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।।बहुत बहुत धन्यवाद।।
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AchhaHaan tharkipo Bhai continue krona please
Bhai 30 likes se jyada ho gaye h.kb tak update ki aasha kareअपडेट नंबर 259 पोस्ट कर दी है पढ़ कर रिव्यू ज़रूर करें, लाइक और रिव्यू कम नहीं होने चाहिए। और जब तक 30 लाइक्स नहीं होते अपडेट लिखना शुरू नहीं होगा।
भाई एक साथ 2- 3 अप डेट दिया करो यार एक पेज पढ़ने के बाद दिमाग खराब हो जाता हे कहानी मस्त हे आप की पर अपडेट देरी से आ रहा हे । अगर आप सही तरीके से समय पर अपडेट करेंगे तो आप को रिव्यू ओर लाइक अच्छे प्राप्त होगे ।अपडेट 259करीब एक घंटा बीत चुका था, और हवा में अभी भी वह कामुक उन्माद की महक तैर रही थी—पसीने, रस और नंगी देहों की मिली-जुली खुशबू। कुछ ने हल्के-फुल्के कपड़े पहन लिए थे, जबकि बाकी अब भी पूरी तरह नंगे पड़े थे, बेफिक्र और संतुष्ट। पहले महिपाल और उसके परिवार ने अपने गुप्त राजों को खोलकर रख दिया था, फिर नीलेश और उसके कुनबे ने। बातें इतनी गहराई से निकलीं कि हवा में एक नई तरह की अंतरंगता घुल गई। जब नीलेश ने अपनी कहानी पूरी की, तो महिपाल और उसके घरवालों के चेहरे पर हैरानी की लकीरें साफ नजर आ रही थीं—मुंह खुले, आंखें फैली हुईं।
महिपाल ने गहरी सांस ली, फिर मुस्कुराते हुए बोला, "नीलेश भाई, हम तो यही सोच रहे थे कि हम काफी आगे निकल चुके हैं, लेकिन अब पता चला कि आप तो हमसे कोसों आगे हैं।"
नीलेश ने हंसकर कंधे उचकाए, "अरे नहीं, भाई साहब। अब सब खुल ही गया है, तो सब साथ हैं। कोई आगे-पीछे नहीं।"
महिपाल ने सिर हिलाया, "ये भी बात सही कही आपने। वैसे, चोदमपुर में लोग इतने खुले होंगे, यह सोचा नहीं था।"
शालू ने बीच में टोकते हुए कहा, "अरे, सब नहीं खुले हैं भैया। बस हमारे कुछ परिवार ही।"
महिपाल ने आंखें सिकोड़ीं, "इतना भी काफी है, वैसे। बस अब तो हम सब भी तुम्हारे साथ जुड़ गए हैं।"
शैलेश ने मुस्कुराते हुए जोड़ा, "अरे बिल्कुल, जुड़ना तो है ही—रिश्तेदार जो बनने वाले हैं।"
यह सुनते ही महिपाल और पीयूष दोनों ने एक साथ हैरानी से पूछा, "रिश्तेदार? मतलब?"
रानी ने शरारती अंदाज में हंसते हुए कहा, "मतलब नहीं समझे, पापाजी? समधी बनने वाले हो तुम चाचाजी के?"
महिपाल थोड़ा असमंजस में पड़ गया, उसका चेहरा सवालों से भर गया। लेकिन पीयूष तुरंत समझ गया—उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। सविता और बाकी सब मुस्कुरा रहे थे, जैसे कोई पुराना राज अब जाहिर होने वाला हो।
पीयूष ने उत्सुकता से पूछा, "क्या सच में?"
रानी ने सिर हिलाया, "हां, तुम्हारी बहन का चक्कर चल रहा है कर्मा से।"
महिपाल ने भौंहें चढ़ाईं, "अरे, ये कब हुआ? ये सब तुम्हें कब से पता है? तुम भी जानती हो क्या?" उसने सविता की ओर देखकर पूछा।
सविता ने शांत मुस्कान के साथ कहा, "पक्का तो नहीं था, पर हां, शक पूरा था।"
सभ्या ने आगे बढ़कर बात संभाली, "शक सही था। और सच कहूं तो अंजली बिटिया तो मुझे भी बहुत पसंद है—बहुत प्यारी है। मैंने सोच लिया है, वही मेरे घर की बहू बनेगी। तुम लोग क्या कहते हो, भाई साहब और बहन जी?"
अचानक सभ्या के इस सवाल से महिपाल, जो पहले ही थोड़ा हैरान था, अब गहरी सोच में डूब गया। उसकी आंखें सवालों से भरी हुईं थीं।
पीयूष ने चिंता जताते हुए कहा, "वो सब तो ठीक है चाची, पर जिस तरह के परिवार हैं हमारे, वो रह पाएगी? और कहीं उसे सच्चाई पता चल गई तो?"
महिपाल ने सहमति में सिर हिलाया, "हां, बिल्कुल सही। यही मैं सोच रहा था। हमें तो एक हफ्ता हुआ है उससे छुपाते हुए, और बड़ी मुश्किल होती है। पर तुम लोग पूरी जिंदगी कैसे छुपा पाओगे?"
इस पर सभ्या मुस्कुराई, और बोली, "छुपाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। वो आप लोगों से पहले ही सब जानती है। कर्मा उससे प्यार करता है, और इसीलिए उसने सबसे पहले ये सच उसे बताया था।"
महिपाल की आंखें और फैल गईं, "क्या सच में?"
