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Incest I Am Murim Lord ( Reincarnation )

Ek number

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chapter 14

विराज आ गया था घर एक साल विराज एक महीने मुरिम तो एक महीने अपनी दुनिया मे अपनी दोनो बीवी के साथ खूब मजे किये rin aria को भी बहोत मजा आया और पिर्थ्वी पे लोग कैसे है कैसे जीते है सब जान समझ लिया था

विराज अपनी मा दीदी के सामने खरा था माला शिवानी विराज को देख हैरान शोक थे विराज अपनी मा दीदी को

एक साल दूर रहने का फायदा विराज ने अच्छे से उठाया अपनी बॉडी हैंडसम नेस को बहोत बढ़ा लिया था यही देख माला शिवानी हैरान शोक विराज को देख रहे थे सोच रहे थे सामने वाला विराज ही है ना

विराज भी माला शिवानी को देख हैरान था एक साल मे माला पहले से और गोरी खूबसूरत हॉट मस्त फिगर वाली बन गई थी

वही शिवानी भी एक साल मे और खूबसूरत हो गई थी पहले थोरि पतली थी अब भरा बदन मस्त फिगर वाली बन गई थी

माला विराज के पास आके विराज के गाल पे हाथ रखते हुवे विराज को देख - तुम मेरे बेटे ही हो ना
विराज माला के गाल पे हाथ रखते हुवे - आप मेरी मा ही हो ना
माला विराज के गाल पे मारते हुवे - नालायक मे तेरी मा ही हु एक साल मे ही अपनी मा को पहचान नही रहा
विराज हस्ते हुवे - यही बात तो मे आपसे भी केह सकता हु
माला मुस्कुराते हुवे विराज को उपर से नीचे तक देखते हुवे - तुम पहले से बहोत ही जायदा हैंडसम हो गये हो बॉडी भी मस्त बना ली है इस लिये पहचान नही पाई

TV Serial Hot Sexy Photos17
विराज भी सेम माला को उपर से नीचे तक अच्छे से देखते हुवे मुस्कुरा के - मा आप भी तो पहले से बहोत खूबसूरत हॉट हो गई है इस लिये मे भी आपको देख हैरान हो गया
माला हैरान मुह पे हाथ रख विराज को देख सर्मा के - बेसर्म मा को हॉट बोलता है

माला फिर विराज को गले लगा के - बहोत मिस क्या बेटा तुझे
विराज भी अपनी मा के गले लगे - मेने भी मा
तभी बीच मे शिवानी आते हुवे विराज को देख - मुझे भूल गया मे भी हु यहा

विराज शिवानी को देख - आप बिल्कुल नही बदली वैसी ही है
शिवानी हैरान शोक मे - क्या मा खूबसूरत लगी मा की तारीफ की मेरा क्या हा

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विराज हस्ते हुवे शिवानी को उपर से नीचे तक देखते हुवे - दीदी आप भी पहले से बहोत खूबसूरत हॉट हो गई है सच केह रहा हु
शिवानी सर्मा के - हा हा पता है मे तो बस पूछ लिया

विराज शिवानी के गले लग - दीदी आपको बहोत मिस करता था
शिवानी विराज के गले लगे हुवे - छोटे मेने भी बहोत मिस किया

तभी आदि आशी विराज के पास आके विराज को देख - मामू मामू बोलने लगते है
माला शिवानी मुस्कुराते हुवे देखने लगते है विराज अपनी भांजी भांजे को देख बहोत खुश होता है फिर दोनो को गोद मे उठा के प्यार करते हुवे - वो मेरा बच्चा देखो मे आ गया और तुम दोनो के लिये बहोत सारी कॉकलेट खिलौने भी लाया हु

आदि - मामू कॉकलेट चाहिये
विराज मुस्कुराते हुवे - हा जरूर दूंगा बहोत सारी

आशी प्यारी तोतली आवाज मे - मामू खिलौने
विराज आशी के गाल मे पप्पी करते हुवे - जरूर दूंगा मेरी प्यारी गुरिया

शिवानी - दोनो तुझे बहोत मिस करते थे मामू मामू कहते रहते थे
माला - आदि तो तुझे ढूंढता रहता था अच्छा चल नहा ले दिमाग फ्रेस् हो जायेगा लम्बा सफर करके आया है

विराज दो बरे बैग उठा के - जी मा

विराज फिर नहाता खाता है उसके बाद फिर एक कमरे मे बैठ बात सुरु होती है

माला विराज को देख इमोसनल होके - आज मे बहोत खुश हु बेटा ये देख मेरा लाल बदल गया मेरे टूटे उमीद भरोसे मे तु खरा उतरा

शिवानी - छोटे मे भी तेरे लिये खुश भी देर सवेर ही सही मेरा भाई अब संभल गया है

विराज अपनी मा दीदी को देख - मा दीदी मुझे भी खुशी मिली है पहले मेने सब का दिल दुखाया था उसके लिये माफ करना

माला शिवानी मुस्कुराते हुवे - भूल जा पहले का सब

विराज खरा होके बरे बैग से छोटा बैग निकालता है जिसमे माला शिवानी रमन आदि आशी के लिये कपड़े थे

विराज माला को दो बैग देते हुवे - मा एक मे आपके लिये कपड़े है दूसरे मे पापा के लिये, विराज शिवानी को दो बैग देते हुवे, दीदी एक मे आपके कपड़े दूसरे मे आदि आशी के कपड़े खिलौने है

शिवानी तो खुशी खुशी बैग लेके - क्या बात है छोटे मेरे लिये नये कपड़े आराम से देखुंगी कैसे कपड़े लाया है अपनी दीदी के लिये और अपनी भांजी भांजे के लिये

विराज - हा आराम से देख लेना

माला - मे भी लेख लुंगी मेरा लाल पहली बार मेरे लिये कुछ लाया है मे बहोत खुश हु

विराज - अच्छा मा दीदी मे घुमने जा रहा हु साम तक आ जाऊंगा
माला - ठीक है जल्दी आ जाना

विराज घर से बाहर निकल - चलो पुरानी यादे ताजा कर लेते है

विराज अपने गाव घुमने लगता है और घूमते घूमते अपने दोस्त यानी रूबी के घर के बाहर खरा होके रूबी के घर को देख मन मे - रूबी अब मुझे तुमपे गुस्सा नही आता बल्कि तेरा सुक्रिया उस दिन वो सब नही होता तो आज मे जो हु नही होता आज मे मुरिम दुनिया का लॉर्ड हु इस दुनिया मे भी मे सब से जायदा पावर फुल हु मेरी दोनो बीवी rin aria के सामने तुम क्या इस दुनिया की कोई भी लरकी औरत ठीक नही सकती खूबसूरती मे पावर मे तो भूल ही जाओ

तभी घर से विराज का दोस्त रूबी का भाई दीपक बाहर आता है विराज को देख दीपक हैरान कंफ्यूज होता है लेकिन गोर से देखने के बाद दीपक और हैरान शोक होके विराज के पास आके - मेरे दोस्त विराज तुम ही हो ना

विराज दीपक को देख मुस्कुराते हुवे - हा कैसा हो दीपक
दोनो गले मिलते है

दीपक विराज को गोर से देखते हुवे - यार एक साल मे तु कितना बदल गया है यकीन नही होता इतना हैंडसम मस्त बॉडी सच केह रहा हु लरकिया तुझे देख दीवानी हो जायेगी

विराज मन मे - अभी तो आधे रूप मे ही हु मुरिम दुनिया मे एक पे एक लरकिया ऑन्टी मेरे पीछे थी लेकिन मेरी दोनो बीबियाँ किसी को आने ही नही देती है भगा देती है

विराज हस्ते हुवे - क्या यार बता क्या चल रहा है
दीपक - यार तु था नही रूबी की सादी हो गई जीजा रूबी आये है चल मिलवाता हु

विराज मुस्कुराते हुवे - ठीक है चल
विराज दीपक के पीछे घर के अंदर जाते हुवे मन मे - हा मुझे पता है दीदी ने बताया था

विराज एक कमरे मे जाता है रूबी उसका पति बैठे थे रूबी जैसे ही विराज को देखती है पूरी शोक मे चली जाती है

विराज मुस्कुराते हुवे रूबी को देख - कैसी है मेरी दोस्त रूबी
रूबी होस मे आके विराज को देख - विराज तुम हो कितना बदल गये हो
विराज मुस्कुराते हुवे - वक़्त हालत बदलने पे मजबूर कर देते है ना बदलो तो आप उसी मे खो के रह जाओगे

रूबी विराज की बात समझ गई थी लेकिन बात घुमाते हुवे अपने पति को देख - ये है मेरे पति अशोक एक xxx कपनी के सुपरवाइज़र 30000 महिना है

विराज हैरान शोक मे - क्या सच्ची मे
रूबी मुस्कुराते हुवे - हा अगर तुम्हे कोई काम चाहिये बोलना मे लगवा डुगी इनसे बोलके मेरे दोस्त हो इतना कर ही सकती हु

विराज - सुक्रिया सुक्रिया मेरे लिये बहोत अच्छा होगा
रूबी मन मे - हु भिखारी अच्छा हुआ तुझे छोर दिया कोन लरकी एक भिखारी से सादी करेगी

विराज रूबी को देख मन मे - कमीनी बरी आई रोब दिखा रही है 30000 हजार मेरी दोनो बीवी ने जो गेहने पहने है ना इसकी कीमत का दूर दूर तक अंदाज़ा तु लगा नही पायेगी अरे कपड़े का ही लगा नही पायेगी

विराज अशोक को देख - मेरी दोस्त बहोत अच्छी है ख्याल रखना नही रखा तो उर् जायेगी
अशोक हैरान कंफ्यूज मे - मतलब
विराज रूबी को देख मुस्कुराते हुवे - मलतब खुश रखेगी फिर भी आपको
अशोक - अच्छा
रूबी मन मे - कमीना आया कियु है एक बात तो है इस एक साल मे बहोत जायदा हैंडसम हो गया है बॉडी भी मस्त है लेकिन क्या फायदा गरीब का गरीब ही रहेगा.

विराज दीपक को देख - चल घूम के आते है
दीपक अशोक को देख - जीजा चलेंगे
अशोक - हा ठीक है
विराज एक बार रूबी को देखता है फिर तीनो निकल परते है

रूबी अकेली मन मे - एक बार भी मुझे कुछ बोला ना गुस्सा क्या ना सवाल क्या पर कियु जब विराज ने मुझे किसी और के साथ देख लिया था तब उसे गुस्सा होना चाहिये था मुझे गाली या कुछ तो बोलता ही पर नही उसने एक शब्द नही कहे यही बात हजम नही हो रही


विराज दीपक अशोक को लेके जाता है खुब खिलता पिलाता है और घर छोर भी देता है उसके बाद साम विराज अपने घर नशे मे आता है लेकिन अंदर जाने दे पहले नसा गायब कर नॉर्मल होके अंदर जाता है

आगन मे बच्चे खेल रहे थे शिवानी खाना बना रही थी और माला रमन बैठे बाते कर रहे थे

रमन विराज को देख हैरान होके -माला हमारा बेटा तो सही मे बदल गया है कितना हैंडसम हो गया है बॉडी भी मस्त बना ली है

माला विराज को देख मुस्कुराते हुवे - मेने कहा था ना
रमन - हु देख रहा हु
. विराज रमन के गले लग - पापा
रमन विराज के पीठ थप् थापते हुवे - सबास् मेरे सेर तूने इस बार उमीद नही तोरी
शिवानी - पापा अब छोटा बदल गया है

बाते मस्ती करते विराज अपनी झूठी कहानी सब को बताने लगता है एक साल कैसे क्या क्या फिर खाना खाने बैठ जाते है

विराज - मा मे सोच रहा हु पक्के का घर बनवाना सुरु कर दु
रमन माला शिवानी हैरान शोक मे - क्या
माला - बेटा नया पक्के का घर बनाने मे बहोत खर्च आता है
विराज - मा जनता हु लेकिन आपने लाल ने इतना पैसे कमा लिये है की घर का आधा काम हो सकता है मुझे फिर जाना होगा 2 साल और काम करूँगा उसके बाद हमारे पास सब होगा

रमन हैरान - अच्छा समझ गया तेरी किस्मत अच्छी थी बरी कपनी मे काम मिल गया और बेटा तूने भी बहोत मेहनत की है इसी लिये इतना अच्छा पैसा मिलता है

विराज - जी पापा

विराज मे झूठी कहानी बना के सब को पहले ही पता दिया था ताकि जब आये तो सब जायदा सवाल ना पूछे

विराज ने बताया सब को वो एक बरी कपनी मे काम के लिये गया जो ब्रांड कपड़े बनाती है उसने जल्दी मशीन चलाना सिख लिया अब उसकी सेलरी लाख है यही कहानी विराज सभी को बताते आया है इस लिये सब जायदा सवाल नही किये

माला - ठीक है बेटा जैसा तुम चाहो
शिवानी - वाह भाई मेरा अब एक लाख महिना कमाता है मा इस गाव मे कोई नही होगा जो छोटे जितना पैसा कमाता होगा हा कुछ लोग को छोर के
माला खुशी से - मेरे लाल तूने हमारी इज़त रख ली आस पास के लोग बोलते थे तेरा बेटा घूमता रहता है कुछ नही करता लेकिन अब सब की बोलती बंद हो जायेगी

विराज सब को खुश देख मन मे - सुक्रिया god एक मोक्का देने के लिये

खाना बाते होने के बाद सभी अपने कमरे मे चले जाते है विराज बिस्तर पे लेता अपनी बीवी को कब कैसे सब से मिलाये यही सोच रहा था 25 मिनट बाद शिवानी बच्चो को सुला के आती है और बैठ जाती है विराज भी बैठ जाता है

विराज - दीदी आदि आशी के कपड़े कैसे लगे अच्छे तो है ना
शिवानी विराज को देख - बहोत खूबसूरत अच्छे है
विराज - और आपके लिये लाया था वो
शिवानी थोरा सर्मा जाती है कियुंकी विराज सारी सूट के साथ बिकनी पैंटी भी लाया था

शिवानी - बहोत अच्छे है मुझे पसंद आया

शिवानी मन मे - कोई भाई बहन के लिये बिकनी पैंटी भी लाता है क्या लेकिन एक बात तो है सारी सूट और बिकनी पैंटी बहोत अच्छे मेहगे है मेने बिकनी पैंटी पहन के भी देखती बहोत सॉफ्ट नर्म है

विराज - जान कर अच्छा लगा
शिवानी विराज की तरफ आराम से बैठ - अच्छा तूने बोला था मुझसे तुझे कुछ चाहिये तु बदल गया मेने मा पापा ने देख लिया अब बारी मेरी है अपने वादे पुरे करने की बोल क्या चाहिये दे सकी तो जरुर दूंगी

