मेरी जांघ संगीता के दोनों पैरों के बीच में फंसी थी. देर रात जब मेरी नींद हल्की खुली तो मैंने संगीता के पैंटी में कैद उसकी चूत की कोमलता को अपने जांघों पर महसूस किया. मैं भी अपनी जांघ को हिला कर उसकी चूत को पैंटी से सहलाते हुए उसका मजा लिया. गहरी नींद में होने के कारण उसे भी आराम महसूस हो रहा था. उसके इन हरकतों से ऐसा लग रहा था जैसे वह नशे में हो. मौके का फायदा उठाते हुए मैंने भी उसके होठों को चूम लिया. उसे हल्की गुदगुदी महसूस हुई अपने होठों पर तो उसने करवट बदल ली. पर अभी भी उसे इस बात का एहसास नहीं था कि मैं उसे चूमा है और पीठ मेरी तरफ करके सो गई.
मैंने उसकी फ्रॉक को थोड़ा और कमर तक उठाया. फ्रॉक तो उठा लेकिन अंधेरा होने की वजह से कुछ दिख नहीं रहा था. सिर्फ उसके पेंटी का होने का एहसास हो रहा थी जो काफी टाइट थी. मैंने पेंट के अंदर से ही अपने लंड को उसके गांड पर चिपकाने की कोशिश की. फिर से अपनी जांघ को उसके दोनों पैर के बीच फंसाए और उससे चिपक कर सोया रहा. धीरे-धीरे मैंने महसूस किया. मेरे लंड से हल्का पानी छूटने लगा था. मेरे मन में उसके लिए भी कहीं ना कहीं हवस जाग उठी थी. पर फिलहाल मैंने अपने दिमाग को काबू में करते हुए अपना ध्यान मम्मी की तरफ देने की कोशिश की.
अगले दिन भी मैंने देखा कोई मौका नहीं था जिससे मैं मम्मी को छू सकूं. उसके लिए यह और भी आसान था क्योंकि इस छोटे से घर में हर कोई उसके सामने ही रहता था. रात हुई पर मैंने इस बार संगीता को बिल्कुल नहीं छेड़ा और गौर किया, मम्मी लगभग रात के 11 या 11:30. के बीच बाथरूम में जाती है. मैं सोचने लगा अगर रोज मम्मी का यही टाइम है तो यही सही मौका होगा, सब सो रहे होते हैं.
मैंने तय कर लिया था चाहे कुछ भी कल रात मौका देखकर मम्मी जब बाथरूम के लिए जाती है. ठीक उसी समय उससे मिलूंगा. अगले दिन भी उसे देखकर मैं बस तरसता रहा उसे छूने को और जब रात हुई तो ठीक 11 बजे का इंतजार मेरे दिमाग में था. मैं उससे पहले निकलना नहीं चाहता था क्योंकि मेरे पहले जाने से वह सतर्क हो जाती.
उसके पैंटी में बार-बार लंड हिला कर मैं भी थक चुका था पिछले दो दिन से इसीलिए आज की रात यह जोखिम लेने का फैसला मैंने लिया क्योंकि एक तरफ मेरे पापा दूसरी तरफ मेरी बहन थी. उनके होने से इस घर में मम्मी के साथ खेलना बहुत मुश्किल था. पिछले दो दिन से वह ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे की कुछ हुआ ही नहीं है उसके और मेरे बीच और बस एक आम मां बेटे का रिश्ता बरकरार है. मैं सोचने लगा कि आखिर वह इतना नार्मल कैसे रह सकती है, मैंने उसके साथ सेक्स किया है क्या उसे याद नहीं.