शालू: कर्मा उनके रिश्ते की शुरुआत झूठ से या कुछ छिपाकर नहीं करना चाहता था।
पीयूष ने हैरानी से कहा, "इतना बड़ा सच बता दिया? हिम्मत तो है कर्मा में। मैं तो कभी ऐसी बात नहीं बता पाता।"
सविता ने सहमति में कहा, "सच में, ये बात तो है। आसान नहीं होता ऐसा सच बोलना।"
महिपाल ने पूछा, "तो क्या अंजली को इस सब से कोई परेशानी नहीं है? मतलब, वो राजी है ये सब जानने के बाद भी?"
शैलेश ने शरारती अंदाज में हंसते हुए कहा, "वैसे, अगर अपनी होने वाली सास की चूत और गांड चाटते हुए होने वाले पति से चुदना अगर राजी होना होता है, तो फिर वो राजी है।"
यह सुनकर महिपाल और उसका परिवार सन्न रह गया—चेहरों पर हैरानी की लहर दौड़ गई।
महिपाल ने अविश्वास में पूछा, "ये कब हुआ? क्या ये सच है?"
शैलेश ने सभ्या की ओर देखकर कहा, "क्यों भाभी, सच है या नहीं?"
सभ्या मुस्कुराई और बोली, "सच है, और आज ही हुआ है। उसने मेरी और कर्मा की एक साथ सेवा की। इसीलिए तो थक कर जल्दी सो गई।"
सविता ने हंसते हुए कहा, "हाय दइया, इस लड़की ने तो हमें भी पीछे छोड़ दिया।"
महिपाल ने सिर पकड़ लिया, "मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा। एक साथ इतना कुछ पता चल रहा है।"
नीलेश ने हल्के से हंसते हुए कहा,
"अरे कुछ ज्यादा समझने की जरूरत नहीं। बस इतना बता दो—हमारे समधी बनने को तैयार हो न? बाकी सब हम संभाल लेंगे।"
महिपाल ने एक बार अपनी पत्नी, बेटे और बहू की तरफ देखा। फिर बड़ी मुस्कान के साथ बोला,
"बिल्कुल तैयार हूं, समधी जी।"
वो नीलेश के गले लगने के लिए आगे बढ़ा, तो नीलेश ने हंसकर रोका,
"अरे महिपाल भाई, समधी भले ही बन जाओ, लेकिन नंगे मर्द से गले नहीं मिलेंगे।"
यह सुनकर सब जोर से हंसने लगे।
सभ्या ने आगे बढ़ते हुए कहा,
"तुम मर्द मिलो या न मिलो, हम समधन तो मिलेंगी न बहन जी?"
सविता भी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ी।
कुछ पल बाद ही दोनों गले लग रहीं थी दोनों की नंगी चूचियां आपस में दब गईं,
सभ्या: बहुत बहुत बधाई हो समधन जी।
सभ्या ने सविता के चूतड़ों को मसलते हुए कहा,
सविता: तुम्हे भी मेरी प्यारी समधन,
सविता ने भी सभ्या के चूचों पर अपने पंजे गड़ा दिए,
शालू: ये क्या बस सूखी सूखी बधाई, कुछ मीठा भी होना चाहिए।
सविता: लो अभी लो मीठा,
ये कह सविता अपने होंठों को सभ्या के होंठो से जोड़ देती है और सभ्या भी तुरंत अपने होंठ खोल कर सविता के होंठों को चूसने लगती है,दोनों कामुक और गदराई समधन एक दूसरे के होंठों को चूस रही थी और दोनों को देख सब खुश थे मुस्कुरा रहे थे,
कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो दोनों के ही चेहरों पर कामुक और बड़ी मुस्कान थी, सविता झुकी और झुक कर सभ्या के चूचों पर टूट पड़ी और बारी बारी से दोनों को चूसने लगी, सभ्या आहें भरने लगी,
महिपाल: आह मेरा तो सारी बातों से ही बुरा हाल हो गया था ऊपर से ये देख कर तो अब रुका नहीं जा रहा।
महिपाल ने अपने लंड को मुठियाते हुए कहा,
पीयूष: मेरा भी यही हाल है पापा,
शैलेश: हाल सबका यही है तो रुके क्यों हो शुरू हो जाओ सब।
नीलेश: और क्या।
महिपाल: अरे समधन जी सारी खुशी सिर्फ समधन के साथ ही मना लोगी या समधी से भी मिलेगी?
महिपाल ने सभ्या की ओर देखते हुए कहा,
सभ्या: बिल्कुल मिलेंगे समधी से भी मिलेंगे, पर क्या करें समधन ही इतनी अच्छी सेवा कर रही है कि छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा,
सभ्या ने सविता के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा जो उसकी चूचियों को चूस रही थी,
महिपाल: अरे हम उससे भी अच्छी करेंगे आओ तो सही भाभी।
सविता ने सभ्या की चूची को मुंह से निकाला और बोली: जाओ पहले इन्हीं से मिल लो बहुत तड़प रहे हैं समधन से मिलने के लिए।
सभ्या मुस्कुराते हुए महिपाल की ओर बढ़ गई, वहीं सविता नीलेश की तरफ चल दी।
सभ्या महिपाल के पास गई जो बिस्तर पर पैर लटका कर नंगा बैठा था, सभ्या उसके सामने अपने घुटनों पर नीचे ही बैठ गई और उसके कड़क लंड को हाथों में लेकर मुठियाने लगी,
सभ्या: आह समधी जी ये इतना कड़क क्यों कर रखा है?
