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ये कहानी अब समाप्त हो चुकी है।।
।।बहुत बहुत धन्यवाद।।
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Read on page 1290Hello writer sir ji,
Apki story recently 3 months pehle padhna chalu ki thi, starting mai thoda boring laga phir baad mai dheere dheere interesting lagne lagi. Aur itna zyada interesting lagi ki aaj tak ki mere liye sabse achi incest story hai. incest stories kaafi padhi hai par iss wali mai masala aur entertainment dono alag level ka hai. matlab harr ek mod mai ek suspense rehta hai aur kitni wait karte thak jatu hu ki next update kab aayega. bohat zyada alag level ki story banayi hai bhai..maza aa jata hai bhai.
Suggestion: 1) bhai jitni sabhya se gandi gaali bulvato ho story ho, utni hi baaki mahila se bhi bulvayo. matlab aisa nhi ki hai gaali nhi hai par sabhya ke statements zyada horny aur impactful hote hai as compare to others.
2) bhai update dene mai time mat lagayo karo..wait nhi kar paatu hu..10 din ka gap zyada ho jaata hai so plz if possible update as early as possible.
3) bhai story mai acha masala add karo jaise apne voh gaav wala scene daala tha voh baba wala jiske baad pairs mai chodampur wale gaav mai jaate hai.. bas kuch masala add karo bhai toh story aur zyada fadu hogi..bhai ache writer ho toh pakka kuch acha content karoge..
Last mai bhai mere mai kya problem aa rahi hai mujhe update no. 261 dikh nhi raha hai, mujhe page no se open karna pad raha hai. mai niche SS attach kar raha hu ek baar dekhlo aur iske liye solution bhi bata dena..
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Ohhh tharki bhai kya likhte ho aap jab bhi ate ho ek dmake kr sath hi ate hoएक दूसरे की बाहों में हांफते हुए लेट गई।
किरन: मज़ा आ गया न भाभी,
अंजली: हां सच में, पल्ली तुम तो बहुत अच्छा चाटती हो।
पल्ली: तुम्हारी है ही इतनी स्वाद की जीभ अपने आप चलते रहती है,
तभी बाहर से नीलेश की आवाज आती है: अरे बच्चों जाग रहे हो क्या थोड़ी चाय ही बना दो।
अपडेट 261
किरन: बनाती हूं फूफाजी!
तीनों फिर उठ कर रसोई में जाती हैं और किरन अंजली के हाथ में चायदान दे कर कहती है: भाभी आज अपने ससुर जी के लिए तुम बनाओ चाय।
अंजली: अरे इसमें क्या है अभी बना देती हूं।
अंजली चाय चढ़ा देती है और तीनों खूब बातें करती रहती हैं चाय बनने तक और फिर चाय बनने के बाद किरन और पल्ली अंजली को ही भेजती हैं नीलेश को चाय देने के लिए।
अंजली नीलेश को चाय देती है,
नीलेश: अरे बिटिया, बाकी दोनों कहां है किरन या पल्ली से भिजवा देती।
अंजली: अरे चाचाजी तो क्या हुआ मैं ले आई तो,
नीलेश: अरे वो तो गलत नहीं हुआ पर अब तू गलत कर रही है,
नीलेश चाय का घूंट भरते हुए कहते हैं,
अंजली: क्या हुआ चाय अच्छी नहीं बनी क्या? अंजली घबराते हुए कहती है,
नीलेश: चाय तो बहुत स्वाद बनी है बिल्कुल तेरी तरह पर तू सभ्या को मां बोलती है और मुझे चाचा? ये तो बिल्कुल गलत है न?
अंजली के चेहरे पर ये सुन मुस्कान आ जाती है,
अंजली: सौरी पापाजी अब से ये गलती नहीं होगी।
नीलेश: मेरी प्यारी बिटिया, तू बहुत प्यारी है, आ मेरे पास बैठ।
अंजली: प्यारे तो तुम हो पापा।
अंजली नीलेश के बगल में बैठते हुए कहती है
नीलेश: अरे हम कहां से प्यारे हो गए, प्यारी तो तू है सुंदर सी बिल्कुल परी की तरह।
अंजली: अरे पापा अब इतनी भी तारीफ मत करो,
अंजली नीलेश के कंधे पर सिर रखते हुए कहती है,
नीलेश: अच्छा तारीफ नहीं करता, ये बता यहां अच्छा लगता है तुझे?
अंजली: अच्छा नहीं बहुत अच्छा,
अंजली हँसते हुए कहती है,
नीलेश: अच्छा है फिर लगना भी चाहिए तुझे हमेशा यहीं तो रहना है,
अंजली: तुम्हे अच्छा लगेगा मुझे बहू बना कर?
नीलेश: नहीं बहू बना कर तो बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा,
ये सुन अंजली का मुंह उतरने लगता है,
नीलेश आगे बोलते हैं: क्योंकि मेरी बिटिया है तू, बहू नहीं।
ये सुन अंजली की मुस्कान बड़ी हो जाती है, और वो नीलेश के गले लग जाती है,
इतने में बाहर से अनुज की आवाज़ आती है: भाभी चलो तुम्हे छोड़ दूंगा।
नीलेश: ले भाई तेरी सवारी तैयार है।
अंजली: हां अभी तो जा रही हूं पर अब मैं कभी भी आ सकती हूं इतनी आसानी से पीछा नहीं छोडूंगी,
नीलेश: पागल है तू बिल्कुल।
अंजली जाने को होती है एक कदम आगे बढ़ा कर फिर बापिस घूम जाती है और झुक कर नीलेश के होंठों को चूमती है
और फिर भाग जाती है, नीलेश हंसते हुए उसे जाते हुए देखते रहते हैं, और सिर हिलाकर मन ही मन कहते हैं: पागल।
अनुज अंजली को घर छोड़ देता है, जब अंजली घर पहुंचती है तो महिपाल और पीयूष बाज़ार गए होते हैं, अंजली जाकर अपनी मां और भाभी से बातें करती है और वहां क्या हुआ वो सब बताती है,
रानी: अरे वो सब तो ठीक है अंजली पर पापा परेशान हैं उन्हें लगता है तू उनसे नाराज़ हो गई है ये सब पता लगने पर।
अंजली: अरे ऐसा किसने कहा।
सविता: वो ही मन में सोच के बैठे हैं। अब आ जाएं तो तू ही उन्हें समझाना।
अंजली: अरे वैसे मुझे गुस्सा होना भी चाहिए आखिर तुम सब लोग मुझसे छुपा तो रहे थे न सब।
अंजली हंसते हुए कहती है,
रानी: तो अब तू गुस्सा होगी।
अंजली: और क्या पापा को भी थोड़ी सजा तो मिलनी चाहिए।
सविता: और वो कैसे देगी तू।
अंजली: सो कर।
रानी: सो कर मतलब?
