Very erotic Sarkar jiUpdate 67 ( समस्या का समाधान)
शाम होने को आ गई थी , मालिश के बाद प्रज्ञा अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी पूरा दिन , वही प्राची की आँख लग गई थी और अब जा के उसकी आंख खुली जब घड़ी में 7 बजाने को आ गए शाम के । उठी तो उसका शरीर अकड़ रहा था । उसने मन में बुदबुदा के कहा : आह...आज एकदम अच्छी नींद आई , प्रज्ञा के हाथों ने जादू कर दिया , महीनों बाद इतना सुकून मिला । पता ही नहीं चला कि शाम हो गया ।
तभी दादी प्राची के पास आती है : अरे बेटी , उठ गई , इतना गहरी नींद में सोई थी कि आवाज देने पर भी नहीं उठी । चल उठ कर मुंह हाथ धो ले और थोड़ा ड्राई फ्रूट भिगो के रखे है तेरे लिए , खा ले । तेरे पापा भी आते ही होंगे । इतना देर तक भूखी रहेगी तो वो गुस्सा करेगा ।
प्राची : अरे मेरी भोली दादी मां , उनको कैसे पता चलेगा कि मैं भूखी हूं? हाहाहा...
दादी : मै रिपोर्ट दे दूंगी उसको की तूने कुछ खाया नहीं है और बस मालिश करा के सोती रही है पूरे दिन । प्रज्ञा को देख इतना पढ़ रही है ।
प्राची : अरे हां दादी वो प्रज्ञा से याद आया , उसका एडमिशन का एग्जाम सेंटर लखनऊ में पड़ा है ।
दादी : क्या , इतनी दूर ?, उसका कॉलेज तो यही पास में ही है १०० किलोमीटर पे ।
प्राची : हां , मगर उस कॉलेज का मैं ब्रांच लखनऊ में है । और एग्जाम वही होगा ।
दादी : कब है एग्जाम ?
प्राची : वो तो बता रही थी कि 15 को है , अगले संडे । और अगर एग्जाम में पास हुई तो उसके अगले संडे इंटरव्यू और काउंसलिंग भी है।
दादी : अरे ये तो मुसीबत हो गई । वो कैसे जाएगी इतनी दूर , लखनऊ के लिए तो ट्रेन लेना होगा , उसका टिकट इतनी जल्दी मिलेगा ?
प्राची : पापा को बोलो ना, वो देख लेंगे , ओर कोई न कोई जुगाड़ निकल लेगे ।
दादी : मगर तेरी ये हालत है । इस हालात में कब हॉस्पिटल के लिए जाना पर जाए कोई गारंटी नहीं होती । इस हालात में तुझे छोड़ के वो थोड़े न जाएगा ।
प्राची : अरे दादी , आप बस पापा को बता दो ना ,बांकी सारा पापा देखलेंगे क्या फैसला लेना है।
उधर प्रज्ञा भी टेंशन में आ गई थी कि इतने दिनों से उसने पापा से ठीक से बात भी नहीं की है , वो कैसे जाएगी पापा के पास , उनसे नज़रे कैसे मिलाएगी । ऊपर से दीदी की ये हालत है । ऐसे में पापा उन्हें छोड़ के मुझे एग्जाम दिलाने जायेंगे ?
खैर दरवाजे पे दस्तक हुआ तो दादी ने प्राची से कहा : शायद आ गया तेरा पापा ।
दादी ने दरवाज़ा खोला और पापा आ गए थे ।
फ्रेश होने के बाद सब डिनर की तैयारी करने लगे और प्राची भी रूम से निकल के लिविंग रूम में आ गई थी , उसका पेट बहुत ही निकल गया था और वो 19 साल की प्रेग्नेंट लड़की थोड़ा चलने से ही थक जा रही थी ।
जब तक प्रज्ञा और दादी खाने की तैयारी में किचेन में लगे थे ,तब तक पापा और प्राची को एकांत मिल गया था ।
पापा ने सोफे पे बैठे अपनी पत्नी को एकदम से होठों पे एक किस कर लिया । प्राची मुस्कुरा दी।
प्राची : क्या बात है आज आप बारे खुश लग रहे है ।
पापा : नहीं ,मै बस सोच रहा था कि अब बस २ महीने की ही बात है , फिर तो हमारा बच्चा ,तुम्हारे गोद में खेल रहा होगा । और तुम उसे दूध पिला रही होगी ।
प्राची : आप तो ऐसे बोल रहे हो जैसे ये सब खेल है ? मुझे कितना सहना पर रहा है , आप देख रहे है ना ? देखिए ना मेरी हालत , पेट इतना भारी हो गया है , वजन बढ़ गया है । मै कितनी बदसूरत दिख रही हु ? ऊपर से मुझे ये भी डर लगा रहा है कि डिलिवारी के दौरान क्या होगा ? मेरी तो हालत खराब हो रही है ये सोच सोच के ।
पापा : तुम्हे चिंता करने की जरूरत नहीं है , डॉक्टर सुषमा पे भरोसा रखो , वो अच्छी डॉक्टर है । वो वर्मा जी जो थे , उनकी भी वाइफ की डिलीवरी तो उन्हीं ने की थी । सब अच्छे से हो गया था । तुम्हारी भी हो जाएगी । और ज्यादा सोचोगी तो ज्यादा डर लगेगा । और बच्चे पर भी असर पड़ेगा । और फिर मै तो साथ हूं ही तुम्हारे पास हमेशा ।
प्राची : हां पापा , आप है तो मुझे कोई डर नहीं है। फिर भी एक झिझक सा तो लग रहा है।
पापा: कोई झिझकने की बात नहीं है , सब अच्छा होगा , हमारा बच्चा तेरे गोद में जल्दी ही खेलेगा ।
तभी दादी पापा का खाना थाली में लिए आई और बोला : आज बेटे ,खाना लग गया है , आ जा खाने ।
पापा : बस अभी आया मां।
दादी ने बारी बारी सबका प्लेट लगा दिया और सबलोग बैठे के खाने ।
दादी : बेटे खाना कैसा बना है ?
