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Incest Sagar (Completed)

firefox420

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lekhak ji .. itne haseen padosiyo se ab milwa rahe ho .. jab ye log yaha se jaa rahe hai .. magar in 36 saal ki bhabi ka dekhte hai ki ye aage chal kar kuch rang dikhati hai ya fir baato - baato mein he ghumayengi ...

well 4 naye kirdaar kahani mein judd chuke hai .. waise Amar Sheveta ki building par kyon aata tha .. jiska jikrr Sagar ne kiya .. jabki Amar ka na to koi rishtedaar hai aur na he Sheveta se itna close rishta .. haan agar wo Sheveta ko apni behen maanta ho .. alag baat hai .. magar fir bhi specially milne aana baat hazam nahi hui .. Sagar ke saath aana jaana ho to maana ja sakta hai .. khair iske piche dekhte hai lekhak ji kya tark pesh karte hai ...

i am considering all the above facts .. keeping in mind the real life probablities .. not just another fuck-fiesta story conditions ...

par ek baat gaur karne waali hai ki .. iss floor par rehne wale sabhi married couples single hai .. na koi bacche .. na koi family members .. :huh:

baharhaal ab kahani mein thodi tezi aayegi .. ye log dili shift hone jaa rahe hai .. aur Amar ke ghar mein Sagar ka inki vajah se aana-jaana bhi badh jaayega ...

par kambakht ye movers to aaye jabhi to yaha se inka saaman uthe ...

itne pados wali adhed aunty ji ke yaha pet pooja bhi kar li jaaye .. dekhte hai unki kya kahani hai ...
 

mahadev31

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lekhak ji .. itne haseen padosiyo se ab milwa rahe ho .. jab ye log yaha se jaa rahe hai .. magar in 36 saal ki bhabi ka dekhte hai ki ye aage chal kar kuch rang dikhati hai ya fir baato - baato mein he ghumayengi ...

well 4 naye kirdaar kahani mein judd chuke hai .. waise Amar Sheveta ki building par kyon aata tha .. jiska jikrr Sagar ne kiya .. jabki Amar ka na to koi rishtedaar hai aur na he Sheveta se itna close rishta .. haan agar wo Sheveta ko apni behen maanta ho .. alag baat hai .. magar fir bhi specially milne aana baat hazam nahi hui .. Sagar ke saath aana jaana ho to maana ja sakta hai .. khair iske piche dekhte hai lekhak ji kya tark pesh karte hai ...

i am considering all the above facts .. keeping in mind the real life probablities .. not just another fuck-fiesta story conditions ...

par ek baat gaur karne waali hai ki .. iss floor par rehne wale sabhi married couples single hai .. na koi bacche .. na koi family members .. :huh:

baharhaal ab kahani mein thodi tezi aayegi .. ye log dili shift hone jaa rahe hai .. aur Amar ke ghar mein Sagar ka inki vajah se aana-jaana bhi badh jaayega ...

par kambakht ye movers to aaye jabhi to yaha se inka saaman uthe ...

itne pados wali adhed aunty ji ke yaha pet pooja bhi kar li jaaye .. dekhte hai unki kya kahani hai ...
aapne bhi amar ke chakkar ke baare me socha ,,,dost ke saath aana sahi hai par akele nahi ,,behen hi kyu na maane shweta ko phir bhi ? baat jamti nahi hai ...
 
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Update 22 continue.

जीजू ने श्वेता दी को आवाज लगाई तो वो कमरे से बाहर निकल गई । मैंने अनामिका जी को देखा , वो मुझे ही देख रही थी ।

" श्वेता बोल रही थी कि तुम लड़कियों को मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दे रहे हो। तो थोड़ा बहुत हमें भी सीखा दो "- वो बोली ।

" आप क्या करोगी मार्शल आर्ट्स सीख कर ?"

" क्यों भाई... बाकी लड़कियों की तरह हमें भी सेल्फ डिफेंस के बारे में जानना चाहिेए । है न ।"

" अरे भाभी आप तो खुद दो बड़े बड़े बम लिए घुमती रहती है...किस बेचारे की शामत आई है जो आप को छेड़ेगा ।"

" बम ? कौन सा बम ?"- वो कन्फ्यूज हो कर बोली ‌।

" जरा ध्यान से देखें समझ में आ जायेगा " - मैंने उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयों को घुरते हुए कहा ।

उन्होंने मेरी नज़रों को अपने छाती के उपर घुरता पाया तो वो समझ गई । उनसे पहले भी हल्की फुल्की मजाक होती रहती थी लेकिन एक लिमिट में ही रहती थी ।

" देवर जी इन बमों को देखकर लफंगे भागते नहीं बल्कि और पीछे पड़ जाते हैं " - वो मुस्करा कर बोली ।

" पीछे पड़ कर भी क्या झां...साॅरी बाल उखाड़ लेंगे , जहां बमों का साक्षात दर्शन हुआ कि नहीं कि वे पालतू कुत्ते की तरह आप के आगे पीछे दूम हिलाते हुए नजर आने लगेंगे ।"

" कहीं तुम्हारी हालत भी तो पालतू कुत्ते की तरह नहीं हो गई है " - वो शरारती अंदाज में बोली ।

" अभी मैंने बमों का दर्शन ही कहां किया है... हां अगर आप...."

