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Incest Maa or mera naya rishta

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dkpk

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अगले सुबह मैं और संगीता तरोताज़गी से भरे हुए थे. हमने एक दूसरे को गुड मॉर्निंग किस किया और मम्मी के कहने पर फटाफट तैयार होकर नाश्ता करने चले गए. मैं बैठा हॉल में टीवी देख रहा था की तनुश्री आंटी का आगमन फिर से हुआ.

आंटी का गांड बहुत बड़ा था, जब मटक कर चलती थी तो दोनों कूल्हे ऊपर नीचे होने लगते थे. मम्मी के साथ बात करने के लिए वो पीछे आंगन में चली गई. संगीता वहीं आंगन से सटे किचन में काम कर रही. उन दोनों के पीछे जाते ही मैं संगीता के पास गया.

जैसा की मम्मी और तनुश्री आंटी पीछे आंगन में बैठी बात कर रही थी यह पक्का था कि घर में तो कोई नहीं था. मैंने देखा संगीता कान लगाए खिड़की से उन दोनों की बातें बड़ी ध्यान से सुन रही थी. मैंने जैसे ही संगीता के कंधे पर हाथ रखा वो डर गई और तुरंत मुझे चुप रहने को कहा. और कहने लगी कि मैं भी उसके साथ उन दोनों की बातें सुनु. मैंने संगीता को पीछे से अपनी बाहों में भर कर उसके बालों की खुशबू को सूंघते हुए उन दोनों की बातें सुनने लगा.



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आंटी: अंजू मेरा तो बड़ा बुरा हाल है.
मम्मी: क्यों ऐसा क्या हो गया? तनुश्री तुम्हें भला किस बात की चिंता, तुम्हारे पति की तो अच्छी खासी नौकरी है शहर में.
आंटी: यही तो चिंता है कि वो शहर में है और मैं यहां अकेली पड़ी रहती हूं. ना कोई बात करने वाला ना कोई मेरा ख्याल रखने वाला.
मम्मी: तो उनके पास क्यों नहीं चली जाती.
आंटी: कैसे जाऊं वहां उनका फील्ड जॉब है. वहां भी वह रूम पर नहीं रहते, कभी इधर कभी उधर.
मम्मी: रिटायरमेंट में कितना साल बाकी है?
आंटी: अभी 6 साल, और तुम्हारी तो पांच उंगलियां घी में है.
मम्मी: वो कैसे?
आंटी: अरे पति का प्यार भी मिलता है और साथ में परिवार का सुख. सच कह रही हूं मेरा बदन बहुत प्यासा रहता है कोई तो होता जिसके साथ मैं रात गुजारती.
मम्मी: ओ तनुश्री. तो तुम इस बात से परेशान हो.
आंटी: हां यार. देखो ना हर दिन बस उंगली से काम चलाना पड़ता है.

संगीता यह सुनकर दंग रह गई और मेरे हाथों को कसकर पकड़ लिया. मैं भी तनुश्री आंटी के मुंह से यह सब पहली बार सुन रहा था. आखिर वो भी चुदासी बैठी है.

मम्मी: उंगली के ही सहारे सही तुम्हारी बेचैनी तो शांत हो जाती है ना.
आंटी: कैसे शांत होगी, जब तक कोई मोटा लंड बुर को भर नहीं देता तब तक कहां शांति.

इसी बीच संगीता,

संगीता: भैया यह बुर क्या होता है?
मैं: चूत को कहते हैं.

मम्मी: (हंसते हुए) हो... बस भी करो कोई सुन लेगा.
आंटी: हां कोई सुन ही ले. किसी से कहना मत पर मन तो बहुत करता है. कोई जवान लड़का मिल जाता तो मजा आ जाता.

यह सुन हम तीनों हैरान रह गए कि तनुश्री आंटी इस हद तक गुजरने को तैयार है और खास करके संगीता. उसे तो इस बात का अंदाजा ही नहीं था की इस उम्र में कोई औरत, जवान लड़कों की ख्वाहिश रखती है.

मम्मी: तनुश्री थोड़ा धीरे बोलो. यह सब बातें ऐसे नहीं की जाती.
आंटी: हां जानती हूं. लेकिन जब से चाचि भतीजे का कहानी सुना है ना तब से मेरी नियत भी बिगड़ने लगी है.
मम्मी: अच्छा उम्मीद रखो, सब कुछ अच्छा हो जाएगा.
(मम्मी ने चुटकी लेते हुए कहा) वैसे भी तुम्हारी उम्र कितनी हुई है. अभी तो तुम जवान हो.