विराज मन मे - क्या करू बोल दु या अभी नही लेकिन डर लग रहा है लेकिन बोल ही देता हु आगे देरी करी तो भी वही होगा जो अभी होगा

विराज शिवानी को देख हिम्मत करके - दीदी मुझे आपके साथ वो करना है जो जीजा जी करते है कि को

शिवानी - फिर से बोल क्या बोला तूने
शिवानी ने सब अच्छे से सुना था पर यकीन नही कर पा रही थी
विराज डरते हुवे फिर वही बात बोलता है उसके तुरंत ही कई थप्पर विराज के गाल पे परने लगते है

शिवानी गुस्से से लाल हो चुकी थी शिवानी गुस्से से जोर से बोलने वाली थी लेकिन फिर समझ आता है जोर से बोलेगी तो मा पापा सुन लेके इस लिये आवाज धीरे लेकिन गुस्से से विराज को देख

शिवानी - तूने क्या बोला पता भी है छि तु अपनी बहन मेरे साथ तेरे दिमाग मे मेरे लिये ये सब था छि छि छोटे पहले तु नाकारा था लेकिन अब जब बदला तो तो और भी नीच गिरा बन गया है कैसे भाई कैसे मेरे साथ छि भाई छि मुझे अब तुमसे नफरत हो गई है घिन आ रही है कहा मे खुश थी मेरा भाई सुधर गया कमा रहा है नाम रोसन् कर रहा है लेकिन तूने मा पापा को पता चलेगा तो

विराज गाल पे हाथ रखे नजरे नीचे किये - माफ करदो दीदी
शिवानी गुस्से से - कैसे माफ कर दु समझ नही आता कब से बता, शिवानी पुरे गुस्से से विराज के कान जोर से खीचते हुवे - कब से मेरे बारे मे गंदी सोच रख रहा था बता एक भाई के अंदर अपनी बहन के लिये गंदी सोच कब से कैसे आई मे भी तो जानु बता जल्दी

विराज डरते हुवे रों देता है आखो से आसु निकल आते है शिवानी विराज को रोता देख सांत हो जाती है और विराज का कान छोर देती है लेकिन गुस्सा नही गया था

विराज आसु बहाते हुवे - मे किसी से प्यार करता था
शिवानी शोक मे विराज को देखती है फिर कुछ सोचने के बाद - कही वो रूबी तो नही

अब विराज शोक होके शिवानी को देखता है

शिवानी विराज को शोक देख सर पकर - कई बार सक हुआ मुझे
शिवानी विराज को मारते हुवे, तुझे उस कमीनी के अलावा कोई नही मिला एक बार बता तो देता मे वही तुझे रोक देती अरे रूबी एक नंबर की छि.. है मे अच्छे से जानती हु पर तुझे दिखाई नही दिया

विराज मार खाता रहता है पर घंटा विराज को कोई फर्क पर रहा था

शिवानी - आगे भी बोल

विराज नजरे नीचे किये - उस दिन मेने रूबी को किसी और के साथ देख लिया मुझे बहोत बरा झटका लगा दिल टूट गया तब समझ मे आया मे किस लरकी के लिये अपनो की उमीद भरोसे तो तोर दिल दुखा रहा था बस उसी दिन मेने अपने आप को बदलने का जो भरोसा उमीद आप लोगो की तोरी उसे पाने का फैसला लिया

शिवानी हैरान शोक से सब सुन के - आगे जो मे जानना चाहती हु

विराज - आपकी सादी के एक महीने पहले रात को मे सुसु करने बाहर निकला तो आपके कमरे से अजीब आवाजे सुनाई दी पास गया तो और अजीब आवाजे सुनाई दी मे रोक नही पाया और दरवाजे के छेद से देखा आप उसी के बाद से

शिवानी मुह पे हाथ रख शोक विराज को देख गुस्से से - फिर भी दीदी हु तेरी कैसे
विराज रोते हुवे - माफ कर दो दीदी मेने उसके बाद कभी आपको लेके गंदे विचार नही आये लेकिन जब मेने कहा मे बदलना चाहता हु और आपसे कुछ चाहिये अपने कहा बस मे होगा दूंगी तो उस वक़्त फिर गंदे विचार आ गये

शिवानी को शोक पे शोक मिल रहे थे

शिवानी - डर नही लगा सोचा नही उसका अंजाम
विराज - सोचा पता था आप गुस्सा करेगी मारेगी नफरत करेगी लेकिन ये अच्छे से जनता था आप मा पापा को नही बतायेगी और आप मुझे माफ भी कर देगी कियुंकी आप मुझे बहोत प्यार करती है इस लिये हिम्मत ही

शिवानी शोक मे - प्यार का इतना गलत फायदा उठाने की सोची

विराज शिवानी के दोनो हाथ पकर आसु लिये शिवानी को देख - जनता हु आज आपका दिल बहोत दुखाया दीदी माफ कर दो प्लेस

शिवानी सांत होके विराज को देख - छोटे समझती हु तेरी उमर हो गई है फिर भी मे तेरी बहन हु सोचना भी पाप है

विराज - जनता हु गलती हो गई दीदी आप बहोत खूबसूरत है जब आपको देखता था सोचता था काश आप मेरी दीदी नही होती कियुंकी आप जितनी खूबसूरत है उतनी ही दिल की अच्छी साफ भी आपकी जैसी बीवी हर कोई पाना चाहेगी बस यही एक चीज खलती थी सोचता था काश आपकी जैसी कोई मुझे मिले पर मेरी दीदी जैसी कोई है ही नही जीजा जी से जलन होती है कभी कभी दीदी मानता हु गलत हु बस मेरी एक चाहत थी जो मेने आपको बताई लेकिन वादा करता हु अभी आप जो बोलोगी करूँगा बस माफ कर दो अपने बेवकूफ भाई को

विराज की ये लाइन बाते शिवानी का पूरा गुस्सा गायब कर देती है

शिवानी विराज को देखती रहती है फिर बिस्तर पे लेत जाती है और अपने चेहरे पे चादर डाल के - ठीक है कर ले पहली बार तूने कुछ मंगा है भले ही गलत है जल्दी से कर ले मे नही चाहती मा पापा को पता चले

विराज हैरान शिवानी को देखता है फिर जल्दी से कपड़े निकाल नँगा होके शिवानी को देख मन मे - एक मोक्का मिला है आज दीदी को एहसास कराऊंगा असली चुदाई किसे कहते है भले आगे फिर मोक्का ना मिले लेकिन आप ये रात पूरी जिंदगी कभी भूल नही पायेगी


आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏
Awesome update
 

Haiwaan

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chapter 14

विराज आ गया था घर एक साल विराज एक महीने मुरिम तो एक महीने अपनी दुनिया मे अपनी दोनो बीवी के साथ खूब मजे किये rin aria को भी बहोत मजा आया और पिर्थ्वी पे लोग कैसे है कैसे जीते है सब जान समझ लिया था

विराज अपनी मा दीदी के सामने खरा था माला शिवानी विराज को देख हैरान शोक थे विराज अपनी मा दीदी को

एक साल दूर रहने का फायदा विराज ने अच्छे से उठाया अपनी बॉडी हैंडसम नेस को बहोत बढ़ा लिया था यही देख माला शिवानी हैरान शोक विराज को देख रहे थे सोच रहे थे सामने वाला विराज ही है ना

विराज भी माला शिवानी को देख हैरान था एक साल मे माला पहले से और गोरी खूबसूरत हॉट मस्त फिगर वाली बन गई थी

वही शिवानी भी एक साल मे और खूबसूरत हो गई थी पहले थोरि पतली थी अब भरा बदन मस्त फिगर वाली बन गई थी

माला विराज के पास आके विराज के गाल पे हाथ रखते हुवे विराज को देख - तुम मेरे बेटे ही हो ना
विराज माला के गाल पे हाथ रखते हुवे - आप मेरी मा ही हो ना
माला विराज के गाल पे मारते हुवे - नालायक मे तेरी मा ही हु एक साल मे ही अपनी मा को पहचान नही रहा
विराज हस्ते हुवे - यही बात तो मे आपसे भी केह सकता हु
माला मुस्कुराते हुवे विराज को उपर से नीचे तक देखते हुवे - तुम पहले से बहोत ही जायदा हैंडसम हो गये हो बॉडी भी मस्त बना ली है इस लिये पहचान नही पाई

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विराज भी सेम माला को उपर से नीचे तक अच्छे से देखते हुवे मुस्कुरा के - मा आप भी तो पहले से बहोत खूबसूरत हॉट हो गई है इस लिये मे भी आपको देख हैरान हो गया
माला हैरान मुह पे हाथ रख विराज को देख सर्मा के - बेसर्म मा को हॉट बोलता है

माला फिर विराज को गले लगा के - बहोत मिस क्या बेटा तुझे
विराज भी अपनी मा के गले लगे - मेने भी मा
तभी बीच मे शिवानी आते हुवे विराज को देख - मुझे भूल गया मे भी हु यहा

विराज शिवानी को देख - आप बिल्कुल नही बदली वैसी ही है
शिवानी हैरान शोक मे - क्या मा खूबसूरत लगी मा की तारीफ की मेरा क्या हा

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विराज हस्ते हुवे शिवानी को उपर से नीचे तक देखते हुवे - दीदी आप भी पहले से बहोत खूबसूरत हॉट हो गई है सच केह रहा हु
शिवानी सर्मा के - हा हा पता है मे तो बस पूछ लिया

विराज शिवानी के गले लग - दीदी आपको बहोत मिस करता था
शिवानी विराज के गले लगे हुवे - छोटे मेने भी बहोत मिस किया

तभी आदि आशी विराज के पास आके विराज को देख - मामू मामू बोलने लगते है
माला शिवानी मुस्कुराते हुवे देखने लगते है विराज अपनी भांजी भांजे को देख बहोत खुश होता है फिर दोनो को गोद मे उठा के प्यार करते हुवे - वो मेरा बच्चा देखो मे आ गया और तुम दोनो के लिये बहोत सारी कॉकलेट खिलौने भी लाया हु

आदि - मामू कॉकलेट चाहिये
विराज मुस्कुराते हुवे - हा जरूर दूंगा बहोत सारी

आशी प्यारी तोतली आवाज मे - मामू खिलौने
विराज आशी के गाल मे पप्पी करते हुवे - जरूर दूंगा मेरी प्यारी गुरिया

शिवानी - दोनो तुझे बहोत मिस करते थे मामू मामू कहते रहते थे
माला - आदि तो तुझे ढूंढता रहता था अच्छा चल नहा ले दिमाग फ्रेस् हो जायेगा लम्बा सफर करके आया है

विराज दो बरे बैग उठा के - जी मा

विराज फिर नहाता खाता है उसके बाद फिर एक कमरे मे बैठ बात सुरु होती है

माला विराज को देख इमोसनल होके - आज मे बहोत खुश हु बेटा ये देख मेरा लाल बदल गया मेरे टूटे उमीद भरोसे मे तु खरा उतरा

शिवानी - छोटे मे भी तेरे लिये खुश भी देर सवेर ही सही मेरा भाई अब संभल गया है

विराज अपनी मा दीदी को देख - मा दीदी मुझे भी खुशी मिली है पहले मेने सब का दिल दुखाया था उसके लिये माफ करना

माला शिवानी मुस्कुराते हुवे - भूल जा पहले का सब

विराज खरा होके बरे बैग से छोटा बैग निकालता है जिसमे माला शिवानी रमन आदि आशी के लिये कपड़े थे

विराज माला को दो बैग देते हुवे - मा एक मे आपके लिये कपड़े है दूसरे मे पापा के लिये, विराज शिवानी को दो बैग देते हुवे, दीदी एक मे आपके कपड़े दूसरे मे आदि आशी के कपड़े खिलौने है

शिवानी तो खुशी खुशी बैग लेके - क्या बात है छोटे मेरे लिये नये कपड़े आराम से देखुंगी कैसे कपड़े लाया है अपनी दीदी के लिये और अपनी भांजी भांजे के लिये

विराज - हा आराम से देख लेना

माला - मे भी लेख लुंगी मेरा लाल पहली बार मेरे लिये कुछ लाया है मे बहोत खुश हु

विराज - अच्छा मा दीदी मे घुमने जा रहा हु साम तक आ जाऊंगा
माला - ठीक है जल्दी आ जाना

विराज घर से बाहर निकल - चलो पुरानी यादे ताजा कर लेते है

विराज अपने गाव घुमने लगता है और घूमते घूमते अपने दोस्त यानी रूबी के घर के बाहर खरा होके रूबी के घर को देख मन मे - रूबी अब मुझे तुमपे गुस्सा नही आता बल्कि तेरा सुक्रिया उस दिन वो सब नही होता तो आज मे जो हु नही होता आज मे मुरिम दुनिया का लॉर्ड हु इस दुनिया मे भी मे सब से जायदा पावर फुल हु मेरी दोनो बीवी rin aria के सामने तुम क्या इस दुनिया की कोई भी लरकी औरत ठीक नही सकती खूबसूरती मे पावर मे तो भूल ही जाओ

तभी घर से विराज का दोस्त रूबी का भाई दीपक बाहर आता है विराज को देख दीपक हैरान कंफ्यूज होता है लेकिन गोर से देखने के बाद दीपक और हैरान शोक होके विराज के पास आके - मेरे दोस्त विराज तुम ही हो ना

विराज दीपक को देख मुस्कुराते हुवे - हा कैसा हो दीपक
दोनो गले मिलते है

दीपक विराज को गोर से देखते हुवे - यार एक साल मे तु कितना बदल गया है यकीन नही होता इतना हैंडसम मस्त बॉडी सच केह रहा हु लरकिया तुझे देख दीवानी हो जायेगी

विराज मन मे - अभी तो आधे रूप मे ही हु मुरिम दुनिया मे एक पे एक लरकिया ऑन्टी मेरे पीछे थी लेकिन मेरी दोनो बीबियाँ किसी को आने ही नही देती है भगा देती है

विराज हस्ते हुवे - क्या यार बता क्या चल रहा है
दीपक - यार तु था नही रूबी की सादी हो गई जीजा रूबी आये है चल मिलवाता हु

विराज मुस्कुराते हुवे - ठीक है चल
विराज दीपक के पीछे घर के अंदर जाते हुवे मन मे - हा मुझे पता है दीदी ने बताया था

विराज एक कमरे मे जाता है रूबी उसका पति बैठे थे रूबी जैसे ही विराज को देखती है पूरी शोक मे चली जाती है

विराज मुस्कुराते हुवे रूबी को देख - कैसी है मेरी दोस्त रूबी
रूबी होस मे आके विराज को देख - विराज तुम हो कितना बदल गये हो
विराज मुस्कुराते हुवे - वक़्त हालत बदलने पे मजबूर कर देते है ना बदलो तो आप उसी मे खो के रह जाओगे

रूबी विराज की बात समझ गई थी लेकिन बात घुमाते हुवे अपने पति को देख - ये है मेरे पति अशोक एक xxx कपनी के सुपरवाइज़र 30000 महिना है

विराज हैरान शोक मे - क्या सच्ची मे
रूबी मुस्कुराते हुवे - हा अगर तुम्हे कोई काम चाहिये बोलना मे लगवा डुगी इनसे बोलके मेरे दोस्त हो इतना कर ही सकती हु

विराज - सुक्रिया सुक्रिया मेरे लिये बहोत अच्छा होगा
रूबी मन मे - हु भिखारी अच्छा हुआ तुझे छोर दिया कोन लरकी एक भिखारी से सादी करेगी

विराज रूबी को देख मन मे - कमीनी बरी आई रोब दिखा रही है 30000 हजार मेरी दोनो बीवी ने जो गेहने पहने है ना इसकी कीमत का दूर दूर तक अंदाज़ा तु लगा नही पायेगी अरे कपड़े का ही लगा नही पायेगी

विराज अशोक को देख - मेरी दोस्त बहोत अच्छी है ख्याल रखना नही रखा तो उर् जायेगी
अशोक हैरान कंफ्यूज मे - मतलब
विराज रूबी को देख मुस्कुराते हुवे - मलतब खुश रखेगी फिर भी आपको
अशोक - अच्छा
रूबी मन मे - कमीना आया कियु है एक बात तो है इस एक साल मे बहोत जायदा हैंडसम हो गया है बॉडी भी मस्त है लेकिन क्या फायदा गरीब का गरीब ही रहेगा.

