Update 28
आज फिर सूरज अपनी सुनहरी किरणों को फैलाता हुआ काली और गर्म अंधेरी रात को दूर करते हुए आकाश मे अपनी यात्रा प्रारम्भ करते हुए धीमे धीमे ऊपर आते हैं, जिससे प्रकृति भी अपनी अंगड़ाई लेते हुए जगती है, पक्षी चहचहाने लगते है, सभी पशु अपनी आवाज करते हुए सुबह का स्वागत करते हैं, छोटे बछड़े अपनी माँ के पास आकर उसके थनों से उसका दुध पीने लगते है, सभी बुजुर्ग लोग भी अपनी आदत से जल्दी जग कर अपनी रोज की दिनचर्या में लगने लगते है।
इधर बाबुजी की नींद भी शालिनी से पहले खुलती है और सबसे पहले सोती हुई अपनी सुन्दर बहु को देखते हैं,

शालिनी को सबसे पहले देखना बाबुजी का सौभाग्य था जिसे उसका पूरा दिन अच्छा बीतता,पहले तो बाबुजी शालिनी को सिर से लेकर पाव तक पूरा निहारते है, बिखरे घने, काले और लंबे बाल जो कुछ आगे आ गए थे जो उसकी नाभि तक थे, कुछ पीठ को घेरे हुए थे, सुंदर मासूम चेहरा, पतली गर्दन, मानो मुट्ठी में आ जाए, और थोड़े नीचे भारी गोल-मटोल और दुध से भरे और शालिनी के शरीर का सबसे खूबसूरत और प्यारा अंग जो ब्लाउज रूपी जैल में कैद थे और उसमे से बाहर आने को तड़प रहे थे, जिसके बीच की गहरी खाई जिसके बीच उंगली घुसने तक कि जगह नहीं है, बाबुजी की नजर स्तन रूपी पर्वत की चढ़ाई करके फिर उधर से फिसलकर स्पाट मैदान रूपी पेट पर घूमने लगती हैं, जिससे थोड़ी चर्बी होने से मानो कोई गिली मिट्टी पर चलने जितना मुलायम लगता है वैसा महसूस हो रहा था, गिली मिट्टी जैसा लगे भी क्यूँ नहीं, उसके बीच गहरे कुए जैसी नाभि भी है, जो उस चिकने पेट की शोभा को कई गुना बढ़ा देता है, थोड़ा नीचे घुटनों से भी थोड़ा जांघों को पास तक लहंगा ऊपर उठ गया था, जिससे चिकने पैर, पिण्डी और थोड़ी जांघों को उजागर कर रहा था, किसी भी मर्द के लिए यह दृश्य नयनरम्य और दिन बनाने वाला होगा।

बाबुजी आराम से यह दृश्य को एक पुरुष की दृष्टी से देख रहे थे, तभी उसके भीतर का ससुर उसे होश में लाता है, बाबुजी फिर फ्रेश होने जाते हैं और वापिस आकर खटिया पर बैठकर दातुन करते हैं, और शालिनी की खूबसूरती को निहारने लगते है, तभी शालिनी अंगड़ाई लेकर जगती है और बाबुजी को देख मुस्कराती है।

शालिनी : सुप्रभात बाबुजी! आप दातुन कर लो में आती हूं,
शालिनी फ्रेश होने जाती हैं, फिर आकर नील को सोते हुए देखती हैं, फिर जाकर अपने योग के कपड़े पहन कर आती हैं, तब तक बाबुजी दातुन कर चुके थे, फिर दोनों मिलकर योग करते हैं,

शालिनी नील को स्तनपान करवाकर बाबुजी को नहलाने आती हैं तब अपने बालोंको बाँधदेतीहैं

, आज जब शालिनी झुककर पानी का मगा भरने जाती हैं तब बाबुजी हल्के से उसकी गोरी कमर पर चिकोटी काट देते है, जिससे शालिनी को हल्का दर्द हुआ पर वो बनावटी गुस्सा दिखाने लगी,जहां पर बाबुजी ने काटा था वहां लाल निशान हो गया
शालिनी : आप दिन-दिन नटखट और शरारती होते जा रहे हैं, लगता है आपको अब डांटना पड़ेगा,
बाबुजी : मैं तो चाहता हूं आप डांट लगाए, काफी साल हो गये किसी ने एसे बात नहीं की, नीरव की माँ कभी डांट देती, और वैसे " जैसा दादा वैसा पोता "
शालिनी : पोते को बीच में ना लाओ, वो तो बहुत अच्छा बच्चा है, वो तो अपना दुध पीकर सो जाता है किसी को परेशान नहीं कर्ता, मुझे तो बिल्कुल भी नहीं परेसान कर्ता
बाबुजी : मैं उसे सीखा दूंगा की कैसे तुम्हें तंग करना है, इसलिए अभी से आपकी ट्रेनिंग चालू कर दिया, जिससे आप तैयार रहो एसी शरारतों से
शालिनी : "जैसा दादा वैसा पोता" नहीं ब्लकि "जैसा बाप वैसा बेटा", अब पता चला नीरव ने एसी आदतें कहा से सीखी, वो भी बस मुझे परेसान करने का बहाना ढूंढ लेता है, जब कभी सोफ़े पर आराम से बैठी होती तब अचानक से कमर पर चिकोटी काट लेता, कभी जब खाना बना रही होती तब पिछे से आकर जकड़ लेता और दबा देता।

बाबुजी : क्या दबा देता?
शालिनी का चेहरा लाल हो जाता है उसे लगता है भावना में ज्यादा बोल दिया, इसलिए वो कुछ देर चुप होकर नीचे देख मुस्करा देती हैं, बाबुजी भी समझ जाते हैं कि शालिनी क्या कहना चाहती है, पर शर्मा रही हैं, फिर शालिनी जवाब घुमा देती हैं।
शालिनी : वो मुझे पूरा दबा देते और उठा कर घुमाने लगते, लगता है आप भी सासु माँ के साथ एसा करते होंगे इसलिए देख देख सीख लिया होगा।
बाबुजी : हाँ! सही कहा, जब वो छोटा था तब कभी कभी आवेश में आकर नीरव की माँ को प्यार करने लगता।
शालिनी : क्या सासु माँ इतनी सुंदर थी?
बाबुजी : सिर्फ सुन्दर नहीं गुणी और समझदार ,हमेसा वो मुझे प्यार करती और हमारा ख्याल रखती, साथ ही तब उस समय भी वह आजाद ख्यालों से जीवन जीती थी, वो अंग्रेजी में कहते हैं ना " मार्डन "
दोनों अपने अपने जीवनसाथी के बारे में बता रहे थे, जिससे पता लगता है कि दोनों के मन में एक खालीपन था,
शालिनी फिर बाबुजी को साबुन लगाकर बड़े अच्छे से नहलाने लगती हैं, आज उसके पूरे कपड़े गिले हो गए थे,