आंटी: हां... हां! तुम भी मजे ले लो.

उनकी बातें चल ही रही थी कि संगीता ने मेरी तरफ पलट कर देखा.

संगीता: भैया सुना आपने? आंटी को तो देखो कितनी बेचैन है कि किसी भी लड़के से करवाने को तैयार है.
मैं: होता है संगीता, बेचैनी ही ऐसी होती है. हम दोनों को ही देख लो, है तो भाई बहन ना.
संगीता: हां फिर भी किसी जवान लड़के से रिश्ता इस आंटी के साथ. ऐसी औरत को कौन पसंद करेगा?
मैं: तुम नहीं जानती आजकल के लड़कों को आंटीयां ज्यादा पसंद आती है.
संगीता: आपको तो बड़ा पता है.
मैं: नहीं बस ऐसे ही. अच्छा यह सब छोड़ो, कौन से कलर की पैंटी पहनी हो?
संगीता: ऐसे कैसे बता दूं, रात को खुद देख लेना.

संगीता मेरे होठों के करीब आकर चुम्मा लेने लगी मैं भी मेरी प्यारी बहन को बेहन को अपने सीने से लगाकर चूमने लगा.

रात हुई मैं और संगीता कमरे में,

मैं: अब तो बता दो.
संगीता: सोचो कौन से कलर की होगी.
मैं: नहीं सोच पा रहा.
संगीता: चलो ठीक है, तो आज एक खेल हो जाए? अगर आपने सही बता दिया तो आप जो बोलोगे मैं करूंगी और गलत हो गया तो फिर आप मुझे पिज्जा खिलाने ले चलोगे. लेकिन सिर्फ तीन ही मौका मिलेगा.
मैं: चलो ठीक है लगी शर्त.

क्योंकि काले रंग की पैंटी उसने कल ही पहनी थी और उससे पहले नीले रंग की. तो जरूर इन दोनों से अलग कुछ उसने पहना होगा. मेरे दिमाग में आया.

मैं: रेड कलर.
संगीता: (मुस्कुराते हुए) गलत, और सोचो.
मैं: पिंक.
संगीता: चलो मेरा पिज़्ज़ा तो फिक्स हो गया लगता है.
मैं: ग्रे कलर.
संगीता: चलो तो कल पिज़्ज़ा खिलाने कहां लेकर चल रहे हो?

ऐसे करते-करते मेरा हर जवाब गलत होता गया. ऐसा कौन सा रहस्यमई में रंग था जो मेरे दिमाग में नहीं आया.
मेरा लंड खड़ा हो गया था यह सोच-सोच कर.


मैं: हां-हां ठीक है, मैं हार मानता हूं. अब तो बता दो.
संगीता: खुद देख लो, मैं क्यों बताऊं.

उसके इजाजत देने के बाद मैंने प्यार से उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया. यह मेरे दिमाग में पहले क्यों नहीं आया- एक पीला रंग.



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मैंने आव देखा ना ताव उसे बिस्तर पर पटक कर उसके दोनों हाथों को जकड़ कर उसके होठों को चूमने लगा. हम दोनों की गर्म सांसे एक दूसरे से टकरा रही थी. उसके वही रसीले लाल होठ का मजा. उसने मेरे खड़े लंड को अपने पेट पर महसूस किया और हाथ डालकर लंड बाहर निकाल सहलाने लगी. इस बार उसकी पकड़ थोड़ी मजबूत थी सहलाने के साथ-साथ उसने हीलाना भी शुरू कर दिया. संगीता की पकड़ धीरे-धीरे और मजबूत होती गई और मेरे लंड को जोर-जोर से हीलाने लगी, मेरी सांसे भी फूलती रही.

वो इस कदर मेरा लंड हिला रही थी जैसे की वो मेरे लंड से वीर्य निकलता देखना चाहती हो. पर तभी उसने अपने हाथों को रोका, मुझे कुछ सोचने का मौका मिलता इससे पहले ही वो मेरा खड़ा लंड अपनी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगी बिना पैंटी को खोलें. उसकी यह बेचैनी देखकर मैं समझ गया कि आज उसे वेश्याओं की तरह चूदवाने का मन है. संगीता अपनी चूत को लंड के ऊपर दबाने लगी और धीरे-धीरे लंड पूरी तरह से उसकी चूत में समा गया. संगीता ने भी गहरी सांस ली.



