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Incest Humbistar Shalini

Love between siblings

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Sandy388ijbb

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141
49
मेरा काम में जरा सा भी मन नहीं लग रहा था, रह रह कर शालिनी के सेक्सी बदन का खयाल आ रहा था मैंने दो तीन बार फोन करके उससे बात की, और शाम को जल्दी घर आने को बोला । तभी मुझे पता चला अवध कॉलेज का कटआफ आ गया है, मैंने जाकर लिस्ट देखी,,, शालिनी का एडमिशन ओके हो गया था, मैंने फोन निकाला उसे बताने के लिए,, फिर सोचा घर चलकर शालिनी को सरप्राइज देता हूं ।

दोपहर के 3: 00 बज रहे थे और मैं जल्दी जल्दी घर की ओर चला जा रहा था रास्ते में मैंने नाश्ते के लिए नमकीन और कुछ मिठाई ले ली । घर आकर मैंने अपनी चाभी से गेट खोला, कूलर चल रहा था और कमरे का दरवाजा ऐसे ही ढलका हुआ था, मैंने दरवाजे को खोलकर जैसे ही अंदर देखा तो मेरे हाथ से नाश्ते का पैकेट छूटते- छूटते बचा....


कूलर की तेज आवाज से शालिनी को मेरे आने की आहट सुनाई नहीं पड़ी थी, मुझसे चार फुट की दूरी पर बेड के उपर दूध से गोरे बदन की मालकिन, मेरी बहन सिर्फ काली ब्रा और पैंटी पहन कर बिंदास सो रही थी । सीधे लेटने के कारण हर सांस के साथ उसकी चूचियां उठ बैठ रहीं थीं और ऐसा लग रहा था कि उसकी ब्रा कहीं फट ना जाए, सुबह मैं ठीक से देख भी नहीं पाया था तो मैं बिना कोई आवाज किए उसके सेक्सी बदन को देखने लगा और पता नहीं कब मेरा दूसरा हाथ मेरे लिंग पर आ गया और मैं पैंट के ऊपर से ही अपना लौड़ा सहलाने लगा ।

अब मैंने गौर से देखा तो शालिनी ने अपनी बगल के बाल साफ़ कर दिये थे, ये देखते ही मुझे खयाल आया कि इसका मतलब इसने अपने नीचे के बाल यानि झांटे भी साफ़ करी होंगी, ये सोच कर ही मैं बिना कुछ किए खड़े खड़े ही उसकी काली पैंटी में फूले हुए हिस्से को घूरने लगा । शालिनी के ब्रा से नीचे का पेट एक दम सपाट और चिकना था, उसकी नाभि काफी गहरी थी, और नाभि के नीचे उसकी काली पैंटी में बंद चूत...आह.....

मेरे अंदर का भाई ये मानने को तैयार ना था कि मेरी बेहन चुदाई की उमर पर पहुँच चुकी है, लेकिन मेरे अंदर का मर्द सॉफ देख रहा था कि मेरी बहन पर जवानी एक तूफान की तरह चढ़ चुकी थी।
वो बिस्तर पर सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में पड़ी थी।

दूधिया बदन, सुराहीदार गर्दन, बड़ी बड़ी आँखें, खुले हुए बाल और गोरे गोरे जिस्म पर काली ब्रा जिसमे उसके 34 साइज़ के दो बड़े बड़े उरोज ऐसे लग रहे थे जैसे किसी ने दो सफेद कबूतरों को जबरदस्ती कैद कर दिया हो।
उसकी चूचियाँ बाहर निकलने के लिए तड़प रही थीं। चूचियों से नीचे उसका सपाट पेट और उसके थोड़ा सा नीचे गहरी नाभि, ऐसा लग रहा था जैसे कोई गहरा छोटा कुँआ हो। उसकी कमर ऐसी जैसे दोनों पंजों में समा जाये। कमर के नीचे का भाग देखते ही मेरे तो होंठ और गला सूख रहा था ।

शालिनी के चूतड़ों का साइज़ भी जबरदस्त था । बिल्कुल गोल और इतना ख़ूबसूरत कि उन्हें तुंरत जाकर पकड़ लेने का मन हो रहा था। कुल मिलाकर वो पूरी सेक्स की देवी लग रही थीं…

मुझे ऐसा लगा कि एक दो मिनट अगर मैं इसे ऐसे ही देखते रहा तो मैं अभी खड़े खड़े ही झड़ जाऊंगा । मगर मैं अब करूं क्या?

मैं सोचने लगा कि अगर मैं शालिनी को इस हालत में जगाता हूं, तो कहीं वो बुरा ना मान जाए और इस कमसिन जवानी को भोगने की इच्छा अभी खत्म हो जाए । फिर मुझे लगा कि यही वो मौका है जो आगे कि राह और आसान कर सकता है... रिस्क लो और मज़ा या सजा जो मिले,
ये तो शालिनी को जगाने के बाद ही पता चल पाएगा ।

मैंने सारी हिम्मत बटोर कर शालिनी के दाहिने पैर को छूकर उसे हिलाया और आवाज भी दी... शालिनी शालिनी....उठो...

एक झटके से शालिनी बेड पर उठ कर बैठ गई और सामने मुझे देखकर चौंक गई,,, कुछ सेकंड बाद उसे अपने शरीर की अर्धनग्न अवस्था का आभास हुआ और उसने पास में पड़ी हुई चादर खींच कर अपने आप को सीने से ढक लिया,,,, और हकलाते हुए बोली....

शालिनी- आप कब आये भाई ।

सागर- बस, अभी-अभी आया और तुम्हे जगाया ।

शालिनी- (उसकी आवाज कांप रही थी) जी...जी आप इतनी जल्दी, आप तो शाम को आनेवाले थे ।

(मन में सोचते हुए कि अगर मैं शाम को आता, तो तुम्हारे कातिल हुस्न का दीदार कहां होता )

सागर- वो तुम्हे खुशखबरी देनी थी, इसलिए सारा काम छोड़कर मैं जल्दी आ गया।

शालिनी- ( चादर से अपने को ढकते हुए) खुशखबरी,,,, कैसी खुशखबरी।

सागर- मेरी प्यारी बहना... तुम्हारा एडमिशन शहर के टाप के अ्वध गर्ल कालेज में हो जायेगा, आज लिस्ट जारी हो गई है और मैं देख भी आया हूं, कल चलकर तुम्हारा एडमिशन करा देंगे और अगले वीक से क्लासेज़ शुरू।।

शालिनी- वाऊ... थैंक यू भाईजी,,,, माम को बताया।

सागर- नहीं, अभी नहीं।

शालिनी चादर लपेट कर ही बेड से उठ कर मेरे पास से होती हुई पीछे कमरे में चली गई और कपड़े पहन कर बाहर आई।

मैंने तब तक नाश्ता एक प्लेट में निकाल कर रख दिया।। शालिनी से मैंने चाय बनाने को कहा,,, और चाय नाश्ता करने के बाद..

