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रात अपने कालेपन को चारों ओर फैला चुकी थी, सभी नींद के आगोश में थे तब एक स्त्री थी जो अपने विचारों और चिंता के कारण जग रही थी और अपने विचारों और चिंता के निवारण के लिए धीरे-धीरे अपने कमरे से निकल कर अपने बग़ल वाले घर मे जाती हैं, जहां उसकी चिंता और चिंता का निवारण दोनों था, वो धीरे से चाचाजी के घर में दाखिल होती हैं,
दरवाजा खुला था जो शालिनी के लिए एक चाचाजी द्वारा ली जाने वाली कसौटी का प्रश्न था ,जिसे वो पास करती हुई आगे बढ़ती है, चाचाजी देखना चाहते थे कि शालिनी क्या पहले की तरह आएगी या नहीं आएगी?,पर देरी होने से चाचाजी मायूस होकर सो गए थे, पर शालिनी भी एक महारानी की तरह अपने आने का एलान अपने पायल की झनकार करके करती हैं, पायल की झनकार से चाचाजी की नींद खुल जाती हैं पर वो सोने का नाटक करते हैं,वो देखना चाहते थे कि शालिनी क्या करेगी?शालिनी कमरे में आती हैं और देखती हैं चाचाजी दरवाजे की ओर पीठ करके सोये हुए हैं, वो बिस्तर के नजदीक आती हैं और धीरे से चाचाजी को पुकारती है पर चाचाजी सोने का नाटक करते हैं, शालिनी फिर पास आकर चाचाजी के सिर पर हाथ फेरती है, फिर उँगलियों को चाचाजी के चेहरे पर फहराते है, चाचाजी पलट जाते हैं, शालिनी अपनी पायल और चूडियों को खनकती हुई दूसरी ओर आती हैं और चाचाजी के पास आकर बैठ जाती हैं ,और चाचाजी के हाथ को अपने हाथों में लेती हैं, पर चाचाजी दूसरी ओर पलट जाते हैं, शालिनी को लगा चाचाजी मज़ाक कर रहे हैं, इसलिए वो दूसरी ओर आती हैं, जब दो तीन बार एसा हुआ तब शालिनी को लगा कि चाचाजी मज़ाक नहीं कर रहे है ,चाचाजी थोड़ा नाराज लग रहे थे, शालिनी अब धीरे से बिस्तर के किनारे पर बैठ जाती हैं और थोड़ा गंभीर होती हैं।
शालिनी : चाचाजी.....
चाचाजी कुछ नहीं बोलते बस करवट लेकर लेटे रहते हैं।
शालिनी : चाचाजी ....क्या आप बात कर सकते है? आप मुझसे क्यूँ नाराज हैं?मैंने किया क्या है?मुझे जानने का हक है कि मेरी किस बात से आप को दुःख हुआ है, आप बात नहीं करेंगे तो मुझे कैसे अपनी गलती का पता चलेगा? कृपया आप मुझसे बात करे, मैं अपनी गलती सुधारने का प्रयास करूंगी, आप एसे नाराज है यह मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है, एक तो आप इतने दिनों के बाद आए हैं और आप को आकार ही दुख हुआ वो भी मेरे वजह से, यह बात मुझे बहुत परेसान कर रही हैं, कृपया आप नाराजगी छोड़ मुझसे बात करो, मेहरबानी करे...
चाचाजी बिस्तर पर बैठ जाते हैं और शालिनी की ओर देखने लगते है।
वो देखते हैं शालिनी ने अपनी सास के पारंपरिक कपड़े पहने हुए हैं, उसके बाल पीठ को ढंके कमर तक थे, उसने सिर्फ चोली और लहंगा पहना हुआ है, चोली का गला गहरा था और शालिनी के स्तन उसमे बड़े तंग थे जिससे वो आपस में सट्टे हुए और उभार बनाकर बाहर आने को व्याकुल थे,जिसके बीच अपने पति की निशानी फंसी हुई थी ,बैठने से शालिनी के पेट में बल पड़े थे, और लहंगा वसे भी लंबाई में छोटा था और बैठने से घुटने तक आ गया था जिससे शालिनी के गोरे पैर और गुलाबी पिण्डी और पैर की तलहटी दिखाई दे रही थी,
शालिनी के सुन्दर शरीर को नीचे से ऊपर तक निहारते है तब चाचाजी को उस सुन्दर यौवन से भरी काया के ऊपर चिंतित और मायूसी भरा चेहरा दिखता है ,जिसे देख चाचाजी की नाराजगी पिघलने लगती हैं, वो खिसक कर थोड़े शालिनी के पास आती हैं जिसे देख शालिनी को खुशी हुई और थोड़ा वो भी खिसकी, अभी आमने सामने बैठे हुए थे।
शालिनी : आप मुझसे गुस्सा हो?
चाचाजी : नहीं..!बस थोड़ी नाराजगी है
शालिनी : मैंने एसा क्या किया जिससे आपको नाराजगी हुई?
चाचाजी : कुछ नहीं....
शालिनी : जब कुछ नहीं है तो नाराज क्यूँ है?अभी आप भी बातें छुपाने लगे?पता है मैं आपकी पत्नी नहीं हूं पर आधी पत्नी तो हूं, देखो आपके लिए आपकी पसंदीदा चीज़ भी लायी हूं,जिसे पाकर आप खुश हो जाएंगे।
एसा बोलकर शालिनी अपने आँखों से अपने स्तनों की ओर इशारा करती हैं और गले पर हाथ घुमाती है।
चाचाजी : नहीं...मुझे नहीं पीना।
शालिनी : क्या?आप मना कर रहे है? आप भूल तो नहीं गए हैं? देखो मैं आपको पिलाने के लिए पूरे भरे हुए लायी हूं, इसे पूरा भरने से मुझे दर्द हो रहा है, आप जल्दी से इसे पीकर दर्द से राहत दिलाए जैसे पहले करते थे,
चाचाजी : नहीं अब मैं यह नहीं करूंगा, कृपया आप जाइए, मैं नहीं चाहता मेरी वजह से आपको दिक्कत आए, भविष्य में आपको मेरी वजह से कोई संकट आए।
शालिनी : आज आप एसी क्यूँ बातें कर रहे हैं?कोई दिक्कत नहीं आएगी, और आएगी तो आप है ना हमें सम्भालने के लिए
चाचाजी : आपको अब दूसरे रास्ते खोजने चाइये, ताकि मुझपर निर्भर ना रहना पड़े।
शालिनी : आप भी मेरी सहायता नहीं करेगें तो कौन करेगा?
चाचाजी : जैसे मेरे जाने के बाद खुद को सम्भाला वैसे सम्भाल लेना। इतने दिन मेरी सहायता के जैसे निकले वैसे आदत बना लेना।
शालिनी को अब अंदाजा होने लगा था कि चाचाजी किस ओर इशारा कर रहे हैं
शालिनी : मन में...) क्या चाचाजी को पता चल गया है कि उसके गैर मौजूदगी में मेने बाबुजी को स्तनपान करवाया है ,क्या इस वजह से चाचाजी नाराज हैं? मुझे बात करनी पड़ेगी इस बारे मे, ताकि गलतफहमी ना हो।
शालिनी : चाचाजी ! क्या आप साफ साफ़ कहेंगे कि क्या दिक्कत हुई है? मैं नहीं चाहती कि मेरे कारण किसी को परेसानी हो, मेने तो सोचा था कि इतने दिनों बाद आपको स्तनपान करने मिलेगा तो आप खुश हो जाएंगे और आपको खुश देखकर मुझे खुशी होगी।
चाचाजी : मैं बस इतना चाहता हूं कि मेरी वजह से तुम्हारे और मेरे घर के इतने सालों के रिश्तों मे कड़वाहट या दरार हो
शालिनी : मैं तो आपको अब हमारे घर का सदस्य मानतीं हूं, अब हम दो नहीं एक घर है, और मे अपने आप को खुशकिस्मत समझती हूं कि इन दोनों घर को एक करने की कड़ी मैं बनी हूं ,अब तो उसमे मीठे दूध का मिश्रण हुआ है कि कड़वाहट का सवाल ही नहीं।
चाचाजी : मैं नहीं चाहता कि मेरे कारण मेरे दोस्त को संशय हो।
शालिनी : आप स्पष्ट शब्दों में कहिये अपनी बात, अब पहेली ना बनाए सीधे और साफ शब्दों में कहें, अभी आप बतायेंगे तो हो सकता है, समस्या का निराकरण भी मिल जाए, फिर बात ज्यादा बिगड़ती जाएगी और मैं नहीं चाहती कि मेरे कारण आप और बाबुजी के बीच कोई दरार पड़े ,
चाचाजी : ठीक हैं, अभी आने में देर क्यूँ हुई?
शालिनी : वो बाबुजी के सोने का और दुध भरने का इंतजार कर रही थी,
चाचाजी : अभी रात को मुन्ने ने दुध पीना कब से शुरू किया?
शालिनी : (मन में..)अब क्या कहूँ?चाचाजी को भी पता है की नील रात को सारा दुध नहीं पीता, क्या मैं सब सच कह दूँ?अगर मेने झूठ बोला और चाचाजी ने दोपहर में सब देख लिया होगा तो मुझसे और ज्यादा नाराज हो सकते है, और मैं हर समय डर में रहना पड़ेगा, इससे अच्छा चाचाजी को सब सच बता देती हूं, और चाचाजी मेरी परिस्थितियों को अच्छे से जानते हैं, वो समझेंगे मेरी बात को।
चाचाजी : क्या हुआ?कोई कहानी बना रही हो, देखो मुझसे कुछ छुपाना नहीं,
शालिनी अपने मन को मजबूत करती हैं।
शालिनी : नहीं...मैं आपसे कुछ नहीं छुपाने वालीं, मैं आपको सब सच बताऊंगी फिर आप निर्णय करना मैंने ठीक किया या गलत।
शालिनी चाचाजी को उसके जाने के बाद की सारी घटना का वर्णन करती हैं कि कैसे बाबुजी बीमार हुए फिर डॉक्टर ने उसे यह उपाय दिलाया और बाबुजी के खातिर उसने दूध की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए दवाई ली है, फिर इस तरह से अब वो रोज बाबुजी को स्तनपान करवाती हैं।
सब बातें सुनकर चाचाजी के मन में पहले शालिनी के लिए सम्मान बढ़ गया उसने सोचा शालिनी कितनी दयालू और सब की चिंता करने वाली है, पहले मेरे लिए उसने अपने स्तनों के दुध को पिलाया और अब अपने ससुर को स्तनपान करवाती हैं, कितना बड़ा बलिदान है, तभी उसके मन में दूसरा स्वार्थी विचार आया कि अब क्या शालिनी के लिए वह प्राथमिकता नहीं रहेंगे, क्योंकि की वह बाहर के हैं, अब उसे दूसरा दर्जा मिलेगा, उसे अब क्या सिर्फ अपने दोस्त के गैरमौजूदगी के समय ही स्तनपान करने का मौका मिलेगा ?
चाचाजी : मन में...) मैं स्वार्थी क्यूँ हो रहा हूं?क्या मुझे शालिनी से स्तनपान करने की लत लग गई है? की उसके दूर होने के विचार से मुझे जलन और दुख होने लगा, मुझे समझना चाहिए कि वो मेरा दोस्त है उससे भी बढ़कर वो शालिनी के परिवार का हिस्सा है और उसका ससुर है, जब घर में मदद मिलती रहेगी तो कोई बाहरी व्यक्ति से मदद क्यु लेगा? मुझे अपने आप को भाग्यशाली मानना चाहिए कि इतने समय तक तो स्तनपान का सुख मिला, वर्ना इस बिरंगी जिंदगी जीना कौन चाहता?
शालिनी चाचाजी की चुप्पी से परेसान होने लगती हैं, वो चाचाजी को दुःखी और परेसान नहीं देख सकती थी, वो उसे कोई जरूरत समय ही काम आने वालीं चीज़ नहीं महसूस करवाना चाहती इसलिए शालिनी चाचाजी का हाथ पकड़ लेती हैं और खिसक कर थोड़ा नजदीक आती हैं।
चाचाजी का हाल उस बड़े भाई जैसा है जिसको बचपन से सारा प्रेम और खिलौने पर एकाकी हक्क मिला था पर अब उसके छोटे भाई के आने से प्रेम और खिलौने में दो भाग हो गए, वो छोटे भाई से नफरत तो नहीं कर्ता पर उसे दुःख और जलन महसूस होती है कि जिस खिलौने से इतने समय से खेलता आ रहा हैं ,और जिस प्रेम की बारिश में वो अकेला भीग रहा था उसमें अब उसके छोटे भाई का हक्क भी होगा, जब कि माँ के लिए दोनों बच्चों में कोई फर्क़ नहीं होता, पर छोटे बच्चे को अभी थोड़े ज्यादा प्यार और देखभाल की जरूरत होती हैं इसलिए बड़े बच्चे को लगता है माँ उसे पहले जैसा प्यार नहीं करती, इसलिए उसे छोटे भाई से जलन होती हैं पर जब समय गुज़रता है तब वहीं छोटा भाई बड़े भाई का सबसे अच्छा दोस्त और साथी बनता है।
शालिनी को भी लगता है कि चाचाजी को थोड़ा दुख हुआ है और थोड़ी असुरक्षा का भाव महसूस कर रहे हैं, इसलिए वो चाचाजी को पूरी तरह से आश्वस्त करना चाहती थी कि बाबुजी के कारण उसके और चाचाजी के बीच के संबंध में कोई बदलाव नहीं आएगा, बस थोड़ा संभालकर चलना होगा,वो बस सब पहले की तरह हो जाए एसा चाहती थी। क्योंकि चाचाजी ने उसकी तब मदद की थी जब कोई नहीं था, जिसका एहसान वो नहीं भूला सकती।
शालिनी : चाचाजी ! मैं जानती हूं कि आप क्या सोच रहे हैं, बाबुजी के बारे में मुझे भी चिंता है, पर अभी वो बीमार है इसलिए उसे दूध की जरूरत ज्यादा है, पर आप चिंता मत करो, मैं हर रात एसे आएंगी और दिन में भी जब मौका मिलेगा तब आपको स्तनपान करवा दूंगी,बस आप सब चिंता छोड़े और पहले जैसे हो जाइए, कुछ ना कुछ रास्ता निकाल लेंगे।
चाचाजी : हाँ ठीक कहा, भविष्य की चिंता में वर्तमान क्यूँ खराब करे पर मेरी एक ईच्छा है।
शालिनी : कैसी ईच्छा?
