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Incest Sagar (Completed)

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Killerpanditji(pandit)

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अभी हम होटल जाने के रास्ते पर ही थे कि मुझे एक ख्याल आया और मैंने श्वेता दी से कहा -

" मुझे ये 2 nd class वाली होटल पे बहुत डाउट रहता है । तुम न यहां तो बाथरूम जाओ मत ।"

" क्यों ? " वो रूकते हुए बोली ।

" ऐसे होटल में बाथरूम के अन्दर गुप्त कैमरा छिपे होते हैं जो औरतों को नहाते समय , टायलेट करते हुए , या पेशाब करने हुए रिकॉर्ड कर लेते हैं ।"

" क्या ?" वो चौंकते हुए बोली ।

" हां "

" तो अब क्या करें "

" यहां से चलते हैं आगे चलकर रास्ते में कहीं सुनसान जगह देखकर पेशाब कर लेना ।"

" ठीक है , जल्दी चलो ।"

उसने शायद पेशाब शब्द पर ज्यादा गौर नहीं किया था । हम वापस कार में सवार होकर वहां से निकल गये । अभी हम थोड़ी ही दूरी पर गये था तो वो कसमसाते हुए बोली - कहीं रूको न । मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा है ।"

मैंने कार को मेन रोड से हटाकर साइड में एक कच्ची रोड पर रोक दिया । वहां अगल बगल जंगल तो नहीं था लेकिन पेड़ पौधे बहुत थी ।

" जाओ पेड़ के ओट में बैठ कर कर लो ।"

वो जल्दी से भागती हुए गई और एक पेड़ के पीछे जा कर बैठ गई । मगर ताज्जुब की बात ये है कि वो पेड़ कार से मात्र दसेक फुट दूर थी । जब की उस पेड़ के थोड़ी ही आगे बहुत सारे घने पेड़ थे । उसके सीटी की मनमोहनी आवाज मेरे कानों में अमृत घोल रही थी । मेरे नाभी के नीचे साढ़े सात बाई अढ़ाई का लिंग राज जोर से इन्कलाब जिंदाबाद का नारा लगाने लगा। मैं अभी उसको कन्ट्रोल करने में लगा ही था कि वो आई और कार के दरवाजे खोल कर बगल में बैठ गई ।

" चलें अब ? " उसने मुझे देखते हुए कहा ।

" तुम्हे करते देख अब मुझे भी लग गई है । मैं अभी आ रहा हूं ।"

बोलकर मैंने अपनी ओर के दरवाजे से बाहर निकला और उसी पेड़ के पीछे चला गया जहां उसने पेशाब किया था । जहां उसने पेशाब की थी वहां की जमीन पर उसके पेशाब जमा हो गए थे । मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मेरे लिंग राज ने पेशाब करने से मना कर दिया । बड़ी मुश्किल से उसे तैयार कराया और उसके पेशाब के उपर ही पेशाब कर दिया ।

वहां से निवृत्त हो कर कार में सवार हुआ और वहां से निकल गया ।

ड्राइव करते हुए कहा - " कल से बाथरूम नहीं की थी क्या "

" सुबह निकलने के पहले फ्रेश हुईं थी । क्यों ?"

" वहां देख कर लगा जैसे कई लोगों ने पेशाब किया है ।"

उसने फिर मेरी तरफ मारने के लिए हाथ उठाया तो मैं जल्दी से बोला -" sorry sorry मैं अब कुछ नहीं बोलुंगा । तुम हाथ वाथ फिर मत उठा देना वो पहले से ही तुम्हारे मारने से दर्द कर रहा है ।"

" तुम्हारी हरकतें ही ऐसी है । अब अगर फिर तुमने कुछ उल्टा पुल्टा कहा तो शर्तिया मैं तुम्हें गाड़ी से ढकेल दुंगी ।" - उसनेे आंखें तरेरते हुए कहा ।

मैं चुप हो गया । पन्द्रह बीस मिनट तक हम ऐसे ही चुप रहे । आखिर में उसने अपनी चुप्पी तोडते हुए कहा _

" उर्वशी के साथ तुम्हारा कोई अफेयर था ?"

मैं चुपचाप रहा और कार ड्राइव करता रहा । जब मैंने कुछ नहीं बोला तो वो दुबारा पुछी -

" बोलो ना । तुम दोनों रिलेशनशिप में थे ?"

" क्या बोलूं ? जब कुछ बोलने जाता हूं तब तब हाथ उठा देती हो । मैं अब कुछ नहीं बोलने वाला ।"- मैंने नकली नाराजगी जताते हुए कहा ।

" ओले ओले मेरा राजा भैया , अपनी ‌ श्वेता दी से नाराज हो गया । " - मेरे पेट पर गुदगुदी करती हुई बोली - " अच्छा , अब कुछ नहीं बोलुगी ।"

" नहीं नहीं मुझे तुम पर विश्वास नहीं है , तुम घड़ी घड़ी मुंह फुला लेती हो और हाथ पांव चलाने लगती हो । मैं अब तुम्हें कुछ नहीं बताने वाला ।"

" नौटंकी बाज कहीं का । बोलता है या नहीं ।"

" नहीं ।" मैंने मुंह फुलाते हुए कहा ।

" अच्छा । तेरी कसम । अब कुछ नहीं करूंगी ।" उसने अपने बाहों का हार मेरे गले में डालते हुए कहा ।

उसके ऐसा करने से उसका दायां वक्ष मेरे बगल से सट गया और मेरे शरीर में उत्तेजना हिलोरें मारने लगा । और कार हल्के से लहरा गई ।

" अरे ! क्या कर रही हो । एक्सीडेंट करवाना है क्या " मैंने स्टियरिंग सम्हालते हुए कहा ।

वो मुझे छोड़ कर जरा सी दुर होते हुए बोली - " बताओ ना , तुम दोनों का अफेयर था क्या ।"

" मुझसे क्यों पुछती हो ? वो तो तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड थी । उसने तुम्हें कुछ नहीं बताया ? "- मैंने उसे देखकर कहा ।

" बोलो ना यार । क्यों लड़कियों जैसी नखरे करते हो । और हां उसने मुझे कुछ नहीं बताया ।"

" ओके । "- मैंने ठंडी सांस भरी -" हमारा अफेयर था ।"

मैंने उसे देखा वो मुझे बिना पलक झुकाए देख रही थी ।

" क्यों ? क्या हुआ ? ऐसे मुझे एक टक क्यों देख रही हो ?"

