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Incest Sagar (Completed)

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Incestlala

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Update 24 A.

Flashback continue....

जैसे ही उर्वशी चुप हुई मैं दौड़कर बाथरूम भागा । संजय और उसकी बहन मधुमिता की चुदाई कहानी सुनकर लन्ड आसमान ज़मीन एक किए हुए था । और वाइन पीने के कारण पेशाब भी लग गया था ।

इतना जोर से पेशाब लगा था कि दो तीन मिनट तक लग गए पेशाब करते करते । फिर हाथ मुंह धोकर रूम में प्रवेश किया । और वहां के माहौल को देखा तो मेरा लन्ड जो पेशाब करने के बाद थोड़ा शांत हो गया था फिर से अशांति पर उतर आया ।

दोनों हस्तनी सहेलियां श्वेता दी और उर्वशी पुरी तरह निर्वस्त्र पलंग पर एक दूसरे से गुत्थमगुत्था हो कर एक दूसरे को चुम चाट रही थी ।

मैंने पोर्न मूवी तो बहुतों देखी थी । और कुछ लेस्बियन सेक्स मूवी भी देखा था लेकिन कभी जीवंत नहीं देखा था । दो गोरी-चिट्टी मांशल बदन वाली शादीशुदा युवतियों को पुरी तरह नंगी एक दूसरे से गुत्थमगुत्था देखना शरीर के रोंगटे खड़े कर देने वाला था । दोनों के लेस्बियन सेक्स को और देखने के लालशा में मैंने उन्हें डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा और बगल में रखे सोफे पर बैठ गया । मैंने भी अपना लोवर निकाल दिया । अब मैं भी उन्हीं की तरह सर से पांव तक निर्वस्त्र था ।

श्वेता दी बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी और उनके उपर उर्वशी दी चढ़ी हुई थी । दोनों सहेलियों ने अपने दोनों पांवों को कैंची की तरह फंसा कर रखा था जिससे दोनों की रस से भरी हुई चुत एक दूसरे से रगड़ खा रही थी । साथ में दोनों अपनी मोटी मोटी जांघें फैलाए एक दुसरे से घसे जा रही थी ।

दोनों की बड़ी बड़ी चूचियां एक दूसरे से दबी हुई थी । उर्वशी श्वेता दी की जीभ को बुरी तरह चुस रही थी । दोनों की चुमाचाटी और सिसकारियों की आवाज पुरे कमरे में मधुर संगीत पैदा कर रही थी ।

उपर चढ़े होने के कारण उर्वशी की तरबुज की तरह बड़ी गांड़ आगे पीछे एक लय में हील रही थी । और नीचे से श्वेता दी भी धक्के लगा रही थी । मैं जहां बैठा था वहां से दोनों को एक-दूसरे के चुत को घिसते हुए स्पष्ट देख रहा था । दोनों की चिकनी चुत की रसमलाई रिसते हुए उनके मोटी मोटी जांघों तक आ पहुंची थी ।

उर्वशी दी के उपर होने के कारण उसकी चौड़ी गान्ड की हल्की भुरी छेद भी मैं देख पा रहा था जो कभी खुल रही थी तो कभी बंद हो रही थी । मै बहुत उत्तेजित हो गया था । मैं डर से अपने लन्ड को छु नहीं रहा था कि कहीं मेरे कठोर हाथों के स्पर्श से लन्ड पानी न फेंक दे ।

वो दोनों एक दूसरे में इतना खो गई थी कि उन्हें मेरा ख्याल तक भी नहीं रहा था । कुछ देर तक एक-दूसरे को चुमते चाटते और अपनी चुत रगड़ते कब 69 पोज में आ गई , इसका अंदाजा उन्हें खुद भी नहीं था। फिर तो जो वो दोनों एक-दूसरे के गुप्तांगों को चुमने चाटने लगी कि उनके चपर चपर की आवाज मेरे कानों तक पहुंचने लगी । उर्वशी दी की पांव मेरी तरफ थी जिससे मैं श्वेता दी को उनकी फुली हुई रसभरी दरारों को अपने जीभ से चाटते हुए स्पष्ट देख रहा था ।

तभी श्वेता दी की नजर मुझ पर पड़ी । वो मुस्कराई और मुझे आंखों ही आंखों में वहां आने का इशारा की ।

मैं तो बहुत पहले से इस निमंत्रण का इंतजार कर रहा था । मैं बिना देरी किए वहां झटपट पहुंच गया । श्वेता दी ने उर्वशी की चुत को अपने दोनों हाथों से फैलाया । उनकी चुत उनके कामरस से भीगी हुई थी । बस फिर क्या था... उर्वशी की चुत को हम दोनों भाई बहन एक साथ चुसने लगे । उर्वशी को भी इसका आभास हो गया था कि उसकी चुत में दो दो जीभ ढुके हुए हैं । वो उत्तेजित हो कर बेसब्री से अपनी कमर हिलाने लगी । श्वेता दी उसकी क्लीट को अपने होंठों से दबा कर चूसने लगी और मैं उसके छेद में अन्दर तक जीभ डाल उसकी चुत को जीभ से चोदने लगा ।

ये दो तरफा प्रहार उर्वशी झेल नहीं पाई और बुरी तरह झड़ने लगी । उसकी चुत ने पानी का फव्वारा छोड़ दिया जिसे हम दोनों भाई बहन ने गटक गटक कर पी लिया ।

उर्वशी के सुस्त पड़ते ही मैंने श्वेता दी को पकड़ कर बिस्तर पर पटक दिया और अपने दोनों हाथों से उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को जोर जोर से मसलते हुए उनकी गुलाबी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा । मेरा लन्ड उनकी कचोड़ी जैसे फुली हुई चुत पर झटके पर झटका दिए जा रहा था । श्वेता दी भी काफी उत्तेजित हो गई थी । वो बड़े जोश से अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर ठेलने लगी ।

ये देख उर्वशी की काम वासना फिर से भड़कने लगी । वो सरक कर हमारे करीब आई और अपनी जीभ निकाल कर हम दोनों के जीभ से सटा दी ।