जिससे शालिनी के निप्पल ब्लाउज मे तने हुए दिख रहे थे, पर शालिनी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था, क्योंकि अब वो बाबुजी के साथ काफी घुलमिल गई थी और खुल भी गई थी। बाबुजी को नहलाने के बाद वो भी नहाने जाती हैं, फिर आकर नास्ता बनाती है, और नील को स्तनपान करवाती हैं पर स्तनपान करवाते समय नील दुपट्टे को बार बार खींच कर हटा देता था, बाबुजी यह देख रहे थे।
बाबुजी : लगता है मुन्ने को आज ज्यादा गर्मी लग रही हैं, वैसे भी गर्मी अब दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, इस बार पिछले साल के तुलना में ज्यादा है, अभी तो शुरुआत है, पता नहीं आगे और कितनी गर्मी बढ़ेगी, हमको तो आदत है, पर आप दोनों को ज्यादा तकलीफ होगी, एसा हो तो शहर से A.C. मंगवा लेते हैं।
शालिनी : नहीं नहीं..वो चाचाजी ने बताया था कि बच्चे को पहले साल सभी ऋतु सहन करनी चाहिए ताकि आगे उसको तकलीफ ना हो और उसकी रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है।
बाबुजी : बात सही है उसकी, पर क्या मुन्ना सह पाएगा ?इस मासूम का ख्याल रखना।
शालिनी : हम मिलकर इसका ख्याल रखेंगे
बाबुजी : अभी एक बात याद आयी अभी तुम मुन्ने को स्तनपान करवाने के पहले अपने स्तन को धो लेना ताकि पसीने और उसकी गंध से मुन्ने को संक्रमण ना हो
शालिनी : हाँ ठीक है, अब से ध्यान रखेंगी।
नास्ता करने के बाद शालिनी बाबुजी को गोदी मे आकर लेटने को कहती है,बाबुजी आकर गोदी में लेट जाते हैं और जैसे ही शालिनी दुपट्टा से बाबुजी का सिर ढंकने जाती हैं तब बाबुजी मना करते हैं
बाबुजी : क्या बिना दुपट्टा ढंके करवा सकते हो? वो क्या है गर्मी की वजह से थोड़ा दिक्कत होती हैं,पर आपको जैसा ठीक लगे वैसे करेंगे
शालिनी : मन में..) बाबुजी को बिना दुपट्टे के स्तनपान करवाने में बहुत शर्म आएगी, पर देखा जाए तो दुपट्टे के नीचे तो वो मेरे स्तनों को देख ही रहे होते है और सिर्फ देखते थोड़ी है उससे दुध भी चूस कर पीते हैं, अगर उससे चूसवाने मे कोई दिक्कत नहीं है फिर उसे देखने में क्यों शर्माना?अभीतक उम्र और रिश्ते की खातिर पर्दा करती थी, पर अब तो रिश्ते में एक नया बदलाव आया है जिससे लगता है उसमें पर्दे की जरूरत नहीं है ,वैसे भी गर्मी ज्यादा बढ़ गई हैं, इसलिए उनको भी दिक्कत होगी, मे सिर्फ अपने दर्द और राहत का सोचती हूं, मुझे बाबुजी के सुविधा और आराम के बारे में सोचना चाहिए,पर्दा नहीं करने से कुछ बिगड़ थोड़ी ना जाएगा, वो तो वैसा ही होगा जो पर्दे के अंदर हो रहा था,मुझे इससे दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
बाबुजी शालिनी को इतनी देर चुप देखकर दुविधा में पड़ जाते हैं, उसे लगता है कि उसने ज्यादा कह दिया।
बाबुजी : बहु...बहु! अगर आपको कुछ भी शंका या दिक्कत हो तो फिर रहने दो, आधे घंटे की तो बात है, मैं सहन लूँगा
शालिनी : नहीं.. नहीं ! आप क्यूँ सहन करेंगे?आप मेरे लिए इतना सब कर रहे हैं और हर बार मेरे इस दर्द में राहत देने के लिए हाजिर रहते हैं, और आप मेरे ससुर है, मे आपके आराम और सुविधा का इतना भी ध्यान नहीं रख सकती तो फिर मुझे धिक्कार है ,सिर ना ढकने से क्या ही फर्क़ पड़ जाएगा,मुझे बस दर्द से राहत और आपकी अच्छी सेहत चाहिए।
बाबुजी : धन्यवाद बहु ! मेरी तकलीफ को समझा
शालिनी : बस अब यही रह गया था बाकी की आप मुझे पराया कर दे और धन्यवाद कहे,मेने कभी आपको धन्यवाद कहा है, जब भी आप मुझे दर्द से छुटकारा दिलाते हैं, नहीं ना..क्युकी में आपको अपना मानते हुए सब करती हूं
बाबुजी : माफ करना मेरा यह इरादा नहीं था।
शालिनी : बस अब माफ़ी माँगना बाकी रह गया था।
बाबुजी असमंजस में पड़ जाते हैं कि अब क्या कहे तभी शालिनी जोर से हसने लगती हैं
शालिनी : आप तो बिल्कुल चुप हो गए, मे मज़ाक कर रही थी, आइए जल्दी से दुध पी लीजिए अभी वो मजदूर आते होंगे, आज मुझे कपड़े धोने तालाब जाना हैं।
बाबुजी गोदी में लेट जाते हैं और शालिनी के हूक खोलते हुए देख रहे थे, सबसे पहले शालिनी के नीचे का हिस्सा दिखता है फिर जैसे जैसे हूक खुलते हैं वैसे वैसे स्तन धीरे धीरे नीचे आते जाते थे ,बाबुजी को लगा अभी स्तन रूपी रुई की गेंद उसके मुँह पर गिरेगी पर शालिनी की कसरत और योग और मदमस्त जवानी उसे तने हुए रखती हैं ऊपर से उसके ऊपर तनी हुई गुलाबी निप्पल जो दुध की बूंद गिराने को तैयार थी, क्युकी स्तन कब से दुध से भरे हुए थे पर दोनों की बातों में हुई देरी से स्तन दुध से रिसने की कगार पर था ,जैसे ही एक बूंद बाहर आती हैं बाबुजी बिना देरी के निप्पल को मुँह में भर लेते हैं और चूस कर गटक लेते है, शालिनी की आंखे बंध हो जाती हैं, बाबुजी की भी आंखे कुदरती रूप से बंध हो जाती हैं, जब शालिनी को कुछ राहत मिली तब वो धीरे से आंखे खोलकर देखती हैं बाबुजी उसके स्तन को भूखे बच्चे की तरह चूस रहे हैं, उसके कहने को तो कह दिया कि वो बाबुजी को बिना पल्लू के स्तनपान कराएगी पर असली में उसने जब बाबुजी को स्तनपान करते देखा तब उसको शर्म का अनुभव होता है, हालाकि उसने चाचाजी को एसे स्तनपान करवाया था पर बाबुजी उसके ससुर थे एक रिश्ता था और उस रिश्ते की मर्यादा उसे यह दृश्य देखने से शर्मशार कर रही थी,शालिनी की आंखे फिर से बंध हो जाती हैं उसके बाद बाबुजी भी अपनी नजर उठाकर देखते हैं कि शालिनी की आंखे बंध थी और उसके चेहरे पर एक प्रकार की शर्म और चिंता दिख रही थी, तभी उसने कुछ नहीं किया, वो चुपचाप स्तनपान करने लगते है,