महिपाल सभ्या के हाथ को अपने लंड पर महसूस कर सिहर उठा और बोला: ये तुम्हारी वजह से ही है समधन आह तुम्हे देख कर ही तड़प रहा है ये,
सभ्या: अच्छा हमारी वजह से, तो फिर इसकी तड़प भी हमें ही मिटानी पड़ेगी,
सभ्या ने मुस्कुराते हुए कहा और उसके लंड के टोपे को जीभ से चाट लिया, महिपाल सभ्या के चाटने से बिल्कुल सिहर गया। वहीं सविता भी अपने समधी नीलेश के सामने पहुंच चुकी थी
नीलेश: आ जाओ समधन आज ये सुख भी भोग कर देख लें,
नीलेश ने सविता को अपने आप चिपका कर कहा,
उधर पीयूष भी उठ कर शालू के पास पहुंच गया था और सीधा उसकी चूचियों पर जाकर मुंह लगा दिया।
शालू: ओह तू तो बड़ा बेसब्र हो रहा है बेटा,
अपने पति को शालू के पास देख रानी भी अपनी चूचियों को सहलाते हुए उठी और शैलेश के पास पहुंच गई,
रानी: मैं तुम्हारी कुछ सेवा करूं मौसा जी?
शैलेश: बिल्कुल बहू तेरी सेवा के लिए ही तो हम यहां हैं।
रानी शैलेश के सामने घुटनों पर बैठ गई और शैलेश के कड़क लंबे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी और फिर उसे अपने मुंह में भर लिया
शैलेश: आह बहू ओह इतना गरम है तेरा मुंह आह ओह।
शैलेश रानी के मुंह का एहसास अपने लंड पर पाकर तड़पने लगे वहीं रानी भी अपना मुंह दबा कर शैलेश के लंड को अधिक से अधिक अपने मुंह में भरने की कोशिश कर रही थी।
रानी के बदन पर सिर्फ उसकी ब्रा थी जिसमें से उसकी चूचियां बाहर झूल रही थीं जिन्हें शैलेश हाथ बढ़ा कर मसलने लगे थे,
शैलेश: आह बहू तू पूरी की पूरी मलाई है आह क्या बदन है तेरा,
रानी कुछ बोली नहीं पर उसका जवाब वो अपनी प्रतिक्रिया से दे रही थी,
पूरे कमरे में लंड चुसाई का दौर चल रहा था और नीलेश और सविता भी इस दौड़ में पीछे नहीं थे, नीलेश भी खड़े हो कर अपने सामने घुटनों पर बैठी अपनी समधन के मुंह में अपना लंबा लंड घुसाने का भरसक प्रयास कर रहे थे सविता के सिर को अपने लंड पर दबाते हुए।
सविता की हालत खराब थी आंखों से आंसू बह रहे थे नीलेश का लंड गले तक टकरा रहा था पर तकलीफ़ के बाद भी सविता अपने समधी की सेवा मे कोई कमी नहीं छोड़ रही थी, उसकी नंगी चूचियां झूल रही थी
नीलेश: ओह आह समधन आह पूरा भर लो अपने मुंह में आह अब तो रिश्तेदार बन गए हैं, आह आना जाना लगा रहेगा,
सविता: हां बिल्कुल ओह भाई साहब आह गुच्च।
सविता ने लंड मुंह निकाल कर बोला और फिर बापिस मुंह में भर लिया,
इधर तभी पीछे से शालू की आह निकली क्योंकि पीयूष जो पहले से ही काफी उत्तेजना में था और थोड़ा सा बेसब्र भी हो रहा था उसने तो शालू को बिस्तर पर घोड़ी बना दिया था और अपना मोटा लंबा लंड पीछे से शालू की चूत में घुसा दिया था और उसकी कमर को थामे अपना लंड शालू की चूत में पेलने लगा था,
शालू: आह आह आह आह बेटा आह ओह ऐसे ही चोद मौसी को ओह आह घुसा दे आह अपना हथियार मौसी की चूत में।
पीयूष: आह आह मौसीईईई ओह क्या चूत है तुम्हारी आह ओह बहुत मज़ा आ रहा है अब नहीं रुक पाऊंगा आह।
शालू: ओह बेटा मत रुक आह चोद जितना मन करे उतना चोद आह आह आह मत रुक।
पीयूष: आह मौसी अब चाह कर भी नहीं रुक पाऊंगा आह आह आह ओह आह।
अब बेटा चालू हो चुका था तो बाप भी पीछे नहीं था पर पीयूष के विपरीत महिपाल थोड़ा धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था, हर पल सभ्या के कामुक और मादक बदन का लुत्फ उठाते हुए आगे बढ़ रहा था, सभ्या के मुंह से महिपाल ने अपना लंड निकाला और सभ्या को उठाया और बिस्तर पर लिटा लिया और फिर खुद उसके ऊपर आ गया, सभ्या ने भी अपनी टांगें अपने होने वाले समधी के लिए फैला दीं, महिपाल में अपना कड़क लंड सभ्या की चूत के ऊपर रखा और फिर आगे होकर सभ्या के होंठो से अपने होंठ मिला दिए,
सभ्या भी तुरंत उसका साथ देने लगी, और दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे, साथ ही अपने आप महिपाल की कमर भी चलने लगी और उसका लंड सभ्या की चूत में समा गया, दोनों के मुंह से ही आह निकली जो एक दूसरे के मुंह में ही घुट गई,