फिर तो हम तीनों आपस में अपना मुंह सटाए चुमा चाटी करने लगे । तीनों बदल बदल कर एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे । तीनों ने अपनी अपनी जीभ निकाल कर एक दूसरे के मुंह में ठुसने शुरू कर दिए । तीनों के थुक एक दूसरे के मुंह में जा रहे थे ।

थोड़ी देर बाद उर्वशी वहां से घसक कर मेरे जांघों के पास आई और मेरे फनफनाते लन्ड को पकड़ कर अपने मुंह में डाल लिया और आइसक्रीम की तरह चूसने लगी । ये देख श्वेता दी ने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरे सर के ऊपर से अपने दोनों पांव दो तरफ करके मेरे मुंह के सामने अपनी चिकनी चुत रखकर आगे की ओर झुक गई । अब वो भी उर्वशी के साथ साथ मेरे लन्ड को चूसने लगी ।

मैंने श्वेता दी की खुबसूरत चुत को बड़ी कामूक भरी निगाहों से देखा जो उसके काम रस से भीगी हुई थी । सच में ये जन्नत का द्वार था । डबल पावरोटी के समान फुली हुई और बीच में दरार ली हुई । उनकी चुत को अपने दोनों हाथ के अंगूठे से फैलाया । अंदर रस ही रस था । और उसकी महक मुझे पागल किए जा रही थी । मैंने अपना जीभ निकाला और उनके दरारों में घुसेड़ दिया और उनकी चुत से निकल रही मलाई को चुस चुस कर पीने लगा । मैं जितना उनकी चुत से मलाई चाटता उतना ही वो और अधिक मलाई छोड़ देती । और मैं बड़े प्रेम से उसे भी चाट चाट कर साफ़ कर देता ।

इधर मेरा मोटा तगड़ा हथियार कभी उर्वशी के मुंह के अंदर होता तो कभी श्वेता दी के मुंह में होता । मेरे दोनो अंडकोष को दोनों सहेलियां बदल बदल कर अपने होंठों से तो कभी जीभ से प्यार करती । कभी अपने मुंह में डाल कर चुसती ।

मैं लन्ड चुसाई का सुख भोग ही रहा था कि उर्वशी दी कामोत्तेजना बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरे जांघों पर चढ़ गई और मेरे लन्ड को पकड़ कर अपने चुत के छिद्र से सटाकर उसे अपने अंदर लेने लगी । जैसे ही मेरा लन्ड उनके चुत के गहराइयों में पहुंचा कि वो अपनी कमर ऊपर नीचे करके मुझे चोदने लगी । उनकी चुत अभी भी कसी हुई थी जिससे कारण लन्ड फंस फंस कर अंदर बाहर हो रहा था ।

श्वेता दी मेरे मुंह पर अपनी चुत रखकर चुसवा रही थी वहीं उर्वशी मेरे लन्ड को अपने चुत में डाल कर खुद ही मुझे चोदे जा रही थी । मैं तो जैसे सातवें आसमान पर था ।

कमरे का तापमान काफी गरम हो गया था । श्वेता दी मेरे मुंह पर अपनी चुत रगड़ते हुए अपनी गाल मेरे नाभि के ऊपर रखकर अपने भाई के लन्ड को उर्वशी की चुत में तेजी से अंदर बाहर होते हुए देख रही थी । इस कामूक दृश्य को देख उत्तेजित होकर वो मेरे मुंह पर अपनी चुत तेजी से पटकने लगी ।

उर्वशी की उत्तेजना चरम पर पहुंच गई थी । वह जोर जोर से मेरे लन्ड पर कूदते हुए और सिसकारियां मारते हुए बुरी तरह झड़ने लगी । उन्होंने अपनी पानी से मेरे लन्ड को नहलवा दिया । मेरा लन्ड उर्वशी की चुत की गर्मी और उनके झड़ते हुए पानी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और वो भलभला कर उनके चुत में झड़ने लगा । श्वेता दी की नजरें हमारे संधि स्थल पर ही थी । हमें झड़ते देखकर वो भी बर्दाश्त नहीं कर पाई और उन्होंने भी अपनी नलकी मेरे मुंह में खोल दी । और मैं बड़े प्रेम से उनकी मलाई पीता गया । उर्वशी झड़ने के बाद श्वेता दी के पीठ पर सुस्त हो कर पसर गई ।

थोड़ी देर बाद तीनों अगल बगल लेट गए । करीब दस पंद्रह मिनट तक हम अपनी सांसें दुरूस्त करते रहे ।

श्वेता दी जब सहज सी महसूस की तो उसने उर्वशी से पुछा -" तेरा और सागर का ये सब चक्कर कैसे चालु हुआ था , ये तो तुने अभी तक बताया नहीं ।"

" इसने नहीं बताया ? " - उर्वशी ने कहा ।

" पुछने का टाइम नहीं मिला "- श्वेता दी बोली ।

मैं चुपचाप बिस्तर पर लेटे थोड़ा आराम करते हुए मोबाइल पर इंग्लैंड और पाकिस्तान क्रिकेट मैच का ड्रीम इलेवन टीम बनाने लगा ।

" ह्वाट्सएप पे बढ़िया बढ़िया मैसेज भेज के पटाया ।"

" ऐसा क्या बढ़िया मैसेज भेजता था कि एक दम से चुद ही गई ?"

" शुरुआत गुड मार्निंग मैसेज से किया था ।"

" गुड मार्निंग मैसेज ?"

" हां... गुड मार्निंग मैसेज.. इतना सुन्दर होता था न कि क्या बताऊं । जो भी पढ़ेगा वो यही समझेगा कि भेजने वाला शख्स कितना अच्छा संस्कारिक और धार्मिक किस्म का आदमी है ।"

" अच्छा तो तु धार्मिक टाइप के मैसेज से पट गई ?"

" अरे नहीं यार । सुन ! ये तेरा मासूम सूरत वाला कमीना भाई रोज सुबह..जो दिन होता था उसी दिन के हिसाब से भगवान का फोटो और साथ में अच्छी अच्छी धार्मिक मैसेज भेजता था । "

" तो इसमें खराबी क्या थी ?"