" कुछ नहीं । साली ।कमीनी । इतना बड़ा राज मुझे तक नहीं बताया । "- वो गुस्से से बोली -" और तुमने मुझे क्यों नहीं बताया ?"

" मैं ... मुझे उसने अपनी कसम दिला कर किसी को भी बोलने से मना किया था इसलिए नहीं बोला ।"

" वाह । उसने तुम्हें बोला और तुमने मान लिया । मुझे अपनी बेस्ट फ्रेंड , नुरे नजर , हम प्याला , हम निवाला और ना जाने क्या क्या बोलते हो और सिक्रेट उर्वशी के साथ शेयर करते हो ।" - वो गुस्से से बोली ।

" देखो फिर गुस्सा हुई ना । इसीलिए नहीं बता रहा था । और कुछ बातें ऐसी होती हैं जो नहीं बताई जा सकती है अगर किसी लड़की के इज्जत का सवाल हो तो ।"

" ठीक है ठीक है ।" वो अभी भी मुंह फुलाए बैठी थी ।

" मेरी जानेमन तुम तो ऐसा रियेक्ट कर रही हो जैसे मैं तुम्हारा खसम हूं ।" मैंने उसके बांह पर चिकौटी काटते हुए कहा ।

" बकवास बंद करो ।" - वो पुर्ववत गुस्से से बोली ।

हम थोड़ी देर तक चुप रहे । वो शायद किसी सोच में डुबी हुई थी । फिर उसने खामोशी तोड़ी ।

" क्या तुम लोगों ने वो भी कर लिया है ?" वो धीरे से बोली ।

" वो ? वो क्या ? "

" वो ! वही जो एक लड़का लड़की करते हैं ।"

" हां । खुब घुरा फिरा हमलोगो ने । पार्क , सिनेमा , लांग ड्राइव ..."

" बेवकूफ मैं पार्क सिनेमा की बात नहीं कर रही हूं ।"

" फिर किसकी बात कर रही हो ?"

" म..म... मैं उसकी बात कर रही हूं जो लवर अकेले में करते हैं । जो पति-पत्नी बन्द कमरे में करते हैं ।" वो झिझकते हुए बोली ।

" अच्छा वो ।" - मैंने ऐसे बोला जैसे मुझे अब बात समझ में आयी हो -" ऐसे बोलो ना चो.. मतलब सेक्स किया है या नहीं ।"

" हां वही ।" वो गुस्से से मुझे घुरते हुए बोली ।

" ज्यादा तो नहीं लेकिन सात आठ बार किया है ।" - मैंने ऐसे बोला जैसे मुझे काफी शर्म आ रही हो ।

जब मैंने उसकी तरफ देखा तो मुझे लगा कि जैसे अब वह मुझ पर रासन पानी लेकर झपटने ही वाली है । मैंने तुरंत कार खड़ी कर दी और उससे कहा -

" देखो ! अभी तुमने मेरी कसम खाई है ।"

वो थोड़ी देर में शान्त हो गई । फिर मैंने कार आगे बढ़ा दी । मैंने थोड़ी देर बाद कहा - " वैसे तो मैं पटाना चाहता था उसके सहेली को लेकिन उसने तो मुझे घांस तक नहीं डाला बल्कि शादी करके फुर्र हो गई तो मैंने सोचा वो नहीं तो उसकी सहेली ही सही ।"

वो कुछ बोली नहीं , चुपचाप सुनती रही । उसे सब समझ में आ रहा था कि मैं किसके बारे में कह रहा हूं । वो एक बार मेरी तरफ देखी फिर सामने सीसे की तरफ देखने लगी ।

" तुमसे कभी झुठ नहीं बोलता ये बात तुम भी जानती हो । अगर तुम्हें बुरा लगा हो तो sorry ." - मैंने उसे मनाते हुए कहा ।

वो चुप बैठी रही ।

" मुझे एक जबरदस्त शायरी याद आ रही है , बोलूं ?" - मैंने कहा ।

वो मेरी तरफ पलटी और अपनी चौबीस कैरेट के मुस्कराहट से माहौल को तनावमुक्त कर दी ।

ये औरतें न , पल में तोला पल में माशा ।

" नहीं नहीं कोई जरूरत नहीं है । जैसे तुम वैसे ही तुम्हारी शायरी ।"- वो बोली ।


रास्ते में एक ढाबे में हल्का फुल्का नाश्ता किया और चाय सिगरेट पीने के बाद आगरा की ओर निकल पड़े । आगरा थोड़ी देर बाद पहुंचने ही वाले थे । रास्ते में मैंने श्वेता दी को मेरे और उर्वशी के रिश्तों के बारे में पुछताछ करने से मना किया ।

उर्वशी का पति संजय चोपड़ा एक बेहद ही रईस और दिल्ली शहर का जाना माना व्यापारी था । उसके दिल्ली में ही नहीं वल्कि आगरा , मुम्बई , हैदराबाद और जयपुर में भी होटल का बिजनेस था । मैंने तो यहां तक सुना था कि वो अगले इलेक्शन में रूलिंग पार्टी के तरह से m.p. के लिए खड़ा होने वाला है । पता नहीं सच है या झूठ ।

उर्वशी भी कोई साधारण घराने से नहीं थी । उसके पिता का गुड़गांव में आटोमोबाइल हार्डवेयर का इंपोर्ट एक्स्पोर्ट का काम था । उर्वशी अपने मां बाप की एकलौती लड़की थी । बहुत बहुत ही सुन्दर बिल्कुल उर्वशी ढोलकिया की तरह ।

उर्वशी की दोस्ती श्वेता दी से कालेज में हुई थी और जल्दी ही वे दोनों बेस्ट फ्रेंड बन गई थी । श्वेता दी ने ही उर्वशी से मेरी परीचय कराई थी जो बाद में चलकर उसके बिस्तर तक पहुंच गई ।