तभी श्वेता दी आ गई और बोली कि लेबर आ गए हैं । सामान वगैरह नीचे रखवाना है । गाड़ी अभी आई नहीं थी ।

जीजू , मनीष जी के साथ नीचे चले गए जहां सामान वगैरह ला कर लेबर को रखना था । रमाकांत जी अपने फ्लैट के अन्दर चले गए । श्वेता दी , अनामिका जी और मैं लेबर के साथ मिलकर घर के अन्दर काम संभालने लगे । मैं इसी बीच पुरे फ्लैट का जिसमें दो रूम , एक बड़ा डाइनिंग हॉल , एक छोटा स्टोर रूम , बालकनी , किचन , बाथरूम सभी का बड़ी बारीकी से मुआयना किया । खासकर बाथरूम का । लेकिन मुझे कुछ भी संदिग्ध जैसी न लगी ।
पौने घंटे के अंदर सारा सामान नीचे चला गया । तब तक गाड़ी भी आ गई । मुझे बहुत जोर से प्यास लगी थी । तो मैंने श्वेता दी को कहा । श्वेता दी बोली प्यास तो मुझे भी लगी है । अनुपमा जी हमें अपने फ्लैट में ले गयी । उन्होंने फ्रीज से ठंडा पानी का बोतल निकाला और श्वेता दी को दे दी । श्वेता दी ने पानी पी फिर मुझे अपने फ्लैट के मेन दरवाजे का चाबी दिया और कहा कि पानी पीने के बाद फ्लैट को लाॅक करके नीचे आ जाना ।

उनके जाने के बाद अनुपमा जी के फ्लैट में सिर्फ हम दोनों ही थे । मैंने उनसे पानी का बोतल लिया और उनके फ्लैट में चहलकदमी करते हुए बोतल खोल कर पानी पीने लगा । उनका फ्लैट भी सेम पैटर्न का था । लेकिन एक अंतर था वो कि उनके मास्टर रूम में उनका पलंग खिड़की के करीब था । और खिड़की से इमारत का इंट्रान्स और पार्किंग स्थल नजर आता था ।

मैंने खिड़की से नीचे देखा । जीजू और मनीष जी खड़े थे । इमारत का दरबान भी वहीं खड़ा खैनी मसल रहा था । लेबर जमीन पर रखे हुए सामानों को गाड़ी जो कि 407 भेन थी में सम्भाल कर रख रहे थे ।

पानी पीने के बाद मैंने खाली बोतल अनुपमा जी को पकड़ाई तो उनकी उंगली से मेरी उंगली टच हो गई ।

" माई गॉड आपकी उंगली में तो 440 भोल्ट का करेंट है... ऐसे किसी को टच करा देगी तो वो झुलस ही जायेगा ।"

" कोई नहीं झुलसने वाला है । झुलसाने वाली उमर निकल गई है ।"

" आप को गलतफहमी है भाभी । झुलसाने की बात छोड़िए , आप तो भस्म कर सकती हैं ।"

वो मुस्कुराई फिर बोली ।

" बातें लड़कियों को खुश करने वाली बोलते हो । लड़कियां तो कुर्बान हो जाती होगी ।"

" सिर्फ खुश ही होती है । कुर्बान कोई नहीं होती है । अब आप अपने आप को देखिए... कुर्बान हुई ? "

" तुम न सच में एक नम्बर के फ्लर्टबाज हो । तुमने तो लगता है कि लड़कियों को लाईन मारने में पी. एच.डी. हासिल कर रखी है ।"

" क्या फायदा ऐसे पी.एच.डी. का भाभी जब बेरोजगारी ही छाईं हुई हो " - मैंने आह भरते हुए कहा ।

वो होंठ दबा कर हंसी । हंसी मतलब छोकरी फंसी ।

" मेरे हसबैंड को जानते हो न...बीसों धाराएं लगा कर हवालात में पहुंचा देंगे " - वो आंख नचाते हुए बोली ।

" एक बात कहूं ?"

" क्या ?"

" छोड़िए । रहने दिजिए ।"

" अरे नहीं नहीं । बोलो ।"

" आप बुरा मान जाओगी ।"

" नहीं मानूंगी ।"

" नहीं । आप शर्तिया बुरा मान जाओगी ।"

" क्या लड़कियों जैसी बहाने बनाते हो । बोल भी दो "- वो चिढ़ते हुए बोली ।

" ओके। आप अपनी कान इधर लाओ ?"

" क्यों ?"