" खराबी कुछ भी नहीं थी। बल्कि बहुत ही सुन्दर मैसेज होता था । जानती है..इसके भेजे हुए देवी देवताओं के फोटो और मैसेज से मेरा फोन का गैलेरी पुरा भर गया था । मुझे डर लगता था कि भुल से भी कहीं मेरा पांव टच न हो जाए मोबाइल से और मोबाइल के अन्दर के देवी देवता नाराज न हो जाएं.... मैंने तो मोबाइल सोते समय बिस्तर पर रखना तक छोड़ दिया था ।"

" फिर ?" - श्वेता दी ने हंसते हुए कहा ।

" फिर.. फिर दो तीन महीने बाद रात में गुड नाईट मैसेज भेजना शुरू किया ।"

" किस तरह का मैसेज ?"

" शुरू में तो सिम्पल साधारण सा भेजता था लेकिन बीस पच्चीस दिन के बाद थोड़ा रोमांटिक टाइप भेजना शुरू किया ।"

" तो तेरे मन में कैसा रियेक्सन होता था ?"

" पहली बार थोड़ा अजीब सा लगा फिर धीरे धीरे सामान्य सा लगा...और जैसे जैसे दिन गुजरते गया अच्छा लगने लगा ।"

" क्या तु भी मैसेज करती थी ?"

" गुड मार्निंग वाला तो मैं भी करती थी । आखिर इतना सुन्दर मैसेज के जबाव में मुझे भी तो कुछ अच्छे अच्छे मैसेज भेजना बनता था न ।"

" और रात वाली । गुड नाईट के बदले ?"

" कुछेक दिन तो नहीं भेजी फिर एकाध महीने के बाद मैं भी भेजना शुरू कर दी ।"

" यानी कि धीरे धीरे आग लगनी शुरू हो गई "- श्वेता दी मुस्कराते हुए बोली ।

" वो तो लगनी ही थी । आखिर कमीना है भी तो हैंडसम । फिर धीरे धीरे रात वाली मैसेज और ज्यादा रोमांटिक होने लग गई । और एक रात इसने थोड़ी अश्लील टाइप गुड नाईट मैसेज भेजा ।"

" किस तरह का ?"

" गूगल से कोई फोटो डाउनलोड करके भेजा था । जिसमें एक लड़की लिंगरी में पीठ के बल लेटी हुई थी और उसके उपर एक लड़का लड़की के एक बोबे को अपने हाथों में पकड़े हुए उसकी चुम्बन ले रहा था और नीचे गुड नाईट लिखा हुआ था ।"

" फिर ?"

" मैं तो देखकर भौंचक्का हो गई थी । शुरू में गुस्सा आया...फिर बिना कोई जबाव दिए मोबाइल स्विच ऑफ कर दी और सो गई । सुबह उठने के बाद जब फिर से वो मैसेज देखी तो मुझे कुछ कुछ होने लगा । मेरी भी भावनाएं मचलने लगी...फिर तो जैसे एक रूटिन बन गई । ये रोज सुबह-सुबह गुड मार्निंग मैसेज अच्छी अच्छी वाली भेजता था और रात में गुड नाईट वाली मैसेज रोमांटिक और गंदी टाइप वाला भेजने लगा ।"

" तो तु क्या करती थी..इसके मैसेज का जबाव देती थी या नहीं ?"

" कुछ दिन बाद मैं भी देने लगी ।"

"अच्छा ! रोमांटिक और गंदी गुड नाईट वाली की भी ?"

" हां । लेकिन मैं सिर्फ गुड नाईट लिखकर भेज दिया करती थी ।"

" फिर ?"

" फिर तो इसकी हिम्मत बढ़ते गई और रात में न जाने कहां-कहां से खोज खोज कर गंदी गंदी पिक्चर और पोर्न टाइप गिफ्ट भेजने लगा । ये सब देखकर मैं उत्तेजित होने लगी... आखिर मैं भी तो एक जवान लड़की थी.... लड़के लड़कियों की नंगी चूदाई तस्वीर देखकर भला कौन उत्तेजित नहीं होगा ?"

" फिर ?

" फिर एक दिन इसने मुझे फोन किया और डेट के लिए पुछा ।"

" हम्म्.. फिर ?"


मैं तो पहले से ही तैयार थी...थोड़ी आनाकानी की फिर मान गई । फिर हम मूवी देखने गए वहीं थियेटर में ही हमने पहली किस की और फिर कुछ दिन के बाद एक होटल में गए... सुबह ग्यारह बजे के आसपास... वहीं हमारी पहली चुदाई हुई... पहले दिन ही इसने तीन बार मेरी ले ली ।"

" क्या ?"- श्वेता दी मुस्की काटते हुए बोली ।

" ये "- उर्वशी दी भी मुस्कराते हुए अपनी चुत की तरफ इशारा की ।

" रूक... मैं पेशाब करके आती हूं तब बाकी बताना "- श्वेता दी खड़ा होते हुए बोली ।

" चल । मैं भी चलती हूं ।"

फिर दोनों नंगी ही रूम में ही बने अटैच बाथरूम में चली गई । और बिना दरवाजा बंद किए नीचे बैठकर पेशाब करने लगी ।

जैसे ही दोनों अपनी अपनी बड़ी गांड़ फैलाए नीचे बैठ कर पेशाब करना शुरू की.... कि मेरा लन्ड फनफना कर खड़ा हो गया । उनकी पेशाब करने की आवाज मेरे कानों तक पहुंच रही थी ।

जब वे नंग धडंग बाथरूम से आई तो मेरा खड़ा लन्ड देखकर मुस्कुराने लगी । श्वेता दी बिस्तर पर चढ़ते ही झुकी और बिना हाथ लगाए मेरे लन्ड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी । उर्वशी दी बगल में बिस्तर पर लेटकर हमें देखने लगी ।

थोड़ी देर बाद मैंने श्वेता दी के मुंह से अपना लन्ड निकाला और उठकर उनके पीछे बैठ गया । अपनी छाती उनके मुलायम पीठ से सटाते हुए अपने हाथों को आगे बढ़ाया और उनकी दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगा । वो अपनी बड़ी गांड़ मेरे गोद में रखकर पीछे की ओर झुक गई और अपनी चूचियों को मसलवाने का आनंद लेने लगी । मेरा तनतनाया हुआ लन्ड उनकी चौड़ी गांड़ से दब गया था। वो सिसकारियां भरते हुए अपनी गांड़ मेरे लन्ड पर घसने लगी ।

थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें आगे की ओर झुकाया और अपने लन्ड को पकड़ कर उनके रस छोड़ती चुत के दरारों में घिसने लगा । उनकी चुत के पानी से मेरा लन्ड गीला हो गया था ।

मैंने उन्हें थोड़ा और आगे की ओर झुकाया । वो अपनी चौड़ी गान्ड पीछे से उपर उठाए आगे की ओर हाथ के सहारे झुक गई । वो कुतिया वाली पोजीशन में हो गई थी । मैंने अपने घुटनों के बल पोजीशन लिया और उनकी चुत के छिद्र में अपना लन्ड रखा और जोर का धक्का लगा दिया। उनकी चुत उनके काम रस से इतनी ज्यादा गीली हो गई थी कि दो ही प्रयास में पुरा लन्ड उनकी चुत की गहराई में प्रवेश कर गया ।

मैं उनकी चूचियों को दबाते हुए धीरे धीरे उन्हें चोदने लगा । शुरू शुरू में हल्के-हल्के धक्के से चोद रहा था । उर्वशी दी ने जब मुझे श्वेता दी को कुतिया पोजीशन में चोदते हुए देखा तो वो पीठ के बल लेट गई और सरकते हुए हम दोनों के कमर के नीचे जहां मेरा लन्ड श्वेता दी की चुत में अन्दर बाहर हो रहा था , पहुंच गई । और अपनी आंखों से करीब दस बारह इंच की दूरी पर मेरे लन्ड को श्वेता दी के चुत से अंदर बाहर होते देखने लगी । वो इतने करीब से लन्ड को चुत में घुसते निकलते देख कर काफी उत्तेजित हो गई और जैसे ही मेरा लन्ड श्वेता दी के चुत के अंदर से बाहर की ओर निकला , अपने हाथों से पकड़ कर पुरी तरह बाहर निकाल ली और अपने मुंह में डाल कर चूसने लगी । मेरे लन्ड को चूसने के बाद श्वेता दी की चुत के अंदर अपनी जीभ डाली और चार पांच बार चारों तरफ जीभ फिराई फिर मेरे लन्ड को पकड़ कर श्वेता दी की चुत के छेद पर सटा दी ।

मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और फिर से मेरा लन्ड उनके चुत में घुस गया । अब मैं जोर जोर से श्वेता दी को चोदने लगा । उर्वशी दी अपनी सिर को उपर की ओर उठाई और अपनी जीभ हम दोनों के संधि स्थल पर फिराने लगी । मैं श्वेता दी को बुरी तरह चोदे जा रहा था । श्वेता दी भी उत्तेजना के मारे अपनी चूतड़ तेजी से पीछे की ओर धकेल रही थी । करीब आधे घंटे की चुदाई के दौरान श्वेता दी तीन बार झड़ चुकी थी और मेरा भी वीर्य निकलने वाला ही था । आखिरी समय में मेरा चोदने का स्पीड इतना बढ़ गया था कि पलंग भी हिलने लग गया था । ज्योंहि मेरा झड़ने का समय नजदीक आया मैंने श्वेता दी के चेहरे को अपनी ओर घुमाया और उनके जीभ को चुसते हुए लन्ड को उसकी चुत की गहराइयों में घुसेड़ कर झड़ने लगा । इसके साथ साथ एक बार फिर से वो भी झडने लगी ।

थोड़ी देर बाद तीनों बिस्तर पर लेट कर सुस्ताने लगे ।

आधे घंटे बाद हम सभी ने एक बार फिर से नहाया । फ्रेश होने के बाद लजीज व्यंजन का लुत्फ उठाया । उसके बाद एक एक राउंड चुदाई का दौर और चालू हुआ ।

उसी दौरान श्वेता दी ने बताया कि रात में सोने के लिए वहां चाची आ रही है । ये सुनकर मैं मायूस हो गया । मेरा इच्छा रातभर उनके साथ रहने का था । खैर.... थोड़ी देर बाद मैं उन दोनों को छोड़कर घर आ गया ।

************

" सागर...चाय पियोगे क्या ?"

माॅम की आवाज सुनकर मेरी तन्द्रा भंग हुई ।

" हां...बनाओ । मैं थोड़ी देर में आ रहा हूं "- मैंने ऊंची आवाज में कहा ।

क्लब भी जाने का टाइम हो गया था । मैं तैयार हो कर रीतु को फोन किया । वो लोग जयपुर पहुंच कर होटल में शिफ्ट हो गए थे । अभी सभी आराम कर रहे थे । थोड़ी देर बात करने के बाद मैं नीचे हाॅल में गया । डैड भी आज जल्दी ही आ गए थे ।

शाम हो गया था । चाय पीने के बाद मैं क्लब चला गया ।
Superb update
 
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Update 25.



अगले दिन...सुबह नौ बजे पिछले दो दिनों की तरह ही सिर्फ तौलिया लपेटे नीचे आया तो डैड को नाश्ता करते हुए पाया । मैं किचन में गया और उसी जगह पर दिवाल से सट कर लकड़ी के छोटे से तख्ते पर बैठ गया ।

माॅम मुझे देख कर मुस्कराई । वो सिम्पल सी नाइटी पहनी हुई थी । वो नाश्ता निकालने लगी ।

नाश्ता निकाल कर एक थाली मुझे दी और दुसरी थाली लेकर मेरे अपोजिट दरवाजे की ओर मुंह करके बैठ गई ।

हम दोनों नाश्ता करने लगे । मैंने फिर से उसी तरह अपने तौलिए को एडजस्ट कर दिया जिससे मेरा लन्ड उन्हें स्पष्ट दिखाई देता रहे ।

वो चुपचाप नाश्ते के दौरान कनखियों से मेरे तौलिए के फांक से हट्टे कट्टे लन्ड को देखती फिर रह रह कर दरवाजे से डैड को भी देखती जो हाॅल में सोफे पर बैठे नाश्ता कर रहे थे ।

