Bht he badiya story likhi hai maza he aagya pad kee bss jldi update de diya kro images to asa lgta hai imagination bilkul hakikat ho
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Meta for running the storyAMAZING UPDATE CAN YOU TELL ME HOW YOU CREATE SUCH REALASTIC PICTURES I MEAN FROM WHICH TOOL

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AMAZING UPDATE CAN YOU TELL ME HOW YOU CREATE SUCH REALASTIC PICTURES I MEAN ..
-Behad mazedaar update ..maa-bete ki prem kahani mein bahan Sangita ki bhi entry karaa do..plz update soonजैसा कि आप लोग ने पिछले भाग में जाना कैसे मेरे पापा शहर से दूर दो महीने के लिए चले गए और उस वजह से मम्मी भी बहुत परेशान हुई और पूरे दिन भाग दौड़ के बाद हमें जाकर एक गेस्ट हाउस का कमरा मिला जहां मुझे मौका मिला मम्मी से नजदीकियां और बढ़ाने का और थके हारे जब हम घर वापस आए तो मैं और मम्मी बाहर सोफे पर बैठे थे और अब संगीता नहा कर बाथरूम से बाहर आ चुकी थी बालों को थोड़ा सूखाने के बाद उसने मम्मी से कहा कि वो बालों को कंघी कर दें.
मम्मी ने उसके बालों को कंघी करना शुरू कर दिया और मैं भी बगल में बैठा हुआ था. मम्मी और संगीता आपस वही औरतों वाली इधर-उधर की बातें कर रही कर रही थी और मैं आराम से सोफे पर बैठा हुआ था कि तभी मम्मी ने मेरे कंधे पर हल्की थपकी मारते हुए,
मम्मी: तू जा रहा है नहाने या फिर मैं जाऊं?
मैं: आप जाओ, मुझे तो पांच मिनट लगता है.
मम्मी: देख मुझे कपड़े भी धोने हैं, तू जा जल्दी नहा ले फिर मैं सब कुछ निपटा कर आती हूं और फिर मार्केट चलना है. कल से हम लोग बाहर है, सब्जी भी नहीं है और भी सामान लेना है.
यह सुनकर मैं खुश हो गया, चलो बढ़िया है और वक्त बिताने को मिलेगा साथ में क्योंकि मम्मी के साथ तो जितना वक्त बिताऊ उतना कम है. मैं फटाफट नहा कर आ गया और फिर मम्मी भी नहाने चली गई और जब वो लौटी तो एक खूबसूरत चॉकलेटी रंग की साड़ी पहने हुए तैयार थी. सच कहूं तो उस पर तो मुझे वो हर रंग की साड़ी में अच्छी लगती थी.
मम्मी: ठीक है संगीता, बेटा ख्याल रखना थोड़ी देर हम आते हैं.
संगीता: हां हां मम्मी ठीक है और भैया को बोलो धीरे चलाया करें बहुत तेज भगाते हैं.
मम्मी: क्यों राहुल ऐसे शैतानी करता है?
मैं: अरे मम्मी आप बताओ ना कभी आपको बैठा कर मैंने तेज गाड़ी भगाया है?
संगीता: अच्छा तो इसका मतलब मुझे जानबूझकर डराते हो.
मम्मी: चल तू बहुत बदमाश हो गया है, क्यों परेशान करता है उसे?
मैं: अच्छा ठीक है...सॉरी मेरी बंदरिया...
संगीता: मम्मी देखो ना फिर से मुझे बंदरिया बोला.
हमारी इस नोकझोंक को खत्म करने के लिए मम्मी ने जल्दी से मुझे चलने को कहा. मैं और मम्मी घर से चल पड़े मार्केट के लिए. वो मुझे रास्ते में समझाते ले जा रही थी.
मम्मी: संगीता को परेशान मत किया कर.
मैं: अब मम्मी उससे मजाक भी नहीं करूं?
मम्मी: मजाक करने से कौन मना कर रहा है लेकिन यह जो मोटरसाइकिल तेज भगाता वो बंद कर दे. तुझे पता है कितनी बुरी तरह से लोग गाड़ियां चलाते हैं कहीं कोई दुर्घटना हो गई तो!
मैं: अच्छा ठीक है नहीं चलाऊंगा तेज.
फिर हम मार्केट पहुंच गए, वहां पहुंचकर मम्मी ने सब्जियां और और जरूरत का बाकी सामान लिया.
तभी मुझे ध्यान आया मैंने कई बार यह चीज गौर किया है की मम्मी के पास बहुत ज्यादा ब्रा पेंटी नहीं है. वही दो-तीन को आज नहीं तो कल पहनती रहती है. तो मैंने उसको टोकना सही समझा आज वो कुछ और नए जोड़े ले ले. वैसे भी पहले वाले पुराने हो गए हैं और अब बारिश का भी मौसम है. चलते-चलते मैंने उनके कान में धीरे से कहा,
मैं: मम्मी नई ब्रा पैंटी ले लो ना.
मम्मी: क्या तू भी कहां-कहां ध्यान रहता है तेरा...
मैं: आप मेरी माँ हो, ध्यान तो रखना पड़ेगा और वैसे भी पापा अभी नहीं है तो यह सब तो मुझे ही देखना पड़ेगा मम्मी: ओ..अच्छा! बहुत समझदार हो गया है. लेकिन अभी जरूरत नहीं है, चल जाएगा. इतना भी कोई पुराना नहीं हो गया है.
मैं: मम्मी ले लो ना.
मम्मी: क्यों तू जिद पर अड जाता है बार-बार. पूजा के वक्त ही तो लिया था एक नया.
मैं: हां तो एक से क्या होने वाला है.
मैंने मम्मी की एक न सुनी, जबरदस्ती लेकिन प्यार से उसे वहां पर दुकान वाली आंटी के पास ले गया जहां हम पिछले बार गए थे.
आंटी: बहन जी बोलिए क्या दिखाऊं?
मम्मी: ब्रा पेंटी का सेट दिखा दीजिए.
आंटी: यह देखिए यह कैसी रहेगी और यह वाली?