विराज दीपक को देख - चल घूम के आते है
दीपक अशोक को देख - जीजा चलेंगे
अशोक - हा ठीक है
विराज एक बार रूबी को देखता है फिर तीनो निकल परते है

रूबी अकेली मन मे - एक बार भी मुझे कुछ बोला ना गुस्सा क्या ना सवाल क्या पर कियु जब विराज ने मुझे किसी और के साथ देख लिया था तब उसे गुस्सा होना चाहिये था मुझे गाली या कुछ तो बोलता ही पर नही उसने एक शब्द नही कहे यही बात हजम नही हो रही


विराज दीपक अशोक को लेके जाता है खुब खिलता पिलाता है और घर छोर भी देता है उसके बाद साम विराज अपने घर नशे मे आता है लेकिन अंदर जाने दे पहले नसा गायब कर नॉर्मल होके अंदर जाता है

आगन मे बच्चे खेल रहे थे शिवानी खाना बना रही थी और माला रमन बैठे बाते कर रहे थे

रमन विराज को देख हैरान होके -माला हमारा बेटा तो सही मे बदल गया है कितना हैंडसम हो गया है बॉडी भी मस्त बना ली है

माला विराज को देख मुस्कुराते हुवे - मेने कहा था ना
रमन - हु देख रहा हु
. विराज रमन के गले लग - पापा
रमन विराज के पीठ थप् थापते हुवे - सबास् मेरे सेर तूने इस बार उमीद नही तोरी
शिवानी - पापा अब छोटा बदल गया है

बाते मस्ती करते विराज अपनी झूठी कहानी सब को बताने लगता है एक साल कैसे क्या क्या फिर खाना खाने बैठ जाते है

विराज - मा मे सोच रहा हु पक्के का घर बनवाना सुरु कर दु
रमन माला शिवानी हैरान शोक मे - क्या
माला - बेटा नया पक्के का घर बनाने मे बहोत खर्च आता है
विराज - मा जनता हु लेकिन आपने लाल ने इतना पैसे कमा लिये है की घर का आधा काम हो सकता है मुझे फिर जाना होगा 2 साल और काम करूँगा उसके बाद हमारे पास सब होगा

रमन हैरान - अच्छा समझ गया तेरी किस्मत अच्छी थी बरी कपनी मे काम मिल गया और बेटा तूने भी बहोत मेहनत की है इसी लिये इतना अच्छा पैसा मिलता है

विराज - जी पापा

विराज मे झूठी कहानी बना के सब को पहले ही पता दिया था ताकि जब आये तो सब जायदा सवाल ना पूछे

विराज ने बताया सब को वो एक बरी कपनी मे काम के लिये गया जो ब्रांड कपड़े बनाती है उसने जल्दी मशीन चलाना सिख लिया अब उसकी सेलरी लाख है यही कहानी विराज सभी को बताते आया है इस लिये सब जायदा सवाल नही किये

माला - ठीक है बेटा जैसा तुम चाहो
शिवानी - वाह भाई मेरा अब एक लाख महिना कमाता है मा इस गाव मे कोई नही होगा जो छोटे जितना पैसा कमाता होगा हा कुछ लोग को छोर के
माला खुशी से - मेरे लाल तूने हमारी इज़त रख ली आस पास के लोग बोलते थे तेरा बेटा घूमता रहता है कुछ नही करता लेकिन अब सब की बोलती बंद हो जायेगी

विराज सब को खुश देख मन मे - सुक्रिया god एक मोक्का देने के लिये

खाना बाते होने के बाद सभी अपने कमरे मे चले जाते है विराज बिस्तर पे लेता अपनी बीवी को कब कैसे सब से मिलाये यही सोच रहा था 25 मिनट बाद शिवानी बच्चो को सुला के आती है और बैठ जाती है विराज भी बैठ जाता है

विराज - दीदी आदि आशी के कपड़े कैसे लगे अच्छे तो है ना
शिवानी विराज को देख - बहोत खूबसूरत अच्छे है
विराज - और आपके लिये लाया था वो
शिवानी थोरा सर्मा जाती है कियुंकी विराज सारी सूट के साथ बिकनी पैंटी भी लाया था

शिवानी - बहोत अच्छे है मुझे पसंद आया

शिवानी मन मे - कोई भाई बहन के लिये बिकनी पैंटी भी लाता है क्या लेकिन एक बात तो है सारी सूट और बिकनी पैंटी बहोत अच्छे मेहगे है मेने बिकनी पैंटी पहन के भी देखती बहोत सॉफ्ट नर्म है

विराज - जान कर अच्छा लगा
शिवानी विराज की तरफ आराम से बैठ - अच्छा तूने बोला था मुझसे तुझे कुछ चाहिये तु बदल गया मेने मा पापा ने देख लिया अब बारी मेरी है अपने वादे पुरे करने की बोल क्या चाहिये दे सकी तो जरुर दूंगी

विराज मन मे - क्या करू बोल दु या अभी नही लेकिन डर लग रहा है लेकिन बोल ही देता हु आगे देरी करी तो भी वही होगा जो अभी होगा

विराज शिवानी को देख हिम्मत करके - दीदी मुझे आपके साथ वो करना है जो जीजा जी करते है कि को

शिवानी - फिर से बोल क्या बोला तूने
शिवानी ने सब अच्छे से सुना था पर यकीन नही कर पा रही थी
विराज डरते हुवे फिर वही बात बोलता है उसके तुरंत ही कई थप्पर विराज के गाल पे परने लगते है

शिवानी गुस्से से लाल हो चुकी थी शिवानी गुस्से से जोर से बोलने वाली थी लेकिन फिर समझ आता है जोर से बोलेगी तो मा पापा सुन लेके इस लिये आवाज धीरे लेकिन गुस्से से विराज को देख

शिवानी - तूने क्या बोला पता भी है छि तु अपनी बहन मेरे साथ तेरे दिमाग मे मेरे लिये ये सब था छि छि छोटे पहले तु नाकारा था लेकिन अब जब बदला तो तो और भी नीच गिरा बन गया है कैसे भाई कैसे मेरे साथ छि भाई छि मुझे अब तुमसे नफरत हो गई है घिन आ रही है कहा मे खुश थी मेरा भाई सुधर गया कमा रहा है नाम रोसन् कर रहा है लेकिन तूने मा पापा को पता चलेगा तो

विराज गाल पे हाथ रखे नजरे नीचे किये - माफ करदो दीदी
शिवानी गुस्से से - कैसे माफ कर दु समझ नही आता कब से बता, शिवानी पुरे गुस्से से विराज के कान जोर से खीचते हुवे - कब से मेरे बारे मे गंदी सोच रख रहा था बता एक भाई के अंदर अपनी बहन के लिये गंदी सोच कब से कैसे आई मे भी तो जानु बता जल्दी

विराज डरते हुवे रों देता है आखो से आसु निकल आते है शिवानी विराज को रोता देख सांत हो जाती है और विराज का कान छोर देती है लेकिन गुस्सा नही गया था

विराज आसु बहाते हुवे - मे किसी से प्यार करता था
शिवानी शोक मे विराज को देखती है फिर कुछ सोचने के बाद - कही वो रूबी तो नही

अब विराज शोक होके शिवानी को देखता है

शिवानी विराज को शोक देख सर पकर - कई बार सक हुआ मुझे
शिवानी विराज को मारते हुवे, तुझे उस कमीनी के अलावा कोई नही मिला एक बार बता तो देता मे वही तुझे रोक देती अरे रूबी एक नंबर की छि.. है मे अच्छे से जानती हु पर तुझे दिखाई नही दिया

विराज मार खाता रहता है पर घंटा विराज को कोई फर्क पर रहा था

शिवानी - आगे भी बोल

विराज नजरे नीचे किये - उस दिन मेने रूबी को किसी और के साथ देख लिया मुझे बहोत बरा झटका लगा दिल टूट गया तब समझ मे आया मे किस लरकी के लिये अपनो की उमीद भरोसे तो तोर दिल दुखा रहा था बस उसी दिन मेने अपने आप को बदलने का जो भरोसा उमीद आप लोगो की तोरी उसे पाने का फैसला लिया

शिवानी हैरान शोक से सब सुन के - आगे जो मे जानना चाहती हु

विराज - आपकी सादी के एक महीने पहले रात को मे सुसु करने बाहर निकला तो आपके कमरे से अजीब आवाजे सुनाई दी पास गया तो और अजीब आवाजे सुनाई दी मे रोक नही पाया और दरवाजे के छेद से देखा आप उसी के बाद से

शिवानी मुह पे हाथ रख शोक विराज को देख गुस्से से - फिर भी दीदी हु तेरी कैसे
विराज रोते हुवे - माफ कर दो दीदी मेने उसके बाद कभी आपको लेके गंदे विचार नही आये लेकिन जब मेने कहा मे बदलना चाहता हु और आपसे कुछ चाहिये अपने कहा बस मे होगा दूंगी तो उस वक़्त फिर गंदे विचार आ गये

शिवानी को शोक पे शोक मिल रहे थे

शिवानी - डर नही लगा सोचा नही उसका अंजाम
विराज - सोचा पता था आप गुस्सा करेगी मारेगी नफरत करेगी लेकिन ये अच्छे से जनता था आप मा पापा को नही बतायेगी और आप मुझे माफ भी कर देगी कियुंकी आप मुझे बहोत प्यार करती है इस लिये हिम्मत ही

शिवानी शोक मे - प्यार का इतना गलत फायदा उठाने की सोची

विराज शिवानी के दोनो हाथ पकर आसु लिये शिवानी को देख - जनता हु आज आपका दिल बहोत दुखाया दीदी माफ कर दो प्लेस

शिवानी सांत होके विराज को देख - छोटे समझती हु तेरी उमर हो गई है फिर भी मे तेरी बहन हु सोचना भी पाप है

विराज - जनता हु गलती हो गई दीदी आप बहोत खूबसूरत है जब आपको देखता था सोचता था काश आप मेरी दीदी नही होती कियुंकी आप जितनी खूबसूरत है उतनी ही दिल की अच्छी साफ भी आपकी जैसी बीवी हर कोई पाना चाहेगी बस यही एक चीज खलती थी सोचता था काश आपकी जैसी कोई मुझे मिले पर मेरी दीदी जैसी कोई है ही नही जीजा जी से जलन होती है कभी कभी दीदी मानता हु गलत हु बस मेरी एक चाहत थी जो मेने आपको बताई लेकिन वादा करता हु अभी आप जो बोलोगी करूँगा बस माफ कर दो अपने बेवकूफ भाई को

विराज की ये लाइन बाते शिवानी का पूरा गुस्सा गायब कर देती है

शिवानी विराज को देखती रहती है फिर बिस्तर पे लेत जाती है और अपने चेहरे पे चादर डाल के - ठीक है कर ले पहली बार तूने कुछ मंगा है भले ही गलत है जल्दी से कर ले मे नही चाहती मा पापा को पता चले

विराज हैरान शिवानी को देखता है फिर जल्दी से कपड़े निकाल नँगा होके शिवानी को देख मन मे - एक मोक्का मिला है आज दीदी को एहसास कराऊंगा असली चुदाई किसे कहते है भले आगे फिर मोक्का ना मिले लेकिन आप ये रात पूरी जिंदगी कभी भूल नही पायेगी


आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏
Superb update bro
 

vikidata

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chapter 14

विराज आ गया था घर एक साल विराज एक महीने मुरिम तो एक महीने अपनी दुनिया मे अपनी दोनो बीवी के साथ खूब मजे किये rin aria को भी बहोत मजा आया और पिर्थ्वी पे लोग कैसे है कैसे जीते है सब जान समझ लिया था

विराज अपनी मा दीदी के सामने खरा था माला शिवानी विराज को देख हैरान शोक थे विराज अपनी मा दीदी को

एक साल दूर रहने का फायदा विराज ने अच्छे से उठाया अपनी बॉडी हैंडसम नेस को बहोत बढ़ा लिया था यही देख माला शिवानी हैरान शोक विराज को देख रहे थे सोच रहे थे सामने वाला विराज ही है ना

विराज भी माला शिवानी को देख हैरान था एक साल मे माला पहले से और गोरी खूबसूरत हॉट मस्त फिगर वाली बन गई थी

वही शिवानी भी एक साल मे और खूबसूरत हो गई थी पहले थोरि पतली थी अब भरा बदन मस्त फिगर वाली बन गई थी

माला विराज के पास आके विराज के गाल पे हाथ रखते हुवे विराज को देख - तुम मेरे बेटे ही हो ना
विराज माला के गाल पे हाथ रखते हुवे - आप मेरी मा ही हो ना
माला विराज के गाल पे मारते हुवे - नालायक मे तेरी मा ही हु एक साल मे ही अपनी मा को पहचान नही रहा
विराज हस्ते हुवे - यही बात तो मे आपसे भी केह सकता हु
माला मुस्कुराते हुवे विराज को उपर से नीचे तक देखते हुवे - तुम पहले से बहोत ही जायदा हैंडसम हो गये हो बॉडी भी मस्त बना ली है इस लिये पहचान नही पाई