माॅम को मेरे लिंग को कनखियों से देखते पाकर मैं एक्साइटेड हो रहा था । मुझे कल का वाकया भी याद आ रहा था जब मैंने एक गंदी पिक्चर वाली पृष्ठ किताब से फाड़ कर अपने तकिए के नीचे दबा दिया था और माॅम को ये कहते हुए चला गया था कि मेरा बिस्तर चेंज कर देना ।

बिस्तर चेंज तो हुआ ही था और साथ ही वो गंदी पिक्चर वाली पृष्ठ जिसमें एक कम उम्र का लड़का एक बड़ी उम्र की औरत के साथ सेक्स कर रहा था... वो सलीके से मोड़कर मेरे बिस्तर पर गद्दे के नीचे रखा हुआ था ।

इसका जो मतलब निकलता था उसका अंदाजा मुझे हो रहा था । और जिस तरह से माॅम मेरे लन्ड को चुपके चुपके देख रही थी.. वो उस मतलब को और भी पुख्ता कर रहा था ।

" डैड आ रहे हैं ।"

" क्या ?"- मैं सकपकाते हुए कहा ।

" डैड आ रहे हैं "- वो मुझसे बिना नजरें मिलाए दरवाजे की ओर देखते हुए बोली ।

मैं हड़बड़ाया , पीछे देखा डैड किचन की तरफ आ रहे थे । मैंने जल्दी से अपने तौलिए को दुरुस्त किया । मेरा लिंग अब तौलिया के अन्दर था ।

डैड किचन में आए और मुझसे कहा -" तुम्हारा मोबाइल बज रहा है ।"

मैंने जल्दी से नाश्ता खतम किया और भागते हुए अपने कमरे में चला गया । सही टाइम पर माॅम ने चेता दिया था नहीं तो डैड के नजरों में मेरा लिंग आ गया होता । बाल बाल बचा था ।

कालेज से प्रोफेसर का फोन था । कुछ बड़ी कम्पनियां काउन्सिल के लिए आ रही थी इसलिए उन्होंने फोन किया था ।

मैं तैयार हो कर माॅम को यह बोलकर निकल गया कि आज कालेज में लेट होगा इसलिए मैं दोपहर नहीं आ पाऊंगा और हो सकता है मैं अब रात को ही घर आऊं ।

मैं कालेज चला गया । वहां काउन्सलिंग के चलते काफी लेट हो गया ।

‌मै कालेज में ही था तभी रमणीक लाल का फोन आया । उसने मुझे शाम को छः बजे मिलने को कहा । चूंकि मुझे शाम को ड्यूटी बजाने क्लब भी जाना था इसलिए उसे शाम को सात बजे मिलने को कहा ।

****

शाम सात बजे करोलबाग में एक बार एंड रेस्टोरेंट में मेरी रमणीक लाल से मुलाकात हुई ।

" विस्की पियोगे ?"- मैंने बोला ।

" फोकट में मिलेगा तो क्यों नहीं पियूंगा ?"- वो संजीदगी से बोला -" लेकिन बाद में । पहले काम की बात ।"

" ओके ।"

" तुने जो नाम लिखाये थे... उनमें पहला नाम था कुलभूषण खन्ना । ये शख्स जवानी में एक मवाली और हिस्ट्रीशीटर था और एक बाहुबली नेता का खास सिपहसालार हुआ करता था । उसी दौरान उसकी एकलौती लड़की से इसका नैन मटक्का चलने लगा । नेता को जब इसके बारे में पता चला तो वो दोनों से बहुत ही खफा हुआ । खासतौर पर कुलभूषण खन्ना से । उसने उसे खुलेआम धमकी दी कि वो उसे जान से मार डालेगा लेकिन उसके कुछ दिनों बाद वो खुद एक दिन अपने कमरे में मरा पाया गया ।"

" क्या ? कैसे ?"

" कहा जाता है कि हार्ट अटैक से मरा ।"

" ऐसे कैसे एकाएक हार्ट अटैक आ गया ? क्या उसके बाडी का पोस्टमार्टम हुआ था ?"

" नहीं.. उसे मरने के बाद तुरंत आनन-फानन जला दिया गया था । और उसके कुछ दिनों बाद लड़की ने कुलभूषण से शादी कर ली थी । "

" कोई जांच पड़ताल नहीं हुआ ?"

" कहां से होगा भाई जब बेटी को ही किसी तरह का शक नहीं था तो जांच पड़ताल के लिए कौन कहता ? और फेमिली के नाम पर दुसरा कोई था ही नहीं ।"

" हुम्म् ..क्या ये हो सकता है कि बेटी ने अपने आशिक कुलभूषण के साथ मिलकर अपने बाप का खून कर दिया हो ?

" सरासर हो सकता है लेकिन जब इसका जांच पड़ताल ही नहीं हुआ तो इसके बारे में क्या कह सकते हैं ?"

" फिर क्या हुआ ?"

" शादी के महज पांच साल के बाद ही उसकी बीवी कैंसर से मर गई ।"

" उसके कुकर्मों की सजा भगवान ने जल्दी ही दे दिया।"

" हूं..फिर छः साल पहले उसने दुसरी शादी अनुष्का नामक एक लड़की से की ।"

" अनुष्का की तो खासुलखास तफ्शीश की होगी तुमने ?"

" ऐसी कोई बात नहीं ।"

" क्यों भाई ? इतनी सेक्सी लड़की...लार तो जरूर टपकी होगी ?"

" लार का क्या है , वो तो हर नौजवान लड़की को देखकर टपकती है । एक मिनट...दारू आर्डर करो ।"

वेटर को रेड वाइन का आर्डर दिया । पांच मिनट में ही उसने वाइन के साथ सलाद और ड्राई फ्रूट्स सर्व कर दिया ।

" हां..अब अनुष्का के बारे में बताओ ?"

" बहुत ही हसीन है , बहुत जवान है , खसम से कुछ नाखुश ही लगती है ।"

" ये तो मुझे भी मालूम है । कुछ नया बताओ ?"