चाचाजी : मैं आज अपनी मर्जी से अपने तरीके से स्तनपान करूंगा, इतने दिन मैं इस स्वाद से दूर रहा हूं इसलिए मुझे जैसे मन करे वैसे पाऊँगा।
शालिनी : हाँ! जैसे पीना है वैसे पी लेना, इतना हक तो बनता है आपका अब जल्दी करो,अब तो मुझे दर्द भी होने लगा है, आप जल्दी से अपनी इस अर्ध पत्नी को दर्द से छुटकारा दिलाए।
चाचाजी : मुझे अच्छा लगा कि तुम हमारे लिए इतना कुछ कर रही हो ,तुम्हारा बलिदान अतुल्य है, चलो अब रात भी बीती जा रही हैं,
शालिनी : लगता है आज मुझे परेसान कर देंगे।
चाचाजी : हाँ थोड़ा परेसान करूंगा पर आनंद भी मिलेगा
चाचाजी पहले शालिनी के गोदी में आकर लेट जाता है और जैसे ही शालिनी पिछे हाथ ले जाकर डोरी खोलने जाती हैं तब चाचाजी रोक लेते हैं।
चाचाजी : आज सब मैं करूंगा आप बस देखेंगे
शालिनी अपने हाथ हटा लेती हैं और चाचाजी हाथ पिछे ले जाकर डोरी खोल देते हैं फिर बाबुजी चोली को आगे से ऊपर उठाकर शालिनी के स्तनों का अनावरण करते हैं, इतने दिनों की भूख और स्तनों को देखने की उत्सुकता उसके आँखों में दिख रही थी, शालिनी भी आज चाचाजी को रोककर उसके आनन्द को रोकना नहीं चाहती थी उसने आज बस एक मूर्ति बनके सब देखने का सोचा था, चाचाजी मुँह खोलकर निप्पल को मुँह में भर लेते हैं और जोर से चुस्की लेते है, दुध की धार सीधा उसके मुँह में गिरने लगती हैं ,
आज कितने दिनों बाद चाचाजी को यह गाढ़ा ,मीठा,और हल्के पीले दुध का स्वाद चखने मिला है, चाचाजी को आज दूध पहले से ज्यादा मीठा और गरमाहट वाला लगा,क्युकी दवाई के कारण अब जैसे बच्चे के जन्म में समय दूध में जैसी पौष्टिकता और स्वाद होता है वैसा दूध बनने लगा था जिससे बाबुजी की तबीयत में तेजी से सुधार आया था, चाचाजी को भी यह स्वाद अच्छा लगा, वो फिर से उस खूबसूरत स्तनों से उसका रस चूसने लगते है ,चाचाजी के चूसने में आज इतने दिनों की दूरी की वजह से उतावलापन दिख रहा था।
तभी वो अचानक से रुक जाते हैं और खड़े हो जाते है शालिनी भी अचंभे में पड़ गई कि चाचाजी अचानक से रुक क्यों गए।
शालिनी : क्या हुआ चाचाजी?आप एसे क्यूँ खड़े हो गए मुझसे कोई गलती हो गई?
चाचाजी : नहीं..नहीं! वो मेने कहा था कि आज अपनी मर्जी से पियेगा।
शालिनी : हाँ! पीला तो रही हूँ
चाचाजी : हाँ अब हम दूसरे तरीके से करेंगे।
( शालिनी अब जो चाचाजी ने कहा वैसे करने जा रही थी, उसे यह सब बचकाना लगा पर चाचाजी की इच्छा होने से वो करने को तैयार थी )
शालिनी अपने कपड़े और बाल ठीक करके कमरे से बाहर जाती हैं
उसने इस समय अपनी चोली थोड़ी ढीली सी पहनी थी ताकि उसे खोलने में देरी ना हो, वैसे भी अभी एक स्तन पूरा भरे होने से दर्द हो रहा था, अब शालिनी कमरे में वापिस दाखिल होती हैं जैसा चाचाजी चाहते थे, चाचाजी ने शालिनी से कहा था की उनको शालिनी सामने से आकर पिलाए।
शालिनी तेजी से चलकर कमरे में दाखिल होती हैं वो सीधा आकर चाचाजी के सामने खड़ी हो जाती है, चाचाजी बिस्तर पर बैठे हुए हैं जिससे शालिनी के सुडोल स्तन उसके ठीक सामने थे, शालिनी के चेहरे पर एक दर्द था, उसे दर्द से छुटकारा चाहिए था।
शालिनी : आह...! चाचाजी आप कभी इतने सारे दिन मुझसे दूर नहीं जाना, जरूरी हो तो मुझको साथ ले जाना मुझसे अब यह स्तन में दूध भरने से दर्द होता है वो नहीं सहना, आप के द्वारा किए जाने वाले स्तनपान से मुझे बहुत सुकून मिलता है, अभी आप जल्द से जल्द मेरा स्तन चूस कर दर्द से छुटकारा दिला दो।
शालिनी स्तन के ऊपर रहे चोली के आवरण को हटाती है और अपना पूरा दूध से भरा स्तन चाचाजी के सामने परोस देती हैं ताकि चाचाजी इसे चूस कर खाली कर दे,
चाचाजी भी मानो शेर हिरन पर झपटते समय पूरा मुँह खोलता है वैसे पूरा मुँह खोलकर स्तन पर झपटते है,
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शालिनी ने चाचाजी का यह रूप पहली बार देखा, उसे यकीन नहीं होता कि चाचाजी उसके स्तनों के इतने दीवाने हैं, उसे लगा कि सामन्य स्तनपान होगा पर अभी चाचाजी जिस तरह से स्तन चूस रहे हैं वो एक अलग भावना है, मानो सच में अपनी पत्नी के स्तन चूस रहे हो।
शालिनी आज चाचाजी को रोकना नहीं चाहती थी कहीं ना कहीं इस प्रकार से चूसने से उसे रोमांच हो रहा था, क्योंकि इतने दिनों से बाबुजी और चाचाजी एक बच्चे की तरह स्तनपान कर रहे थे, पर आज चाचाजी एक मर्द की तरह चूस रहे थे, चाचाजी कभी अपनी जीभ से निप्पल से खेलते, कभी हल्के दांत गढ़ाते इससे शालिनी की सिसकारी निकलने लगती
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, शालिनी को आज महसूस होता है कि एक असली मर्द द्वारा स्तन से कैसे खेला और चूसा जाता है ,नीरव ने कभी इतनी कठोरता नहीं दिखाई थी, वो हमेसा शालिनी को दर्द ना हो उसका ख्याल रखता था, पर शालिनी को आज एसा लगा कि थोड़ा दर्द भी ज्यादा आनंद दिलाता सकता है ,शालिनी को अभी दुख में सुख मिल रहा था, चाचाजी कभी एकसाथ दूध को एसे चूसने लगते की मानो एक श्वास में सारा निचोड़ के पी जाएंगे
और अगले पल वो अपने खुरदरे होंठ को एसे स्तन पर लगाते मानो उस स्तन को सबसे ज्यादा परवाह करने वाले यही होंठ है,
शालिनी को पल पल में मिल रहे सुख और दुख के अनुभव से एक रोमांच हो रहा था जो शालिनी के जीवन के हसीन पलों को बना रहा था ,शालिनी एक अलग दुनिया में थी, वो यह अनुभव का पूरा आनंद लेना चाहती हैं जो वो ले भी रही थी।
शालिनी मे अब कामुकता का असर दिख रहा था, उसके निप्पल तन गए थे ,और उसके बोलने में भी अब नियंत्रण नहीं रह गया था।
शालिनी : आह....! पी जाइए सारा दूध,निचोड़ दीजिए इस स्तनों को,आज तक इस तरह से किसी ने नहीं पीया, आह...जरा धीरे..मैं पूरा पिलाकर ही जाऊँगी, आराम से पियो ,
चाचाजी फिर से स्तनपान छोड़ देते हैं, इस बार शालिनी तड़प उठती हैं, उसे समझ नहीं आ रहा था कि चाचाजी क्यूँ रुक गए,इतना अच्छा सब चल रहा था, उसे मजा आ रहा था।
शालिनी : क्या हुआ, आप रुक क्यूँ गए?
चाचाजी : में चाहता हूं तुम फिर से कमरे में आओ
शालिनी : अभी यह जरूरी है?कहीं बाबुजी जाग गए तो?
चाचाजी : वो में सब सम्भाल लूँगा, अभी तुम मेरी आधी पत्नी के रूप मे हो, अभी तुम्हारी सारी जिम्मेदारी मेरी है, तुम बस मेरा कहना मान लो
शालिनी : वो सब ठीक है मेरा मतलब यह था कि इतना अच्छा स्तनपान हो रहा था और उसे बीच में छोड़ दिया इसलिए..
शालिनी को यह सुनकर अच्छा भी लगा जब चाचाजी ने उसकी जिम्मेदारी उठाने की बात कही तब उसे लगा कि चाचाजी सिर्फ कहने को आधी पत्नी नहीं कहते पर सच में उसे मानते भी है और उस रिश्ते को निभा भी रहे है।
चाचाजी : विश्वास करो इससे भी अच्छा स्तनपान होगा,
शालिनी फिर से अपनी चोली को पहनकर बाहर जाती हैं और फिर वापिस आती हैं, शालिनी जैसे ही दरवाजा बंध करके कमरे में आती हैं, बाबुजी तेजी से जाकर शालिनी के चोली को हटाकर उसके स्तन को खड़े खड़े चूसने लगते है,
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शालिनी को कुछ सोचने समझने का मौका ही नहीं मिला कि क्या हो रहा है, चाचाजी तेजी से बारी बारी से स्तन चूसने लगते है, इस बार चाचाजी पूरे जोश से चूस रहे थे, चाचाजी भी अभी अपना हक्क जताने लग गए थे मानो शालिनी सच में उसकी पत्नी हो, इस बार जब वो एक स्तन को चूस रहे थे तब पहले तो शालिनी को कमर से पकडकर अपनी ओर खींचा फिर चूसते हुए ही अपने हाथ को दूसरे स्तन पर रख दिया मानो कह रहे हैं कि यह स्तन उसकी संपत्ति है,जिसपर अंगूठे से नहीं पर पूरे पंजे से अपनी मोहर लगा रहे हैं,
शालिनी को चाचाजी का यह मर्दाना अंदाज अजीब लगा पर उसे कहीं ना कहीं अंदरूनी आनंद मिल रहा था, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से उसकी कामुकता कभी कभी बाहर आ रही थी, पर हर समय वो उसे दबा देती थी पर अगली बार वहीं कामुकता दोगुनी ताकत से आती, शालिनी अभी ज्यादा सोचने समझने की स्थिति में नहीं थी, क्योंकि चाचाजी की क्रिया उसकी सोचने की शक्ति से ज्यादा तेज थी, उसके साथ यह सब पहली बार हो रहा था इसलिए उसका दिमाग आगे क्या होगा इस उत्सुकता मे स्थिर हो गया था, शालिनी बस देख रही थी कि चाचाजी क्या और कैसे कर रहे हैं, एसा कुछ तो उसके जवान पति ने भी नहीं किया जो बुजुर्ग चाचाजी कर रहे थे,शालिनी के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी जो चाचाजी को स्तनों को चूसने के लिए उकसा रही थी।
चाचाजी अब अलग अलग तरीके से स्तनों को चुस रहे थे, कभी वो एक स्तन चूसने लगते तब दूसरे स्तन पर हाथ रखते, कभी दूसरे स्तन के निप्पल को उंगलियों से मसल देते, कभी दोनों स्तनों को बारी-बारी से तेजी से चूसने लगते,
कभी सिर्फ निप्पल चूसें तो कभी पूरा मुँह खोलकर स्तन मुँह में भरने लगते
, कभी निप्पल को दांतों से हल्के से खींचते, कभी जीभ से खेलते, एसे करते हुए दोनों स्तन खाली हो गए थे, पर चाचाजी स्तनों से अलग नहीं होते, शालिनी भी आज चाचाजी को अपनी मर्जी का करने देना चाहती थी ताकि चाचाजी को यह ना लगे कि वो उससे भेदभाव करती हैं, ब्लकि वो चाचाजी को वह सब करने दे रही थी जो सिर्फ एक पति ही अपनी पत्नी के स्तनों के साथ कर सकता है।
जब स्तनों से खेलते खेलते चाचाजी को कुछ होश आया कि स्तन मे अब दूध नहीं है तब वो शर्माते हुए अपने मुँह को शालिनी के सुडोल गोरे स्तनों के बीच छुपा देते हैं, शालिनी को भी थोड़ी हसीं आती हैं, पर अभी जो चाचाजी उससे खुलकर स्तनपान कर रहे थे उससे उसे जो खुशी मिली थी इसलिए वो भी अपनी ओर से चाचाजी को थोड़ा खुश करने का सोचती हैं, वो अपने दोनों हाथों से अपने दोनों स्तनों को भींच कर चाचाजी के चेहरे पर दबाव डालकर दाएं बाएं हिलाने लगती हैं, चाचाजी के लिए यह एक चौकाने वाला इनाम था, जिसे वो खुशी से स्वीकार करते हुए होठों से स्तनों को चूमने लगते है,
शालिनी : आह....! चाचाजी चूस डालिए,सारा दुध पी जाइए, इस दुध पर आपका अधिकार है, एसे ही चूसा करो, आज से पहले किसी ने एसे स्तनपान नहीं किया, आज पता चला कि स्तनपान भी इतना मजेदार हो सकता है,
चाचाजी : तुम्हारा स्तनपान बलवंत भी कर्ता है और मैं भी कर्ता हूं, तो क्या फर्क़ है उसमें और मुझमें?मुझे कुछ ज्यादा चाहिए,क्योंकि तुम मेरी आधी पत्नी हो।
शालिनी : हाँ...सही कहा, क्या चाहिए आपको?