उन्होंने अपने शादी की रिसेप्शन आगरा के अपने ही होटल में रखी थी । जब हम होटल पहुंचे तब दोपहर के दो बज रहे थे । हम होटल के रिसेप्शन हाल में पहुंचे । वहां मेहमानों का जमघट लगा हुआ था । रिसेप्शन को बहुत ही अच्छी तरह से सजाया गया था । खाने में कई तरह की Verity थी । वेज और नान वेज दोनों ही तरह का व्यवस्था था । शराब का साईड में अलग काउंटर बना था जहां पर मेहमानों की भीड़ ज्यादा थी । वर्दी धारी वेटर हाल के चारों ओर मेहमानों के खातिरदारी में जुटे हुए थे । नये नये शादी के बंधन में बंधे हुए जोड़े के लिए एक शानदार मंच बना हुआ था जो अभी खाली पड़ा था । हाल के अन्दर जगह जगह मर्द और औरतें ग्रुप बनाकर स्नैक्स और तरल पेय का आनंद लेते हुए बातों में व्यस्त थे ।

जब हम हाल में प्रवेश किये तो हमारी नजरें मेजबान को ढूंढने लगी । हमने चारों तरफ देखा तो संजय को कुछ लोगों में घिरा हुआ पाया वहीं उर्वशी कुछ औरतों के बीच में । उर्वशी उन औरतों से हंस हंस कर बातें कर रही थी ।

" देखो ! उर्वशी वहां है । उन औरतों के बीच में । हंस हंस के बातें करते हुए ।" श्वेता दी ने उर्वशी की तरफ इशारा किया ।

" हां ।" मैंने देखा इस वक्त वो लाल साड़ी , लाल ब्लाउज , लाल सैंडल माने सर से पांव तक लाल ही लाल गेट अप में थी । गले में सोने का बड़ा हार , जुल्फें खुली हुई , होंठों पर लाली... कयामत लग रही थी ।

" देख कर कौन बोल सकता है कि ये साली इतनी चालु निकलेगी ।" उसने मेरी आंखों के आगे अपनी हथेली हिलाते हुए कहा ।

" तुम्हे एक बात कहूं ।" मैंने श्वेता दी को थोड़ा साईड में ले जाकर बोला ।

" क्या ?"

" A bad man is better than a bad name ."

" मतलब ?"

" बद बदनाम होने से अच्छा है ।"

" मैं समझी नहीं ।" उन्होंने मुझे प्रश्न भरी निगाहों से देखा ।

" मैं समझाता हूं ....मान लो ..एक लड़का राम , जिसने कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाया हो, कभी शराब पी ना हो उसे यदि कोई शराब दुकान में या शराब दुकान के पास या पब में कोई देख ले तो वो यही समझेगा कि वो लड़का राम शराबी है । और एक लड़का जिसका नाम मोहन है वो डेली ड्रींकर है रोज शराब पीता है लेकिन उसे शराब पीते हुए कभी किसी ने भी नहीं देखा तो लोग उसके बारे में यही कहेंगे कि मोहन कितना अच्छा लड़का है , शराब को हाथ तक नहीं लगाता ।.... यहां राम बदनाम है लेकिन एक्चुअली बद आदमी मोहन है ।......समझी ।"

वो कुछ बोली तो नहीं लेकिन समझने का प्रयत्न कर रही थी ।

मैंने फिर कहा -" मान लो .... मैं कहता हूं मान लो कि मैं एक अय्याश छोकरी बाज लड़का हूं , मेरी कई लड़कियों से नाजायज ताल्लुकात है मगर किसी ने भी... किसी ने भी मुझे वो सब गन्दी हरकतें करते हुए नहीं देखा है, और ना ही सुना है इसका मतलब मै एक शरीफ बन्दा हूं । दुसरी तरफ वो उर्वशी का हसबैंड संजय एक बहुत ही शरीफ और पराई औरतों से दूर रहने वाला लड़का है लेकिन भुले भटके किसी कोठा या वैश्या के साथ दिख गया तो लोग यही समझेंगे कि वो एक रंडीबाज और चरित्रहीन लड़का है ।..... तुम गलत करो लेकिन पकड़े मत जाओ तो सब ठीक ठीक लेकिन अगर पकड़े जाओ तो सब खराब खराब ।.... इसीलिए कहते हैं कि बद आदमी बद नाम होने से अच्छा है ।"

" ठीक है ठीक है । समझ गई । तुम्हारी विद्या तुम्हे ही मुबारक । चलो उर्वशी के पास चलते हैं ।" उसने मेरी बांह पकड़ कर ले जाते हुए कहा ।

चलते-चलते वो अचानक रूकी और मुझसे पूछा " तुम भी कुछ gift लाए हो ?"

"हां । तुम क्या लाई हो ?"

" एक सोने की अंगूठी , चांदी का पायल और कपड़े का सेट । और तुम ?"


" मैं " -मैं उसके कान में फुसफुसाया -" Manforce Condoms "

उसने मेरे पेट एक जोर का मुक्का मारा और मुस्कराते हुए मेरी बांह पकड़ उर्वशी की तरफ चल पड़ी ।
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दोनों सहेलियां बगलगीर होकर मिली । मैंने उर्वशी को शादी की मुबारकबाद दी । उर्वशी ने अजय के लिए संवेदना प्रकट की । फिर वो अपने हसबैंड संजय के पास हमें ले गयी ।

संजय जी भी हमसे बड़े गर्मजोशी से मिले और मेरे काम और परिवार के बारे में पुछा । मैंने बड़े धैर्य से उन्हें सब बताया । मुझे वो बहुत ही मिलनसार ‌और हंसमुख स्वभाव के व्यक्ति लगे । फिर उर्वशी ने अपने माता-पिता से और फिर अपने सास ससुर से मिलवाया । हम दोनों ने उनको प्रणाम किया ।।फिर दोनों सहेलियां मुझसे बिदा ले कर गर्ल्स टाक में लग गई ।
मैं भी टहलते टहलते जुस काउंटर पर पहुंच और मिल्क शेक लेकर ज्योंहि पलटा कि एक लड़की से टकरा गया । मैंने जल्दी से लड़की को कमर से पकड़ कर गिरने से बचाया ।

लड़की मुझे thanks कहते हुए पलटी ‌तो उसे देखते हुए मैं चौंक गया ।

" तुम !" मैंने चौंकते हुए कहा ।

" तुम ! तुम यहां क्या कर रहे हो ?" लड़की ने भी चौंकते हुए कहा ।

ये वही लड़की थी जिससे मैं रीतु के कालेज में मिला था और जिससे मैंने मज़ाक में फ्रेंडशिप बनाने का आफर दिया था ।

" जो आप कर रही है । " मैंने संभलते हुए मुस्कुरा कर कहा ।

" लड़की वालों के तरफ से हो ?"

