Biwi sang honeymoon nhi man saka , sali sang to mana hi skte hai7 din ka honeymoon package
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Pragya or papa ka rista jald hi badalne wala haiDekhte h pragya kha thukti h train k coupe me ya hotel me thukna to h hi
Bahut hi hot pics...
Nice update....Update 66:
इन दिनों, प्राची और पापा का बात बहुत कम हो होती थी। पापा काम में व्यस्त और उसके अलावा जो समय मिलता वो प्राची की देखभाल में लगाते। वैसे भी घर पे उनको रहने का ज़्यादा समय मिलता भी नहीं था । सबेरे घर से निकल जाना और शाम को भी लेट घर आना यही रुटिन था। उधर प्रज्ञा भी उस दिन के बाद पापा से ज्यादा तर नज़रे चुराने की ही कोशिश करती थी। और अपना ज्यादा समय पढ़ने में लगती। हालांकि प्राची के साथ समय जरूर बिताती थी। उसका छोटा मोटा काम कर देना , उसकी मालिस कर देना , उसको समय समय पर दवाइयां देना । उसे प्राची का ध्यान रखते रखते ऐसा लगने लगा था कि उसे अब प्रेग्नेंट होने के बाद क्या करना है अब पहले से पता होगा। आज अगर प्रज्ञा और प्राची की मां जिंदा होती तो शायद प्राची का ध्यान वो रखती । ये अलग बात है कि तब प्राची के पति पापा नहीं होते ।
खैर , प्रज्ञा अब दीदी के सारे रुटीन से वाकिफ थी। जब भी प्रज्ञा प्राची की मालिश करती । तब तब वो महसूस करती कि प्राची कुछ तो असहज हो जाती थी और अब उसको अच्छे से पता था उस असहजता का मतलब । दीदी को मालिश करते टाइम जोश आने लगता था और फिर वही होता था , प्राची की पैन्टी गीली हो जाती थी।
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और वो आहे भरने लगती , हवा में अपने भरी हुई और गदराई हुई नितंभ उछलने लगती, और कभी कभी तो प्रज्ञा के सामने ही अपने पैन्टी में हाथ तक डाल लेती थी और अपने गुप्तांग को सहलाने लगती थी।
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प्रज्ञा इन सब चीजों में सहज हो चुकी थी । वो अब चौकती नहीं थी क्योंकि उसे दादी ने बता दिया था कि ऐसा दीदी के साथ क्यों हो जाता है। प्राची का पेट भी अब काफी उभर गया था।
एकदम तो प्राची इतना हॉर्नी महसूस कर रही थी कि उसने प्रज्ञा का हाथ पकड़ के अपने जांघों के ऊपरी हिस्से पे डाल लिया जो उसके योनि से बहुत करीब था और प्राची ने बोला : प्रज्ञा , जरा यहां की मालिश कर दे ना आज जांघों में अकड़न सी महसूस हो रही है।
प्रज्ञा : जी दीदी। और प्रज्ञा दीदी की जांघों में मालिश करने लगी । प्राची ने अपनी घाघरे को पेट पे चढ़ाया हुआ था जिससे उसके पैन्टी भी प्रज्ञा को दिख रहे थे और प्राची की टांगे पूरी तरह से नंगी खुली थी अपने छोटी बहन के सामने । प्रज्ञा ने देखा कि दीदी की पैन्टी में चुत के पास हल्का सा पानी जैसा लगा है और प्रज्ञा जब प्राची का पैर रगड़ रही थी तो गीलेपन का दायरा बढ़ता हो जा रहा था । और देखते ही देखती पूरी पैन्टी गीली हो गई ।
प्राची और प्रज्ञा के बीच इस क्रिया पे कभी बात नहीं होती थी । प्राची का मालिश प्रज्ञा करती थी , उस दौरान प्राची का पैन्टी गीला होता था और या तो प्राची का हाथ पैन्टी ने चला जाता था और अंत में प्राची हिचकोले खाते हुए झर जाती थी , ना वो एक शब्द भी प्रज्ञा से इस बारे में बात करती और ये सब देखने के बाद भी ना प्रज्ञा ही प्राची से कुछ पूछती। मगर आज पापा से चुदाई किए हुए प्राची को लगभग 4 महीने होने को आ गए थे और आज ये कुछ अलग था । प्राची काम उद्वेग का काबू नहीं कर पा रही थी । उसके हाव भाव में एक छटपटाहट सी थी। उसका बदन गरम भट्ठी की तरह पक रहा था और प्राची को पसीना भी बहुत आ रहा था । पैन्टी भी आज पहले दिनों के मुकाबले , आज कुछ ज्यादा ही गीली हो गई थी। अंत में हार के , जब प्राची काम उद्वेग पे काबू न के सकी तो प्रज्ञा से बोला : प्रज्ञा , मुझे आज पता नहीं क्या हो गया है । मन काबू में नहीं है छुटकी, देख रही है क्या हाल हो गया है ।
