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Mahesh007

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Mujhe ye pratet hota he is story me abhi ten logo ki bhumika adhik rahegi ek ekram dusri hina aur tesi divya
Agar renu aur maa bhi sagai bale din pachan le to sone pe suhaga hojaye
 

dhparikh

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अपडेट 141 -

आखिरकार दिव्या की बेसब्री को देखते हुए निशा एक गहरी सांस लेकर बोली

निशा- वो इसलिए क्योंकि कुछ महिनों पहले जब मामा जी का सच सबके सामने आया था और तुम लोगों ने नऐ शिरे से मेरी तलाश शुरू कर दी थी। उस वक्त मुझे अपने कई सारे काम बहुत सावधानी से करने पडते थे, यहाँ तक कि मुझे कहीं भी आने जाने पर यही डर लगा रहता था कि पता नहीं कब कौन सा इंशान मुझे पहचान कर अज्जू के पास मेरी इंफॉर्मेशन पहुँच दे और अज्जू मेरे सामने आकर खडा हो जाऐ। मैंं कई बार बस कुछ पलों या सेकेण्डों के अंतर से अज्जू की नजरों में आते आते बची हूँ। इसलिए मैं ज्यादातर दिल्ली से बाहर ही रहती थी, और दिल्ली केवल तभी आती थी, जब बहुत ज्यादा जरूरी हो। लेकिन जब नायडू ने तुम लोगों को किडनैप किया, तबसे मुझे तुम लोगों की सुरक्षा को लेकर काफी टेंशन होने लगी थी। इसलिए मैंने तय किया था कि मैं तुम सबकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम करके और परिवार में सबके बीच जो दूरियाँ आ गईँ हैं, उन्हें सुलझाकर हमेशा के लिए किसी ऐसी जगह पर चली जाऊँगी। जहाँ मेरे पहचाने जाने का कोई डर ना हो।

इतना बोलकर निशा ने एक गहरी सांस ली और फिर दोवारा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- पर सब कुछ ठीक करके यहाँ से जाने से पहले ही तुमने और पापा ने मुझे पहचान लिया था। लेकिन मैं और लोगों द्वारा पहचाने जाने का रिस्क लेना नहीं चाहती थी, इसलिए मैंने अपनी सुपर पावर का यूज करके तुम्हें और पापा को छोडकर बाकी सभी लोगों के दिमाग के साथ थोडी सी छेडछाड कर दी थी। जिसके अनुसार मैं जब तक अपने असली यानि निशा के रूप में सबके सामने नहीं जाऊँगी, तब तक सभी लोग जोया और निशा को दो अलग अलग इँशान ही मानते रहेंगे।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए निशा को देखने लगी। असल में दिव्या की हालत इस वक्त ऐसी थी, जैसे उसने अपने सामने कोई भूत देख लिया हो। काफी देर तक निशा को यूँ ही हैरानी से देखने के बाद आखिरकार दिव्या ने उससे सबाल पूछ ही लिया

दिव्या- पर निशा दी आखिर आप ऐसे कैसे किसी के भी दिमाग के साथ छेडछाड कर सकती हो….. यह तो गलत बात है….. मैं मानती हूँ कि आप अज्जू और बाकी लोगों से नाराज हो, जिस कारण आप किसी से भी निशा के रूप में मिलना नहीं चाहती। लेकिन आपको कम से कम अज्जू और बाकी लोगों को पूरी ईमानदारी के साथ आप तक पहुँचने का एक मौका तो देना ही चाहिए। क्योंकि अगर आप इसी तरह सबसे दूर दूर भागती रहीं तो फिर सब कुछ कैसे ठीक होगा।

दिव्या की बात सुनकर निशा चिढते हुए बोली

निशा- दिव्या की बच्ची मैं अच्छी तरह समझ रही हूँ तेरी बातों का क्या मतलब है। लेकिन मैं तेरी बातों में नहीं आने बाली, बैसे भी प्यार और जंग में सब जायज है। रही बात अज्जू और बाकी लोगों से नाराज होने की, तो ऐसा कुछ भी नहीं है। हाँ यह बात सही है कि मैं नाराज हूँ पर अज्जू और बाकी लोगों से नहीं, बल्कि अपने आप से नाराज हूँ। मैं इसलिए नाराज हूँ कि आखिर क्यों मैंने अज्जू से प्यार किया, आखिर क्यों मैंने सब लोगों की बात मानकर अज्जू से शादी की। अगर मैंने कभी अज्जू से प्यार ही नहीं किया होता या सबकी बात मानकर उससे शादी नहीं की होती, तो आज हम दोनों की जिंदगी काफी अलग होती।

निशा की बात सुनकर दिव्या उसे समझाते हुए बोली

दिव्या- अब जो हो गया सो हो गया निशा दी, अब उसे बदला नहीं जा सकता है। बैसे भी आप दोनों बचपन से ही एक दूसरे से प्यार करते थे, हाँ यह बात अलग है कि आप दोनों को ही इसका एहसास सालों बाद हुआ। लेकिन आप दोनों का एक साथ आना आपकी किस्मत में लिखा था। जिसे कोई भी नहीं बदल सकता है, भले ही उस वक्त आप अज्जू से शादी नहीं करती, लेकिन किस्मत आपको कभी ना कभी एक दूसरे का जीवन साथी जरूर बना देती।

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- हाँ शायद तुम सही कह रही हो… लेकिन अब जब अज्जू मेरे बिना जीना सीख गया है और जिया ने भी सब कुछ अच्छी तरह संभाल लिया है। तो मुझे लगता है कि यही सही मौका है सबकी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाने का

दिव्या- लेकिन आप तो पहले से ही सबसे दूर हो…. अब और कहाँ जाओगी…..

निशा- फिलहाल मैं तुम सबके बीच में ही अपना नाम और पहचान बदलकर रह रही हूँ। लेकिन अब मैं यहाँ से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाना चाहती हूँ।

दिव्या- कहीं आप बांधवगढ में जाकर तो बसना नहीं चाहती हो

दिव्या की बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- हाँ यह बात सही है कि मैं काफी लम्बे समय तक बांधवगढ में रही हूँ और अभी भी जब मुझे समय मिलता है तो मैं बांधवगढ चली जाती हूँ। पर मेरा यह राज अब खुल चुका है। जिस कारण मैं अब वहाँ पर ज्यादा समय तक नहीं रह सकती। इसीलिए मैंने इण्डिया छोडकर किसी और देश में जाकर बसने का फैसला कर लिया है।

दिव्या- अगर आप इस देश को ही छोड दोगे तो फिर आपकी सीक्रेट ऐजेंट बाली ज़ॉब का क्या होगा और आपकी इस कम्पनी का क्या होगा।

निशा- मैंने अपनी ऐजेंट बाली जॉब से रिजाईन करने का फैसला कर लिया है, इकराम की इंगेज्मेंट के बाद मैं उस जॉब से रिजाईन कर दूँगी, रही बात इस कम्पनी की को इसे संभालने के लिए तुम और इकराम हो ना।

दिव्या- मतलब इकराम आपके साथ नहीं जा रहा है

निशा- नहीं…. क्योंकि सच तो यह है कि इकराम को मेरे इस प्लान के बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं है। बैसे भी जल्द ही उसकी शादी होने बाली है, ऐसे में उसे अपने साथ ले जाना बिल्कुल भी ठीक नहीं होगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या झुंझलाते हुए बोली

दिव्या- अगर ऐसा ही है तो फिर आपने यह सच मुझे क्यों बताया…. क्या आपको डर नहीं लग रहा कि मैं आपके बारे में सबको बता दूंगी

निशा- नहीं मुझे तुमसे बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है।

दिव्या- पर क्यों

निशा- क्योंकि मुझे तुम पर पूरा भरोसा है।

दिव्या- और अगर मैंने आपका भरोसा तोड़ दिया तो….

निशा- तो भी मेरे प्लान में कोई अंतर नहीं आऐगा… हाँ लेकिन तुम पर से मेरा भरोसा जरूर उठ जाऐगा।

दिव्या- अज्जू आपको कहीं नहीं जाने देगा निशा दी

निशा- नहीं दिव्या ऐसा कुछ भी नहीं होगा…… क्योंकि अब अज्जू चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता है

दिव्या- मतलब…

दिव्या की बात सुनकर निशा के चेहरे पर एक रहस्यमई मुस्कान आ गई थी, जिसे देखकर दिव्या काफी ज्यादा कन्फ्यूज हो रही थी, इससे पहले वो निशा से कोई और सबाल कर पाती, निशा अपनी जगह से उठकर खडी हो गई और अपने ऑफिस में रखी सेफ में से कुछ डॉक्यूमेंट निकालकर दिव्या की तरफ बडा दिए। दिव्या ने जैसे ही उन पैपर के टाईटल को पडा तो वो बुरी तरह से हैरान होते हुए बोली

दिव्या- डायवोर्स पेपर…. ओह माई गॉड….. यह सब क्या है निशा दी…. आपके और अज्जू के बीच डायवोर्स कब हो गया… और सबसे बडी बात कि हमें इस बारे में अब तक पता क्यों नहीं चला।

निशा- तुम शायद भूल गई हो दिव्या कि मैं इस वक्त अज्जू और मोनू की बॉस हूँ। जब मैं अपनी आईड़ेंटिटी बदलकर उनके साथ जॉब कर सकती हूँ तो फिर अज्जू को उल्झाकर उससे डायवोर्स पेपर पर साईन लेना मेरे लिए कौन सी बडी बात है। मैंने कुछ दिनों पहले ही अज्जू से डायवोर्स पेपर पर धोखे से साईन लेकर गुपचुप तरीके से केश फाईल कर दिया था और अपनी पावर का यूज करके अज्जू को कुछ भी पता चले बिना ही कोर्ट से डायवोर्स आर्डर भी ले लिया है। इसलिए अब कानूनी रूप से मेरा अज्जू से कोई रिश्ता नहीं है। जिस कारण वो चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता। बैसे भी उसके पास जिया और राधा तो हैं ही… वो उनके साथ हमेशा खुश रहेगा….

निशा की बात सुनकर दिव्या उससे नाराज होते हुए बोली

दिव्या- यह तो गलत बात है निशा दी….. आप आखिर ऐसा कैसे कर सकते हो….. आपने अज्जू को धोखा देकर यह डायवोर्स लिया है…… जिसे कोई भी एक्सेप्ट नहीं करेगा

निशा- सच तो यही है दिव्या कि अब मेरे और अज्जू के बीच में कानूनी रूप से डायवोर्स हो चुका है। इसलिए इस बात से क्या फर्क पडता है कि कोई इस डायवोर्स को एक्सेप्ट करता है या नहीं। बैसे भी अज्जू का असली और पहला प्यार जिया है… ना कि मैं…. मैंने तो बस कुछ दिनों की लिए जिया की जगह उधार ली थी। जो मैंने जिया के बापिस आने के बाद उसे खुशी खुशी लौटा दी थी। बैसे भी अब इस डायवोर्स के बाद ना तो अज्जू का मेरे ऊपर कोई हक है और ना ही मेरा अज्जू पर कोई हक बचा है। अब अज्जू की पत्नि और जीवनसाथी होने के सारे अधिकार जिया के पास हैं।

निशा की बातें सुनकर दिव्या को इस वक्त दर्द, निराशा, गुस्सा जैसे कई सारे इमोशन एकसाथ महसूस हो रहे थे। वो इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाना चाहती थी कि जब सबको इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तब क्या होगा। लेकिन वो इतना तो समझ गई थी कि निशा के लिए भी यह फैसला लेना उतना आसान नहीं रहा होगा। इन्हीं सब बातों के बारे में सोचते हुए दिव्या की आँखों में कब आँशू आ गए उसे पता ही नहीं चला। आखिरकार दिव्या अपने इमोशंस को कंट्रोल करते हुए बोली

दिव्या- निशा दी….. आखिर आप यह सब क्यों कर रही हो…. आपके इस फैसले से कोई भी खुश नहीं रहेगा… ना आप…. ना अज्जू और ना ही हम लोग…..