" जी " मैंने कहा ।

वो घुटनों तक का जीन्स और नाभि से उपर तक का डिजाइनर सफेद रंग का टॉप पहने हुए थी । पैरों में ऊंचे हील का सेंडल था । उसके लम्बे लम्बे पांव , केले के टहनियों की तरह माशल जांघें , नंगी कमर , गहरी नाभि , गिरिवर के ऊंचे शिखरों की तरह वक्ष , गुलाबी होंठ , कजरारे नैन .....सब कुछ बन्दा के मन मुताबिक जैसा था ।

मैं उसके सौन्दर्य का रसपान कर ही रहा था कि उर्वशी और श्वेता दी वहां आ गई ।

उर्वशी ने लड़की से पुछा " क्या हुआ मधुमिता ? सब ठीक है ना ।"

" हां भाभी सब ठीक है । थोड़ी फिसल गई थी । सब ठीक है ।" उस लड़की ने मुझे घुरते हुए कहा ।

ओह तो ये उर्वशी की ‌ननद और संजय जी की बहन है । मैंने सोचा ।
" तुम दोनों एक दूसरे को जानते हो क्या " उर्वशी ने मधुमिता से पूछा ।

" हां भाभी एक बार दिल्ली में मिल चुके हैं । लेकिन जान पहचान नहीं है ।" मधुमिता ने कहा ।

उर्वशी ने मुस्कुराते हुए मधुमिता से कहा -" ये सागर हैं । श्वेता का भाई । और मेरा भी सबसे प्यारा भाई । श्वेता से तो तुम शादी में मिल चुकी हो । और सागर..ये है मेरी एकलौती ननद मधुमिता ।"

मधुमिता ने श्वेता दी को नमस्कार किया । और मुझसे हैंड सेक किया ।

उर्वशी ने मुझे कुटिल मुस्कान भरी नजरों से देखा और मधुमिता से बोली " सागर बहुत ही शरीफ और नेक लड़का है । ये श्वेता और रीतु से भी ज्यादा मुझे मानता है । मुझे जब भी कोई जरूरत पड़ जाय तो मेरी मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है ।'

मैं हड़बड़ाया । मैंने श्वेता दी को देखा वो मेरे ही तरफ देख रही थी । मैंने मधुमिता को देखा तो वो भी मुझे ही घुर रही थी । मुझे डर लगा कहीं मधुमिता कालेज वाली बात यहां न बता दें ।

तभी किसी ने उर्वशी को पुकारा और वो श्वेता दी को लेकर उनके पास चली गई । उनके जाते ही मेरी confidence वापस आई ।

मैंने मधुमिता को देखा और मुस्कुरा कर कहा " मेरा उस दिन के प्रस्ताव के बारे में आप ने क्या सोचा ?"

वो मुझे देख कर व्यंग भरे स्वर में बोली " अच्छी इमेज बनाई है आप ने अपने फेमिली में । अगर उन्हें पता होता कि लड़कियों के बारे में आप के कितने उच्च विचार है ?"

मैंने मुस्करा कर कहा " मैंने क्या ग़लत कहा । हमारे शास्त्रों में भी तो यही कहा गया है कि औरतों का चरित्र और पुरूषों का भाग्य तो देवता भी नहीं समझ पाए फिर मानव की क्या विशात है ।"

वो कुछ बोली नहीं सिर्फ मूझे अपनी बड़ी बड़ी आंखों से घूरती रही । मैंने उस वक्त जाते हुए एक वेटर से दो ग्लास मैंगो शेक लेकर एक उसे दिया और एक खुद लेकर अपने होंठों से लगा लिया ।

" मेरे सवाल का जवाब अभी भी नहीं मिला " मैंने कहा ।

" आप को आप के सवाल का जवाब चाहिए ?" वो चलते चलते बोली ।

" यदि आप को कोई आपत्ती नही हो ।"

" ओके । जब आप सवाल कर ही रहे हैं तो क्यों न मैं भी कुछ सवाल करूं ।"

" जरुर जरुर । पुछिए ।'

" आप मेरे पांच सवालों का जवाब दें दे । अगर आपका जवाब सही हुआ तो we are friend "

" कैसा सवाल ?" मैं शंकित भरी नजरों से उसे देखा ।

" सिम्पल । जनरल नॉलेज वाली ।"

मैंने उसे देखा । वो मुझे अपलक देखे जा रही थी । क्या लड़की थी । अपने आप को जेनिफर लोपेज समझती है या ऐश्वर्या राय ।जरूर पैसे का और सुन्दरता का घमंड है ।

" मैडम । ये क्या बात हुई । आप क्या पूछेगी और किस विषय पर पूछेंगी । ये तो मैं नहीं जानता लेकिन दुनिया में इतने जनरल नॉलेज के सवाल है कि उसे गुगल बाबा के अलावा दुनिया में कोई भी नहीं बता सकता । अब यदि आप ने पूछा कि अमेरिका के अलास्का के गवर्नर का नाम बताओ , जर्मनी के रेलमंत्री का नाम बताओ , युगांडा के होम मिनिस्टर कौन है , तेलंगाना के हाई कोर्ट के जज का नाम क्या है ? .... ये कौन बता सकता है ।"

वो चुप हो गई और मुझे घुरती रही ।

मैंने बातों को बढ़ाते हुए कहा " इससे अच्छा है कि इसके उलट गेम खेलते हैं ।'

" क्या ?" उसने कहा ।

" मैं आप से पांच सवाल पूछूंगा और उसके जबाव में आप को उत्तर गलत देने होंगे ।'

" मतलब ?" उसने प्रश्न भरी नजरों से देखा ।

" मतलब ये कि मैं आप से पांच सवाल पूछूंगा और आप को उसके जबाव सही नहीं बल्कि गलत देने हैं । यदि आप ने एक भी सवाल का जवाब सही में दिया तो आप हार जाएंगी और मैं जीत जाउंगा । फिर आप को मेरी फ्रेंड शिप कबूल करनी होगी ।"

" ओके । और अगर मैंने आपके सवालों का जवाब गलत में दे दिया तो "

' तो फिर आप जीती और मैं हारा । उसके बाद में आप को फ्रेंड शिप के लिए जोर नहीं दुंगा । आप अपनी राह और मैं अपनी राह ।"

वो कुछ देर तक सोचती रही । उसे इसमें कुछ तो राज लग रहा था । मैंने उसे सोचते देख कहा ' आप सोचती बहुत ज्यादा है । सिम्पल सा गैम है । आप को बस गलत ऐनसर देने हैं । जैसे मैं आप से आपका नाम पुछूं तो आप अपना नाम मधुमिता ना बोलकर रीना सीना आदि बता देना ।'

वो आश्वस्त हुई ।

" ओके । डन । अपना सवाल पुछो ।" मधुमिता ने कांफिडेंस से कहा ।

" ओके । मेरा पहला सवाल है "- मैं ड्रामेटिक अंदाज में बोला -" भारत के राष्ट्रपति का नाम क्या है ?"