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संगीता: आअह्ह्ह्ह...भैय्याआआ...बहुत मजा आ रहा है !!!

धीरे-धीरे वो अपनी गांड को उठाते हुए ऊपर नीचे बैठने लगी.

संगीता: आह्ह्ह…आह्ह्ह…आह...

वो ऐसे ही ऊपर नीचे होते हुए चूदवाते रही. उसके गांड से मेरी जांघों का टकराना शुरू हो गया. हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था पर क्योंकि संगीता अभी नई-नई थी, उसके चेहरे पर बढ़ता हुआ पसीना और थकान मैं साफ-साफ देख सकता था. मैं उसे और तंग करना नहीं चाहता था और मैं यह भी जानता था की प्यास अभी भी अधूरी है. मैं फिर से उसे बिस्तर पर सीधा सुलाता हुआ उसके ऊपर आया और अपना लंड चूत में घुसा कर चोदने लगा. अब जाकर उसने राहत की सांस ली और पूरे मजे लेने लगी.


संगीता: हां भैया... ऐसे ही... ओह....

मैं भी गुर्राता हुआ शेर की तरह चोदता रहा.

संगीता: आह्ह्ह्हह…….ओह यस...यस...भैय्याआआ...चोदो...
मैं: हां मेरी जान...भैया चोद रहा है देखो.

और लगातार 15- 20 झटका लगाने के बाद, हमारे मन को आखिर मिल ही गया. फिर से हमें एक सुकून भरा है नींद आया और आंख सीधा अगली सुबह ही खुला.


संगीता शायद पीछे आंगन की सफाई कर रही थी. मैं भी फ्रेश होने के बाद फिर किचन में पानी पीने गया तो देखा मम्मी वहीं पर खाना बना रही है.


मम्मी: उठ गया तू, क्या बात है आजकल बहुत देर तक सोता है?
मैं: इसमें नई बात क्या है मम्मी, मैं तो हमेशा से ही लेट उठता हूं.
मम्मी: पर ऐसे काम नहीं चलेगा. सुबह जल्दी उठने की आदत डाल ले.

मैं मम्मी के करीब जाकर उसे उसके होठों को चूमता हुआ,

मैं: अच्छा सुनो, मेरी बात हुई है मेरे दोस्त से. उसने अगले महीने इंटरव्यू के लिए बुलाया है उसके पापा की कंपनी में.
मम्मी: सच! में मेरा बेटा नौकरी करने जाएगा, देखते ही देखते तू कितना बड़ा हो गया?

मम्मी ने मुझे कसकर अपनी बाहों में भर लिया और उसकी आंखों में हल्की नमी थी.

मैं: क्या हुआ मम्मी? आप रो मत.
मम्मी: नहीं यह खुशी के आंसू है.

कहकर उसने मेरे माथे को चुम्मा. मैं भी उसे कस के जकड़ते हुए उसके होठों को चुमा क्योंकि हम दोनों अब सिर्फ माँ और बेटे नहीं, उससे भी आगे बहुत कुछ थे.


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मम्मी को चूमने के बाद अपनी बेहन को कैसे भूल सकता हूं. मैं फिर पीछे गया जहां संगीता साफ सफाई कर रही थी.

संगीता: भैया उठ गए?
मैं: सुबह मुझे उठा दिया करो. पता है, मम्मी बोल रही थी आजकल मैं बहुत सोने लगा हूं देर तक.
संगीता: उठाती तो हूं पर आप उठाते कहां हो, बस 5 मिनट बोलकर फिर सो जाते हो.
मैं: कल से पक्का उठ जाऊंगा. चलो पहले प्यारा सा चुम्मा दो.

संगीता भी मेरे तरफ आगे बढ़ी और मुझे एक मीठा सा चुम्मा दे दिया. सच में दिन कितना अच्छा गुजरता है अगर सुबह ही सुबह माँ और बहन दोनों का चुम्मा मिल जाए.

नाश्ता करने के बाद मेरा मूड हुआ कि मैं अपने दोस्त से मिलकर आऊं.

मैं: अच्छा मम्मी मैं जा रहा हूं कमल से मिलने.
मम्मी: वही जिसके वहां पर इंटरव्यू के लिए जाने वाला है?
मैं: हां देखो कुछ घंटे में आ जाऊंगा.
मम्मी: ठीक है, आराम से जाना.