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- तुम शायद मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती दिव्या, इसलिए ऐसी बातें कर रही हो। सच तो यही है कि अज्जू कभी मुझसे शादी करना ही नहीं चाहता था और ना ही शादी के बाद उसने हमारे रिश्ते को एक्सेप्ट किया था। वो तो बस मेरी खुशी और मेरी जिद्द के चलते अज्जू केवल चीफ से हमारा बदला लेने तक इस रिश्ते को निभाने के लिए मजबूर था। लेकिन अब जब चीफ मारा जा चुका है तो उसे इस रिश्ते को जबरदस्ती निभाने की कोई जरूरत नहीं है।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए बोली

दिव्या- यह सब आप क्या कह रही हो निशा दी….. हम सभी लोग अज्जू की आँखों में आपके लिए प्यार साफ साफ देख सकते हैं….. फिर आपको अज्जू का प्यार क्यों नजर नहीं आ रहा है…

निशा- वो प्यार नहीं बल्कि जिम्मेदारी और मेरे लिए फिक्र है…..

दिव्या- फिक्र भी तो हम उन्हीं लोगों की करते हैं, जिनसे हमें प्यार हो…..

निशा- कुछ समय तक साथ रहते रहते प्यार तो हमें पालतू कुत्तों से भी हो जाता है। तो इसका मतलब यह तो नहीं है कि हम कुत्तों से शादी करके उन्हें अपना जीवनसाथी बना लें।

दिव्या- आखिर आप अपने और अज्जू के प्यार की तुलना एक कुत्ते से कैसे कर सकती हो निशा दी..

निशा- क्योंकि यही सच है….. तुम तो जानती ही हो कि मैं अज्जू और मोनू बचपन से एक दूसरे के बेस्टफ्रेंड रहे हैं। ऐसे में अज्जू का मेरी फिक्र करना और मेरे लिए इस तरह परेशान होना पूरी तरह से नैचुरल है….. इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वो मुझे दिल से प्यार करता है और मुझे अपने जीवनसाथी के रूप में देखता। मैं बस उसके लिए अपनी फिजीकल नीड पूरी करना का माध्यम हूँ… क्योंकि जिया उसे फिजीकली सैटिस्फाई नहीं कर पाती है…. साथ ही साथ मेरे और अज्जू के बीच बचपन से ही एक इमोशनल बॉण्ड रहा है, जिसे सब लोग प्यार समझ बैठे हैं। पर वो प्यार कभी था ही नहीं। वो तो बस मजबूरी में बने हमारे ऱिश्ते और अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस डायवोर्स के माध्यम से मैंने उसे सारी जिम्मेदारियों से आजाद कर दिया है। इसलिए जब अज्जू को इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तो उसका रिऐक्शन देखकर तुम्हें हमारे रिश्ते का सारा सच खुद व खुद पता चल जाऐगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या अपनी आँखों मे झलक आऐ आँशुओं को पोंछते हुए बोली

दिव्या- मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि आप आखिर ऐसा क्यों बोल रही हो। क्योंकि जहाँ तक मैं जानती हूँ अज्जू शिर्फ और शिर्फ आपसे ही प्यार करता है और यह बात केवल मै ही नहीं मानती बल्कि मोनू, माँ, पापा, रीनू यहाँ तक की जिया का मानना भी यही है।

निशा- वो इसलिए क्योंकि तुम मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती हो।

दिव्या- तो आप बताईऐ कि आखिर आप दोनों की शादी का असली सच क्या है। मुझे भी तो पता चले कि आपने इतना बडा कदम आखिर क्यों उठाया है।

निशा- बात बस इतनी सी है दिव्या की मैं और अज्जू रिश्ते में एक दूसरे के भाई बहन लगते हैं। जिस कारण हमारे बीच शादी और फिजीकल रिलेशन जैसा कुछ भी होना पाप है।

दिव्या- हाँ मैं इस बारे में पहले से ही जानती हूँ…. लेकिन आपको तो एडोप्ट किया गया था ना… इस हिसाब से टैक्निकली आप दोनों के बीच भाई बहन का रिश्ता नहीं है।

निशा- नहीं मुझे एडोप्ट नहीं किया गया था, बल्कि मुझे मेरे असली माता पिता से चुराया गया था। खैर अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडता है। लेकिन मेरे असली माता पिता का भी अज्जू से एक गरहा रिश्ता था, जिस कारण मुझे एडोप्ट किए जाने के बाबजूद भी टैक्निकल रूप से मैं और अज्जू भाई बहन ही हैं।

दिव्या- ओह कम ऑन निशा दी….. आजकल तो यह सब काफी ज्यादा कॉमन है…. जब आप लोगों की शादी हुई तब आप लोगों को अपने असली रिश्ते के बारे में नहीं पता था। इसलिए जो कुछ भी हुआ वो गलत कैसे हो सकता है। बैसे भी अगर आपका लॉजिक माने तो उस हिसाब से अज्जू और जिया भी भाई बहन हुए… क्योंकि जिया प्रो. नारायण की असली बेटी है और प्रो. नारायण अज्जू के सगे मामा जी हैं।

निशा- नहीं ऐसा नहीं है…. असल में मेरी और अज्जू की शादी से पहले या फिर हमारे रिश्ते का सारा सच जानने से पहले भी मैं और अज्जू चचेरे भाई बहन थे। इसलिए यह कहना कि हमने अनजाने में शादी की थी, यह पूरी तरह से गलत होगा।

दिव्या- तो फिर आप दोनों की शादी के पीछे का असली सच क्या है निशा दी

निशा- अगर तुम सच जानना ही चाहती हो तो सुनो, बात असल में यह है कि जब जिया को ब्लड कैंसर हुआ और वो एक्सीडेंट में लापता हो गई थी। उस वक्त सभी को यही लगा था कि जिया अब इस दुनिया में नहीं है। उसी दौरान साधना और सिम्मी ने अज्जू को धोखे से बहुत बडी मात्रा में ड्रग दे दिया था। हाँलाकि अज्जू के द्वारा बनाऐ गए सीरम के चलते उसके शरीर से ड्रग का ज्यादातर असर खत्म हो गया था, लेकिन अज्जू के शरीर में उत्तेजना काफी ज्यादा बड गई थी। जिसे कंट्रोल किया जाना बहुत जरूरी था और उसके लिए अज्जू का शादी करके किसी लडकी के साथ रैगुलर फिजीकल रिलेशन बनाना बहुत जरूरी था। उसी दौरान चीफ से बदला लेने के लिए अज्जू इंदौर आया हुआ था। जिया ने मरने से पहले हॉस्पीटल में मुझसे वादा लिया था कि मैं अज्जू को कभी अकेले नहीं छोडूंगी और उसकी जिंदगी में दोबारा प्यार लाकर रहूँगी। अपना वादा पूरा करने के लिए मैं ज्यादा से ज्यादा समय अज्जू के साथ बिताने लगी, इस दौरान पता ही नहीं चला कि कब मैं अज्जू से प्यार करने लगी। वहीं दूसरी तरफ अज्जू भी अपनी फिजीकल नीड पूरी करने के लिए अनजाने में ही मेरे करीब आने लगा था और फिर चीफ के जाल में फंसकर हम लोग शादी कर बैठे।

इतना बोलकर निशा कुछ पलों के लिए रुकी और अपनी पुरानी यादों में खो गई


कहानी जारी है.............
Nice update....
 
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parkas

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आखिरकार दिव्या की बेसब्री को देखते हुए निशा एक गहरी सांस लेकर बोली

निशा- वो इसलिए क्योंकि कुछ महिनों पहले जब मामा जी का सच सबके सामने आया था और तुम लोगों ने नऐ शिरे से मेरी तलाश शुरू कर दी थी। उस वक्त मुझे अपने कई सारे काम बहुत सावधानी से करने पडते थे, यहाँ तक कि मुझे कहीं भी आने जाने पर यही डर लगा रहता था कि पता नहीं कब कौन सा इंशान मुझे पहचान कर अज्जू के पास मेरी इंफॉर्मेशन पहुँच दे और अज्जू मेरे सामने आकर खडा हो जाऐ। मैंं कई बार बस कुछ पलों या सेकेण्डों के अंतर से अज्जू की नजरों में आते आते बची हूँ। इसलिए मैं ज्यादातर दिल्ली से बाहर ही रहती थी, और दिल्ली केवल तभी आती थी, जब बहुत ज्यादा जरूरी हो। लेकिन जब नायडू ने तुम लोगों को किडनैप किया, तबसे मुझे तुम लोगों की सुरक्षा को लेकर काफी टेंशन होने लगी थी। इसलिए मैंने तय किया था कि मैं तुम सबकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम करके और परिवार में सबके बीच जो दूरियाँ आ गईँ हैं, उन्हें सुलझाकर हमेशा के लिए किसी ऐसी जगह पर चली जाऊँगी। जहाँ मेरे पहचाने जाने का कोई डर ना हो।

इतना बोलकर निशा ने एक गहरी सांस ली और फिर दोवारा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- पर सब कुछ ठीक करके यहाँ से जाने से पहले ही तुमने और पापा ने मुझे पहचान लिया था। लेकिन मैं और लोगों द्वारा पहचाने जाने का रिस्क लेना नहीं चाहती थी, इसलिए मैंने अपनी सुपर पावर का यूज करके तुम्हें और पापा को छोडकर बाकी सभी लोगों के दिमाग के साथ थोडी सी छेडछाड कर दी थी। जिसके अनुसार मैं जब तक अपने असली यानि निशा के रूप में सबके सामने नहीं जाऊँगी, तब तक सभी लोग जोया और निशा को दो अलग अलग इँशान ही मानते रहेंगे।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए निशा को देखने लगी। असल में दिव्या की हालत इस वक्त ऐसी थी, जैसे उसने अपने सामने कोई भूत देख लिया हो। काफी देर तक निशा को यूँ ही हैरानी से देखने के बाद आखिरकार दिव्या ने उससे सबाल पूछ ही लिया

दिव्या- पर निशा दी आखिर आप ऐसे कैसे किसी के भी दिमाग के साथ छेडछाड कर सकती हो….. यह तो गलत बात है….. मैं मानती हूँ कि आप अज्जू और बाकी लोगों से नाराज हो, जिस कारण आप किसी से भी निशा के रूप में मिलना नहीं चाहती। लेकिन आपको कम से कम अज्जू और बाकी लोगों को पूरी ईमानदारी के साथ आप तक पहुँचने का एक मौका तो देना ही चाहिए। क्योंकि अगर आप इसी तरह सबसे दूर दूर भागती रहीं तो फिर सब कुछ कैसे ठीक होगा।

दिव्या की बात सुनकर निशा चिढते हुए बोली

निशा- दिव्या की बच्ची मैं अच्छी तरह समझ रही हूँ तेरी बातों का क्या मतलब है। लेकिन मैं तेरी बातों में नहीं आने बाली, बैसे भी प्यार और जंग में सब जायज है। रही बात अज्जू और बाकी लोगों से नाराज होने की, तो ऐसा कुछ भी नहीं है। हाँ यह बात सही है कि मैं नाराज हूँ पर अज्जू और बाकी लोगों से नहीं, बल्कि अपने आप से नाराज हूँ। मैं इसलिए नाराज हूँ कि आखिर क्यों मैंने अज्जू से प्यार किया, आखिर क्यों मैंने सब लोगों की बात मानकर अज्जू से शादी की। अगर मैंने कभी अज्जू से प्यार ही नहीं किया होता या सबकी बात मानकर उससे शादी नहीं की होती, तो आज हम दोनों की जिंदगी काफी अलग होती।

निशा की बात सुनकर दिव्या उसे समझाते हुए बोली

दिव्या- अब जो हो गया सो हो गया निशा दी, अब उसे बदला नहीं जा सकता है। बैसे भी आप दोनों बचपन से ही एक दूसरे से प्यार करते थे, हाँ यह बात अलग है कि आप दोनों को ही इसका एहसास सालों बाद हुआ। लेकिन आप दोनों का एक साथ आना आपकी किस्मत में लिखा था। जिसे कोई भी नहीं बदल सकता है, भले ही उस वक्त आप अज्जू से शादी नहीं करती, लेकिन किस्मत आपको कभी ना कभी एक दूसरे का जीवन साथी जरूर बना देती।

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- हाँ शायद तुम सही कह रही हो… लेकिन अब जब अज्जू मेरे बिना जीना सीख गया है और जिया ने भी सब कुछ अच्छी तरह संभाल लिया है। तो मुझे लगता है कि यही सही मौका है सबकी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाने का

दिव्या- लेकिन आप तो पहले से ही सबसे दूर हो…. अब और कहाँ जाओगी…..

