Update 14
पिछले भाग मे देखा कि जैसे ही चाचाजी को स्तनपान करवाने के बाद शालिनी चाचाजी का मुँह पोंछ रही थी कि दरवाजे की घंटी बजती है, घंटी की आवाज सुनकर दोनों चौक जाते है।
शालिनी : इस समय कौन हो सकता है ?क्या चाची होगी? या फिर वो बदमाश तो नहीं होंगे?
चाचाजी : एक काम करे आप कमरे मे जाए और मुन्ने को साथ ले जाए और दरवाजा अंदर से बंध रखना और मेरे कहने पर ही खोलना ,साथ ही साड़ी भी पहन लेना कहीं पहचान वाला होगा तो मे नही चाहता वो हमे गलत समझे।
शालिनी : ठीक है पर पहले सेफ्टी होल से देख लेना बाद मे ही दरवाजा खोलना ,अपना ध्यान रखना।
शालिनी नील की सुरक्षा के खातिर कमरे मे आ जाती है और दरवाजा बंध कर देती है ,इधर चाचाजी दरवाजे के सेफ्टी हॉल से देखते है कि बाहर एक इंस्पेक्टर और दो हवलदार थे ,उसे देख कर चाचाजी को राहत की साँस आती है और वो दरवाजा खोलते है और पुलिसकर्मियों को आदर के साथ अंदर बुलाते है और उसको बिठाते है ,चाचाजी कमरे के दरवाजे के पास जाके शालिनी को दरवाजा खोलने को कहते है।
चाचाजी : शालिनी घबराने की बात नहीं है ये तो हमारे पुलिस भाई आए है ,आप बाहर आ सकते हो।
शालिनी एक नॉर्मल साड़ी पहने हुई नील को लेके बाहर आती है

और पुलिसकर्मियों को नमस्ते करती है फिर वो नील को चाचाजी को देकर पानी लेने जाती है ,वो सब को पानी पिलाती है।
शालिनी : क्या हुआ सर ?आप अचानक कैसे आना हुआ ?सब ठीक तो है ना?
पुलिस इंस्पेक्टर : सब ठीक है ,कुछ डरने वाली बात नहीं है हम तो आप को यह बताने आए है कि तीन दिन बाद कर्फ्यू हटाने वाले है।
शालिनी : ये तो अच्छी बात है ,कितने दिन हो गए ?अब सब पहले की तरह आजादी से घूम सकेंगे।
इंस्पेक्टर : हाँ ये सही कहा आपने ,पर एक बात आपको बतानी है कि कर्फ्यू हटाने की वज़ह से अब हम आपको अभी तक जैसी सुरक्षा दी है वैसी नहीं दे पाएंगे तो हम आप से यह कहने आए है कि हो सके तो आप शहर से दूर चले जाए क्युकी अपराधी तो जेल मे है पर उसके आदमी अभी आजाद घूम रहे है और कोन किस वेश मे आ जाए और आपको नुकसान पहुंचाने का प्रयास करे इस लिए आप कहीं दूर चले जाए ,जब सब पकड़े जाएंगे तब हम आपको बता देंगे।
शालिनी सोच मे पड़ जाती है क्युकी अचानक से ये सब
इंस्पेक्टर : आप हमे बताये आपको कहा जाना है तो हम आपके टिकट की व्यवस्था कर देंगे ,आप घबराए नहीं बस कुछ दिनों ki बात है।
शालिनी चाचाजी की ओर देखती है तब चाचाजी कहते है मुझे लगता है एसे समय मे अपने गाव से ज्यादा सुरक्षित स्थान कोई नहीं ,वहा तुम्हारे ससुर भी है और गाव मे भी सब पहचान के लोग है
इंस्पेक्टर : वाह परिवार से ज्यादा सुरक्षा और कौन कर सकता है ,तो आप अपना नाम नंबर और आप सब की जानकारी और आपका गाव कहा पे है वो सब लिखवा दीजिए
शालिनी हवलदार को सब का नाम नंबर और बाकी की जानकारी देते है और चाचाजी अपने गाव का पता देते है ,सबको कुछ औपचारिकता करने के बाद जब इंस्पेक्टर सर जब जाने लगते है तब एक बात कहते है कि आप गाव जाँ रहे है वो आप किसीको ना बताये।
पुलिस के जाने के बाद चाचाजी वापिस दरवाजा लॉक कर देते है और दोनों आपस मे बात करते है कि अब आगे क्या करना है फिर शालिनी नीरव को और चाचाजी अपने दोस्त यानी शालिनी के ससुर को कॉल करते है और अभी जो हुआ वो सब बताते है ,नीरव और उसके पिताजी दोनों एक ही बात करते है कि ये सब से अच्छा निर्णय है जिससे सब सुरक्षित रहेंगे।
फोन पर बात करने के बाद दोनों सोफ़े पर बैठ जाते है और बस एक दूसरे बात करते है।
चाचाजी : मुझे लगा कि गाव मे ही आप और मुन्ना सुरक्षित रहेंगे इस लिए मेने ये सुझाव दिया था पर आप के कोई ईच्छा हो तो हम वहा जा सकते है।
शालिनी : नहीं ! सायद गांव जाना ही सही रहेगा,मे बस यही चाहती हूं कि मेरा बच्चा सुरक्षित रहे इस वज़ह से मे कहीं भी जाने को तैयार हूं।
चाचाजी : देखना गाव मे भी तुमको अपनापन लगेगा वहां सब तुम्हारे ससुर की बहुत इज़्ज़त करते है ,
शालिनी : ठीक है ,मे कपड़े और जरूरी सामान पैक करने लगती हूं ताकि कोई चीज़ छुट ना जाए।
चाचाजी : आराम से ! अभी तीन दिन है।
शालिनी : फिर एक काम करते हैं एक लिस्ट बना लेते हैं ताकि कोई समान छुट ना जाए।
चाचाजी : ठीक है जैसी आपकी मर्जी। लेकिन अभी तो आराम से बैठो।
शालिनी और चाचाजी मिलकर लिस्ट बनाने लगते हैं

फिर बात चीत करते है ,फिर थोड़ी देर बाद शालिनी रसोई बनाने लगती है ,अभी तो उसने नॉर्मल साड़ी पहनी थी पर वो बेहद खूबसूरत लग रही थी ,चाचाजी वातावरण को हल्का बनाने के लिए अपने आपको छोटे बच्चे जैसे बर्ताव करने लगते है।
चाचाजी शालिनी का पल्लू पकड लेते है जिस वज़ह से शालिनी के कंधे से पल्लू खिसक जाता है और शालिनी मूड जाती है और बड़ी बड़ी आंखे कर के चाचाजी को डराने का नाटक करती है पर चाचाजी बस मुस्कराते रहते है ,जिस से शालिनी हसने लगती है।