अंजली: अरे मतलब अभी पापा नहीं है, मैं थकी हुई भी हूं तो मैं सो जाती हूं तुम दोनों लोग बस उन्हें ये मत बताना जो हमारी बात हुई।
सविता: अच्छा फिर क्या बताएं उन्हें?
अंजली: अरे बस कह देना कि आकर मैने ज़्यादा बात नहीं की और सो गई।
रानी: वैसे मज़ेदार प्लान है, पापा को थोड़ा तो तड़पाने में मज़ा आयेगा,
अंजली: तो फिर तय रहा, अब मैं चलती हूं सोने।
ये कह अंजली उठती है और अपनी मां और भाभी के होंठों को बारी बारी चूमती है और अपने कमरे में चली जाती है, उसके जाने के बाद दोनों के चेहरे पर मुस्कान होती है
रानी: बहुत मीठा स्वाद है मेरी ननद का,
सविता: आखिर बेटी किसकी है,
रानी: ओहो मेरी सेक्सी सासु मां।
रानी ये कस सविता का मुंह पकड़ती है और उसके होंठों को चूसने लगती है, सविता भी अपनी बहू का साथ देती है, और कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग होते हैं
सविता: चल अब खाना भी बनाना है।
रानी: हां चलो न मेरी चुदक्कड़ मम्मी जी।
सविता: कमीनी कही की।
दोनों खाना बनाती हैं जब तक पीयूष और महिपाल भी आ जाते हैं और फिर वैसा ही होता है जैसा अंजली ने सोचा था, आते ही महिपाल अंजली के बारे में पूछते हैं और जब उन्हें पता चलता है आकर सो गई तो महिपाल का दिमाग खराब हो जाता है, बेमन से खाना खा कर वो अंजली के कमरे में झांक कर देखते हैं उसे सोता देखते हैं तो एक हल्की मुस्कान चेहरे पर आती है पर फिर अपने कमरे में जाकर सोने की कोशिश करते हैं तो काफी देर के बाद आखिर नींद आ ही जाती है,
महिपाल की नींद धीरे धीरे खुलती है उन्हें लगता है कोई उनके बदन को हिला रहा है, वो धीरे से आंखें खोलते हैं देखते हैं उनके बगल में सविता सो रही है फिर दूसरी ओर देखते हैं और अगले ही पल आँखें पूरी खुल जाती हैं, बिस्तर के बगल में अंजली खड़ी थी सिर्फ काली समीज और पैंटी पहन कर, महिपाल कुछ कहने वाले होते हैं तो अंजली उन्हें चुप का इशारा करती है और धीमी आवाज़ में कहती है पापा बाहर आओ, हॉल में।
ये कहके वो चली जाती है, महिपाल को समझ नहीं आता हो क्या रहा है, वो घड़ी की ओर देखते हैं सुबह के 5 बज रहे थे, वो बिस्तर से उठते हैं और कमरे से बाहर निकल जाते हैं, हॉल में अंजली खड़ी थी चेहरे पर मुस्कान लिए, महिपाल आगे बढ़ते हैं और अंजली उनका हाथ पकड़ लेती है।
महिपाल: ये सब क्या हो रहा है बेटा,
अंजली मुस्कुराती है और महिपाल को सोफे पर बिठा देती है,
अंजली: अब तुम्हे सज़ा मिलेगी पापा, मुझसे सच छुपाने की सज़ा।
ये कहते हुए अंजली आगे होती है और महिपाल के होंठों को हल्का सा चूम लेती है, महिपाल के तन बदन में बिजली दौड़ पड़ती है, अपनी बेटी के होंठों के स्पर्श से, उनका लंड तुरंत सिर उठाने लगता है और कड़क हो जाता है,
अंजली फिर नीचे सरकती है और सोफे पर झुक कर उनकी पैंट के ऊपर से ही उनके खड़े होते लंड को सहलाने लगती है, महिपाल की सांसें बढ़ने लगती हैं, अंजली अपने दोनों हाथों को प्रयोग करती है और पैंट की चैन को खोल देती है और उसमें से महिपाल के लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लेती है, और उस पर हाथ चलाने लगती है। और महिपाल की आंखों में देखती है।
अंजली: ये तुमने क्यों खड़ा कर रखा है पापा, मेरे लिए अपनी बेटी के लिए।
महिपाल: हां हां तेरे लिए ही है बिटिया आह ओह आह्ह्ह्ह।
महिपाल की बात पूरी होने से पहले ही अंजली उनके लंड को मुंह में भर लेती है, महिपाल के मुंह से आह निकल जाती है ये सोच के कि उनका लंड उनकी बेटी के मुंह में है, अंजली बिना झिझक और शर्म के अपने पापा का लंड गहराई तक मुंह में लेकर चूसने लगती है,
महिपाल: ओह ओह आह्ह्ह्ह बिटिया ओह तू मेरा, लंड आह मुंह में ले रही है,
महिपाल के पास शब्द नहीं थे उस पल को बयां करने के लिए वहीं अंजली तो पूरी लगन से अपने पापा की सेवा में लगी थी, उसने लंड को मुंह में बाहर तक निकाला और पापा की ओर देख कर बोली: कैसा लग रहा है पापा.