चाचाजी : मैं चाहता हूं कि जैसे तुम मेरी आधी पत्नी बनी हो तो तुम्हारे आधे शरीर यानी कमर के ऊपर के शरीर पर अधिकार हो, मुझे इसे छूने, चूसने, चूमने और सहलाने की पूरी छुट मिले " कहीं भी और कभी भी "
शालिनी अभी भी कामुकता के आवेश में थी ,वो ज्यादा सोचने समझने की स्थिति में नहीं थी, उसे लगा कमर के ऊपर तो उसके स्तन है जिसे चाचाजी ने अनगिनत बार देखा है और चूसा है इसमें कोई बड़ी या नयी बात नहीं है, इससे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिये
शालिनी : हाँ मंजूर है, में आपकी आधी पत्नी होने का पूरा कर्तव्य निभाएंगी,
चाचाजी खुशी के मारे फिर से अपने मुँह को स्तन के बीच रखकर दाएं बाएं हिलाने लगते है, शालिनी अभी भी सोच रही थी कि इससे चाचाजी को अपने परिवार के खोने के दुःख और ऊपर से अपने भाई के मरने के दुःख से राहत मिलेगी,वो चाहती थी चाचाजी अपना सामान्य जीवन फिर से शुरू करे।
शालिनी ने आवेश में अधिकार तो दे दिया, पर उसने यह नहीं सोचा कि कमर के ऊपर सिर्फ उसके स्तन नहीं है उसके घने काले लंबे बाल भी है, इसका गौरा सुन्दर चेहरा है जिसमें उसकी नशीली आंखे और उसके रसदार गुलाब की पंखुरी जैसे गुलाबी होंठ भी है, उसके पास उसके गुलाब के फूल जैसे दो गुलाबी मुलायम गाल भी है, उसके नीचे पतली चिकनी गर्दन भी है, जिसके खत्म होते ही उसकी छाती है जिसपर उसके शरीर के सबसे हसीन अंग उसके दो पर्वत समान दूध कलश भी है, जिसके नीचे पतली कटीली कमर और बीच में गहरी गोल नाभि भी है और पिछे तो पूरी संगमरमर की सड़क जैसी उसकी लंबी गोरी बेदाग पीठ है।
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चाचाजी अपने मिले अधिकार का उपयोग करना चाहते थे पर वो एक एक कदम आगे बढ़ना चाहते थे ताकि शालिनी को यह ना लगे कि वो कामुक बन गए हैं और चाचाजी यह भी सोच रहे थे कि वो शालिनी के दिए हुए अधिकारों का गलत उपयोग नहीं करेंगे, पर वो अपने मन की ईच्छा को पूरा करेंगे पर उस मे अगर शालिनी मना करेगी तो वो वहीं रुक जाएंगे।
चाचाजी शालिनी को थोड़ा पीछे ले जाकर दीवार से सटा देते हैं और शालिनी के खाली स्तन को चूसने लगते है और दूसरे स्तन को सहलाने लगते है, फिर दूसरे स्तन को चूसने लगते है कुछ देर एसे ही चूसने से उसकी गर्दन में दर्द होता है, और शालिनी से भी अब खड़ा नहीं रहा जाता है, चाचाजी शालिनी का हाथ पकडकर बेड के पास लाते हैं,
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शालिनी भी चुपचाप चाचाजी की सब ईच्छा पूरी करती जा रही थी, उसे भी मजा आ रहा था, शालिनी के भीतर की स्त्री को अपने आप पर गर्व हो रहा था क्योंकि एक मर्द के लिए वो खास है, बेड के किनारे पर आकर चाचाजी शालिनी को धीरे से लेटा कर उसके ऊपर आकर स्तन चूसने लगे और दूसरे स्तन से खेलने और दबाने लगे शालिनी की आंखे बंध हो गई थी
उसका एक हाथ चाचाजी के सिर पर था जो कभी उसके बाल सहलाती कभी सिर पर दबाव डालती जिससे चाचाजी को स्तन चूसने के लिए प्रोत्साहन मिलता जिससे वो तेजी से चूसने लगते।
तभी चाचाजी स्तनों को चूसने छोड़ चाटने लगते है, वो कभी ऊपर से नीचे तो कभी दाएँ बाएँ चाटते, कभी दोनों स्तनों के बीच चाटने लगते,
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गर्मी से शालिनी को पसीना आ गया था पर उस नमकीन पसीना भी आज चाचाजी को मीठा लग रहा था, शालिनी के दोनों स्तन प्रदेश चाचाजी की लार से भीग गए थे, तभी चाचाजी ताबड़तोड़ पागलों की तरह चूमने लगते है, शालिनी के स्तनों पर मानो आज प्यार और आकर्षण की बाढ़ आयी थी, और यह बाढ़ बहकर कब शालिनी की कमर पर आ गई दोनों को पता नहीं चला, दोनों बस जो हो रहा था वो होने दे रहे थे।
चाचाजी स्तनों को चूमते चूमते धीरे धीरे नीचे की ओर आने लगते है ,पहले चाचाजी स्तनों के बीच चूमता है फिर अपने चुंबन की बारिश को बिना रोके वो शालिनी की पतली कमर पर बरसाने लगते है,
शालिनी का पूरा पेट चाचाजी के थूक की लार से गिला हो गया था, फिर चाचाजी आखिर में उस पेट के केंद्र में सुन्दर गोल नाभि पर आते हैं और कुछ पल उसे निहारते है, शालिनी की नाभि उसके द्वारा देखी गई सभी नाभि से सुंदर थी, इतनी सुन्दर गोल गहरी नाभि को देख चाचाजी से ज्यादा देर रहा नहीं जाता और वो शालिनी की कमर अपने हाथ से पकड़ लेते हैं और अपने होंठों को नाभि पर रख देते हैं बाबुजी अपने चेहरे को शालिनी के पेट पर दबाने लगते है ताकि नाभि और उसके बीच की कुछ ना हो, जैसे ही चाचाजी के खुरदरे होंठ शालिनी के मलाई मक्खन जैसे पेट पर लगते है और नाभि को चूमते है, शालिनी की आंखे फिर से बंध हो जाती हैं और एक मुठ्ठी से बिस्तर भींच लेती हैं
और दूसरे मुठ्ठी से चाचाजी के बालों को भींच देती हैं, शालिनी के सारे शरीर में सिहरन दौड़ जाती हैं, आज कितने महीनों बाद किसी ने उसकी नाभि पर प्यार जताया है, उसे बहुत अच्छा लग रहा था, शालिनी की सिहरन बिजली के करंट में तब बदली जब चाचाजी ने अपनी जीभ को शालिनी के नाभि में डाल दिया, यह शालिनी के सोच से परे था उसे लगा नहीं था कि चाचाजी एसा कुछ करेंगे, जब चाचाजी जीभ से नाभि से खेलने लगते है, तब शालिनी और ज्यादा ताकत मुठ्ठी भींच देती हैं, चाचाजी के बालों में खिंचाव से दर्द होता है पर उसे भी इस दर्द में मजा आता है, इतनी खूबसूरत नाभि चूमने मिले तो इतना दर्द तो कोई भी मर्द सह लेगा, करीब 10 मिनट नाभि को चूमने चाटने के बाद बाबुजी धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ते हैं और फिर से अपना ध्यान स्तनों पर केंद्रित करते हैं
कामुकता से स्तन थोड़े कठोर और निप्पल तन कर अनार के दाने जैसी हो गई थी, चाचाजी झटके से निप्पल पर टूट पड़ते हैं और चूसने लगते है अभी शालिनी के स्तनों मे थोड़ा दुध फिर से बन गया था, जो चाचाजी के लिए एक सरप्राइज था, उसे लगा नहीं था कि इतनी जल्दी दुध बनने लगेगा, पर जल्दबाजी करने से 5 मिनट में दोनों स्तन खाली हो जाते है ,चाचाजी कुछ देर स्तनों को चूसने के बाद इसबार ऊपर की ओर बढ़ते हैं, पहले वो शालिनी की छाती पर चुंबन करने लगते है
फिर वो अपने हाथ से शालिनी के बालों को हटाकर शालिनी के चेहरे को दायी और करते हैं जिससे शालिनी की बायी और की गर्दन दिखने लगती हैं, चाचाजी उस बगुले जैसी सफेद और पतली गर्दन और उसमे हरे रंग की नस उसकी शोभा बढ़ा रही थी,
शालिनी को चाचाजी की गर्म सांसे उसकी गर्दन पर महसूस होती है तभी अगले ही क्षण चाचाजी का चुंबन भी महसूस होता है, चाचाजी बिना रोके लगातार चुंबन किए जा रहे थे, फिर चाचाजी पूरी गोरी गर्दन को चाटने लगते है,शालिनी तो मानो खुशियो के पायदान चढ़ रही हो एसे उसकी खुशी बढ़ती जाती हैं, अभी शालिनी पूरे दुनिया जहाँ और रिश्ते नाते सब भूल गई थी, बस जो खुशी उसे मिल रही थी उसे बस वो उसे बीना किसी रुकावट के महसूस करना चाह रही थी, फिर चाचाजी उसके चेहरे को बायी ओर करके उसकी दायी ओर की गर्दन को चूमना चाटने लगते है,शालिनी की पूरी गर्दन चाटने के बाद चाचाजी थोड़ा और ऊपर खिसक कर आते हैं, अभी शालिनी के स्तन पर चाचाजी की छाती दब रही थी और उसकी गर्म सांसे उसके कानो मे गूंज रही थी, चाचाजी पहले शालिनी के माथे को चुंबन करते हैं, फिर उसके गालों को चुम्बन करते हैं फिर उसकी दाढ़ी को चूमते है, फिर वो एक पल रुकते है और आँखें बंध किए अपने नीचे लेटी अपने दोस्त के बेटे की पत्नी के सुंदर चेहरे को देखते है, क्या सुन्दरता की मूर्ति है, क्या नाक नक्शा है, एकदम संपूर्ण, मानो अप्सरा, एसी सुन्दर और जवान स्त्री को अपने नीचे लेटा देख चाचाजी को अपने भाग्य पर बहुत खुशी होती है ,और अपने आप पर गर्व होता है।
चाचाजी : (मन में..)ना जाने कौन से जन्म में कौन से पुण्य किए होगे जो इतनी सुंदर स्त्री के साथ उसकी मर्जी से यह सब करने को मिल रहा हैं वर्ना यह कहा और मैं कहा?वो इतनी गोरी चिट्टी जवान काया की मालकिन और में बुजुर्ग सांवला ,कहीं मेल नहीं खाता, यह तो सिर्फ मेरे अच्छे भाग्य और कुदरत की करामात ही है वर्ना इसी सुन्दर जवान स्त्री मेरे नीचे कैसे लेटी होती? काश! यह समय बस यही रुक जाए।
चाचाजी अब शालिनी के गुलाबी पंखुरी के समान गुलाबी होंठ को अपने खुरदरे होंठ से चूमने के लिए आगे बढ़ते हैं पर उनके इतने देर अपने विचारों में खोए होने से शालिनी को जो लगातार मिल रही खुशियो में रुकावट आ जाती हैं और वो अपनी काल्पनिक दुनिया से निकलकर वास्तविकता में आती हैं और देखती हैं कि चाचाजी उसके ऊपर आ गए हैं और उसको चूमने जा रहे हैं, अभी चाचाजी की आंखे बंध थी वो अपने भाग्य पर इतराते हुए अपने होंठ को शालिनी के होंठ से मिलाने नजदीक ला रहे थे पर शालिनी इसके लिए तैयार नहीं थी इसलिए वो अपनी पूरी ताकत से चाचाजी को अपने ऊपर से धक्का देकर हटा देती हैं, उसकी साँस तेजी से चलने लगती हैं
जिससे उसके स्तन तेजी से ऊपर नीचे हो रहे थे, और वो तेजी से पास रखी चादर से अपने आप को ढंक देती हैं, चाचाजी भी इस अचानक हुए हमले से हक्के-बक्के रह जाते है उसे भी वास्तविकता का ख्याल आता है और ध्यान आता है कि उसने क्या किया और क्या करने जाने वाले थे,वो तुरत बिस्तर से नीचे उतर जाते हैं।
चाचाजी : माफ़ करना! जो हुआ मेरी गलती है, और मे इसके लिए शर्मिंदा हूं और दिल से माफी मांगता हूं, इसके लिए सिर्फ में जिम्मेदार हूं, मुझे दुःख है।
शालिनी : (मन में..) यह क्या हो गया?यह सब नहीं होना चाहिये, मुझे क्या हो गया था?इसमें सिर्फ चाचाजी की गलती नहीं,एक तरीके से मेरी भी मंजूरी थी इसलिए बात यहां तक बढ़ी, अब तो मेने चाचाजी को और ज्यादा दुःखी कर दिया, अब चाचाजी इस घटना से दुखी होकर ज्यादा मन ही मन घुटने लगेगें इससे तो बहुत गलत होगा, मैं चाचाजी को इस पश्चाताप की आग में नहीं जलने दे सकती।
चाचाजी : माफ करना मैं बुढ़ापे में पागल हो गया हूं, जो एसी हरकत कर बैठा, मेरे कारण हुआ है, मुझे सजा मिलनी चाहिए।
शालिनी : फिर सजा हम दोनों को मिलनी चाहिए, क्योंकि इस घटना में हम दोनों सामिल थे, आप दुखी मत हो, यह समझो की एक सपना था, और कई ना कहीं मेरी रजामंदी भी थी, आपने ही तो मुजे अपनी आधी पत्नी कहा था, और मेने आधी पत्नी के अधिकार से आपको यह मंजूरी दी थी कि आप मेरे कमर के ऊपर के शरीर पर हक्क होगा ,और आप अपने आप को मिले अधिकार का उपयोग ही कर रहे थे, इसमे कोई गलत बात नहीं है, आप अपने आप को इस घटना से दुःखी ना करे।
(हालाकि शालिनी को भी पछतावा था पर चाचाजी और दुखी ना हो और कहीं उसे डिप्रेशन ना हो इसलिए वो इस घटना को हल्के में लेने का दिखावा करती हैं)
चाचाजी : पर मुझे अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
शालिनी : गलत कहा हुआ? गलत तब होता जब मेरी मर्जी के बगैर आप यह सब करते,
चाचाजी : क्या? सच में आपकी मर्जी थी?
शालिनी : हाँ! मैंने सिर्फ कहने को अधिकार नहीं दिए थे, उसके लिए मैं तन मन से तैयार थी।
चाचाजी : यह सुनकर अच्छा लगा पर मुझे लगता है आप मेरा दिल रखने के लिए कह रहे हो।
शालिनी : अब आपको कैसे यकीन दिलाऊं? आप कहेंगे तो नील की कसम खा कर कहूँ,और यह अधिकार आपको एक दिन या आज रात तक नहीं दिया, यह जब तक आप चाहें तब तक रहेगा, मुझे आप पर पूरा भरोसा है इसलिए यह अधिकार दिए हैं, पर आपको मुझपर भरोसा नहीं।
चाचाजी : नहीं..नहीं..एसा नहीं है, मुझे यकीन है तुम पर, मुझे लगा तुम इतनी सुंदर जवान और मैं गांव का बुढ़ा ...बस यकीन नहीं होता है इसलिए...
शालिनी : रिश्ते में उम्र नहीं देखी जाती, रिश्ते दिल से निभाने होते हैं, कौन कहता है आप बूढे है, शहर में कैसे आपने गुंडों को पकड़ाया और आज भी आपने.....
इतना बोल शालिनी शर्मा जाती हैं और उसके गाल लाल हो जाता है।
चाचाजी : वो आज इतने दिनों बाद स्तनपान करने मिला और स्तन में दूध खत्म हो गया था पर मन नहीं भरा था इसलिए मैं बहक गया था।
शालिनी : मैं समझ सकती हूं,पर यकीन करें स्तन पूरे भरे हुए थे।
चाचाजी : लगता है इतने दिनों बाद पिया है इसलिए कम लगा।
शालिनी : अगर आपको कम लगा तो मैं वो चूर्ण खा लुंगी जिससे ज्यादा बनने लगेगा, वैसे अब बाबुजी भी पीते हैं।
चाचाजी : नहीं मेरे ख्याल से एसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि तुम एकबार चूर्ण ले चुकी हो और तुम्हारी दुध की गुणवत्ता बढ़ाने की दवाई चालू है इस में अगर चूर्ण लेना कहीं तुम्हारे लिए मुश्किलें ना बढ़ा दे, इससे मुन्ने को दिक्कत हो सकती है।
शालिनी को यह सुनकर अच्छा लगा कि चाचाजी नील के लिए चिंतित है और उसके बारे मे पहले सोचते हैं।
शालिनी : फिर मैं क्या करूं?
