This story is copy paste here otherwise original story is to good. I was read that somewhere.
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Super update diya haiसुनीता अपने कमरे में जाके बिस्टर पर लेट जाती है, अभी भी सुनीता के बूर में मीठा मीठा दर्द था। बिस्टर पर लेट कर सोचने लगती है कैसे रमेश ने आज उसकी चुदाई की और शर्मा जाती है क्योंकि आज पहली बार सुनीता एकदुम नंगी हुई थी। यहीं सब सोचते सोचते उसकी आंख लग जाती है।
उधर रमेश बहुत खुश था और आगे मुझे सोचना लगता है कि कैसे सुनीता को धीरे-धीरे चुदाई की आदत डालनी है, ताकि सुनीता पूरी तरह से खुल जाए चुदवाने के लिए। रमेश को पता था कि अभी कुंवारी है धीरे-धीरे उसको अपना दीवाना बना लेना है। रमेश भी धीरे-धीरे सो जाता है।
सुबह 5 बजे राजू की नींद खुलती है तो देखता है रमेश सोया हुआ फिर राजू उठाके धीरे से स्टोर रूम के रास्ते अपने कमरे में चला जाता है। सुनीता भी राजाई ढाक के सोयी हुई थी, फिर राजू अपनी दीदी के बगल में जाके सो जाता है।
सुनीता को कुछ आहट सुनाई देता है, तो देखती है कोई उसके बगल में लता हुआ है, वो समझ जाती है राजू ही होगा।
सुनीता- राजू कब आया
राजू- आवाज सुनकर कंबल से बाहर सुनीता को देखता है और बोलता है हा दीदी अभी आया, तुम कब आये
सुनीता- mai तो रात में ही आगयी थी तू सो गया था।इसलिए मैं तुझे जगाया नहीं
राजू को क्या पता था उसकी दीदी पूरी रात चुदवा रही थी रमेश के साथ
राजू- अच्छा दीदी, रमेश भैया अच्छे हैं ना
सुनीता- मन में मुस्कुरा के बोलती हूँ हा बहुत अच्छे है
राजू- अच्छा दीदी अब तुम अपने ही रूम में रमेश अंकल को बुला लिया करो बात करने के लिए।
सुनीता- हां देखूंगी लेकिन यहां बुलाना ठीक नहीं होगा क्योंकि कोई हमारी आवाज सुनके रात में जग गया फिर दिक्कत हो जाएगी।
दोनो ऐसे ही बात करते रहते हैं फिर घर में सभी जग जाते हैं।