" मेरठ की रहने वाली है । इसकी एक बहन है वीणा । इन दोनों के मां बाप की मौत सालों पहले ही हो गई थी । इनकी जिंदगी अभाव और तंगी में बीती हे । मां और बाप दोनों मेरठ के ही हैं । दोनों की फेमिली साधारण वर्ग की है । बाप के परिवार में कोई अपना नहीं है लेकिन मां की एक बहन थी जो अनुष्का की ही तरह किसी अमीरजादे से शादी करके चली गई । लेकिन इन दोनों बहनों की परिस्थितियां मां बाप के मरने के बाद बहुत ही खराब हो गई थी । अनुष्का घर छोड़कर दिल्ली आ गई और कुलभूषण खन्ना से शादी करके अपनी अभाव ग्रस्त जिंदगी से छुटकारा पा ली लेकिन उसकी छोटी बहन वीणा अपनी बड़ी बहन अनुष्का के जाने के बाद बहुत ही कष्टदायक जीवन जी रही थी..साल भर पहले वो भी गांव छोड़कर दिल्ली आ गई । नई दिल्ली में एक नाइट क्लब में कैबरे डांसर का काम करती है ।"

" क्या ?"- मैं आश्चर्यचकित हो कर बोला -" उसकी बडी बहन जो यहां करोड़पति की बीवी है..रोज के हजारों रूपए शौकिया खर्च कर देती है उसकी छोटी बहन एक मामूली सी कैबरे डांसर ?"

" यही तो ऊपरवाले का खेल है बेटा ।"

" और इनकी मौसी ने कोई हेल्प नहीं किया ?"

" मौसी के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है ।"

" क्या अनुष्का को मालूम है कि उसकी बहन एक मामूली सी कैबरे डांसर है ?"

" इसके बारे में भी फिलहाल मुझे नहीं पता । "

" वो कहां काम करती है.. ये तो जानते होंगे ?"

" हां ।"

उसने मुझे एडरेश लिखाया । वो डिफेंस कॉलोनी में गोल्डन नाईट क्लब का पता था ।

" उसकी कोई फोटो है तुम्हारे पास ?"

" नहीं ।"

" वीणा के काम का समय तो रात में ही होगा ?

" नाईट क्लब में असल रौनक तो रात को ही होती है ।"

" मतलब रात में ही काम करती होंगी ।"

" हूं... फिर तुम्हारे नामों के लिस्ट में बिजनेस मैन संजय का नाम था । इसके बारे में जो जानकारी निकल कर आई उसके हिसाब से ये एक महत्वाकांक्षी नौजवान है , जहीन है और काबिल बिजनेस मैन है । होटल का बिजनेस है और अच्छे पैसे कमाता है । इसकी अभी हाल में ही शादी हुई है । फेमिली में बीवी के अलावा मां बाप और एक बहन है जो कि अभी कुंवारी है । इसके मां बाप की शादी लव मैरिज हुई थी और इनका होटल का व्यापार खानदानी है ।

" आदमी कैसा है ?"

" रंगीन मिजाज और बिंदास जीवन जीने वाला ।"

" कभी किसी केस में या किसी लफड़े में इस पर पुलिस केस दर्ज हुआ ?"

" नहीं ।"

" ओके । अब जरा वकील साहब मनीष जैन के बारे में बताओ ?"

" कमीना ! आदतन खुन्दकी ! झगड़ालू ! दगाबाज ! हमेशा पीठ पर छुरी मारने को तैयार । अपने इन्हीं गुणों की वजह से उसके दोस्तों की संख्या न के बराबर है । लेकिन पट्ठे ने बीवी काफी खूबसूरत पाई ।"

" वो इतना खराब कैसे हो सकता है ?"

" मिलना । देखना । भुगतना । फिर आ के बताना ।"

" मिला तो हूं एकाध बार लेकिन सिर्फ दुआ सलाम तक ही बातें सीमित रही । मुझे नहीं पता था कि वो ऐसा आदमी होगा ।"

" ये तो मैंने उसके कुछ खुबियों के बारे में बताया ।"

" अच्छा ! अभी और भी है ?"

" इसके अलावा वो एक बेरहम , बदमिजाज , दिमागी तौर पर शातिर और एक नम्बर का रिश्वतखोर वकील है ।"

" तुम इतने विश्वास से कैसे कहते हो ?"

" तु भुल रहा है कि मैं भी पुलिस ही हूं भले ही अभी सस्पेंसन में चल रहा हूं और पुलिस वकील का साथ हर दुसरे तीसरे दिन होता ही रहता है ।"

" जब वो ऐसा आदमी है तो अब तक सरकारी वकील बना कैसे रहा ? जज को या प्रशासन की नजर इसके ऊपर कैसे न पड़ी ?"

" मैंने बताया न कि दिमागी तौर पर शातीर आदमी है ।"

" हूं । "

" गिलाश खाली करो ।"

" क्या ?... नहीं , नहीं । वन इज एनफ फार मी । तुम अपना जारी रखो ।"

" ओनली वन ?"

" प्रेजेंटली ।"

" ओह , प्रेजेंटली ।"

उसने अपने लिए नया जाम तैयार किया ।

" रमाकांत की क्या कहानी है ?"

" उसके बारे में अभी तक जो जानकारी मिली है वो एक रिटायर्ड बुजुर्ग आदमी है जो अपनी पत्नी जानकी के साथ हिमाचल प्रदेश से करीब पच्चीस साल पहले नोएडा में शिफ्ट हुआ था । उसकी पत्नी को कोई सांस की बिमारी थी इसलिए । वो दिल्ली शिफ्ट होना चाहता था लेकिन महंगा शहर होने के कारण वो नोएडा में शिफ्ट हो गया । गाजियाबाद में पिछले पांच सालों से रह रहा है ।"

" उसके इनकम का सोर्स ? करता क्या है ?"

" नहीं मालूम । शायद तुम्हारा जीजा जानता होगा आखिर पड़ोसी है ।"

" ठीक है । बात करूंगा ।"

" खर्च बढ़ते जा रहा है बेटा । कुछ रोकड़ा तो सरकाओ ?"

" तुम अपना एकाउंट नंबर मुझे दे दो , मैं आन लाइन तुम्हारे एकाउंट में ट्रांसफर कर दुंगा ।"

" एक तो सस्पेंड चल रहा हूं उपर से रोकड़ा डायरेक्ट मेरे एकाउंट में ट्रांसफर करके और दुश्वारियां पैदा करना चाहते हो ?"