शालिनी- भाईजी,, स्वारी।

सागर- किसलिए

शालिनी- वो.. वो मैं इस तरह सो रही थी,,, और उसने नज़रें नीची कर ली।

सागर- अरे, तो इसमें क्या हुआ, मैं भी तो चढ्ढी बनयान में ही रहता हूं और यहां कौन आने वाला है मेरे सिवा।

शालिनी- नहीं, मुझे ऐसे नहीं सोना चाहिए था, प्लीज़, आप माम से मत कहना ।

सागर- अरे पागल,,, तुम फालतू में परेशान हो रही हो, मैंने पहले ही कहा था कि यहां जैसे मन हो वैसे रहो,,, घर के अंदर,,, हां बाहर निकलते हुए थोड़ा ध्यान रखना बस। और तुम ऐसा करोगी तो हम लोग कैसे रहेंगे साथ में।

शालिनी- बट भाई, किसी को पता चला कि मैं घर में ऐसे...

सागर- बच्चे, तुम क्यों ऐसे सोच रही हो कि बाहर किसी को पता चलेगा, अरे इस गेट के अंदर की दुनिया सिर्फ हम दोनों की है, किसी को कैसे पता चलेगा कि हम घर में क्या करते हैं, कैसे रहते है। और तुम्हारे आने से पहले मैं तो घर में ज्यादातर बिना कपड़ों के ही रहता था,,, सो बी हैप्पी एंड इंज्वाय योर लाइफ।


शालिनी- जी, ठीक है।

सागर- और हां , तुमने सुबह से ब्रा पहनी है ना,, तो कोई रैशेज वगैरह तो नहीं हुए तुम्हें।

शालिनी- नहीं, बिल्कुल भी नही, इसका फैब्रिक अच्छा है, कम्फ़र्टेबल है...

सागर- और क्या किया आज दिन भर में,

शालिनी- आपके जाने के बाद मैंने साफ सफाई करने के बाद थोड़ी देर टी वी देखी, फिर खाना खाकर आराम कर रही थी... फिर आप आ गये....

सागर- हां, साफ-सफाई तो अच्छी हुई है घर की भी और तुम्हारे जंगल की भी...

शालिनी- मेरे जंगल की ???

सागर- अरे, मैं वो तुम्हारे अंडरआर्म वाले जंगल की बात कर रहा हूं... और मैं हंसने लगा ।

तभी शालिनी जोर से चिल्लाई ... भाईईईईईई ,आप फिर मेरे मज़े ले रहे हैं ,प्लीज़....

सागर- अच्छा ,चलो अब मजाक बंद,,,, अभी मुझे कुछ काम से बाहर जाना है, कुछ चाहिए हो तो बोलो..
 

Sandy388ijbb

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दोपहर के 3: 00 बज रहे थे और मैं जल्दी जल्दी घर की ओर चला जा रहा था रास्ते में मैंने नाश्ते के लिए नमकीन और कुछ मिठाई ले ली । घर आकर मैंने अपनी चाभी से गेट खोला, कूलर चल रहा था और कमरे का दरवाजा ऐसे ही ढलका हुआ था, मैंने दरवाजे को खोलकर जैसे ही अंदर देखा तो मेरे हाथ से नाश्ते का पैकेट छूटते- छूटते बचा....


कूलर की तेज आवाज से शालिनी को मेरे आने की आहट सुनाई नहीं पड़ी थी, मुझसे चार फुट की दूरी पर बेड के उपर दूध से गोरे बदन की मालकिन, मेरी बहन सिर्फ काली ब्रा और पैंटी पहन कर बिंदास सो रही थी । सीधे लेटने के कारण हर सांस के साथ उसकी चूचियां उठ बैठ रहीं थीं और ऐसा लग रहा था कि उसकी ब्रा कहीं फट ना जाए, सुबह मैं ठीक से देख भी नहीं पाया था तो मैं बिना कोई आवाज किए उसके सेक्सी बदन को देखने लगा और पता नहीं कब मेरा दूसरा हाथ मेरे लिंग पर आ गया और मैं पैंट के ऊपर से ही अपना लौड़ा सहलाने लगा ।

अब मैंने गौर से देखा तो शालिनी ने अपनी बगल के बाल साफ़ कर दिये थे, ये देखते ही मुझे खयाल आया कि इसका मतलब इसने अपने नीचे के बाल यानि झांटे भी साफ़ करी होंगी, ये सोच कर ही मैं बिना कुछ किए खड़े खड़े ही उसकी काली पैंटी में फूले हुए हिस्से को घूरने लगा । शालिनी के ब्रा से नीचे का पेट एक दम सपाट और चिकना था, उसकी नाभि काफी गहरी थी, और नाभि के नीचे उसकी काली पैंटी में बंद चूत...आह.....

मेरे अंदर का भाई ये मानने को तैयार ना था कि मेरी बेहन चुदाई की उमर पर पहुँच चुकी है, लेकिन मेरे अंदर का मर्द सॉफ देख रहा था कि मेरी बहन पर जवानी एक तूफान की तरह चढ़ चुकी थी।
वो बिस्तर पर सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में पड़ी थी।

दूधिया बदन, सुराहीदार गर्दन, बड़ी बड़ी आँखें, खुले हुए बाल और गोरे गोरे जिस्म पर काली ब्रा जिसमे उसके 34 साइज़ के दो बड़े बड़े उरोज ऐसे लग रहे थे जैसे किसी ने दो सफेद कबूतरों को जबरदस्ती कैद कर दिया हो।
उसकी चूचियाँ बाहर निकलने के लिए तड़प रही थीं। चूचियों से नीचे उसका सपाट पेट और उसके थोड़ा सा नीचे गहरी नाभि, ऐसा लग रहा था जैसे कोई गहरा छोटा कुँआ हो। उसकी कमर ऐसी जैसे दोनों पंजों में समा जाये। कमर के नीचे का भाग देखते ही मेरे तो होंठ और गला सूख रहा था ।

शालिनी के चूतड़ों का साइज़ भी जबरदस्त था । बिल्कुल गोल और इतना ख़ूबसूरत कि उन्हें तुंरत जाकर पकड़ लेने का मन हो रहा था। कुल मिलाकर वो पूरी सेक्स की देवी लग रही थीं…

मुझे ऐसा लगा कि एक दो मिनट अगर मैं इसे ऐसे ही देखते रहा तो मैं अभी खड़े खड़े ही झड़ जाऊंगा । मगर मैं अब करूं क्या?

मैं सोचने लगा कि अगर मैं शालिनी को इस हालत में जगाता हूं, तो कहीं वो बुरा ना मान जाए और इस कमसिन जवानी को भोगने की इच्छा अभी खत्म हो जाए । फिर मुझे लगा कि यही वो मौका है जो आगे कि राह और आसान कर सकता है... रिस्क लो और मज़ा या सजा जो मिले,
ये तो शालिनी को जगाने के बाद ही पता चल पाएगा ।

मैंने सारी हिम्मत बटोर कर शालिनी के दाहिने पैर को छूकर उसे हिलाया और आवाज भी दी... शालिनी शालिनी....उठो...

एक झटके से शालिनी बेड पर उठ कर बैठ गई और सामने मुझे देखकर चौंक गई,,, कुछ सेकंड बाद उसे अपने शरीर की अर्धनग्न अवस्था का आभास हुआ और उसने पास में पड़ी हुई चादर खींच कर अपने आप को सीने से ढक लिया,,,, और हकलाते हुए बोली....