शालिनी : ये क्या बचपना है ,चलो छोड़ों मेरे पल्लू को ,फिर खाना बनाने मे देर होगी तो तुम ही बैचेन हो जाओगे।
चाचाजी : मुझे आपके साथ आना है ,मुझे अपने साथ ले जाओ।
शालिनी : रसोई मे आपका क्या काम ?आप इधर रुकिए अपने भाई के साथ
चाचाजी : मुन्ना अपने खिलौने से खेल रहा है।
शालिनी : (पल्लू छुड़ाते हुए ...)नहीं आप इधर ही रहे ,मेने कह दिया बस।
शालिनी जाने लगती है तब चाचाजी फिर से पल्लू पकडने जाते है तब शालिनी तेजी से पल्लू को अपने हाथ मे ले लेती है और तेजी से चलने लगती है ,जिस से चाचाजी भी खड़े होके उसके पीछे जाने लगते है तो शालिनी धीरे धीरे भागने लगते है और चाचाजी उसे पकडने के लिए पीछे-पीछे भागने लगते है ,मानो दोनों पकङमपकङाई खेल रहे हो और जैसे ही शालिनी भाग के किचन मे आती है तब चाचाजी भी उसके पीछे आते है और पल्लू पकड लेते हैं जिस से फिर से पल्लू खिसक जाता है।

शालिनी : क्यु तंग कर रहे हों ,मुझे खाना बनाने दो ,
चाचाजी : ठीक है पर एक शर्त पर।
शालिनी : कैसी शर्त?
चाचाजी : मे आपके पास यही बैठूंगा
एसा बोल के चाचाजी प्लेटफॉर्म के ऊपर बैठ जाते है और शालिनी को खाने बनाते हुए देखने लगते है

,जब जब शालिनी कुछ चीजे लेने झुकती तब तब उसका पल्लू खिसक जाता।
चाचाजी : आप इतनी गर्मी मे किचन मे रसोई बना रही है तो आपको ज्यादा गर्मी लगती होगी तो मे ये कह रहा हूं कि आप ये सारे निकाल क्यु नहीं देते ?
शालिनी : अरे हा ये हो सकता है वैसे भी अब तो आप दो ही है तो फिर क्या दिक्कत ! एक काम करो जाओ ये साड़ी कमरे मे बेड पर रखके आओ।
शालिनी अपनी साड़ी निकालने लगती है

और सिर्फ ब्लाउज और घाघरा पहने हुए ही रसोई बनाने लगती है ,

चाचाजी भी साड़ी कमरे मे रख के आते है और साथ ही नील को भी देख लेते है कि वो ठीक तो है ,नील तो अपनी ही धुन में मस्त खिलोनों से खेल रहा था ,इस लिए चाचाजी वापिस किचन में आते है।
शालिनी आटा गोंद रही थी और चाचाजी उसके पीछे आके उसके पेट पर अपने हाथ बाँध देते है।

चाचाजी : मेरी प्यारी छोटी माँ!खाने मे क्या बना रही हो?
शालिनी : मस्का क्यों लगा रहे हो ? क्या खाना की ईच्छा है?
चाचाजी : आपको कैसे पता कि मुझे कुछ खाने की ईच्छा है?
शालिनी : दो बेटों की माँ हूं ,अब तो थोड़ा-थोड़ा मुझे भी अंदाजा आ जाता है कि मेरे बच्चो को क्या चाहिए।
चाचाजी : वो आज खीर खाने का मन है।
शालिनी : अच्छा मेरे बड़े बेटे को खीर पसंद है,तो फिर मुझे तो अब बनानी ही पड़ेगी।
चाचाजी : वाह ...मेरी प्यारी छोटी माँ!
एसा कहकर चाचाजी शालिनी के गाल को चूम लेते है।

शालिनी : बस बस ...अभी मुझे काम करने दो और उधर जाके बैठो।
चाचाजी भी वापिस प्लेटफॉर्म पर आके बैठ जाते है और शालिनी को काम करते हुए देख रहे थे ,कुछ समय बाद सब खाना तैयार हो गया था।
शालिनी : आज हॉल मे खाना खाते है साथ मे टीवी भी देख लेंगे।
चाचाजी : ठीक है।
चाचाजी भी सब बर्तन वगैरह समान हॉल मे रखने मे मदद करते है ,और शालिनी आखिर मे खीर का बर्तन लेके आती है ,शालिनी पसीने से तरबतर हो गई थी

जिस से पहले वो पंखे के नीचे आके खड़ी रहती है फिर नैपकिन से पसीना पोछने लगती है पर उसे अच्छा नहीं लगता तो वो अपना हाथ मुँह धोने चली जाती है, आते समय वो एक दुपट्टा लेकर आती है।
शालिनी : (वापस आके ..)अब अच्छा लगा, चलो खाना खा लेते है और हाँ टीवी चालू कर देना।
शालिनी नील को अपनी गोदी मे सुलाती है और दुपट्टे से ढककर नील को स्तनपान करवाने लगती है ,नील भी हररोज की तरह "छ्प छ्प "करके स्तनों से दुध पीने लगता है ,और इधर शालिनी चाचाजी को चम्मच से खीर खिलाने लगती है साथ ही वो भी खाना खा रही थी ,खाने के बीच मे नील एक स्तन खाली कर देता है और शालिनी उसे अपने दूसरे स्तन पे रख देती है ,पर नील वो स्तन अधूरा छोड़ देता है और इधर दोनों का खाना भी पूरा हो गया था ,शालिनी नील को चाचाजी को दे देती है और खुद ब्लाउज को ठीक कर के दुपट्टा हटा के खड़ी हो जाती है।
शालिनी : अभी आप दोनों खेलों मे तब तक सारे काम निपटा देती हू।
चाचाजी और नील दोनों सोफ़े पर खेलने लगते है इधर शालिनी सारे काम करने मे व्यस्त हो जाती है आज जबकि हॉल मे खाना खाया था तो शालिनी उधर पौंछा लगाने आती है तब उसके झुकने से उसके स्तन और उसके बीच की दरार की ओर चाचाजी का ध्यान आकर्षित हो जाता है

