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Adultery Rudra Ki Duniya

Ayush2017

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रुद्र एक बड़े शहर के नामी कॉलेज में पढ़ता है। बाहर से उसकी जिंदगी आम युवाओं जैसी है, लेकिन उसके परिवार का एक ऐसा अतीत है जिसके बारे में उसे भी नहीं पता। कॉलेज में उसकी मुलाकात जिन लड़कियों से होती है, वे अनजाने में नहीं, बल्कि उसी पारिवारिक रहस्य और किसी पुरानी कसम या वसीयत के कारण उसकी तरफ खिंची चली आती हैं। समाज की नजरों में ये रिश्ते गलत या 'टैबू' हो सकते हैं, लेकिन अपनी किस्मत और परिवार को बचाने के लिए रुद्र को इन्हें अपनाना होगा।

किरदारों का परिचय और उनके छुपे रिश्ते:

रुद्र = वह एक साधारण स्टूडेंट समझता है खुद को, लेकिन असल में वह एक बेहद रसूखदार और रहस्यमयी वसीयत का इकलौता वारिस है।

काव्या = रुद्र की बचपन की दोस्त / कज़िन (सौतेली बहन) कॉलेज में दोनों साथ हैं। दोनों के परिवारों के बीच एक सख्त सामाजिक दीवार है, जिसके कारण इनका करीब आना समाज में तहलका मचा सकता है।

मेघना =कॉलेज की सबसे कम उम्र की प्रोफेसर वह रुद्र के पिता के अतीत को जानती है। रुद्र को गाइड करने के बहाने वह उसके करीब आती है, जो कि एक टीचर-स्टूडेंट के रिश्ते के लिहाज से अनैतिक है।

तारा = कॉलेज की रिबेल/अमीर लड़की वह उस विरोधी परिवार से है जिससे रुद्र के परिवार की पुश्तैनी दुश्मनी है। उससे रिश्ता जोड़ना सीधे मौत को बुलावा देने जैसा है।

कहानी की शुरुआत

कहानी की शुरुआत कॉलेज के एक बड़े इवेंट से हो सकती है, जहाँ रुद्र को पहली बार अहसास होता है कि ये तीन अलग-अलग लड़कियाँ उसमें कुछ ऐसा देख रही हैं जो आम नहीं है। उसी रात, उसे अपने घर की तिजोरी से एक पुरानी चिट्ठी मिलती है, जिसमें लिखा होता है: "तुम्हें उन तीनों को अपने करीब लाना होगा, वरना हमारा वंश खत्म हो जाएगा।"

अब आप इस कहानी को किस सीन से शुरू करना चाहेंगे?
  1. कॉलेज के पहले दिन से, जहाँ रुद्र की इन किरदारों से पहली टक्कर होती है?
  2. उस रहस्यमयी रात से, जब रुद्र को अपने परिवार के इस अजीब और वर्जित नियम के बारे में पता चलता है?
 

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अध्याय 1: वह खामोश वसीयत

आधी रात का समय था। दिल्ली की उमस भरी रात में, रुद्र के पुश्तैनी बंगले के सबसे ऊपरी हिस्से—'अटारी' (Attic)—में सन्नाटा पसरा था। रुद्र यहाँ कभी नहीं आता था, लेकिन आज पिता के निधन के बाद कागज़ात ढूँढते हुए वह यहाँ पहुँचा था।

एक कोने में, धूल से ढकी एक भारी ओक (Oak) की मेज थी। उसने जैसे ही उसका दराज खींचा, वह अटक गया। जोर लगाने पर दराज का पिछला हिस्सा खुला और अंदर से एक चमड़े से लिपटा हुआ एक प्राचीन बक्सा बाहर गिर पड़ा।

रुद्र का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसने कांपते हाथों से बक्सा उठाया। उसमें एक पुरानी डायरी थी, जिसके पन्ने पीले पड़ चुके थे। सबसे पहले पन्ने पर उसका नाम लिखा था—"रुद्र: अंतिम वारिस"।

उसने पन्ना पलटा। लिखावट बहुत पुरानी और स्याही गहरी थी। उसने पढ़ना शुरू किया:

"रुद्र, अगर तुम इसे पढ़ रहे हो, तो इसका मतलब है कि हमारे परिवार का पतन शुरू हो चुका है। लोग जिसे 'वर्जित' (Taboo) कहेंगे, वही तुम्हारी नियति है। हमारे वंश को बचाने के लिए तुम्हें उन तीन शक्तियों को एक सूत्र में पिरोना होगा—काव्या, मेघना और तारा।

याद रखना, वे सिर्फ लड़कियाँ नहीं हैं, वे तुम्हारे अतीत और भविष्य की डोर हैं। अगर तुमने उन्हें ठुकराया, तो तुम अपना अस्तित्व खो दोगे। अगर तुमने उन्हें अपनाया, तो समाज तुम्हें कभी माफ़ नहीं करेगा।"

रुद्र के हाथ से डायरी छूट गई। ये नाम—काव्या, मेघना और तारा—ये कोई अजनबी नहीं थे। ये वही नाम थे जो पिछले कुछ हफ़्तों से किसी न किसी बहाने उसकी ज़िंदगी में दाखिल हो रहे थे। उसके माथे पर पसीना आ गया। यह कोई साधारण वसीयत नहीं थी, यह तो एक जाल था।

तभी, नीचे के दरवाज़े पर दस्तक हुई। ज़ोरदार और लयबद्ध। रात के 2 बजे कौन हो सकता था?

रुद्र ने जैसे ही खिड़की से नीचे झाँका, उसे बाहर खड़ी गाड़ी की लाइट दिखाई दी। वह वही गाड़ी थी जिसे उसने आज सुबह कॉलेज के पार्किंग लॉट में देखा था।

आगे क्या होगा

दरवाज़े पर कौन है?: क्या वह उन तीन में से कोई एक (काव्या, मेघना या तारा) है जो आधी रात को रुद्र के घर आई है?

डायरी का रहस्य: क्या रुद्र तुरंत डायरी के अगले पन्नों को पढ़ना शुरू करता है ताकि समझ सके कि यह "वर्जित" रिश्ता असल में है क्या?

रुद्र का डर: क्या वह इस सब से भागने की कोशिश करता है, लेकिन उसे एहसास होता है कि उसके घर का मुख्य दरवाज़ा बाहर से लॉक है?
 