चाचाजी : सोचकर...) एक काम कर सकती हो पर पता नहीं तुम इसपर यकीन करोगी या नहीं क्योंकि यह तुम्हारे यकीन पर निर्भर होगा
शालिनी : आप लोगों के लिए मैं करेगी, पर क्या करना होगा?
चाचाजी : यह काम दवाई का नहीं दुवा का है
शालिनी : मतलब?
चाचाजी : तुम्हें पता नहीं होगा पर तालाब के दूसरे किनारे से कुछ दूरी पर एक गुफा है हम उसे "अप्सरा गुफा" कहते है
शालिनी : क्या अप्सरा गुफा?
चाचाजी : हाँ अप्सरा गुफा...
चाचाजी शालिनी को उस गुफा का इतिहास बताते हैं...
जब यह गाव बसा उसके कुछ ही समय बाद कहीं से एक भिक्षुक जैसा आदमी गांव में आता है, फटे पुराने कपड़े,लंबे बाल और दाढ़ी ,सबने उसे पागल भिकारी समझकर उसे कभी खाना पीना दे देते, कोई उसे पत्थर मारकर भगा देता,उसका बर्ताव बच्चों जैसा था, वो बच्चों को पसंद करते पर बच्चे उससे डरते थे, वो पैसों को फेंक देता बस खाना खाता और गांव के बाहर उस गुफा में सो जाता।
तभी कई सालों तक बारिश नहीं हुई, सब अकाल से परेसान हो गए थे, सब गाव छोड़ने के बारे मे सोच रहे थे, उसमे जब यह आदमी खाना मांगने आता तब लोग उसे तिरस्कार करके भगा देते, एक घर जहां से उसे रोज खाने को मिलता था वो वहां जाकर खाना मांगने जाता है तभी उस घर में एक छोटे बच्चे के रोने की और उसके मां की रोने की आवाज आती हैं क्योंकि खाना कम था इसलिए सभी लोग कुपोषित होने लगे थे, ऊपर से यह स्त्री को अभी बच्चा हुआ था पर उसकी माँ को पोषण ना मिलने से स्तनों मे दूध नहीं बन रहा था जिससे वो बहुत दुखी थी पर जब वो उस आदमी को देखती हैं तब वो अपने आंसू पोंछ कर उसे आधी रोटी खाने को देती है पर वो आदमी मना कर देता है और उस माँ के सिर पर हाथ रखकर उसे भरोसा दिलाता है कि वो कुछ रास्ता निकालेगा।
वो भिक्षुक वहां से सीधा अपनी गुफा में आता है और ऊपर वाले से प्राथना करने लगता है, उससे वो बच्चे और उसकी माँ का दुख नहीं गया था, उसने परोपकार की भावना से प्राथना की थी इसलिए उपरवाले ने उसकी प्राथना सुन ली।
पूर्णिमा की वो रात थी जब तीन दिन के भूखे सोये उस भिक्षुक के सिर पर एक कोमल हाथ घूमता है, वो भिक्षुक देखता है एक श्वेत कपड़े पहनी एक खूबसूरत स्त्री उसके पास मे वो लेटा है, उसके शरीर में से एक दिव्य सुंगध आ रही थी,
भिक्षुक को लगा वो सपना देख रहा है पर जब उस अप्सरा ने उसे बुलाया तब वो खड़ा हो गया।
अप्सरा : मुझे उपरवाले ने तुम्हारी मदद के लिये भेजा है।
भिक्षुक : मुझे कुछ नहीं चाहिए आप बस गांव में सब ठीक कर दे।
अप्सरा : गांव में भी हालत जल्द ठीक होगे, तुम्हारे इस परोपकारी स्वभाव के करना देवता प्रसन्न हुए हैं,आपको अब गाव में जाकर भिक्षा मांगने की जरूरत भी नहीं है ,आपको खाना यही मिलेगा।
भिक्षुक : यहां कहीं सालों से वर्षा नहीं हुई है, अन्न का एक दाना भी मिलना मुश्किल है।
अप्सरा : मुझे मालूम है, पहले आप अपना खाना खा लीजिए, बाद में मैं आपको जैसा कहु वैसा करना, सब ठीक हो जाएगा।
भिक्षुक पत्थर की शीला पर बैठ जाता है, अप्सरा उसके पास आती हैं और धीरे से अपने स्तन पर बंधा कपड़ा हटाती है,
जिससे उसके सुन्दर सुडोल गोरे गोरे गुलाबी घेराव वाले और गुलाबी निप्पल वाले स्तन जो आपस में सटे हुए हैं वो आजाद हो जाते है, भिक्षुक अपनी नजरों को घुमा लेता है।
भिक्षुक : यह आप क्या कर रही हैं?
अप्सरा : वहीं जिसके लिए मुझे भेजा गया है। आपका ख्याल रखने के लिए, मेरे इस स्तनों में सब पोषण से युक्त दूध बनता है जिसे पीकर आप स्वस्थ हो जाएंगे और आपकी भूख भी शांत होगी, कृपया मुझे अपनी सेवा करने दीजिए,
भिक्षुक अप्सरा की गोदी में लेट जाता है, अप्सरा उसे अपने स्तनों से वो दिव्य दूध पिलाने लगती हैं,
भिक्षुक को भी यह स्वाद दिव्य लगा, उसकी भूख शांत होने लगी, जैसे भिक्षुक की भूख शांत हुई वैसे गांव में भी सभी की भूख शांत हो गई, एसे ही लगातार 5 दिनों तक अप्सरा भिक्षुक को जब भी जरूरत पड़ती तब उसके स्तनों मे दूध बन जाता और वो उसे पीला देती।
5 दिनों बाद...
भिक्षुक : अब मे स्वस्थ हूं, अब मुझे गाव में लोगों की मदद करनी होगी।
अप्सरा : ठीक कहा, आप गांव और इस गुफा के बीच एक पीपल का वृक्ष आएगा उससे 21 कदम दूर तालाब बनाना उसमे से कभी ना सूखने वाली सरस्वती नदी की धारा निकलेगी जो गांव के पीने और खेत की जरूरत को पूरा करेगी पर गांव वालों को कहना कभी इसे दूषित ना करे।
भिक्षुक : आपका बहुत बहुत धन्यावाद, पर मेरी एक विनती है, जब मे आखिरी बार गांव में एक घर है जहां मुझे कभी खाली हाथ नहीं लौटाया ,उस घर में एक छोटा बच्चे को अपनी माँ का दूध नहीं मिल रहा तो क्या आप उस बच्चे को स्तनपान करवा देगी, इससे उस बच्चे को नया जीवन मिलेगा
अप्सरा : माफ करना मुझे इसकी आज्ञा नहीं है, पर हाँ एक काम करना उस महिला को कहना वो इधर आकर इस शीला पर बैठकर दिल से प्राथना करे, तब उसे जब भी जरूरत होगी तब दूध स्तनों मे बन जाएगा और भविष्य में भी जब किसी माता को दुध कम बने या ना बनता हो तब इधर आकर प्राथना करे, उसकी ईच्छा पूरी होगी। अभी मुझे जाना पड़ेगा आप भी जब तालाब बनवाकर इस गुफा में आ जाना, मैं आपको मेरे साथ अपने लोक मे लेके जाऊँगी।
एसा बोलकर अप्सरा अदृश्य हो जाती हैं, और भिक्षुक सीधा उस घर पर आता है और उस महिला और परिवार जनों को उस गुफा में जाकर प्राथना करने को कहता है, बच्चे की हालत गंभीर देखकर वो महिला गुफा में जाति है और प्राथना करती हैं, और जब घर वापिस आती हैं तब उसके रोते हुए बच्चे को देखकर उसके स्तन कठोर और भारी होने लगते है इस चमत्कार को देख घर के सदस्य उस भिक्षुक के पैरों में गिर जाते हैं।
भिक्षुक : आप सब गांव वालों को समझाकर चौराहे पर ले आना, वहां में इस अकाल से बचने का उपाय बताऊँगा।
वो घर के सदस्य सभी गांव वाले को लेकर चौराहे पर आते हैं वहां भिक्षुक सभी को अप्सरा के द्वारा बतायी जगह पर तालाब बनाने को कहता है, पहले कोई विश्वास नहीं करते फिर जब वो महिला अपने साथ हुए चमत्कार को बताती हैं तब सब एक आशा की किरण मानकर खुदाई करते हैं, राजा भी अपने सैनिकों को मदद के लिए भेजता है, जिससे कुछ ही दिनों में तालाब तैयार होने लगता है और एक पानी की धार निकली और देखते ही देखते तालाब भरने लगा, सभी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई, सभी अपनी जरूरत के अनुसार पानी भरने लगे,दूसरे दिन राजा वहां आया और पानी पीकर तृप्त हुआ फिर वो उस भिक्षुक के पास आया।
राजा : आप जैसे पवित्र लोगों के कारण ही हम जिवित है, कृपया आप मुझे एक संतान होने का आशीर्वाद दीजिए ,जिससे मेरा वंश आगे बढ़े और प्रजा की सेवा होती रहे।
भिक्षुक : आप भी उस गुफा में आकर प्रार्थना करना, जिससे आप पति पत्नी के शरीर की कमी दूर होगी जिससे आपको संतानो की प्राप्ति होगी।
उसके बाद वहीं सब हुआ और राजा को दो पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति हुई, और जैसा अप्सरा ने कहा था वैसे वो रात को भिक्षुक को अपने लोक में ले गई।
चाचाजी : तभी से गांव में खुशहाली आयी हैं, पर समय बदलने से वो बाते बस कहानी बनकर रह गई।
शालिनी : नहीं मैं इस पर भरोसा करती हूं और हम जाकर वहां प्राथना करेंगे, पर अभी रात हो गई है अब मुजे चलना चाहिए।
चाचाजी : ठीक हैं अगर बुरा ना मानो तो क्या मैं अपने अधिकार का उपयोग कर सकता हूं?
शालिनी : हाँ! बिल्कुल, अभी क्यूँ?आगे भी जब आप चाहें तब करना, और हाँ हर बार मुझसे पूछने की जरूरत नहीं, कभी किसी पति को अपनी पत्नि से पूछकर छेड़खानी करते देखा है? नहीं ना! अब आप भी बेझिझक और निडर होकर अपने अधिकार का उपयोग करिए, मैंने आपको पूरा हक्क दिया है।
चाचाजी शालिनी के पास आकर उसके माथे को चूमता है जिससे शालिनी को अच्छा लगता हैं
शालिनी अधनंगी हालत में खड़ी होती हैं
और अपनी चोली ढूंढकर पहनती है और पलटकर चाचाजी को नटखट अंदाज में देखती हैं और मुस्करा कर चली जाती हैं,
पर रास्ते में उसके दिमाग में कमरे में हुई घटना चल रही थी।
शालिनी : विचारों मैं...)यह मुझे क्या हो गया था?चाचाजी आज अपनी मर्यादा तोड़ने वाले थे, पर इसमें चाचाजी की गलती नहीं है, मैंने उसे अधिकार दिए थे, वो तो अपने अधिकार का उपयोग कर रहे थे, पर उसने आज कैसे कैसे स्तनपान किया, और उसके बाद जो चुंबन किए (यह सोच शालिनी शर्मा जाती हैं और जो कामुकता बीच में दबा दि थी वो कामुकता जागने लगती हैं )एसे चुम्बन तो नीरव ने भी कभी नहीं किए, अगर वो नहीं रुकते तो सायद मैं भी उसे रोकने नहीं वालीं थी, पर कुछ भी कहो मजा तो आ रहा था, आज पता चला कि एसे काम में उम्र मायने नहीं रखती पर लगाव और अनुभव काम आता है, इतनी उम्र में भी एसी तीव्रता और सूझबूझ, किस अंग को कितना प्यार देना कितना दर्द देना, कैसे चूमना, कब चूमना सब मानो माप तोल के, किसी भी औरत को बिस्तर पर पति से जो ईच्छा होती हैं वो सब कर रहे थे, चाचीजी भी कितनी भाग्यशाली होगी जो एसा प्यार उसे मिलता होगा, आज वो नहीं है सायद इसलिए उसकी याद में चाचाजी ने वो प्रेम मुझपर बरसाया,मैंने उसे आगे भी अधिकार जताने को कहा है पर क्या मैं तैयार हूं?मुझे चाचाजी को फिर से मना करके दुःख नहीं दे सकती, मैं अपने आप को इसके लिए मजबूत करूंगी और अपने से हो सके उतना सहयोग करूंगी।
शालिनी अभी चलते हुए अपने आंगन में आ गई थी, वो खटिया पर बैठ जाती हैं,उसके दिमाग में अभी कामुकता बढ़ने लगती है, वो चाचाजी के स्पर्श को महसूस करते हुए कामुक होने लगती हैं, क्योंकि चाचाजी के थूक की लार उसके शरीर में सूखी हुई थी, शालिनी अपने लहंगा उठा कर अपनी योनि को सहलाने लगती हैं,
आज उसके दिमाग में नीरव का एकबार भी ख्याल नहीं आता वो बस चाचाजी के बारे मे सोच रही थी, धीरे-धीरे उसकी उंगली उसकी योनि में डाल देती हैं, और दूसरे हाथ चोली में डालकर स्तन दबाने लगती हैं ,शालिनी जैसे जैसे विचारों में डूबती जाती हैं वैसे उसकी योनि सहलाने की गति बढ़ जाती हैं, अब शालिनी अपने चरम पर पहुचने को तैयार थी, उसके मुहँ से सिसकारी निकलने लगती हैं, और हाथ की गति बढ़ने लगती है।
शालिनी : आह ! चाचाजी कितना मजा दिलाया आपने, आप तो सच्चे और मंजे हुए खिलाड़ी हैं, मेरी सोच से ज्यादा मजा दिया आपने, आगे मैं आपको नहीं रोकने वालीं, आप भी अपनी ईच्छा पूरी कर लेना, मे आज पागल हो जाती अगर आप नहीं रुकते,
शालिनी की योनि से काम रस बहने की तैयारी होने लगती हैं उसके पैर कांपने लगते है इसके पैर के पंजे मोड़ने लगते है, उसका शरीर अकड़ जाता है, शालिनी के शरीर में जो चंचलता की तरंगे उठ रही थी वो अब धीरे धीरे शांत होने लगती हैं, उसका शरीर थकान महसूस कर्ता है
और रात भी काफी हो गई थी इसलिए उसे आंगन में उसी खटिया पर नींद आ जाती हैं।
शालिनी का हस्तमैथुन वाला सारा दृश्य खिड़की से बाबुजी भी देख रहे थे पर उसे लगता है, बहु जवान है पति से दूर है इसलिए यह सब कर रही हैं पर वो क्या जाने की शालिनी उसके बेटे को नहीं पर उसके बुजुर्ग दोस्त को याद करके अपनी कामुकता शांत कर रही थी।
Hot updateUpdate 30 :
रात अपने कालेपन को चारों ओर फैला चुकी थी, सभी नींद के आगोश में थे तब एक स्त्री थी जो अपने विचारों और चिंता के कारण जग रही थी और अपने विचारों और चिंता के निवारण के लिए धीरे-धीरे अपने कमरे से निकल कर अपने बग़ल वाले घर मे जाती हैं, जहां उसकी चिंता और चिंता का निवारण दोनों था, वो धीरे से चाचाजी के घर में दाखिल होती हैं,
दरवाजा खुला था जो शालिनी के लिए एक चाचाजी द्वारा ली जाने वाली कसौटी का प्रश्न था ,जिसे वो पास करती हुई आगे बढ़ती है, चाचाजी देखना चाहते थे कि शालिनी क्या पहले की तरह आएगी या नहीं आएगी?,पर देरी होने से चाचाजी मायूस होकर सो गए थे, पर शालिनी भी एक महारानी की तरह अपने आने का एलान अपने पायल की झनकार करके करती हैं, पायल की झनकार से चाचाजी की नींद खुल जाती हैं पर वो सोने का नाटक करते हैं,वो देखना चाहते थे कि शालिनी क्या करेगी?शालिनी कमरे में आती हैं और देखती हैं चाचाजी दरवाजे की ओर पीठ करके सोये हुए हैं, वो बिस्तर के नजदीक आती हैं और धीरे से चाचाजी को पुकारती है पर चाचाजी सोने का नाटक करते हैं, शालिनी फिर पास आकर चाचाजी के सिर पर हाथ फेरती है, फिर उँगलियों को चाचाजी के चेहरे पर फहराते है, चाचाजी पलट जाते हैं, शालिनी अपनी पायल और चूडियों को खनकती हुई दूसरी ओर आती हैं और चाचाजी के पास आकर बैठ जाती हैं ,और चाचाजी के हाथ को अपने हाथों में लेती हैं, पर चाचाजी दूसरी ओर पलट जाते हैं, शालिनी को लगा चाचाजी मज़ाक कर रहे हैं, इसलिए वो दूसरी ओर आती हैं, जब दो तीन बार एसा हुआ तब शालिनी को लगा कि चाचाजी मज़ाक नहीं कर रहे है ,चाचाजी थोड़ा नाराज लग रहे थे, शालिनी अब धीरे से बिस्तर के किनारे पर बैठ जाती हैं और थोड़ा गंभीर होती हैं।
शालिनी : चाचाजी.....