,हालाकि चाचाजी ने उस स्तनों से सीधे ही दुध पिया था पर वो स्तन है ही इतने मनमोहक की किसी को भी वो आकर्षित कर दे ,करीब आधे पौने घंटे बाद शालिनी आती है और नील के पास आके बैठ जाती है।
दोनों नील के साथ खेलने लगते है कुछ समय बाद नील उबासी लेने लगता है जिसे देख के शालिनी सोने को कहती है ,चाचाजी टीवी बंध कर देते है और शालिनी नील को उठा लेती है और उसे प्यार से लोरी सुनाने लगती है और पालने मे सुला देती है थोड़ी ही देर में नील सो जाता है,और चाचाजी कमरे मे आते है।
चाचाजी : वो कुछ दूध बचा है तो मे गर्म करके पी लू, वर्ना एक बार सो गया तो फिर मे नही उठेगा।
शालिनी : आज खीर बनाने की वज़ह से आपके पीने के लिए दुध नहीं बचा ,पर आप चिंता ना करे।
इस वाक्य से चाचाजी समझ जाते है कि शालिनी क्या कहना चाहती है ,पर वो कुछ नहीं बोलते और लाइट बंध करके चुपचाप शालिनी के बग़ल मे आके लेट जाते है और अपना एक पैर शालिनी के पैर के ऊपर रख देते है।
शालिनी : आपने इतनी गर्मी मे कुर्ता क्यु पहना है ,निकाल दीजिए आराम मिलेगा ,मैंने कैसे साड़ी निकाल दी है।
चाचाजी बेड पर बैठे बैठे अपना कुर्ता निकाल के बेड के नीचे रख देते हैं और फिर से शालिनी के पैर के ऊपर पैर रख के लेट जाते है।
शालिनी : मे क्या कह रही हूँ कि आपके लिए पीने के लिए दूध बचा नहीं और नील ने मेरा पूरा खाली किया नहीं तो क्यु ना आप इसे पी ले।
चाचाजी : ठीक है।
अब चाचाजी ये सब अपने जीवन का हिस्सा मानकर स्वीकार कर लेते है,शालिनी जो चाचाजी ने बेड पर साड़ी रखी थी उस से स्तनों के ढककर गोदी मे चाचाजी का सिर रख कर उसको स्तनपान करवाने लगती है ,चाचाजी भी किसी बच्चे की तरह निप्पल चूस रहे थे शालिनी उसके पीठ और सिर पर हाथ फेरकर उसे वात्सल्य दे रही थी करीब 10 मिनट बाद स्तन खाली हो जाता है और चाचाजी के मुँह से निप्पल छुड़ाकर शालिनी स्तन ढक देती है और साड़ी को वापिस बेड के नीचे रख देती है।

करीब रात के 3 बजे थे कि शालिनी के स्तनों मे दूध के उतर आने से दर्द शुरू हो गया था ,वो कुछ देर व्याकुलता से लेटी रहती है पर जब उससे रहा नहीं जाता तब वो धीरे से चाचाजी को जगाती है।
शालिनी : सुनो ,जरा उठो ,बेटा जरा उठो ना।
चाचाजी : (नींद मे ..)क्या हुआ ?कुछ चाहिए है क्या ?
शालिनी : वो फिर से दर्द शुरू हो गया है तो तुम मदद कर दो प्लीज।
चाचाजी : अच्छा एसी बात है ! और आप प्लीज मत कहिये
शालिनी : चलो बाहर चलते है।
चाचाजी : बाहर क्यु जाना ?इधर ही पीला दो ना ,इधर क्या दिक्कत है ?अभी तो आपने पिलाया था ना।
शालिनी : (मन में ...) ये भी सही है खामखा क्यु उठकर जाना जब इधर ही पीला सकती हूं।
शालिनी : ठीक है ,गोदी मे आ जाओ।
एसा बोलते हुए शालिनी नीचे पड़ी साड़ी उठाने जाती है कि चाचाजी उसे रोकते है
चाचाजी : एक काम करिए ना आज मुझे लेटे लेटे ही पीला दो ना।
शालिनी : पर कैसे ?
चाचाजी : जैसे एक माँ अपने छोटे बच्चे को बग़ल मे सुलाकर पिलाती है वैसे और अभी लाइट भी बंध है तो क्या आप पल्लू नहीं लगाएगी तो चलेगा ?वैसे पल्लू मे थोड़ी गर्मी होती है ,फिर जैसे आपको ठीक लगे।
शालिनी : (मन मे ...)क्या..? बिना पल्लू के कैसे ?पर बात सही है लाइट बंध है तो पल्लू लगाऊँ या ना लगाऊँ क्या फर्क़ पड़ता है?और वैसे भी पल्लू के अंदर तो वो मेरे स्तनों को देख ही लेते है और स्तनपान भी कर लेते है तो फिर कैसे भी स्तनपान करे मुझे तो स्तनों मे से दूध निकल जाए वहीँ चाहिए और लेटे लेटे स्तनपान करवाने से भी आराम मिलेगा ,सिर्फ करवट लेके लेट जाना है।
शालिनी : ठीक है।
शालिनी चाचाजी की ओर करवट लेती है

और चाचाजी थोड़ा खिसक कर नीचे आते है अब शालिनी अपने हूक खोल ने लगती है धीरे धीरे करके उसने सारे हूक खोल दिए।

शालिनी : चलो अब एक अच्छे बच्चे की तरह पीने लगो।
शालिनी अपनी उंगलियों से अपना दाहिने स्तन को जो नीचे था वो पहले चाचाजी को परोसती है ,और चाचाजी भी एक बच्चे की तरह निप्पल को लपक के मुँह मे ले लेते हैं और चूसने लगते है और दूध को अपने मुँह मे भरने लगते है और पीने लगते है

,जैसे जैसे दूध स्तनों से खाली होता शालिनी को राहत मिलने लगती है ,और वो चाचाजी के सिर को स्तनों मे दबाने लगती है।
शालिनी : आह...पी जाओ सारा दूध ,एक बूंद भी मत रखना।
चाचाजी निप्पल मुँह मे रखते हुए ही "हम्म " बोल के सहमती जताते है ,15 मिनट स्तन चूसने के बाद शालिनी अपने स्तन को चाचाजी के मुँह से छुड़ाते है और उसको अपनी दूसरी ओर आने को बोलती है और खुद करवट ले लेती है ,चाचाजी भी शालिनी के बायी ओर आके लेट जाते है और शालिनी अपना बायां स्तन चाचाजी को परोसती है

