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Incest Sagar (Completed)

Incestlala

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" वैलकम ! वैलकम ! " - कुलभूषण खन्ना अपनी चेयर पर बैठे हुए बोला ।

मैं उससे हाथ मिलाया और उसके सामने पड़ी एक कुर्सी पर बैठ गया ।

" और सब खैरियत है ।" वो अपने कान की लौ खिंचता हुआ बोला ।

" जी खन्ना साहब । सब खैरियत है ।"

उसने अपने स्टाफ को चाय लाने की आर्डर दी । मैं उसके बोलने की प्रतीक्षा करने लगा ।

" हम सोच रहे थे कि अमेरिका शिफ्ट हो जाएं ।"

" हम ?"

" मैं और अनुष्का ।"

" अमेरिका ?"

" मेरा छोटा भाई वहां रहता है । कयी साल से बुला रहा है ।"

" सैर कर आने को ?"

" वही सैटल हो जाने का ।"

" क्यों ? कोई खास वजह ?"

" वजह तुम जानते हो " - भावावेश में उसकी आवाज कांपने लगी -" तुम्हें यह भी पता है कि उस दिन मैंने यहां तुम्हें क्यों रोक रखा था ।"

" क्यों ?"

" अपनी बीवी से तुम्हारा आमना सामना करवाने के लिए ।"

" जी !"

"" तुम्हारी विजिट से मेरा यह शक विश्वास में बदल गया था कि तुम्हारे जीजा राजीव सोलंकी के फ्लेट में तुम्हारा जिस कटे बालों वाली युवती से आमना-सामना हुआ था , वह मेरी बीवी अनुष्का थी । तुम्हारी शक्ल देखते ही उसके चेहरे का रंग उड़ता मैंने साफ देखा था । और वो समझती है कि बाद में क्लब के बाहर उसने तुमसे जो खुसुर फुसुर की थी , उसकी मुझे खबर नहीं ।"

मैं खामोश रहा । अपनी नर्वसनेस छुपाने के लिए मैंने सिगरेट सुलगा लिया ।

" दो कौड़ी की औकात नहीं थी मेरी बीवी की मेरे साथ शादी से पहले " - वह जोर जोर से अपने कान को मसलता हुआ बोला -" कालेज की मामूली स्टूडेंट , टी. बी. सिरियल में काम पाने के लिए सारा सारा दिन मण्डी हाउस की खाक छाना करती थी । मैंने उससे शादी की , उसे रूतबा दिया , इज्जत दी , सुख-सुविधा और ऐश्वर्य दिया । जमीन से उठा कर आसमान पर बिठाया उसे । बदले में मुझे क्या मिला उस नाशुक्री और बेवफाई औरत से ? धोखा ! फरेब ! बेवफाई !"

वह ठिठका । मुझे यूं लगा जैसे वह रोने लगा हो । लेकिन ऐसा न हुआ । उसने अपने आप पर काबू पाया और अपेक्षा कृत सुसंयत स्वर में बोला -" मैं जिन्दगी का बड़े से बड़ा झटका बर्दाश्त कर सकता हूं लेकिन औरत की बेवफ़ाई नहीं बर्दाश्त कर सकता । मैं अपनी बीवी की कल्पना राजीव सोलंकी , तुम्हारे उस हरामजादे , कुत्ते के पिल्ले के पहलू में नहीं कर सकता । मैं खून कर दुंगा उसका ।"

" फांसी हो जाएगी " - मैं धीरे से बोला ।

" मैं उसे तबाह कर दुंगा " - वह यूं बोला जैसे उसने मेरी बात सुनी न हो -" मैं उसे कौड़ी कौड़ी का मोहताज कर दुंगा । मैं उसे गलियों में भीख मांगने वाला मंगता बना दुंगा ।"

मैं खामोश रहा । तभी स्टाफ चाय लेकर आया । स्टाफ के जाने के बाद फिर बोला -" मेरी बीवी बाद में तुमसे मिली थी ।"

मैंने उत्तर न दिया ।

" झुठ बोलने का कोई फायदा नहीं । मेरे आदमी को अनुष्का ने डाज दे दी थी । लेकिन फिर भी मुझे मालूम है कि वह तुम्हीं से मिली थी ।"

" फिर भी कैसे मालूम है ?"