निशा- फिलहाल मैं तुम सबके बीच में ही अपना नाम और पहचान बदलकर रह रही हूँ। लेकिन अब मैं यहाँ से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाना चाहती हूँ।

दिव्या- कहीं आप बांधवगढ में जाकर तो बसना नहीं चाहती हो

दिव्या की बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- हाँ यह बात सही है कि मैं काफी लम्बे समय तक बांधवगढ में रही हूँ और अभी भी जब मुझे समय मिलता है तो मैं बांधवगढ चली जाती हूँ। पर मेरा यह राज अब खुल चुका है। जिस कारण मैं अब वहाँ पर ज्यादा समय तक नहीं रह सकती। इसीलिए मैंने इण्डिया छोडकर किसी और देश में जाकर बसने का फैसला कर लिया है।

दिव्या- अगर आप इस देश को ही छोड दोगे तो फिर आपकी सीक्रेट ऐजेंट बाली ज़ॉब का क्या होगा और आपकी इस कम्पनी का क्या होगा।

निशा- मैंने अपनी ऐजेंट बाली जॉब से रिजाईन करने का फैसला कर लिया है, इकराम की इंगेज्मेंट के बाद मैं उस जॉब से रिजाईन कर दूँगी, रही बात इस कम्पनी की को इसे संभालने के लिए तुम और इकराम हो ना।

दिव्या- मतलब इकराम आपके साथ नहीं जा रहा है

निशा- नहीं…. क्योंकि सच तो यह है कि इकराम को मेरे इस प्लान के बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं है। बैसे भी जल्द ही उसकी शादी होने बाली है, ऐसे में उसे अपने साथ ले जाना बिल्कुल भी ठीक नहीं होगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या झुंझलाते हुए बोली

दिव्या- अगर ऐसा ही है तो फिर आपने यह सच मुझे क्यों बताया…. क्या आपको डर नहीं लग रहा कि मैं आपके बारे में सबको बता दूंगी

निशा- नहीं मुझे तुमसे बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है।

दिव्या- पर क्यों

निशा- क्योंकि मुझे तुम पर पूरा भरोसा है।

दिव्या- और अगर मैंने आपका भरोसा तोड़ दिया तो….

निशा- तो भी मेरे प्लान में कोई अंतर नहीं आऐगा… हाँ लेकिन तुम पर से मेरा भरोसा जरूर उठ जाऐगा।

दिव्या- अज्जू आपको कहीं नहीं जाने देगा निशा दी

निशा- नहीं दिव्या ऐसा कुछ भी नहीं होगा…… क्योंकि अब अज्जू चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता है

दिव्या- मतलब…

दिव्या की बात सुनकर निशा के चेहरे पर एक रहस्यमई मुस्कान आ गई थी, जिसे देखकर दिव्या काफी ज्यादा कन्फ्यूज हो रही थी, इससे पहले वो निशा से कोई और सबाल कर पाती, निशा अपनी जगह से उठकर खडी हो गई और अपने ऑफिस में रखी सेफ में से कुछ डॉक्यूमेंट निकालकर दिव्या की तरफ बडा दिए। दिव्या ने जैसे ही उन पैपर के टाईटल को पडा तो वो बुरी तरह से हैरान होते हुए बोली

दिव्या- डायवोर्स पेपर…. ओह माई गॉड….. यह सब क्या है निशा दी…. आपके और अज्जू के बीच डायवोर्स कब हो गया… और सबसे बडी बात कि हमें इस बारे में अब तक पता क्यों नहीं चला।

निशा- तुम शायद भूल गई हो दिव्या कि मैं इस वक्त अज्जू और मोनू की बॉस हूँ। जब मैं अपनी आईड़ेंटिटी बदलकर उनके साथ जॉब कर सकती हूँ तो फिर अज्जू को उल्झाकर उससे डायवोर्स पेपर पर साईन लेना मेरे लिए कौन सी बडी बात है। मैंने कुछ दिनों पहले ही अज्जू से डायवोर्स पेपर पर धोखे से साईन लेकर गुपचुप तरीके से केश फाईल कर दिया था और अपनी पावर का यूज करके अज्जू को कुछ भी पता चले बिना ही कोर्ट से डायवोर्स आर्डर भी ले लिया है। इसलिए अब कानूनी रूप से मेरा अज्जू से कोई रिश्ता नहीं है। जिस कारण वो चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता। बैसे भी उसके पास जिया और राधा तो हैं ही… वो उनके साथ हमेशा खुश रहेगा….

निशा की बात सुनकर दिव्या उससे नाराज होते हुए बोली

दिव्या- यह तो गलत बात है निशा दी….. आप आखिर ऐसा कैसे कर सकते हो….. आपने अज्जू को धोखा देकर यह डायवोर्स लिया है…… जिसे कोई भी एक्सेप्ट नहीं करेगा

निशा- सच तो यही है दिव्या कि अब मेरे और अज्जू के बीच में कानूनी रूप से डायवोर्स हो चुका है। इसलिए इस बात से क्या फर्क पडता है कि कोई इस डायवोर्स को एक्सेप्ट करता है या नहीं। बैसे भी अज्जू का असली और पहला प्यार जिया है… ना कि मैं…. मैंने तो बस कुछ दिनों की लिए जिया की जगह उधार ली थी। जो मैंने जिया के बापिस आने के बाद उसे खुशी खुशी लौटा दी थी। बैसे भी अब इस डायवोर्स के बाद ना तो अज्जू का मेरे ऊपर कोई हक है और ना ही मेरा अज्जू पर कोई हक बचा है। अब अज्जू की पत्नि और जीवनसाथी होने के सारे अधिकार जिया के पास हैं।

निशा की बातें सुनकर दिव्या को इस वक्त दर्द, निराशा, गुस्सा जैसे कई सारे इमोशन एकसाथ महसूस हो रहे थे। वो इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाना चाहती थी कि जब सबको इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तब क्या होगा। लेकिन वो इतना तो समझ गई थी कि निशा के लिए भी यह फैसला लेना उतना आसान नहीं रहा होगा। इन्हीं सब बातों के बारे में सोचते हुए दिव्या की आँखों में कब आँशू आ गए उसे पता ही नहीं चला। आखिरकार दिव्या अपने इमोशंस को कंट्रोल करते हुए बोली

दिव्या- निशा दी….. आखिर आप यह सब क्यों कर रही हो…. आपके इस फैसले से कोई भी खुश नहीं रहेगा… ना आप…. ना अज्जू और ना ही हम लोग…..

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- तुम शायद मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती दिव्या, इसलिए ऐसी बातें कर रही हो। सच तो यही है कि अज्जू कभी मुझसे शादी करना ही नहीं चाहता था और ना ही शादी के बाद उसने हमारे रिश्ते को एक्सेप्ट किया था। वो तो बस मेरी खुशी और मेरी जिद्द के चलते अज्जू केवल चीफ से हमारा बदला लेने तक इस रिश्ते को निभाने के लिए मजबूर था। लेकिन अब जब चीफ मारा जा चुका है तो उसे इस रिश्ते को जबरदस्ती निभाने की कोई जरूरत नहीं है।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए बोली

दिव्या- यह सब आप क्या कह रही हो निशा दी….. हम सभी लोग अज्जू की आँखों में आपके लिए प्यार साफ साफ देख सकते हैं….. फिर आपको अज्जू का प्यार क्यों नजर नहीं आ रहा है…

निशा- वो प्यार नहीं बल्कि जिम्मेदारी और मेरे लिए फिक्र है…..

दिव्या- फिक्र भी तो हम उन्हीं लोगों की करते हैं, जिनसे हमें प्यार हो…..

निशा- कुछ समय तक साथ रहते रहते प्यार तो हमें पालतू कुत्तों से भी हो जाता है। तो इसका मतलब यह तो नहीं है कि हम कुत्तों से शादी करके उन्हें अपना जीवनसाथी बना लें।

दिव्या- आखिर आप अपने और अज्जू के प्यार की तुलना एक कुत्ते से कैसे कर सकती हो निशा दी..

निशा- क्योंकि यही सच है….. तुम तो जानती ही हो कि मैं अज्जू और मोनू बचपन से एक दूसरे के बेस्टफ्रेंड रहे हैं। ऐसे में अज्जू का मेरी फिक्र करना और मेरे लिए इस तरह परेशान होना पूरी तरह से नैचुरल है….. इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वो मुझे दिल से प्यार करता है और मुझे अपने जीवनसाथी के रूप में देखता। मैं बस उसके लिए अपनी फिजीकल नीड पूरी करना का माध्यम हूँ… क्योंकि जिया उसे फिजीकली सैटिस्फाई नहीं कर पाती है…. साथ ही साथ मेरे और अज्जू के बीच बचपन से ही एक इमोशनल बॉण्ड रहा है, जिसे सब लोग प्यार समझ बैठे हैं। पर वो प्यार कभी था ही नहीं। वो तो बस मजबूरी में बने हमारे ऱिश्ते और अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस डायवोर्स के माध्यम से मैंने उसे सारी जिम्मेदारियों से आजाद कर दिया है। इसलिए जब अज्जू को इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तो उसका रिऐक्शन देखकर तुम्हें हमारे रिश्ते का सारा सच खुद व खुद पता चल जाऐगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या अपनी आँखों मे झलक आऐ आँशुओं को पोंछते हुए बोली

दिव्या- मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि आप आखिर ऐसा क्यों बोल रही हो। क्योंकि जहाँ तक मैं जानती हूँ अज्जू शिर्फ और शिर्फ आपसे ही प्यार करता है और यह बात केवल मै ही नहीं मानती बल्कि मोनू, माँ, पापा, रीनू यहाँ तक की जिया का मानना भी यही है।

निशा- वो इसलिए क्योंकि तुम मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती हो।

दिव्या- तो आप बताईऐ कि आखिर आप दोनों की शादी का असली सच क्या है। मुझे भी तो पता चले कि आपने इतना बडा कदम आखिर क्यों उठाया है।

निशा- बात बस इतनी सी है दिव्या की मैं और अज्जू रिश्ते में एक दूसरे के भाई बहन लगते हैं। जिस कारण हमारे बीच शादी और फिजीकल रिलेशन जैसा कुछ भी होना पाप है।

दिव्या- हाँ मैं इस बारे में पहले से ही जानती हूँ…. लेकिन आपको तो एडोप्ट किया गया था ना… इस हिसाब से टैक्निकली आप दोनों के बीच भाई बहन का रिश्ता नहीं है।

निशा- नहीं मुझे एडोप्ट नहीं किया गया था, बल्कि मुझे मेरे असली माता पिता से चुराया गया था। खैर अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडता है। लेकिन मेरे असली माता पिता का भी अज्जू से एक गरहा रिश्ता था, जिस कारण मुझे एडोप्ट किए जाने के बाबजूद भी टैक्निकल रूप से मैं और अज्जू भाई बहन ही हैं।

दिव्या- ओह कम ऑन निशा दी….. आजकल तो यह सब काफी ज्यादा कॉमन है…. जब आप लोगों की शादी हुई तब आप लोगों को अपने असली रिश्ते के बारे में नहीं पता था। इसलिए जो कुछ भी हुआ वो गलत कैसे हो सकता है। बैसे भी अगर आपका लॉजिक माने तो उस हिसाब से अज्जू और जिया भी भाई बहन हुए… क्योंकि जिया प्रो. नारायण की असली बेटी है और प्रो. नारायण अज्जू के सगे मामा जी हैं।