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रुद्र ने खिड़की का शीशा थोड़ा और सरकाया और नीचे देखा। दिल सीने को चीरकर बाहर आने को बेताब था। नीचे खड़ी काले रंग की उस एसयूवी (SUV) की हेडलाइट्स सीधे बंगले के मुख्य दरवाज़े पर पड़ रही थीं।

यह गाड़ी उसने आज सुबह ही कॉलेज के वीआईपी (VIP) पार्किंग में देखी थी। यह प्रोफ़ेसर मेघना की गाड़ी थी।

रात के ठीक दो बजे, कॉलेज की सबसे सख्त और खूबसूरत प्रोफ़ेसर उसके इस पुराने, सुनसान घर के बाहर क्या कर रही थीं? दरवाज़े पर दस्तक और तेज़ हो गई।

रुद्र ने फुर्ती से वह चमड़े की डायरी अपनी जींस की जेब में ठूसी और सीढ़ियों से नीचे की तरफ भागा। जैसे ही उसने लिविंग रूम पार कर के मुख्य दरवाज़ा खोला, सामने का नज़ारा देखकर उसके होश उड़ गए।

सामने सिर्फ मेघना नहीं खड़ी थी। गाड़ी के पास दो और साये थे।

हेडलाइट की तेज़ रोशनी में तीन चेहरे साफ़ दिखाई दे रहे थे—काव्या, मेघना और तारा। तीनों एक साथ, आधी रात को, वहाँ मौजूद थीं। लेकिन उनके चेहरों पर वह कॉलेज वाली सामान्य बात नहीं थी। उनकी आँखों में एक अजीब सी गंभीरता और सम्मोहन था।

प्रोफ़ेसर मेघना ने आगे बढ़कर अपना हाथ रुद्र के कंधे पर रखा। उनका हाथ बर्फ़ की तरह ठंडा था। उन्होंने बेहद धीमी लेकिन गहरी आवाज़ में कहा:

"तुमने डायरी खोल दी है ना, रुद्र? तुम्हें आवाज़ें सुनाई देने लगी होंगी। अब छुपाने का समय खत्म हो चुका है। हमारे परिवारों का जो कर्ज तुम पर उधार है... उसे चुकाने का वक़्त आ गया है।"

काव्या, जो हमेशा रुद्र के सामने शर्माती थी, आज बिल्कुल शांत खड़ी थी। उसने आगे बढ़कर रुद्र का दूसरा हाथ थाम लिया। और तारा, जो कॉलेज की सबसे अमीर और घमंडी लड़की थी, उसने अपनी गाड़ी की डिक्की से एक अजीब सा प्राचीन पीतल का कलश निकाला।

रुद्र ने अपना हाथ पीछे खींचने की कोशिश की, "आप लोग... आप सब यहाँ क्या कर रही हैं? यह क्या पागलपन है? मैम, आप मेरी प्रोफ़ेसर हैं! और काव्या, तुम..."

"हम यहाँ अपनी मर्ज़ी से नहीं आए हैं, रुद्र," तारा ने सर्द लहज़े में कहा, "हमें हमारी रगों में दौड़ने वाले ख़ून ने यहाँ खींचा है। अगर आज रात यह रस्म पूरी नहीं हुई, तो कल का सूरज हममें से कोई नहीं देख पाएगा।"

रुद्र को समझ आ गया था कि वह एक ऐसे जाल में फंस चुका है जहाँ से लौटने का कोई रास्ता नहीं है। यह 'टैबू' (वर्जित) संबंध सिर्फ सामाजिक नियमों को तोड़ने के बारे में नहीं था, यह उनकी जान से जुड़ा हुआ कोई प्राचीन रहस्य था।

आगे क्या होना चाहिए?

वह वर्जित रस्म (The Taboo Ritual): तीनों लड़कियाँ रुद्र को घर के अंदर ले जाती हैं और उस प्राचीन कलश के साथ एक गुप्त रस्म शुरू करती हैं, जहाँ रुद्र को पता चलता है कि उसे इन तीनों के साथ क्या रिश्ता बनाना है।

पिता का अतीत: मेघना रुद्र को बताती है कि उसके पिता ने इन तीनों लड़कियों के परिवारों के साथ क्या वादा किया था, और क्यों यह रिश्ता समाज की नजरों में एक बहुत बड़ा पाप माना जाता है।

अचानक हमला: इससे पहले कि वे घर के अंदर जाएं, अंधेरे से कुछ अनजान लोग उन पर हमला कर देते हैं, जो इस 'हरम' और वसीयत के पूरा होने को रोकना चाहते हैं।
 

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2: वह वर्जित रस्म और पिता का अतीत

रुद्र के पास सोचने का समय नहीं था। मेघना और काव्या ने उसे लगभग खींचते हुए घर के अंदर किया, और तारा ने अंदर आते ही भारी दरवाज़े की कुंडी चढ़ा दी।

बाहर सन्नाटा था, लेकिन हवा में एक अजीब सा भारीपन था।

घर के पुराने हॉल में, जहाँ सिर्फ एक मोमबत्ती जल रही थी, तारा ने उस पीतल के कलश को ज़मीन पर रख दिया। मेघना ने रुद्र को बीच में बिठाया और खुद उसके ठीक सामने बैठ गईं। काव्या और तारा रुद्र के दाएं और बाएं बैठ गईं। एक त्रिकोण (Triangle) बन चुका था जिसके केंद्र में रुद्र था।

"मैम... प्लीज़ बताइए यह सब क्या है?" रुद्र की आवाज़ काँप रही थी।

मेघना ने गहरी सांस ली और अपनी जेब से एक पुराना ताबीज निकाला। "रुद्र, तुम्हारे पिता कोई साधारण इंसान नहीं थे। पैंतीस साल पहले, हमारे तीनों परिवारों के मुखियाओं ने मिलकर एक प्राचीन संविदा (Pact) पर दस्तखत किए थे। एक ऐसा तांत्रिक और पारिवारिक समझौता, जो समाज के हर नियम के खिलाफ है।"

"कैसा समझौता?" रुद्र ने पूछा।

"यह कलश हमारे परिवारों के खून और किस्मत को जोड़ता है," मेघना ने कलश का ढक्कन हटाते हुए कहा, जिसमें से लाल रंग का एक गाढ़ा तरल चमक रहा था। "तुम्हारे पिता ने अपनी ताकत और दौलत के बदले हमारे परिवारों से वादा किया था कि उनका इकलौता वारिस—यानी तुम—हम तीनों के भाग्य को अपने नियंत्रण में लोगे। तुम हमारे गुरु भी होगे, रक्षक भी, और स्वामी भी।"