शालिनी- आप कब आये भाई ।

सागर- बस, अभी-अभी आया और तुम्हे जगाया ।

शालिनी- (उसकी आवाज कांप रही थी) जी...जी आप इतनी जल्दी, आप तो शाम को आनेवाले थे ।

(मन में सोचते हुए कि अगर मैं शाम को आता, तो तुम्हारे कातिल हुस्न का दीदार कहां होता )

सागर- वो तुम्हे खुशखबरी देनी थी, इसलिए सारा काम छोड़कर मैं जल्दी आ गया।

शालिनी- ( चादर से अपने को ढकते हुए) खुशखबरी,,,, कैसी खुशखबरी।

सागर- मेरी प्यारी बहना... तुम्हारा एडमिशन शहर के टाप के अ्वध गर्ल कालेज में हो जायेगा, आज लिस्ट जारी हो गई है और मैं देख भी आया हूं, कल चलकर तुम्हारा एडमिशन करा देंगे और अगले वीक से क्लासेज़ शुरू।।

शालिनी- वाऊ... थैंक यू भाईजी,,,, माम को बताया।

सागर- नहीं, अभी नहीं।

शालिनी चादर लपेट कर ही बेड से उठ कर मेरे पास से होती हुई पीछे कमरे में चली गई और कपड़े पहन कर बाहर आई।

मैंने तब तक नाश्ता एक प्लेट में निकाल कर रख दिया।। शालिनी से मैंने चाय बनाने को कहा,,, और चाय नाश्ता करने के बाद..

शालिनी- भाईजी,, स्वारी।

सागर- किसलिए

शालिनी- वो.. वो मैं इस तरह सो रही थी,,, और उसने नज़रें नीची कर ली।

सागर- अरे, तो इसमें क्या हुआ, मैं भी तो चढ्ढी बनयान में ही रहता हूं और यहां कौन आने वाला है मेरे सिवा।

शालिनी- नहीं, मुझे ऐसे नहीं सोना चाहिए था, प्लीज़, आप माम से मत कहना ।

सागर- अरे पागल,,, तुम फालतू में परेशान हो रही हो, मैंने पहले ही कहा था कि यहां जैसे मन हो वैसे रहो,,, घर के अंदर,,, हां बाहर निकलते हुए थोड़ा ध्यान रखना बस। और तुम ऐसा करोगी तो हम लोग कैसे रहेंगे साथ में।

शालिनी- बट भाई, किसी को पता चला कि मैं घर में ऐसे...

सागर- बच्चे, तुम क्यों ऐसे सोच रही हो कि बाहर किसी को पता चलेगा, अरे इस गेट के अंदर की दुनिया सिर्फ हम दोनों की है, किसी को कैसे पता चलेगा कि हम घर में क्या करते हैं, कैसे रहते है। और तुम्हारे आने से पहले मैं तो घर में ज्यादातर बिना कपड़ों के ही रहता था,,, सो बी हैप्पी एंड इंज्वाय योर लाइफ।


शालिनी- जी, ठीक है।रात को आठ बजे मैं वापस आया तब तक शालिनी ने खाना बना लिया था और हमने कुछ देर तक टीवी देखी फिर मैंने शालिनी से कहा, मैं नहा लूं फिर खाना खाते हैं और मैं नहाने के लिए बाथरूम में आ गया। पिछले दिनों से लगातार शालिनी के सेक्सी बदन को देखने से सैकड़ों बार मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था, और इस समय भी मैंने जैसे ही अपनी बनयान और चढ्ढी उतार कर पानी डाला, तो लन्ड फिर से खड़ा हो गया। मैंने सोचा कि अब हस्तमैथुन करने से ही आराम मिलेगा , आज के पहले मैंने हजारों बार मुठ मारी थी अलग अलग भाभियों, आंटियों, फिल्म की हीरोइनों को याद करते हुए, आज भी मैं पड़ोस वाली सुनीता भाभी को याद करके मुठ मारने लगा। पर पता नहीं कब मेरी बंद आंखों में शालिनी का चेहरा आया और मैं दोपहर में देखे नजारे को सोचते हुए झड़ गया,

झड़ने के बाद मैं जल्दी से नहाया और सिर्फ टावेल लपेट कर बाहर आ गया । अंजाने में ही सही शालिनी के नाम ये मेरा पहला हस्तमैथुन था ।

कमरे में आ कर मैंने सिर्फ बरमूडा पहना बिना अंडरवियर के और उपर बनयान भी नहीं पहनी, बहाना गर्मी का था पर मेरे दिमाग में कुछ और खुराफात चल रही थी।

सागर- शालिनी तुम भी नहा लो फिर खाना खाते हैं ।

शालिनी- जी, भाई मैं भी यही सोच रही थी, यहां शहर में गर्मी कुछ ज्यादा ही होती है, खाना बनाने में पसीना पसीना हो जाता है पूरा। अगर कूलर ना हो तब तो यहां रहना मुश्किल है।

सागर- हां, यहां गर्मी थोड़ी ज्यादा होती है गांव से,,,

और शालिनी पीछे कमरे में जाकर अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गई।

थोड़ी देर बाद कमरे में फिर से मादा महक फैल गई, मैं लेटकर टीवी देख रहा था, मैंने नज़रें उठा कर देखा तो शालिनी ने दूसरी टी-शर्ट और निक्कर पहनी हुई थी और वह आईने के सामने अपने बाल संवार रही थी ।
क्या गजब ढा रही थी वो ....

हम लोगों ने खाना खाया और फिर मैंने शालिनी से कहा कि अगर तुम बोर हो गई हो दिन भर घर में तो चलो थोड़ा सा बाहर वाक करके आते हैं, शालिनी ने मना कर दिया बाहर जाने को,,,

आज मौसम में उमस और गर्मी कुछ ज्यादा ही थी, हम लोग बेड पर लेट कर टीवी देख रहे थे, और सुबह शालिनी के एडमिशन के बारे में बात कर रहे थे ।


शालिनी- भाई जी आज गर्मी बहुत है, ऐसा लग रहा है कि नींद नहीं आयेगी ।

सागर- हां,,,, है तो,,, और उपर से तुमने इतने कपड़े भी लाद रखें हैं ।

शालिनी- हां, बट हम लड़कियों को आप लोगों जैसी लिबर्टी कहां,,,

सागर- क्यों , किसने तुम्हारी लिबर्टी पे रोक लगा रखी है, कम से कम मैंने तो नहीं...