चाचाजी उसको भी अच्छे से चूसने लगते है ,स्तन मे से तो मानो दूध की नदी बह रही हो और चाचाजी रूपी सागर मे मिल जाती हो ,जैसे नदी का सागर मे मिलना ही उसका भाग्य होता है ठीक वैसे शालिनी के दूध को चाचाजी के पेट मे जाना उसका भाग्य हैं।
दूसरा स्तन भी जब खाली हो जाता है तब शालिनी को आराम मिलता है वो चाचाजी को निप्पल छुड़ाकर चार मे से सिर्फ दो हूक लगा के चाचाजी को अपने सीने से चिपका के सुला देती है

और खुद भी सो जाती है क्युकी दोनों कच्ची नींद से जागे थे तो दोनों को तुरत नींद भी आ जाती है ,जब सुबह छह बजे शालिनी की नींद खुलती है तो देखती है चाचाजी उसके पेट पर हाथ रख के सोये हुए है ,वो धीरे से उसका हाथ हटा के बेड पर बैठ जाती है और अपने ब्लाउज के खुले हुए हूक लगाने लगती है।

तब उसे याद आता है कि कल रात कैसे उसने बिना पल्लू के चाचाजी को स्तनपान करवाया था ,फिर वो अंगड़ाई लेती है ,तभी हाथ हटाने की वज़ह से चाचाजी की भी नींद खुल जाती है ,वो देखते है कि शालिनी अंगड़ाई ले रही है,चाचाजी अपना हाथ उसकी गोदी मे लंबा कर देते है जिस से शालिनी पीछे मुड़ के देखती है तो चाचाजी मुस्करा रहे थे तो वो भी मुस्करा देती है और झुक के माथे को चूम लेती है।
शालिनी : आज जल्दी जग गए, क्या बात है ! सोना है तो थोड़ी देर सो जाओ
चाचाजी गर्दन हिलाकर ना कहते है।
शालिनी : क्यु ?
चाचाजी : क्युकी मुझे यहा सोना है।
एसा बोलकर चाचाजी शालिनी के गोदी मे सिर रख देते है ,शालिनी उसके सिर पर प्यार से हाथ घुमाती है ,चाचाजी अपने चेहरे को शालिनी के पेट पर सटा देते है और दाएं हाथ को शालिनी की कमर पर लिपटा देते है और हल्के से कमर को अपनी ओर खींचते है तो शालिनी थोड़ा ऊँचा उठकर उसके पास होती है।
शालिनी : अरे...हाय रे मेरा बच्चा! बहुत प्यार करते हो मुझसे लिपट जा रहे हो।
चाचाजी : हा ,बहुत ! मे अब आपसे अलग नहीं होना चाहता ,कुछ भी हो मे आपके पास रहूँगा ,
शालिनी : मे भी तुमको अपने से अलग नहीं करूंगी, अभी जितना नील मेरे करीब है उतना ही आप ,अभी तो गाव मे भी हम साथ होंगे।
चाचाजी : हा वैसे तो हम साथ होगे पर एक दिक्कत है।
शालिनी : क्या है दिक्कत?
चाचाजी : वहा आप अपने ससुर के साथ रहोगे और मे अपने घर।
शालिनी : आप हमारे साथ आ जाना।
चाचाजी : वो हो सकता है पर तुम्हारे ससुर भी तो होगे।
शालिनी : हाँ ! तो फिर क्या करेंगे ?क्या ये सुकून मेरा बस इतने दिनों का ही था ?नहीं! उस दर्द को फिर से सहन नहीं करूंगी।
चाचाजी : किस्मत हमे यहा तक लायी है तो आगे भी कुछ जरूर रास्ता निकलेगा।
शालिनी : मुझे तो कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा ,काश ! कोई रास्ता मिल जाए पर मे आने वाले दुख को सोच के अभी मिल रहे सुख को नहीं बर्बाद करना चाहती। अभी मे फ्रेश होने जा रही हूं तब तक आप आराम करें।
शालिनी फिर से उस दर्द को सहन करने के विचार मात्र से कांप गई थी ,वो फ्रेश होने जाती है तब तक चाचाजी अपने पहले की तरह प्राणयाम करने लगते है जब शालिनी आती है तब चाचाजी फ्रेश होने जाते हैं,और शालिनी अपने योग के कपड़े पहनकर अपनी मैट बिछा के योग करने लगती है।
अभी जो उसने टॉप पहना था वो किसी स्पोर्ट्स ब्रा जैसा था और एकदम तंग पेंट था ,जिसमें उसकी जांघें का कटाव बहुत मादक दिख रहा था और टॉप मे से उसके स्तन भी छलक रहे थे क्युकी ब्रा तो पहनी नहीं थी