मम्मी ने कई सारी जोड़ियां देखी लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था. उनके कान मैं उन्हें बताने लगा कि उन पर क्या अच्छा लगेगा यह देख वो दुकान वाली आंटी फिर से भड़क गई.
आंटी: बहन जी, मैंने आपको पिछले बार ही समझाया था बेटे को मत लाया कीजिए इन सब चीजों को लेने के लिए. आजकल के बेटे पहले जैसे नहीं है.
मम्मी: पहले जैसे से आपका क्या मतलब?
आंटी: अरे बुरा मत मानिए लेकिन आप खुद सोचिए. मम्मी: ऐसी कोई बात नहीं है मेरे पति बाहर गए हैं तो घर पर कोई था नहीं. मैं मार्केट आ सकूं इसीलिए यह बेचारा तो सिर्फ छोड़ने आया था मुझे.
आंटी: माफ कीजिएगा मैं इतना कुछ बोल गई कोई बात नहीं आप वो सब छोड़िए.
मम्मी: यह वाली पैक कर दीजिए दो.
यह सब लेने के बाद मैंने यहां देखा मम्मी ने मेरा पूरी तरह से बचाव किया जैसे एक माँ को अपने बेटे का करना चाहिए और फिर जब हम घर वापस लौट रहे थे कि तभी बीच रास्ते में मम्मी ने एक तालाब के पास मुझे रुकने को कहा.
मैं भी थोड़ा सोच में पड़ गया ऐसी क्या बात हो गई.
मैं: क्या हुआ मम्मी?
मम्मी: कुछ बात करनी थी मुझे?
मुझे लगा यह शायद वो दुकान वाली घटना से जुड़ी हुई कोई बात है.
मम्मी: मैं आज सब कुछ जानना चाहती हूं इसीलिए मुझसे झूठ मत बोलना पहले यह बता कि एक बेटा अपनी माँ को कभी गंदी नजर से नहीं देखता फिर तेरे दिमाग में ऐसा क्यों आया और यह कब से हो रहा है?
मैं: मम्मी देखो मैं आपके बारे में कभी भी गलत नहीं सोचता था पर एक दिन मेरा दोस्त रवि, माँ बेटे की रिश्ते के बारे में जिक्र करने लगा. उसने अपने मम्मी पापा को सेक्स करते हुए देखा था और इस चीज का जिक्र वो मुझसे करने लगा उस वक्त से मेरे मन में आपके लिए भी गलत ख्याल आने लगे.
मम्मी: कितना गंदा है तेरा दोस्त और उसकी बातों में तू भी आकर वैसा ही हो गया.
मैं: मम्मी मैं सच कहूं तो शुरू में मुझे आपके बारे में बहुत गंदे गंदे ख्याल आते थे लेकिन अब मैं आपको सच में चाहने लगा हूं.
मम्मी: इस चाहत की क्या वजह है? मैं ही क्यों पसंद आ रही हूं क्या दुनिया जमाने में लड़कियां कम पड़ गई है? मेरी तो इतनी उम्र हो चुकी है, मुझ में क्या तुझे अच्छा लगता है?
मैं: ऐसा मत बोलो मम्मी लड़कियों को तो मैं जानता भी नहीं और जानना भी नहीं चाहता पर आप वो हो मेरे लिए जिसको मैंने बचपन से देखा है और जिसने मेरी हमेशा परवाह की है. क्या यह कोई लड़की कर सकती है और रही बात खूबसूरती की आपसे खूबसूरत कोई लड़की नहीं लगती मुझे. देखो आप भी मान ही गई.
मम्मी: देख इस नए रिश्ते को मानना मेरी मजबूरी थी, एक माँ होने के नाते मैं कभी नहीं चाहूंगी कि तू किसी और गलत रास्ते पर जाए. कल को शादी भी तो करना है की पूरी जिंदगी तो नहीं रह सकता ना ऐसे.
मैं: वो वक्त जब आएगा तब देखा जाएगा पर फिलहाल तो मुझे आप ही अच्छी लगती हो.
मम्मी: ठीक है मैं तेरे लिए ढूढ़ूंगी लड़की जो तेरा ख्याल रखें और तुझे प्यार करें.
मेरी ऐसी बातें सुनकर मम्मी का दिल भी पिघल गया. उसने मुझे गले लगाते हुए मेरे माथे को चुमा.
तभी मैं भी अपना प्यार दिखाते हुए उसे अपने गोद में उठाकर बैठा लिया जैसे एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को एक पति अपनी पत्नी को उठते है. और देर ना करते हुए उसे धीरे से चूमने लगा, वो भी मेरे आगोश में पूरी तरह खो गई और हम दोनों एक दूसरे के होठों के रस को चूसे जा रहे थे. हम कुछ पल के लिए भूल गए थे कि हम कहां हैं और क्या कर रहे हैं.
तभी किसी के खांसी की आवाज आई. यह सुनकर मैं और मम्मी पूरी तरह से घबरा गए और पलट कर देखा तो वहां एक बकरी चराने वाली गांव की औरत खड़ी हमें देख रही थी.
बूढी औरत: हे भगवान! यह क्या कर रहे हो तुम लोग... शर्म नहीं आती?
उसे देखकर हम भी फटाफट खड़े हो गए और मम्मी तुरंत उसे समझाने की कोशिश करते हुए,
मम्मी: देखिए आप यह बात किसी से मत कहिएगा मैं हाथ जोड़ती हूं आपके...
बूढी औरत: अरे लेकिन ऐसी क्या मजबूरी है कि तू इतनी जवान लड़के के साथ चुम्मा चाटी कर रही है? यह पक्का तेरा बेटा है ना?
मम्मी: हां लेकिन आप यह बात किसी से नहीं कहिए.
बूढी औरत: मुझे तो विश्वास नहीं हो रहा है कि एक माँ बेटे में यह सब कैसे हो सकता है. मेरी इतनी उम्र हो गई लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई कि अपने बेटे के साथ कैसे करूं.
मम्मी: तो क्या आप भी यह सब करना चाहती थी?
