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(कर्मा की जुबानी)
अगली सुबह नाश्ता निपटते ही मैं बाकी लड़कों के साथ काम पर लग गया। इतने सारे लोग यहाँ फंस गए थे, और कोई अंदाज़ा नहीं था कि ये लॉकडाउन कितने दिन चलेगा। खाने-पीने का सामान, बिस्तर-बिछौना, रसोई का सामान — सबकी जुगाड़ करनी थी। कमी तो कुछ नहीं थी, बस सब कुछ लाकर यहाँ सही जगह रखना था। हमने तुरंत काम शुरू कर दिया।
जब हम खाने-पीने के सामान में लगे थे, तब तक बड़े लोग पशुओं को फार्महाउस ले आए थे। उनकी हौदी तो हमने कल ही तैयार कर ली थी, ऊपर से अच्छा-खासा त्रिपाल भी डाल दिया था ताकि बारिश में भी जानवरों को तकलीफ न हो। रमन जीजा बाहर से बाकी ज़रूरी सामान ले आए — कुछ देखकर राजन चाचा और दीनू चाचा के चेहरे पर ऐसी चमक आ गई कि हम सब हँस पड़े बाकी सामान क्या था ये तो आप लोग समझ गए होंगे। शाम तक ज़्यादातर काम निपट चुका था।
मर्दों ने बाहर का सारा भारी काम संभाला — सामान ढोना, हौदी ठीक करना, सामान इधर इधर करना। वहीं औरतों ने रसोई को पूरी तरह से संभाल लिया। ममता चाची, गुंजन मामी, शालू मौसी और रज्जो चाची ने मिलकर बड़ा चूल्हा बनाया, रसोई व्यवस्थित की। लड़कियाँ — पूर्वी, रिमझिम, किरण, पल्ली, नीतू, लाड़ो — सबने अंदर बेडशीट बिछाईं, तकिए लगाए, कंबल-गद्दे व्यवस्थित किए। पूरा फार्महाउस अब एक बड़े संयुक्त परिवार का घर लगने लगा था।
शाम को सब थक चुके थे। हम बाहर पूल के किनारे गार्डन में बैठ गए। ठंडी-ठंडी शिकंजी के ग्लास हाथ में थे, हल्की हवा चल रही थी। तभी किरन और पल्ली उठकर खड़ी हो गईं। किरन ने मुस्कुराते हुए पर बुलंद आवाज़ में कहा, “सुनो सब लोग, आज शाम और रात को कोई चुदाई-वुदाई नहीं। आज की शाम सिर्फ बातों के लिए है। कभी-कभी इन छोटी-छोटी बातों में भी बहुत मज़ा आता है।”
पल्ली ने जोड़ दिया, “हाँ, इतने सारे लोग इकट्ठे हैं, सबको अच्छे से जानने-समझने का मौका तो मिलना चाहिए ना?”
अंजली तुरंत सहमत हो गई, “बात बिल्कुल सही है।”
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो फिर वैसा ही करते हैं जैसा किरन और पल्ली कह रही हैं।”
एक-दो लड़कों ने हल्की-सी “आह ओह” की, लेकिन सब थके भी हुए थे और अंदर से राजी भी थे। सुझाव सबको पसंद आ गया।
देर रात तक बातें चलती रहीं। बचपन की यादें, पुरानी कहानियाँ, मजाक, हँसी, कुछ गाने भी बजाए गए। पूरा माहौल इतना हल्का और परिवार वाला था कि समय का पता ही नहीं चला। आखिरकार सब थककर अपने-अपने बिस्तर पर सो गए — अगले दिन के इंतज़ार में।
अगली सुबह आँख खुली तो काफी देर हो चुकी थी। कमरे में नरम सुनहरी धूप छनकर आ रही थी। शरीर अभी भी थका हुआ था, लेकिन मन में एक अलग ही उत्तेजना थी। उठकर सीधा बाथरूम में घुसा, अच्छे से फ्रेश हुआ — मुँह धोया, दाँत साफ किए, पूरा बदन पानी से तर कर लिया। तौलिए से शरीर पोंछते हुए बाहर निकला ही था कि रुक गया।
मेरा बिस्तर... पूरी तरह से भरा हुआ था।
अंजली, प्रीती और किरन — तीनों मेरे बिस्तर पर लेटी हुई थीं। एक-दूसरे से सटी हुई, चादर आधी खिसकी हुई, सुबह की हल्की धूप उनके नंगे पैरों और चेहरों पर खेल रही थी। अंजली बीच में थी, प्रीती उसकी बाईं तरफ और किरन दाईं तरफ। तीनों की आँखें मेरी तरफ थीं — किरन की आँखों में पुरानी वाली शरारत, अंजली की मुस्कान में छुपी हुई भूख, और प्रीती थोड़ी शर्माती हुई लेकिन उत्सुकता से भरी हुई।
मैं हँसते हुए बोला, “अरे तुम लोग कब आईं?”
किरन तुरंत बोली, “जब तुम हग रहे थे भैया तब ही।”
तीनों खिलखिलाकर हँस पड़ीं। उनकी हँसी कमरे में गूँज गई, इतनी मीठी और शरारती कि मैं भी हँस पड़ा।
मैंने किरन की तरफ देखा और आँखें तरेरीं, “हप्प बहुत बोलती है तू।”
किरन ने लापरवाही से कंधे उचकाए और बोली, “अरे हगने को हगना न बोलूं तो क्या बोलूं। तुमने पिछवाड़ा तो सही से धोया है ना।”
मैं मुस्कुराया, “हां धोया है तू देखेगी।”
किरन की आँखें चमक उठीं। उसने अपनी दोनों सहेलियों की तरफ देखा और बोली, “हां देखेंगे न।”
ये कह कर तीनों मुझ पर कूद पड़ीं।
पल भर में मेरे बदन से मेरा निक्कर और कच्छ दोनों खिंच चुके थे। मैं पूरा नंगा था। मैं पैर लटका कर बिस्तर पर बैठ गया और तीनों मेरे पैरों के बीच घुटनों पर बैठ गईं।
नज़ारा कुछ ऐसा था कि साँस अटक गई।
मेरा लंड अंजली के गरम, गीले मुंह में था। वो पूरी तल्लीनता से उसे चूस रही थी। किरन और प्रीती मेरी एक-एक गोली को चाट-चूस रही थीं। उनकी नरम जीभें, गर्म साँसें, थूक की चिकनाहट — सब कुछ एक साथ हो रहा था। मैं मज़े से मचल रहा था, आहें भर रहा था।
कभी तीनों एक साथ पूरे लंड पर अपनी जीभें फिरातीं, तो कभी टोपे को चाटते हुए एक दूसरे को चूम लेतीं। मेरा लंड बिल्कुल कड़क था और उनके थूक में चमक रहा था। फिर भी वो लोग मेरे लंड और गोलियों पर और थूक रही थीं और उसे चाट रही थीं।
फिर अचानक से कुछ ऐसा हुआ कि मैं बिल्कुल मचल उठा। किरन नीचे हुई और अपनी गर्म, नरम जीभ मेरी गांड पर फिराने लगी। मेरी बहन, मेरी छोटी सुंदर बहन मेरी गांड चाट रही थी। मैं पागलों की तरह तड़प रहा था। मेरा लंड प्रीती के मुंह में था और अंजली मेरी गोलियों को चाट रही थी।
और फिर बारी-बारी से तीनों ही अपनी-अपनी जगह आपस में बदल लेती थीं।
मैं पागल होता जा रहा था। वहीं वो तीनों आज पूरे मूड में थीं। तीनों ने मेरी गांड, लंड और गोलियों को तब तक चाटा और चूसा जब तक मैंने अपना रस उनके चेहरों पर नहीं छोड़ दिया।
गाढ़ा, गर्म रस उनके चेहरों पर, होंठों पर, नाक पर बिखर गया। वो लोग उसे भी एक दूसरे के चेहरों से चाटने लगीं।
मैं उन्हें देखते हुए हाँफते हुए बोला, “तुम लोगों ने तो सुबह सुबह ही सारी ताकत खींच ली मेरी।”
अंजली ने होंठ चाटते हुए कहा, “तो जाओ न नीचे नाश्ता बन गया है कर लो जाकर।”
मैंने पूछा, “तुम लोग नहीं करोगे?”
