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Aap Is story ko kaisa dekhna chahenge?


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TharkiPo

I'M BACK
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159
Bhai itna garam update, hath jal gaye hamare to 🤣🤣🤣

Din bana dia aapne tharkipo bhai..ab dekhte hai Anjali ghar aaegi tab kya tadka lagega kahani mai.

Just awesome . Bhai masterbate karne pe majbur kar diye.
एक एक लाइन का रिव्यू देने वालों थोड़ा मेहनत कर लो, इतनी मेहनत से लिखता हूं तुम लोग सारी बात एक लाइन में कर के निपटा देते हो। पाप चढ़ेगा
 
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ayush01111

Well-Known Member
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प्रीती: वैसे पापा दादी को याद करके जल्दी मत निकालना जैसे भैया को मम्मी को चोदना होता है डेली वैसे मुझे भी तुमसे चुदना होता है,

पूर्वी: अरे हां पति और पिता से एक साथ भी तो चुदना है अभी ननद रानी को।

प्रीती: भाभी। गंदी कहीं की।

प्रीती शर्माते हुए बोली।


अपडेट 254



काम नगर में अनुज और सागर की अच्छी खासी खातिरदारी हो रही थी तो रीता और रवि के काम भवन में भी प्रोग्राम पूरे रंग में था, बस आसन थोड़े बदले हुए थे जोश वैसा ही था, एक ओर महिपाल रीता और सविता एक साथ लगे हुए थे बस फर्क इतना सा था कि महिपाल का लंड अब रीता की चूत की जगह उसकी गरम और कसी हुई गांड में था, रीता सोफे पर उसका आगे घोड़ी बनी हुई थी वहीं रीता का मुंह सामने बैठी सविता की चूचियों के बीच था जिन्हें वो लगातार चूस रही थी, महिपाल का हर धक्का उसे सविता की चूचियों में घुसा रहा था,

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सविता: आह जी कैसी है रीता की गांड कैसा लग रहा है तुम्हें?

सविता ने रीता के सिर पर हाथ फेरते हुए अपने पति से पूछा जो चेहरे पर कामुकता और आनंद के भाव लिए रीता की गांड मार रहा था,

महिपाल: ओह ओह ओह बहुत मज़ा आ रहा है, इसकी गांड तो बिल्कुल मक्खन जैसी है और बहुत कसी हुई भी, ओह आह आह।

सविता: तो और तेज मारो जी, ओह मथ दो इसकी गांड को, अपने लंड से कूटो इसकी गांड के मक्खन को,

सविता ने गरम होते हुए अपनी पति से कहा,

जिसे सुनकर महिपाल के धक्के और तेज हो गए और जोश में आ कर वो उसकी गांड मारने लगे,



वहीं दूसरे बिस्तर पर रानी एक ओर करवट लेकर लेटी थी रवि और पीयूष के बीच जहां पीयूष उसकी टांगों के बीच था और उसकी गांड में लंड चला रहा था वहीं रानी रवि का लंड चूस रही थी, रवि बिस्तर पर लेटा हुआ आहें भर रहा था,

रवि: आह ओह छोटी आह क्या गरम मुंह है तुम्हारा आह क्या चूसती हो अह लगता है जान ही निकाल लोगी।

पीयूष: सही बोला भाई साहब आह आह हम्मम आह मेरी पत्नी जानलेवा है,

पीयूष ने मुस्कुराते हुए रानी की गांड मारते हुए कहा। रानी को उनकी बातों से कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा था उसके बदन में दो लंड घुसे हुए थे जिनका वो लुत्फ उठा रही थी, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक की जगह दो लंड कितना मज़ा देते हैं।

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रवि: ओह छोटू भाई बुरा न मानो तो तुम्हारी पत्नी की जानलेवा गांड का स्वाद मेरे लंड को भी मिल सकता है,

पीयूष: ओह इसमें बुरा मानने जैसा क्या है आओ न,

पीयूष ने अपना लंड रानी की गांड से निकाला और उसकी जगह रवि ने ली और अपना लंड रानी की गांड के खुले छेद पर रखा और अंदर सरका दिया, वहीं पियूष ने अपना लंड रानी के मुंह में दे दिया,

दूसरी ओर महिपाल हर बढ़ते पल के साथ हर धक्के के साथ अपने चरम पर पहुंच रहे थे वहीं रानी की चीखें भी बढ़ती जा रही थीं कुछ तगड़े धक्के मारने के बाद महिपाल ने हुंकार भरते हुए अपना लंड जड़ तक रीता की गांड में ठूंस दिया और दातों को भींचते हुए अपने रस की पिचकारी उसकी गांड में छोड़ने लगे। अपने रस को उसकी गांड में भरने लगे और जब एक एक बूंद निचोड़ दी तो लंड रीता की गांड से निकाला और पीछे की ओर बैठ कर बुरी तरह हांफने लगे, वहीं रीता तुरंत पीछे घूमी और महिपाल के रस से सने लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी चाटने लगी और उसे कुछ ही पलों में चाट कर साफ कर दिया और फिर लंड को मुंह से निकाल दिया, और घूम कर सविता के होंठों को चूसने लगी और उसे उसके पति के रस का स्वाद चखाने लगी।

रवि रानी की गांड मारते हुए आहें भर रहा था और बिल बिला रहा था,

रवि: आह ओह आह आह आह यहम्मम आह छोटी क्या मस्त गांड है तुम्हारी, ओह छोटू आह गजब है तुम्हारी पत्नी आह।

पीयूष: हां आह गजब तो है वैसे तुम्हारी पत्नी भी कम नहीं है देखो उन अंकल का रस निचोड़ लिया पूरा अपनी गांड में और अब भी मन नहीं भरा,

रवि: आह मन उसका नहीं भरता यार, वैसे अंकल को छोड़ो और आंटी को देखो क्या फैली हुई गजब के चूतड़ हैं, आह कितना मज़ा आएगा इनके बीच लंड घुसा कर गांड मारने में।

रवि ने सविता की ओर इशारा करते हुए कहा जो उसकी पत्नी के होंठों को चूसने में व्यस्त थी, वहीं पीयूष मन ही मन सोचने लगा साला मेरी पत्नी की गांड मार रहा है और मेरी मां की गांड मारने की सोच रहा है, पीयूष ने अपनी मां के चूतड़ों की ओर देखते हुए सोचा,

पीयूष: सच में यार हैं तो मस्त।

रवि: वैसे हर लड़का किसी न किसी आंटी को चोदना चाहता है कभी न कभी, ये आंटी वैसी ही है, बड़ी बड़ी चूचियां और फैले हुए चूतड, भरा हुआ बदन। बिल्कुल चोदने लायक बदन है।

रवि अनजाने में पीयूष की मां के बदन की तारीफ कर रहा था उसके बारे में गंदी बातें कर रहा था और ये पीयूष को और उत्तेजित कर रहा था,

उसका लंड रानी के मुंह में ठुमके मार रहा था और रानी अपने पति की हालत समझ रही थी, और कहीं न कहीं उसे अपनी सास के बारे में सुनकर अच्छा भी लग रहा था,

पीयूष: ओह हां बड़ी बड़ी चूचियां, मोटी गांड सब कुछ तराशा हुआ है बिल्कुल चोदने लायक बदन।

पीयूष अपनी मां के बदन को देखते हुए सम्मोहित सा होकर देख रहा था और रवि की बातें उसके दिमाग में घूम रही थी,

रवि: अरे छोटू भाई देख क्या रहा है अभी उनके पति भी झड़ कर आराम कर रहे हैं जा और चोद ले आंटी को, मैं तो छोटी की गांड के बाद ज़रूर चोदूंगा उन्हें।

रवि की बात सुनकर तो पियूष का दिमाग ही घूम गया, वो उसे उसकी मां को चोदने के लिए कह रहा था अनजाने में ही सही, और ये सोच कर पीयूष के बदन में बिजली दौड़ रही थी, उसका रोम रोम उत्तेजना से फड़क रहा था, उसे पता भी नहीं चला कि वो रानी के मुंह से लंड निकाल कर रीता और सविता की ओर चल दिया, सविता और रीता एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगी हुई थी,

पीयूष उनके पास जाकर खड़ा हो गया और उन्हें देखने लगा उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे तभी रानी ने उसे देख और हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़ लिया और उसके लंड को हिलाने लगी, और फिर अचानक से उसे पकड़ कर अपने चेहरे की ओर खींच लिया और अगले ही पल उसका लंड रीता और सविता के होंठों से टकराया, रीता तो तुरंत उसके टोपे को चाटने लगी वहीं सविता ने जैसे ही देखा कि कौन है वो हैरान रह गई उसकी आँखें बड़ी हो गईं, उसके बेटे का लंड उसके होंठों से लग रहा था, उसने तुरंत अपना मुंह पीछे कर लिया और रीता को उसके बेटे के लंड को चाटते हुए चूसते हुए देखने लगी अपनी आंखों से कुछ इंच दूर बस, रीता ने कुछ पल पीयूष का लंड चूसा और फिर मुंह से निकाल कर सविता के होंठों पर लगा दिया, जिसके लगते ही पीयूष और सविता दोनों के बदन में बिजली दौड़ गई,

दोनों पल भर के लिए ज्यों के त्यों रुक गए फिर अपने आप सविता का मुंह खुला और उसने बेटे के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी, पीयूष के मुंह से एक गहरी आह निकली, वज़न रानी अपनी गांड मरवाते हुए इस नज़र को बिना पलक झपकाए देख रही थी, वहीं महिपाल अपनी पत्नी को अपने बेटे का लंड चूसते देख रहा था और उसका लंड तुरंत कड़क हो चुका था,

कुछ पल बाद रीता ने पीयूष का लंड पकड़ कर सविता के मुंह से निकाल लिया और मुस्कुराते हुए बोली: गंदी बात है दीदी जवान लंड मिला तो अकेले ही मजे लेने लगी, बांट कर खाओ।

ये कह कर वो पीयूष के लंड पर जीभ चलाने लगी और सविता भी मुंह आगे कर बेटे का लंड चाटने लगी।

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पीयूष तो जैसे जन्नत में था एक साथ उसके लंड पर दो मुंह चल रहे थे जिनमें से एक उसकी मां का था, उसके मुंह से लगातार आहें निकलने लगी, कुछ देर लंड चूसने के बाद रीता ने सविता को पीछे धकेल दिया और खुद पीयूष का लंड हाथ से सहलाते हुए सविता की चूत पर मुंह रख दिया और चाटने लगी, दोनों मां और बेटे अब रीता नाम की डोर से जुड़े हुए थे पीयूष सोफे के बगल में खड़ा था जिसका लंड रीता के हाथ में था जो बैठी हुई थी सोफे के नीचे उसका मुंह सोफे पर लेटी सविता की जांघों के बीच था और उसकी जीभ सविता की चूत पर चल रही थी, सविता अपनी टांगे फैलाए हुए अपनी चूत रीता से चटवा रही थी पर उसकी आँखें उसके बेटे पर टिकी हुई थीं।

कुछ पल बाद रीता ने अपना मुंह सविता की चूत से हटाया और हटाकर पीयूष के लंड पर रख दिया और उसे चूसने लगी और अपनी उंगलियों से सविता की चूत को रगड़ने लगी,

कुछ देर लंड चूसने के बाद रीता ने फिर से पीयूष का लंड निकाला और इस बार अपना मुंह सविता की चूत पर रखने की बजाय पीयूष का लंड सविता की चूत पर रख दिया और पीयूष को इशारा किया आगे बढ़ने का,

वहीं पीयूष और सविता तो बिल्कुल सुन्न पड़ गए उसके इस कदम से पीयूष का लंड वहीं अपनी मां की चूत के स्पर्श पाकर फुदकने लगा वहीं सविता को लग रहा था उसका पूरा बदन जल रहा है, दोनों की आंखें एक दूसरे पर थी, वहीं महिपाल और रानी की भी जो टक टकी लगा कर उन्हें ही देखे जा रहे थे,

फिर पीयूष को न जाने क्या हुआ उसने अपनी मां की जांघ को पकड़ा और धक्का देकर अपना लंड सविता की चूत में घुसा दिया जिसके साथ ही दोनों की तेज चीख निकल गई, और महिपाल और रानी की आह।

पीयूष धीरे धीरे अपनी कमर हिलाकर अपने लंड को अपनी मां की चूत में चलाने लगा, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वो अपनी मां को चोद रहा था ये तो जो उसने सोचा था जो योजना बनाई थी उससे भी कहीं ज्यादा था पर अपनी मां की गरम चूत का एहसास उसे ऐसा सुख ऐसा मज़ा दे रहा था जो आज तक उसे महसूस नहीं हुआ था। वहीं सविता अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में चलता महसूस कर उत्तेजना से बिलबिलाने लगी उसका बदन मचल रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था ये सब इतना गलत था जो हो रहा था फिर भी इतना अच्छा लग रहा था,

रीता उठ कर सविता के पीछे सोफे पर बैठ गई उसने सविता के सिर को गोद में रख लिया और उसकी मोटी चूचियों को सहलाते हुए उसे चुदते हुए देख रही थी वहीं अब सविता भी खुल कर बेटे से चुदाई का मज़ा ले रही थी।

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महिपाल का लंड ये देख बिल्कुल कड़क हो चुका था उसका बेटा और उसकी पत्नी चुदाई कर रहे थे, और ये किसी के लिए भी देखना बहुत अजीब था, दूसरी ओर रानी तो ये देख झड़ने लगी थी, गांड में रवि का लंड और पति और सास की चुदाई देखने से वो अपने चरम पर पहुंच गई थी और उसके साथ साथ रवि भी उसकी गांड की गर्मी के आगे पिघल चुका था और अपना रस रानी की गांड में भर दिया था, दोनों एक दूसरे के बगल में चिपके हुए हांफ रहे थे,

रीता: कैसी है आंटी की चूत छोटू, मज़ेदार है न?