शालिनी- नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था, बट मैं कपड़े निकाल कर भी तो नहीं रह सकती,,,, आप की तरह

सागर- हां, निकाल कर नहीं रह सकती बट कम तो कर सकती हो,,, जब भी ज्यादा गर्म हो। तुम ऐसा करो कि अपनी पुरानी वाली समीज और निक्कर पहन लो, अंडरगार्मेंट टाइट होने से गर्मी ज्यादा ही लगती है , मैंने भी नहीं पहने हैं ।

शालिनी- नहीं नहीं भाई, मुझे ठीक नहीं लगेगा,,,, ऐसे मैं कभी रही नहीं ।

सागर- क्या ठीक नहीं लगेगा, तुम मेरे साथ भी कम्फ़र्टेबल नहीं हो तो बाहर कैसे निकलोगी अकेले माडर्न कपड़ों में,

मैंने उसे काफी समझाया तब उसने कहा कि ठीक है मैं ट्राई करती हूं, और वो उठकर पीछे रूम में चली गई।

मैं लेटे लेटे अपने प्लान की कामयाबी पर खुश हो रहा था और अब मुझे यकीन हो रहा था कि मैं शालिनी को धीरे धीरे अपनी लिव इन गर्ल फ्रेंड बना ही लूंगा बस मुझे थोड़ी होशियारी से काम लेना होगा, अब तक मैंने शालिनी को छुआ भी नहीं था ना ही मुझे इसकी कोई जल्दी थी... इतने में शालिनी आकर मेरे पास लेट गई।

सागर- दैट्स गुड,,,, अब कुछ गर्मी कम लगेगी।

शालिनी- जी,

वो अब भी मेरे तरफ देख नहीं रही थी, सीधे टीवी स्क्रीन पर ही नजर गड़ाए थी।

उसकी समीज सफेद रंग की थी और उसके उन्नत उरोजों से कुछ नीचे उसकी नाभि के ऊपर तक थी, मैंने थोड़ा सा आंखें घुमाकर देखा तो उसके निप्पल अलग से नुमायां हो रहे थे, मैंने तुरंत अपनी आंखें हटाई क्योंकि मुझे लगा कि मेरा लन्ड ने फिर से जागने लगा है और नीचे मैंने चढ्ढी भी नहीं पहनी हुई थी ।

मैं सोच रहा था कि जल्दी से जल्दी शालिनी सो जाये, जिससे मैं बिना डर के उसके शरीर को देखूं, शायद छू भी लूं।

हम ऐसे ही बातें करते हुए टीवी आफ करके सो गए।

मैं तो सोने का नाटक ही कर रहा था करीब एक घंटे तक मेरे मन में फिर से...
खुद के सवाल और खुद के ही जवाब....

वासना तो किसी रिश्ते को नही मानती, फिर ये उधेड़बुन क्यूँ?

कहीं ऐसा तो नही जो चाहत जिस्म की प्यास ने शुरू की थी वो आत्मा की प्यास में बदल गयी है।

मेरे दिलोदिमाग में आँधियाँ चल रही थी, मेरा जिस्म जैसे एक सूखे पत्ते की तरह फड़फडा रहा था. ये क्या हो रहा है, क्या ये समाज भाई बहन के प्यार को इज़ाज़त देगा अपनी ही बहन से प्यार करने के लिए.

क्या ये प्यार कभी परवान चढ़ पाएगा. अगर ये प्यार ही है तो इसमे वासना कहाँ से आ गयी। क्यूँ मेरा जिस्म शालिनी के जिस्म में समाने के लिए बेताब है. क्यूँ उसके जिस्म से भड़की हुई प्यास को मैं उसी के बदन से बुझाने की आस लगाए बैठा हूं ।

कैसे बेशर्मो की तरह अपनी बहन की लाज के टुकड़े टुकड़े कर रहा हूं उसके अर्ध नग्न बदन को घूरते हुए।

उफफफफफफ्फ़ ये क्या हो रहा है ये किस दलदल की ओर बढ़ रहा हूँ मैं,

क्या माँ के विश्वास को उसके निश्चल प्रेम को वासना की बलि चढ़ाना ठीक होगा? क्या शालिनी कभी दिल से उसके साथ ऐसा संबंध बनाएगी - नही.... क्या शालिनी कभी उसे एक मर्द के रूप में देखेगी - शायद नही ।

तो फिर क्यूँ ये गंदे ख़यालात मेरे मन से क्यूं नही जा रहे. इसी उधेड़बुन में मैं यूँ ही जागता रहा ।

सागर- और हां , तुमने सुबह से ब्रा पहनी है ना,, तो कोई रैशेज वगैरह तो नहीं हुए तुम्हें।

शालिनी- नहीं, बिल्कुल भी नही, इसका फैब्रिक अच्छा है, कम्फ़र्टेबल है...

सागर- और क्या किया आज दिन भर में,

शालिनी- आपके जाने के बाद मैंने साफ सफाई करने के बाद थोड़ी देर टी वी देखी, फिर खाना खाकर आराम
 

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रात को आठ बजे मैं वापस आया तब तक शालिनी ने खाना बना लिया था और हमने कुछ देर तक टीवी देखी फिर मैंने शालिनी से कहा, मैं नहा लूं फिर खाना खाते हैं और मैं नहाने के लिए बाथरूम में आ गया। पिछले दिनों से लगातार शालिनी के सेक्सी बदन को देखने से सैकड़ों बार मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था, और इस समय भी मैंने जैसे ही अपनी बनयान और चढ्ढी उतार कर पानी डाला, तो लन्ड फिर से खड़ा हो गया। मैंने सोचा कि अब हस्तमैथुन करने से ही आराम मिलेगा , आज के पहले मैंने हजारों बार मुठ मारी थी अलग अलग भाभियों, आंटियों, फिल्म की हीरोइनों को याद करते हुए, आज भी मैं पड़ोस वाली सुनीता भाभी को याद करके मुठ मारने लगा। पर पता नहीं कब मेरी बंद आंखों में शालिनी का चेहरा आया और मैं दोपहर में देखे नजारे को सोचते हुए झड़ गया,

झड़ने के बाद मैं जल्दी से नहाया और सिर्फ टावेल लपेट कर बाहर आ गया । अंजाने में ही सही शालिनी के नाम ये मेरा पहला हस्तमैथुन था ।

कमरे में आ कर मैंने सिर्फ बरमूडा पहना बिना अंडरवियर के और उपर बनयान भी नहीं पहनी, बहाना गर्मी का था पर मेरे दिमाग में कुछ और खुराफात चल रही थी।

सागर- शालिनी तुम भी नहा लो फिर खाना खाते हैं ।

शालिनी- जी, भाई मैं भी यही सोच रही थी, यहां शहर में गर्मी कुछ ज्यादा ही होती है, खाना बनाने में पसीना पसीना हो जाता है पूरा। अगर कूलर ना हो तब तो यहां रहना मुश्किल है।

सागर- हां, यहां गर्मी थोड़ी ज्यादा होती है गांव से,,,

और शालिनी पीछे कमरे में जाकर अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गई।

थोड़ी देर बाद कमरे में फिर से मादा महक फैल गई, मैं लेटकर टीवी देख रहा था, मैंने नज़रें उठा कर देखा तो शालिनी ने दूसरी टी-शर्ट और निक्कर पहनी हुई थी और वह आईने के सामने अपने बाल संवार रही थी ।
क्या गजब ढा रही थी वो ....

