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Sushil@10

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Update 18



सुबह जागते ही वीर, रात के अपने एग्रेशन के बारे में सोचने लगा…. उसे पछतावा था… काफी देर यूं ही छत की तरफ देखने के बाद जब उसने करवट बदली तो सामने काव्या का मासूम चेहरा था जिसे देख एकबार फिर उससे रहा नहीं गया और उसने उसके गालों को चूम लिया

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वहीं काव्या जो नींद में होने का दिखावा कर रही थी जैसे ही उसने किस के बाद वीर के मुंह से सॉरी सुना….. वो एक झटके से उसके ऊपर आ गई

काव्या : हम्म….🙃 “सॉरी…. पर वो क्यूँ” ???

वीर : वो रात मैं कुछ……(इसके आगे वो कुछ कहता इसके पहले ही काव्या ने उसके लबों पर अपने लब रख दिए और लगभग 2 मिनट तक किस किया)

tenor.gif


“मै तो हूं ही आपकी…. आप जो चाहे वो..... मेरे साथ कर सकते हो”

वीर : जो चाहे वो 🙄 ???…. (काव्या उसकी छाती पे मुक्के मारते हुए, अब मैने ऐसा भी नहीं कहा)

वीर : कहा तो है जानू, पर ठीक है…. तुम खुश तो मैं खुश

वहीं काव्या ने वीर का मूड ठीक देखकर फिर से वही चित्रा वाली बात छेड़ दी आखिर ये है, कौन….. और आप उसे कैसे जानते हो !!

वीर : बताया तो था... तुम्हें सेफ रखनें लिए उसे हायर किया था !!

काव्या🧐 : मुझे सेफ ??…… “देखो आप सच नहीं बोल रहे”

वीर : मै सच ही बोल रहा हूं, बाबा…

काव्या : तो फिर आज मुझे सब कुछ डिटेल से बताइए…

🤔ये चित्रा कौन है ?? और आपको मेरी डिबेट के बारे में कहां कैसे पता चला ??

वीर : ठीक है, तो सुनो…

दरअसल रिया दी ने, पहले ही मुझे लकी के बारे में चेता दिया था इसीलिए…. जब तक मैं यहां था….. तुम्हारे हरपल की खबर रखता था....

...और...

वीर : और इंटरव्यू के लिए जाने से पहले मैं ये जिम्मेदारी चित्रा को सौंप गया था !!

काव्या : इसका मतलब डिबेट के बारे भी.. 🤔 चित्रा ???

वीर : अरे नहीं, इसके बारे में तो संकलित से पता चला…. “मेरे दोस्त, का छोटा भाई है वो” !!

काव्या : हम्म…. पर अब चित्रा 🤔 … पता नहीं पुलिस क्या करेगी उसका ???

वीर : कुछ नहीं होगा उसे.... तुम फालतू टेंशन मत लो

काव्या : हम्म... चलो सारी बातें कनेक्ट हो गई….

वीर : अरे! अभी कहां…. कल तुम्हें बेबी चाहिए था ना, उसे भी तो एक्सप्लेन करो !!

श्रेया के एक फोन की वजह से तुम इतना परेशान हो गई… कि..😐

काव्या : कि??...कि क्या ?….. बताओ ना !!!

वीर : यही कि….. तुम्हें लगा अगर हमारा बेबी हो जाएगा तो तुम मुझे जिम्मेदारी से बांध लोगी… और..

तभी काव्या बोल पड़ी….. तो क्या इसी बात का गुस्सा कल आपने मुझपर निकला था "साली…. साली बोल कर….. कितनी जोर से जोर से किया.... अभी तक दर्द हो रहा है…. (और उसकी आँखें छलक आईं )

वीर : शक करोगी तो गुस्सा तो आएगा ही…. चलो अब चुप हो जाओ

काव्या सिसकते हुए वो मैं... "मैं आप पर किसी तरह का बंधन नहीं चाहती ” पर..पर

वीर : अरे ठीक है, अब एक्सप्लेन करने की जरूरत नहीं है..... जो हो गया सो हो गया… अभी बस अपनी पढ़ाई पर दो….

काव्या : “वैसे एक बात और है जो मैने आपसे छिपाई है” ?

वीर : छिपाने की कोई वजह होगी….. अगर नहीं बताना.... तो मत बताओ…

काव्या : नहीं, आज मैं आपको सब बताना चाहती हूं…..

वो दरअसल मैं नहीं चाहती थी.... आपको किसी तरह की परेशानी हो इसीलिए जैसे आपको लकी के इरादों के बारे में पता था….. वैसे ही मुझे जानवी…

तभी वीर बोल पड़ा “अरे !! मैने तो तुमसे इसलिए छिपाया था.... क्योंकि तुम अभी पढ़ाई कर रही हो” और मैं नहीं चाहता..... कि तुम फालतू पचड़ों में पड़ो….. और हां.... "रही बात जानवी की तो मुझे उसके इरादों के बारे में भी सब पता था"

काव्या : क्या!!!... तो आपने मुझे इस बारे में बताया क्यूँ नहीं???

वीर : तुम रिलैक्स्ड रहो मैं बस यही चाहता हूं और बाकी सब सम्हालने के लिए तो मैं हूं ही...

काव्या : हम्मम, वैसे कल तो आप मुझे स्ट्रांग बनाने का बोल रहे थे…

वीर : रात गई बात गई…. और वो तो इसीलिए कहा था क्योंकि तुम बच्चे करने की जिद कर रही थी..

काव्या (निराश) : ओह.. हुम्मम….. तभी उसकी नजर घड़ी पर गई….

बाप रे ! काफी लेट हो गया….. “मै नहाने जाती हूं”

और वो बाथरूम चली गई जबकि वीर वहीं लेटा रहा...और पुरानी यादों में खो गया….



✨ फ्लैशबैक :


बात उस समय की है जब हैकर एक्स ने , वीर को उन 12 लोगों की इनफॉर्मेशन निकाल कर दी…. “जिन्होंने उस पर हमला किया था”….

पर फोटोस और थोड़ी सी इनफॉर्मेशन के सहारे उन लोगों तक पहुंचना वीर के लिए भी काफी मुश्किल था……

उसके दिमाग में इस समय राणे का ख्याल आ रहा था लेकिन इसमें काफी समय लग जाता इसलिए उसने फिर से हैकर एक्स से संपर्क किया….

जेसियन उर्फ एक्स जो अपने पिता के कातिल तक पहुंचना चाहता था उसकी ख्वाहिश थी….. एक ऐसी आर्गेनाइजेशन बनाने की…. जो ऐसे ही.... डार्क मैटर्स को सॉल्व करे !!

जब वीर ने लोकेशन के लिए दोबारा उससे संपर्क किया तब उसने अपनी ये इच्छा उसके सामने रखी

वीर : एक आर्गेनाइजेशन

एक्स : हां “डार्क आर्गेनाइजेशन”

काफी देर डिस्कसन के बाद वीर ने जेसियन के इस प्रस्ताव को मान लिया और उन 12 लोगों की लोकेशन मिलते ही खुद को आगे के लिए तैयार करने लगा….



✨ कुछ दिनों बाद

~खंडहर “आउटर भोपाल”


जेसियन के बताए अनुसार आज…. उन 12 लोगों का ग्रुप यहां इकट्ठा होने वाला था….. और वीर के बदले के लिए इस जगह से अच्छी कोई जगह नहीं हो सकती थी...

वीर ने अपने यहां आने की भनक जैक तक को नहीं लगने दी क्योंकि वह अपना बदला खुद लेना चाहता था


“खंडहर के अंदर”


आदमी १ : पता नहीं बहनचोद, हम काम किसके लिए करते है…. साला सामने ही नहीं आता !!

आदमी २ : पैसे मिल रहे हैं ना…. फिर जानकर क्या करना कोई भी हो?..

आदमी १ : पर भाई, बात सिर्फ पैसों की नहीं है वो तो मिलते ही है…. लेकिन ऑर्डर कब आएगा कब नहीं.... कुछ कह नहीं सकते….

आदमी २ : हम्म.. वो तो है..

आदमी १ (फ्रस्ट्रेट होकर) : तब तक क्या करे….. कहां झक मराये ??

आदमी २ : बात तो तूने पते की …..की है लेकिन उस एक ऑर्डर की बदौलत हमारा महीनों का काम बन जाता है…..

और रही बात, तब तक क्या करें.... तो लोकल लफड़े तो हैं न हमारे पास….

आदमी १ : हां, भाई

आदमी २: वैसे, लोकल लफड़े से याद आया वो कालेज वाला छोकरा याद है

आदमी १: हां भाई, कैसे मुंह मांगे पैसे देने को तैयार था……

आपके भांजे की बात न होती तो काफी मोटी मुर्गी थी, मनचाही रकम वसूलते उससे….

आदमी २ : अरे !! हां बे….. “पर लोकल लफ़ड़ों में हम कहां किसी को मारते हैं”………. और उस छोकरे को भी कितना समझाया था……… पर नहीं माना….. अच्छा हुआ, मर गया साला !!

और दोनो हंसने लगे….. हा हाहाह


✨कुछ देर बाद :


उन्हें उनके साथी की आवाज आई…… बड़े ओ बड़े सब तैयार है…. आ जाओ...

(बाकी के जो 10 बंदे थे वो बढ़िया मटन–वटन बना कर दारू खोले उन्हीं दो आदमियों को बुला रहे थे)

फिर सभी एक गोल घेरा बनाकर बैठ गए... वाह !! क्या खुशबू है, कमाल कर दिया बिरजू ये कहते हुए जैसे ही उन सब के बॉस ने मटन की हंडी में कड़छी चलाई, हवा में से एक डागर आया और सीधा उसके हाथ में घुस गया…..

“आह्ह्ह घुस डाला रे”... (एक भयानक चींख पूरे खंडहर में गूंज गई)

( खंडहर जैसी जगह में उनके साथ... ऐसा कुछ होगा उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था…. उनमें से कोई भी इस हमले के लिए तैयार नहीं था)…..

वहीं वीर अभी कुछ ही महीनों पहले 23 लोगों को मौत के घाट उतार चुका था उसके अंदर से डर और रहम खत्म सा हो गया था

सभी ने अपनी अपनी पोजिशन ली.. पर उन्हें आस–पास कोई नज़र नहीं आया….

बॉस (चिल्लाकर) : ढूंढो साले को…..

सभी आदमी वीर को आस पास ढूंढने लगे जबकि वीर उन सब पर दूर से अपनी नज़र बनाए हुए था और जब उसे कन्फर्म हो गया.... किसी के पास गन नहीं है तो वो सीधा ही उनके बीच आ गया…..


“पहले कौन मरना चाहेगा”……


12 के 12 लोगों की नजरें उस पर टिक गई…..

बॉस : “अपने घायल हाथ को दूसरे हाथ से पकड़े हुए”…….. हराम के पिल्ले तू …. तू बच कैसे गया…..

“कोई बात नहीं” आज हम यहां तेरी रूह तक दफन कर देंगे…

तभी एक और बोला……. बच्चे तूने यहां आके गलती कर दी..


वीर चिल्लाया ““ मैने पूछा पहले कौन ““


बॉस : ये करिया ! तू जा ……. ये बहनचोद बहुत उड़ रहा है


करिया वीर की तरफ जाते हुए….. “बच्चे तेरा मोह.... जिंदगी से खत्म हो गया है, जो खुद चलके मौत के मुंह में आया... ह्हययि”…… जैसे ही वीर की रेंज में वो पहुंचा एक जोरदार मुक्का उसके पेट पर पड़ा साथ ही घुमाकर एक लात उसके पैर के पीछे…..

जिससे वह नीचे बैठ गया और फिर वीर ने उसके पीछे आके उसकी गर्दन मरोड़ दी…. जिससे वह वहीं ढेर हो गया…

और फिर से वीर चिल्लाया…… ““अगला कौन””

(सबकी फट रही थी…. जिसका कारण था.... वो रौबदार आवाज जो उस वक्त किसी बच्चे की तो बिल्कुल नहीं लग रही थी…… दोनो पैरों में खंजर और आंखों में भयंकर गुस्सा)


बॉस : ये हकले तू जा….

पर हकला पास जाने से झिझक रहा था…..तो उसने बिरजू से कहा

ये बिरजू तू जा रे…..


