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Update 11
थोड़ी देर बाद रानी मुझे सीढ़ियों से नीचे उतरती दिखी। मगर ये क्या उसने वही रात वाली उसकी चूतरस से भीगी कच्छी पहन रखा था। और अपने बूब्स को तोलिया से ढक रखा था। मुझे बड़ा गुस्सा आया यहां मै नंगा बैठा हुआ हु और इसे अपने पति के सामने नंगी आने में शर्म आ रही है। मैने रानी को अपने पास बुलाया। उसे कड़क आवाज में पूछा "किससे पूछकर तूने कपड़े पहने" रानी के पैर कांप रहे थे। क्योंकि अब तक वो जान चुकी थी कि मेरे गुस्से का अंजाम उसके गोरे गोरे गालों या बूब्स को चुकाना पड़ता है। मै "यहां मै नंगा बैठा हूं और तुझे कपड़े पहने है। जल्दी से सारे कपड़े उतार" वो अपने कपड़े उतारने लगी। कपड़े थे भी क्या एक तोलिया था जो सिर्फ उसके बूब्स पे रखा हुआ था और एक कच्छी थी। उसके कपड़े उतारने बाद मै बोला "तू तब तक कपड़े नहीं पहनेगी जब तक मैं न बोलूं" रानी वैसे भी डरी हुई थी उसने सहमति में सिर हिलाया। मेरी नजर उसके चूत पे पड़ी जो झांटे से घिरी थीं। इसलिए मैने कुछ सोचते हुए "जल्दी से खाना बना मुझे बाजार जाना है" रानी किचन में नंगी ही चली गई और मैं मोबाइल पर कुछ सामान ऑर्डर करने लगा। जिसका पता आपको आगे आने वाले अपडेट में मिलेगा। थोड़ी देर में खाना पीना भी हो गया। फिर मैने आवाज देके रानी को किचेन से डायनिंग टेबल के पास बुलाया। मै "मैं बाजार जा रहा हु घर का कुछ सामान भी आएगा?" रानी ने हां में सिर हिलाते हुए कहा "घर का राशन कुछ दिन में खत्म हो जाएगा" फिर मैने ऊपर अपने कमरे में जाके कपड़े पहने और घर से निकलने ही वाला था कि रानी ने मुझे पीछे से रोकते हुए कहा "सुनिए" मै पीछे मुड़ा तो रानी "जी वो मेरे कपड़े..." रानी की बात सुन मुझे हँसी आ गई और मैं बोला "तुझे कपड़े की क्या जरूरत तू तो नंगी ही माल लगती है" मेरे जवाब से रानी का चेहरा उतर गया। फिर मैने घर में बाहर से ताला लगाया और बाजार की ओर निकल गया। रस्ते भर मै सोचता रहा अगर रानी के बूब्स बड़े होते और उसमें दूध होता तो कितना मजा आता। मै जब मन चाहे उसके दूध पी पाता और उसके चूचियां को दबाने में भी कितना मजा आता। मगर मैं अभी बिल्कुल बच्चे नहीं चाहता था। तभी मुझे याद आया कि कही मैने पढ़ा था कि कुछ ऐसे इंजेक्शन होते है जिससे औरत के स्तन में बिना बच्चा पैदा किए दूध भरा जा सकता है। इन्हीं सब विचारों में खोया मै मॉल पहुंच गया। जहां मैं सीधे लेडीज सेक्शन में घुस गया। वहां मैने रानी के लिए 2 सूट और 2 लेगीस लिए। अब अगर रानी को कही बाहर ले जाना हो तो उसे नंगा तो नहीं न ले जा सकता था। मगर मैने जान बुझकर सूट रानी की साइज से 2 इंच छोटा और लेगीस एकदम चुस्त लिया था। फिर मै घर का राशन लेके वापस घर लौटने लगा। रस्ते में मुझे एक मेडिकल शॉप दिखा। जहां रुक कर मैने 3–4 फुल पैकेट कंडोम, चूत के बाल हटाने के लिए हेयर रिमूवल क्रीम, उत्तेजना बढ़ने वाली गोली और 2 सैनिटरी पैड के पैकेट लिए और चल दिया घर की तरफ। घर पहुंच कर जैसे ही मैने दरवाजा खोला तो पाया कि रानी कुर्सी पे बैठ के डाइनिंग टेबल पे नाश्ता कर रही है। मगर अभी भी वो नंगी थी थी। मुझे देखते ही वो कुर्सी से उठ खड़ी हुई। दोस्तो वैसे तो किसी को खाना खाने वक्त परेशान नहीं करना चाहिए। मगर मेरे इरादे तो कुछ और ही थे। मैने सारे सामान साइड में रखे और उसके पास पहुंचा। वो सहमी हुई थी और कांप रही थी। मैने अपने हथेली से उसके दोनों गोलों को पकड़ते हुए उससे पूछा "भूख लगी है?" रानी की नज़रे झुकी हुई थी। उसने कुछ बोला भी नहीं। वो दूध में रोटी मिलके खा रही थीं। अभी शायद उसने खाना शुरू ही किया था। मैने अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए पहले अपना पेंट खोला और वही कुर्सी पे बैठ गया। मै "पहले लन्ड खाना सिख ले फिर कुछ और खाना" बोलते हुए उससे नीचे बैठा दिया। और अपने लन्ड को उसके मुंह के करीब कर दिया।