" अरे लाओ ना , कान में बोलूंगा ।"

वो इधर उधर देखी । कमरा क्या पुरे फ्लेट में कोई भी नहीं था । वो मेरी ओर बढ़ी ।

मैं भी उनके बिल्कुल करीब गया । वो मेरी आंखों में देख रही थी । मैंने भी उनकी आंखों में देखा । फिर नजरें नीचे की और उनके बड़े-बड़े खरबुजो पर टीका दी। दसेक सेकेंड के बाद फिर उसकी आंखों में झांका । वो मेरी हरकतों को वो बिना हिले डुले देख रही थी । मैं स्पष्ट देख रहा था कि उनके सांसों की गति बढ़ गई है । मैं उनके पीछे गया और उनके पिछवाड़े से सटते हुए अपने लबों को उनके कान के पास ले गया ।

" बोल दूं " - मैंने उनके कान में धीरे से मुंह से फूंक मारते हुए कहा ।

" हम्म " - वो मंत्र मुग्ध सा बोली ।

" उससे पहले उसकी बीवी न चोद दुंगा ?" - मैं उनके कान में बहुत धीमें से फुसफुसाया ।

वो सिहर सी गई । उसके बदन ने एक जोर का झटका खाया । उसने ऐसा आशा नहीं किया होगा । वो चुपचाप स्टैच्यू की मुद्रा में खड़ी रही ।

कुछ देर तक मैं भी वैसे ही उनके पीछे उसके कान के पास अपने लबों को रखे रखा कि शायद वो कुछ बोले ।

दो मिनट तक वो कुछ नहीं बोली ।

तभी वो फुसफुसाई -" किसकी बीवी को ?"

" मनीष जैन की बीवी को " - मैंने भी फुसफुसाते हुए जबाव दिया ।

हम जहां खड़े थे वो जगह खिड़की के करीब थी । वो खिड़की की ओर चेहरा किए खड़ी थी और मैं उनके पीछे उनकी बदन से चिपक कर खड़ा था । हम दोनों खिड़की से नीचे जमीन पर पोर्च में गाड़ी के पास जीजू और उसके पति को बातचीत करते हुए देख रहे थे ।

वो अपने पति को देखते हुए फुसफुसाई -" ऐसा क्या है मनीष की बीवी में ?"

" ये पुछो न कि क्या नहीं है " - मैंने उनकी कान के लौ को होंठों से पकड़ते हुए कहा ।

" क्या है ?"

" कह दूं ?"

" हम्म !"

मैं उनसे पीछे से पुरी तरह चिपक गया और अपने दोनों हाथों को आगे ले जाकर उनके साड़ी के अंदर ब्लाउज के ऊपर से गोलाईयों के उपर रख दिया । ओर उन्हें हथेलियों से दबोचते हुए कहा -" मनीष के बीवी की बड़ी बड़ी दो दो किलो की चूंचियां हैं । पुरे ठोस और कड़े कड़े जो मुझे हर रात सपनों में आते हैं ।"

वो उत्तेजित हो कर पीछे घसक कर मुझसे पुरी तरह चिपक गई । अपने चुचियों को मसलवाते हुए धीरे से बुदबुदाई -" और ?"

मैंने उनकी ब्लाउज और ब्रा को खोल कर उसकी चूचियों को मसलने लगा । फिर मैंने अपने लिंग को उसके चूतड पर दबाते हुए कहा -" उसके बीवी की बड़ी बड़ी भारी भरकम गांड़ ।"

" ओह कितना गन्दा बोलते हो ।"

" आप को मेरी गन्दी बातें अच्छी नहीं लग रही है "- मैंने उसके गालों पर अपनी जीभ रगड़ते हुए कहा ।

" हम्म ।"

" क्या हम्म ?"

" अच्छी लग रही है ।"

" तो क्या कहती है आप ?"

" किस बारे में ?

" मनीष जी की बीवी को चोद दूं ?"

" हां " - वो झट से पलट कर मेरे सीने में समाते हुए मेरे कान में फुसफुसाई -" चोद दो मनीष की बीवी को ।"

मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों से पकड़ा और अपने चेहरे के सामने किया । उसकी आंखों में लाल लाल डोरे तैर रहे थे । चेहरा पुरी तरह तमतमाया हुआ था । होंठ फड़क रहे थे ।

उसने मुझे अपनी नशीली आंखों से देखा फिर अपने होंठों पर अपनी जीभ फिराई । और बड़ी तीव्र गति से हमारे होंठ मिल गए । फिर...

