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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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#173.

पर सभी के चेहरे पर शैफाली की वजह से एक मुस्कान आ गयी थी।

80 नंबर पर ऐस्टेरोयड बेल्ट लिखा था और कुछ पत्थर हवा में नाच रहे थे। 71 से 80 नंबर के बीच में जमीन से लगभग 1 फुट ऊपर, मिट्टी के कण हवा में तैर रहे थे।

उस पूरे रास्ते में ऊपर छत भी बनी थी, जिस पर 1 फुट मोटी पानी की पर्त जमा थी। पर वह पानी जमीन पर गिरने की जगह ऊपर की छत से चिपका हुआ था।

मिट्टी के ऊपर पहेली की नयी पंक्तियां लिखी हुई थीं-
“नीचे मिट्टी ऊपर पानी,
संग मिलें तो बने कहानी।”

“ये कैश्वर तो पूरा कविता कार बन गया है।” ऐलेक्स ने कहा- “कविता मार-मार कर हमें आगे बढ़ा रहा है।”

“मुझे अभी तक तो इस कार्य में कोई खास खतरा नहीं दिख रहा है।” तौफीक ने कहा- “लेकिन पिछले कार्यों को देखते हुए, मैं पूरी तरह से सहमत हूं कि यह कार्य भी इतनी आसानी से नहीं होगा।”

“कैप्टेन, क्या मैं आगे बढ़कर देखूं कि यहां कैसा खतरा है?” क्रिस्टी ने कहा।

सुयश ने कुछ ना होते देख क्रिस्टी को इशारा कर दिया। क्रिस्टी ने जैसे ही मिट्टी वाले भाग में कदम रखा, वह हवा में लहराती हुई ऊपर छत से जा चिपकी। क्रिस्टी अब पानी से पूरी तरह से भीग गई थी।

“कैप्टेन, इस पूरे क्षेत्र में गुरुत्वाकर्षण नहीं है।” क्रिस्टी ने जोर से आवाज लगाते हुए कहा- “और मैं यहां छत से आ चिपकी हूं, मैं अब स्वयं को छत से अलग भी नहीं कर पा रहीं हूं।”

“इन कविता की पंक्तियों से यह तो साफ है कि मिट्टी और पानी को आपस में मिलाना पड़ेगा, तभी कुछ संभव हो सकता है।” सुयश ने कहा।

“पर यह कैसे संभव है कैप्टेन?” जेनिथ ने कहा- “क्यों कि पानी, छत के गुरुत्वाकर्षण से बंधा है और मिट्टी जमीन पर है, ऐसे में दोनों को मिलाना कैसे संभव है?”

“क्रिस्टी, तुम अपने हाथों से पानी को जमीन की ओर फेंकने की कोशिश करके देखो।” सुयश ने क्रिस्टी को आवाज लगाकर कहा- “हो सकता है कि पानी जमीन तक पहुंच जाये?”

सुयश की बात सुन क्रिस्टी ने अपने हाथों की अंजुलि से, ऊपर का पानी नीचे जमीन की ओर फेंकने की कोशिश की, पर उसके द्वारा फेंके गये पानी का बहुत थोड़ा भाग ही नीचे हवा में तैर रही मिट्टी तक पहुंच
पाया और इतने थोड़े पानी को उस मिट्टी ने ऐसे सोख लिया, जैसे कि वह जन्म-जन्म से प्यासी हो।

पर जितनी मिट्टी ने पानी को सोखा, वह पानी मिट्टी में मिलकर जमीन पर ही रह गया।

उधर क्रिस्टी लगातार पानी को फेंकने की कोशिश कर रही थी, पर कुछ ही देर में क्रिस्टी के हाथ, अब उसका साथ छोड़ने लगे और क्रिस्टी ने थककर पानी फेंकना बंद कर दिया।

“तौफीक और ऐलेक्स तुम्हें भी वहां ऊपर क्रिस्टी की सहायता के लिये जाना पड़ेगा।” सुयश ने ऐलेक्स और तौफीक से कहा- “मुझे ऐसा लग रहा है कि जितनी मिट्टी, पानी से मिक्स हो जा रही है, उस पर जमीन की गुरुत्वाकर्षण शक्ति काम करने लगी है।”

सुयश की बात सुन ऐलेक्स और तौफीक भी मिट्टी के उस क्षेत्र में घुस कर क्रिस्टी के पास ऊपर जा पहुंचे।

अब ऐलेक्स और तौफीक ने भी पानी को अपने हाथों में भर-भर कर मिट्टी पर फेंकना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में मिट्टी का अधिकांश भाग जमीन के गुरुत्वाकर्षण के कारण, पानी से मिक्स होकर नीचे आ गया।

सुयश ने एक इशारे से अब ऐलेक्स और तौफीक को पानी फेंकने से मना कर दिया।

अब जमीन पर मिट्टी, पानी से मिक्स होने की वजह से, कीचड़ की मानिंद नजर आने लगी थी। यह देख सुयश ने अपना एक हाथ धीरे से मिट्टी वाले क्षेत्र में डाला।

सुयश को अपना हाथ हवा में उठता दिखाई दिया। अब सुयश ने वहां पड़ी कीचड़ को हाथ में उठा लिया।
कीचड़ के हाथ में उठाते ही सुयश का हाथ हवा में खिंचना बंद हो गया।

अब सुयश के पास दूसरी ओर जाने का एक तरीका मिल गया था। सुयश ने हाथ आगे बढ़ाकर धीरे-धीरे बहुत सी कीचड़ को अपनी ओर उठा कर रख लिया।

जब काफी कीचड़ इकठ्ठा हो गई, तो सुयश उस कीचड़ को अपने शरीर पर लगाने लगा।

सभी सुयश को यह करते देख रहे थे, पर सभी को सुयश का प्लान समझ आ गया था। कुछ ही देर में सुयश पूरा का पूरा कीचड़ से नहा गया। यह देख सुयश अब आगे बढ़कर मिट्टी वाले क्षेत्र में आ गया।

पर सुयश का शरीर साधारण तरीके से ही काम करता रहा। यह देख सुयश खुश हो गया क्यों कि आखिर उसका प्लान काम कर गया था।

सुयश अब धीरे-धीरे 80 नंबर की ओर बढ़ने लगा। कुछ ही देर में सुयश उस पार पहुंच गया।

सुयश के उस पार पहुंचते ही हवा में लटके ऐलेक्स, क्रिस्टी और तौफीक नीचे आ गिरे और मिट्टी वाला वह स्थान अब सामान्य काम करने लगा। सभी अब उस रास्ते को पार कर 80 नंबर पर आ गये।

तभी छत पर रुका पूरा पानी, एक बौछार की तरीके से सभी पर आकर गिरने लगा और इसी के साथ ऐलेक्स, क्रिस्टी, तौफीक और सुयश के शरीर पर लगी सारी कीचड़ उस पानी से धुल गई।

“ये कैश्वर इतना भी बुरा नहीं है, देखो हमारे नहाने की व्यवस्था भी कर दी उसने।” ऐलेक्स ने खुश होते हुए कहा।

सभी ऐलेक्स की बात सुनकर मुस्कुरा दिये। सभी अब आगे बढ़कर 81 नंबर पर आ गये।

81 नंबर पर 3 फुट का 1 तीर रखा था। 90 नंबर पर मंगल ग्रह था और 81 से 90 नंबर के बीच हवा में एक लाल रंग की गैस विद्यमान थी, जिसे देखने पर ही वह कोई खतरनाक गैस महसूस हो रही थी।

तभी उस लाल रंग की गैस ने हवा में एक पहेली लिखी।
“नहीं गिरे सिर से यह तीर,
चाहे जल जाये तेरा शरीर।”

“ये अब खतरनाक स्टेज है।” ऐलेक्स ने कविता को पढ़ने के बाद अपने होठों को गोल करते हुए कहा- “कविता की पंक्तियों से ही पता चल रहा है कि इस भाग को पार करने में बहुत मुश्किल आने वाली है।”

ऐलेक्स की बात से सभी सहमत थे।

“मुझे लगता है कि इस तीर को सिर पर रखकर इस क्षेत्र को पार करना होगा।” शैफाली ने कहा- “परंतु मुझे यह गैस जहरीली लग रही है और कविता की पंक्तियों में भी शरीर के जलने की बात की गई है।”

कुछ सोच जेनिथ ने अपना हाथ धीरे से उस गैस वाले हिस्से में डालकर देखा। परंतु जैसे ही जेनिथ का हाथ उस गैस के हिस्से में पहुंचा, उसका हाथ बुरी तरह जल गया।

“आह!” जेनिथ ने कराहते हुए अपना हाथ तुरंत अंदर कर लिया।

नक्षत्रा ने तुरंत जेनिथ के जले हुए हाथ को सही कर दिया, पर उस एक पल के अहसास ने ही जेनिथ की जान निकाल दी थी।

“यह गैस बहुत खतरनाक है, हममें से इसे कोई नहीं पार कर सकता।” सुयश ने सभी को देखते हुए कहा।

“मैं पार कर सकती हूं।” जेनिथ ने अपने दाँत को भींचते हुए कहा- “और यकीन मानिये, कैश्वर ने यह भाग मुझे और नक्षत्रा को ध्यान में रखकर ही बनाया है।”

“जेनिथ, माना कि नक्षत्रा ने तुम्हें तुरंत सही कर दिया, पर उस एक पल के लिये मैंने तुम्हारे चेहरे पर दर्द को महसूस किया था, तिलिस्म के इस भाग को पार करने में तुम्हें नर्क से भी भयानक दर्द का सामना करना पड़ेगा और यह दर्द असहनीय हो सकता है।” सुयश ने दर्द भरे स्वर में जेनिथ की ओर देखते हुए कहा।