महिपाल: आह बिटिया ओह बहुत अच्छा इतना अच्छा कि आह सपने से भी अच्छा ओह अह्ह्ह्ह
अंजली दोबारा से उसका लंड चूसने लगी। वहीं महिपाल ने तो बिना कहे अपने कपड़े उतारना भी शुरू कर दिया था, कुछ देर चूसने के बाद अंजली ने उसका लंड मुंह से निकाला और बोली: कपड़े उतार दो पापा, महिपाल ने तुरंत जवान लड़के की फुर्ती दिखाई और तुरंत नंगा हो गया, अंजली ने भी अपनी समीज को
नीचे खिसका दिया और पैंटी को भी पैरों से निकाल दिया, समीज के सरकते ही अंजली की नंगी चूचियां महिपाल के सामने थी वहीं महिपाल भी पूरा नंगा हो चुका था, एक दूसरे को इस तरह देख दोनों ही एक दूसरे पर टूट पड़े, दोनों के होंठ मिल गए और एक आक्रामक और जोश के साथ होंठो को चूसने लगे, वहीं महिपाल के हाथ जहां बेटी की चूचियों को मसलने लगे, वहीं अंजली अपनी पापा के लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी।
एक दूसरे के लिए भूख एक दूसरे के बदन को पाने की ललक दोनों की आंखों में और हरकतों में देखी जा सकती थी, महिपाल बेटी के रसीले कोमल होंठों को चूसते हुए मस्त हुए जा रहे थे ऐसा लग रहा था मानो उसके होंठों का रस उनके मुंह में पिघल रहा है हाथों में अंजली की चूचियां मक्खन की पोटलियों जैसी थी कितनी नरम कितनी कोमल, दोनों के होंठ अलग हुए तो महिपाल झुक कर बेटी की चूचियों पर टूट पड़े, एक को मुंह में भर लिया और दूसरी को हाथों से मसलना जारी रखा,
अंजली: आह आह ओह पापा पी लो आह चूसो अपनी बेटी की चूचियों को आह खा जाओ आह।
अंजली एक हाथ से महिपाल के कड़क लंड को सहलाते हुए बोल रही थी, जो उसके हाथ में झटके मार रहा था, शायद ही कभी महिपाल का लंड इतना कड़क हुआ था बिल्कुल पत्थर की तरह कठोर जो बता रहा था कि महिपाल कितना उत्तेजित है,
महिपाल ने जी भर के अंजली की चूचियों को चूसा और अंजली अपनी बातों से अपनी सिसकियों से उसका जोश बढ़ाती रही, फिर अंजली ने उसके सिर को अपनी चूचियों से हटाया और खुद नीचे बैठ गई, अपने घुटनों पर और अपने पापा की आंखों में देखते हुए उसके लंड के टोपे पर अपनी जीभ फिराई तो महिपाल की आंखें बंद हो गई, ऐसा सुख शायद ही कभी उन्हें नहीं मिला होगा, वहीं अंजली आज अपने पापा पर वो सब आजमाना चाहती थी जो उसने कर्मा के साथ सीखा था, लंड के सिर को जीभ से चाटते हुए उसने लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी,
महिपाल: आह बिटिया ओह आह्ह्ह्ह आज तू आह मेरी जान लेगी आह।
महिपाल के मुंह से सिसकियां निकल रही थी, अंजली ने उनके लंड को मुंह से निकाला और बोली, पापा आज रुको मत पूरी कसर निकाल लो मुझ पर
महिपाल ने उसका सिर पकड़ा और उसे लंड पर दबा दिया महिपाल का लंड दोबारा अंजली के मुंह में घुस गया, महिपाल अपनी कमर हिला हिला कर बेटी के मुंह को चोदने लगा और कुछ ही पल बाद उसका लंड जड़ तक अंजली के मुंह में था और वो बेटी के मुंह को अपने लंड पर दबा रहा था
कुछ पल यूं ही रोकने के बाद उसने अंजली के सिर को छोड़ा तो अंजली पीछे हो गई हांफते हुए, अंजली के होंठों से एक थूक की धार उसके लंड को जोड़ रही थी,
अंजली: आह ऐसे ही पापा आह अब मैं गुड़िया नहीं रही आह चुदक्कड़ बिटिया हूं तुम्हारी आह ऐसे ही चोदो मुझे।
अंजली गरम होते हुए बोली,
महिपाल ने उसके मुंह में दोबारा लंड घुसा दिया और बोला: आह बिटिया आह वैसे ही चोदूंगा आह आह मेरी प्यारी आह चुदक्कड़ बिटिया।
कुछ पल लंड चुसवा कर महिपाल ने अंजली को उठाया और उसे सोफे पर बिठा दिया, और खुद उसके सामने नीचे बैठ गया, अंजली ने अपनी जांघों को बंद कर लिया और बोली,
अंजली: पापा वहां क्यों बैठे हो, शर्म नहीं आती मैं नंगी हूं?
महिपाल उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोला: अपनी बेटी की रसभरी गरम चूत देखने के लिए बैठा हूं, और बिटिया बाप के सामने नंगी हो इसमें क्या शर्म?
अंजली: मेरी चूत देखोगे पापा अपनी बिटिया की चूत?
अंजली गरम सांसों के साथ बोली।
महिपाल: हां मेरी बिटिया, तेरी चूत देखूंगा उसे प्यार करूंगा।
अंजली: आह पापा लो कर लो प्यार अपनी बिटिया की चूत से,
अंजली ने जांघों को फैला दिया और उसकी चूत उसके बाप के सामने आ गई, महिपाल की आंखें अंजली की चूत पर जम गईं वो बड़ी बड़ी आंखों से बेटी की चूत को देखने लगा उसकी सांसे अंजली को अपनी जांघों और चूत पर महसूस हो रही थी,
अंजली: कैसी है पापा तुम्हारी बिटिया की चूत?
महिपाल: बहुत प्यारी और सुंदर है बिटिया, बहुत रसीली लग रही है मेरे मुंह में पानी आ रहा है इसे देख कर,
अंजली: ओह पापा अपनी बिटिया की चूत का रस पियोगे?