“बिना हथियारों के सबकी फटी पड़ी थी”


जब कोई आगे नहीं बढ़ा तो….

बॉस : अबे सालों थू है तुम्हारी मर्दानगी पर….. एक बच्चे से डर गए…… पहले भी तो मारा था … इसे

“सब एकसाथ हमला करो”

जैसे ही सारे वीर की ओर बढ़े… उसने खंजर निकला और दोनों हाथों से बारी–बारी सबको काटने लगा किसी की गर्दन तो किसी का पेट…

बस खच–खच की आवाज आ रही थी और वीर उन्हें काटते जा रहा था….

जब सभी ढेर हो गए तब वीर रुका…. और बॉस के पास जा पहुंचा जो अपना दायां हाथ सम्हाल रहा था….


बॉस : छोकरे!! तू बहुत बड़ी गलती कर रहा है ये तुझे बहुत महंगा पड़ेगाअअअआ…….(एक जबरदस्त मुक्का उसके जबड़े पर पड़ा)……

“बता तुम लोगो को किसने भेजा था”

वो कुछ नहीं बोला बस मुंह से आते हुए खून को थूका और वीर को एकटक खा जाने वाली नजरों से देखने लगा

वीर : घूर क्या रहा है बहनचोद…. (और खंजर उसके पेट में घुसा दिया)…..

खंजर घुमाते हुए... "कब तक नहीं बोलेगा मादरचोद" !!

वीर जगह–जगह दूसरे खंजर से उसके कट्स बना रहा था जबकि एक खंजर परमानेंटली उसके पेट में था जब दर्द एक बर्दाश्त से बाहर होने लगा तब….

बॉस : भाई ! भाई….. प्रतीक प्रतीक...

(वीर को अब सारा मामला समझ आ रहा था….. उसने सपने में भी नहीं सोचा था…… एक लड़की के पीछे कोई उसके साथ ऐसा कर देगा)

वीर खंजर को और भी ज्यादा घुसाते हुए……..

“कुछ लगता है, क्या वो तुम्हारा ??” 😈……

बॉस : भांजा… भांजा …….

वीर : और, तुम्हारे ऊपर कौन है ?…….


( अब बॉस ने वीर को सब बताना शुरू किया…… कैसे उसे सबसे पहले एक अननोन नंबर से कॉल आया और एक बंगले में भूत बनके लोगो को डराने का काम मिला……

पहले तो उसे इस बात पर भरोसा नहीं हुआ….. लेकिन फिर भी चेक करने के लिए उसने इस काम को अंजाम दिया….. और तभी उसे उसके खाते में 2 लाख रुपए मिले……

इसके बाद से हमेशा ही कुछ समय बाद उसे ऐसे ही किसी काम को अंजाम देने के लिए कॉल आने लगा


जब धीरे–धीरे इन कामों की कठिनाई बढ़ने लगी…. तब इसने अपने अंडर और भी लोगों को जोड़ना चालू किया…. इस तरह उसके अंडर 11 आदमी थे..

लेकिन आज तक उन्हें इस बात का पता नहीं चला.... उन्हें किसका कॉल आता था हर बार एक अलग नंबर से कॉल आता और उन्हें काम मिल जाता )


बॉस : भाई अब मुझे छोड़ दो….. तुम्हे जितने पैसे चाहिए... मैं देने को तैयार हूं….. और मैने तुम्हे सबकुछ बता दिया है

वीर हंसा और जोरों से हंसा…..

“कुछ याद आया आज से 6 महीने पहले मैं भी….. इसी तरह तुमसे भीख मांग रहा था”…….

इन 6 महीनों में ऐसा कोई दिन नहीं रहा होगा.... जब मैने तुम्हे मारने के बारे में नहीं सोचा…..पर हर रोज यही सोचकर..... खुद को तसल्ली दे देता ……. कि

जिस दिन तेरा मेरा सामना होगा.... "तुझे वहीं मार दूंगा"

बॉस गुस्से से चिल्लाया... “मादरचोद”

पर तभी वीर ने दूसरा खंजर उसके सीने में घुसा दिया…. और वो तड़प तड़प कर वहीं मर गया…

एक्स ने कहा था…… इस आर्गेनाइजेशन के तुम पहले किलर हो इसीलिए इस पर अपनी मुहर लगा के आना…..

इसलिए वीर ने सबके हाथ पैरों की उंगलियां काट डाली इससे...... जिनमें थोड़ी भी बची खुची जान थी वो भी निकल गई और निकल गया वो गुबार जो उसके मन में 6 महीनों भरा हुआ था !!


( वीर जब किसी को मारना या तड़पाना शुरू करता तो कुछ ही देर बाद….. उसे उसमें मजा आने लगता और वह क्रूरता और हैवानियत की सारी हदें पार कर देता…… शायद यही एक प्वाइंट था जिसमें उसकी दूसरी पर्सनालिटी ट्रिगर होती थी….)


खैर उसने सबको लाइन से लिटाया और उनकी पीठ पर खंजर से लिखा “k…I…L…L…E…R N...U…M…B…E…R…” १ हर आदमी की पीठ पर साइन का एक लेटर



✨डार्क आर्गेनाइजेशन :


वीर का खंडहर वाला कांड बहुत फेमस हुआ….. ऐसी क्रूरता ने पुलिस महकमे में भी हलचल मचा दी….. जेसियन और वीर दोनों को पता था अब आगे क्या करना है…..

इसलिए जेसियन जो हर तरह के केसेस में दिलचस्पी लेता था... चाहे वो नेशनल हो या इंटरनेशनल…… उसका कनेक्ट सभी से था

टॉप किलर्स, फाइटर्स और मास्टर्स….. इन्हीं से उसने वीर को ट्रेन करवाया ….

वीर इन सब के बीच भी काफी सारे कामों को अंजाम देता गया जिससे किलर्स की ये आर्गेनाइजेशन अंडरवर्ल्ड में काफी पॉपुलर होने लगी और लगभग 2 साल बाद इस आर्गेनाइजेशन से और भी किलर्स जुड़ने लगे……

आर्गेनाइजेशन का क्लियर रूल था….. अगर कोई किलर अपनी रैंक सुधारना चाहता है तो उसे अपने से ऊपर रैंक वाले को हराकर उसकी रैंक हासिल करनी होगी

जैसे अगर कोई किलर 10वें नंबर पर है तो उसे सबसे पहले किलर नंबर 9 को हराना होगा…….

और इसका सिर्फ एक ही मौका मिलेगा अगर नाकाम हुए तो आप 10 पर ही रहोगे जब तक कि किलर नम्बर 11 आके आपको न हटा दे !!

फिलहाल अब तक इस आर्गेनाइजेशन में 50 से अधिक किलर्स रजिस्टर है…. चाहे सिक्योरिटी की आवश्यकता हो या किसी को मारना हो..... ये सभी तरह के काम को अंजाम देते है

आर्गेनाइजेशन में सभी किलर्स को “शैडो वॉरियर” पर टॉप 5 किलर्स को स्पेशली “डार्क गार्ड” कहा जाता था..



✨किलर नंबर 2


आर्गेनाइजेशन स्टैबलिश हो जाने के बाद काफी समय तक एक भी किलर एड नहीं हुआ….. और जब हुआ तो वीर का उससे सामना काफी ड्रामेटिक रहा.... या कहें…… ये नाइटफॉल का स्टाइल हैं……

“slaying with the beauty”

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रात में सेक्सी कपड़ों और अदाओं से सब्जेक्ट को अपने जाल में फंसाना…… और इस तरीके से उसकी जान लेना कि उसे खुद ही पता ही न लगे….. कि कब…. उसकी जान चली गई…..

वीर का सामना जब नाइटफॉल (किलर न. २) से हुआ तो वह उसके हुस्न जाल में नहीं फंसा इसका कारण उस वक्त श्रेया रही (कॉलेज लव)…..

फिर नाइटफॉल ने उस पर पॉइजनस डार्ट से हमला करना चाहा जिसे उसने डॉज कर दिया और कुछ को अपने कवर पे ले लिया….

दोनों काफी देर तक अटैक और डिफेंस का खेल खेलते रहे….. और ये खेल तब तक चला जब तक वीर ने उसे एक स्नीक अटैक के थ्रू पिन डाउन नहीं कर दिया….


फ्लैशबैक 🔚


काव्या जो अभी बाथरूम में थी जैसे ही बाहर आई….. तो देखा वीर की आंख लग चुकी है….. वो फटाफट तैयार होने लगी

तभी उसका फोन रिंग हुआ ये यशस्वी का कॉल था जो पहले ही उसे 5 बार कॉल कर चुकी थी

काव्या : हेलो

यशस्वी : अरे दी ! कहां थी, आप…… आज ग्राउंड चलना है ना…..

काव्या : हां, बाबा याद है….. बस 10 मिनट में आ रही हूं

यशस्वी : रूही को भी लेते आना…

काव्या : ओके !!

और थोड़ी ही देर बाद तीनों निकल गई, काव्या को स्कूटी सिखाने
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✨ धन्यवाद !
Nice update and awesome story
 
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vihan27

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Bhai shandaar update diya hai, itni achi kahani ko bich me chorna sahi nhi hai yaar, tumhe wapas dekh ke bahut khushi hue....
Aage bhi ese hi likhte raho....
Thank you 🙏🏼
Good update, keep regular updates.
Abhi regular update nhi milne ke karan site hi boring ho gyi h please update regularly
Hmm.... Story ko thodha review krna pad rha h.... kahi kuchh chhoot na jay isiliye ye update late ho jyga... aur abhi thoda busy v hu..
Bhai ab regular update dete rahana super story
Thanks bro
 

vihan27

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Update 19




लकी के साथ हुई वारदात को 15 दिन होने को है…. पर माहौल काफी शांत है, कही ये किसी तूफान से.... पहले की शांति तो नहीं…

🤔🤔🤔
खैर चलिए.... चलते हैं, वापिस से वीर की ओर….


संडे का दिन था…. रंभा हमेशा की तरह.... सुबह ही अस्पताल के लिए निकल गई..... घर पर अब सिर्फ वीर, काव्या और रिया थे….

तभी डोरबेल बजती है !


काव्या : जी.. अ

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लड़की (धीमे स्वर में) : वीर, घर पर है... क्या ??

काव्या : जी हैं, पर.... आप ??

लड़की : मैं श्रेया..... "हम दोनों कॉलेज में साथ पढ़ते थे" !!

ये सुनते ही काव्या के दिमाग में.... 10 तरह के ख्याल आने लगे,..... उसने उससे अंदर से आने के लिए कहा…..

जैसे ही श्रेया हॉल में आई उसने, रिया और वीर.. को साथ बैठे देखा..… उन दोनों की नजरें भी उस पर गई.... पर कोई कुछ नही बोला…

चूंकि रिया, श्रेया से परिचित थी इसीलिए उसके मन में भी तरह–तरह के ख्याल आ रहे थे…. (जैसे अब ये यहां क्यों आई है.... और क्या लेने आई है ??? )

जबकि वीर, अपने में मग्न... चाय का कप हाथ में थामे, सिर्फ चाय पीने पे ध्यान दे रहा था…. बस किसी के कुछ कहने की देर थी...

काव्या ने इशारे से..... श्रेया को बैठने के लिए कहा, तभी...... वीर, श्रेया की तरफ देखे बगैर....

"बोलो किस लिए आई हो" !!

श्रेया, काव्या और रिया की ओर देखने के बाद….

"अकेले में बात हो सकती है, क्या" ??

वीर : जो बोलना है, साफ–साफ बोलो और यहीं बोलो !!

श्रेया यहां वहां देखने के साथ... "वीर"… सॉरी वो😔😔

वीर : सॉरी 🤨… किसलिए सॉरी…??

श्रेया : वो.. वो मैं यहां नहीं बोल सकती, प्लीज़ !!🥺🥺

"चार आँखें ये दृश्य देख रही थी"

इस बीच जैसे ही रिया की नजरें काव्या पर गई…. जो मन में दसियों प्रकार के, विचार लिए सन्न खड़ी थी…. उससे रहा नहीं गया.... उसने उसका हाथ पकड़ा और कमरे में ले गई…

वीर, काव्या को वहां से उदास जाते देखता रहा….. जिसने उसके दिमाग को और खराब कर दिया …

श्रेया : क्या सब पहले जैसा नहीं हो सक…. (इससे आगे कि वो कुछ कहती..... वीर ने उसका गला पकड़ लिया)

वीर : तुम, क्या पहले जैसा करना चाहती हो… ये मत समझना मुझे तुम्हारे बारे में कुछ पता नहीं…

श्रेया : प्लीज़ वीर.... सब भूल जाओ प्लीज़… मैं बहक गई थी.... लेकिन अब सब समझ गई हूं !!

