Update -17
सुबह हो गई थी, और आज मुझे कॉलेज जाना जरूरी है क्योंकि पार्ट -3 का सारा पेपर कटिंग हो गया है और मुझे पेपर सबमिट करना है रिजल्ट के लिए
विक्की भी अपने कंपनी जाने के लिए तैयार हो चुका था
मां सबके लिए नास्ता बना चुकी थी
मैं - मां आज आने में देर हो सकती है, कॉलेज में काम बहुत है आज
मां- क्यों
मैं -पेपर सबमिट करना है तो देर हो सकती है
मां -वो, अच्छा ठीक है, पर कोशिश करना जल्दी आने की
मैं -ठीक है
मैं अब कॉलेज के लिए तैयार होने कमरे में चली गई
पीछे से सुमन भी कमरे में आ गई
सुमन -दीदी मैं भी आपके साथ जाना चाहती हूं
मैं - तुम क्या करोगी जाकर, आज बहुत काम है कॉलेज में
सुमन - घर में मन नहीं लगेगा, मैं आप का कॉलेज देखना चाहती हूं
मैं -आज नहीं
सुमन -दीदी प्लीज
मैं -चल ठीक है, जल्दी से तैयार हो जा
सुमन -थैंक्स दी
मैं -जा अब मसका मत लगा
तुरंत सुमन नहाने चली गई, और मैं बैग में पेपर रखने लगी
हमदोनो बहने कॉलेज जाने के लिए तैयार थे, आज सुमन ने एक पीले रंग की चूडीदार पहना था
जिसमें वो बहुत कमाल लग रही थी
उसके मांसल जाघें गजब लग रही थी साथ में बडी बडी चूचियां
ओह..... कोई देख ले तो लंड में पानी आ जाए
और मैंनें साड़ी पहन रखा था, हमलोग जब निकलने लगे तो मामा काफी घहरी नजरो से देखने लगे
मामा जी का हलक अटक गया था हमारे नितम्बों को देख कर
मामा- देर मत करना बच्चों
मैं और सुमन एक साथ जी बोलकर निकल गये
बस स्टॉप पर बहुत भीड़ थी, खैर बस आने पर हमलोग किसी तरह से चढ़ गये
बस पूरी ठसाठस भरी हुई थी, हिलने की भी जगह नहीं थी सुमन के दोनों बाजू दो लड़के खड़े थे, जो जानबूझकर अपने हाथ मोड़ कर अपनी कुहंनी से सुमन के चूची को रगड़ कर मजे ले रहे थे ,
पर सुमन एकदम बेबस सी नजर आ रही थी बेचारी
दोनों लड़के सुमन की चूचियों को एैसे दबा दे रहे की, उसकी चूची आपस में सट जाने से सुमन की सीने की घाटियाँ साफ साफ नजर आ रही थी,
और उसके मजे बस में खड़े सब मर्द ले रहे थे
मेरे भी चूतड़ो के दरार पर पीछे किसी ने उँगली घुसा कर रगड़ने लगा, भीड़ की वजह से मैं देख नही पा रही थी, अचानक ड्राइवर ने ब्रेक मारा जोर से तो सामने खड़े एक बुड्ढा मेरे उपर गिरा और मेरी दोनों चूची को पकड़ कर मसल दिया और फिर सम्भला
बूड्डा -सॉरी बेटा, मैं सम्भल नहीं पाया
मैं -कोई बात नहीं चाचा
बुड्डा -बहुत भीड़ हैं
मैं -हां
बुड्डे ने मेरी प्रति क्रिया को शायद स्वीकार समझ कर
कुछ देर में धीरे हथेली बढा कर मौके का फायदा उठाया और मेरी दोनों चूची को बारी बारी से हव्ले हव्ले दबाने लगा
मैं कुछ नहीं बोली, मुझे भी मजा आ रहा था
बुड्डा- तुम जैसी जवान और खूबसूरत हसीना को सिटी बस में सफर नहीं करना चाहिए ,वैसे क्या तुम रोज इस बस से आती जाती हो
मैं -हां
साले उस बुड्डे ने एक हाथ को मेरे साडी के आंचल के अंदर घुसा दिया और मेरे ब्लाउज के हुक खोलने की लगातार कोशिश करने लगा
उधर सुमन को भी चारो ओर से कमीने लड़के घेरे हुए थे और उसके बदन को छेड़ रहे थे