रानी समझ चुकी थी कि उससे अपनी पेट की भूख मिटाने के लिए पहले मेरे लन्ड की प्यास को बुझाना होगा। मगर उसे रात की घटना भी याद थी जब मैने अपना लन्ड उसके मुंह पे डाला था और उसका दंत मेरे लन्ड पे लग गया था तो मैने उसे कितना मारा था। यह तक कि उसका मूत तक निकल गया था। मैने उसके बालों को पीछे से पकड़ते हुए बोला "याद रहे तेरा दांत मेरे लन्ड पे नहीं लगना चाहिए, समझी?" रानी के मुंह में अब तक मेरा लन्ड घूस चुका था। इसलिए वो जबाव तो नहीं दे सकती थी। मगर उसने सिर हिलाया जैसे कहना चाह रखी हो इस बार मेरे लन्ड पे दंत नहीं लगने देगी। हालांकि रानी के दांत अभी भी मेरे लन्ड को हल्का छू रहे थे मगर चुकी मुझे उससे तकलीफ नहीं हो रही थी और रानी के लिए लंड चूसना कोई रोज का काम तो था नहीं इसलिए इस बार मैने उससे मारा नहीं। और मारता भी क्यों मै तो आंख बंद किए लंड चुसाई का मजा के रहा था। थोड़ी देर रानी आराम आराम से मेरे लन्ड को चुस्ती रही। अब मुझे अपने लन्ड में खून का प्रवाह तेज होता महसूस होने लगा था। इसलिए अब लंड चुसाई की कमान मैने अपने हाथ में ली। मतलब मैने अपने दोनों हाथों से रानी के चेहरे को पकड़ा और तेज तेज उसके मुंह को चोदने लगा। जैसे ही मुझे लगा कि मेरा माल निकलने वाला है मैने रानी के मुंह से लंड को निकाला और सारा माल रानी के दूध और रोटी के कटोरी में डाल दिया। कटोरी को देख मुझे ऐसा लग रहा था जैसे दूध के ऊपर घी तैर रहा हो। रानी अभी भी खास रही थी और अपने सांसों को काबू में करने में जुटी थी।
शेष अगले भाग में, आपको ये update कैसा लगा हमें बताए? और भाई लोग और उनकी दीदियों update अच्छा लगे तो Like कर देना।
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थोड़ी देर बाद रानी मुझे सीढ़ियों से नीचे उतरती दिखी। मगर ये क्या उसने वही रात वाली उसकी चूतरस से भीगी कच्छी पहन रखा था। और अपने बूब्स को तोलिया से ढक रखा था। मुझे बड़ा गुस्सा आया यहां मै नंगा बैठा हुआ हु और इसे अपने पति के सामने नंगी आने में शर्म आ रही है। मैने रानी को अपने पास बुलाया। उसे कड़क आवाज में पूछा "किससे पूछकर तूने कपड़े पहने" रानी के पैर कांप रहे थे। क्योंकि अब तक वो जान चुकी थी कि मेरे गुस्से का अंजाम उसके गोरे गोरे गालों या बूब्स को चुकाना पड़ता है। मै "यहां मै नंगा बैठा हूं और तुझे कपड़े पहने है। जल्दी से सारे कपड़े उतार" वो अपने कपड़े उतारने लगी। कपड़े थे भी क्या एक तोलिया था जो सिर्फ उसके बूब्स पे रखा हुआ था और एक कच्छी थी। उसके कपड़े उतारने बाद मै बोला "तू तब तक कपड़े नहीं पहनेगी जब तक मैं न बोलूं" रानी वैसे भी डरी हुई थी उसने सहमति में सिर हिलाया। मेरी नजर उसके चूत पे पड़ी जो झांटे से घिरी थीं। इसलिए मैने कुछ सोचते हुए "जल्दी से खाना बना मुझे बाजार जाना है" रानी किचन में नंगी ही चली गई और मैं मोबाइल पर कुछ सामान ऑर्डर करने लगा। जिसका पता आपको आगे आने वाले अपडेट में मिलेगा। थोड़ी देर में खाना पीना भी हो गया। फिर मैने आवाज देके रानी को किचेन से डायनिंग टेबल के पास बुलाया। मै "मैं बाजार जा रहा हु घर का कुछ सामान भी आएगा?" रानी ने हां में सिर हिलाते हुए कहा "घर का राशन कुछ दिन में खत्म हो जाएगा" फिर मैने ऊपर अपने कमरे में जाके कपड़े पहने और घर से निकलने ही वाला था कि रानी ने मुझे पीछे से रोकते हुए कहा "सुनिए" मै पीछे मुड़ा तो रानी "जी वो मेरे कपड़े..." रानी की बात सुन मुझे हँसी आ गई और मैं बोला "तुझे कपड़े की