पीयूष: ओह आह आह हां बहुत मज़ेदार आह कितनी गरम है और गीली भी, ऐसा मज़ा कभी नहीं आया, ओह।

पीयूष ने किसी तरह से खुद को काबू में करते हुए बोला।

रीता: और दीदी तुम्हे कैसा लग रहा है जवान लंड से चुदकर।

रीता ने सविता की चूचियों को मसलते हुए पूछा,

सविता: ओह ओह आह बहुत मज़ा आ रहा हैओह बेटा ऐसे ही चोद अपनी मां आह आह आह मां जैसी आंटी को ओह और तेज भर दे मेरी चूत को अपने लंड से।

सविता उत्तेजना में मचलते हुए बोली, वहीं एक पल को तो पियूष और बाकी सब भी डर गए कि कहीं सविता सच न बोल दे।

पीयूष: ओह हां आह आह आंटी तुम्हारी चूत ओह आह कितनी गरम है मानो लंड निचोड़ रही है.

रीता: बिल्कुल सही कहा दीदी तुम्हारी उमर इसकी दुगुनी ही होगी, छोटू तेरी मां की उमर कितनी है?

रीता ने ये पूछा तो पियूष और सविता दोनों ही थोड़ा हैरान रह गए पर पीयूष ने धक्के लगाते हुए बोला: बिलकुल इन आंटी जितनी ही है आह। बिल्कुल इतनी आह आह आह।

पीयूष अपनी मां की चूत में थापें मारते हुए बोला,

रीता: आह तभी तो इतना मजा आ रहा है तुम्हें छोटू, तुम्हारी मां कैसी है देखने में छोटू आंखें बंद करके सोचो।
पीयूष: क्या मां क्यों?
रीता: सोचो तो सही...
पीयूष मन ही मन सोचने लगा सोचने की क्या जरूरत है मां तो मेरे सामने है मेरा लंड उसकी चूत में है फिर भी रीता की बात मानते हुए बोला: भरा बदन है, बड़ी बड़ी चूचियां हैं, और फैले हुए चूतड हैं,सुंदर चेहरा है।
रीता: ये तो बिल्कुल दीदी जैसी हुई,
पीयूष: मम्मी भी इनके जैसी ही है बिल्कुल।
रीता: ओह छोटू तो सोचो न तुम्हारा लंड तुम्हारी मां की चूत में है, आंटी को अपनी मां ही समझो।
पीयूष: ओह क्या मम्मी? आह पर कैसे?
रीता: अरे बस सोचना ही तो है सोचने में कैसी बंदिशें? क्यों दीदी चुदोगी इसकी मम्मी बनकर.
सविता जो पहले ही बेटे से चुद रही थी क्या बोलती उसने तुरंत हां में सिर हिला दिया,
रीता: छोटू अब चोदो अपनी मम्मी को खुल कर।
पीयूष को तो जैसे छूट मिली तो वो दनादन धक्के लगाने लगा सविता की चूत में,
पीयूष: ओह मम्मी आह ओह बहुत मज़ा आ रहा है तुम्हे चोदने में आह सोचा नहीं था कभी मौका मिलेगा ओह तुम्हारी चूत कितनी गरम है मन करता है चोदता रहूं।
सविता: आह आह आह आह बेटा चोदता रह ओह तेरा लंड भी बहुत सुख दे रहा है मुझे ओह चोद ले बेटा जितना मम्मी को चोदना है उतना चोद ले,
दोनों उत्तेजित होते हुए एक दूसरे की चुदाई में लगे हुए थे अब तो उन्हें मां बेटा बन कर चुदाई करने का मौका भी मिल गया था

इस मां बेटे की चुदाई का सब पर ही असर हो रहा था महिपाल तो लगातार उन्हें देख अपना कड़क लंड सहला रहा था, दूसरी ओर रानी अपने पति और सास की चुदाई देख और रवि से गांड मरवा रही थी और उसकी उत्तेजना चरम पर का जा रही थी, वहीं मां बेटे की चुदाई का रोलप्ले देख रवि भी खुद को रोक नहीं पाया बाकी का काम रानी की गांड ने कर दिया और रवि उसकी गांड में झड़ने लगा एक के बाद एक पिचकारी उसकी गांड में भरने लगा,
इधर जैसे ही झड़ने के बाद रवि ने रानी की गांड से लंड निकाला तो रानी तुरंत फुर्ती में उठ कर उसके पास से भागी, और उसने कुछ ऐसा किया जिससे सब हैरान हो गए, रानी सीधी अपने ससुर के आगे झुकी और उसका लंड अपने मुंह में लेकर पागलों की तरह चूसने लगी, महिपाल ये देख बिल्कुल हैरान रह गया अपनी बहू के मुंह में अपना लंड देख उसका पूरा बदन उत्तेजना में जल उठा वहीं रानी तो सब कुछ भूल कर उसका लंड ऐसे चूस रही थी मानो कब से भूखी हो, कुछ पल तो महिपाल स्तब्ध सा ही रहा फिर मानो धीरे धीरे से उसका दिमाग जो हो रहा था उसे समझा तो उसके हाथ रानी के सिर पर आ गए और उसे धीरे धीरे सहलाने लगे,

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उसका मुंह आहें भरने के लिए खुलने लगा, उसने सिर उठाया तो उसकी नज़र बेटे से मिली जो उसकी पत्नी को चोदते हुए उसे ही देख रहा था, और कुछ पल बाद दोनों के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई, ये सफलता की मुस्कान थी, जो योजना उन दोनों ने मिलकर बनाई थी वो सफल हो गई थी और जो उन्होंने सोचा था उससे ज़्यादा उन्हें मिल गया था, दोनों जानते थे कि उनका जीवन अब पूरी तरह बदल चुका था, पीयूष ने सिर हिलाकर उसे आगे बढ़ने का इशारा किया तो उसने भी अपनी आंखों से उसे आगे बढ़ने का इशारा किया, और फिर दोनों ही अपने अपने काम में लग गए,

रीता और रवि अपनी अपनी जगह बैठे हुए दोनों जोड़ों की चुदाई देख रहे थे, पीयूष के लिए अपनी मां की चूत में धक्के लगाना बहुत उत्तेजित कर रहा था हर पल के साथ उसका पूरा बदन सिहर रहा था उसे लग रहा था मानो उसकी सारी ऊर्जा इकट्ठा होकर उसके लंड में भर रही है और फिर उसके धक्के बहुत तगड़े हो गए, इतनी तेज कि सविता की चीखें निकलने लगी और फिर पियूष ने अपना रस अपनी मां की चूत में आहें भरते हुए गुर्राते हुए छोड़ दिया, सविता भी बेटे की दमदार चुदाई के आगे टिक नहीं पाई और झड़ने लगी। दोनों मां बेटे एक सतझड़ गए।
पीयूष के झड़ने के साथ ही रीता अपनी जगह से उठी और उसने सविता की चूत से पीयूष के लंड को निकाला और चूसने लगी, उसका रस चाट कर साफ करने लगी, पीयूष का लंड अभी भी पूरी तरह कड़क था शायद मां को चोदने का खयाल झड़ने के बाद भी उसे उत्तेजित कर रहा था,
सविता उसी तरह लेटी हुई हांफ रही थी और जो कुछ हुआ उसके बारे में सोच रही थी कि तभी उसे अपनी गांड के छेद पर गरम एहसास हुआ, उसने तुरंत आंख खोल कर देखा तो रीता पीयूष के लंड को उसकी गांड के छेद पर घिस रही थी,
रीता मुस्कुराई और कहा: दीदी इसका लंड तो अभी भी खड़ा है तुम्हारे दूसरे छेद की भी सैर करवा दें?
सविता ने ये सुन उसे देखा और फिर पीयूष को और फिर अपनी जांघें और फैला दी,
सविता: बेटा अपनी मां की गांड मारेगा?
पीयूष: हां मम्मी तुम्हारी कसी हुई गांड मारने को कब से तड़प रहा हूं,
रीता: अब आए हो तुम लोग पूरे रोल में। चल छोटू घुसा दे अपना मोटा लंड अपनी मां की गांड में और अच्छे से मार।
पीयूष ने भी ऐसा ही किया और धक्का लगा कर अपना लंड अपनी मां की गांड में घुसा दिया जिसके घुसते ही दोनों के मुंह से आह निकल गई, फिर धीरे धीरे पीयूष लंड को अंदर बाहर करने लगा, वहीं रीता फिर से सविता के सिर की ओर बैठ गई और उसके होंठों को चूसने लगी,

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वहीं पीयूष अपनी मां की गांड में लंड चलाते हुए उसकी खुली चूत को फैला फैला कर देखने लगा जिसे कुछ देर पहले उसने चोदा था, सविता अपनी गांड में बेटे का लंड चलता देख सिहर रही थी और आहें भर रही थी,
पीयूष: ओह मम्मी कितनी गरम है तुम्हारी गांड आह और कितनी कसी हुई भी ऐसा लग रहा है मेरे लंड को जकड़े हुए है।

सविता: आह बेटा तेरा लंड इतना मोटा है आह आह मेरी गांड को फैला रहा है ओह और अंदर तक घुसा मुझे तेरा लंड पूरा अपने अंदर महसूस करना है।
रीता: ओह तुम्हारी बाते सुन कर मेरा बुरा हाल हो रहा है आह ऐसे ही गांड मार अपनी मां की छोटू।
रीता अपनी चूत में उंगली करते हुए बोली, कि तभी उसे अपने कंधे पर हाथ महसूस हुआ उसने देखा वो रवि का था, जो अपना खड़ा लंड लेकर खड़ा था,
रवि: ये लोग तो व्यस्त हैं अपने पति का भी तो खयाल रखो,
रीता: नेकी और पूछ पूछ, पर तुम्हे भी मेरी गांड ही मारनी पड़ेगी
ये कह रीता तुरंत ही सविता और पीयूष के बगल में घोड़ी बन गई।
रवि: नेकी और पूछ पूछ। कहते हुए रवि ने अपना लंड अपनी पत्नी की गांड में घुसा दिया और उसकी गांड मारने लगा।
रवि: ओह तो कैसी लगी आंटी की गांड मेरा मतलब तुम्हारी मां की गांड?
रवि ने मुस्कुराते हुए पीयूष से पूछा जो सविता की गांड में लंड अंदर बाहर कर रहा था,
पीयूष: सच कहूं तो ऐसा कभी महसूस नहीं किया आह बहुत मज़ा आ रहा है।
रवि: इसी मज़े के लिए तो हम ये सब करते हैं छोटू,
रवि ने रीता की गांड मारते हुए कहा,
रीता: तुम लोगो की बातें हो गईं हो तो काम पर ध्यान दो।
रीता की डांट सुन दोनों मुस्कुराते हुए चुप हो गए और चुदाई पर लग गये।
तभी दूसरी ओर से आहें तेज हो गई दोनो ने ही बिस्तर की ओर देखा तो पाया कि रानी बिस्तर पर लेटी थी और महिपाल उसकी टांगों के बीच था और दनादन अपना लंड अपनी बहू की चूत में चला रहा था,

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रानी का मुंह खुला हुआ था और लगातार आहें और सिसकियां निकल रही थी, उसका पूरा बदन अपने ससुर के झटकों से झूल रहा था मचल रहा था
रानी: आह आह आह आह पापा जी ओह ऐसे ही चोदो अपनी बहू को ओह ओह ओह।
महिपाल: ओह हां बेटा आह आह आह तेरी गरम चूत मुझे रुकने नहीं देगी।
रानी: रुकना नहीं पापा जी बस चोदते रहो ओह ओह ओह चोदते रहो,

उनकी बातें सुन रीता गांड मरवाते बोली: लगता है छोटी की भी अंदर की इच्छाएं जाग रही हैं।
रवि: सही है न रोलप्ले का असली मज़ा भी यही है, अब छोटू अपनी मां को चोद रहा है तो छोटी भी ससुर से चुदेगी ही ना।
पीयूष: मुझे लगता है तुम दोनों को भी हमारा कुछ बनना चाहिए?
रीता: पर क्या छोटू तुम ही बताओ?
रानी: तुम लोग मेरे मम्मी पापा बन जाओ।
रानी दूर से ही चिल्लाते हुए बोली और ये सुन रवि और रीता के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
रीता: आह देखो जी हमारी बेटी कैसे अपने ससुर से चुदवा रही है कितनी चुदक्कड़ है।
रवि: बिल्कुल अपनी मां पर गई है न, अभी कुछ देर पहले अपना बाप से गांड मरवाई और अब ससुर से चुदवा रही है।
रीता: बिल्कुल, वैसे कम तो समधन तुम भी नहीं हो अपने ही बेटे से गांड मरवा ली।
सविता: अब अपनी समधन की बराबरी तो करनी पड़ेगी ही न चुदने में, इसके लिए चाहे बेटे से चुदना पड़े या बाप से सबसे चुदुंगी।
एक तो बेटे से गांड मरवाने का सुख ऊपर से ऐसी गंदी बातें सुनकर सविता को भी मज़ा आ रहा था और वो भी पूरा खुलकर सबका साथ दे रही थी।
महिपाल अपनी पत्नी और बेटे की चुदाई देखते हुए अपनी बहू को चोद रहे थे और सोच रहे थे कि एक दिन में उनका परिवार कितना बदल गया है, और अभी तो बस शुरुआत थी।



दूसरी ओर काम नगर में भी चुदाई का खेल जोरों पर था पूरे घर में सिसकियों और थापें गूंज रही थीं, अनुज बिस्तर पर लेटा था और रेनू उसके ऊपर थी अनु का लंड रेनू की गांड में था और अनुज रेनू की मोटी चूचियों को मसलते हुए नीचे से ज़ोरदार धक्के उसकी गांड में लगा रहा था