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विराज भी सेम माला को उपर से नीचे तक अच्छे से देखते हुवे मुस्कुरा के - मा आप भी तो पहले से बहोत खूबसूरत हॉट हो गई है इस लिये मे भी आपको देख हैरान हो गया
माला हैरान मुह पे हाथ रख विराज को देख सर्मा के - बेसर्म मा को हॉट बोलता है

माला फिर विराज को गले लगा के - बहोत मिस क्या बेटा तुझे
विराज भी अपनी मा के गले लगे - मेने भी मा
तभी बीच मे शिवानी आते हुवे विराज को देख - मुझे भूल गया मे भी हु यहा

विराज शिवानी को देख - आप बिल्कुल नही बदली वैसी ही है
शिवानी हैरान शोक मे - क्या मा खूबसूरत लगी मा की तारीफ की मेरा क्या हा

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विराज हस्ते हुवे शिवानी को उपर से नीचे तक देखते हुवे - दीदी आप भी पहले से बहोत खूबसूरत हॉट हो गई है सच केह रहा हु
शिवानी सर्मा के - हा हा पता है मे तो बस पूछ लिया

विराज शिवानी के गले लग - दीदी आपको बहोत मिस करता था
शिवानी विराज के गले लगे हुवे - छोटे मेने भी बहोत मिस किया

तभी आदि आशी विराज के पास आके विराज को देख - मामू मामू बोलने लगते है
माला शिवानी मुस्कुराते हुवे देखने लगते है विराज अपनी भांजी भांजे को देख बहोत खुश होता है फिर दोनो को गोद मे उठा के प्यार करते हुवे - वो मेरा बच्चा देखो मे आ गया और तुम दोनो के लिये बहोत सारी कॉकलेट खिलौने भी लाया हु

आदि - मामू कॉकलेट चाहिये
विराज मुस्कुराते हुवे - हा जरूर दूंगा बहोत सारी

आशी प्यारी तोतली आवाज मे - मामू खिलौने
विराज आशी के गाल मे पप्पी करते हुवे - जरूर दूंगा मेरी प्यारी गुरिया

शिवानी - दोनो तुझे बहोत मिस करते थे मामू मामू कहते रहते थे
माला - आदि तो तुझे ढूंढता रहता था अच्छा चल नहा ले दिमाग फ्रेस् हो जायेगा लम्बा सफर करके आया है

विराज दो बरे बैग उठा के - जी मा

विराज फिर नहाता खाता है उसके बाद फिर एक कमरे मे बैठ बात सुरु होती है

माला विराज को देख इमोसनल होके - आज मे बहोत खुश हु बेटा ये देख मेरा लाल बदल गया मेरे टूटे उमीद भरोसे मे तु खरा उतरा

शिवानी - छोटे मे भी तेरे लिये खुश भी देर सवेर ही सही मेरा भाई अब संभल गया है

विराज अपनी मा दीदी को देख - मा दीदी मुझे भी खुशी मिली है पहले मेने सब का दिल दुखाया था उसके लिये माफ करना

माला शिवानी मुस्कुराते हुवे - भूल जा पहले का सब

विराज खरा होके बरे बैग से छोटा बैग निकालता है जिसमे माला शिवानी रमन आदि आशी के लिये कपड़े थे

विराज माला को दो बैग देते हुवे - मा एक मे आपके लिये कपड़े है दूसरे मे पापा के लिये, विराज शिवानी को दो बैग देते हुवे, दीदी एक मे आपके कपड़े दूसरे मे आदि आशी के कपड़े खिलौने है

शिवानी तो खुशी खुशी बैग लेके - क्या बात है छोटे मेरे लिये नये कपड़े आराम से देखुंगी कैसे कपड़े लाया है अपनी दीदी के लिये और अपनी भांजी भांजे के लिये

विराज - हा आराम से देख लेना

माला - मे भी लेख लुंगी मेरा लाल पहली बार मेरे लिये कुछ लाया है मे बहोत खुश हु

विराज - अच्छा मा दीदी मे घुमने जा रहा हु साम तक आ जाऊंगा
माला - ठीक है जल्दी आ जाना

विराज घर से बाहर निकल - चलो पुरानी यादे ताजा कर लेते है

विराज अपने गाव घुमने लगता है और घूमते घूमते अपने दोस्त यानी रूबी के घर के बाहर खरा होके रूबी के घर को देख मन मे - रूबी अब मुझे तुमपे गुस्सा नही आता बल्कि तेरा सुक्रिया उस दिन वो सब नही होता तो आज मे जो हु नही होता आज मे मुरिम दुनिया का लॉर्ड हु इस दुनिया मे भी मे सब से जायदा पावर फुल हु मेरी दोनो बीवी rin aria के सामने तुम क्या इस दुनिया की कोई भी लरकी औरत ठीक नही सकती खूबसूरती मे पावर मे तो भूल ही जाओ

तभी घर से विराज का दोस्त रूबी का भाई दीपक बाहर आता है विराज को देख दीपक हैरान कंफ्यूज होता है लेकिन गोर से देखने के बाद दीपक और हैरान शोक होके विराज के पास आके - मेरे दोस्त विराज तुम ही हो ना

विराज दीपक को देख मुस्कुराते हुवे - हा कैसा हो दीपक
दोनो गले मिलते है

दीपक विराज को गोर से देखते हुवे - यार एक साल मे तु कितना बदल गया है यकीन नही होता इतना हैंडसम मस्त बॉडी सच केह रहा हु लरकिया तुझे देख दीवानी हो जायेगी

विराज मन मे - अभी तो आधे रूप मे ही हु मुरिम दुनिया मे एक पे एक लरकिया ऑन्टी मेरे पीछे थी लेकिन मेरी दोनो बीबियाँ किसी को आने ही नही देती है भगा देती है

विराज हस्ते हुवे - क्या यार बता क्या चल रहा है
दीपक - यार तु था नही रूबी की सादी हो गई जीजा रूबी आये है चल मिलवाता हु

विराज मुस्कुराते हुवे - ठीक है चल
विराज दीपक के पीछे घर के अंदर जाते हुवे मन मे - हा मुझे पता है दीदी ने बताया था

विराज एक कमरे मे जाता है रूबी उसका पति बैठे थे रूबी जैसे ही विराज को देखती है पूरी शोक मे चली जाती है

विराज मुस्कुराते हुवे रूबी को देख - कैसी है मेरी दोस्त रूबी
रूबी होस मे आके विराज को देख - विराज तुम हो कितना बदल गये हो
विराज मुस्कुराते हुवे - वक़्त हालत बदलने पे मजबूर कर देते है ना बदलो तो आप उसी मे खो के रह जाओगे

रूबी विराज की बात समझ गई थी लेकिन बात घुमाते हुवे अपने पति को देख - ये है मेरे पति अशोक एक xxx कपनी के सुपरवाइज़र 30000 महिना है

विराज हैरान शोक मे - क्या सच्ची मे
रूबी मुस्कुराते हुवे - हा अगर तुम्हे कोई काम चाहिये बोलना मे लगवा डुगी इनसे बोलके मेरे दोस्त हो इतना कर ही सकती हु

विराज - सुक्रिया सुक्रिया मेरे लिये बहोत अच्छा होगा
रूबी मन मे - हु भिखारी अच्छा हुआ तुझे छोर दिया कोन लरकी एक भिखारी से सादी करेगी

विराज रूबी को देख मन मे - कमीनी बरी आई रोब दिखा रही है 30000 हजार मेरी दोनो बीवी ने जो गेहने पहने है ना इसकी कीमत का दूर दूर तक अंदाज़ा तु लगा नही पायेगी अरे कपड़े का ही लगा नही पायेगी

विराज अशोक को देख - मेरी दोस्त बहोत अच्छी है ख्याल रखना नही रखा तो उर् जायेगी
अशोक हैरान कंफ्यूज मे - मतलब
विराज रूबी को देख मुस्कुराते हुवे - मलतब खुश रखेगी फिर भी आपको
अशोक - अच्छा
रूबी मन मे - कमीना आया कियु है एक बात तो है इस एक साल मे बहोत जायदा हैंडसम हो गया है बॉडी भी मस्त है लेकिन क्या फायदा गरीब का गरीब ही रहेगा.

विराज दीपक को देख - चल घूम के आते है
दीपक अशोक को देख - जीजा चलेंगे
अशोक - हा ठीक है
विराज एक बार रूबी को देखता है फिर तीनो निकल परते है

रूबी अकेली मन मे - एक बार भी मुझे कुछ बोला ना गुस्सा क्या ना सवाल क्या पर कियु जब विराज ने मुझे किसी और के साथ देख लिया था तब उसे गुस्सा होना चाहिये था मुझे गाली या कुछ तो बोलता ही पर नही उसने एक शब्द नही कहे यही बात हजम नही हो रही


विराज दीपक अशोक को लेके जाता है खुब खिलता पिलाता है और घर छोर भी देता है उसके बाद साम विराज अपने घर नशे मे आता है लेकिन अंदर जाने दे पहले नसा गायब कर नॉर्मल होके अंदर जाता है

आगन मे बच्चे खेल रहे थे शिवानी खाना बना रही थी और माला रमन बैठे बाते कर रहे थे

रमन विराज को देख हैरान होके -माला हमारा बेटा तो सही मे बदल गया है कितना हैंडसम हो गया है बॉडी भी मस्त बना ली है

माला विराज को देख मुस्कुराते हुवे - मेने कहा था ना
रमन - हु देख रहा हु
. विराज रमन के गले लग - पापा
रमन विराज के पीठ थप् थापते हुवे - सबास् मेरे सेर तूने इस बार उमीद नही तोरी
शिवानी - पापा अब छोटा बदल गया है

बाते मस्ती करते विराज अपनी झूठी कहानी सब को बताने लगता है एक साल कैसे क्या क्या फिर खाना खाने बैठ जाते है

विराज - मा मे सोच रहा हु पक्के का घर बनवाना सुरु कर दु
रमन माला शिवानी हैरान शोक मे - क्या
माला - बेटा नया पक्के का घर बनाने मे बहोत खर्च आता है
विराज - मा जनता हु लेकिन आपने लाल ने इतना पैसे कमा लिये है की घर का आधा काम हो सकता है मुझे फिर जाना होगा 2 साल और काम करूँगा उसके बाद हमारे पास सब होगा

रमन हैरान - अच्छा समझ गया तेरी किस्मत अच्छी थी बरी कपनी मे काम मिल गया और बेटा तूने भी बहोत मेहनत की है इसी लिये इतना अच्छा पैसा मिलता है

विराज - जी पापा

विराज मे झूठी कहानी बना के सब को पहले ही पता दिया था ताकि जब आये तो सब जायदा सवाल ना पूछे

विराज ने बताया सब को वो एक बरी कपनी मे काम के लिये गया जो ब्रांड कपड़े बनाती है उसने जल्दी मशीन चलाना सिख लिया अब उसकी सेलरी लाख है यही कहानी विराज सभी को बताते आया है इस लिये सब जायदा सवाल नही किये

माला - ठीक है बेटा जैसा तुम चाहो
शिवानी - वाह भाई मेरा अब एक लाख महिना कमाता है मा इस गाव मे कोई नही होगा जो छोटे जितना पैसा कमाता होगा हा कुछ लोग को छोर के
माला खुशी से - मेरे लाल तूने हमारी इज़त रख ली आस पास के लोग बोलते थे तेरा बेटा घूमता रहता है कुछ नही करता लेकिन अब सब की बोलती बंद हो जायेगी

विराज सब को खुश देख मन मे - सुक्रिया god एक मोक्का देने के लिये

खाना बाते होने के बाद सभी अपने कमरे मे चले जाते है विराज बिस्तर पे लेता अपनी बीवी को कब कैसे सब से मिलाये यही सोच रहा था 25 मिनट बाद शिवानी बच्चो को सुला के आती है और बैठ जाती है विराज भी बैठ जाता है

विराज - दीदी आदि आशी के कपड़े कैसे लगे अच्छे तो है ना
शिवानी विराज को देख - बहोत खूबसूरत अच्छे है
विराज - और आपके लिये लाया था वो
शिवानी थोरा सर्मा जाती है कियुंकी विराज सारी सूट के साथ बिकनी पैंटी भी लाया था

शिवानी - बहोत अच्छे है मुझे पसंद आया

शिवानी मन मे - कोई भाई बहन के लिये बिकनी पैंटी भी लाता है क्या लेकिन एक बात तो है सारी सूट और बिकनी पैंटी बहोत अच्छे मेहगे है मेने बिकनी पैंटी पहन के भी देखती बहोत सॉफ्ट नर्म है

विराज - जान कर अच्छा लगा
शिवानी विराज की तरफ आराम से बैठ - अच्छा तूने बोला था मुझसे तुझे कुछ चाहिये तु बदल गया मेने मा पापा ने देख लिया अब बारी मेरी है अपने वादे पुरे करने की बोल क्या चाहिये दे सकी तो जरुर दूंगी

विराज मन मे - क्या करू बोल दु या अभी नही लेकिन डर लग रहा है लेकिन बोल ही देता हु आगे देरी करी तो भी वही होगा जो अभी होगा

विराज शिवानी को देख हिम्मत करके - दीदी मुझे आपके साथ वो करना है जो जीजा जी करते है कि को

शिवानी - फिर से बोल क्या बोला तूने
शिवानी ने सब अच्छे से सुना था पर यकीन नही कर पा रही थी
विराज डरते हुवे फिर वही बात बोलता है उसके तुरंत ही कई थप्पर विराज के गाल पे परने लगते है

शिवानी गुस्से से लाल हो चुकी थी शिवानी गुस्से से जोर से बोलने वाली थी लेकिन फिर समझ आता है जोर से बोलेगी तो मा पापा सुन लेके इस लिये आवाज धीरे लेकिन गुस्से से विराज को देख

शिवानी - तूने क्या बोला पता भी है छि तु अपनी बहन मेरे साथ तेरे दिमाग मे मेरे लिये ये सब था छि छि छोटे पहले तु नाकारा था लेकिन अब जब बदला तो तो और भी नीच गिरा बन गया है कैसे भाई कैसे मेरे साथ छि भाई छि मुझे अब तुमसे नफरत हो गई है घिन आ रही है कहा मे खुश थी मेरा भाई सुधर गया कमा रहा है नाम रोसन् कर रहा है लेकिन तूने मा पापा को पता चलेगा तो

