उसे देखकर ही, मेरी नजरें बहक जाती थीं,
ये उन दिनों की बात है, जब वो स्कूल आती थी,
पढ़ना सबसे कठिन मेरे लिए था, कठिन था स्कूल जाना
पर उसके आने से पूरी पाठशाला महक जाती थी,
उसे देखना इश्क़ था या था बचपना मेरा,
सब पढ़ते रहते थे किताबें वो नजरें मिलाती थी,
मैं किताबों से चुरा नजरें उससे मिलाता था,
उसे इश्क़ था या नहीं पर वो भी मुस्कुराती थी
चोरी से चुराई थी किताब से फोटो मैंने उसकी
मुझे ही छोड़कर के वो, सबको चोर बताती थी,
दिन बीत गये वो यादें हो गयीं अब धुंधली सी
वो भूल गई थी मुझको, मुझे यादें सताती थीं।
ना मिलती थी कभी ना बोलती थी कभी मुझसे,
कैसा प्यार था उसका वो कैसी प्रीत निभाती थी।
मेरा मन नहीं लगता था उस दिन स्कूल में
जिस दिन वो भी स्कूल न आती थी
मैं तो आज भी उससे ही मोहब्बत करता हूं
पर तब किसी और से झूठा प्यार करके वो मुझे आजमाती थी।।