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जिन धक्कों से रेनू का पूरा बदन अंदर तक हिल रहा था, इस गांड फाड़ चुदाई से उसे बहुत मज़ा आ रहा था
रेनू: आह आह आह आह आह अनुज आह ऐसा लग रहा है गांड में आग लग रही है ओह।
अनुज: ओह चाची आह तुम्हारी गांड में ही आग है जिसे मैं अपने पानी से बुझाऊंगा ओह ओह बस ऐसे ही रहो।

पूर्वी: ओह ओह देख ओह प्रीती तेरा क्या ओह होगा जब ओह मम्मी जी अनुज का लंड ओह नहीं झेल पा रही तो।
पूर्वी ने कहा जो खुद अभी दो लंड के बीच पिस रही थी, अपने पति और ससुर के बीच।
प्रीती: ओह भाभी ओह तुम अभी अपनी गांड और चूत पर ध्यान दो, आह आह पापा भैया अच्छे से चोदो भाभी को कि ये चलने लायक न रह जाए,
सागर: अरे भाभी तुम भी मुझ पर ध्यान लगाओ न पूर्वी दीदी को छोड़ो,
सागर ने प्रीती को चोदते हुए उसकी चूचियों को मसलते हुए कहा,
प्रीती: धत्त अभी से मुझे भाभी मत बुलाओ सागर, ओह ओह आह आराम से ओह।
सागर: फिर क्या बुलाऊं? ओह भाभी ओह।
प्रीती: छोड़ो ओह जो मन करे बुलाओ बस ऐसे ही करते रहो।
पूर्वी: ओह आह हम्मम अच्छे से चोद सागर मेरी चुदक्कड़ ननद रानी को, दिखा इसे की देवर में कितना दम है, ओह ओह।
पूर्वी अपनी चूत अपने ससुर और गांड अपने पति से कुटवाते हुए बोली।
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प्रकाश: इन ननद भाभी की छेड़छाड़ कभी नहीं रुकती।
पंकज: रुकनी भी नहीं पापा माहौल बना रहता है।
रेनू: सही कहा बेटा आह आह ये अपनों की छेड़छाड़ ही तो परिवार को बनाती है
रेनू ने अनुज के लंड से गांड मरवाते हुए कहा, माहौल देख कर लग रहा था कि ये दौर लंबा चलने वाला था।


चोदम पुर में सूरज ढल रहा था, लोग अपने घरों की ओर लौट रहे थे नीलेश के बाग में भी मज़दूर जा चुके थे वहीं नीलेश, नाना, राजन और जमुना(मामा) बैठ कर बातें कर रहे थे आगे का काम कैसे होगा उसकी योजना बना रहे थे, इसी बीच राजपाल और दीनू भी वहां पहुंच गए थे, राजपाल के चेहरे पर आज सभ्या को भोगने की खुशी अलग ही दिख रही थी,
नीलेश: आओ भैया, कहो जोड़ी कहां घूम रही है,
राजन: जरूर कोई चक्कर है।
दीनू: अरे कोई चक्कर नहीं है भैया बस तुमसे ही बात करने आए थे काम की।
नीलेश: हां बोलो न?
दीनू: आज राजपाल भाई साहब का घर खाली है,
जमुना: तो?
दीनू: तो आगे खुद समझ जाओ,
दीनू ने नाना को देख नज़रें नीचे कर के बोला,
नाना: अरे बाबू हमसे क्या लजा रहे हो, खुल कर बोलो।
राजन: अरे हम पहले ही समझ गए थे बाबा क्या बात है तभी तो बोला कोई न कोई चक्कर है।
राजपाल: तो फिर बनाया जाए क्या कहते हो नीलेश?
नीलेश: ठीक है बनाते हैं क्यों बाबा?
नाना: नहीं भैया तुम लोग ही बनाओ पिछली बार छोटी और बड़ी दोनों ने खूब सुनाया था।
राजन: थोड़ा भी नहीं?
नाना: अरे नहीं तुम लोग मजे करो,
राजन: ठीक है फिर बनाते हैं पर याद रखना बिना चूत के दारु का मज़ा नहीं है।
नीलेश: देख लेंगे, ऐसा करो तब तक समान लेने चले जाओ दो आदमी।
राजपाल: हां जमुना और दीनू ले आयेंगे।
योजना बना कर सब निकल जाते हैं करीब तीन घंटे बाद राजपाल के घर पर सब बैठे हैं बीच में दारू है और खूब हंसी मज़ाक के साथ दारू पी जा रही है, राजपाल, नीलेश, दीनू, राजन और जमुना सब हाथ में गिलास लिए दारू का लुत्फ़ उठा रहे हैं, तभी उन्हें आवाज सुनाई देती है और उनका ध्यान उधर जाता है। सामने देखते हैं तो उनकी पत्नियां थीं सिवाय राजपाल की पत्नी को छोड़ कर यानी सभ्या, ममता, रज्जो और गुंजन।

रज्जो: क्यों जी हमें इंतजार करवा कर कब तक दारू पियोगे तुम लोग।
गुंजन: हां अगर और पीनी है तो बताओ हम चले जाते हैं।
सभ्या: और क्या अगर दारू से रात काटनी है तो हमें क्यों लेकर आए।
नीलेश: अरे बस एक एक जाम और फिर आते हैं।
ममता: हर बार यही होता है भैया, चलो हम कमरे में चलते हैं।
दारू खत्म होने के बाद आ मत जाना।
राजन: नहीं नहीं मेरी जान ऐसा नहीं है लो छोड़ दी दारू, आ गए तुम्हारे पास, तुम्हारे बिना तो सारे नशे फीके हैं।
राजन ने उठते हुए कहा तो बाकी सारे मर्द भी उठ कर चल दिए,
आज की योजना यही थी सब मर्द अपनी अपनी पत्नियों को लाए थे सिवाय राजपाल के, नीलेश के घर पर नाना और किरन थे तो राजन के घर को बिरजू और पल्ली देख रहे थे वहीं सरजू के घर पर लाडो और सरजू थे। वहीं राजपाल के घर में एक लंबी चलने वाली रात शुरू हो चुकी थी,

राजन सबसे पहले आगे बढ़ा, उसकी आंखों में शराब की नशा और कामुकता का मिश्रण था। वो सीधा अपनी पत्नी ममता की तरफ बढ़ा, लेकिन रास्ते में गुंजन से टकरा गया। गुंजन ने हंसते हुए उसका हाथ पकड़ लिया और बोली, "जीजा, इतनी जल्दी क्या है जीजी के पल्लू में घुसने की आओ मैं दूदू पिला दूं।"
राजन: अरे गुंजन तुम्हारा तो दूदू क्या सब पी लेंगे हम, आओ न।
ये कहते हुए राजन ने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और चूसने लगे, गुंजन को उसके होंठों से दारू का स्वाद आ रहा था पर कामुकता का असर दारू के नशे से ज्यादा था,

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राजन के हाथ लगातार गुंजन की कमर और पेट पर चल रहे थे, दोनों के होंठ लगातार एक दूसरे के होंठो को समाने की कोशिश कर रहे थे,
राजन: ओह गुंजन तुम्हारे होंठो में तो दारू की बोतल से ज़्यादा नशा है।
राजन ने उसके होंठो को छोड़ते हुए कहा,
गुंजन: तो दारू की जगह इन्हें ही चूस लिया करो जीजा, क्यों मुई दारू के पीछे लगे रहते हो।
राजन: अब से नहीं छोड़ेंगे सलहज रानी,
ये कह राजन ने दोबारा उसके होंठो को भर लिया और चूसने लगा।
उधर, ममता ने अपने पति को गुंजन के साथ देखा तो वो राजपाल जो कुर्सी पर बैठे थे उनकी ओर बढ़ गई,
ममता: भाई साहब अकेला तो महसूस नहीं हो रहा जीजी के बिना?
ममता ने राजपाल की नंगी छाती पर हाथ फिराते हुए कहा,
राजपाल: तुम लोगो के रहते हम कभी अकेले नहीं हो सकते बहू,
राजपाल ने हाथ बढ़ा कर ममता की कमर को सहलाते हुए कहा,
ममता: अच्छा हम या दारू?
राजपाल: अरे तुम लोगो की जगह दारू क्या कोई चीज नहीं ले सकती।
ये कहते हुए राजपाल ने ममता को अपने करीब खींच लिया और फिर दोनों के होंठ मिल गए। राजपाल ममता के होंठों का रस चूसने लगा।

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राजपाल के हाथ अभी भी लगातार ममता की पीठ और कमर पर चल रहे थे और बीच बीच में नीचे उसके चूतड़ों को भी सहला रहे थे।
इधर नीलेश जो अब तक खाली थे उनके पास रज्जो पहुंच गई, और बोली: क्यों भाई साहब ऐसे अकेले क्यों खड़े हो, अपनी साली की याद आ रही है क्या?
नीलेश: तुम्हारे रहते किसी की याद आ सकती है क्या रज्जो रानी?
रज्जो: हां तभी तो हमारे रहते भी दारू को तो नहीं भूलते।
नीलेश: अरे दारू का क्या है अभी पिए और मूत दिए तुम लोग तो हमारी जान हो।
नीलेश ने नशे के सुरूर में कहा,
रज्जो: ये भी लगता है दारू ही बोल रही है,
नीलेश: अरे छोड़ो तुम दारू को आओ अपना रस पिलाओ,
ये कहकर नीलेश ने रज्जो को खुद से चिपका लिया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और चूसने लगा,
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रज्जो भी उसका पूरा साथ दे रही थी, नीलेश के हाथ रज्जो के भरे और कामुक बदन पर फिसल रहे थे,

जहां रज्जो नीलेश के साथ थी तो उसके पति कैसे पीछे रहते वो नीलेश की पत्नी के साथ हो लिए और अभी उसकी कमर को मसल रहे थे
दीनू: ओह भाभी कितना मखमली बदन है तुम्हारा आह मन करता है खा ही जाऊं।
सभ्या: यहम्मम ये सब तुम नशे में ही बोल पाते हो दीनू भैया, वैसे कभी नहीं होती ऐसी बातें।
दीनू: नशे में तो हैं भाभी पर दारू के नहीं तुम्हारे इस कामुक बदन के नशे में हैं, आह इसका रस इतना नशीला है।
सभ्या: बस बस अब और रहने दो इतनी तारीफ बहुत है।
सभ्या ने हंसते हुए कहा पर उसकी हंसी आधी में ही रुक गई क्योंकि दीनू ने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया, और उसकी चूचियों को मसलने लगा,
कुछ देर तक होंठो को चूसने के बाद दीनू ने उसके होंठों को छोड़ा और उसकी एक चूची को ब्लाउज़ से बाहर निकाल लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा, इतने में जमुना भी उनके पास आ गया और अपनी बहन के चेहरे को अपनी ओर घुमा कर उसके होंठों को चूसने लगा

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चोदम पुर की एक और कामुक रात की शुरुआत हो चुकी थी, राजपाल के घर में जहां ये सब इकट्ठे हो कर मजे कर रहे थे तो बाकी लोग भी पीछे नहीं थे, सभ्या नीलेश के यहां किरन अपने दादा का लंड चूस रही थी बिल्कुल नंगी हो कर वहीं कर्मा के नाना अपनी नानी के बदन को सहलाते हुए उसका मुंह अपने लंड पर चलता हुआ महसूस कर सिहर रहे थे,
राजन के घर में बिरजू और पल्लू भी लगे हुए थे, पल्ली बिस्तर के किनारे झुकी हुई थी तो बिरजू उसके पीछे था उसके चूतड़ों को फैलाकर उसकी गांड के छेद पर अपनी जीभ चला रहा था और पल्लू उसकी हरकतों से सिहर रही थी।
वहीं रज्जो और दीनू के घर में सरजू और लाडो थे, जहां सरजू अपने बड़े भाई होने का पूरा फर्ज निभा रहा था और अपनी छोटी बहन की चूत में अपना लंड डाल कर सफाई कर रहा था।


दूसरी ओर काम भवन में अब भी घमासान मचा हुआ था अब जब रिश्तों की मर्यादा तार तार हो चुकी थी, शर्म का पर्दा हट चुका था और इन सब की जगह वासना ने ले ली थी, सविता अभी रवि के लंड को अपनी गांड में लेकर धीरे धीरे उछल रही थी वहीं उसकी चूत पर रीता की जीभ चल रही थी, रीता के पीछे पीयूष था जो रीता की गांड में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था

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सविता: ओह ओह ओह आह आह तुम दोनों आह एक साथ बहुत मज़ा आ रहा है, आह
रीता: अपनी समधन की सेवा तो करनी पड़ेगी न, तभी तो बेटी खुश रहेगी,
रीता ने रोलप्ले को जारी रखते हुए बोला।
सविता: ओह समधन जी ओह आह कितना अच्छा जीभ चलाती हो तुम, ओह और समधी जी का लंड भी कितना मोटा है।
पीयूष: ओह अच्छी और कसी हुई तो सासु मां तुम्हारी गांड भी है ओह कितनी गरम है, आह आह आह आह मज़ा आ रहा है।
पियूष रीता की गांड में पीछे से धक्के लगाते हुए बोला,
रीता: आह तुम्हारी सास चुदक्कड़ है जमाई बाबू, ओह मज़ा तो आएगा ही, अपनी बेटी को भी अपनी ही तरह चुदक्कड़ बना के भेजा है।
ये सुन कर महिपाल बोले: आह तभी तो बेटी भी अपने ससुर की आह आह इतने अच्छे से सेवा कर रही है ओह बहू तेरी गांड आह आज तक ऐसा कभी नहीं महसूस किया जैसा तेरी गांड करा रही है।
महिपाल रानी की गांड मारते हुए बोले, रानी बिस्तर पर लेटी थी अपनी टांगे को फैलाकर और पीछे की ओर पकड़ कर और महिपाल उसकी टांगों के बीच थे और अपना लंड उसकी गांड में चला रहे थे,