हम लोगों ने खाना खाया और फिर मैंने शालिनी से कहा कि अगर तुम बोर हो गई हो दिन भर घर में तो चलो थोड़ा सा बाहर वाक करके आते हैं, शालिनी ने मना कर दिया बाहर जाने को,,,

आज मौसम में उमस और गर्मी कुछ ज्यादा ही थी, हम लोग बेड पर लेट कर टीवी देख रहे थे, और सुबह शालिनी के एडमिशन के बारे में बात कर रहे थे ।


शालिनी- भाई जी आज गर्मी बहुत है, ऐसा लग रहा है कि नींद नहीं आयेगी ।

सागर- हां,,,, है तो,,, और उपर से तुमने इतने कपड़े भी लाद रखें हैं ।

शालिनी- हां, बट हम लड़कियों को आप लोगों जैसी लिबर्टी कहां,,,

सागर- क्यों , किसने तुम्हारी लिबर्टी पे रोक लगा रखी है, कम से कम मैंने तो नहीं...

शालिनी- नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था, बट मैं कपड़े निकाल कर भी तो नहीं रह सकती,,,, आप की तरह

सागर- हां, निकाल कर नहीं रह सकती बट कम तो कर सकती हो,,, जब भी ज्यादा गर्म हो। तुम ऐसा करो कि अपनी पुरानी वाली समीज और निक्कर पहन लो, अंडरगार्मेंट टाइट होने से गर्मी ज्यादा ही लगती है , मैंने भी नहीं पहने हैं ।

शालिनी- नहीं नहीं भाई, मुझे ठीक नहीं लगेगा,,,, ऐसे मैं कभी रही नहीं ।

सागर- क्या ठीक नहीं लगेगा, तुम मेरे साथ भी कम्फ़र्टेबल नहीं हो तो बाहर कैसे निकलोगी अकेले माडर्न कपड़ों में,

मैंने उसे काफी समझाया तब उसने कहा कि ठीक है मैं ट्राई करती हूं, और वो उठकर पीछे रूम में चली गई।

मैं लेटे लेटे अपने प्लान की कामयाबी पर खुश हो रहा था और अब मुझे यकीन हो रहा था कि मैं शालिनी को धीरे धीरे अपनी लिव इन गर्ल फ्रेंड बना ही लूंगा बस मुझे थोड़ी होशियारी से काम लेना होगा, अब तक मैंने शालिनी को छुआ भी नहीं था ना ही मुझे इसकी कोई जल्दी थी... इतने में शालिनी आकर मेरे पास लेट गई।

सागर- दैट्स गुड,,,, अब कुछ गर्मी कम लगेगी।

शालिनी- जी,

वो अब भी मेरे तरफ देख नहीं रही थी, सीधे टीवी स्क्रीन पर ही नजर गड़ाए थी।

उसकी समीज सफेद रंग की थी और उसके उन्नत उरोजों से कुछ नीचे उसकी नाभि के ऊपर तक थी, मैंने थोड़ा सा आंखें घुमाकर देखा तो उसके निप्पल अलग से नुमायां हो रहे थे, मैंने तुरंत अपनी आंखें हटाई क्योंकि मुझे लगा कि मेरा लन्ड ने फिर से जागने लगा है और नीचे मैंने चढ्ढी भी नहीं पहनी हुई थी ।

मैं सोच रहा था कि जल्दी से जल्दी शालिनी सो जाये, जिससे मैं बिना डर के उसके शरीर को देखूं, शायद छू भी लूं।

हम ऐसे ही बातें करते हुए टीवी आफ करके सो गए।

मैं तो सोने का नाटक ही कर रहा था करीब एक घंटे तक मेरे मन में फिर से...
खुद के सवाल और खुद के ही जवाब....

वासना तो किसी रिश्ते को नही मानती, फिर ये उधेड़बुन क्यूँ?

कहीं ऐसा तो नही जो चाहत जिस्म की प्यास ने शुरू की थी वो आत्मा की प्यास में बदल गयी है।

मेरे दिलोदिमाग में आँधियाँ चल रही थी, मेरा जिस्म जैसे एक सूखे पत्ते की तरह फड़फडा रहा था. ये क्या हो रहा है, क्या ये समाज भाई बहन के प्यार को इज़ाज़त देगा अपनी ही बहन से प्यार करने के लिए.

क्या ये प्यार कभी परवान चढ़ पाएगा. अगर ये प्यार ही है तो इसमे वासना कहाँ से आ गयी। क्यूँ मेरा जिस्म शालिनी के जिस्म में समाने के लिए बेताब है. क्यूँ उसके जिस्म से भड़की हुई प्यास को मैं उसी के बदन से बुझाने की आस लगाए बैठा हूं ।

कैसे बेशर्मो की तरह अपनी बहन की लाज के टुकड़े टुकड़े कर रहा हूं उसके अर्ध नग्न बदन को घूरते हुए।

उफफफफफफ्फ़ ये क्या हो रहा है ये किस दलदल की ओर बढ़ रहा हूँ मैं,

क्या माँ के विश्वास को उसके निश्चल प्रेम को वासना की बलि चढ़ाना ठीक होगा? क्या शालिनी कभी दिल से उसके साथ ऐसा संबंध बनाएगी - नही.... क्या शालिनी कभी उसे एक मर्द के रूप में देखेगी - शायद नही ।

तो फिर क्यूँ ये गंदे ख़यालात मेरे मन से क्यूं नही जा रहे. इसी उधेड़बुन में मैं यूँ ही जागता रहा ।
 
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कमरे की लाइट जल रही थी और मैं दूसरी तरफ करवट बदल कर लेटा हुआ था, अंत में जैसे ही मुझे लगा कि शालिनी सो गयी है, बस एक झटके में ही सारी नैतिकता गायब हो गई और मैं शालिनी के एकदम करीब आकर उसे सूंघने लगा, क्या मदहोश करने वाली महक आ रही थी उसके कामुक बदन से,,, मैं उठकर बैठ गया और उसके यौवन को जीभर कर देखने लगा ।

मेरा उसको समीज पहनाना अब काम में आ रहा था, अब तक मैंने शालिनी के दूध ब्रा में कैद हुए ही देखें थे,

अब समीज इतनी ढीली थी कि शायद नंगी चूचियों के दर्शन हो जाए,
धीरे धीरे मैंने शालिनी की समीज को आधी चूचियों तक उठा डाला ।

मैंने बहुत कोशिश की उसकी समीज को गर्दन तक उठाने की पर उसकी पीठ से दबी हुई थी, मैंने धीरे धीरे उसकी चूचियों पर हाथ रखकर हल्का सा दबाव बनाया तो ऐसा लगा जैसे रूई का नरम गोला हो, मैं डर भी रहा था कि अगर शालिनी जाग गई और अपने आप को इस हालत में देखेगी, और कहीं मेरे खड़े लौड़े को देख लिया तो आज ही मेरे लौड़े लग जाने हैं,।

करीब दो घंटे तक मैं जागता रहा और बिना ज्यादा छूए शालिनी के बदन को देख कर धीरे-धीरे अपने लौड़े को सहलाते सहलाते मुठ मार कर , वही पास में पड़े कपड़े में अपना वीर्य पोंछ कर सो गया, मुठ मारने में आज जैसा आनंद कभी नहीं आया था ।।


सुबह मैं जानबूझकर देर तक लेटा रहा और शालिनी ने फ्रेश होकर चाय बनाई और मुझे जगाया, मेरा लन्ड अभी सुबह वाले रेगुलर हार्ड कंडीशन में खड़ा था, मुझे पक्का यकीन था कि शालिनी ने चाय पकड़ाते हुए उसे देखा जरूर था , मैं इतने से ही गनगना उठा, शालिनी ने टी-शर्ट पहन ली थी, और हम लोग बातें करते हुए कालेज जाने की तैयारी करने लगे ।