वीर (गुस्से से) : अब क्या समझ गई हो तुम ..... और समझ क्या रखा है, तुमने मुझे..… जब मन चाहा छोड़ दिया जब मन चाहा वापिस आ गई…

श्रेया : ऐसा कुछ नहीं है वी….

वीर (चिल्लाकर): तो फिर कैसा है…

"श्रेया का गला छोड़ने के बाद".... (शांत स्वर से)…

"यहां से चली जाओ, तुम्हारे आने की वजह से मेरी वाइफ नाराज हो गई है,,,,, मेरा जरा भी मन नहीं कि मैं तुमसे कोई बात करूं"…

श्रेया : वो… वो छोटी लड़की तुम्हारी वाइफ है (🙄मतलब वीर का फोन इसी ने उठाया था)

वीर : हां वही है…. और अब तुम, यहां से जाओ..
"आज के बाद न यहां आना और न ही कॉल करना"...

श्रेया : ठीक है..... पर वीर हम आगे कनेक्ट में तो रह ही सकते है ना, दोस्त की तरह…

वीर : बिल्कुल नहीं, और तुम्हे मेरा नंबर कहां से मिला…

श्रेया : वो, सुमित से…

वीर : ठीक है, तुम जाओ...…



|| श्रेया के जाने के बाद वीर के दिमाग में फिर से सारी पुरानी बाते रिपीट होने लगी…. दरअसल हैकर एक्स ने वीर को 3 साल पहले ही श्रेया के पिताजी के बिजनेस बर्बाद होने की न्यूज़ दे दी थी… और जितना कर्जा उन पर था… उस हिसाब से अब तक सब तबाह हो जाना चाहिए़…

और रही बात श्रेया के नए प्यार की….. तो जो लैविश लाइफस्टाइल दिखा कर उसने श्रेया को अपनी तरफ अट्रैक्ट किया था वो खत्म हो गई, कारण था चैन मार्केटिंग कम्पनी का फ्रॉड निकल जाना…. उसी के कहने पर, श्रेया ने वीर से 17 हजार रुपए लिए थे… जो अंततः डूब गए ||



|| दूसरी तरफ श्रेया गुस्से से जा रही थी… 😡 उस दिन हॉस्पिटल में उसने , मुझे दिखाने के लिए ही उस लड़की गोद में उठाया था… मुझे लगा कोई बीमार…. (गुस्से से पैर पटकते हुए)…. पर वो तो उसकी वाइफ थी.... (श्रेया और सुमित, वीर के कॉन्टेक्ट में न होने की वजह से उसकी शादी से अनजान थे)… वहीं फोन काल पर श्रेया ने समझा कि वीर उससे बात नहीं करना चाहता इसीलिए किसी ओर से मतलब काव्या से ये सब करा रहा है ||


खैर एक बार फिर डोरबेल बजी

इस बार वीर ने दरवाजा खोला ….बाहर रंभा खड़ी थी….

दोनों अन्दर आए…. तो रंभा ने सबको खाने के लिए आवाज लगा दी

कुछ ही देर में, सब खाने की टेबल पर थे, सभी के चेहरों का रंग उड़ा.... देख ….रंभा

"कुछ हुआ है क्या" ??

सब एकसाथ : नहीं…

रंभा : खाने की टेबल पर ऐसे नहीं बैठते…. अगर किसी को कोई समस्या है तो बताओ फिर ही खाना शुरू करेंगे…

पर रंभा को किसी ने कुछ नहीं बताया उल्टा सभी के चेहरों पर अब झूठी मुस्कान थी, उसे लगा सब ठीक है… इसीलिए सभी लंच करने लगे…



~पुलिस थाना
✨भोपाल


डीएसपी ने लकी के केस पर पूरा जोर डाला हुआ था पर उसे... आगे बढ़ने के लिए कोई लीड नहीं मिल रही थी…. वो अभी तक मिले हिंट्स पर ही अपना सिर खपाकर कनक्लूजन ड्रा करने की कोशिश कर रहा था…

आज तक पुलिस यही मानती रही.... कि "किलर नंबर वन" ....एक आदमी है, पर "काव्या और यशस्वी" के बयान ने सारी तस्वीर ही बदल कर रख दी…

लकी की पीठ पर किलर नंबर वन का साइन मिलना दर्शाता है कि.... ये उसी का काम है पर पिछले दो सालों से जैसे केसेस सामने आए है….. उससे लगता नहीं... ये किलर नम्बर वन ने किया होगा !!

न बॉडी पर डायमंड कट के निशान.... न ही उसे उस तरह तड़पाया गया जिस तरह..... पिछले 2 सालों से किलर नंबर वन करता आ रहा है...

जब से उसने तड़पाना चालू किया है… जान से मारना तो मानो जैसे भूल ही गया है !!

कोई, आखिर इतनी सफाई से काम करके... कैसे चला गया???..... डीएसपी इसी सोच में डूबा हुआ था…

नाइटफॉल.. जो रात में एक्शन में आती थी ये पहली बार था…. जब उसने किसी को दिन में मारा था… कुल मिलाकर ये काम किसका.... ये पता लगा पाना नामुमकिन था..

अभी डीएसपी इन सब में अपना माथा पीट.... ही रहा था कि...... थाने में नाना की एंट्री होती है

नाना (बाहर से ही) : “नमस्कार डीएसपी साहब”..

डीएसपी : नमस्कार !! "एमएलए साब" नमस्कार !!

“करीब पहुंचकर” नाना : पता लगा कुछ ??..

डीएसपी : बस छानबीन जारी हैं…

नाना (दांत पीसकर): “छानबीन जारी है" मतलब…. ओह्ह् हम सब समझ गए

"एक बात कहे डीएसपी तू कातिल को बचाना चाहता है ना ...चल बचा के दिखा"…

डीएसपी : आप गलत समझ रहे है सर !!

नाना : गलत समझ रहा हूं, बेटीचोद… अब तू मुझे गलत–सही सिखायेगा

"तुझे पता लगाना होता तो तूने कबका.... उन लौंडियों को उठवा लिया होता"…

डीएसपी : ये क्या अनाप–सनाप बोल रहे हो, सर ??... आप होश में तो हो ??

नाना : होश में तो मैं अब आया हूं डीएसपी….. उन लौंडियों की वजह से ही मुन्ने की ये हालत है…. "देखता हूं उन्हें बचाने इस बार कौन आता है"…

डीएसपी का दिमाग खराब हो रहा था... जिस वजह से उसके सब्र का बांध टूट गया…. और उसे गुस्सा आ गया

😡😡😡
डीएसपी : तुझे पता है, तेरे मुन्ने ने कितनी जिंदगियां बर्बाद की है…. ये देख, ये पड़े सबूत….

और किन्हें उठवाने की बात कर रहा है…. उन्हें जिनकी जिंदगी तेरा मुन्ना बर्बाद करने वाला था…

कसम से विधायक "उस दिन अगर किलर की जगह मै होता, तो तेरा मुन्ना नहीं होता”


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नाना : जब टाईम बुरा चल रहा हो न डीएसपी….. तब कुत्ता भी सर पे मूत देता है… और तेरे इस लंबे भाषण को.........
"मैं याद रखूंगा"

डीएसपी : याद रखेगा ना…. ठीक है, निकल…

और टेबल पर हाथ पटकते हुए …. साला पुलिस में भी इसके खबरी हैं..…. आखिर लड़कियों की बात... इस तक पहुंची कैसे ???

डीएसपी सोच ही रहा था कि उसे.... सोनू याद आ गया और उसका दिमाग फिर खराब….

दरअसल सोनू के बयान के बाद हुई छानबीन से पता लगा….... कि लकी के सारे कृत्यों में.... ये भी सम्मिलित था और इस मादरचोद को सब पता था, लकी ने इसकी बहन के साथ क्या किया है…

डीएसपी (सोचते हुए) : अब इन लड़कियों का क्या करूं ?…. क्या उन्हें अलर्ट कर दूं ??… अरे नहीं, खामखां डर जायेगी… और कुछ देर और सोचने के बाद.... उसने अपने भरोसेमंद आदमी.... निगरानी पे लगा दिए….



✨ शाम के वक्त


दोपहर खाने के बाद से ही वीर और काव्या एक दूसरे के सामने नहीं आए… वीर को पता था इस मामले में वो जितनी एक्सप्लेनेशन देगा… बात उतनी बिगड़ेगी…. अब बस वो माहौल शांत होने का इंतेज़ार कर रहा था…

वहीं रंभा का आजकल खुश रहना किसी से छिपा नहीं था…. सालों बाद ऐसी रौनक उसके चेहरे पे आई थी….

इस शाम भी वो अस्पताल से खाना बनाकर अशोक के साथ लौट रही थी…. दोनों अब इतना घुल चुके थे कि… अशोक उसे सीधे रंभा कह कर बुलाता.… और वो प्यार से उसका जवाब देती…

पार्किंग में रंभा के दोनों हाथों को अपने हाथों में थामते हुए....

अशोक : "कब तक मैं तुम्हारी इस बाहरी सुंदरता को सराहता रहूंगा, रंभा…. अब तुम्हें इस डॉक्टर को अपने आंतरिक अंगों की जांच का मौका दे देना चाहिए़"…

रंभा (दूसरी तरफ सिर घुमाते हुए) : मैं ऐसा नहीं कर सकती अशोक जी !!

अशोक : आखिर क्यूँ..... क्या तुम मुझे इस काबिल नहीं समझती..

रंभा : वो बात नहीं है अशोक जी… हमें पहले बच्चों को.... अपने इस रिश्ते के बारे में बताना चाहिए…. फिर ही..

अशोक : देखो रंभा, यशी को तुम पसंद हो… और बेटी रिया तुमसे कई बार शादी के लिए कह चुकी है… हमारे साथ होने से शायद उसका भी शादी का डर निकल जाए… सोचो

रंभा (🤔) : पर..

अशोक : कोई पर–वर नहीं… तुम्हारे अकेले हो जाने के डर ने ही.... उसके डर को और बढ़ा रखा है…. शायद इसीलिए वो शादी ही नहीं करना चाहती !!

रंभा : आप ठीक कह रहे है, अशोक जी….लेकिन.. हम उन्हें ये सब बताएंगे कैसे !!

अशोक : एक काम करते हैं, कल मंदिर में शादी कर लेते है…..

रंभा (🤔) : पर, क्या ये ठीक… रहेगा !!

अशोक : बिल्कुल, “यशस्वी और रिया” हमारी दोनों बेटियां खुश हो जायेंगी…. पर फिलहाल के लिए इसे सरप्राइज़ रखते है....

...और समय आने पर उन्हें सब बता देंगे….

रंभा : ठीक है...

और आपसी रजामंदी के बाद अपने–अपने फ्लैट की ओर निकल गए…



✨ रात 8 बजे :


एक बार फिर, सभी डिनर टेबल पर साथ थे…. सुबह की घटना के बाद से “वीर और काव्या” में बात नहीं हुई थी और इस दौरान भी दोनों खामोश रहे…

बस काव्या बीच–बीच में नजरें उठाकर वीर को देखती और फिर झुका लेती…

"इस सब के बीच डिनर कंप्लीट हो गया"....

तभी वीर को एक ईमेल आया और वो बात करने छत पर चला गया….



✨ रात 11 बजे :


जैसे ही वीर कमरे में आया, काव्या वहां नहीं थी… उसने बाथरूम चेक किया, वो वहां भी नहीं थी…

तभी उसे....किसी के इसी तरफ, आने की आहट सुनाई दी.... वो समझ गया, कि कौन है... इसीलिए एक तरफ करवट लेकर सो गया …

टेबल पर पानी रखने के साथ ही, काव्या ने वीर की तरफ देखा... वो सो रहा था इसीलिए वो भी .... चुपचाप लेट गई…

काफी देर तक दोनों चुप रहे…. कोई कुछ नहीं बोला..... तभी वीर को उसकी पीठ पर गीलापन महसूस हुआ….