अंजली ने किरन और प्रीती की चूत पर हाथ रखते हुए कहा, “मेरा नाश्ता तो ये रहा।”
तीनों हंसने लगीं।
फिर अंजली किरन की ओर झुक गई और उसके होंठों को कामुक तरीके से चूसने लगी। वहीं प्रीती अंजली की गांड को जीभ से कुरेदने लगी।
मेरे लिए बड़ी दुविधा हो गई। पेट कह रहा था नीचे चल, लंड कह रहा था यहीं रुक जा। खैर आँखों और लंड की मर्ज़ी के आगे पेट की नहीं चली और मैं वापस बिस्तर की ओर मुड़ गया।
मैं प्रीती के पीछे गया। लंड जो झड़ने के बाद हल्का सा ढीला हुआ था, फिर से कड़क हो गया। मैंने उसे प्रीती की गांड के छेद पर रखा और अंदर घुसा दिया। प्रीती की आह निकल गई। मैं उसकी गांड मारने लगा। वहीं अंजली और किरन दोनों एक दूसरे को चूमने-चाटने में लगी हुई थीं।
मैं हाँफते हुए बोला, “अह्ह्ह प्रीती ओह्ह्ह्ह क्या किस्मत है मेरी आह्ह अपने छोटे भाई की पत्नी की गांड मार रहा हूं अह्ह्ह वो भी शादी से पहले ही।”
प्रीती के बोलने से पहले ही अंजली बोली, “ये तो सही कहा किस्मत तो है।”
किरन बोली, “आओ इन दोनों की किस्मत को और चमकाते हैं।”
ये कह कर दोनों भी हमारी ओर आ गईं। अंजली प्रीती के नीचे घुस कर उसकी चूत चाटने लगी तो किरन प्रीती की चूचियों को मसलते हुए उसके होंठों को चूसने लगी।
प्रीती इस तिहरे हमले से पागल होने लगी।
प्रीती: “ओह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह भैया, अह्ह्ह्ह अंजली दीदी किरन नन्ननन्नन ओह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है।”
मैं तेजी से उसकी गांड मारते हुए बोला, “मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है मेरी जान अह्ह्ह्ह क्या कसी हुई गांड है तेरी ओह्ह्ह्ह।”
इस तिहरे हमले का असर प्रीती पर ऐसा हुआ कि कुछ पल बाद ही वो अंजली के मुंह में झड़ने लगी और अंजली उसका सारा रस चासनी की तरह चाट गई।
उसके झड़ने के बाद मैंने उसकी गांड से लंड निकाला और उसे एक ओर लिटा दिया। वहीं अंजली और किरन मेरे लिए तैयार थीं। किरन ने अंजली को बिस्तर के किनारे लिटा दिया। अंजली ने भी अपनी टांगें पीछे मोड़ लीं जिससे उसकी गांड का छेद खुल कर सामने आ गया।
मैं उसके पैरों के बीच आया तो किरन ने मेरे लंड को मुंह में भरके चूसा, फिर उस पर थूक कर उसे अंजली की गांड के छेद पर लगा दिया और उसे अंदर घुसा दिया। मैं अंजली की गांड मारने लगा।
किरन भी कभी अंजली की चूचियों को चूसती, तो कभी मेरे पीछे आकर मेरी गांड चाटती, तो कभी मुझे चूमती। मैं लगातार अंजली की गांड मार रहा था।
किरन नीचे बैठ कर अपनी चूत में उंगली करते हुए बोली, “अह्ह्ह्ह भैया ऐसे ही मारो भाभी की गांड आह्ह्ह क्या चुदक्कड़ गंडमरी भाभी चुनी है मेरे लिए अह्ह्ह्ह मोटे मोटे लौड़े ऐसे ही ले लेती है गांड में।”
मैं अंजली की गांड में लंड चलाते हुए कहा, “अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह तुझे तो पसंद है न तेरी चुदक्कड़ गण्डमरी भाभी?”
अंजली हाँफते हुए बोली, “ओह्ह्ह्ह बाबू इसे तो आऊँगी ही आह्ह्ह्ह इसकी प्यासी चूत जो चूस चूस कर शांत करती रहती हूं।”
किरन बोली, “ओह्ह्ह्ह बिल्कुल सही अह्ह्ह्ह लाओ भैया भाभी की गांड का स्वाद चखाओ मुझे।”
मैंने उसकी बात समझी तो अपना लंड अंजली की गांड से निकाल कर किरन के मुंह में घुसा दिया। किरन ने चाटा और फिर चाट कर चूस कर वापस अंजली की गांड में घुसा दिया।
किरन झुक कर उसकी चूत चाटने लगी, और अंजली हम दोनों की वजह से आहें भरने लगी।
इतने में तब तक प्रीती उठ कर बाहर चली गई थी। कुछ देर बाद अनुज मेरे पीछे आया और बोला, “भैया मुझे भी भाभी की गांड मारने दो न।”
मैं बोला, “किरन की मार ले न।”
अनुज बोला, “इस बंदरिया की मैं नहीं मार रहा तुम ही मारो।”
किरन बोली, “अब तूने छुआ भी मुझे तो बताऊंगी कुत्ता कहीं का।”
अनुज ने उसकी ओर चुम्मे का इशारा कर उसे चिढ़ाया।
अंजली बोली, “अरे लड़ो मत, सुनो बाबू मुझे देवर से सेवा करवाने दो।”
मैं उसकी बात सुनकर उसके आगे से हटा। लंड “पॉप” की आवाज़ के साथ उसकी गांड से निकला। मैंने किरन को झुका कर उसकी गांड में लंड घुसा दिया और उसकी कमर थाम कर उसकी गांड मारने लगा।
उधर अनुज ने भी अंजली की गांड में उसी आसन में अपना लंड घुसा दिया था और तेजी से उसे आहें भरते हुए चोद रहा था।
अनुज बोला, “ओह्ह्ह भाभी ओह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह क्या मज़ेदार है तुम्हारी गांड आह मज़ा आ गया।”
इतने में पीछे से सागर भी आ गया और अनुज को अंजली की गांड मारते देख बोला, “अरे मुझे भाभी की गांड मारनी थी।”
अनुज बोला, “अब बाद में आना, यहां जगह नहीं है।”
सागर बोला, “अरे थोड़ा सा करने दे न।”
अनुज बोला, “जा न मैं नहीं करने दे रहा।”
सागर बोला, “देख लो भाभी इसे।”
अंजली बोली, “तुम लोग भी न कितना लड़ते हो।”
किरन बोली, “गधों से अह्ह्ह्ह और उम्मीद क्या कर सकते हैं भाभी।”
सागर बोली, “तू तो चुप ही रह ले।”
अंजली बोली, “सागर इधर आ कर बैठ मेरा मुंह खाली है।”
सागर ऊपर चढ़ा और अंजली के आगे बैठ गया। उसका लंड बिल्कुल कड़क था जिसे अंजली चूसने लगी।
किरन बोली, “देख लो भैया ये लोग भाभी को कितना परेशान करते हैं।”
मैं बोला, “अरे तू क्यों परेशान होती है ये लोग जाने और इनकी भाभी जानें।”
किरन बोली, “हां और क्या भाभी इन्हें सिर पर चढ़ा रही हैं किसी दिन उठा कर पटक भी देंगी तब मज़ा आयेगा।”
मैं बोला, “और हम लोग मजे से देखेंगे।”
हम मज़ाक करते हुए चुदाई कर रहे थे।
उधर अंजली भी अनुज और सागर को एक साथ खुश कर रही थी।
सागर बोला, “भाभी अब इससे बोलो न, कि गांड मारने दे।”
अंजली बोली, “अच्छा अनुज एक मिनट रुको।”
अनुज अंजली की गांड से लंड निकालता है और अंजली उठती है और उठ कर सागर के ऊपर आकर उसे पीछे लेटने को कहती है। सागर खुशी से लेट जाता है। फिर अंजली उसके ऊपर बैठती है उसका लंड अपनी गांड में लेकर। अंजली की पीठ सागर की ओर होती है। जैसे ही अंजली की गांड में सागर का लंड घुसता है सागर के मुंह से आह निकलती है। अंजली पीछे होकर अपने पैरों को फैला कर इशारा करती है अनुज को। अनुज समझ गया था कि उसे भाभी की दोहरी चुदाई करनी थी। सागर के साथ मिलकर वो अंजली के पैरों के बीच आकर जगह बनाता है और फिर अपना लंड पकड़ कर उसकी चूत पर लगाता है, पर अंजली उसका लंड पकड़ लेती है और नीचे खिसका कर गांड पर ही रख देती है और कहती है “घुसाओ अनुज”।
अनुज हैरान रह जाता है और कहता है, “नहीं भाभी लग जाएगी।”
अंजली बोली, “अरे कुछ नहीं होगा घुसाओ तो।”
अनुज अंजली के कहने पर अपना लंड सागर के लंड से घिसते हुए अंजली की कसी हुई गांड में घुसाने का प्रयास करता है।
सागर बोला, “अबे क्या कर रहा है।”
अंजली अपने दांतों को भींचते हुए उसे शांत रहने का इशारा करती है और कुछ पलों की मेहनत के बाद अनुज का लंड भी जगह बनाते हुए उसकी गांड में घुस जाता है और तीनों ही आहें भरने लगते हैं। मुझे और किरन को तो तब पता चलता है क्या हुआ।
किरन बोली, “अरे भाभी दोनों के एक साथ गांड में क्यों ले रही हो।”
मैं बोला, “हां निकालो लग जाएगी, ए तुम दोनों निकालो पीछे से।”
अंजली बोली, “आह्ह्ह्ह अरे नहीं मत निकालो करने दो आह्ह्ह्ह बाबू थोड़ा महसूस करने दो मुझे।”
मैं बोला, “दर्द होगा।”
अंजली बोली, “कुछ नहीं होगा, आह तुम दोनों रुके क्यों हो चोदो मुझे, तबसे मेरी गांड के पीछे थे।”
उन दोनों के लिए भी ये खास अनुभव था। पहली बार एक साथ एक गांड को चोद रहे थे तो दोनों धीरे-धीरे लय बनाकर अंजली की गांड मारने लगे। वहीं अंजली तो बहुत उत्तेजित हो रही थी और अपनी चूत मसलते हुए उन्हें और गांड मारने के लिए उकसा रही थी।
अंजली बोली, “आह्ह ऐसे ही ऐसे ही ओह्ह्ह मारो अपनी भाभी की गांड आह्ह्ह एक साथ ओह्ह्ह्ह मजा आ रहा है आह्ह रुकना मत।”
अनुज बोला, “ओह्ह भाभी चाह कर भी नहीं रुक पा रहा, ओह्ह्ह।”
सागर बोला, “मैं भी।”
मैंने किरण की गांड मारना जारी रखा। कुछ पल बाद ही अंजली झड़ने लगी। ये नया अनुभव उसके लिए काफी था। वो काँपते हुए झड़ने लगी और दोनों के लंड उसकी गांड से निकल गए।
वो झड़ने के बाद हांफते हुए बेजान हो कर लेट गई। वहीं अनुज और सागर हमारी ओर देखने लगे जिस पर किरन बोली, “मेरी तरफ कोई बढ़ मत जाना, दोनों के नुनु काट दूंगी।”
दोनों बेचारे उसकी धमकी से डरते हुए अपने नुनु की सुरक्षा के लिए कमरे से निकल गए।
कुछ पल बाद अंजली की आँखें खुलीं और मुस्कुराते हुए वो हमें देख रही थी।
किरन बोली, “रण्डी भाभी।”
अंजली बोली, “रंडी ननद।”
अंजली उठ कर हमारी ओर आई और किरन की चूत को मसलने लगी। बस इतना ही काफी था किरन को झड़ने के लिए। उसके झड़ने के बाद मैंने उसकी गांड से लंड निकाल लिया। मुझे झड़ने का मन नहीं था और मूत भी आ रहा था। मैं उतर कर बाथरूम की तरफ बढ़ा और मैंने सोचा कि जब सब इतना हो चुका था तो खुल कर ही क्यों न मजे ले। इसलिए मैं मुड़ गया। अंजली और किरन बिस्तर पर बैठ कर एक दूसरे को चूम रही थीं। मैंने उनके पास जाकर उनकी ओर लंड किया और अपने मूत की धार उन पर छोड़ दी। दोनों ही बिल्कुल भी नहीं सकुचाईं, और मेरे मूत से अपने चेहरों को भिगा लिया। कभी मूत में भीगते हुए एक दूसरे के होंठों को चूस रही थी।
इसके बाद हम तीनों लोग बाथरूम में घुस साथ में नहाए। बिस्तर को उठाकर भी धुलने के लिए डाल दिया।
हम तीनों बाथरूम से बाहर निकले तो बदन अभी भी नहाने की ताज़गी और गर्माहट से तर था। अंजली ने अपनी भीगी लटें मेरे कंधे पर डाल दीं और हँसते हुए बोली, “चलो, अब असली नाश्ता करते हैं।” किरन मेरी दूसरी बाँह थामे हुए थी, उसकी उँगलियाँ मेरी कमर पर खेल रही थीं। हम हॉल पार करते हुए रसोई की तरफ बढ़े।
रसोई का दरवाज़ा खुला था। अंदर से गरम तेल की खुशबू, चाय की महक और तवे पर कुछ सिकने की आवाज़ आ रही थी। मैंने झाँका तो नज़ारा देखकर ठिठक गया।
गुंजन मामी सिर्फ एक, पतला-सा एप्रन पहने खड़ी थीं। बस। एप्रन का ऊपरी हिस्सा उनके भारी, दूधिया चूचों को मुश्किल से संभाल पा रहा था — दोनों चूचे आधे-आधे बाहर झाँक रहे थे, निप्पल हल्के से उभरे हुए। नीचे कुछ नहीं था। उनकी चिकनी कमर, गोल-मटोल चूतड़ और मोटी टाँगें पूरी तरह नंगी थीं। वो चूल्हे पर पराठा सेंक रही थीं, कमर लचकाते हुए, जिससे उनका नंगा बदन हर हलचल के साथ हिल रहा था। एप्रन का फीता पीठ पर ढीला बँधा था, जिससे उनकी पूरी पीठ और गांड का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था।
मैं चुपके से पीछे पहुँचा और दोनों हाथों से उनकी कमर को जकड़ लिया। मामी चौंककर हँसी, “अरे...लल्ला... सुबह-सुबह ही शैतानी शुरू?”