“कैप्टेन, हमारे पास और कोई चारा भी नहीं है। अगर मैंने इस भाग को पार करने की कोशिश नहीं की, तो हममें से कोई भी इस तिलिस्म से कभी नहीं निकल पायेगा....इसलिये मुझे एक बार कोशिश तो करनी ही
होगी....भले ही मुझे कितने भी दर्द का सामना क्यों न करना पड़े और वैसे भी ईश्वर ने सिर्फ स्त्री को ही असहनीय दर्द से लड़ने की शक्ति दी है।

आपको पता है कैप्टेन कि एक आदमी का शरीर सिर्फ 45 डेल का दर्द सह सकता है, जबकि एक स्त्री का शरीर, बच्चे के जन्म के समय 57 डेल का दर्द सहता है, जो कि शरीर की 20 हड्डियों के टूटने के बराबर होता है। तो आज मैं भी तैयार हूं, इस असहनीय दर्द को सहने के लिये।” (‘डेल’ दर्द मापने की एक इकाई है, जिसे डोलोरी मीटर यंत्र के द्वारा मापा जाता है)

सभी आश्चर्य से जेनिथ का मुंह देख रहे थे, उनके पास जेनिथ से कुछ कहने के लिये शब्द ही नहीं थे, वह बस जेनिथ की हिम्मत को महसूस करने की कोशिश कर रहे थे।

“नक्षत्रा क्या तुम तैयार हो?” जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

“मैं तो हमेशा से तैयार हूं, पर तुम्हारी इन भावनाओं का मेरे पास भी कोई जवाब नहीं है, मुझे भी समझ नहीं आ रहा कि मैं तुम्हें क्या कहूं....मैं आज मान गया कि इस समूचे ब्रह्मांड में जितने भी जीव हैं, मनुष्य उन सबसे भावनाओं के मामले में सर्वश्रेष्ठ है। आज मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मैंने तुम्हें चुना।” नक्षत्रा ने कहा- “चलो जेनिथ, ये तुम्हारी ही नहीं, मेरी भी परीक्षा है, मुझे भी आज यह देखना है कि मैं किस गति से तुम्हारे शरीर को सही कर सकता हूं।”

यह सुन जेनिथ उस गैस वाले क्षेत्र में उतर गई। जेनिथ के उस क्षेत्र में उतरते ही गैस ने जेनिथ के पूरे शरीर को जलाना शुरु कर दिया।

एक असहनीय दर्द जेनिथ के शरीर में दौड़ गया। एक पल को तो जेनिथ का शरीर डगमगा भी गया, पर तुरंत ही जेनिथ ने अपने दाँतों को पूरी ताकत से भींचकर आगे बढ़ गयी।

जेनिथ के शरीर से खाल झूलने लगी, उसका चेहरा भी बुरी तरह से जल गया। नक्षत्रा पूरी ताकत से जेनिथ के शरीर के जख्मों को भरने की कोशिश कर रहा था, पर गैस का कहर निरंतर जारी था।

जेनिथ के कदम लड़खड़ा रहे थे, पर वह हार नहीं मान रही थी। सुयश और क्रिस्टी तो यह दृश्य देख ही नहीं पा रहे थे, उन्होंने अपना चेहरा दूसरी दिशा में कर लिया।

इस समय सभी की आँखों में जेनिथ के लिये आँसू थे, यहां तक कि तौफीक की भी.....पता नहीं क्यों आज तौफीक को बहुत बुरा महसूस हो रहा था, एक पल में उसे यह जलन अपने शरीर पर महसूस हो रही थी।

तौफीक को अफसोस था कि क्या यह वही लड़की है? जिसके द्वारा वह अपना बदला लेने आया था, उसे अपने पर धिक्कार हो रहा था।

जेनिथ के शरीर पर अब कई जगह पर हड्डियां भी नजर आने लगीं थीं, पर पता नहीं कैसा जुनून था ? कैसा यह बलिदान था कि जेनिथ रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

यह भी भला था कि उस गैस का जेनिथ के कपड़े पर कोई असर नहीं हुआ था।

अब बस 4 कदम की ही दूरी बची थी, पर अब जेनिथ के शरीर पर मूर्छा हावी होने लगी। यह 4 कदम की दूरी भी उसे मीलों बराबर की लगने लगी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता कि जेनिथ लहराकर वही गैस के क्षेत्र में गिर गई।

यह देख ऐलेक्स, शैफाली और तौफीक के मुंह से चीख निकल गई। इनकी चीखें सुनकर क्रिस्टी और सुयश भी भागकर आगे की ओर आ गये।

जेनिथ का शरीर उस गैस के क्षेत्र में सुलग रहाकोई सोच भी नहीं सकता था कि ऐसा हो जायेगा कि तभी एक चमत्कार हो गया।

ना जाने कहां से एक शक्तिशाली योद्धा वहां प्रकट हो गया, जिसने कि बैंगनी रंग की धातु की एक पोशाक पहन रखी थी।

उसके हाथों की मसल्स दूर से ही चमक रहे थे, उसके चेहरे पर देवताओं सा तेज था। उसने सिर पर एक सुनहरे रंग का पट्टी नुमा मुकुट भी लगा रखा था, जिसके बीच में एक कालें रंग की मणि लगी हुई थी। उस योद्धा के बाल सुनहरे थे।

सभी बिना पलकें झपकाये उस योद्धा को देख रहे थे। उस योद्धा ने जेनिथ का शरीर गैस वाले क्षेत्र से उठा कर 90 नंबर पर रखा और इसी के साथ हवा में कहीं गायब हो गया।

“वो कौन था कैप्टेन?” तौफीक ने सुयश की ओर देखते हुए कहा- “कैश्वर ने तो कहा था कि तिलिस्मा में हमारी कोई मदद नहीं कर सकता, फिर वह योद्धा यहां कैसे आ पहुंचा? और फिर जेनिथ को बचाकर गायब भी हो गया।”

“मुझे भी इसका कोई आइडिया नहीं है तौफीक?” सुयश ने ना में सिर हिलाते हुए कहा- “पर वह जो भी था, हमारे लिये तो ईश्वर के ही समान था क्यों कि उसने जेनिथ की जान बचाई है।

उधर जेनिथ के उस पार पहुंचते ही 81 से 90 के बीच की गैस स्वतः कहीं गायब हो गई।

अब सभी भागकर जेनिथ के पास पहुंच गये। नक्षत्रा अभी भी जेनिथ के शरीर को तेजी से सही कर रहा था। यह देख सभी जेनिथ से कुछ दूर खड़े हो गये।

आखिरकार लगभग 7 से 8 मिनट के अंदर नक्षत्रा ने जेनिथ को पूरी तरह से सही कर दिया। थोड़ी देर के बाद जेनिथ होश में भी आ गई।

वह आश्चर्य से सभी को देख रही थी- “मैं बच कैसे गई? मैं तो गैस का वह क्षेत्र पार नहीं कर पायी थी।”

जेनिथ की बात सुन क्रिस्टी ने कुछ देर पहले घटी पूरी घटना जेनिथ को अक्षरशः सुना दी।

यह सुन जेनिथ भी आश्चर्य में आ गई।

“नक्षत्रा क्या तुमने देखा उस रहस्यमयी योद्धा को?” जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

“नहीं जेनिथ, मैं तो उस समय पूरी ताकत से तुम्हें सही करने में लगा था इसलिये मैंने उस योद्धा को नहीं देखा।” नक्षत्रा ने कहा।

“चलो वह जो भी था, उसका बहुत-बहुत शुक्रिया बोलो, क्यों कि हम लोगों ने तो तुम्हें गैस में गिरते देख, तुम्हारे जीने की आस छोड़ दी थी, पर पता नहीं कहां से वह योद्धा आ गया?” सुयश ने जेनिथ से कहा- “चलो दोस्तों कुल मिलाकर सब कुछ अच्छा हुआ...अब आगे बढ़कर पृथ्वी को गति देते हैं।”

यह कहकर सुयश आगे बढ़कर 91 पर जाकर खड़ा हो गया। 100 नंबर पर अब रुकी हुई पृथ्वी साफ नजर आ रही थी, पर इस बार रास्ते में कुछ भी नहीं था।

“कैप्टेन इस 91 से 100 के बीच का रास्ता तो बिल्कुल साफ है, यहां तो कुछ भी नहीं है।” ऐलेक्स ने कहा।

काफी देर तक इधर-उधर देखने के बाद क्रिस्टी ने धीरे से अपना कदम 92 पर बढ़ाया, पर वह आगे जा नहीं सकी।

“कैप्टेन आगे कोई अदृश्य दीवार है, जो हमें आगे नहीं बढ़ने दे रही।” क्रिस्टी ने कहा।

तभी दीवार पर भाप से एक पहेली लिख गई-
“साँसों की ताकत पहचानो,
शब्दों से तुम लिखना जानो।”

“साँसों की ताकत? इसका मतलब समझ में नहीं आया?” तौफीक ने कहा।

“कैप्टेन अंकल, यहां का मौसम कुछ ठंडा है, देखिये हमारे बोलने पर हमारे मुंह से भाप निकल रही है।” शैफाली ने सुयश से कहा- “कहीं हमारे मुंह से निकली भाप ही तो हमारी साँसों की ताकत नहीं?”

“हो भी सकता है।” सुयश ने कहा - “पर हम अपने मुंह से निकली भाप पर क्या लिख सकते हैं?”