सभ्या के होंठो को चूसते हुए महिपाल धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और सभ्या की गरम चूत में अपना लंड जड़ तक घुसा कर उसे चोदने लगा, धीरे धीरे उसकी गति बढ़ती जा रही थी पर उसके होंठ सभ्या के होंठो से लगातार जुड़े हुए थे। पर उसका लंड लगातार सभ्या की चूत में गड्ढा कर रहा था
जहां महिपाल अपनी समधन के साथ धीरे धीरे से और बड़े ही कामुक तरीके चुदाई कर रहा था वहीं उनके समधी यानि नीलेश सिंह अपने चिर परिचित अंदाज़ में अपनी समधन यानी सविता की धुंआधार चुदाई कर रहे थे,
सविता भी बिस्तर पर टेक लगाए लेटी थी, उसकी टांगें फैली हुई थी या यूं कहें कि नीलेश ने उन्हें पीछे की ओर ही मोड़ रखा था और उसकी टांगों के नीचे बैठ कर उसकी चूत में तूफानी रफ़्तार से लंड पेल रहे थे, सविता का पूरा बदन पसीने से तर था और लगातार उसके मुंह से आहें और सिसकारियां निकल रही थीं।
सविता: आह आह आह ओह मां आह समधी जी आह आज तो जान आह लेकर ही ओह मानोगे क्या आह आह।
नीलेश: आह ओह भाभी जी जान आह तो नहीं आह तुम्हारी गरम चूत ओह और कसी हुई गांड लेकर आह ज़रूर मानेंगे।
शैलेश: आह भैया तुम आह सब मत ले आह लेना हमारे लिए ओह भी छोड़ देना आह समधन को ओह,
शैलेश ने रानी को उसके ऊपर लेटकर चोदते हुए सिर उठाकर कहा,
रानी: ओह मौसा जी ओह पहले आह मुझे तो आह अच्छे से चोद लो ओह मम्मी जी आह कहां भागी जा रही हैं
रानी ने भी शैलेश के लंड पर अपनी चूत को कसते हुए कहा,
शैलेश: बिल्कुल बहू आह तुझे चोदे बिना आह तो मैं हिलने वाला आह भी नहीं हूं, आह।
रानी: ओह मौसा जी मैं जाने भी नहीं दूंगी आह बहुत मज़ा दे रहा है तुम्हारा मोटा लंड आह आह ऐसे ही,
रानी ने अपने हाथों को शैलेश की पीठ पर कसते हुए कहा, शैलेश भी कमर घुमा घुमा कर रानी की चूत में जड़ तक लंड घुसा कर चोद रहे थे।
रानी: आह मौसा लगता है तुम्हारा लंड सीधा बच्चेदानी में ही टक्कर मार रहा है,
शैलेश: बहू वो तो पता नहीं पर आह तेरी चूत आह बहुत गरम है लग रहा है लंड अंदर ही पिघला लेगी।
रानी: आह मौसा जी आह यहम्मम चोदते रहो ओह ऐसे ही
पूरे कमरे में चुदाई का तूफान एक बार फिर से चल पड़ा था, चारों ओर से आहें और सिसकियों की आवाज़ गूंज रही थी, दोनों परिवार होने वाले रिश्ते की शुरुआत के लिए एक नए तरह का जश्न मना रहे थे शायद ही इस तरह से कहीं कोई रिश्ता पक्का होता होगा पर ये ही तो खासियत थी चोदम पुर के लोगों की, इनका हर काम थोड़ा हटके ही होता था, दोनों होने वाले समधी अपनी अपनी भावी समधन के साथ लगे हुए थे और पारिवारिक मेल जोड़ बढ़ा रहे थे इसी कड़ी में शैलेश, शालू, पीयूष और रानी भी लगे हुए थे, इधर पीयूष जो शालू को लगातार तेज़ी से चोद रहा था उसे अपना रस अपने लंड में भरता हुआ महसूस हुआ और उसकी आहें निकलने लगी, शालू ने भी ये महसूस किया और तुरंत आगे हो गई और उसका लंड अपनी चूत से निकाल दिया,
पीयूष: अरे आह क्या हुआ मौसी?
पियूष ने हैरानी से हांफते हुए पूछा,
शालू: तेरा होने वाला था ना, थोड़ा आराम कर अभी तो और काफी देर करना है।
शालू ने गर्दन घुमा कर उसे बोला,
पीयूष: ये भी सही कहा मौसी तुमने, खुद को रोकना भी सीखना होगा मुझे।
ये कहते हुए पीयूष पीछे होकर बैठ गया और हांफने लगा,
शालू: बिल्कुल, इन्हें और जीजा को देख ये भी यही करते हैं, तभी तो लम्बी चुदाई का मज़ा मिलता है।
शालू ने नीलेश और शैलेश की ओर इशारा करके कहा और फिर खुद भी उठ कर अपने पति और रानी के पास चल दी, जहां शैलेश रानी को घोड़ी बना कर चोद रहे थे,
शालू भी रानी के नीचे जा कर लेट गई और उसकी चूचियों को चूमने खुशी वहीं रानी भी शालू की चूचियों को मसलने लगी, शालू साथ में खुद की भी चूत में उंगलियां अंदर बाहर कर रही थी,
शालू: तेरे पति को तो थका दिया मैने बहू, मेरे पति के साथ मज़ा आ रहा है?
रानी: आह आह ओह हां मौसी आह बहुत मज़ा आह मौसा का लंड आह अंदर तक मार रहा है। आह मैं आने वाली हूं,
शालू: आह बहुरिया खुल कर झड़ आह ले अपनी चूत में इनका मोटा लंबा लोड़ा आह, क्यों जी कैसी है बहुरिया की चूत मस्त है न?