उसने पलटकर देखा...तो काव्या के आंसू थे…वो सिसक नहीं रही थी… फिर भी उसकी आँखों में इतने आंसू थे.... कि वीर से रहा नहीं गया

उसने उसको गले लगा लिया और माथे को चूमते हुए… पूछा “क्या हुआ मेरी जान को” ??

काव्या : वो वो… आज.. वो

वीर : आराम से… आराम से, पहले शांत हो जाओ..

थोड़ी देर बाद, जब काव्या का मन हल्का हो गया….
वीर : अब बताओ क्या बात है..?

काव्या : वो… वो आज मुझे पहली बार लगा.... किसी की वजह से मेरा विश्वास..... आप पर कमजोर हो रहा है.... "डरती हूं कही आपको खो न दूं"

वीर उसके चेहरे को ऊपर उठाकर…. आंखों में देखते हुए..

“बड़ा कमजोर विश्वास है तुम्हारा जो…. किसी के आने मात्र से ही डगमगाने लगा”

काव्या : सॉरी 🥺… पर मैं बहुत डर गई थी !!

वीर : और वो क्यूं…

काव्या : क्योंकि... वो लड़की बहुत खूबसूरत थी… और मुझे लगा .... (बस इतना कहकर, वो चुप हो गई)

वीर : खूबसूरत हम्मम !! पर मेरे लिए तो तुमसे ज्यादा खूबसूरत कोई दूजी है नहीं और मै तुम्हे पत्नी के रूप में पाकर बहुत खुश हूं....

"तुम उस… शांत झील की तरह हो काव्या, जिसे देखकर मन प्रसन्न होता है"…

काव्या : पर आपने तो, आज.... इस झील को अनदेखा कर दिया .....और बात भी नहीं की… बताईए... जरा ऐसा क्या खूबसूरत है.... इस झील में ??…

वीर ये सुनते ही काव्या पर झपट पड़ा….

उसके लिए तो मुझे इस झील का रसपान करना पड़ेगा… और फटाफट किस करते हुए, … उसके बदन से कपड़े उतारने लगा


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काव्या ने उसकी आँखें बंद कर रखी थी जबकि वीर उसकी खूबसूरती गुम… उसे निहार रहा था… .....

जब काफी देर…. काव्या को उसकी तरफ से... कोई हलचल महसूस नहीं हुई तो उसने अपनी आंखें खोल ली…. और वीर की नजरों का पीछा ....

वीर को यूं अपनी चूत घूरता देख... काव्या के हाथ.... झट से उसकी चूत पर आ ग़ए और उन्होंने उसे धक लिया !!

वीर : ये क्या!!!! मेरी झील, मुझे रसपान करने से रोक रही है !!

काव्या : आप वहां ऐसे देखो.... मत तो न, मुझे शर्म आती है…

वीर अपने कपड़े उतारते हुए.... ठीक है, बाबा नहीं देखूंगा… अब अपने हाथ तो हटाओ……

जैसे ही काव्या ने... चूत पर से हाथ हटाए….. वीर उस पर टूट पड़ा… और पागलों की तरह उसे चाटने लगा…

उसकी जीभ… इस वक्त अपना जादू दिखा रही थी, जब भी वो उसे चूत के अन्दर घुसेड़ता… काव्या धनुष 🏹 जैसे अकड़ जाती !! और उसके सिर को अपनी चूत पर... जोर से दबाने लगती


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इस समय उसके हाथ वीर के बालों पर थे.... तभी वीर ने उसकी चूचियों को पकड़ा और उन्हें जोर जोर से मसलना चालू कर दिया !!
काव्या, आह्ह्ह... अम्म... ऐसे ही.. ज.. जान और... और जोर से... और आह्ह्ह...सस इस्स.. आन्ह.... आन्ह और....जोर से मसलों इन्हें ओह... हां..


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वीर के लंड की ठोकर, इस दौरान... जब भी काव्या की गांड पर पड़ती….. वो सिहर जाती…

वीर : आह्ह्ह मेरी जान क्या बदन है तेरा !!…. क्या खुशबू है तेरे इस गरम बदन की… आज तो मै तेरे इस रसभरे बदन का सारा रस पी जाऊंगा

काव्या : आह्ह्ह… पी जाओ जी ...आपको किसने रोका है,।।।।। मैं आपकी हूं आप जो चाहे मेरे साथ करो… मैं आपको नहीं रोकूंगी…

बाहर, रंभा... जो आज फिर पानी पीने के लिए उठी थी…. इनकी आहों ने उसके... कदमों की दिशा बदल दी और वो खुद ब खुद.... वीर के रूम की दिशा में बढ़ने लगे…

उसके मन ने.... बहुत रोका उसे…. बेटा है वो तेरा… पर वर्षों पुरानी वासना दुबारा जागी थी….

मर्यादाओं में बंध इतनी आसानी से .... कैसे शांत हो जाती ???…

अंदर वीर और काव्या का रोमांश देखने के लिए उसने जगह ढूंढनी चाही…. पर उसे कोई जगह नहीं मिली….

अब उसके लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था इसीलिए वो वही रुककर उनकी आहों के सहारे खुद को शांत करने लगी..….

रंभा : आह्ह्ह... आह्ह्.... ये मुझे क्या हो रहा...मै खुद को रोक नहीं पा रही.. आह्ह्ह... अआह्ह्ह...


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वैसे आज... काव्या की आहे भी काफी तेज थी दिन में जो हुआ, शायद ये उसी का असर था…..

अब वीर ने पलटाकर उसको 69 पोजीशन में कर दिया…


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दोनों काफी देर.... इसी तरह एक दूसरे को मजा देते रहे.....

तभी वीर ने काव्या से लंड चूसने के लिए कहा…

और उसके बालों पर अपने हाथ फिराते हुए… आह्ह्ह एस्सस आह्ह्ह... ऐसे ही... शाबाश... आह्ह्ह...बस.... आह्ह्ह....क्या गरम मुंह है साली.... आह्ह्ह


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वीर को मजा आ रहा था इसीलिए बीच बीच में वो लंड काव्या गले तक पुश कर देता जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत होती…. पर इस सब की अब दोनों को आदत पड़ चुकी थी…

वहां से गप्प्प गलप्प्प…अग्घ… उग्घ अप्प्प…औख़... की आवाजे आ रही थी... जिन्हें सुनकर रंभा और भी ज्यादा गरम हो गई



थोड़ी ही देर में जब वीर का लंड…. “थूक और लार” के मिश्रण से चमकने लगा… तब उसने उससे काव्या के गालों पर चपत लगाई

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और फिर देर न करते हुए... उसे लिटा दिया....

अब वीर काव्या के चेहरे को देख रहा था... वहीं काव्या उससे नजरें चुरा रही थी... पर तड़प उसमें थी..

वो चाहती थी.... कि वीर जल्दी से उसकी चूत में लंड घुसाकर... उसे ठंडा कर दे...

तभी

वीर ने भी देर करना अनुचित समझा....और काव्या को कंधों से पकड़कर एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया......

काव्या की चीख पूरे कमरे में गूंज गई...


वो इसके लिए जरा भी तैयार नहीं थी.... उसे लगा वीर आराम से घुसाएगा... पर नहीं.....

उसे खुद को शांत करने के लिए उंगली मुंह में डालकर चूसनी पड़ी....

वहीं बाहर.... इस आवाज को सुनने के साथ ही रंभा खल्लाश हो गई... और जल्दी से किचन की ओर भागी...

वहीं वीर काव्या की जबरदस्त चुदाई कर रहा था... जिससे उसकी जबरदस्त चीखे निकला रही थी


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आह्ह्ह आह्ह्ह.... जान..आहह...बहुत दर्द.... आह्ह्ह.... धीरे.... सस्ससस... धीरे... आह्ह्ह....ओ.ओह...धीरे हम्मम....यस्सस... बेबी....या्यययससस याह्स !!

वीर उसे अनसुना कर रहा था इसीलिए उसने...... उसे पीछे की तरफ धकेल दिया

पर वीर ने लंड बाहर नहीं निकाला..... और वो उसे उसी अवस्था में चोदने लग गया...

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काव्या.... आह्ह्ह....आह्ह्ह नहीं तभी वीर ने पलटाकर उसे घोड़ी बना दिया... और इस बार लंड उसने बड़े आराम से घुसाया... और आराम से ही चोद रहा था...

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तभी काव्या फिर से,,.. आह्ह्ह तेज और तेज... आह्ह्ह... मां आह्ह्ह.... आउच आह्ह्ह.... हम्मम ईsssssssss और तभी वीर ने अचानक से एक जोर का धक्का दिया जिससे वो आगे कि तरफ गिर पड़ी....

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आह्ह्ह बेबी थोड़ा स्लो आह्ह्ह.... आह्ह्ह... बेबी.... आह्ह्ह.... आह्ह्ह.. यस.... ऐसे ही आह्ह्ह ..…आह्ह्ह...मजा.... आह्ह्ह रहा...है
तभी वीर ने एक अलग पोजीशन ट्राई की...

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आह्ह्ह... आह्ह्ह ऐसे.... ऐसे न... नाहीं... हट...ओ... आह्ह्ह... छोड़.. ओह ओह... दो... नहीं... रुक..आह्ह्ह .....जा. आह्ह्ह....प्लीज़

पर वीर ने उसकी एक नहीं सुनी.... क्योंकि उसे .....इसी पोजीशन में मजा आ रहा था...

और वह तब तक नहीं रुका जब तक... कि काव्या झड़ नहीं गई...

पर क्योंकि काव्या के झड़ने के बाद भी उसका नहीं हुआ था..... इसीलिए वो उसके बूब्स के बीच अपना लंड रगड़ने लगा....

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आह्ह्ह साली....आह्ह्ह... ऐसे ही......
ओ...आह्ह्ह आह्ह्ह और बस उसका होने ही वाला था।।।।।।

इसलिए वो काव्या के ऊपर आया और उसके पेट पर झड़ गया....

✨ कुछ देर बाद

जब वीर ने देखा..... काव्या सो चुकी है... तो वो चुपचाप.... घर से बाहर निकल गया...
.
.
.
.
.

✨धन्यवाद !
 

Looteraaa

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Dosto... Update kal nhi aa paya, kyunki site mere sath khel rhi thi... yahi karan h thik s edit nhi kiya hu adjust kr lena....
 

vihan27

Blood Makes Empire Not Tear
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Update 19




लकी के साथ हुई वारदात को 15 दिन होने को है…. पर माहौल काफी शांत है, कही ये किसी तूफान से.... पहले की शांति तो नहीं…

🤔🤔🤔
खैर चलिए.... चलते हैं, वापिस से वीर की ओर….


संडे का दिन था…. रंभा हमेशा की तरह.... सुबह ही अस्पताल के लिए निकल गई..... घर पर अब सिर्फ वीर, काव्या और रिया थे….

तभी डोरबेल बजती है !


काव्या : जी.. अ

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लड़की (धीमे स्वर में) : वीर, घर पर है... क्या ??

काव्या : जी हैं, पर.... आप ??

लड़की : मैं श्रेया..... "हम दोनों कॉलेज में साथ पढ़ते थे" !!

ये सुनते ही काव्या के दिमाग में.... 10 तरह के ख्याल आने लगे,..... उसने उससे अंदर से आने के लिए कहा…..

जैसे ही श्रेया हॉल में आई उसने, रिया और वीर.. को साथ बैठे देखा..… उन दोनों की नजरें भी उस पर गई.... पर कोई कुछ नही बोला…

चूंकि रिया, श्रेया से परिचित थी इसीलिए उसके मन में भी तरह–तरह के ख्याल आ रहे थे…. (जैसे अब ये यहां क्यों आई है.... और क्या लेने आई है ??? )

जबकि वीर, अपने में मग्न... चाय का कप हाथ में थामे, सिर्फ चाय पीने पे ध्यान दे रहा था…. बस किसी के कुछ कहने की देर थी...

काव्या ने इशारे से..... श्रेया को बैठने के लिए कहा, तभी...... वीर, श्रेया की तरफ देखे बगैर....

"बोलो किस लिए आई हो" !!

श्रेया, काव्या और रिया की ओर देखने के बाद….

"अकेले में बात हो सकती है, क्या" ??

वीर : जो बोलना है, साफ–साफ बोलो और यहीं बोलो !!