निशा- नहीं ऐसा नहीं है…. असल में मेरी और अज्जू की शादी से पहले या फिर हमारे रिश्ते का सारा सच जानने से पहले भी मैं और अज्जू चचेरे भाई बहन थे। इसलिए यह कहना कि हमने अनजाने में शादी की थी, यह पूरी तरह से गलत होगा।

दिव्या- तो फिर आप दोनों की शादी के पीछे का असली सच क्या है निशा दी

निशा- अगर तुम सच जानना ही चाहती हो तो सुनो, बात असल में यह है कि जब जिया को ब्लड कैंसर हुआ और वो एक्सीडेंट में लापता हो गई थी। उस वक्त सभी को यही लगा था कि जिया अब इस दुनिया में नहीं है। उसी दौरान साधना और सिम्मी ने अज्जू को धोखे से बहुत बडी मात्रा में ड्रग दे दिया था। हाँलाकि अज्जू के द्वारा बनाऐ गए सीरम के चलते उसके शरीर से ड्रग का ज्यादातर असर खत्म हो गया था, लेकिन अज्जू के शरीर में उत्तेजना काफी ज्यादा बड गई थी। जिसे कंट्रोल किया जाना बहुत जरूरी था और उसके लिए अज्जू का शादी करके किसी लडकी के साथ रैगुलर फिजीकल रिलेशन बनाना बहुत जरूरी था। उसी दौरान चीफ से बदला लेने के लिए अज्जू इंदौर आया हुआ था। जिया ने मरने से पहले हॉस्पीटल में मुझसे वादा लिया था कि मैं अज्जू को कभी अकेले नहीं छोडूंगी और उसकी जिंदगी में दोबारा प्यार लाकर रहूँगी। अपना वादा पूरा करने के लिए मैं ज्यादा से ज्यादा समय अज्जू के साथ बिताने लगी, इस दौरान पता ही नहीं चला कि कब मैं अज्जू से प्यार करने लगी। वहीं दूसरी तरफ अज्जू भी अपनी फिजीकल नीड पूरी करने के लिए अनजाने में ही मेरे करीब आने लगा था और फिर चीफ के जाल में फंसकर हम लोग शादी कर बैठे।

इतना बोलकर निशा कुछ पलों के लिए रुकी और अपनी पुरानी यादों में खो गई


कहानी जारी है.............
Bahut hi badhiya update diya hai redhat.ag bhai....
Nice and beautiful update....
 
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आखिरकार दिव्या की बेसब्री को देखते हुए निशा एक गहरी सांस लेकर बोली

निशा- वो इसलिए क्योंकि कुछ महिनों पहले जब मामा जी का सच सबके सामने आया था और तुम लोगों ने नऐ शिरे से मेरी तलाश शुरू कर दी थी। उस वक्त मुझे अपने कई सारे काम बहुत सावधानी से करने पडते थे, यहाँ तक कि मुझे कहीं भी आने जाने पर यही डर लगा रहता था कि पता नहीं कब कौन सा इंशान मुझे पहचान कर अज्जू के पास मेरी इंफॉर्मेशन पहुँच दे और अज्जू मेरे सामने आकर खडा हो जाऐ। मैंं कई बार बस कुछ पलों या सेकेण्डों के अंतर से अज्जू की नजरों में आते आते बची हूँ। इसलिए मैं ज्यादातर दिल्ली से बाहर ही रहती थी, और दिल्ली केवल तभी आती थी, जब बहुत ज्यादा जरूरी हो। लेकिन जब नायडू ने तुम लोगों को किडनैप किया, तबसे मुझे तुम लोगों की सुरक्षा को लेकर काफी टेंशन होने लगी थी। इसलिए मैंने तय किया था कि मैं तुम सबकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम करके और परिवार में सबके बीच जो दूरियाँ आ गईँ हैं, उन्हें सुलझाकर हमेशा के लिए किसी ऐसी जगह पर चली जाऊँगी। जहाँ मेरे पहचाने जाने का कोई डर ना हो।

इतना बोलकर निशा ने एक गहरी सांस ली और फिर दोवारा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- पर सब कुछ ठीक करके यहाँ से जाने से पहले ही तुमने और पापा ने मुझे पहचान लिया था। लेकिन मैं और लोगों द्वारा पहचाने जाने का रिस्क लेना नहीं चाहती थी, इसलिए मैंने अपनी सुपर पावर का यूज करके तुम्हें और पापा को छोडकर बाकी सभी लोगों के दिमाग के साथ थोडी सी छेडछाड कर दी थी। जिसके अनुसार मैं जब तक अपने असली यानि निशा के रूप में सबके सामने नहीं जाऊँगी, तब तक सभी लोग जोया और निशा को दो अलग अलग इँशान ही मानते रहेंगे।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए निशा को देखने लगी। असल में दिव्या की हालत इस वक्त ऐसी थी, जैसे उसने अपने सामने कोई भूत देख लिया हो। काफी देर तक निशा को यूँ ही हैरानी से देखने के बाद आखिरकार दिव्या ने उससे सबाल पूछ ही लिया

दिव्या- पर निशा दी आखिर आप ऐसे कैसे किसी के भी दिमाग के साथ छेडछाड कर सकती हो….. यह तो गलत बात है….. मैं मानती हूँ कि आप अज्जू और बाकी लोगों से नाराज हो, जिस कारण आप किसी से भी निशा के रूप में मिलना नहीं चाहती। लेकिन आपको कम से कम अज्जू और बाकी लोगों को पूरी ईमानदारी के साथ आप तक पहुँचने का एक मौका तो देना ही चाहिए। क्योंकि अगर आप इसी तरह सबसे दूर दूर भागती रहीं तो फिर सब कुछ कैसे ठीक होगा।

दिव्या की बात सुनकर निशा चिढते हुए बोली

निशा- दिव्या की बच्ची मैं अच्छी तरह समझ रही हूँ तेरी बातों का क्या मतलब है। लेकिन मैं तेरी बातों में नहीं आने बाली, बैसे भी प्यार और जंग में सब जायज है। रही बात अज्जू और बाकी लोगों से नाराज होने की, तो ऐसा कुछ भी नहीं है। हाँ यह बात सही है कि मैं नाराज हूँ पर अज्जू और बाकी लोगों से नहीं, बल्कि अपने आप से नाराज हूँ। मैं इसलिए नाराज हूँ कि आखिर क्यों मैंने अज्जू से प्यार किया, आखिर क्यों मैंने सब लोगों की बात मानकर अज्जू से शादी की। अगर मैंने कभी अज्जू से प्यार ही नहीं किया होता या सबकी बात मानकर उससे शादी नहीं की होती, तो आज हम दोनों की जिंदगी काफी अलग होती।

निशा की बात सुनकर दिव्या उसे समझाते हुए बोली

दिव्या- अब जो हो गया सो हो गया निशा दी, अब उसे बदला नहीं जा सकता है। बैसे भी आप दोनों बचपन से ही एक दूसरे से प्यार करते थे, हाँ यह बात अलग है कि आप दोनों को ही इसका एहसास सालों बाद हुआ। लेकिन आप दोनों का एक साथ आना आपकी किस्मत में लिखा था। जिसे कोई भी नहीं बदल सकता है, भले ही उस वक्त आप अज्जू से शादी नहीं करती, लेकिन किस्मत आपको कभी ना कभी एक दूसरे का जीवन साथी जरूर बना देती।

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- हाँ शायद तुम सही कह रही हो… लेकिन अब जब अज्जू मेरे बिना जीना सीख गया है और जिया ने भी सब कुछ अच्छी तरह संभाल लिया है। तो मुझे लगता है कि यही सही मौका है सबकी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाने का

दिव्या- लेकिन आप तो पहले से ही सबसे दूर हो…. अब और कहाँ जाओगी…..

निशा- फिलहाल मैं तुम सबके बीच में ही अपना नाम और पहचान बदलकर रह रही हूँ। लेकिन अब मैं यहाँ से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाना चाहती हूँ।

दिव्या- कहीं आप बांधवगढ में जाकर तो बसना नहीं चाहती हो

दिव्या की बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- हाँ यह बात सही है कि मैं काफी लम्बे समय तक बांधवगढ में रही हूँ और अभी भी जब मुझे समय मिलता है तो मैं बांधवगढ चली जाती हूँ। पर मेरा यह राज अब खुल चुका है। जिस कारण मैं अब वहाँ पर ज्यादा समय तक नहीं रह सकती। इसीलिए मैंने इण्डिया छोडकर किसी और देश में जाकर बसने का फैसला कर लिया है।

दिव्या- अगर आप इस देश को ही छोड दोगे तो फिर आपकी सीक्रेट ऐजेंट बाली ज़ॉब का क्या होगा और आपकी इस कम्पनी का क्या होगा।

निशा- मैंने अपनी ऐजेंट बाली जॉब से रिजाईन करने का फैसला कर लिया है, इकराम की इंगेज्मेंट के बाद मैं उस जॉब से रिजाईन कर दूँगी, रही बात इस कम्पनी की को इसे संभालने के लिए तुम और इकराम हो ना।

दिव्या- मतलब इकराम आपके साथ नहीं जा रहा है

निशा- नहीं…. क्योंकि सच तो यह है कि इकराम को मेरे इस प्लान के बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं है। बैसे भी जल्द ही उसकी शादी होने बाली है, ऐसे में उसे अपने साथ ले जाना बिल्कुल भी ठीक नहीं होगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या झुंझलाते हुए बोली

दिव्या- अगर ऐसा ही है तो फिर आपने यह सच मुझे क्यों बताया…. क्या आपको डर नहीं लग रहा कि मैं आपके बारे में सबको बता दूंगी

निशा- नहीं मुझे तुमसे बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है।

दिव्या- पर क्यों

निशा- क्योंकि मुझे तुम पर पूरा भरोसा है।

दिव्या- और अगर मैंने आपका भरोसा तोड़ दिया तो….

निशा- तो भी मेरे प्लान में कोई अंतर नहीं आऐगा… हाँ लेकिन तुम पर से मेरा भरोसा जरूर उठ जाऐगा।

दिव्या- अज्जू आपको कहीं नहीं जाने देगा निशा दी

निशा- नहीं दिव्या ऐसा कुछ भी नहीं होगा…… क्योंकि अब अज्जू चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता है

दिव्या- मतलब…

दिव्या की बात सुनकर निशा के चेहरे पर एक रहस्यमई मुस्कान आ गई थी, जिसे देखकर दिव्या काफी ज्यादा कन्फ्यूज हो रही थी, इससे पहले वो निशा से कोई और सबाल कर पाती, निशा अपनी जगह से उठकर खडी हो गई और अपने ऑफिस में रखी सेफ में से कुछ डॉक्यूमेंट निकालकर दिव्या की तरफ बडा दिए। दिव्या ने जैसे ही उन पैपर के टाईटल को पडा तो वो बुरी तरह से हैरान होते हुए बोली

दिव्या- डायवोर्स पेपर…. ओह माई गॉड….. यह सब क्या है निशा दी…. आपके और अज्जू के बीच डायवोर्स कब हो गया… और सबसे बडी बात कि हमें इस बारे में अब तक पता क्यों नहीं चला।

निशा- तुम शायद भूल गई हो दिव्या कि मैं इस वक्त अज्जू और मोनू की बॉस हूँ। जब मैं अपनी आईड़ेंटिटी बदलकर उनके साथ जॉब कर सकती हूँ तो फिर अज्जू को उल्झाकर उससे डायवोर्स पेपर पर साईन लेना मेरे लिए कौन सी बडी बात है। मैंने कुछ दिनों पहले ही अज्जू से डायवोर्स पेपर पर धोखे से साईन लेकर गुपचुप तरीके से केश फाईल कर दिया था और अपनी पावर का यूज करके अज्जू को कुछ भी पता चले बिना ही कोर्ट से डायवोर्स आर्डर भी ले लिया है। इसलिए अब कानूनी रूप से मेरा अज्जू से कोई रिश्ता नहीं है। जिस कारण वो चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता। बैसे भी उसके पास जिया और राधा तो हैं ही… वो उनके साथ हमेशा खुश रहेगा….