शैफाली ने कुछ सोच सामने की अदृश्य दीवार पर अपने मुंह से निकली भाप को मारा, अदृश्य दीवार पर किसी शीशे की तरह से भाप की पर्त चढ़ गई।

अब शैफाली ने कुछ सोच उस पर 92 लिख दिया, ऐसा करते ही शैफाली अब अदृश्य दीवार को पार कर 92 पर आ गई।

यह देख सभी ने ऐसा किया, अब सभी 92 नंबर पर थे। आगे एक और अदृश्य दीवार थी।

इस बार शैफाली ने सीधे 100 नंबर अपने मुंह से निकली भाप से लिख दिया और इसी के साथ वह सीधे 100 नंबर पर पृथ्वी के पास पहुंच गई।

शैफाली को वहां पहुंचते देख बाकी सभी ने भी वैसा ही किया। अब सभी 100 नंबर पर थे और आगे अब कोई भी अदृश्य दीवार मौजूद नहीं थी।

सुयश ने अब आगे बढ़कर पृथ्वी को अपने हाथों से घुमाने की कोशिश की, पर पृथ्वी अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई।

“अब इसे आगे कैसे घुमाना है?” सुयश ने पृथ्वी को देखते हुए कहा।

सभी अब चारो ओर देखने लगे, पर आसपास ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दिया, जिसके द्वारा वह पृथ्वी को घुमा सकें।

बहुत देर तक किसी को कुछ समझ नहीं आया, तभी शैफाली को अब भी सबके मुंह से भाप निकलती दिखाई दी।

यह देख शैफाली ने अपने मुंह से फिर से भाप छोड़ी और हवा में बिखरी उस भाप पर अंग्रेजी में ‘अर्थ रोटेशन’ लिख दिया।

शैफाली के ऐसा करते ही पृथ्वी ने नाचना शुरु कर दिया और इसी के साथ सभी फिर से पृथ्वी के ग्लोब के पास पहुंच गये।

“कैप्टेन, हमने 2 ऋतुओं को पार कर लिया, अब 2 ऋतुएं और बचीं हैं, तो हमें कुछ देर आराम करना है, या फिर मैं न्यूजीलैंड का फ्लैग लगा दूं, पृथ्वी के ग्लोब में।” ऐलेक्स ने सुयश की ओर देखकर पूछा।

“हम तिलिस्मा में हैं, यहां हमें थकान का अनुभव तो हो नहीं रहा। ऊपर से यहां का 1 दिन बाहर के 7 दिन के बराबर है, तो जितनी जल्दी हम यहां से निकल जाएं, उतना ही अच्छा है। ज्यादा देर करने में कहीं ऐसा ना हो जाये कि जब हम बाहर निकलें तो 50 वर्ष बीत चुके हों और हमारे जानने वाले सभी लोग बूढ़े हो चुके हों।” सुयश ने हंसते हुए कहा।

सुयश की बात सुन ऐलेक्स ने नीला फ्लैग उठाकर न्यूजीलैंड वाले स्थान पर लगा दिया।

हर बार की तरह जमीन पर बने न्यूजीलैंड का मानचित्र बड़ा होकर चमकने लगा। यह देख सभी एक-एक कर उस मानचित्र पर जाकर खड़े हो गये।

फिर रोशनी का एक झमाका हुआ और सभी अपने स्थान से गायब हो गये।


जारी रहेगा______✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Oh toh kahani ka villan Makota :roll3: hai! Poore aarka 🏝️ dweep par raaj karne ke liye usne Jaigan 🐛 ka sahara liya.

Aakruti 🤵‍♀️ ko Shalaka 👸 banakar usne Lufasa 🦁 aur Sanura 🐈‍⬛ ko bhi behka diya.

Supreme 🛳️ ke Bermuda Triangle mei aane ke baad jo bhi musibate aayi woh kahina kahi usi ke wajah se hai.

Supreme par se sabhi laasho ke gayab hone ka raaz toh woh keede 🐛 hi thay.

Lekin Lufasa 🐀 aur Sanura 🐈‍⬛ ne Aakruti aur Makota ki baate sunn hi li. Shayad ab ab woh sahi raasta chune.

Iss Aarka / Atlantis ke chakkar mei hum Supreme par hue sab se pehle khoon ki baat toh bhool hi gaye Aur kyo Aslam ne jahaaz ko Bermuda Triangle ki taraf moda! Aur Woh Vega ki kahani bhi wahi chhut gayi.
Lekin aaj ke iss update mei kaafi sawaalo ke jawaab mil hi gaye. :cool3:





Badhiya update bhai

To Toffik hi tha jisne sab kiya tha lekin loren ko kyun mar diya usne wo to usse pyar karta tha na or bechari loren bhi uske pyar me andhi hoker uski baten man rahi thi or jis jenith se badla lena chahta tha use abhi tak jinda rakha ha usne usse pyar ka natak karta ja raha ha Jenith ki sab sachhai pata pad gayi ha dekhte han kab tak Toffik babu apni sachhai chhupa pate han waise bure karm ki saja milti hi ha or jis jagah ye sab han usse lagta ha jaise Aslam miya ko saja mili usi prakar Toffik ka bhi number lag sakta ha

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

शानदार अपडेट राज भाई

Awesome update bhai , ab dheere dheere sb pta chal rh h kaishwar kaise bana aur usne kaise sb apne control mei kiya

अद्भुत अंक भाई

फिर से एक अप्रतिम रोमांचक और अद्भुत अविस्मरणीय मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
अब स्टॅचू ऑफ लिबर्टी की मुर्ती पर तिलिस्मा का नया खेल शुरु हो गया
खैर देखते हैं आगे
अगले रोमांचकारी धमाकेदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

Awesome update and nice story

ekdam romanch se bhara update likha hai ..shefali aur taufik ki guno se ek padaw paar kar liya sabne ..
christy ne bhi teesra padaw paar kar liya apne dancing mooves se jisme nakshatra ne bhi saath diya ..



Gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Ke-ishwar ne bhi ek se badhkar ek paheli banayi he......

Samanay aadmi to pehle hi dwar par fans jata.......

Keep rocking Bro

Nice update....

Bhut hi badhiya update Bhai
Sabhi ek ke baad ek paheliyo ko paar karte huye aage bad rahe hai
Sabhi paheliya bhi ek se badhkar ek hai

Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update.....

nice update

बहुत ही उम्दा और बेहतरीन लिखा है

Nice update.....

#171

इस अपडेट से काफ़ी हद तक वीनस और लुफासा की शक्तियों के पीछे का रहस्य सामने आया। उस दिन मस्त्य आक्रमण के दौरान वीनस ने जो कुछ किया था, उसका रहस्य मालूम पड़ा, और यह भी समझा कि उसको अन्य जीव जंतुओं की भाषा समझ में आती है। लुफासा के बारे में हमको वैसे तो पहले से ही पता था, लेकिन उसकी रूप बदलने वाली शक्ति का पता चल गया।
वैसे, जीव शक्ति वहाँ थी ही क्यों? क्या ज़रुरत आन पड़ी किसी को कि इस शक्ति को वहाँ रखा जाए?
अगला प्रश्न यह है कि समुद्री जीवों को किस शक्ति ने अपने वश में कर रखा था? शायद Rene और Orena ने?

रोचक है! एवरन भाई ने पहले से ही बेहद बढ़िया प्रतिक्रिया दी है, इसलिए नया लिखने लायक कुछ रह नहीं गया मेरे पास!

#172

भाई वो 'पॉप पॉप नाव' मैंने बचपन में दो बार खरीदी, और वो एक बार भी नहीं चली।
फिर विज्ञान प्रगति जैसी पत्रिकाओं में लिखे / सिखाए तरीके से अपनी नाव बनाने की कोशिश भी करी, लेकिन वो फिर भी नहीं चली। अंत में मैंने उस नाव से अपना हाथ झाड़ लिया और अपनी कागज़ वाली नाव से ही काम चला लिया।
एक और बात, पत्थरों से आग बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं है। स्साला आग बनाते बनाते अपना हाथ ही सुलग जाता है।
एक बार किया था - हाथ में छाले पड़ गए। माता जी ने कूटा सो अलग! हा हा हा!

वैसे सुयश की हरकतें दादी अम्मा जैसी हैं - हर चीज़ जमा कर के, घर ही अजायबघर बना लो! “सुयश - आर्यन” वाले मोड में भी है वो! बढ़िया।

एक और बात जो इस अपडेट से याद आ गई -- स्टिल्ट वाकिंग से ‘ब्योमकेश बख़्शी’ का वो एपिसोड याद आ गया जिसमें सर्कस का एक रिटायर्ड और बदमाश किस्म का आदमी, अपनी बीवी के मामा को भूत बन कर डरा रहा था। देखना - बढ़िया कहानी है वो।

एलेक्स और क्रिस्टी की मोहब्बत बढ़ती जा रही है - अगर अपने महबूब को नुकसान होते देख कर कोई ऐसी प्रतिक्रिया दे, तो यही समझना चाहिए कि मोहब्बत गहरी हो गई है।
इस अपडेट में दल के कई सदस्यों को एक एक कर के अपने बुद्धि और शारीरिक कौशल को दिखाने का अवसर मिला।
बढ़िया है!