जब वो अपनी नजरों को नीचे करते हैं तब उसका ध्यान शालिनी के सुन्दर सफेद रुई जैसे स्तनों पर आता है जो बिल्कुल उसके पास था, जो उसके चूसने से हिल रहे थे, बाबुजी का एक हाथ शालिनी की कमर को लिपट जाता है, शालिनी भी उसे समान्य तरीके से लेती हैं क्युकी की चाचाजी भी अक्सर एसा ही करते थे ,शालिनी सामन्य रूप से स्तनपान करवाती हैं, हालाकि उसकी आँखें ज्यादातर बंध ही थी, वो कभी कभार अधमुंदी आँखों से देखती की बाबुजी कैसे चूस रहे हैं ,जब दोनों स्तन खाली हो जाते है तब बाबुजी खड़े होकर चुपचाप बाहर चले जाते है, शालिनी अपने ब्लाउज के हूक बंध करके बर्तन धोने और सारे घर के काम करने लगती हैं।

कुछ देर बाद सभी मजदूर आ जाते है और अपना अपना काम करने लगते है, जब शालिनी सब काम पूरा कर लेती हैं तब वो नील को स्तनपान करवाकर सुला देती हैं,फिर वो बाबुजी को कॉल करके तालाब चली जाती हैं, कुछ देर बाद बाबुजी भी बिजली कर्माचारियों के पास आते हैं जो नया ट्रांसफार्मर लेकर आए थे, कुछ देर रुकने बाद बाबुजी वापिस घर आते हैं, और नील को लेकर आँगन मे चक्कर लगाते हैं, और सब काम पर नजर रख रहे थे।
(सुबह को रसीला का घर....)
पक्षियों की चहचहाती आवाज और सासु माँ की आंगन साफ़ करने से हो रही आवाज से रसीला की नींद खुलती है

, वो अपने कपड़े सही करके बाल सही से बाँध कर अंगड़ाई लेकर खड़ी होती हैं, वो नहाने जाती हैं, तभी उसके ससुर की भी नींद खुल जाती हैं और राजू गहरी नींद में सोया हुआ था, सुन्दरलाल खटिया पर बैठे बैठे दातुन चबा रहा था, तभी बाथरूम का दरवाजा खुलता है जिसमें से पायल की "छन छन"करती हुई रसीला बाहर आती हैं बाथरूम के भीतर साड़ी पहने हुए से उसकी साड़ी थोड़ी गिली हुई थी, उसने अपने तौलिये को सिर पर रखा हुआ था

, सुन्दरलाल अपने सामने इस सुंदर दृश्य देखकर मंत्रमुग्ध हो गया था, पर असली सुन्दर दृश्य तो उसने देखा ही नहीं था, वो तो जब रसीला अपने तौलिये को रस्सी पर सुखाने रखती हैं तब सुन्दरलाल की आंखे फटी की फटी रह जाती हैं उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था,उसने दो तीन बार अपनी आँखों को मसल कर देखा तब उसकी पत्नी उसके पास आती हैं।
सास : ज्यादा आंखे मत मसलों जो देख रहे हों वो सच मे है,
सुन्दरलाल : पर अभी इसको समय है ना?
सास : यह उसका निर्णय है, वो भी मेरी सहमती से।
जब रसीला ने तौलिया रसी पर डाला तब सुन्दरलाल देखता है कि रसीला के पल्लू के नीचे ब्लाउज नहीं है, जब उसने तौलिया डाला तब बाजू में से उसके स्तन का हिस्सा दिख रहा था, जिसपर उनको यकीन नहीं हो रहा था।
सास : वो गर्मी बढ़ गई हैं और ऊपर से बिजली चलै जाने से बहु को तकलीफ हो रही थी ऊपर से तुम तीनों उसको शांति से बैठने कहा दे रहे थे, एक जाता तो दूसरा तैयार, दूसरा जाए तो तीसरा तैयार, जब तीसरा जाए तो पहला वापिस से मुँह फाड़े तैयार रहता था,
सुन्दरलाल हसने लगता है, तभी मुन्नी रोने लगती हैं और रसीला उसे लेकर सुन्दरलाल के सामने ही स्तनपान करवाने लगती हैं, सुन्दरलाल को यह दृश्य देखना था पर अपनी पत्नी के कहने पर उसे नहाने जाना पड़ता है, तब तक राजू भी जग गया था, उसने जब आंख खोली तब सबसे पहले यही दृश्य देखा कि उसकी भतीजी अपनी माँ के स्तन को चूस रही हैं, राजू भी अपनी भाभी को बिना ब्लाउज के देखकर हैरान हो जाता है साथ ही खुश भी होता है ,राजू अपनी भाभी को देखता रहता है, रसीला भी कभी कभी उसके सामने देख मुस्करा देती।
जब करीब करीब आधा स्तन रह गया था तब मुन्नी का पेट भर जाता है और वो निप्पल को अपने मुँह से निकालकर मुँह फ़ेर देती हैं, रसीला के दो तीन बार प्रयास करने के बाद भी वो मुँह फ़ेर लेती हैं तब रसीला पल्लू सही करके मुन्नी को अपने बाजू में लिटा देती हैं, फिर वो एक नटखट मुस्कराहट के साथ राजू की ओर देखती हैं

और आँखों से अपने स्तन की ओर इशारा करके स्तनपान का पूछती हैं, राजू का तो खुशी का ठिकाना नहीं रहता,मानो उसका तो दिन बन गया, वो तुरत खड़ा होकर मुन्नी को अपनी खटिया पर लेटा कर खुद अपनी भाभी के गोदी मे सिर रखकर लेट जाता है।
सास : यह क्या?सुबह सुबह तो शांति रखो, अब तुम्हें देर नहीं हो रही?
राजू : अभी बाबुजी नहाने गए हैं और मुझे फिर शाम को मिलेगा, अभी जितना है उतना पीने दो, वैसे भी भाभी के कहने पर पी रहा हूं।
सास : लगता है तुम इसे बिगाड़ दोगी बहु ,इसे लत लग जाएगी फिर।
रसीला : वैसे ये सुधरा हुआ कब था?,मुन्नी के जन्म से ही इसकी नजर इस दुध पर थी, और अन्न प्रासन के बाद तो अधिकार भी मिल गया इसे,मेरे लिए तो अभी भी वहीं छोटा लड़का है जो मुझसे शर्मा कर भाग जाता था, और अभी तो जाने का नाम नहीं लेता।
तब तक सुन्दरलाल नहाकर आते हैं वो देखते हैं कि राजू रसीला के गोदी में लेटकर स्तनपान कर रहा है,

वो रसीला के पास आकर ईर्ष्या और दीन भाव से राजू की ओर देख रहे थे ,जिससे रसीला कि हसी छूट जाती हैं,सुन्दरलाल मुन्नी के पास जाकर बैठ कर उससे खेलकर अपना दिल बहलाता है,कुछ देर बाद राजू भी अपना मुँह पोछते हुए खड़ा होता है और नहाने चले जाता है, और रसीला नास्ता बनाने चली जाती है।
सब लोग साथ मे नास्ता करते हैं और राजू अपने पढ़ाई के लिए शहर चला गया और रसीला और उसकी सास घर के काम करने लगते है, सुन्दरलाल का ध्यान अपनी बहु के ऊपर था, बिना ब्लाउज के और सिर्फ पल्लू से ढंके हुए स्तन काम करते समय झूल रहे थे,