मैं रूम में कपड़े पहन रहा था और शालिनी पीछे कमरे में ।

करीब 5 मिनट के बाद जब शालिनी बाहर निकल कर आई तो मैं उसे देखता रह गया, शालिनी ने जो कपड़े पहने हुए थे उनमे मैने उसे पहली बार देखा था,

उसने एक वाइट कलर की टी शर्ट पहनी हुई थी जो उसके बदन से बुरी तरह चिपकी हुई थी, और वो इतनी टाइट थी कि उसकी ब्लैक ब्रा की पूरी रूपरेखा मुझे दिखाई दे रही थी, और उसमे उसके बूब्स काफ़ी बड़े लग रहे थे, मैं तो रात को उसके बूब्स को अधनंगा देख चुका था इसलिए मुझे उनका असली साइज़ पता था, वरना इस वाली ब्रा मे उसके बूब्स देख कर मैं तो बेहोश ही हो जाता ।

और नीचे उसने जींस पहनी हुई थी, जो उसकी जाँघो पर चिपकी थी, वो भी काफ़ी टाइट थी, और उसे पहन कर चलने मे उसे शायद हल्की परेशानी हो रही थी..साथ मे उसने हाइ हील के सेंडिल पहने हुए थे..

कुल मिलाकर वो देखने मे एक कड़क पटाखा माल लग रही थी, वो अगर मेरी बहन ना भी होती तो इस वक़्त मैं उसे देख कर मर मिट ता..

मैने उसे देख कर हल्की सी सीटी मारी और वो शर्मा गयी,
शालिनी ने मुझे मुक्का दिखाकर मारने का इशारा किया, जो मुझे बहुत अच्छा लगा, हमारे बीच अब थोड़ी थोड़ी चुहलबाज़ी शुरू हो गई थी ।

उसके सीने का उभार देख कर मेरे दिल की धडकन तेज़ हो गयी. ब्रा में चूचियां और बड़ी हो जाती हैं, शालिनी बिलकुल किसी हिरोईन जैसी दिख रही थी. उसकी चुची किसी पहाड़ी की चोटी की माफ़िक खड़ी थी ।

मुझे लगा की शालिनी ने मुझे उसकी चूंची को घूरते हुये देख लिया है. मै शरम के मारे चुप रहा. और हम लोग बाइक से कालेज के लिए निकल पड़े ।

रास्ते मे बाईक पर जब मै ब्रेक मारता तो शालिनी का सीना मेरी पीठ से टकराता और मेरी पैंट मे तम्बू बन रहा था, मुझे महसूस हो रह था की शालिनी भी शरारती ढन्ग से मुस्कुरा रही थी.

"मुझे अच्ही तरह से पकड कर रखो, कही गिर ना जाना !" मैने कहा तो शालिनी ने मुझे कमर से कस के पकड़ लिया और उसका हाथ मेरे लन्ड से अधिक दूर नही था. उसकी सांस मेरी गर्दन से टकरा रही थी. उत्तेजना की हालत मे हम कालेज पहुंच गये.

कालेज में आ कर हम लोगों ने एडमिशन की फार्मेलिटीज पूरी की, और क्लासेज़ शुरू होने के लिए पता करके हम लोग कालेज घूमते रहे.. काफी पैरेंट्स और कुछ लड़कियों के ब्वायफ्रेन्ड भी साथ में थे वहां पर, सभी लोग अपने अपने काम में बिजी थे, इस कालेज की खासियत यह थी कि यहां अपर मिडिल क्लास फैमिली की लड़कियां ज्यादा पढ़ती थी, शहर की सबसे माडर्न लड़कियों में से कुछ एक यहां भी घूम रहीं थीं, सीनियर लड़कियों में कुछ ने बहुत ही सेक्सी कपड़े पहन रखे थे, किसी के दूध दिख रहे थे तो किसी की लो वेस्ट जींस के ऊपर पैंटी... और किसी की ब्रा नुमाइश कर रही थी कपड़ों के ऊपर से ...

लड़कियों का कालेज होने से खुलापन या कहें नंगापन कुछ ज्यादा ही था।

कुछ लड़कियां नये एडमिशन वाली भी गजब अंग प्रदर्शन कर रहीं थीं... मुझे लगा साला यहां तो एक से एक खूबसूरत आईटम हैं और चंचल भी,,,, कहीं शालिनी इन सब के चक्कर में ना आ जाए।। आज कल मैं सिटी का माहौल देख ही रहा था, पहले लड़कियां सिर्फ प्यार करतीं थीं और आज कल चुदाई और शापिंग ....

मैंने तो पहले से ही सोच लिया था कि मुझे शालिनी को ब्वायफ्रेन्ड के चक्कर में पड़ने से पहले ही अपना हमबिस्तर बना लेना है, और अब मैं ये जल्दी करना चाह रहा था ।

खैर,,, मैं और शालिनी लाईब्रेरी का कार्ड बनवाने के बाद बाहर बड़े ग्राउंड में आकर घास पर एक पेड़ की छांव में बैठ गये ।


सागर- तो तुम्हारे तो सारे काम हो गए, अब दस मिनट आराम कर लें फिर घर चलें । और कालेज कैंपस कैसा लगा।

शालिनी- बहुत जबरदस्त... बस पढ़ाई भी ऐसी ही जबरदस्त हो...
वह बहुत ही एक्साइटेड थी

सागर- हां, यहां पढ़ाई भी टापक्लास है और बाकी सब भी

शालिनी थोड़ा हंसने के बाद बोली हां वो तो दिख रहा है।

सागर- हां, दिख तो रहा ही है, यहां की लड़कियों का कान्फीडेन्स देखा... बोल्ड ब्यूटीज...

शालिनी- बोल्ड भी और बेशर्म भी...

सागर- अरे, यहां मुझे तो कोई बेशर्म नही दिखाई देता है...

शालिनी- वो सामने ही देखिए, वो लड़की की शर्म।

सागर- नहीं, वो क्या बेशर्मी कर रही है, वो तो अपने साथ आए लड़के से बात कर रही है।

शालिनी- नहीं,मेरा वो मतलब नहीं है, आप वो.... वो उसके कपड़े देखिए कितना एक्सपोज हो रहा है।
 
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Sandy388ijbb

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सामने कुछ दूर पर जो लड़की खड़ी थी, उसने खुले कन्धों वाली ड्रेस पहनी थी जिससे उसकी लाल रंग की ब्रा की पट्टियां पूरी दिखाई दे रही थी, और अंदर से उसकी लाल ब्रा का शेप पूरी तरह से सफेद रंग के झीने टाप से नुमायां हो रहा था, उसकी चूचियां काफ़ी बड़ी थी, नीचे उसने शार्ट जींस पहनी थी जो उसके घुटनों से कुछ ऊपर ही थी और उसके गोरे मांसल पैरों को देखकर किसी का भी लन्ड खड़ा हो जाता....