हम दोनों एक दूसरे के होंठों को बुरी तरह से चुस रहे थे । चुम रहे थे । चाट रहे थे । हमारी जीभें एक दूसरे के मुंह में बिना किसी रोक-टोक के भ्रमण कर रही थी । हम दोनों के थुक मिल कर एक हो गए थे । मैं उसकी भारी भरकम चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से मसल रहा था ।

जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उसकी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके कमर के ऊपर कर दिया और उन्हें साड़ी को पकड़ने का इशारा किया । उसने अपनी साड़ी को अपने हाथों से पकड़ लिया । मैंने खड़े खड़े ही उसकी नंगी चूतड़ को उसके पैन्टी के अन्दर हाथ डाल कर दबोचने और मसलने लगा जबकि हमारे होंठ पहले की तरह एक दूसरे के मुखरस को चूसने चुसाने में व्यस्त थे ।
उसने अपने एक हाथ से मेरी पैंट खोलना शुरू किया जिसमें वो कामयाब नही हो पा रही थी । मैंने अपना हाथ उनकी चूतड़ों से हटा कर सामने लाया और अपने पैंट को उपर से खोल दिया । पैंट के ढीला होते ही उसने अपनी दायीं हाथ को मेरे जांघिया के अन्दर कर दिया और मेरे बगावत पर उतारू सिपाही मेरे लन्ड को अपने हथेलियों से पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगी । मैंने भी उसकी आंखों में देखते हुए अपना एक हाथ सामने लाया और उसकी पैंटी के अन्दर प्रवेश करा दिया । हल्के हल्के झांटों से भरी उसकी रस छोड़ती फुली हुई चुत को अपने हथेलियों में भर लिया और चुत के दरारों में ऊंगली डाल कर रगड़ने लगा । उनकी चुत रस से सराबोर हो गई थी । मेरी उंगली उनके चुत के गाढ़े पानी से लस लस कर रही थी । वो मेरे उपर पसर सी गई थी ।

हमारी आंखें एक दूसरे पर टिकी हुई थी । हमारे होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे । वो मेरे लन्ड को अपने हथेलियों में भर कर मुठ मार रही थी । मैं उसके चुत में ऊंगली डाल कर अन्दर बाहर कर रहा था । हम दोनों काफी उत्तेजित हो गए थे ।

" कैसा है ?" - मैंने अपने होंठ को अलग करते हुए कहा ।

" क्या ?" - वो कामुक नज़रों से मुझे देखते हुए बोली ।

" मनीष की बीवी के चुत को चोदने वाला लन्ड ।"

" मस्त । काफी मोटा और लम्बा " - वो मेरे लन्ड को मुठियाते हुए फुसफुसाई ।

" तो क्या ख्याल है मनीष की बीवी अपने चुत में मेरा लन्ड लेगी ?"

" तुम खुद ही पुछ लो न ?"

" किससे ?"

" मनीष के बीवी की चुत से " - बोलकर वो मुझे अपने पैरों की तरफ ढकेलने लगी ।

मैं नीचे फर्श पर बैठ गया और उसे अपने साड़ी और पेटीकोट कमर से ऊपर रखने का इशारा किया । उसने ऐसा ही किया । मैंने उसकी पेंटी को नीचे कर दिया तो उसने अपने पांव इधर उधर करके पैन्टी को पुरी तरह से बाहर निकाल दिया । उसके लम्बे लम्बे गोरे चिकने पांव और मोटी मोटी जांघें देखकर मैं दिवाना सा हो गया । दोनों जांघों के मध्य कचोड़ी की तरह चुत जो उसकी काम रस से भीगी हुई थी , मुझे सम्मोहित सा कर दिया था । मैंने अपनी होंठ को उसके चुत से सटा दिया और फिर गहरी खाइयों से मधु निकालने की कोशिश में लग गया । वो खिड़की को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी एक पांव सामने पलंग पर रख दी जिससे उसकी चुत की दरारें फैल गई । मैंने अपनी जीभ उसके चुत में घुसेड़ दी और....

दो मिनट में ही मैंने मधुपान कर लिया । मैं खड़ा हुआ तो उसने मुझे अपनी बांहों में लेकर कस लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी । उसकी नजर खिड़की से बाहर नीचे की ओर गई ।

" हटो " - वो मुझे धकेल कर अपनी पैंटी पहनते हुए बोली -" नीचे गाड़ी में सामान रखा गया है । मनीष उपर आ रहा है ।"

मैंने भी जल्दी से अपनी पैंट को व्यवस्थित करते हुए कहा -" लेकिन असल काम तो हुआ नहीं ।"

" तुम मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दो । मैं बाद में फोन करूंगी लेकिन भुल के भी तुम मुझे फोन मत करना " - वो अपनी हुलिया दुरूस्त करते हुए बोली ।

हम दोनों ने अपना अपना मोबाइल नंबर एक्सचेंज किया । और मैं उसके होंठों पर एक किस कर के श्वेता दी के फ्लेट में चला गया । फ्लेट तो पहले ही पुरा खाली हो गया था । एक बार फिर से पुरे फ्लेट का निरीक्षण किया और फिर बाहर निकल गया । मैंने मेन दरवाजे को लाॅक करके चाबी अपने पैंट में डाल दिया और उस इमारत से बाहर निकल आया ।

407 भेन पुरी तरह से सामानों से लद चुका था । जीजू के कार में बहुत चीजें पीछे वाली सीट पर भरी हुई थी । जीजू और श्वेता दी ने वहां जो लोग अभी भी थे उनको हाथ जोड़कर नमस्ते किया और फिर अपने कार में बैठ गये । मैं भी अपने कार में बैठ गया ।