रिव्यू की शुरुआत किया जाए

तीन सीढ़ियों को पार कर लिया गया, जिनमें हर एक की परिस्थिति बिल्कुल अलग थी। मेरा पसंदीदा तो नाव वाला सेटअप रहा, जिसमें बचपन की यादें ताज़ा हो गईं। मैंने भी बचपन में ऐसी नावें चलाई हैं घर में पड़े स्टील के बड़े टब में।

वैसे मुझे लगा था कि कंकाल की खोपड़ी को पूरी तरह निचोड़कर सब इस्तेमाल कर लिया गया होगा, लेकिन यह एक सरप्राइज़ था कि धागा अभी बचा हुआ था।
आग वाला सेटअप अच्छा था। आग वाला नहीं, बल्कि मुझे यह पानी वाले खेल जैसा लगा बिल्कुल Takeshi Castle की तरह, जहाँ ऐसे करतब दिखाकर चैलेंज पार करना होता है।

अब आगे क्रिस्टी को निपटाने का कोई प्लान है क्या?
क्योंकि मुझे कुछ-कुछ याद है कि चित्या के तिलिस्म में भी क्रिस्टी को निपटा दिया गया था। यहाँ भी कुछ वैसा ही लगा।

कहीं ऐसा तो नहीं कि यह आगे के लिए एक हिंट था कि क्रिस्टी को किसी मिलती-जुलती स्थिति में उड़ा दिया जाए?
मुझे क्या लगता है जू (लेखक) रीडर्स का काटना चाहता है।

पहले बार-बार क्रिस्टी को बचवाकर रीडर्स को विश्वास दिलाएगा कि “कुछ नहीं होने वाला, ये बच ही जाएगी”,
और फिर अचानक ऐसी स्थिति लाएगा जहाँ सच में क्रिस्टी को खत्म कर दिया जाए।

तब रीडर इंतज़ार करता रहेगा “पहले भी तो बच गई थी, अब भी बच जाएगी” और तभी झटका लगे।वैसे एलेक्स और क्रिस्टी का प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। मैं सोच रहा था कि लव स्टोरी में शलाका–आर्यन या व्योम–त्रिकाली जैसा कुछ देखने को मिलेगा ,लेकिन यहाँ इनकी कहानी बिल्कुल अलग ट्रैक पर चल रही है।

वैसे व्योम से याद आया हिमालय साइड और विदुम्ना वाला प्लॉट कहाँ है?तिलिस्म शुरू होने के बाद से उस चीज़ को स्क्रीन टाइम ही नहीं मिला।

अब जो रोमन नंबर वाला खेल था, वो काफ़ी मज़ेदार लगा।
साथ ही मैथ्स वाला पहला खेल भी बढ़िया था। मैं खुद सोचने लगा भाई, 30 कबूतरों को सम संख्या में सात बार उड़ाना ये तो काफ़ी मुश्किल था।लेकिन यहाँ कोई फॉर्मूला काम नहीं आया,यहाँ आया एक अलग लॉजिक, जिसमें रोमन नंबर की एंट्री थी।

वैसे यह दूसरी बार रोमन नंबर वाला खेल था,इससे पहले स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी में आया था।अब अगली बार अगर रोमन वाला खेल आया, तो मैं उसे डिकोड कर लूंगा।

ओवरऑल अपडेट अच्छा था।
Raj_sharma

Cristy wakai me kaafi hosiyar nikli bhai, kis himmat se sambhala, and agar baat kare shefaali ki to uska to kahna hi kya? Uske dimaak ka loha to hum shuru se maante hi aaye hain :bow::bow: khair ye padaav bhi paar ho gaya, and jaisa ki dikh hi raha hai ki har baar ka padaav aur muskil hota ja raha hai. Awesome update and superb amazing writing bhai 👌🏻👌🏻👌🏻

No

sirf Text ko mene hinglish se devngri me convert kiya
Due to my slow devnagri Typing

Screenshot-2025-1228-223305

Shaandar update

Well! Well! Well! Wonderful update brother, thodi si planets ki journey, thodi si numbers ki baatein, thodi si acrobatic ka scene aur thodi si pahli ka raaj sab kuchh mila kar banaya gaya ye update lajawab raha.
Keep going on like this. 🌹 🌹 🌹

Mind blowing update❤❤

intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....

Update posted friends :declare:
 

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parkas

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#173.

पर सभी के चेहरे पर शैफाली की वजह से एक मुस्कान आ गयी थी।

80 नंबर पर ऐस्टेरोयड बेल्ट लिखा था और कुछ पत्थर हवा में नाच रहे थे। 71 से 80 नंबर के बीच में जमीन से लगभग 1 फुट ऊपर, मिट्टी के कण हवा में तैर रहे थे।

उस पूरे रास्ते में ऊपर छत भी बनी थी, जिस पर 1 फुट मोटी पानी की पर्त जमा थी। पर वह पानी जमीन पर गिरने की जगह ऊपर की छत से चिपका हुआ था।

मिट्टी के ऊपर पहेली की नयी पंक्तियां लिखी हुई थीं-
“नीचे मिट्टी ऊपर पानी,
संग मिलें तो बने कहानी।”

“ये कैश्वर तो पूरा कविता कार बन गया है।” ऐलेक्स ने कहा- “कविता मार-मार कर हमें आगे बढ़ा रहा है।”

“मुझे अभी तक तो इस कार्य में कोई खास खतरा नहीं दिख रहा है।” तौफीक ने कहा- “लेकिन पिछले कार्यों को देखते हुए, मैं पूरी तरह से सहमत हूं कि यह कार्य भी इतनी आसानी से नहीं होगा।”

“कैप्टेन, क्या मैं आगे बढ़कर देखूं कि यहां कैसा खतरा है?” क्रिस्टी ने कहा।

सुयश ने कुछ ना होते देख क्रिस्टी को इशारा कर दिया। क्रिस्टी ने जैसे ही मिट्टी वाले भाग में कदम रखा, वह हवा में लहराती हुई ऊपर छत से जा चिपकी। क्रिस्टी अब पानी से पूरी तरह से भीग गई थी।

“कैप्टेन, इस पूरे क्षेत्र में गुरुत्वाकर्षण नहीं है।” क्रिस्टी ने जोर से आवाज लगाते हुए कहा- “और मैं यहां छत से आ चिपकी हूं, मैं अब स्वयं को छत से अलग भी नहीं कर पा रहीं हूं।”

“इन कविता की पंक्तियों से यह तो साफ है कि मिट्टी और पानी को आपस में मिलाना पड़ेगा, तभी कुछ संभव हो सकता है।” सुयश ने कहा।

“पर यह कैसे संभव है कैप्टेन?” जेनिथ ने कहा- “क्यों कि पानी, छत के गुरुत्वाकर्षण से बंधा है और मिट्टी जमीन पर है, ऐसे में दोनों को मिलाना कैसे संभव है?”

“क्रिस्टी, तुम अपने हाथों से पानी को जमीन की ओर फेंकने की कोशिश करके देखो।” सुयश ने क्रिस्टी को आवाज लगाकर कहा- “हो सकता है कि पानी जमीन तक पहुंच जाये?”

सुयश की बात सुन क्रिस्टी ने अपने हाथों की अंजुलि से, ऊपर का पानी नीचे जमीन की ओर फेंकने की कोशिश की, पर उसके द्वारा फेंके गये पानी का बहुत थोड़ा भाग ही नीचे हवा में तैर रही मिट्टी तक पहुंच
पाया और इतने थोड़े पानी को उस मिट्टी ने ऐसे सोख लिया, जैसे कि वह जन्म-जन्म से प्यासी हो।

पर जितनी मिट्टी ने पानी को सोखा, वह पानी मिट्टी में मिलकर जमीन पर ही रह गया।

उधर क्रिस्टी लगातार पानी को फेंकने की कोशिश कर रही थी, पर कुछ ही देर में क्रिस्टी के हाथ, अब उसका साथ छोड़ने लगे और क्रिस्टी ने थककर पानी फेंकना बंद कर दिया।

“तौफीक और ऐलेक्स तुम्हें भी वहां ऊपर क्रिस्टी की सहायता के लिये जाना पड़ेगा।” सुयश ने ऐलेक्स और तौफीक से कहा- “मुझे ऐसा लग रहा है कि जितनी मिट्टी, पानी से मिक्स हो जा रही है, उस पर जमीन की गुरुत्वाकर्षण शक्ति काम करने लगी है।”

सुयश की बात सुन ऐलेक्स और तौफीक भी मिट्टी के उस क्षेत्र में घुस कर क्रिस्टी के पास ऊपर जा पहुंचे।

अब ऐलेक्स और तौफीक ने भी पानी को अपने हाथों में भर-भर कर मिट्टी पर फेंकना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में मिट्टी का अधिकांश भाग जमीन के गुरुत्वाकर्षण के कारण, पानी से मिक्स होकर नीचे आ गया।

सुयश ने एक इशारे से अब ऐलेक्स और तौफीक को पानी फेंकने से मना कर दिया।

अब जमीन पर मिट्टी, पानी से मिक्स होने की वजह से, कीचड़ की मानिंद नजर आने लगी थी। यह देख सुयश ने अपना एक हाथ धीरे से मिट्टी वाले क्षेत्र में डाला।

सुयश को अपना हाथ हवा में उठता दिखाई दिया। अब सुयश ने वहां पड़ी कीचड़ को हाथ में उठा लिया।
कीचड़ के हाथ में उठाते ही सुयश का हाथ हवा में खिंचना बंद हो गया।

अब सुयश के पास दूसरी ओर जाने का एक तरीका मिल गया था। सुयश ने हाथ आगे बढ़ाकर धीरे-धीरे बहुत सी कीचड़ को अपनी ओर उठा कर रख लिया।

जब काफी कीचड़ इकठ्ठा हो गई, तो सुयश उस कीचड़ को अपने शरीर पर लगाने लगा।

सभी सुयश को यह करते देख रहे थे, पर सभी को सुयश का प्लान समझ आ गया था। कुछ ही देर में सुयश पूरा का पूरा कीचड़ से नहा गया। यह देख सुयश अब आगे बढ़कर मिट्टी वाले क्षेत्र में आ गया।

पर सुयश का शरीर साधारण तरीके से ही काम करता रहा। यह देख सुयश खुश हो गया क्यों कि आखिर उसका प्लान काम कर गया था।

सुयश अब धीरे-धीरे 80 नंबर की ओर बढ़ने लगा। कुछ ही देर में सुयश उस पार पहुंच गया।

सुयश के उस पार पहुंचते ही हवा में लटके ऐलेक्स, क्रिस्टी और तौफीक नीचे आ गिरे और मिट्टी वाला वह स्थान अब सामान्य काम करने लगा। सभी अब उस रास्ते को पार कर 80 नंबर पर आ गये।