मैंने भी मोटरसाइकिल चालू की और निकल पड़ा. कुछ दूर जाते ही मैंने देखा तनुश्री आंटी कहीं जा रही थी.

मैं: आंटी कहां जा रही हो?
आंटी: ऐसे ही खाली बैठी थी तो सोचा भैया और भाभी से मिलकर आ जाऊं.
मैं: पर वो तो अगले शहर में रहते हैं ना?
आंटी: हां देख ना, निकल तो गई हूं पर इतना दूर है कि फिर हिम्मत नहीं होती.
मैं: तो आप कैसे जाओगी?
आंटी: पहले रेलवे स्टेशन फिर वहां से उनके घर.
मैं: मैं आपको छोड़ देता हूं.
आंटी: अरे पर रेलवे स्टेशन तो बहुत दूर है. तू क्यों परेशान होता है.
मैं: परेशानी वाली कोई बात नहीं है, मैं भी उसी तरफ जा रहा हूं.
आंटी: अच्छा फिर ठीक है.



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कहकर वो मेरे पीछे बैठ गई और हमने सफर शुरू किया.
कुछ दूर आगे जाकर मैंने सही मौका देखते हुए आंटी से पूछ लिया.


मैं: आंटी आपका मन कैसे लगता है पूरे दिन, अकेले रहती हो.
आंटी: तभी तो तेरी मम्मी को ढूंढते रहती हूं. कम से कम कुछ बातें कर लूं.
मैं: हां फिर भी अकेले रहना तो बहुत अजीब लगता होगा.
आंटी: हां राहुल यह बात तो है. मेरे समझ में नहीं आता की कब मेरा परिवार साथ में होगा. दोनों बेटे अपनी बीवियों के गुलाम बने पड़े हैं शहर में. वो भी आने का नाम नहीं लेते.
मैं: तो आपने क्या सोचा है, क्या ऐसे ही अकेले रहना है?
आंटी: अच्छा तो तू मुझसे दोस्ती कर ले. हम दोनों रोज घूमने चलेंगे, मैं तुझे बढ़िया-बढ़िया खाना खिलाऊंगी और फिर मूवी देखने भी चलेंगे.
मैं: क्यों मजाक करती हो आंटी.
आंटी: मजाक नहीं, सच में. फिर मैं भी कह सकती हूं ना किसी से, देखो मैंने नया दोस्त बनाया है.

मैंने कुछ दूर जाकर गाड़ी रोक दिया एक सुनसान जगह पर. क्योंकि वो जगह सही थी बात करने के लिए.

आंटी: क्या हुआ राहुल गाड़ी क्यों रोक दिया?
मैं: आंटी मैं जानता हूं कि आप तकलीफ में हो. आप अकेले रहती हो, आपको भी साथ की जरूरत महसूस होती है.
आंटी: कहना क्या चाहता है राहुल?
मैं: आप कहो तो मैं आपकी मदद कर सकता हूं.
आंटी: तुझे यह सब कैसे पता?
मैं: कैसे पता नहीं होगा, आप मेरी पड़ोसी हो. चेहरा देखकर तो पता चलता ही है, आप कितना उदास रहती हो. और आप फिक्र मत करो आप मुझसे कह सकती हो अगर कोई ऐसी बात है जो बताने जैसी नहीं है तो भी, मैं किसी से नहीं कहूंगा.
आंटी: राहुल, तू यह किस तरह की बात कर रहा है मुझसे?
मैं: आंटी सोच लो मैं सच में नहीं कहूंगा किसी से.
आंटी: नहीं राहुल ऐसी कोई बात नहीं है. हम चलते हैं नहीं तो ट्रेन छूट जाएगी.
मैं: आंटी यह सही मौका है, मेरी बात मान मानो. आप मुझसे कह सकती हो.

यह सुनकर उसके चेहरे का हाव-भाव थोड़ा बदलने लगा. वो काफी हिचक रही थी इन सब बातों को मुझसे करने के लिए. मैंने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रख दिया.