मैंने अपना सीना उनकी नंगी पीठ से पूरी तरह सटा दिया। मेरी छाती उनके कंधों से रगड़ खा रही थी। दोनों हाथ ऊपर ले जाकर मैंने उनके भरे-भरे चूचों को एप्रन के अंदर से जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। मेरी उँगलियाँ उनके निप्पलों को पकड़कर खींच रही थीं, दबा रही थीं। मामी की साँसें तुरंत तेज़ हो गईं। उन्होंने सिर पीछे झुकाकर मेरे कंधे पर टिका दिया और धीरे-धीरे कराहने लगीं, “आह्ह्ह... लल्ला... तुम चाय में उबाल आने से पहले मुझे गर्म कर दोगे... आह्ह... इतनी जोर से मत...”
मैंने उनका दायाँ चूचा और भी जोर से मसला, निप्पल को अँगूठे से रगड़ा और कान में फुसफुसाया, “तो मैं तुम्हे ही पी लूं मामी चाय की जगह”
मामी: अह्ह्ह्ह लल्ला
मामी की गांड मेरे लंड पर हिलने लगी। ठीक उसी वक्त पीछे से शालू मौसी चाय का ट्रे लेकर अंदर आईं। उन्होंने हमें देखा तो बोली, “अरे वाह! रसोई में मामी भांजे का प्रोग्राम शुरू हो गया? गुंजन, और चाय चढ़ाई है न और भी लोग रह गए हैं।
मामी: अभी चढ़ाती हूं जीजी, लल्ला थोड़ा छोड़ना तो।
मैंने मुस्कुराते हुए मामी के चूतड़ पर एक जोरदार थपकी मारी, उनके कान में “बाद में मिलते हैं” कहा और तुरंत पीछे हट गया। शालू मौसी ने ट्रे से एक कप चाय निकालकर मुझे थमा दिया। अंजली और किरन दोनों तो तब तक गायब हो चुकी थीं।
बाहर गार्डन में बड़ा चूल्हा जल रहा था। धुआँ हल्का-हल्का ऊपर उठ रहा था। मंजू ताई और सावित्री बुआ (बड़ी बुआ) दोनों वहाँ खड़ी थीं। मंजू ताई ने साड़ी का पल्लू कमर पर खोंस रखा था, ब्लाउज़ के ऊपर के तीन हुक खुले थे — उनके भारी, लटकते चूचे आधे बाहर निकले हुए थे, हर हिलने पर हिल रहे थे। सावित्री बुआ ने हल्का कुर्ता पहना था जो उनके गुदगुदे पेट और मोटे चूतड़ों पर तना हुआ था। दोनों पकौड़े तल रही थीं। तेल की छींटें उनके हाथों, गर्दन और चेहरों पर पड़ रही थीं।
मैं पास पहुँचा तो मंजू ताई ने एक गरम-गरम पकौड़ा उठाकर सीधा मेरे मुँह में ठूँस दिया, “ले बेटा, चख... अभी कढ़ाई से निकाला है।”
मैं: बहुत स्वाद है ताई तुम्हारी तरह
वो दोनों हंसने लगीं।”
मैं चाय का घूँट लेते हुए आगे बढ़ा।
फार्महाउस के बाहर की तरफ जाते हुए नज़ारा और भी मस्त था।
रज्जो चाची भैंस को नहला रही थीं। पानी का टब भरा हुआ था। लेकिन चाची पूरी नंगी थी उनके कपड़े नीचे पड़े थे उनके पीछे चेतन जीजा पूरी तरह नंगे खड़े थेखड़े-खड़े ही उनकी मोटी गांड में लंड घुसाए हुए जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे।
हर धक्के पर रज्जो चाची का बदन आगे की तरफ झुक जाता था। उनके गोल-मटोल चूतड़ लहरा रहे थे। पानी की छप-छप की आवाज़ उनके कराहों के साथ मिल रही थी। चाची दोनों हाथों से भैंस के सिर को पकड़े हुए थीं ताकि वो हिले नहीं।
रज्जो चाची हाँफते हुए बोलीं, “आह्ह्ह... चेतन... आह्ह्ह... धीरे बेटा... भैंस डर जाएगी... ओह्ह्ह... गहरी मत मार... आह्ह्ह...”
चेतन जीजा पीछे से उनकी कमर कसकर पकड़े हुए तेज़ी से ठोक रहे थे, “आह्ह... मामी.. आपकी ये मक्खन वाली गांड... अह्ह्ह पूरे दिन चोदने का मन कर रहा है... ले... ले मेरी जान... कितनी कसी हुई है आज...”
रज्जो चाची की आहें पानी की छपाक के साथ गूँज रही थीं। भैंस बेचारी चुपचाप खड़ी थी, जैसे रोज़ का नजारा हो।
मैं चाय का आखिरी घूँट लेकर मुस्कुराया। वहीं गार्डन में ममता चाची की तेज़ हंसी गूंज रही थी मैने देखा तो पाया जग्गू मोटरसाइकल पर पूरा नंगा बैठा था और उसे चला रहा था वहीं ममता चाची भी पूरी नंगी उसके पीछे बैठ कर घूम रही थी और हंस रही थीं
उन्हें देख कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था सबको आस पास इतना खुश और आनंद में देख मन को बहुत ठंडक मिल रही थी, ये लॉकडाउन किसी भी कारण से लगा हो पर हम लोगों के लिए ये समय बहुत खास था, ये हम सब को साथ में ऐसे रहने और मजा लेने का मौका दे रहा था जो वैसे शायद मिलना मुश्किल था, ये ही जीवन था कोई रोक टोक नहीं, समाज का डर नहीं सिर्फ प्यार और आपस में हवस जो समाज के लिए भले ही खराब मानी जाती हो हमारे लिए अच्छी थी।
अगले दो तीन दिन ऐसे ही बीते पूरे चुदाई और मजे से भरपूर कुछ लोग नंगे ही रहते तो कुछ कपड़ों में हर कोई अपने अपने जीवन का भरपूर आनंद ले रहा था,
जग्गू का चंचल दीदी को पूल के किनारे लिटा कर चोदना हो,
या मेरा पीयूष का और पंकज जीजा का, खुशी भाभी, प्रेमा भाभी और माधुरी ताई को पूल में चोदते हुए रेस लगाना हो कि कौन चोदते हुए दूसरी ओर पहुँचेगा।
कहीं अनुज और प्रीती की प्रेम कहानी पनप रही थी,
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तो कहीं मेरी सासू मां को मेरे मामा अपने लंड पर उछाल उछाल कर सैर करवा रहे थे,
कहीं पर हमारे बड़े फूफाजी अपनी होने वाली बहू यानी खुशी भाभी को साइकिल चलाना सिखा रहे थे,
कहीं पर जग्गू अनुज की सासू मां को ऐसे चोद रहा था जैसे बरसों से उनकी चाहत में बैठा हो
![]()
इसी तरह अगले 2-3 दिन खूब मस्ती और चुदाई में बीते, फिर चौथे दिन मैं, अंजली नीतू और रानी भाभी के साथ साथ एक दो लोग और बैठे थे तो नीतू बोली कि अब कुछ बोरिंग सा होने लगा है, कितनी चुदाई करें उसके अलावा कुछ है है ही नहीं करने को,
रानी भाभी: हाँ चुदाई में मजा तो है पर कुछ नयापन भी होना चाहिए हमें कुछ सोचना चाहिए।
खैर मैने भी सोचा ये लोग सही कह रहे हैं कुछ सोचना पड़ेगा, और सोचने के पहले मैने दोनों की एक एक बार गांड ज़रूर मारी फिर जाकर मेरे दिमाग ने काम किया और मैने फिर रात को सबके सामने बुला कर कहा कि अब से हम लोग हर रोज़ कुछ नया करेंगे, दिन भर चुदाई करने की जगह हम शाम को साथ में करेंगे।
इस पर पीयूष बोला: कर्मा इसमें नया क्या है वो तो हम लोग अब भी करते हैं रात में भी।
मैं: नया ये है कि अब काँट छांट वाली चुदाई होगी।
पूर्वी: मतलब?