तभी छत पर रुका पूरा पानी, एक बौछार की तरीके से सभी पर आकर गिरने लगा और इसी के साथ ऐलेक्स, क्रिस्टी, तौफीक और सुयश के शरीर पर लगी सारी कीचड़ उस पानी से धुल गई।

“ये कैश्वर इतना भी बुरा नहीं है, देखो हमारे नहाने की व्यवस्था भी कर दी उसने।” ऐलेक्स ने खुश होते हुए कहा।

सभी ऐलेक्स की बात सुनकर मुस्कुरा दिये। सभी अब आगे बढ़कर 81 नंबर पर आ गये।

81 नंबर पर 3 फुट का 1 तीर रखा था। 90 नंबर पर मंगल ग्रह था और 81 से 90 नंबर के बीच हवा में एक लाल रंग की गैस विद्यमान थी, जिसे देखने पर ही वह कोई खतरनाक गैस महसूस हो रही थी।

तभी उस लाल रंग की गैस ने हवा में एक पहेली लिखी।
“नहीं गिरे सिर से यह तीर,
चाहे जल जाये तेरा शरीर।”

“ये अब खतरनाक स्टेज है।” ऐलेक्स ने कविता को पढ़ने के बाद अपने होठों को गोल करते हुए कहा- “कविता की पंक्तियों से ही पता चल रहा है कि इस भाग को पार करने में बहुत मुश्किल आने वाली है।”

ऐलेक्स की बात से सभी सहमत थे।

“मुझे लगता है कि इस तीर को सिर पर रखकर इस क्षेत्र को पार करना होगा।” शैफाली ने कहा- “परंतु मुझे यह गैस जहरीली लग रही है और कविता की पंक्तियों में भी शरीर के जलने की बात की गई है।”

कुछ सोच जेनिथ ने अपना हाथ धीरे से उस गैस वाले हिस्से में डालकर देखा। परंतु जैसे ही जेनिथ का हाथ उस गैस के हिस्से में पहुंचा, उसका हाथ बुरी तरह जल गया।

“आह!” जेनिथ ने कराहते हुए अपना हाथ तुरंत अंदर कर लिया।

नक्षत्रा ने तुरंत जेनिथ के जले हुए हाथ को सही कर दिया, पर उस एक पल के अहसास ने ही जेनिथ की जान निकाल दी थी।

“यह गैस बहुत खतरनाक है, हममें से इसे कोई नहीं पार कर सकता।” सुयश ने सभी को देखते हुए कहा।

“मैं पार कर सकती हूं।” जेनिथ ने अपने दाँत को भींचते हुए कहा- “और यकीन मानिये, कैश्वर ने यह भाग मुझे और नक्षत्रा को ध्यान में रखकर ही बनाया है।”

“जेनिथ, माना कि नक्षत्रा ने तुम्हें तुरंत सही कर दिया, पर उस एक पल के लिये मैंने तुम्हारे चेहरे पर दर्द को महसूस किया था, तिलिस्म के इस भाग को पार करने में तुम्हें नर्क से भी भयानक दर्द का सामना करना पड़ेगा और यह दर्द असहनीय हो सकता है।” सुयश ने दर्द भरे स्वर में जेनिथ की ओर देखते हुए कहा।

“कैप्टेन, हमारे पास और कोई चारा भी नहीं है। अगर मैंने इस भाग को पार करने की कोशिश नहीं की, तो हममें से कोई भी इस तिलिस्म से कभी नहीं निकल पायेगा....इसलिये मुझे एक बार कोशिश तो करनी ही
होगी....भले ही मुझे कितने भी दर्द का सामना क्यों न करना पड़े और वैसे भी ईश्वर ने सिर्फ स्त्री को ही असहनीय दर्द से लड़ने की शक्ति दी है।

आपको पता है कैप्टेन कि एक आदमी का शरीर सिर्फ 45 डेल का दर्द सह सकता है, जबकि एक स्त्री का शरीर, बच्चे के जन्म के समय 57 डेल का दर्द सहता है, जो कि शरीर की 20 हड्डियों के टूटने के बराबर होता है। तो आज मैं भी तैयार हूं, इस असहनीय दर्द को सहने के लिये।” (‘डेल’ दर्द मापने की एक इकाई है, जिसे डोलोरी मीटर यंत्र के द्वारा मापा जाता है)

सभी आश्चर्य से जेनिथ का मुंह देख रहे थे, उनके पास जेनिथ से कुछ कहने के लिये शब्द ही नहीं थे, वह बस जेनिथ की हिम्मत को महसूस करने की कोशिश कर रहे थे।

“नक्षत्रा क्या तुम तैयार हो?” जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

“मैं तो हमेशा से तैयार हूं, पर तुम्हारी इन भावनाओं का मेरे पास भी कोई जवाब नहीं है, मुझे भी समझ नहीं आ रहा कि मैं तुम्हें क्या कहूं....मैं आज मान गया कि इस समूचे ब्रह्मांड में जितने भी जीव हैं, मनुष्य उन सबसे भावनाओं के मामले में सर्वश्रेष्ठ है। आज मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मैंने तुम्हें चुना।” नक्षत्रा ने कहा- “चलो जेनिथ, ये तुम्हारी ही नहीं, मेरी भी परीक्षा है, मुझे भी आज यह देखना है कि मैं किस गति से तुम्हारे शरीर को सही कर सकता हूं।”

यह सुन जेनिथ उस गैस वाले क्षेत्र में उतर गई। जेनिथ के उस क्षेत्र में उतरते ही गैस ने जेनिथ के पूरे शरीर को जलाना शुरु कर दिया।

एक असहनीय दर्द जेनिथ के शरीर में दौड़ गया। एक पल को तो जेनिथ का शरीर डगमगा भी गया, पर तुरंत ही जेनिथ ने अपने दाँतों को पूरी ताकत से भींचकर आगे बढ़ गयी।

जेनिथ के शरीर से खाल झूलने लगी, उसका चेहरा भी बुरी तरह से जल गया। नक्षत्रा पूरी ताकत से जेनिथ के शरीर के जख्मों को भरने की कोशिश कर रहा था, पर गैस का कहर निरंतर जारी था।

जेनिथ के कदम लड़खड़ा रहे थे, पर वह हार नहीं मान रही थी। सुयश और क्रिस्टी तो यह दृश्य देख ही नहीं पा रहे थे, उन्होंने अपना चेहरा दूसरी दिशा में कर लिया।

इस समय सभी की आँखों में जेनिथ के लिये आँसू थे, यहां तक कि तौफीक की भी.....पता नहीं क्यों आज तौफीक को बहुत बुरा महसूस हो रहा था, एक पल में उसे यह जलन अपने शरीर पर महसूस हो रही थी।

तौफीक को अफसोस था कि क्या यह वही लड़की है? जिसके द्वारा वह अपना बदला लेने आया था, उसे अपने पर धिक्कार हो रहा था।

जेनिथ के शरीर पर अब कई जगह पर हड्डियां भी नजर आने लगीं थीं, पर पता नहीं कैसा जुनून था ? कैसा यह बलिदान था कि जेनिथ रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

यह भी भला था कि उस गैस का जेनिथ के कपड़े पर कोई असर नहीं हुआ था।

अब बस 4 कदम की ही दूरी बची थी, पर अब जेनिथ के शरीर पर मूर्छा हावी होने लगी। यह 4 कदम की दूरी भी उसे मीलों बराबर की लगने लगी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता कि जेनिथ लहराकर वही गैस के क्षेत्र में गिर गई।

यह देख ऐलेक्स, शैफाली और तौफीक के मुंह से चीख निकल गई। इनकी चीखें सुनकर क्रिस्टी और सुयश भी भागकर आगे की ओर आ गये।

जेनिथ का शरीर उस गैस के क्षेत्र में सुलग रहाकोई सोच भी नहीं सकता था कि ऐसा हो जायेगा कि तभी एक चमत्कार हो गया।

ना जाने कहां से एक शक्तिशाली योद्धा वहां प्रकट हो गया, जिसने कि बैंगनी रंग की धातु की एक पोशाक पहन रखी थी।

उसके हाथों की मसल्स दूर से ही चमक रहे थे, उसके चेहरे पर देवताओं सा तेज था। उसने सिर पर एक सुनहरे रंग का पट्टी नुमा मुकुट भी लगा रखा था, जिसके बीच में एक कालें रंग की मणि लगी हुई थी। उस योद्धा के बाल सुनहरे थे।

सभी बिना पलकें झपकाये उस योद्धा को देख रहे थे। उस योद्धा ने जेनिथ का शरीर गैस वाले क्षेत्र से उठा कर 90 नंबर पर रखा और इसी के साथ हवा में कहीं गायब हो गया।

“वो कौन था कैप्टेन?” तौफीक ने सुयश की ओर देखते हुए कहा- “कैश्वर ने तो कहा था कि तिलिस्मा में हमारी कोई मदद नहीं कर सकता, फिर वह योद्धा यहां कैसे आ पहुंचा? और फिर जेनिथ को बचाकर गायब भी हो गया।”

“मुझे भी इसका कोई आइडिया नहीं है तौफीक?” सुयश ने ना में सिर हिलाते हुए कहा- “पर वह जो भी था, हमारे लिये तो ईश्वर के ही समान था क्यों कि उसने जेनिथ की जान बचाई है।

उधर जेनिथ के उस पार पहुंचते ही 81 से 90 के बीच की गैस स्वतः कहीं गायब हो गई।

अब सभी भागकर जेनिथ के पास पहुंच गये। नक्षत्रा अभी भी जेनिथ के शरीर को तेजी से सही कर रहा था। यह देख सभी जेनिथ से कुछ दूर खड़े हो गये।