मैं उस बुड्डे के हाथ को निकालने के लिए छटपटा रही थी पर उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी
इसी कोशिश में मेरे ब्लाउज के सब के सब हुक टूट कर नीचे बिखर गया और मेरा ब्लाउज मेरी बदन पे ढीला पड़ गया
उस बुड्डे को तो मानो खजाना मिल गया हो
उसने अपने हाथ को मेरी ब्रा के अंदर डाल दिया और बेरहम तरीके से मेरे चूची और गुलाबी निप्पल को मसलने लगा
मैं दर्द से चीख भी नहीं पा रही थी
फिर बुड्डे ने अपनी पैंट की चेन खोल कर लंड बाहर निकाला और मेरे हाथ में दे दिया और धीरे से बोला हिला दो जानेमन
मुझे जाने क्या हो गया था मैं भी उसका लंड हिलाने लगी
उधर सुमन को भी लड़के लोग कोई उसकी चूची से तो कोई उसकी गांड से खेल रहा था
एक ने तो सुमन के कपड़े उपर कर दिया और उसकी चूची दबाने लगा कुछ इस तरह से
और फिर कंडक्टर ने आवाज लगाई की कॉलेज गेट पर उतरने वाले धीरे धीरे बस की गेट पर आये
मैनें तेजी से उस बुड्डे का लंड हिलाने लगी उसका शरीर थोडा अकड रहा था
बुड्डा और जोर से मेरे चूची को मसलने लगा और एक जोरदार पिचकारी निकली उसके लंड से,
मेरा हाथ में सारा वीर्य लगा कुछ मेरे साडी और सैंडल पर भी गिरा
इधर वीर्य का महक पूरे बस में फैल गया
मेरा रूमाल बैग में था, सो मैनें नजरे बचा कर अपने हाथ में लगे सारे वीर्य को चाट कर साफ कर लिया
अजीब सा स्वाद था बहुत ही गाढ़ा माल था, साले ने कई महीने से चुदाई नहीं की होगी
बस रूकी और हमलोग धक्के खाते हुए बस से नीचे उतरे
गांड में उंगली करने की वजह से मेरे सुमन दोनों के चूतड़ो की दरार में कपड़े अभी भी धंसे हुए थे
खैर हमनें अपने अपने कपड़े ठीक किये
तभी सुमन की नजर मेरी साडी में गिरे वीर्य पर गयी
सुमन -दीदी ये आपके साडी पर क्या लगा है चिपचिपा सा
मैं -पता नहीं
सुमन -आपकी तो साडी खराब हो गई और कैसा गंध दे रहा है
मैं -हां
सुमन - अरे ब्लाउज कैसे लूज हो गया
मैं - बस में मेरा बलाउज का सारा हुक टूट कर गिर गया
सुमन - आपका ब्लाउज काफी टाईट रहता है पर अब क्या करोगी
मैं -चलो पास में एक लेडिज कार्नर है वहाँ सारी जरूरत की चीजे मिल जाती है
सुमन - चेंजिग रूम है क्या
मैं -नहीं
सुमन -फिर कैसे चेंज करोगी
मैं -कपड़े लेकर चलते हैं, कॉलेज में प्रिसिंपल सर के ऑफिस के अंदर एक रूम है वहीं कर लूंगी और तू भी कर ले तेरे भी कपड़े खराब हो गये हैं
सुमन -नहीं तो
मैं -पीछे से
सुमन -ओ माई गॉड, मुझे तो पता ही नहीं
सुमन के भी पीछे सूट में किसी ने मुठ मार कर माल गिरा दिया था
हमलोगो ने वहां से कपड़े लिये
और तभी सुमन बोली दीदी मेरे बैग में अलपीन है अपने ब्लाउज में अभी लगा लो किसी तरह से
मैं वहीं दुकान पर ही ब्लाउज में अलपीन लगाने लगी
दुकानदार ने मेरी चूची ब्रा के उपर से देख लिया
मैं बलाउज में अलपीन लगाती हुई
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फिर हम कॉलेज गये और पहले कमल से रूम की चाबी ली और पहले मैं चेंज करने लगी
चेंज करने के बाद मैं कमरे से बाहर निकली
तब तक मेहता सर नहीं आये थे सो मैंने सुमन से कहा जा जल्दी से कपड़े बदल ले
सुमन अंदर चली गई, और मैं बाहर लॉन में टहलने लगी