काव्या ने आगे बढ़कर रुद्र का हाथ अपने गाल से छुआया। उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं। "रुद्र, समाज कहता है कि मैं तुम्हारी कज़िन हूँ, मेघना मैम तुम्हारी गुरु हैं, और तारा तुम्हारी दुश्मन। हम तीनों का तुम्हारे करीब आना एक घोर पाप (Taboo) माना जाएगा। लेकिन अगर तुमने यह खून का रिश्ता आज स्वीकार नहीं किया, तो इस संविदा का श्राप हम तीनों को अंदर से भस्म कर देगा।"

तारा ने अपनी उंगली पर छोटा सा कट लगाया और अपने खून की एक बूंद उस कलश में टपका दी। "यह रस्म हमें एक दूसरे के प्रति पूरी तरह समर्पित कर देगी, रुद्र। चाहे दुनिया हमें पापी कहे या बदनाम करे, अब हमारा वजूद सिर्फ तुमसे है।"

मेघना ने उस कलश से थोड़ा सा तरल रुद्र के माथे पर लगाया। रुद्र को महसूस हुआ जैसे उसकी रगों में बिजली दौड़ गई हो। उसे उन तीनों लड़कियों के विचारों और उनकी धड़कनों का अहसास अपने अंदर होने लगा। यह एक गहरा, डरावना और बेहद आकर्षक 'टैबू हरम' का बंधन था जो अब जुड़ चुका था।


अभी रुद्र इस नए अहसास को संभाल भी नहीं पाया था कि अचानक—'धाड़!'

घर की खिड़की का कांच चकनाचूर हो गया। एक भारी पत्थर सीधे हॉल के बीच में आकर गिरा। मोमबत्ती बुझ गई और चारों तरफ अंधेरा छा गया

बाहर से कई गाड़ियों के रुकने और भारी जूतों की आवाज़ें आने लगीं।

"वे आ गए!" तारा ने घबराकर अपनी जींस के पीछे खोंसा हुआ एक छोटा चाकू निकाल लिया।

"कौन आ गए?" रुद्र चिल्लाया, उसकी आँखों के सामने अभी भी रस्म का नशा तैर रहा था।
"सोसाइटी ऑफ द प्योर (The Keepers of Order)," मेघना ने अंधेरे में रुद्र को पीछे धकेलते हुए कहा। "यह समाज के उन ताकतवर लोगों का गुप्त संगठन है जो इस संविदा को अपवित्र मानते हैं। वे हमारे परिवारों को खत्म करना चाहते हैं ताकि यह 'वर्जित वंश' आगे न बढ़ सके। वे तुम्हें मारने आए हैं, रुद्र!"

बाहर से मुख्य दरवाज़े पर कुल्हाड़ी से वार होने की आवाज़ आई। दरवाज़े की लकड़ी चटकने लगी थी।

काव्या ने डरकर रुद्र को पीछे से पकड़ लिया, लेकिन इस बार रुद्र को डर नहीं लगा। उस रस्म के बाद, उसे अपने अंदर एक अजीब सी, खतरनाक ताकत महसूस हो रही थी। उसकी आँखें अंधेरे में भी साफ़ देख पा रही थीं। उसे महसूस हो रहा था कि काव्या, मेघना और तारा की ताकतें भी अब उसकी कमान का इंतज़ार कर रही थीं।

"रुद्र!" मेघना ने चिल्लाकर कहा, "तुम्हें हमें आदेश देना होगा! जब तक तुम्हारा हुक्म नहीं होगा, हम अपनी पूरी ताकत से लड़ नहीं पाएंगे! हमें अपनी दासी या अपनी रक्षक के रूप में स्वीकार करो और आदेश दो!"

दरवाज़ा टूटकर गिर गया। हाथ में टॉर्च और हथियार लिए पांच नकाबपोश लोग हॉल के अंदर दाखिल हुए।

रुद्र अब इस हरम का स्वामी बन चुका है और पहली बार अपनी 'वर्जित शक्तियों' का इस्तेमाल करने जा रहा है।
 
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3. आदेश (रिबेल का वार)


नकाबपोश हमलावरों की टॉर्च की रोशनी जैसे ही हॉल में पड़ी, रुद्र के सीने में अजीब सी गर्माहट महसूस हुई। डायरी के शब्द और उस कलश का रहस्यमयी तरल उसकी रगों में आग बनकर दौड़ रहे थे। उसे साफ महसूस हो रहा था कि काव्या, मेघना और तारा के शरीर और आत्माएं अब उसके एक इशारे पर नाचने को तैयार थीं।


"उन्हें जिंदा मत छोड़ना! लड़के को खत्म करो और लड़कियों को उठा लो!" हमलावरों के लीडर ने चिल्लाकर कहा और अपनी पिस्तौल रुद्र की तरफ तान दी।


रुद्र का दिमाग अब डर से सुन्न नहीं था, बल्कि उसमें एक अजीब सा सम्मोहन और अधिकार आ चुका था। उसने अपनी आँखें बंद कीं और अपनी आवाज़ में उस रहस्यमयी संविदा (Pact) की पूरी ताकत झोंक दी:


"काव्या... तारा... मेघना... इन्हें खत्म करो!"

जैसे ही रुद्र के मुंह से यह आदेश निकला, हॉल का तापमान अचानक गिर गया और उन तीनों लड़कियों के अंदर एक भयानक बदलाव आया।


सबसे पहले तारा आगे बढ़ी। जो लड़की कॉलेज में सिर्फ अपनी अमीरी और घमंड के लिए जानी जाती थी, वह पलक झपकते ही एक कुशल शिकारी में बदल गई। उसने अपनी जींस के पीछे से दो चाकू निकाले।


पिस्तौल ताने हुए पहले हमलावर की कलाई पर उसका चाकू इतनी तेजी से लगा कि पिस्तौल छिटककर दूर जा गिरी। तारा ने उसकी छाती पर लात मारी और उसे ज़मीन पर गिराकर उसकी ही बंदूक अपने हाथ में ले ली। "रुद्र के घर में कदम रखने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी?" उसने ठंडे और कातिलाना लहज़े में कहा और सीधे फायर कर दिया।





इसी बीच, दो हमलावर रुद्र की तरफ बढ़े, लेकिन प्रोफेसर मेघना उनके रास्ते में ढाल बनकर खड़ी हो गईं। कॉलेज की शांत और गंभीर प्रोफेसर इस समय किसी योद्धा जैसी लग रही थीं। उन्होंने तांत्रिक शब्दों का एक धीमा मंत्र बुदबुदाया, जिससे उन दोनों हमलावरों के पैर अचानक ज़मीन से चिपक गए, जैसे अदृश्य जंजीरों ने उन्हें जकड़ लिया हो