पापा: बहुत अच्छा मां । अच्छा प्राची को सारे टाइम डाइट के हिसाब से खिला रही हो ना ?
दादी : हां बेटे , मै प्राची को अभी बिना खिलाये नहीं छोड़ने वाली , उसका ध्यान रखना तो अभी और जरूरी हो गया है ।
पापा: हां मां, अब समय नजदीक आता जा रहा है। आप अनुभवी है । प्राची का ये पहला बच्चा है । आप ही इसका मार्गदर्शन करते रहियेगा । आज ये घबराई हुई थी , डिलीवरी का सोच सोच के ।
प्रज्ञा भी वही बैठी ये बाते सुनते हुए अपना निवाला खा रही थी ।
दादी : अरे प्राची , तू इन सब बातों का टेंशन अभी मत ले , अभी २ महीने है उसको , और वैसे भी कुछ भी नहीं होगा तुम्हे , सब अच्छे से हो जाएगा , डॉक्टर साहिबा ने बोला है ना , ज्यादा टेंशन इस हालात में नहीं लेने को ।
प्राची : अरे नहीं दादी , बस ऐसे ही थोड़ा , वो पहली बार अब कुछ हो रहा है ना तो थोड़ा डर लग रहा है ।
दादी : हमलोग है ना , डरने की कोई जरूरत नहीं ।
सब लोग खाना खाते रहे ।
दादी ने तभी बोला : बेटे एक ओर बात कहना है तुझसे ।
पापा : हाँ मां , बताइए ना।
दादी : वो बेटे , प्रज्ञा के एडमिशन के लिए जो कॉलेज तूने बताई थी ना, वो रामनगर वाली , उसका एग्जाम अगले संडे को ही है ।
पापा प्रज्ञा का नाम सुन के जरा सा झेप गए और बोला : अच्छा ।
दादी : तो बेटे , एग्जाम दिलाने तू जाएगा साथ में ?
पापा : अरे मां, ज़्यादा दूर का मामला थोड़ी ना है , आप दिलवा देना , बस से ३ घंटे ही तो लगते है , सबेरे निकल जाना और शाम तक तो घर भी आ जाएगा आप दोनों । और वैसे भी प्रज्ञा को तब अब देखा ही हुआ है । फॉर्म भरने तो गई थी ना वह ।
दादी : पर बेटा एक दिक्कत है । एग्जाम का सेंटर लखनऊ में है ।
पापा चौक गए : हाअअ...ये कैसे , कॉलेज तो यहां है ओर एग्जाम लखनऊ, इसी लिए तो मैने पास का कॉलेज चुना था कि इन सब चीजों में परेशानी नहीं होगी ।
प्रज्ञा : हां पापा , मैने भी यही सोच के इस कॉलेज का फॉर्म भरा था । और एडमिशन के बाद क्लास भी यही चलेगी मेरी , अगर मै सिलेक्ट हुई तो । मगर ये कॉलेज का मैन ब्रांच लखनऊ में है । और इस कॉलेज के जितने भी ब्रांच है सबका एग्जाम मैन ब्रांच में ही होता है , वहां सिलेक्शन होने के बाद हमने जहां के लिए फॉर्म भरा है , एडमिशन वही होती है ।
पापा: ओह , फिर थे फेरे में पड़ गए । लखनऊ के लिए तो ट्रेन लेना पड़ेगा । क्यों कि नहीं भी तो 12-13 घंटे का सफर है।
दादी : हां , मैं भी वही सोच रही हूं, अब टिकट भी मिलेगा क्या नहीं इतनी जल्दी , अगले संडे ही एग्जाम है । तुम बोलो तो प्रज्ञा ये एग्जाम छोड़ देगी । वैसे भी वो दूसरा कॉलेज का भी तो तैयारी कर रही है , उसका एग्जाम दे देगी । एडमिशन इस कॉलेज में ले या उस कॉलेज में , पढ़ना तो एक ही चीज है।