तभी मम्मी की आहट हुई तो मैं तुरंत चौकन्ना हो गया और तुरंत खड़ा हुआ बिस्तर पर से दरवाजे की कुंडी धीरे से खोला तो देखा मम्मी ने बाथरूम का दरवाजा खोला ही होगा कि मैं पीछे से जाकर उसे धकेलता हुआ बाथरूम के अंदर ले गया और दरवाजा बंद कर दिया. इस घटना से वह पूरी तरह डर गई. उसके पास कोई चारा नहीं था ना तो वह चिल्ला सकती थी क्योंकि बाहर तो उसका पति और उसकी बेटी थे. मैंने उसे कुछ सेकेंड के लिए दीवार से चिपकाए रखा.
हालांकि हम दोनों की सांस फूल रही थी. वह डरी हुई थी और मैं भी उत्तेजित और डरा हुआ. उसे ज़ोर से पकड़े रखा. बहुत धीमी आवाज में मेरे कान में बोल रही थी.
मम्मी: मत कर यह सही जगह नहीं है.
क्योंकि हम ज्यादा जोर से बातें नहीं कर सकते थे. मैं भी फुसफुसाते हुए बोला उसके कान में.
मैं: तो फिर कहां चले आप ही बताओ?
मम्मी: मेरा मतलब है यह सब मत कर, दोनों की बदनामी हो जाएगी सब बाहर ही है.
मैं: कुछ नहीं होगा, एक मौका दो.
अपने दोनों हाथों से जोर लगा रही थी छुड़ाने के लिए.
मैं: मम्मी प्लीज, भूल गई वो रात जब हमने साथ में सब कुछ किया था. आपकी चूत में लंड तक डाल दिया था. तभी इतनी परेशान नहीं थी.
मम्मी: तुझे क्या पता मैं कितनी परेशानी थी.
मैं: फिर अच्छा तो लगा था ना आपको.
मम्मी: नहीं छोड़ दे अभी मुझे. हो गया ना कर लिया ना मुझे अब क्या करना है?
और कुछ कहती इससे पहले मैंने उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया. उसका स्तन फूलता हुआ मेरे सीने को दबा रहा था. उस बंद बाथरूम में ना हवा था ना कुछ. हम दोनों थोड़े-थोड़े पसीने से भीगने लगे. तभी मैंने एक हाथ से उसके स्तन को दबाना शुरू कर दिया और उसके कान को चूसना. वह नीचे झुक कर छूटना चाहती थी. तभी मैंने अपने दोनों हाथों से उसे अपनी बाहों में भर लिया और गर्दन पर चूमने लगा. पीछे की तरफ से उसकी साड़ी कमर पर उठाने लगा, और एक हाथ से वो अपनी साड़ी से अपने आप को छुपाने की कोशिश कर रही थी.
मैं: कुछ नहीं होगा. मम्मी एक बार और मान जाओ, सच में खुश कर दूंगा आपको (धीरे से उसके कान में).
मम्मी: मारूंगी अब बेशर्मी मत कर छोड़ दे.
तभी जबरदस्ती मेरा हाथ उसकी पैंटी में डालकर नीचे की तरफ खींचने लगा. उसने भी ताकत लगाकर मुझे रोके रखा. यह बहुत मुश्किल हो रहा था. मुझे आइडिया आया यह मानने वाली नहीं है. मैं तुरंत खुद नीचे झुक गया उसकी पैंटी के सामने. उसने गुलाबी रंग की सफेद धारी वाली पैंटी पहनी थी, वो भी सोच में पड़ गई कि मैं क्या करने वाला हूं. मैंने अपने दोनों हाथ से उसकी गांड को पकड़ा और उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसे चाटने लगा. उसके गोरे बदन पर वो गुलाबी पैंटी बहुत अच्छी लग रही थी. इससे उसने हरकत करना थोड़ा काम कर दिया. तभी मैंने तुरंत अपने एक हाथ से पैंटी को साइड में किया. उसकी चूत अचानक से फड़फड़ाते हुए मेरी आंखों के सामने आ गई. वो भी हैरान करे तो करे क्या? अब तो मैं पूरे मन से उसकी चूत को निहार कर रहा था कुछ सेकेंड के लिए. वो छोटे-छोटे बाल और बीच में भूरे रंग की मां की चूत के दोनों होठ. मुझे रहा नहीं गया, अपना जीवन उसकी चूत के होठों के बीच में डालकर चाटना शुरू कर दिया जो बिल्कुल सूखी पड़ी थी.