मैं: कहो आपको जो कहना है, डरो मत.
आंटी: कैसे कहूं?
मैं: ज्यादा सोचो मत, बस कह दो.
आंटी: इतने सालों से मैं अकेली रह रही हूं और पता नहीं और कितने दिन अकेला रहना होगा मुझे. मुझे साथी की बहुत जरूरत लगती है, पर तेरे अंकल भी शहर के बाहर हैं. तो मेरे समझ में नहीं आता मैं क्या करूं?
मैं: मैं एक बात कहूं? मेरा एक दोस्त है जो आपका साथ देगा.
आंटी: पर किसी को पता चल गया तो
मैं: कैसे पता चलेगा यह बात तो सिर्फ मैं मेरे और आपके बीच में है
आंटी: बेटा मुझे बहुत डर लगता है मेरी इज्जत चली जाएगी अगर पता चल गया तो. अभी-अभी मेरे भाभी के चाचि और भतीजे के बीच में चक्कर था उनका बड़ा बुरा हाल हुआ आखिर में उन्हें भागना पड़ा.
मैं: ऐसा कुछ नहीं होगा.



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उसकी आंखों में एक चमक भी दिखाई दी.

आंटी: कौन है तेरा दोस्त? तेरे ही उम्र का है क्या?
मैं: हां-हां, आपको भी मिलकर अच्छा लगेगा उससे. आप बस मुझे 5 मिनट दो मैं उससे बात कर लूं.


उसने आंखों ही आंखों से इशारा करते हुए मुझे इजाजत दिया. मैं थोड़ी दूर जाकर अपना फोन निकाला,

मैं: और आदि क्या हाल-चाल है?
आदि: अरे वाह राहुल भाई इतनी जल्दी मुझे याद कर लिया कैसे?
मैं: तुम्हें आंटी चाहिए थी ना.
आदि: आंटी, क्या बात कर रहे हो सच में? जुगाड़ हो गया?
मैं: हां पर सुनो, उसे बहुत प्यार से रखना. वो मेरे भरोसे है और मैं कल जो आंटी के साथ तुम्हारे पास आया था वो उसे पता नहीं चलना चाहिए.
आदि: हां हां वादा करता हूं भरोसा रखो.
मैं: तो लेकर आऊं?
आदि: यह भी कोई पूछने की बात है! सच में तुमने मेरा दिल जीत लिया, आज से मेरा लॉज तुम्हारे लिए फ्री है.

आदि से बात करके मैं आंटी के पास आया और,

मैं: तो फिर चले आपके बॉयफ्रेंड से मिलने?
आंटी: हो...सच में अभी...?
मैं: हां क्यों?
आंटी: राहुल मुझे बहुत घबराहट हो रही है. मैं कभी किसी और मर्द से इस तरह नहीं मिली हूं.
मैं: आंटी आप तो जवान लड़कियों की तरह शर्मा रही हो. जैसे वो अपने बॉयफ्रेंड से पहली बार मिलती है.
आंटी: हां मेरे लिए तो यह पहली बार ही है.

उसके मन में खुशी और घबराहट दोनों एक साथ था नए जवान लड़के से मिलने का.

आंटी: लेकिन मैं तो उधर भैया को कह दिया है कि मैं आ रही हूं.
मैं: कोई बात नहीं उन्हें मना कर देना ना. कह देना कोई काम आ गया था.

उसके तो पैर ही जमीन पर नहीं थे. मिलने से पहले ही उसे ऐसा लग रहा था सब कुछ मिल गया है. उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ एक शर्मिंदगी थी.


आंटी: राहुल मैं तेरा यह एहसान कभी नहीं भूलूंगी. तुझे किसी भी चीज की जरूरत हो तो मुझे कहना.

मैं आंटी को लेकर आदि के पास पहुंचा. आदि उसे देखकर खुशी से फूला नहीं समाया. इधर तनुश्री आंटी का चेहरा भी शर्म से लाल हो गया था. उधर आदी भी थोड़ा शर्मा रहा था क्योंकि यह उसके लिए एक नया अनुभव था.

मैं: आंटी इससे मिलो यह है आदि और यह तनुश्री आंटी.

दोनों ने शरमाते हुए हाथ मिलाया.

मैं: जाओ अब, शर्माना छोड़ो भी.



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वो दोनों कमरे की ओर चले गए. मैं बाहर बैठा इंतजार कर रहा था. तनुश्री आंटी की चाल बहुत ही कामुक थी. जब वो चलती थी, उसके मोटे-मोटे दोनों गांड उसकी चाल पर थिरकते थे. आंटी बहुत दिनों से चुदासी थी. आज दोनों में से किसी एक की हालत खराब होना तो तय था.


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लगभग 1 घंटे बाद आदि बाहर आया.


