Update 02
उस हादसे के बाद, सविता ने लगातार कई रातों तक कमरे में जागने और सिर्फ सोने का नाटक करने का फैसला किया। वह पूरी-पूरी रात आँखें मूँदे खटिया पर सीधी लेटी रहती और हर छोटी से छोटी आहट को सुनने की कोशिश करती। लेकिन लगातार चार-पाँच दिनों तक रात के सन्नाटे में कुछ भी नहीं हुआ। घर का माहौल एकदम शांत रहा। धीरे-धीरे सविता के मन का वह खौफ कम होने लगा और उसे लगने लगा कि कमला दीदी की बातें और उसका अपना डर सिर्फ एक वहम था। उसने खुद को पूरी तरह तसल्ली दे दी कि उमस और बदन की बढ़ती गरमी की वजह से ही उसने खुद नींद में अपने सारे कपड़े उतार दिए होंगे।
दिन इसी तरह सामान्य तरीके से बीतते चले गए और सविता का डर पूरी तरह गायब हो चुका था। लेकिन तभी एक रात, नियति ने उसके साथ वह खौफनाक खेल खेला जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
रात के करीब दो बज रहे थे, जब घने अंधेरे के बीच सविता को गहरी नींद में अपनी दाहिनी चूची पर किसी बहुत ही गर्म, गीले और भारी स्पर्श का अहसास हुआ। उसे साफ महसूस हुआ कि कोई बहुत ही भूखे अंदाज़ में उसके कड़े हो चुके निप्पल को अपने मुँह में भींचकर चूँस रहा है। उस तीखे और रसीले स्पर्श से सविता की आँखें झटके से खुल गईं। कमरे में घाघ अंधेरा पसरा हुआ था और हाथ को हाथ भी दिखाई नहीं दे रहा था। उसने हड़बड़ाकर जैसे ही उठना चाहा और अपने हाथ हिलाए, तो खौफ के मारे उसका गला पूरी तरह सूख गया।
वह एक बार फिर अपनी खटिया पर पूरी तरह से नग्न हालत में पड़ी हुई थी। उसके भारी पेटीकोट और ब्लाउज का नामोनिशान नहीं था। लेकिन इस बार का नज़ारा सिर्फ कपड़े उतरने तक महदूद नहीं था। जैसे ही उसने अपने दोनों हाथों को अपने भारी बदन पर फेरा, उसे समझ आया कि उस अदृश्य शिकारी ने उसके जिस्म के साथ कितनी बेबाकी से खेला था।
उसके पूरे कातिलाना और भरे-पूरे शरीर का हाल इस समय देखने लायक था। केवल उसके दोनों कड़े और भारी स्तनों पर ही नहीं, बल्कि उसकी गोरी नाभि, उसके चिकने पेट के निचले हिस्से और उसकी दोनों भारी-भरकम दूधिया जाँघों के बीच तक हर जगह एक अजीब सा गीलापन महसूस हो रहा था। किसी ने बड़ी ही फुर्सत और दीवानगी से उसके मक्खन जैसे गोरे जिस्म के एक-एक उभार को चाट-चाटकर पूरी तरह से तर कर दिया था। उसकी योनि के द्वार पर जमे उस लार के गाढ़े और ठंडे अहसास को महसूस करते ही सविता की रूह काँप उठी। वह समझ गई कि गहरी नींद में उसे कोई नशीली चीज़ सुंघाई गई थी, जिसके नशे में वह सुध-बुध खो चुकी थी, और उसी बेहोशी का फायदा उठाकर उस अज्ञात मर्द ने उसके इस ४८ साल के गदराए हुए बदन का कोना-कोना चखकर उसे अपनी हवस की मलाई से सराबोर कर दिया था। अंधेरे कमरे में सविता अपनी इस पूरी तरह भीगी और नग्न काया को समेटे डर और एक अनजानी कामुक उत्तेजना के भयंकर चक्रव्यूह में घुटने टेक चुकी थी।
रात के उस डरावने साए से पीछा छुड़ाने के लिए सविता ने हिम्मत जुटाई। उसने सोचा कि वह इसी वक्त दबे पाँव बाहर जाएगी और घर के बाकी मर्दों के कमरों में झाँककर देखेगी कि कौन अपनी खटिया से गायब है। वह अपनी लाज बचाने के लिए झटपट अपना ब्लाउज और पेटीकोट बदन पर डालती है और कमरे से बाहर निकलती है। लेकिन बाहर इतना घना अंधेरा था कि उसे कुछ भी दिखाई नहीं दिया। वह जैसे ही आगे बढ़ी, उसका पैर लड़खड़ाया और वह सीधे अपने बेटे चिंटू की खटिया से टकराकर उसके ऊपर जा गिरी।