शालिनी ने अभी आधा योग किया था कि चाचाजी भी बाथरूम से बाहर आते है और सोफ़े पर आके बैठते है फिर 5 मिनट बाद वो भी शालिनी के बग़ल मे आके योग करना शुरू कर देते है।
शालिनी : अरे आप रहने दीजिए।
चाचाजी : अभी मे बिल्कुल ठीक हो गया हूं दो दिन से मुझे काफी अच्छा महसूस हो रहा है।
उसका इशारा शालिनी के स्तनपान के और था जिसे शालिनी भी समझ जाती है और शर्मा जाती है।
शालिनी : (चिढ़ाते हुए ..)तो फिर आपको ओर दो दिन अच्छा महसूस होगा फिर आप वापिस से बीमार हो जाओगे।
चाचाजी : एसी अच्छी तबीयत के लिए मे कुछ भी कर सकता हूं।
दोनों एक दूसरे को चिढ़ाते और मज़ाक करते है और फिर से योग करने लगते है ,योग करने के बाद शालिनी नैपकिन से अपना पसीना पोछते है और पंखे के नीचे आके सोफा पर बैठ जाती है तभी नील की आवाज आती है तो चाचाजी उसे लेकर आते है और शालिनी को देते है ,शालिनी उसे प्यार दुलार करती है और चाचाजी से अपना दुपट्टा मंगाया और उसे ढककर नील को स्तनपान करवाने लगती है।
शालिनी : जाओ आप नहा लो तब तक मे नील को दूध पीला देती हूं।
चाचाजी : नहीं ! मुझे आप नहला दो तो ही मे नहाउंगा।
शालिनी : उसमे देर लगेगी।
चाचाजी : मुझे कोई जल्दी नहीं है ,मे बैठा हूं इधर।
शालिनी : एक काम करो ,आप ब्रश कर लीजिए बाद मे आके नहला दूंगी।
चाचाजी ब्रश करने जाते है और जब ब्रश करके बाहर आते है तब भी शालिनी स्तनपान करवा रही थी क्युकी सुबह मे नील भूख की वज़ह से बहुत अच्छा स्तनपान करता है ,चाचाजी को देख के शालिनी उसे तौलिया और पानी की बाल्टी भरने को कहते है और चाचाजी ठीक वैसा ही करते है,तब भी शालिनी नहीं आयी।
चाचाजी : कितनी देर लगेगी ?ज्यादा देर लगेगी तो मे बाहर आके बैठता हूँ।
शालिनी : नहीं नहीं ,बस अभी आती हूं।
5 मिनट बाद चाचाजी के धैर्य का बाँध टूट जाता है और तौलिया लपेटकर बाहर आते है और इधर शालिनी भी नील को स्तनपान करवा चुकी थी और अपने टॉप को सही कर रही थी।
चाचाजी : चलो ना ,गर्मी से बाथरूम मे पसीना पसीना हो गया।
शालिनी : (मज़ाक मे ..)अच्छा है ना अब तो ठंडे पानी से नहाने का मजा आएगा आपको।
चाचाजी : जल्दी करो।
चाचाजी अब धीरे धीरे शालिनी से अच्छे से जुड़ चुके थे इस लिए अब वो अपना हक जताते हुए बात करते थे ,शालिनी भी उसको एक छोटे बच्चे के जिद जैसा समझकर बात मान जाती, क्युकी कहीं न कहीं उसको भी आनंद मिलता था।
शालिनी बाथरूम मे आती है और चाचाजी भी तौलिया निकालकर एक चड्डा पहने हुए बैठ जाते है।
शालिनी : लगता है दो दिनों में आपका मेरे बगैर कोई काम नहीं होता ,हर काम मे मेरी जरूरत पड़ती है आपको।
चाचाजी : एक बच्चा कितना करेगा?अपनी छोटी माँ से मदद लेने मे कैसी शर्म ?मेरा हक है और सब से जरूरी इन सब काम तो एक बहाना है इसके जरिए आपका प्यार ,दुलार और वात्सल्य मिलता है उससे मुझे बहुत खुशी होती है और जब आप मेरे साथ होती है तब हृदय मे एक अजीब सी सुकून देने वाली शांति मिलती है।
शालिनी : छोटा बच्चा और इतनी बड़ी बड़ी बातें, चलो अब बातें छोड़ो अभी जो काम करना है वो करे।
शालिनी अपने योग ड्रेस मे खड़ी थी उसके शरीर के सारे कटाव उस तंग ड्रेस मे साफ़ नजर आ रहे थे ,वो जब डिब्बे से पानी लेने के लिए जब झुकती तब टॉप और पेंट के बीच जो उसके कमर का भाग नंगा था वो लचक लेता है तब और भी हसीन लगने लगती और जब उसके बाल आगे आ जातें तब झटक कर पिछे ले जाती तब ब्रा मे से उसके स्तन भी दाएं बाएं होने लगते और उस पर पानी की बूंदे। आय हाय....स्वर्ग
शालिनी जब चाचाजी के सिर को धोने लगती है तब उसके टॉप मे कैद स्तनों की जोड़ी ठीक उसके सामने आके आम की माफिक जुलने लगते मानो दो पके हुए आमों की जोड़ी हो जिसमें से मीठा रस पीने को कोई भी ललचा जाए।

शालिनी चाचाजी को अच्छे से नहला देती है और बाद मे वो बाहर आ जाती है और चाचाजी अपने शरीर को सूखा कर तौलिया लपेटकर बाहर आते है और कमरे में कपड़े पहनने के लिए आते है इधर कमरे मे शालिनी अपने कपड़े निकाल रही थी पिछे से भी शालिनी बिजली गिरा रही थी। योग वाली ड्रेस पहने हुई शालिनी के खुल्ले रेशमी बाल और टॉप और पेंट के बीच मे पतली कमर और उसके नीचे थोड़ी चौड़ी तशरीफ और ठीक उसके नीचे आपस मे सटी हुई उसकी जांघों और उसके नीचे गोरी गोरी पिण्डी और पैरों मे पहनी हुई पायल
शालिनी फिर नहाने जाती है और इधर चाचाजी तैयार होकर नील को लेके हॉल मे आते है तभी घंटी बजती है और बगल वाली चाची दूध देकर चली जाती है ,जब शालिनी नहाकर अपनी ब्रा और साड़ी पहनकर बाहर आती है

,बाहर आते ही वो अपने हाथो सिर पर ले जा के अपने बाल सही करने लगती है।

शालिनी : दुध आ गया ?
चाचाजी : हाँ
शालिनी : थोड़ी देर खेलों मे नास्ता बना लेती हूं।
शालिनी हर रोज की तरह नास्ता बनाती है और दोनों नास्ता करते है और नील को पीसी हुई दाल पिलाती है ,नास्ता करने के बाद चाचाजी नील के साथ हॉल मे आते है और शालिनी घर के सारे काम करने लगती है।
चाचाजी : मेरे लायक कोई काम हो तो बताना।
शालिनी : जरूर ,अभी तो बस नील को संभाले
सब काम निपटाने के बाद शालिनी आती है और चाचाजी के बगल मे बैठ जाती है।
शालिनी : एक काम करो नील को लेके वो छोटे वाले सोफ़े पर बैठ जाइए ना।
चाचाजी : क्यु ?क्या हुआ ?
शालिनी : कुछ नहीं बस थोड़ी देर लेटने का मन कर रहा है
चाचाजी : तबीयत तो सही है, एसा हो तो कमरे मे सो जाओ
शालिनी : नहीं नहीं ! बस थोड़ा आराम करना है बस।
चाचाजी : नील को लेके बड़े वाले सोफ़े के पास नीचे बैठ जाते है और नील को भी अपनी गोदी मे ले लेते है और उसको खिलौना दे देते है ,शालिनी सोफ़े पर लेट जाती है, चाचाजी सोफ़े के बीच मे थे तो उसका सिर शालिनी के कमर को छु जाता है जब शालिनी करवट लेती है