प्रज्ञा : हां दीदी आप को पापा की याद आ रही है ना।
प्राची : बहुत मेरी बहन...उनको बहुत मिस कर रही हु । एक तो रात को ये दादी कम्बक्त की तरह मेरे पास ही सोती है । नहीं तो कम से कम पापा को थोड़ा अपने बांहों में तो लपेट सकती थी । उनके टच करने से मेरा ये हाल नहीं होता ।
प्रज्ञा : उनके टच करने से आपका हाल ठीक कैसे होता दीदी।
प्राची : तू एक दम नादान ही है मेरी नन्ही मुनिया । टच का मतलब है पापा मेरे अगर वहां अपने हाथों से मसल भी देते तो मेरा ये हाल नहीं होता ।
प्रज्ञा : होह...क्या कह रही दीदी..पापा से आप ये सब भी करवाओगी , जैसे आप मेरे सामने अपना मसल लेती हो पैन्टी में हाथ डाल के ।
प्राची : अच्छा... और तू क्यों देखती है मुझे वो करते ।
प्रज्ञा : तो आंखे थोड़ी न बंद के लूंगी यार।
प्राची : ह्म्म...पता नहीं प्रज्ञा , मुझे क्या हो जाता है , एक तो मालिश के वक्त तू जो मेरे पैरो को रगड़ती है , वो मुझे मदहोश कर देता है , ऐसा लगता है जैसे पापा का हाथ हो और वो मेरे जांघो के रगड़ रहे है और फिर मेरी वो गीली हो जाती है। मै खुद को रोक ही नहीं पाती ।
प्रज्ञा : ऐसा क्या है पापा के हाथों में दीदी की आपको उनकी इतनी याद आती है ।
प्राची : प्रज्ञा , उनके हाथों में जादू है , उनका जादू जब मुझ पे छा जाता था ना तो मै एक बिल्कुल अलग सा दुनिया में पहुंच जाती हु।
प्रज्ञा : दीदी , आप पापा से बहुत प्यार करती है ?
प्राची : हां मेरी छुटकी,जान से ज्यादा , पापा तो अब मेरे बच्चे का भी पापा बनने वाले है।प्यार न होता तो ये अब नहीं होता ना।
प्रज्ञा : अच्छा दीदी , मुझे इन सब बातों से कुछ कुछ होने लगता है ।
प्राची : तू भी तो जवान हो गई है । ये बाते किसी भी जवान लड़की हो रोमांचित कर देते है ।
प्रज्ञा और प्राची की बाते चलती रही । और इन बातों का असर प्राची पे ये हुआ कि उसका चुत और गीला हो गया । वो अब सह नहीं पा रही थी । मगर पेट निकल जाने के कारण उसको अपना हाथ अपने चुत तक पहुँचा के उसे रगड़ के अपना चरम सुख प्राप्त भी मुश्किल हो रहा था ।
कोई चारा ना देखते हुए उसने प्रज्ञा से बोला : छुटकी , मेरा एक काम कर देगी ?
प्रज्ञा : हां दीदी बोलो ना।
प्राची : बहन , आज रहा नहीं जा रहा , मन के रहा है कि जोर से मेरे योनि को कोई तो मसल दे , तो थोड़ा सुकून मिलेगा । पापा रहते तो उनसे कहती । मेरे लिए इतना कर दे , मेरे पैन्टी के ऊपर से ही क्या तू मेरे योनि को थोड़ा मसल देगी । जी बहुत मचल रहा है ।
प्रज्ञा : अरे मै कैसे दीदी , ओर डॉक्टर ने तो मना किया है ना आपको।
प्राची : मेरे पास कोई चारा नहीं है प्रज्ञा , मै खुद से नहीं कर पा रही हु पेट के कारण । ओर डॉक्टर ने सेक्स करने के लिए मन किया है , हस्तमैथुन के लिए नहीं।
प्रज्ञा : आपकी तड़प मुझे से देखी नहीं जा रही है दीदी । ठीक है मै आपके वहां भी मालिश कर देती हु।
प्राची : क्या मै अपना पैन्टी खोलू?
प्रज्ञा : मगर दीदी अपने तो कहा था पैन्टी के ऊपर से ही ।
प्राची : मगर तेरे हाथों में तो तेल लगा है ऐसे में पैन्टी पे अपने हाथ रगड़रेगी तो ये खराब नहीं हो जाएगी क्या ?
प्रज्ञा : पर दीदी आपको शर्म नहीं आएगी ?