शालू ने अपने पति से पूछा जो कि रानी को चोदने में व्यस्त थे,
शैलेश: आह पूछो मत आह यार बहुत गरम है और कसी हुई भी आह बड़ा मज़ा दे रही है आह आह आह आह।
शालू: तो और कुछ आह तगड़े धक्के लगाओ बहू झड़ने की कगार पर है उसे भी आनंद आने दो।
शैलेश ने ये सुना और रानी की कमर को थाम कर तूफानी धक्के लगाने लगे और कुछ पल बाद ही रानी का मुंह खुला का खुला रह गया और उसका बदन अकड़ने लगा कमर झटके खाने लगी और वो झड़ने लगी, झड़ते हुए वो आगे बिस्तर पर गिर गई और वैसे ही लेट कर हांफने लागू, शैलेश का लंड उसकी चूत से निकल गया, जिसे शालू उठकर तुरंत ही चूसने लगी।
रानी तो नीचे बेसुध सी हो कर लेट गई थी वहीं शालू अपने पति का लंड मस्ती में चूस रही थी, शैलेश भी रानी की चुदाई से थोड़ा आराम मिला तो अपनी पत्नी के गरम मुंह का आनंद लेने लगे,
इतने में पीयूष भी अपनी जगह से उठा और शालू के पीछे आ गया और अपने लंड को शालू के चूतड़ों में घिसने लगा,
पीयूष: मौसी तुम्हारे चूतड़ों को देख कर और रुका नहीं गया, आह क्या मस्त चूतड हैं तुम्हारी पत्नी के मौसा।
शैलेश: जानता हूं पीयूष, वैसे तेरी पत्नी भी कम नहीं है, एक दम चुदक्कड़ बहू है।
पीयूष: तुम्हे पसंद आई मौसा?
शैलेश: अरे ऐसी बहू पसंद नहीं आएगी तो कैसी आएगी? और तू क्या बातों में लगा है घुसा दे अपनी मौसी में लोड़ा और मिल कर चोदते हैं।
पीयूष ये सुन मुस्कुराया और फिर अपना लंड शालू की चूत में घुसा दिया, शालू दो तरफ से चुदने लगी मुंह में पति का लंड था तो चूत में पीयूष का,
दूसरी ओर नीलेश ने अपनी होने वाली समधन को आज अच्छे से भोगने का मन बना रखा था और उसी को जारी रखते हुए सविता को बुरी तरह चोद रहे थे, सविता के मुंह से अब तो आहें भी लगातार निकल रही थी, नीलेश ने सविता को बिस्तर पर टांगें ऊपर कर के मोड रखा था और उसके ऊपर आ कर बेदर्दी से तूफानी धक्के लगा रहे थे।
सविता: ओह आह आह आह आह आह आह आह मां मर गई आईईईई आह आह आरा आह आराम से ओह ओह ओह ओह मैं गईइई, पीयूष के पापाआअह देखो। आह पीयूष ओह आह आह आह देख तेरी आह आह मां चुद गई आह आह आह आह।
सविता चुदते हुए उत्तेजना में लगातार बढ़ बड़ा रही थी।
नीलेश: आह आह आह ओह ओह समधन आह साली कुतिया बना कर आह चोदूंगा तुझे आह आह आह रंडी है तू मेरी आह आह आह बोल क्या है तू।
सविता: ओह आह आह रंडीईईई हूं तुम्हारी आह आह मेरे आह राजा आआह। ओह ओह ओह गई मैं आह।
इतनी भयंकर चुदाई के सामने सविता टिक नहीं पाई और झड़ने लगी उसका बदन पहले तो अकड़ा और फिर ढीला पड़ गया, सविता के ढीले पड़ने पर नीलेश ने उसे छोड़ दिया और खुद भी एक ओर बैठ कर सांसें भरने लगे और बाकी लोगों की चुदाई देखने लगे, एक ओर सोफे पर शैलेश बैठे थे और शालू झुक कर उनका लंड चूस रही थी वहीं पीयूष शालू के पीछे था और उसकी कमर को थाम कर अपना लंड उसकी चूत में पेल रहा था,
पीयूष: आह आह आह सच में मौसी आह आह आह बहुत मज़ा आ रहा है ओह मुझे तो तुमसे प्यार हो गया आह आह मौसी।
शैलेश: ओ लल्ला चोद भले ही कितना लो पर प्यार व्यार मत करो यार, कहीं ये भी तुम्हारे प्यार में पड़ गईं तो हम तो रंडवा हो जाएंगे यार,
शैलेश ने मजाक करते हुए कहा, तो सब हंसने लगे,
पीयूष: अरे नहीं मौसा जी ऐसा नहीं है।
शैलेश: ऐसा ही है बेटा इस उमर में हम से कोई ब्याह भी नहीं करेगा।
इस पर शालू ने उनका लंड मुंह से निकाला और बोली: नई समधन से कर लेना, समधन के बाद जोरू भी बन जायेंगी।
शालू ने मज़ाक को आगे बढ़ाया,
सभ्या: तो फिर पीयूष तू भैया को मौसा नहीं पापा बुलाएगा।
सभ्या ने महिपाल के लंड पर उछलते हुए कहा, महिपाल नीचे पैर लटका कर बैठा था और सभ्या उसका लंड चूत में लेकर उछल रही थी,
महिपाल: अरे ऐसा न करो यार आह आह हमारा घर काहे उजाड़ रहे हो,
महिपाल ने सभ्या की चूत में धक्के लगाते हुए कहा, उन्हें देख कर नीलेश भी उठे और उनकी ओर चल दिए और जाकर दोनों के बगल में खड़े हो गए और अपना लंड सभ्या के मुंह के सामने कर दिया जिसे तुरंत सभ्या मुंह में भर के चोदने लगी।
महिपाल को थोड़ा अजीब भी लग रहा था और उत्तेजित भी हो रहा था कि वो नीलेश के साथ मिलकर उसकी पत्नी को चोद रहा है।
महिपाल: आह आह भाई साहब आह ओह कैसी लगी नई समधन ओह आह।
नीलेश: बहुत भरी हुई और मस्त तुम्हे कैसी लग रही है ?