महिपाल: हां बिटिया पियूंगा, जी भर के पियूंगा।
अंजली: तो चाटो न आह पी जाओ सारा रस आह बहुत बह रही है अह।
महिपाल ने भी अपना मुंह बेटी की चूत पर लगा दिया और पागलों की तरह चाटने लगा मानो कब से भूखा हो, अंजली ने अपने हाथों से अपने पापा का सिर पकड़ लिया और उसे अपनी चूत पर दबाने लगी।
अंजली: आह आह पापा ओह ऐसे ही जीभ अंदर घुसाओ आह आह कुत्ते की तरह चाटो आह अच्छे से।
महिपाल भी पूरी लगन से और जोश से बेटी की चूत को चाट रहा था उसे अंजली भी पूरा जोश दिला रही थी, जब रात को सोया था तो उसने सोचा नहीं था कि ऐसे कुछ होगा, रात को उसके मन में निराशा थी, डर था कि कहीं अंजली उससे गुस्सा तो नहीं हो गई पर सुबह की ऐसी शुरुआत हुई थी जो वो सोच नहीं सकता था, उसके मुंह में बेटी की चूत थी, उसका रस बह बहकर उसके मुंह में समा रहा था,
अंजली भी अपने बाप से अपनी चूत चटवा कर उत्तेजना के चरम पर थी, उसके मुंह से कभी आहें तो कभी कुछ भी बातें निकल रही थी, आखिर उत्तेजना हो भी क्यों न? बेटी बाप से चूत चटवा रही थी, वही बाप जिसके रस से वो बनी थी आज उसका रस चाट रहा था, और उत्तेजना हर पल के साथ इतनी बढ़ी कि अंजली का बदन कांपने लगा वो चिल्लाने लगी, उसकी आँखें ऊपर चढ़ गई और वो अपने पापा के मुंह में झड़ने लगी, महिपाल ने उसकी जांघो को कस लिया और उसकी चूत को पल भर के लिए भी अपने मुंह से अलग नहीं होने दिया और उसकी चूत से निकली रस की एक एक बूंद को गटक गया, अंजली शांत हो गई महिपाल फिर भी उसकी चूत चाट रहा था,
अंजली ने महिपाल के सिर को पकड़कर ऊपर खींचा तो महिपाल ऊपर आया और फिर से बाप-बेटी के होंठ मिल गए। अंजली को अपने पापा के होंठों पर अपनी ही चूत का मीठा-नमकीन रस महसूस हो रहा था। झड़ने के बाद भी उसकी चूत अभी भी कसमसा रही थी। दोनों के होंठ एक-दूसरे को चूस रहे थे, जीभें लिपट रही थीं, लार एक-दूसरे के मुंह में बह रही थी। दोनों के होंठ अलग हुए।
अंजली (हाँफते हुए, महिपाल के लंड को हाथ में पकड़कर):
“पापा... अब बस चाटना काफी नहीं... मुझे अपनी बिटिया की चूत में अपना मोटा लंड घुसा दो... चोद दो मुझे पापा... मैं तैयार हूँ......”
अंजली एक नशे में बोली, और अंजली ने खुद अपनी टाँगें चौड़ी कर लीं। उसकी गुलाबी, अभी भी तर चूत पूरी तरह खुली हुई थी। महिपाल उसके ऊपर चढ़ गए। उनका कड़ा, मोटा लंड अंजली की चूत के मुंह पर रगड़ रहा था।
अंजली: पापा... मत तड़पाओ... देखो मेरी चूत कितनी भूखी है... पूरा लंड एक ही झटके में घुसा दो... फाड़ दो अपनी बेटी की टाइट चूत... आह्ह्ह... डालो न पापा...
महिपाल ने लंड का सिर अंजली की चूत के छेद पर रखा और टोपे को उसकी चूत के होंठो के बीच फंसा दिया, अंजली ने खुद को जैसे आगे जो होने वाला था उसके लिए तैयार कर लिया,
महिपाल: ओह बिटिया आह कितनी गरम चूत है आह ऐसा लग रहा है मेरा लंड किसी भट्ठी के द्वार पर है आह
अंजली: आह्ह्ह पापा... तुम्हारा लंड भी बहुत कड़क और गरम है... आह पापा.. मत रुको... हाँ... और अंदर... आह्ह्ह... पूरा घुसा दो... अब और इंतजार मत करो अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह।
अंजली के कहते ही महिपाल ने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड से ज़्यादा अंजली की गीली लेकिन कसी हुई चूत में घुस गया। अंजली ने जोर से कराह मारी और पापा की पीठ पर नाखून गड़ा दिए।
अंजली: ओह आह्ह्ह्ह पापा ओह आह।
महिपाल: आह्ह्ह्ह बिटिया आह क्या कमसिन चूत है तेरी आह कितनी गरम आह्ह्ह्ह।
महिपाल ने एक धक्का और लगा कर पूरा लंड जड़ तक अंजली की चूत में घुसा दिया, बाप बेटी दोनों की आँखें इस अनोखे पल में बंद हो गईं, अंजली का मुंह खुल गया, पहले महिपाल की आंखें खुली उन्होंने नीचे देखा उनका लंड जड़ तक उनकी बेटी की चूत में समाया हुआ था, फिर उनकी नजर बेटी के सुंदर चेहरे पर गई, धीरे धीरे अंजली की आंखें खुली उसने अपनी पापा की आंखों में झांका और मुस्कुराते हुए बोली: पापाह तुमने अपनी बेटी चोद ली।
महिपाल: ओह्ह्ह्ह हां बिटिया आह ये सुख देकर तूने आह अपने बाप को सबसे खुश इंसान बना दिया है, आह तेरी ये चूत आह तेरा ये सुंदर बदन भोग कर मैं सुखी हो गया बिटिया।
महिपाल ने भावुक और उत्तेजित होकर बोला,
अंजली: ओह पापा, मेरे बदन पर आह इस चूत पर सबसे पहला हक तुम्हारा ही है और हमेशा रहेगा,
महिपाल बेटी की बात सुनकर झुके और फिर दोनों के होंठ फिर से मिल गए, महिपाल बेटी के होंठों को चूसते हुए धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत में चलाने लगे, और बेटी को चोदने लगे।
महिपाल की कमर धीमे धीमे ऊपर नीचे हो रही थी और उनका लंड अंजली की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, दोनों के लिए अभी यही गति काफी थी, कुछ देर बाद होंठ अलग हुए और दोनों ही उत्तेजना में बहकर जोशीले होने लगे, महिपाल अब अंजली की कमर को थाम कर और तेज धक्के लगाने लगे,
महिपाल: आह्ह्ह बिटिया... तेरी चूत तो आह जन्नत से भी बेहतर है... इतनी टाइट, इतनी गीली... पापा का लंड पूरा अपने अंदर चूस रही है... ले... ले... ले मेरी बिटिया... पापा तेरी चूत को रोज़ चोदेंगे मेरी बिटिया...