" वो छोड़ो और बोलो मेरी बीवी तुमसे मिली थी । जबाव यह सोचकर देना कि इनकार भी करोगे तो मुझे विश्वास नहीं होगा ।"

" हां । मिली थी ।"

" क्या चाहती थी ?"

" खास कुछ नहीं ।"

" फिर भी ।"

" मेरा शुक्रगुजार होना चाहती थी कि मैंने उस दिन आपके सामने उसकी पोल नहीं खोली थी और आगे भी वह राज रखने का वादा लेना चाहती थी ।"

" यह वादा हासिल करने के लिए और क्या क्या किया उसने ?"

" क्या मतलब ?"

" तुम पर डोरे डालने की कोशिश नहीं की उसने ?"

" नहीं " - मैं बड़े सब्र से बोला ।

" क्यों झुठ बोल रहे हो । इसलिए इनकार कर रहे हो क्योंकि समझते हो कि मैं बुरा मान जाऊंगा । तुम खुबसूरत हो , नौजवान हो , मार्डन हो , उपर से....."

" खन्ना साहब " - मैं सख्ती से बोला -" ऐसा कहकर , ऐसा सोचकर आप अपने आप को टार्चर कर रहे हैं । ईशया की भावना ‌ने आपकी मति भ्रष्ट कर दी मालूम होती है । यूं तो जो मर्द एक सेकेंड के लिए आपकी बीवी के पास खड़ा होगा , आप उसी पर शक करने लगेंगे । ऐसा कहीं होता है ? इससे तो बेहतर है तो आप तलाक दे दें ऐसी बीवी को ।"

" उसने.... उसने तलाक का कोई जिक्र किया था ?"

" नहीं । कतई नहीं ।"

" हूं । "- वह बोला । उसने कान की लौ को खींचने मसलने की जगह सहलाना आरम्भ कर दिया -" अच्छा , यह बताओ तुम्हारे ख्याल से मेरी बीवी का उस आदमी के कत्ल से कोई रिश्ता हो सकता है जो राजीव के फ्लेट में मरा पाया गया था । क्या नाम था उसका ?"

" अमर । अमर गुप्ता ।"

" हां । अमर गुप्ता । उसके कत्ल से मेरी बीवी का कोई रिश्ता हो सकता है ?"

" मुझे नहीं मालूम ।"

" भई । मैंने तुम्हारा ख्याल पुछा है ।"

" मेरा इमानदराना ख्याल जानना चाहते हैं आप ?"

" हां ।"

" फिर तो हो सकता है । आप की बीबी के पास राजीव जी के फ्लैट की चाबी थी । और मौका-ए-वारदात पर वो पाई गई है । और हालात ऐसे पैदा हो गये हो सकते हैं कि आपकी बीवी को गोली चलानी पड़ गई हो ।"

" हूं । अगर ऐसा हुआ , वह पकड़ी गई और उसे सजा हो गई तो मुझे बहुत अफसोस होगा ।"

" अच्छा !"

" मैं उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकता ।"

" जी ।"

मेरे समझ में नहीं आ रहा था कि ये शख्स किस टाइप का आदमी है । घड़ी में तोला , घड़ी में माशा ।

" मैं सच कह रहा हूं ।'

" अच्छा , मुझे आज्ञा दिजिए ।" मैंने उठने का उपक्रम किया ।

" जरा एक मिनट सुनो ।"- वो बोला -" तुम्हारा जीजा भी तो क़ातिल हो सकता है ?"