चाचाजी कुछ नहीं बोलते बस करवट लेकर लेटे रहते हैं।
शालिनी : चाचाजी ....क्या आप बात कर सकते है? आप मुझसे क्यूँ नाराज हैं?मैंने किया क्या है?मुझे जानने का हक है कि मेरी किस बात से आप को दुःख हुआ है, आप बात नहीं करेंगे तो मुझे कैसे अपनी गलती का पता चलेगा? कृपया आप मुझसे बात करे, मैं अपनी गलती सुधारने का प्रयास करूंगी, आप एसे नाराज है यह मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है, एक तो आप इतने दिनों के बाद आए हैं और आप को आकार ही दुख हुआ वो भी मेरे वजह से, यह बात मुझे बहुत परेसान कर रही हैं, कृपया आप नाराजगी छोड़ मुझसे बात करो, मेहरबानी करे...
चाचाजी बिस्तर पर बैठ जाते हैं और शालिनी की ओर देखने लगते है।
वो देखते हैं शालिनी ने अपनी सास के पारंपरिक कपड़े पहने हुए हैं, उसके बाल पीठ को ढंके कमर तक थे, उसने सिर्फ चोली और लहंगा पहना हुआ है, चोली का गला गहरा था और शालिनी के स्तन उसमे बड़े तंग थे जिससे वो आपस में सट्टे हुए और उभार बनाकर बाहर आने को व्याकुल थे,जिसके बीच अपने पति की निशानी फंसी हुई थी ,बैठने से शालिनी के पेट में बल पड़े थे, और लहंगा वसे भी लंबाई में छोटा था और बैठने से घुटने तक आ गया था जिससे शालिनी के गोरे पैर और गुलाबी पिण्डी और पैर की तलहटी दिखाई दे रही थी,
शालिनी के सुन्दर शरीर को नीचे से ऊपर तक निहारते है तब चाचाजी को उस सुन्दर यौवन से भरी काया के ऊपर चिंतित और मायूसी भरा चेहरा दिखता है ,जिसे देख चाचाजी की नाराजगी पिघलने लगती हैं, वो खिसक कर थोड़े शालिनी के पास आती हैं जिसे देख शालिनी को खुशी हुई और थोड़ा वो भी खिसकी, अभी आमने सामने बैठे हुए थे।
शालिनी : आप मुझसे गुस्सा हो?
चाचाजी : नहीं..!बस थोड़ी नाराजगी है
शालिनी : मैंने एसा क्या किया जिससे आपको नाराजगी हुई?
चाचाजी : कुछ नहीं....
शालिनी : जब कुछ नहीं है तो नाराज क्यूँ है?अभी आप भी बातें छुपाने लगे?पता है मैं आपकी पत्नी नहीं हूं पर आधी पत्नी तो हूं, देखो आपके लिए आपकी पसंदीदा चीज़ भी लायी हूं,जिसे पाकर आप खुश हो जाएंगे।
एसा बोलकर शालिनी अपने आँखों से अपने स्तनों की ओर इशारा करती हैं और गले पर हाथ घुमाती है।
चाचाजी : नहीं...मुझे नहीं पीना।
शालिनी : क्या?आप मना कर रहे है? आप भूल तो नहीं गए हैं? देखो मैं आपको पिलाने के लिए पूरे भरे हुए लायी हूं, इसे पूरा भरने से मुझे दर्द हो रहा है, आप जल्दी से इसे पीकर दर्द से राहत दिलाए जैसे पहले करते थे,
चाचाजी : नहीं अब मैं यह नहीं करूंगा, कृपया आप जाइए, मैं नहीं चाहता मेरी वजह से आपको दिक्कत आए, भविष्य में आपको मेरी वजह से कोई संकट आए।
शालिनी : आज आप एसी क्यूँ बातें कर रहे हैं?कोई दिक्कत नहीं आएगी, और आएगी तो आप है ना हमें सम्भालने के लिए
चाचाजी : आपको अब दूसरे रास्ते खोजने चाइये, ताकि मुझपर निर्भर ना रहना पड़े।
शालिनी : आप भी मेरी सहायता नहीं करेगें तो कौन करेगा?
चाचाजी : जैसे मेरे जाने के बाद खुद को सम्भाला वैसे सम्भाल लेना। इतने दिन मेरी सहायता के जैसे निकले वैसे आदत बना लेना।
शालिनी को अब अंदाजा होने लगा था कि चाचाजी किस ओर इशारा कर रहे हैं
शालिनी : मन में...) क्या चाचाजी को पता चल गया है कि उसके गैर मौजूदगी में मेने बाबुजी को स्तनपान करवाया है ,क्या इस वजह से चाचाजी नाराज हैं? मुझे बात करनी पड़ेगी इस बारे मे, ताकि गलतफहमी ना हो।
शालिनी : चाचाजी ! क्या आप साफ साफ़ कहेंगे कि क्या दिक्कत हुई है? मैं नहीं चाहती कि मेरे कारण किसी को परेसानी हो, मेने तो सोचा था कि इतने दिनों बाद आपको स्तनपान करने मिलेगा तो आप खुश हो जाएंगे और आपको खुश देखकर मुझे खुशी होगी।
चाचाजी : मैं बस इतना चाहता हूं कि मेरी वजह से तुम्हारे और मेरे घर के इतने सालों के रिश्तों मे कड़वाहट या दरार हो
शालिनी : मैं तो आपको अब हमारे घर का सदस्य मानतीं हूं, अब हम दो नहीं एक घर है, और मे अपने आप को खुशकिस्मत समझती हूं कि इन दोनों घर को एक करने की कड़ी मैं बनी हूं ,अब तो उसमे मीठे दूध का मिश्रण हुआ है कि कड़वाहट का सवाल ही नहीं।
चाचाजी : मैं नहीं चाहता कि मेरे कारण मेरे दोस्त को संशय हो।
शालिनी : आप स्पष्ट शब्दों में कहिये अपनी बात, अब पहेली ना बनाए सीधे और साफ शब्दों में कहें, अभी आप बतायेंगे तो हो सकता है, समस्या का निराकरण भी मिल जाए, फिर बात ज्यादा बिगड़ती जाएगी और मैं नहीं चाहती कि मेरे कारण आप और बाबुजी के बीच कोई दरार पड़े ,
चाचाजी : ठीक हैं, अभी आने में देर क्यूँ हुई?
शालिनी : वो बाबुजी के सोने का और दुध भरने का इंतजार कर रही थी,
चाचाजी : अभी रात को मुन्ने ने दुध पीना कब से शुरू किया?
शालिनी : (मन में..)अब क्या कहूँ?चाचाजी को भी पता है की नील रात को सारा दुध नहीं पीता, क्या मैं सब सच कह दूँ?अगर मेने झूठ बोला और चाचाजी ने दोपहर में सब देख लिया होगा तो मुझसे और ज्यादा नाराज हो सकते है, और मैं हर समय डर में रहना पड़ेगा, इससे अच्छा चाचाजी को सब सच बता देती हूं, और चाचाजी मेरी परिस्थितियों को अच्छे से जानते हैं, वो समझेंगे मेरी बात को।
चाचाजी : क्या हुआ?कोई कहानी बना रही हो, देखो मुझसे कुछ छुपाना नहीं,
शालिनी अपने मन को मजबूत करती हैं।
शालिनी : नहीं...मैं आपसे कुछ नहीं छुपाने वालीं, मैं आपको सब सच बताऊंगी फिर आप निर्णय करना मैंने ठीक किया या गलत।
शालिनी चाचाजी को उसके जाने के बाद की सारी घटना का वर्णन करती हैं कि कैसे बाबुजी बीमार हुए फिर डॉक्टर ने उसे यह उपाय दिलाया और बाबुजी के खातिर उसने दूध की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए दवाई ली है, फिर इस तरह से अब वो रोज बाबुजी को स्तनपान करवाती हैं।
सब बातें सुनकर चाचाजी के मन में पहले शालिनी के लिए सम्मान बढ़ गया उसने सोचा शालिनी कितनी दयालू और सब की चिंता करने वाली है, पहले मेरे लिए उसने अपने स्तनों के दुध को पिलाया और अब अपने ससुर को स्तनपान करवाती हैं, कितना बड़ा बलिदान है, तभी उसके मन में दूसरा स्वार्थी विचार आया कि अब क्या शालिनी के लिए वह प्राथमिकता नहीं रहेंगे, क्योंकि की वह बाहर के हैं, अब उसे दूसरा दर्जा मिलेगा, उसे अब क्या सिर्फ अपने दोस्त के गैरमौजूदगी के समय ही स्तनपान करने का मौका मिलेगा ?
चाचाजी : मन में...) मैं स्वार्थी क्यूँ हो रहा हूं?क्या मुझे शालिनी से स्तनपान करने की लत लग गई है? की उसके दूर होने के विचार से मुझे जलन और दुख होने लगा, मुझे समझना चाहिए कि वो मेरा दोस्त है उससे भी बढ़कर वो शालिनी के परिवार का हिस्सा है और उसका ससुर है, जब घर में मदद मिलती रहेगी तो कोई बाहरी व्यक्ति से मदद क्यु लेगा? मुझे अपने आप को भाग्यशाली मानना चाहिए कि इतने समय तक तो स्तनपान का सुख मिला, वर्ना इस बिरंगी जिंदगी जीना कौन चाहता?
शालिनी चाचाजी की चुप्पी से परेसान होने लगती हैं, वो चाचाजी को दुःखी और परेसान नहीं देख सकती थी, वो उसे कोई जरूरत समय ही काम आने वालीं चीज़ नहीं महसूस करवाना चाहती इसलिए शालिनी चाचाजी का हाथ पकड़ लेती हैं और खिसक कर थोड़ा नजदीक आती हैं।
चाचाजी का हाल उस बड़े भाई जैसा है जिसको बचपन से सारा प्रेम और खिलौने पर एकाकी हक्क मिला था पर अब उसके छोटे भाई के आने से प्रेम और खिलौने में दो भाग हो गए, वो छोटे भाई से नफरत तो नहीं कर्ता पर उसे दुःख और जलन महसूस होती है कि जिस खिलौने से इतने समय से खेलता आ रहा हैं ,और जिस प्रेम की बारिश में वो अकेला भीग रहा था उसमें अब उसके छोटे भाई का हक्क भी होगा, जब कि माँ के लिए दोनों बच्चों में कोई फर्क़ नहीं होता, पर छोटे बच्चे को अभी थोड़े ज्यादा प्यार और देखभाल की जरूरत होती हैं इसलिए बड़े बच्चे को लगता है माँ उसे पहले जैसा प्यार नहीं करती, इसलिए उसे छोटे भाई से जलन होती हैं पर जब समय गुज़रता है तब वहीं छोटा भाई बड़े भाई का सबसे अच्छा दोस्त और साथी बनता है।
शालिनी को भी लगता है कि चाचाजी को थोड़ा दुख हुआ है और थोड़ी असुरक्षा का भाव महसूस कर रहे हैं, इसलिए वो चाचाजी को पूरी तरह से आश्वस्त करना चाहती थी कि बाबुजी के कारण उसके और चाचाजी के बीच के संबंध में कोई बदलाव नहीं आएगा, बस थोड़ा संभालकर चलना होगा,वो बस सब पहले की तरह हो जाए एसा चाहती थी। क्योंकि चाचाजी ने उसकी तब मदद की थी जब कोई नहीं था, जिसका एहसान वो नहीं भूला सकती।
शालिनी : चाचाजी ! मैं जानती हूं कि आप क्या सोच रहे हैं, बाबुजी के बारे में मुझे भी चिंता है, पर अभी वो बीमार है इसलिए उसे दूध की जरूरत ज्यादा है, पर आप चिंता मत करो, मैं हर रात एसे आएंगी और दिन में भी जब मौका मिलेगा तब आपको स्तनपान करवा दूंगी,बस आप सब चिंता छोड़े और पहले जैसे हो जाइए, कुछ ना कुछ रास्ता निकाल लेंगे।
चाचाजी : हाँ ठीक कहा, भविष्य की चिंता में वर्तमान क्यूँ खराब करे पर मेरी एक ईच्छा है।
शालिनी : कैसी ईच्छा?