मैं: क्या हुआ आंटी कहां है?
आदि: यार मत पूछो, वो कमरे में ही है.
मैं: क्या हुआ, तुम तो पसीने से नहा रहे हो.
आदि: यार क्या बताऊं, क्या गजब की चीज है! मैंने जितना सोचा था यह उससे बढ़कर है. मेरा पानी छूटने के बाद भी वो हार नहीं मानी और मेरे कमर को पकड़ कर अपनी और हिलाई जा रही थी. मेरी तो हालत खराब हो गई.
मैं: पोजीशन चेंज करके नहीं किया था क्या?
आदि: यार क्या कहूं पहली बार अपनी माँ की उम्र की औरत से मिला. मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा था मैं क्या करूं. उसका चूत है कि भोसड़ा पूरा लंड अंदर समा गया फिर भी वो और अंदर डालने के लिए कह रही थी और गांड तो दोनों हाथ से पकड़ में नहीं आ रहा.



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मैं: मैंने कहा था ना टिक नहीं पाओगे.
आदि: यार सच में, सलाम है तुम्हें. पता नहीं कैसे उस दिन 4 घंटे तक टिके रहे उस हॉट आंटी के साथ. अब मुझे लग रहा है कि अगर वो होती आज तो मैं तो 2 मिनट भी नहीं टिक पाता.
मैं: एक बात बोलूं बुरा तो नहीं मानोगे?
आदि: नहीं यार बोलो ना.
मैं: इसकी जगह अगर तुम्हारी माँ होती तो?
आदि: यार क्या कह रहे हो मैंने कभी नहीं सोचा यह सब तो उसके बारे में.
मैं: एक सलाह देता हूं. सोचना शुरू कर दो तभी जाकर ऐसी औरतों से निपट पाओगे. क्योंकि माँ के ख्याल दूसरी औरतों से भी ज्यादा सेक्सी होते हैं.
आदि: सच में! लेकिन यह तो गलत है ना.
मैं: गलत क्या है, तुम्हारे मन में क्या चल रहा है कौन देखने जाता है.
आदि: मैं इस बारे में तुमसे जरूर बात करूंगा. तुम्हें काफी अनुभव लग रहा है. पर अभी क्या करूं?
मैं: अभी तुम घबराओ मत और मजे करो. वो क्या कर रही है अभी?
आदि: इंतजार कर रही है.
मैं: तो जाओ ना
आदि: मैं यहां से फोन कर देता हूं पास ही में एक होटल वाला है ऑर्डर ले आएगा तुम बस रिसीव कर लेना बहुत भूख लग रही है अब तो मैं अंदर जाता हूं.
मैं: ठीक है


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आंटी एक राउंड फिर से चूदने वाली थी. कुछ देर बाद जब ऑर्डर वाला आया मैं पार्सल ले लिया और आदि को फोन लगाया.

आदि: बस 5 मिनट में आ रहा हूं.

कुछ देर बाद आदि मेरे पास पहुंचा.

मैं: क्या हुआ भाई काम हो गया?
आदि: काम भी हो गया मजा भी आ गया. तुम्हें मजा लेना है तो तुम भी जाओ. वह औरत थकने वालों में से नहीं है.

मैं: नहीं यार जाने दो.
आदि: क्यों तुम्हारा मन नहीं हो रहा क्या?
मैं: यार मैंने उसके साथ कभी किया नहीं है और वो भी पड़ोसी है मेरी.
आदि: तो क्या हुआ, हिम्मत दिखाओ. मुझे तो इतना सिखाते हो. सच में मजा आ जाएगा.

आदि काफी जिद करने लगा पर मेरे मन में यही चल रहा था कि मैंने कभी भी आंटी के साथ कुछ सोचा नहीं. उनकी मदद जरूर की पर अगर मैं ऐसे चला गया तो वो यह समझेगी कि मैं अपने किए हुए एहसान का फायदा उठा रहा हूं.

मैं: नहीं यार अभी रहने दो.
आदि: राहुल देखो तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया है. मैं कह रहा हूं ना कुछ नहीं होगा जाओ.

आदि बाहर ही रुक गया. उसके इतना जिद करने पर मैं भी हिम्मत करके कमरे के पास गया. दरवाजा हल्का सा खुला ही था. जब मैं दरवाजा खोल अंदर की तरफ गया तो मेरे होश उड़ गए. आंटी शायद हल्का नींद में पीठ मेरी तरफ करके सो रही थी और उसकी गांड पूरी नंगी थी. बर्दाश्त नहीं हुआ मैं डरता हुआ धीरे से पास में गया लेकिन उसे इस हालत में देख कर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उससे कुछ कहूं.