आखिरकार लगभग 7 से 8 मिनट के अंदर नक्षत्रा ने जेनिथ को पूरी तरह से सही कर दिया। थोड़ी देर के बाद जेनिथ होश में भी आ गई।

वह आश्चर्य से सभी को देख रही थी- “मैं बच कैसे गई? मैं तो गैस का वह क्षेत्र पार नहीं कर पायी थी।”

जेनिथ की बात सुन क्रिस्टी ने कुछ देर पहले घटी पूरी घटना जेनिथ को अक्षरशः सुना दी।

यह सुन जेनिथ भी आश्चर्य में आ गई।

“नक्षत्रा क्या तुमने देखा उस रहस्यमयी योद्धा को?” जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

“नहीं जेनिथ, मैं तो उस समय पूरी ताकत से तुम्हें सही करने में लगा था इसलिये मैंने उस योद्धा को नहीं देखा।” नक्षत्रा ने कहा।

“चलो वह जो भी था, उसका बहुत-बहुत शुक्रिया बोलो, क्यों कि हम लोगों ने तो तुम्हें गैस में गिरते देख, तुम्हारे जीने की आस छोड़ दी थी, पर पता नहीं कहां से वह योद्धा आ गया?” सुयश ने जेनिथ से कहा- “चलो दोस्तों कुल मिलाकर सब कुछ अच्छा हुआ...अब आगे बढ़कर पृथ्वी को गति देते हैं।”

यह कहकर सुयश आगे बढ़कर 91 पर जाकर खड़ा हो गया। 100 नंबर पर अब रुकी हुई पृथ्वी साफ नजर आ रही थी, पर इस बार रास्ते में कुछ भी नहीं था।

“कैप्टेन इस 91 से 100 के बीच का रास्ता तो बिल्कुल साफ है, यहां तो कुछ भी नहीं है।” ऐलेक्स ने कहा।

काफी देर तक इधर-उधर देखने के बाद क्रिस्टी ने धीरे से अपना कदम 92 पर बढ़ाया, पर वह आगे जा नहीं सकी।

“कैप्टेन आगे कोई अदृश्य दीवार है, जो हमें आगे नहीं बढ़ने दे रही।” क्रिस्टी ने कहा।

तभी दीवार पर भाप से एक पहेली लिख गई-
“साँसों की ताकत पहचानो,
शब्दों से तुम लिखना जानो।”

“साँसों की ताकत? इसका मतलब समझ में नहीं आया?” तौफीक ने कहा।

“कैप्टेन अंकल, यहां का मौसम कुछ ठंडा है, देखिये हमारे बोलने पर हमारे मुंह से भाप निकल रही है।” शैफाली ने सुयश से कहा- “कहीं हमारे मुंह से निकली भाप ही तो हमारी साँसों की ताकत नहीं?”

“हो भी सकता है।” सुयश ने कहा - “पर हम अपने मुंह से निकली भाप पर क्या लिख सकते हैं?”

शैफाली ने कुछ सोच सामने की अदृश्य दीवार पर अपने मुंह से निकली भाप को मारा, अदृश्य दीवार पर किसी शीशे की तरह से भाप की पर्त चढ़ गई।

अब शैफाली ने कुछ सोच उस पर 92 लिख दिया, ऐसा करते ही शैफाली अब अदृश्य दीवार को पार कर 92 पर आ गई।

यह देख सभी ने ऐसा किया, अब सभी 92 नंबर पर थे। आगे एक और अदृश्य दीवार थी।

इस बार शैफाली ने सीधे 100 नंबर अपने मुंह से निकली भाप से लिख दिया और इसी के साथ वह सीधे 100 नंबर पर पृथ्वी के पास पहुंच गई।

शैफाली को वहां पहुंचते देख बाकी सभी ने भी वैसा ही किया। अब सभी 100 नंबर पर थे और आगे अब कोई भी अदृश्य दीवार मौजूद नहीं थी।

सुयश ने अब आगे बढ़कर पृथ्वी को अपने हाथों से घुमाने की कोशिश की, पर पृथ्वी अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई।

“अब इसे आगे कैसे घुमाना है?” सुयश ने पृथ्वी को देखते हुए कहा।

सभी अब चारो ओर देखने लगे, पर आसपास ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दिया, जिसके द्वारा वह पृथ्वी को घुमा सकें।

बहुत देर तक किसी को कुछ समझ नहीं आया, तभी शैफाली को अब भी सबके मुंह से भाप निकलती दिखाई दी।

यह देख शैफाली ने अपने मुंह से फिर से भाप छोड़ी और हवा में बिखरी उस भाप पर अंग्रेजी में ‘अर्थ रोटेशन’ लिख दिया।

शैफाली के ऐसा करते ही पृथ्वी ने नाचना शुरु कर दिया और इसी के साथ सभी फिर से पृथ्वी के ग्लोब के पास पहुंच गये।

“कैप्टेन, हमने 2 ऋतुओं को पार कर लिया, अब 2 ऋतुएं और बचीं हैं, तो हमें कुछ देर आराम करना है, या फिर मैं न्यूजीलैंड का फ्लैग लगा दूं, पृथ्वी के ग्लोब में।” ऐलेक्स ने सुयश की ओर देखकर पूछा।

“हम तिलिस्मा में हैं, यहां हमें थकान का अनुभव तो हो नहीं रहा। ऊपर से यहां का 1 दिन बाहर के 7 दिन के बराबर है, तो जितनी जल्दी हम यहां से निकल जाएं, उतना ही अच्छा है। ज्यादा देर करने में कहीं ऐसा ना हो जाये कि जब हम बाहर निकलें तो 50 वर्ष बीत चुके हों और हमारे जानने वाले सभी लोग बूढ़े हो चुके हों।” सुयश ने हंसते हुए कहा।

सुयश की बात सुन ऐलेक्स ने नीला फ्लैग उठाकर न्यूजीलैंड वाले स्थान पर लगा दिया।

हर बार की तरह जमीन पर बने न्यूजीलैंड का मानचित्र बड़ा होकर चमकने लगा। यह देख सभी एक-एक कर उस मानचित्र पर जाकर खड़े हो गये।

फिर रोशनी का एक झमाका हुआ और सभी अपने स्थान से गायब हो गये।


जारी रहेगा______✍️
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update.....
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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पर सभी के चेहरे पर शैफाली की वजह से एक मुस्कान आ गयी थी।

80 नंबर पर ऐस्टेरोयड बेल्ट लिखा था और कुछ पत्थर हवा में नाच रहे थे। 71 से 80 नंबर के बीच में जमीन से लगभग 1 फुट ऊपर, मिट्टी के कण हवा में तैर रहे थे।

उस पूरे रास्ते में ऊपर छत भी बनी थी, जिस पर 1 फुट मोटी पानी की पर्त जमा थी। पर वह पानी जमीन पर गिरने की जगह ऊपर की छत से चिपका हुआ था।

मिट्टी के ऊपर पहेली की नयी पंक्तियां लिखी हुई थीं-
“नीचे मिट्टी ऊपर पानी,
संग मिलें तो बने कहानी।”

“ये कैश्वर तो पूरा कविता कार बन गया है।” ऐलेक्स ने कहा- “कविता मार-मार कर हमें आगे बढ़ा रहा है।”

“मुझे अभी तक तो इस कार्य में कोई खास खतरा नहीं दिख रहा है।” तौफीक ने कहा- “लेकिन पिछले कार्यों को देखते हुए, मैं पूरी तरह से सहमत हूं कि यह कार्य भी इतनी आसानी से नहीं होगा।”

“कैप्टेन, क्या मैं आगे बढ़कर देखूं कि यहां कैसा खतरा है?” क्रिस्टी ने कहा।

सुयश ने कुछ ना होते देख क्रिस्टी को इशारा कर दिया। क्रिस्टी ने जैसे ही मिट्टी वाले भाग में कदम रखा, वह हवा में लहराती हुई ऊपर छत से जा चिपकी। क्रिस्टी अब पानी से पूरी तरह से भीग गई थी।

“कैप्टेन, इस पूरे क्षेत्र में गुरुत्वाकर्षण नहीं है।” क्रिस्टी ने जोर से आवाज लगाते हुए कहा- “और मैं यहां छत से आ चिपकी हूं, मैं अब स्वयं को छत से अलग भी नहीं कर पा रहीं हूं।”

“इन कविता की पंक्तियों से यह तो साफ है कि मिट्टी और पानी को आपस में मिलाना पड़ेगा, तभी कुछ संभव हो सकता है।” सुयश ने कहा।

“पर यह कैसे संभव है कैप्टेन?” जेनिथ ने कहा- “क्यों कि पानी, छत के गुरुत्वाकर्षण से बंधा है और मिट्टी जमीन पर है, ऐसे में दोनों को मिलाना कैसे संभव है?”

“क्रिस्टी, तुम अपने हाथों से पानी को जमीन की ओर फेंकने की कोशिश करके देखो।” सुयश ने क्रिस्टी को आवाज लगाकर कहा- “हो सकता है कि पानी जमीन तक पहुंच जाये?”