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रानी: आह आह पापाजी, ऐसे ही मारो अपनी बहू की गांड आह अपनी पत्नी और बेटे के सामने आह भर दो मेरी गांड।
महिपाल: ओह बहू आह हां अब नहीं रोक पाऊंगा खुद को आह तेरी गांड।
रानी: ओह आह आह आह आह पापा जी ओह जी देखो कैसे तुम्हारे पापा मेरी गांड मार रहे हैं, तुम्हारी बीवी की गांड आह आह ।
रानी गरम होते हुए बोल रही थी,
पीयूष: आह आह वो तुम्हारी गांड मार रहे हैं आह और मैं तुम्हारी मां की और तुम्हारे पापा मेरी मां की आह।
सविता: आह आह आह ऐसे ही तो परिवार को सब एक दूसरे आह आह की सेवा कर मिल जुल ओहम कर रहते हैं।
रवि: बिल्कुल सही कहा समधन जी।
रवि नीचे से धक्के लगाते हुए बोला सविता की गांड में। पीयूष कमरे में देखते हुए सोच रहा था कि एक दिन में कितना कुछ बदल सकता है।


काम नगर में भी चुदाई अपने चरम पर थी, और अभी दोहरी चुदाई का दौर चल रहा था, पूर्वी पहले ही अपने पति और ससुर से एक साथ चुद कर झड़ चुकी थी और अभी एक ओर बैठे खुद के बदन को सहलाते हुए कमरे में चल रहे खेल को देख रही थी, जहां एक ओर प्रीती थी जो अपने पापा के लंड पर सवार थी और पीछे से उसकी गांड में उसके भैया का लंड घुसा हुआ था, वहीं उसके बगल में उसकी मां रेनू थी जो अनुज के लंड पर सवार थी और सागर का लंड उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था,
दोनों मां बेटी की एक साथ दोहरी चुदाई हो रही थी और पूरा कमरा ही उनकी आहों और थापो से गूंज रहा था,
मर्द भी अपने चरम पर ही थे और कुछ पल बाद ही अपने अपने रस को छेदों में भर रहे थे, प्रीती अपने बाप और भाई का रस अपनी चूत और गांड में लेकर वैसे ही लेट गई और वहीं सो गई वहीं रेनू भी अपने रस से भरे छेदों के साथ सागर और अनुज को अपने सीने से लिपटा कर सो गई, पूर्वी भी अपने पति के बगल में लेट गई क्योंकि अब और कुछ करने की हिम्मत किसी में नहीं थी सब बुरी तरह थक चुके थे।

जहां काम नगर में सब थके हुए थे चोदम पुर में तो अभी खेल शुरू हुआ था, दारू का नशा मर्दों को और उत्तेजित कर रहा था और वो औरतों के बदन से खुल कर खेल रहे थे,
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राजन ने गुंजन के कपड़ों को उतार दिया था और अभी उसके बदन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी थी वहीं राजन के बदन पर भी सिर्फ उसका कच्छा बचा था, राजन गुंजन के पेट और मोटी चूचियों को मसल रहा था वहीं कच्छे में खड़ा उसका लंड गुंजन के मोटे चूतड़ों के बीच में चुभ रहा था जिससे गुंजन की आह निकल रही थी।
राजन: ओह गुंजन मेरी दुधारू गाय, इतनी मोटी चूचियों से तो पूरे घर का पेट भर जाए।
गुंजन: आह जीजा तो निचोड़ लो न और पी लो सारा दूध आह बस अपने गन्ने का रस पिला दो मुझे।
राजन: गन्ना तो तुम्हारे लिए ही तैयार है मेरी रानी आ जाओ चूस लो,
गुंजन ये सुन घूम कर बैठ जाती है और राजन के लंड को कच्छे से बाहर निकाल कर उस पर अपनी जीभ फिराने लगती है तो राजन के मुंह से गरम आहें निकलने लगती हैं।
वहीं राजन की पत्नी ममता भी पीछे नहीं थी बल्कि उनसे एक कदम आगे ही थी, राजपाल ने ममता की साड़ी और ब्लाउज़ को उतार दिया था, उसका पेटीकोट आगे इकट्ठा हो रखा था वहीं राजपाल ने अपना लंड कच्छे को एक ओर कर बाहर निकाल कर पीछे से ममता की चूत में घुसा दिया था और अब उसकी चूचियों को मसलते हुए पीछे से धक्के लगा कर उसे चोद रहे थे

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ममता: ओह ओह ओह भाई साहब ऐसे ही आह बस ऐसे ही चोदते रहो ओह!
राजपाल: ओह आह बहू ओह तेरी चूत आह बहुत मस्त है आह कितनी गरम है आह आह आह।
ममता: आज दिन भर तो सभ्या जीजी को खून चोदा है न आह थक तो नहीं गए,
राजपाल: तुम लोगों को देख कर हो सारी थकान चली जाती है बहू ओह अभी तो बहुत चुदाई करनी है।
ममता: करते रहो भाई साहब ओह लगे रहो आह आह आह।

इधर नीलेश अभी भी रज्जो के होंठों को चूस रहे थे वहीं रज्जो की साड़ी को उठाकर उसके मोटे मोटे चूतड़ों को मसल रहे थे दोनों के होंठ और जीभ एक दूसरे से कुश्ती कर रहे थे,

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कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो नीलेश ने रज्जो की साड़ी पकड़ कर खींच दी और उतार दी,
नीलेश: उतार दो सारे कपड़े रज्जो रानी तुम्हारा बदन देखने दो,
रज्जो: तुम खुद उतार दो न भाई साहब,
नीलेश: ये तो और अच्छा रहेगा,
ये कह कर नीलेश ने रज्जो के सारे कपड़े एक एक करके उतार दिए और रज्जो पूरी नंगी हो गई,
रज्जो: हमें तो नंगा कर दिया खुद कपड़े पहने हो।
नीलेश: लो ये कौन सी बड़ी बात है,
ये कह नीलेश ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी पूरे नंगे हो गए, और फिर रज्जो की मोटी चूचियों को चूसने लगे,
उधर उनकी पत्नी का भी यही हाल था, अपने भाई और दीनू के बीच थी, बदन से ब्लाउज गायब था और साड़ी जांघों के ऊपर इकट्ठी हो रखी थी जहां जमुना उसका भाई उसके होंठों को लगातार चूसते हुए उसकी कमर को मसलते हुए अपने कड़क लंड को कच्छे के ऊपर से ही सभ्या के चूतड़ पर एक ओर से घिस रहा था वहीं दूसरी ओर दीनू अपने घुटनों पर बैठ कर सभ्या के पेट और चूतड़ों को मसलते हुए उसके पेट को चूम रहा था चाट रहा था

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तीनों के मुंह एक दूसरे के साथ व्यस्त थे इसलिए बातें कम हो रही थी और काम ज़्यादा,
दीनू ने फिर सभ्या के पेट को चूमते हुए उसकी साड़ी को भी खोल दिया था और सभ्या को पूरा नंगा कर दिया, वहीं सभ्या भी अपने हाथ अपने भाई के कच्चे में डाल कर उसका लंड निकाल कर सहलाने लगी थी, दीनू ने अपनी जीभ सभ्या की नाभी में डाली तो वो जमुना के मुंह में ही आहें भरने लगी, वहीं जमुना उसकी मोटी चूचियों को लगातार मसल रहा था।
पूरे कमरे में से सिसकियों और थापें गूंज रहीं थी, सब जानते थे ये एक लंबी रात होने वाली थी।
नीलेश के घर में कर्मा के नाना अपनी पोती किरण की गांड के छेद को चाट रहे थे वहीं किरण की चूत से रस टपक रहा था वो अपने चूतड़ों को फैलाते हुए अपने दादा को और अंदर जीभ घुसाने को उकसा रही थी।
किरन: ओह बाबा और अंदर ऐसे ही चलाओ अपनी खुरदरी मोटी जीभ, आह ओह बाबा आह।
दूसरी ओर पल्ली बिरजू से अपनी गांड मरवा रही थी और उसका लंड अपनी गांड में लेकर उछल रही थी,
सरजू भी अपनी सबसे छोटी बहन लाडो की गांड में लंड जड़ तक घुसाए हुए धक्के मार रहा था और लाडो की आहें निकल रही थी।

इधर राजपाल के घर में दृश्य बदल चुके थे और अब चुम्मा चाटी का समय निकल चुका था और अब चुदाई हो रही थी। राजपाल और नीलेश एक दूसरे के बगल में लेट कर चुदाई का आनंद ले रहे थे, वहीं ममता और रज्जो उनके ऊपर बैठ कर उनके लंड अपनी चूत में लेकर उछल रही थीं

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ममता: ओह रज्जो जीजी तुम्हारे ये आह आह तरबूज कितने मस्त लगते हैं उछलते हुए,
ममता ने हाथ बढ़ाकर रज्जो की चूची को पकड़ते हुए कहा।
रज्जो: मस्त तो तुम्हारे भी हैं ममता रानी देखो कैसे झूल रहे हैं।
ममता: पर तुम्हारे जितने बड़े तो नहीं है न।
राजपाल: अरे बहू तुम दोनों भी कहां तुलना करने बैठ गई आह आह तुम दोनों ही एक दम पटाका हो, आह जिसको मिल जाओ उसको धन्य करदो। क्यों नीलेश बाबू।
नीलेश: ओह बिल्कुल सही कहा भैया, ओह रज्जो, ममता तुम दोनों का आह बदन चुदने के लिए बना है असली चुदक्कड़ रंडिया हो तुम दोनों आह।
नीलेश गरम होकर नीचे से धक्का लगाते हुए बोले।
रज्जो: आह आह सही कहा भाई साहब हम सब ओह चुदक्कड़ रंडिया हैं आह तुम्हारे लंड की ओह तुम सब के लंड की आह आह आह चोदो अपनी रंडियों को ऐसे ही।
जहां दोनों अपने चूतड़ों को राजपाल और नीलेश के लंड पर पटक रही थी वहीं नीलेश की पत्नी सभ्या की भी पीछे नहीं थी क्योंकि एक साथ दो दो लंड उसके अंदर घुसे हुए थे

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दीनू उसके पीछे से लेट कर उसकी चूची को थामे अपना लंड उसकी चूत में पेल रहा था वहीं जमुना अपनी बहन के सिर के पीछे था और सभ्या उसका लंड एक हाथ से हिलाते हुए चाट रही थी।
दीनू: ओह मेरी गरम भाभी आह आह आह क्या गरम चूत है तुम्हारी ओह ओह।
जमुना: ओह जीजी ओह ऐसे ही चाटो अपने भाई के लंड को ओह जीजी।
दीनू: आह आह आह आह जमुना तेरी बहन की चूत आह मज़ा आ रहा है ओह तेरी बहन चोद कर।
जमुना: आह जीजा, ऐसी बहन होती ही चोदने के लिए है, आह तुम्हारी तो भाभी है तुम्हारा तो हक बनता है।
दीनू: आह बिल्कुल साले साहब पूरा हक वसूलेंगे भाभी की चूत और आह गांड से आह क्या चुदक्कड़ माल हो तुम भाभी।
जहां जमुना अपनी बहन के साथ व्यस्त था वहीं उसकी पत्नी यानी गुंजन राजन के साथ थी, राजन ने गुंजन को झुका रखा था और पीछे से उसकी कमर को थामे दनादन उसकी चूत में धक्के लगा रहा था,
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राजन: ओह ओह ओह गुंजन आह तेरी ओह चूत ओह ले साली आह आह बहुत गरम है आह आह आह आह।
गुंजन: ओह ओह ओह ओह ओह ओह अब आह आह आह आह जीजा अब ओह रुकना मत आह आह ऐसे ही अब रुकना मत आह नहीं तो गांड फाड़ दूंगी तुम्हारी ओह ऐसे ही चोदते रहो।

पूरे घर में चुदाई का खेल चल रहा था जो अब चोदम पुर की पहचान बन गया था। पूरी रात चुदाई का ये खेल चलता रहा आसन और साथी बदल बदल कर चुदाई चलती रही, चूत गांड मुंह सब चोदे गए, लंड का रस हर छेद में भरा गया, और तब तक ये चुदाई का खेल चलता रहा जब तक सब थक कर सो नहीं गए।


काम भवन में भी यही हुआ हर तरह से चुदाई करने के बाद सब थक कर सो गए थे महिपाल के परिवार को सुबह घर जल्दी पहुंचना था क्योंकि अंजली आने वाली थी, एक अनोखे दिन का अंत करके महिपाल और उसका परिवार भी नींद के साए में चला गया।
एक और दिन का अंत हो चुका था और कल फिर से नया दिन आने वाला था जो और नए किस्से लाने वाला था।



जारी रहेगी।
Jaldi hi hume anjali and family ke sath kamal ki family ka sex dekhne ko milega jabardast updatr tha

1) Mahipal ki family itna khul gey jitna socha nahi tha accha hai beti ki sasural me kaam aeyga .

2)Anuj or kamal ki shadi ek sath karana par dhyan rahe kahi mandap me hi sab shuru na hojay .
बहुत बहुत धन्यवाद भाई, आगे शादी का क्या होगा वो बाद में देखेंगे, पर आप कर्मा को कमल क्यों बुलाते हो।
Sorry its my mistake bhai
 

THARKI BHAI

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Bhai update ek no diya Lakin mujhe aasa lagta hai chodampur me sabki threesome chudai honi chaiye or karma mosi puja me gye vha kya hua ye bhi bta do please bhai abki baar mane apke liye etna bda review diya please mare liye agla update thoda jaldi dena 24 ya 25 me please bhaiya 🙏🙏
 

Hector_789

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Praising your article is equivalent to showing the lamp of the sun, everyone knows that you write the most in this forum, and the way you control this story is unbelievable because despite being so long, there is no shortage anywhere, we sincerely hope that praising your article is equivalent to showing the lamp of the sun, Everyone knows that you write the most in this forum, and the way you control this story is unbelievable because the story is so long and it doesn't work anywhere.
 