वो कुछ देर सोची । अब वो इतनी बेवकूफ तो नहीं होगी कि भारत के राष्ट्रपति का नाम भी पता ना हो ।

" मनमोहन सिंह " उसने जवाब दिया ।

" गुड ।" मैंने अगला सवाल पूछा -" भारत के राष्ट्रीय झंडे में कौन-कौन सा रंग है ?"

इस बार उसने काफी सोच-विचार कर जबाव दिया -" नीला , पीला और लाल ।"

मैंने तुरंत अगला सवाल पूछा -" तुम्हारे पिता जी का नाम क्या है ?"

वो चौंक गई । थोड़ी कसमसाई फिर बोली -" सुभाष चन्द्र बोस "

मैं मुस्कराया । वो मुझे देख कर थोड़ी शरमाई ।

" कितने सवाल हुए " मैंने पूछा।

" तीन ।" मधुमिता ने कहा ।

" तुम हार गयी ।" - मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

" कहां हार गयी ? मैंने तो सारे जबाव गलत ही दिए हैं ।" वो चौंकते हुए बोली ।

" तुम गेम हार गयी । मेरा चौथा सवाल ही ये था कि ' कितने सवाल हुए ? ' तुम्हें इसके जवाब में आठ , दस , बीस कुछ भी बोलना था लेकिन तीन नहीं बोलना था ।"

वो भौंचक्का सा मुझे देखती रही ।

" तो अब हमारी फ्रेंड शिप पक्की ?" - मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

वो अपलक मुझे घुरती रही फिर एकाएक जोर से हंसने लगी ।

वो हंसते हुए बोली -" सच में यार काफी फनी हो । ओके । पक्की लेकिन फ्रेंड शिप नहीं ।"

" फिर ?"

मुझे मुस्करा कर बड़े ही ड्रामेटिक से में बोली -" गर्लफ्रेंड । .... क्या मैं तुम्हारा गर्लफ्रेंड बन सकती हूं ?"

मैं खुश हो गया । मैंने अपने सिर को उसके आगे हल्के से झुकाते हुए कहा -" जहे नसीब । It's my pleasure ।"

उसने अपने कोमल हाथ मेरी तरफ बढ़ाई । मैंने उसे अपने दोनों हाथों से थाम लिया । मन तो किया उसे पकड़ कर अपने गले से चिपका लूं कि तभी श्वेता दी वहां आ गई । श्वेता दी के आने के बाद मधुमिता काम का बहाना बना कर वहां से चली गई ।

" क्या बात है ? बड़ी हंस हंस के बातें हो रही थी ।"- श्वेता दी ने कहा ।

" हां क्यों ना हो आखिर मेरी गर्लफ्रेंड जो है ।"

" दो ही मुलाकात में गर्लफ्रेंड ?" - श्वेता दी आश्चर्य करते हुए बोली -" बड़े फास्ट हो ।"

" हर काम फास्ट ही होना चाहिए । वो दोहा सुनी है ना ?"

" कौन सा ?"

" काल करे सो आज कर , आज करे सो अब ।
पल में प्रलय होयगी , बहुरी करोगे कब ।।"

श्वेता दी भुनभुनाती हुए बोली -" बस बस । सुनो हमें आज रात यहीं रूकना पड़ेगा । उर्वशी और जीजू दोनों बहुत जोर दे रहे हैं । हमारे ठहरने का इंतजाम इसी होटल में थर्ड फ्लोर में हुआ है । कमरे का नम्बर ३०३ है । आज पुरा होटल सिर्फ मेहमानों के लिए बुक हैं ।हमारा बैग रूम में चला गया है । मैं बहुत थक गई हूं तो मैं सोने जा रही हूं अगर तुम्हें भी आराम करना है तो रूम में आ जाना ।"

" क्या हम दोनों एक ही रूम में सोयेगे ।" मैं खुश होते हुए बोला ।

" हां । एक ही रूम में ।"

" वाह ! वाह ।"

" मैं जा रही हूं और हां एक ही रूम में नहीं बल्कि एक ही बिस्तर पर ।" - बोलकर वह पलटी और एक मीनट के अन्दर मेरे आंखों से ओझल हो गई ।

मैं चुम्बक की तरह वहीं जमीन से चिपका हुआ भौंचक्का खड़ा रहा । उसके बातों का अर्थ सोचने लगा ।मेरे सांसों की गति तीव्र हो गई । मैं कल्पनाओं के पंख में उड़ने लगा । मेरा दिल गार्डेन गार्डन हो गया ।

आज रात जरूर कुछ तुफानी होने वाला है ।
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RIP Sushant Singh Rajput. ??

Update 14.


माॅम और चाची के आने के बाद अपने र्पाट टाइम जाॅब करने क्लब चला गया । वहां दो घंटे तक पसीना बहाया फिर काजल के घर रीतु को लाने चला गया । वहां रीतु के रहते काजल के साथ कुछ गरम गरम होने की संभावना कम ही थी लेकिन भले फिल्म न सही ट्रेलर की आस तो थी ही । मगर वो भी नहीं हुआ । काजल के हाव भाव पहले की ही तरह सामान्य थी । मैं रीतु को बाइक पर बैठा कर घर की ओर चल दिया ।

" आज कल काजल से बड़ी चैटिंग सैटिंग होती हैं " रीतु ने अचानक कहा ।

" क्या मतलब ?" मैं चौंकते हुए बोला ।

" काजल से बड़ी चैटिंग सैटिंग होती है ।" वो बाइक पर थोड़ा आगे की ओर सरक कर बोली ।

" किसने कहा ? क्या काजल ने कहा ?" मैं घबराए हुए बोला ।

" हां ।"

" क्या कहा ?".... मैंने सोचा कहीं उसने सारी बातें रीतु को कह तो नहीं दी । आखिर वो दोनों सहेलियां हैं । लेकिन नहीं हमने जिस तरह की गन्दी बातें की थी वो सब वो किसी को भी नहीं बोल सकती ‌।

" यही कि मैं सागर से बात कर रही थी ।"

" अरे ! पुरी बात बतायेगी ?"