उसका वह 48 साल का भारी-भरकम और गदराया हुआ बदन सीधे चिंटू के जवान जिस्म से जा टकराया। अचानक आए इस भारी वजन और स्पर्श की वजह से चिंटू की गहरी नींद टूट गई। नींद के झोंके में, बिना कुछ सोचे-समझे, चिंटू का मजबूत हाथ सीधे आगे बढ़ा और उसने सविता के ब्लाउज के भीतर दबे एक भारी चूची को गलती से कसकर पकड़ लिया। अपनी हथेली में उस विशाल और मखमली उभार का अहसास होते ही चिंटू को झटके से समझ आया कि यह तो उसकी अपनी माँ का बदन है। उसने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया और घबराकर माफ़ी माँगते हुए पूछने लगा, "क्या हुआ मम्मी? आप ठीक तो हो ना? आधी रात को यहाँ कैसे गिर गईं?" सविता ने बात संभालते हुए कोई बहाना बनाया और वापस अपने कमरे में आ गई।
अगली सुबह जैसे ही घर के सभी मर्द काम के लिए बाहर चले गए, सविता हाँफती हुई और भागती हुई सीधे अपनी जेठानी कमला के पास पहुँची। उसने रात में अपने जिस्म के साथ हुए उस घिनौने खेल और चिंटू की खटिया पर गिरने वाली पूरी बात सच-सच बता दी।
सविता की यह दास्तान सुनकर कमला ज़ोर से हँसी और उसे चिढ़ाते हुए बोली, "क्यों छोटी? सच बता, क्या तुझे भी अब इस छुपे हुए खेल में मज़ा आने लगा है क्या? तेरे बदन पर इतनी बड़ी आफ़त आ गई, कोई तेरे पूरे जिस्म को चाटकर तर कर गया और तू घोड़े बेचकर सोती रही?"
सविता ने रोने जैसी सूरत बनाकर अपनी सफ़ाई दी, "नहीं दीदी! मैं सच कह रही हूँ, मुझे कुछ भी याद नहीं है। जब मेरी आँख खुली, तब कोई मेरी चूची चूस रहा था। मुझे तो पक्का लगता है कि किसी ने मुझे कोई नशीली चीज़ सुँघा दी थी।"
चूची चूसने और पूरे बदन को सिर्फ चाटने की बात सुनते ही कमला का दिमाग अचानक ठनक गया। वह फौरन गंभीर होकर बोली, "सुन छोटी, अगर घर का कोई बड़ा मर्द होता, तो वह अब तक तेरी चूत में अपना खड़ा लँड डाल चुका होता। सिर्फ बदन को चाटना और चूची चूसना... ऐसा बचपना और तड़प कोई जवान लड़का ही कर सकता है। कहीं यह सब करने वाला तेरा अपना जवान बेटा चिंटू तो नहीं है? मैंने कई बार देखा है, जब तू घर में काम करती है, तो वह भी पीछे से तुझे बड़ी गंदी नज़रों से घूरता रहता है।" कमला की यह बात सुनते ही सविता के पैरों तले से ज़मीन पूरी तरह खिसक गई।
कमला के मुँह से चिंटू का नाम सुनते ही सविता का गोरा चेहरा एकदम सफेद पड़ गया। उसने झटके से कमला की बाहों से खुद को अलग किया और खटिया पर उठकर बैठ गई। अपनी ही कोख से जन्मे जवान बेटे पर ऐसा घिनौना इल्जाम सुनकर उसका माँ का दिल अंदर तक तड़प उठा।
उसने गुस्से और घबराहट में अपनी आँखें बड़ी-बड़ी करते हुए कहा, "दीदी! तुम ये कैसी बहकी-बहकी बातें लेकर बैठ गईं? चिंटू मेरा बेटा है, मेरी छाती का दूध पीकर बड़ा हुआ है वो! तुम उसे इस पाप के खेल में कैसे घसीट सकती हो? वह तो अपनी माँ के लिए ऐसा गंदा विचार सपने में भी नहीं सोच सकता। रात को जो कुछ भी हुआ, वह सिर्फ एक भूल थी। अंधेरे में जब मैं अचानक उसकी खटिया पर गिरी, तो नींद के झोंके में उसने अनजाने में मुझे छू लिया था। लेकिन जैसे ही उसे समझ आया कि वह उसकी अपनी माँ का बदन है, उसने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया था। वह मुझसे कितना डरता है, उसने रोनी सूरत बनाकर मुझसे माफ़ी माँगी और पूछा कि क्या मैं ठीक हूँ। वह शहर में दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह खटता है, आते ही थका-हारा सो जाता है। मेरा बच्चा ऐसा कभी नहीं कर सकता!"