"तुम लोग ऑर्डर ऑफ द प्योर के मोहरे हो," मेघना ने गर्व से कहा, "लेकिन तुम भूल गए कि तुम किसके सामने खड़े हो। रुद्र अब इस वंश का नया स्वामी है।" उन्होंने अपने हाथ के एक झटके से हवा में ऐसा दबाव बनाया कि दोनों हमलावर दीवार से जा टकराए।



सबसे हैरान करने वाला बदलाव काव्या में था। वह मासूम लड़की, जो हमेशा रुद्र के पीछे छुपती थी, अब उसकी आँखें पूरी तरह काली हो चुकी थीं। जैसे ही पांचवां हमलावर रुद्र पर चाकू लेकर झपटा, काव्या हवा की रफ्तार से उसके सामने आ गई।


उसने बिना किसी हथियार के, सिर्फ अपने नंगे हाथों से उस मजबूत हमलावर का गला पकड़ लिया और उसे हवा में उठा दिया। उसकी उँगलियों के नाखून बढ़ चुके थे और उनमें से एक हल्की काली ऊर्जा निकल रही थी। "रुद्र को छूने की हिम्मत भी मत करना..."


उसकी आवाज़ में एक अजीब सा भारीपन था। एक झटके में उसने हमलावर को फर्श पर पटक दिया, जिससे वह बेहोश हो गया।


सिर्फ दो मिनट के अंदर, पाँचों हमलावर ज़मीन पर तड़प रहे थे या बेहोश पड़े थे। हॉल में फिर से सन्नाटा छा गया, सिर्फ उन चारों की तेज़ सांसों की आवाज़ आ रही थी।


रस्म का असर अब साफ़ दिख रहा था। तीनों लड़कियां—काव्या, मेघना और तारा—रुद्र के सामने घुटनों के बल बैठ गईं। उनके चेहरों पर रुद्र के प्रति एक अटूट वफादारी और समर्पण था, जो समाज के किसी भी नियम से परे था। यह उनका 'टैबू हरम' था, जो अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका था।


मेघना ने सिर उठाकर रुद्र की तरफ देखा, उसकी आँखों में सम्मान और चाहत दोनों थी। "स्वामी... हमने आपका पहला आदेश पूरा किया। लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत है। 'ऑर्डर ऑफ द प्योर' के लोग फिर आएंगे, और कॉलेज में हमारा सामना उनके और बड़े मोहरों से होगा।"


तारा ने पिस्तौल रुद्र के कदमों में रख दी। "अब हम यहाँ सुरक्षित नहीं हैं। हमें आपके कॉलेज के हॉस्टल या किसी सुरक्षित जगह पर निकलना होगा, जहाँ हम इस रहस्य की अगली कड़ी ढूंढ सकें।"
 

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4. कॉलेज का हॉस्टल और नया मोड़


रुद्र का दिल अभी भी ज़ोरों से धड़क रहा था। हॉल में फैले सन्नाटे और ज़मीन पर पड़े हमलावरों को देखकर उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह सब उसने किया है—या कहें कि उसके एक आदेश ने इन तीनों लड़कियों के अंदर की इस भयानक और जादुई ताकत को जगा दिया है।

काव्या, मेघना और तारा अभी भी उसके सामने घुटनों के बल बैठी थीं, उनकी सांसें अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं, लेकिन उनकी आँखों में रुद्र के लिए जो समर्पण था, उसने रुद्र के भीतर एक अजीब सी कशिश और घबराहट पैदा कर दी थी।

"हमें यहाँ से तुरंत निकलना होगा, स्वामी," मेघना ने खड़े होते हुए कहा। उसने अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक किया, और उसकी आँखों में फिर से वही कॉलेज वाली गंभीर प्रोफ़ेसर की झलक लौट आई। "यह हमलावर सिर्फ मोहरे थे। उनके आकाओं को पता चल चुका है कि आपने संविदा (Pact) को स्वीकार कर लिया है। वे अगला हमला और बड़ा करेंगे।"

"लेकिन हम जाएँगे कहाँ?" रुद्र ने अपनी जींस की जेब से वह चमड़े की डायरी निकालते हुए पूछा। "और इस डायरी का अगला पन्ना क्या कहता है?"

तारा खड़ी हुई और उसने ज़मीन से पिस्तौल उठाकर अपनी कमर में खोंस ली। "कॉलेज का जो गर्ल्स हॉस्टल का वीआईपी विंग है, वह पूरी तरह सुरक्षित है। वह ज़मीन मेरे परिवार के ट्रस्ट के अधीन है, वहाँ 'ऑर्डर ऑफ द प्योर' के लोग आसानी से नहीं घुस सकते। आज रात हमें वहीं छुपना होगा।"

काव्या अभी भी रुद्र का हाथ पकड़े हुए थी। उसकी आँखें जो कुछ देर पहले पूरी तरह काली हो चुकी थीं, अब फिर से मासूम और नम थीं। "रुद्र... मुझे डर लग रहा है। लेकिन जब मैं तुम्हारा हाथ पकड़ती हूँ, तो मुझे लगता है कि मैं कुछ भी कर सकती हूँ। समाज चाहे हमें जो भी कहे, मैं तुमसे दूर नहीं जाऊँगी।"

रात के करीब तीन बजे, मेघना की काले रंग की एसयूवी कॉलेज के पिछले दरवाज़े से अंदर दाखिल हुई। पूरा कैंपस अंधेरे में डूबा था, सिर्फ स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी सड़क पर पड़ रही थी।

तारा की बदौलत उन्हें वीआईपी विंग के एक बड़े, आलीशान सुइट में जगह मिल गई। दरवाज़ा बंद करते ही चारों ने राहत की सांस ली। कमरे के बीचों-बीच एक बड़ा सा सोफा था, जहाँ चारों बैठ गए। माहौल में एक अजीब सी उत्तेजना और वर्जित (Taboo) खिंचाव था। एक प्रोफ़ेसर, एक कज़िन, और एक कॉलेज की दुश्मन—तीनों अब एक ही लड़के के लिए अपनी जान देने को तैयार थीं।

रुद्र ने मेज पर डायरी खोली। जैसे ही उसने अगला पन्ना पलटा, उस पर ताजे खून जैसी लाल स्याही से कुछ नए शब्द उभर आए थे:

