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पापा बेदर्दी से प्रज्ञा को चोदे जा रहे थे , कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी , प्रज्ञा चिल्लाती जा रही थी : नहीं पापा , आह छोड़ो पापा , मत करिए दर्द हो रहा है । पापा: चुप मादरचोद, चुप चाप लन्ड ले मेरा । बहुत मज़ा आएगा ।
पापा प्रज्ञा के चुत पे उछल उछल के धक्के लगा रहे थे । प्रज्ञा का हर धक्के के साथ मूत निकल जा रहा था । उनकी आंखें ऊपर चढ़ गई थी और हाथ से पापा को हटाने की नाकाम कोशिश कर रही थी । पसीने पसीने । पापा ने गांड का ऐम लगा के लिंग गांड में डाल दिया और फुल स्पीड में चोदने लगे । फिर चुत में । और ऐसा ही रीपीट होता रहा । कभी गांड तो कभी चुत। प्रज्ञा का मूत निकलने से पापा पूरे भीग गए थे , बिस्तर भी गिला ही गया था ।
प्रज्ञा रोई जा रही थी : आह ,पापा , दर्द हो रहा है , छोड़िए । दरिन्दे की तरह मुझ पे टूट परे है । मत करिए पापा । आह....अपने बेटी पे रहम खाइये पापा।
पापा: चुप कर साली , सिनेमा हॉल में तो मजे से चुचि मिझवा रही थी । चुप चाप लौड़ा का चोट सह मादरचोद और रोना धोना बंद कर । पूरे मज़े ले । आह...बारी कमसिन कली है तू । मज़ा आ गया तेरे टाइट बुर में लन्ड पेस के ।
चुदाई उफान में आ गया और छलछला के पापा ने अपना गरम पानी प्रज्ञा के चुत में भर दिया । प्रज्ञा भी चीख पड़ी और पापा एकदम शांत हो गए । पापा : अब क्या चीख रही है । अब तो मेरा बच्चा तेरे कोख मे ठहरने से कोई नहीं रोक सकता , मेरी रांड बेटी ।
अचानक ही पापा को गीला गीला महसूस हुआ और उनकी आंखें खुल गई ।
वो पसीने से लथपथ थे और देखा कि पजामे वीर्य गिरने से आगे से थोड़ा गीला हो गया है । बगल में प्रज्ञा आराम से सो रही है ।यानी पापा का प्रज्ञा से मिलन सपने में हो रहा था ।
पापा एकदम शरम से लाल हो गए । उन्हें आज पहली बार स्वपन दोष हुआ था । मतलब जब किसी इंसान ने लंबे समय से सेक्स ना किया हो और उसके वीर्य बनाने की क्षमता के अनुसार शरीर से वीर्य ना निकले , तो ऐसे ही सोते समय वीर्य अपने आप ही कोई सेक्सी सपना देखते हुए , निकल जाता है । वही पापा के साथ हुआ था । असल में उन्होंने प्रज्ञा को हाथ भी नहीं लगाया था मगर सपने में प्रज्ञा को अभी अभी जी भर के चोद दिया था ।
पापा चुपचाप उठे और बाथरूम में जा के पेशाब किया और अपने आप को साफ किया , पजामा बदला और चड्डी में आ गए । फिर पानी पिया , तब जा के उनका मन शांत हुआ । पानी पीने के बाद उनका नज़र प्रज्ञा पे पड़ी । कितनी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा सोती हुई। पापा ने घड़ी पे नज़र डाली । सुबह के 4:30 बजने को आ गए थे ।
प्रज्ञा अभी भी गहरी नींद में जान पड़ती थी । पापा उसके बगल में आ के वापस लेट गए। पापा ऊपर छत को देखने लगे और सोचने लगे : ये क्या हो गया था मुझे , मै सपने में अपनी ही बेटी का रे प कर रहा था ? प्रज्ञा कैसे चीखे निकल के रो रही थी , और मै कमीने की तरह ,बेदर्दी से उसे छोड़ रहा था , गलिया भी दे रहा था । लानत है मुझपे , मै अपनी प्यारी और फूल सी बेटी के साथ ऐसा कभी नहीं कर सकता ।
पापा सपने के बारे में सोच रहे थे , सपना भयावह था , मगर उस सपने में एक पाप ओर बेटी का मिलन भी तो था । और ये सपना प्रमाण था कि प्रज्ञा के साथ वो किस रिश्ते की शुरुआत करना चाहते थे । कहते है सुबह का सपना सच होता है । तो क्या प्रज्ञा की चुत पे अब मेरा हक होगा । क्या प्रज्ञा भी प्राची के तरह मुझे प्यार करने देगी ।
प्रज्ञा बेहद सुंदर थी , एकदम चिकनी बदन की मालिक , पापा प्रज्ञा के संग अब अपना रिश्ता बनाने का मन बना चुके थे ।