चाचाजी : मैं आज अपनी मर्जी से अपने तरीके से स्तनपान करूंगा, इतने दिन मैं इस स्वाद से दूर रहा हूं इसलिए मुझे जैसे मन करे वैसे पाऊँगा।
शालिनी : हाँ! जैसे पीना है वैसे पी लेना, इतना हक तो बनता है आपका अब जल्दी करो,अब तो मुझे दर्द भी होने लगा है, आप जल्दी से अपनी इस अर्ध पत्नी को दर्द से छुटकारा दिलाए।
चाचाजी : मुझे अच्छा लगा कि तुम हमारे लिए इतना कुछ कर रही हो ,तुम्हारा बलिदान अतुल्य है, चलो अब रात भी बीती जा रही हैं,
शालिनी : लगता है आज मुझे परेसान कर देंगे।
चाचाजी : हाँ थोड़ा परेसान करूंगा पर आनंद भी मिलेगा
चाचाजी पहले शालिनी के गोदी में आकर लेट जाता है और जैसे ही शालिनी पिछे हाथ ले जाकर डोरी खोलने जाती हैं तब चाचाजी रोक लेते हैं।
चाचाजी : आज सब मैं करूंगा आप बस देखेंगे
शालिनी अपने हाथ हटा लेती हैं और चाचाजी हाथ पिछे ले जाकर डोरी खोल देते हैं फिर बाबुजी चोली को आगे से ऊपर उठाकर शालिनी के स्तनों का अनावरण करते हैं, इतने दिनों की भूख और स्तनों को देखने की उत्सुकता उसके आँखों में दिख रही थी, शालिनी भी आज चाचाजी को रोककर उसके आनन्द को रोकना नहीं चाहती थी उसने आज बस एक मूर्ति बनके सब देखने का सोचा था, चाचाजी मुँह खोलकर निप्पल को मुँह में भर लेते हैं और जोर से चुस्की लेते है, दुध की धार सीधा उसके मुँह में गिरने लगती हैं ,
आज कितने दिनों बाद चाचाजी को यह गाढ़ा ,मीठा,और हल्के पीले दुध का स्वाद चखने मिला है, चाचाजी को आज दूध पहले से ज्यादा मीठा और गरमाहट वाला लगा,क्युकी दवाई के कारण अब जैसे बच्चे के जन्म में समय दूध में जैसी पौष्टिकता और स्वाद होता है वैसा दूध बनने लगा था जिससे बाबुजी की तबीयत में तेजी से सुधार आया था, चाचाजी को भी यह स्वाद अच्छा लगा, वो फिर से उस खूबसूरत स्तनों से उसका रस चूसने लगते है ,चाचाजी के चूसने में आज इतने दिनों की दूरी की वजह से उतावलापन दिख रहा था।
तभी वो अचानक से रुक जाते हैं और खड़े हो जाते है शालिनी भी अचंभे में पड़ गई कि चाचाजी अचानक से रुक क्यों गए।
शालिनी : क्या हुआ चाचाजी?आप एसे क्यूँ खड़े हो गए मुझसे कोई गलती हो गई?
चाचाजी : नहीं..नहीं! वो मेने कहा था कि आज अपनी मर्जी से पियेगा।
शालिनी : हाँ! पीला तो रही हूँ
चाचाजी : हाँ अब हम दूसरे तरीके से करेंगे।
( शालिनी अब जो चाचाजी ने कहा वैसे करने जा रही थी, उसे यह सब बचकाना लगा पर चाचाजी की इच्छा होने से वो करने को तैयार थी )
शालिनी अपने कपड़े और बाल ठीक करके कमरे से बाहर जाती हैं
उसने इस समय अपनी चोली थोड़ी ढीली सी पहनी थी ताकि उसे खोलने में देरी ना हो, वैसे भी अभी एक स्तन पूरा भरे होने से दर्द हो रहा था, अब शालिनी कमरे में वापिस दाखिल होती हैं जैसा चाचाजी चाहते थे, चाचाजी ने शालिनी से कहा था की उनको शालिनी सामने से आकर पिलाए।
शालिनी तेजी से चलकर कमरे में दाखिल होती हैं वो सीधा आकर चाचाजी के सामने खड़ी हो जाती है, चाचाजी बिस्तर पर बैठे हुए हैं जिससे शालिनी के सुडोल स्तन उसके ठीक सामने थे, शालिनी के चेहरे पर एक दर्द था, उसे दर्द से छुटकारा चाहिए था।
शालिनी : आह...! चाचाजी आप कभी इतने सारे दिन मुझसे दूर नहीं जाना, जरूरी हो तो मुझको साथ ले जाना मुझसे अब यह स्तन में दूध भरने से दर्द होता है वो नहीं सहना, आप के द्वारा किए जाने वाले स्तनपान से मुझे बहुत सुकून मिलता है, अभी आप जल्द से जल्द मेरा स्तन चूस कर दर्द से छुटकारा दिला दो।
शालिनी स्तन के ऊपर रहे चोली के आवरण को हटाती है और अपना पूरा दूध से भरा स्तन चाचाजी के सामने परोस देती हैं ताकि चाचाजी इसे चूस कर खाली कर दे,
चाचाजी भी मानो शेर हिरन पर झपटते समय पूरा मुँह खोलता है वैसे पूरा मुँह खोलकर स्तन पर झपटते है,
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शालिनी ने चाचाजी का यह रूप पहली बार देखा, उसे यकीन नहीं होता कि चाचाजी उसके स्तनों के इतने दीवाने हैं, उसे लगा कि सामन्य स्तनपान होगा पर अभी चाचाजी जिस तरह से स्तन चूस रहे हैं वो एक अलग भावना है, मानो सच में अपनी पत्नी के स्तन चूस रहे हो।
शालिनी आज चाचाजी को रोकना नहीं चाहती थी कहीं ना कहीं इस प्रकार से चूसने से उसे रोमांच हो रहा था, क्योंकि इतने दिनों से बाबुजी और चाचाजी एक बच्चे की तरह स्तनपान कर रहे थे, पर आज चाचाजी एक मर्द की तरह चूस रहे थे, चाचाजी कभी अपनी जीभ से निप्पल से खेलते, कभी हल्के दांत गढ़ाते इससे शालिनी की सिसकारी निकलने लगती
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, शालिनी को आज महसूस होता है कि एक असली मर्द द्वारा स्तन से कैसे खेला और चूसा जाता है ,नीरव ने कभी इतनी कठोरता नहीं दिखाई थी, वो हमेसा शालिनी को दर्द ना हो उसका ख्याल रखता था, पर शालिनी को आज एसा लगा कि थोड़ा दर्द भी ज्यादा आनंद दिलाता सकता है ,शालिनी को अभी दुख में सुख मिल रहा था, चाचाजी कभी एकसाथ दूध को एसे चूसने लगते की मानो एक श्वास में सारा निचोड़ के पी जाएंगे
और अगले पल वो अपने खुरदरे होंठ को एसे स्तन पर लगाते मानो उस स्तन को सबसे ज्यादा परवाह करने वाले यही होंठ है,
शालिनी को पल पल में मिल रहे सुख और दुख के अनुभव से एक रोमांच हो रहा था जो शालिनी के जीवन के हसीन पलों को बना रहा था ,शालिनी एक अलग दुनिया में थी, वो यह अनुभव का पूरा आनंद लेना चाहती हैं जो वो ले भी रही थी।
शालिनी मे अब कामुकता का असर दिख रहा था, उसके निप्पल तन गए थे ,और उसके बोलने में भी अब नियंत्रण नहीं रह गया था।
शालिनी : आह....! पी जाइए सारा दूध,निचोड़ दीजिए इस स्तनों को,आज तक इस तरह से किसी ने नहीं पीया, आह...जरा धीरे..मैं पूरा पिलाकर ही जाऊँगी, आराम से पियो ,
चाचाजी फिर से स्तनपान छोड़ देते हैं, इस बार शालिनी तड़प उठती हैं, उसे समझ नहीं आ रहा था कि चाचाजी क्यूँ रुक गए,इतना अच्छा सब चल रहा था, उसे मजा आ रहा था।
शालिनी : क्या हुआ, आप रुक क्यूँ गए?
चाचाजी : में चाहता हूं तुम फिर से कमरे में आओ
शालिनी : अभी यह जरूरी है?कहीं बाबुजी जाग गए तो?
चाचाजी : वो में सब सम्भाल लूँगा, अभी तुम मेरी आधी पत्नी के रूप मे हो, अभी तुम्हारी सारी जिम्मेदारी मेरी है, तुम बस मेरा कहना मान लो
शालिनी : वो सब ठीक है मेरा मतलब यह था कि इतना अच्छा स्तनपान हो रहा था और उसे बीच में छोड़ दिया इसलिए..
शालिनी को यह सुनकर अच्छा भी लगा जब चाचाजी ने उसकी जिम्मेदारी उठाने की बात कही तब उसे लगा कि चाचाजी सिर्फ कहने को आधी पत्नी नहीं कहते पर सच में उसे मानते भी है और उस रिश्ते को निभा भी रहे है।
चाचाजी : विश्वास करो इससे भी अच्छा स्तनपान होगा,
शालिनी फिर से अपनी चोली को पहनकर बाहर जाती हैं और फिर वापिस आती हैं, शालिनी जैसे ही दरवाजा बंध करके कमरे में आती हैं, बाबुजी तेजी से जाकर शालिनी के चोली को हटाकर उसके स्तन को खड़े खड़े चूसने लगते है,
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शालिनी को कुछ सोचने समझने का मौका ही नहीं मिला कि क्या हो रहा है, चाचाजी तेजी से बारी बारी से स्तन चूसने लगते है, इस बार चाचाजी पूरे जोश से चूस रहे थे, चाचाजी भी अभी अपना हक्क जताने लग गए थे मानो शालिनी सच में उसकी पत्नी हो, इस बार जब वो एक स्तन को चूस रहे थे तब पहले तो शालिनी को कमर से पकडकर अपनी ओर खींचा फिर चूसते हुए ही अपने हाथ को दूसरे स्तन पर रख दिया मानो कह रहे हैं कि यह स्तन उसकी संपत्ति है,जिसपर अंगूठे से नहीं पर पूरे पंजे से अपनी मोहर लगा रहे हैं,
शालिनी को चाचाजी का यह मर्दाना अंदाज अजीब लगा पर उसे कहीं ना कहीं अंदरूनी आनंद मिल रहा था, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से उसकी कामुकता कभी कभी बाहर आ रही थी, पर हर समय वो उसे दबा देती थी पर अगली बार वहीं कामुकता दोगुनी ताकत से आती, शालिनी अभी ज्यादा सोचने समझने की स्थिति में नहीं थी, क्योंकि चाचाजी की क्रिया उसकी सोचने की शक्ति से ज्यादा तेज थी, उसके साथ यह सब पहली बार हो रहा था इसलिए उसका दिमाग आगे क्या होगा इस उत्सुकता मे स्थिर हो गया था, शालिनी बस देख रही थी कि चाचाजी क्या और कैसे कर रहे हैं, एसा कुछ तो उसके जवान पति ने भी नहीं किया जो बुजुर्ग चाचाजी कर रहे थे,शालिनी के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी जो चाचाजी को स्तनों को चूसने के लिए उकसा रही थी।
चाचाजी अब अलग अलग तरीके से स्तनों को चुस रहे थे, कभी वो एक स्तन चूसने लगते तब दूसरे स्तन पर हाथ रखते, कभी दूसरे स्तन के निप्पल को उंगलियों से मसल देते, कभी दोनों स्तनों को बारी-बारी से तेजी से चूसने लगते,
कभी सिर्फ निप्पल चूसें तो कभी पूरा मुँह खोलकर स्तन मुँह में भरने लगते
, कभी निप्पल को दांतों से हल्के से खींचते, कभी जीभ से खेलते, एसे करते हुए दोनों स्तन खाली हो गए थे, पर चाचाजी स्तनों से अलग नहीं होते, शालिनी भी आज चाचाजी को अपनी मर्जी का करने देना चाहती थी ताकि चाचाजी को यह ना लगे कि वो उससे भेदभाव करती हैं, ब्लकि वो चाचाजी को वह सब करने दे रही थी जो सिर्फ एक पति ही अपनी पत्नी के स्तनों के साथ कर सकता है।
जब स्तनों से खेलते खेलते चाचाजी को कुछ होश आया कि स्तन मे अब दूध नहीं है तब वो शर्माते हुए अपने मुँह को शालिनी के सुडोल गोरे स्तनों के बीच छुपा देते हैं, शालिनी को भी थोड़ी हसीं आती हैं, पर अभी जो चाचाजी उससे खुलकर स्तनपान कर रहे थे उससे उसे जो खुशी मिली थी इसलिए वो भी अपनी ओर से चाचाजी को थोड़ा खुश करने का सोचती हैं, वो अपने दोनों हाथों से अपने दोनों स्तनों को भींच कर चाचाजी के चेहरे पर दबाव डालकर दाएं बाएं हिलाने लगती हैं, चाचाजी के लिए यह एक चौकाने वाला इनाम था, जिसे वो खुशी से स्वीकार करते हुए होठों से स्तनों को चूमने लगते है,
शालिनी : आह....! चाचाजी चूस डालिए,सारा दुध पी जाइए, इस दुध पर आपका अधिकार है, एसे ही चूसा करो, आज से पहले किसी ने एसे स्तनपान नहीं किया, आज पता चला कि स्तनपान भी इतना मजेदार हो सकता है,
चाचाजी : तुम्हारा स्तनपान बलवंत भी कर्ता है और मैं भी कर्ता हूं, तो क्या फर्क़ है उसमें और मुझमें?मुझे कुछ ज्यादा चाहिए,क्योंकि तुम मेरी आधी पत्नी हो।
शालिनी : हाँ...सही कहा, क्या चाहिए आपको?