और निप्पल तन कर अपना स्थान बता रहे थे, रसीला जब भी अपने ससुर को देखती तब वो मुस्करा देती, जब सब काम खत्म हुआ तब रसीला पल्लू से चेहरा पोछते हुए खटिया पर बैठ जाती हैं, और वो बाबुजी से मुन्नी को मांगती है और थोड़ी देर उसके साथ दुलार करती हैं।
सास : बहु ! वो आज कपड़े धोने तालाब जाना हैं कि घर पर धोने वालीं हो?
रसीला : तालाब पर ही धोने जाना हैं, वो बस अपनी छाती का भार कम कर लूं, बाद में जाऊँगी।
सास समझ जाती हैं कि रसीला क्या कहना चाह रही हैं, रसीला पहले मुन्नी को पिलाने लगती हैं, पर मुन्नी एक स्तन मे से भी आधा नहीं पीती, रसीला अपनी सास को मुन्नी सोंप देती हैं जिसे लेकर सास बाहर टहलने जाती हैं जिससे मुन्नी को ताजी हवा भी खिला दे और रसीला और अपने पति को थोड़ा अकेलापन मिल जाए जिससे रसीला अच्छे से स्तनपान करवाएं।
रसीला : आइए बाबुजी ! अपने हिस्से का दुध पी लीजिए फिर मुझे कपड़े धोने जाना हैं
बाबुजी : (नाराजगी दिखाते हुए..)सुबह को राजू को क्यू पिलाया?अब जब वो नहीं है तो मुझे बुला रही हो,
रसीला : अरे अरे...देखो तो, ससुर जी नाराज हो गए, उसको कॉलेज जाना था, पूरा दिन उसे नहीं मिलेगा, आपको तो वो नहीं आता तब तक मिलेगा, और उस बिचारे को मुन्नी से जो बच गया था वो मिला था, अभी आप अपने बेटे से जलने लगे
बाबुजी : जलता नहीं हूं बस, मुझे पीना था,
रसीला : अब तो पीला रही हूँ ना, अभी दोनों भरे पड़े हैं, आप जी भरकर पी लीजिए, वो तो रात को आएगा, अभी गुस्सा छोड़े और आइए मुझे देर हो रही हैं,ठीक है आज पूरे दिन जब भी पिलाना होगा तब सबसे पहले मे आपको बोलेंगी।
सुन्दरलाल यह सुनकर खुश हो जाता है और तुरत आकर लेट जाता है।
सुन्दरलाल : आज लेटकर पिलाओ ना, दोनों को आराम मिलेगा।
रसीला खड़ी होकर अपने ससुराल के पास आकर लेट जाती हैं और धीरे से अपना पल्लू हटाकर स्तन को अपने ससुर के मुँह के सामने रख देती हैं, सुन्दरलाल भी बिना देरी के उस गोल सुडोल दुध से भरे स्तन की निप्पल को अपने होठों मे भर लेता है,

रसीला पल्लू से सिर ढककर स्तनपान से मिल रहे आनंद का लाभ ले रही थी उसकी आँखें बंध हो जाती हैं, सुन्दरलाल भी आज बड़ी फ़ुरसत से समय लेकर आराम से चूस रहे थे, जब दोनों स्तन खाली हो जाते है तब रसीला एक हल्का फुल्का ब्लाउज पहनकर पल्लू सही करके गंदे कपड़े लेकर तालाब जाती हैं, सुन्दरलाल मुँह में अपनी बहु के गाढ़े मीठे दुध का स्वाद लिए और होठों पर खुशी की मुस्कान लिए अपनी बहु की ठुमक ठुमक कर जा रही अपनी बहु को देख रहा था।
तालाब पर....)
ज्यादातर गांव की महिलाओं का जमावड़ा हो गया था अब कोई कोई अपने अपने समय पर आ जा रही थी,रसीला जब आती है तब सरला भी उधर अपने कपड़े धो रही थी, रसीला उसके पास आती हैं।