दोपहर को तीन बजे हम आन्टी ( अमर की मम्मी ) के घर पहुंचे । वहां जाने के बाद मैंने मजदूरों को बुलाया और फिर सारे सामान को उनके घर में पहुंचाने का इंतजाम करवाने लगा । सब कुछ करते करते शाम के छः बज गए । आन्टी भी हर वक्त हम सभी के साथ ही रही जो मुझे बहुत अच्छा लगा ।

वहां से निपट कर मैं अपने घर चला गया । शरीर थका हुआ महसूस हो रहा था इसलिए जल्दी ही खाना खा कर मैं अपने कमरे में चला गया । कपड़े चेंज किए और बिस्तर पर लेट गया ।

आज बहुत सारी घटनाएं हुई थी । इंस्पेक्टर कोठारी से एक सार्थक मुलाकात... श्वेता दी और जीजू का यहां शिफ्ट होना... अनुपमा भाभी के साथ जबर्दस्त एनकाऊंटर..... और...और भी कुछ था ।
 
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nice update ....yaha se sabko yaad rakh raha hu ,,yaha ke do padosi hai .....dekhte hai inme se to koi nahi? ..baaki ke aadhe update ka intejar rahega ...
Thanks friend for continuous reading and supporting ?
 
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amita

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Update 22 continue.

जीजू ने श्वेता दी को आवाज लगाई तो वो कमरे से बाहर निकल गई । मैंने अनामिका जी को देखा , वो मुझे ही देख रही थी ।

" श्वेता बोल रही थी कि तुम लड़कियों को मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दे रहे हो। तो थोड़ा बहुत हमें भी सीखा दो "- वो बोली ।

" आप क्या करोगी मार्शल आर्ट्स सीख कर ?"

" क्यों भाई... बाकी लड़कियों की तरह हमें भी सेल्फ डिफेंस के बारे में जानना चाहिेए । है न ।"

" अरे भाभी आप तो खुद दो बड़े बड़े बम लिए घुमती रहती है...किस बेचारे की शामत आई है जो आप को छेड़ेगा ।"

" बम ? कौन सा बम ?"- वो कन्फ्यूज हो कर बोली ‌।

" जरा ध्यान से देखें समझ में आ जायेगा " - मैंने उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयों को घुरते हुए कहा ।

उन्होंने मेरी नज़रों को अपने छाती के उपर घुरता पाया तो वो समझ गई । उनसे पहले भी हल्की फुल्की मजाक होती रहती थी लेकिन एक लिमिट में ही रहती थी ।

" देवर जी इन बमों को देखकर लफंगे भागते नहीं बल्कि और पीछे पड़ जाते हैं " - वो मुस्करा कर बोली ।

" पीछे पड़ कर भी क्या झां...साॅरी बाल उखाड़ लेंगे , जहां बमों का साक्षात दर्शन हुआ कि नहीं कि वे पालतू कुत्ते की तरह आप के आगे पीछे दूम हिलाते हुए नजर आने लगेंगे ।"

" कहीं तुम्हारी हालत भी तो पालतू कुत्ते की तरह नहीं हो गई है " - वो शरारती अंदाज में बोली ।

" अभी मैंने बमों का दर्शन ही कहां किया है... हां अगर आप...."

तभी श्वेता दी आ गई और बोली कि लेबर आ गए हैं । सामान वगैरह नीचे रखवाना है । गाड़ी अभी आई नहीं थी ।

जीजू , मनीष जी के साथ नीचे चले गए जहां सामान वगैरह ला कर लेबर को रखना था । रमाकांत जी अपने फ्लैट के अन्दर चले गए । श्वेता दी , अनामिका जी और मैं लेबर के साथ मिलकर घर के अन्दर काम संभालने लगे । मैं इसी बीच पुरे फ्लैट का जिसमें दो रूम , एक बड़ा डाइनिंग हॉल , एक छोटा स्टोर रूम , बालकनी , किचन , बाथरूम सभी का बड़ी बारीकी से मुआयना किया । खासकर बाथरूम का । लेकिन मुझे कुछ भी संदिग्ध जैसी न लगी ।
पौने घंटे के अंदर सारा सामान नीचे चला गया । तब तक गाड़ी भी आ गई । मुझे बहुत जोर से प्यास लगी थी । तो मैंने श्वेता दी को कहा । श्वेता दी बोली प्यास तो मुझे भी लगी है । अनुपमा जी हमें अपने फ्लैट में ले गयी । उन्होंने फ्रीज से ठंडा पानी का बोतल निकाला और श्वेता दी को दे दी । श्वेता दी ने पानी पी फिर मुझे अपने फ्लैट के मेन दरवाजे का चाबी दिया और कहा कि पानी पीने के बाद फ्लैट को लाॅक करके नीचे आ जाना ।