सुयश की बात सुन क्रिस्टी ने अपने हाथों की अंजुलि से, ऊपर का पानी नीचे जमीन की ओर फेंकने की कोशिश की, पर उसके द्वारा फेंके गये पानी का बहुत थोड़ा भाग ही नीचे हवा में तैर रही मिट्टी तक पहुंच
पाया और इतने थोड़े पानी को उस मिट्टी ने ऐसे सोख लिया, जैसे कि वह जन्म-जन्म से प्यासी हो।

पर जितनी मिट्टी ने पानी को सोखा, वह पानी मिट्टी में मिलकर जमीन पर ही रह गया।

उधर क्रिस्टी लगातार पानी को फेंकने की कोशिश कर रही थी, पर कुछ ही देर में क्रिस्टी के हाथ, अब उसका साथ छोड़ने लगे और क्रिस्टी ने थककर पानी फेंकना बंद कर दिया।

“तौफीक और ऐलेक्स तुम्हें भी वहां ऊपर क्रिस्टी की सहायता के लिये जाना पड़ेगा।” सुयश ने ऐलेक्स और तौफीक से कहा- “मुझे ऐसा लग रहा है कि जितनी मिट्टी, पानी से मिक्स हो जा रही है, उस पर जमीन की गुरुत्वाकर्षण शक्ति काम करने लगी है।”

सुयश की बात सुन ऐलेक्स और तौफीक भी मिट्टी के उस क्षेत्र में घुस कर क्रिस्टी के पास ऊपर जा पहुंचे।

अब ऐलेक्स और तौफीक ने भी पानी को अपने हाथों में भर-भर कर मिट्टी पर फेंकना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में मिट्टी का अधिकांश भाग जमीन के गुरुत्वाकर्षण के कारण, पानी से मिक्स होकर नीचे आ गया।

सुयश ने एक इशारे से अब ऐलेक्स और तौफीक को पानी फेंकने से मना कर दिया।

अब जमीन पर मिट्टी, पानी से मिक्स होने की वजह से, कीचड़ की मानिंद नजर आने लगी थी। यह देख सुयश ने अपना एक हाथ धीरे से मिट्टी वाले क्षेत्र में डाला।

सुयश को अपना हाथ हवा में उठता दिखाई दिया। अब सुयश ने वहां पड़ी कीचड़ को हाथ में उठा लिया।
कीचड़ के हाथ में उठाते ही सुयश का हाथ हवा में खिंचना बंद हो गया।

अब सुयश के पास दूसरी ओर जाने का एक तरीका मिल गया था। सुयश ने हाथ आगे बढ़ाकर धीरे-धीरे बहुत सी कीचड़ को अपनी ओर उठा कर रख लिया।

जब काफी कीचड़ इकठ्ठा हो गई, तो सुयश उस कीचड़ को अपने शरीर पर लगाने लगा।

सभी सुयश को यह करते देख रहे थे, पर सभी को सुयश का प्लान समझ आ गया था। कुछ ही देर में सुयश पूरा का पूरा कीचड़ से नहा गया। यह देख सुयश अब आगे बढ़कर मिट्टी वाले क्षेत्र में आ गया।

पर सुयश का शरीर साधारण तरीके से ही काम करता रहा। यह देख सुयश खुश हो गया क्यों कि आखिर उसका प्लान काम कर गया था।

सुयश अब धीरे-धीरे 80 नंबर की ओर बढ़ने लगा। कुछ ही देर में सुयश उस पार पहुंच गया।

सुयश के उस पार पहुंचते ही हवा में लटके ऐलेक्स, क्रिस्टी और तौफीक नीचे आ गिरे और मिट्टी वाला वह स्थान अब सामान्य काम करने लगा। सभी अब उस रास्ते को पार कर 80 नंबर पर आ गये।

तभी छत पर रुका पूरा पानी, एक बौछार की तरीके से सभी पर आकर गिरने लगा और इसी के साथ ऐलेक्स, क्रिस्टी, तौफीक और सुयश के शरीर पर लगी सारी कीचड़ उस पानी से धुल गई।

“ये कैश्वर इतना भी बुरा नहीं है, देखो हमारे नहाने की व्यवस्था भी कर दी उसने।” ऐलेक्स ने खुश होते हुए कहा।

सभी ऐलेक्स की बात सुनकर मुस्कुरा दिये। सभी अब आगे बढ़कर 81 नंबर पर आ गये।

81 नंबर पर 3 फुट का 1 तीर रखा था। 90 नंबर पर मंगल ग्रह था और 81 से 90 नंबर के बीच हवा में एक लाल रंग की गैस विद्यमान थी, जिसे देखने पर ही वह कोई खतरनाक गैस महसूस हो रही थी।

तभी उस लाल रंग की गैस ने हवा में एक पहेली लिखी।
“नहीं गिरे सिर से यह तीर,
चाहे जल जाये तेरा शरीर।”

“ये अब खतरनाक स्टेज है।” ऐलेक्स ने कविता को पढ़ने के बाद अपने होठों को गोल करते हुए कहा- “कविता की पंक्तियों से ही पता चल रहा है कि इस भाग को पार करने में बहुत मुश्किल आने वाली है।”

ऐलेक्स की बात से सभी सहमत थे।

“मुझे लगता है कि इस तीर को सिर पर रखकर इस क्षेत्र को पार करना होगा।” शैफाली ने कहा- “परंतु मुझे यह गैस जहरीली लग रही है और कविता की पंक्तियों में भी शरीर के जलने की बात की गई है।”

कुछ सोच जेनिथ ने अपना हाथ धीरे से उस गैस वाले हिस्से में डालकर देखा। परंतु जैसे ही जेनिथ का हाथ उस गैस के हिस्से में पहुंचा, उसका हाथ बुरी तरह जल गया।

“आह!” जेनिथ ने कराहते हुए अपना हाथ तुरंत अंदर कर लिया।

नक्षत्रा ने तुरंत जेनिथ के जले हुए हाथ को सही कर दिया, पर उस एक पल के अहसास ने ही जेनिथ की जान निकाल दी थी।

“यह गैस बहुत खतरनाक है, हममें से इसे कोई नहीं पार कर सकता।” सुयश ने सभी को देखते हुए कहा।

“मैं पार कर सकती हूं।” जेनिथ ने अपने दाँत को भींचते हुए कहा- “और यकीन मानिये, कैश्वर ने यह भाग मुझे और नक्षत्रा को ध्यान में रखकर ही बनाया है।”

“जेनिथ, माना कि नक्षत्रा ने तुम्हें तुरंत सही कर दिया, पर उस एक पल के लिये मैंने तुम्हारे चेहरे पर दर्द को महसूस किया था, तिलिस्म के इस भाग को पार करने में तुम्हें नर्क से भी भयानक दर्द का सामना करना पड़ेगा और यह दर्द असहनीय हो सकता है।” सुयश ने दर्द भरे स्वर में जेनिथ की ओर देखते हुए कहा।

“कैप्टेन, हमारे पास और कोई चारा भी नहीं है। अगर मैंने इस भाग को पार करने की कोशिश नहीं की, तो हममें से कोई भी इस तिलिस्म से कभी नहीं निकल पायेगा....इसलिये मुझे एक बार कोशिश तो करनी ही
होगी....भले ही मुझे कितने भी दर्द का सामना क्यों न करना पड़े और वैसे भी ईश्वर ने सिर्फ स्त्री को ही असहनीय दर्द से लड़ने की शक्ति दी है।

आपको पता है कैप्टेन कि एक आदमी का शरीर सिर्फ 45 डेल का दर्द सह सकता है, जबकि एक स्त्री का शरीर, बच्चे के जन्म के समय 57 डेल का दर्द सहता है, जो कि शरीर की 20 हड्डियों के टूटने के बराबर होता है। तो आज मैं भी तैयार हूं, इस असहनीय दर्द को सहने के लिये।” (‘डेल’ दर्द मापने की एक इकाई है, जिसे डोलोरी मीटर यंत्र के द्वारा मापा जाता है)

सभी आश्चर्य से जेनिथ का मुंह देख रहे थे, उनके पास जेनिथ से कुछ कहने के लिये शब्द ही नहीं थे, वह बस जेनिथ की हिम्मत को महसूस करने की कोशिश कर रहे थे।

“नक्षत्रा क्या तुम तैयार हो?” जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

“मैं तो हमेशा से तैयार हूं, पर तुम्हारी इन भावनाओं का मेरे पास भी कोई जवाब नहीं है, मुझे भी समझ नहीं आ रहा कि मैं तुम्हें क्या कहूं....मैं आज मान गया कि इस समूचे ब्रह्मांड में जितने भी जीव हैं, मनुष्य उन सबसे भावनाओं के मामले में सर्वश्रेष्ठ है। आज मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मैंने तुम्हें चुना।” नक्षत्रा ने कहा- “चलो जेनिथ, ये तुम्हारी ही नहीं, मेरी भी परीक्षा है, मुझे भी आज यह देखना है कि मैं किस गति से तुम्हारे शरीर को सही कर सकता हूं।”

यह सुन जेनिथ उस गैस वाले क्षेत्र में उतर गई। जेनिथ के उस क्षेत्र में उतरते ही गैस ने जेनिथ के पूरे शरीर को जलाना शुरु कर दिया।

एक असहनीय दर्द जेनिथ के शरीर में दौड़ गया। एक पल को तो जेनिथ का शरीर डगमगा भी गया, पर तुरंत ही जेनिथ ने अपने दाँतों को पूरी ताकत से भींचकर आगे बढ़ गयी।

जेनिथ के शरीर से खाल झूलने लगी, उसका चेहरा भी बुरी तरह से जल गया। नक्षत्रा पूरी ताकत से जेनिथ के शरीर के जख्मों को भरने की कोशिश कर रहा था, पर गैस का कहर निरंतर जारी था।

जेनिथ के कदम लड़खड़ा रहे थे, पर वह हार नहीं मान रही थी। सुयश और क्रिस्टी तो यह दृश्य देख ही नहीं पा रहे थे, उन्होंने अपना चेहरा दूसरी दिशा में कर लिया।

इस समय सभी की आँखों में जेनिथ के लिये आँसू थे, यहां तक कि तौफीक की भी.....पता नहीं क्यों आज तौफीक को बहुत बुरा महसूस हो रहा था, एक पल में उसे यह जलन अपने शरीर पर महसूस हो रही थी।

तौफीक को अफसोस था कि क्या यह वही लड़की है? जिसके द्वारा वह अपना बदला लेने आया था, उसे अपने पर धिक्कार हो रहा था।