Sanju07

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Wah bhai mazaa aa gaya.
प्रीती: वैसे पापा दादी को याद करके जल्दी मत निकालना जैसे भैया को मम्मी को चोदना होता है डेली वैसे मुझे भी तुमसे चुदना होता है,

पूर्वी: अरे हां पति और पिता से एक साथ भी तो चुदना है अभी ननद रानी को।

प्रीती: भाभी। गंदी कहीं की।

प्रीती शर्माते हुए बोली।


अपडेट 254



काम नगर में अनुज और सागर की अच्छी खासी खातिरदारी हो रही थी तो रीता और रवि के काम भवन में भी प्रोग्राम पूरे रंग में था, बस आसन थोड़े बदले हुए थे जोश वैसा ही था, एक ओर महिपाल रीता और सविता एक साथ लगे हुए थे बस फर्क इतना सा था कि महिपाल का लंड अब रीता की चूत की जगह उसकी गरम और कसी हुई गांड में था, रीता सोफे पर उसका आगे घोड़ी बनी हुई थी वहीं रीता का मुंह सामने बैठी सविता की चूचियों के बीच था जिन्हें वो लगातार चूस रही थी, महिपाल का हर धक्का उसे सविता की चूचियों में घुसा रहा था,

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सविता: आह जी कैसी है रीता की गांड कैसा लग रहा है तुम्हें?

सविता ने रीता के सिर पर हाथ फेरते हुए अपने पति से पूछा जो चेहरे पर कामुकता और आनंद के भाव लिए रीता की गांड मार रहा था,

महिपाल: ओह ओह ओह बहुत मज़ा आ रहा है, इसकी गांड तो बिल्कुल मक्खन जैसी है और बहुत कसी हुई भी, ओह आह आह।

सविता: तो और तेज मारो जी, ओह मथ दो इसकी गांड को, अपने लंड से कूटो इसकी गांड के मक्खन को,

सविता ने गरम होते हुए अपनी पति से कहा,

जिसे सुनकर महिपाल के धक्के और तेज हो गए और जोश में आ कर वो उसकी गांड मारने लगे,



वहीं दूसरे बिस्तर पर रानी एक ओर करवट लेकर लेटी थी रवि और पीयूष के बीच जहां पीयूष उसकी टांगों के बीच था और उसकी गांड में लंड चला रहा था वहीं रानी रवि का लंड चूस रही थी, रवि बिस्तर पर लेटा हुआ आहें भर रहा था,

रवि: आह ओह छोटी आह क्या गरम मुंह है तुम्हारा आह क्या चूसती हो अह लगता है जान ही निकाल लोगी।

पीयूष: सही बोला भाई साहब आह आह हम्मम आह मेरी पत्नी जानलेवा है,

पीयूष ने मुस्कुराते हुए रानी की गांड मारते हुए कहा। रानी को उनकी बातों से कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा था उसके बदन में दो लंड घुसे हुए थे जिनका वो लुत्फ उठा रही थी, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक की जगह दो लंड कितना मज़ा देते हैं।

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रवि: ओह छोटू भाई बुरा न मानो तो तुम्हारी पत्नी की जानलेवा गांड का स्वाद मेरे लंड को भी मिल सकता है,

पीयूष: ओह इसमें बुरा मानने जैसा क्या है आओ न,

पीयूष ने अपना लंड रानी की गांड से निकाला और उसकी जगह रवि ने ली और अपना लंड रानी की गांड के खुले छेद पर रखा और अंदर सरका दिया, वहीं पियूष ने अपना लंड रानी के मुंह में दे दिया,

दूसरी ओर महिपाल हर बढ़ते पल के साथ हर धक्के के साथ अपने चरम पर पहुंच रहे थे वहीं रानी की चीखें भी बढ़ती जा रही थीं कुछ तगड़े धक्के मारने के बाद महिपाल ने हुंकार भरते हुए अपना लंड जड़ तक रीता की गांड में ठूंस दिया और दातों को भींचते हुए अपने रस की पिचकारी उसकी गांड में छोड़ने लगे। अपने रस को उसकी गांड में भरने लगे और जब एक एक बूंद निचोड़ दी तो लंड रीता की गांड से निकाला और पीछे की ओर बैठ कर बुरी तरह हांफने लगे, वहीं रीता तुरंत पीछे घूमी और महिपाल के रस से सने लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी चाटने लगी और उसे कुछ ही पलों में चाट कर साफ कर दिया और फिर लंड को मुंह से निकाल दिया, और घूम कर सविता के होंठों को चूसने लगी और उसे उसके पति के रस का स्वाद चखाने लगी।

रवि रानी की गांड मारते हुए आहें भर रहा था और बिल बिला रहा था,

रवि: आह ओह आह आह आह यहम्मम आह छोटी क्या मस्त गांड है तुम्हारी, ओह छोटू आह गजब है तुम्हारी पत्नी आह।

पीयूष: हां आह गजब तो है वैसे तुम्हारी पत्नी भी कम नहीं है देखो उन अंकल का रस निचोड़ लिया पूरा अपनी गांड में और अब भी मन नहीं भरा,

रवि: आह मन उसका नहीं भरता यार, वैसे अंकल को छोड़ो और आंटी को देखो क्या फैली हुई गजब के चूतड़ हैं, आह कितना मज़ा आएगा इनके बीच लंड घुसा कर गांड मारने में।

रवि ने सविता की ओर इशारा करते हुए कहा जो उसकी पत्नी के होंठों को चूसने में व्यस्त थी, वहीं पीयूष मन ही मन सोचने लगा साला मेरी पत्नी की गांड मार रहा है और मेरी मां की गांड मारने की सोच रहा है, पीयूष ने अपनी मां के चूतड़ों की ओर देखते हुए सोचा,

पीयूष: सच में यार हैं तो मस्त।

रवि: वैसे हर लड़का किसी न किसी आंटी को चोदना चाहता है कभी न कभी, ये आंटी वैसी ही है, बड़ी बड़ी चूचियां और फैले हुए चूतड, भरा हुआ बदन। बिल्कुल चोदने लायक बदन है।

रवि अनजाने में पीयूष की मां के बदन की तारीफ कर रहा था उसके बारे में गंदी बातें कर रहा था और ये पीयूष को और उत्तेजित कर रहा था,

उसका लंड रानी के मुंह में ठुमके मार रहा था और रानी अपने पति की हालत समझ रही थी, और कहीं न कहीं उसे अपनी सास के बारे में सुनकर अच्छा भी लग रहा था,

पीयूष: ओह हां बड़ी बड़ी चूचियां, मोटी गांड सब कुछ तराशा हुआ है बिल्कुल चोदने लायक बदन।

पीयूष अपनी मां के बदन को देखते हुए सम्मोहित सा होकर देख रहा था और रवि की बातें उसके दिमाग में घूम रही थी,

रवि: अरे छोटू भाई देख क्या रहा है अभी उनके पति भी झड़ कर आराम कर रहे हैं जा और चोद ले आंटी को, मैं तो छोटी की गांड के बाद ज़रूर चोदूंगा उन्हें।

रवि की बात सुनकर तो पियूष का दिमाग ही घूम गया, वो उसे उसकी मां को चोदने के लिए कह रहा था अनजाने में ही सही, और ये सोच कर पीयूष के बदन में बिजली दौड़ रही थी, उसका रोम रोम उत्तेजना से फड़क रहा था, उसे पता भी नहीं चला कि वो रानी के मुंह से लंड निकाल कर रीता और सविता की ओर चल दिया, सविता और रीता एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगी हुई थी,

पीयूष उनके पास जाकर खड़ा हो गया और उन्हें देखने लगा उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे तभी रानी ने उसे देख और हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़ लिया और उसके लंड को हिलाने लगी, और फिर अचानक से उसे पकड़ कर अपने चेहरे की ओर खींच लिया और अगले ही पल उसका लंड रीता और सविता के होंठों से टकराया, रीता तो तुरंत उसके टोपे को चाटने लगी वहीं सविता ने जैसे ही देखा कि कौन है वो हैरान रह गई उसकी आँखें बड़ी हो गईं, उसके बेटे का लंड उसके होंठों से लग रहा था, उसने तुरंत अपना मुंह पीछे कर लिया और रीता को उसके बेटे के लंड को चाटते हुए चूसते हुए देखने लगी अपनी आंखों से कुछ इंच दूर बस, रीता ने कुछ पल पीयूष का लंड चूसा और फिर मुंह से निकाल कर सविता के होंठों पर लगा दिया, जिसके लगते ही पीयूष और सविता दोनों के बदन में बिजली दौड़ गई,

दोनों पल भर के लिए ज्यों के त्यों रुक गए फिर अपने आप सविता का मुंह खुला और उसने बेटे के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी, पीयूष के मुंह से एक गहरी आह निकली, वज़न रानी अपनी गांड मरवाते हुए इस नज़र को बिना पलक झपकाए देख रही थी, वहीं महिपाल अपनी पत्नी को अपने बेटे का लंड चूसते देख रहा था और उसका लंड तुरंत कड़क हो चुका था,

कुछ पल बाद रीता ने पीयूष का लंड पकड़ कर सविता के मुंह से निकाल लिया और मुस्कुराते हुए बोली: गंदी बात है दीदी जवान लंड मिला तो अकेले ही मजे लेने लगी, बांट कर खाओ।

ये कह कर वो पीयूष के लंड पर जीभ चलाने लगी और सविता भी मुंह आगे कर बेटे का लंड चाटने लगी।

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पीयूष तो जैसे जन्नत में था एक साथ उसके लंड पर दो मुंह चल रहे थे जिनमें से एक उसकी मां का था, उसके मुंह से लगातार आहें निकलने लगी, कुछ देर लंड चूसने के बाद रीता ने सविता को पीछे धकेल दिया और खुद पीयूष का लंड हाथ से सहलाते हुए सविता की चूत पर मुंह रख दिया और चाटने लगी, दोनों मां और बेटे अब रीता नाम की डोर से जुड़े हुए थे पीयूष सोफे के बगल में खड़ा था जिसका लंड रीता के हाथ में था जो बैठी हुई थी सोफे के नीचे उसका मुंह सोफे पर लेटी सविता की जांघों के बीच था और उसकी जीभ सविता की चूत पर चल रही थी, सविता अपनी टांगे फैलाए हुए अपनी चूत रीता से चटवा रही थी पर उसकी आँखें उसके बेटे पर टिकी हुई थीं।

कुछ पल बाद रीता ने अपना मुंह सविता की चूत से हटाया और हटाकर पीयूष के लंड पर रख दिया और उसे चूसने लगी और अपनी उंगलियों से सविता की चूत को रगड़ने लगी,

कुछ देर लंड चूसने के बाद रीता ने फिर से पीयूष का लंड निकाला और इस बार अपना मुंह सविता की चूत पर रखने की बजाय पीयूष का लंड सविता की चूत पर रख दिया और पीयूष को इशारा किया आगे बढ़ने का,

वहीं पीयूष और सविता तो बिल्कुल सुन्न पड़ गए उसके इस कदम से पीयूष का लंड वहीं अपनी मां की चूत के स्पर्श पाकर फुदकने लगा वहीं सविता को लग रहा था उसका पूरा बदन जल रहा है, दोनों की आंखें एक दूसरे पर थी, वहीं महिपाल और रानी की भी जो टक टकी लगा कर उन्हें ही देखे जा रहे थे,

फिर पीयूष को न जाने क्या हुआ उसने अपनी मां की जांघ को पकड़ा और धक्का देकर अपना लंड सविता की चूत में घुसा दिया जिसके साथ ही दोनों की तेज चीख निकल गई, और महिपाल और रानी की आह।

पीयूष धीरे धीरे अपनी कमर हिलाकर अपने लंड को अपनी मां की चूत में चलाने लगा, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वो अपनी मां को चोद रहा था ये तो जो उसने सोचा था जो योजना बनाई थी उससे भी कहीं ज्यादा था पर अपनी मां की गरम चूत का एहसास उसे ऐसा सुख ऐसा मज़ा दे रहा था जो आज तक उसे महसूस नहीं हुआ था। वहीं सविता अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में चलता महसूस कर उत्तेजना से बिलबिलाने लगी उसका बदन मचल रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था ये सब इतना गलत था जो हो रहा था फिर भी इतना अच्छा लग रहा था,

रीता उठ कर सविता के पीछे सोफे पर बैठ गई उसने सविता के सिर को गोद में रख लिया और उसकी मोटी चूचियों को सहलाते हुए उसे चुदते हुए देख रही थी वहीं अब सविता भी खुल कर बेटे से चुदाई का मज़ा ले रही थी।

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महिपाल का लंड ये देख बिल्कुल कड़क हो चुका था उसका बेटा और उसकी पत्नी चुदाई कर रहे थे, और ये किसी के लिए भी देखना बहुत अजीब था, दूसरी ओर रानी तो ये देख झड़ने लगी थी, गांड में रवि का लंड और पति और सास की चुदाई देखने से वो अपने चरम पर पहुंच गई थी और उसके साथ साथ रवि भी उसकी गांड की गर्मी के आगे पिघल चुका था और अपना रस रानी की गांड में भर दिया था, दोनों एक दूसरे के बगल में चिपके हुए हांफ रहे थे,

रीता: कैसी है आंटी की चूत छोटू, मज़ेदार है न?