प्राची : तुझ से शर्म कैसा , जो तेरे पास है वही तो मेरे पास भी है । और मां तो हमदोनों को साथ में ही नहा देती थी , तब तो हमदोनों को शर्म नहीं आयी थी ।
प्रज्ञा : मगर उस समय तो ह्म बस 12-13साल के रहे होंगे ।
प्राची : प्लीज़ प्रज्ञा , कर दे ना , मै मर जाऊंगी नहीं तो ,इतनी खुजली हो रही है । लग रहा है पूरा बिस्तर ही गीला हो जाएगा इतना गीला हो रहा है ।
प्रज्ञा : ठीक है दीदी , आपको आराम मिलेगा तो मै कर दूंगी । वैसे भी मुझे आपकी सेवा करने का ही काम मिला हुआ है ना ।
प्राची : ठीक है , तू खुद से उतार दे और के दे ना। तुझे तो पता ही है ना कि कैसे करते है , दादी ने जो बताया था तुझे ?
प्रज्ञा शरम से पानी पानी हो गई : क्या दीदी , दादी ने आपको भी बता दिया ?
प्राची : तब , और क्या , सोने से पहले मै दादी से डेढ़ सारा बात करती हु । उन्होंने मुझे अब बताया । मेरे काम अग्नि को शांत करने के बाद मै भी तेरे अग्नि को शांत कर दूंगी । अगर तू जाहे तो ।
प्रज्ञा : अच्छा ठीक है दीदी , मै आपका कर देती हु मगर मुझे नहीं करवाना । मुझे शर्म आती है ।
प्राची: दादी के सामने तो नहीं आई शर्म? वहां तो तू उनके सामने ही मजे ले रही थी ।
प्रज्ञा : पर वो तो बस मुझे वो करते कैसे है वो सीखा रही थी।
प्रज्ञा ने प्राची का पैन्टी खींच के नीचे टांगों से सरका के अलग कर दिया , योनि द्वार के सामने का पार्ट पूरा गीला हो गया था । प्रज्ञा ने प्राची का चुत देखा , प्रेग्नेंट होने के बाद काफी बदल गया था , एकदम फूल गया था
और लग रहा था किसी भी वक्त इससे बच्चा बाहर ना आ जाए । ऐसा लग रह था, कि कोई प्राची के योनि को अंदर से धक्का दे रहा है । वैसे 7 वा महीना जो चल रहा था । दो महीने ही तो बचे थे । योनि पे बाल आ गए थे , आज कल प्राची बाल साफ नहीं कर रही थी क्योंकि उसे अपना चुत पापा को दिखाना नहीं था ।
योनि का छिद्र भी पलर सा गया था , यानी काफी फैला हुआ लग रहा था । ऐसा लग रहा था कि प्राची को किसी मूसल से चोदा गया हो । ये पापा के कृपा से हुआ था । पापा ने इस बुर का इतना इस्तेमाल कर लिया था कि प्राची के योनि की कसावट ढीली हो गई थी । ये देख के प्रज्ञा को आश्चर्य भी हुआ ।
प्रज्ञा ने अपने हाथों में हल्का तेल लगाया और प्राची के चुत पे हल्के हल्के मसलने लगी । प्राची के मुंह से एक दबी आह निकल गई । उसकी आँखे बंद हो गई और वो जन्नत का सैर करने लगी ।
प्रज्ञा : कैसा लग रहा है दीदी?
प्राची : सुकून मिल रहा है मेरी बहना , सुकून।
प्रज्ञा : सच में , आपकी ये तो बहुत ज्यादा ही गीली हो चुकी है पूरा पानी निकल रहा है ।
प्राची : हां देख रही है न क्या हाल है मेरा । उस निगोडी डॉक्टर ने कैसे मुझे पापा से दूर कर के इस हालात में पहुंच दिया है ।
प्रज्ञा : दीदी, ये तो आपके भलाई के लिए ही किया है ना डॉक्टर ने , भूल गई क्या हालत हो गई थी आपकी ।
प्राची : ह्म्म्म..याद है..मगर इसका करे क्या ।
प्रज्ञा : दीदी एक बात पूछूं?
प्राची: कुछ भी पूछ पर अपना हाथ ऐसे हो मेरे योनि पे चलती रह ,बहुत मज़ा आ रहा है ,उम्म्म...आह्ह्ह...
प्रज्ञा : दीदी , आपका गुगू (चुत) तो बहुत टाइट था शादी से पहले , अभी ऐसा कैसे हो गया , पूरा खुल गया है लग रहा ? इतना फ़ैला कैसे ? प्रेग्नेंट होने की वजह से क्या ?
प्राची : ये सब तेरे पापा का कमाल है मेरी बेटी...तेरी दीदी मां को पापा ने हर रात अच्छे से भोगा है ।
प्रज्ञा : पर इतना फैल जाता है क्या ? क्या पापा का इतना मोटा है ?