जेनिथ के शरीर पर अब कई जगह पर हड्डियां भी नजर आने लगीं थीं, पर पता नहीं कैसा जुनून था ? कैसा यह बलिदान था कि जेनिथ रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

यह भी भला था कि उस गैस का जेनिथ के कपड़े पर कोई असर नहीं हुआ था।

अब बस 4 कदम की ही दूरी बची थी, पर अब जेनिथ के शरीर पर मूर्छा हावी होने लगी। यह 4 कदम की दूरी भी उसे मीलों बराबर की लगने लगी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता कि जेनिथ लहराकर वही गैस के क्षेत्र में गिर गई।

यह देख ऐलेक्स, शैफाली और तौफीक के मुंह से चीख निकल गई। इनकी चीखें सुनकर क्रिस्टी और सुयश भी भागकर आगे की ओर आ गये।

जेनिथ का शरीर उस गैस के क्षेत्र में सुलग रहाकोई सोच भी नहीं सकता था कि ऐसा हो जायेगा कि तभी एक चमत्कार हो गया।

ना जाने कहां से एक शक्तिशाली योद्धा वहां प्रकट हो गया, जिसने कि बैंगनी रंग की धातु की एक पोशाक पहन रखी थी।

उसके हाथों की मसल्स दूर से ही चमक रहे थे, उसके चेहरे पर देवताओं सा तेज था। उसने सिर पर एक सुनहरे रंग का पट्टी नुमा मुकुट भी लगा रखा था, जिसके बीच में एक कालें रंग की मणि लगी हुई थी। उस योद्धा के बाल सुनहरे थे।

सभी बिना पलकें झपकाये उस योद्धा को देख रहे थे। उस योद्धा ने जेनिथ का शरीर गैस वाले क्षेत्र से उठा कर 90 नंबर पर रखा और इसी के साथ हवा में कहीं गायब हो गया।

“वो कौन था कैप्टेन?” तौफीक ने सुयश की ओर देखते हुए कहा- “कैश्वर ने तो कहा था कि तिलिस्मा में हमारी कोई मदद नहीं कर सकता, फिर वह योद्धा यहां कैसे आ पहुंचा? और फिर जेनिथ को बचाकर गायब भी हो गया।”

“मुझे भी इसका कोई आइडिया नहीं है तौफीक?” सुयश ने ना में सिर हिलाते हुए कहा- “पर वह जो भी था, हमारे लिये तो ईश्वर के ही समान था क्यों कि उसने जेनिथ की जान बचाई है।

उधर जेनिथ के उस पार पहुंचते ही 81 से 90 के बीच की गैस स्वतः कहीं गायब हो गई।

अब सभी भागकर जेनिथ के पास पहुंच गये। नक्षत्रा अभी भी जेनिथ के शरीर को तेजी से सही कर रहा था। यह देख सभी जेनिथ से कुछ दूर खड़े हो गये।

आखिरकार लगभग 7 से 8 मिनट के अंदर नक्षत्रा ने जेनिथ को पूरी तरह से सही कर दिया। थोड़ी देर के बाद जेनिथ होश में भी आ गई।

वह आश्चर्य से सभी को देख रही थी- “मैं बच कैसे गई? मैं तो गैस का वह क्षेत्र पार नहीं कर पायी थी।”

जेनिथ की बात सुन क्रिस्टी ने कुछ देर पहले घटी पूरी घटना जेनिथ को अक्षरशः सुना दी।

यह सुन जेनिथ भी आश्चर्य में आ गई।

“नक्षत्रा क्या तुमने देखा उस रहस्यमयी योद्धा को?” जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

“नहीं जेनिथ, मैं तो उस समय पूरी ताकत से तुम्हें सही करने में लगा था इसलिये मैंने उस योद्धा को नहीं देखा।” नक्षत्रा ने कहा।

“चलो वह जो भी था, उसका बहुत-बहुत शुक्रिया बोलो, क्यों कि हम लोगों ने तो तुम्हें गैस में गिरते देख, तुम्हारे जीने की आस छोड़ दी थी, पर पता नहीं कहां से वह योद्धा आ गया?” सुयश ने जेनिथ से कहा- “चलो दोस्तों कुल मिलाकर सब कुछ अच्छा हुआ...अब आगे बढ़कर पृथ्वी को गति देते हैं।”

यह कहकर सुयश आगे बढ़कर 91 पर जाकर खड़ा हो गया। 100 नंबर पर अब रुकी हुई पृथ्वी साफ नजर आ रही थी, पर इस बार रास्ते में कुछ भी नहीं था।

“कैप्टेन इस 91 से 100 के बीच का रास्ता तो बिल्कुल साफ है, यहां तो कुछ भी नहीं है।” ऐलेक्स ने कहा।

काफी देर तक इधर-उधर देखने के बाद क्रिस्टी ने धीरे से अपना कदम 92 पर बढ़ाया, पर वह आगे जा नहीं सकी।

“कैप्टेन आगे कोई अदृश्य दीवार है, जो हमें आगे नहीं बढ़ने दे रही।” क्रिस्टी ने कहा।

तभी दीवार पर भाप से एक पहेली लिख गई-
“साँसों की ताकत पहचानो,
शब्दों से तुम लिखना जानो।”

“साँसों की ताकत? इसका मतलब समझ में नहीं आया?” तौफीक ने कहा।

“कैप्टेन अंकल, यहां का मौसम कुछ ठंडा है, देखिये हमारे बोलने पर हमारे मुंह से भाप निकल रही है।” शैफाली ने सुयश से कहा- “कहीं हमारे मुंह से निकली भाप ही तो हमारी साँसों की ताकत नहीं?”

“हो भी सकता है।” सुयश ने कहा - “पर हम अपने मुंह से निकली भाप पर क्या लिख सकते हैं?”

शैफाली ने कुछ सोच सामने की अदृश्य दीवार पर अपने मुंह से निकली भाप को मारा, अदृश्य दीवार पर किसी शीशे की तरह से भाप की पर्त चढ़ गई।

अब शैफाली ने कुछ सोच उस पर 92 लिख दिया, ऐसा करते ही शैफाली अब अदृश्य दीवार को पार कर 92 पर आ गई।

यह देख सभी ने ऐसा किया, अब सभी 92 नंबर पर थे। आगे एक और अदृश्य दीवार थी।

इस बार शैफाली ने सीधे 100 नंबर अपने मुंह से निकली भाप से लिख दिया और इसी के साथ वह सीधे 100 नंबर पर पृथ्वी के पास पहुंच गई।

शैफाली को वहां पहुंचते देख बाकी सभी ने भी वैसा ही किया। अब सभी 100 नंबर पर थे और आगे अब कोई भी अदृश्य दीवार मौजूद नहीं थी।

सुयश ने अब आगे बढ़कर पृथ्वी को अपने हाथों से घुमाने की कोशिश की, पर पृथ्वी अपने स्थान से टस से मस नहीं हुई।

“अब इसे आगे कैसे घुमाना है?” सुयश ने पृथ्वी को देखते हुए कहा।

सभी अब चारो ओर देखने लगे, पर आसपास ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दिया, जिसके द्वारा वह पृथ्वी को घुमा सकें।

बहुत देर तक किसी को कुछ समझ नहीं आया, तभी शैफाली को अब भी सबके मुंह से भाप निकलती दिखाई दी।

यह देख शैफाली ने अपने मुंह से फिर से भाप छोड़ी और हवा में बिखरी उस भाप पर अंग्रेजी में ‘अर्थ रोटेशन’ लिख दिया।

शैफाली के ऐसा करते ही पृथ्वी ने नाचना शुरु कर दिया और इसी के साथ सभी फिर से पृथ्वी के ग्लोब के पास पहुंच गये।

“कैप्टेन, हमने 2 ऋतुओं को पार कर लिया, अब 2 ऋतुएं और बचीं हैं, तो हमें कुछ देर आराम करना है, या फिर मैं न्यूजीलैंड का फ्लैग लगा दूं, पृथ्वी के ग्लोब में।” ऐलेक्स ने सुयश की ओर देखकर पूछा।

“हम तिलिस्मा में हैं, यहां हमें थकान का अनुभव तो हो नहीं रहा। ऊपर से यहां का 1 दिन बाहर के 7 दिन के बराबर है, तो जितनी जल्दी हम यहां से निकल जाएं, उतना ही अच्छा है। ज्यादा देर करने में कहीं ऐसा ना हो जाये कि जब हम बाहर निकलें तो 50 वर्ष बीत चुके हों और हमारे जानने वाले सभी लोग बूढ़े हो चुके हों।” सुयश ने हंसते हुए कहा।

सुयश की बात सुन ऐलेक्स ने नीला फ्लैग उठाकर न्यूजीलैंड वाले स्थान पर लगा दिया।

हर बार की तरह जमीन पर बने न्यूजीलैंड का मानचित्र बड़ा होकर चमकने लगा। यह देख सभी एक-एक कर उस मानचित्र पर जाकर खड़े हो गये।

फिर रोशनी का एक झमाका हुआ और सभी अपने स्थान से गायब हो गये।


जारी रहेगा______✍️

Gazab ki update he Raj_sharma Bhai,

Is baar to itna aasan nahi tha jitna lag rha tha.........

Bahut hi adbhud tarike se vo anjan yodhdha prakat hua aur Zenith ki jaan bacha di.......

Ab ye sab Newzealand pahuch gaye he........

Ek se badhkar ek khatre aur paheliya inke intezar me he...........

Keep posting Bhai
 

Raj_sharma

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Aap bas sath bane rahiye, hum aapko aisi yatra pe le jayenge jo aapne na dekhi hogi, na suni hogi :D Thank you very much for your wonderful review and support bhai :hug:
 

Raj_sharma

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