"संविदा का पहला चरण पूरा हुआ। रक्षक जाग चुके हैं। लेकिन इस बंधन को अटूट बनाने के लिए, स्वामी को अपने रक्षकों के साथ शारीरिक और आत्मिक रूप से एक होना होगा। जैसे-जैसे यह वर्जित संबंध गहरा होगा, तुम्हारी शक्तियां असीमित होती जाएंगी।

पर सावधान! तुम्हारे सबसे करीब रहने वाला ही तुम्हारा सबसे बड़ा शिकारी है। कॉलेज का वह व्यक्ति, जो खुद को न्याय का रक्षक कहता है, वही इस विनाश का सूत्रधार है।"

"न्याय का रक्षक..." रुद्र ने धीरे से दोहराया।
मेघना का चेहरा पीला पड़ गया। "प्रिंसिपल... प्रोफ़ेसर भारद्वाज! वह सिर्फ कॉलेज के हेड नहीं हैं, बल्कि 'ऑर्डर ऑफ द प्योर' के इस क्षेत्र के सबसे बड़े लीडर हैं। वही हैं जो हमारे परिवारों को खत्म करना चाहते हैं।"

तभी, कमरे के कोने में रखी लैंडलाइन फोन की घंटी बजी। इस आलीशान और सुनसान विंग में रात के 3:30 बजे फोन की आवाज़ ने सबको चौंका दिया।

रुद्र ने आगे बढ़कर फोन का रिसीवर उठाया। दूसरी तरफ से एक भारी, गंभीर और डरावनी हँसी गूँजी।

"बधाई हो, रुद्र..." वह प्रोफ़ेसर भारद्वाज की आवाज़ थी। "तुमने अपने पिता के पापी रास्ते को चुन ही लिया। जिन लड़कियों को तुम अपनी ताकत समझ रहे हो, वे ही तुम्हारी मौत का कारण बनेंगी। सुबह कॉलेज के असेंबली हॉल में तुम्हारा इंतज़ार रहेगा... अपनी इस खूबसूरत टोली के साथ आना।"

फोन कट गया।
 

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5. वह वर्जित रात और सुबह का महायुद्ध

कमरे में सन्नाटा छा गया। फोन की वह ठंडी और कटीली आवाज़ अभी भी रुद्र के कानों में गूंज रही थी। प्रिंसिपल भारद्वाज को उनके यहाँ होने का पता चल चुका था।

रुद्र ने रिसीवर वापस रखा और अपनी हरम की तरफ देखा। मेघना के चेहरे पर चिंता थी, तारा गुस्से में अपनी मुट्ठियाँ भींच रही थी, और काव्या डर के बावजूद रुद्र के और करीब सरक आई थी।

"भारद्वाज हमें खुली चुनौती दे रहा है," तारा ने दांत पीसते हुए कहा। "वह जानता है कि हम यहाँ हैं। सुबह असेंबली हॉल में जाना सीधे मौत के कुएँ में कूदने जैसा होगा।"

"लेकिन हमारे पास और कोई रास्ता भी नहीं है," मेघना ने खड़े होते हुए कहा, उसकी आँखें डायरी के उस खुले पन्ने पर टिकी थीं जहाँ 'शारीरिक और आत्मिक रूप से एक होने' की बात लिखी थी। उसने गहरी सांस ली और रुद्र के बिल्कुल सामने आकर खड़ी हो गई। "रुद्र... भारद्वाज के पास 'ऑर्डर ऑफ द प्योर' की पूरी फौज है। उनके हथियारों और तांत्रिक ताकतों का मुकाबला हम इस आधी-अधूरी शक्ति से नहीं कर सकते।"

रुद्र ने उसकी आँखों में देखा, "तो हमें क्या करना होगा, मेघना?" (अब उसने 'मैम' कहना छोड़ दिया था, क्योंकि संविदा ने उनके बीच के सामाजिक रिश्ते की दीवार को ढहा दिया था)।

मेघना के गालों पर हल्की सी सुर्खी आ गई, लेकिन उसकी आवाज़ में दृढ़ता थी। "डायरी ने जो कहा, हमें वही करना होगा। हमें इस वर्जित बंधन (Taboo Bond) को उसकी आखिरी सीमा तक ले जाना होगा। जब तक हम तीनों अपनी आत्मा और शरीर को पूरी तरह तुम्हारे अधीन नहीं कर देतीं, तब तक हमारी शक्तियाँ अपनी चरम सीमा (Peak) पर नहीं पहुँचेंगी।"

काव्या ने धीरे से रुद्र का हाथ पकड़ा, उसकी उंगलियाँ कांप रही थीं लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सा सम्मोहन था। "रुद्र... अगर समाज की नजरों में यह पाप है, तो मैं यह पाप करने के लिए तैयार हूँ। मैं हमेशा से तुम्हारी होना चाहती थी।"

तारा जो हमेशा घमंडी और दूर रहने वाली लड़की थी, उसने भी आगे बढ़कर अपनी पिस्तौल मेज पर रख दी और अपनी जैकेट उतार दी। "मेरी किस्मत पहले ही तुमसे जुड़ चुकी है, रुद्र। भारद्वाज के सामने घुटने टेकने से बेहतर है कि मैं पूरी तरह तुम्हारी शक्ति बन जाऊँ।"


कमरे की लाइटें मद्धम हो गईं। उस आलीशान सुइट के बंद दरवाजों के पीछे, समाज के बनाए सारे नियम, सारे रिश्ते—प्रोफेसर, कज़िन, और दुश्मन—धुंधले पड़ गए। सिर्फ एक आदिम और शक्तिशाली संविदा बची थी।
रुद्र ने जैसे ही मेघना, काव्या और तारा को अपने करीब खींचा, डायरी से लाल रोशनी का एक तेज़ भंवर उठा और पूरे कमरे में फैल गया। यह सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं था; यह उनकी आत्माओं का एक-दूसरे में विलीन होना था। रुद्र को महसूस हुआ जैसे मेघना का ज्ञान और रणनीतिक सोच, तारा का बेखौफ गुस्सा और काव्या की छुपी हुई असीमित जादुई ऊर्जा... सब कुछ पानी की तरह बहकर उसके भीतर समा रहा हो।

तीनों लड़कियों की पीठ पर एक जैसे काले और सुनहरे रंग के रहस्यमयी टैटू उभर आए—यह उनके रुद्र के प्रति पूर्ण समर्पण और उसके हरम का अटूट हिस्सा होने का प्रतीक था। उस रात, रुद्र सिर्फ एक कॉलेज स्टूडेंट नहीं रहा; वह उस प्राचीन और वर्जित वंश का असली 'स्वामी' बन गया।