" ठीक है..कल शाम को सात बजे कनात पैलेस पैराडाइज क्लब के बाहर मिलना ।"

रात के नौ बज गए थे । मैं आज ही वीणा से मिलना चाहता था । क्योंकि जहां वो काम करती थी वहां उससे रात में मिला जा सकता था । यदि उसके घर का पता होता तो दिन में किसी भी वक्त उससे मिल लेता लेकिन घर का पता मालूम नहीं था ।

मैंने रमणीक लाल से नाईट क्लब चलने को कहा तो उसने साफ इंकार कर दिया । वो नहीं चाहता था कि नौकरी बहाल होने तक पुलिस की नजरों में किसी अवांछनीय जगह पर देखा जाय ।

उसके जाने के बाद मैं गोल्डन नाईट क्लब की ओर अपनी बाइक दौड़ा दिया ।

Continue....
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Update 25. Continue.


दस बजे के आसपास मैं गोल्डन नाईट क्लब पहुंचा ।

बाहर से दिखने में साधारण सा ही लगा लेकिन अंदर की रौनक और रंगीनी देखने लायक थी । पुरे हाॅल में मध्यम रोशनी थी। डांस फ्लोर से डीजे की धुन आ रही थी । कुछ जोड़े वहां डांस करने के बहाने एक दूसरे से अभिसार रत में मशगूल थे । हाॅल के अन्दर कई टेबल दो चार कुर्सियों सहित थोड़ी थोड़ी दुरी पर लगे हुए थे । कुछ लोग जोड़े में बैठे हुए थे तो कुछ सिंगल । अभी हाॅल पुरा भरा हुआ नहीं था ।

मैं कोने में एक खाली टेबल देखकर बैठ गया । मैंने एक बार फिर पुरे हाॅल में नजरें दौड़ाई । वहां जितने भी Steward थे सभी जवान लड़कियां थी । वो पुरे हाॅल में घुम घुम कर अपने कस्टमर को वाइन और भोजन सर्व कर रही थी । सभी लड़कियों का एक ड्रेस कोड था । वे सभी स्कर्ट और टॉप पहने हुए थी । वे जो स्कर्ट पहनी थी वो उनके घुटनों से काफी ऊपर थी । उनकी जांघें दुधिया रोशनी में भी चमक रही थी और टाॅप उनके छातियों पर कसा हुआ था ।

मैं बैठे हुए उन बार बालाओं को ताड़ ही रहा था कि एक लड़की आई और बोली -" गुड इवनिंग सर ! आप को क्या सर्व करूं ?

मैंने उसे देखा । वो एक बीस बाइस साल की स्लिम फिगर की खुबसूरत लड़की थी ।

" सर्व तो आप बहुत कुछ कर सकती हो लेकिन उसके लिए आपको मुझे कम्पनी देनी होगी । मुझे अकेले अकेले वाइन पीने में मजा नहीं आता "- मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

" ह्वाई नाॅट सर ! "- वो भी अपने चेहरे पर गोल्डन जुबली मुस्कान लाते हुए बोली -" लेकिन बील आपको पे करनी होगी ।"

" जरूर । लेकिन आपका एम्पायर कहीं नाराज तो नहीं हो जायेगा आपको यहां बैठे देखकर ?"

" अभी नहीं होगा । अभी तो आधा हाॅल खाली है , हां ग्यारह बजे के बाद जब पुरा हाॅल भर जायेगा तब जरूर नाराज होगा ।"

" जब यहां का हाईलाइट प्रोग्राम शुरू होगा ?"

" हां । जब हाॅट लड़कियों का हाॅट डांस शुरू होगा ।"

" हाॅट तो तुम भी कोई कम नहीं हो ?"

" थैंक्यू लेकिन मेरा फिल्ड अलग है ।"

" ओके । मेरे लिए रेड वाइन विथ सोडा ऐंड वाटर और आपको जो पसंद हो ।"

" राइट सर ! मैं अभी आई ।"

वो चली गई । मैं फिर से पुरे हाॅल को सरसरी निगाह से मुआयना करने लगा ।

पांच मिनट बाद वो आई वाइन और चखने के साथ । सभी चीजें टेबल पर रख कर मेरे बाजू में बैठ गई । वो अपने लिए वोदका लाई थी ।

हमने चियर किया और ग्लास अपने अपने होंठों से लगा लिया ।

" तुमने अपना नाम तो बताया ही नहीं ?"

" आपने जो पुछा नहीं ।"

" अब पुछ लेता हूं । वैसे मेरा नाम सागर है ।"

" मैं श्रेया ।"

" ब्यूटीफुल नेम बिल्कुल तुम्हारी तरह ।"

" थैंक्यू सर । मैंने यहां पहले आपको कभी देखा नहीं ।"

" सही कहा । मैं यहां पहली बार ही आया हूं ।"

मैंने अपने पैंट से सिगरेट का पैकेट निकाला और उसे आफर किया । उसने इनकार कर दिया । मैंने सिगरेट सुलगाई और कहा - "श्रेया , मुझे तुमसे एक फैवर चाहिए !"

लड़की चौंक कर मुझे देखी और बोली -" माफ कीजिएगा सर , मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूं ।"

" अरे तुम गलत सोच रही हो । मुझे किसी के बारे में जानकारी चाहिए और यदि सम्भव हो तो मिलना भी ।"

" किस के बारे में ?"- वो संदिग्ध स्वर में बोली ।

" एक वीणा नाम की लड़की है जो यहीं पर काम करती है । वो यहां के कैबरे डांसर लड़कियों में से ही कोई एक है । पर मेरी बदकिस्मती है कि मैं उसे चेहरे से भी नहीं पहचानता ।"

वो अब थोड़ा आश्वस्त हुई ।

" लेकिन इस नाम की कोई भी लड़की यहां काम नहीं करती ।"

" शायद यहां उसने अपना नाम चेंज कर लिया हो ?"

" हो सकता है । लेकिन आपको उससे काम क्या है ?"