उनके जाने के बाद अनुपमा जी के फ्लैट में सिर्फ हम दोनों ही थे । मैंने उनसे पानी का बोतल लिया और उनके फ्लैट में चहलकदमी करते हुए बोतल खोल कर पानी पीने लगा । उनका फ्लैट भी सेम पैटर्न का था । लेकिन एक अंतर था वो कि उनके मास्टर रूम में उनका पलंग खिड़की के करीब था । और खिड़की से इमारत का इंट्रान्स और पार्किंग स्थल नजर आता था ।

मैंने खिड़की से नीचे देखा । जीजू और मनीष जी खड़े थे । इमारत का दरबान भी वहीं खड़ा खैनी मसल रहा था । लेबर जमीन पर रखे हुए सामानों को गाड़ी जो कि 407 भेन थी में सम्भाल कर रख रहे थे ।

पानी पीने के बाद मैंने खाली बोतल अनुपमा जी को पकड़ाई तो उनकी उंगली से मेरी उंगली टच हो गई ।

" माई गॉड आपकी उंगली में तो 440 भोल्ट का करेंट है... ऐसे किसी को टच करा देगी तो वो झुलस ही जायेगा ।"

" कोई नहीं झुलसने वाला है । झुलसाने वाली उमर निकल गई है ।"

" आप को गलतफहमी है भाभी । झुलसाने की बात छोड़िए , आप तो भस्म कर सकती हैं ।"

वो मुस्कुराई फिर बोली ।

" बातें लड़कियों को खुश करने वाली बोलते हो । लड़कियां तो कुर्बान हो जाती होगी ।"

" सिर्फ खुश ही होती है । कुर्बान कोई नहीं होती है । अब आप अपने आप को देखिए... कुर्बान हुई ? "

" तुम न सच में एक नम्बर के फ्लर्टबाज हो । तुमने तो लगता है कि लड़कियों को लाईन मारने में पी. एच.डी. हासिल कर रखी है ।"

" क्या फायदा ऐसे पी.एच.डी. का भाभी जब बेरोजगारी ही छाईं हुई हो " - मैंने आह भरते हुए कहा ।

वो होंठ दबा कर हंसी । हंसी मतलब छोकरी फंसी ।

" मेरे हसबैंड को जानते हो न...बीसों धाराएं लगा कर हवालात में पहुंचा देंगे " - वो आंख नचाते हुए बोली ।

" एक बात कहूं ?"

" क्या ?"

" छोड़िए । रहने दिजिए ।"

" अरे नहीं नहीं । बोलो ।"

" आप बुरा मान जाओगी ।"

" नहीं मानूंगी ।"

" नहीं । आप शर्तिया बुरा मान जाओगी ।"

" क्या लड़कियों जैसी बहाने बनाते हो । बोल भी दो "- वो चिढ़ते हुए बोली ।

" ओके। आप अपनी कान इधर लाओ ?"

" क्यों ?"

" अरे लाओ ना , कान में बोलूंगा ।"

वो इधर उधर देखी । कमरा क्या पुरे फ्लेट में कोई भी नहीं था । वो मेरी ओर बढ़ी ।

मैं भी उनके बिल्कुल करीब गया । वो मेरी आंखों में देख रही थी । मैंने भी उनकी आंखों में देखा । फिर नजरें नीचे की और उनके बड़े-बड़े खरबुजो पर टीका दी। दसेक सेकेंड के बाद फिर उसकी आंखों में झांका । वो मेरी हरकतों को वो बिना हिले डुले देख रही थी । मैं स्पष्ट देख रहा था कि उनके सांसों की गति बढ़ गई है । मैं उनके पीछे गया और उनके पिछवाड़े से सटते हुए अपने लबों को उनके कान के पास ले गया ।

" बोल दूं " - मैंने उनके कान में धीरे से मुंह से फूंक मारते हुए कहा ।

" हम्म " - वो मंत्र मुग्ध सा बोली ।

" उससे पहले उसकी बीवी न चोद दुंगा ?" - मैं उनके कान में बहुत धीमें से फुसफुसाया ।

वो सिहर सी गई । उसके बदन ने एक जोर का झटका खाया । उसने ऐसा आशा नहीं किया होगा । वो चुपचाप स्टैच्यू की मुद्रा में खड़ी रही ।

कुछ देर तक मैं भी वैसे ही उनके पीछे उसके कान के पास अपने लबों को रखे रखा कि शायद वो कुछ बोले ।

दो मिनट तक वो कुछ नहीं बोली ।

तभी वो फुसफुसाई -" किसकी बीवी को ?"

" मनीष जैन की बीवी को " - मैंने भी फुसफुसाते हुए जबाव दिया ।

हम जहां खड़े थे वो जगह खिड़की के करीब थी । वो खिड़की की ओर चेहरा किए खड़ी थी और मैं उनके पीछे उनकी बदन से चिपक कर खड़ा था । हम दोनों खिड़की से नीचे जमीन पर पोर्च में गाड़ी के पास जीजू और उसके पति को बातचीत करते हुए देख रहे थे ।

वो अपने पति को देखते हुए फुसफुसाई -" ऐसा क्या है मनीष की बीवी में ?"