प्राची: हां मेरी बहना , पापा का बहुत ही मोटा है ....आह्ह्ह्ह...ऐसे ही हाथ चलती रह...रोक मत.....,
हां पापा का बोहत मोटा है...इसीलिए...आह तो मेरी पहली रात के बाद 10 दिनों था हालात खराब थी....आह्ह्ह्ह प्रज्ञा बहुत मज़ा आ रहा है ।
प्रज्ञा को एक झटका सा लगा , उसे प्राची का ये हाल देख के । क्या पापा का इतना मोटा है ? दीदी ने इतनी मोटा लिया कैसे होगा ? उसकी भी तो शादी से पहले मेरे जितनी छोटी गुगु ही थी ? उसके दिल में एक डर सा बैठ गया ।
खैर प्राची अपने चरम पर पहुंच गई थी ,और प्रज्ञा पूरी सिद्दत से अपने दीदी के सेवा में लगी थी ।
अगले ही पल प्राची का शरीर अकड़ गया और उसने अपनी मीठी से कस के प्रज्ञा के हाथ को पकड़ के भींचने लगी । और उद्वेग के साथ एक रस का फुहार उसके चुत से छुट पड़ा। वो तृप्त हो गई थी । आंखे मूंदे परी थी । और शायद होश में नहीं थी । प्रज्ञा ने प्राची के चुत को एक कपड़े से साफ किया । और वापस पैन्टी कमर तक चढ़ा दी । प्राची एकदम शांत हो गई थी ।
प्रज्ञा : दीदी , ठीक तो हो ।
प्राची: आह...एकदम मस्त...अब जा के चैन मिला मेरी बहना , थैंक्यू, पता है मै लगभग एक महीने से इतना नहीं झड़ी थी ।
प्रज्ञा : आपको खुशी मिली तो मुझे भी अच्छा लगा दीदी। अच्छा दीदी , आपको क्या चाहिए लड़का या लड़की ?
प्राची : प्रज्ञा , मुझे सच पूछो तो , जो भी हो , लड़का या लड़की , उसे कोई फर्क नहीं पड़ता । मेरे लिए वो पापा के प्यार की निशानी होगा ।
प्रज्ञा : वाह मेरे पापा की दुल्हनिया , उनके प्यार में एकदम पागल हो गई हो तुम दीदी है ना।
प्राची : अब क्या करूं वो है ही इतने अच्छे , एकबार तू भी अगर उनका प्यार पा ली तब पता चलेगा तुझे , ऐसे मै बयान नहीं कर सकती ।
प्राची के इस तरह से कहने से प्रज्ञा का दिल एकदम जोर से धड़क गया , एकदम से वो कांप उठी , क्या दीदी मुझे पापा के साथ ...?
प्रज्ञा सोच में डूबी ही थी कि प्राची बोल पड़ी: सोचना भी मत कि पापा कुछ ऐसा तेरे साथ करेंगे , तू उनकी बेटी ही रहेगी , पत्नी मै हु। मै मजाक के रही थी , तेरे चेहरे पे तो हवाइयां उड़ने लगी...हाहाहा...
प्रज्ञा थोड़ा शर्माते हुई: .... दीदी... आप भी ना। मजाक ही हद होती है , वो मेरे पापा है यार।
प्राची : सॉरी ।
प्रज्ञा : अच्छा दीदी मै चलती हु अब मेरा एग्जाम है तो पढ़ना है ।
प्राची : ओके जा।
प्रज्ञा : अच्छा दीदी , मेरे एग्जाम का डेट आ गया है ।
प्राची: वाह, कब है ?
प्रज्ञा : अगले संडे को दीदी ।ओर फिर अगर इस एग्जाम में पास हो गई तो उसके अगले संडे इंटरव्यू। मगर एक प्रॉबल्म है दीदी।
प्राची : प्रॉब्लम क्या है इसमें ?
प्रज्ञा : दीदी एग्जाम का सेंटर लखनऊ में पर गया है । इस कॉलेज के कई ब्रांच है और मेरा एग्जाम का सेंटर लखनउ के मेन ब्रांच में पड़ा। अब कैसे जा पाऊंगी ?
प्राची : तू क्यों टेंशन लेती है । पापा है ना, मै बात करूंगी । वो लेके जाएंगे ।
प्रज्ञा पापा का नाम सुन के थोड़ा सहमी ,क्योंकि उस दिन पापा के साथ हुए घटना के बाद उसने पापा के तरफ ठीक से देखा भी नहीं था ।
प्रज्ञा : ठीक है दीदी।
और प्रज्ञा अपने कमरे ने चल दी।

Sexyप्रज्ञा के पापा होटल रूम से बाहर गए बीयर और स्नैक्स लेने...
प्रज्ञा अकेले बिकनी पहन के फोटोशूट कर रही है
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