" होने को तो क़ातिल आप भी हो सकते हैं । "

" क्या बकवास कर रहे हो ।"

" मैं भी आप ही की तरह सम्भावना व्यक्त कर रहा हूं । आप को अपनी बीवी पर शक था । आपने अपनी बीवी का पिछा किया । वहां आपने अपनी बीवी को अपने दुसरे यार अमर की बाहों में देखा । आपका खून खौलने लगा । और आपने अमर का खून कर दिया । "

" क्या बे-सिर-पैर की बातें कर रहे हो । उसकी दोस्ती तो राजीव से थी । मुझे मारना होता तो मैं राजीव को मारता । और ये अमर नाम का लड़का कहां से फिट हो गया । उसे तो न मैं जानता हूं और न ही अनुष्का । उसे भला मैं क्यों मारूंगा ।"

" आप को अमर के मर्डर केस की सारी कहानी पता है । क्या आप बता सकते हैं कि मर्डर वाले दिन सुबह दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे तक कहां थे ?"

" घर में हुंगा और कहां होऊंगा । "

" अच्छी तरह से याद करके बताईए । शायद भविष्य में इससे आप को फायदा ही हो ।"

" मैं ‌घर में ही था ।"

" आप घर में थे , इसका कोई सबूत , या कोई गवाह ।"

" नहीं कोई भी नहीं था । एक मेड आती है रोज लेकिन ‌शायद उस दिन वो आई नहीं थी । और अनुष्का किसी सहेली के पास जाने के लिए कहकर चली गई थी ।"

" तब तो आपके पास भी उस वक्त की कोई पुख्ता एलीवाई नहीं है । अच्छा अब इजाजत दिजिए । क्लास के लिए लेट हो रहा है ।"

" ठीक है । जाते जाते ये तो बता जाओ कि पुलिस को अनुष्का के बारे में कोई खबर है ?"

" जी नहीं ।"

मैं वहां से क्लास चला गया । थोड़ी देर में ही मन उचट गया । और खन्ना साहब से बिदा ले कर घर चला गया । दरवाजा रीतु ने खोला । वो सलवार सूट पहने हुए थी । मैं अभी हाल में पहुंचा ही था कि रीतु पीछे से आकर बोली ।

" भाई । काजल को उसके घर छोड़ दोगे क्या ?"

" क्या " - मैं चौंकते हुए कहा -" वो अभी तक यहीं है ।"

" हां ।"

" ठीक है छोड़ दुंगा । कब तक निकलेगी ?"

" आधे घंटे में ।"

" माॅम कहां है ?

" किचन में ।" बोल कर वो अपने रूम में चली गई ।

मैं किचन में गया । माॅम हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहने खड़ी हो कर किचन स्लैब के उपर सब्जी काट रही थी । गर्मी के कारण पसीने से उनका ब्लाउज भीग गया था । साड़ी पेट से हट गयी थी जिससे उनकी गोरी गोरी थोड़े फुले हुए पेट दिखाई दे रही थी । साड़ी नाभि के थोड़ा नीचे से बंधा हुआ था । पसीने की बूंदें सरक कर नाभि से होते हुए साड़ी पर जमा हो रही थी । ये सब देखकर मैं थोड़ा उत्तेजित हो गया । मैं उनके पास गया और पीछे से उनसे लिपट गया ।

" इतनी गर्मी में इतना हैवी साड़ी क्यों पहनती हो । पुरा पसीना पसीना हो गई हो । तुम्हारी नाइटी कहां गयी ?"

" बड़ा जल्दी आ गया ।" - माॅम पलट कर मेरे बालों को सहलाते हुए बोली ।

" हां । आज मन नहीं लगा इसलिए जल्दी चला आया । तुमने बताया नहीं तुम्हारी नाइटी क्या हुईं ?"