क्या जरूरत तू तो नंगी ही माल लगती है" मेरे जवाब से रानी का चेहरा उतर गया। फिर मैने घर में बाहर से ताला लगाया और बाजार की ओर निकल गया। रस्ते भर मै सोचता रहा अगर रानी के बूब्स बड़े होते और उसमें दूध होता तो कितना मजा आता। मै जब मन चाहे उसके दूध पी पाता और उसके चूचियां को दबाने में भी कितना मजा आता। मगर मैं अभी बिल्कुल बच्चे नहीं चाहता था। तभी मुझे याद आया कि कही मैने पढ़ा था कि कुछ ऐसे इंजेक्शन होते है जिससे औरत के स्तन में बिना बच्चा पैदा किए दूध भरा जा सकता है। इन्हीं सब विचारों में खोया मै मॉल पहुंच गया। जहां मैं सीधे लेडीज सेक्शन में घुस गया। वहां मैने रानी के लिए 2 सूट और 2 लेगीस लिए। अब अगर रानी को कही बाहर ले जाना हो तो उसे नंगा तो नहीं न ले जा सकता था। मगर मैने जान बुझकर सूट रानी की साइज से 2 इंच छोटा और लेगीस एकदम चुस्त लिया था। फिर मै घर का राशन लेके वापस घर लौटने लगा। रस्ते में मुझे एक मेडिकल शॉप दिखा। जहां रुक कर मैने 3–4 फुल पैकेट कंडोम, चूत के बाल हटाने के लिए हेयर रिमूवल क्रीम, उत्तेजना बढ़ने वाली गोली और 2 सैनिटरी पैड के पैकेट लिए और चल दिया घर की तरफ। घर पहुंच कर जैसे ही मैने दरवाजा खोला तो पाया कि रानी कुर्सी पे बैठ के डाइनिंग टेबल पे नाश्ता कर रही है। मगर अभी भी वो नंगी थी थी। मुझे देखते ही वो कुर्सी से उठ खड़ी हुई। दोस्तो वैसे तो किसी को खाना खाने वक्त परेशान नहीं करना चाहिए। मगर मेरे इरादे तो कुछ और ही थे। मैने सारे सामान साइड में रखे और उसके पास पहुंचा। वो सहमी हुई थी और कांप रही थी। मैने अपने हथेली से उसके दोनों गोलों को पकड़ते हुए उससे पूछा "भूख लगी है?" रानी की नज़रे झुकी हुई थी। उसने कुछ बोला भी नहीं। वो दूध में रोटी मिलके खा रही थीं। अभी शायद उसने खाना शुरू ही किया था। मैने अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए पहले अपना पेंट खोला और वही कुर्सी पे बैठ गया। मै "पहले लन्ड खाना सिख ले फिर कुछ और खाना" बोलते हुए उससे नीचे बैठा दिया। और अपने लन्ड को उसके मुंह के करीब कर दिया।रानी समझ चुकी थी कि उससे अपनी पेट की भूख मिटाने के लिए पहले मेरे लन्ड की प्यास को बुझाना होगा। मगर उसे रात की घटना भी याद थी जब मैने अपना लन्ड उसके मुंह पे डाला था और उसका दंत मेरे लन्ड पे लग गया था तो मैने उसे कितना मारा था। यह तक कि उसका मूत तक निकल गया था। मैने उसके बालों को पीछे से पकड़ते हुए बोला "याद रहे तेरा दांत मेरे लन्ड पे नहीं लगना चाहिए, समझी?" रानी के मुंह में अब तक मेरा लन्ड घूस चुका था। इसलिए वो जबाव तो नहीं दे सकती थी। मगर उसने सिर हिलाया जैसे कहना चाह रखी हो इस बार मेरे लन्ड पे दंत नहीं लगने देगी। हालांकि रानी के दांत अभी भी मेरे लन्ड को हल्का छू रहे थे मगर चुकी मुझे उससे तकलीफ नहीं हो रही थी और रानी के लिए लंड चूसना कोई रोज का काम तो था नहीं इसलिए इस बार मैने उससे मारा नहीं। और मारता भी क्यों मै तो आंख बंद किए लंड चुसाई का मजा के रहा था। थोड़ी देर रानी आराम आराम से मेरे लन्ड को चुस्ती रही। अब मुझे अपने लन्ड में खून का प्रवाह तेज होता महसूस होने लगा था। इसलिए अब लंड चुसाई की कमान मैने अपने हाथ में ली। मतलब मैने अपने दोनों हाथों से रानी के चेहरे को पकड़ा और तेज तेज उसके मुंह को चोदने लगा। जैसे ही मुझे लगा कि मेरा माल निकलने वाला है मैने रानी के मुंह से लंड को निकाला और सारा माल रानी के दूध और रोटी के कटोरी में डाल दिया। कटोरी को देख मुझे ऐसा लग रहा था जैसे दूध के ऊपर घी तैर रहा हो। रानी अभी भी खास रही थी और अपने सांसों को काबू में करने में जुटी थी।
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