अगली सुबह। कॉलेज का असेंबली हॉल खचाखच भरा हुआ था। सैकड़ों स्टूडेंट्स और प्रोफ़ेसर वहाँ मौजूद थे, लेकिन माहौल में एक अजीब सा सन्नाटा था। स्टेज पर प्रिंसिपल भारद्वाज खड़े थे, उनके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी।

जैसे ही असेंबली हॉल का भारी मुख्य दरवाज़ा खुला, सबकी नज़रें उधर घूम गईं।
रुद्र अंदर दाखिल हुआ। उसके पीछे मेघना, तारा और काव्या चल रही थीं। लेकिन आज उन चारों का आभा (Aura) पूरी तरह बदल चुका था। रुद्र की आँखों में एक अजीब सी सुनहरी चमक थी और उसका आत्मविश्वास किसी राजा जैसा था। तीनों लड़कियाँ उसके पीछे उसकी ढाल बनकर चल रही थीं।

"देखो... पापी आ गए," भारद्वाज ने माइक पर गहरी आवाज़ में कहा। अचानक, कॉलेज के गार्ड्स और कुछ प्रोफ़ेसरों ने अपने कपड़ों के अंदर से हथियार निकाल लिए। वे साधारण गार्ड्स नहीं, बल्कि 'ऑर्डर ऑफ द प्योर' के ट्रेंड लड़ाके थे। स्टूडेंट्स घबराकर चिल्लाने लगे और हॉल में भगदड़ मच गई।

"रुद्र! तुम्हारे पिता ने जो अपवित्रता शुरू की थी, आज मैं उसे तुम्हारे और इन लड़कियों के खून से साफ़ कर दूँगा!" भारद्वाज ने चिल्लाकर कहा और अपनी जेब से एक काला क्रूस (Cross) निकाला। उसे हवा में लहराते ही हॉल की छत से काली ऊर्जा की किरणें रुद्र की तरफ बढ़ीं।

लेकिन रुद्र अपनी जगह से हिला तक नहीं। उसने अपनी उंगलियों से एक चुटकी बजाई और मुस्कुराया।

"मेघना, तारा, काव्या..." रुद्र की आवाज़ पूरे हॉल में गूंज उठी, "इन्हें दिखाओ कि जब वर्जित शक्तियां एक होती हैं, तो क्या होता है।"

इस बार, उनकी ताकत पहले से दस गुना ज्यादा थी।

तारा ने पलक झपकते ही हवा में छलांग लगाई, उसकी गति इतनी तेज़ थी कि हमलावरों की गोलियाँ उसे छू भी नहीं पाईं। उसने एक साथ तीन लड़ाकों को ज़मीन पर ढेर कर दिया। मेघना ने अपने हाथों से एक अदृश्य सुरक्षा कवच (Shield) बना दिया जिसने भारद्वाज के काले जादू को हवा में ही सोख लिया।

और काव्या... उसने अपनी आँखें खोलीं, जिससे निकलने वाली काली लहरों ने स्टेज पर खड़े भारद्वाज के मुख्य गार्ड्स को घुटनों के बल ला दिया।

भारद्वाज का चेहरा डर से पीला पड़ गया। वह समझ गया कि वह एक साधारण हरम से नहीं, बल्कि एक नए जागृत हुए देवता और उसकी शक्तियों से लड़ रहा है। वह पीछे के दरवाज़े से भागने की कोशिश करने लगा।

"वह भाग रहा है, स्वामी!" मेघना ने चिल्लाकर कहा।
 
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6. द फोर्थ मेंबर: एक नया और बड़ा राज़


भारद्वाज अपनी जान बचाकर स्टेज के पीछे बने वीआईपी एग्जिट (Exit) दरवाज़े की तरफ भाग रहा था। रुद्र की आँखों में अब कोई दया नहीं थी। उसने तारा को इशारा किया, लेकिन इससे पहले कि तारा आगे बढ़ती, एक बड़ा धमाका हुआ और स्टेज का भारी मखमली पर्दा अचानक गिर गया।

पर्दे के पीछे का नज़ारा देखकर पूरा हॉल सन्न रह गया।

वहाँ एक और लड़की खड़ी थी। यह नंदिनी थी—कॉलेज की स्टूडेंट काउंसिल की प्रेसिडेंट, सबसे लोकप्रिय सीनियर, और शहर के सबसे रसूखदार राजनीतिक परिवार की इकलौती बेटी। लेकिन आज उसका अंदाज़ हमेशा से बिल्कुल अलग था। उसने काले रंग का एक लेदर सूट पहना हुआ था और उसके हाथ में एक चमकता हुआ प्राचीन खंजर था।


भारद्वाज कुछ समझ पाता, उससे पहले ही नंदिनी ने बिजली की फुर्ती से वह खंजर भारद्वाज के कंधे में घोंप दिया। भारद्वाज दर्द से चीखता हुआ ज़मीन पर घुटनों के बल गिर पड़ा और उसका जादुई क्रूस (Cross) दूर जा गिरा।

"तुम... तुम यहाँ क्या कर रही हो, नंदिनी? तुम्हारा परिवार तो हमारे 'ऑर्डर' के साथ था!" भारद्वाज ने हांफते हुए खून थूकते हुए कहा।

नंदिनी ने खंजर वापस खींचा और उसकी तरफ हिकारत से देखा। "मेरे परिवार ने तुम्हारे ऑर्डर का सिर्फ इस्तेमाल किया, प्रोफेसर। असली वफादारी हमेशा से सिर्फ एक ही वंश के लिए थी।"

फिर वह घूमी और रुद्र की तरफ चलने लगी। मेघना, तारा और काव्या तुरंत रुद्र के आगे ढाल बनकर खड़ी हो गईं, लेकिन रुद्र ने उन्हें पीछे हटने का इशारा किया। नंदिनी रुद्र के बिल्कुल करीब आई, उसकी आँखों में एक अजीब सी कशिश और चुनौती थी। उसने अपने घुटने ज़मीन पर टेके और रुद्र के सामने अपना सिर झुका लिया।

"मुझे माफ़ करना, मेरे स्वामी। मुझे आप तक पहुँचने और सही समय का इंतज़ार करने में थोड़ी देर हो गई," नंदिनी की आवाज़ में गज़ब का आत्मविश्वास और समर्पण था। "मैं इस संविदा (Pact) का चौथा और सबसे अहम हिस्सा हूँ... द सीक्रेट कीपर (The Secret Keeper)।"