तब उसके पेट पर चाचाजी सिर पीछे ले जाके सटा देते हैं शालिनी भी उसके सिर पर हाथ फहराने लगती है।
शालिनी : कुछ सोचा कि दो दिन बाद कैसे होगा
चाचाजी : आप भविष्य की चिंता क्यु करते हो ?अभी वर्तमान में जियो और कुछ ना कुछ हो जाएगा ,किस्मत हमे यहा तक लायी है तो आगे भी रास्ता मिल जाएगा अगर हम चिंताग्रस्त हो जायेगे तो हम रास्ता ढूंढ ही नहीं पाएंगे।
शालिनी : पर दर्द मुझे सहना होता है।
चाचाजी शालिनी को दिलासा देने के लिए कह देते है
चाचाजी : आप मेरे ऊपर छोड़ दीजिए मे कोई ना कोई रास्ता ढूंढ लूँगा।
हालाकि चाचाजी को भी कुछ नहीं सुझ रहा था।
15 मिनट बाद शालिनी नील को स्तनपान करवाती है और बाद मे उसको सुला के एक बढ़िया सी साड़ी और ब्रा जैसा ब्लाउज और थोड़े गहने ,कमरबंद पहन कर आती है।
चाचाजी : आज तो मे भी आपके साथ नृत्य करूंगा।
शालिनी : अच्छा ! कर सकोगे ना?
चाचाजी : हा ,अभी एकदम तंदरुस्त हो गया हूं।
शालिनी : ठीक है फिर चलो। पर हा नृत्य के समय नृत्य को पूरा सम्मान देना होगा तो जैसा गाने मे हो वैसा ही नृत्य करना।
चाचाजी : कोशिश करूंगा।
दोनों मिल के काफी अच्छा नृत्य करते है
,नृत्य के सम्मान के लिए कभी चाचाजी शालिनी के कमर को पकड़े तो एक बार तो नाभि को चुंबन भी करते है
और एक सीन मे तो अभिनेत्री अभिनेता के सिर को अपने सीने से लगाती है तो शालिनी भी एसा करती है।

जब नृत्य हो जाता है तब दोनों आके सोफ़े पर बैठ जाते है दोनों हांफ रहे थे पर दोनों खुश थे ,कितने दिन बाद दोनों ने साथ मे नृत्य किया ,दोनों अपना पसीना पोछते है।
शालिनी : चलिए आप थक गए होगे तो आपको शक्ति के लिए कुछ शक्तिवर्धक पीना चाहिए।
चाचाजी समझ जाते है कि शालिनी उसे स्तनपान के लिए आमंत्रित कर रही है ,उसको अभी नृत्य की वज़ह से गर्मी हो रही थी तो वो शालिनी से एक विनती करते है।
चाचाजी : मेरी एक गुजारिश है कि आप मुझे बिना पल्लू के स्तनपान करवाये ,मुझे अभी गर्मी हो रही है इस लिए,पर आपको जैसे ठीक लगे वैसा करे।
शालिनी : (मन मे ..)क्या ?बिना पल्लू के कैसे ? मुझे तो शर्म आएगी ,पर नील को तो जब कोई नहीं होता तो उसको भी बिना पल्लू के स्तनपान करवाती हूं ,ये भी मेरे बच्चे है ,और अभी कोई है भी नहीं ,और जब वो पल्लू मे रहकर स्तनपान करते है तब भी तो वो मेरा स्तन देख ही लेते है,और कल रात भी मेने उसे बिना पल्लू के ही स्तनपान करवाया था तो मुझे भी आराम मिला था ,जबकि मेने स्तन से सीधा दूध चूसने की रजामंदी दी है तो अब स्तन दिखाने मे कैसी शर्म?और जब पहली बार स्तनपान करवाते समय ही मुझसे कहा था कि उसकी कुछ मांग और ईच्छा होगी तो मुझे पूरी करनी होगी और इस बात को मेने भी माना था ,अब जब वो अपनी ईच्छा जाहिर की है तो मुझे माननी चाहिए ,इससे हमारे बीच और भी जुड़ाव होगा और हम और सामन्य महसूस करेंगे।
चाचाजी : अगर आपको कोई तकलीफ हो तो रहने दो ,और मेने कुछ गलत मांग की हो तो माफ़ कर देना।
शालिनी : नहीं नहीं! कुछ गलत नहीं कहा ,मे बस ...कुछ नहीं ! मे जब कोई नहीं होता तो नील को भी बिना पल्लू के ही स्तनपान करवाती और कल आपने भी तो बिना पल्लू के ही स्तनपान किया था ना।
चाचाजी : सच कहूँ तो कल रात को जब स्तनपान किया था तब खुद को आजाद और आपसे जुड़ा हुआ महसूस किया था ,पर लगा अगर आपको ये कहूँगा तो आप को क्या लगेगा?
शालिनी : कैसा लगेगा ? आपको मेरे से बात कहने मे अब भी हिचकिचाहट होती है ?
चाचाजी : नहीं ! बात थोड़ी असामान्य लगी इस लिए
शालिनी : सच कहूँ तो मे भी शर्म की वज़ह से ही पल्लू लगाती थी ,पर अब नहीं ,अब हमारे बीच शर्म ,हिचकिचाहट या असहजता नहीं होगी ,होगा तो सिर्फ प्यार ,दुलार ,सम्मान और कुछ भी कहने और मांगने की आजादी।
चाचाजी : ठीक है ,और धन्यवाद ! आपने मेरे दिल से बोझ हल्का कर दिया।
शालिनी : मेरे लिए आपमे और नील मे कोई फर्क़ नहीं है ,आप इतने मे ही समझ जाए बस।
चाचाजी : लगता है कुछ ज्यादा ही बात हो गई अब जो करना है वो करे।
शालिनी : (मज़ाक मे ...)क्या करना है ?
चाचाजी : आपको आराम दिलाना है दर्द से।
शालिनी : आप मुझे कैसे आराम दिलाएंगे?
चाचाजी : दुध पीकर
शालिनी : दुध तो फ्रिज में पडा है और उसे पीकर मुझे कैसे आराम मिलेगा भला ?
चाचाजी : वो ..वो ...
शालिनी : वो ..वो ..क्या ?
चाचाजी समझ जाते है कि शालिनी उसे मज़ाक कर रही है और वो उसका साफ़ साफ़ बोले बिना मानेंगी नहीं ,क्योंकि शालिनी अब पूरी तरीके से खुल गई थी और वो चाचाजी को भी खुलकर बुलाना चाहती थी,अब चाचाजी भी हार मान लेते है और वो भी खुल जाते है।
चाचाजी : वो मुझे स्तनपान करना है ,मुझे भूख लगी है।
शालिनी : अच्छा ! मेरे बच्चे को भूख लगी है ? तो एसे साफ़-साफ़ बोलो ना।
चाचाजी : मुझे दूध पीना है ,मुझे पिलाएं ना
शालिनी : पिलाती हूं पिलाती हूं ,आओ यहा आओ।
शालिनी चाचाजी को सोफ़े पर सुलाकर खुद खड़ी होके अपने साड़ी को अपने से अलग कर के ब्रा और घाघरा पहने बैठ जाती है और चाचाजी का सिर अपने गोदी मे लेती है और फिर धीरे से अपने ब्रा को अपने दाहिने स्तन के नीचे से अपनी नाजुक सी उँगलियों से ऊपर उठाने लगती है और उसका स्तन मानो सूरज जैसे अंधेरा हटा के उजाला बिखेरता है वैसे शालिनी अपने ब्रा रूपी अंधेरे को हटा कर अपने स्तन रूपी सूरज को प्रकाशित कर रही थी ,फर्क़ बस इतना है वो सूरज देखने से आँखों मे जलन होती है पर इस स्तन रूपी सूरज को देख के आँखों को ठंडक मिलती है और उस सूरज से आग बरसती है और इस सूरज से दूध बरसता है।
शालिनी ने अपना आधे से भी ज्यादा स्तन उजागर कर दिया था और दूसरे स्तन का नीचे का हिस्सा थोड़ा दिख रहा था, दोनों के लिए ये पहली बार था कि दिन के उजाले मे अपने स्तन को दिखा रही थी और चाचाजी देख रहे थे ,अब तक पल्लू के बंधन मे स्तनपान किया था पर आज एकदम खुलेपन मे वो भी शालिनी की मर्जी से स्तनपान करने वाले थे।
(वाकई चाचाजी बहुत भाग्यशाली है )
दिन के उजाले मे शालिनी के स्तन ओर भी ज्यादा गोरे और सुडोल दिख रहे थे ,चाचाजी को अपने भाग्य पर विश्वास नहीं हो रहा था कि जिंदगी उसे एसा सुनहरा पल भी दिखाएगी, एक जवान गदराई स्त्री अपनी मर्जी से सामने से दिन दहाड़े अपने दूध से भरे गोरे सुडोल और उठे हुए स्तन जिस पे गुलाबी निप्पल तना हुआ है और दूध की बूंद बस निकलने का इंतजार कर रही थी,मानो चाचाजी के होंठ का इंतजार हो।
शालिनी अपने एक हाथ से चाचाजी के सिर के नीचे ले के सहारा देते हुए ऊपर उठाती है और दूसरे हाथ से अपने स्तन को चाचाजी की ओर अग्रसर करती है जिस से स्तन पर हल्का सा दबाव पड़ता है और एक बूंद निप्पल पे आके रुक जाती है ,चाचाजी भी मानो एक बूंद भी छोड़ना नहीं चाहते थे इस लिए उसने अपने मुँह खोल दिया ताकि वो मोती जैसी बूंद गिरे तो उसके मुँह में गिरे, शालिनी भी ये देखती है और हल्का सा मुस्करा देती है और अपने स्तन को चाचाजी के खुले मुँह मे निवाले की तरह रख देती है और चाचाजी निप्पल को अपने होठों पे जकड़ के उसको चूसने लगते है और दूध की तेज धारा को मुँह मे भार के गले से नीचे उतरने लगते है ,