अपनी जीभ से अच्छे से गीला करने के बाद उसकी चूत कभी से थोड़ी-थोड़ी नमकीन पानी रिस रहा जिसका एक-एक कतरा मैं पीता रहा. उसकी सांसे और तेज हो रही थी.
मम्मी: आ....ह...आह...(बहुत हल्की आवाज में).
उसकी चूत फैला कर देखा तो उसकी पेशाब का छेद भी नजर आया मैं अपना जीभ लगाकर उसे भी चाटने लगा वो और ज्यादा बेचैन हुई. नीचे मेरा लैंड भी पूरी तरह से खड़ा था. तभी मैं अपने लंड को बाहर निकाल कर खड़ा हुआ और अपने लंड को उसकी चूत से रगड़ने लगा.
मम्मी: मत करना अच्छा नहीं है. तू कंडोम भी इस्तेमाल नहीं करता.
मैं: आप फिक्र मत करो इस बार में बाहर गिरा दूंगा.
मम्मी: नहीं मुझे छोड़ दे प्लीज.
पर सामने से लंड अंदर घुसाने की बहुत कोशिश किया पर जा नहीं रहा था. घुसाने पर भी नहीं घुस रहा था. तभी मैंने उसे पलट कर पीछे की तरफ कर दिया और उसकी पैंटी नीचे कर दी. मेरी आंखों के सामने उसकी मोटी को गोल-गोल गांड थी. अपने दोनों हाथ से उसे मसलने लगा और पेट की तरफ से पकड़ कर उसे थोड़ा झुकाया. वो दोनों पैरों को सिकोड़ रही थी. मैंने अपना लंड बाहर निकाल उसकी गांड पर रगड़ना शुरू कर दिया. वह अपने पैरों को सिकोड़े जा रही थी और हाथ से मेरे लंड को रोक रही थी. उसका पेटिकोट बार-बार नीचे की तरफ फिसलता जा रहा था जिससे मुझे काफी तकलीफ हो रहा था अंदर डालने में.
तभी मैं जबर्दस्ती उसके हाथ को आगे करते हुए उसका पेटिकोट अपने दांत में दबा लिया. उसे दबाकर जल्दी से मैंने अपने लंड को चूत के आगे रखकर धकेल दिया और ऊपर का टोपा उसकी चूत में घुस गया.
मम्मी: इशशश...शश..
फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर घुस जाने के बाद थोड़ी शांत हो गई. तभी मैंने पीछे से धक्का देना शुरू किया. उसके कारण उसका भी विरोध थोड़ा कम हो गया. मैं भी धीरे-धीरे रफ्तार को और बढ़ाया. हम दोनों यह भूल गए कि बाहर हमारा परिवार सो रहा है. उसका पति और उसकी बेटी तो मेरी बहन और मेरे पापा. और इस छोटे से बाथरूम में मैं और मम्मी वो काम कर रहे थे की शायद ही कोई बेटा अपनी मां के साथ करता है.
मेरी जांघों से उसकी जांघे टकरा रही थी और टकराव के कारण थपकीयों की आवाज आने लगी. यह थप..थप की आवाज इस चोदने की प्रक्रिया को और कामुक बना रही थी. तभी वह बोल पड़ी.
मम्मी: धीरे...धीरे...धीरे कोई सुन लेगा.
मैं: अच्छा ठीक है और कैसे चोदना है आप बताओ (उसका पेटिकोट अपने दांत में दबाए चोदते हुए).
उसने कोई जवाब नहीं दिया शर्म के मारे.
मैं तुरंत मम्मी को अपनी तरफ घुमाया. ब्लाउज की हुक को खोलने लगा. उसका हुक काफी टाइट था. वह मुझे देख रही थी बस मुंह बनाए हुए, फिर से कोशिश करते हुए.