मेघना, तारा और काव्या हैरान थीं। रुद्र को भी अब समझ आ रहा था कि उसके पिता का जाल कितना बड़ा था। यह 'टैबू हरम' सिर्फ तीन लड़कियों तक सीमित नहीं था; इसमें शहर के सबसे ऊंचे तबके के लोग भी शामिल थे।

तभी ज़मीन पर पड़े घायल भारद्वाज ने एक कुटिल मुस्कान के साथ अपनी खून से लथपथ उंगलियों से स्टेज के फर्श पर छिपा हुआ एक बटन दबा दिया।

"तुम जीत नहीं पाओगे, रुद्र... संविदा का मुख्य स्रोत (Source) मैं आज हमेशा के लिए नष्ट कर दूँगा!" भारद्वाज चिल्लाया।

फर्श का एक हिस्सा अचानक खुला और भारद्वाज एक अंधेरी सुरंग में खिसक गया।

नंदिनी तुरंत खड़ी हुई, "स्वामी, वह लाइब्रेरी के नीचे बने उस प्राचीन तहखाने (Dungeon) में जा रहा है। वहीं उस संविदा का असली जादुई स्रोत मौजूद है। अगर उसने उसे नष्ट कर दिया, तो हमारी सारी शक्तियाँ खत्म हो जाएँगी। हमें उसे रोकना होगा!"

रुद्र ने गहरी सांस ली। उसकी नज़रें अपनी चारों रक्षकों—काव्या (मासूमियत), मेघना (ज्ञान), तारा (विद्रोह), और अब नंदिनी (सत्ता)—पर पड़ीं। उसका 'टैबू हरम' अब पूरा हो चुका था, और अब आखिरी लड़ाई का समय आ गया था।

"चलो," रुद्र ने आदेश दिया, और पाँचों उस अंधेरी सुरंग में कूद गए।

रुद्र और उसका 'टैबू हरम' अब उस रहस्यमयी तहखाने में उतर चुका है। आप इस रोमांचक कहानी को किस दिशा में ले जाना चाहेंगे?

क्या तहखाने के मुख्य दरवाज़े को खोलने के लिए रुद्र को अपनी नई साथी नंदिनी के साथ भी अपना 'वर्जित बंधन' (Taboo Bond) जोड़ना होगा, या अंदर उनका सामना भारद्वाज के किसी भयानक गुरु या दैत्य से होगा?
 

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7. शक्ति का पूर्ण रूप


सुरंग का रास्ता संकरा, ठंडा और पूरी तरह अंधेरा था। रुद्र सबसे आगे चल रहा था, और उसकी आँखों से निकलने वाली हल्की सुनहरी रोशनी पूरे रास्ते को रास्ता दिखा रही थी। उसके ठीक पीछे मेघना, तारा, काव्या और उनकी नई साथी नंदिनी थीं।

जैसे-जैसे वे नीचे जा रहे थे, हवा भारी होती जा रही थी। अंत में, वे एक बहुत बड़े, प्राचीन हॉलनुमा तहखाने में पहुंचे। यहाँ की दीवारें काली चट्टानों से बनी थीं और उनके बीचों-बीच एक विशाल पत्थर का दरवाज़ा था, जिस पर एक त्रिशूल और कुछ प्राचीन लिपियाँ खुदी हुई थीं।

दरवाज़े के ठीक सामने घायल भारद्वाज खड़ा था, उसके हाथ में एक मशाल थी। वह हाँफते हुए उस दरवाज़े पर बने एक चक्र को घुमाने की कोशिश कर रहा था।

"रुक जाओ, भारद्वाज!" रुद्र की आवाज़ तहखाने की दीवारों से टकराकर गूंजी।

भारद्वाज पीछे घूमा, उसकी आँखों में पागलपन था। "तुम बहुत देर से आए, रुद्र! इस दरवाज़े के पीछे तुम्हारे वंश का 'मुख्य स्रोत' (The Core Source) है। अगर मैं इसे खोलकर इसके अंदर का तंत्र नष्ट कर दूँगा, तो तुम और तुम्हारी ये चारों रखैलें (Harem) पल भर में राख हो जाओगे!"

"उसे मैं देख लूँगी!" तारा गुस्से में आगे बढ़ी, लेकिन जैसे ही उसने कदम बढ़ाया, उस पत्थर के दरवाज़े से नीली जादुई बिजली की एक ज़बरदस्त लहर निकली, जिसने तारा को पीछे फेंक दिया। नंदिनी ने फुर्ती से आगे बढ़कर तारा को संभाला।

नंदिनी ने दरवाज़े की तरफ देखा और उसका चेहरा गंभीर हो गया। "स्वामी... भारद्वाज झूठ बोल रहा है। वह इस स्रोत को नष्ट नहीं कर सकता, क्योंकि इसे खोलने की चाबी सिर्फ मेरे पास है। लेकिन एक समस्या है।"

"कैसी समस्या, नंदिनी?" रुद्र ने पूछा।

नंदिनी रुद्र के बिल्कुल करीब आई, उसकी सांसें तेज़ थीं। "यह दरवाज़ा तब तक नहीं खुलेगा जब तक कि इस संविदा (Pact) का चौथा और आखिरी चरण पूरा नहीं हो जाता। आपको मुझे भी पूरी तरह अपनाना होगा... जैसा आपने काव्या, मेघना और तारा के साथ किया है। जब तक हमारा आत्मिक और शारीरिक मिलन नहीं होगा, इस दरवाज़े की सील नहीं टूटेगी।"

भारद्वाज ज़ोर से हँसा, "तुम्हारे पास वक्त नहीं है, लड़का! इस दरवाज़े के रक्षक जाग रहे हैं!"

तभी, दीवारों के सायों से काले धुएं के बने कुछ डरावने दैत्य (Shadow Monsters) बाहर निकलने लगे, जो भारद्वाज के काले जादू के आख़िरी रक्षक थे। वे धीरे-धीरे रुद्र और उसकी लड़कियों की तरफ बढ़ने लगे।

मेघना और काव्या ने तुरंत आगे बढ़कर एक सुरक्षा घेरा बनाया। मेघना ने अपने मंत्रों से उन सायों को रोका और काव्या ने अपनी काली ऊर्जा से उन्हें पीछे धकेला। तारा ने भी अपनी बंदूक संभाल ली।

"रुद्र!" मेघना ने चिल्लाकर कहा, "हमारे पास इन सायों को रोकने के लिए ज़्यादा वक़्त नहीं है! तुम्हें और नंदिनी को अभी यह बंधन पूरा करना होगा!"