पापा : अरे नहीं नहीं मां, प्रज्ञा ने इतनी मेहनत किया है तो एग्जाम तो देना ही चाहिए , ऊपर से ये कॉलेज बहुत ही अच्छा है । और क्या पता , उस कॉलेज में एडमिशन के लिए सिलेक्ट नहीं हो पाई तो । यहाँ तो मैने उस कॉलेज को बैकअप के तौर पे रखा था कि अगर इस कॉलेज में सिलेक्ट नहीं हो पाती तो दूसरे में तो हो जाएगा । रिस्क नहीं ले सकते मां, एग्जाम तो दिलवाना ही पड़ेगा , प्रज्ञा के करियर का सवाल है ।
प्राची : हां दादी, आपने तो मेरी शादी करा दी , वैसे मुझे तो पढ़ने में मन भी नहीं लगता था । तो मेरा तो ठीक है पर प्रज्ञा को बहुत लगता है , उसको ना रोकिये ।
पापा: हां मैं भी यही सोच रहा हु । प्रज्ञा को तो पढ़ना ही चाहिए। कोई नहीं मै देखता हु। तत्काल में भी टिकट मिल जाए तो बेहतर है । या किस्मत सही रही तो शायद ट्रेन में ऐसे भी मिल सकता है ।
प्रज्ञा : पापा और संडे के एग्जाम के बाद अगर सिलेक्ट हो जाती हु मै , तो अगला इंटरव्यू और काउंसलिंग भी वही है उसके नेक्स्ट संडे ।
पापा: ओह ये एक तो और मुसीबत हो गई , फिर आना फिर जाना , हद है ये कॉलेज वाले , कुछ समझते ही नहीं है और अपनी मनमानी लगा रखी है इन लोगों ने तो।
दादी : फिर क्या करेगा बेटे ?
पापा : ह्म्म्म.. दुबारा आना और जाना तो काफी मुश्किल वाला फैसला लग रहा है । एक काम हो सकता है । मै लौटने का २ टिकिट कर लेता हु । अगर एग्जाम के बाद प्रज्ञा अगले राउंड में नहीं जाती है तो हम लोग मंडे को हो रात का ट्रेन ले लेंगे वापस घर के लिए , और अगर सिलेक्ट हो जाती है तो वही एक होटल ले के रुक जाएंगे । और प्रज्ञा का एग्जाम अगले दिन दिलवा के वापस आ जाएंगे।
दादी : पर बेटा , प्राची की हालत देख , इस हालात में अगर तू 1 सप्ताह घर पे नहीं रहेगा तो प्रॉब्लम हो जाएगी, प्राची कम उमर की प्रेग्नेंट है। कुछ ऊंच नीच होगा तो इसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाना पर सकता है । तू नहीं रहेगा तो कैसे हो पाएगा ।
पापा: आप क्यों फिक्र करती है , उसका जुगाड़ भी मै लगा दूंगा ।
दादी : देख ले , बाद में मै मुसीबत में नहीं पड़ना चाहती और मेरी बच्ची प्राची को भी कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए ।
पापा: विश्वास रखिए मां , आप निश्चिंत रहिए । मै खुद प्राची को अभी ऐसे चोर के नहीं जाना चाहता पर ,सबकुछ हमारे हाथ में नहीं होता ना। मै अभी हॉस्पिटल कॉल कर के अब सेट करता ही , टिकट तब ही लूंगा ।
दादी : ठीक है बेटा ।
खाना खाने के बाद पापा ने अपना फोन उठाया और स्त्री केयर हॉस्पिटल में कॉल लगाया ।
पापा: हैलो।
फोन एक रिसेप्शनिट ने उठाया : हेलो, रोमा हेयर , स्त्री केयर हॉस्पिटल, हाउ में ई हेल्पयू सर?