लेकिन लंड इतना जोरों से खड़ा हो चुका था की बस उसे चोदने का मन कर रहा था. उसकी मोटी-मोटी गांड देखकर, मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी गांड पर रखा बहुत गर्म थी उसकी गांड.



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आंटी अभी भी मुंह फेर कर सोई हुई थी उसे ऐसा लग रहा था कि मैं आदि हूं. जब मैंने झांक कर देखा तो आंटी की चूत बहुत खुली हुई थी और उसी से सटा हुआ गांड का छेद बंद था. मेरे पैर डर के मारे कांप पर रहे थे. मैं चुपचाप अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया और उसकी चूत से सटा दिया. अभी भी उसकी कोई हलचल नहीं थी बल्कि सिर्फ आंख बंद किए हुए हल्की सिस्क रही थी.

मैं फिर हल्का सा धक्का दिया उसकी चूत खुली होने के कारण लंड तुरंत अंदर घुसने लगा. उसका शरीर काफी गद्देदार था चूत का सुरंग पूरी तरह से खुला हुआ, लंड को अपनाने के लिए बेकरार. मैंने धीरे-धीरे अपना कमर लहराते हुए चोदना शुरू कर दिया आंटी को भी बहुत मजा आ रहा था. यकीन कर पाना मुश्किल था जिस औरत की हालात की वजह से, मैं कुछ देर पहले तक मदद कर रहा था, जो मेरी आंटी थी, उसे मैं ही पहली बार चोद रहा था.


आंटी का जरा भी ध्यान नहीं था कि उसे आदि नहीं बल्कि मैं चोद रहा हूं. मैं भी मौके का फायदा उठा कर धीरे-धीरे उसे चोदता रहा. उसकी सिसकारियां हल्की-हल्की निकल रही थी. आंटी का तो सच में भोसड़ा था जो एक साथ दो-दो लंड भी ले सकता था. उसके भोसड़े का अंदरूनी हिस्सा भी काफी गुदगुदा था. उसका भोसड़ा चारों ओर से लंड को जैसे चाट रहा हो. मैंने थोड़ी रफ्तार बढ़ाई तो "फच-फच" की आवाज आने लगी. जैसे किसी गीली मिट्टी में जूते की फस जाने की आवाज आती है. वो करवट बदल के पड़ी रही.


कुछ 15 मिनट चोदने के बाद मैंने सोचा, आज अच्छा मौका मिला है क्यों ना एक बार गांड चोदने की कोशिश करता हूं. अपना लंड धीरे से बाहर निकाला और सावधानी से उसकी गांड की छेद पर रख दिया अभी भी कोई हलचल नहीं थी. और जैसे मैंने धक्का लगना शुरू किया, उसकी गांड का छेद जो बंद था वो थोड़ा खुल गया. जैसे ही मैं थोड़ा और जोर लगाया लेकिन लंड संघर्ष कर रहा था. शायद उसकी गांड कुंवारी थी, जिसे किसी ने अभी तक नहीं चोदा था. इससे उसे अचानक होश आया. तेज सिसकारी के साथ,


आंटी: राहुल तू ?...हे भगवान...

मैं तुरंत आंटी के पास जाकर उनके होठों को चूमता हुआ शांत करने लगा.

मैं: शांत हो जाओ आंटी, देखो सब हो गया है फिक्र मत करो.
आंटी: राहुल लेकिन तुझसे मैं कैसे करवा सकती हूं.
मैं: क्यों आंटी मुझ में क्या दिक्कत है मैं भी तो जवान हूं.
आंटी: मैंने तुझे कभी उस नजर से नहीं देखा.
मैं: तो आज देख लो.

कहते हुए मैंने धक्का देकर लंड को अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा.

आंटी: आअह्ह्ह्ह...नहीं राहुल उसमें नहीं...कभी नहीं करवाया है बहुत दर्द होगा मत कर.
मैं: धीरे-धीरे करेंगे आंटी, नहीं होगा दर्द.

थोड़ा और जोर लगाया तो लंड एक इंच अंदर घुस गया गांड में.

आंटी: आह...ऊऊह्ह्ह्ह... यह क्या हो गया...आअह्ह्ह्ह...राहुल...