मम्मी: मत करना प्लीज. हो तो गया बहुत है इतना.
मैंने उसका हुक भी खोल दिया. उसकी दोनों चूचियां जो अंदर कैद थी, उसे ब्रा से आजाद किया. खींचकर बाहर निकाल दिया और फौरन चूसने लगा.
मम्मी: ओ..हो...बस बहुत हुआ. क्या कर रहा है?
और एक हाथ से उसकी चूत को सहला रहा था. उसे अच्छा लग रहा था तभी लाइट चली गई और पूरा अंधेरा हो गया. पर मैं रुका नहीं उसकी चूचियों को चूसता रहा.
मम्मी भी अपने मुंह को दबाए हुए आवाज न करने की कोशिश कर रही थी. लाइट न होने की वजह से शायद बाथरूम के बाहर भी बिल्कुल शांति हो चुकी थी और हमारी आवाज बाहर जा सकती है. तभी अचानक.
पापा: अंजू...अंजू कहां हो?
मम्मी: (जोर से) आई बस बाथरूम में हूं (तभी धीरे से मेरी तरफ) पागल छोड़....छोड़.
मैं भी डर के मारे रुक गया पापा की आवाज सुनकर
मैं: मम्मी अब क्या करें (घबराता हुआ)?
मम्मी: चुपचाप यहीं पर रहना, आवाज मत करना...सही मौका देखकर अंदर चले जाना कमरे में.
उसने तुरंत अपने साड़ी से ब्लाउज को ढाका और फटाफट साड़ी को संभालते हुए बाथरूम से बाहर गई. मैं भी चुपचाप अंदर खड़ा था और ऐसा लगा जैसे पापा भी उठकर खड़े हो रहे थे. मेरा तो डर के मारे लंड सो गया.
पापा: इन्वर्टर चार्ज नहीं है क्या? इतनी गर्मी हो रही है.
मम्मी: अच्छा आप सो जाइए मैं हाथ वाला पंखा चला देती हूं.
पापा: तुम क्यों परेशान होगी.
शायद पापा ने मम्मी को छू लिया था.
पापा: अरे इतना पसीना कैसे है तुम्हें.
मम्मी: बाथरूम में थी ना. गर्मी कितनी है.
सच में मम्मी को बात छुपाने तो आता था. मुझे भी बचा लिया और खुद को भी तभी मैं धीरे से अपने कमरे में वापस चला गया.
मैंने उसकी फ्रॉक को थोड़ा और कमर तक उठाया. फ्रॉक तो उठा लेकिन अंधेरा होने की वजह से कुछ दिख नहीं रहा था. सिर्फ उसके पेंटी का होने का एहसास हो रहा थी जो काफी टाइट थी. मैंने पेंट के अंदर से ही अपने लंड को उसके गांड पर चिपकाने की कोशिश की. फिर से अपनी जांघ को उसके दोनों पैर के बीच फंसाए और उससे चिपक कर सोया रहा. धीरे-धीरे मैंने महसूस किया. मेरे लंड से हल्का पानी छूटने लगा था. मेरे मन में उसके लिए भी कहीं ना कहीं हवस जाग उठी थी. पर फिलहाल मैंने अपने दिमाग को काबू में करते हुए अपना ध्यान मम्मी की तरफ देने की कोशिश की.
अगले दिन भी मैंने देखा कोई मौका नहीं था जिससे मैं मम्मी को छू सकूं. उसके लिए यह और भी आसान था क्योंकि इस छोटे से घर में हर कोई उसके सामने ही रहता था. रात हुई पर मैंने इस बार संगीता को बिल्कुल नहीं छेड़ा और गौर किया, मम्मी लगभग रात के 11 या 11:30. के बीच बाथरूम में जाती है. मैं सोचने लगा अगर रोज मम्मी का यही टाइम है तो यही सही मौका होगा, सब सो रहे होते हैं.