बूढी औरत: मेरा पति तो 15 साल पहले ही छोड़ कर मुझे चला गया तब से मेरा बेटा ही मेरा सहारा है. उसका मेरे लिए ख्याल रखना देखकर मुझे उस पर बहुत तरस आता है क्योंकि उसकी शादी भी अब तक नहीं हुई है. पर मैं भला इतनी बूढी हो चुकी है उसका सहारा नहीं बन सकती और ना तो मैं खूबसूरत हूं.
मम्मी: कोई बात नहीं आप हिम्मत रखिए. उम्मीद करती हूं कि सब कुछ ठीक होगा आपके साथ.
चलो शुक्र है माहौल शांत हो गया, हम भी फिर वहां से घर के लिए चल पड़े. रास्ते में मैंने मम्मी से उस बूढी औरत का उदाहरण देते हुए समझाने की कोशिश कर रहा था.
मैं: देखा आपने ऐसी कितनी सारी कहानी है.
मम्मी: तुझे तो कहानी समझाने के लिए बस बहाने चाहिए होते हैं... उसकी परेशानी कुछ और थी.
रात को खाने पर बैठकर हम यह सोच रहे थे कि अब तो मौसम भी अच्छा हो गया तो कल हम जा सकते हैं मामा के घर घूमने के लिए. संगीता भी इस बात से बहुत खुश और उत्सुक थी वहां जाने के लिए. तभी संगीता ने सुझाव दिया,
संगीता: आप दोनों आज अंदर कमरे में सो जाइए मैं आज यहां सोफे पर सो जाती हूं, क्योंकि आप बहुत थक गए हैं दिन में आराम भी नहीं कर पाए.
मम्मी: नहीं बेटा तुम भी चलो ना साथ में.
संगीता: इतना छोटा तो बेड है कैसे सोएंगे हम तीनों, आप लोग जाइए ना. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है यहां पर सो सकती हूं और हम कब तक इस छोटे घर में रहेंगे?
मम्मी: ओ मेरी बच्ची थोड़ा इंतजार कर लो पापा जल्दी इस घर को बड़ा करने का काम करेंगे बस उनका प्रमोशन हो जाए जल्दी.
संगीता के इस सुझाव से मुझे जरूर फायदा हुआ उसके इस बात पर तो मुझे उसे गले लगाने का मन कर रहा है, आज इतने दिनों बाद मम्मी के साथ एक कमरे में सोने का मौका मिलेगा. कमरे मे अकेले मेरे साथ होने की वजह से मम्मी को काफी शर्म आ रही थी उसका चेहरा शर्म से लाल था जैसे कोई नई नवेली दुल्हन. मैंने राहत देने के लिए उसे पानी पिलाया जिससे उसकी घबराहट कम हो.
वो भी फिर मुस्कुरा दी और बोली कि उसे कपड़े बदलना है. इसीलिए वो बाथरूम मे चली गई कपड़े बदलने के लिए और एक सुंदर सी हल्के नीले रंग की साड़ी जो की पहनने में आरामदायक थी वो उसने पहन लिया.
जब वो वापस आई तो मैं पूरी तरह से तैयार था उसके साथ रात का खेल खेलने के लिए लेकिन वो आते ही मुझे समझाने लगी.
मम्मी: रात बहुत हो गई है, सो जा. सुबह उठकर तैयार भी तो होना है मामा के घर जाने के लिए.
मैं: अभी कहां रात हुई है अभी तो शुरुआत हुआ है. आओ मैं आपकी मालिश कर देता हूं.
मम्मी: नहीं चलेगा, मालिश की क्या जरूरत.
मैं: आप दिन भर के भाग दौड़ के वजह से थक गई होगी, रुको मैं तेल लेकर आता हूं.
मैं किचन में जल्दी से गया और तेल की शीशी ले आया वो फिर से कहने लगी,
मम्मी: नहीं राहुल रहने देना मैं ठीक हूं.
मैं: आप मुंह बंद करो और चुपचाप लेट जाओ.
मम्मी: ओहो ठीक है, लेकिन सिर्फ मालिश करना और कुछ नहीं समझ में आया मैं बहुत थक चुकी हूं.
मैंने उसे राहत देते हुए उसके पैर के तलवे में तेल लगाना शुरू किया. फिर धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ता गया और बढ़ता हुआ उसकी घुटनों की मालिश करने लगा.
अब बारी थी उसके मुलायम जांघों की. मेरा उसकी जांघों पर तेल लगाकर हाथ रखते ही उसके बदन में सिहरन होने लगी और फिर से सांसों का तेज होना शुरू हुआ. मैं इस बार कोई गलती नहीं करना चाहता था मेरी कोशिश थी उसके उत्तेजना को अंतिम स्तर तक बढ़ाना कि वो कोई विरोध ना करके पूरी तरह से मेरा साथ दे.
मैं: मम्मी कपड़े उतार दो ना तभी तो अच्छे से मालिश हो पाएगा.
मम्मी: ऊपर ऊपर से ही कर देना, क्यों परेशान कर रहा है?
मैं: आपको अच्छा लगेगा उसे बिल्कुल परेशान होने की जरूरत नहीं है.
मम्मी: राहुल मैंने मना किया था ना कि सिर्फ मालिश करना और कुछ भी नहीं.
मैं: लेकिन आप छुपाने की फिक्र क्यों करती हो अब क्या बाकी रह गया है हम दोनों के बीच.
मम्मी: बात बाकी का नहीं है. आज मेरा मूड नहीं है.
मैं: तो यह बात है, चलो अब कुछ मत बोलो और आप आराम से लेटी रहो.
मैंने अपना काम जारी रखा और उसके नाभि के हिस्से को भी सहलाने और मसलने लगा और धीरे-धीरे उसके स्तनों को ब्रा के ऊपर से. इससे उसे थोड़ा अच्छा लगने लगा क्योंकि उसका मूड नहीं था थकान के कारण मेरा काम था उसका मूड बनाना मैं भी आगे बढ़कर उसके गले को चूमने लगा और साथ ही साथ स्तनों को भी मसलते रहा. उसके हाव-भाव में अब कुछ बदलाव था.