अंजली की टाँग महिपाल के कंधे पर थी, जिससे लंड और भी गहराई तक जा रहा था। हर धक्के पर अंजली की चूत से सफेद झाग बन रहा था।
अंजली: ओह... आह्ह्ह... पापा ऐसे ही और तेज चोदो... मेरी चूत फाड़ दो...” आह हां रोज चोदना आह बेटी को आह बेटीचोद।
बेटी की बातों से जोश में आते हुए महिपाल ने अंजली की दोनों टाँगें अब अपने कंधों पर रख लीं। अब चुदाई और भी गहरी हो गई थी। वो पूरी ताकत से लंड अंदर-बाहर कर रहे थे। सोफा हिल रहा था। अंजली की चूत लगातार पापा के लंड को निचोड़ रही थी।
अंजली: हाँ पापा... इसी तरह... गहरा... बहुत गहरा... आह्ह्ह... तुम्हारा लंड मेरी चूत के अंत तक पहुँच रहा है... मैं झड़ने वाली हूँ... पापा... तेज... तेज चोदो... अपनी बेटी को झाड़ दो.
महिपाल भी अब चरम पर थे। उनके धक्के और तेज हो गए। लंड जड़ तक घुस रहा था और निकल रहा था। दोनों के शरीर पसीने से तर थे। महिपाल ने अंजली के होंठ फिर चूस लिए और कान में फुसफुसाए:
महिपाल: ले बिटिया... ले... आह आज तेरा बेटीचोद बाप तेरी चूत भर देगा... आह आह आह आह अब रुकना मुश्किल हो रहा है मेरा,
अंजली: ओह आह पापा रुको मत आह आह ऐसे ही चोदते रहो आह आह आह आह पापा अह्ह्ह्ह।
अंजली का बदन अचानक काँपने लगा। उसकी चूत महिपाल के लंड को कसकर पकड़ ली। वो जोर से चीखी:
अंजली: आआआह्ह्ह पापा... मज़ाअ अह्ह्ह्ह आ गया... मैं झड़ रही हूँ... मेरी चूत बह गई... हाँ... अंदर डालो... भर दो... आह्ह्ह... पापा...”
अंजली का पूरा शरीर झड़ने के साथ काँप उठा। उसकी चूत से रस की धार निकलकर महिपाल के लंड और अंडकोष को भीगो रही थी। महिपाल भी और दो-तीन जोरदार धक्के मारकर रुक गए। उनका मोटा लंड अंजली की चूत के सबसे अंदर तक फड़फड़ाया और गरम-गरम, गाढ़े रस की मोटी-मोटी फुहारें अंजली की चूत में उड़ेलने लगा। जो अंजली के रस के साथ ही उसकी चूत से बह कर रिसने लगा।
दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए जोर-जोर से हाँफ रहे थे। महिपाल का लंड अभी भी अंजली की चूत के अंदर था और धीरे-धीरे रस बाहर निकल रहा था। अंजली ने पापा के होंठों को फिर चूम लिया और हाँफते हुए बोली,
अंजली: पापा... कितना गरम और ज्यादा रस भरा है तुमने... मेरी चूत पूरी भर गई... आह्ह्ह...
महिपाल: हाँ मेरी बिटिया पर ये सब तेरी चूत का कमाल है जिसने मुझे पूरा निचोड़ लिया,
ये कहने के बाद महिपाल ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला और अंजली के ऊपर से हटकर उसके बगल में सोफे पर बैठ गए। दोनों पसीने से तर थे। महिपाल की साँसें अभी भी तेज थीं। उन्होंने अपनी बेटी को देखा — नंगी, चूचियाँ ऊपर-नीचे हिल रही थीं, चूत से रस टपक रहा था — और मुस्कुराए। अंजली भी एक ओर उनकी बाहों में सिमट गई, दोनों कुछ देर चुपचाप एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे। महिपाल अंजली की चूची को हल्के से सहला रहे थे। अंजली पापा के सीने पर सिर रखे लेटी थी। लेकिन अंजली का मन अभी शांत नहीं हुआ था। उसकी चूत फिर से कसमसा रही थी।
अंजली कुछ देर बाद मुस्कुराते हुए, पापा की छाती पर उँगलियाँ फेरते हुए बोली
अंजली: पापा... अभी काम पूरा नहीं हुआ है...
ये कहते हुए अंजली उठी और महिपाल की गोद में चढ़ गई। उसने अपनी दोनों टाँगें महिपाल के दोनों तरफ फैला दीं और सीधे उनकी गोद में बैठ गई। अपनी भारी-भारी, गोल-गोल चूचियाँ महिपाल के चेहरे पर दबा दीं। दोनों चूचियाँ पापा के मुँह और नाक पर रगड़ रही थीं।
अंजली :पापा... लो... अपनी बिटिया की चूचियाँ... चूसो इन्हें... काटो... चबाओ... मेरी चूचियों का दूध पी लो... आह्ह्ह... देखो कितनी सख्त हो गई हैं तुम्हारे लंड के लिए...”
महिपाल ने मुंह खोला और एक चूची का निप्पल मुँह में भर लिया। जोर-जोर से चूसने लगे। दूसरी चूची को हाथ से मसल रहे थे। फिर एक चूची को मुंह से निकालते हुए बोले,
महिपाल: आह्ह्ह बिटिया... तेरी चूचियाँ तो मक्खन जैसी हैं... कितनी नरम... कितनी स्वादिष्ट... आह्ह्ह... मैं इन्हें खा जाऊँगा... चूस-चूस के लाल कर दूँगा...”
अंजली सिसकते हुए, पापा के सिर को चूचियों में दबाते हुए बोली:
“हाँ पापा... और जोर से चूसो... काट लो... आह्ह्ह... मेरी चूत फिर से गीली हो रही है... तुम्हारा लंड मेरी गांड के नीचे खड़ा होने लगा है... ओह पापा... तुम्हारी जीभ कितनी गर्म है...”