विराज गाल पे हाथ रखे नजरे नीचे किये - माफ करदो दीदी
शिवानी गुस्से से - कैसे माफ कर दु समझ नही आता कब से बता, शिवानी पुरे गुस्से से विराज के कान जोर से खीचते हुवे - कब से मेरे बारे मे गंदी सोच रख रहा था बता एक भाई के अंदर अपनी बहन के लिये गंदी सोच कब से कैसे आई मे भी तो जानु बता जल्दी

विराज डरते हुवे रों देता है आखो से आसु निकल आते है शिवानी विराज को रोता देख सांत हो जाती है और विराज का कान छोर देती है लेकिन गुस्सा नही गया था

विराज आसु बहाते हुवे - मे किसी से प्यार करता था
शिवानी शोक मे विराज को देखती है फिर कुछ सोचने के बाद - कही वो रूबी तो नही

अब विराज शोक होके शिवानी को देखता है

शिवानी विराज को शोक देख सर पकर - कई बार सक हुआ मुझे
शिवानी विराज को मारते हुवे, तुझे उस कमीनी के अलावा कोई नही मिला एक बार बता तो देता मे वही तुझे रोक देती अरे रूबी एक नंबर की छि.. है मे अच्छे से जानती हु पर तुझे दिखाई नही दिया

विराज मार खाता रहता है पर घंटा विराज को कोई फर्क पर रहा था

शिवानी - आगे भी बोल

विराज नजरे नीचे किये - उस दिन मेने रूबी को किसी और के साथ देख लिया मुझे बहोत बरा झटका लगा दिल टूट गया तब समझ मे आया मे किस लरकी के लिये अपनो की उमीद भरोसे तो तोर दिल दुखा रहा था बस उसी दिन मेने अपने आप को बदलने का जो भरोसा उमीद आप लोगो की तोरी उसे पाने का फैसला लिया

शिवानी हैरान शोक से सब सुन के - आगे जो मे जानना चाहती हु

विराज - आपकी सादी के एक महीने पहले रात को मे सुसु करने बाहर निकला तो आपके कमरे से अजीब आवाजे सुनाई दी पास गया तो और अजीब आवाजे सुनाई दी मे रोक नही पाया और दरवाजे के छेद से देखा आप उसी के बाद से

शिवानी मुह पे हाथ रख शोक विराज को देख गुस्से से - फिर भी दीदी हु तेरी कैसे
विराज रोते हुवे - माफ कर दो दीदी मेने उसके बाद कभी आपको लेके गंदे विचार नही आये लेकिन जब मेने कहा मे बदलना चाहता हु और आपसे कुछ चाहिये अपने कहा बस मे होगा दूंगी तो उस वक़्त फिर गंदे विचार आ गये

शिवानी को शोक पे शोक मिल रहे थे

शिवानी - डर नही लगा सोचा नही उसका अंजाम
विराज - सोचा पता था आप गुस्सा करेगी मारेगी नफरत करेगी लेकिन ये अच्छे से जनता था आप मा पापा को नही बतायेगी और आप मुझे माफ भी कर देगी कियुंकी आप मुझे बहोत प्यार करती है इस लिये हिम्मत ही

शिवानी शोक मे - प्यार का इतना गलत फायदा उठाने की सोची

विराज शिवानी के दोनो हाथ पकर आसु लिये शिवानी को देख - जनता हु आज आपका दिल बहोत दुखाया दीदी माफ कर दो प्लेस

शिवानी सांत होके विराज को देख - छोटे समझती हु तेरी उमर हो गई है फिर भी मे तेरी बहन हु सोचना भी पाप है

विराज - जनता हु गलती हो गई दीदी आप बहोत खूबसूरत है जब आपको देखता था सोचता था काश आप मेरी दीदी नही होती कियुंकी आप जितनी खूबसूरत है उतनी ही दिल की अच्छी साफ भी आपकी जैसी बीवी हर कोई पाना चाहेगी बस यही एक चीज खलती थी सोचता था काश आपकी जैसी कोई मुझे मिले पर मेरी दीदी जैसी कोई है ही नही जीजा जी से जलन होती है कभी कभी दीदी मानता हु गलत हु बस मेरी एक चाहत थी जो मेने आपको बताई लेकिन वादा करता हु अभी आप जो बोलोगी करूँगा बस माफ कर दो अपने बेवकूफ भाई को

विराज की ये लाइन बाते शिवानी का पूरा गुस्सा गायब कर देती है

शिवानी विराज को देखती रहती है फिर बिस्तर पे लेत जाती है और अपने चेहरे पे चादर डाल के - ठीक है कर ले पहली बार तूने कुछ मंगा है भले ही गलत है जल्दी से कर ले मे नही चाहती मा पापा को पता चले

विराज हैरान शिवानी को देखता है फिर जल्दी से कपड़े निकाल नँगा होके शिवानी को देख मन मे - एक मोक्का मिला है आज दीदी को एहसास कराऊंगा असली चुदाई किसे कहते है भले आगे फिर मोक्का ना मिले लेकिन आप ये रात पूरी जिंदगी कभी भूल नही पायेगी


आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏
Super update hai bhai maja aa gaya
 
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ajay bhai

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chapter 15

आज रात विराज को जो चाहिये था मिल रहा था अपनी बरी दीदी की बुर शिवानी अपने आप को अपने भाई को शॉप दिया था ऐसा नही था शिवानी अपने भाई के साथ चुदाई करना चाहती थी या शिवानी अपने पति से खुश नही थी

शिवानी की शादी सुधा लाइफ बहोत मस्त थी विकी शिवानी के शरीर का सुख अच्छे दे रहा था पर हालत ऐसे बने की शिवानी रोक नही पाई और विराज अपने भाई की इक्छा पूरी करने के लिये मान गई

विराज जनता था उसकी बहन अपने पुरे मन से राजी नही है लेकिन विराज जायदा नही सोचता किस्मत पे छोर देता है

विराज पुरा नँगा खरा था लंड फुल करक टाइट खरा था विराज धीरे से बिस्तर पे जाता है शिवानी चादर से अपना चेहरा ढकी चुप लेती थी लेकिन मोमेंट फिल कर रही थी

विराज शिवानी को गोर से देखता है फिर धीरे से - दीदी नाइटी
शिवानी जल्दी से नाइटी निकाल पूरी नंगी टांगे फैला के अपना चेहरा हाथो से धक के फिर चुप चाप लेत जाती है

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विराज मुह खोले आखे फ़ारेअपनीi बहन की मस्त नंगी बॉडी को देखते हुवे मन मे - मा कदम क्या बवाल बॉडी है चुचे कीतने बड़े मस्त है बुर पे हल्के बाल उफ दीदी उपर से नीचे तक बवाल है

विराज मन मे - दीदी कुछ बोलेगी नही ना कुछ करेगी मुझे ही सब करना होगा

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विराज शिवानी के एक एक चुचे पकर दबाने लगता है शिवानी थोरी काप् जाती है दर्द चेहरे पे आने लगता है विराज को बहोत मजा आ रहा था टाइट नर्म फिल लेके शिवानी हल्की सिसकिया दर्द भरी लेने लगती है विराज 3 minat चुचे दबाता है

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विराज चुचे दबाने के बाद चुचे मुह मे लेके चूसने लगता है शिवानी फिर मचल जाती है सिसकिया लेने लगती है विराज मजे से चुचे दबा के चूसने लगता है चुचे से दूध विराज निकाल पी रहा था विराज मन मे - उफ दीदी के चुचे के दूध पीके मजा आ रहा है
शिवानी बस धीरे सिसकिया ले रही थी चेहरा धके लेती थी

2 मिनट मजे से दूध पीने के बाद विराज पेट ढोरी को चूमते हुवे बुर के पास टांगों के बीच बुर के फाके फैला के छेद देखते हुवे मन मे - मेरी दीदी की बुर का छेद उफ टाइट लग रही है
शिवानी मन मे - जल्दी सब खतम हो जाये

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विराज के मुह पानी आ जाता है विराज बुर को मुह मे लेके चूसने चाटने लगता है शिवानी बिस्तर कस के पकर सिसकिया लेने लगती है
विराज मन मे - आह मजा आ रहा है उफ कसम से दीदी कि बुर का स्वाद बहोत ही जायदा मस्त है उफ गर्म रस पीके मजा आ रहा है
3 mina बाद शिवानी की बुर गीली हो गई थी

अब विराज बिना देश किये शिवानी के ऊपर लेत बुर को छेद पे रख देता है शिवानी जोर से सिसकिया लेती है सासे तेज चल रही थी
शिवानी बहोत मोटा गर्म बुर के छेद पे फिल करके

विराज शिवानी को देख मन मे - दीदी चेहरा भी नही दिखा रही मुझे किस करना है ऐसे अंदर घुसाउंगा तो मेरा बरा है दर्द होगा दीदी चिलाई तो मा पापा फिर मे गया

विराज धीरे से - दीदी किस करना है
शिवानी बिना बोले चेहरे से हाथ हटा लेती है लेकिन आखे बंद किये रहती है

विराज अपनी बहन के होठ मुह मे लेके चूसने लगता है शिवानी भी सब करने लेती है मुह खोल देती है विजय किस करते धीरे से बुर पे लंड घुसाने लगता है फिर एक धक्का तुरंत दूसरा धक्का बस काम हो गया पुरा लंड शिवानी के बुर के अंदर

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शिवानी सांत फिर एकदम से पैर हाथ मारने लगती है विराज के मुह से अपने होठ हटाने लगती विराज को हाथो से दूर करने लगती है लेकिन विराज सांत किस करते हुवे शिवानी को दबाये रखता है 2 मिनट बाद

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विराज चुदाई करने लगता है विराज धीरे से - चिल्लाना मत दीदी नही तो पापा मा
शिवानी दर्द मे रोते हुवे - बहोत दर्द हो रहा है
विराज फिर किस करते हुवे चुदाई करने लगता है धीरे धीरे दर्द के साथ शिवानी को मजा आने लगता है

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30 मिनट हो गये थे अब शिवानी सब भूल चुदाई के मजे मे खो गई थी अब शिवानी विराज को बाहों मे लिये जोर से सिसकिया लेते आह उफ मा कर रही थी विराज शिवानी को बाहों मे लिये धकके मे धक्का मार रहा था 2 बार शिवानी मजे से झरी थी

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विराज शिवानी को फिर घोरी बना के चुदाई करने लगता है कोई कुछ बोल नही रहा था विराज बोलना बाते करना चाहता था लेकिन विराज जनता था उसकी दीदी नही चाहती तो चुप ही रहता है
50 मिनट हो गये थे अब शिवानी समझ गई थी असली चुदाई क्या होती है शिवानी पहली बार दर्द मे बोलती है - तेरी भांजी भांजे अकेले है जल्दी कर
विराज तेज धक्का मारते हुवे - जी
फिर 12 मिनट बाद विराज अपनी बहन के बुर मे झर जाता है

शिवानी पसीने से भीगी तेज सासे लेते हुवे जल्दी से नाइटी पहन सीधा अपने कमरे मे आके लेत जाती है बुर मे दर्द जलन लिये

विराज बिस्तर को देखता है बुर के पानी से गिला
विराज मन मे - मुझे तो पूरी रात करना था खैर मेरा सपना पुरा हुआ जो मजा सुकून मिला अपनी दीदी की गर्म बुर मारके कभी भूल नही पाऊंगा पता नही आगे फिर बुर मिलेगी या नही

विराज चादर हटा के नई चादर डाल बिस्तर पे लेत सो जाता है


सुबह होती है माला शिवानी उठ गये थे रमन भी रेडी हो गया था विराज सबसे बाद उठता है आगन् मे शिवानी को खाना बनाते देखता है

माला विराज को देख - उठ गया
विराज माला के गाल पे किस करते हुवे - जी मा
माला मुस्कुराते हुवे - जाके नहा ले
शिवानी विराज को एक नजर देखती है फिर खाना बनाने लगती है
रमन विराज के पास आते हुवे - कैसा है मेरा सेर
विराज - मस्त पापा मे बोल रहा

विराज फिर हल्का होके आता है नहाता है फिर सब खाते पीते है इसी मे 9 बज जाते है रमन माला खेत मे चले जाते है विराज माला अकेले रह जाते है

माला कमरे मे अपने बच्चो के साथ बैठी थी आदी खेल रहा था आशी को माला दूध पिला रही थी विराज आता है और माला के पास बैठ जाता है दोनो चुप थे

शिवानी आशी को दूध पिला देती है और चुचे अंदर करने लगती है तो विराज चुचे पकर लेता है फिर दबाने लगता है शिवानी सिसकिया लेने लगती है लेकिन कुछ नही बोलती तो विराज को हरि सिंगनल मिल जाता है

विराज चुचे दबाता मुह मे लेके चुस्ता पिता है फिर चुप चाप बाहर चला जाता है

विराज अब आगे क्या करना है सोचने लगता है विराज एक सांत पेर के नीचे बैठ मन मे - दीदी की लेली आगे चांस है लेकिन मा की कैसे लू बहोत डर लग रहा है सोच के ही लेकिन दीदी के साथ करने के बाद जो मजा आया मा के साथ और मजा आयेगा तो रिस्क लेना ही परेगा अब घर बनाना है हु साम को मा पापा से बाते करूँगा फिर कल से काम सुरु

दोपहर एक बज रहे थे घर मे कोई नही था विराज पीछे जाता है तो देखता है माला रमन खटिये पे बैठे थे शिवानी नीचे चटाई पे आदि आशी के साथ खेल रही थी

असल मे गर्मी का दिन था पीछे विराज के खेत मे एक बरा पीपल का पेर था उसी के नीचे सब बैठे थे

विराज सबके सामने आता है शिवानी विराज को देखती है फिर नजरे फेर लेती है

माला रमन विराज को देख - आओ बेटा बैठो
विराज माला के पास बैठ - मा पापा मेने सोचा था रात को बात करूँगा लेकिन अभी ही सही है कल से घर का काम सुरु करवा देते है पापा आपकी नजर मे कोई अच्छा ठीकेदार है तो बात करवाइये

रमन सोचते हुवे - हा एक है रामपाल
विराज - राजपाल अंकल अरे हा मे भूल हि गया था
माला - कैसा घर बनाना है सोचा है
विराज - हा दो मंजिला होगा चार नीचे कमरे 2 उपर बाकी छत की जगह रहेगी

रमन - हु अच्छा है लेकिन नया घर बनायेगा कहा
विराज जमीन को देख - इसी जमीन पे और कहा
माला - अगर ऐसा है तो सही है
शिवानी सब सुन रही थी पर चुप थी

विराज जरूरी बाते डिस्कस करता है फिर फैसला हो जाता है पूछे बरी जमीन थी जो खाली थी

विराज शिवानी को देखता है और शिवानी जब देखती है विराज को तो विराज इशारा करता है और फिर विराज घर मे आ जाता है