पापा: अरे मैने एक पेशेंट के रेगडिंग कॉल किया है । दरअसल मेरी पेसेंट गर्भवती है और उसका इलाज आपके ही हॉस्पिटल से चल रहा है । मगर अगले हफ्ते ही मुझे शायद आउट ऑफ टाउन जाना पर सकता है , अगले एक सप्ताह के लिए । उस बीच आपकी कोई इमरसेंसी सेवा उपलब्ध है जो बस एक कॉल से तुरंत हेल्प पहुंचा सके ।
रोमा: जी सर , व्हाई नॉट , हमारा एक एमर्सेंजी एम्बुलेंस सर्विस है जो बस एक कॉल से ही आपके घर तक पहुंच जाएगा और पेशेंट का इलाज हो जाने के बाद वापस छोड़ आयेगा ।
पापा: वाह वही तो चाहिए था । अच्छा मुझे उस का नंबर दे दीजिए ।
रोमा : ओके सर , आप अपना नंबर दे दीजिए और हम आपके कॉल को प्रायरिटी लिस्ट में डाल देंगे , ताकि आपका कोई भी कॉल आएगा तो हम क्विक रिस्पॉन्स देंगे । मै आपको नंबर भी उसी नंबर पे व्हाट्सएप्प कर दूंगी ।
पापा ने रोमा को नंबर दिया और फिर कॉल काट दिया और दादी के तरफ देख के बोले : आप खामखा टेंशन ले लेते हो , सब सही हो जाएगा।
पापा ने तुरंत ही टिकट बुक करने का देखा, स्लीपर या 3rd एसी में कोई टिकट नहीं , यहां तक कि 2nd ऐसी में भी सभी ट्रेन में लगभग येही हाल था । अब क्या किया जाए । किस्मत से बस एक रात की ट्रेन थी जो शनिवार को चल के रविवार को सबेरे 5 बजे लखनऊ पहुंचा देती थी और उसमें बस 1st एसी में ही कुछ शीट खाली था । बांकी सारे भरे हुए थे । 1st AC का टिकट तो थोड़ा महंगा था ,मगर और दूसरा कोई चारा नहीं था । ऊपर से समय भी ठीक था । पापा शनिवार को ऑन ऑफिस का काम कर के , शाम को ट्रेन पाकर सकते थे और सबेरे प्राची का एग्जाम 11 बजे से था तो टाइम से पहले हो पहुंच सकते थे। पापा ने कोई और उपाय न देख के 2 टिकट बुक कर ली। वही साथ ही पापा ने आने के लिए 2 दिनों का टिकट बुक किया , एक मंडे का और अगला , इंटरव्यू के बाद वाले मंडे का।
अब जा के प्रज्ञा के जान में जान आई । वो लखनऊ वो भी एक सप्ताह में जाने का सोच के घबरा गई थी । की कही वो एग्जाम दे ही नहीं पाई तो । पर पापा ने सब ठीक कर दिया । उसके दिमाग से ,पापा संग घंटे वो घटना भुला गया और अभी वो पापा पे बहुत खुश हो गई । खुशी के मारे , वो अपने चुलबुली स्वभाव के कारण पापा के पास फुदकते गई और पापा को गले लगा लिया । उसके मन में पापा के साथ कोई गलत भाव नहीं था , उसने पापा को बोला : थैंक यू पापा।
दादी : अब खुश है ना?
प्रज्ञा : हां दादी पापा ने सारी परेशानी ही दूर कर दी ।
दादी : हां तो चल अब पापा थके है ,लिपटना छोड़ ओर उन्हें सोने जाने दे , तू भी जा सो जा। 10 बजने को आये ।
दादी ने प्राची को सहारा दे के उसे अपने कमरे में ले गई । वही प्रज्ञा भी खुशी मन से अपने कमरे में चली गई । पर पाप वही स्तब्ध खड़े रहे । उस घटना के बाद आज पहली बार प्रज्ञा ने ढंग से उनसे बात की और अभी जो उसने उन्हें गले लगाया । उस आलिंगन ने उन्हें हिला दिया । प्रज्ञा भले ही वो आलिंगन , अपने पापा को की थी ,मगर पापा , जो कि अपने पत्नी के प्रेग्नेंट होने के बाद इतने दिनों से स्त्री स्पर्श को तरस रहे थे । उन्हें प्रज्ञा का वो छुआन, अंदर तक हिला दिया । आज से पहले जो उनके दिमाग में उस दिन के घटना के लिए शर्मिंदगी थी , जो उनके और प्प्रज्ञा के बीच घटा था , वो दूर हो गया था । प्रज्ञा का वो चुलबुली अंदाज में पापा से यूं अचानक ही चिपट जाना उनके मन को कचोट दिया था । आज पहली बार उन्हें प्रज्ञा के छोटे छोटे मौसंबी जैसे स्तनो का आभाष अच्छे से हुआ था । उनका लिंग एकदम 90 डिग्री एंगल में टनक गया था । वो तो अच्छा हुआ कोई आस पास था नहीं । नहीं तो वो पूरे परिवार के सामने शर्मिन्दा हो जाते । और उन्होंने लोअर पहन रखा था बिना चड्डी के , इस कारण ,वो 8 इंच का लंबा और मोटा मूसल लौरा , लोअर में इतना लंबा तंबू बना गया ।
वो झट से अपने रूम में चले गए ।
अगला अपडेट जल्द ही...