चाचाजी की आंखे स्वाभाविक रूप से बंध हो जाती है और राहत की वज़ह से शालिनी की भी आँखे बंध हो गई थी पर कुछ देर बाद वो उत्सुकता वश देखती है कि कैसा दिखता है।
वो देखती है चाचाजी आंख बंध किए स्तन के निप्पल को अपने खुरदरे होठों से मुँह मे कैद कर रहे थे और धीरे से चूस कर अपने मुँह मे दूध को खींच रहे है जिस से उसका गले मे हलचल होती दिख रही है और "चप चप "की आवाज कर रहे थे।
वैसे शालिनी को नील और चाचाजी के चूसने मे ज्यादा फर्क़ नहीं लगता, सिर्फ दोनों के कद के सिवा ,चाचाजी का कद बड़ा था इस लिए उसके चूसने का दबाव थोड़ा ज्यादा था पर इस से शालिनी को दिक्कत नहीं थी हालाकि चाचाजी भी ज्यादा जोर से नहीं चुस्ते थे क्योंकि ज्यादा जोर से चूसने से उसे डर था कि शालिनी को दर्द होगा ,शालिनी को अपने पति के अलावा किसी वयस्क पुरुष को स्तनपान कराने से एक रोमांच सा लग रहा था ,लेकिन उसका मन एक बच्चे की भावना कर्ता है।
15 मिनट बाद स्तन खाली हो जाता है तो शालिनी चाचाजी को अपनी दायी ओर आकर सोने को कहती है और चाचाजी दायी ओर आकर सो जाते है तब तक शालिनी अपना बायां स्तन को ढक के दाया स्तन को उजागर करती है ,चाचाजी को ये दृश्य देख के सिहरन सी होती है और अपने सारे रोम खड़े हो जाते है और वो अपने आप शालिनी के स्तन के ऊपर अनार के दाने के जैसा निप्पल को अपने मुँह मे समा लेते है और चूसने लगते है।
पहली घूंट वो थोड़ा जोर से चूसने से शालिनी को मीठा दर्द होता है और मुँह से " आह.." निकल जाती है ,बाद मे शालिनी अपने स्तन को चूसवाकर खुश हो रही थी ,वो कभी चाचाजी के सिर पर हाथ फिराती, कभी अपने स्तन पर उँगलियों से दबाव डालती ताकि चाचाजी को आसानी हो और कभी "मेरा राजा बेटा "बोल के चाचाजी को उत्साहित करती, 15 मिनट बाद ये स्तन भी खाली हो जाता है और शालिनी अपना स्तन चाचाजी के होठों से छुड़ाते हुए निप्पल को बाहर निकालती है तब एक पुचकारी से पच की आवाज आती है।
शालिनी अपने स्तन को ढक देती है पर चाचाजी अभी भी गोदी मे सो रहे थे।
शालिनी : चलो उठो खाना बनाना है
चाचाजी : मेने तो अपना खाना खा लिया तो मुझे तो सोने दो।
शालिनी : मुझे भूख लगी है अगर मे नही खाना खाएगी तो आप दोनों को भी नहीं मिलेगा।
शालिनी फिर खाना बनाने जाती है और दोनों खाना खाते है और फिर सो जाते है ,फिर शाम को शालिनी नील को स्तनपान करवाती है फिर वो अपना और नील का सामान पैक करने लगती है जिस मे चाचाजी भी मदद करते है और चाचाजी भी कुछ साड़ी और ड्रेस अपनी पसंद के रखते है क्युकी शालिनी उसे उस कपड़ों मे सुन्दर लगती थी ,शालिनी भी चाचाजी के बात का सम्मान करते हुए पैक कर देती है।
तब तक रात हो जाती है ,फिर शालिनी खाना बनाती है और तीनों साथ मे खाना खाते है और बाद मे शालिनी नील को अपने गोदी मे लेकर सोफ़े पर बैठकर टीवी देख रही थी तब चाचाजी भी उसके गोदी मे सिर रख के लेट जाते है ,शालिनी दोनों को प्यार दुलार करती है ,फिर उसको नींद आ रही थी तो वो सोने चली जाती है