" पुरानी हो गई थी इसलिए फट गई ।"

" तो दुसरी ले लेती ।"

" मैंने रीतु को बोला था लेकिन वो बार बार भुल जाती है ।"

" अरे ! तो मैं हूं ना । मुझसे कहती मैं ले आता ।'

" अच्छा तो तु ही ले आना ।"

मैं माॅम के कन्धों के पसीने को हाथों से पोछता हुआ बोला -" कौन सी ले आऊंगा ?"

" कोई भी ले आना ।"

" कोई भी ?"

" हां । "

" तुम्हे पता है न नाइटी कयी तरह की आती है । एक पुरे एंडी तक आने वाली , एक घुटने से थोड़ी नीचे तक आने वाली और एक घुटने से थोड़ी उपर वाली ।"

वो फिर मेरी तरफ पलटी और मुझे देखते हुए मुस्कुरा कर बोली -" बड़ा ज्ञान है तुझे नाइटी का ।"

" मुझे तो सभी चीजों के बारे में थोड़ा थोड़ा ज्ञान है । तुम जानती ही हो ।"

" हां जानती हूं लेकिन थोड़ा थोड़ा नहीं बल्कि ज्यादा ज्यादा ज्ञान है ।"

" बोलो ना ।"

" क्या ?"

" कौन सी ले आऊं ?"

" घुटनों से ऊपर वाली अपनी बीवी को पहनाना । मुझे एंडी तक आने वाली ही ले आना ।"

" घुटनों तक वाली पहनोगी तो हवा अच्छी तरह से आयेगी और इतना पसीना पसीना नहीं रहोगी ।"

" जरूरत नहीं है । मुझे वही ले आना ।"

" ओके वही ले आऊंगा । अब ये बताओ कि किस टाइप का ले आऊं ?"

" अब ये ' किस टाइप ' क्या है ?"

" मतलब मोटे कपड़े वाली , पतले कपड़े वाली , सेमी ट्रांसपेरेंट या ..."

उसने मेरे पेट पर कस कर मुक्का मारा । " बहुत ज्यादा बदमाश हो गया है । तुम रहने ही दो मैं रीतु से मंगवा लुंगी ।"

मैं माॅम के गाल पर पप्पी लेते हुए बोला -" ऐसे कैसे रहने दो । मैं ही ‌ले आऊंगा और ‌अब से नाइटी ही नहीं बल्कि तुम्हारी हर चीजें मैं ही ले आऊंगा ।"

" बड़ा आया ले ‌आने वाला । पहले कमाना तब बातें करना ।"

" इतना तो कमा ही लेता हूं कि तुम्हारी जरूरत के चीजों को खरीद सकूं और रही बात ज्यादा कमाने की तो कुछ दिनों तक वेट करो । सोने की पलंग बनवा दुंगा ।"

" किसके लिए । अपनी बीवी के लिए ।" - माॅम मुस्कराते हुए बोली ।

" तुम्हारे लिए । "

" मैं क्या करूंगी सोने की पलंग ले कर । मेरे लिए मेरा टुटा फुटा लकड़ी का खटिया ही काफी है ।"

अभी मैं कुछ कहता तभी रीतु और काजल आ गयी । काजल घर जाने के लिए तैयार हो गई थी । मैं वहां से निकला और काजल को अपनी बाइक पर बैठा कर उसके घर की ओर रवाना हो गया ।
Superb update
 
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बढ़िया अपडेट हैं दोस्त
 
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Update 12 B.