मैं: मतलब ये कि हर रोज़ चुदाई की एक कैटेगरी बनाई जाएगी, सबको उसी के अनुसार चुदाई करनी होगी सबके साथ में। और मुकाबले होंगे जो जीतेंगे उन्हें इनाम मिलेगा।
चरण सिंह: चुदाई की प्रतियोगिता ये तो सुनने में मज़ेदार है।
कर्मा: सच में मज़ेदार है, तो कल दो बार चुदाई की प्रतियोगिता होंगी एक सुबह 11 बजे में शुरू होगी और दूसरी रात में इसी समय, अब सुनलो कल सुबह की प्रतियोगिता भाई बहन की होगी इसमें जितने भी भाई बहन होंगे वो शामिल हो सकते हैं।
पंकज: सिर्फ सगे भाई बहन।
मैं: नहीं जीजाजी, मुंह बोले भी या चाचा ताऊ कैसे भी बस रिश्ते में भाई बहन लगने चाहिए,
मामा: और जिसकी दो बहनें हो?
मैं: उसका दोगुना मज़ा।
पल्ली: पर जीत हार का फैसला कैसे होगा?
मैं: सब लोग एक साथ शुरू करेंगे चुदाई जो भी बहन भाई सबसे देर तक बिना झड़े रुक पाएंगे वो जीत जाएंगे, उन्हें नंबर वन भाई बहन का खिताब मिलेगा।
मेरी बात सुनकर लोगों में आपस मे बातें होने लगीं और लोग इसके लिए उत्साहित नज़र आ रहे थे,
इतने में चंचल दीदी बोली: अरे वो तो कल होगा कर्मा आज का क्या प्लान है वो तो बता।
इतने में नीतू और अंजली खड़ी हुई,
अंजली: वो मैं बताती हूँ,
मैं अंजली और नीतू की ओर देखने लगा क्योंकि मैं भी नहीं जानता था उसने क्या सोचा है,
नीतू ने इशारा किया तो किरन और लाडो जो कि दोनों पूरी नंगी थी एक एक कटोरा लेकर आई और खड़ी हो गईं।
नीतू: तुम सब को लाडो और किरन के पास जो कटोरे दिख रहे हैं उनमें पर्चियां जिनपर नाम लिखे हैं, एक कटोरे में आदमियों की और दूसरे में औरतों की, अब होगा ये कि अब दो पर्चियां औरतों के कटोरे से निकलेंगी और 10 आदमियों के से, जो दो औरतें होंगी उनको अकेले अकेले 5-5 आदमियों से चुदवाना होगा और वो भी तब तक जब तक पांचो आदमी झड़ न जायें, अकेले कोई मदद नहीं मिलेगी।
अंजली: दोनों औरतों में से जो पहले पांचों आदमियों को स्खलित कर देगी वो बनेगी आज रात की गैंगबैंग क्वीन, और जो औरत हारेगी उसे अगले एक दिन तक क्वीन की नौकरानी बन कर रहना पड़ेगा।
रिमझिम: इस बीच औरत खुद झड़ गई तो?
नीतू: उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, काम है पांचो आदमियों का रस निकालना।
अंजली और नीतू का प्लान सुनकर तो मैं भी हैरान रह गया और बाकी सब भी, किसी भी चीज़ में जब प्रतिस्पर्धा आ जाती है तो उसका मजा ही बढ़ जाता है, और मेरी तरह बाकी सब को भी ये सुझाव बहुत पसंद आया था।
अंजली: सब तैयार हो इस खेल के लिए?
सबने गर्म जोशी से हां कहा, फिर किरन ने कटोरे को अच्छे से हिलाया ताकि पर्चियां अच्छे से मिक्स हो जाएं और फिर सबसे बड़े यानी नाना को मौका दिया गया कि वो दो पर्चियां निकाल कर दोनों औरतों कौन होंगी ये बतायें, नाना ने दो पर्चियां निकाली और किरण को दे दी, किरन ने पहली पर्ची खोली और पढ़ी और फिर सबको दिखाते हुए बोली पहली प्रतियोगी हैं मेरी प्यारी छोटी बुआ: शालू बुआ।
मौसी का नाम आते ही सब तालियां पीटने लगे वहीं मौसी भी शर्माते हुए खड़ी हुई, वो थोड़ी सी घबराई सी लग रही थी तो अंजली ने जाकर उन्हें गले लगाया और बोली: घबराओ मत मौसी पांच लंड मिलने वाले हैं अच्छे से निचोड़ लेना,
मौसी: बिलकुल बिटिया, अब तू देख मेरा जलवा
अंजली और मौसी दोनों साथ में हॉल के बीच आ गए,
नीतू: किरन बता मौसी का मुकाबला किससे है?
किरन ने दूसरी पर्ची पढ़ी और उस पर देखते हुए बोली: बुआ का सामना करेंगी हमारी रज्जो बुआ,
मतलब दूसरा नाम निकला रज्जो चाची का, अब दोनों ही प्रतियोगी एक से बढ़ कर एक थे, रज्जो चाची भी शर्माते हुए और सकुचाते हुए खड़ी हुई, उन्हें भी अंजली गले लगा कर लेकर आई,
नीतू: तो एक तरफ हैं मौसी, और एक तरफ हैं मेरी मम्मी, और ये दोनों ही लंड की प्यासी चुदक्कड़ रंडिया हैं तो मुकाबला तगड़ा होगा।
नीतू ने ये कहा तो सब हंसने लगे, इसी बीच पूर्वी दीदी ने पूछा कि जब इनकी चुदाई होगी तो बाकी सब क्या करेंगे,
अंजली: हम लोग दर्शक बनेंगे, चुम्मा चाटी और चूची दबाना चलेगा बस कोई दर्शक चुदाई नहीं करेगा।
मामा: लो भाई अब इसमें तो हमें भी रुकना पड़ेगा।
किरन: ये ही तो मज़ा है पापा।
नीतू: अब मम्मी और मौसी आदमियों के कटोरे से पांच पांच पर्चियां निकालेंगी, जो पर्चियां मम्मी निकालेंगी वो आदमी मौसी को चोदेंगे, और जो मौसी निकालेंगी वो मम्मी को।
पहले मौसी को मौका मिला तो उन्होंने पर्ची निकाली और बोली: प्रकाश भाई साहब,
यानि प्रीती और पंकज के पिता वो अपना नाम सुनकर उठे और हँसते मुस्कुराते हुए रज्जो चाची के पास जाकर खड़े हो गए,
फिर रज्जो चाची ने पर्ची निकाली और बोली: सुजान सिंह जीजाजी।
अपना नाम सुनकर बड़े फूफाजी खड़े हुए और मौसी के पास जाकर खड़े हो गये,
फिर मौसी ने एक पर्ची निकाली जिसमें चेतन जीजा का नाम था, चेतन जीजा भी तुरंत जाकर रज्जो चाची के पास खड़े हो गये, फिर रज्जो चाची ने पर्ची निकाली और उसमें चरण सिंह ताऊ का नाम है तो वो उठे और मौसी के पास आकर खड़े हो गये, अगली पर्ची मौसी ने निकाली उस पर पापा का नाम था पापा उठ कर रज्जो चाची के पास खड़े हो गये फिर रज्जो चाची ने निकाली जिस पर उदयवीर ताऊजी का नाम था, अगली पर्ची जो मौसी ने निकाली उस पर मामा का नाम था जो रज्जो चाची के पास खड़े हो गये, उसके बाद रज्जो चाची ने निकाली जिस पर उनके बेटे सरजू का नाम था, वो उठ कर मौसी के पास खड़ा हो गया मौसी ने अपनी आखिरी पर्ची निकाली जिस पर जग्गू का नाम था, वहीं रज्जो चाची ने अपनी आखिर पर्ची निकाली जिस पर मेरे ससुरजी महिपाल सिंह का नाम था।
जो लोग रज्जो चाची के पास खड़े थे और उन्हें चोदने वाले थे:- प्रकाश ताऊजी, चेतन जीजा, पापा, मामा, जग्गू
जो लोग मौसी के पास खड़े थे और उन्हें चोदने वाले थे: बड़े फूफाजी, चरण सिंह ताऊजी, उदयवीर ताऊजी, सरजू, महिपाल सिंह।
हम सब दर्शक लोग हॉल में घेरा बना कर बैठे थे और ये दोनों समूह अलग अलग होकर तैयार थे आज की प्रतियोगिता के लिए।
जारी रहेगी
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(कर्मा की जुबानी)
अगली सुबह नाश्ता निपटते ही मैं बाकी लड़कों के साथ काम पर लग गया। इतने सारे लोग यहाँ फंस गए थे, और कोई अंदाज़ा नहीं था कि ये लॉकडाउन कितने दिन चलेगा। खाने-पीने का सामान, बिस्तर-बिछौना, रसोई का सामान — सबकी जुगाड़ करनी थी। कमी तो कुछ नहीं थी, बस सब कुछ लाकर यहाँ सही जगह रखना था। हमने तुरंत काम शुरू कर दिया।
जब हम खाने-पीने के सामान में लगे थे, तब तक बड़े लोग पशुओं को फार्महाउस ले आए थे। उनकी हौदी तो हमने कल ही तैयार कर ली थी, ऊपर से अच्छा-खासा त्रिपाल भी डाल दिया था ताकि बारिश में भी जानवरों को तकलीफ न हो। रमन जीजा बाहर से बाकी ज़रूरी सामान ले आए — कुछ देखकर राजन चाचा और दीनू चाचा के चेहरे पर ऐसी चमक आ गई कि हम सब हँस पड़े बाकी सामान क्या था ये तो आप लोग समझ गए होंगे। शाम तक ज़्यादातर काम निपट चुका था।
मर्दों ने बाहर का सारा भारी काम संभाला — सामान ढोना, हौदी ठीक करना, सामान इधर इधर करना। वहीं औरतों ने रसोई को पूरी तरह से संभाल लिया। ममता चाची, गुंजन मामी, शालू मौसी और रज्जो चाची ने मिलकर बड़ा चूल्हा बनाया, रसोई व्यवस्थित की। लड़कियाँ — पूर्वी, रिमझिम, किरण, पल्ली, नीतू, लाड़ो — सबने अंदर बेडशीट बिछाईं, तकिए लगाए, कंबल-गद्दे व्यवस्थित किए। पूरा फार्महाउस अब एक बड़े संयुक्त परिवार का घर लगने लगा था।
शाम को सब थक चुके थे। हम बाहर पूल के किनारे गार्डन में बैठ गए। ठंडी-ठंडी शिकंजी के ग्लास हाथ में थे, हल्की हवा चल रही थी। तभी किरन और पल्ली उठकर खड़ी हो गईं। किरन ने मुस्कुराते हुए पर बुलंद आवाज़ में कहा, “सुनो सब लोग, आज शाम और रात को कोई चुदाई-वुदाई नहीं। आज की शाम सिर्फ बातों के लिए है। कभी-कभी इन छोटी-छोटी बातों में भी बहुत मज़ा आता है।”
पल्ली ने जोड़ दिया, “हाँ, इतने सारे लोग इकट्ठे हैं, सबको अच्छे से जानने-समझने का मौका तो मिलना चाहिए ना?”