पीयूष: ओह आह आह हां बहुत मज़ेदार आह कितनी गरम है और गीली भी, ऐसा मज़ा कभी नहीं आया, ओह।

पीयूष ने किसी तरह से खुद को काबू में करते हुए बोला।

रीता: और दीदी तुम्हे कैसा लग रहा है जवान लंड से चुदकर।

रीता ने सविता की चूचियों को मसलते हुए पूछा,

सविता: ओह ओह आह बहुत मज़ा आ रहा हैओह बेटा ऐसे ही चोद अपनी मां आह आह आह मां जैसी आंटी को ओह और तेज भर दे मेरी चूत को अपने लंड से।

सविता उत्तेजना में मचलते हुए बोली, वहीं एक पल को तो पियूष और बाकी सब भी डर गए कि कहीं सविता सच न बोल दे।

पीयूष: ओह हां आह आह आंटी तुम्हारी चूत ओह आह कितनी गरम है मानो लंड निचोड़ रही है.

रीता: बिल्कुल सही कहा दीदी तुम्हारी उमर इसकी दुगुनी ही होगी, छोटू तेरी मां की उमर कितनी है?

रीता ने ये पूछा तो पियूष और सविता दोनों ही थोड़ा हैरान रह गए पर पीयूष ने धक्के लगाते हुए बोला: बिलकुल इन आंटी जितनी ही है आह। बिल्कुल इतनी आह आह आह।

पीयूष अपनी मां की चूत में थापें मारते हुए बोला,

रीता: आह तभी तो इतना मजा आ रहा है तुम्हें छोटू, तुम्हारी मां कैसी है देखने में छोटू आंखें बंद करके सोचो।
पीयूष: क्या मां क्यों?
रीता: सोचो तो सही...
पीयूष मन ही मन सोचने लगा सोचने की क्या जरूरत है मां तो मेरे सामने है मेरा लंड उसकी चूत में है फिर भी रीता की बात मानते हुए बोला: भरा बदन है, बड़ी बड़ी चूचियां हैं, और फैले हुए चूतड हैं,सुंदर चेहरा है।
रीता: ये तो बिल्कुल दीदी जैसी हुई,
पीयूष: मम्मी भी इनके जैसी ही है बिल्कुल।
रीता: ओह छोटू तो सोचो न तुम्हारा लंड तुम्हारी मां की चूत में है, आंटी को अपनी मां ही समझो।
पीयूष: ओह क्या मम्मी? आह पर कैसे?
रीता: अरे बस सोचना ही तो है सोचने में कैसी बंदिशें? क्यों दीदी चुदोगी इसकी मम्मी बनकर.
सविता जो पहले ही बेटे से चुद रही थी क्या बोलती उसने तुरंत हां में सिर हिला दिया,
रीता: छोटू अब चोदो अपनी मम्मी को खुल कर।
पीयूष को तो जैसे छूट मिली तो वो दनादन धक्के लगाने लगा सविता की चूत में,
पीयूष: ओह मम्मी आह ओह बहुत मज़ा आ रहा है तुम्हे चोदने में आह सोचा नहीं था कभी मौका मिलेगा ओह तुम्हारी चूत कितनी गरम है मन करता है चोदता रहूं।
सविता: आह आह आह आह बेटा चोदता रह ओह तेरा लंड भी बहुत सुख दे रहा है मुझे ओह चोद ले बेटा जितना मम्मी को चोदना है उतना चोद ले,
दोनों उत्तेजित होते हुए एक दूसरे की चुदाई में लगे हुए थे अब तो उन्हें मां बेटा बन कर चुदाई करने का मौका भी मिल गया था

इस मां बेटे की चुदाई का सब पर ही असर हो रहा था महिपाल तो लगातार उन्हें देख अपना कड़क लंड सहला रहा था, दूसरी ओर रानी अपने पति और सास की चुदाई देख और रवि से गांड मरवा रही थी और उसकी उत्तेजना चरम पर का जा रही थी, वहीं मां बेटे की चुदाई का रोलप्ले देख रवि भी खुद को रोक नहीं पाया बाकी का काम रानी की गांड ने कर दिया और रवि उसकी गांड में झड़ने लगा एक के बाद एक पिचकारी उसकी गांड में भरने लगा,
इधर जैसे ही झड़ने के बाद रवि ने रानी की गांड से लंड निकाला तो रानी तुरंत फुर्ती में उठ कर उसके पास से भागी, और उसने कुछ ऐसा किया जिससे सब हैरान हो गए, रानी सीधी अपने ससुर के आगे झुकी और उसका लंड अपने मुंह में लेकर पागलों की तरह चूसने लगी, महिपाल ये देख बिल्कुल हैरान रह गया अपनी बहू के मुंह में अपना लंड देख उसका पूरा बदन उत्तेजना में जल उठा वहीं रानी तो सब कुछ भूल कर उसका लंड ऐसे चूस रही थी मानो कब से भूखी हो, कुछ पल तो महिपाल स्तब्ध सा ही रहा फिर मानो धीरे धीरे से उसका दिमाग जो हो रहा था उसे समझा तो उसके हाथ रानी के सिर पर आ गए और उसे धीरे धीरे सहलाने लगे,

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उसका मुंह आहें भरने के लिए खुलने लगा, उसने सिर उठाया तो उसकी नज़र बेटे से मिली जो उसकी पत्नी को चोदते हुए उसे ही देख रहा था, और कुछ पल बाद दोनों के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई, ये सफलता की मुस्कान थी, जो योजना उन दोनों ने मिलकर बनाई थी वो सफल हो गई थी और जो उन्होंने सोचा था उससे ज़्यादा उन्हें मिल गया था, दोनों जानते थे कि उनका जीवन अब पूरी तरह बदल चुका था, पीयूष ने सिर हिलाकर उसे आगे बढ़ने का इशारा किया तो उसने भी अपनी आंखों से उसे आगे बढ़ने का इशारा किया, और फिर दोनों ही अपने अपने काम में लग गए,

रीता और रवि अपनी अपनी जगह बैठे हुए दोनों जोड़ों की चुदाई देख रहे थे, पीयूष के लिए अपनी मां की चूत में धक्के लगाना बहुत उत्तेजित कर रहा था हर पल के साथ उसका पूरा बदन सिहर रहा था उसे लग रहा था मानो उसकी सारी ऊर्जा इकट्ठा होकर उसके लंड में भर रही है और फिर उसके धक्के बहुत तगड़े हो गए, इतनी तेज कि सविता की चीखें निकलने लगी और फिर पियूष ने अपना रस अपनी मां की चूत में आहें भरते हुए गुर्राते हुए छोड़ दिया, सविता भी बेटे की दमदार चुदाई के आगे टिक नहीं पाई और झड़ने लगी। दोनों मां बेटे एक सतझड़ गए।
पीयूष के झड़ने के साथ ही रीता अपनी जगह से उठी और उसने सविता की चूत से पीयूष के लंड को निकाला और चूसने लगी, उसका रस चाट कर साफ करने लगी, पीयूष का लंड अभी भी पूरी तरह कड़क था शायद मां को चोदने का खयाल झड़ने के बाद भी उसे उत्तेजित कर रहा था,
सविता उसी तरह लेटी हुई हांफ रही थी और जो कुछ हुआ उसके बारे में सोच रही थी कि तभी उसे अपनी गांड के छेद पर गरम एहसास हुआ, उसने तुरंत आंख खोल कर देखा तो रीता पीयूष के लंड को उसकी गांड के छेद पर घिस रही थी,
रीता मुस्कुराई और कहा: दीदी इसका लंड तो अभी भी खड़ा है तुम्हारे दूसरे छेद की भी सैर करवा दें?
सविता ने ये सुन उसे देखा और फिर पीयूष को और फिर अपनी जांघें और फैला दी,
सविता: बेटा अपनी मां की गांड मारेगा?
पीयूष: हां मम्मी तुम्हारी कसी हुई गांड मारने को कब से तड़प रहा हूं,
रीता: अब आए हो तुम लोग पूरे रोल में। चल छोटू घुसा दे अपना मोटा लंड अपनी मां की गांड में और अच्छे से मार।
पीयूष ने भी ऐसा ही किया और धक्का लगा कर अपना लंड अपनी मां की गांड में घुसा दिया जिसके घुसते ही दोनों के मुंह से आह निकल गई, फिर धीरे धीरे पीयूष लंड को अंदर बाहर करने लगा, वहीं रीता फिर से सविता के सिर की ओर बैठ गई और उसके होंठों को चूसने लगी,

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वहीं पीयूष अपनी मां की गांड में लंड चलाते हुए उसकी खुली चूत को फैला फैला कर देखने लगा जिसे कुछ देर पहले उसने चोदा था, सविता अपनी गांड में बेटे का लंड चलता देख सिहर रही थी और आहें भर रही थी,
पीयूष: ओह मम्मी कितनी गरम है तुम्हारी गांड आह और कितनी कसी हुई भी ऐसा लग रहा है मेरे लंड को जकड़े हुए है।

सविता: आह बेटा तेरा लंड इतना मोटा है आह आह मेरी गांड को फैला रहा है ओह और अंदर तक घुसा मुझे तेरा लंड पूरा अपने अंदर महसूस करना है।
रीता: ओह तुम्हारी बाते सुन कर मेरा बुरा हाल हो रहा है आह ऐसे ही गांड मार अपनी मां की छोटू।
रीता अपनी चूत में उंगली करते हुए बोली, कि तभी उसे अपने कंधे पर हाथ महसूस हुआ उसने देखा वो रवि का था, जो अपना खड़ा लंड लेकर खड़ा था,
रवि: ये लोग तो व्यस्त हैं अपने पति का भी तो खयाल रखो,
रीता: नेकी और पूछ पूछ, पर तुम्हे भी मेरी गांड ही मारनी पड़ेगी
ये कह रीता तुरंत ही सविता और पीयूष के बगल में घोड़ी बन गई।
रवि: नेकी और पूछ पूछ। कहते हुए रवि ने अपना लंड अपनी पत्नी की गांड में घुसा दिया और उसकी गांड मारने लगा।
रवि: ओह तो कैसी लगी आंटी की गांड मेरा मतलब तुम्हारी मां की गांड?
रवि ने मुस्कुराते हुए पीयूष से पूछा जो सविता की गांड में लंड अंदर बाहर कर रहा था,
पीयूष: सच कहूं तो ऐसा कभी महसूस नहीं किया आह बहुत मज़ा आ रहा है।
रवि: इसी मज़े के लिए तो हम ये सब करते हैं छोटू,
रवि ने रीता की गांड मारते हुए कहा,
रीता: तुम लोगो की बातें हो गईं हो तो काम पर ध्यान दो।
रीता की डांट सुन दोनों मुस्कुराते हुए चुप हो गए और चुदाई पर लग गये।
तभी दूसरी ओर से आहें तेज हो गई दोनो ने ही बिस्तर की ओर देखा तो पाया कि रानी बिस्तर पर लेटी थी और महिपाल उसकी टांगों के बीच था और दनादन अपना लंड अपनी बहू की चूत में चला रहा था,

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रानी का मुंह खुला हुआ था और लगातार आहें और सिसकियां निकल रही थी, उसका पूरा बदन अपने ससुर के झटकों से झूल रहा था मचल रहा था
रानी: आह आह आह आह पापा जी ओह ऐसे ही चोदो अपनी बहू को ओह ओह ओह।
महिपाल: ओह हां बेटा आह आह आह तेरी गरम चूत मुझे रुकने नहीं देगी।
रानी: रुकना नहीं पापा जी बस चोदते रहो ओह ओह ओह चोदते रहो,

उनकी बातें सुन रीता गांड मरवाते बोली: लगता है छोटी की भी अंदर की इच्छाएं जाग रही हैं।
रवि: सही है न रोलप्ले का असली मज़ा भी यही है, अब छोटू अपनी मां को चोद रहा है तो छोटी भी ससुर से चुदेगी ही ना।
पीयूष: मुझे लगता है तुम दोनों को भी हमारा कुछ बनना चाहिए?
रीता: पर क्या छोटू तुम ही बताओ?
रानी: तुम लोग मेरे मम्मी पापा बन जाओ।
रानी दूर से ही चिल्लाते हुए बोली और ये सुन रवि और रीता के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
रीता: आह देखो जी हमारी बेटी कैसे अपने ससुर से चुदवा रही है कितनी चुदक्कड़ है।
रवि: बिल्कुल अपनी मां पर गई है न, अभी कुछ देर पहले अपना बाप से गांड मरवाई और अब ससुर से चुदवा रही है।
रीता: बिल्कुल, वैसे कम तो समधन तुम भी नहीं हो अपने ही बेटे से गांड मरवा ली।
सविता: अब अपनी समधन की बराबरी तो करनी पड़ेगी ही न चुदने में, इसके लिए चाहे बेटे से चुदना पड़े या बाप से सबसे चुदुंगी।
एक तो बेटे से गांड मरवाने का सुख ऊपर से ऐसी गंदी बातें सुनकर सविता को भी मज़ा आ रहा था और वो भी पूरा खुलकर सबका साथ दे रही थी।
महिपाल अपनी पत्नी और बेटे की चुदाई देखते हुए अपनी बहू को चोद रहे थे और सोच रहे थे कि एक दिन में उनका परिवार कितना बदल गया है, और अभी तो बस शुरुआत थी।



दूसरी ओर काम नगर में भी चुदाई का खेल जोरों पर था पूरे घर में सिसकियों और थापें गूंज रही थीं, अनुज बिस्तर पर लेटा था और रेनू उसके ऊपर थी अनु का लंड रेनू की गांड में था और अनुज रेनू की मोटी चूचियों को मसलते हुए नीचे से ज़ोरदार धक्के उसकी गांड में लगा रहा था