निशा की बात सुनकर दिव्या उससे नाराज होते हुए बोली

दिव्या- यह तो गलत बात है निशा दी….. आप आखिर ऐसा कैसे कर सकते हो….. आपने अज्जू को धोखा देकर यह डायवोर्स लिया है…… जिसे कोई भी एक्सेप्ट नहीं करेगा

निशा- सच तो यही है दिव्या कि अब मेरे और अज्जू के बीच में कानूनी रूप से डायवोर्स हो चुका है। इसलिए इस बात से क्या फर्क पडता है कि कोई इस डायवोर्स को एक्सेप्ट करता है या नहीं। बैसे भी अज्जू का असली और पहला प्यार जिया है… ना कि मैं…. मैंने तो बस कुछ दिनों की लिए जिया की जगह उधार ली थी। जो मैंने जिया के बापिस आने के बाद उसे खुशी खुशी लौटा दी थी। बैसे भी अब इस डायवोर्स के बाद ना तो अज्जू का मेरे ऊपर कोई हक है और ना ही मेरा अज्जू पर कोई हक बचा है। अब अज्जू की पत्नि और जीवनसाथी होने के सारे अधिकार जिया के पास हैं।

निशा की बातें सुनकर दिव्या को इस वक्त दर्द, निराशा, गुस्सा जैसे कई सारे इमोशन एकसाथ महसूस हो रहे थे। वो इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाना चाहती थी कि जब सबको इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तब क्या होगा। लेकिन वो इतना तो समझ गई थी कि निशा के लिए भी यह फैसला लेना उतना आसान नहीं रहा होगा। इन्हीं सब बातों के बारे में सोचते हुए दिव्या की आँखों में कब आँशू आ गए उसे पता ही नहीं चला। आखिरकार दिव्या अपने इमोशंस को कंट्रोल करते हुए बोली

दिव्या- निशा दी….. आखिर आप यह सब क्यों कर रही हो…. आपके इस फैसले से कोई भी खुश नहीं रहेगा… ना आप…. ना अज्जू और ना ही हम लोग…..

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- तुम शायद मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती दिव्या, इसलिए ऐसी बातें कर रही हो। सच तो यही है कि अज्जू कभी मुझसे शादी करना ही नहीं चाहता था और ना ही शादी के बाद उसने हमारे रिश्ते को एक्सेप्ट किया था। वो तो बस मेरी खुशी और मेरी जिद्द के चलते अज्जू केवल चीफ से हमारा बदला लेने तक इस रिश्ते को निभाने के लिए मजबूर था। लेकिन अब जब चीफ मारा जा चुका है तो उसे इस रिश्ते को जबरदस्ती निभाने की कोई जरूरत नहीं है।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए बोली

दिव्या- यह सब आप क्या कह रही हो निशा दी….. हम सभी लोग अज्जू की आँखों में आपके लिए प्यार साफ साफ देख सकते हैं….. फिर आपको अज्जू का प्यार क्यों नजर नहीं आ रहा है…

निशा- वो प्यार नहीं बल्कि जिम्मेदारी और मेरे लिए फिक्र है…..

दिव्या- फिक्र भी तो हम उन्हीं लोगों की करते हैं, जिनसे हमें प्यार हो…..

निशा- कुछ समय तक साथ रहते रहते प्यार तो हमें पालतू कुत्तों से भी हो जाता है। तो इसका मतलब यह तो नहीं है कि हम कुत्तों से शादी करके उन्हें अपना जीवनसाथी बना लें।

दिव्या- आखिर आप अपने और अज्जू के प्यार की तुलना एक कुत्ते से कैसे कर सकती हो निशा दी..

निशा- क्योंकि यही सच है….. तुम तो जानती ही हो कि मैं अज्जू और मोनू बचपन से एक दूसरे के बेस्टफ्रेंड रहे हैं। ऐसे में अज्जू का मेरी फिक्र करना और मेरे लिए इस तरह परेशान होना पूरी तरह से नैचुरल है….. इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वो मुझे दिल से प्यार करता है और मुझे अपने जीवनसाथी के रूप में देखता। मैं बस उसके लिए अपनी फिजीकल नीड पूरी करना का माध्यम हूँ… क्योंकि जिया उसे फिजीकली सैटिस्फाई नहीं कर पाती है…. साथ ही साथ मेरे और अज्जू के बीच बचपन से ही एक इमोशनल बॉण्ड रहा है, जिसे सब लोग प्यार समझ बैठे हैं। पर वो प्यार कभी था ही नहीं। वो तो बस मजबूरी में बने हमारे ऱिश्ते और अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस डायवोर्स के माध्यम से मैंने उसे सारी जिम्मेदारियों से आजाद कर दिया है। इसलिए जब अज्जू को इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तो उसका रिऐक्शन देखकर तुम्हें हमारे रिश्ते का सारा सच खुद व खुद पता चल जाऐगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या अपनी आँखों मे झलक आऐ आँशुओं को पोंछते हुए बोली

दिव्या- मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि आप आखिर ऐसा क्यों बोल रही हो। क्योंकि जहाँ तक मैं जानती हूँ अज्जू शिर्फ और शिर्फ आपसे ही प्यार करता है और यह बात केवल मै ही नहीं मानती बल्कि मोनू, माँ, पापा, रीनू यहाँ तक की जिया का मानना भी यही है।

निशा- वो इसलिए क्योंकि तुम मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती हो।

दिव्या- तो आप बताईऐ कि आखिर आप दोनों की शादी का असली सच क्या है। मुझे भी तो पता चले कि आपने इतना बडा कदम आखिर क्यों उठाया है।

निशा- बात बस इतनी सी है दिव्या की मैं और अज्जू रिश्ते में एक दूसरे के भाई बहन लगते हैं। जिस कारण हमारे बीच शादी और फिजीकल रिलेशन जैसा कुछ भी होना पाप है।

दिव्या- हाँ मैं इस बारे में पहले से ही जानती हूँ…. लेकिन आपको तो एडोप्ट किया गया था ना… इस हिसाब से टैक्निकली आप दोनों के बीच भाई बहन का रिश्ता नहीं है।

निशा- नहीं मुझे एडोप्ट नहीं किया गया था, बल्कि मुझे मेरे असली माता पिता से चुराया गया था। खैर अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडता है। लेकिन मेरे असली माता पिता का भी अज्जू से एक गरहा रिश्ता था, जिस कारण मुझे एडोप्ट किए जाने के बाबजूद भी टैक्निकल रूप से मैं और अज्जू भाई बहन ही हैं।

दिव्या- ओह कम ऑन निशा दी….. आजकल तो यह सब काफी ज्यादा कॉमन है…. जब आप लोगों की शादी हुई तब आप लोगों को अपने असली रिश्ते के बारे में नहीं पता था। इसलिए जो कुछ भी हुआ वो गलत कैसे हो सकता है। बैसे भी अगर आपका लॉजिक माने तो उस हिसाब से अज्जू और जिया भी भाई बहन हुए… क्योंकि जिया प्रो. नारायण की असली बेटी है और प्रो. नारायण अज्जू के सगे मामा जी हैं।

निशा- नहीं ऐसा नहीं है…. असल में मेरी और अज्जू की शादी से पहले या फिर हमारे रिश्ते का सारा सच जानने से पहले भी मैं और अज्जू चचेरे भाई बहन थे। इसलिए यह कहना कि हमने अनजाने में शादी की थी, यह पूरी तरह से गलत होगा।

दिव्या- तो फिर आप दोनों की शादी के पीछे का असली सच क्या है निशा दी

निशा- अगर तुम सच जानना ही चाहती हो तो सुनो, बात असल में यह है कि जब जिया को ब्लड कैंसर हुआ और वो एक्सीडेंट में लापता हो गई थी। उस वक्त सभी को यही लगा था कि जिया अब इस दुनिया में नहीं है। उसी दौरान साधना और सिम्मी ने अज्जू को धोखे से बहुत बडी मात्रा में ड्रग दे दिया था। हाँलाकि अज्जू के द्वारा बनाऐ गए सीरम के चलते उसके शरीर से ड्रग का ज्यादातर असर खत्म हो गया था, लेकिन अज्जू के शरीर में उत्तेजना काफी ज्यादा बड गई थी। जिसे कंट्रोल किया जाना बहुत जरूरी था और उसके लिए अज्जू का शादी करके किसी लडकी के साथ रैगुलर फिजीकल रिलेशन बनाना बहुत जरूरी था। उसी दौरान चीफ से बदला लेने के लिए अज्जू इंदौर आया हुआ था। जिया ने मरने से पहले हॉस्पीटल में मुझसे वादा लिया था कि मैं अज्जू को कभी अकेले नहीं छोडूंगी और उसकी जिंदगी में दोबारा प्यार लाकर रहूँगी। अपना वादा पूरा करने के लिए मैं ज्यादा से ज्यादा समय अज्जू के साथ बिताने लगी, इस दौरान पता ही नहीं चला कि कब मैं अज्जू से प्यार करने लगी। वहीं दूसरी तरफ अज्जू भी अपनी फिजीकल नीड पूरी करने के लिए अनजाने में ही मेरे करीब आने लगा था और फिर चीफ के जाल में फंसकर हम लोग शादी कर बैठे।

इतना बोलकर निशा कुछ पलों के लिए रुकी और अपनी पुरानी यादों में खो गई


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आखिरकार दिव्या की बेसब्री को देखते हुए निशा एक गहरी सांस लेकर बोली

निशा- वो इसलिए क्योंकि कुछ महिनों पहले जब मामा जी का सच सबके सामने आया था और तुम लोगों ने नऐ शिरे से मेरी तलाश शुरू कर दी थी। उस वक्त मुझे अपने कई सारे काम बहुत सावधानी से करने पडते थे, यहाँ तक कि मुझे कहीं भी आने जाने पर यही डर लगा रहता था कि पता नहीं कब कौन सा इंशान मुझे पहचान कर अज्जू के पास मेरी इंफॉर्मेशन पहुँच दे और अज्जू मेरे सामने आकर खडा हो जाऐ। मैंं कई बार बस कुछ पलों या सेकेण्डों के अंतर से अज्जू की नजरों में आते आते बची हूँ। इसलिए मैं ज्यादातर दिल्ली से बाहर ही रहती थी, और दिल्ली केवल तभी आती थी, जब बहुत ज्यादा जरूरी हो। लेकिन जब नायडू ने तुम लोगों को किडनैप किया, तबसे मुझे तुम लोगों की सुरक्षा को लेकर काफी टेंशन होने लगी थी। इसलिए मैंने तय किया था कि मैं तुम सबकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम करके और परिवार में सबके बीच जो दूरियाँ आ गईँ हैं, उन्हें सुलझाकर हमेशा के लिए किसी ऐसी जगह पर चली जाऊँगी। जहाँ मेरे पहचाने जाने का कोई डर ना हो।

इतना बोलकर निशा ने एक गहरी सांस ली और फिर दोवारा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- पर सब कुछ ठीक करके यहाँ से जाने से पहले ही तुमने और पापा ने मुझे पहचान लिया था। लेकिन मैं और लोगों द्वारा पहचाने जाने का रिस्क लेना नहीं चाहती थी, इसलिए मैंने अपनी सुपर पावर का यूज करके तुम्हें और पापा को छोडकर बाकी सभी लोगों के दिमाग के साथ थोडी सी छेडछाड कर दी थी। जिसके अनुसार मैं जब तक अपने असली यानि निशा के रूप में सबके सामने नहीं जाऊँगी, तब तक सभी लोग जोया और निशा को दो अलग अलग इँशान ही मानते रहेंगे।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए निशा को देखने लगी। असल में दिव्या की हालत इस वक्त ऐसी थी, जैसे उसने अपने सामने कोई भूत देख लिया हो। काफी देर तक निशा को यूँ ही हैरानी से देखने के बाद आखिरकार दिव्या ने उससे सबाल पूछ ही लिया