,पीछे पीछे चाचाजी भी आते है ,शालिनी ने दोपहर के बाद साड़ी पहनी ही नहीं थी ,वो सिर्फ ब्रा और घाघरा पहने हुए थी ,उसे अब ये सामान्य लगने लगा था ,नील को पालने मे सुला कर वो बेड पर आती है ,जिसे देख के चाचाजी थोड़ा खिसक कर शालिनी के नजदीक आते है।
शालिनी : लगता है आपको तो मेरे बगैर नींद नहीं आती?
चाचाजी : हाँ सही कहा ,कुछ ही दिनों में आपकी आदत लग गई।
शालिनी : फिर दो दिन बाद क्या करोगे ?सोचा कुछ?
दरअसल शालिनी चाचाजी का बहाना बना रही थी पर हकीकत मे खुद को जो आदत लग गई थी उसकी चिंता थी क्युकी उसे भी चाचाजी के जिस प्रकार उसके ऊपर पैर रखके और पेट पर हाथ रख के सोते थे उसको भी अब उसकी आदत हो गई थी और सबसे बड़ी बात चाचाजी के स्तनपान करने से उसे जो राहत मिलती थी उसको वो दूर करना नहीं चाहती थी।
चाचाजी : सोच रहा हूँ ,कुछ ना कुछ रास्ता निकल आएगा
शालिनी : जरा जल्दी सोचना ठीक है ?
चाचाजी : हाँ
चाचाजी शालिनी के ऊपर पैर रख के सो जाते है और शालिनी भी उसके सिर को अपने सीने से लगा के सो जाती है ,फिर रात करीब तीन बजे शालिनी की नींद खुलती है और वो चाचाजी को जगाती है क्युकी उसके स्तन मे दर्द होने लगा था।

शालिनी : मेरे बच्चे ..मेरे बच्चे ,जरा उठो ,
चाचाजी : क्या हुआ ? सोने दो ना।
शालिनी : सो जाना पर अभी उठो ,मुझे दर्द होना शुरू हो गया है ,कृपया उठो

चाचाजी : ठीक है ,पहले मे पानी पी लेता हूं
शालिनी उसे पानी की बोतल देती है चाचाजी पानी पी लेते है तब तक शालिनी अपने ब्रा का हूक खोल देती है ,फिर दोनों वापिस से लेट जाते है,चाचाजी अपने होठों को शालिनी के स्तनों के निप्पल की ओर ले जाते है और निप्पल को चूस कर दुध पीने लगते है ,चाचाजी अपने पैर को घुटनों से मोड़ के शालिनी के पैर पर रखते है और अपने हाथ को शालिनी के कमर पे से ले जाके शालिनी की पीठ पर रख रख देते है।
चाचाजी एक दम आराम से स्तनों को चूस रहे थे ,और शालिनी कच्ची नींद से जागने की वज़ह से उसको नींद आने लगी थी और दर्द से मिल रहे राहत के आनंद मे कब उसकी आंख लग जाती है उसको नहीं पता रहता पर चाचाजी अपने कर्तव्य के पालन करते हुए आराम से स्तनपान कर रहे थे, जब एक स्तन खाली कर देते है तब देखते है शालिनी तो सो चुकी है ,फिर भी वो अपने सिर को थोड़ा ऊपर उठा के दूसरे स्तन को भी चूसने लगते है ,

शालिनी नींद मे ही अपने दर्द से मिली राहत मे खुश हो रही थी

,जब दूसरा स्तन भी खाली हो जाता है तब भी चाचाजी उसे चूस रहे थे ,क्युकी अभी वो आजाद थे इस लिए वो बिना किसी डर के चूस रहे थे ,फिर चाचाजी को भी कब नींद आ जाती है उसे पता नहीं रहता और वो सो जाते है।
सवेरे जब शालिनी की नींद खुलती है तब देखती है कि चाचाजी उससे किसी बच्चे की तरह लिपटे हुए सो रहे है उसका सिर उसके नंगे स्तन पर टिका हुआ है ,वो चाचाजी को हल्के से हटाने की कोशिश करती है तब चाचाजी और जोर से लिपट जाते है ,जब शालिनी थोड़ा जोर लगा के चाचाजी को हटाती है तब चाचाजी की नींद खुल जाती है तब वो देखते है कि शालिनी अपनी ब्रा पहन रही थी

और जब शालिनी चाचाजी को देखती है तब मुस्करा देती है और अपने हूक लगा देती है।
शालिनी योग करती है
और चाचाजी फ्रेश होने जाते है बाद मे शालिनी ने चाचाजी को नहलाया ,नहाते समय चाचाजी शालिनी को गिला कर देते है बाद मे शालिनी भी नहाकर तैयार होकर आती है

और नील को स्तनपान करवाते हुए दोनों नास्ता करते है ,नास्ता करने के बाद हररोज की तरह कामकाज निपटाकर शालिनी कुछ गाने पर नृत्य करती है

तभी एक गाने मे शालिनी के ब्लाउज की डोरी टूट जाती है ,फिर वो ब्लाउज बदलकर ब्रा पहन लेती है ,जिसमें उसके स्तन काफी दिख रहे थे

,फिर जब शालिनी थक कर बैठ जाती है तब तक उसके स्तनों मे दुध भर जाता है वो चाचाजी को स्तनपान करवाने लगती है ,स्तनपान कराने के बाद शालिनी खाना बनाने जाती है और तीनों खाना खाकर सोने आते है ,तब भी शालिनी चाचाजी को स्तनपान करने को कहती है ,तब चाचाजी उसे मना करते है।
चाचाजी ने क्यु मना किया ?इसका जवाब अगले अपडेट मे ....