" ये पुछो न कि क्या नहीं है " - मैंने उनकी कान के लौ को होंठों से पकड़ते हुए कहा ।

" क्या है ?"

" कह दूं ?"

" हम्म !"

मैं उनसे पीछे से पुरी तरह चिपक गया और अपने दोनों हाथों को आगे ले जाकर उनके साड़ी के अंदर ब्लाउज के ऊपर से गोलाईयों के उपर रख दिया । ओर उन्हें हथेलियों से दबोचते हुए कहा -" मनीष के बीवी की बड़ी बड़ी दो दो किलो की चूंचियां हैं । पुरे ठोस और कड़े कड़े जो मुझे हर रात सपनों में आते हैं ।"

वो उत्तेजित हो कर पीछे घसक कर मुझसे पुरी तरह चिपक गई । अपने चुचियों को मसलवाते हुए धीरे से बुदबुदाई -" और ?"

मैंने उनकी ब्लाउज और ब्रा को खोल कर उसकी चूचियों को मसलने लगा । फिर मैंने अपने लिंग को उसके चूतड पर दबाते हुए कहा -" उसके बीवी की बड़ी बड़ी भारी भरकम गांड़ ।"

" ओह कितना गन्दा बोलते हो ।"

" आप को मेरी गन्दी बातें अच्छी नहीं लग रही है "- मैंने उसके गालों पर अपनी जीभ रगड़ते हुए कहा ।

" हम्म ।"

" क्या हम्म ?"

" अच्छी लग रही है ।"

" तो क्या कहती है आप ?"

" किस बारे में ?

" मनीष जी की बीवी को चोद दूं ?"

" हां " - वो झट से पलट कर मेरे सीने में समाते हुए मेरे कान में फुसफुसाई -" चोद दो मनीष की बीवी को ।"

मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों से पकड़ा और अपने चेहरे के सामने किया । उसकी आंखों में लाल लाल डोरे तैर रहे थे । चेहरा पुरी तरह तमतमाया हुआ था । होंठ फड़क रहे थे ।

उसने मुझे अपनी नशीली आंखों से देखा फिर अपने होंठों पर अपनी जीभ फिराई । और बड़ी तीव्र गति से हमारे होंठ मिल गए । फिर...

हम दोनों एक दूसरे के होंठों को बुरी तरह से चुस रहे थे । चुम रहे थे । चाट रहे थे । हमारी जीभें एक दूसरे के मुंह में बिना किसी रोक-टोक के भ्रमण कर रही थी । हम दोनों के थुक मिल कर एक हो गए थे । मैं उसकी भारी भरकम चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से मसल रहा था ।

जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने उसकी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके कमर के ऊपर कर दिया और उन्हें साड़ी को पकड़ने का इशारा किया । उसने अपनी साड़ी को अपने हाथों से पकड़ लिया । मैंने खड़े खड़े ही उसकी नंगी चूतड़ को उसके पैन्टी के अन्दर हाथ डाल कर दबोचने और मसलने लगा जबकि हमारे होंठ पहले की तरह एक दूसरे के मुखरस को चूसने चुसाने में व्यस्त थे ।
उसने अपने एक हाथ से मेरी पैंट खोलना शुरू किया जिसमें वो कामयाब नही हो पा रही थी । मैंने अपना हाथ उनकी चूतड़ों से हटा कर सामने लाया और अपने पैंट को उपर से खोल दिया । पैंट के ढीला होते ही उसने अपनी दायीं हाथ को मेरे जांघिया के अन्दर कर दिया और मेरे बगावत पर उतारू सिपाही मेरे लन्ड को अपने हथेलियों से पकड़ कर जोर जोर से मसलने लगी । मैंने भी उसकी आंखों में देखते हुए अपना एक हाथ सामने लाया और उसकी पैंटी के अन्दर प्रवेश करा दिया । हल्के हल्के झांटों से भरी उसकी रस छोड़ती फुली हुई चुत को अपने हथेलियों में भर लिया और चुत के दरारों में ऊंगली डाल कर रगड़ने लगा । उनकी चुत रस से सराबोर हो गई थी । मेरी उंगली उनके चुत के गाढ़े पानी से लस लस कर रही थी । वो मेरे उपर पसर सी गई थी ।

हमारी आंखें एक दूसरे पर टिकी हुई थी । हमारे होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे । वो मेरे लन्ड को अपने हथेलियों में भर कर मुठ मार रही थी । मैं उसके चुत में ऊंगली डाल कर अन्दर बाहर कर रहा था । हम दोनों काफी उत्तेजित हो गए थे ।

" कैसा है ?" - मैंने अपने होंठ को अलग करते हुए कहा ।

" क्या ?" - वो कामुक नज़रों से मुझे देखते हुए बोली ।

" मनीष की बीवी के चुत को चोदने वाला लन्ड ।"

" मस्त । काफी मोटा और लम्बा " - वो मेरे लन्ड को मुठियाते हुए फुसफुसाई ।

" तो क्या ख्याल है मनीष की बीवी अपने चुत में मेरा लन्ड लेगी ?"