उसकी गांड बाहर से मुलायम लेकिन अंदर से बहुत सख्त था. चोदा पाना मुश्किल हो रहा था, मैंने अपना लंड बाहर निकाला.

मैं: आंटी एक बार आप मदद करो तो हो सकता है.
आंटी: कैसी मदद राहुल
मैं: इसे थोड़ा सा गीला कर दो सब सही हो जाएगा.


कहते हुए लंड को उसके मुंह के पास ले गया. आंटी ने पहले तो मुंह बनाया लेकिन मैं भी थोड़ा जबरदस्ती दिखाते हुए उसके होठों पर रख दिया अपने लंड को. लंड को मुंह के इतने करीब पाकर उसने भी अपने होंठ खोल दिए. इस पूरे सफर में बहुत सारी ऐसी घटनाएं थी जो पहली बार हो रही थी और यह भी पहली बार था कि मैं अपना लंड चुस्वाने जा रहा था और गांड चोदने.

जैसे आंटी ने मुंह खोला, मैं भी अपना लंड थोड़ा अंदर घुसाया. वाह! क्या एहसास था. चूत और गांड का मजा अलग था और चुस्वाने का मजा कुछ और. मैं उसके जीभ को अपने लंड पर रेंगते हुए महसूस कर सकता था. यह देखकर लगा की आंटी को चूसना बहुत अच्छे से आता है. मैंने उसका सिर पकड़ा और अपना लंड पूरा उसके मुंह में अंदर बाहर चोदने लगा. उसके मुंह के किनारों से थूक रिसता रहा. लंड पूरी तरह से उस गर्म थूक से भीगा हुआ था. मैंने आंटी को उल्टा लिटाया और अपने लंड के सुपारे को गांड के छेद पर रखा और ऊपर नीचे करने लगा. लंड पर लगा आंटी का थूक और मेरे निकलते पानी ने गांड को गीला कर रखा था. उसके बाद गांड के छेद पर रख कर जोर से धक्का मारा तो मेरा सुपारा गांड को चीरते हुए अंदर घुस गया. आंटी दर्द से चिल्लाने लगी.

आंटी: आह्ह्ह्हह...राहुल...आह्ह्ह्हह...छोड़ दे मेरी गांड मत मार....

मैं उसकी गांड में लंड घुसाए थोड़ा इंतजार किया कि वो अपने आप को संभाल सके. कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने पर दर्द कुछ कम हुआ तो धीरे धीरे अपना लंड गांड के अंदर बाहर करने लगा, मुझे भी मज़ा आने लगा. मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला दिया. कुछ देर बाद फिर मैंने एक जोरदार धक्का मारा और अपना पूरा लंड गांड में पेल दिया. दर्द से उसकी हालत खराब हो गयी लेकिन चीख़ नहीं निकल पाई. कुछ देर में उसका दर्द कम हो गया और मेरी स्पीड भी बढ़ गयी. मेरे प्री-कम की चिकनाहट से लंड आराम से गांड के अंदर बाहर जा रहा था. वो भी अपना कमर हिला कर साथ देने लगी.


20 मिनट तक मैंने गांड की जबरदस्त चुदाई की और फिर हांफते हुए गांड में ही वीर्य छोड़ दिया. वीर्य की गर्मी को वो अपनी गांड में कर सकती थी. और वो भी साथ में झड़ गई।

मैं गांड में लंड डाले हुए उसके ही ऊपर लेट गया. 5 मिनट बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला. उसकी गांड में दर्द हो रहा था लेकिन जो मज़ा आया उसके सामने वो दर्द कुछ नहीं था.

फिर मैं भी आंटी को घर के लिए लेकर निकल गया.



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रास्ते में आंटी एकदम चिपक कर बैठी थी जैसे अपने पति के साथ बैठी हो. और बीच-बीच में मेरे गले और कान को भी चूम रही थी.

आंटी: राहुल मुझे थोड़ा पहले ही उतार देना कहीं किसी को कोई शक ना हो जाए.

मैं भी उसकी बात मानकर उसे घर आने से कुछ दूर पहले ही उतार दिया. हम दोनों अपने-अपने घर पहुंच गए और रात को वैसे भी संगीता को तो चोदना ही था. सच में लंड में दर्द हो गया था इन औरतों को चोद-चोद के लेकिन उनका आग बुझाना भी तो जरूरी है.
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vs12557

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ok I will try to update.
 
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