थोरि देर बाद शिवानी खरी होके - मा पापा मे आती हु दोनो को देखना

माला रमन - ठीक है बेटी

शिवानी कमरे मे आती है विराज पैंट नीचे कर - दीदी मुह मे लो ना
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कमाल की बात ये थी शिवानी घुटने पे आके मजे से लंड चूसने लगती है विराज खुश जोस से भर जाता है शिवानी पुरे मजे से चूस रस पीने लगती है विराज मजे से - आह दीदी बहोत मजा आ रहा है
3 मिनट बाद

विराज - दीदी लेत जाओ मुझे करना है

शिवानी बिना कुछ बोले सारी पेटीकोट उठा के टाँगे फैला के लेत धीरे से डालना
विराज सुन हैरान होता है फिर मुस्कुराते हुवे - हु
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विराज बुर के छेद पे रख धीरे से धक्का मारके पुरा घुसा देता है फिर चुदाई करने लगता है शिवानी दूसरी तरफ नजरे किये आह उफ मा करते रहती है और विराज चोदता रहता है 25 मिनट बाद

शिवानी सारी नीचे कर जाने लगती है तो विराज पीछे से शिवानी को बाहों मे भर के - दीदी जब दिल करेगा आप करने देगी ना
शिवानी - हु
विराज - आप मजा तो आता है ना
शिवानी - हु
विराज - जीजा से जायदा मजा
शिवानी - हा
विराज - तो मे समझू आप नाराज नही है
शिवानी - हु
विराज - रात को आयेगी
शिवानी - हु
विराज शिवानी को अपनी तरफ घुमा के चेहरे को पकर - ये चुपी तोर दीजिये मजा नही आता आज रात बोलना पड़ेगा
शिवानी सर्मा के - चल भाग बेसर्म

शिवानी कमरे से निकल अपने बच्चो के पास आ जाती है वही विराज खुशी से नाचने लगता है

रात 9 बजे खाना खाने के बाद

विराज के कमरे मे माला आती है दोनो बैठ बाते करने लगते है

माला - बेटा फिर कब जाने का सोचा है सच कहु मे फिर नही चाहती तु जाये
विराज माला के गोद मे सर रख - मा आगे हम अच्छे घर मे रह सके इस लिये जाना जरूरी है मे 1 साल और आपसे दूर रहूँगा उसके बाद तो इतने पैसे होगे ही की घर बन जायेगा बाकी एक मस्त कपड़े की दुकान लगा लूंगा फिर जाने की जरूर ही रही परेगी , विराज माला को देख, कियुंकी मुझे अपनी खूबसूरत मा को छोर जाना नही चाहता

माला हस्ते हुवे - बेसर्म क्या सच मे मै खूबसूरत हु
विराज मुस्कुराते हुए - बहोत खूबसूरत हॉट भी है
माला सर्मा के विराज के गाल पे धीरे से मारते हुवे - बेसर्म बेटा अच्छा ये बता तूने मुझसे कहा था कुछ चाहिये तूने जो कहा कर दिखाया बोल क्या चाहिये अब मेरी बारी वादा पुरा करने की है

विराज एकदम हैरान मन मे - सेम हो रहा है क्या करू मे
माला विराज के सर सेहलाते हुवे - बोल ना
विराज उठ कर बैठ जाता है और माला की तरफ देख एकदम से गले लगा के रोने लगता है माला हैरान होके - रो कियु रहा है

विराज रोते हुवे - मा मेने आपको लेके गंदा सोचा है
विराज की बात सुन बहोत शोक लगता है माला को

माला विराज को दूर कर - क्या केह रहा है बेटा
विराज नजरे नीचे कर रोते हुवे - मा मेने एक दिन आपको कमरे मे कपड़े बदलते देख लिया उसके बाद मेरे मन मे गंदे ख्याल आपको लेने आने लगे आपसे मे ,,,

माला और शोक होती है और समझते देर नही लगती उसका बेटा जो मांगना चाहता था वो उसकी बुर है

विराज माला के हाथ पकर - मा लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ मे जवानी की जोस मे क्या सोच रहा था क्या करने की कोसिस कर रहा था मेने गलती की है मा मुझे मारो लेकिन माफ भी कर देना

माला विराज को देखती रह जाती है कुछ मिनट बाद

माला विराज के कंधे पे हाथ रख विराज को देख - तूने अपनी गलती मान मुझे सच बताया मे समझती हु बेटा तेरी उमर हो गई है पर मा को देख गंदे ख्याल लाना गलत है लेकिन तुझे अपनी गलती का एहसास हो गया तूने सच बताया इस लिये माफ किया

विराज एकदम से माला के गले लगके - सुक्रिया मा
माला विराज के गाल पे प्यार से हाथ - अब सो जा

माला बाहर आती है अपना सर पकर मन मे - विराज की शादी करवानी होगी ये उमर होती ही ऐसी है

माला ने विराज को गलत नही समझा उमर को समझा

वही विराज ने कोई नाटक नही क्या हा विराज ने जो कहा सब सच था लेकिन विराज ने दिमाग से एक सेफ गेम खेला था विराज एक चांस लेगा विराज को लगा कुछ होगा आगे बढ़ेगा और अलग लगा कुछ नही हो सकता तो विराज पूरी तरह से पीछे हट जायेगा

विराज का पुरा इरादा तो अपनी मा की चुदाई करने का था लेकिन विराज जनता था उसका परिमान् गलत निकला तो वो अपनी मा की नजर मे हमेसा के लिये गिर जायेगा उसकी मा उसे गिरी घिन से देखेगी उसे वो प्यार नही दे पायेगी ना फिर कभी बिस्वास करेगी यही सोच विराज ने मा से सच अपनी गलती बता दी लेकिन एक कोसिस धीरे से करेगा लगा काम हो सकता है तो ठीक नही तो कभी नही

विराज का दिल हल्का हो गया था तभी शिवानी आती है

विराज शिवानी को बिस्तर पे लेता के - मुझे लगा था एक बार ही करने देगी लेकिन फिर आपने रोका नही कियु
शिवानी - एक औरत को जो चाहिये वो भरपूर मिले तो उसे वही बार बार चाहिये होता है
विराज शिवानी के नाइटी निकाल - तो जीजा जी से जायदा मजा मे देता हु

शिवानी टाँगे फैला के - हा पहली बार भाई तेरा लंड रात गया तो मुझे इतना दर्द हुआ जितना पहली बार भी नही हुआ था

विराज चुचे मुह मे लेके चूस दूध पीते हुवे - दीदी आप बहोत गजब है आपकी गर्म बुर मारने मे मजा आता है
शिवानी सिसकिया लेते हुवे - भाई धीरे उफ मुझे रात पता चला असली चुदाई किया होती है और तेरा मोटा लम्बा लंड कमाल का है सोचा नही था इतना बरा लंड भी होता है लेकिन रात उफ सुबह मजा आया

विराज शिवानी के बुर चाटने हुवे - बिस्वास नही होता आपकी बुर चाट रहा हु आप नंगी है
शिवानी - आह भाई चाट अच्छे से तेरे साथ बहोत मजा आ रहा है इतना मजा सुकून उफ

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विराज शिवानी के बुर चुदाई करते हुवे - आह दीदी बहोत मजा आ रहा है दीदी आपकी बुर बहोत टाइट गर्म है
शिवानी - आह भाई धीरे आह मा तेरा लंड बरा है भाई आह मेरी बुर आह बहोत मजा आ रहा है चोद अपनी दीदी को आह ये मजा उफ तूने मुझे नया सुख असली चुदाई का मजा दिया है

30 मिनट बाद

शिवानी तेज सासे लेते हुवे - छोटे अब जाती हु बच्चे अकेले है और हा छोटे कल तेरे जीजा आने वाले है मुझे लेने

विराज बैठे शिवानी को देख - दीदी रुक जाओ ना
शिवानी विराज के पास आके - छोटे मेरा घर अब यहा नही अपने पति के यहा है सासु ससुर घर सब अब मुझे ही देखना है

विराज मुस्कुराते हुवे - ठीक है लेकिन जल्दी आऊंगा आपके pas बुर लेने फी लेके आऊंगा तो यह भि

शिवानी मुस्कुराते हुवे - बेसर्म ठीक है गुड नाइट

आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏
 

Haiwaan

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chapter 15

आज रात विराज को जो चाहिये था मिल रहा था अपनी बरी दीदी की बुर शिवानी अपने आप को अपने भाई को शॉप दिया था ऐसा नही था शिवानी अपने भाई के साथ चुदाई करना चाहती थी या शिवानी अपने पति से खुश नही थी

शिवानी की शादी सुधा लाइफ बहोत मस्त थी विकी शिवानी के शरीर का सुख अच्छे दे रहा था पर हालत ऐसे बने की शिवानी रोक नही पाई और विराज अपने भाई की इक्छा पूरी करने के लिये मान गई

विराज जनता था उसकी बहन अपने पुरे मन से राजी नही है लेकिन विराज जायदा नही सोचता किस्मत पे छोर देता है

विराज पुरा नँगा खरा था लंड फुल करक टाइट खरा था विराज धीरे से बिस्तर पे जाता है शिवानी चादर से अपना चेहरा ढकी चुप लेती थी लेकिन मोमेंट फिल कर रही थी

विराज शिवानी को गोर से देखता है फिर धीरे से - दीदी नाइटी
शिवानी जल्दी से नाइटी निकाल पूरी नंगी टांगे फैला के अपना चेहरा हाथो से धक के फिर चुप चाप लेत जाती है

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विराज मुह खोले आखे फ़ारेअपनीi बहन की मस्त नंगी बॉडी को देखते हुवे मन मे - मा कदम क्या बवाल बॉडी है चुचे कीतने बड़े मस्त है बुर पे हल्के बाल उफ दीदी उपर से नीचे तक बवाल है

विराज मन मे - दीदी कुछ बोलेगी नही ना कुछ करेगी मुझे ही सब करना होगा

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विराज शिवानी के एक एक चुचे पकर दबाने लगता है शिवानी थोरी काप् जाती है दर्द चेहरे पे आने लगता है विराज को बहोत मजा आ रहा था टाइट नर्म फिल लेके शिवानी हल्की सिसकिया दर्द भरी लेने लगती है विराज 3 minat चुचे दबाता है

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विराज चुचे दबाने के बाद चुचे मुह मे लेके चूसने लगता है शिवानी फिर मचल जाती है सिसकिया लेने लगती है विराज मजे से चुचे दबा के चूसने लगता है चुचे से दूध विराज निकाल पी रहा था विराज मन मे - उफ दीदी के चुचे के दूध पीके मजा आ रहा है
शिवानी बस धीरे सिसकिया ले रही थी चेहरा धके लेती थी

2 मिनट मजे से दूध पीने के बाद विराज पेट ढोरी को चूमते हुवे बुर के पास टांगों के बीच बुर के फाके फैला के छेद देखते हुवे मन मे - मेरी दीदी की बुर का छेद उफ टाइट लग रही है
शिवानी मन मे - जल्दी सब खतम हो जाये

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विराज के मुह पानी आ जाता है विराज बुर को मुह मे लेके चूसने चाटने लगता है शिवानी बिस्तर कस के पकर सिसकिया लेने लगती है
विराज मन मे - आह मजा आ रहा है उफ कसम से दीदी कि बुर का स्वाद बहोत ही जायदा मस्त है उफ गर्म रस पीके मजा आ रहा है
3 mina बाद शिवानी की बुर गीली हो गई थी

अब विराज बिना देश किये शिवानी के ऊपर लेत बुर को छेद पे रख देता है शिवानी जोर से सिसकिया लेती है सासे तेज चल रही थी
शिवानी बहोत मोटा गर्म बुर के छेद पे फिल करके

विराज शिवानी को देख मन मे - दीदी चेहरा भी नही दिखा रही मुझे किस करना है ऐसे अंदर घुसाउंगा तो मेरा बरा है दर्द होगा दीदी चिलाई तो मा पापा फिर मे गया

विराज धीरे से - दीदी किस करना है
शिवानी बिना बोले चेहरे से हाथ हटा लेती है लेकिन आखे बंद किये रहती है

विराज अपनी बहन के होठ मुह मे लेके चूसने लगता है शिवानी भी सब करने लेती है मुह खोल देती है विजय किस करते धीरे से बुर पे लंड घुसाने लगता है फिर एक धक्का तुरंत दूसरा धक्का बस काम हो गया पुरा लंड शिवानी के बुर के अंदर

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शिवानी सांत फिर एकदम से पैर हाथ मारने लगती है विराज के मुह से अपने होठ हटाने लगती विराज को हाथो से दूर करने लगती है लेकिन विराज सांत किस करते हुवे शिवानी को दबाये रखता है 2 मिनट बाद

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विराज चुदाई करने लगता है विराज धीरे से - चिल्लाना मत दीदी नही तो पापा मा
शिवानी दर्द मे रोते हुवे - बहोत दर्द हो रहा है
विराज फिर किस करते हुवे चुदाई करने लगता है धीरे धीरे दर्द के साथ शिवानी को मजा आने लगता है

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30 मिनट हो गये थे अब शिवानी सब भूल चुदाई के मजे मे खो गई थी अब शिवानी विराज को बाहों मे लिये जोर से सिसकिया लेते आह उफ मा कर रही थी विराज शिवानी को बाहों मे लिये धकके मे धक्का मार रहा था 2 बार शिवानी मजे से झरी थी

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विराज शिवानी को फिर घोरी बना के चुदाई करने लगता है कोई कुछ बोल नही रहा था विराज बोलना बाते करना चाहता था लेकिन विराज जनता था उसकी दीदी नही चाहती तो चुप ही रहता है
50 मिनट हो गये थे अब शिवानी समझ गई थी असली चुदाई क्या होती है शिवानी पहली बार दर्द मे बोलती है - तेरी भांजी भांजे अकेले है जल्दी कर
विराज तेज धक्का मारते हुवे - जी
फिर 12 मिनट बाद विराज अपनी बहन के बुर मे झर जाता है

शिवानी पसीने से भीगी तेज सासे लेते हुवे जल्दी से नाइटी पहन सीधा अपने कमरे मे आके लेत जाती है बुर मे दर्द जलन लिये

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विराज मन मे - मुझे तो पूरी रात करना था खैर मेरा सपना पुरा हुआ जो मजा सुकून मिला अपनी दीदी की गर्म बुर मारके कभी भूल नही पाऊंगा पता नही आगे फिर बुर मिलेगी या नही

विराज चादर हटा के नई चादर डाल बिस्तर पे लेत सो जाता है


सुबह होती है माला शिवानी उठ गये थे रमन भी रेडी हो गया था विराज सबसे बाद उठता है आगन् मे शिवानी को खाना बनाते देखता है

