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Incest Sagar (Completed)

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Hellohoney

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Fentastik update bro lagtahe kuch garma garam honevala he
 
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Incestlala

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मैं जितनी तेजी से संजय जी को लेकर फ्लोर पर गिरा था उतनी ही तेजी से खड़ा हुआ और जिधर से गोली चलने की आवाज आई थी उधर झपटते हुए दौड़ा । मैंने एक आदमी को हाल के प्रवेश द्वार से बाहर की ओर भागते हुए जाते देखा । मैं उसके पीछे दौड़ा । वो आदमी प्रवेश द्वार से बाहर निकल गया था । मैं अभी उसके पास पहुंचता कि वो मेन गेट के सामने रखे एक बाइक पर सवार होकर ये जा । वो जा । मैं उसका पिछा नहीं कर सकता था क्योंकि हमारी कार होटल के पिछे बनी पार्किंग में खड़ी थी । और वहां दुसरी कोई भी गाड़ी नहीं थी । मैंने उस शख्स को जितना देखा उससे यही पता लगा कि वो एक हल्के लाल रंग का शर्ट पहना था । उसके बाल काफी बड़े थे और वो एक दाढ़ी मूंछ वाला इंसान था । मैं वापस हाल की तरफ चल दिया कि तभी संजय जी , उनके पिता जी और कुछ गेस्ट वहां आ गए ।

संजय जी ने मेरी तरफ प्रश्न भरी नजरों से देखा तो मैंने इनकार में सर हिलाते हुए कहा -" भाग गया ।"

हम हाल में वापस आये । वहां अफरातफरी का माहौल था । संजय जी और उनके पिता जी मेहमानों को शान्त कराने की कोशिश करने लगे । मैं संजय जी के पास पहुंचा और उनसे पुलिस को फोन करने को कहा । उन्होंने हां में सिर हिलाया और पुलिस को फोन किया ।

दस मिनट में ही पुलिस आ गयी । फिर संजय जी , उनके फादर और मैं हाल में ही कोने में बने मैनेजर के केबिन में चले गए । हमने पुलिस को वहां घटित हुए वारदात के बारे में बताया । पुलिस के ये पुछने पर कि आप को किसी पर शक है तो संजय जी ने कहा उन्हें किसी पर शक नहीं है ।

संजय जी एक उच्च दर्जे के बिजनेस मैन थे इसलिए पुलिस उनसे बड़े लिहाज से पेश आई । आधे घंटे के पुछताछ के बाद पुलिस जिस दिवार में गोली घुसी थी वहां गयी । उन्होंने गोली निकाल कर अपने कब्जे में किया और ये बोलकर बिदा हुई कि कुछ पता चलने पर आपको खबर करेंगे ।

धीरे धीरे माहौल थोड़ा शांत हुआ । मेहमान खा पी कर अपने अपने कमरों में जाने लगे थे । वहां के लोकल मेहमान अपने अपने घरों को निकल गये ।

मैं एक काउंटर पर गया और लेमन जूस लेकर पीने लगा और आज के कार्यक्रम में जो विध्न हुआ था उसके बारे में सोचने लगा । तभी मैंने संजय जी , उनके डैड और मम्मी , उर्वशी , उर्वशी के माॅम डैड , मधुमिता और श्वेता दी को मेरी तरफ आते देखा । वे सभी मेरे पास आये तभी संजय जी ने मुझे गले से लगाते हुए कहा -

"Thank you soo much सागर । मैं तुम्हारा किस तरह से आभार प्रकट करूं ।आज मैं जिन्दा हूं तो सिर्फ तुम्हारी वजह से । "

" हां बेटा । आज तुमने संजय को एक नई जीवन दी है । हम तुम्हारा अहसान कभी नहीं भुलेंगे ।" संजय जी के फादर ने प्यार से कहा ।

मैं शर्मिंदा होता हुआ बोला -" ऐसी बात नहीं है अंकल । मैंने ऐसा कोई चमत्कार नहीं किया है । मुझे संजय जी के चस्मा में से रिवाल्वर की झलक मिली और मैंने इन्हें तुरंत धक्का दे दिया । एक ग्रह था जो कट गया ।"

" अगर एक सेकेंड की भी देरी होती तो जीजू या तुम्हारा किसी ना किसी को गोली लग ही जाती " - श्वेता दी भयभीत होते हुए बोली ।


तभी उर्वशी मेरे हाथ को पकड़ कर रोते होते हुए बोली -" सागर तुम ने मेरी मांग सुनी होने से बचा लिया । मैं जिन्दगी भर तुम्हारा अहसानमंद रहुंगी । मैं..."