मैं भी उसकी पैंटी की तरफ हाथ बढ़ाते हुए उसकी चूत को ऊपर से सहलाने लगा. वो चुपचाप बस मुझसे चिपक कर आंखें बंद की हुई थी मेरा हाथ अब उसके पैंटी के अंदर जाकर उसके मुलायम चूत की होठों को सहलाने लगा और फिर धीरे से उसे चूमते हुए उसे पीछे मुड़ने को कहा. वो भी मेरी बात चुपचाप मानकर पीछे की ओर मुड़ गई. तब उसके गांड को सहलाना शुरू किया और फिर एक झटके में उसकी पैंटी उतार दी. वो कुछ नहीं कह रही थी. एक तरफ से यह इशारा भी था कि मैं और आगे बढ़ता जाऊं. तब मैं भी मम्मी की गांड पर जीभ को रगड़ते हुए एक चुम्मा दिया इससे वो मुझे पलट कर देखती हुई शर्मा गई. मैं भी उसे इशारों से आश्वासन दिया कि सब कुछ ठीक है धीरे-धीरे उसकी चूत को पीछे से मसलने लगा जिससे उसका गीलापन भी अब बढ़ रहा था.
उसकी रसीले चूत को अब अपनी उंगलियों से छेड़ना चाहता था. जब मैंने पहली बार उसकी चूत के अंदर उंगली डाला था तब मैं बहुत जल्दबाजी में था पर आज मेरे पास वक्त ही वक्त था इसलिए मैं हर एक चीज को एक अलग ही स्तर पर महसूस करना चाहता था.
मैंने अपने अंगूठे को उसकी गांड के छेद पर टिकाते हुए अपनी उंगली चूत के अंदर घुसाने की कोशिश करने लगा. उसकी चूत को छूते ही मुझे एक गरमा गरम मलाई का एहसास मेरे उंगलियों पर हो रहा था. मेरे इस मीठी छुअन से उसके शरीर में सनसनाहट पैदा हो रही थी और पूरे बदन में तरंग फैल रहा था, लगभग यही हाल मेरा भी था. मैंने गौर किया कि, के कुछ 5-8 से.मी. अंदर चूत के सुरंग में एक जीभ की तरह स्पंजी, थोड़ा मोटा और मुलायम महसूस होता है और अगर ये उत्तेजित हो जाए, तो बस तहलका मच
जाएगा. मैं समझ गया था कि यही उत्तेजना का केंद्र है.
इससे मेरे लंड की लंबाई भी पूरी तरह से बढ़ चुकी थी और वो पत्थर की तरह मजबूत हो चुका था. लेकिन मैं अपने आप को काबू करते हुए पहले उसके पूरे उत्पादन का लेकिन मेरा अपने आप पर पूरा काबू था आज मैं कोई जल्दबाजी और कोई गलती करना नहीं चाहता था.
मैं फिर से उसे पलटने का आदेश देते हुए उसकी चूत को सहलाना और उंगली करना जारी रखा. क्योंकि अब मुझे उत्तेजना का केंद्र पता चल चुका था इसीलिए मैं उस मुलायम हिस्से को रगड़ रहा था और उधर उसकी बेचैनी उसे आग बबूला कर रही थी.
मम्मी: ओह...आह...आह...राहुल अब नहीं... बर्दाश्त नहीं हो रहा...
मैं: आपका बुर तो बहुत गर्म है...
मम्मी: क्या मिलता है अपनी माँ के साथ यह करके
मैं: जन्नत और आपको क्या मिल रहा है.
मम्मी: म्म...चुप कर पगले...
लेकिन मम्मी की चूत एक उंगली तक सीमित नहीं थी इसलिए मैं उंगलियां डालना बढ़ाता गया और धीरे-धीरे चारों उंगलियां उसकी चूत के अंदर उथल-पुथल मचा रही थी जिससे वो बेकाबू होने लगी.
मम्मी: आह...ओहो...मार डालेगा क्या आज...आह..
मम्मी की सांस थमने का नाम नहीं ले रही थी, तभी मैं उसके दोनों जांघों के बीच जाकर उसकी चूत को चाटने लगा. फिर से वही नमकीन रसदार पानी मेरे जीभर पर पडते ही प्यास को और बढ़ाने लगी. मैंने उसकी चूत के हर एक हिस्से को बराबर का दर्जा देते हुए अपनी जीभ से उसका नाम उसी की चूत पर लिखने लगा.
मम्मी: म्म...आह...आह...आहा...बेटा पानी निकल जाएगा...
मैं: मम्मी मेरा लंड सहलाओना...
वो इस चीज को तैयार हो गई, इशारा कर मुझे लेटने को कहने लगी. मेरे लेटते ही उसने मेरे खड़े लंड को पकड़ के पहले गौर से देखा और फिर मेरी तरफ देखते हुए,
मम्मी: (मुस्कुरा कर) धत...बदमाश...क्या-क्या करवाएगा अपनी माँ से?
मैं: (लंड की तरफ इशारा करते हुए) कैसा है मेरा?
मम्मीशरमाते हुए) अच्छा है...
मैं: कितना अच्छा?
मम्मी: (प्यार से मेरे जांघों पर चटकी मारते हुए) मेरी तरफ मत देख आंख बंद कर...
और फिर हल्का सा चुम्मा मेरे लंड पर दिया, यह इससे मेरी आंखें खुल गई.
मैं: ओ मम्मी फिर से एक बार...
मम्मी: नहीं पहले आंखें बंद.
मैं: ठीक है.
कहते हुए मैंने फिर से आंखें बंद कर ली. मैं उसे देख नहीं सकता था लेकिन मैंने महसूस किया कि उसने फिर से अपने गरम होठों से लंड के सुपाड़े पर एक और चुम्मा दिया. और अपना हाथ ऊपर नीचे चलाना शुरु किया उसका हाथ चलते ही मेरा खड़ा लंड जैसे मदद मांग रहा हो. फिर भी मैंने अपनी आंखें खोली तो देखा, मम्मी पूरे मन से लंड को हिलाने में लगी थी और उसके इस गति की वजह से उसकी चूचियां ऊपर नीचे उछल रही थी. जिसे संभालना भी जरूरी था मैं भी अपना हाथ बढ़ा कर चूचियां पकड़े रखा. तभी उसने अपने हाथों से मेरे लंड पर कंडोम लगा दिया और यह काफी था कहने के लिए की वो अब चूदवाना चाहती है.