माला विराज को देख - उठ गया
विराज माला के गाल पे किस करते हुवे - जी मा
माला मुस्कुराते हुवे - जाके नहा ले
शिवानी विराज को एक नजर देखती है फिर खाना बनाने लगती है
रमन विराज के पास आते हुवे - कैसा है मेरा सेर
विराज - मस्त पापा मे बोल रहा

विराज फिर हल्का होके आता है नहाता है फिर सब खाते पीते है इसी मे 9 बज जाते है रमन माला खेत मे चले जाते है विराज माला अकेले रह जाते है

माला कमरे मे अपने बच्चो के साथ बैठी थी आदी खेल रहा था आशी को माला दूध पिला रही थी विराज आता है और माला के पास बैठ जाता है दोनो चुप थे

शिवानी आशी को दूध पिला देती है और चुचे अंदर करने लगती है तो विराज चुचे पकर लेता है फिर दबाने लगता है शिवानी सिसकिया लेने लगती है लेकिन कुछ नही बोलती तो विराज को हरि सिंगनल मिल जाता है

विराज चुचे दबाता मुह मे लेके चुस्ता पिता है फिर चुप चाप बाहर चला जाता है

विराज अब आगे क्या करना है सोचने लगता है विराज एक सांत पेर के नीचे बैठ मन मे - दीदी की लेली आगे चांस है लेकिन मा की कैसे लू बहोत डर लग रहा है सोच के ही लेकिन दीदी के साथ करने के बाद जो मजा आया मा के साथ और मजा आयेगा तो रिस्क लेना ही परेगा अब घर बनाना है हु साम को मा पापा से बाते करूँगा फिर कल से काम सुरु

दोपहर एक बज रहे थे घर मे कोई नही था विराज पीछे जाता है तो देखता है माला रमन खटिये पे बैठे थे शिवानी नीचे चटाई पे आदि आशी के साथ खेल रही थी

असल मे गर्मी का दिन था पीछे विराज के खेत मे एक बरा पीपल का पेर था उसी के नीचे सब बैठे थे

विराज सबके सामने आता है शिवानी विराज को देखती है फिर नजरे फेर लेती है

माला रमन विराज को देख - आओ बेटा बैठो
विराज माला के पास बैठ - मा पापा मेने सोचा था रात को बात करूँगा लेकिन अभी ही सही है कल से घर का काम सुरु करवा देते है पापा आपकी नजर मे कोई अच्छा ठीकेदार है तो बात करवाइये

रमन सोचते हुवे - हा एक है रामपाल
विराज - राजपाल अंकल अरे हा मे भूल हि गया था
माला - कैसा घर बनाना है सोचा है
विराज - हा दो मंजिला होगा चार नीचे कमरे 2 उपर बाकी छत की जगह रहेगी

रमन - हु अच्छा है लेकिन नया घर बनायेगा कहा
विराज जमीन को देख - इसी जमीन पे और कहा
माला - अगर ऐसा है तो सही है
शिवानी सब सुन रही थी पर चुप थी

विराज जरूरी बाते डिस्कस करता है फिर फैसला हो जाता है पूछे बरी जमीन थी जो खाली थी

विराज शिवानी को देखता है और शिवानी जब देखती है विराज को तो विराज इशारा करता है और फिर विराज घर मे आ जाता है

थोरि देर बाद शिवानी खरी होके - मा पापा मे आती हु दोनो को देखना

माला रमन - ठीक है बेटी

शिवानी कमरे मे आती है विराज पैंट नीचे कर - दीदी मुह मे लो ना
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कमाल की बात ये थी शिवानी घुटने पे आके मजे से लंड चूसने लगती है विराज खुश जोस से भर जाता है शिवानी पुरे मजे से चूस रस पीने लगती है विराज मजे से - आह दीदी बहोत मजा आ रहा है
3 मिनट बाद

विराज - दीदी लेत जाओ मुझे करना है

शिवानी बिना कुछ बोले सारी पेटीकोट उठा के टाँगे फैला के लेत धीरे से डालना
विराज सुन हैरान होता है फिर मुस्कुराते हुवे - हु
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विराज बुर के छेद पे रख धीरे से धक्का मारके पुरा घुसा देता है फिर चुदाई करने लगता है शिवानी दूसरी तरफ नजरे किये आह उफ मा करते रहती है और विराज चोदता रहता है 25 मिनट बाद

शिवानी सारी नीचे कर जाने लगती है तो विराज पीछे से शिवानी को बाहों मे भर के - दीदी जब दिल करेगा आप करने देगी ना
शिवानी - हु
विराज - आप मजा तो आता है ना
शिवानी - हु
विराज - जीजा से जायदा मजा
शिवानी - हा
विराज - तो मे समझू आप नाराज नही है
शिवानी - हु
विराज - रात को आयेगी
शिवानी - हु
विराज शिवानी को अपनी तरफ घुमा के चेहरे को पकर - ये चुपी तोर दीजिये मजा नही आता आज रात बोलना पड़ेगा
शिवानी सर्मा के - चल भाग बेसर्म

शिवानी कमरे से निकल अपने बच्चो के पास आ जाती है वही विराज खुशी से नाचने लगता है

रात 9 बजे खाना खाने के बाद

विराज के कमरे मे माला आती है दोनो बैठ बाते करने लगते है

माला - बेटा फिर कब जाने का सोचा है सच कहु मे फिर नही चाहती तु जाये
विराज माला के गोद मे सर रख - मा आगे हम अच्छे घर मे रह सके इस लिये जाना जरूरी है मे 1 साल और आपसे दूर रहूँगा उसके बाद तो इतने पैसे होगे ही की घर बन जायेगा बाकी एक मस्त कपड़े की दुकान लगा लूंगा फिर जाने की जरूर ही रही परेगी , विराज माला को देख, कियुंकी मुझे अपनी खूबसूरत मा को छोर जाना नही चाहता

माला हस्ते हुवे - बेसर्म क्या सच मे मै खूबसूरत हु
विराज मुस्कुराते हुए - बहोत खूबसूरत हॉट भी है
माला सर्मा के विराज के गाल पे धीरे से मारते हुवे - बेसर्म बेटा अच्छा ये बता तूने मुझसे कहा था कुछ चाहिये तूने जो कहा कर दिखाया बोल क्या चाहिये अब मेरी बारी वादा पुरा करने की है

विराज एकदम हैरान मन मे - सेम हो रहा है क्या करू मे
माला विराज के सर सेहलाते हुवे - बोल ना
विराज उठ कर बैठ जाता है और माला की तरफ देख एकदम से गले लगा के रोने लगता है माला हैरान होके - रो कियु रहा है

विराज रोते हुवे - मा मेने आपको लेके गंदा सोचा है
विराज की बात सुन बहोत शोक लगता है माला को

माला विराज को दूर कर - क्या केह रहा है बेटा
विराज नजरे नीचे कर रोते हुवे - मा मेने एक दिन आपको कमरे मे कपड़े बदलते देख लिया उसके बाद मेरे मन मे गंदे ख्याल आपको लेने आने लगे आपसे मे ,,,

माला और शोक होती है और समझते देर नही लगती उसका बेटा जो मांगना चाहता था वो उसकी बुर है

विराज माला के हाथ पकर - मा लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ मे जवानी की जोस मे क्या सोच रहा था क्या करने की कोसिस कर रहा था मेने गलती की है मा मुझे मारो लेकिन माफ भी कर देना

माला विराज को देखती रह जाती है कुछ मिनट बाद

माला विराज के कंधे पे हाथ रख विराज को देख - तूने अपनी गलती मान मुझे सच बताया मे समझती हु बेटा तेरी उमर हो गई है पर मा को देख गंदे ख्याल लाना गलत है लेकिन तुझे अपनी गलती का एहसास हो गया तूने सच बताया इस लिये माफ किया

विराज एकदम से माला के गले लगके - सुक्रिया मा
माला विराज के गाल पे प्यार से हाथ - अब सो जा

माला बाहर आती है अपना सर पकर मन मे - विराज की शादी करवानी होगी ये उमर होती ही ऐसी है

माला ने विराज को गलत नही समझा उमर को समझा

वही विराज ने कोई नाटक नही क्या हा विराज ने जो कहा सब सच था लेकिन विराज ने दिमाग से एक सेफ गेम खेला था विराज एक चांस लेगा विराज को लगा कुछ होगा आगे बढ़ेगा और अलग लगा कुछ नही हो सकता तो विराज पूरी तरह से पीछे हट जायेगा

विराज का पुरा इरादा तो अपनी मा की चुदाई करने का था लेकिन विराज जनता था उसका परिमान् गलत निकला तो वो अपनी मा की नजर मे हमेसा के लिये गिर जायेगा उसकी मा उसे गिरी घिन से देखेगी उसे वो प्यार नही दे पायेगी ना फिर कभी बिस्वास करेगी यही सोच विराज ने मा से सच अपनी गलती बता दी लेकिन एक कोसिस धीरे से करेगा लगा काम हो सकता है तो ठीक नही तो कभी नही

विराज का दिल हल्का हो गया था तभी शिवानी आती है

विराज शिवानी को बिस्तर पे लेता के - मुझे लगा था एक बार ही करने देगी लेकिन फिर आपने रोका नही कियु
शिवानी - एक औरत को जो चाहिये वो भरपूर मिले तो उसे वही बार बार चाहिये होता है
विराज शिवानी के नाइटी निकाल - तो जीजा जी से जायदा मजा मे देता हु

शिवानी टाँगे फैला के - हा पहली बार भाई तेरा लंड रात गया तो मुझे इतना दर्द हुआ जितना पहली बार भी नही हुआ था

विराज चुचे मुह मे लेके चूस दूध पीते हुवे - दीदी आप बहोत गजब है आपकी गर्म बुर मारने मे मजा आता है
शिवानी सिसकिया लेते हुवे - भाई धीरे उफ मुझे रात पता चला असली चुदाई किया होती है और तेरा मोटा लम्बा लंड कमाल का है सोचा नही था इतना बरा लंड भी होता है लेकिन रात उफ सुबह मजा आया

विराज शिवानी के बुर चाटने हुवे - बिस्वास नही होता आपकी बुर चाट रहा हु आप नंगी है
शिवानी - आह भाई चाट अच्छे से तेरे साथ बहोत मजा आ रहा है इतना मजा सुकून उफ

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विराज शिवानी के बुर चुदाई करते हुवे - आह दीदी बहोत मजा आ रहा है दीदी आपकी बुर बहोत टाइट गर्म है
शिवानी - आह भाई धीरे आह मा तेरा लंड बरा है भाई आह मेरी बुर आह बहोत मजा आ रहा है चोद अपनी दीदी को आह ये मजा उफ तूने मुझे नया सुख असली चुदाई का मजा दिया है

30 मिनट बाद

शिवानी तेज सासे लेते हुवे - छोटे अब जाती हु बच्चे अकेले है और हा छोटे कल तेरे जीजा आने वाले है मुझे लेने

विराज बैठे शिवानी को देख - दीदी रुक जाओ ना
शिवानी विराज के पास आके - छोटे मेरा घर अब यहा नही अपने पति के यहा है सासु ससुर घर सब अब मुझे ही देखना है

विराज मुस्कुराते हुवे - ठीक है लेकिन जल्दी आऊंगा आपके pas बुर लेने फी लेके आऊंगा तो यह भि

शिवानी मुस्कुराते हुवे - बेसर्म ठीक है गुड नाइट

आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏
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chapter 15

आज रात विराज को जो चाहिये था मिल रहा था अपनी बरी दीदी की बुर शिवानी अपने आप को अपने भाई को शॉप दिया था ऐसा नही था शिवानी अपने भाई के साथ चुदाई करना चाहती थी या शिवानी अपने पति से खुश नही थी

शिवानी की शादी सुधा लाइफ बहोत मस्त थी विकी शिवानी के शरीर का सुख अच्छे दे रहा था पर हालत ऐसे बने की शिवानी रोक नही पाई और विराज अपने भाई की इक्छा पूरी करने के लिये मान गई

विराज जनता था उसकी बहन अपने पुरे मन से राजी नही है लेकिन विराज जायदा नही सोचता किस्मत पे छोर देता है

विराज पुरा नँगा खरा था लंड फुल करक टाइट खरा था विराज धीरे से बिस्तर पे जाता है शिवानी चादर से अपना चेहरा ढकी चुप लेती थी लेकिन मोमेंट फिल कर रही थी

विराज शिवानी को गोर से देखता है फिर धीरे से - दीदी नाइटी
शिवानी जल्दी से नाइटी निकाल पूरी नंगी टांगे फैला के अपना चेहरा हाथो से धक के फिर चुप चाप लेत जाती है

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विराज मुह खोले आखे फ़ारेअपनीi बहन की मस्त नंगी बॉडी को देखते हुवे मन मे - मा कदम क्या बवाल बॉडी है चुचे कीतने बड़े मस्त है बुर पे हल्के बाल उफ दीदी उपर से नीचे तक बवाल है

विराज मन मे - दीदी कुछ बोलेगी नही ना कुछ करेगी मुझे ही सब करना होगा

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विराज शिवानी के एक एक चुचे पकर दबाने लगता है शिवानी थोरी काप् जाती है दर्द चेहरे पे आने लगता है विराज को बहोत मजा आ रहा था टाइट नर्म फिल लेके शिवानी हल्की सिसकिया दर्द भरी लेने लगती है विराज 3 minat चुचे दबाता है

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विराज चुचे दबाने के बाद चुचे मुह मे लेके चूसने लगता है शिवानी फिर मचल जाती है सिसकिया लेने लगती है विराज मजे से चुचे दबा के चूसने लगता है चुचे से दूध विराज निकाल पी रहा था विराज मन मे - उफ दीदी के चुचे के दूध पीके मजा आ रहा है
शिवानी बस धीरे सिसकिया ले रही थी चेहरा धके लेती थी

2 मिनट मजे से दूध पीने के बाद विराज पेट ढोरी को चूमते हुवे बुर के पास टांगों के बीच बुर के फाके फैला के छेद देखते हुवे मन मे - मेरी दीदी की बुर का छेद उफ टाइट लग रही है
शिवानी मन मे - जल्दी सब खतम हो जाये

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विराज के मुह पानी आ जाता है विराज बुर को मुह मे लेके चूसने चाटने लगता है शिवानी बिस्तर कस के पकर सिसकिया लेने लगती है
विराज मन मे - आह मजा आ रहा है उफ कसम से दीदी कि बुर का स्वाद बहोत ही जायदा मस्त है उफ गर्म रस पीके मजा आ रहा है
3 mina बाद शिवानी की बुर गीली हो गई थी