श्रेया यहां वहां देखने के साथ... "वीर"… सॉरी वो😔😔

वीर : सॉरी 🤨… किसलिए सॉरी…??

श्रेया : वो.. वो मैं यहां नहीं बोल सकती, प्लीज़ !!🥺🥺

"चार आँखें ये दृश्य देख रही थी"

इस बीच जैसे ही रिया की नजरें काव्या पर गई…. जो मन में दसियों प्रकार के, विचार लिए सन्न खड़ी थी…. उससे रहा नहीं गया.... उसने उसका हाथ पकड़ा और कमरे में ले गई…

वीर, काव्या को वहां से उदास जाते देखता रहा….. जिसने उसके दिमाग को और खराब कर दिया …

श्रेया : क्या सब पहले जैसा नहीं हो सक…. (इससे आगे कि वो कुछ कहती..... वीर ने उसका गला पकड़ लिया)

वीर : तुम, क्या पहले जैसा करना चाहती हो… ये मत समझना मुझे तुम्हारे बारे में कुछ पता नहीं…

श्रेया : प्लीज़ वीर.... सब भूल जाओ प्लीज़… मैं बहक गई थी.... लेकिन अब सब समझ गई हूं !!

वीर (गुस्से से) : अब क्या समझ गई हो तुम ..... और समझ क्या रखा है, तुमने मुझे..… जब मन चाहा छोड़ दिया जब मन चाहा वापिस आ गई…

श्रेया : ऐसा कुछ नहीं है वी….

वीर (चिल्लाकर): तो फिर कैसा है…

"श्रेया का गला छोड़ने के बाद".... (शांत स्वर से)…

"यहां से चली जाओ, तुम्हारे आने की वजह से मेरी वाइफ नाराज हो गई है,,,,, मेरा जरा भी मन नहीं कि मैं तुमसे कोई बात करूं"…

श्रेया : वो… वो छोटी लड़की तुम्हारी वाइफ है (🙄मतलब वीर का फोन इसी ने उठाया था)

वीर : हां वही है…. और अब तुम, यहां से जाओ..
"आज के बाद न यहां आना और न ही कॉल करना"...

श्रेया : ठीक है..... पर वीर हम आगे कनेक्ट में तो रह ही सकते है ना, दोस्त की तरह…

वीर : बिल्कुल नहीं, और तुम्हे मेरा नंबर कहां से मिला…

श्रेया : वो, सुमित से…

वीर : ठीक है, तुम जाओ...…



|| श्रेया के जाने के बाद वीर के दिमाग में फिर से सारी पुरानी बाते रिपीट होने लगी…. दरअसल हैकर एक्स ने वीर को 3 साल पहले ही श्रेया के पिताजी के बिजनेस बर्बाद होने की न्यूज़ दे दी थी… और जितना कर्जा उन पर था… उस हिसाब से अब तक सब तबाह हो जाना चाहिए़…

और रही बात श्रेया के नए प्यार की….. तो जो लैविश लाइफस्टाइल दिखा कर उसने श्रेया को अपनी तरफ अट्रैक्ट किया था वो खत्म हो गई, कारण था चैन मार्केटिंग कम्पनी का फ्रॉड निकल जाना…. उसी के कहने पर, श्रेया ने वीर से 17 हजार रुपए लिए थे… जो अंततः डूब गए ||



|| दूसरी तरफ श्रेया गुस्से से जा रही थी… 😡 उस दिन हॉस्पिटल में उसने , मुझे दिखाने के लिए ही उस लड़की गोद में उठाया था… मुझे लगा कोई बीमार…. (गुस्से से पैर पटकते हुए)…. पर वो तो उसकी वाइफ थी.... (श्रेया और सुमित, वीर के कॉन्टेक्ट में न होने की वजह से उसकी शादी से अनजान थे)… वहीं फोन काल पर श्रेया ने समझा कि वीर उससे बात नहीं करना चाहता इसीलिए किसी ओर से मतलब काव्या से ये सब करा रहा है ||


खैर एक बार फिर डोरबेल बजी

इस बार वीर ने दरवाजा खोला ….बाहर रंभा खड़ी थी….

दोनों अन्दर आए…. तो रंभा ने सबको खाने के लिए आवाज लगा दी

कुछ ही देर में, सब खाने की टेबल पर थे, सभी के चेहरों का रंग उड़ा.... देख ….रंभा

"कुछ हुआ है क्या" ??

सब एकसाथ : नहीं…

रंभा : खाने की टेबल पर ऐसे नहीं बैठते…. अगर किसी को कोई समस्या है तो बताओ फिर ही खाना शुरू करेंगे…

पर रंभा को किसी ने कुछ नहीं बताया उल्टा सभी के चेहरों पर अब झूठी मुस्कान थी, उसे लगा सब ठीक है… इसीलिए सभी लंच करने लगे…



~पुलिस थाना
✨भोपाल


डीएसपी ने लकी के केस पर पूरा जोर डाला हुआ था पर उसे... आगे बढ़ने के लिए कोई लीड नहीं मिल रही थी…. वो अभी तक मिले हिंट्स पर ही अपना सिर खपाकर कनक्लूजन ड्रा करने की कोशिश कर रहा था…

आज तक पुलिस यही मानती रही.... कि "किलर नंबर वन" ....एक आदमी है, पर "काव्या और यशस्वी" के बयान ने सारी तस्वीर ही बदल कर रख दी…

लकी की पीठ पर किलर नंबर वन का साइन मिलना दर्शाता है कि.... ये उसी का काम है पर पिछले दो सालों से जैसे केसेस सामने आए है….. उससे लगता नहीं... ये किलर नम्बर वन ने किया होगा !!

न बॉडी पर डायमंड कट के निशान.... न ही उसे उस तरह तड़पाया गया जिस तरह..... पिछले 2 सालों से किलर नंबर वन करता आ रहा है...

जब से उसने तड़पाना चालू किया है… जान से मारना तो मानो जैसे भूल ही गया है !!

कोई, आखिर इतनी सफाई से काम करके... कैसे चला गया???..... डीएसपी इसी सोच में डूबा हुआ था…

नाइटफॉल.. जो रात में एक्शन में आती थी ये पहली बार था…. जब उसने किसी को दिन में मारा था… कुल मिलाकर ये काम किसका.... ये पता लगा पाना नामुमकिन था..

अभी डीएसपी इन सब में अपना माथा पीट.... ही रहा था कि...... थाने में नाना की एंट्री होती है

नाना (बाहर से ही) : “नमस्कार डीएसपी साहब”..

डीएसपी : नमस्कार !! "एमएलए साब" नमस्कार !!

“करीब पहुंचकर” नाना : पता लगा कुछ ??..

डीएसपी : बस छानबीन जारी हैं…

नाना (दांत पीसकर): “छानबीन जारी है" मतलब…. ओह्ह् हम सब समझ गए

"एक बात कहे डीएसपी तू कातिल को बचाना चाहता है ना ...चल बचा के दिखा"…

डीएसपी : आप गलत समझ रहे है सर !!

नाना : गलत समझ रहा हूं, बेटीचोद… अब तू मुझे गलत–सही सिखायेगा

"तुझे पता लगाना होता तो तूने कबका.... उन लौंडियों को उठवा लिया होता"…

डीएसपी : ये क्या अनाप–सनाप बोल रहे हो, सर ??... आप होश में तो हो ??

नाना : होश में तो मैं अब आया हूं डीएसपी….. उन लौंडियों की वजह से ही मुन्ने की ये हालत है…. "देखता हूं उन्हें बचाने इस बार कौन आता है"…

डीएसपी का दिमाग खराब हो रहा था... जिस वजह से उसके सब्र का बांध टूट गया…. और उसे गुस्सा आ गया

😡😡😡
डीएसपी : तुझे पता है, तेरे मुन्ने ने कितनी जिंदगियां बर्बाद की है…. ये देख, ये पड़े सबूत….

और किन्हें उठवाने की बात कर रहा है…. उन्हें जिनकी जिंदगी तेरा मुन्ना बर्बाद करने वाला था…

कसम से विधायक "उस दिन अगर किलर की जगह मै होता, तो तेरा मुन्ना नहीं होता”


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नाना : जब टाईम बुरा चल रहा हो न डीएसपी….. तब कुत्ता भी सर पे मूत देता है… और तेरे इस लंबे भाषण को.........
"मैं याद रखूंगा"

डीएसपी : याद रखेगा ना…. ठीक है, निकल…

और टेबल पर हाथ पटकते हुए …. साला पुलिस में भी इसके खबरी हैं..…. आखिर लड़कियों की बात... इस तक पहुंची कैसे ???

डीएसपी सोच ही रहा था कि उसे.... सोनू याद आ गया और उसका दिमाग फिर खराब….

दरअसल सोनू के बयान के बाद हुई छानबीन से पता लगा….... कि लकी के सारे कृत्यों में.... ये भी सम्मिलित था और इस मादरचोद को सब पता था, लकी ने इसकी बहन के साथ क्या किया है…

डीएसपी (सोचते हुए) : अब इन लड़कियों का क्या करूं ?…. क्या उन्हें अलर्ट कर दूं ??… अरे नहीं, खामखां डर जायेगी… और कुछ देर और सोचने के बाद.... उसने अपने भरोसेमंद आदमी.... निगरानी पे लगा दिए….



✨ शाम के वक्त


दोपहर खाने के बाद से ही वीर और काव्या एक दूसरे के सामने नहीं आए… वीर को पता था इस मामले में वो जितनी एक्सप्लेनेशन देगा… बात उतनी बिगड़ेगी…. अब बस वो माहौल शांत होने का इंतेज़ार कर रहा था…

वहीं रंभा का आजकल खुश रहना किसी से छिपा नहीं था…. सालों बाद ऐसी रौनक उसके चेहरे पे आई थी….

इस शाम भी वो अस्पताल से खाना बनाकर अशोक के साथ लौट रही थी…. दोनों अब इतना घुल चुके थे कि… अशोक उसे सीधे रंभा कह कर बुलाता.… और वो प्यार से उसका जवाब देती…

पार्किंग में रंभा के दोनों हाथों को अपने हाथों में थामते हुए....

अशोक : "कब तक मैं तुम्हारी इस बाहरी सुंदरता को सराहता रहूंगा, रंभा…. अब तुम्हें इस डॉक्टर को अपने आंतरिक अंगों की जांच का मौका दे देना चाहिए़"…

रंभा (दूसरी तरफ सिर घुमाते हुए) : मैं ऐसा नहीं कर सकती अशोक जी !!

अशोक : आखिर क्यूँ..... क्या तुम मुझे इस काबिल नहीं समझती..

रंभा : वो बात नहीं है अशोक जी… हमें पहले बच्चों को.... अपने इस रिश्ते के बारे में बताना चाहिए…. फिर ही..

अशोक : देखो रंभा, यशी को तुम पसंद हो… और बेटी रिया तुमसे कई बार शादी के लिए कह चुकी है… हमारे साथ होने से शायद उसका भी शादी का डर निकल जाए… सोचो

रंभा (🤔) : पर..

अशोक : कोई पर–वर नहीं… तुम्हारे अकेले हो जाने के डर ने ही.... उसके डर को और बढ़ा रखा है…. शायद इसीलिए वो शादी ही नहीं करना चाहती !!

रंभा : आप ठीक कह रहे है, अशोक जी….लेकिन.. हम उन्हें ये सब बताएंगे कैसे !!

अशोक : एक काम करते हैं, कल मंदिर में शादी कर लेते है…..

रंभा (🤔) : पर, क्या ये ठीक… रहेगा !!

अशोक : बिल्कुल, “यशस्वी और रिया” हमारी दोनों बेटियां खुश हो जायेंगी…. पर फिलहाल के लिए इसे सरप्राइज़ रखते है....

...और समय आने पर उन्हें सब बता देंगे….

रंभा : ठीक है...

और आपसी रजामंदी के बाद अपने–अपने फ्लैट की ओर निकल गए…



✨ रात 8 बजे :


एक बार फिर, सभी डिनर टेबल पर साथ थे…. सुबह की घटना के बाद से “वीर और काव्या” में बात नहीं हुई थी और इस दौरान भी दोनों खामोश रहे…

बस काव्या बीच–बीच में नजरें उठाकर वीर को देखती और फिर झुका लेती…

"इस सब के बीच डिनर कंप्लीट हो गया"....

तभी वीर को एक ईमेल आया और वो बात करने छत पर चला गया….