अंजली तुरंत सहमत हो गई, “बात बिल्कुल सही है।”
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो फिर वैसा ही करते हैं जैसा किरन और पल्ली कह रही हैं।”
एक-दो लड़कों ने हल्की-सी “आह ओह” की, लेकिन सब थके भी हुए थे और अंदर से राजी भी थे। सुझाव सबको पसंद आ गया।
देर रात तक बातें चलती रहीं। बचपन की यादें, पुरानी कहानियाँ, मजाक, हँसी, कुछ गाने भी बजाए गए। पूरा माहौल इतना हल्का और परिवार वाला था कि समय का पता ही नहीं चला। आखिरकार सब थककर अपने-अपने बिस्तर पर सो गए — अगले दिन के इंतज़ार में।
अगली सुबह आँख खुली तो काफी देर हो चुकी थी। कमरे में नरम सुनहरी धूप छनकर आ रही थी। शरीर अभी भी थका हुआ था, लेकिन मन में एक अलग ही उत्तेजना थी। उठकर सीधा बाथरूम में घुसा, अच्छे से फ्रेश हुआ — मुँह धोया, दाँत साफ किए, पूरा बदन पानी से तर कर लिया। तौलिए से शरीर पोंछते हुए बाहर निकला ही था कि रुक गया।
मेरा बिस्तर... पूरी तरह से भरा हुआ था।
अंजली, प्रीती और किरन — तीनों मेरे बिस्तर पर लेटी हुई थीं। एक-दूसरे से सटी हुई, चादर आधी खिसकी हुई, सुबह की हल्की धूप उनके नंगे पैरों और चेहरों पर खेल रही थी। अंजली बीच में थी, प्रीती उसकी बाईं तरफ और किरन दाईं तरफ। तीनों की आँखें मेरी तरफ थीं — किरन की आँखों में पुरानी वाली शरारत, अंजली की मुस्कान में छुपी हुई भूख, और प्रीती थोड़ी शर्माती हुई लेकिन उत्सुकता से भरी हुई।
मैं हँसते हुए बोला, “अरे तुम लोग कब आईं?”
किरन तुरंत बोली, “जब तुम हग रहे थे भैया तब ही।”
तीनों खिलखिलाकर हँस पड़ीं। उनकी हँसी कमरे में गूँज गई, इतनी मीठी और शरारती कि मैं भी हँस पड़ा।
मैंने किरन की तरफ देखा और आँखें तरेरीं, “हप्प बहुत बोलती है तू।”
किरन ने लापरवाही से कंधे उचकाए और बोली, “अरे हगने को हगना न बोलूं तो क्या बोलूं। तुमने पिछवाड़ा तो सही से धोया है ना।”
मैं मुस्कुराया, “हां धोया है तू देखेगी।”
किरन की आँखें चमक उठीं। उसने अपनी दोनों सहेलियों की तरफ देखा और बोली, “हां देखेंगे न।”
ये कह कर तीनों मुझ पर कूद पड़ीं।
पल भर में मेरे बदन से मेरा निक्कर और कच्छ दोनों खिंच चुके थे। मैं पूरा नंगा था। मैं पैर लटका कर बिस्तर पर बैठ गया और तीनों मेरे पैरों के बीच घुटनों पर बैठ गईं।
नज़ारा कुछ ऐसा था कि साँस अटक गई।
मेरा लंड अंजली के गरम, गीले मुंह में था। वो पूरी तल्लीनता से उसे चूस रही थी। किरन और प्रीती मेरी एक-एक गोली को चाट-चूस रही थीं। उनकी नरम जीभें, गर्म साँसें, थूक की चिकनाहट — सब कुछ एक साथ हो रहा था। मैं मज़े से मचल रहा था, आहें भर रहा था।
कभी तीनों एक साथ पूरे लंड पर अपनी जीभें फिरातीं, तो कभी टोपे को चाटते हुए एक दूसरे को चूम लेतीं। मेरा लंड बिल्कुल कड़क था और उनके थूक में चमक रहा था। फिर भी वो लोग मेरे लंड और गोलियों पर और थूक रही थीं और उसे चाट रही थीं।
फिर अचानक से कुछ ऐसा हुआ कि मैं बिल्कुल मचल उठा। किरन नीचे हुई और अपनी गर्म, नरम जीभ मेरी गांड पर फिराने लगी। मेरी बहन, मेरी छोटी सुंदर बहन मेरी गांड चाट रही थी। मैं पागलों की तरह तड़प रहा था। मेरा लंड प्रीती के मुंह में था और अंजली मेरी गोलियों को चाट रही थी।
और फिर बारी-बारी से तीनों ही अपनी-अपनी जगह आपस में बदल लेती थीं।
मैं पागल होता जा रहा था। वहीं वो तीनों आज पूरे मूड में थीं। तीनों ने मेरी गांड, लंड और गोलियों को तब तक चाटा और चूसा जब तक मैंने अपना रस उनके चेहरों पर नहीं छोड़ दिया।
गाढ़ा, गर्म रस उनके चेहरों पर, होंठों पर, नाक पर बिखर गया। वो लोग उसे भी एक दूसरे के चेहरों से चाटने लगीं।
मैं उन्हें देखते हुए हाँफते हुए बोला, “तुम लोगों ने तो सुबह सुबह ही सारी ताकत खींच ली मेरी।”
अंजली ने होंठ चाटते हुए कहा, “तो जाओ न नीचे नाश्ता बन गया है कर लो जाकर।”
मैंने पूछा, “तुम लोग नहीं करोगे?”
अंजली ने किरन और प्रीती की चूत पर हाथ रखते हुए कहा, “मेरा नाश्ता तो ये रहा।”
तीनों हंसने लगीं।
फिर अंजली किरन की ओर झुक गई और उसके होंठों को कामुक तरीके से चूसने लगी। वहीं प्रीती अंजली की गांड को जीभ से कुरेदने लगी।
मेरे लिए बड़ी दुविधा हो गई। पेट कह रहा था नीचे चल, लंड कह रहा था यहीं रुक जा। खैर आँखों और लंड की मर्ज़ी के आगे पेट की नहीं चली और मैं वापस बिस्तर की ओर मुड़ गया।
मैं प्रीती के पीछे गया। लंड जो झड़ने के बाद हल्का सा ढीला हुआ था, फिर से कड़क हो गया। मैंने उसे प्रीती की गांड के छेद पर रखा और अंदर घुसा दिया। प्रीती की आह निकल गई। मैं उसकी गांड मारने लगा। वहीं अंजली और किरन दोनों एक दूसरे को चूमने-चाटने में लगी हुई थीं।
मैं हाँफते हुए बोला, “अह्ह्ह प्रीती ओह्ह्ह्ह क्या किस्मत है मेरी आह्ह अपने छोटे भाई की पत्नी की गांड मार रहा हूं अह्ह्ह वो भी शादी से पहले ही।”
प्रीती के बोलने से पहले ही अंजली बोली, “ये तो सही कहा किस्मत तो है।”
किरन बोली, “आओ इन दोनों की किस्मत को और चमकाते हैं।”
ये कह कर दोनों भी हमारी ओर आ गईं। अंजली प्रीती के नीचे घुस कर उसकी चूत चाटने लगी तो किरन प्रीती की चूचियों को मसलते हुए उसके होंठों को चूसने लगी।
प्रीती इस तिहरे हमले से पागल होने लगी।
प्रीती: “ओह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह भैया, अह्ह्ह्ह अंजली दीदी किरन नन्ननन्नन ओह्ह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है।”
मैं तेजी से उसकी गांड मारते हुए बोला, “मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है मेरी जान अह्ह्ह्ह क्या कसी हुई गांड है तेरी ओह्ह्ह्ह।”
इस तिहरे हमले का असर प्रीती पर ऐसा हुआ कि कुछ पल बाद ही वो अंजली के मुंह में झड़ने लगी और अंजली उसका सारा रस चासनी की तरह चाट गई।
उसके झड़ने के बाद मैंने उसकी गांड से लंड निकाला और उसे एक ओर लिटा दिया। वहीं अंजली और किरन मेरे लिए तैयार थीं। किरन ने अंजली को बिस्तर के किनारे लिटा दिया। अंजली ने भी अपनी टांगें पीछे मोड़ लीं जिससे उसकी गांड का छेद खुल कर सामने आ गया।
मैं उसके पैरों के बीच आया तो किरन ने मेरे लंड को मुंह में भरके चूसा, फिर उस पर थूक कर उसे अंजली की गांड के छेद पर लगा दिया और उसे अंदर घुसा दिया। मैं अंजली की गांड मारने लगा।
किरन भी कभी अंजली की चूचियों को चूसती, तो कभी मेरे पीछे आकर मेरी गांड चाटती, तो कभी मुझे चूमती। मैं लगातार अंजली की गांड मार रहा था।
किरन नीचे बैठ कर अपनी चूत में उंगली करते हुए बोली, “अह्ह्ह्ह भैया ऐसे ही मारो भाभी की गांड आह्ह्ह क्या चुदक्कड़ गंडमरी भाभी चुनी है मेरे लिए अह्ह्ह्ह मोटे मोटे लौड़े ऐसे ही ले लेती है गांड में।”
मैं अंजली की गांड में लंड चलाते हुए कहा, “अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह तुझे तो पसंद है न तेरी चुदक्कड़ गण्डमरी भाभी?”