दिव्या- पर निशा दी आखिर आप ऐसे कैसे किसी के भी दिमाग के साथ छेडछाड कर सकती हो….. यह तो गलत बात है….. मैं मानती हूँ कि आप अज्जू और बाकी लोगों से नाराज हो, जिस कारण आप किसी से भी निशा के रूप में मिलना नहीं चाहती। लेकिन आपको कम से कम अज्जू और बाकी लोगों को पूरी ईमानदारी के साथ आप तक पहुँचने का एक मौका तो देना ही चाहिए। क्योंकि अगर आप इसी तरह सबसे दूर दूर भागती रहीं तो फिर सब कुछ कैसे ठीक होगा।

दिव्या की बात सुनकर निशा चिढते हुए बोली

निशा- दिव्या की बच्ची मैं अच्छी तरह समझ रही हूँ तेरी बातों का क्या मतलब है। लेकिन मैं तेरी बातों में नहीं आने बाली, बैसे भी प्यार और जंग में सब जायज है। रही बात अज्जू और बाकी लोगों से नाराज होने की, तो ऐसा कुछ भी नहीं है। हाँ यह बात सही है कि मैं नाराज हूँ पर अज्जू और बाकी लोगों से नहीं, बल्कि अपने आप से नाराज हूँ। मैं इसलिए नाराज हूँ कि आखिर क्यों मैंने अज्जू से प्यार किया, आखिर क्यों मैंने सब लोगों की बात मानकर अज्जू से शादी की। अगर मैंने कभी अज्जू से प्यार ही नहीं किया होता या सबकी बात मानकर उससे शादी नहीं की होती, तो आज हम दोनों की जिंदगी काफी अलग होती।

निशा की बात सुनकर दिव्या उसे समझाते हुए बोली

दिव्या- अब जो हो गया सो हो गया निशा दी, अब उसे बदला नहीं जा सकता है। बैसे भी आप दोनों बचपन से ही एक दूसरे से प्यार करते थे, हाँ यह बात अलग है कि आप दोनों को ही इसका एहसास सालों बाद हुआ। लेकिन आप दोनों का एक साथ आना आपकी किस्मत में लिखा था। जिसे कोई भी नहीं बदल सकता है, भले ही उस वक्त आप अज्जू से शादी नहीं करती, लेकिन किस्मत आपको कभी ना कभी एक दूसरे का जीवन साथी जरूर बना देती।

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- हाँ शायद तुम सही कह रही हो… लेकिन अब जब अज्जू मेरे बिना जीना सीख गया है और जिया ने भी सब कुछ अच्छी तरह संभाल लिया है। तो मुझे लगता है कि यही सही मौका है सबकी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाने का

दिव्या- लेकिन आप तो पहले से ही सबसे दूर हो…. अब और कहाँ जाओगी…..

निशा- फिलहाल मैं तुम सबके बीच में ही अपना नाम और पहचान बदलकर रह रही हूँ। लेकिन अब मैं यहाँ से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाना चाहती हूँ।

दिव्या- कहीं आप बांधवगढ में जाकर तो बसना नहीं चाहती हो

दिव्या की बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- हाँ यह बात सही है कि मैं काफी लम्बे समय तक बांधवगढ में रही हूँ और अभी भी जब मुझे समय मिलता है तो मैं बांधवगढ चली जाती हूँ। पर मेरा यह राज अब खुल चुका है। जिस कारण मैं अब वहाँ पर ज्यादा समय तक नहीं रह सकती। इसीलिए मैंने इण्डिया छोडकर किसी और देश में जाकर बसने का फैसला कर लिया है।

दिव्या- अगर आप इस देश को ही छोड दोगे तो फिर आपकी सीक्रेट ऐजेंट बाली ज़ॉब का क्या होगा और आपकी इस कम्पनी का क्या होगा।

निशा- मैंने अपनी ऐजेंट बाली जॉब से रिजाईन करने का फैसला कर लिया है, इकराम की इंगेज्मेंट के बाद मैं उस जॉब से रिजाईन कर दूँगी, रही बात इस कम्पनी की को इसे संभालने के लिए तुम और इकराम हो ना।

दिव्या- मतलब इकराम आपके साथ नहीं जा रहा है

निशा- नहीं…. क्योंकि सच तो यह है कि इकराम को मेरे इस प्लान के बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं है। बैसे भी जल्द ही उसकी शादी होने बाली है, ऐसे में उसे अपने साथ ले जाना बिल्कुल भी ठीक नहीं होगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या झुंझलाते हुए बोली

दिव्या- अगर ऐसा ही है तो फिर आपने यह सच मुझे क्यों बताया…. क्या आपको डर नहीं लग रहा कि मैं आपके बारे में सबको बता दूंगी

निशा- नहीं मुझे तुमसे बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है।

दिव्या- पर क्यों

निशा- क्योंकि मुझे तुम पर पूरा भरोसा है।

दिव्या- और अगर मैंने आपका भरोसा तोड़ दिया तो….

निशा- तो भी मेरे प्लान में कोई अंतर नहीं आऐगा… हाँ लेकिन तुम पर से मेरा भरोसा जरूर उठ जाऐगा।

दिव्या- अज्जू आपको कहीं नहीं जाने देगा निशा दी

निशा- नहीं दिव्या ऐसा कुछ भी नहीं होगा…… क्योंकि अब अज्जू चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता है

दिव्या- मतलब…

दिव्या की बात सुनकर निशा के चेहरे पर एक रहस्यमई मुस्कान आ गई थी, जिसे देखकर दिव्या काफी ज्यादा कन्फ्यूज हो रही थी, इससे पहले वो निशा से कोई और सबाल कर पाती, निशा अपनी जगह से उठकर खडी हो गई और अपने ऑफिस में रखी सेफ में से कुछ डॉक्यूमेंट निकालकर दिव्या की तरफ बडा दिए। दिव्या ने जैसे ही उन पैपर के टाईटल को पडा तो वो बुरी तरह से हैरान होते हुए बोली

दिव्या- डायवोर्स पेपर…. ओह माई गॉड….. यह सब क्या है निशा दी…. आपके और अज्जू के बीच डायवोर्स कब हो गया… और सबसे बडी बात कि हमें इस बारे में अब तक पता क्यों नहीं चला।

निशा- तुम शायद भूल गई हो दिव्या कि मैं इस वक्त अज्जू और मोनू की बॉस हूँ। जब मैं अपनी आईड़ेंटिटी बदलकर उनके साथ जॉब कर सकती हूँ तो फिर अज्जू को उल्झाकर उससे डायवोर्स पेपर पर साईन लेना मेरे लिए कौन सी बडी बात है। मैंने कुछ दिनों पहले ही अज्जू से डायवोर्स पेपर पर धोखे से साईन लेकर गुपचुप तरीके से केश फाईल कर दिया था और अपनी पावर का यूज करके अज्जू को कुछ भी पता चले बिना ही कोर्ट से डायवोर्स आर्डर भी ले लिया है। इसलिए अब कानूनी रूप से मेरा अज्जू से कोई रिश्ता नहीं है। जिस कारण वो चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता। बैसे भी उसके पास जिया और राधा तो हैं ही… वो उनके साथ हमेशा खुश रहेगा….

निशा की बात सुनकर दिव्या उससे नाराज होते हुए बोली

दिव्या- यह तो गलत बात है निशा दी….. आप आखिर ऐसा कैसे कर सकते हो….. आपने अज्जू को धोखा देकर यह डायवोर्स लिया है…… जिसे कोई भी एक्सेप्ट नहीं करेगा

निशा- सच तो यही है दिव्या कि अब मेरे और अज्जू के बीच में कानूनी रूप से डायवोर्स हो चुका है। इसलिए इस बात से क्या फर्क पडता है कि कोई इस डायवोर्स को एक्सेप्ट करता है या नहीं। बैसे भी अज्जू का असली और पहला प्यार जिया है… ना कि मैं…. मैंने तो बस कुछ दिनों की लिए जिया की जगह उधार ली थी। जो मैंने जिया के बापिस आने के बाद उसे खुशी खुशी लौटा दी थी। बैसे भी अब इस डायवोर्स के बाद ना तो अज्जू का मेरे ऊपर कोई हक है और ना ही मेरा अज्जू पर कोई हक बचा है। अब अज्जू की पत्नि और जीवनसाथी होने के सारे अधिकार जिया के पास हैं।

निशा की बातें सुनकर दिव्या को इस वक्त दर्द, निराशा, गुस्सा जैसे कई सारे इमोशन एकसाथ महसूस हो रहे थे। वो इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाना चाहती थी कि जब सबको इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तब क्या होगा। लेकिन वो इतना तो समझ गई थी कि निशा के लिए भी यह फैसला लेना उतना आसान नहीं रहा होगा। इन्हीं सब बातों के बारे में सोचते हुए दिव्या की आँखों में कब आँशू आ गए उसे पता ही नहीं चला। आखिरकार दिव्या अपने इमोशंस को कंट्रोल करते हुए बोली

दिव्या- निशा दी….. आखिर आप यह सब क्यों कर रही हो…. आपके इस फैसले से कोई भी खुश नहीं रहेगा… ना आप…. ना अज्जू और ना ही हम लोग…..

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- तुम शायद मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती दिव्या, इसलिए ऐसी बातें कर रही हो। सच तो यही है कि अज्जू कभी मुझसे शादी करना ही नहीं चाहता था और ना ही शादी के बाद उसने हमारे रिश्ते को एक्सेप्ट किया था। वो तो बस मेरी खुशी और मेरी जिद्द के चलते अज्जू केवल चीफ से हमारा बदला लेने तक इस रिश्ते को निभाने के लिए मजबूर था। लेकिन अब जब चीफ मारा जा चुका है तो उसे इस रिश्ते को जबरदस्ती निभाने की कोई जरूरत नहीं है।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए बोली

दिव्या- यह सब आप क्या कह रही हो निशा दी….. हम सभी लोग अज्जू की आँखों में आपके लिए प्यार साफ साफ देख सकते हैं….. फिर आपको अज्जू का प्यार क्यों नजर नहीं आ रहा है…

निशा- वो प्यार नहीं बल्कि जिम्मेदारी और मेरे लिए फिक्र है…..

दिव्या- फिक्र भी तो हम उन्हीं लोगों की करते हैं, जिनसे हमें प्यार हो…..

निशा- कुछ समय तक साथ रहते रहते प्यार तो हमें पालतू कुत्तों से भी हो जाता है। तो इसका मतलब यह तो नहीं है कि हम कुत्तों से शादी करके उन्हें अपना जीवनसाथी बना लें।

दिव्या- आखिर आप अपने और अज्जू के प्यार की तुलना एक कुत्ते से कैसे कर सकती हो निशा दी..