✨ रात 11 बजे :


जैसे ही वीर कमरे में आया, काव्या वहां नहीं थी… उसने बाथरूम चेक किया, वो वहां भी नहीं थी…

तभी उसे....किसी के इसी तरफ, आने की आहट सुनाई दी.... वो समझ गया, कि कौन है... इसीलिए एक तरफ करवट लेकर सो गया …

टेबल पर पानी रखने के साथ ही, काव्या ने वीर की तरफ देखा... वो सो रहा था इसीलिए वो भी .... चुपचाप लेट गई…

काफी देर तक दोनों चुप रहे…. कोई कुछ नहीं बोला..... तभी वीर को उसकी पीठ पर गीलापन महसूस हुआ….

उसने पलटकर देखा...तो काव्या के आंसू थे…वो सिसक नहीं रही थी… फिर भी उसकी आँखों में इतने आंसू थे.... कि वीर से रहा नहीं गया

उसने उसको गले लगा लिया और माथे को चूमते हुए… पूछा “क्या हुआ मेरी जान को” ??

काव्या : वो वो… आज.. वो

वीर : आराम से… आराम से, पहले शांत हो जाओ..

थोड़ी देर बाद, जब काव्या का मन हल्का हो गया….

वीर : अब बताओ क्या बात है..?

काव्या : वो… वो आज मुझे पहली बार लगा.... किसी की वजह से मेरा विश्वास..... आप पर कमजोर हो रहा है.... "डरती हूं कही आपको खो न दूं"

वीर उसके चेहरे को ऊपर उठाकर…. आंखों में देखते हुए..

“बड़ा कमजोर विश्वास है तुम्हारा जो…. किसी के आने मात्र से ही डगमगाने लगा”

काव्या : सॉरी 🥺… पर मैं बहुत डर गई थी !!

वीर : और वो क्यूं…

काव्या : क्योंकि... वो लड़की बहुत खूबसूरत थी… और मुझे लगा .... (बस इतना कहकर, वो चुप हो गई)

वीर : खूबसूरत हम्मम !! पर मेरे लिए तो तुमसे ज्यादा खूबसूरत कोई दूजी है नहीं और मै तुम्हे पत्नी के रूप में पाकर बहुत खुश हूं....


"तुम उस… शांत झील की तरह हो काव्या, जिसे देखकर मन प्रसन्न होता है"…

काव्या : पर आपने तो, आज.... इस झील को अनदेखा कर दिया .....और बात भी नहीं की… बताईए... जरा ऐसा क्या खूबसूरत है.... इस झील में ??…

वीर ये सुनते ही काव्या पर झपट पड़ा….

उसके लिए तो मुझे इस झील का रसपान करना पड़ेगा… और फटाफट किस करते हुए, … उसके बदन से कपड़े उतारने लगा


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काव्या ने उसकी आँखें बंद कर रखी थी जबकि वीर उसकी खूबसूरती गुम… उसे निहार रहा था… .....

जब काफी देर…. काव्या को उसकी तरफ से... कोई हलचल महसूस नहीं हुई तो उसने अपनी आंखें खोल ली…. और वीर की नजरों का पीछा ....

वीर को यूं अपनी चूत घूरता देख... काव्या के हाथ.... झट से उसकी चूत पर आ ग़ए और उन्होंने उसे धक लिया !!

वीर : ये क्या!!!! मेरी झील, मुझे रसपान करने से रोक रही है !!

काव्या : आप वहां ऐसे देखो.... मत तो न, मुझे शर्म आती है…

वीर अपने कपड़े उतारते हुए.... ठीक है, बाबा नहीं देखूंगा… अब अपने हाथ तो हटाओ……

जैसे ही काव्या ने... चूत पर से हाथ हटाए….. वीर उस पर टूट पड़ा… और पागलों की तरह उसे चाटने लगा…

उसकी जीभ… इस वक्त अपना जादू दिखा रही थी, जब भी वो उसे चूत के अन्दर घुसेड़ता… काव्या धनुष 🏹 जैसे अकड़ जाती !! और उसके सिर को अपनी चूत पर... जोर से दबाने लगती


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इस समय उसके हाथ वीर के बालों पर थे.... तभी वीर ने उसकी चूचियों को पकड़ा और उन्हें जोर जोर से मसलना चालू कर दिया !!
काव्या, आह्ह्ह... अम्म... ऐसे ही.. ज.. जान और... और जोर से... और आह्ह्ह...सस इस्स.. आन्ह.... आन्ह और....जोर से मसलों इन्हें ओह... हां..


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वीर के लंड की ठोकर, इस दौरान... जब भी काव्या की गांड पर पड़ती….. वो सिहर जाती…

वीर : आह्ह्ह मेरी जान क्या बदन है तेरा !!…. क्या खुशबू है तेरे इस गरम बदन की… आज तो मै तेरे इस रसभरे बदन का सारा रस पी जाऊंगा

काव्या : आह्ह्ह… पी जाओ जी ...आपको किसने रोका है,।।।।। मैं आपकी हूं आप जो चाहे मेरे साथ करो… मैं आपको नहीं रोकूंगी…

बाहर, रंभा... जो आज फिर पानी पीने के लिए उठी थी…. इनकी आहों ने उसके... कदमों की दिशा बदल दी और वो खुद ब खुद.... वीर के रूम की दिशा में बढ़ने लगे…

उसके मन ने.... बहुत रोका उसे…. बेटा है वो तेरा… पर वर्षों पुरानी वासना दुबारा जागी थी….

मर्यादाओं में बंध इतनी आसानी से .... कैसे शांत हो जाती ???…

अंदर वीर और काव्या का रोमांश देखने के लिए उसने जगह ढूंढनी चाही…. पर उसे कोई जगह नहीं मिली….

अब उसके लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था इसीलिए वो वही रुककर उनकी आहों के सहारे खुद को शांत करने लगी..….

रंभा : आह्ह्ह... आह्ह्.... ये मुझे क्या हो रहा...मै खुद को रोक नहीं पा रही.. आह्ह्ह... अआह्ह्ह...


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वैसे आज... काव्या की आहे भी काफी तेज थी दिन में जो हुआ, शायद ये उसी का असर था…..

अब वीर ने पलटाकर उसको 69 पोजीशन में कर दिया…


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दोनों काफी देर.... इसी तरह एक दूसरे को मजा देते रहे.....

तभी वीर ने काव्या से लंड चूसने के लिए कहा…

और उसके बालों पर अपने हाथ फिराते हुए… आह्ह्ह एस्सस आह्ह्ह... ऐसे ही... शाबाश... आह्ह्ह...बस.... आह्ह्ह....क्या गरम मुंह है साली.... आह्ह्ह


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वीर को मजा आ रहा था इसीलिए बीच बीच में वो लंड काव्या गले तक पुश कर देता जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत होती…. पर इस सब की अब दोनों को आदत पड़ चुकी थी…

वहां से गप्प्प गलप्प्प…अग्घ… उग्घ अप्प्प…औख़... की आवाजे आ रही थी... जिन्हें सुनकर रंभा और भी ज्यादा गरम हो गई



थोड़ी ही देर में जब वीर का लंड…. “थूक और लार” के मिश्रण से चमकने लगा… तब उसने उससे काव्या के गालों पर चपत लगाई

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और फिर देर न करते हुए... उसे लिटा दिया....

अब वीर काव्या के चेहरे को देख रहा था... वहीं काव्या उससे नजरें चुरा रही थी... पर तड़प उसमें थी..

वो चाहती थी.... कि वीर जल्दी से उसकी चूत में लंड घुसाकर... उसे ठंडा कर दे...

तभी

वीर ने भी देर करना अनुचित समझा....और काव्या को कंधों से पकड़कर एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया......

काव्या की चीख पूरे कमरे में गूंज गई...


वो इसके लिए जरा भी तैयार नहीं थी.... उसे लगा वीर आराम से घुसाएगा... पर नहीं.....

उसे खुद को शांत करने के लिए उंगली मुंह में डालकर चूसनी पड़ी....

वहीं बाहर.... इस आवाज को सुनने के साथ ही रंभा खल्लाश हो गई... और जल्दी से किचन की ओर भागी...

वहीं वीर काव्या की जबरदस्त चुदाई कर रहा था... जिससे उसकी जबरदस्त चीखे निकला रही थी


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आह्ह्ह आह्ह्ह.... जान..आहह...बहुत दर्द.... आह्ह्ह.... धीरे.... सस्ससस... धीरे... आह्ह्ह....ओ.ओह...धीरे हम्मम....यस्सस... बेबी....या्यययससस याह्स !!

वीर उसे अनसुना कर रहा था इसीलिए उसने...... उसे पीछे की तरफ धकेल दिया

पर वीर ने लंड बाहर नहीं निकाला..... और वो उसे उसी अवस्था में चोदने लग गया...

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काव्या.... आह्ह्ह....आह्ह्ह नहीं तभी वीर ने पलटाकर उसे घोड़ी बना दिया... और इस बार लंड उसने बड़े आराम से घुसाया... और आराम से ही चोद रहा था...

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तभी काव्या फिर से,,.. आह्ह्ह तेज और तेज... आह्ह्ह... मां आह्ह्ह.... आउच आह्ह्ह.... हम्मम ईsssssssss और तभी वीर ने अचानक से एक जोर का धक्का दिया जिससे वो आगे कि तरफ गिर पड़ी....

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आह्ह्ह बेबी थोड़ा स्लो आह्ह्ह.... आह्ह्ह... बेबी.... आह्ह्ह.... आह्ह्ह.. यस.... ऐसे ही आह्ह्ह ..…आह्ह्ह...मजा.... आह्ह्ह रहा...है
तभी वीर ने एक अलग पोजीशन ट्राई की...

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आह्ह्ह... आह्ह्ह ऐसे.... ऐसे न... नाहीं... हट...ओ... आह्ह्ह... छोड़.. ओह ओह... दो... नहीं... रुक..आह्ह्ह .....जा. आह्ह्ह....प्लीज़

पर वीर ने उसकी एक नहीं सुनी.... क्योंकि उसे .....इसी पोजीशन में मजा आ रहा था...

और वह तब तक नहीं रुका जब तक... कि काव्या झड़ नहीं गई...

पर क्योंकि काव्या के झड़ने के बाद भी उसका नहीं हुआ था..... इसीलिए वो उसके बूब्स के बीच अपना लंड रगड़ने लगा....

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आह्ह्ह साली....आह्ह्ह... ऐसे ही......
ओ...आह्ह्ह आह्ह्ह और बस उसका होने ही वाला था।।।।।।

इसलिए वो काव्या के ऊपर आया और उसके पेट पर झड़ गया....

✨ कुछ देर बाद

जब वीर ने देखा..... काव्या सो चुकी है... तो वो चुपचाप.... घर से बाहर निकल गया...
.
.
.
.
.

✨धन्यवाद !
Badhiya update hai bhai, ab kahani ki parte dheere dheere khul rahi hai
 
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Sushil@10

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Update 19




लकी के साथ हुई वारदात को 15 दिन होने को है…. पर माहौल काफी शांत है, कही ये किसी तूफान से.... पहले की शांति तो नहीं…

🤔🤔🤔
खैर चलिए.... चलते हैं, वापिस से वीर की ओर….


संडे का दिन था…. रंभा हमेशा की तरह.... सुबह ही अस्पताल के लिए निकल गई..... घर पर अब सिर्फ वीर, काव्या और रिया थे….

तभी डोरबेल बजती है !


काव्या : जी.. अ

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लड़की (धीमे स्वर में) : वीर, घर पर है... क्या ??

काव्या : जी हैं, पर.... आप ??

लड़की : मैं श्रेया..... "हम दोनों कॉलेज में साथ पढ़ते थे" !!

ये सुनते ही काव्या के दिमाग में.... 10 तरह के ख्याल आने लगे,..... उसने उससे अंदर से आने के लिए कहा…..

जैसे ही श्रेया हॉल में आई उसने, रिया और वीर.. को साथ बैठे देखा..… उन दोनों की नजरें भी उस पर गई.... पर कोई कुछ नही बोला…

चूंकि रिया, श्रेया से परिचित थी इसीलिए उसके मन में भी तरह–तरह के ख्याल आ रहे थे…. (जैसे अब ये यहां क्यों आई है.... और क्या लेने आई है ??? )

जबकि वीर, अपने में मग्न... चाय का कप हाथ में थामे, सिर्फ चाय पीने पे ध्यान दे रहा था…. बस किसी के कुछ कहने की देर थी...