पापा ने करवट बदली और प्रज्ञा के तरफ देखने लगे। प्रज्ञा का पीठ पापा के तरफ था और मुंह उल्टा साइड । पापा प्रज्ञा को देखते रहे, और रात की हुई बातों को सोचने लगे । प्रज्ञा अभी सुकून से सो रही थी , उसका पीठ उसके हर गहरे सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी । पापा ने सिर उठा के प्रज्ञा का चेहरा देखा । गोरे चेहरे पे बाल बिखरे हुए थे । चांद जैसी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा ।
पापा सोच रहे थे : कास रात को मै प्रज्ञा की नाराज़ ना करता तो शायद प्रज्ञा मेरी बाहों में लिपट के सोती । मैने गलती करी । प्रज्ञा मेरा साथ चाहती है । उसे मै पसंद हु , ये बात तो तय है । बस बेचारी हिम्मत नहीं कर पा रहीं है । मै कल उसे लाइन दे रहा था । और वो सारे सवाल पूछे जा रही थी । मतलब वो चाहती थी कि वो सारे आगे होने वाले घटनाक्रम के बारे में मुझ से पूछ ले , ताकि आगे उसे मुझ से धोखा ना मिले । वो शायद आश्वत हों चाहती थी कि मैं उसका साथ दूंगा या नहीं , मेरी एक बीवी के रहते मै उसका साथ किस तरह से दूंगा । अगर मै कल रात उसे सारे सही जवाब दे देता तो शायद वो मेरे प्यार का इजहार मान जाती या खुद इजहार कर देती । मै कितना बुधु हूं,बेटी का दिल ना पढ़ सका और उसको मजाक का नाम दे दिया और प्रज्ञा का दिल तोड़ दिया । नहीं आज मै सब ठीक कर दूंगा । आप प्रज्ञा मेरी होगी । उसके सारे गिले शिकवे दूर करना ही होगा मुझे । आधी घरवाली नहीं , पूरी घरवाली बनाना है प्रज्ञा की मुझे । प्राची को भी समय आने पे सब बता दूंगा । और वो शायद मुझे समझ जाएगी । मै उसे भी धोखे में नहीं रखूंगा ।
पापा ने अपने हाथ बढ़ा के प्रज्ञा के चेहरे से उसकी बाल के लटों को आराम से हटाया । वो सोते हुए किसी शांत खूबसूरत समंदर की तरह लग रही थी । पापा प्रज्ञा का चेहरा एक टक से देख रहे थे । कितनी सुंदर है प्रज्ञा । प्राची की तुलना में शायद दुगनी सुंदर होगी । इसे मै किसी ओर को कैसे सौंप सकता हूं। ये फूल पे सिर्फ़ मेरा हक है । मेरे बगिए की फूल है दोनों ,प्रज्ञा ओर प्राची । और मै ही माली बन के , इन दिनों फूलों की हिफाचत करूंगा , एक फूल को खिला चुका हूं, इस कली को फूल बनाना है अब । और अपने बगिया में ही इस फूल का सुगंध लेना है मुझ ।
पापा ने झुक के प्रज्ञा के गाल को धीरे से चूमा । प्रज्ञा बस थोड़ी सकपकाई और फिर नींद में गहरी सांस लेने लगी ।
पापा ने अपनी प्यारी बेटी को आलिंगन में धीरे से भर लिया और पीठ के तरफ से ही प्रज्ञा से लिपट गए । और गर्दन में एक हल्का सा चुंबन ले लिया । प्रज्ञा की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई । पापा का हौसला बढ़ा । और फिर से एक चुंबन गले पे जड़ दिया । उनका हाथ प्राची के पेट पे था और पापा ऐसे प्रज्ञा से लिपट गए थे जैसे एक सांप चंदन के पेड़ से लिपटा हुआ हो। प्रज्ञा के शरीर से एक मादक सुगंध आ रहा था । मादा के शरीर का ये सुगंध एक नर ही समझ सकता है। पापा का पैर प्रज्ञा के पैर से लिपटा हुआ था । ऐसा लग रहा था कि पापा बरसों से प्यासे है और प्रज्ञा ही अब उनकी प्यास बुझा सकती है । पापा गले पे चुम्बन करते जा रहे थे । पापा ने नोटिस किया कि प्रज्ञा की सबसे अब गहरी नहीं चल रही है , आंखे अभी भी बंद है । पापा ने हाथ को हल्के से पेट से सहलाते हुए प्रज्ञा के दाई चुचि के ऊपर सरका दिया । चुचि पे अभी ब्रा भी नहीं थी और अभी का मखमली एहसास पापा को सिनेमा घर में हुए एहसास से भी मुलायम लगा । पापा ने एकदम हल्के से प्रज्ञा की चुचि पे हाथ फेरा , ओर थोड़ा सा दबाया। प्रज्ञा का कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पापा ने चुप चाप हाथ को प्रज्ञा के पेट के नीच सरका दिया ओर नाइट शूट के टॉप के अंतिम छोड़ पे पहुंच गए । और हलके हाथों से उसकी नाइट सूट के अंदर हाथ को घुसा दिया , पापा का हाथ अब प्रज्ञा की चिकनी ,मखमली और मक्खन जैसी नगीं पेट पे था । पापा लगातार प्रज्ञा के गर्दन पे अपने होंठों से स्पर्श कर रहे थे । उनको अपने छोटी बेटी पे बड़ा प्यार आ रहा था ।