Wah kya situation creat ki hai. Pragya ki ragdai train ke safar se hi suru ho jayegi. Good going.Update 67 ( समस्या का समाधान)
शाम होने को आ गई थी , मालिश के बाद प्रज्ञा अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी पूरा दिन , वही प्राची की आँख लग गई थी और अब जा के उसकी आंख खुली जब घड़ी में 7 बजाने को आ गए शाम के । उठी तो उसका शरीर अकड़ रहा था । उसने मन में बुदबुदा के कहा : आह...आज एकदम अच्छी नींद आई , प्रज्ञा के हाथों ने जादू कर दिया , महीनों बाद इतना सुकून मिला । पता ही नहीं चला कि शाम हो गया ।
तभी दादी प्राची के पास आती है : अरे बेटी , उठ गई , इतना गहरी नींद में सोई थी कि आवाज देने पर भी नहीं उठी । चल उठ कर मुंह हाथ धो ले और थोड़ा ड्राई फ्रूट भिगो के रखे है तेरे लिए , खा ले । तेरे पापा भी आते ही होंगे । इतना देर तक भूखी रहेगी तो वो गुस्सा करेगा ।
प्राची : अरे मेरी भोली दादी मां , उनको कैसे पता चलेगा कि मैं भूखी हूं? हाहाहा...
दादी : मै रिपोर्ट दे दूंगी उसको की तूने कुछ खाया नहीं है और बस मालिश करा के सोती रही है पूरे दिन । प्रज्ञा को देख इतना पढ़ रही है ।
प्राची : अरे हां दादी वो प्रज्ञा से याद आया , उसका एडमिशन का एग्जाम सेंटर लखनऊ में पड़ा है ।
दादी : क्या , इतनी दूर ?, उसका कॉलेज तो यही पास में ही है १०० किलोमीटर पे ।
प्राची : हां , मगर उस कॉलेज का मैं ब्रांच लखनऊ में है । और एग्जाम वही होगा ।
दादी : कब है एग्जाम ?
प्राची : वो तो बता रही थी कि 15 को है , अगले संडे । और अगर एग्जाम में पास हुई तो उसके अगले संडे इंटरव्यू और काउंसलिंग भी है।
दादी : अरे ये तो मुसीबत हो गई । वो कैसे जाएगी इतनी दूर , लखनऊ के लिए तो ट्रेन लेना होगा , उसका टिकट इतनी जल्दी मिलेगा ?
प्राची : पापा को बोलो ना, वो देख लेंगे , ओर कोई न कोई जुगाड़ निकल लेगे ।
दादी : मगर तेरी ये हालत है । इस हालात में कब हॉस्पिटल के लिए जाना पर जाए कोई गारंटी नहीं होती । इस हालात में तुझे छोड़ के वो थोड़े न जाएगा ।
प्राची : अरे दादी , आप बस पापा को बता दो ना ,बांकी सारा पापा देखलेंगे क्या फैसला लेना है।
उधर प्रज्ञा भी टेंशन में आ गई थी कि इतने दिनों से उसने पापा से ठीक से बात भी नहीं की है , वो कैसे जाएगी पापा के पास , उनसे नज़रे कैसे मिलाएगी । ऊपर से दीदी की ये हालत है । ऐसे में पापा उन्हें छोड़ के मुझे एग्जाम दिलाने जायेंगे ?
खैर दरवाजे पे दस्तक हुआ तो दादी ने प्राची से कहा : शायद आ गया तेरा पापा ।
दादी ने दरवाज़ा खोला और पापा आ गए थे ।
फ्रेश होने के बाद सब डिनर की तैयारी करने लगे और प्राची भी रूम से निकल के लिविंग रूम में आ गई थी , उसका पेट बहुत ही निकल गया था और वो 19 साल की प्रेग्नेंट लड़की थोड़ा चलने से ही थक जा रही थी ।
जब तक प्रज्ञा और दादी खाने की तैयारी में किचेन में लगे थे ,तब तक पापा और प्राची को एकांत मिल गया था ।
पापा ने सोफे पे बैठे अपनी पत्नी को एकदम से होठों पे एक किस कर लिया । प्राची मुस्कुरा दी।
प्राची : क्या बात है आज आप बारे खुश लग रहे है ।
पापा : नहीं ,मै बस सोच रहा था कि अब बस २ महीने की ही बात है , फिर तो हमारा बच्चा ,तुम्हारे गोद में खेल रहा होगा । और तुम उसे दूध पिला रही होगी ।
प्राची : आप तो ऐसे बोल रहे हो जैसे ये सब खेल है ? मुझे कितना सहना पर रहा है , आप देख रहे है ना ? देखिए ना मेरी हालत , पेट इतना भारी हो गया है , वजन बढ़ गया है । मै कितनी बदसूरत दिख रही हु ? ऊपर से मुझे ये भी डर लगा रहा है कि डिलिवारी के दौरान क्या होगा ? मेरी तो हालत खराब हो रही है ये सोच सोच के ।
पापा : तुम्हे चिंता करने की जरूरत नहीं है , डॉक्टर सुषमा पे भरोसा रखो , वो अच्छी डॉक्टर है । वो वर्मा जी जो थे , उनकी भी वाइफ की डिलीवरी तो उन्हीं ने की थी । सब अच्छे से हो गया था । तुम्हारी भी हो जाएगी । और ज्यादा सोचोगी तो ज्यादा डर लगेगा । और बच्चे पर भी असर पड़ेगा । और फिर मै तो साथ हूं ही तुम्हारे पास हमेशा ।
प्राची : हां पापा , आप है तो मुझे कोई डर नहीं है। फिर भी एक झिझक सा तो लग रहा है।
पापा: कोई झिझकने की बात नहीं है , सब अच्छा होगा , हमारा बच्चा तेरे गोद में जल्दी ही खेलेगा ।
तभी दादी पापा का खाना थाली में लिए आई और बोला : आज बेटे ,खाना लग गया है , आ जा खाने ।
पापा : बस अभी आया मां।
दादी ने बारी बारी सबका प्लेट लगा दिया और सबलोग बैठे के खाने ।
दादी : बेटे खाना कैसा बना है ?