महिपाल: आह यार क्या बताऊं आह रुकने का मन नहीं हो रहा आह मन कर रहा है ये चुदाई आह जीवन भर खत्म न हो।
नीलेश: अरे जीवन में और भी बहुत मौके आयेंगे अभी के पल का मज़ा लो,
महिपाल: आह भाभी का बदन ही ऐसा है कि बिना मज़ा लिए रहा ही नहीं जाएगा।
नीलेश: ओह ये तो बिल्कुल सही कहा तुमने आह समधी जी, हमारी पत्नी का जवाब नहीं।
महिपाल: आह भाभी थोड़ी देर उठ जाओ आह नहीं तो मेरा निकल जाएगा, आह और मैं और देर चोदना चाहता हूं तुम्हें।
महिपाल ने अपनी उत्तेजना महसूस करते हुए कहा,
नीलेश: अरे ये भी ठीक है आह आओ तब तक तुम्हारी चूत को हम चोद लें,
नीलेश ने सभ्या से कहा और उसे उठा कर घोड़ी बना लिया और पीछे से उसकी चूत में लंड घुसा कर चोदने लगे
सभ्या भी आगे को झुक कर महिपाल के लंड को पकड़ कर उसे सहलाने लगी,
महिपाल: आह आप भाभी आह आराम से।
सभ्या: चिंता मत करो भाई साहब नहीं निकलेगा आह लंड संभालने का अच्छा अनुभव है मुझे।
सभ्या ने मुस्कुराते हुए कहा,
नीलेश: सही कह रही है ये महिपाल भाई ओह हमारा तो न जाने कब से संभाल रही है।
दूसरी ओर रानी अब उठ कर बैठ चुकी थीं और थोड़ी तरोताजा लग रही थी कुछ देर के आराम के बाद, ये शैलेश ने देखा तो शालू के सामने से उठ कर उसकी ओर चल दिए,
शैलेश: आराम कर लिया न बहू?
रानी उनकी ओर देख मुस्कुराई और बोली: फिर से थकाने आए हो मौसा जी?
शैलेश: अब इसके अलावा और काम ही क्या है मेरा, आ जा थोड़ा आगे होकर लेट,
शैलेश ने उसे बिस्तर के किनारे लिटाया और खुद उसके पैरों के बीच बैठ गए और फिर उसके पैरों को मोड़ कर पीछे की ओर फैलाया जिससे उसके चूतड खुल कर उसके सामने आ गए, शैलेश ने अपना मुंह रानी की गांड के छेद पर लगा दिया और जीभ निकाल कर उसे चाटने लगे, रानी अपनी गांड के छेद पर शैलेश की खुरदरी जीभ को महसूस कर सिहरन लगी,
रानी: ओह मौसा जी आह क्या कर आह रहे हो ओह।
शैलेश अपनी जीभ से रानी की गांड में रास्ता बनाने लगे और उसमें थूक भरने लगे, रानी लगातार अपनी चूचियों को मसलते हुए आहें भर रही थी। जब शैलेश को लगा रानी की गांड का छेद अच्छे से चिकना जो चुका है तो वो उठे और अपने लंड को पकड़ कर उसके मोटे फैले हुए टोपे को रानी की गांड के छेद पर लगाया, रानी समझ तो गई क्या होने वाला है इसलिए खुद को तैयार करते हुए बोली: मौसा जी आराम से डालना।
शैलेश: चिंता मत कर बहू तुझे तकलीफ नहीं होने दूंगा,
ये कहते हुए शैलेश ने हल्का धक्का मारा और लंड का टोपा रानी की गांड को फैलाते हुए उसमें फंस गया जिससे रानी की एक और आह निकल गई, शैलेश ने कुछ पल बाद ही धक्का लगाकर अपना और लंड अंदर सरका दिया और रानी आहें भरने लगी और कुछ पल बाद ही शैलेश धीरे और लंबे धक्के लगा कर रानी की गांड में लंड अंदर बाहर कर रहे थे।
रानी गरम होते हुए अपनी चूचियों को मसल रही थी
शैलेश: आह बहू ओह मुझे तो आह लगा आह था कि तेरी चूत ही गरम है आह पर तेरी गांड तो उससे भी ज़्यादा गरम और आह मखमली है आह,
रानी: मौसा जी तुम्हारा लंड ओह गांड को पूरा आह भर रहा है आह मौसा जी
शैलेश आह तेरी गांड आह बहुत तंग है बहू आह लगता है लंड को पकड़ रही है, आह बहुत मज़ा आ रहा है।
शैलेश ने रानी की गांड में लंड चलाते हुए कहा, और धीरे धीरे गति बढ़ाने लगे,
दूसरी तरफ रानी का पति शैलेश की पत्नी को पूरे जोश से चोद रहा था अब वो उस उत्तेजना के वेग में था कि चाह कर भी रुक नहीं पा रहा था वहीं उसके झटके शालू को भी उसके चरम की नदी में धकेल रहे थे, कुछ देर बाद दोनों के मुंह से ही एक आह निकली और दोनों ही हांफते हुए गुर्राते हुए सिसकियां भरते हुए झड़ने लगे, पीयूष ने अपना रस शालू की गर्म चूत में भर दिया वहीं शालू भी झड़ने के बाद आराम से लेट गई पीयूष भी उसके बगल में लेट गया, और आंखे बंद करके हांफने लगा।
दूसरी ओर नीलेश ने सभ्या को अपने ऊपर बिठा लिया था और सभ्या भी अपनी गांड में अपने पति का लंड लेकर उनके ऊपर धीरे धीरे उछल रही थी,