कब आचानक कमल मेहता सर के टेबल साफ सफाई के लिए अंदर चला गया मै देख नही पाई और फिर अंदर कमल ने सुमन को पूरा कपड़े बदलते हुए देख लिया
सुमन चेंज कर बाहर निकली
तो कुछ देर बाद कमल भी सफाई कर निकला मैं समझ गई की उसने सुमन को पूरा नंगा देखा होगा क्योंकि कमल के पैंट पर उसका खड़ा लंड साफ साफ नजर आ रहा था
कमल हंसते हुए निकला तो मैंनें सुमन और कमल का परिचय कराया
मैं कमल से बोली जा सुमन को पूरा कॉलेज दिखा तबतक मैं अपना काम कर लेती हूं
कमल तो मौके में ही था की इतना सुंदर माल के साथ कुछ देर समय बिताने के लिए
मैं स्टॉफ रूम में जाने लगी और वो दोनों भी जाने लगे
2घंटे के बाद मेरा काम खत्म हो गया तो मैं उन्हें कॉलेज में ढूंढने लगी
पर वो दोनों कहीं दिख नहीं रहे थे
चलते चलते मैं कॉलेज के केमस्टरी लैब की तरफ पुहंची जो काफी सुनसान रहता है
कांच की खिड़की से देखा की दो परछाई दिख रही थी
मैं दबे पाँव से अंदर गयी और एक कोने में छुपकर देखने लगी की क्या हो रहा है
ओ माई गॉड, कमल ने सुमन को बाहों में भर रखा था, दोनों पूरी तरह से नंगे थे और कमल सुमन के चूची को चूस रहा था
सुमन की ऑखें बंद थी वो हल्की सी सिसकारी भर रही थी
कमल सुमन के निप्पल को काटता
सुमन -उफ..... धीरे से
कमल ने अपना मोटा लंड को सुमन को पकड़ा दिया
सुमन भी उसके लंड को सहलाने लगी
कमल बेहताशा सुमन के बदन को चूम रहा था
अब कमल ने सुमन को नीचे बैठा दिया और लंड को सुमन के मुँह में डाल दिया
सुमन मस्ती में चूसने लगी
चपड. -चपड़ की आवाज़ आ रही थी
कमल -आऊ........ उफ.... ममम्......
कमल ने सुमन को वहां पर के एक टेबल में लिटा दिया और जैसे अपना होठ सुमन के बूर से सटाया
सुमन -आऊऊ..... हम्म........ आह...
कमल, सुमन के बूर को पूरा चाटने लगा
सुमन भी गांड उचका रही थी
फिर कमल ने सुमन के बूर में मोटा लंड का चमड़ा ओपन किया और लंड का सुपाड़ा सटाकर एक जोरदार धक्का मारा
सुमन चीख उठी पर कमल ने उसके होठो को दबा दिया और फिर से धक्का मारा
उसका लंड सुमन के बूर को चीरता हुआ समा गया
खून का फुव्वारा फूट पड़ा और सुमन के ऑखों आंसू भी
सुमन - बहुत दर्द हो रहा है, छोड दो
कमल -कुछ नहीं होगा मेरी रानी
और कमल ने सुमन की चुदाई चालू रखी, अब सुमन को भी मजा आ रहा था
पूरे कमरे में उनकी सिसकारी गूंजने लगा
सुमन -आह......... आह....... आह...
भयंकर चुदाई होने लगी सुमन की
और फिर कमल ने अपना सारा वीर्य सुमन के बूर में ही उडेल दिया
सुमन का बूर लबलबा कर कमल के वीर्य से भर गया
अब दोनों उठकर अपने अपने कपड़े पहने लगे
मैं भी वहां से निकल कर ऑफिस की तरफ आ गई
कुछ देर में वो दोनो भी आ गये
कमल - मैम सारा कॉलेज घुमा दिया सुमन को
मैं -अच्छा ,सुमन कैसा लगा कॉलेज
सुमन -बहुत बढ़िया कॉलेज है
मेरी बहन को कॉलेज घुमाने के बहाने कमल ने पटा कर चोद दिया
चुदाई इतना भयंकर हुई थी की सुमन लंगड़ा कर चल रही थी
मैं -क्या हुआ, सुमन
सुमन -लगता है मोच आ गया दीदी
बोलकर बात छुपा ली
मैं और सुमन अब घर लौटने लगे

सुमन चुदाई के बाद कुछ इस तरह से