" हम दोनों उसके बगीचे में थे तभी वो बाथरूम जाने को बोलकर निकल गई । और बाथरूम से पुरे आधे घंटे बाद निकली । तो मैंने पूछा इतनी देर क्या कर रही थी तो वो बोली कि तेरे भैया से बात कर रही थी ।'

" अच्छा ! ऐसा कहा उसने ।"

" हां ।"

" फिर तु क्या बोली ?"

" मैं क्या बोलती ? मैंने बस इतना ही कहा कि जरा संभल कर कहीं पंगा न हो जाए , और कहीं तेरे डैड को पता चल गया तो अपनी रिवॉल्वर लेकर मेरे घर ना पहूंच जाएं । और साथ में तेरी भी खैर खबर ना ले लें ।"

" क्या ? उसके डैड के पास रिवाल्वर है ?" मैं चौंक गया ।

" हां ।"

" कौन सी रिवाल्वर है ? तुने देखी है ?"

" हां । छोटी सी है "

" अच्छा । फिर तेरे बोलने के बाद काजल ने क्या कहा ?"

" प्यार किया तो डरना क्या ।"

" क्या ?"

" बोली प्यार किया तो डरना क्या ।"

" मुझे तो लगता है कि या तो वो तुझे बेवकूफ बना रही है या तु मुझे बेवकूफ बना रही है ।"

" यू नो.. मुझे कोई बेवकूफ नहीं बना सकता ।"

" इसका मतलब तु मुझे बेवकूफ बना रही है ।"

" तुम्हें कौन बेवकूफ बना सकता है ?

" अच्छा !... पहली बार सही बोली ।"

" जी नहीं । जो पहले से ही बेवकूफ हो उसे भला बेवकूफ बनाने की क्या जरूरत है ।"

" मैं बेवकूफ हूं ?"- मैं भड़क कर बोला ।

" हां , काजल तो यही कहती हैं ।"

" काजल नहीं , तु बकती हैं ये सारी बकवास । ये सब तेरी हमेशा वाली फितरत है । वैसे काजल ने तुझे ये नहीं बताया कि वो मुझसे क्या क्या बातें कर रही थी ।"

" नहीं बताई कलमुंही ने । इसीलिए तो मैं तुम से पुछ रही थी ।"

" कोई बात हुई होगी तो न बताएगी । अब चुपचाप बैठ , हम घर पहुंचने वाले हैं ।"

थोड़ी देर बाद हम घर पहुंच गए । रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में चला गया । कपड़े चेंज किए फिर छत पर टहलते हुए सिगरेट पीने लगा । मुझे न जाने क्यों शुरू से लग रहा था कि अनुष्का और उसके पति कुलभूषण खन्ना के बारे में पुलिस को न बता कर बड़ी गलती कर दी है । अगर मैंने पहले ही पुलिस को उनके बारे में बता दिया होता तो वो उनके घर जाकर तहकीकात करती और हो सकता है कि मर्डर विपन भी बरामद हो जाता यदि वो क़ातिल हुए तो । पुलिस के पास जानकारी हासिल करने के लिए बहुत सारी चीज़ें होती हैं । वो इन मामलों में एक्सपर्ट होते हैं । उनके पास पावर होता है , टार्चर करके सच्चाई निकलवाने के हजारों तरीके होते हैं । और अगर कहीं दोनों मियां बीवी अमेरिका खसक लिए, और बाद में वो गुनाहगार पाए गए तो सांप निकलने के बाद लकीरें पिटने वाली बात रह जायेगी ।

मैंने डिसाइड कर लिया कि मैं पुलिस को उन के बारे में बताऊंगा । मगर मैं ये भी जानता था कि पुलिस मुझे उनके बारे में इतने दिनों तक जानकारी छुपाने पर मेरी बखिया उधेड़ देंगी । खैर अब पुलिस मेरे साथ जो भी करें मैंने उनके बारे में पुलिस को बताने का निर्णय कर लिया ।


.......

सुबह तैयार होकर नाश्ता किया फिर माॅम डैड को सारी बातें बताई । उन्होंने भी मुझे पुलिस के पास जाने की सलाह दी । मैं अपनी बाइक लेकर गाजियाबाद निकल गया । थाने में इंस्पेक्टर विजय कोठारी अपने कक्ष में मिला । मैंने उसे सारी बातें बताई । सुनते ही वो भड़क उठा । भरे थाने में मेरी बुरी तरह फजीहत कर दी । फिर उसने कहा वो कुलभूषण खन्ना और अनुष्का के घर जा रहा है और वो जब तक वहां से वापस न आ जाए तब तक थाने में ही उसकी प्रतीक्षा करें । मैंने बड़ी मुश्किल से उसे मनाया कि मैं थाने में न रूककर अपने जीजा के घर चला जाता हूं और वो जब वहां से वापस आ जाए तब मैं थाने चला आऊंगा ।

इंस्पेक्टर अपने लाव लश्कर के साथ कुलभूषण खन्ना के घर चला गया और मैं जीजू के घर । अभी दिन के ग्यारह ही बजे थे । जब मैं जीजू के घर पहुंचा तब श्वेता दी किचन में थी और दोपहर के भोजन बनाने की तैयारी कर रही थी और जीजू अपने कमरे में टीवी चालू किए मोबाइल देख रहे थे ।

मुझे देखकर श्वेता दी बहुत खुश हुई । वो साड़ी पहनी हुई थी । मैंने श्वेता दी को हग किया और अपने हाथ को पीछे ले जाकर उनके बड़े बड़े चूतड़ों को दबोच लिया । वो चिहुंक कर मुझे देखी और फुसफुसाई - " क्या करते हो , तुम्हारे जीजू घर में हैं , कहीं देख लिया तो ।"

" नहीं देखेंगे । कमरे से किचन थोड़ी ही दिखेगा । " - कहकर मैंने अपने होंठ उनके होंठों से सटा दिया । और उनके शहद से भी मीठे लबों को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा ।

वो मुझे परे धकेलते हुए बोली -" क्या कर रहे हो मरवाओगे क्या ? चुपचाप रूम में जाकर जीजू के पास बैठो । "