मैं बाइक लिए दरवाजे के बाहर खड़ा था जब रीतु और काजल वहां आई ‌। काजल से रीतु की दोस्ती स्कूल के समय से ही थी । दोनों में काफी गहरी दोस्ती थी । इन दोनों का एक-दूसरे के घर जाना और कभी कभी एक-दूसरे के घर रुक जाना आम बात थी । वैसे मैं भी कभी कभी काजल से मजाक कर लिया करता था । उसके घर में उसके मां बाप के अलावा एक बड़ी बहन थी जिसकी शादी गुड़गांव में ही हुई थी ।

काजल डीप ब्लू कलर की शर्ट और लेगिंग्स पहनी हुई थी जो उसके गोरे गोरे रंग पर काफी फब रहा था । उसके बड़े-बड़े वक्ष शर्ट पर काफी कसे हुए थे । उसकी मोटी मोटी जांघें लेगिंग्स में बहुत ही सेक्सी लग रही थी । होंठों पर लाली , आंखों में हल्का सुरमा , घुंघराले कमर तक आये हुए बाल उसकी खूबसूरती में चार-चांद लगा रहे थे । रीतु सलवार सूट में भी हमेशा की तरह जगमग जगमग कर रही थी ।

काजल रीतु को बाय बोल कर बाईक पर मेरे पिछे अपने दोनों पैर दोनों साइड करके बैठ गई ।

" सुन ! अच्छी तरह से भाई को पकड़ कर बैठ जा ।" - रीतु बोली ।

पिछे थोड़ा हिल डोल कर काजल अपने को एडजस्ट करने लगी ।

' अरे ! क्या कर रही है ? ठीक से भाई को पकड़ कर बैठ । कहीं गिरा , पड़ा तो लेने को देने पड़ जायेंगे ।"

" हां काजल । अच्छी तरह से पकड़ ले नहीं तो गिर पड़ेगी " - मैंने भी काजल को समझाया ।

काजल आगे की ओर घसक गई और मुझसे सटकर बैठ गई ।

" मैं काजल को गिरने के चलते तुम्हें पकड़ कर बैठने के लिए नहीं बोल रही हूं ।"- रीतु बोली ।

" तो किसलिए बोल रही हो ?"

" तुम्हे गिरने से बचाने के लिए । अगर रास्ते में किसी से भिड़ गए तो काजल तुम्हें बचा ले ।"

" मुझे गिरने से बचाने के लिए "- मैं हैरान हुआ ।

" हां । क्योंकी काजल तो बाईक पर से गिर ही नहीं सकती । वो तो चुम्बक की तरह बाईक से चिपक जाती है । उसे कोई गिरा ही नहीं सकता ।"

" क्या बकवास करती है ।" मैं भड़क कर बोला ।

" सच बोल रही हूं । तुम काजल से ही पुछ लो । अभी कुछ दिन पहले जब ये मामा के यहां गयी थी तो ये एक दिन अपने मामा के साथ उनके बाईक पर बैठे मार्केट जा रही थी । रास्ते में एक कुत्ता आ गया और इसका मामा एक्सीडेंट कर बैठा । मामा तो उछल कर दुर कहीं गिरा मगर ये बाईक से चिपकी हुई ही रही ।"

" क्या ?"- मैं आश्चर्यचकित मुंह बाये देखता रहा ।

" हां । " - रीतु काजल को बोली -" चल अब कस के भाई को पकड़ ले ।"

काजल अब पुरा आगे आ गयी और मुझसे सटकर बैठते हुए अपनी दोनों बांहों को आगे कर मेरे बाहों को पकड़ ली ।

" अरे ! क्या कर रही है काजल । मेरी बांह तो छोड़ , मैं बाईक कैसे चलाऊंगा ।"

काजल ने तुरंत अपनी बाहें हटायी और इस बार मेरे पेट के उपर बाहों का हार बना कर पकड़ ली । उसकी दोनों बड़े बड़े मम्मे मेरे पीठ पर धंस गये ।

" हां । अब ठीक है । "- रीतु सन्तुष्ट हो कर बोली ।

" अब मैं जाऊं ?" मैंने कहा ।

" हां जाओ ‌।"

" चलें काजल ?" मैंने काजल से पूछा ।

' हां भैया चलिए ।" काजल बोली ।

मैं बाईक स्टार्ट करने ही वाला था कि रीतु जोर से बोली -" अरे काजल , तेरी बुक्स कहां है ? और तेरा पेठा वाला बैग ?"