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जिन धक्कों से रेनू का पूरा बदन अंदर तक हिल रहा था, इस गांड फाड़ चुदाई से उसे बहुत मज़ा आ रहा था
रेनू: आह आह आह आह आह अनुज आह ऐसा लग रहा है गांड में आग लग रही है ओह।
अनुज: ओह चाची आह तुम्हारी गांड में ही आग है जिसे मैं अपने पानी से बुझाऊंगा ओह ओह बस ऐसे ही रहो।

पूर्वी: ओह ओह देख ओह प्रीती तेरा क्या ओह होगा जब ओह मम्मी जी अनुज का लंड ओह नहीं झेल पा रही तो।
पूर्वी ने कहा जो खुद अभी दो लंड के बीच पिस रही थी, अपने पति और ससुर के बीच।
प्रीती: ओह भाभी ओह तुम अभी अपनी गांड और चूत पर ध्यान दो, आह आह पापा भैया अच्छे से चोदो भाभी को कि ये चलने लायक न रह जाए,
सागर: अरे भाभी तुम भी मुझ पर ध्यान लगाओ न पूर्वी दीदी को छोड़ो,
सागर ने प्रीती को चोदते हुए उसकी चूचियों को मसलते हुए कहा,
प्रीती: धत्त अभी से मुझे भाभी मत बुलाओ सागर, ओह ओह आह आराम से ओह।
सागर: फिर क्या बुलाऊं? ओह भाभी ओह।
प्रीती: छोड़ो ओह जो मन करे बुलाओ बस ऐसे ही करते रहो।
पूर्वी: ओह आह हम्मम अच्छे से चोद सागर मेरी चुदक्कड़ ननद रानी को, दिखा इसे की देवर में कितना दम है, ओह ओह।
पूर्वी अपनी चूत अपने ससुर और गांड अपने पति से कुटवाते हुए बोली।
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प्रकाश: इन ननद भाभी की छेड़छाड़ कभी नहीं रुकती।
पंकज: रुकनी भी नहीं पापा माहौल बना रहता है।
रेनू: सही कहा बेटा आह आह ये अपनों की छेड़छाड़ ही तो परिवार को बनाती है
रेनू ने अनुज के लंड से गांड मरवाते हुए कहा, माहौल देख कर लग रहा था कि ये दौर लंबा चलने वाला था।


चोदम पुर में सूरज ढल रहा था, लोग अपने घरों की ओर लौट रहे थे नीलेश के बाग में भी मज़दूर जा चुके थे वहीं नीलेश, नाना, राजन और जमुना(मामा) बैठ कर बातें कर रहे थे आगे का काम कैसे होगा उसकी योजना बना रहे थे, इसी बीच राजपाल और दीनू भी वहां पहुंच गए थे, राजपाल के चेहरे पर आज सभ्या को भोगने की खुशी अलग ही दिख रही थी,
नीलेश: आओ भैया, कहो जोड़ी कहां घूम रही है,
राजन: जरूर कोई चक्कर है।
दीनू: अरे कोई चक्कर नहीं है भैया बस तुमसे ही बात करने आए थे काम की।
नीलेश: हां बोलो न?
दीनू: आज राजपाल भाई साहब का घर खाली है,
जमुना: तो?
दीनू: तो आगे खुद समझ जाओ,
दीनू ने नाना को देख नज़रें नीचे कर के बोला,
नाना: अरे बाबू हमसे क्या लजा रहे हो, खुल कर बोलो।
राजन: अरे हम पहले ही समझ गए थे बाबा क्या बात है तभी तो बोला कोई न कोई चक्कर है।
राजपाल: तो फिर बनाया जाए क्या कहते हो नीलेश?
नीलेश: ठीक है बनाते हैं क्यों बाबा?
नाना: नहीं भैया तुम लोग ही बनाओ पिछली बार छोटी और बड़ी दोनों ने खूब सुनाया था।
राजन: थोड़ा भी नहीं?
नाना: अरे नहीं तुम लोग मजे करो,
राजन: ठीक है फिर बनाते हैं पर याद रखना बिना चूत के दारु का मज़ा नहीं है।
नीलेश: देख लेंगे, ऐसा करो तब तक समान लेने चले जाओ दो आदमी।
राजपाल: हां जमुना और दीनू ले आयेंगे।
योजना बना कर सब निकल जाते हैं करीब तीन घंटे बाद राजपाल के घर पर सब बैठे हैं बीच में दारू है और खूब हंसी मज़ाक के साथ दारू पी जा रही है, राजपाल, नीलेश, दीनू, राजन और जमुना सब हाथ में गिलास लिए दारू का लुत्फ़ उठा रहे हैं, तभी उन्हें आवाज सुनाई देती है और उनका ध्यान उधर जाता है। सामने देखते हैं तो उनकी पत्नियां थीं सिवाय राजपाल की पत्नी को छोड़ कर यानी सभ्या, ममता, रज्जो और गुंजन।

रज्जो: क्यों जी हमें इंतजार करवा कर कब तक दारू पियोगे तुम लोग।
गुंजन: हां अगर और पीनी है तो बताओ हम चले जाते हैं।
सभ्या: और क्या अगर दारू से रात काटनी है तो हमें क्यों लेकर आए।
नीलेश: अरे बस एक एक जाम और फिर आते हैं।
ममता: हर बार यही होता है भैया, चलो हम कमरे में चलते हैं।
दारू खत्म होने के बाद आ मत जाना।
राजन: नहीं नहीं मेरी जान ऐसा नहीं है लो छोड़ दी दारू, आ गए तुम्हारे पास, तुम्हारे बिना तो सारे नशे फीके हैं।
राजन ने उठते हुए कहा तो बाकी सारे मर्द भी उठ कर चल दिए,
आज की योजना यही थी सब मर्द अपनी अपनी पत्नियों को लाए थे सिवाय राजपाल के, नीलेश के घर पर नाना और किरन थे तो राजन के घर को बिरजू और पल्ली देख रहे थे वहीं सरजू के घर पर लाडो और सरजू थे। वहीं राजपाल के घर में एक लंबी चलने वाली रात शुरू हो चुकी थी,

राजन सबसे पहले आगे बढ़ा, उसकी आंखों में शराब की नशा और कामुकता का मिश्रण था। वो सीधा अपनी पत्नी ममता की तरफ बढ़ा, लेकिन रास्ते में गुंजन से टकरा गया। गुंजन ने हंसते हुए उसका हाथ पकड़ लिया और बोली, "जीजा, इतनी जल्दी क्या है जीजी के पल्लू में घुसने की आओ मैं दूदू पिला दूं।"
राजन: अरे गुंजन तुम्हारा तो दूदू क्या सब पी लेंगे हम, आओ न।
ये कहते हुए राजन ने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और चूसने लगे, गुंजन को उसके होंठों से दारू का स्वाद आ रहा था पर कामुकता का असर दारू के नशे से ज्यादा था,

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राजन के हाथ लगातार गुंजन की कमर और पेट पर चल रहे थे, दोनों के होंठ लगातार एक दूसरे के होंठो को समाने की कोशिश कर रहे थे,
राजन: ओह गुंजन तुम्हारे होंठो में तो दारू की बोतल से ज़्यादा नशा है।
राजन ने उसके होंठो को छोड़ते हुए कहा,
गुंजन: तो दारू की जगह इन्हें ही चूस लिया करो जीजा, क्यों मुई दारू के पीछे लगे रहते हो।
राजन: अब से नहीं छोड़ेंगे सलहज रानी,
ये कह राजन ने दोबारा उसके होंठो को भर लिया और चूसने लगा।
उधर, ममता ने अपने पति को गुंजन के साथ देखा तो वो राजपाल जो कुर्सी पर बैठे थे उनकी ओर बढ़ गई,
ममता: भाई साहब अकेला तो महसूस नहीं हो रहा जीजी के बिना?
ममता ने राजपाल की नंगी छाती पर हाथ फिराते हुए कहा,
राजपाल: तुम लोगो के रहते हम कभी अकेले नहीं हो सकते बहू,
राजपाल ने हाथ बढ़ा कर ममता की कमर को सहलाते हुए कहा,
ममता: अच्छा हम या दारू?
राजपाल: अरे तुम लोगो की जगह दारू क्या कोई चीज नहीं ले सकती।
ये कहते हुए राजपाल ने ममता को अपने करीब खींच लिया और फिर दोनों के होंठ मिल गए। राजपाल ममता के होंठों का रस चूसने लगा।

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राजपाल के हाथ अभी भी लगातार ममता की पीठ और कमर पर चल रहे थे और बीच बीच में नीचे उसके चूतड़ों को भी सहला रहे थे।
इधर नीलेश जो अब तक खाली थे उनके पास रज्जो पहुंच गई, और बोली: क्यों भाई साहब ऐसे अकेले क्यों खड़े हो, अपनी साली की याद आ रही है क्या?
नीलेश: तुम्हारे रहते किसी की याद आ सकती है क्या रज्जो रानी?
रज्जो: हां तभी तो हमारे रहते भी दारू को तो नहीं भूलते।
नीलेश: अरे दारू का क्या है अभी पिए और मूत दिए तुम लोग तो हमारी जान हो।
नीलेश ने नशे के सुरूर में कहा,
रज्जो: ये भी लगता है दारू ही बोल रही है,
नीलेश: अरे छोड़ो तुम दारू को आओ अपना रस पिलाओ,
ये कहकर नीलेश ने रज्जो को खुद से चिपका लिया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और चूसने लगा,
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रज्जो भी उसका पूरा साथ दे रही थी, नीलेश के हाथ रज्जो के भरे और कामुक बदन पर फिसल रहे थे,

जहां रज्जो नीलेश के साथ थी तो उसके पति कैसे पीछे रहते वो नीलेश की पत्नी के साथ हो लिए और अभी उसकी कमर को मसल रहे थे
दीनू: ओह भाभी कितना मखमली बदन है तुम्हारा आह मन करता है खा ही जाऊं।
सभ्या: यहम्मम ये सब तुम नशे में ही बोल पाते हो दीनू भैया, वैसे कभी नहीं होती ऐसी बातें।
दीनू: नशे में तो हैं भाभी पर दारू के नहीं तुम्हारे इस कामुक बदन के नशे में हैं, आह इसका रस इतना नशीला है।
सभ्या: बस बस अब और रहने दो इतनी तारीफ बहुत है।
सभ्या ने हंसते हुए कहा पर उसकी हंसी आधी में ही रुक गई क्योंकि दीनू ने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया, और उसकी चूचियों को मसलने लगा,
कुछ देर तक होंठो को चूसने के बाद दीनू ने उसके होंठों को छोड़ा और उसकी एक चूची को ब्लाउज़ से बाहर निकाल लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा, इतने में जमुना भी उनके पास आ गया और अपनी बहन के चेहरे को अपनी ओर घुमा कर उसके होंठों को चूसने लगा

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चोदम पुर की एक और कामुक रात की शुरुआत हो चुकी थी, राजपाल के घर में जहां ये सब इकट्ठे हो कर मजे कर रहे थे तो बाकी लोग भी पीछे नहीं थे, सभ्या नीलेश के यहां किरन अपने दादा का लंड चूस रही थी बिल्कुल नंगी हो कर वहीं कर्मा के नाना अपनी नानी के बदन को सहलाते हुए उसका मुंह अपने लंड पर चलता हुआ महसूस कर सिहर रहे थे,
राजन के घर में बिरजू और पल्लू भी लगे हुए थे, पल्ली बिस्तर के किनारे झुकी हुई थी तो बिरजू उसके पीछे था उसके चूतड़ों को फैलाकर उसकी गांड के छेद पर अपनी जीभ चला रहा था और पल्लू उसकी हरकतों से सिहर रही थी।
वहीं रज्जो और दीनू के घर में सरजू और लाडो थे, जहां सरजू अपने बड़े भाई होने का पूरा फर्ज निभा रहा था और अपनी छोटी बहन की चूत में अपना लंड डाल कर सफाई कर रहा था।


दूसरी ओर काम भवन में अब भी घमासान मचा हुआ था अब जब रिश्तों की मर्यादा तार तार हो चुकी थी, शर्म का पर्दा हट चुका था और इन सब की जगह वासना ने ले ली थी, सविता अभी रवि के लंड को अपनी गांड में लेकर धीरे धीरे उछल रही थी वहीं उसकी चूत पर रीता की जीभ चल रही थी, रीता के पीछे पीयूष था जो रीता की गांड में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था

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सविता: ओह ओह ओह आह आह तुम दोनों आह एक साथ बहुत मज़ा आ रहा है, आह
रीता: अपनी समधन की सेवा तो करनी पड़ेगी न, तभी तो बेटी खुश रहेगी,
रीता ने रोलप्ले को जारी रखते हुए बोला।
सविता: ओह समधन जी ओह आह कितना अच्छा जीभ चलाती हो तुम, ओह और समधी जी का लंड भी कितना मोटा है।
पीयूष: ओह अच्छी और कसी हुई तो सासु मां तुम्हारी गांड भी है ओह कितनी गरम है, आह आह आह आह मज़ा आ रहा है।
पियूष रीता की गांड में पीछे से धक्के लगाते हुए बोला,
रीता: आह तुम्हारी सास चुदक्कड़ है जमाई बाबू, ओह मज़ा तो आएगा ही, अपनी बेटी को भी अपनी ही तरह चुदक्कड़ बना के भेजा है।
ये सुन कर महिपाल बोले: आह तभी तो बेटी भी अपने ससुर की आह आह इतने अच्छे से सेवा कर रही है ओह बहू तेरी गांड आह आज तक ऐसा कभी नहीं महसूस किया जैसा तेरी गांड करा रही है।
महिपाल रानी की गांड मारते हुए बोले, रानी बिस्तर पर लेटी थी अपनी टांगे को फैलाकर और पीछे की ओर पकड़ कर और महिपाल उसकी टांगों के बीच थे और अपना लंड उसकी गांड में चला रहे थे,