सागर- कम आन... यार इतना सब चलता है यहां सिटी में, किसी के पास इतना टाइम नहीं है कि वो ये सब देखें... बहुत बिजी हैं लोग और माडर्न भी ।

मैंने पहली बार शालिनी को यार कहकर बात की थी, और शायद उसे अच्छा ही लगा था

शालिनी- ओके .. ओके,भाई ...अब मुझे भी यहीं आना है , इन्हीं के साथ पढ़ना है,,,

सागर- हां भई, और एक तुम हो कि घर के अंदर भी तुम्हे शर्म आती है वो भी मेरे साथ, इन लड़कियों का कान्फीडेन्स देखो,,,,

शालिनी- ऐसा कुछ नहीं है वो आप के साथ थोडा़ ध्यान रखना जरूरी रहता है, आफ्टरआल, यू आर माई एल्डर ब्रदर, और मेरी तरफ से आपको कोई परेशानी ना हो, बस .... वैसे मैं भी इस तरह के कपड़े पहनना पसंद करूंगी, बट कालेज में नहीं, कोई पार्टी वगैरह हो तो....

सागर- कोई नहीं, जब तुम्हारे अंदर कान्फीडेन्स आ जायेगा तो तुम भी पहनोगी कालेज हो या पार्टी... इट्स आल अबाउट कान्फीडेन्स ।

शालिनी- ओके, देखते हैं, अब घर चलें,या और किसी की बेशर्मी देखनी है... हंसते हुए

सागर- हां, चलो, आज के लिए इतनी काफी है अब तो हर रोज तुम्हें जब कालेज छोड़ने आऊंगा तो ऐसी बेशरमियां हर रोज देखने को मिलेंगी .. ही ही हंसते हुए ...

मुझे तुमको घर पहुंचाकर काम पर भी जाना है,

कालेज की एक से एक जबरदस्त माल आईटम को देखकर मेरा लन्ड कई बार हरकत में आया था और बाईक पर वापसी के समय शालिनी भी कुछ ज्यादा ही सटकर बैठी थी, मैंने कई बार उसकी गुदाज चुचियों को अपनी पीठ पर महसूस किया, और बातें करते हुए हम घर आ गए । इस थोड़ी चुहलबाज़ी से मुझे थोड़ी हिम्मत और बढ़ी कि शालिनी को जल्दी ही मैं लाइन पर ले आऊंगा ।

शालिनी को घर छोड़ कर मैं अपना बैग लेकर घर से निकल लिया, मन में सारी पढ़ी हुई सेक्स कहानियों के किरदार नजर के सामने आ रहे थे, मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं शालिनी के साथ बातचीत में थोड़ा सा फ्री हो पाया हूं अब उसके शरीर के साथ अपने आप को कैसे फ्री करूं ,,, कालेज में लड़कियों के नंगेपन ने मेरी कुछ मदद तो कर दी थी, मगर इसके आगे क्या ??

शाम को सात बजे मैं वापस घर आया और आते ही मैंने कपड़े बदले और नहाने लगा,,, नहाकर मैंने फिर से बिना अंडरवियर के बरमूडा पहन लिया।।

शालिनी मेरे लिए नाश्ता बनाकर ले आई और मेरे सामने रख दिया और रखते हुए जब वो झुकी तो मेरी गंदी नज़रों ने पहली बार, जान बूझकर, उसकी टी-शर्ट के खुल्ले हुए गले के अन्दर की तरफ देखा…

और जो मुझे दिखा, उसके बाद तो मेरे लंड का बैठे रहना दुश्वार हो गया.. गला नीचे करने की वजह से उसके गले की गहरी घाटियाँ अंदर तक मुझे दिखाई दे गयी… दो पके हुए मोटे तरबूज ठीक मेरी नज़रों के सामने थे…

उनकी कसावट का अंदाज़ा मैं थोड़ा थोड़ा ले ही चूका था, काली ब्रा में कसे हुए ऐसे थे कि वो हिल भी नही रहे थे, एकदम किसी पत्थर की तरह जम कर चिपके हुए थे वो उसकी छाती से..

पर यहाँ मेरी गंदी नज़रों की चोरी पकड़ी गयी।

मैं उसके बूब्स को देख रहा था और वो मुझे

शालिनी- भाई कहां हो तुम, चाय ठंडी हो जायेगी ।

और एक कातिलाना स्माइल देकर वो अपनी गान्ड मटकाती हुई फिर से किचन मे चली गयी..

मेरा मुँह खुल्ला का खुल्ला रह गया, शालिनी ने कुछ नही कहा… एक तरह से देखा जाए तो मैने आज ही पहली बार शालिनी के ऑलमोस्ट नंगे बूब्स देखे उसकी जानकारी में, और उसने मुझे देखते हुए पकड़ा भी और मुस्कुराइ भी.. यानी उसे इस बात मे मज़ा आ रहा है क्या ??

शालिनी ने आज वीशेप गले की टी-शर्ट और निक्कर पहनी थी, इन कपड़ो मे उसके शरीर का एक एक उभार खुल कर दिखाई दे रहा था, मैं अभी लेटकर टीवी देखने लगा । शालिनी को खाना बनाने की तैयारी के लिए बार बार मेरे सामने से गुज़रना पड़ रहा था उसके मादक बदन और मस्त चाल को देख देख कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था और मैं अपनी बहन की मस्त जवानी का नयन सुख ले रहा था मुझे पता ही नही चला कि कब मेरे बरमूडा मे बड़ा सा टेंट बन गया था तभी शालिनी मेरे पास आई और बोली-भाई खाना कब खायेंगे ?

सागर- थोड़ी देर में,,

इतना कहकर शालिनी वहाँ से नही हटी और एक टक मेरे बरमूडे मे बने तम्बू को देखने लगी मुझे समझ नही आया कि वो ऐसे क्या देख रही है जब मैने उसकी नज़रो का पीछा किया और अपने तम्बू को देखा तो झट से अपने हाथ से अपने लंड को दबा दिया और वो झट से बाहर बरामदे में चली गई ।

कुछ देर बाद वो अंदर आई और

हम लोगों ने खाना खाया और शालिनी ने साफ सफाई करने के बाद कहा, भाई मैं नहाने जा रही हूं, बहुत पसीना हो रहा है ऐसे तो नींद नहीं आयेगी, मैं लेटकर टीवी देख रहा था, कुछ देर बाद शालिनी नहाकर कमरे में आई तो मैं उसे देखता ही रह गया, आज उसने बिना कहे समीज और निक्कर पहन ली थी, ब्रा तो पक्का नहीं पहनी थी और शायद पैंटी भी नहीं ।
 

Sandy388ijbb

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शालिनी मेरे सामने खड़ी हो कर अपने हाथ उपर करके बाल संवार रही थी जिससे उसकी चूचियां काफ़ी बड़ी लग रही थीं, मेरे लौड़े में फिर से तनाव आने लगा, फिर वो पानी की बोतल सर के पास रख कर मेरे बगल में लेट गई, हम टीवी देख रहे थे, तभी टीवी में मर्डर फिल्म का गाना आ गया... कभी मेरे साथ कोई रात गुजार...

गाना खत्म होते होते मेरा लन्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया जो शायद शालिनी भी देख रही थी, बट मैंने उसे छुपाने की कोशिश नहीं की... सोचो सामने स्क्रीन पर मल्लिका शेरावत और बगल में कुछ इंच की दूरी पर एक अधनंगी लड़की....