पापा: बहुत अच्छा मां । अच्छा प्राची को सारे टाइम डाइट के हिसाब से खिला रही हो ना ?
दादी : हां बेटे , मै प्राची को अभी बिना खिलाये नहीं छोड़ने वाली , उसका ध्यान रखना तो अभी और जरूरी हो गया है ।
पापा: हां मां, अब समय नजदीक आता जा रहा है। आप अनुभवी है । प्राची का ये पहला बच्चा है । आप ही इसका मार्गदर्शन करते रहियेगा । आज ये घबराई हुई थी , डिलीवरी का सोच सोच के ।
प्रज्ञा भी वही बैठी ये बाते सुनते हुए अपना निवाला खा रही थी ।
दादी : अरे प्राची , तू इन सब बातों का टेंशन अभी मत ले , अभी २ महीने है उसको , और वैसे भी कुछ भी नहीं होगा तुम्हे , सब अच्छे से हो जाएगा , डॉक्टर साहिबा ने बोला है ना , ज्यादा टेंशन इस हालात में नहीं लेने को ।
प्राची : अरे नहीं दादी , बस ऐसे ही थोड़ा , वो पहली बार अब कुछ हो रहा है ना तो थोड़ा डर लग रहा है ।
दादी : हमलोग है ना , डरने की कोई जरूरत नहीं ।
सब लोग खाना खाते रहे ।
दादी ने तभी बोला : बेटे एक ओर बात कहना है तुझसे ।
पापा : हाँ मां , बताइए ना।
दादी : वो बेटे , प्रज्ञा के एडमिशन के लिए जो कॉलेज तूने बताई थी ना, वो रामनगर वाली , उसका एग्जाम अगले संडे को ही है ।
पापा प्रज्ञा का नाम सुन के जरा सा झेप गए और बोला : अच्छा ।
दादी : तो बेटे , एग्जाम दिलाने तू जाएगा साथ में ?
पापा : अरे मां, ज़्यादा दूर का मामला थोड़ी ना है , आप दिलवा देना , बस से ३ घंटे ही तो लगते है , सबेरे निकल जाना और शाम तक तो घर भी आ जाएगा आप दोनों । और वैसे भी प्रज्ञा को तब अब देखा ही हुआ है । फॉर्म भरने तो गई थी ना वह ।
दादी : पर बेटा एक दिक्कत है । एग्जाम का सेंटर लखनऊ में है ।
पापा चौक गए : हाअअ...ये कैसे , कॉलेज तो यहां है ओर एग्जाम लखनऊ, इसी लिए तो मैने पास का कॉलेज चुना था कि इन सब चीजों में परेशानी नहीं होगी ।
प्रज्ञा : हां पापा , मैने भी यही सोच के इस कॉलेज का फॉर्म भरा था । और एडमिशन के बाद क्लास भी यही चलेगी मेरी , अगर मै सिलेक्ट हुई तो । मगर ये कॉलेज का मैन ब्रांच लखनऊ में है । और इस कॉलेज के जितने भी ब्रांच है सबका एग्जाम मैन ब्रांच में ही होता है , वहां सिलेक्शन होने के बाद हमने जहां के लिए फॉर्म भरा है , एडमिशन वही होती है ।
पापा: ओह , फिर थे फेरे में पड़ गए । लखनऊ के लिए तो ट्रेन लेना पड़ेगा । क्यों कि नहीं भी तो 12-13 घंटे का सफर है।
दादी : हां , मैं भी वही सोच रही हूं, अब टिकट भी मिलेगा क्या नहीं इतनी जल्दी , अगले संडे ही एग्जाम है । तुम बोलो तो प्रज्ञा ये एग्जाम छोड़ देगी । वैसे भी वो दूसरा कॉलेज का भी तो तैयारी कर रही है , उसका एग्जाम दे देगी । एडमिशन इस कॉलेज में ले या उस कॉलेज में , पढ़ना तो एक ही चीज है।