अब विराज बिना देश किये शिवानी के ऊपर लेत बुर को छेद पे रख देता है शिवानी जोर से सिसकिया लेती है सासे तेज चल रही थी
शिवानी बहोत मोटा गर्म बुर के छेद पे फिल करके

विराज शिवानी को देख मन मे - दीदी चेहरा भी नही दिखा रही मुझे किस करना है ऐसे अंदर घुसाउंगा तो मेरा बरा है दर्द होगा दीदी चिलाई तो मा पापा फिर मे गया

विराज धीरे से - दीदी किस करना है
शिवानी बिना बोले चेहरे से हाथ हटा लेती है लेकिन आखे बंद किये रहती है

विराज अपनी बहन के होठ मुह मे लेके चूसने लगता है शिवानी भी सब करने लेती है मुह खोल देती है विजय किस करते धीरे से बुर पे लंड घुसाने लगता है फिर एक धक्का तुरंत दूसरा धक्का बस काम हो गया पुरा लंड शिवानी के बुर के अंदर

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शिवानी सांत फिर एकदम से पैर हाथ मारने लगती है विराज के मुह से अपने होठ हटाने लगती विराज को हाथो से दूर करने लगती है लेकिन विराज सांत किस करते हुवे शिवानी को दबाये रखता है 2 मिनट बाद

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विराज चुदाई करने लगता है विराज धीरे से - चिल्लाना मत दीदी नही तो पापा मा
शिवानी दर्द मे रोते हुवे - बहोत दर्द हो रहा है
विराज फिर किस करते हुवे चुदाई करने लगता है धीरे धीरे दर्द के साथ शिवानी को मजा आने लगता है

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30 मिनट हो गये थे अब शिवानी सब भूल चुदाई के मजे मे खो गई थी अब शिवानी विराज को बाहों मे लिये जोर से सिसकिया लेते आह उफ मा कर रही थी विराज शिवानी को बाहों मे लिये धकके मे धक्का मार रहा था 2 बार शिवानी मजे से झरी थी

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विराज शिवानी को फिर घोरी बना के चुदाई करने लगता है कोई कुछ बोल नही रहा था विराज बोलना बाते करना चाहता था लेकिन विराज जनता था उसकी दीदी नही चाहती तो चुप ही रहता है
50 मिनट हो गये थे अब शिवानी समझ गई थी असली चुदाई क्या होती है शिवानी पहली बार दर्द मे बोलती है - तेरी भांजी भांजे अकेले है जल्दी कर
विराज तेज धक्का मारते हुवे - जी
फिर 12 मिनट बाद विराज अपनी बहन के बुर मे झर जाता है

शिवानी पसीने से भीगी तेज सासे लेते हुवे जल्दी से नाइटी पहन सीधा अपने कमरे मे आके लेत जाती है बुर मे दर्द जलन लिये

विराज बिस्तर को देखता है बुर के पानी से गिला
विराज मन मे - मुझे तो पूरी रात करना था खैर मेरा सपना पुरा हुआ जो मजा सुकून मिला अपनी दीदी की गर्म बुर मारके कभी भूल नही पाऊंगा पता नही आगे फिर बुर मिलेगी या नही

विराज चादर हटा के नई चादर डाल बिस्तर पे लेत सो जाता है


सुबह होती है माला शिवानी उठ गये थे रमन भी रेडी हो गया था विराज सबसे बाद उठता है आगन् मे शिवानी को खाना बनाते देखता है

माला विराज को देख - उठ गया
विराज माला के गाल पे किस करते हुवे - जी मा
माला मुस्कुराते हुवे - जाके नहा ले
शिवानी विराज को एक नजर देखती है फिर खाना बनाने लगती है
रमन विराज के पास आते हुवे - कैसा है मेरा सेर
विराज - मस्त पापा मे बोल रहा

विराज फिर हल्का होके आता है नहाता है फिर सब खाते पीते है इसी मे 9 बज जाते है रमन माला खेत मे चले जाते है विराज माला अकेले रह जाते है

माला कमरे मे अपने बच्चो के साथ बैठी थी आदी खेल रहा था आशी को माला दूध पिला रही थी विराज आता है और माला के पास बैठ जाता है दोनो चुप थे

शिवानी आशी को दूध पिला देती है और चुचे अंदर करने लगती है तो विराज चुचे पकर लेता है फिर दबाने लगता है शिवानी सिसकिया लेने लगती है लेकिन कुछ नही बोलती तो विराज को हरि सिंगनल मिल जाता है

विराज चुचे दबाता मुह मे लेके चुस्ता पिता है फिर चुप चाप बाहर चला जाता है

विराज अब आगे क्या करना है सोचने लगता है विराज एक सांत पेर के नीचे बैठ मन मे - दीदी की लेली आगे चांस है लेकिन मा की कैसे लू बहोत डर लग रहा है सोच के ही लेकिन दीदी के साथ करने के बाद जो मजा आया मा के साथ और मजा आयेगा तो रिस्क लेना ही परेगा अब घर बनाना है हु साम को मा पापा से बाते करूँगा फिर कल से काम सुरु

दोपहर एक बज रहे थे घर मे कोई नही था विराज पीछे जाता है तो देखता है माला रमन खटिये पे बैठे थे शिवानी नीचे चटाई पे आदि आशी के साथ खेल रही थी

असल मे गर्मी का दिन था पीछे विराज के खेत मे एक बरा पीपल का पेर था उसी के नीचे सब बैठे थे

विराज सबके सामने आता है शिवानी विराज को देखती है फिर नजरे फेर लेती है

माला रमन विराज को देख - आओ बेटा बैठो
विराज माला के पास बैठ - मा पापा मेने सोचा था रात को बात करूँगा लेकिन अभी ही सही है कल से घर का काम सुरु करवा देते है पापा आपकी नजर मे कोई अच्छा ठीकेदार है तो बात करवाइये

रमन सोचते हुवे - हा एक है रामपाल
विराज - राजपाल अंकल अरे हा मे भूल हि गया था
माला - कैसा घर बनाना है सोचा है
विराज - हा दो मंजिला होगा चार नीचे कमरे 2 उपर बाकी छत की जगह रहेगी

रमन - हु अच्छा है लेकिन नया घर बनायेगा कहा
विराज जमीन को देख - इसी जमीन पे और कहा
माला - अगर ऐसा है तो सही है
शिवानी सब सुन रही थी पर चुप थी

विराज जरूरी बाते डिस्कस करता है फिर फैसला हो जाता है पूछे बरी जमीन थी जो खाली थी

विराज शिवानी को देखता है और शिवानी जब देखती है विराज को तो विराज इशारा करता है और फिर विराज घर मे आ जाता है

थोरि देर बाद शिवानी खरी होके - मा पापा मे आती हु दोनो को देखना

माला रमन - ठीक है बेटी

शिवानी कमरे मे आती है विराज पैंट नीचे कर - दीदी मुह मे लो ना
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कमाल की बात ये थी शिवानी घुटने पे आके मजे से लंड चूसने लगती है विराज खुश जोस से भर जाता है शिवानी पुरे मजे से चूस रस पीने लगती है विराज मजे से - आह दीदी बहोत मजा आ रहा है
3 मिनट बाद

विराज - दीदी लेत जाओ मुझे करना है

शिवानी बिना कुछ बोले सारी पेटीकोट उठा के टाँगे फैला के लेत धीरे से डालना
विराज सुन हैरान होता है फिर मुस्कुराते हुवे - हु
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विराज बुर के छेद पे रख धीरे से धक्का मारके पुरा घुसा देता है फिर चुदाई करने लगता है शिवानी दूसरी तरफ नजरे किये आह उफ मा करते रहती है और विराज चोदता रहता है 25 मिनट बाद

शिवानी सारी नीचे कर जाने लगती है तो विराज पीछे से शिवानी को बाहों मे भर के - दीदी जब दिल करेगा आप करने देगी ना
शिवानी - हु
विराज - आप मजा तो आता है ना
शिवानी - हु
विराज - जीजा से जायदा मजा
शिवानी - हा
विराज - तो मे समझू आप नाराज नही है
शिवानी - हु
विराज - रात को आयेगी
शिवानी - हु
विराज शिवानी को अपनी तरफ घुमा के चेहरे को पकर - ये चुपी तोर दीजिये मजा नही आता आज रात बोलना पड़ेगा
शिवानी सर्मा के - चल भाग बेसर्म

शिवानी कमरे से निकल अपने बच्चो के पास आ जाती है वही विराज खुशी से नाचने लगता है

रात 9 बजे खाना खाने के बाद

विराज के कमरे मे माला आती है दोनो बैठ बाते करने लगते है

माला - बेटा फिर कब जाने का सोचा है सच कहु मे फिर नही चाहती तु जाये
विराज माला के गोद मे सर रख - मा आगे हम अच्छे घर मे रह सके इस लिये जाना जरूरी है मे 1 साल और आपसे दूर रहूँगा उसके बाद तो इतने पैसे होगे ही की घर बन जायेगा बाकी एक मस्त कपड़े की दुकान लगा लूंगा फिर जाने की जरूर ही रही परेगी , विराज माला को देख, कियुंकी मुझे अपनी खूबसूरत मा को छोर जाना नही चाहता

माला हस्ते हुवे - बेसर्म क्या सच मे मै खूबसूरत हु
विराज मुस्कुराते हुए - बहोत खूबसूरत हॉट भी है
माला सर्मा के विराज के गाल पे धीरे से मारते हुवे - बेसर्म बेटा अच्छा ये बता तूने मुझसे कहा था कुछ चाहिये तूने जो कहा कर दिखाया बोल क्या चाहिये अब मेरी बारी वादा पुरा करने की है

विराज एकदम हैरान मन मे - सेम हो रहा है क्या करू मे
माला विराज के सर सेहलाते हुवे - बोल ना
विराज उठ कर बैठ जाता है और माला की तरफ देख एकदम से गले लगा के रोने लगता है माला हैरान होके - रो कियु रहा है

विराज रोते हुवे - मा मेने आपको लेके गंदा सोचा है
विराज की बात सुन बहोत शोक लगता है माला को

माला विराज को दूर कर - क्या केह रहा है बेटा
विराज नजरे नीचे कर रोते हुवे - मा मेने एक दिन आपको कमरे मे कपड़े बदलते देख लिया उसके बाद मेरे मन मे गंदे ख्याल आपको लेने आने लगे आपसे मे ,,,

माला और शोक होती है और समझते देर नही लगती उसका बेटा जो मांगना चाहता था वो उसकी बुर है

विराज माला के हाथ पकर - मा लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ मे जवानी की जोस मे क्या सोच रहा था क्या करने की कोसिस कर रहा था मेने गलती की है मा मुझे मारो लेकिन माफ भी कर देना

माला विराज को देखती रह जाती है कुछ मिनट बाद

माला विराज के कंधे पे हाथ रख विराज को देख - तूने अपनी गलती मान मुझे सच बताया मे समझती हु बेटा तेरी उमर हो गई है पर मा को देख गंदे ख्याल लाना गलत है लेकिन तुझे अपनी गलती का एहसास हो गया तूने सच बताया इस लिये माफ किया

विराज एकदम से माला के गले लगके - सुक्रिया मा
माला विराज के गाल पे प्यार से हाथ - अब सो जा

माला बाहर आती है अपना सर पकर मन मे - विराज की शादी करवानी होगी ये उमर होती ही ऐसी है

माला ने विराज को गलत नही समझा उमर को समझा

वही विराज ने कोई नाटक नही क्या हा विराज ने जो कहा सब सच था लेकिन विराज ने दिमाग से एक सेफ गेम खेला था विराज एक चांस लेगा विराज को लगा कुछ होगा आगे बढ़ेगा और अलग लगा कुछ नही हो सकता तो विराज पूरी तरह से पीछे हट जायेगा

विराज का पुरा इरादा तो अपनी मा की चुदाई करने का था लेकिन विराज जनता था उसका परिमान् गलत निकला तो वो अपनी मा की नजर मे हमेसा के लिये गिर जायेगा उसकी मा उसे गिरी घिन से देखेगी उसे वो प्यार नही दे पायेगी ना फिर कभी बिस्वास करेगी यही सोच विराज ने मा से सच अपनी गलती बता दी लेकिन एक कोसिस धीरे से करेगा लगा काम हो सकता है तो ठीक नही तो कभी नही

विराज का दिल हल्का हो गया था तभी शिवानी आती है

विराज शिवानी को बिस्तर पे लेता के - मुझे लगा था एक बार ही करने देगी लेकिन फिर आपने रोका नही कियु
शिवानी - एक औरत को जो चाहिये वो भरपूर मिले तो उसे वही बार बार चाहिये होता है
विराज शिवानी के नाइटी निकाल - तो जीजा जी से जायदा मजा मे देता हु

शिवानी टाँगे फैला के - हा पहली बार भाई तेरा लंड रात गया तो मुझे इतना दर्द हुआ जितना पहली बार भी नही हुआ था

विराज चुचे मुह मे लेके चूस दूध पीते हुवे - दीदी आप बहोत गजब है आपकी गर्म बुर मारने मे मजा आता है
शिवानी सिसकिया लेते हुवे - भाई धीरे उफ मुझे रात पता चला असली चुदाई किया होती है और तेरा मोटा लम्बा लंड कमाल का है सोचा नही था इतना बरा लंड भी होता है लेकिन रात उफ सुबह मजा आया

विराज शिवानी के बुर चाटने हुवे - बिस्वास नही होता आपकी बुर चाट रहा हु आप नंगी है
शिवानी - आह भाई चाट अच्छे से तेरे साथ बहोत मजा आ रहा है इतना मजा सुकून उफ

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विराज शिवानी के बुर चुदाई करते हुवे - आह दीदी बहोत मजा आ रहा है दीदी आपकी बुर बहोत टाइट गर्म है
शिवानी - आह भाई धीरे आह मा तेरा लंड बरा है भाई आह मेरी बुर आह बहोत मजा आ रहा है चोद अपनी दीदी को आह ये मजा उफ तूने मुझे नया सुख असली चुदाई का मजा दिया है

30 मिनट बाद

शिवानी तेज सासे लेते हुवे - छोटे अब जाती हु बच्चे अकेले है और हा छोटे कल तेरे जीजा आने वाले है मुझे लेने

विराज बैठे शिवानी को देख - दीदी रुक जाओ ना
शिवानी विराज के पास आके - छोटे मेरा घर अब यहा नही अपने पति के यहा है सासु ससुर घर सब अब मुझे ही देखना है

विराज मुस्कुराते हुवे - ठीक है लेकिन जल्दी आऊंगा आपके pas बुर लेने फी लेके आऊंगा तो यह भि

शिवानी मुस्कुराते हुवे - बेसर्म ठीक है गुड नाइट

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Fantastic update
 

krish1152

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