चाचाजी : मैं चाहता हूं कि जैसे तुम मेरी आधी पत्नी बनी हो तो तुम्हारे आधे शरीर यानी कमर के ऊपर के शरीर पर अधिकार हो, मुझे इसे छूने, चूसने, चूमने और सहलाने की पूरी छुट मिले " कहीं भी और कभी भी "
शालिनी अभी भी कामुकता के आवेश में थी ,वो ज्यादा सोचने समझने की स्थिति में नहीं थी, उसे लगा कमर के ऊपर तो उसके स्तन है जिसे चाचाजी ने अनगिनत बार देखा है और चूसा है इसमें कोई बड़ी या नयी बात नहीं है, इससे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिये
शालिनी : हाँ मंजूर है, में आपकी आधी पत्नी होने का पूरा कर्तव्य निभाएंगी,
चाचाजी खुशी के मारे फिर से अपने मुँह को स्तन के बीच रखकर दाएं बाएं हिलाने लगते है, शालिनी अभी भी सोच रही थी कि इससे चाचाजी को अपने परिवार के खोने के दुःख और ऊपर से अपने भाई के मरने के दुःख से राहत मिलेगी,वो चाहती थी चाचाजी अपना सामान्य जीवन फिर से शुरू करे।
शालिनी ने आवेश में अधिकार तो दे दिया, पर उसने यह नहीं सोचा कि कमर के ऊपर सिर्फ उसके स्तन नहीं है उसके घने काले लंबे बाल भी है, इसका गौरा सुन्दर चेहरा है जिसमें उसकी नशीली आंखे और उसके रसदार गुलाब की पंखुरी जैसे गुलाबी होंठ भी है, उसके पास उसके गुलाब के फूल जैसे दो गुलाबी मुलायम गाल भी है, उसके नीचे पतली चिकनी गर्दन भी है, जिसके खत्म होते ही उसकी छाती है जिसपर उसके शरीर के सबसे हसीन अंग उसके दो पर्वत समान दूध कलश भी है, जिसके नीचे पतली कटीली कमर और बीच में गहरी गोल नाभि भी है और पिछे तो पूरी संगमरमर की सड़क जैसी उसकी लंबी गोरी बेदाग पीठ है।
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चाचाजी अपने मिले अधिकार का उपयोग करना चाहते थे पर वो एक एक कदम आगे बढ़ना चाहते थे ताकि शालिनी को यह ना लगे कि वो कामुक बन गए हैं और चाचाजी यह भी सोच रहे थे कि वो शालिनी के दिए हुए अधिकारों का गलत उपयोग नहीं करेंगे, पर वो अपने मन की ईच्छा को पूरा करेंगे पर उस मे अगर शालिनी मना करेगी तो वो वहीं रुक जाएंगे।
चाचाजी शालिनी को थोड़ा पीछे ले जाकर दीवार से सटा देते हैं और शालिनी के खाली स्तन को चूसने लगते है और दूसरे स्तन को सहलाने लगते है, फिर दूसरे स्तन को चूसने लगते है कुछ देर एसे ही चूसने से उसकी गर्दन में दर्द होता है, और शालिनी से भी अब खड़ा नहीं रहा जाता है, चाचाजी शालिनी का हाथ पकडकर बेड के पास लाते हैं,
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शालिनी भी चुपचाप चाचाजी की सब ईच्छा पूरी करती जा रही थी, उसे भी मजा आ रहा था, शालिनी के भीतर की स्त्री को अपने आप पर गर्व हो रहा था क्योंकि एक मर्द के लिए वो खास है, बेड के किनारे पर आकर चाचाजी शालिनी को धीरे से लेटा कर उसके ऊपर आकर स्तन चूसने लगे और दूसरे स्तन से खेलने और दबाने लगे शालिनी की आंखे बंध हो गई थी
उसका एक हाथ चाचाजी के सिर पर था जो कभी उसके बाल सहलाती कभी सिर पर दबाव डालती जिससे चाचाजी को स्तन चूसने के लिए प्रोत्साहन मिलता जिससे वो तेजी से चूसने लगते।
तभी चाचाजी स्तनों को चूसने छोड़ चाटने लगते है, वो कभी ऊपर से नीचे तो कभी दाएँ बाएँ चाटते, कभी दोनों स्तनों के बीच चाटने लगते,
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गर्मी से शालिनी को पसीना आ गया था पर उस नमकीन पसीना भी आज चाचाजी को मीठा लग रहा था, शालिनी के दोनों स्तन प्रदेश चाचाजी की लार से भीग गए थे, तभी चाचाजी ताबड़तोड़ पागलों की तरह चूमने लगते है, शालिनी के स्तनों पर मानो आज प्यार और आकर्षण की बाढ़ आयी थी, और यह बाढ़ बहकर कब शालिनी की कमर पर आ गई दोनों को पता नहीं चला, दोनों बस जो हो रहा था वो होने दे रहे थे।
चाचाजी स्तनों को चूमते चूमते धीरे धीरे नीचे की ओर आने लगते है ,पहले चाचाजी स्तनों के बीच चूमता है फिर अपने चुंबन की बारिश को बिना रोके वो शालिनी की पतली कमर पर बरसाने लगते है,
शालिनी का पूरा पेट चाचाजी के थूक की लार से गिला हो गया था, फिर चाचाजी आखिर में उस पेट के केंद्र में सुन्दर गोल नाभि पर आते हैं और कुछ पल उसे निहारते है, शालिनी की नाभि उसके द्वारा देखी गई सभी नाभि से सुंदर थी, इतनी सुन्दर गोल गहरी नाभि को देख चाचाजी से ज्यादा देर रहा नहीं जाता और वो शालिनी की कमर अपने हाथ से पकड़ लेते हैं और अपने होंठों को नाभि पर रख देते हैं बाबुजी अपने चेहरे को शालिनी के पेट पर दबाने लगते है ताकि नाभि और उसके बीच की कुछ ना हो, जैसे ही चाचाजी के खुरदरे होंठ शालिनी के मलाई मक्खन जैसे पेट पर लगते है और नाभि को चूमते है, शालिनी की आंखे फिर से बंध हो जाती हैं और एक मुठ्ठी से बिस्तर भींच लेती हैं
और दूसरे मुठ्ठी से चाचाजी के बालों को भींच देती हैं, शालिनी के सारे शरीर में सिहरन दौड़ जाती हैं, आज कितने महीनों बाद किसी ने उसकी नाभि पर प्यार जताया है, उसे बहुत अच्छा लग रहा था, शालिनी की सिहरन बिजली के करंट में तब बदली जब चाचाजी ने अपनी जीभ को शालिनी के नाभि में डाल दिया, यह शालिनी के सोच से परे था उसे लगा नहीं था कि चाचाजी एसा कुछ करेंगे, जब चाचाजी जीभ से नाभि से खेलने लगते है, तब शालिनी और ज्यादा ताकत मुठ्ठी भींच देती हैं, चाचाजी के बालों में खिंचाव से दर्द होता है पर उसे भी इस दर्द में मजा आता है, इतनी खूबसूरत नाभि चूमने मिले तो इतना दर्द तो कोई भी मर्द सह लेगा, करीब 10 मिनट नाभि को चूमने चाटने के बाद बाबुजी धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ते हैं और फिर से अपना ध्यान स्तनों पर केंद्रित करते हैं
कामुकता से स्तन थोड़े कठोर और निप्पल तन कर अनार के दाने जैसी हो गई थी, चाचाजी झटके से निप्पल पर टूट पड़ते हैं और चूसने लगते है अभी शालिनी के स्तनों मे थोड़ा दुध फिर से बन गया था, जो चाचाजी के लिए एक सरप्राइज था, उसे लगा नहीं था कि इतनी जल्दी दुध बनने लगेगा, पर जल्दबाजी करने से 5 मिनट में दोनों स्तन खाली हो जाते है ,चाचाजी कुछ देर स्तनों को चूसने के बाद इसबार ऊपर की ओर बढ़ते हैं, पहले वो शालिनी की छाती पर चुंबन करने लगते है
फिर वो अपने हाथ से शालिनी के बालों को हटाकर शालिनी के चेहरे को दायी और करते हैं जिससे शालिनी की बायी और की गर्दन दिखने लगती हैं, चाचाजी उस बगुले जैसी सफेद और पतली गर्दन और उसमे हरे रंग की नस उसकी शोभा बढ़ा रही थी,
शालिनी को चाचाजी की गर्म सांसे उसकी गर्दन पर महसूस होती है तभी अगले ही क्षण चाचाजी का चुंबन भी महसूस होता है, चाचाजी बिना रोके लगातार चुंबन किए जा रहे थे, फिर चाचाजी पूरी गोरी गर्दन को चाटने लगते है,शालिनी तो मानो खुशियो के पायदान चढ़ रही हो एसे उसकी खुशी बढ़ती जाती हैं, अभी शालिनी पूरे दुनिया जहाँ और रिश्ते नाते सब भूल गई थी, बस जो खुशी उसे मिल रही थी उसे बस वो उसे बीना किसी रुकावट के महसूस करना चाह रही थी, फिर चाचाजी उसके चेहरे को बायी ओर करके उसकी दायी ओर की गर्दन को चूमना चाटने लगते है,शालिनी की पूरी गर्दन चाटने के बाद चाचाजी थोड़ा और ऊपर खिसक कर आते हैं, अभी शालिनी के स्तन पर चाचाजी की छाती दब रही थी और उसकी गर्म सांसे उसके कानो मे गूंज रही थी, चाचाजी पहले शालिनी के माथे को चुंबन करते हैं, फिर उसके गालों को चुम्बन करते हैं फिर उसकी दाढ़ी को चूमते है, फिर वो एक पल रुकते है और आँखें बंध किए अपने नीचे लेटी अपने दोस्त के बेटे की पत्नी के सुंदर चेहरे को देखते है, क्या सुन्दरता की मूर्ति है, क्या नाक नक्शा है, एकदम संपूर्ण, मानो अप्सरा, एसी सुन्दर और जवान स्त्री को अपने नीचे लेटा देख चाचाजी को अपने भाग्य पर बहुत खुशी होती है ,और अपने आप पर गर्व होता है।
चाचाजी : (मन में..)ना जाने कौन से जन्म में कौन से पुण्य किए होगे जो इतनी सुंदर स्त्री के साथ उसकी मर्जी से यह सब करने को मिल रहा हैं वर्ना यह कहा और मैं कहा?वो इतनी गोरी चिट्टी जवान काया की मालकिन और में बुजुर्ग सांवला ,कहीं मेल नहीं खाता, यह तो सिर्फ मेरे अच्छे भाग्य और कुदरत की करामात ही है वर्ना इसी सुन्दर जवान स्त्री मेरे नीचे कैसे लेटी होती? काश! यह समय बस यही रुक जाए।
चाचाजी अब शालिनी के गुलाबी पंखुरी के समान गुलाबी होंठ को अपने खुरदरे होंठ से चूमने के लिए आगे बढ़ते हैं पर उनके इतने देर अपने विचारों में खोए होने से शालिनी को जो लगातार मिल रही खुशियो में रुकावट आ जाती हैं और वो अपनी काल्पनिक दुनिया से निकलकर वास्तविकता में आती हैं और देखती हैं कि चाचाजी उसके ऊपर आ गए हैं और उसको चूमने जा रहे हैं, अभी चाचाजी की आंखे बंध थी वो अपने भाग्य पर इतराते हुए अपने होंठ को शालिनी के होंठ से मिलाने नजदीक ला रहे थे पर शालिनी इसके लिए तैयार नहीं थी इसलिए वो अपनी पूरी ताकत से चाचाजी को अपने ऊपर से धक्का देकर हटा देती हैं, उसकी साँस तेजी से चलने लगती हैं
जिससे उसके स्तन तेजी से ऊपर नीचे हो रहे थे, और वो तेजी से पास रखी चादर से अपने आप को ढंक देती हैं, चाचाजी भी इस अचानक हुए हमले से हक्के-बक्के रह जाते है उसे भी वास्तविकता का ख्याल आता है और ध्यान आता है कि उसने क्या किया और क्या करने जाने वाले थे,वो तुरत बिस्तर से नीचे उतर जाते हैं।
चाचाजी : माफ़ करना! जो हुआ मेरी गलती है, और मे इसके लिए शर्मिंदा हूं और दिल से माफी मांगता हूं, इसके लिए सिर्फ में जिम्मेदार हूं, मुझे दुःख है।
शालिनी : (मन में..) यह क्या हो गया?यह सब नहीं होना चाहिये, मुझे क्या हो गया था?इसमें सिर्फ चाचाजी की गलती नहीं,एक तरीके से मेरी भी मंजूरी थी इसलिए बात यहां तक बढ़ी, अब तो मेने चाचाजी को और ज्यादा दुःखी कर दिया, अब चाचाजी इस घटना से दुखी होकर ज्यादा मन ही मन घुटने लगेगें इससे तो बहुत गलत होगा, मैं चाचाजी को इस पश्चाताप की आग में नहीं जलने दे सकती।
चाचाजी : माफ करना मैं बुढ़ापे में पागल हो गया हूं, जो एसी हरकत कर बैठा, मेरे कारण हुआ है, मुझे सजा मिलनी चाहिए।
शालिनी : फिर सजा हम दोनों को मिलनी चाहिए, क्योंकि इस घटना में हम दोनों सामिल थे, आप दुखी मत हो, यह समझो की एक सपना था, और कई ना कहीं मेरी रजामंदी भी थी, आपने ही तो मुजे अपनी आधी पत्नी कहा था, और मेने आधी पत्नी के अधिकार से आपको यह मंजूरी दी थी कि आप मेरे कमर के ऊपर के शरीर पर हक्क होगा ,और आप अपने आप को मिले अधिकार का उपयोग ही कर रहे थे, इसमे कोई गलत बात नहीं है, आप अपने आप को इस घटना से दुःखी ना करे।
(हालाकि शालिनी को भी पछतावा था पर चाचाजी और दुखी ना हो और कहीं उसे डिप्रेशन ना हो इसलिए वो इस घटना को हल्के में लेने का दिखावा करती हैं)
चाचाजी : पर मुझे अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
शालिनी : गलत कहा हुआ? गलत तब होता जब मेरी मर्जी के बगैर आप यह सब करते,
चाचाजी : क्या? सच में आपकी मर्जी थी?
शालिनी : हाँ! मैंने सिर्फ कहने को अधिकार नहीं दिए थे, उसके लिए मैं तन मन से तैयार थी।
चाचाजी : यह सुनकर अच्छा लगा पर मुझे लगता है आप मेरा दिल रखने के लिए कह रहे हो।
शालिनी : अब आपको कैसे यकीन दिलाऊं? आप कहेंगे तो नील की कसम खा कर कहूँ,और यह अधिकार आपको एक दिन या आज रात तक नहीं दिया, यह जब तक आप चाहें तब तक रहेगा, मुझे आप पर पूरा भरोसा है इसलिए यह अधिकार दिए हैं, पर आपको मुझपर भरोसा नहीं।
चाचाजी : नहीं..नहीं..एसा नहीं है, मुझे यकीन है तुम पर, मुझे लगा तुम इतनी सुंदर जवान और मैं गांव का बुढ़ा ...बस यकीन नहीं होता है इसलिए...
शालिनी : रिश्ते में उम्र नहीं देखी जाती, रिश्ते दिल से निभाने होते हैं, कौन कहता है आप बूढे है, शहर में कैसे आपने गुंडों को पकड़ाया और आज भी आपने.....
इतना बोल शालिनी शर्मा जाती हैं और उसके गाल लाल हो जाता है।
चाचाजी : वो आज इतने दिनों बाद स्तनपान करने मिला और स्तन में दूध खत्म हो गया था पर मन नहीं भरा था इसलिए मैं बहक गया था।
शालिनी : मैं समझ सकती हूं,पर यकीन करें स्तन पूरे भरे हुए थे।
चाचाजी : लगता है इतने दिनों बाद पिया है इसलिए कम लगा।
शालिनी : अगर आपको कम लगा तो मैं वो चूर्ण खा लुंगी जिससे ज्यादा बनने लगेगा, वैसे अब बाबुजी भी पीते हैं।
चाचाजी : नहीं मेरे ख्याल से एसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि तुम एकबार चूर्ण ले चुकी हो और तुम्हारी दुध की गुणवत्ता बढ़ाने की दवाई चालू है इस में अगर चूर्ण लेना कहीं तुम्हारे लिए मुश्किलें ना बढ़ा दे, इससे मुन्ने को दिक्कत हो सकती है।
शालिनी को यह सुनकर अच्छा लगा कि चाचाजी नील के लिए चिंतित है और उसके बारे मे पहले सोचते हैं।
शालिनी : फिर मैं क्या करूं?