महिपाल की चूसाई से उनका लंड फिर से सख्त होने लगा। अंजली ने ये महसूस किया और नीचे सरक गई। उन्होंने महिपाल के लंड को हाथ में पकड़ा — अभी भी चूत के रस और वीर्य से चिपचिपा था। अंजली ने मुस्कुराते हुए लंड का टोपा चूमा और पूरी तरह मुंह में ले लिया और फिर उसपर अपनी जीभ फिराते हुए बोली:
अंजली:आह्ह्ह पापा... तुम्हारा लंड फिर से कड़क हो रहा है... मेरे मुंह में... आह बेटी की चूत से इसका मन नहीं भरा।
उसने उसे अंदर गले तक लंड ले लिया, जीभ से चारों तरफ चाटा, अंडकोष सहलाए। महिपाल की साँसें फिर तेज हो गईं।
महिपाल हाँफते हुए बोले:
“आह्ह्ह बिटिया... तू तो मेरी जान लेगी... तेरी जीभ... ओह... कितना अच्छा चूस रही है... हाँ... ऐसे ही...
कुछ देर चूसने के बाद अंजली ने लंड को मुंह से निकाला, थूक से चमकता हुआ, पूरी तरह खड़ा और मोटा। वो फिर से महिपाल की गोद में चढ़ गई। इस बार उसने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर रख दिया। फिर धीरे-धीरे नीचे बैठ गई।
“धप्प्...”
पूरा लंड एक ही बार में अंजली की चूत में घुस गया।
अंजली: आआआह्ह्ह पापा... पूरा घुस गया... मेरी चूत फिर से भर गई तुम्हारे मोटे लंड से... अब देखो... मैं तुम्हारे लंड की सवारी करती हूँ...”
अंजली धीरे धीरे अपनी गांड ऊपर-नीचे करने लगी। महिपाल भी बेटी की कमर को थाम कर उसे अपने लंड पर उछालने, कुछ पल बाद ही तेज-तेज सवारी शुरू हो गई। हर बार वो पूरी ताकत से नीचे बैठती और लंड को जड़ तक चूसती वहीं महिपाल नीचे से बेटी की चूत में धक्का लगाते। उसकी चूचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं। महिपाल नीचे
अंजली थोड़ी देर अपने पापा के लंड पर उछलती रही और फिर जब उसकी गति धीमे पड़ने लगी तो वो अपनी कमर नचाते हुए बोली
अंजली: पापा अब पीछे से चोदो मुझे... घोड़ी बनाकर... जैसे कुत्ते कुतिया को चोदते हैं... अपनी बेटी की गांड देखकर चोदो पापा...”
महिपाल ने ये सुन सिर हिलाया और अंजली मुस्कुराई और उनके ऊपर से हटकर सोफे पर घुटनों के बल बैठ गई। उसने अपनी कमर नीचे झुका दी, छाती सोफे पर टिका दी और अपनी मोटी, गोल गांड ऊपर उठा दी। अब वो पूरी तरह घोड़ी बन चुकी थी। उसकी टाइट चूत और गुलाबी गांड का छेद महिपाल के सामने पूरी तरह खुला हुआ था।
अंजली पीछे मुड़कर पापा को देखते हुए, बहुत कामुक और शरारती आवाज में बोली:
“देखो पापा... अपनी बिटिया की गांड... कितनी मोटी और गोल है... अब आओ... पीछे से अपना मोटा लंड मेरी चूत में घुसा दो... जोर से पेलो... मैं तुम्हारी कुतिया हूँ आज... चोदो अपनी कुतिया बेटी को...”
महिपाल ने दोनों हाथों से अंजली की मोटी गांड को पकड़ लिया। उँगलियाँ गांड के नरम मांस में धंस गईं। उन्होंने लंड का टोपा अंजली की चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाव डाला।
महिपाल: आह्ह्ह बिटिया... तेरी गांड तो कितनी सुंदर है... ये चूत भी कितनी गीली हो रही है मेरे लंड के लिए... ले... तेरा बाप अब पीछे से चोदेगा है तेरी चूत को...”
एक जोरदार धक्का! और महिपाल का पूरा मोटा लंड अंजली की चूत में जड़ तक घुस गया। “धप्प्!” की आवाज हुई। अंजली का पूरा बदन आगे की तरफ झटका खा गया।
अंजली: आआआह्ह्ह पापा... पूरा घुस गया... आह्ह्ह... पीछे से कितना गहरा जा रहा है... मेरी चूत फाड़ दो... हाँ... जोर से... अपनी बेटी की चूत को पेलो... आह्ह्ह... गांड पकड़कर चोदो पापा...”
महिपाल अब पूरी रफ्तार में आ गए। उन्होंने अंजली की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और तेज-तेज धक्के मारने लगे। हर धक्के के साथ अंजली की मोटी गांड लहरा रही थी और “चप-चप-चप-चप” की आवाज हॉल में गूँज रही थी। महिपाल का लंड बार-बार जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था।
अंजली हाँफते हुए, गांड पीछे की तरफ उठाते हुए बोली:
“हाँ पापा... इसी तरह... और तेज... मेरी चूत को फाड़ दो... आह्ह्ह... तुम्हारा लंड मेरी चूत के अंदर कितना जोर से मार रहा है... मुझे बहुत मजा आ रहा है... चोदो अपनी कुतिया बेटी को... मैं तुम्हारी कुतिया हूँ पापा... जितना मन करे पेलो...”
महिपाल गांड पर थप्पड़ मारते हुए, तेज चोदते हुए बोले:
“आह्ह्ह मेरी कुतिया चुदक्कड़ बेटी... तेरी गांड कितनी मस्त हिल रही है... ले... ले... ले मेरी जान... पापा तेरी चूत का भोसड़ा बना देंगे... रोज सुबह तुझे ऐसे ही कुतिया बनाकर चोदूँगा...
अंजली की चूचियाँ सोफे पर रगड़ रही थीं। हर धक्के पर वो आगे-पीछे हो रही थी।
अंजली: पापा... और जोर से... मेरी गांड पर थप्पड़ मारो... हाँ... ऐसे... आह्ह्ह... तुम्हारा लंड मेरी चूत को पूरी तरह भर रहा है....अभी मत रुको... चोदते रहो... मेरी चूत फाड़ दो...”