" तुम खुद ही पुछ लो न ?"

" किससे ?"

" मनीष के बीवी की चुत से " - बोलकर वो मुझे अपने पैरों की तरफ ढकेलने लगी ।

मैं नीचे फर्श पर बैठ गया और उसे अपने साड़ी और पेटीकोट कमर से ऊपर रखने का इशारा किया । उसने ऐसा ही किया । मैंने उसकी पेंटी को नीचे कर दिया तो उसने अपने पांव इधर उधर करके पैन्टी को पुरी तरह से बाहर निकाल दिया । उसके लम्बे लम्बे गोरे चिकने पांव और मोटी मोटी जांघें देखकर मैं दिवाना सा हो गया । दोनों जांघों के मध्य कचोड़ी की तरह चुत जो उसकी काम रस से भीगी हुई थी , मुझे सम्मोहित सा कर दिया था । मैंने अपनी होंठ को उसके चुत से सटा दिया और फिर गहरी खाइयों से मधु निकालने की कोशिश में लग गया । वो खिड़की को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी एक पांव सामने पलंग पर रख दी जिससे उसकी चुत की दरारें फैल गई । मैंने अपनी जीभ उसके चुत में घुसेड़ दी और....

दो मिनट में ही मैंने मधुपान कर लिया । मैं खड़ा हुआ तो उसने मुझे अपनी बांहों में लेकर कस लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी । उसकी नजर खिड़की से बाहर नीचे की ओर गई ।

" हटो " - वो मुझे धकेल कर अपनी पैंटी पहनते हुए बोली -" नीचे गाड़ी में सामान रखा गया है । मनीष उपर आ रहा है ।"

मैंने भी जल्दी से अपनी पैंट को व्यवस्थित करते हुए कहा -" लेकिन असल काम तो हुआ नहीं ।"

" तुम मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दो । मैं बाद में फोन करूंगी लेकिन भुल के भी तुम मुझे फोन मत करना " - वो अपनी हुलिया दुरूस्त करते हुए बोली ।

हम दोनों ने अपना अपना मोबाइल नंबर एक्सचेंज किया । और मैं उसके होंठों पर एक किस कर के श्वेता दी के फ्लेट में चला गया । फ्लेट तो पहले ही पुरा खाली हो गया था । एक बार फिर से पुरे फ्लेट का निरीक्षण किया और फिर बाहर निकल गया । मैंने मेन दरवाजे को लाॅक करके चाबी अपने पैंट में डाल दिया और उस इमारत से बाहर निकल आया ।

407 भेन पुरी तरह से सामानों से लद चुका था । जीजू के कार में बहुत चीजें पीछे वाली सीट पर भरी हुई थी । जीजू और श्वेता दी ने वहां जो लोग अभी भी थे उनको हाथ जोड़कर नमस्ते किया और फिर अपने कार में बैठ गये । मैं भी अपने कार में बैठ गया ।

दोपहर को तीन बजे हम आन्टी ( अमर की मम्मी ) के घर पहुंचे । वहां जाने के बाद मैंने मजदूरों को बुलाया और फिर सारे सामान को उनके घर में पहुंचाने का इंतजाम करवाने लगा । सब कुछ करते करते शाम के छः बज गए । आन्टी भी हर वक्त हम सभी के साथ ही रही जो मुझे बहुत अच्छा लगा ।

वहां से निपट कर मैं अपने घर चला गया । शरीर थका हुआ महसूस हो रहा था इसलिए जल्दी ही खाना खा कर मैं अपने कमरे में चला गया । कपड़े चेंज किए और बिस्तर पर लेट गया ।

आज बहुत सारी घटनाएं हुई थी । इंस्पेक्टर कोठारी से एक सार्थक मुलाकात... श्वेता दी और जीजू का यहां शिफ्ट होना... अनुपमा भाभी के साथ जबर्दस्त एनकाऊंटर..... और...और भी कुछ था ।
Shaandar aur majedaar update
 
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mahadev31

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nice update ...anupama pyasi hai to shayad uska chakkar amar ke saath ho sakta tha ,,,,,,,,aur unka ghar shweta didi ki tarah same hona ( shayad ye baat sagar ne notice ki aur :::::::: aap samajh jao ) sagar ko kuch to shak hua hai ,,, kisipar to ,,,,
 

mahadev31

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आज बहुत सारी घटनाएं हुई थी । इंस्पेक्टर कोठारी से एक सार्थक मुलाकात... श्वेता दी और जीजू का यहां शिफ्ट होना... अनुपमा भाभी के साथ जबर्दस्त एनकाऊंटर..... और...और भी कुछ था ।.................... aur kuch tha matlab shak
 
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