रसीला : क्यूँ री ! कहा थी इतने दिन?ना कोई खबर और ना कोई पता?
सरला : वो भाभी मेरे पीरियड थे तो मैं घर पर आराम करती थी और फिर में अपने मायके गई थी कुछ दिन।
रसीला : वो बहुरानी नहीं आयी ?
सरला : आ रही होगी अब तो उसे याद ही होगा, पिछली बार उसे बहुत अच्छा लगा था इसलिए आज जरूर आएगी।
रसीला के चेहरे पर एक अजीब सी खुशी और मुस्कराहट थी, मानो वो किसी बात को वो बताना चाहती हैं पर सीधे कह भी नहीं सकती, उसके वर्तन मे एक उतावलापन दिख रहा था।
सरला : क्या भाभी आज आप बहुत खुश दिख रही है? लगता है भैया घर आ गए लगते है,
रसीला : शर्माकर ..)अरे नहीं वो कहा वापिस आए हैं, वो तो बस ऐसे ही
सरला : नहीं भाभी यह खुशी कुछ और ही है, देखो आपका चेहरा पूरा गुलाबी हो गया है, कुछ तो जरूर हैं, मुझे तो आप बता सकती हो,
रसीला का स्वभाव था कि कोई बात उसके पेट में टिकती नहीं थी, उसे बस बहाना चाहिए था अपनी बात बताने का, जो सरला के रूप मे मिल गया।
रसीला आसपास देखती हैं, कुछ औरते थी पर वो थोड़ी दूर थी,
रसीला : किसीको बताना मत
सरला : यह भी कोई कहने की बात है?आप बताओ ना, अब तो मुझे सब्र नहीं हो रहा।
रसीला : तुम्हें तो पता है मुन्नी के अन्न प्रासन के बाद राजू को मेरे दुध पर अधिकार मिला था
सरला : हाँ, पता है
रसीला : वो अभी कुछ दिनों पहले मेरे पति को काम से बाहर जाना पड़ा, ऊपर से राजू को परीक्षा के चलते शहर रुकना पड़ा, ऊपर से मुन्नी ने पीना कम कर दिया उस दिन मेरे इस थनों में इतना दर्द हुआ था, मेरे आंसू निकलने लगे थे, तभी मुझे याद आया कि मेरे ससुर भी मेरे स्तनों को घूरते रहते, जब स्तनपान करवाती तब भी सामने बैठे रहते थे, इसलिए मेरे दिमाग में यह बात आयी कि क्यू ना अपने बूढे ससुर को इसे पिलाया जाए जिससे मुझे राहत मिलेगी, अब मेरे ससुर भी मेरे स्तनपान करते हैं, पर हाँ यह सब मेरी सास की सहमती से किया है ताकि आगे दिक्कत ना आए
सरला : क्या? आप अपने ससुर को स्तनपान करवाती हैं?
रसीला : हाँ, एक बात कहूँ, इसमें मजा आ रहा हैं, एक रोमांच आता है, और तो और अब तो हमने नियम बना लिए है यह दाया वाला देवर का और बायाँ वाला बाबुजी का,ताकि दोनों को समान दुध मिले
सरला : क्या सच में भाभी?आप यह कर रहे है?यह एक बहादुरी भरा निर्णय है
रसीला : हाँ, कल को मुझे घर की रानी बनाना पड़े तो यह सब मुझे काम आयेंगे,
सरला : आप तो बड़ी होशियार हो भाभी।
जब यह दोनों अपनी बातों में खोयी हुई थी तब शालिनी उसके पिछे खड़ी हो गई थी उनको पता भी नहीं चला, शालिनी ने ज्यादातर बातें सुन ली थी, उसे भी हैरानी होती हैं, उसे अंदाजा था एसा होगा पर इतनी जल्दी होगा यह नहीं पता था,
शालिनी : मन में..)यह रसीला तो काफी तेज निकली इतनी जल्दी अपने ससुर को स्तनपान करवाने लगी, और यह सरला खुद घर की रानी बन चुकी हैं और अपने ससुर से अपने खानदान आगे बढ़ाने वाली है फिर भी रसीला की बातों से हैरान हो रही हैं,
रसीला की बात सुनकर सरला के मन भी उसे अपनी बहादुरी और घर की रानी बनने की बात बताने को उतावला होने लगता है
सरला : भाभी ! मैं भी एक बात कहना चाहती हूं, आप किसी को अभी मत बताना।
रसीला : कसम से किसी को नहीं बताऊंगी, जल्दी बता
सरला : वो हुआ यूं कि मुझे गर्भ नहीं ठहर रहा था, इसलिए हम अस्पताल गए थे, वहां पता चला मेरे उनको समस्या है, इसलिए मुझे दूसरे रास्ते से पेट से होना होगा, पर उसमें खर्चा बहुत ज्यादा था, मेरे यह बहुत मायूस हो गए थे, फिर कहीं से इसे "नारी घर की रानी " प्रथा के बारे में पता चला फिर उन्होंने काफी मेहनत से मुझे मनाया की...
रसीला : क्या मनवाया?
सरला : यही की मे अपने ससुर से गर्भवती हो जाऊँ
रसीला : क्या?क्या कह रही है?तुम तो मुझसे भी चार कदम आगे निकली, तेरे ससुर की तो चांदी हो गई जो इतनी कमसिन लड़की मिल गई है
सरला : अरे..नहीं भाभी ! उन्होंने तो साफ मना कर दिया, काफी दिनों तक उन्होंने बात तक नहीं की, वो तो मेरे पति के काफी समझाने और मेरी सास की कसम और खानदान आगे बढ़ाने का वास्ता देकर मुस्किल से समझाया, पहले तो मुझे बहुत असहजता हुई पर मेरे ससुर के प्यार और वात्सल्य ने मुझे काफी सहज और अपनापन महसूस करवाया, कभी कोई जबरदस्ती नहीं और हमेसा मेरी भावना को समझ कर आगे बढ़ते हैं
रसीला : वो सब ठीक है, यह बताना कि मजा आ रहा है कि नहीं ?
सरला शर्मा जाती हैं और उसके चेहरे पर लालिमा उतर आती हैं, वो नीचे देख मुस्कराने लगती हैं, जिसे देख रसीला समझ जाती हैं।
रसीला : लगता है काफी मजे ले रहे हो, कोई बात नहीं, खानदान आगे बढ़ाने के लिए जरूरी भी है, काम करना ही है तो फिर आनंद उठाते हुए ही करे,
सरला : हाँ ! भाभी इतनी उम्र होने के बावजूद भी थका देते हैं, कभी कभी तो आँखों से आँसू तक आ जाते है,
रसीला : लगता है काफी आग भरी है, हो भी क्यों न जब नयी कमसिन कुंवारी बहु भोगने मिले तो किसी की भी आग जल जाए।
दोनों अपनी बातों में खोयी और शालिनी पीछे खड़ी है इस बात से अनजान दोनों बात कर रही थी, वो अचानक से सरला की नजर पीछे जाती हैं तब वो चौक जाती हैं।
सरला : अरे भाभी ! कभी आयी?
शालिनी : बस अभी आयी,वैसे क्या बात हो रही है।
शालिनी अनजान बनकर बातें करती हैं ताकि उसे और सरला दोनों को असहजता ना हो,
रसीला : कैसी हो बहु रानी?आज देर हो गई?
शालिनी : वो घर पर काम चल रहा हैं, वो बिजली नहीं थी तो पानी भरने टंकी तक ना आना पड़े इसलिए बाबुजी ने घर पर दो टंकी बनवाने का निर्णय किया है,जिससे तकलीफ ना हो
रसीला : सरपंच जी! कितना सोचते हैं तुम्हारे बारे मे, कितना ख्याल रखते हैं, ससुर हो तो एसा, एक हमारे ससुर है बस दिनभर खटिया पर बैठे बैठे ताड़ने में लगे रहते हैं
शालिनी : क्या ताकतें रहते हैं?
रसीला : हम जवान औरतों में सबसे ज्यादा क्या दिखता है?हमारे ये गुंबद, अभी तो गर्मी से हाल बेहाल हो रखा था इसलिए कपड़े तो काटने को दौड़ते है, इसलिए बिना साड़ी के घूमते हैं,अब तुमसे क्या छुपाना, कल तो गर्मी के मारे हालत खराब हो गई थी इसलिए मेने आज घर मे ब्लाउज पहनना छोड़ दिया
शालिनी : क्या?सच में?सभी के होते हुए कैसे?
रसीला : वो मुन्नी और राजू ने तो स्तनपान किया है, रहे बाबुजी उसको भी राजू की गैरहाजिर में पिलाना पड़ा, वैसे सब ने मेरे स्तनों को देखा ही है, इसलिए मेने ब्लाउज ना पहनाना का निर्णय लिया,
शालिनी : अपने ससुर को स्तनपान करवाना कुछ अजीब नहीं लगा
रसीला : ज्यादा फर्क़ नहीं पड़ता, वैसे तुमने तो चाचाजी को अन्न प्रासन को पिलाया हुआ है
शालिनी : वो तो प्रथा निभाने के लिए,
रसीला : तुम्हें भी यह प्रयास करना चाहिए, वैसे भी दोनों बुढ़े विधुर हो चुके हैं उसे मनना आसान होगा, आखिर है तो मर्द ही,
शालिनी अनजान बनते हुए बात टालने लगती हैं
शालिनी : बिना ब्लाउज के भाभी काम करने में और सब के सामने आसानी नहीं होती होगी
रसीला : तुम पहली बार गांव आयी हो इसलिए यह पूछ रही हो, यह अभी आगे गर्मी इतनी बढ़ेगी तब गाव में छुट दी जाती हैं ब्लाउज ना पहनने के लिए, पर जब बाहर निकले तब दुपट्टे या पल्लू से ढंककर रखना होगा,
शालिनी : क्या सच में?कैसा लगता होगा?
सरला : यह एक सुविधा के तौर पर किया जाता है ना कि अश्लीलता या कामुकता बढ़ाने,
फिर सब अपने कपड़े धोती है और ब्लाउज निकालकर नहाने लगती हैं,