पापा : अरे नहीं नहीं मां, प्रज्ञा ने इतनी मेहनत किया है तो एग्जाम तो देना ही चाहिए , ऊपर से ये कॉलेज बहुत ही अच्छा है । और क्या पता , उस कॉलेज में एडमिशन के लिए सिलेक्ट नहीं हो पाई तो । यहाँ तो मैने उस कॉलेज को बैकअप के तौर पे रखा था कि अगर इस कॉलेज में सिलेक्ट नहीं हो पाती तो दूसरे में तो हो जाएगा । रिस्क नहीं ले सकते मां, एग्जाम तो दिलवाना ही पड़ेगा , प्रज्ञा के करियर का सवाल है ।
प्राची : हां दादी, आपने तो मेरी शादी करा दी , वैसे मुझे तो पढ़ने में मन भी नहीं लगता था । तो मेरा तो ठीक है पर प्रज्ञा को बहुत लगता है , उसको ना रोकिये ।
पापा: हां मैं भी यही सोच रहा हु । प्रज्ञा को तो पढ़ना ही चाहिए। कोई नहीं मै देखता हु। तत्काल में भी टिकट मिल जाए तो बेहतर है । या किस्मत सही रही तो शायद ट्रेन में ऐसे भी मिल सकता है ।
प्रज्ञा : पापा और संडे के एग्जाम के बाद अगर सिलेक्ट हो जाती हु मै , तो अगला इंटरव्यू और काउंसलिंग भी वही है उसके नेक्स्ट संडे ।
पापा: ओह ये एक तो और मुसीबत हो गई , फिर आना फिर जाना , हद है ये कॉलेज वाले , कुछ समझते ही नहीं है और अपनी मनमानी लगा रखी है इन लोगों ने तो।
दादी : फिर क्या करेगा बेटे ?
पापा : ह्म्म्म.. दुबारा आना और जाना तो काफी मुश्किल वाला फैसला लग रहा है । एक काम हो सकता है । मै लौटने का २ टिकिट कर लेता हु । अगर एग्जाम के बाद प्रज्ञा अगले राउंड में नहीं जाती है तो हम लोग मंडे को हो रात का ट्रेन ले लेंगे वापस घर के लिए , और अगर सिलेक्ट हो जाती है तो वही एक होटल ले के रुक जाएंगे । और प्रज्ञा का एग्जाम अगले दिन दिलवा के वापस आ जाएंगे।
दादी : पर बेटा , प्राची की हालत देख , इस हालात में अगर तू 1 सप्ताह घर पे नहीं रहेगा तो प्रॉब्लम हो जाएगी, प्राची कम उमर की प्रेग्नेंट है। कुछ ऊंच नीच होगा तो इसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाना पर सकता है । तू नहीं रहेगा तो कैसे हो पाएगा ।
पापा: आप क्यों फिक्र करती है , उसका जुगाड़ भी मै लगा दूंगा ।
दादी : देख ले , बाद में मै मुसीबत में नहीं पड़ना चाहती और मेरी बच्ची प्राची को भी कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए ।
पापा: विश्वास रखिए मां , आप निश्चिंत रहिए । मै खुद प्राची को अभी ऐसे चोर के नहीं जाना चाहता पर ,सबकुछ हमारे हाथ में नहीं होता ना। मै अभी हॉस्पिटल कॉल कर के अब सेट करता ही , टिकट तब ही लूंगा ।
दादी : ठीक है बेटा ।
खाना खाने के बाद पापा ने अपना फोन उठाया और स्त्री केयर हॉस्पिटल में कॉल लगाया ।
पापा: हैलो।
फोन एक रिसेप्शनिट ने उठाया : हेलो, रोमा हेयर , स्त्री केयर हॉस्पिटल, हाउ में ई हेल्पयू सर?
