ट्रेन में बैठे एक लड़के ने दूसरी तरफ बैठी एक औरत को देखा उसे लगा जैसे उनसे कुछ दिन पहले फलतुपुर में बस में सफर करते हुए उसको देखा था । जब लड़का औरत की ओर देख कर ये सोच रहा था तभी औरत ने उसकी तरफ एक नजर देखा , लड़के ने ऐसे दिखाया की वो औरत के बगल वाली खिड़की से बाहर देख रहा है। औरत समझ गई कि ये लड़का मुझे ही देख रहा है। औरत ने अपने दोनो पैर उठाए और सामने वाली सीट पर रख दिए । लड़का ना चाह कर भी औरत के दोनो पैर देखने से खुद को रोक नहीं पाया " पैरो की बनावट ऐसी थी मानो किसी अप्सरा के पैर हो " लड़का उसके पैरो की तरफ देखता रहा जैसे वो अपनी नजरे नही हटा पा रहा हो । कुछ देर बाद लड़का अपनी सीट से उठ कर स्टैटेन से कुछ खाने के लिए लेने चला गया और कुछ देर बाद कुरकुरे का पैकेट ले कर वापस आ गया । ट्रेन स्टेशन से चल पड़ी धीरे धीरे ट्रेन ने स्पीड पकड़नी शुरू कर दी। लड़के ने देखा औरत ने अब अपना एक पैर सीट से उठा लिया और झुक कर दूसरे पैर में बंधी पायल को खोलने लगी । उसका एक पैर अब भी सीट था और एक पैर नीचे इसी तरह औरत ने दूसरे पैर की पायल भी उतार दी । अब औरत खड़ी हो गई और उसने दोनो पायल बैग में रख दी । ये सब लड़का देख रहा था उससे रहा नही गया उसने पूछ ही लिया " आप कहा जा रही है " औरत अपने बैग में कुछ दुदंते हुए बोली में चुड़ाईघर जा रही हु ।