अंजली हाँफते हुए बोली, “ओह्ह्ह्ह बाबू इसे तो आऊँगी ही आह्ह्ह्ह इसकी प्यासी चूत जो चूस चूस कर शांत करती रहती हूं।”
किरन बोली, “ओह्ह्ह्ह बिल्कुल सही अह्ह्ह्ह लाओ भैया भाभी की गांड का स्वाद चखाओ मुझे।”
मैंने उसकी बात समझी तो अपना लंड अंजली की गांड से निकाल कर किरन के मुंह में घुसा दिया। किरन ने चाटा और फिर चाट कर चूस कर वापस अंजली की गांड में घुसा दिया।
किरन झुक कर उसकी चूत चाटने लगी, और अंजली हम दोनों की वजह से आहें भरने लगी।
इतने में तब तक प्रीती उठ कर बाहर चली गई थी। कुछ देर बाद अनुज मेरे पीछे आया और बोला, “भैया मुझे भी भाभी की गांड मारने दो न।”
मैं बोला, “किरन की मार ले न।”
अनुज बोला, “इस बंदरिया की मैं नहीं मार रहा तुम ही मारो।”
किरन बोली, “अब तूने छुआ भी मुझे तो बताऊंगी कुत्ता कहीं का।”
अनुज ने उसकी ओर चुम्मे का इशारा कर उसे चिढ़ाया।
अंजली बोली, “अरे लड़ो मत, सुनो बाबू मुझे देवर से सेवा करवाने दो।”
मैं उसकी बात सुनकर उसके आगे से हटा। लंड “पॉप” की आवाज़ के साथ उसकी गांड से निकला। मैंने किरन को झुका कर उसकी गांड में लंड घुसा दिया और उसकी कमर थाम कर उसकी गांड मारने लगा।
उधर अनुज ने भी अंजली की गांड में उसी आसन में अपना लंड घुसा दिया था और तेजी से उसे आहें भरते हुए चोद रहा था।
अनुज बोला, “ओह्ह्ह भाभी ओह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह क्या मज़ेदार है तुम्हारी गांड आह मज़ा आ गया।”
इतने में पीछे से सागर भी आ गया और अनुज को अंजली की गांड मारते देख बोला, “अरे मुझे भाभी की गांड मारनी थी।”
अनुज बोला, “अब बाद में आना, यहां जगह नहीं है।”
सागर बोला, “अरे थोड़ा सा करने दे न।”
अनुज बोला, “जा न मैं नहीं करने दे रहा।”
सागर बोला, “देख लो भाभी इसे।”
अंजली बोली, “तुम लोग भी न कितना लड़ते हो।”
किरन बोली, “गधों से अह्ह्ह्ह और उम्मीद क्या कर सकते हैं भाभी।”
सागर बोली, “तू तो चुप ही रह ले।”
अंजली बोली, “सागर इधर आ कर बैठ मेरा मुंह खाली है।”
सागर ऊपर चढ़ा और अंजली के आगे बैठ गया। उसका लंड बिल्कुल कड़क था जिसे अंजली चूसने लगी।
किरन बोली, “देख लो भैया ये लोग भाभी को कितना परेशान करते हैं।”
मैं बोला, “अरे तू क्यों परेशान होती है ये लोग जाने और इनकी भाभी जानें।”
किरन बोली, “हां और क्या भाभी इन्हें सिर पर चढ़ा रही हैं किसी दिन उठा कर पटक भी देंगी तब मज़ा आयेगा।”
मैं बोला, “और हम लोग मजे से देखेंगे।”
हम मज़ाक करते हुए चुदाई कर रहे थे।
उधर अंजली भी अनुज और सागर को एक साथ खुश कर रही थी।
सागर बोला, “भाभी अब इससे बोलो न, कि गांड मारने दे।”
अंजली बोली, “अच्छा अनुज एक मिनट रुको।”
अनुज अंजली की गांड से लंड निकालता है और अंजली उठती है और उठ कर सागर के ऊपर आकर उसे पीछे लेटने को कहती है। सागर खुशी से लेट जाता है। फिर अंजली उसके ऊपर बैठती है उसका लंड अपनी गांड में लेकर। अंजली की पीठ सागर की ओर होती है। जैसे ही अंजली की गांड में सागर का लंड घुसता है सागर के मुंह से आह निकलती है। अंजली पीछे होकर अपने पैरों को फैला कर इशारा करती है अनुज को। अनुज समझ गया था कि उसे भाभी की दोहरी चुदाई करनी थी। सागर के साथ मिलकर वो अंजली के पैरों के बीच आकर जगह बनाता है और फिर अपना लंड पकड़ कर उसकी चूत पर लगाता है, पर अंजली उसका लंड पकड़ लेती है और नीचे खिसका कर गांड पर ही रख देती है और कहती है “घुसाओ अनुज”।
अनुज हैरान रह जाता है और कहता है, “नहीं भाभी लग जाएगी।”
अंजली बोली, “अरे कुछ नहीं होगा घुसाओ तो।”
अनुज अंजली के कहने पर अपना लंड सागर के लंड से घिसते हुए अंजली की कसी हुई गांड में घुसाने का प्रयास करता है।
सागर बोला, “अबे क्या कर रहा है।”
अंजली अपने दांतों को भींचते हुए उसे शांत रहने का इशारा करती है और कुछ पलों की मेहनत के बाद अनुज का लंड भी जगह बनाते हुए उसकी गांड में घुस जाता है और तीनों ही आहें भरने लगते हैं। मुझे और किरन को तो तब पता चलता है क्या हुआ।
किरन बोली, “अरे भाभी दोनों के एक साथ गांड में क्यों ले रही हो।”
मैं बोला, “हां निकालो लग जाएगी, ए तुम दोनों निकालो पीछे से।”
अंजली बोली, “आह्ह्ह्ह अरे नहीं मत निकालो करने दो आह्ह्ह्ह बाबू थोड़ा महसूस करने दो मुझे।”
मैं बोला, “दर्द होगा।”
अंजली बोली, “कुछ नहीं होगा, आह तुम दोनों रुके क्यों हो चोदो मुझे, तबसे मेरी गांड के पीछे थे।”
उन दोनों के लिए भी ये खास अनुभव था। पहली बार एक साथ एक गांड को चोद रहे थे तो दोनों धीरे-धीरे लय बनाकर अंजली की गांड मारने लगे। वहीं अंजली तो बहुत उत्तेजित हो रही थी और अपनी चूत मसलते हुए उन्हें और गांड मारने के लिए उकसा रही थी।
अंजली बोली, “आह्ह ऐसे ही ऐसे ही ओह्ह्ह मारो अपनी भाभी की गांड आह्ह्ह एक साथ ओह्ह्ह्ह मजा आ रहा है आह्ह रुकना मत।”
अनुज बोला, “ओह्ह भाभी चाह कर भी नहीं रुक पा रहा, ओह्ह्ह।”
सागर बोला, “मैं भी।”
मैंने किरण की गांड मारना जारी रखा। कुछ पल बाद ही अंजली झड़ने लगी। ये नया अनुभव उसके लिए काफी था। वो काँपते हुए झड़ने लगी और दोनों के लंड उसकी गांड से निकल गए।
वो झड़ने के बाद हांफते हुए बेजान हो कर लेट गई। वहीं अनुज और सागर हमारी ओर देखने लगे जिस पर किरन बोली, “मेरी तरफ कोई बढ़ मत जाना, दोनों के नुनु काट दूंगी।”
दोनों बेचारे उसकी धमकी से डरते हुए अपने नुनु की सुरक्षा के लिए कमरे से निकल गए।
कुछ पल बाद अंजली की आँखें खुलीं और मुस्कुराते हुए वो हमें देख रही थी।
किरन बोली, “रण्डी भाभी।”
अंजली बोली, “रंडी ननद।”
अंजली उठ कर हमारी ओर आई और किरन की चूत को मसलने लगी। बस इतना ही काफी था किरन को झड़ने के लिए। उसके झड़ने के बाद मैंने उसकी गांड से लंड निकाल लिया। मुझे झड़ने का मन नहीं था और मूत भी आ रहा था। मैं उतर कर बाथरूम की तरफ बढ़ा और मैंने सोचा कि जब सब इतना हो चुका था तो खुल कर ही क्यों न मजे ले। इसलिए मैं मुड़ गया। अंजली और किरन बिस्तर पर बैठ कर एक दूसरे को चूम रही थीं। मैंने उनके पास जाकर उनकी ओर लंड किया और अपने मूत की धार उन पर छोड़ दी। दोनों ही बिल्कुल भी नहीं सकुचाईं, और मेरे मूत से अपने चेहरों को भिगा लिया। कभी मूत में भीगते हुए एक दूसरे के होंठों को चूस रही थी।
इसके बाद हम तीनों लोग बाथरूम में घुस साथ में नहाए। बिस्तर को उठाकर भी धुलने के लिए डाल दिया।
हम तीनों बाथरूम से बाहर निकले तो बदन अभी भी नहाने की ताज़गी और गर्माहट से तर था। अंजली ने अपनी भीगी लटें मेरे कंधे पर डाल दीं और हँसते हुए बोली, “चलो, अब असली नाश्ता करते हैं।” किरन मेरी दूसरी बाँह थामे हुए थी, उसकी उँगलियाँ मेरी कमर पर खेल रही थीं। हम हॉल पार करते हुए रसोई की तरफ बढ़े।
रसोई का दरवाज़ा खुला था। अंदर से गरम तेल की खुशबू, चाय की महक और तवे पर कुछ सिकने की आवाज़ आ रही थी। मैंने झाँका तो नज़ारा देखकर ठिठक गया।
गुंजन मामी सिर्फ एक, पतला-सा एप्रन पहने खड़ी थीं। बस। एप्रन का ऊपरी हिस्सा उनके भारी, दूधिया चूचों को मुश्किल से संभाल पा रहा था — दोनों चूचे आधे-आधे बाहर झाँक रहे थे, निप्पल हल्के से उभरे हुए। नीचे कुछ नहीं था। उनकी चिकनी कमर, गोल-मटोल चूतड़ और मोटी टाँगें पूरी तरह नंगी थीं। वो चूल्हे पर पराठा सेंक रही थीं, कमर लचकाते हुए, जिससे उनका नंगा बदन हर हलचल के साथ हिल रहा था। एप्रन का फीता पीठ पर ढीला बँधा था, जिससे उनकी पूरी पीठ और गांड का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था।
मैं चुपके से पीछे पहुँचा और दोनों हाथों से उनकी कमर को जकड़ लिया। मामी चौंककर हँसी, “अरे...लल्ला... सुबह-सुबह ही शैतानी शुरू?”