" ओह ! भुल गयी यार । लेते आ न ।" काजल ने कहा ।

" तु भी चल ना , दो मिनट में आ जाएंगे ।"

फिर दोनों अन्दर चली गई । और करीब पन्द्रह मिनट बाद आई । मैं बाइक पर बैठे बैठे भुनभुनाता रहा । काजल ने अपनी किताबें और पेठा वाला बैग मुझे दिया । मैंने उसे बाइक की डिकी में रख दिया । फिर मेरे बाइक पर बैठते ही काजल उसी तरह मेरे पेट को अपने हाथों से पकड़ कर चिपक कर बैठ गई ।

ज्योंहि उसके बड़े-बड़े वक्ष मेरी पीठ पर दबे तो मुझे कुछ अलग सा फिल हुआ । मैं उसके मम्मे को स्पष्ट रूप से महसूस कर रहा था । शर्तिया उसने अन्दर जा कर अपनी ब्रा उतार दी थी । मेरी दिल की धड़कन तेज हो गई । ये क्या खेल खेलना चाहती है ।

" चलें काजल "- मैंने प्यार से कहा ।

" हां भैया ।"

काजल ने रीतु को बाय बोला और हम वहां से रवाना हो गए । वो मुझसे इस तरह चिपकी हुई थी कि बीच में से हवा भी पार न होने पाए । उसकी छाती मेरी पीठ से धंसी हुई थी । उसके बड़े-बड़े मुलायम स्पंज की तरह मम्मे की रगड़ मुझे काफी उत्तेजित कर रही थी । जांघिया में कैद मेरे छोटे सिपाही ने जैसे बाहर निकलने के लिए बगावत शुरू कर दी थी ।

काजल का घर पीतमपुरा में था जो हमारे यहां से करीब आठ किलोमीटर दूर है । इनका मकान दो मंजिला था । मकान के पिछले हिस्से में एक छोटा सा बगीचा था जहां हमलोगो की तरह ही फलों के पेड़ लगे हुए थे और कुछ सब्जियां भी बोई गई थी ।

" काजल कोई परेशानी तो नहीं हो रही है न ।" मैं बाइक चलाते हुए कहा ।

" नहीं भैया ।"

" तुमने पेठा खाया ?"

" हां । बहुत टेस्टी है और थैंक यू भैया ।"

" तुझे अच्छा लगा यही मेरे लिए काफी है ।"

बाइक चलाते हुए सामने एक बमपर आया तो बाइक हल्के से उछल गई और काजल भी थोड़ी उछली और फिर मेरे पीठ पर अपने मम्मे को रगड़ते हुए बैठ गई । मैं ' आह ' करके रह गया ‌। मैं उससे बात करना चाहता था लेकिन क्या कहूं समझ में नहीं आ रहा था । तभी कुछ याद आया ।

" काजल तुझे याद है तुम मुझे अपने आम खिलाने वाली थी ।" मैं बोला ।

" हां भैया याद है । घर चलिए आप को खिलाती हूं ।"

" अभी तो घर पर सभी होंगे । कभी फुर्सत में खा लेंगे ।"

अपने मम्मे को मेरे पीठ पर कसते हुए बोली -" उससे क्या फर्क पड़ेगा । आप पिछे की तरफ से गार्डेन में चलियेगा । अभी इस वक्त वहां कोई नहीं होगा , आप आराम से खा लिजिएगा ।"

" कहीं तेरी मम्मी डैड ने देख लिया तो ।"

" क्या देख लिया तो ?"