" क्या यार , इतनी दूर से आया था कि अपनी बहन को प्यार करूंगा , उसके गले लगूंगा , लेकिन तुम तो मेरा दिल ही तोड़े देती हो ।" मैंने मायूसी शक्ल बनाते हुए कहा ।

" नाटक मत करो । जाओ , मैं चाय लेकर आती हूं ।" - उन्होंने बर्तन उठाते हुए कहा ।

" लेकिन मुझे चाय नहीं पिनी है ।"

" तो क्या पिनी है , खाना बना दूं ..वैसे चावल और दाल बना दिया है , सब्जी बनानी बाकी है । सलाद काट देती हूं और पापड़ तल देती हूं , क्यों ठीक रहेगा ना ।"

" लेकिन फिलहाल तो मुझे दुध पिनी है और वो भी तुम्हारी चोली के अंदर वाली ।" - कहकर मैंने उनके एक मम्मा दबा दिया ।

" कमीना कहीं का । अभी कुछ नहीं मिलने वाला है । और इस वक्त तो हरगिज नहीं ।"

" चलो ठीक है । जैसी आप की इच्छा ।" - मैं निराश होकर बोला ।

और मैं जीजू के पास जाने लगा तभी उसने मेरी बांह पकड़ी और किचन के कोने में ले गयी । फिर उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों से पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए । धीरे धीरे चुम्बन विल्ड होने लगी । दोनों एक दूसरे के होंठों को बुरी तरह से चुसने लगे । वो अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी । मैं उसके जीभ को चूसने लगा । उसकी लार थूक को मैं गले के अन्दर लेने लगा । वो उत्तेजित होकर पैंट के ऊपर से ही मेरे लन्ड को दबाने लगी । मैं उसकी भारी चूतड़ों को हाथों से पकड़ कर दबोचने लगा । फिर मैंने अपनी हाथ को उसके पेटीकोट के अन्दर प्रवेश कराने लगा तो उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मुझसे अलग हो गई ।

" आज नहीं " - वो हांफते हुए बोली -" मैं वहां तो आ ही रही हूं चार पांच दिन के अंदर फिर कर लेना ।"

" क्या कर लेना ?" मैंने उसे पकड़ने की कोशिश की ।

" प्लीज़ भाई , जाओ ना " श्वेता दी ने अनुरोध किया ।

" ओके । तुम खाना बनाओ मैं जीजू के पास बैठता हूं ।" - मैंने प्यार से कहा ।

उसने सहमति में सिर हिलाया । मैं जीजू के पास चला गया और पलंग के बगल में दिवाल से लगी हुई बड़े सोफे पर एक किनारे बैठ गया । थोड़ी बहुत औपचारिक बातों के पश्चात उन्होंने मेरे आने का कारण पूछा तो मैंने बहाना बनाया कि मेरे एक दोस्त का यहां के कालेज में कोई काम है इसलिए उसके साथ चला आया । तभी श्वेता दी आई और हमें चाय सर्व किया फिर सोफे के दुसरे कोने में बैठ गई । तीनों चाय पीते पीते बात करने लगे । मैंने जीजू से पूछा कि काम कब से ज्वाइन करने वाले हैं तो उन्होंने कहा अब दिल्ली आकर वहीं से काम ज्वाइन करेंगे । फिर थोड़ी देर बाद वो एक टीबी सीरियल देखने में बिजी हो गये । शायद वो उनकी फेवरेट सीरियल थी जो दुबारा दिन में दिखाई जा रही थी ।

मैं चाय पीते हुए श्वेता दी की तरफ देखा । वो चाय पीते हुए मुझे ही देख रही थी । मैंने अपना मोबाइल बाहर निकाला और श्वेता दी के ह्वाट्सएप पर मैसेज किया । श्वेता दी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने इशारे से उनको अपना मोबाइल देखने को कहा । वो अपनी मोबाइल उठाई जो उनके बगल में सोफे पर पड़ी हुई थी ।

मेरा मैसेज - वहां सन्डे को आ रही हो ना ।

श्वेता दी का मैसेज - हां , क्यों ?

मैं - जीजू काम कब से ज्वाइन करेंगे ?

श्वेता दी - सोमवार से ।

मैं - ड्यूटी पर निकलेंगे किते बजे ।

श्वेता दी - दस बजे । और वापस लौटेंगे सात बजे ।

मैं - तब तो तुम नौ घंटे अकेले रहोगी । कैसे समय काटोगी ।

श्वेता दी - क्यों ? मां को या राहुल को बुला लुंगी ।

मैं - राहुल का स्कूल रहेगा और चाची रोज रोज थोड़ी न आयेगी ।

श्वेता दी - तो उर्वशी को बुला लुंगी । वो नहीं मिली तो रीतु या तुम्हारी मम्मी को बुला लुंगी ।

मैं - सारी दुनिया को बुला लेना लेकिन मेरे बारे में ख्याल तक मत करना ।

श्वेता दी - क्यों नहीं ख्याल करूंगी , जब मेरे कपड़े धोने हो तब खयाल करूंगी , जब घर की साफ-सफाई करनी होगी तब खयाल करूंगी , जब बाजार से राशन सब्जी मंगवानी हो तब खयाल करूंगी ।

मैं - इतना सारा काम करवाओगी ।

श्वेता दी - हां ।

मैं - और बदले में मजदुरी में क्या दोगी ।

श्वेता दी - तुम्हारे जीजू से बोलकर पांच सौ रुपए और दिवाली होली के दिन कपड़े ।

तभी जीजू ने श्वेता दी को टोका -" किससे चैट कर रही हो श्वेता ।"

श्वेता दी ने संभलते हुए कहा - " उर्वशी है ।"

" अच्छा ।" कहकर उन्होंने फिर अपना ध्यान टीवी पर केन्द्रित कर दिया ।

मैं - वैसे तुम पैसे कपड़े ना भी देती तो मैं तुम्हारे सारे काम कर देता ।

श्वेता दी - फ्री में ।

मैं - बिल्कुल फ्री में ।

श्वेता दी - कुछ भी नहीं लेते ।

मैं - लेता न ..बस तीनों टाइम.... ब्रेकफास्ट , लंच और डिनर करा देती ‌।

श्वेता दी - वाह ! ये भी कोई कहने की बात है । मैं पक्का ब्रेकफास्ट , लंच , डिनर करा दुंगी ।