पापा: अरे मैने एक पेशेंट के रेगडिंग कॉल किया है । दरअसल मेरी पेसेंट गर्भवती है और उसका इलाज आपके ही हॉस्पिटल से चल रहा है । मगर अगले हफ्ते ही मुझे शायद आउट ऑफ टाउन जाना पर सकता है , अगले एक सप्ताह के लिए । उस बीच आपकी कोई इमरसेंसी सेवा उपलब्ध है जो बस एक कॉल से तुरंत हेल्प पहुंचा सके ।
रोमा: जी सर , व्हाई नॉट , हमारा एक एमर्सेंजी एम्बुलेंस सर्विस है जो बस एक कॉल से ही आपके घर तक पहुंच जाएगा और पेशेंट का इलाज हो जाने के बाद वापस छोड़ आयेगा ।
पापा: वाह वही तो चाहिए था । अच्छा मुझे उस का नंबर दे दीजिए ।
रोमा : ओके सर , आप अपना नंबर दे दीजिए और हम आपके कॉल को प्रायरिटी लिस्ट में डाल देंगे , ताकि आपका कोई भी कॉल आएगा तो हम क्विक रिस्पॉन्स देंगे । मै आपको नंबर भी उसी नंबर पे व्हाट्सएप्प कर दूंगी ।
पापा ने रोमा को नंबर दिया और फिर कॉल काट दिया और दादी के तरफ देख के बोले : आप खामखा टेंशन ले लेते हो , सब सही हो जाएगा।
पापा ने तुरंत ही टिकट बुक करने का देखा, स्लीपर या 3rd एसी में कोई टिकट नहीं , यहां तक कि 2nd ऐसी में भी सभी ट्रेन में लगभग येही हाल था । अब क्या किया जाए । किस्मत से बस एक रात की ट्रेन थी जो शनिवार को चल के रविवार को सबेरे 5 बजे लखनऊ पहुंचा देती थी और उसमें बस 1st एसी में ही कुछ शीट खाली था । बांकी सारे भरे हुए थे । 1st AC का टिकट तो थोड़ा महंगा था ,मगर और दूसरा कोई चारा नहीं था । ऊपर से समय भी ठीक था । पापा शनिवार को ऑन ऑफिस का काम कर के , शाम को ट्रेन पाकर सकते थे और सबेरे प्राची का एग्जाम 11 बजे से था तो टाइम से पहले हो पहुंच सकते थे। पापा ने कोई और उपाय न देख के 2 टिकट बुक कर ली। वही साथ ही पापा ने आने के लिए 2 दिनों का टिकट बुक किया , एक मंडे का और अगला , इंटरव्यू के बाद वाले मंडे का।
अब जा के प्रज्ञा के जान में जान आई । वो लखनऊ वो भी एक सप्ताह में जाने का सोच के घबरा गई थी । की कही वो एग्जाम दे ही नहीं पाई तो । पर पापा ने सब ठीक कर दिया । उसके दिमाग से ,पापा संग घंटे वो घटना भुला गया और अभी वो पापा पे बहुत खुश हो गई । खुशी के मारे , वो अपने चुलबुली स्वभाव के कारण पापा के पास फुदकते गई और पापा को गले लगा लिया । उसके मन में पापा के साथ कोई गलत भाव नहीं था , उसने पापा को बोला : थैंक यू पापा।
दादी : अब खुश है ना?
प्रज्ञा : हां दादी पापा ने सारी परेशानी ही दूर कर दी ।
दादी : हां तो चल अब पापा थके है ,लिपटना छोड़ ओर उन्हें सोने जाने दे , तू भी जा सो जा। 10 बजने को आये ।
दादी ने प्राची को सहारा दे के उसे अपने कमरे में ले गई । वही प्रज्ञा भी खुशी मन से अपने कमरे में चली गई । पर पाप वही स्तब्ध खड़े रहे । उस घटना के बाद आज पहली बार प्रज्ञा ने ढंग से उनसे बात की और अभी जो उसने उन्हें गले लगाया । उस आलिंगन ने उन्हें हिला दिया । प्रज्ञा भले ही वो आलिंगन , अपने पापा को की थी ,मगर पापा , जो कि अपने पत्नी के प्रेग्नेंट होने के बाद इतने दिनों से स्त्री स्पर्श को तरस रहे थे । उन्हें प्रज्ञा का वो छुआन, अंदर तक हिला दिया । आज से पहले जो उनके दिमाग में उस दिन के घटना के लिए शर्मिंदगी थी , जो उनके और प्प्रज्ञा के बीच घटा था , वो दूर हो गया था । प्रज्ञा का वो चुलबुली अंदाज में पापा से यूं अचानक ही चिपट जाना उनके मन को कचोट दिया था । आज पहली बार उन्हें प्रज्ञा के छोटे छोटे मौसंबी जैसे स्तनो का आभाष अच्छे से हुआ था । उनका लिंग एकदम 90 डिग्री एंगल में टनक गया था । वो तो अच्छा हुआ कोई आस पास था नहीं । नहीं तो वो पूरे परिवार के सामने शर्मिन्दा हो जाते । और उन्होंने लोअर पहन रखा था बिना चड्डी के , इस कारण ,वो 8 इंच का लंबा और मोटा मूसल लौरा , लोअर में इतना लंबा तंबू बना गया ।
वो झट से अपने रूम में चले गए ।
अगला अपडेट जल्द ही...
Feedback ke liye dhanyawaad. Apki utsukta dekh ke bahut accha laga.Very erotic Sarkar jihi c cc siiii
Kyaa likha hai ji,bilkul gili kr di
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Hmmm...naye safar ki suruaat.Wah kya situation creat ki hai. Pragya ki ragdai train ke safar se hi suru ho jayegi. Good going.