काव्या ने इशारे से..... श्रेया को बैठने के लिए कहा, तभी...... वीर, श्रेया की तरफ देखे बगैर....

"बोलो किस लिए आई हो" !!

श्रेया, काव्या और रिया की ओर देखने के बाद….

"अकेले में बात हो सकती है, क्या" ??

वीर : जो बोलना है, साफ–साफ बोलो और यहीं बोलो !!

श्रेया यहां वहां देखने के साथ... "वीर"… सॉरी वो😔😔

वीर : सॉरी 🤨… किसलिए सॉरी…??

श्रेया : वो.. वो मैं यहां नहीं बोल सकती, प्लीज़ !!🥺🥺

"चार आँखें ये दृश्य देख रही थी"

इस बीच जैसे ही रिया की नजरें काव्या पर गई…. जो मन में दसियों प्रकार के, विचार लिए सन्न खड़ी थी…. उससे रहा नहीं गया.... उसने उसका हाथ पकड़ा और कमरे में ले गई…

वीर, काव्या को वहां से उदास जाते देखता रहा….. जिसने उसके दिमाग को और खराब कर दिया …

श्रेया : क्या सब पहले जैसा नहीं हो सक…. (इससे आगे कि वो कुछ कहती..... वीर ने उसका गला पकड़ लिया)

वीर : तुम, क्या पहले जैसा करना चाहती हो… ये मत समझना मुझे तुम्हारे बारे में कुछ पता नहीं…

श्रेया : प्लीज़ वीर.... सब भूल जाओ प्लीज़… मैं बहक गई थी.... लेकिन अब सब समझ गई हूं !!

वीर (गुस्से से) : अब क्या समझ गई हो तुम ..... और समझ क्या रखा है, तुमने मुझे..… जब मन चाहा छोड़ दिया जब मन चाहा वापिस आ गई…

श्रेया : ऐसा कुछ नहीं है वी….

वीर (चिल्लाकर): तो फिर कैसा है…

"श्रेया का गला छोड़ने के बाद".... (शांत स्वर से)…

"यहां से चली जाओ, तुम्हारे आने की वजह से मेरी वाइफ नाराज हो गई है,,,,, मेरा जरा भी मन नहीं कि मैं तुमसे कोई बात करूं"…

श्रेया : वो… वो छोटी लड़की तुम्हारी वाइफ है (🙄मतलब वीर का फोन इसी ने उठाया था)

वीर : हां वही है…. और अब तुम, यहां से जाओ..
"आज के बाद न यहां आना और न ही कॉल करना"...

श्रेया : ठीक है..... पर वीर हम आगे कनेक्ट में तो रह ही सकते है ना, दोस्त की तरह…

वीर : बिल्कुल नहीं, और तुम्हे मेरा नंबर कहां से मिला…

श्रेया : वो, सुमित से…

वीर : ठीक है, तुम जाओ...…



|| श्रेया के जाने के बाद वीर के दिमाग में फिर से सारी पुरानी बाते रिपीट होने लगी…. दरअसल हैकर एक्स ने वीर को 3 साल पहले ही श्रेया के पिताजी के बिजनेस बर्बाद होने की न्यूज़ दे दी थी… और जितना कर्जा उन पर था… उस हिसाब से अब तक सब तबाह हो जाना चाहिए़…

और रही बात श्रेया के नए प्यार की….. तो जो लैविश लाइफस्टाइल दिखा कर उसने श्रेया को अपनी तरफ अट्रैक्ट किया था वो खत्म हो गई, कारण था चैन मार्केटिंग कम्पनी का फ्रॉड निकल जाना…. उसी के कहने पर, श्रेया ने वीर से 17 हजार रुपए लिए थे… जो अंततः डूब गए ||



|| दूसरी तरफ श्रेया गुस्से से जा रही थी… 😡 उस दिन हॉस्पिटल में उसने , मुझे दिखाने के लिए ही उस लड़की गोद में उठाया था… मुझे लगा कोई बीमार…. (गुस्से से पैर पटकते हुए)…. पर वो तो उसकी वाइफ थी.... (श्रेया और सुमित, वीर के कॉन्टेक्ट में न होने की वजह से उसकी शादी से अनजान थे)… वहीं फोन काल पर श्रेया ने समझा कि वीर उससे बात नहीं करना चाहता इसीलिए किसी ओर से मतलब काव्या से ये सब करा रहा है ||


खैर एक बार फिर डोरबेल बजी

इस बार वीर ने दरवाजा खोला ….बाहर रंभा खड़ी थी….

दोनों अन्दर आए…. तो रंभा ने सबको खाने के लिए आवाज लगा दी

कुछ ही देर में, सब खाने की टेबल पर थे, सभी के चेहरों का रंग उड़ा.... देख ….रंभा

"कुछ हुआ है क्या" ??

सब एकसाथ : नहीं…

रंभा : खाने की टेबल पर ऐसे नहीं बैठते…. अगर किसी को कोई समस्या है तो बताओ फिर ही खाना शुरू करेंगे…

पर रंभा को किसी ने कुछ नहीं बताया उल्टा सभी के चेहरों पर अब झूठी मुस्कान थी, उसे लगा सब ठीक है… इसीलिए सभी लंच करने लगे…



~पुलिस थाना
✨भोपाल


डीएसपी ने लकी के केस पर पूरा जोर डाला हुआ था पर उसे... आगे बढ़ने के लिए कोई लीड नहीं मिल रही थी…. वो अभी तक मिले हिंट्स पर ही अपना सिर खपाकर कनक्लूजन ड्रा करने की कोशिश कर रहा था…

आज तक पुलिस यही मानती रही.... कि "किलर नंबर वन" ....एक आदमी है, पर "काव्या और यशस्वी" के बयान ने सारी तस्वीर ही बदल कर रख दी…

लकी की पीठ पर किलर नंबर वन का साइन मिलना दर्शाता है कि.... ये उसी का काम है पर पिछले दो सालों से जैसे केसेस सामने आए है….. उससे लगता नहीं... ये किलर नम्बर वन ने किया होगा !!

न बॉडी पर डायमंड कट के निशान.... न ही उसे उस तरह तड़पाया गया जिस तरह..... पिछले 2 सालों से किलर नंबर वन करता आ रहा है...

जब से उसने तड़पाना चालू किया है… जान से मारना तो मानो जैसे भूल ही गया है !!

कोई, आखिर इतनी सफाई से काम करके... कैसे चला गया???..... डीएसपी इसी सोच में डूबा हुआ था…

नाइटफॉल.. जो रात में एक्शन में आती थी ये पहली बार था…. जब उसने किसी को दिन में मारा था… कुल मिलाकर ये काम किसका.... ये पता लगा पाना नामुमकिन था..

अभी डीएसपी इन सब में अपना माथा पीट.... ही रहा था कि...... थाने में नाना की एंट्री होती है

नाना (बाहर से ही) : “नमस्कार डीएसपी साहब”..

डीएसपी : नमस्कार !! "एमएलए साब" नमस्कार !!

“करीब पहुंचकर” नाना : पता लगा कुछ ??..

डीएसपी : बस छानबीन जारी हैं…

नाना (दांत पीसकर): “छानबीन जारी है" मतलब…. ओह्ह् हम सब समझ गए

"एक बात कहे डीएसपी तू कातिल को बचाना चाहता है ना ...चल बचा के दिखा"…

डीएसपी : आप गलत समझ रहे है सर !!

नाना : गलत समझ रहा हूं, बेटीचोद… अब तू मुझे गलत–सही सिखायेगा

"तुझे पता लगाना होता तो तूने कबका.... उन लौंडियों को उठवा लिया होता"…

डीएसपी : ये क्या अनाप–सनाप बोल रहे हो, सर ??... आप होश में तो हो ??

नाना : होश में तो मैं अब आया हूं डीएसपी….. उन लौंडियों की वजह से ही मुन्ने की ये हालत है…. "देखता हूं उन्हें बचाने इस बार कौन आता है"…

डीएसपी का दिमाग खराब हो रहा था... जिस वजह से उसके सब्र का बांध टूट गया…. और उसे गुस्सा आ गया

😡😡😡
डीएसपी : तुझे पता है, तेरे मुन्ने ने कितनी जिंदगियां बर्बाद की है…. ये देख, ये पड़े सबूत….

और किन्हें उठवाने की बात कर रहा है…. उन्हें जिनकी जिंदगी तेरा मुन्ना बर्बाद करने वाला था…

कसम से विधायक "उस दिन अगर किलर की जगह मै होता, तो तेरा मुन्ना नहीं होता”


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नाना : जब टाईम बुरा चल रहा हो न डीएसपी….. तब कुत्ता भी सर पे मूत देता है… और तेरे इस लंबे भाषण को.........
"मैं याद रखूंगा"

डीएसपी : याद रखेगा ना…. ठीक है, निकल…

और टेबल पर हाथ पटकते हुए …. साला पुलिस में भी इसके खबरी हैं..…. आखिर लड़कियों की बात... इस तक पहुंची कैसे ???

डीएसपी सोच ही रहा था कि उसे.... सोनू याद आ गया और उसका दिमाग फिर खराब….

दरअसल सोनू के बयान के बाद हुई छानबीन से पता लगा….... कि लकी के सारे कृत्यों में.... ये भी सम्मिलित था और इस मादरचोद को सब पता था, लकी ने इसकी बहन के साथ क्या किया है…

डीएसपी (सोचते हुए) : अब इन लड़कियों का क्या करूं ?…. क्या उन्हें अलर्ट कर दूं ??… अरे नहीं, खामखां डर जायेगी… और कुछ देर और सोचने के बाद.... उसने अपने भरोसेमंद आदमी.... निगरानी पे लगा दिए….



✨ शाम के वक्त


दोपहर खाने के बाद से ही वीर और काव्या एक दूसरे के सामने नहीं आए… वीर को पता था इस मामले में वो जितनी एक्सप्लेनेशन देगा… बात उतनी बिगड़ेगी…. अब बस वो माहौल शांत होने का इंतेज़ार कर रहा था…

वहीं रंभा का आजकल खुश रहना किसी से छिपा नहीं था…. सालों बाद ऐसी रौनक उसके चेहरे पे आई थी….

इस शाम भी वो अस्पताल से खाना बनाकर अशोक के साथ लौट रही थी…. दोनों अब इतना घुल चुके थे कि… अशोक उसे सीधे रंभा कह कर बुलाता.… और वो प्यार से उसका जवाब देती…

पार्किंग में रंभा के दोनों हाथों को अपने हाथों में थामते हुए....

अशोक : "कब तक मैं तुम्हारी इस बाहरी सुंदरता को सराहता रहूंगा, रंभा…. अब तुम्हें इस डॉक्टर को अपने आंतरिक अंगों की जांच का मौका दे देना चाहिए़"…

रंभा (दूसरी तरफ सिर घुमाते हुए) : मैं ऐसा नहीं कर सकती अशोक जी !!

अशोक : आखिर क्यूँ..... क्या तुम मुझे इस काबिल नहीं समझती..

रंभा : वो बात नहीं है अशोक जी… हमें पहले बच्चों को.... अपने इस रिश्ते के बारे में बताना चाहिए…. फिर ही..

अशोक : देखो रंभा, यशी को तुम पसंद हो… और बेटी रिया तुमसे कई बार शादी के लिए कह चुकी है… हमारे साथ होने से शायद उसका भी शादी का डर निकल जाए… सोचो

रंभा (🤔) : पर..

अशोक : कोई पर–वर नहीं… तुम्हारे अकेले हो जाने के डर ने ही.... उसके डर को और बढ़ा रखा है…. शायद इसीलिए वो शादी ही नहीं करना चाहती !!

रंभा : आप ठीक कह रहे है, अशोक जी….लेकिन.. हम उन्हें ये सब बताएंगे कैसे !!

अशोक : एक काम करते हैं, कल मंदिर में शादी कर लेते है…..

रंभा (🤔) : पर, क्या ये ठीक… रहेगा !!

अशोक : बिल्कुल, “यशस्वी और रिया” हमारी दोनों बेटियां खुश हो जायेंगी…. पर फिलहाल के लिए इसे सरप्राइज़ रखते है....