मैं - लेकिन ये तो पुछ लो कि मैं ब्रेकफास्ट लंच और डिनर में क्या लुंगा ।

श्वेता दी - क्या लोगे ।

मैं - ब्रेकफास्ट में तुम्हारे होठों और जीभ का मधु रस , लंच में तुम्हारे थानों का दुध और डिनर में तुम्हारे जांघों के बीच जो गहरी सी छेद है न , वहां से निकलने वाली मलाई ।

श्वेता दी ने कामुक नज़रों से मुझे देखा फिर जीजू की तरफ देखा जो टीबी देखने में व्यस्त थे , फिर अपने मोबाइल पर मैसेज लिखने लगी ।

श्वेता दी - सिर्फ इतने में पेट भर जाएगा ।

मैं - हां... भर तो जाना चाहिए । खास तौर पर तुम्हारी मलाई से तो पक्का ही भर जाएगा । बोलो पिलाओगी न अपने चिकनी छेद से निकलने वाली गाढ़ी मलाई को ।

श्वेता दी ने फिर एक नज़र जीजू को देखा फिर मैसेज टाइप की - जरूर पिलाऊंगी अपने डार्लिंग भाई को.... अपनी गाढ़ी मलाई ।

मैंने उनकी तरफ देखा वो कामुक नज़रों से मुझे देख रही थी फिर उन्होंने अपने जीभ को होंठों पर फिराने लगी ।

मैं - हाय दीदी... मैं तो मरा जा रहा हूं तेरी सुरंग की लसदार गाढ़ी मलाई को पीने के लिए ...चल ना बाथरूम में..अपनी पेटीकोट को पकड़ कर अपने जांघों से ऊपर कर खड़ी हो जाना और मैं नीचे बैठ कर तेरी जांघों के बीच में जो सुरंग है उस पर अपना मुंह रख कर जीभ से सारी मलाई चुस चुस कर पी लुंगा ।

श्वेता दी - मेरी भी बहुत इच्छा कर रही है तुझे पिलाने में । मेरी तो अभी से पैन्टी भीग गई है... अगर तुने अभी चुस लिया न तो मेरी इतनी मलाई निकलेगी कि तेरा पेट क्या गला तक भर जाएगा ।

तभी जीजू ने बोला -" क्या बोल रही है उर्वशी ।"

श्वेता दी ने संभलते हुए कहा - " वही सब लड़कियों वाली बातें.. गर्ल्स टाक । उसे मेरी बनाई हुई मलाई बहुत पसंद है , वही खिलाने को बोल रही है ।"

" ओह ! ठीक है उसे दिल्ली , घर बुलाना वहीं उसे मलाई खिला देना ।" - जीजू ने कहा ।

" हां वही तो उसे बता रही हूं दिल्ली में जितना इच्छा हो खा लेना ।" श्वेता दी ने मुझे घुरते हुए कहा ।

फिर जीजू ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा -" तुम कहां बीजी हो गये हो , कोई गर्लफ्रेंड है क्या ?"

" अरे नहीं जीजू , मेरी ऐसी किस्मत कहां । मेरे एक स्टुडेंट का फोन है । " मैंने मुस्करा कर जबाव दिया ।

वो फिर टीवी देखने में व्यस्त हो गए । मैंने फिर श्वेता दी को मैसेज किया ।

मैं - श्वेता दी , चलो न बाथरूम में ।

तुरंत श्वेता दी का मैसेज आया - किसलिए ।

मैं - तुम्हारी मलाई चाटने ।

श्वेता दी - हाय तुम से ज्यादा इच्छा मेरी हो रही है लेकिन अभी रिस्क ज्यादा है.... दिल्ली में तुम्हें भरपेट मलाई चटाऊगी । जब कहोगे तब । बोलो चाटोगे न अपनी बहन की मलाई ।

मैं - हां दीदी चाटूंगा... वहां तो तुम्हें पुरी नंगी करके तुम्हारे दोनों पैरों को फैला कर तुम्हारे सीने के उपर रख कर अपनी जीभ अंदर बाहर कर कर के चाटूंगा । ( मैंने श्वेता दी को जीजू के नजरों से छुपा कर अपने लन्ड को पैंट के ऊपर से मसलते हुए दिखाया )

श्वेता दी भी पुरी गरम हो गई थी । उन्होंने मैसेज भेज कर मुझे देखा ।

श्वेता दी - हां , मेरे बेडरूम में मेरी बिस्तर पर जहां तुम्हारे जीजू और मैं सोते हैं उसी पर मुझे नंगी कर के मेरी जांघों के बीच के छेद में अपनी जीभ डाल डाल कर चाटना ।

मैं - हां दीदी...तेरा भाई तेरी छेद के अंदर मुंह और जीभ घुसा घुसा कर चाटेगा । तेरी आगे वाली और पिछे वाली दोनों छेदों में जीभ पेलूंगा ।

श्वेता दी - खाली जीभ ही पेलेगा और कुछ नहीं पेलेगा ।

मैं - तु बता न और क्या पेलूंगा ।

श्वेता दी - अपना मोटा लौड़ा नहीं पेलेगा ।

मैं - हाय मेरी दीदी...मेरा मोटा लौड़ा से पेलवाएगी.. मेरे मोटे लन्ड से क्या पेलवाएगी ।

श्वेता दी - अपनी चुत पेलवाऊगी... अपने छोटे भाई से अपनी चुत चोदवाऊगी... अपनी गांड़ चोदवाऊगी ।

जीजू वहीं बैठा टीवी देख रहा था और हम दोनों भाई बहन उसी के साथ बैठे एक दूसरे को गन्दे गन्दे मैसेज कर रहे थे । मेरा लन्ड तो बहुत पहले से ही उफ़ान पर था और अब वो किसी भी समय बरसात करने के लिए तैयार था । और जो मुझे समझ आ रहा था कि श्वेता दी भी या तो चरम पर पहुंच चुकी थी या पहुंचने वाली थी । मैं श्वेता दी को मैसेज भेजता कि जीजू ने उन्हें लंच सर्व करने को बोल दिया । बहुत मुश्किल से हम दोनों अपने को कन्ट्रोल किए ।

खाना पीना होते-होते दो बज गए । फिर हम तीनों उसी बेड पर लेट गए । जीजू बीच में था इसलिए और कुछ होने की संभावना नहीं ही थी । हमें आराम करते हुए एक घंटा बीता था कि इंस्पेक्टर कोठारी का फोन मेरे मोबाइल पर आया ।
 
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