मैं भी उसे अपनी बाहों में दबा कर बेड पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़कर उसे चूमने लगा. दोनों एक दूसरे की होठों को चूसने लगे. उसने भी मुझे कसकर जकड़ रखा था. जकड़न की वजह से मैंने दूसरे हाथ से अपने आप को संतुलित करते हुए लंड से फिर एक बार उसकी चूत पर निशाना लगाया. यह हर बार से थोड़ा अलग था, उसने अपने दोनों पैरों को अच्छे से फैला दिया जिससे मुझे मदद मिल पाए. जैसे-जैसे लंड अंदर घुसता गया, जो एहसास मेरी उंगली अंदर डालने में मेरी उंगली पर था वो एहसास अब अपने लंड पर कर रहा था. उसकी चूत की एक-एक रेशेदार मांसपेशियां लंड को चारों तरफ से जकड़ रही थी. तभी मेरे धक्के देने की शुरुआत हो गई जिससे उसने अपना पूरा शरीर ढीला छोड़ दिया कि मैं अच्छे से चोद सकूं उसको.
मैं: आज तो आपको पूरी रात चोदने का मन है...
मम्मी: आह...ओ बेटा...आह...हे भगवान...आह..आ...
साथ ही साथ थपकियों की आवाज भी तेज हो गई. पहले तो नहीं पर मैं इस बार देखा मेरी जांघों के टकराने की वजह से उसकी जांघे लाल हो गई थी. वो मचल रही थी और मैं चोदे जा रहा था. मुझे बर्दाश्त नहीं हुआ.
मैं: मम्मी कंडोम निकाल लेने दो.
मम्मी: नहीं बेटा मुझे बहुत डर लगता है.
मैं: कुछ नहीं होगा मैं बाहर गिरा दूंगा.
मम्मी: हां लेकिन संभाल के...
मैंने लंड को बाहर निकाल कंडोम उतार फेंका. वो अभी भी आहें भर रही थी. उसकी आहें कम होने से पहले मैंने फिर से एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड अंदर घुसा दिया.
मम्मी: आह..जान लेगा क्या मेरी...
मैं: (तेज सांसे भरते हुए उसके कान में) कैसा लग रहा है मम्मी अपने बेटे से चूदवा कर?
मम्मी: मत पूछ, तेरे पापा इस वक्त क्या सोच रहे होंगे कि उनकी पत्नी उनके लिए बेचैन होगी लेकिन यहां तो बेटा ही बेचैनी दूर कर रहा है.
मैं: तो इसमें बुराई क्या है मम्मी? आपका ख्याल रखना तो मेरा भी काम है और आप हो ही इतनी गरम. आपकी बुर की गर्मी पता नहीं पापा ने कैसे बर्दाश्त किया होगा. और जोर से जकड़ो मेरे लंड को.
मम्मी: हां...आह...आह...हां
मैं भी पूरे रफ्तार में उसे चोदे जा रहा था. वो अपनी चूत को टाइट कर रही थी लेकिन मेरे जोर-जोर झटके के कारण उसकी चूत की पकड़ भी बार-बार छूट रही थी. मुझे महसूस हुआ उसकी चूत के नरमाहट गर्माहट के कारण कहीं मेरा पानी निकल जाएगा. मैं अपने आप को थोड़ा रोका की कहीं मेरा वीर्य ना निकल जाए. उसे ऐसा लगा कि मेरा शायद काम हो गया है.
मम्मी: क्या हुआ?
मैं: कुछ नहीं.
मैं उसे अपनी बाहों में लेकर कुछ देर तक उसके आम जैसे चुचियों को चूसने लगा. इससे उसे भी संतोष हुआ कि शायद अभी मेरा काम बाकी है.
उसके रसीले चूचियों को चूसने के बाद उसे पीछे मुड़ने का इशारा करते हुए उसके कमर को पकड़ कर उसकी गांड अपनी तरफ खींचने लगा. लेकिन उसके गोरे-गोरे गांड ने तो मेरी कामुकता को और बढ़ावा दे दिया. तभी मैंने कामुक अंदाज में उसके गांड पर एक चांटा मारा.
मम्मी: आह...
तभी उसने अपना हाथ पीछे बढ़ाकर मुझे रोकने की कोशिश की मैं भी उसकी बात मानकर अपने हाथ से उसकी गांड को सहलाने लगा और फिर अपना लंड जब घुसाने गया तो शायद हड़बड़ी के कारण जल्दी अंदर जा नहीं रहा था.
तब मम्मी ने अपने हाथों से मदद किया और
लंड को सही रास्ता दिखाते हुए अपनी चूत के मुहाने पर रख दिया और जैसे मानो मुझे कह रही हो यही सुरंग का रास्ता है. मैं भी मम्मी के दिखाए हुए रास्ते पर अंदर जाने लगा और एक बार लंड को फिर से धकेल पूरा अंदर किया. लंड पूरा अंदर घुसते ही मम्मी की आह की आवाज निकल गई. उसने अपने आप को संभालते हुए बेड को पकड़े रखा.
यह देख की मम्मी का संतुलन बिगड़ रहा है मैंने चूत मारना बंद नहीं किया मेरा लंड घपाघप उसकी चूत में घुसे जा रहा था. उसकी बेचैनी भी जवाब दे रही थी.
वह राहुल
मम्मी: आअह्ह्ह्ह...राहुल...ऊहहह...हो गया बेटा...आह...
मैं: बस मम्मी हो गया...
रात की रात के लगभग दो बज चुके थे. उसकी ऐसी कामुकता भरी आवाज को सुनकर मेरा लंड भी पानी छोड़ने को बेकरार हो गया. पूरे कमरे में जांघों की थपकी जो उसके गांड को लाल कर चुके थे, चूत के गीलेपन भरी छप छप और मम्मी की आह गूंज रही थी.