...और समय आने पर उन्हें सब बता देंगे….

रंभा : ठीक है...

और आपसी रजामंदी के बाद अपने–अपने फ्लैट की ओर निकल गए…



✨ रात 8 बजे :


एक बार फिर, सभी डिनर टेबल पर साथ थे…. सुबह की घटना के बाद से “वीर और काव्या” में बात नहीं हुई थी और इस दौरान भी दोनों खामोश रहे…

बस काव्या बीच–बीच में नजरें उठाकर वीर को देखती और फिर झुका लेती…

"इस सब के बीच डिनर कंप्लीट हो गया"....

तभी वीर को एक ईमेल आया और वो बात करने छत पर चला गया….



✨ रात 11 बजे :


जैसे ही वीर कमरे में आया, काव्या वहां नहीं थी… उसने बाथरूम चेक किया, वो वहां भी नहीं थी…

तभी उसे....किसी के इसी तरफ, आने की आहट सुनाई दी.... वो समझ गया, कि कौन है... इसीलिए एक तरफ करवट लेकर सो गया …

टेबल पर पानी रखने के साथ ही, काव्या ने वीर की तरफ देखा... वो सो रहा था इसीलिए वो भी .... चुपचाप लेट गई…

काफी देर तक दोनों चुप रहे…. कोई कुछ नहीं बोला..... तभी वीर को उसकी पीठ पर गीलापन महसूस हुआ….

उसने पलटकर देखा...तो काव्या के आंसू थे…वो सिसक नहीं रही थी… फिर भी उसकी आँखों में इतने आंसू थे.... कि वीर से रहा नहीं गया

उसने उसको गले लगा लिया और माथे को चूमते हुए… पूछा “क्या हुआ मेरी जान को” ??

काव्या : वो वो… आज.. वो

वीर : आराम से… आराम से, पहले शांत हो जाओ..

थोड़ी देर बाद, जब काव्या का मन हल्का हो गया….

वीर : अब बताओ क्या बात है..?

काव्या : वो… वो आज मुझे पहली बार लगा.... किसी की वजह से मेरा विश्वास..... आप पर कमजोर हो रहा है.... "डरती हूं कही आपको खो न दूं"

वीर उसके चेहरे को ऊपर उठाकर…. आंखों में देखते हुए..

“बड़ा कमजोर विश्वास है तुम्हारा जो…. किसी के आने मात्र से ही डगमगाने लगा”

काव्या : सॉरी 🥺… पर मैं बहुत डर गई थी !!

वीर : और वो क्यूं…

काव्या : क्योंकि... वो लड़की बहुत खूबसूरत थी… और मुझे लगा .... (बस इतना कहकर, वो चुप हो गई)

वीर : खूबसूरत हम्मम !! पर मेरे लिए तो तुमसे ज्यादा खूबसूरत कोई दूजी है नहीं और मै तुम्हे पत्नी के रूप में पाकर बहुत खुश हूं....


"तुम उस… शांत झील की तरह हो काव्या, जिसे देखकर मन प्रसन्न होता है"…

काव्या : पर आपने तो, आज.... इस झील को अनदेखा कर दिया .....और बात भी नहीं की… बताईए... जरा ऐसा क्या खूबसूरत है.... इस झील में ??…

वीर ये सुनते ही काव्या पर झपट पड़ा….

उसके लिए तो मुझे इस झील का रसपान करना पड़ेगा… और फटाफट किस करते हुए, … उसके बदन से कपड़े उतारने लगा


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काव्या ने उसकी आँखें बंद कर रखी थी जबकि वीर उसकी खूबसूरती गुम… उसे निहार रहा था… .....

जब काफी देर…. काव्या को उसकी तरफ से... कोई हलचल महसूस नहीं हुई तो उसने अपनी आंखें खोल ली…. और वीर की नजरों का पीछा ....

वीर को यूं अपनी चूत घूरता देख... काव्या के हाथ.... झट से उसकी चूत पर आ ग़ए और उन्होंने उसे धक लिया !!

वीर : ये क्या!!!! मेरी झील, मुझे रसपान करने से रोक रही है !!

काव्या : आप वहां ऐसे देखो.... मत तो न, मुझे शर्म आती है…

वीर अपने कपड़े उतारते हुए.... ठीक है, बाबा नहीं देखूंगा… अब अपने हाथ तो हटाओ……

जैसे ही काव्या ने... चूत पर से हाथ हटाए….. वीर उस पर टूट पड़ा… और पागलों की तरह उसे चाटने लगा…

उसकी जीभ… इस वक्त अपना जादू दिखा रही थी, जब भी वो उसे चूत के अन्दर घुसेड़ता… काव्या धनुष 🏹 जैसे अकड़ जाती !! और उसके सिर को अपनी चूत पर... जोर से दबाने लगती


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इस समय उसके हाथ वीर के बालों पर थे.... तभी वीर ने उसकी चूचियों को पकड़ा और उन्हें जोर जोर से मसलना चालू कर दिया !!
काव्या, आह्ह्ह... अम्म... ऐसे ही.. ज.. जान और... और जोर से... और आह्ह्ह...सस इस्स.. आन्ह.... आन्ह और....जोर से मसलों इन्हें ओह... हां..


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वीर के लंड की ठोकर, इस दौरान... जब भी काव्या की गांड पर पड़ती….. वो सिहर जाती…

वीर : आह्ह्ह मेरी जान क्या बदन है तेरा !!…. क्या खुशबू है तेरे इस गरम बदन की… आज तो मै तेरे इस रसभरे बदन का सारा रस पी जाऊंगा

काव्या : आह्ह्ह… पी जाओ जी ...आपको किसने रोका है,।।।।। मैं आपकी हूं आप जो चाहे मेरे साथ करो… मैं आपको नहीं रोकूंगी…

बाहर, रंभा... जो आज फिर पानी पीने के लिए उठी थी…. इनकी आहों ने उसके... कदमों की दिशा बदल दी और वो खुद ब खुद.... वीर के रूम की दिशा में बढ़ने लगे…

उसके मन ने.... बहुत रोका उसे…. बेटा है वो तेरा… पर वर्षों पुरानी वासना दुबारा जागी थी….

मर्यादाओं में बंध इतनी आसानी से .... कैसे शांत हो जाती ???…

अंदर वीर और काव्या का रोमांश देखने के लिए उसने जगह ढूंढनी चाही…. पर उसे कोई जगह नहीं मिली….

अब उसके लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था इसीलिए वो वही रुककर उनकी आहों के सहारे खुद को शांत करने लगी..….

रंभा : आह्ह्ह... आह्ह्.... ये मुझे क्या हो रहा...मै खुद को रोक नहीं पा रही.. आह्ह्ह... अआह्ह्ह...


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अब वीर ने पलटाकर उसको 69 पोजीशन में कर दिया…


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दोनों काफी देर.... इसी तरह एक दूसरे को मजा देते रहे.....

तभी वीर ने काव्या से लंड चूसने के लिए कहा…

और उसके बालों पर अपने हाथ फिराते हुए… आह्ह्ह एस्सस आह्ह्ह... ऐसे ही... शाबाश... आह्ह्ह...बस.... आह्ह्ह....क्या गरम मुंह है साली.... आह्ह्ह


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वीर को मजा आ रहा था इसीलिए बीच बीच में वो लंड काव्या गले तक पुश कर देता जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत होती…. पर इस सब की अब दोनों को आदत पड़ चुकी थी…

वहां से गप्प्प गलप्प्प…अग्घ… उग्घ अप्प्प…औख़... की आवाजे आ रही थी... जिन्हें सुनकर रंभा और भी ज्यादा गरम हो गई



थोड़ी ही देर में जब वीर का लंड…. “थूक और लार” के मिश्रण से चमकने लगा… तब उसने उससे काव्या के गालों पर चपत लगाई

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और फिर देर न करते हुए... उसे लिटा दिया....

अब वीर काव्या के चेहरे को देख रहा था... वहीं काव्या उससे नजरें चुरा रही थी... पर तड़प उसमें थी..

वो चाहती थी.... कि वीर जल्दी से उसकी चूत में लंड घुसाकर... उसे ठंडा कर दे...

तभी

वीर ने भी देर करना अनुचित समझा....और काव्या को कंधों से पकड़कर एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया......

काव्या की चीख पूरे कमरे में गूंज गई...


वो इसके लिए जरा भी तैयार नहीं थी.... उसे लगा वीर आराम से घुसाएगा... पर नहीं.....

उसे खुद को शांत करने के लिए उंगली मुंह में डालकर चूसनी पड़ी....

वहीं बाहर.... इस आवाज को सुनने के साथ ही रंभा खल्लाश हो गई... और जल्दी से किचन की ओर भागी...

वहीं वीर काव्या की जबरदस्त चुदाई कर रहा था... जिससे उसकी जबरदस्त चीखे निकला रही थी


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आह्ह्ह आह्ह्ह.... जान..आहह...बहुत दर्द.... आह्ह्ह.... धीरे.... सस्ससस... धीरे... आह्ह्ह....ओ.ओह...धीरे हम्मम....यस्सस... बेबी....या्यययससस याह्स !!

वीर उसे अनसुना कर रहा था इसीलिए उसने...... उसे पीछे की तरफ धकेल दिया

पर वीर ने लंड बाहर नहीं निकाला..... और वो उसे उसी अवस्था में चोदने लग गया...

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काव्या.... आह्ह्ह....आह्ह्ह नहीं तभी वीर ने पलटाकर उसे घोड़ी बना दिया... और इस बार लंड उसने बड़े आराम से घुसाया... और आराम से ही चोद रहा था...

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तभी काव्या फिर से,,.. आह्ह्ह तेज और तेज... आह्ह्ह... मां आह्ह्ह.... आउच आह्ह्ह.... हम्मम ईsssssssss और तभी वीर ने अचानक से एक जोर का धक्का दिया जिससे वो आगे कि तरफ गिर पड़ी....

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आह्ह्ह बेबी थोड़ा स्लो आह्ह्ह.... आह्ह्ह... बेबी.... आह्ह्ह.... आह्ह्ह.. यस.... ऐसे ही आह्ह्ह ..…आह्ह्ह...मजा.... आह्ह्ह रहा...है
तभी वीर ने एक अलग पोजीशन ट्राई की...

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आह्ह्ह... आह्ह्ह ऐसे.... ऐसे न... नाहीं... हट...ओ... आह्ह्ह... छोड़.. ओह ओह... दो... नहीं... रुक..आह्ह्ह .....जा. आह्ह्ह....प्लीज़

पर वीर ने उसकी एक नहीं सुनी.... क्योंकि उसे .....इसी पोजीशन में मजा आ रहा था...

और वह तब तक नहीं रुका जब तक... कि काव्या झड़ नहीं गई...

पर क्योंकि काव्या के झड़ने के बाद भी उसका नहीं हुआ था..... इसीलिए वो उसके बूब्स के बीच अपना लंड रगड़ने लगा....

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आह्ह्ह साली....आह्ह्ह... ऐसे ही......
ओ...आह्ह्ह आह्ह्ह और बस उसका होने ही वाला था।।।।।।

इसलिए वो काव्या के ऊपर आया और उसके पेट पर झड़ गया....

✨ कुछ देर बाद

जब वीर ने देखा..... काव्या सो चुकी है... तो वो चुपचाप.... घर से बाहर निकल गया...
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✨धन्यवाद !
Nice update and awesome story
 
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Arjunsingh287

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क्या बवाल चीज लिखें हो बे📝....

पड़ कर एक अलग सा ही नस्सा छा गया 😵‍💫

वीर और काव्या की स्टोरी थोड़ी हट के 🖋️ लिखी है आपने.

ऐसी कहानी📖 पहली बार कोई xforum पे लिख रहा है.

अब आगे देखना 👁️ है नानाजी और वीर का आमाना सामना कैसे होता है.

और इतने दिनों 🌞 के बाद श्रेया का वीर के पास आना इंट्रेस्टिंग है वो अब वीर को फिर से पाना चाहती है.

और वीर के साफ मना करने की वजह से उसे काव्या से 😡नफ़रत भी हो गई है
जो आगे चल कर काव्या के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है.

रम्भा जी और अशोक जी अपने ही काम मे लगे हुवे है, अब देखना 👁️ है उन की शादी को क्या वीर रिया अपनाते है या नहीं.

I am steel waiting for next update ✍️🩷🩷
 
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