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रानी: आह आह पापाजी, ऐसे ही मारो अपनी बहू की गांड आह अपनी पत्नी और बेटे के सामने आह भर दो मेरी गांड।
महिपाल: ओह बहू आह हां अब नहीं रोक पाऊंगा खुद को आह तेरी गांड।
रानी: ओह आह आह आह आह पापा जी ओह जी देखो कैसे तुम्हारे पापा मेरी गांड मार रहे हैं, तुम्हारी बीवी की गांड आह आह ।
रानी गरम होते हुए बोल रही थी,
पीयूष: आह आह वो तुम्हारी गांड मार रहे हैं आह और मैं तुम्हारी मां की और तुम्हारे पापा मेरी मां की आह।
सविता: आह आह आह ऐसे ही तो परिवार को सब एक दूसरे आह आह की सेवा कर मिल जुल ओहम कर रहते हैं।
रवि: बिल्कुल सही कहा समधन जी।
रवि नीचे से धक्के लगाते हुए बोला सविता की गांड में। पीयूष कमरे में देखते हुए सोच रहा था कि एक दिन में कितना कुछ बदल सकता है।


काम नगर में भी चुदाई अपने चरम पर थी, और अभी दोहरी चुदाई का दौर चल रहा था, पूर्वी पहले ही अपने पति और ससुर से एक साथ चुद कर झड़ चुकी थी और अभी एक ओर बैठे खुद के बदन को सहलाते हुए कमरे में चल रहे खेल को देख रही थी, जहां एक ओर प्रीती थी जो अपने पापा के लंड पर सवार थी और पीछे से उसकी गांड में उसके भैया का लंड घुसा हुआ था, वहीं उसके बगल में उसकी मां रेनू थी जो अनुज के लंड पर सवार थी और सागर का लंड उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था,
दोनों मां बेटी की एक साथ दोहरी चुदाई हो रही थी और पूरा कमरा ही उनकी आहों और थापो से गूंज रहा था,
मर्द भी अपने चरम पर ही थे और कुछ पल बाद ही अपने अपने रस को छेदों में भर रहे थे, प्रीती अपने बाप और भाई का रस अपनी चूत और गांड में लेकर वैसे ही लेट गई और वहीं सो गई वहीं रेनू भी अपने रस से भरे छेदों के साथ सागर और अनुज को अपने सीने से लिपटा कर सो गई, पूर्वी भी अपने पति के बगल में लेट गई क्योंकि अब और कुछ करने की हिम्मत किसी में नहीं थी सब बुरी तरह थक चुके थे।

जहां काम नगर में सब थके हुए थे चोदम पुर में तो अभी खेल शुरू हुआ था, दारू का नशा मर्दों को और उत्तेजित कर रहा था और वो औरतों के बदन से खुल कर खेल रहे थे,
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राजन ने गुंजन के कपड़ों को उतार दिया था और अभी उसके बदन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी थी वहीं राजन के बदन पर भी सिर्फ उसका कच्छा बचा था, राजन गुंजन के पेट और मोटी चूचियों को मसल रहा था वहीं कच्छे में खड़ा उसका लंड गुंजन के मोटे चूतड़ों के बीच में चुभ रहा था जिससे गुंजन की आह निकल रही थी।
राजन: ओह गुंजन मेरी दुधारू गाय, इतनी मोटी चूचियों से तो पूरे घर का पेट भर जाए।
गुंजन: आह जीजा तो निचोड़ लो न और पी लो सारा दूध आह बस अपने गन्ने का रस पिला दो मुझे।
राजन: गन्ना तो तुम्हारे लिए ही तैयार है मेरी रानी आ जाओ चूस लो,
गुंजन ये सुन घूम कर बैठ जाती है और राजन के लंड को कच्छे से बाहर निकाल कर उस पर अपनी जीभ फिराने लगती है तो राजन के मुंह से गरम आहें निकलने लगती हैं।
वहीं राजन की पत्नी ममता भी पीछे नहीं थी बल्कि उनसे एक कदम आगे ही थी, राजपाल ने ममता की साड़ी और ब्लाउज़ को उतार दिया था, उसका पेटीकोट आगे इकट्ठा हो रखा था वहीं राजपाल ने अपना लंड कच्छे को एक ओर कर बाहर निकाल कर पीछे से ममता की चूत में घुसा दिया था और अब उसकी चूचियों को मसलते हुए पीछे से धक्के लगा कर उसे चोद रहे थे

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ममता: ओह ओह ओह भाई साहब ऐसे ही आह बस ऐसे ही चोदते रहो ओह!
राजपाल: ओह आह बहू ओह तेरी चूत आह बहुत मस्त है आह कितनी गरम है आह आह आह।
ममता: आज दिन भर तो सभ्या जीजी को खून चोदा है न आह थक तो नहीं गए,
राजपाल: तुम लोगों को देख कर हो सारी थकान चली जाती है बहू ओह अभी तो बहुत चुदाई करनी है।
ममता: करते रहो भाई साहब ओह लगे रहो आह आह आह।

इधर नीलेश अभी भी रज्जो के होंठों को चूस रहे थे वहीं रज्जो की साड़ी को उठाकर उसके मोटे मोटे चूतड़ों को मसल रहे थे दोनों के होंठ और जीभ एक दूसरे से कुश्ती कर रहे थे,

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कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो नीलेश ने रज्जो की साड़ी पकड़ कर खींच दी और उतार दी,
नीलेश: उतार दो सारे कपड़े रज्जो रानी तुम्हारा बदन देखने दो,
रज्जो: तुम खुद उतार दो न भाई साहब,
नीलेश: ये तो और अच्छा रहेगा,
ये कह कर नीलेश ने रज्जो के सारे कपड़े एक एक करके उतार दिए और रज्जो पूरी नंगी हो गई,
रज्जो: हमें तो नंगा कर दिया खुद कपड़े पहने हो।
नीलेश: लो ये कौन सी बड़ी बात है,
ये कह नीलेश ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी पूरे नंगे हो गए, और फिर रज्जो की मोटी चूचियों को चूसने लगे,
उधर उनकी पत्नी का भी यही हाल था, अपने भाई और दीनू के बीच थी, बदन से ब्लाउज गायब था और साड़ी जांघों के ऊपर इकट्ठी हो रखी थी जहां जमुना उसका भाई उसके होंठों को लगातार चूसते हुए उसकी कमर को मसलते हुए अपने कड़क लंड को कच्छे के ऊपर से ही सभ्या के चूतड़ पर एक ओर से घिस रहा था वहीं दूसरी ओर दीनू अपने घुटनों पर बैठ कर सभ्या के पेट और चूतड़ों को मसलते हुए उसके पेट को चूम रहा था चाट रहा था

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तीनों के मुंह एक दूसरे के साथ व्यस्त थे इसलिए बातें कम हो रही थी और काम ज़्यादा,
दीनू ने फिर सभ्या के पेट को चूमते हुए उसकी साड़ी को भी खोल दिया था और सभ्या को पूरा नंगा कर दिया, वहीं सभ्या भी अपने हाथ अपने भाई के कच्चे में डाल कर उसका लंड निकाल कर सहलाने लगी थी, दीनू ने अपनी जीभ सभ्या की नाभी में डाली तो वो जमुना के मुंह में ही आहें भरने लगी, वहीं जमुना उसकी मोटी चूचियों को लगातार मसल रहा था।
पूरे कमरे में से सिसकियों और थापें गूंज रहीं थी, सब जानते थे ये एक लंबी रात होने वाली थी।
नीलेश के घर में कर्मा के नाना अपनी पोती किरण की गांड के छेद को चाट रहे थे वहीं किरण की चूत से रस टपक रहा था वो अपने चूतड़ों को फैलाते हुए अपने दादा को और अंदर जीभ घुसाने को उकसा रही थी।
किरन: ओह बाबा और अंदर ऐसे ही चलाओ अपनी खुरदरी मोटी जीभ, आह ओह बाबा आह।
दूसरी ओर पल्ली बिरजू से अपनी गांड मरवा रही थी और उसका लंड अपनी गांड में लेकर उछल रही थी,
सरजू भी अपनी सबसे छोटी बहन लाडो की गांड में लंड जड़ तक घुसाए हुए धक्के मार रहा था और लाडो की आहें निकल रही थी।

इधर राजपाल के घर में दृश्य बदल चुके थे और अब चुम्मा चाटी का समय निकल चुका था और अब चुदाई हो रही थी। राजपाल और नीलेश एक दूसरे के बगल में लेट कर चुदाई का आनंद ले रहे थे, वहीं ममता और रज्जो उनके ऊपर बैठ कर उनके लंड अपनी चूत में लेकर उछल रही थीं

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ममता: ओह रज्जो जीजी तुम्हारे ये आह आह तरबूज कितने मस्त लगते हैं उछलते हुए,
ममता ने हाथ बढ़ाकर रज्जो की चूची को पकड़ते हुए कहा।
रज्जो: मस्त तो तुम्हारे भी हैं ममता रानी देखो कैसे झूल रहे हैं।
ममता: पर तुम्हारे जितने बड़े तो नहीं है न।
राजपाल: अरे बहू तुम दोनों भी कहां तुलना करने बैठ गई आह आह तुम दोनों ही एक दम पटाका हो, आह जिसको मिल जाओ उसको धन्य करदो। क्यों नीलेश बाबू।
नीलेश: ओह बिल्कुल सही कहा भैया, ओह रज्जो, ममता तुम दोनों का आह बदन चुदने के लिए बना है असली चुदक्कड़ रंडिया हो तुम दोनों आह।
नीलेश गरम होकर नीचे से धक्का लगाते हुए बोले।
रज्जो: आह आह सही कहा भाई साहब हम सब ओह चुदक्कड़ रंडिया हैं आह तुम्हारे लंड की ओह तुम सब के लंड की आह आह आह चोदो अपनी रंडियों को ऐसे ही।
जहां दोनों अपने चूतड़ों को राजपाल और नीलेश के लंड पर पटक रही थी वहीं नीलेश की पत्नी सभ्या की भी पीछे नहीं थी क्योंकि एक साथ दो दो लंड उसके अंदर घुसे हुए थे

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दीनू उसके पीछे से लेट कर उसकी चूची को थामे अपना लंड उसकी चूत में पेल रहा था वहीं जमुना अपनी बहन के सिर के पीछे था और सभ्या उसका लंड एक हाथ से हिलाते हुए चाट रही थी।
दीनू: ओह मेरी गरम भाभी आह आह आह क्या गरम चूत है तुम्हारी ओह ओह।
जमुना: ओह जीजी ओह ऐसे ही चाटो अपने भाई के लंड को ओह जीजी।
दीनू: आह आह आह आह जमुना तेरी बहन की चूत आह मज़ा आ रहा है ओह तेरी बहन चोद कर।
जमुना: आह जीजा, ऐसी बहन होती ही चोदने के लिए है, आह तुम्हारी तो भाभी है तुम्हारा तो हक बनता है।
दीनू: आह बिल्कुल साले साहब पूरा हक वसूलेंगे भाभी की चूत और आह गांड से आह क्या चुदक्कड़ माल हो तुम भाभी।
जहां जमुना अपनी बहन के साथ व्यस्त था वहीं उसकी पत्नी यानी गुंजन राजन के साथ थी, राजन ने गुंजन को झुका रखा था और पीछे से उसकी कमर को थामे दनादन उसकी चूत में धक्के लगा रहा था,
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राजन: ओह ओह ओह गुंजन आह तेरी ओह चूत ओह ले साली आह आह बहुत गरम है आह आह आह आह।
गुंजन: ओह ओह ओह ओह ओह ओह अब आह आह आह आह जीजा अब ओह रुकना मत आह आह ऐसे ही अब रुकना मत आह नहीं तो गांड फाड़ दूंगी तुम्हारी ओह ऐसे ही चोदते रहो।

पूरे घर में चुदाई का खेल चल रहा था जो अब चोदम पुर की पहचान बन गया था। पूरी रात चुदाई का ये खेल चलता रहा आसन और साथी बदल बदल कर चुदाई चलती रही, चूत गांड मुंह सब चोदे गए, लंड का रस हर छेद में भरा गया, और तब तक ये चुदाई का खेल चलता रहा जब तक सब थक कर सो नहीं गए।


काम भवन में भी यही हुआ हर तरह से चुदाई करने के बाद सब थक कर सो गए थे महिपाल के परिवार को सुबह घर जल्दी पहुंचना था क्योंकि अंजली आने वाली थी, एक अनोखे दिन का अंत करके महिपाल और उसका परिवार भी नींद के साए में चला गया।
एक और दिन का अंत हो चुका था और कल फिर से नया दिन आने वाला था जो और नए किस्से लाने वाला था।



जारी रहेगी।
Waah bhai mazaa aa gaya.akhirkar kaam bhawan me maa ne bete se aur bahu ne sasur se chudai kar hi dali.sath hi ek nayi sambhavna b bani jo ki rani k maa baap ki chudai me shamil hone ki.dekhte h kya wo b is family ki tarah hi kuch karte h aapas me.intezar h rani k maayke ki family ka.baki chodampur me to mast mahol hamesha ki tarah bana hi h. asha karta hu waha b kuch naye mehman kisi k mayke se aayenge aur kuch naye samikaran bane. Kaamnagar me b family maze le rhi h.tharkipo bhai tumhare jaisi stories maine kabhi nhi padhi jabki main internet pe pichle 20 sal se stories padh rha hu.tumhari writing aur narration superb h dear
 

Mbra

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This episode is packed with highly sensual dialogues and appearances.
Finally hum anjali ki family ka family sex dekh paye. piyush aur savitri ke batoon mein chudai ki bukh samajik rishto se pare bete ke lund ko maa k choot ke muhane pe lake khara kar diya hain ki kaamlipt chudai ko dekhke bahu khud ko rok nahi pati sasur ke lund ko chusne se.
 
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