मम्मी: आह...ऊऊह्ह्ह्ह…बेटा…आह्ह्ह…आह्ह्ह… आह्ह्ह्हह…….नही…रुकक्क…..
फिर क्या था मेरा भी पानी छूट ही गया मैं तुरंत अपने लंड को बाहर निकाला और उसके गांड पर पूरा वीर्य गिरा दिया.
मैं: आह... मम्मी...ओ मेरी माँ...
हम दोनों की हिम्मत जवाब दे रही थी. उसके भी पैर में हल्की कंपकंपी महसूस हुई और मेरे पैरों में भी. फिर भी हम दोनों हिम्मत दिखाते हुए जैसे तैसे अपने कपड़े पहने की सुबह कोई दिक्कत ना हो और एक दूसरे से लिपटकर सो गए. चूदाइ से जो गर्मी पैदा हुई उसके कारण मम्मी ने ब्लाउज का हुक खुला ही छोड़ दिया.
हम दोनों पसीने से तर गए थे
मम्मी: राहुल पंखा थोड़ा तेज कर देना...
मैं भी पंखा तेज किया तब जाकर हम दोनों को राहत मिला.
मैं: ओ मम्मी आई लव यू...
मम्मी: लव यू टू...अब सो जा सुबह जल्दी उठना है.
ऐसे तो मैं पहले भी मम्मी को चोद चुका था लेकिन वो सब जोर जबरदस्ती से किया हुआ था. आज पहली बार ऐसा लगा की वाकई में दुनिया की सारी अय्याशियां एक तरफ और अपनी माँ को चोदने का मजा एक तरफ. इन सब के बाद आखिरकार हम चैन की नींद सो गए.
अगले दिन सुबह नींद खुली तो मैंने मम्मी को जगाया. वो अभी भी मदहोश सो रही थी, बिल्कुल लापरवाह तरीके से ब्लाउज का हुक वैसे ही खुला पड़ा था
मेरे उठने पर वो उठकर बैठी तब मैंने उसके कंधे पर सर रखते हुए उसे एक चुम्मा दिया. उसने भी मेरे होठों को चुम्मा.
मम्मी: (धीरे से) अच्छा सुन बाहर जाने के बाद हम एक आम माँ बेटे की तरह ही रहेंगे, संगीता को कोई शक नहीं होना चाहिए.
मैं: हां मेरी माँ, पहले ब्लाउज का हुक तो बंद कर लो.
मम्मी: ओहो..मैं तो भूली गई थी. थैंक यू बेटा.
यह बोल कर अपना हुक बंद करने लगी मैं भी उसके कंधे पर लेटा लेटा सर टिकाए हुए उसके स्तनों की गहराई देख रहा था.
मम्मी: क्या देख रहा है रात भर मन नहीं भरा?
मैं: आपसे तो कभी मन नहीं भरने वाला.
मम्मी: चल बड़ी चिकनी चुपड़ी बातें करता है, मैं जा रही हूं बाथरूम बाद में तु भी नहा लेना फिर हम नाश्ता करेंगे और फिर मामा के घर भी तो चलना है.
तभी संगीता भी कमरे में आ गई मम्मी ने बड़े लाड से उसके माथे को चुमा और फिर रास्ते का प्लानिंग करने लगे. कुछ देर बाद मम्मी ने कहा ठीक है मैं जा रही हूं बाथरुम रेडी होने के लिए तुम सभी उठ जाओ.
यह कहकर मम्मी बाथरूम चली गई.
मैं वहां वैसे ही पड़ा रहा, संगीता मेरे पास आकर बोली,
संगीता: क्या हुआ कैसी नींद आई?
मैं: हां बहुत अच्छी.
संगीता: मुझसे ज्यादा अच्छी नहीं आई होगी.
मैं: वो कैसे?
संगीता: क्योंकि आप तो मम्मी के साथ सोए थे, पक्का मम्मी ने तो फोन भी नहीं चलाने दिया होगा. मैंने तो पूरी वेब सीरीज खत्म कर दी.
यह सुनकर तो मैं हैरान था की कहीं संगीता ने कुछ सुन तो नहीं लिया कल रात.
मैं: क्या पूरी वेब सीरीज तो फिर मुझे आवाज क्यों नहीं आई?
संगीता: कैसी आएगी मैंने तो एयरफोन लगा रखा था. नहीं तो फिर मम्मी मुझे आकर डांटती.
चलो अच्छा हुआ और इसे क्या पता है इसका मजा तो बिल्कुल फीका था मेरे मजे के आगे.
संगीता: अब तैयार तो हो जाओ जाना भी तो है थोड़ी देर बाद.
मैं: कैसे हो जाऊं अभी तो मम्मी गई है ना बाथरूम में.
संगीता: हां शायद नहा रही होगी.
मैं: और पहले तुम तो तैयार हो जाओ तुम औरतें ही सबसे ज्यादा टाइम लेती हो.
संगीता: हां क्योंकि हमें अच्छा दिखना होता है आपकी तरह नहीं, गंदा.
मैं: क्या फायदा दिखती तो बंदरिया जैसी ही हो.
संगीता: अच्छा यह सब छोड़ो काम की बात करते हैं, सेवइयां खाओगे?
मैं: बना रही हो क्या?
संगीता: हां लेकर आती हूं पास वाले दुकान से.
यह कहकर वो चली गई दुकान पर तभी बाथरूम से मम्मी की आवाज आई.
मम्मी: संगीता...संगीता...कहां चली जाती है यह लड़की!
मैं दरवाजे के पास जाकर बोला,
मैं: वो तो नहीं है दुकान गई है, क्या हुआ?
मम्मी: (दबी हुई आवाज में) जरा मुझे ब्रा पैंटी ला दे.
मैं: कल जो लिए थे उसमें से ला कर दूं.
मम्मी: अच्छा ठीक है बाबा दे दे मुझे.
मम्मी के इतना कहते ही में दौड़कर ब्रा पैंटी लेकर मम्मी के पास गया. उसने थोड़ा दरवाजा खोल कर अपना हाथ बाहर की तरफ निकला लेने के लिए तभी मैं उसके हाथ को पकड़ता हुआ उसके हाथों ब्रा पैंटी रखकर उसे अंदर ले गया बाथरूम में.