निशा- क्योंकि यही सच है….. तुम तो जानती ही हो कि मैं अज्जू और मोनू बचपन से एक दूसरे के बेस्टफ्रेंड रहे हैं। ऐसे में अज्जू का मेरी फिक्र करना और मेरे लिए इस तरह परेशान होना पूरी तरह से नैचुरल है….. इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वो मुझे दिल से प्यार करता है और मुझे अपने जीवनसाथी के रूप में देखता। मैं बस उसके लिए अपनी फिजीकल नीड पूरी करना का माध्यम हूँ… क्योंकि जिया उसे फिजीकली सैटिस्फाई नहीं कर पाती है…. साथ ही साथ मेरे और अज्जू के बीच बचपन से ही एक इमोशनल बॉण्ड रहा है, जिसे सब लोग प्यार समझ बैठे हैं। पर वो प्यार कभी था ही नहीं। वो तो बस मजबूरी में बने हमारे ऱिश्ते और अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस डायवोर्स के माध्यम से मैंने उसे सारी जिम्मेदारियों से आजाद कर दिया है। इसलिए जब अज्जू को इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तो उसका रिऐक्शन देखकर तुम्हें हमारे रिश्ते का सारा सच खुद व खुद पता चल जाऐगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या अपनी आँखों मे झलक आऐ आँशुओं को पोंछते हुए बोली

दिव्या- मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि आप आखिर ऐसा क्यों बोल रही हो। क्योंकि जहाँ तक मैं जानती हूँ अज्जू शिर्फ और शिर्फ आपसे ही प्यार करता है और यह बात केवल मै ही नहीं मानती बल्कि मोनू, माँ, पापा, रीनू यहाँ तक की जिया का मानना भी यही है।

निशा- वो इसलिए क्योंकि तुम मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती हो।

दिव्या- तो आप बताईऐ कि आखिर आप दोनों की शादी का असली सच क्या है। मुझे भी तो पता चले कि आपने इतना बडा कदम आखिर क्यों उठाया है।

निशा- बात बस इतनी सी है दिव्या की मैं और अज्जू रिश्ते में एक दूसरे के भाई बहन लगते हैं। जिस कारण हमारे बीच शादी और फिजीकल रिलेशन जैसा कुछ भी होना पाप है।

दिव्या- हाँ मैं इस बारे में पहले से ही जानती हूँ…. लेकिन आपको तो एडोप्ट किया गया था ना… इस हिसाब से टैक्निकली आप दोनों के बीच भाई बहन का रिश्ता नहीं है।

निशा- नहीं मुझे एडोप्ट नहीं किया गया था, बल्कि मुझे मेरे असली माता पिता से चुराया गया था। खैर अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडता है। लेकिन मेरे असली माता पिता का भी अज्जू से एक गरहा रिश्ता था, जिस कारण मुझे एडोप्ट किए जाने के बाबजूद भी टैक्निकल रूप से मैं और अज्जू भाई बहन ही हैं।

दिव्या- ओह कम ऑन निशा दी….. आजकल तो यह सब काफी ज्यादा कॉमन है…. जब आप लोगों की शादी हुई तब आप लोगों को अपने असली रिश्ते के बारे में नहीं पता था। इसलिए जो कुछ भी हुआ वो गलत कैसे हो सकता है। बैसे भी अगर आपका लॉजिक माने तो उस हिसाब से अज्जू और जिया भी भाई बहन हुए… क्योंकि जिया प्रो. नारायण की असली बेटी है और प्रो. नारायण अज्जू के सगे मामा जी हैं।

निशा- नहीं ऐसा नहीं है…. असल में मेरी और अज्जू की शादी से पहले या फिर हमारे रिश्ते का सारा सच जानने से पहले भी मैं और अज्जू चचेरे भाई बहन थे। इसलिए यह कहना कि हमने अनजाने में शादी की थी, यह पूरी तरह से गलत होगा।

दिव्या- तो फिर आप दोनों की शादी के पीछे का असली सच क्या है निशा दी

निशा- अगर तुम सच जानना ही चाहती हो तो सुनो, बात असल में यह है कि जब जिया को ब्लड कैंसर हुआ और वो एक्सीडेंट में लापता हो गई थी। उस वक्त सभी को यही लगा था कि जिया अब इस दुनिया में नहीं है। उसी दौरान साधना और सिम्मी ने अज्जू को धोखे से बहुत बडी मात्रा में ड्रग दे दिया था। हाँलाकि अज्जू के द्वारा बनाऐ गए सीरम के चलते उसके शरीर से ड्रग का ज्यादातर असर खत्म हो गया था, लेकिन अज्जू के शरीर में उत्तेजना काफी ज्यादा बड गई थी। जिसे कंट्रोल किया जाना बहुत जरूरी था और उसके लिए अज्जू का शादी करके किसी लडकी के साथ रैगुलर फिजीकल रिलेशन बनाना बहुत जरूरी था। उसी दौरान चीफ से बदला लेने के लिए अज्जू इंदौर आया हुआ था। जिया ने मरने से पहले हॉस्पीटल में मुझसे वादा लिया था कि मैं अज्जू को कभी अकेले नहीं छोडूंगी और उसकी जिंदगी में दोबारा प्यार लाकर रहूँगी। अपना वादा पूरा करने के लिए मैं ज्यादा से ज्यादा समय अज्जू के साथ बिताने लगी, इस दौरान पता ही नहीं चला कि कब मैं अज्जू से प्यार करने लगी। वहीं दूसरी तरफ अज्जू भी अपनी फिजीकल नीड पूरी करने के लिए अनजाने में ही मेरे करीब आने लगा था और फिर चीफ के जाल में फंसकर हम लोग शादी कर बैठे।

इतना बोलकर निशा कुछ पलों के लिए रुकी और अपनी पुरानी यादों में खो गई


कहानी जारी है.............
Nice and superb update....
 
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kas1709

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आखिरकार दिव्या की बेसब्री को देखते हुए निशा एक गहरी सांस लेकर बोली

निशा- वो इसलिए क्योंकि कुछ महिनों पहले जब मामा जी का सच सबके सामने आया था और तुम लोगों ने नऐ शिरे से मेरी तलाश शुरू कर दी थी। उस वक्त मुझे अपने कई सारे काम बहुत सावधानी से करने पडते थे, यहाँ तक कि मुझे कहीं भी आने जाने पर यही डर लगा रहता था कि पता नहीं कब कौन सा इंशान मुझे पहचान कर अज्जू के पास मेरी इंफॉर्मेशन पहुँच दे और अज्जू मेरे सामने आकर खडा हो जाऐ। मैंं कई बार बस कुछ पलों या सेकेण्डों के अंतर से अज्जू की नजरों में आते आते बची हूँ। इसलिए मैं ज्यादातर दिल्ली से बाहर ही रहती थी, और दिल्ली केवल तभी आती थी, जब बहुत ज्यादा जरूरी हो। लेकिन जब नायडू ने तुम लोगों को किडनैप किया, तबसे मुझे तुम लोगों की सुरक्षा को लेकर काफी टेंशन होने लगी थी। इसलिए मैंने तय किया था कि मैं तुम सबकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम करके और परिवार में सबके बीच जो दूरियाँ आ गईँ हैं, उन्हें सुलझाकर हमेशा के लिए किसी ऐसी जगह पर चली जाऊँगी। जहाँ मेरे पहचाने जाने का कोई डर ना हो।

इतना बोलकर निशा ने एक गहरी सांस ली और फिर दोवारा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- पर सब कुछ ठीक करके यहाँ से जाने से पहले ही तुमने और पापा ने मुझे पहचान लिया था। लेकिन मैं और लोगों द्वारा पहचाने जाने का रिस्क लेना नहीं चाहती थी, इसलिए मैंने अपनी सुपर पावर का यूज करके तुम्हें और पापा को छोडकर बाकी सभी लोगों के दिमाग के साथ थोडी सी छेडछाड कर दी थी। जिसके अनुसार मैं जब तक अपने असली यानि निशा के रूप में सबके सामने नहीं जाऊँगी, तब तक सभी लोग जोया और निशा को दो अलग अलग इँशान ही मानते रहेंगे।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए निशा को देखने लगी। असल में दिव्या की हालत इस वक्त ऐसी थी, जैसे उसने अपने सामने कोई भूत देख लिया हो। काफी देर तक निशा को यूँ ही हैरानी से देखने के बाद आखिरकार दिव्या ने उससे सबाल पूछ ही लिया

दिव्या- पर निशा दी आखिर आप ऐसे कैसे किसी के भी दिमाग के साथ छेडछाड कर सकती हो….. यह तो गलत बात है….. मैं मानती हूँ कि आप अज्जू और बाकी लोगों से नाराज हो, जिस कारण आप किसी से भी निशा के रूप में मिलना नहीं चाहती। लेकिन आपको कम से कम अज्जू और बाकी लोगों को पूरी ईमानदारी के साथ आप तक पहुँचने का एक मौका तो देना ही चाहिए। क्योंकि अगर आप इसी तरह सबसे दूर दूर भागती रहीं तो फिर सब कुछ कैसे ठीक होगा।

दिव्या की बात सुनकर निशा चिढते हुए बोली

निशा- दिव्या की बच्ची मैं अच्छी तरह समझ रही हूँ तेरी बातों का क्या मतलब है। लेकिन मैं तेरी बातों में नहीं आने बाली, बैसे भी प्यार और जंग में सब जायज है। रही बात अज्जू और बाकी लोगों से नाराज होने की, तो ऐसा कुछ भी नहीं है। हाँ यह बात सही है कि मैं नाराज हूँ पर अज्जू और बाकी लोगों से नहीं, बल्कि अपने आप से नाराज हूँ। मैं इसलिए नाराज हूँ कि आखिर क्यों मैंने अज्जू से प्यार किया, आखिर क्यों मैंने सब लोगों की बात मानकर अज्जू से शादी की। अगर मैंने कभी अज्जू से प्यार ही नहीं किया होता या सबकी बात मानकर उससे शादी नहीं की होती, तो आज हम दोनों की जिंदगी काफी अलग होती।

निशा की बात सुनकर दिव्या उसे समझाते हुए बोली

दिव्या- अब जो हो गया सो हो गया निशा दी, अब उसे बदला नहीं जा सकता है। बैसे भी आप दोनों बचपन से ही एक दूसरे से प्यार करते थे, हाँ यह बात अलग है कि आप दोनों को ही इसका एहसास सालों बाद हुआ। लेकिन आप दोनों का एक साथ आना आपकी किस्मत में लिखा था। जिसे कोई भी नहीं बदल सकता है, भले ही उस वक्त आप अज्जू से शादी नहीं करती, लेकिन किस्मत आपको कभी ना कभी एक दूसरे का जीवन साथी जरूर बना देती।

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- हाँ शायद तुम सही कह रही हो… लेकिन अब जब अज्जू मेरे बिना जीना सीख गया है और जिया ने भी सब कुछ अच्छी तरह संभाल लिया है। तो मुझे लगता है कि यही सही मौका है सबकी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाने का

दिव्या- लेकिन आप तो पहले से ही सबसे दूर हो…. अब और कहाँ जाओगी…..

निशा- फिलहाल मैं तुम सबके बीच में ही अपना नाम और पहचान बदलकर रह रही हूँ। लेकिन अब मैं यहाँ से हमेशा हमेशा के लिए दूर जाना चाहती हूँ।

दिव्या- कहीं आप बांधवगढ में जाकर तो बसना नहीं चाहती हो

दिव्या की बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोली

निशा- हाँ यह बात सही है कि मैं काफी लम्बे समय तक बांधवगढ में रही हूँ और अभी भी जब मुझे समय मिलता है तो मैं बांधवगढ चली जाती हूँ। पर मेरा यह राज अब खुल चुका है। जिस कारण मैं अब वहाँ पर ज्यादा समय तक नहीं रह सकती। इसीलिए मैंने इण्डिया छोडकर किसी और देश में जाकर बसने का फैसला कर लिया है।

दिव्या- अगर आप इस देश को ही छोड दोगे तो फिर आपकी सीक्रेट ऐजेंट बाली ज़ॉब का क्या होगा और आपकी इस कम्पनी का क्या होगा।

निशा- मैंने अपनी ऐजेंट बाली जॉब से रिजाईन करने का फैसला कर लिया है, इकराम की इंगेज्मेंट के बाद मैं उस जॉब से रिजाईन कर दूँगी, रही बात इस कम्पनी की को इसे संभालने के लिए तुम और इकराम हो ना।

दिव्या- मतलब इकराम आपके साथ नहीं जा रहा है

निशा- नहीं…. क्योंकि सच तो यह है कि इकराम को मेरे इस प्लान के बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं है। बैसे भी जल्द ही उसकी शादी होने बाली है, ऐसे में उसे अपने साथ ले जाना बिल्कुल भी ठीक नहीं होगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या झुंझलाते हुए बोली

दिव्या- अगर ऐसा ही है तो फिर आपने यह सच मुझे क्यों बताया…. क्या आपको डर नहीं लग रहा कि मैं आपके बारे में सबको बता दूंगी

निशा- नहीं मुझे तुमसे बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है।

दिव्या- पर क्यों

निशा- क्योंकि मुझे तुम पर पूरा भरोसा है।

दिव्या- और अगर मैंने आपका भरोसा तोड़ दिया तो….