महिपाल ने अंजली की कमर को और कस लिया। अब उनके धक्के और भी तेज और गहरे हो गए थे। लंड पूरी ताकत से अंदर-बाहर हो रहा था। अंजली की चूत से सफेद झाग बन रहा था जो महिपाल के लंड और अंडकोष पर लग रहा था।
महिपाल: ले बिटिया... ले... पापा तेरी चूत को आज पूरी तरह अपना बना लेंगे... रोज रात और सुबह तुझे ऐसे ही चोदूँगा... आह्ह्ह तेरी चूत
दोनों की साँसें बहुत तेज हो चुकी थीं। अंजली की चूत महिपाल के लंड को कस-कसकर निचोड़ रही थी। महिपाल अभी भी पूरी ताकत से पीछे से चोद रहे थे, अंजली की मोटी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी।
महिपाल अंजली की मोटी गांड को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए थे। उनके धक्के अब और भी तेज और बेतहाशा हो गए थे। लंड जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। अंजली की चूत पूरी तरह फूल गई थी और सफेद झाग बनाकर चारों तरफ फैल रहा था। सोफा जोर-जोर से हिल रहा था।
अंजली (गांड पीछे की तरफ उठाते हुए, हाँफते हुए बोली: आह्ह्ह पापा... और तेज... मेरी चूत फाड़ दो... हाँ... इसी तरह... मुझे लग रहा है मेरी चूत फट जाएगी... लेकिन चोदते रहो... अपनी कुतिया बेटी को आह .. आह्ह्ह... गांड पर थप्पड़ मारो पापा...
महिपाल :आह्ह्ह बिटिया... तेरी चूत तो मेरे लंड को निचोड़ रही है... बहुत कसी हुई है... पापा अब झड़ने वाला है... आह्ह्ह... तेरी चूत में ही भर दूँगा अपना गरम माल...”
अंजली ने तुरंत पीछे मुड़कर पापा को देखा। उसकी आँखों में शरारत और भूख थी। वो अभी भी घोड़ी बनी हुई थी, लेकिन आवाज बहुत कामुक हो गई थी।
अंजली हाँफते हुए, लेकिन साफ-साफ बोलते हुए: नहीं पापा... मत डालो अंदर... मैं चाहती हूँ कि तुम्हारा सारा गरम रस मेरे चेहरे पर आए... मेरी चूचियों पर आए... अपनी बेटी के मुँह और चूचियों पर झाड़ दो पापा... मुझे तुम्हारा रस चेहरे पर चाहिए... आह्ह्ह... जल्दी निकालो लंड... मैं तैयार हूँ...”
ये सुनते ही महिपाल का जोश और बढ़ गया। उन्होंने आखिरी कुछ बहुत तेज धक्के मारे, फिर अंजली की चूत से अपना मोटा, चमकदार लंड बाहर निकाल लिया। लंड पूरी तरह अंजली के चूत-रस से भीगा हुआ था और फड़फड़ा रहा था।
अंजली तुरंत घोड़ी पोजीशन से मुड़ी और सोफे पर पीठ के बल लेट गई। उसने अपनी दोनों टाँगें थोड़ी फैला दीं और दोनों हाथों से अपनी चूचियों को ऊपर की तरफ दबाकर और भी उभार दिया। चेहरा ऊपर की तरफ था, मुँह थोड़ा खुला हुआ, जीभ बाहर निकली हुई। वो पूरी तरह तैयार खड़ी थी अपने पापा के वीर्य के लिए।
अंजली नशे भरी, भूखी आवाज में, हाथों से चूचियाँ मसलते हुए बोली: आ जाओ पापा... झाड़ दो... अपनी बिटिया के चेहरे पर... मेरी चूचियों पर... सारा माल मेरे ऊपर उड़ेल दो... मैं तुम्हारी चुदक्कड़ बेटी हूँ... देखो कैसे मुँह खोलकर इंतजार कर रही हूँ... झाड़ो पापा...नहला दो मुझे अपने गरम रस से...
महिपाल घुटनों के बल अंजली के ऊपर आ गए। उन्होंने एक हाथ से अपना कड़ा लंड पकड़ा और तेजी से हिलाने लगे। लंड अंजली के चेहरे और चूचियों के ठीक ऊपर था।
महिपाल हाँफते हुए, लंड हिलाते हुए बोले:
आह्ह्ह बिटिया... ले... ले मेरी जान... तेरा बाप तेरा बेटीचोद बाप तेरे चेहरे पर झड़ रहा है... आह्ह्ह... तेरी चूचियों पर... ले...”
और फिर महिपाल के लंड से निकली पहली मोटी धार, महिपाल का गरम, गाढ़ा रस अंजली के चेहरे पर गिरा। कुछ उसके माथे पर, कुछ उसकी आँखों के पास, कुछ उसके खुले मुँह में चला गया। अंजली ने जीभ से उसे चाट लिया।
अंजली मुँह में रस लेते हुए, आह भरते हुए बोली: आह्ह्ह पापा... कितना गरम है... स्वाद तो मस्त है... और डालो... मेरी चूचियों पर भी...”
महिपाल ने लंड को थोड़ा नीचे किया और बाकी की धारें अंजली की दोनों गोरी, मोटी चूचियों पर उड़ेल दीं। सफेद, गाढ़ा वीर्य उसकी चूचियों पर फैल गया, निप्पलों पर टपकने लगा। कुछ धारें उसकी पेट पर भी गिर गईं।
अंजली अपनी चूचियों पर हाथ फेरते हुए, वीर्य को मलते हुए, बहुत संतुष्ट स्वर में बोली: आह्ह्ह... पूरा भर दिया पापा... मेरे चेहरे पर... मेरी चूचियों पर... कितना ज्यादा है... मैं अब तुम्हारे रस से सनी हुई सुंदर चुदक्कड़ बेटी हूँ... देखो कैसे तुम्हारा रस चाट रही हूँ...”