मैंने माहौल को थोड़ा हल्का करने की कोशिश की

सागर- शालिनी , अगले वीक से तुम्हारे क्लासेज़ शुरू हो जायेंगे, कल शाम को चलकर तुम्हारी बुक्स वगैरह ले लें और कुछ कपड़े भी...

शालिनी- जी भाई,

सागर- ओके, गुडनाईट, अब सोते हैं...

नींद तो मेरी आंखों से गायब थी, मुझे इंतज़ार शालिनी के सोने का था... करीब एक घंटे बाद मैंने अपना कल वाला कार्यक्रम फिर शुरू किया... शालिनी के बदन को सूंघने से ही मेरा लन्ड खड़ा हो गया और मैंने धीरे से उसकी समीज उपर उठाई और हौले हौले से उसकी चूचियां सहलाने लगा मैंने चूचियों को दबाया नहीं क्योंकि अगर दबाव ज्यादा हुआ तो शालिनी कहीं जाग ना जाए ।

मैं उसके पेट पर हाथ रख कर उसकी नाभि में उंगली डाल कर धीरे धीरे सहलाता रहा मैंने थोड़ी हिम्मत करके आज उसकी निक्कर को आराम से थोड़ा नीचे सरका दिया.... ये सारा काम करते करते हुए घंटे भर हो चुका था।

मैंने जब देखा निक्कर और नीचे नहीं हो रही है तो मैने धीरे से अपना हाथ उसके अंदर कर दिया... उसने पैंटी नहीं पहनी थी, और क्या बताऊं वो एहसास..... ये मेरी लाइफ का पहला टाइम था किसी की चूत को छूने का... बिल्कुल चिकनी और मखमली... निक्कर में इलास्टिक बैंड होने से बहुत ज्यादा परेशानी नहीं हुई हाथ को उसकी अनछुई बुर को सहलाने में... मैं शालिनी की बुर को देख नहीं पा रहा था मगर अंदर की गर्मी को पूरा महसूस कर रहा था,,, मैंने बहुत सावधानी से अपना दाहिना हाथ उसकी बुर के उपर रखा और बायें हाथ से अपने लौड़े को सहलाने लगा,, तभी शालिनी ने हल्की सी करवट बदलने की कोशिश की, मैंने झट से अपना हाथ बाहर निकाल लिया और कुछ देर इंतजार करने के बाद मैंने ज्यादा कोशिश नहीं की फिर से हाथ अंदर डालने की,,,,

मेरे लौड़े में अब दर्द हो रहा था जो बिना मुठ मारे ठीक नहीं होने वाला था,, मैं धीरे से उठकर बाहर बरामदे में आ गया और वहां शालिनी ने नहाने के बाद अपनी ब्रा और पैंटी सूखने के लिए फैलाई थी, उसकी ब्रा को हाथ में लेकर उसे चूसने चाटने लगा और अपने लौड़े पर रगड़ रगड़ कर उसी में अपना वीर्य निकाल दिया और उसे फिर से सूखने के लिए टांग दिया।

मुठ मारने के बाद सारा जोश ठंडा हो जाता है और वही मेरे साथ भी हुआ,एक बार मैने सोचा कि ब्रा को धोकर डाल दूं, पर कुछ सोच कर मैंने उसे ऐसे ही रहने दिया और कमरे में लेटी हुई अप्सरा के साथ लेट गया, सोने से पहले उसके पेट पर आज हाथ रखकर, मैं सोने लगा, मैं अभी भी शालिनी के बदन से चिपका नहीं था, सिर्फ उसके खुले पेट पर हाथ रखकर सो गया।

मुझे इस सब में मजा तो आ रहा था मगर मैं चाहता था कि जो काम मैं चोरी से करता हूं, वो खुलकर कर सकूं.... जाने वो दिन कब आएगा जब शालिनी कहेगी.... लो भाई पी लो मेरे दूध जीभर कर.... चूस लो इनका सारा रस... इन्ही कल्पनाओं में मुझे नींद आ गई ।


अगले दिन सुबह मेरी नींद फिर शालिनी से पहले खुल गई पर मैंने फिर से अपना हाथ उसके गोरे पेट पर रख दिया और सोने की एक्टिंग करने लगा, मैं शालिनी का रियेक्सन देखना चाहता था,,,

मैं आंखें बंद करके लेटा रहा और काफी देर तक इंतजार करने के बाद शालिनी के बदन में हरकत हुई,वो थोड़ा सा ऊपर की ओर खिसकी लेटे ही लेटे... उसने अब तक मेरा हाथ नहीं हटाया था अपने पेट से.... करीब पांच मिनट ऐसे ही लेटे रहने के बाद शालिनी ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और उसे हल्का सा सहलाते हुए धीरे से हटा दिया और वो बेड से उठ कर बाथरूम में चली गई ।

मैं वैसे ही लेटा रहा, शालिनी ने फ्रेश होकर चाय बनाई और मुझे जगाया...

शालिनी- उठो भाई, योर बेड टी इज रेडी ।

मैं अंगड़ाई लेते हुए उठा और उसे गुड मॉर्निंग बोलकर चाय का कप हाथ में पकड़ा,,, मेरे बरमूडे में फिर से मार्निंग हार्डआन की वजह से तम्बू बना हुआ था, मगर अब मैंने उसे छुपाने की कोशिश नहीं की, शालिनी भी मेरे साथ बेड पर बैठ कर चाय पी रही थी और उसने समीज निकाल कर टीशर्ट पहन ली थी,।

और वो काफी खुश लग रही थी मतलब उसे मेरा उसके पेट पर हाथ रखकर सोना बुरा नहीं लगा था,,,

सुबह सुबह बिना ब्रा के शालिनी के उछलते हुए दूध देखकर अपने आप को रोक पाना बहुत मुश्किल काम था...

खैर, डेली रूटीन के काम करते हुए मैं नाश्ता करके अपने काम पर निकल लिया और शालिनी से शाम को शापिंग मॉल चलने को कहकर उसे रेडी रहने को बोल दिया!

दिन में मैंने कई बार उसको वीडियो काल करी, मैं जल्दी घर आना चाहिए रहा था ।

मैं शाम को वापस आया और आज मैं ये सोच कर शापिंग मॉल जाने के लिए निकला था कि शालिनी के साथ बातचीत में और फ्री होने की कोशिश करूंगा।

मैं और शालिनी शाम पांच बजे शॉपिंग के लिए अपनी बाईक से निकल आये । मैंने नोटिस किया कि शालिनी ने घर से निकलते समय बाईक पर मुझसे दूरी बनाई थी और थोड़ी दूर निकल कर वो बात करने के बहाने मेरी पीठ से चिपक कर बैठ गई । इस दोहरे चरित्र को देख मुझे बहुत अच्छा लगा, ऐसा लगा जैसे शालिनी को घर पे मुझे अपना बदन दिखाने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती है या शायद उसे मुझे अपना बदन दिखाना अच्छा लगने लगा है। वहीँ घर से निकलते समय बाहर वो एक साधारण सीधी लड़की की तरह सादगी से रहती है।
 
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