कमला ने सविता की बात सुनकर गहरी सांस ली और रहस्यमयी अंदाज़ में अपना सिर हिलाया। उसने एक अनुभवी और शातिर औरत की तरह सविता के गोरे कंधे पर अपना मजबूत हाथ रखा और चबा-चबाकर बोली, "छोटी, तू ममता के जाल में अंधी हो रही है। चिंटू अब कोई छोटा बच्चा नहीं रहा, वह चौबीस साल का पूरा जवान गबरू मर्द हो चुका है। तू उसे अब भी गोदी का लाल समझ रही है, लेकिन उसकी आँखों की भूखी जवानी को तू नहीं पहचानती। मैंने खुद अपनी आँखों से कई बार देखा है कि जब तू आँगन में झुककर झाड़ू लगाती है या कपड़े सुखाती है, तो वह पीछे से तेरे इस भारी और गदराए हुए बदन को टिक-टिकी लगाए घूरता रहता है। तू खुद सोच, अगर जेठ जी या ससुर जी होते, तो वे अब तक तेरी चूत का ताला तोड़कर अपना काम कर चुके होते। सिर्फ बदन को पागलों की तरह चाटना और आधी रात को चूची चूसना... यह बचपना और तड़प किसी भूखे जवान लड़के की ही हरकत होती है। और फिर शहर में रहने के कारण चिंटू को ही ऐसी नशीली चीज़ों की समझ और जुगाड़ है, जिसे सुँघाकर वह तुझे बेसुध कर देता है।"
कमला की बातें सुनकर सविता का जी बैठने लगा था, लेकिन उसका माँ का दिल हार मानने को तैयार नहीं था। वह किसी भी हाल में अपने कलेजे के टुकड़े चिंटू के सिर से इस कीचड़ को धोना चाहती थी। उसने अपनी साड़ी के पल्लू को कसकर उँगलियों में भींचा और कमला के सामने अपने जेठ और ससुर के खिलाफ अपने तर्क सामने रखे।
सविता ने अपनी जेठानी की आँखों में आँखें डालकर कहा, "दीदी, तुम चिंटू को शहर वाला समझकर सारा दोष उसी पर मढ़ रही हो, लेकिन तुम अपने घर के पुराने मर्दों को भूल रही हो। जेठ जी और ससुर जी खेतों पर भले ही सीधे बनते हों, पर असली साज़िश उनके दिमाग में भी चल सकती है। तुम कहती हो कि बड़े होने की वजह से वे ऐसी हरकत क्यों करेंगे, लेकिन क्या पता वे अपनी चालाकी की वजह से सीधे-सीधे ज़बरदस्ती न कर रहे हों? वे अच्छी तरह जानते हैं कि अगर उन्होंने ज़बरदस्ती की, तो मैं चिल्ला दूँगी, पूरा गाँव इकट्ठा हो जाएगा और खानदान की इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी। इसीलिए वे खुलकर सामने आने से डरते हैं।"
सविता ने थोड़ा और करीब आकर धीमी आवाज़ में कहा, "क्या पता जेठ जी सालों से मेरे इस गोरे और भारी बदन को देखकर अंदर ही अंदर सुलग रहे हों, पर बदनामी के डर से सिर्फ रात के अंधेरे में आकर मेरी चूची चूसकर और बदन चाटकर ही अपनी प्यास बुझा लेते हों? और ससुर जी को तो पूरा गाँव जानता है, बूढ़े भले हो गए हैं पर ज़मींदारी का रोब आज भी है। वे मुझे इस घर में बांधकर रखना चाहते हैं। अगर वे मेरे कमरे में आकर नशीली चीज़ सुँघाकर मेरे कपड़े उतारते हैं, तो इसके पीछे उनका एक बहुत बड़ा डर हो सकता है। वे सिर्फ मेरी जवानी का मज़ा लेना चाहते हैं, वह भी बिना किसी सबूत के। और सारा शक चिंटू पर जाए, इसीलिए तो रात को जब मैं बाहर निकली, तो अंधेरे में चिंटू की खटिया मेरे रास्ते में आई। क्या पता किसी ने जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया हो कि सारा इल्ज़ाम चिंटू पर ही आ जाए?"
सविता की इस नई दलील को सुनकर इस बार कमला की बोलती बंद हो गई। सविता ने अपने जेठ और ससुर के ऊपर जो शक जताया था, उसने मामले को और भी ज़्यादा पेचीदा बना दिया था। अब दोनों औरतों के मन में घर के तीनों मर्दों को लेकर एक भयंकर जंग छिड़ चुकी थी।