मैंने अपना सीना उनकी नंगी पीठ से पूरी तरह सटा दिया। मेरी छाती उनके कंधों से रगड़ खा रही थी। दोनों हाथ ऊपर ले जाकर मैंने उनके भरे-भरे चूचों को एप्रन के अंदर से जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। मेरी उँगलियाँ उनके निप्पलों को पकड़कर खींच रही थीं, दबा रही थीं। मामी की साँसें तुरंत तेज़ हो गईं। उन्होंने सिर पीछे झुकाकर मेरे कंधे पर टिका दिया और धीरे-धीरे कराहने लगीं, “आह्ह्ह... लल्ला... तुम चाय में उबाल आने से पहले मुझे गर्म कर दोगे... आह्ह... इतनी जोर से मत...”
मैंने उनका दायाँ चूचा और भी जोर से मसला, निप्पल को अँगूठे से रगड़ा और कान में फुसफुसाया, “तो मैं तुम्हे ही पी लूं मामी चाय की जगह”
मामी: अह्ह्ह्ह लल्ला
मामी की गांड मेरे लंड पर हिलने लगी। ठीक उसी वक्त पीछे से शालू मौसी चाय का ट्रे लेकर अंदर आईं। उन्होंने हमें देखा तो बोली, “अरे वाह! रसोई में मामी भांजे का प्रोग्राम शुरू हो गया? गुंजन, और चाय चढ़ाई है न और भी लोग रह गए हैं।
मामी: अभी चढ़ाती हूं जीजी, लल्ला थोड़ा छोड़ना तो।
मैंने मुस्कुराते हुए मामी के चूतड़ पर एक जोरदार थपकी मारी, उनके कान में “बाद में मिलते हैं” कहा और तुरंत पीछे हट गया। शालू मौसी ने ट्रे से एक कप चाय निकालकर मुझे थमा दिया। अंजली और किरन दोनों तो तब तक गायब हो चुकी थीं।
बाहर गार्डन में बड़ा चूल्हा जल रहा था। धुआँ हल्का-हल्का ऊपर उठ रहा था। मंजू ताई और सावित्री बुआ (बड़ी बुआ) दोनों वहाँ खड़ी थीं। मंजू ताई ने साड़ी का पल्लू कमर पर खोंस रखा था, ब्लाउज़ के ऊपर के तीन हुक खुले थे — उनके भारी, लटकते चूचे आधे बाहर निकले हुए थे, हर हिलने पर हिल रहे थे। सावित्री बुआ ने हल्का कुर्ता पहना था जो उनके गुदगुदे पेट और मोटे चूतड़ों पर तना हुआ था। दोनों पकौड़े तल रही थीं। तेल की छींटें उनके हाथों, गर्दन और चेहरों पर पड़ रही थीं।
मैं पास पहुँचा तो मंजू ताई ने एक गरम-गरम पकौड़ा उठाकर सीधा मेरे मुँह में ठूँस दिया, “ले बेटा, चख... अभी कढ़ाई से निकाला है।”
मैं: बहुत स्वाद है ताई तुम्हारी तरह
वो दोनों हंसने लगीं।”
मैं चाय का घूँट लेते हुए आगे बढ़ा।
फार्महाउस के बाहर की तरफ जाते हुए नज़ारा और भी मस्त था।
रज्जो चाची भैंस को नहला रही थीं। पानी का टब भरा हुआ था। लेकिन चाची पूरी नंगी थी उनके कपड़े नीचे पड़े थे उनके पीछे चेतन जीजा पूरी तरह नंगे खड़े थेखड़े-खड़े ही उनकी मोटी गांड में लंड घुसाए हुए जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे।
हर धक्के पर रज्जो चाची का बदन आगे की तरफ झुक जाता था। उनके गोल-मटोल चूतड़ लहरा रहे थे। पानी की छप-छप की आवाज़ उनके कराहों के साथ मिल रही थी। चाची दोनों हाथों से भैंस के सिर को पकड़े हुए थीं ताकि वो हिले नहीं।
रज्जो चाची हाँफते हुए बोलीं, “आह्ह्ह... चेतन... आह्ह्ह... धीरे बेटा... भैंस डर जाएगी... ओह्ह्ह... गहरी मत मार... आह्ह्ह...”
चेतन जीजा पीछे से उनकी कमर कसकर पकड़े हुए तेज़ी से ठोक रहे थे, “आह्ह... मामी.. आपकी ये मक्खन वाली गांड... अह्ह्ह पूरे दिन चोदने का मन कर रहा है... ले... ले मेरी जान... कितनी कसी हुई है आज...”
रज्जो चाची की आहें पानी की छपाक के साथ गूँज रही थीं। भैंस बेचारी चुपचाप खड़ी थी, जैसे रोज़ का नजारा हो।
मैं चाय का आखिरी घूँट लेकर मुस्कुराया। वहीं गार्डन में ममता चाची की तेज़ हंसी गूंज रही थी मैने देखा तो पाया जग्गू मोटरसाइकल पर पूरा नंगा बैठा था और उसे चला रहा था वहीं ममता चाची भी पूरी नंगी उसके पीछे बैठ कर घूम रही थी और हंस रही थीं
उन्हें देख कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था सबको आस पास इतना खुश और आनंद में देख मन को बहुत ठंडक मिल रही थी, ये लॉकडाउन किसी भी कारण से लगा हो पर हम लोगों के लिए ये समय बहुत खास था, ये हम सब को साथ में ऐसे रहने और मजा लेने का मौका दे रहा था जो वैसे शायद मिलना मुश्किल था, ये ही जीवन था कोई रोक टोक नहीं, समाज का डर नहीं सिर्फ प्यार और आपस में हवस जो समाज के लिए भले ही खराब मानी जाती हो हमारे लिए अच्छी थी।
अगले दो तीन दिन ऐसे ही बीते पूरे चुदाई और मजे से भरपूर कुछ लोग नंगे ही रहते तो कुछ कपड़ों में हर कोई अपने अपने जीवन का भरपूर आनंद ले रहा था,
जग्गू का चंचल दीदी को पूल के किनारे लिटा कर चोदना हो,
या मेरा पीयूष का और पंकज जीजा का, खुशी भाभी, प्रेमा भाभी और माधुरी ताई को पूल में चोदते हुए रेस लगाना हो कि कौन चोदते हुए दूसरी ओर पहुँचेगा।
कहीं अनुज और प्रीती की प्रेम कहानी पनप रही थी,
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तो कहीं मेरी सासू मां को मेरे मामा अपने लंड पर उछाल उछाल कर सैर करवा रहे थे,
कहीं पर हमारे बड़े फूफाजी अपनी होने वाली बहू यानी खुशी भाभी को साइकिल चलाना सिखा रहे थे,
कहीं पर जग्गू अनुज की सासू मां को ऐसे चोद रहा था जैसे बरसों से उनकी चाहत में बैठा हो
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इसी तरह अगले 2-3 दिन खूब मस्ती और चुदाई में बीते, फिर चौथे दिन मैं, अंजली नीतू और रानी भाभी के साथ साथ एक दो लोग और बैठे थे तो नीतू बोली कि अब कुछ बोरिंग सा होने लगा है, कितनी चुदाई करें उसके अलावा कुछ है है ही नहीं करने को,
रानी भाभी: हाँ चुदाई में मजा तो है पर कुछ नयापन भी होना चाहिए हमें कुछ सोचना चाहिए।
खैर मैने भी सोचा ये लोग सही कह रहे हैं कुछ सोचना पड़ेगा, और सोचने के पहले मैने दोनों की एक एक बार गांड ज़रूर मारी फिर जाकर मेरे दिमाग ने काम किया और मैने फिर रात को सबके सामने बुला कर कहा कि अब से हम लोग हर रोज़ कुछ नया करेंगे, दिन भर चुदाई करने की जगह हम शाम को साथ में करेंगे।
इस पर पीयूष बोला: कर्मा इसमें नया क्या है वो तो हम लोग अब भी करते हैं रात में भी।
मैं: नया ये है कि अब काँट छांट वाली चुदाई होगी।
पूर्वी: मतलब?