निशा- तो भी मेरे प्लान में कोई अंतर नहीं आऐगा… हाँ लेकिन तुम पर से मेरा भरोसा जरूर उठ जाऐगा।

दिव्या- अज्जू आपको कहीं नहीं जाने देगा निशा दी

निशा- नहीं दिव्या ऐसा कुछ भी नहीं होगा…… क्योंकि अब अज्जू चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता है

दिव्या- मतलब…

दिव्या की बात सुनकर निशा के चेहरे पर एक रहस्यमई मुस्कान आ गई थी, जिसे देखकर दिव्या काफी ज्यादा कन्फ्यूज हो रही थी, इससे पहले वो निशा से कोई और सबाल कर पाती, निशा अपनी जगह से उठकर खडी हो गई और अपने ऑफिस में रखी सेफ में से कुछ डॉक्यूमेंट निकालकर दिव्या की तरफ बडा दिए। दिव्या ने जैसे ही उन पैपर के टाईटल को पडा तो वो बुरी तरह से हैरान होते हुए बोली

दिव्या- डायवोर्स पेपर…. ओह माई गॉड….. यह सब क्या है निशा दी…. आपके और अज्जू के बीच डायवोर्स कब हो गया… और सबसे बडी बात कि हमें इस बारे में अब तक पता क्यों नहीं चला।

निशा- तुम शायद भूल गई हो दिव्या कि मैं इस वक्त अज्जू और मोनू की बॉस हूँ। जब मैं अपनी आईड़ेंटिटी बदलकर उनके साथ जॉब कर सकती हूँ तो फिर अज्जू को उल्झाकर उससे डायवोर्स पेपर पर साईन लेना मेरे लिए कौन सी बडी बात है। मैंने कुछ दिनों पहले ही अज्जू से डायवोर्स पेपर पर धोखे से साईन लेकर गुपचुप तरीके से केश फाईल कर दिया था और अपनी पावर का यूज करके अज्जू को कुछ भी पता चले बिना ही कोर्ट से डायवोर्स आर्डर भी ले लिया है। इसलिए अब कानूनी रूप से मेरा अज्जू से कोई रिश्ता नहीं है। जिस कारण वो चाहकर भी मुझे कहीं भी जाने से रोक नहीं सकता। बैसे भी उसके पास जिया और राधा तो हैं ही… वो उनके साथ हमेशा खुश रहेगा….

निशा की बात सुनकर दिव्या उससे नाराज होते हुए बोली

दिव्या- यह तो गलत बात है निशा दी….. आप आखिर ऐसा कैसे कर सकते हो….. आपने अज्जू को धोखा देकर यह डायवोर्स लिया है…… जिसे कोई भी एक्सेप्ट नहीं करेगा

निशा- सच तो यही है दिव्या कि अब मेरे और अज्जू के बीच में कानूनी रूप से डायवोर्स हो चुका है। इसलिए इस बात से क्या फर्क पडता है कि कोई इस डायवोर्स को एक्सेप्ट करता है या नहीं। बैसे भी अज्जू का असली और पहला प्यार जिया है… ना कि मैं…. मैंने तो बस कुछ दिनों की लिए जिया की जगह उधार ली थी। जो मैंने जिया के बापिस आने के बाद उसे खुशी खुशी लौटा दी थी। बैसे भी अब इस डायवोर्स के बाद ना तो अज्जू का मेरे ऊपर कोई हक है और ना ही मेरा अज्जू पर कोई हक बचा है। अब अज्जू की पत्नि और जीवनसाथी होने के सारे अधिकार जिया के पास हैं।

निशा की बातें सुनकर दिव्या को इस वक्त दर्द, निराशा, गुस्सा जैसे कई सारे इमोशन एकसाथ महसूस हो रहे थे। वो इस बात का अंदाजा भी नहीं लगाना चाहती थी कि जब सबको इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तब क्या होगा। लेकिन वो इतना तो समझ गई थी कि निशा के लिए भी यह फैसला लेना उतना आसान नहीं रहा होगा। इन्हीं सब बातों के बारे में सोचते हुए दिव्या की आँखों में कब आँशू आ गए उसे पता ही नहीं चला। आखिरकार दिव्या अपने इमोशंस को कंट्रोल करते हुए बोली

दिव्या- निशा दी….. आखिर आप यह सब क्यों कर रही हो…. आपके इस फैसले से कोई भी खुश नहीं रहेगा… ना आप…. ना अज्जू और ना ही हम लोग…..

दिव्या की बात सुनकर निशा एक गहरी सांस लेते हुए बोली

निशा- तुम शायद मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती दिव्या, इसलिए ऐसी बातें कर रही हो। सच तो यही है कि अज्जू कभी मुझसे शादी करना ही नहीं चाहता था और ना ही शादी के बाद उसने हमारे रिश्ते को एक्सेप्ट किया था। वो तो बस मेरी खुशी और मेरी जिद्द के चलते अज्जू केवल चीफ से हमारा बदला लेने तक इस रिश्ते को निभाने के लिए मजबूर था। लेकिन अब जब चीफ मारा जा चुका है तो उसे इस रिश्ते को जबरदस्ती निभाने की कोई जरूरत नहीं है।

निशा की बात सुनकर दिव्या हैरान होते हुए बोली

दिव्या- यह सब आप क्या कह रही हो निशा दी….. हम सभी लोग अज्जू की आँखों में आपके लिए प्यार साफ साफ देख सकते हैं….. फिर आपको अज्जू का प्यार क्यों नजर नहीं आ रहा है…

निशा- वो प्यार नहीं बल्कि जिम्मेदारी और मेरे लिए फिक्र है…..

दिव्या- फिक्र भी तो हम उन्हीं लोगों की करते हैं, जिनसे हमें प्यार हो…..

निशा- कुछ समय तक साथ रहते रहते प्यार तो हमें पालतू कुत्तों से भी हो जाता है। तो इसका मतलब यह तो नहीं है कि हम कुत्तों से शादी करके उन्हें अपना जीवनसाथी बना लें।

दिव्या- आखिर आप अपने और अज्जू के प्यार की तुलना एक कुत्ते से कैसे कर सकती हो निशा दी..

निशा- क्योंकि यही सच है….. तुम तो जानती ही हो कि मैं अज्जू और मोनू बचपन से एक दूसरे के बेस्टफ्रेंड रहे हैं। ऐसे में अज्जू का मेरी फिक्र करना और मेरे लिए इस तरह परेशान होना पूरी तरह से नैचुरल है….. इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि वो मुझे दिल से प्यार करता है और मुझे अपने जीवनसाथी के रूप में देखता। मैं बस उसके लिए अपनी फिजीकल नीड पूरी करना का माध्यम हूँ… क्योंकि जिया उसे फिजीकली सैटिस्फाई नहीं कर पाती है…. साथ ही साथ मेरे और अज्जू के बीच बचपन से ही एक इमोशनल बॉण्ड रहा है, जिसे सब लोग प्यार समझ बैठे हैं। पर वो प्यार कभी था ही नहीं। वो तो बस मजबूरी में बने हमारे ऱिश्ते और अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस डायवोर्स के माध्यम से मैंने उसे सारी जिम्मेदारियों से आजाद कर दिया है। इसलिए जब अज्जू को इस डायवोर्स के बारे में पता चलेगा, तो उसका रिऐक्शन देखकर तुम्हें हमारे रिश्ते का सारा सच खुद व खुद पता चल जाऐगा।

निशा की बात सुनकर दिव्या अपनी आँखों मे झलक आऐ आँशुओं को पोंछते हुए बोली

दिव्या- मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि आप आखिर ऐसा क्यों बोल रही हो। क्योंकि जहाँ तक मैं जानती हूँ अज्जू शिर्फ और शिर्फ आपसे ही प्यार करता है और यह बात केवल मै ही नहीं मानती बल्कि मोनू, माँ, पापा, रीनू यहाँ तक की जिया का मानना भी यही है।

निशा- वो इसलिए क्योंकि तुम मेरे और अज्जू की शादी का असली सच नहीं जानती हो।

दिव्या- तो आप बताईऐ कि आखिर आप दोनों की शादी का असली सच क्या है। मुझे भी तो पता चले कि आपने इतना बडा कदम आखिर क्यों उठाया है।

निशा- बात बस इतनी सी है दिव्या की मैं और अज्जू रिश्ते में एक दूसरे के भाई बहन लगते हैं। जिस कारण हमारे बीच शादी और फिजीकल रिलेशन जैसा कुछ भी होना पाप है।

दिव्या- हाँ मैं इस बारे में पहले से ही जानती हूँ…. लेकिन आपको तो एडोप्ट किया गया था ना… इस हिसाब से टैक्निकली आप दोनों के बीच भाई बहन का रिश्ता नहीं है।

निशा- नहीं मुझे एडोप्ट नहीं किया गया था, बल्कि मुझे मेरे असली माता पिता से चुराया गया था। खैर अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडता है। लेकिन मेरे असली माता पिता का भी अज्जू से एक गरहा रिश्ता था, जिस कारण मुझे एडोप्ट किए जाने के बाबजूद भी टैक्निकल रूप से मैं और अज्जू भाई बहन ही हैं।

दिव्या- ओह कम ऑन निशा दी….. आजकल तो यह सब काफी ज्यादा कॉमन है…. जब आप लोगों की शादी हुई तब आप लोगों को अपने असली रिश्ते के बारे में नहीं पता था। इसलिए जो कुछ भी हुआ वो गलत कैसे हो सकता है। बैसे भी अगर आपका लॉजिक माने तो उस हिसाब से अज्जू और जिया भी भाई बहन हुए… क्योंकि जिया प्रो. नारायण की असली बेटी है और प्रो. नारायण अज्जू के सगे मामा जी हैं।

निशा- नहीं ऐसा नहीं है…. असल में मेरी और अज्जू की शादी से पहले या फिर हमारे रिश्ते का सारा सच जानने से पहले भी मैं और अज्जू चचेरे भाई बहन थे। इसलिए यह कहना कि हमने अनजाने में शादी की थी, यह पूरी तरह से गलत होगा।

दिव्या- तो फिर आप दोनों की शादी के पीछे का असली सच क्या है निशा दी

निशा- अगर तुम सच जानना ही चाहती हो तो सुनो, बात असल में यह है कि जब जिया को ब्लड कैंसर हुआ और वो एक्सीडेंट में लापता हो गई थी। उस वक्त सभी को यही लगा था कि जिया अब इस दुनिया में नहीं है। उसी दौरान साधना और सिम्मी ने अज्जू को धोखे से बहुत बडी मात्रा में ड्रग दे दिया था। हाँलाकि अज्जू के द्वारा बनाऐ गए सीरम के चलते उसके शरीर से ड्रग का ज्यादातर असर खत्म हो गया था, लेकिन अज्जू के शरीर में उत्तेजना काफी ज्यादा बड गई थी। जिसे कंट्रोल किया जाना बहुत जरूरी था और उसके लिए अज्जू का शादी करके किसी लडकी के साथ रैगुलर फिजीकल रिलेशन बनाना बहुत जरूरी था। उसी दौरान चीफ से बदला लेने के लिए अज्जू इंदौर आया हुआ था। जिया ने मरने से पहले हॉस्पीटल में मुझसे वादा लिया था कि मैं अज्जू को कभी अकेले नहीं छोडूंगी और उसकी जिंदगी में दोबारा प्यार लाकर रहूँगी। अपना वादा पूरा करने के लिए मैं ज्यादा से ज्यादा समय अज्जू के साथ बिताने लगी, इस दौरान पता ही नहीं चला कि कब मैं अज्जू से प्यार करने लगी। वहीं दूसरी तरफ अज्जू भी अपनी फिजीकल नीड पूरी करने के लिए अनजाने में ही मेरे करीब आने लगा था और फिर चीफ के जाल में फंसकर हम लोग शादी कर बैठे।

इतना बोलकर निशा कुछ पलों के लिए रुकी और अपनी पुरानी यादों में खो गई


कहानी जारी है.............
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