अंजली ने अपनी जीभ बाहर निकालकर होंठों पर पड़े रस को चाटा। फिर दोनों हाथों से अपनी चूचियों को मसलने लगी और रस को पूरे चूचों पर फैला दिया। महिपाल हाँफते हुए उसके ऊपर झुके रहे।
महिपाल अभी भी अंजली के ऊपर झुके हुए थे। अंजली की चूचियाँ और चेहरा पापा के गाढ़े, गरम वीर्य से सना हुआ था। अंजली मुस्कुराते हुए अपनी चूचियों पर हाथ फेर रही थी और वीर्य को अपनी उँगलियों पर लेकर चाट रही थी। तभी दोनों को पीछे से एक आवाज़ और हल्की-सी हँसी सुनाई दी।
सविता: “तो बाप-बेटी यहां ये गुल खिला रहे हैं... सुबह-सुबह ही बेटी को चोदकर उसे अपने रस से नहला दिया तुमने तो?” और अंजली तूने बड़ी अच्छी सज़ा दी है अपने पापा को।
दोनों चौंककर पीछे मुड़े। सविता हॉल में खड़ी थी। सिर्फ एक पतला, सफेद पेटीकोट पहने हुए। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ नंगी झूल रही थीं। निप्पल खड़े होकर कपड़े को उभार रहे थे। बाल खुले थे और मुस्कुरा रही थी। वो धीरे-धीरे आगे बढ़ी।
सविता अंजली के पास आकर, मुस्कुराते हुए बोली: अरे मेरी प्यारी बिटिया... पापा ने तेरे चेहरे और चूचियों को कितना सुंदर से रंग दिया है... कितना गाढ़ा और गरम रस है... माँ को भी तो चखने दे...”
सविता झुक गई और अपनी जीभ से अंजली के चेहरे पर पड़े रस को चाटने लगी। पहले माथे से, फिर गालों से, फिर होंठों पर। अंजली की आँखें बंद हो गईं। सविता ने अंजली के होंठों को चूस लिया और पति का वीर्य अपनी जीभ से बेटी के मुँह में डाल दिया।
सविता अंजली के होंठ चूसते हुए बोली:
“मम्म... स्वाद तो और अच्छा हो गया है तेरे पापा के रस का तेरे बदन के साथ मिलकर ...
सविता नीचे झुकी और अंजली की रस से सनी चूचियों को चूसने लगी। एक-एक निप्पल को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूस रही थी। रस को चाट-चाटकर निगल रही थी। अंजली सिसकारियाँ भर रही थी।
अंजली: आह्ह्ह मम्मी... चूसो... मेरी चूचियों को साफ कर दो... पापा ने बहुत भरा है... आह्ह्ह...
सविता ने अंजली की दोनों चूचियाँ अच्छे से चाट लीं। फिर नीचे सरकी। अंजली की टाँगें अभी भी फैली हुई थीं। उसकी चूत अभी भी चुदाई के बाद लाल और गीली थी। महिपाल का कुछ रस चूत से बाहर निकलकर जांघों पर बह रहा था।
सविता अंजली की जांघों को फैलाते हुए, मुस्कुराते हुए बोली:
“अब माँ अपनी बेटी की चूत भी साफ करेगी... पापा ने कितनी अच्छी तरह चोदा है तेरी चूत को... देखो कितनी फूली हुई है...”
सविता ने अपना मुँह अंजली की चूत पर रख दिया और भूखों की तरह चाटने लगी। जीभ अंदर-बाहर कर रही थी, चूत के रस और महिपाल के वीर्य को मिलाकर चूस रही थी। अंजली का बदन फिर से काँपने लगा।
अंजली अपनी माँ के सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए बोली:
आह्ह्ह मम्मी... जीभ अंदर डालो... आह्ह्ह... पापा का रस और मेरा रस... सब चूस लो... हाँ... ऐसे ही... मेरी चूत चाटो मम्मी... आह्ह्ह... मैं फिर झड़ने वाली हूँ...”
सविता ने अपनी जीभ पूरी तरह अंजली की चूत में घुसा दी और तेज-तेज चाटने लगी। एक हाथ से अंजली की चूची मसल रही थी। महिपाल बस बैठे-बैठे ये नजारा देख रहे थे, उनका लंड फिर से खड़ा होने लगा था।
अंजली का बदन काँपने लगा उसकी कमर फिर से झटके खाने लगी, वो चीखते हुए बोली: आआआह्ह्ह मम्मी... तेज... तेज चाटो... मेरी चूत बह रही है... आह्ह्ह... झड़ रही हूँ... मम्मी तुम्हारे मुंह में आह मम्मी... मैं झड़ गई...”
अंजली का पूरा शरीर जोर से काँप उठा। वो दूसरी बार बुरी तरह झड़ गई। चूत से ताज़ा रस निकला जो सविता ने चूस-चूसकर पी लिया। अंजली की साँसें बहुत तेज हो गईं। उसका बदन पूरी तरह थक गया था। आँखें बंद हो गईं और वो सोफे पर ही लेट गई। सविता ने बेटी की चूत से मुंह हटाया एक मुस्कान के साथ पति की ओर देखा और फिर उठकर महिपाल के पास पहुंची, चेहरा अंजली के रस से सना हुआ था
महिपाल: बहुत सुन्दर लग रही हो अंजली की मां.
सविता ने झुक कर अपने होंठ पति के होंठों से मिला दिए और उन्हें भी अंजली की चूत का स्वाद मिला, दोनों के होंठ अलग हुए तो सविता बोली: कितना अलग हो गया है न हमारा परिवार।
महिपाल: हां और अंजली के शामिल होने से पूरा भी।
दोनों ने अंजली की ओर देखा जो सोफे पर ही सो चुकी थी।
सविता: ये तो सो गई, इसे अंदर ले चलो ।
महिपाल ने आगे बढ़ कर अंजली को बाहों में उठाया, तो अंजली की आंखे कुछ पल के लिए खुली पर खुद को अपने पापा की बाहों में देखा तो फिर से बंद कर ली, महिपाल ने उसे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया, और सविता ने चादर ओढ़ा दी। दोनों कमरे से बाहर निकले इस एहसास के साथ की ये एक नया सवेरा हो रहा था उनके जीवन में एक नए जीवन की शुरुआत थी।
जारी रहेगी।
पारिवारिक संभोग का अद्भुत चित्रण,... गरमागरम अपडेट... मजा आ गया... और की प्रतीक्षा.....Akhirkar Mahipal betichod ban hi gaya.mazaa aa gaya in dono ki mast chudai dekh k.Nilesh ko apni hone wali bahu se shagun mil gaya ab aage kya hoga dekhna h.piyush ki kismat kb khulegi.baap aur bhai dono mazaa lenge sath me.agle update k intezar me