मम्मी: अरे क्या कर रहा है वो आ जाएगी.
मैं: नहीं आएगी, दुकान गई है.
मम्मी: दुकान कौन सा दूर है, यहीं बगल में तो गई है जा बाहर.
मैं: नहीं आज तो मैं अपनी माँ को अपने हाथों से ब्रा पैंटी पहनाऊंगा.
मम्मी: बेटा जिद नहीं करते. मैंने समझाया था, बिल्कुल हमें एक आम माँ बेटे की तरह रहना है.
मैं: मम्मी लेकिन मौका बार-बार नहीं मिलता एक बार बस मेरे हाथ से पहन लो.
वो मान गई मैं उसे चूमने लगा.
फिर अपने हाथों से उसे ब्रा पैंटी पहनाया जिससे उसे भी काफी अच्छा लगा.
मम्मी: अच्छा...अच्छा हो गया. अब बाहर देख संगीता दरवाजा खटखटा रही है.
यह सुन मैं भी तुरंत उधर से चला गया.
मम्मी वो मेहरून कलर की साड़ी में तैयार होकर क़यामत ढहा रही थी.
हम सब तैयार होकर बस स्टैंड के लिए निकल गए. मामा के घर के लिए बस पकड़े.
रास्ते में मुझे और मम्मी दोनों को नींद आ रहा था क्योंकि हम लगभग पूरी रात जागे थे.
तो एक तरफ मम्मी और दूसरे तरफ मैं दोनों संगीता के कंधे पर सर रखकर सो गए इससे वो भी हैरान थी कि आखिर यह दोनों को अचानक क्या हो गया कि दोनों एक ही साथ हो गए. मामा का घर आते ही संगीता ने हम दोनों को जगाया. जब उनके घर पहुंचे तो मामी ने बड़े अच्छे से हमारा स्वागत किया प्रिया भी हमें देख काफी खुश थी.
रात को हम सब साथ बैठकर खाना खाए और ढेर सारी बातें करने के बाद अपने-अपने कमरे में सोने के लिए चले गए. मैं और मम्मी एक ही कमरे में यहां सोते थे क्योंकि संगीता और प्रिया बहुत दिनों बाद मिलते थे तो उन लोगों को ढेर सारी बातें भी करनी होती थी इसीलिए वो अलग कमरे में सोते थे और मामी और मामा जी अलग कमरे में.
क्योंकि मैं और मम्मी एक साथ थे इसलिए फिर से हमारे पास एक बेहतरीन मौका था अपने प्यार को आगे बढाने का. कमरे में आते ही मैं तो उसके सौंदर्य और उसे पर सजी मैरून साड़ी देखकर घायल था. उसे अपनी बाहों में भरकर चूमना शुरू कर दिया.
मम्मी: रुक जा रुक जा सांस तो लेने दे.
मैं: मम्मी आपको देखकर ऐसा लगता है कि ना जाने आप कितनी किरदार निभा रही हो इस वक्त और मैं सब कुछ भूल कर आपसे इस कदर प्यार कर रहा हूं.
मम्मी: किरदार जैसे?...मैं कोई हीरोइन तो नहीं हूं.
मैं: आप उससे बढ़कर हो इसी घर में देखा तो आप किसी की बहन, माँ और मेरे पापा की पत्नी हो. मैं यह सब भूल कर आपसे दिल लगा बैठा हूं.
मम्मी: जब दिल लगा बैठा है तो इतना सोचता क्यों है?
मम्मी की यह बात सुनकर मैं फिर से चूमता हुआ उसे बिस्तर पर लेटा दिया और बिना रुके उसके हर एक अंग को चूमता गया चाहे वो उसकी पैरों की एड़ी हो या उसका गला, कान, होंठ, नाक, सीना, नाभि, कमर, जांघे और हां उसकी चूचियां, चूत और उसकी गांड भी.
और जब वो थोड़ी भावुक हो गई.
मैं उसके होठों को चूमता हुआ उसके दोनों पैर को अपने कंधे पर रख लिया और चोदना शुरू किया लेकिन इस बार मैं उसे ज़ोर से ना चोद कर धीरे-धीरे उसके गहराई में उतर कर उसे छेड़ने चाहता था और मैंने ऐसा ही किया. अपने लंड को पूरा अंदर घुसा कर चूत की सुरंग में गोल-गोल घूमाने लगा.
मम्मी: ऊऊ...म्म्म...आह्ह्ह्हह... हां बेटा ऐसे ही...आह्ह्ह्हह...
मैंने देखा मम्मी को यह तरीका बहुत पसंद आ रहा था. वो भी अपने कमर को धीरे-धीरे लहराने लगी अपने बेटे के लंड को पूरी तरह से अपना लिया. धीरे-धीरे हम दोनों की सांस तेज होने लगी, वो भी अपनी कमर को उठाकर मेरी तरफ धकेल रही थी और मैं भी अपने कमर से जोर लगाकर उसके और अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था. कुछ देर की लगातार चूदाइ के उसके बाद उसे पेशाब लग गया.
मम्मी: राहुल बहुत जोर से सूसू लग रही है.
मैं: चलो मैं चलता हूं आपके साथ बाहर अंधेरा है क्योंकि गांव था तो वहां खुले में भी कर सकते थे उस घर का बाथरूम बहुत छोटा और रात के समय तो बाथरूम में जाना सही नहीं था, लाइट की भी सुविधा नहीं थी उसमें.
मैं लालटेन लेकर मम्मी के साथ पीछे पीछे घर के पीछे आंगनबाड़ी हिस्से में उसे वाले में काफी झाड़ियां थी मैंने मम्मी को समझाते हुए कहा कि वह यहां कर सकती है वह भी मान गई लेकिन मुझे थोड़ा दूर जाने को कहा मैं उसे ना नहीं कह सकता था इसीलिए मैं भी थोड़ी दूर पहुंच गया.