मैंने उसे बीच में टोकते हुए उसे अपने गले लगा लिया और बोला -" क्या बात करती हो उर्वशी दी भाई भी कभी अहसान करता है । भाई का कर्तव्य होता है कि वह अपनी बहन के हर सुख दुःख का ख्याल रखें । और तुम इसे एक दुर्घटना समझ कर भुल जाओ नहीं तो आज के पार्टी का कैसे मजा उठाओगी ।"

वो मुझ से लिपट गई । मैंने उसके सिर के बालों को सहलाते हुए कहा - " ज्यादा रोना धोना करोगी तो सारी मेकअप उत्तर जाएगी और संजय जी डर से कहीं दिल्ली न भाग जाएं ।"

सबके चेहरों पर मुस्कान आ गई । उर्वशी ने मुस्कुराते हुए मेरी छाती पर हल्के से मुक्का जड़ दिया । मैंने देखा सभी मुझे बलिहारी नजरों से देख रहे थे ।

धीरे धीरे परिवार के मेम्बर खाने के लिए निकल गये । रात के दस बज गए थे । बुजुर्ग लोग खा कर अपने अपने कमरे में चले गए । वहां मेरे अलावा संजय जी , उर्वशी , और श्वेता दी ही खड़े थे ।

तभी संजय जी ने मुझसे कहा -" सागर जब भी कभी तुम्हे मेरी जरूरत होगी चाहे वो किसी भी मामलात में हो , बेहिचक मेरे पास आ जाना । किसी भी तरह की संकोच मत करना । ओके ।"

मैंने मुस्करा कर कहा -" ओके ।"

" चलो अब जरा गला तर कर लें ।"

" जी चलिए लेकिन मैं दो पैग से ज्यादा नहीं लुंगा ।" मैंने कहा ।

" ठीक है। चलो।" उन्होंने कहा ।

हम चारों जहां बार का काउंटर बना था वहां गये । संजय जी ने जानी वाकर ब्लैक लेबल के बोतल से पैग बना कर एक मुझे दिया और एक खुद पकड़ लिया । संजय जी के बहुत जोर देने पर उर्वशी और श्वेता दी ने एक बोतल बीयर में से हाफ हाफ पिया । ना ना करते भी मैं तीन पैग पी गया और संजय जी ने तो पांच पैग मार लिया ।

मुझे हल्का हल्का शरूर था लेकिन संजय जी को देख कर लगता नहीं था कि उन्होंने शराब पी रखी हो । उर्वशी और श्वेता दी के चेहरे से लगता था जैसे उन्हें भी कुछ नशा हुआ है । फिर हमने खाना खाया और अपने कमरों में जाने के लिए लिफ्ट की तरफ बढ़े ।

" सागर ताश खेलते हो या नहीं ।" चलते-चलते ही संजय जी ने मुझसे पूछा ।

" जी थोड़ी बहुत खेल लेता हूं ।"

" तो आ जाओ रुम नम्बर ३२२ में । हमारे कुछ दोस्त भी हैं । थोड़ा लक आजमाते हैं ।"

" आप लोग जूआ खेलोगे ।"

" क्यों तुम्हें पसंद नहीं ।"

" पसंद नापसंद वाली बात नहीं है । कहा आप लोगों की बड़ी बड़ी चाल वाली जुआ और कहां मै ।" मैंने मना किया ।

" मेरी तरफ से खेल लेना ।"

" नहीं । आज नहीं फिर कभी जरूर खेलेंगे ।"

बातों ही बातों के दौरान हम थर्ड फ्लोर पर पहुंच गए । हमारा कमरा पहले आता था इसलिए हम अपने कमरे के सामने खड़े हो गए और उर्वशी और संजय जी को गुड नाईट बोल कर अपने कमरे में प्रवेश कर गये ।

कमरे में प्रवेश करते ही श्वेता बोली -" संजय जीजू से एक ताश मांग के ले आओ ।"

मैं चौंकते हुए बोला -" ताश ! ताश क्या करोगी ?"

" खेलेंगे ।"

" इस वक्त । रात के बारह बजने वाले हैं ।" मुझे आश्चर्य हुआ ।

" हां । इस वक्त । क्यों तुम्हें नींद आ रही है ?"

" नहीं । " - मैंने उसे थोड़ी देर घुर के देखा -" ओके । लाता हूं ।"

बोलकर मैं कमरे से निकल गया और संजय जी से ताश लेकर वापस कमरे में आ गया ।

मैंने देखा श्वेता दी ने कपड़े चेंज नहीं किए थे । वो पलंग के सिरहाने पीठ पीछे तकिया लगाए बैठी थी । मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और उसके विपरीत पलंग पर बैठ गया ।
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