महिपाल उनसे थोड़ा दूर बैठ कर अपने आप को थोड़ा शांत कर रहा था। उसकी नज़रें सभ्या और नीलेश पर ही थी खासकर सभ्या के कामुक बदन पर, तभी सभ्या की नज़रें उससे मिली तो सभ्या नीलेश के लंड पर उछलते हुए बोली: इधर आओ न समधी जी आह समधन के पास आह आओ।
सभ्या की इतनी कामुक और मादक बातें सुन कर महिपाल तुरंत उठा और उठ कर फुर्ती में सभ्या और नीलेश के पास पहुंच गया, नीलेश नीचे लेटे हुए उसकी गांड मार रहा था और अपनी पत्नियां कामुक क्रियाएं देख रहा था, सभ्या ने महिपाल के पास आते ही उछलना रोका और हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़ लिया, और उसकी आंखों में देखते हुए बोली: आह समधी जी अपना ये मोटा लंबा लंड मेरी चूत में घुसा दो, आह देखो कितनी प्यासी है मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए, आह मुझे एक साथ दो लंड चाहिए आह घुसा दो न।
महिपाल: आह भाभी ओह अभी लो।
अब सभ्या ऐसे बोले तो कौन मना कर सकता था महिपाल तुरंत उसकी और नीलेश की टांगों के बीच आया सभ्या ने उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया और फिर खुद ही पकड़ कर अंदर सरका लिया,
सभ्या: आह आह ओह देखो आह तुम्हारा लंड मेरी प्यासी और गरम चूत में घुस गया है समधी जी आह कितना मोटा है आह कैसा लग रहा है?
महिपाल: ओह भाभी जी आह समधन जी आह बहुत अच्छा आह लग रहा है लंड किसी भट्ठी में है।
सभ्या: आह तो अब चोदो समधी जी आह बुरी तरह से चोदो अपनी समधन को आह, दिखा दो आज आह अपने मोटे लंड का दम आह, अपने समधी के साथ मिलकर चोदो अपनी समधन को।
महिपाल सभ्या की बातों से उत्तेजित होकर उसकी चूत में धक्के लगाने लगा, वहीं नीलेश नीचे से दना दन उसकी गांड मार रहा था जिसमें फ़ायदा सभ्या का हो रहा था जैसे चुदाई उसे चाहिए़ थी उसकी वैसी हो रही यही और उसके मुंह से कभी सिसकिया तो कभी कामुक बातें निकल रही थीं।
दोनों समधी मिलकर उसे चोद रहे थे, और सभ्या की हालत खराब कर रहे थे
सभ्या: आह आह आह ऐसे ही आह चोदो आह ओह आह मारो आह आह रुकना मत आह नहीं तो आह गांड में आह डंडा तोड़ दूंगी।
सभ्या लगातार बड़बड़ाती हुई आहे भर रही थी और उसकी उत्तेजना बड़ती जा रही थी, वहीं यही हाल महिपाल का भी था और नीलेश का भी कुछ देर बाद सभ्या इस दोहरी चुदाई के आनंद को और संभाल नहीं पाई और झड़ने लगी, उसकी कमर थरथराते हुए झटके खाने लगी जिससे कुछ पल तो नीलेश और महिपाल ने उसे रोक कर रखा पर वो फिर फिसल गई, और दोनों के लंड उसके अंदर से निकल गए, महिपाल और नीलेश उसे देखते हुए हांफ रहे थे, नीलेश ने कुछ पल बाद महिपाल की ओर देखा और बोले,
नीलेश: महिपाल भाई देख क्या रहे हो उठाओ फिर से, अभी हमारा थोड़े ही हुआ है,
महिपाल ने ये सुन सभ्या को उठाया और नीलेश के ऊपर बिठा दिया पर इस बार सभ्या का मुंह नीलेश की ओर करके बिठाया और नीलेश का लंड सभ्या की चूत में समा गया, नीलेश तो तुरंत ही नीचे से धक्का लगाने लगे वहीं महिपाल ने भी देर न करते हुए अपने लंड को सभ्या की गांड के छेद पर रखा और अंदर घुसा दिया और तुरंत ही धक्के लगा कर सभ्या की गांड मारने लगा,
महिपाल: आह तुम्हारी गांड में तो जन्नत है समधन आह क्या मखमली गांड है आह ऐसी गांड आह, मज़ा आ अह गया ओह लो समधन आह नए समधी का आह लंड अपनी गांड में।
महिपाल सभ्या की गांड मारते हुए बड़बड़ कर रहा था,
सभ्या जो अभी अभी झड़ कर शांत हुई थी एक बार फिर से उसकी चूत और गांड में लंड घुसे हुए थे और उसकी उत्तेजना को फिर से बढ़ा रहे थे, पर ये सिल सिला ज़्यादा नहीं चल पाया और महिपाल सभ्या की गांड की गर्मी के आगे पिघल गया और गुर्राते हुए कुछ तेज धक्के लगाते हुए झड़ने लगा और सभ्या की गांड मैं पिचकारी छोड़ने लगा, झड़ने के बाद महिपाल ने सभ्या की गांड से लंड निकाला जिसके साथ उसका रस भी सभ्या की गांड से बह कर बाहर आ रहा था, महिपाल लड़खड़ाते हुए पीछे जाकर बिस्तर पर गिर गया, उसके पीछे ही सविता थी जो नीलेश की चुदाई से इतनी थक चुकी थी कि सो गई थी, महिपाल के बाद सभ्या भी नीलेश के ऊपर से उठी,