मैं यूं ही चलता हुआ घर के आखिरी छोर पर पहुंच गया जहां आंगन की छोर से सटा हुआ एक कमरा था. तभी मुझे अचानक कुछ आवाज सुनाई दी, यह थोड़ी संदिग्ध आवाज थी इसीलिए मैंने कोशिश किया उसके पास जाने की. खिड़की का एक पल्ला खुला हुआ था, वैसे तो ताक झांक करना गलत चीज है फिर भी मेरी जिज्ञासा के कारण मैं यह करने पर मजबूर हो गया और उस खिड़की से झांकने की कोशिश की. जो मैंने देखा उससे मेरे होश उड़ गए मैं यह कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था की बात यहां तक आ सकती है.
प्रिया संगीता उसको चूम रही थी. यह कोई आम चुंबन नहीं था बल्कि एक कामोत्तेजना के अंदाज में लिया हुआ चुंबन लग रहा था.
मेरे मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगे- क्या मेरी बहन लेस्बियन है? समलैंगिक, नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता. मुझे घबराहट के मारे कुछ सूझ नहीं रहा था की तभी मम्मी पीछे से आ गई,
मम्मी: क्या हुआ राहुल तू इतना डरा हुआ क्यों है?
मैं: कुछ नहीं बस गर्मी की वजह से पसीना हो रहा है
मम्मी: हां पर इतनी गर्मी तो नहीं है अभी तो तू ठीक था.
मैं: आप चलो मैं बस दो मिनट में पेशाब करके आता हूं. मम्मी: मैं रुकती हूं तू करके आजा जल्दी.
मैं: आप जाओ ना मैं आ जाऊंगा.
मम्मी: पक्का ना कोई घबराने वाली बात तो नहीं है?
मैं: नहीं मम्मी आप जाओ मैं बस अभी आता हूं.
मम्मी के वहां से जाते ही मैंने फिर से एक बार देखने की कोशिश की और देखा तो वाकई में संगीता और प्रिया दोनों आपस में एक दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे कोई प्रेमी हो.
मुझे उस वक्त घबराहट और गुस्सा दोनों आ रहा था क्योंकि मैं नहीं चाहता था मेरी बहन इस तरह का काम करें आखिर वो अभी एक जवान लड़की है कल को उसकी शादी होगी और अगर यह हाल रहा तो उसका अपने पति में कोई रुचि ही नहीं रहेगा. मुझे तो अभी संगीता से बात करने की इच्छा हो रही थी लेकिन मैं सही मौके का इंतजार करते हुए वहां से चला गया.
और जब अपने कमरे में गया तो मैंने देखा मम्मी मेरा बेसब्री से इंतजार कर रही थी. उसे मेरी फिक्र थी, मेरे अंदर आते ही,
मम्मी: तू ठीक है ना बेटा कुछ तो बता मुझे.
मैं बहाना करते हुए,
मैं: वहां कुछ अजीब देखा आंगन के उसे तरफ.
मम्मी: क्या था?
मैं: वो नहीं पता बस कुछ अजीब सा था.
मम्मी को ऐसा लगा कि शायद गांव के रात मे कुछ चीज अजीब होती है और मैंने शायद वही देख लिया है या मुझे कोई वहम हो गया है.
मुझे अपने सीने से लगाते हुए कहा,
मम्मी: आराम से लेट जा और आंखें बंद कर ले.
मैं भी ऐसा ही किया तभी मैंने महसूस किया की मम्मी मेरे ऊपर आकर बैठ गई है और अपने हाथों से मेरे लंड को निकाल कर अपनी नंगी चूत में मसल रही थी. वो मुझे अपने तरीके से मेरे मन को शांत करना चाहती थी.
मम्मी का यह अंदाज काम उत्तेजना को बढ़ावा दे रहा था.
मम्मी की रसीली चूत के पानी लगने की वजह से मेरा लंड फिर से एक बार खड़ा हो गया. मम्मी ने देर ना करते हुए अपनी चूत मेरे लंड पर रख दी और ऊपर नीचे होने लगी. वैसे तो मम्मी ने मुंह में लेने से मना कर दिया था लेकिन आज उसकी चूत ठीक वही काम कर रही थी, ऐसा लग रहा था उसकी चूत मेरे लंड को चूस रही है.
मैं वैसे ही सोया रहा अपनी सांसों को काबू करते हुए और वो कमर उठा उठा कर मेरे लंड पर उछल रही थी. मम्मी का यह रूप भी पहली बार देखे जाने वाले रूपों में से एक था.
ऐसा लग रहा था वो इस कला में माहिर है मेरे लंड को दबाते हुए ऊपर नीचे उठना और फिर अपने कमर को लहराते हुए गोल गोल घूमाना. इस उम्र में यह शायद सबके बस की बात नहीं.
मम्मी: ओह्ह्ह्ह...बेटा...आह्ह्ह्हह...ऊऊह्ह्ह्ह...
मैं: हां मम्मी निकाल दो मेरा पानी...आह...
मम्मी: आह...हां बेटा...म्म्म..बोलना जब निकलने वाला होगा.
मैं: बस निकलने वाला है मम्मी...
तभी मम्मी ने अपनी चूत को ऊपर उठाकर निकाल लिया, मेरे लंड का पानी उसको नीचे जमीन पर गिरने दिया.
और फिर मुझे और आराम देने के लिए मेरे करीब आकर अपने ब्लाउज के हुक को खोल दिया और अपने ब्रा में से खींचते हुए अपनी चूची निकाल कर जैसे एक माँ अपने बच्चों को दूध पिलाती है वैसे मम्मी ने मुझे दूध पिलाना शुरू किया कि मैं आराम से सो सकूं और मेरे बालों को भी सहला रही थी. मम्मी सच में बदल चुकी थी वो भी मेरे जरूरत का ख्याल रखना सीख गई थी.
मेरे दिमाग में यही बात घूम रहा था कि आज की रात भला कैसी रात है इस कमरे में माँ और बेटे लगे पड़े हैं, उधर दो बहने आपस में संभोग का खेल खेल रही है, जाहिर सी बात है मामा और मामी भी शांत नहीं सो रहे होंगे...यह घर हवस की आग में दहक रहा था.
END OF SEASON 2