हॉल के एक कोने में, जहाँ परछाइयों का युद्ध चल रहा था, रुद्र ने नंदिनी को अपनी बाँहों में खींच लिया। नंदिनी ने अपनी आँखें बंद कर लीं। जैसे ही रुद्र के होंठ नंदिनी से मिले, तहखाने की पूरी ज़मीन काँपने लगी।

नंदिनी की पीठ पर भी वही रहस्यमयी सुनहरा टैटू उभर आया। रुद्र को महसूस हुआ कि राजनीतिक रसूख, कानून की ताकत और दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचाने का जो हुनर नंदिनी के पास था, वह सब अब उसकी शक्ति का हिस्सा बन चुका था। उसका 'टैबू हरम' अब अपने पूर्ण और अजेय रूप में आ चुका था।

रुद्र की आँखें पूरी तरह सुनहरी हो गईं। उसके शरीर से एक ऐसी तेज़ रोशनी निकली जिसने तहखाने के सारे अंधेरे सायों को एक झटके में भस्म कर दिया।

भारद्वाज खौफ से कांपता हुआ पीछे हटा, "नहीं... यह असंभव है! इतनी ताकत..."

रुद्र ने आगे बढ़कर भारद्वाज का गला हवा में ही पकड़ लिया, बिना उसे छुए। उसकी आवाज़ अब किसी इंसान की नहीं, बल्कि एक सम्राट की लग रही थी।

"भारद्वाज, तुमने मेरे परिवार को मिटाने की कोशिश की। तुमने मेरे इन रक्षकों को नुकसान पहुँचाना चाहा," रुद्र ने ठंडे लहज़े में कहा। "अब इस वर्जित साम्राज्य की पहली सज़ा भुगतो।"

रुद्र ने हाथ का एक झटका दिया, और भारद्वाज दीवार से टकराकर सीधे उस जादुई चक्र पर जा गिरा। पत्थर का विशाल दरवाज़ा एक भयानक आवाज़ के साथ धीरे-धीरे खुलने लगा, और भारद्वाज उस दरवाज़े के अंदर छिपी असीम जादुई आग में समाकर हमेशा के लिए खत्म हो गया।

जब दरवाज़ा पूरी तरह खुला, तो अंदर से एक दिव्य सुनहरी रोशनी निकली। वहाँ एक प्राचीन सिंहासन था, और उसके चारों तरफ चार दीये जल रहे थे—जो काव्या, मेघना, तारा और नंदिनी की शक्तियों के प्रतीक थे।

चारों लड़कियाँ—जो समाज के नियमों को तोड़कर अब रुद्र की हो चुकी थीं—एक साथ उसके सामने आईं। उन्होंने रुद्र को उस सिंहासन की तरफ बढ़ने का इशारा किया।

"आपका सिंहासन आपका इंतज़ार कर रहा है, हमारे स्वामी," मेघना, काव्या, तारा और नंदिनी ने एक साथ झुककर कहा।

रुद्र ने आगे बढ़कर उस सिंहासन पर कदम रखा। अब वह सिर्फ एक कॉलेज का छात्र नहीं था, बल्कि दुनिया की नज़रों से छिपे इस शक्तिशाली और 'वर्जित' साम्राज्य का इकलौता और सर्वोच्च राजा (The Sovereign of the Taboo Harem) बन चुका था।
 

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सीज़न 2: वर्जित साम्राज्य और वासना का खेल

(Season 2: The Sovereign's Pleasure)


भारद्वाज का अंत तो सिर्फ एक शुरुआत थी। उस प्राचीन सिंहासन पर बैठते ही रुद्र को समझ आ गया था कि इस 'वर्जित साम्राज्य' (Taboo Harem) की असली ताकत सिर्फ दुश्मनों को हराने में नहीं, बल्कि अपनी इन चारों रक्षकों के समर्पण, उनकी कामुकता और उनके साथ बनाए शारीरिक संबंधों की गहराई में थी। संविदा (Pact) का नियम साफ़ था—रुद्र जितना अधिक इन वर्जित (Taboo) और अनैतिक रिश्तों में डूबेगा, उनकी जादुई और राजनीतिक ताकतें उतनी ही अजेय होती जाएंगी।

अब कॉलेज सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि रुद्र के इस गुप्त ऐश-ओ-आराम का महल बन चुका था, जहाँ वासना, विश्वासघात और असीमित अधिकार का एक नया खेल शुरू होने जा रहा था।

नए सीज़न के मुख्य किरदार और उनके गहरे होते 'वर्जित' रिश्ते

रुद्र (Rudra) = सम्राट (The Sovereign) वह अब अपनी वासना को ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति बना चुका है। हरम के हर सदस्य के साथ उसका संबंध अब और अधिक कामुक, गहरा और बेबाक हो चुका है।

प्रोफ़ेसर मेघना (Meghna) = कॉलेज प्रोफ़ेसर (The Intellectual Guide) दिन में वह रुद्र को लेक्चर देती है, लेकिन रात होते ही वह अपने केबिन या रुद्र के सुइट में एक समर्पित दासी बन जाती है। गुरु और शिष्य के इस गुप्त और कामुक रिश्ते से रुद्र को 'ज्ञान और रणनीति' की असीमित शक्ति मिलती है।

काव्या (Kavya) = सौतेली बहन समाज की नज़र में यह रिश्ता सबसे बड़ा पाप है। लेकिन काव्या अब रुद्र के प्यार और वासना में पूरी तरह अंधी हो चुकी है। रुद्र के साथ उसका हर शारीरिक मिलन उसके भीतर की खतरनाक तांत्रिक ऊर्जा को चरम पर पहुँचा देता है।

तारा (Tara) = पूर्व प्रतिद्वंद्वी (The Wild Wild Card), वह रुद्र के अधिकार और दबदबे से उत्तेजित होती है। उसका और रुद्र का रिश्ता बेहद आक्रामक, बेकाबू और जुनून से भरा है, जो रुद्र को शारीरिक शक्ति और युद्ध कौशल देता है।

नंदिनी (Nandini) = स्टूडेंट प्रेसिडेंट / रसूखदार सीनियरवह रुद्र के लिए सत्ता के गलियारे खोलती है। वह रुद्र के इस हरम को दुनिया की नज़रों से छुपा कर रखती है और खुद को रुद्र के बिस्तरों में पूरी तरह सौंप चुकी है।
 
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