नीलेश: आओ मेरी जान अब मैं और तुम हैं
सभ्या: नहीं अब और नहीं, दिन में कर्मा फिर रात में तबसे अब मैं और नहीं झेल पाऊंगी।
नीलेश: अच्छा ठीक है तुम आराम करो सो जाओ।
सभ्या: हां पिशाब कर आऊं फिर सोऊंगी ही।
सभ्या कमरे से बाहर जाती है और पिशाब करके बापिस आती है तो कमरे का नज़ारा ऐसा था
बिस्तर पर एक ओर पीयूष एक बार फिर से उत्तेजित हो गया था और अब शालू की गांड मार रहा था दोनों बिस्तर पर एक ओर करवट लेकर लेट कर चुदाई का मज़ा ले रहे थे,
शालू: ओह ओह पीयूष बेटा आह आह आह आह आह मार मौसी की गांड आह बहुत अच्छे से मार रहा है तू आह।
पियूष: मौसी तुम्हारी गांड ही इतनी मस्त है आह कि ओह की लंड अपने आप चल रहा है आह कितनी चिकनी है आह आह मौसी ओह ओह।
शालू: मारता रह बेटा आह
शालू हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत को उंगलियों से सहलाते हुए बोली।
वहीं बिस्तर के दूसरी ओर से रानी की सिसकियां अब चीखों में बदल चुकी थी और वो लगातार चीख रही थी और चीखे भी क्यों न एक साथ दो मोटे मोटे और लंबे लंड उसके अंदर घुसे हुए थे, शैलेश नीचे थे और उनका लंड रानी की चूत में घुसा हुआ था वहीं नीलेश पीछे से अपना मोटा लंबा लंड रानी की गांड में घुसा कर मार रहे थे
रानी: ओह ओह आह आह मर गई आह चाचा जी आह मौसा जी आह लगता है आह आह आह आज मजे से आह मैं मर जाऊंगी।
नीलेश: ओह मेरी बहू आह तू नहीं मरेगी आह आह बस तेरी चूत और गांड मारेंगे हम आह आह आह क्या गांड है शैलेश इसकी।
शैलेश: सच में आह भैया, बहुत कमाल का आह बदन है बहू का आह जितना भोग लो आह मन ही नहीं भरता आह।
नीलेश: तो ओह भोगते हैं आह आज जितना आह मन करे।
शालू: अरे बेचारी को इतना भी आह मत परेशान करना आह।
रानी: आह कोई बात नहीं इईई मौसी आह आज चोद लेने दो आह बहुत मज़ा आ रहा है,
शालू: तो फिर आह मज़ा ले बहू, आह देख पीयूष तेरी पत्नी कितनी चुदक्कड़ है आह,
पीयूष: होनी भी ऐसी ही आह चाहिए न मौसी आह जो लंड देखते ही टूट पड़े, आह मम्मी की तरह तुम्हारी तरह चुदक्कड़ लंड की प्यासी।
शालू: आह फिर तो तेरी पसंद बिल्कुल आह सही है,
सभ्या तो एक ओर लेट कर आंखें बंद करके लेट कर सो भी चुकी थी आखिर थकी हुई थी काफी मेहनत जो की थी,
इधर शैलेश और नीलेश आज रानी को दिखा रहे थे चुदाई का आनंद क्या होता है रानी भी आज ऐसी उत्तेजना की नहर में तैर रही थी जिसमें उसने कभी सफर नहीं किया था वो बार बार झड़ रही थी और कुछ पल बाद फिर से वही उत्तेजना उसके अंदर जाग रही थी खैर कुछ देर बाद नीलेश और शैलेश दोनों का भी सब्र का बांध टूट गया और दोनों ने रानी की गांड और चूत में अपना रस भर दिया रानी उनके साथ एक बार और झड़ गई। झड़ने के बाद नीलेश ने अपना लंड उसकी गांड से निकाला और शैलेश ने उसे अपने ऊपर से हटा कर एक ओर लिटा दिया वो बेजान गुड़िया सी ज्यों की त्यों पड़ कर सो गई, चूत और गांड से रस बह कर जांघों और बिस्तर पर आ गया था पर वो तो बेसुध होकर सो गई,
नीलेश और शैलेश भी आंखें मूंद कर लेटे और तुरंत ही सो गए, पीयूष और शालू ही आखिरी में बचे थे कुछ देर तक पीयूष ने शालू की गांड मारी और फिर वो भी शालू की गांड में झड़ गया और दोनों चिपक कर सो गए।
अगली सुबह कुछ आवाज़ से सबसे पहले सविता उठी और उसने उठ कर सामने देखा तो हैरान रह गई धीरे धीरे एक एक करके सब उठ गए और जो उठ कर सामने देखता थोड़ा चौंक जाता, क्योंकि सामने खड़ी अंजली दरवाज़े पर हाथ मार कर सबको जगा रही थी और सब नींद भरी आंखों से उसकी ओर हैरानी से देख रहे थे, जब सब जाग गए तो अंजली ने सबकी ओर देखा और बोली: चाय ले आऊं क्या?
ये कह कर वो मुस्कुराने लगी तो बाकी सब के चेहरों पर भी मुस्कान आ गई,
जारी रहेगी।
Jabardast update bhai 30 nai 300 like k kabil update he, swingers party bana diya...अपडेट नंबर 259 पोस्ट कर दी है पढ़ कर रिव्यू ज़रूर करें, लाइक और रिव्यू कम नहीं होने चाहिए। और जब तक 30 लाइक्स नहीं होते अपडेट लिखना शुरू नहीं होगा।