चाचाजी : सोचकर...) एक काम कर सकती हो पर पता नहीं तुम इसपर यकीन करोगी या नहीं क्योंकि यह तुम्हारे यकीन पर निर्भर होगा
शालिनी : आप लोगों के लिए मैं करेगी, पर क्या करना होगा?
चाचाजी : यह काम दवाई का नहीं दुवा का है
शालिनी : मतलब?
चाचाजी : तुम्हें पता नहीं होगा पर तालाब के दूसरे किनारे से कुछ दूरी पर एक गुफा है हम उसे "अप्सरा गुफा" कहते है
शालिनी : क्या अप्सरा गुफा?
चाचाजी : हाँ अप्सरा गुफा...
चाचाजी शालिनी को उस गुफा का इतिहास बताते हैं...
जब यह गाव बसा उसके कुछ ही समय बाद कहीं से एक भिक्षुक जैसा आदमी गांव में आता है, फटे पुराने कपड़े,लंबे बाल और दाढ़ी ,सबने उसे पागल भिकारी समझकर उसे कभी खाना पीना दे देते, कोई उसे पत्थर मारकर भगा देता,उसका बर्ताव बच्चों जैसा था, वो बच्चों को पसंद करते पर बच्चे उससे डरते थे, वो पैसों को फेंक देता बस खाना खाता और गांव के बाहर उस गुफा में सो जाता।
तभी कई सालों तक बारिश नहीं हुई, सब अकाल से परेसान हो गए थे, सब गाव छोड़ने के बारे मे सोच रहे थे, उसमे जब यह आदमी खाना मांगने आता तब लोग उसे तिरस्कार करके भगा देते, एक घर जहां से उसे रोज खाने को मिलता था वो वहां जाकर खाना मांगने जाता है तभी उस घर में एक छोटे बच्चे के रोने की और उसके मां की रोने की आवाज आती हैं क्योंकि खाना कम था इसलिए सभी लोग कुपोषित होने लगे थे, ऊपर से यह स्त्री को अभी बच्चा हुआ था पर उसकी माँ को पोषण ना मिलने से स्तनों मे दूध नहीं बन रहा था जिससे वो बहुत दुखी थी पर जब वो उस आदमी को देखती हैं तब वो अपने आंसू पोंछ कर उसे आधी रोटी खाने को देती है पर वो आदमी मना कर देता है और उस माँ के सिर पर हाथ रखकर उसे भरोसा दिलाता है कि वो कुछ रास्ता निकालेगा।
वो भिक्षुक वहां से सीधा अपनी गुफा में आता है और ऊपर वाले से प्राथना करने लगता है, उससे वो बच्चे और उसकी माँ का दुख नहीं गया था, उसने परोपकार की भावना से प्राथना की थी इसलिए उपरवाले ने उसकी प्राथना सुन ली।
पूर्णिमा की वो रात थी जब तीन दिन के भूखे सोये उस भिक्षुक के सिर पर एक कोमल हाथ घूमता है, वो भिक्षुक देखता है एक श्वेत कपड़े पहनी एक खूबसूरत स्त्री उसके पास मे वो लेटा है, उसके शरीर में से एक दिव्य सुंगध आ रही थी,
भिक्षुक को लगा वो सपना देख रहा है पर जब उस अप्सरा ने उसे बुलाया तब वो खड़ा हो गया।
अप्सरा : मुझे उपरवाले ने तुम्हारी मदद के लिये भेजा है।
भिक्षुक : मुझे कुछ नहीं चाहिए आप बस गांव में सब ठीक कर दे।
अप्सरा : गांव में भी हालत जल्द ठीक होगे, तुम्हारे इस परोपकारी स्वभाव के करना देवता प्रसन्न हुए हैं,आपको अब गाव में जाकर भिक्षा मांगने की जरूरत भी नहीं है ,आपको खाना यही मिलेगा।
भिक्षुक : यहां कहीं सालों से वर्षा नहीं हुई है, अन्न का एक दाना भी मिलना मुश्किल है।
अप्सरा : मुझे मालूम है, पहले आप अपना खाना खा लीजिए, बाद में मैं आपको जैसा कहु वैसा करना, सब ठीक हो जाएगा।
भिक्षुक पत्थर की शीला पर बैठ जाता है, अप्सरा उसके पास आती हैं और धीरे से अपने स्तन पर बंधा कपड़ा हटाती है,
जिससे उसके सुन्दर सुडोल गोरे गोरे गुलाबी घेराव वाले और गुलाबी निप्पल वाले स्तन जो आपस में सटे हुए हैं वो आजाद हो जाते है, भिक्षुक अपनी नजरों को घुमा लेता है।
भिक्षुक : यह आप क्या कर रही हैं?
अप्सरा : वहीं जिसके लिए मुझे भेजा गया है। आपका ख्याल रखने के लिए, मेरे इस स्तनों में सब पोषण से युक्त दूध बनता है जिसे पीकर आप स्वस्थ हो जाएंगे और आपकी भूख भी शांत होगी, कृपया मुझे अपनी सेवा करने दीजिए,
भिक्षुक अप्सरा की गोदी में लेट जाता है, अप्सरा उसे अपने स्तनों से वो दिव्य दूध पिलाने लगती हैं,
भिक्षुक को भी यह स्वाद दिव्य लगा, उसकी भूख शांत होने लगी, जैसे भिक्षुक की भूख शांत हुई वैसे गांव में भी सभी की भूख शांत हो गई, एसे ही लगातार 5 दिनों तक अप्सरा भिक्षुक को जब भी जरूरत पड़ती तब उसके स्तनों मे दूध बन जाता और वो उसे पीला देती।
5 दिनों बाद...
भिक्षुक : अब मे स्वस्थ हूं, अब मुझे गाव में लोगों की मदद करनी होगी।
अप्सरा : ठीक कहा, आप गांव और इस गुफा के बीच एक पीपल का वृक्ष आएगा उससे 21 कदम दूर तालाब बनाना उसमे से कभी ना सूखने वाली सरस्वती नदी की धारा निकलेगी जो गांव के पीने और खेत की जरूरत को पूरा करेगी पर गांव वालों को कहना कभी इसे दूषित ना करे।
भिक्षुक : आपका बहुत बहुत धन्यावाद, पर मेरी एक विनती है, जब मे आखिरी बार गांव में एक घर है जहां मुझे कभी खाली हाथ नहीं लौटाया ,उस घर में एक छोटा बच्चे को अपनी माँ का दूध नहीं मिल रहा तो क्या आप उस बच्चे को स्तनपान करवा देगी, इससे उस बच्चे को नया जीवन मिलेगा
अप्सरा : माफ करना मुझे इसकी आज्ञा नहीं है, पर हाँ एक काम करना उस महिला को कहना वो इधर आकर इस शीला पर बैठकर दिल से प्राथना करे, तब उसे जब भी जरूरत होगी तब दूध स्तनों मे बन जाएगा और भविष्य में भी जब किसी माता को दुध कम बने या ना बनता हो तब इधर आकर प्राथना करे, उसकी ईच्छा पूरी होगी। अभी मुझे जाना पड़ेगा आप भी जब तालाब बनवाकर इस गुफा में आ जाना, मैं आपको मेरे साथ अपने लोक मे लेके जाऊँगी।
एसा बोलकर अप्सरा अदृश्य हो जाती हैं, और भिक्षुक सीधा उस घर पर आता है और उस महिला और परिवार जनों को उस गुफा में जाकर प्राथना करने को कहता है, बच्चे की हालत गंभीर देखकर वो महिला गुफा में जाति है और प्राथना करती हैं, और जब घर वापिस आती हैं तब उसके रोते हुए बच्चे को देखकर उसके स्तन कठोर और भारी होने लगते है इस चमत्कार को देख घर के सदस्य उस भिक्षुक के पैरों में गिर जाते हैं।
भिक्षुक : आप सब गांव वालों को समझाकर चौराहे पर ले आना, वहां में इस अकाल से बचने का उपाय बताऊँगा।
वो घर के सदस्य सभी गांव वाले को लेकर चौराहे पर आते हैं वहां भिक्षुक सभी को अप्सरा के द्वारा बतायी जगह पर तालाब बनाने को कहता है, पहले कोई विश्वास नहीं करते फिर जब वो महिला अपने साथ हुए चमत्कार को बताती हैं तब सब एक आशा की किरण मानकर खुदाई करते हैं, राजा भी अपने सैनिकों को मदद के लिए भेजता है, जिससे कुछ ही दिनों में तालाब तैयार होने लगता है और एक पानी की धार निकली और देखते ही देखते तालाब भरने लगा, सभी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई, सभी अपनी जरूरत के अनुसार पानी भरने लगे,दूसरे दिन राजा वहां आया और पानी पीकर तृप्त हुआ फिर वो उस भिक्षुक के पास आया।
राजा : आप जैसे पवित्र लोगों के कारण ही हम जिवित है, कृपया आप मुझे एक संतान होने का आशीर्वाद दीजिए ,जिससे मेरा वंश आगे बढ़े और प्रजा की सेवा होती रहे।
भिक्षुक : आप भी उस गुफा में आकर प्रार्थना करना, जिससे आप पति पत्नी के शरीर की कमी दूर होगी जिससे आपको संतानो की प्राप्ति होगी।
उसके बाद वहीं सब हुआ और राजा को दो पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति हुई, और जैसा अप्सरा ने कहा था वैसे वो रात को भिक्षुक को अपने लोक में ले गई।
चाचाजी : तभी से गांव में खुशहाली आयी हैं, पर समय बदलने से वो बाते बस कहानी बनकर रह गई।
शालिनी : नहीं मैं इस पर भरोसा करती हूं और हम जाकर वहां प्राथना करेंगे, पर अभी रात हो गई है अब मुजे चलना चाहिए।
चाचाजी : ठीक हैं अगर बुरा ना मानो तो क्या मैं अपने अधिकार का उपयोग कर सकता हूं?
शालिनी : हाँ! बिल्कुल, अभी क्यूँ?आगे भी जब आप चाहें तब करना, और हाँ हर बार मुझसे पूछने की जरूरत नहीं, कभी किसी पति को अपनी पत्नि से पूछकर छेड़खानी करते देखा है? नहीं ना! अब आप भी बेझिझक और निडर होकर अपने अधिकार का उपयोग करिए, मैंने आपको पूरा हक्क दिया है।
चाचाजी शालिनी के पास आकर उसके माथे को चूमता है जिससे शालिनी को अच्छा लगता हैं
शालिनी अधनंगी हालत में खड़ी होती हैं
और अपनी चोली ढूंढकर पहनती है और पलटकर चाचाजी को नटखट अंदाज में देखती हैं और मुस्करा कर चली जाती हैं,
पर रास्ते में उसके दिमाग में कमरे में हुई घटना चल रही थी।
शालिनी : विचारों मैं...)यह मुझे क्या हो गया था?चाचाजी आज अपनी मर्यादा तोड़ने वाले थे, पर इसमें चाचाजी की गलती नहीं है, मैंने उसे अधिकार दिए थे, वो तो अपने अधिकार का उपयोग कर रहे थे, पर उसने आज कैसे कैसे स्तनपान किया, और उसके बाद जो चुंबन किए (यह सोच शालिनी शर्मा जाती हैं और जो कामुकता बीच में दबा दि थी वो कामुकता जागने लगती हैं )एसे चुम्बन तो नीरव ने भी कभी नहीं किए, अगर वो नहीं रुकते तो सायद मैं भी उसे रोकने नहीं वालीं थी, पर कुछ भी कहो मजा तो आ रहा था, आज पता चला कि एसे काम में उम्र मायने नहीं रखती पर लगाव और अनुभव काम आता है, इतनी उम्र में भी एसी तीव्रता और सूझबूझ, किस अंग को कितना प्यार देना कितना दर्द देना, कैसे चूमना, कब चूमना सब मानो माप तोल के, किसी भी औरत को बिस्तर पर पति से जो ईच्छा होती हैं वो सब कर रहे थे, चाचीजी भी कितनी भाग्यशाली होगी जो एसा प्यार उसे मिलता होगा, आज वो नहीं है सायद इसलिए उसकी याद में चाचाजी ने वो प्रेम मुझपर बरसाया,मैंने उसे आगे भी अधिकार जताने को कहा है पर क्या मैं तैयार हूं?मुझे चाचाजी को फिर से मना करके दुःख नहीं दे सकती, मैं अपने आप को इसके लिए मजबूत करूंगी और अपने से हो सके उतना सहयोग करूंगी।
शालिनी अभी चलते हुए अपने आंगन में आ गई थी, वो खटिया पर बैठ जाती हैं,उसके दिमाग में अभी कामुकता बढ़ने लगती है, वो चाचाजी के स्पर्श को महसूस करते हुए कामुक होने लगती हैं, क्योंकि चाचाजी के थूक की लार उसके शरीर में सूखी हुई थी, शालिनी अपने लहंगा उठा कर अपनी योनि को सहलाने लगती हैं,
आज उसके दिमाग में नीरव का एकबार भी ख्याल नहीं आता वो बस चाचाजी के बारे मे सोच रही थी, धीरे-धीरे उसकी उंगली उसकी योनि में डाल देती हैं, और दूसरे हाथ चोली में डालकर स्तन दबाने लगती हैं ,शालिनी जैसे जैसे विचारों में डूबती जाती हैं वैसे उसकी योनि सहलाने की गति बढ़ जाती हैं, अब शालिनी अपने चरम पर पहुचने को तैयार थी, उसके मुहँ से सिसकारी निकलने लगती हैं, और हाथ की गति बढ़ने लगती है।
शालिनी : आह ! चाचाजी कितना मजा दिलाया आपने, आप तो सच्चे और मंजे हुए खिलाड़ी हैं, मेरी सोच से ज्यादा मजा दिया आपने, आगे मैं आपको नहीं रोकने वालीं, आप भी अपनी ईच्छा पूरी कर लेना, मे आज पागल हो जाती अगर आप नहीं रुकते,
शालिनी की योनि से काम रस बहने की तैयारी होने लगती हैं उसके पैर कांपने लगते है इसके पैर के पंजे मोड़ने लगते है, उसका शरीर अकड़ जाता है, शालिनी के शरीर में जो चंचलता की तरंगे उठ रही थी वो अब धीरे धीरे शांत होने लगती हैं, उसका शरीर थकान महसूस कर्ता है
और रात भी काफी हो गई थी इसलिए उसे आंगन में उसी खटिया पर नींद आ जाती हैं।
शालिनी का हस्तमैथुन वाला सारा दृश्य खिड़की से बाबुजी भी देख रहे थे पर उसे लगता है, बहु जवान है पति से दूर है इसलिए यह सब कर रही हैं पर वो क्या जाने की शालिनी उसके बेटे को नहीं पर उसके बुजुर्ग दोस्त को याद करके अपनी कामुकता शांत कर रही थी।