रसीला कभी कभी शालिनी के सुन्दर स्तन देखकर उसे छुएं बिना रह नहीं पाती, वो निप्पल को दो उंगली से दबा देती तब कोई बार दुध की बूंद बाहर आ जाती
रसीला : देखो तो सरला, इस दुधारू स्तनों को कितने सुन्दर है, इसे चूसने वाले सच मे भाग्यशाली होगा, मेरे एसे होते तो मेरा देवर और ससुर इसे निचोड़ लेते
शालिनी : शर्मा कर...)वैसे आपके भी काफी बड़े और सुंदर है,
रसीला : इसलिए तो मेरा ससुर ताकता रहते हैं, तुम्हारे देखकर लगता है मुन्ने को पिलाने के बाद काफी सारा बचता होगा
शालिनी : हाँ बचता है, इसलिए पहले पम्प से निकाल देती थी पर पम्प बिगड़ने से दबाकर निकलना पड़ता है, जिसमें दर्द होता है और जलन भी
रसीला : इसलिए तो कह रही हूँ, घर के लोगों की सहायता लो,मेरे अनुभव से कहती हूँ इससे आराम और खुशी दोनों मिलेगी, इससे रिश्ते में भी नजदीकी आती हैं।
तीनों नहाकर भीगे बदन लेकर सिर्फ घाघरा पहने टॉपलेस सभी एसे लग रही थी मानो जलपरी निकली हो, इस सब में शालिनी सब से सुन्दर लगती है, सभी अपने अपने कपड़े पहनकर अपने अपने घर निकलती है, रसीला के घर जाने के बाद सरला और शालिनी दोनों चलके जा रही थी
सरला : भाभी आप रसीला भाभी की बातों का बुरा मत लगाना, वह थोड़ी दिलफेंक है, जो मन में आता है वो बोल देती हैं।
शालिनी : (मन में..)अब तुम्हें क्या बताऊँ की वो जो बोल रही हैं वो में कर चूंकि हूं, पर मे रसीला के जैसे बोल नहीं सकती
सरला : भाभी...भाभी! आप बुरा मत मानना
शालिनी : नहीं नहीं..सब ठीक है, मैं अब थोड़ा बहुत जानने लगी हूं, सरला तुम घर जाओ, मुझे बाबुजी के रिपोर्ट लेने अस्पताल जाना हैं
शालिनी अस्पताल आती हैं, डाक्टर नहीं थे पर एक नर्स थी वो जानती है कि शालिनी को उसके दुध का रिपोर्ट करवाना है जिससे पता चले के उसने जो दवाई खाई उसका फर्क़ पड़ा है कि नहीं, शालिनी अपना दुध निकालकर देती हैं, नर्स शालिनी को रिपोर्ट उनके फोन पर भेज देगी और फोन पर सब समजा देंगी, अगर जरूरत पड़ी तो उसे बुलाया जाएगा।
शालिनी वहां से चाचाजी घर आती हैं ,फिर वो और बाबुजी खाना खाते हैं

और नील को दाल पीसकर पिलाती है और थोड़ा स्तनपान भी करवाती हैं, फिर वो बेड पर आकर लेट जाते हैं, शालिनी अपनी साड़ी निकालकर रख देती हैं और ब्लाउज और घाघरा पहने बेड पर लेट जाती हैं,बाबुजी उनके पास आते हैं,शालिनी अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगती हैं, जिसे देख बाबुजी नीचे खिसक कर स्तनों के सामने आते हैं जैसे ही ब्लाउज हटता है बाबुजी स्तन को मुँह में लेकर चूसने लगते है,

शालिनी को अच्छा लगा कि बाबुजी अब बिना संकोच के स्तनपान करने लगे थे, वो अपने दोनों स्तनों से दुध पिलाकर सो जाती हैं, बाबुजी भी गहरी नींद में सो जाते हैं, तभी शालिनी का फोन वाइब्रेंट होता है, शालिनी देखती हैं कि नीरव का फोन है,

वो तुरत अपने ब्लाउज सही करती हैं और पल्लू ढककर दूसरे कमरे में आती हैं ताकि बाबुजी और नील की नींद ना बिगड़े।
फोन पर...
शालिनी : हैलो नीरव! कैसे हो?
नीरव : ठीक हुँ मेरी प्यारी पत्नी
शालिनी : आज पत्नी की याद कैसे आयी?
नीरव : तुमको भूलता ही नहीं हूं
शालिनी ; ओह हो! आज तो बहुत मक्खन लगा रहे हैं
नीरव : मक्खन क्या लगाना, जो सच है वो बता रहा हूं, और मक्खन को क्या मक्खन लगाना
शालिनी : आज तो बड़े रोमांटिक मूड में लगते है
नीरव : हाँ सही कहा, जब इतनी सुन्दर पत्नी से दूर रहना पड़े तब कितने दिन रोके खुद को
शालिनी : तो फिर आप आ जाइए ना
नीरव : मुझे भी आने का मन है पर आप लोगों के भविष्य के खातिर दूर रहना पड़ेगा, दूर हो तो क्या हुआ?वीडियो कॉल करके देख तो सकते है
शालिनी : हाँ! कितने दिनों से तुम्हें नहीं देखा, पर एक काम करो लेपटोप पर कॉल कर्ता हूं ताकि आराम से बात हो
लेपटोप भी उसी कमरे था इसलिए शालिनी तुरत लेपटोप चालू करती हैं, फिर दोनों वीडियो कॉल पर बातचीत करते हैं
नीरव : जान मुझे अपने दोनों सितारे की झलक दिखा दो,
शालिनी : आ गए ना अपनी लाइन पर,
नीरव : प्लीज जान दिखा दो ना, कितने दिन हो गये, आज उस स्तनों के बारे में सोचकर मेरा लिंग खड़ा हो गया है, देखो
एसा बोलकर वो पेंट की चैन खोलकर अपने लिंग को बाहर निकालता है और हिलाता है ,जिसे देख शालिनी को भी कामुकता होने लगती हैं, वो जैसे ही अपने ब्लाउज को निकालने लगती हैं तभी दरवाजे पर दस्तक होती हैं। वो तुरत ब्लाउज सही करके नीरव को रुकने को कहती है, तभी बाबुजी की आवाज आती हैं।
शालिनी : नीरव बाबुजी बाहर बुला रहे हैं, में दो मिनट में आती हूं,
नीरव : कोई नहीं, जल्दी आना
शालिनी दरवाजा खोलती है, बाहर बाबुजी अपना फोन लेकर खड़े थे
शालिनी : क्या हुआ बाबुजी?कुछ चाहिए था?
बाबुजी: नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए पर बलवंत को कुछ काम है ,इसलिए उसने तुम्हें फोन किया था पर तुम्हारा फोन व्यस्त था इसलिए मुझे किया है
शालिनी : क्या काम हो सकता है?
बाबुजी : पता नहीं ,कुछ कहा नहीं ये लो,तुम बात करो में कुछ देर सो जाता हूँ।
बाबुजी अपने कमरे में जाते हैं, और शालिनी अपने कमरे का दरवाजा बंध कर देती हैं