मैंने तय कर लिया था चाहे कुछ भी कल रात मौका देखकर मम्मी जब बाथरूम के लिए जाती है. ठीक उसी समय उससे मिलूंगा. अगले दिन भी उसे देखकर मैं बस तरसता रहा उसे छूने को और जब रात हुई तो ठीक 11 बजे का इंतजार मेरे दिमाग में था. मैं उससे पहले निकलना नहीं चाहता था क्योंकि मेरे पहले जाने से वह सतर्क हो जाती.
उसके पैंटी में बार-बार लंड हिला कर मैं भी थक चुका था पिछले दो दिन से इसीलिए आज की रात यह जोखिम लेने का फैसला मैंने लिया क्योंकि एक तरफ मेरे पापा दूसरी तरफ मेरी बहन थी. उनके होने से इस घर में मम्मी के साथ खेलना बहुत मुश्किल था. पिछले दो दिन से वह ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे की कुछ हुआ ही नहीं है उसके और मेरे बीच और बस एक आम मां बेटे का रिश्ता बरकरार है. मैं सोचने लगा कि आखिर वह इतना नार्मल कैसे रह सकती है, मैंने उसके साथ सेक्स किया है क्या उसे याद नहीं.
तभी मम्मी की आहट हुई तो मैं तुरंत चौकन्ना हो गया और तुरंत खड़ा हुआ बिस्तर पर से दरवाजे की कुंडी धीरे से खोला तो देखा मम्मी ने बाथरूम का दरवाजा खोला ही होगा कि मैं पीछे से जाकर उसे धकेलता हुआ बाथरूम के अंदर ले गया और दरवाजा बंद कर दिया. इस घटना से वह पूरी तरह डर गई. उसके पास कोई चारा नहीं था ना तो वह चिल्ला सकती थी क्योंकि बाहर तो उसका पति और उसकी बेटी थे. मैंने उसे कुछ सेकेंड के लिए दीवार से चिपकाए रखा.
हालांकि हम दोनों की सांस फूल रही थी. वह डरी हुई थी और मैं भी उत्तेजित और डरा हुआ. उसे ज़ोर से पकड़े रखा. बहुत धीमी आवाज में मेरे कान में बोल रही थी.
मम्मी: मत कर यह सही जगह नहीं है.
क्योंकि हम ज्यादा जोर से बातें नहीं कर सकते थे. मैं भी फुसफुसाते हुए बोला उसके कान में.
मैं: तो फिर कहां चले आप ही बताओ?
मम्मी: मेरा मतलब है यह सब मत कर, दोनों की बदनामी हो जाएगी सब बाहर ही है.
मैं: कुछ नहीं होगा, एक मौका दो.
अपने दोनों हाथों से जोर लगा रही थी छुड़ाने के लिए.
मैं: मम्मी प्लीज, भूल गई वो रात जब हमने साथ में सब कुछ किया था. आपकी चूत में लंड तक डाल दिया था. तभी इतनी परेशान नहीं थी.
मम्मी: तुझे क्या पता मैं कितनी परेशानी थी.
मैं: फिर अच्छा तो लगा था ना आपको.
मम्मी: नहीं छोड़ दे अभी मुझे. हो गया ना कर लिया ना मुझे अब क्या करना है?
और कुछ कहती इससे पहले मैंने उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया. उसका स्तन फूलता हुआ मेरे सीने को दबा रहा था. उस बंद बाथरूम में ना हवा था ना कुछ. हम दोनों थोड़े-थोड़े पसीने से भीगने लगे. तभी मैंने एक हाथ से उसके स्तन को दबाना शुरू कर दिया और उसके कान को चूसना. वह नीचे झुक कर छूटना चाहती थी. तभी मैंने अपने दोनों हाथों से उसे अपनी बाहों में भर लिया और गर्दन पर चूमने लगा. पीछे की तरफ से उसकी साड़ी कमर पर उठाने लगा, और एक हाथ से वो अपनी साड़ी से अपने आप को छुपाने की कोशिश कर रही थी.