" कि मैं तेरे आम खा रहा हूं ।"

वो अपने हाथों को मेरे पेट से हटा कर मेरे जांघों पर लिंग के करीब ले गयी और उंगलियों से जांघ को सहलाते हुए बोली -" डैड अभी दुकान पर होगें और मम्मी अपनी फेवरेट सीरियल देख रही होगी ।"

लिंग के खड़े होने के कारण पैंट पर काफी उभार आ गया था । और उसकी ऊंगली उभारों से करीब करीब सट कर ही थी । उसके उंगलियों द्वारा वहां सहलाने से मेरा लिंग फुल कर कुप्पा हो गया था


" अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात बताई । अब तो मैं पक्का तेरी आम चुसुगा ।"

वो अपने मुंह मेरे कानों से सटा कर बोली -" भैया आपको कैसे आम पसंद है मतलब बड़े बड़े या छोटे ।"

" मुझे सभी पसंद है । वैसे तेरी आम कैसी है ?"

वो कान में अपनी होंठ को सटा कर फुसफुसाई -" भैया मेरे बड़े बड़े हैं ।"

मुझे तो ऐसा लगा कि सच में ही कहीं मैं एक्सीडेंट ना कर बैठूं । मैं अपने आप को संभालते हुए बोला -" वाह । बड़े बड़े । मुझे बड़े बड़े बहुत ज्यादा पसंद है । काजल सच में अपने आम मुझसे चुसवाएगी...मेरा मतलब चुसने देगी न ।"

" हां भैया सच में दुंगी । आप से नहीं चुसवाउगी....माने आप को चूसने नहीं दुंगी तो भला किसे दुंगी ।" - फुसफुसा कर बोली और अपनी मध्यम उंगली को मेरे लिंग के साइड में हल्का हल्का सहलाने लगी ।

उसके उंगलियों के वहां स्पर्श से मुझे लगा कि अब मैं झडने ही वाला हूं । मैं काफी उत्तेजित हो गया था । मैंने हिम्मत करके बाइक के हैंडल पर से अपना एक हाथ हटाया और उसकी उंगलियां जो मेरे जांघों के मध्य से जरा ही दुर था उसे अपने उंगलियों से फसा कर बीच में ठीक लिंग के उपर रख दिया । उसने जरा भी प्रतिवाद नहीं किया ।

" मैं जरूर चुसुगा । दबा दबा कर चुसुगा । "

" हां भैया जरूर चुसीएगा । दबा दबा कर चुसीएगा ।" - वो अपने उंगलियों को हल्के से पैंट के ऊपर से लिंग के उपर दबाई ।

" हां अपने दोनों हथेलियों से पकड़ कर खुब दबा दबा कर चुसुगा , पिऊंगा ।"

" चुस लेना भैया । अपने हाथों से दबोच दबोच कर पी लेना । " कहते हुए वह अपने हथेलियों को मेरे लन्ड को पैंट के ऊपर से दबाई ।

" हाय काजल ... मुझे तो तु अपनी आम चुसाएगी और तुझे क्या पसंद है .... तुझे क्या चाहिए ?"

" हाय भैया मुझे केला पसंद है । आप मुझे खिलाओगे न " - मेरे कानों में धीरे से बोली और उसे अपनी जीभ की नोक से स्पर्श कर दिया ।

" जरूर खिलाऊंगा काजल । मैं तो कब से चाहता था कि तुझे अपना केला खिलाऊं ।"

" तो ये आपकी गलती है न भैया । आप को पहले बोलना चाहिए था ।"

" हां मेरी गलती है । मगर अब गलती नहीं करूंगा । "

वो कुछ कहती उससे पहले ही उसका घर आ गया । उसके घर के सामने ही उसके डैड खड़े मिले । मैं समझ गया अब कुछ नहीं हो सकता है । KLPD हो गया । मैंने काजल की तरफ देखा। उसकी आंखें गुलाबी सी हो गई थी । मुझे अपनी ओर देखता पाकर धीरे से मुस्कुराई । मैंने उसके डैड को प्रणाम किया । उनके साथ उनके घर में प्रवेश किया । उसके मम्मी और डैड से गप शप किया । चाय नाश्ता किया और फिर अपने घर चला आया ।
 
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