शालिनी : हैलो चाचाजी! क्या काम पड़ गया मुझसे?
चाचाजी : काम कुछ नहीं है, बस तुम्हारी याद आ रही थी, कितने दिनों से तुम्हें देखा नहीं
शालिनी : इतनी ही याद आती हैं तो आप आ जाओ ना
चाचाजी : में जल्द ही आऊंगा, तुम अभी किस्से बात कर रही थी?
शालिनी : नीरव का फोन था उसे भी आज मेरी याद सता रही थी, इसलिए उससे वीडियो कॉल पर बात कर रही थी
चाचाजी : में भी वीडियो कॉल कर्ता हूं इसी बहाने में भी तुम्हें देख लूँगा
शालिनी : ठीक है पर मे आपका कॉल म्यूट रखेंगी जिससे आपकी आवाज ना आए
चाचाजी : तुम्हें देखने के लिए कुछ भी करूंगा
शालिनी : ओह हो! देखो तो सही कितने बावले हो गए हैं
चाचाजी : जो भी कहो, सब मंजूर है
शालिनी बाबुजी के फोन को लेपटोप की स्क्रीन से टीकाकार रख देती है, और नीरव से बात करने लगती हैं, तभी नीरव के कहने पर शालिनी अपने ब्लाउज को खोलने लगती हैं,

नीरव अपनी प्यारी और सुंदर पत्नी के सुन्दर गोल तने हुए गोरे और गुलाबी निप्पल से सजे हुए उसके स्तनों को देखने लगता है, काफी समय हो गया था इसे इस नजारे को देखे, पर इस बात से बेखबर नीरव की इस नजारे को देखने वाला वो अकेला नहीं है उसे कोई और भी देख रहा है, वो अपनी पत्नि के स्तनों को देखकर लार टपकाए देख रहा था, तभी चाचाजी इशारों से शालिनी को स्तन दबाने को कहते है, शालिनी वैसा ही करती हैं,

वो अपने स्तनों को उठाकर आगे करती हैं मानो वो दोनों को एक-एक स्तन मुँह में दे रही हो, जिससे दोनों का मुँह खुला का खुला रहता है, चाचाजी और भी इशारे करते हैं, शालिनी ठीक वैसा ही करती हैं, और बेचारे नीरव को लगता है शालिनी यह सब उनको रिझाने और खुश करने के लिए कर रही हैं।
तभी स्तनों को दबाने पर अचानक से एक धार निकालती है और मोबाइल की स्क्रीन पर टकराती है जिसे देख चाचाजी खुश होते हैं नीरव भी खुश होता है, शालिनी के इस कामुक अदा देखकर उसके लिंग से वीर्य निकल जाता है और वो शांत हो जाता है,

शालिनी अपने स्तनों को अपने हाथों से दबाने लगती हैं अभी वो चाचाजी को लुभा रही थी, चाचाजी भी खुश हो जाते है, फिर नीरव से कुछ देर बात करके लेपटोप बंध करके, फोन काट कर अपने ब्लाउज को पहनकर बाबुजी के पास आती हैं,

शालिनी सब के लिए चाय बनाती हैं और फिर नील के साथ खेलने लगती हैं, जब शाम होती हैं, मजदूर सब चले गए थे, शालिनी और बाबुजी अपने आँगन मे खटिया पर बैठे हुए थे,शालिनी के स्तन में दुध भरने लगा था, पहले वो नील को पिलाती है फिर बाद में बाबुजी को गोदी में सुलाकर स्तनपान करवाती हैं, बाबुजी जब स्तनपान करके खड़े हुए तभी उसका फोन बजता है, और वो बिजली वाले के पास जाते है।
बिजली का सब काम सही से हो गया था, वो बस बाबुजी के हस्ताक्षर लेेते है, फिर बिजली को चालू कर देते हैं, और पूरा गाव जगमगा उठता है, सभी खुशी से झूम उठते हैं, मानो कोई त्योहार हो, सब की दो दिनों की पीड़ा का अंत हो चुका था, बिजली वाले भी शहर चले जाते हैं, और बाबुजी घर आते हैं और देखते हैं शालिनी नील को उठाए हुए उनका इंतजार कर रही थी।
बाबुजी : देखो बहु ,बिजली आ गई, आज बढ़िया रसोई बनाते हैं, फिर सब ने आज बिजली आनी के खुशी में रंगारंग कार्यक्रम करने को तय किया है।
बाबुजी और शालिनी दोनों मिलकर रसोई बनाते हैं बाबुजी कभी कभी शालिनी से मज़ाक मस्ती कर लेते, शालिनी को भी अच्छा लगता,जब रसोई करते समय शालिनी पसीने से भीगी हुई थी

तब आटा लगे हाथ से अपने चेहरे पर से पसीना पोछती तब थोड़ा आटा उसके चेहरे पर लग जाता है, बाबुजी यह देख हस्ते है, और अपने हाथों से आटा पोछने लगते है, फिर वो शालिनी के कमर से भी पसीने की बूंद हटाते है,अभी दोनों खाना खाने बैठते है, फिर नील को स्तनपान करवाकर शालिनी उसका पेट भर देती हैं जिससे उसे अच्छी नींद आए, फिर बाबुजी नील को सुलाने लगते है और शालिनी घर के काम करती हैं,नील को सुलाने के बाद बाबुजी थोड़ा तैयार होते हैं, और सब काम करके शालिनी नहीं कमरे में आकर अपने चोली लहंगा पहनती है, पर अब उसकी चोली थोड़ी तंग हो गई थी और उससे उसकी डोरी भी नहीं लगा रही थी, बार बार डोरी अटक जाती थी, जिससे परेसान होकर वो बाबुजी को कमरे में बुलाती है। बाबुजी जैसे कमरे में दाखिल होते हैं वो वहीं स्थिर हो जाते है,क्योंकि सामने का दृश्य था ही कुछ एसा...
शालिनी आईने की ओर मुँह करके खड़ी थी उसने लहंगा पहना हुआ था उसके ऊपर चोली पहनी थी पर डोरी ना लगने से पूरी नंगी और एकदम गोरी और कटावदार और लंबी पीठ दिख रही थी,

जो कमर के पास से सिकुड़ कर पतली हो जाती हैं फिर नितंबों के पास से चौड़ी हो जाती हैं, एसा मादक दृश्य पुरुष जात ने सिर्फ सपनों में सोचा होता है पर बाबुजी के नजरो के सामने था जिसे देख बाबुजी मूर्ति बन गए थे, तभी शालिनी उसको पुकारते हुए होश मे लाती हैं।

बाबुजी शालिनी के पिछे आकर खड़े हो जाते है, शालिनी के पास से आती इत्र की खुशबु से वातावरण और मादक और खुशनुमा हो जाता है, जब बाबुजी अपने हाथों से चोली की डोरी बंध करने लगते है तब उसके हाथ थोड़े काँप रहे थे,