मैं: कुछ नहीं होगा. मम्मी एक बार और मान जाओ, सच में खुश कर दूंगा आपको (धीरे से उसके कान में).
मम्मी: मारूंगी अब बेशर्मी मत कर छोड़ दे.
तभी जबरदस्ती मेरा हाथ उसकी पैंटी में डालकर नीचे की तरफ खींचने लगा. उसने भी ताकत लगाकर मुझे रोके रखा. यह बहुत मुश्किल हो रहा था. मुझे आइडिया आया यह मानने वाली नहीं है. मैं तुरंत खुद नीचे झुक गया उसकी पैंटी के सामने. उसने गुलाबी रंग की सफेद धारी वाली पैंटी पहनी थी, वो भी सोच में पड़ गई कि मैं क्या करने वाला हूं. मैंने अपने दोनों हाथ से उसकी गांड को पकड़ा और उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसे चाटने लगा. उसके गोरे बदन पर वो गुलाबी पैंटी बहुत अच्छी लग रही थी. इससे उसने हरकत करना थोड़ा काम कर दिया. तभी मैंने तुरंत अपने एक हाथ से पैंटी को साइड में किया. उसकी चूत अचानक से फड़फड़ाते हुए मेरी आंखों के सामने आ गई. वो भी हैरान करे तो करे क्या? अब तो मैं पूरे मन से उसकी चूत को निहार कर रहा था कुछ सेकेंड के लिए. वो छोटे-छोटे बाल और बीच में भूरे रंग की मां की चूत के दोनों होठ. मुझे रहा नहीं गया, अपना जीवन उसकी चूत के होठों के बीच में डालकर चाटना शुरू कर दिया जो बिल्कुल सूखी पड़ी थी.
अपनी जीभ से अच्छे से गीला करने के बाद उसकी चूत कभी से थोड़ी-थोड़ी नमकीन पानी रिस रहा जिसका एक-एक कतरा मैं पीता रहा. उसकी सांसे और तेज हो रही थी.
मम्मी: आ....ह...आह...(बहुत हल्की आवाज में).
उसकी चूत फैला कर देखा तो उसकी पेशाब का छेद भी नजर आया मैं अपना जीभ लगाकर उसे भी चाटने लगा वो और ज्यादा बेचैन हुई. नीचे मेरा लैंड भी पूरी तरह से खड़ा था. तभी मैं अपने लंड को बाहर निकाल कर खड़ा हुआ और अपने लंड को उसकी चूत से रगड़ने लगा.
मम्मी: मत करना अच्छा नहीं है. तू कंडोम भी इस्तेमाल नहीं करता.
मैं: आप फिक्र मत करो इस बार में बाहर गिरा दूंगा.
मम्मी: नहीं मुझे छोड़ दे प्लीज.
पर सामने से लंड अंदर घुसाने की बहुत कोशिश किया पर जा नहीं रहा था. घुसाने पर भी नहीं घुस रहा था. तभी मैंने उसे पलट कर पीछे की तरफ कर दिया और उसकी पैंटी नीचे कर दी. मेरी आंखों के सामने उसकी मोटी को गोल-गोल गांड थी. अपने दोनों हाथ से उसे मसलने लगा और पेट की तरफ से पकड़ कर उसे थोड़ा झुकाया. वो दोनों पैरों को सिकोड़ रही थी. मैंने अपना लंड बाहर निकाल उसकी गांड पर रगड़ना शुरू कर दिया. वह अपने पैरों को सिकोड़े जा रही थी और हाथ से मेरे लंड को रोक रही थी. उसका पेटिकोट बार-बार नीचे की तरफ फिसलता जा रहा था जिससे मुझे काफी तकलीफ हो रहा था अंदर डालने में.
तभी मैं जबर्दस्ती उसके हाथ को आगे करते हुए उसका पेटिकोट अपने दांत में दबा लिया. उसे दबाकर जल्दी से मैंने अपने लंड को चूत के आगे रखकर धकेल दिया और ऊपर का टोपा उसकी चूत में घुस गया.