मैं: मतलब ये कि हर रोज़ चुदाई की एक कैटेगरी बनाई जाएगी, सबको उसी के अनुसार चुदाई करनी होगी सबके साथ में। और मुकाबले होंगे जो जीतेंगे उन्हें इनाम मिलेगा।
चरण सिंह: चुदाई की प्रतियोगिता ये तो सुनने में मज़ेदार है।
कर्मा: सच में मज़ेदार है, तो कल दो बार चुदाई की प्रतियोगिता होंगी एक सुबह 11 बजे में शुरू होगी और दूसरी रात में इसी समय, अब सुनलो कल सुबह की प्रतियोगिता भाई बहन की होगी इसमें जितने भी भाई बहन होंगे वो शामिल हो सकते हैं।
पंकज: सिर्फ सगे भाई बहन।
मैं: नहीं जीजाजी, मुंह बोले भी या चाचा ताऊ कैसे भी बस रिश्ते में भाई बहन लगने चाहिए,
मामा: और जिसकी दो बहनें हो?
मैं: उसका दोगुना मज़ा।
पल्ली: पर जीत हार का फैसला कैसे होगा?
मैं: सब लोग एक साथ शुरू करेंगे चुदाई जो भी बहन भाई सबसे देर तक बिना झड़े रुक पाएंगे वो जीत जाएंगे, उन्हें नंबर वन भाई बहन का खिताब मिलेगा।
मेरी बात सुनकर लोगों में आपस मे बातें होने लगीं और लोग इसके लिए उत्साहित नज़र आ रहे थे,
इतने में चंचल दीदी बोली: अरे वो तो कल होगा कर्मा आज का क्या प्लान है वो तो बता।
इतने में नीतू और अंजली खड़ी हुई,
अंजली: वो मैं बताती हूँ,
मैं अंजली और नीतू की ओर देखने लगा क्योंकि मैं भी नहीं जानता था उसने क्या सोचा है,
नीतू ने इशारा किया तो किरन और लाडो जो कि दोनों पूरी नंगी थी एक एक कटोरा लेकर आई और खड़ी हो गईं।
नीतू: तुम सब को लाडो और किरन के पास जो कटोरे दिख रहे हैं उनमें पर्चियां जिनपर नाम लिखे हैं, एक कटोरे में आदमियों की और दूसरे में औरतों की, अब होगा ये कि अब दो पर्चियां औरतों के कटोरे से निकलेंगी और 10 आदमियों के से, जो दो औरतें होंगी उनको अकेले अकेले 5-5 आदमियों से चुदवाना होगा और वो भी तब तक जब तक पांचो आदमी झड़ न जायें, अकेले कोई मदद नहीं मिलेगी।
अंजली: दोनों औरतों में से जो पहले पांचों आदमियों को स्खलित कर देगी वो बनेगी आज रात की गैंगबैंग क्वीन, और जो औरत हारेगी उसे अगले एक दिन तक क्वीन की नौकरानी बन कर रहना पड़ेगा।
रिमझिम: इस बीच औरत खुद झड़ गई तो?
नीतू: उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, काम है पांचो आदमियों का रस निकालना।
अंजली और नीतू का प्लान सुनकर तो मैं भी हैरान रह गया और बाकी सब भी, किसी भी चीज़ में जब प्रतिस्पर्धा आ जाती है तो उसका मजा ही बढ़ जाता है, और मेरी तरह बाकी सब को भी ये सुझाव बहुत पसंद आया था।
अंजली: सब तैयार हो इस खेल के लिए?
सबने गर्म जोशी से हां कहा, फिर किरन ने कटोरे को अच्छे से हिलाया ताकि पर्चियां अच्छे से मिक्स हो जाएं और फिर सबसे बड़े यानी नाना को मौका दिया गया कि वो दो पर्चियां निकाल कर दोनों औरतों कौन होंगी ये बतायें, नाना ने दो पर्चियां निकाली और किरण को दे दी, किरन ने पहली पर्ची खोली और पढ़ी और फिर सबको दिखाते हुए बोली पहली प्रतियोगी हैं मेरी प्यारी छोटी बुआ: शालू बुआ।
मौसी का नाम आते ही सब तालियां पीटने लगे वहीं मौसी भी शर्माते हुए खड़ी हुई, वो थोड़ी सी घबराई सी लग रही थी तो अंजली ने जाकर उन्हें गले लगाया और बोली: घबराओ मत मौसी पांच लंड मिलने वाले हैं अच्छे से निचोड़ लेना,
मौसी: बिलकुल बिटिया, अब तू देख मेरा जलवा
अंजली और मौसी दोनों साथ में हॉल के बीच आ गए,
नीतू: किरन बता मौसी का मुकाबला किससे है?
किरन ने दूसरी पर्ची पढ़ी और उस पर देखते हुए बोली: बुआ का सामना करेंगी हमारी रज्जो बुआ,
मतलब दूसरा नाम निकला रज्जो चाची का, अब दोनों ही प्रतियोगी एक से बढ़ कर एक थे, रज्जो चाची भी शर्माते हुए और सकुचाते हुए खड़ी हुई, उन्हें भी अंजली गले लगा कर लेकर आई,
नीतू: तो एक तरफ हैं मौसी, और एक तरफ हैं मेरी मम्मी, और ये दोनों ही लंड की प्यासी चुदक्कड़ रंडिया हैं तो मुकाबला तगड़ा होगा।
नीतू ने ये कहा तो सब हंसने लगे, इसी बीच पूर्वी दीदी ने पूछा कि जब इनकी चुदाई होगी तो बाकी सब क्या करेंगे,
अंजली: हम लोग दर्शक बनेंगे, चुम्मा चाटी और चूची दबाना चलेगा बस कोई दर्शक चुदाई नहीं करेगा।
मामा: लो भाई अब इसमें तो हमें भी रुकना पड़ेगा।
किरन: ये ही तो मज़ा है पापा।
नीतू: अब मम्मी और मौसी आदमियों के कटोरे से पांच पांच पर्चियां निकालेंगी, जो पर्चियां मम्मी निकालेंगी वो आदमी मौसी को चोदेंगे, और जो मौसी निकालेंगी वो मम्मी को।
पहले मौसी को मौका मिला तो उन्होंने पर्ची निकाली और बोली: प्रकाश भाई साहब,
यानि प्रीती और पंकज के पिता वो अपना नाम सुनकर उठे और हँसते मुस्कुराते हुए रज्जो चाची के पास जाकर खड़े हो गए,
फिर रज्जो चाची ने पर्ची निकाली और बोली: सुजान सिंह जीजाजी।
अपना नाम सुनकर बड़े फूफाजी खड़े हुए और मौसी के पास जाकर खड़े हो गये,
फिर मौसी ने एक पर्ची निकाली जिसमें चेतन जीजा का नाम था, चेतन जीजा भी तुरंत जाकर रज्जो चाची के पास खड़े हो गये, फिर रज्जो चाची ने पर्ची निकाली और उसमें चरण सिंह ताऊ का नाम है तो वो उठे और मौसी के पास आकर खड़े हो गये, अगली पर्ची मौसी ने निकाली उस पर पापा का नाम था पापा उठ कर रज्जो चाची के पास खड़े हो गये फिर रज्जो चाची ने निकाली जिस पर उदयवीर ताऊजी का नाम था, अगली पर्ची जो मौसी ने निकाली उस पर मामा का नाम था जो रज्जो चाची के पास खड़े हो गये, उसके बाद रज्जो चाची ने निकाली जिस पर उनके बेटे सरजू का नाम था, वो उठ कर मौसी के पास खड़ा हो गया मौसी ने अपनी आखिरी पर्ची निकाली जिस पर जग्गू का नाम था, वहीं रज्जो चाची ने अपनी आखिर पर्ची निकाली जिस पर मेरे ससुरजी महिपाल सिंह का नाम था।
जो लोग रज्जो चाची के पास खड़े थे और उन्हें चोदने वाले थे:- प्रकाश ताऊजी, चेतन जीजा, पापा, मामा, जग्गू
जो लोग मौसी के पास खड़े थे और उन्हें चोदने वाले थे: बड़े फूफाजी, चरण सिंह ताऊजी, उदयवीर ताऊजी, सरजू, महिपाल सिंह।
हम सब दर्शक लोग हॉल में घेरा बना कर बैठे थे और ये दोनों समूह अलग अलग होकर तैयार थे आज की प्रतियोगिता के लिए।
जारी रहेगी






Kahani Sundar hai or achhi chal rahi hai bas ek chhota mashwara dena chahunga writer Saab ki kahani me sabke bich sab kuch ho chuka hai to kuch naye kirdar jese maa bete ki jodi ya baap beti ki jodi ko intro karaiye fir wo dheere dheere is mahol me khule fir unse jude or rishtedar aa jaye ......or kahani me karma sabse tagda hai kyo na ek aisa character ho jo jo uski takkar ka ho or bade budhe sab ikkatha hai or hone wale bacho ki bate na ho to ajib lgta h kese sb bache honge or usi raah par chalenge jis unke maa baap chal rhe h baki aap bhot shandar writer h isliye kahani me itna intrest aata h varna kuch kahani to thode dino me bore karne lgti h .... Keep it up