फिर वो जैसे तैसे करके डोरी बाँध देते है, फिर नील ठीक से सोया है कि नहीं यह देखकर दोनों मोटरसाईकिल से गांव के चौराहे पर आते हैं
रास्ते में...
शालिनी : बाबुजी आप चाचाजी को मत
बताना कि आज मैं कार्यक्रम में नृत्य किया है
बाबुजी : क्यूँ?
शालिनी : वो पिछली बार जब मेने नृत्य किया तब उसने कहा कि मुझे एसे नहीं नाचना चाहिए, घर पर जैसे चाहूं वैसे नृत्य करूं ,उसे लगता है कि कुछ लोग कि नजर ठीक नहीं है।
बाबुजी : ठीक है, तुम नृत्य करते समय थोड़ा ध्यान रखना और तुम्हें एसा लगे तो नृत्य मत करना
शालिनी : ठीक हैं।
चौराहे पर सब इकठ्ठा हो गए थे, आज स्टेज नहीं बनाया था, शालिनी औरतों के समुह में आ जाती हैं और बाबुजी अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गए थे, सभी अपनी और से अपने अपने नृत्य और अपनी कोई कला दिखाते हैं, तब तक शालिनी,सरला और रसीला और कुछ औरते मिलकर एक नृत्य की तैयारी कर लेते है

, जब शालिनी की बारी आती हैं तब वो और उसके साथ सब महिला नृत्य करने लगते है, नृत्य एक एसे गाने पर था जिसमें अभिनेत्री गुंडों के सामने नृत्य करते हैं, इसलिए कभी एसे स्टेप आते जिसमें शालिनी को झुकना पड़ता या कभी कमर मटकाना पड़ता और कभी नितंबों को हिलाना पड़ता

, यह सब शालिनी जानबूझकर बाबुजी के सामने करती क्युकी दूसरों के सामने उसे शर्म आती और कोई क्या सोचता इससे अच्छा बाबुजी देखे, जब वो झुकती तब स्तन चोली मे से बाहर छलक जाते

और एक स्टेप मे अभिनेत्री जैसे गुंडे के मुखिया के पास आती वैसे शालिनी बाबुजी के पास आकर अपनी कमर और स्तनों को मटकाने लगती हैं,

बाबुजी को यह दृश्य एकदम कामुकता और मादकता भरा दिखता है, वो बस मंत्रमुग्ध होकर देखते हैं, बाबुजी के जहन में बस शालिनी का नृत्य ही चल रहा था ,कार्यक्रम के समापन के बाद सब अपने घर चले जाते हैं
रसीला अपने घर आती हैं, आकार वो पहले अपना ब्लाउज और साड़ी निकालती है, और वो राजू को कमरे में बुलाती है, तब सुन्दरलाल इसका विरोध कर्ता है।
सुन्दरलाल : मुझे भी पीना है।
रसीला : आप सुबह से तीन बार पी चूके है, वो भी दोनों पूरे भरे हुए, बिचारे राजू को अब पीने दीजिए।
सास : बहु सही कह रही हैं, आप सो जाए इतनी लालच अच्छी नहीं
सुन्दरलाल ना चाहते हुए भी अपनी खटिया पर सो जाता है, रसीला और राजू कमरे में आते है राजू भी अपनी शर्ट निकाल देता है और पेंट निकालकर सिर्फ कच्छे में खड़ा रह जाता है, और सामने सिर्फ घाघरा पहने उसकी भाभी,

जिसे देख उसका लिंग धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है, जिसे रसीला भी देखती हैं, वो एक अनुभवी महिला थी उसे मालूम था कि एसा होगा इसलिए वो बस मुस्कराती है
रसीला : देवर जी! अपने आप को संभालो, कहीं चड्डी बिगड़ गई तो?
राजू : उसके बिगड़ने का कारण आप ही होगी,
रसीला : मैं कैसे?मैं तो बस अपना रिवाजों को निभा रही हूँ
राजू : वो सब ठीक है, पर एक जवान मर्द बिचारा क्या करे?भाभी अगर आपको गर्मी लग रही हो तो घाघरा निकाल कर मेरी तरह हो जाइए
रसीला : मैं अपना देख लुंगी आप अपना देखो, आप बस अच्छे नंबर से पास हो जाइए फिर आपको अपना इनाम मिल जाएगा।
राजू : आज अभी का इनाम दे दो पहले।
रसीला गद्दे पर लेट जाती हैं राजू उसके पास आकर लेट जाता है, और अपने सिर को स्तनों के सामने लाता है, आज रसीला भी मदहोश थी, वो तुरत हाथ से राजू के सिर को अपने स्तनों में दबती है राजू भी स्तनों का जो हिस्सा मुँह में आता वो चूसने और चाटने लगता, फिर जब निप्पल आया तब वो लपक के मुँह में भरकर जोर से चूसने लगता है,

जिससे रसीला को हल्का दर्द होता है पर मदहोशी मे होने से मजा भी आ रहा था, राजू भूखे भेड़िये की तरह स्तनों को चूस रहा था,

कभी चुस्ते हुए दूसरे को दबा देता और निप्पल को उंगली से खेलता, कभी नाभि में उंगली घुमाता तो कभी रसीला के नितंबों को दबाने लगता, रसीला भी एक मर्द के स्पर्श और शरारत का आनंद ले रही थी,
राजू : (स्तन चूस कर..)भाभी मुझे भी शांत कीजिए ना ,देखो कैसे तना हुआ है, इतना तो आप कर ही सकती हैं,
रसीला अपने एक हाथ को राजू के चड्डी में हाथ डालकर उसके तने हुए लिंग को सहलाते हुए हाथ में लेती हैं और हिलाने लगती हैं
रसीला : यह तो दिन-दिन बड़ा होता जाता है, तुम्हारे भैया के जितना हो गया है, लगता है, शादी करानी पड़ेगी
राजू : शादी के बाद क्या और कैसे करना पहले सीखा दो, फिर करूंगा शादी
रसीला : सब सीखा दूंगी बस अच्छे से पढ़ लो, शुरू से अंत तक सिखाएँगे, और देवरानी के आने से मुझे राहत मिलेगी।
राजू : हाँ आपका काम में हाथ बटाएंगी।
रसीला : काम में नहीं, इस स्तनों को आराम मिलेगा, तुम तीन इनको चूस चूस कर दर्द देते हो,
राजू : वो भी ठीक कहा
राजू जोर से चूस कर दोनों स्तन खाली कर देता है, रसीला के स्तन लाल हो गए थे, रसीला भी बैठ जाती हैं और राजू के लिंग को चड्डी से बाहर निकालकर हिलाने लगती हैं, तब उनकी चूडिय़ां बजने लगती हैं, दोनों को काफी देर भी हो गयी थी इसलिए सुन्दरलाल खिड़की से धीरे से झांकता है तो देखते हैं कि रसीला अपने देवर को हस्तमैथुन करवा रही हैं, उसे यह देखकर थोड़ा गुस्सा और थोड़ी कामुकता हो जाती हैं, वो तब तक खड़े रहते हैं जब तक राजू का वीर्य निकल नहीं गया, वीर्य की धार रसीला के हाथों पर होती हैं, उसके हाथ अपने देवर के गाढ़े और सफेद वीर्य से सने हुए थे, वो उस वीर्य को सूंघने के बाद एक आह करती हैं मानो किसी नशेड़ी को नशा मिला हो, फिर वो बाथरूम मे जाकर हाथ मुँह धोकर पल्लू लेकर अपनी खटिया पर आकर लेट जाती हैं, राजू भी शांत होकर अपनी जगह सो जाता है, सुन्दरलाल अधमूंदी आंखों से अपनी अधनंगी बहु को देख रहा था,सभी के सो जाने के बाद सुन्दरलाल भी हस्तमैथुन कर के सो जाता है।