मम्मी: इशशश...शश..
फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर घुस जाने के बाद थोड़ी शांत हो गई. तभी मैंने पीछे से धक्का देना शुरू किया. उसके कारण उसका भी विरोध थोड़ा कम हो गया. मैं भी धीरे-धीरे रफ्तार को और बढ़ाया. हम दोनों यह भूल गए कि बाहर हमारा परिवार सो रहा है. उसका पति और उसकी बेटी तो मेरी बहन और मेरे पापा. और इस छोटे से बाथरूम में मैं और मम्मी वो काम कर रहे थे की शायद ही कोई बेटा अपनी मां के साथ करता है.
मेरी जांघों से उसकी जांघे टकरा रही थी और टकराव के कारण थपकीयों की आवाज आने लगी. यह थप..थप की आवाज इस चोदने की प्रक्रिया को और कामुक बना रही थी. तभी वह बोल पड़ी.
मम्मी: धीरे...धीरे...धीरे कोई सुन लेगा.
मैं: अच्छा ठीक है और कैसे चोदना है आप बताओ (उसका पेटिकोट अपने दांत में दबाए चोदते हुए).
उसने कोई जवाब नहीं दिया शर्म के मारे.
मैं तुरंत मम्मी को अपनी तरफ घुमाया. ब्लाउज की हुक को खोलने लगा. उसका हुक काफी टाइट था. वह मुझे देख रही थी बस मुंह बनाए हुए, फिर से कोशिश करते हुए.
मम्मी: मत करना प्लीज. हो तो गया बहुत है इतना.
मैंने उसका हुक भी खोल दिया. उसकी दोनों चूचियां जो अंदर कैद थी, उसे ब्रा से आजाद किया. खींचकर बाहर निकाल दिया और फौरन चूसने लगा.
मम्मी: ओ..हो...बस बहुत हुआ. क्या कर रहा है?
और एक हाथ से उसकी चूत को सहला रहा था. उसे अच्छा लग रहा था तभी लाइट चली गई और पूरा अंधेरा हो गया. पर मैं रुका नहीं उसकी चूचियों को चूसता रहा.
मम्मी भी अपने मुंह को दबाए हुए आवाज न करने की कोशिश कर रही थी. लाइट न होने की वजह से शायद बाथरूम के बाहर भी बिल्कुल शांति हो चुकी थी और हमारी आवाज बाहर जा सकती है. तभी अचानक.
पापा: अंजू...अंजू कहां हो?
मम्मी: (जोर से) आई बस बाथरूम में हूं (तभी धीरे से मेरी तरफ) पागल छोड़....छोड़.
मैं भी डर के मारे रुक गया पापा की आवाज सुनकर
मैं: मम्मी अब क्या करें (घबराता हुआ)?
मम्मी: चुपचाप यहीं पर रहना, आवाज मत करना...सही मौका देखकर अंदर चले जाना कमरे में.
उसने तुरंत अपने साड़ी से ब्लाउज को ढाका और फटाफट साड़ी को संभालते हुए बाथरूम से बाहर गई. मैं भी चुपचाप अंदर खड़ा था और ऐसा लगा जैसे पापा भी उठकर खड़े हो रहे थे. मेरा तो डर के मारे लंड सो गया.
पापा: इन्वर्टर चार्ज नहीं है क्या? इतनी गर्मी हो रही है.
मम्मी: अच्छा आप सो जाइए मैं हाथ वाला पंखा चला देती हूं.
पापा: तुम क्यों परेशान होगी.
शायद पापा ने मम्मी को छू लिया था.
पापा: अरे इतना पसीना कैसे है तुम्हें.
मम्मी: बाथरूम में थी ना. गर्मी कितनी है.
सच में मम्मी को बात छुपाने तो आता था. मुझे भी बचा लिया और खुद को भी तभी मैं धीरे से अपने कमरे में वापस चला गया.