" देखो तुम बुरा मत मानना । मै उसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकता । बस इतना ही कह सकता हूं कि वो एक अच्छे और संभ्रांत परिवार से विलोंग करती है । उसकी बड़ी बहन यहीं दिल्ली में एक करोड़पति की पत्नी है ।"

" ओह ! लेकिन वीणा नाम की लड़की यहां कोई नहीं है , मैं यहां काम करने वाली सारी लड़कियों को जानती हूं ।"

" वो इस ट्रेड में हाल फिलहाल महिने में ही आई है । शायद एकाध साल के भीतर । जब तुम सभी को जानती हो तो ये भी जानती होगी कि कौन कौन सी लड़की हाल के महीनों में यहां ज्वाइन की है ?"

" एक लड़की है तो जिसने आठ महीने पहले ज्वाइन किया है और आज के तारीख में वो यहां की सबसे बेस्ट परफार्मर है । बाकियों से उसकी डिमांड कहीं अधिक है ।"

" कौन ?"- मैंने आशा भरी नजरों से देखा ।

" नेहा ।"

" क्या तुम उससे अभी मिल सकती हो ?"

" अभी उनके परफोर्मेंस में टाईम है । मिल सकती हूं ।"

" तो प्लीज़ एक बार उससे मिलो और ये तस्दीक करो कि वो वीणा है या नहीं ।"

" ओके , मैं मालूम करती हूं वो कहां और किस पोजीशन में है ।"

" थैंक्यू ।"

" लेकिन अगर उसको तुमसे मिलना कबूल नहीं हुआ तो , मैं कुछ नहीं कर सकूंगी ।"

" कर सकोगी । थोड़ा प्यार से समझाना , कहना ये उसी के फायदे के लिए है ।"

" मैं... मैं देखती हूं ।"

उसने अपना ग्लास खत्म किया । फिर वो चली गई ।

मैं ड्रिंक्स और सिगरेट पीते हुए इन्तजार करने लगा ।

लगभग बीस मिनट बाद वो आई । उसके चेहरे के भाव से लग रहा था कि पोजीटिव न्यूज लाई है ।"

वो बैठते हुए एक कागज का परची मुझे पकड़ा दी ।

" क्या है ये ?"

" देखो ?"

मैंने परची खोला । वो किसी जगह का एड्रेस था ।

" ये तो एड्रेस है ।"

" हां । नेहा ही वीणा है । उसने तुम्हें इसी एड्रेस पे कल एक बजे दोपहर में बुलाया है ।"

" थैंक्यू सो मच श्रेया । "

" ओके । अब मुझे जाना होगा । अब भीड़ बढ़ती जा रही है "- वो हाॅल में बढ़ते हुए भीड़ को देखते हुए बोली ।

" अब नहीं लोगी ?"

" नहीं सर । ज्यादा पी लुंगी तो ड्यूटी कैसे करूंगी ।"

" कोई बात नहीं । बील ले आओ । "

" आप क्यों जा रहे हो । अभी तो यहां की असली रौनक बाकी है ।"

" मुझे ये सब पसंद नहीं है ।"

" ओके मैं बील लाती हूं ।"

जब घर पहुंचा तब साढ़े ग्यारह बज गए थे । डैड ने दरवाजा खोला था । माॅम शायद सो गई थी । मैं उपर अपने कमरे में गया और सोने की तैयारी करने लगा ।

***********

अगले दिन समय से पहले ही वीणा के पत्ते पर पहुंच गया । वो मुझे एक बजे बुलाई थी लेकिन मैं बारह बजे ही पहुंच गया ।

मैंने काॅलबेल बजाई ।

कोई जवाब नहीं मिला ।

मैंने दोबारा काॅलबेल बजाई तो भीतर से झुंझलाए से जनाना स्वर में पुछा गया -" कौन है ?"

" मैं ।"- मैंने बोला -" दरवाजा खोलिए ।"

" मैं क्या होता है ? कौन हो ?"

" मैं सागर । कल रात आपने गोल्डन नाईट क्लब में अपने फ्लैट का पता दिया था श्रेया के थ्रू ।"

कुछ देर तक खामोशी छाई रही ।

" ओह ! ठहरो , खोलती हूं ।"

कुछ क्षण बाद दरवाजा खुला और एक बेहद ही खूबसूरत लड़की मुझे चौखट पर दिखाई दी ।

उसने एक तरफ हटकर मुझे भीतर आने दिया और फिर मेरे पीछे दरवाजा बंद कर दिया ।

मैंने देखा कि वो तभी... शायद काॅलबेल की आवाज सुनकर ही...सो के उठी मालूम होती थी । उस घड़ी उसने एक खुले गले की नाइटी पहनी हुई थी जिसमें देखने लायक जो थी... वो काफी दिलकश थी.... बड़ी बड़ी..गोल गोल ।

एकाएक वो घुमी और " अभी आई " कहकर पिछले कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर दी ।

मैं एक सोफे पर बैठ कर सिगरेट पीते हुए उसका इन्तजार करने लगा ।

वो आधे घंटे बाद वापिस लौटी । उस वक्त वो साधारण सलवार सूट पहनी हुई थी । मगर उस ड्रेस में भी वो बला की खूबसूरत लग रही थी । हाईट पांच फुट सात इंच , उम्र शायद तेईस चौबीस , जाफरानी रंगत जैसी त्वचा , बड़ी बड़ी आंखें , तीखे नैन-नक्श , भरे भरे गुलाबी होंठ , फुले हुए गाल , लंबे बाल , मोतियों जैसी दांत , असाधारण रूप से उन्नत वक्ष , उभरे हुए नितम्ब , मांशल जांघ....सब कुछ नम्बर वन...सब कुछ वाह वाह ।

" चाय पियोगे ?"- वो खड़े खड़े ही बोली ।

" जी नहीं शुक्रिया । मैं नाश्ता करके आया हूं ।"

" लेकिन मैंने नहीं किया है । मैं अभी अभी सो कर उठी हूं । "

" ओके ।"

वो फिर गई । थोड़ी देर बाद चाय और स्नैक्स लेकर आई ।

वो एक दूसरे सिंगल सोफे पर बैठ गई । उसने मुझे चाय दिया । मैंने " थैंक्स " कहकर चाय ले लिया ।

" तुम अमर के दोस्त हो ना ?"

मेरे हाथ से चाय की प्याली छलक गई । मैं चौंक कर उसे देखने लगा ।
 
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