पापा धीरे धीरे प्रज्ञा के नाइट सूट के अंदर ही हाथ को ऊपर की ओर सरकते चले जा रहे थे और पापा को ऐसा लग रहा था जैसे किसी मक्खन के शिला पे हाथ फेर रहे हो। तभी पापा की उँगलियों को किसी गोल से उठान का महसूस हुआ । वो प्रज्ञा की चुचि थी , प्रज्ञा की नंगी चुचि । पापा का हाथ अपने बेटी के मखमली चूचक तक पहुंच गया था । पापा ने बारे आराम से अपने बेटी के उजोरो को अपने हथेली में पूरी तरह से भर गया । उनका लिंग एकदम 90° में तन गया और प्रज्ञा से चिपके होने के कारण उसके गांड के दरार में दवाब बनाने लगा । पापा हवस से भर चुके थे । और अब उनकी हथेली में छोटी बेटी का चूचक समाया हुआ था । पापा अभी भी बीच बीच में एकदम मादक भाव से प्रज्ञा का गला चूम रहे थे । आज पापा सच में बहक गए थे , एक अनचुदी बुर के लिए ।
पापा अपने हाथों को एकदम धीमा घुमा रहे थे और चुचि को भी हल्के हल्के ही दबा रहे थे । तभी पापा को प्रतीत हुआ ही प्रज्ञा की चुचि का निप्पल एकदम तन गया है और सख्त हो गया है । पापा ने प्रज्ञा के सांसो पे गौर किया , एकदम स्लो ,जबकि एक सोते हुए आदमी की सांस जोरो से चलती है । पापा हैरान रह गए और समझ गए प्रज्ञा जग चुकी है । पर पापा ने अपनी हरकतों को ना रोका । वो प्रज्ञा के चुचि को भींचते रहे । पापा ने सोचा : वाह,प्रज्ञा कोई विरोध नहीं कर रही । मुझे पक्का यकीन है ही प्रज्ञा सो तो नहीं रही है । और उसे मजा आ रहा होगा । अभी पता लग जाएगा प्रज्ञा जागी है या सोने का नाटक कर रही , आंखे बंद कर के । पापा ने प्रज्ञा के चुचि को कस के २ बार दबाया , प्रज्ञा के मुंह पे कोई सिकन भी नहीं । पापा ने अपना अगला दाव चला और प्रज्ञा के निप्पल या चूचक के गुड़ी को अपने चुटकी से भर के मसल दिया । पहले धीरे धीरे । प्रज्ञा तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । प्रज्ञा का निप्पल एकदम सख्त मटर के दाने जैसा था । एकदम नई यौवन का उठान , और कुँवारी 18 साल लड़की की फूलता हुआ छोटी सी सीने पे खिले दो ताज़े फूल की तरह ते प्रज्ञा के उजोर।
पापा ने सोचा : अच्छा बेटी , अपने बाप से ही चालाकी , अभी बताता हूं, कैसे नहीं प्रतिक्रिया देती है कोई ।
पापा ने इसबार कस के प्रज्ञा के निप्पल को चुटकी से मसल दिया , इतना कस के नहीं कि उसे बहुत दर्द हो । प्रज्ञा के मुंह से इस बार एक सीईईई.......कि सिसकारी निकल गई । प्रज्ञा इस बार कंट्रोल खो बैठी । पापा का शक यकीन में बदल गया । पर अभी भी प्रज्ञा ने अपनी आंखें नहीं खोली थी । शायद वो पापा के नजरों में शर्म के मारे देखना नहीं चाहती थी । या उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि पापा का साथ देती रहे वो भी उनको निहारते हुए ।
पापा अब बेधड़क प्रज्ञा के दोनों चुचियो का अपने कब्जे में बारी बारी लेते और दबा देते , फिर निप्पल भी मसल रही थे । प्रज्ञा अपने होंठों को अपने मुंह से दबा रही थी और बीच बीच में उसकी सिसकारी भी निकल रही थी ।
पापा सबेरे के अंधेरे में अपने बेटी को एक अलग और नया सुख का अनुभव करा रहे थे । पापा ने गर्दन पे चुम्बन लिया और प्रज्ञा के कान के पास जा के बोला : मेरी रानी , मै जनता हूं कि मेरी बेटी जागी हुई है और पापा के स्पर्श से उसका रोम रोम सिहर उठा है । मैने इस दिन की कब से तलाश की थी प्रज्ञा , तेरी हर अदा , तेरी चंचलपन , तेरी चहक , तेरी वो अपने दीदी का उसके मा के जैसा ख्याल रखना , सब तुझे स्पेशल बना देते है मेरी जान । मै कब से प्यासा हु तेरे लिए मेरी रानी और आज अपने दिल की बात तुझ से कहता हु । आई लव यू बेटी । मै तुमसे बहुत प्यार करता हु । मै तुमसे इतना प्यार करता हु जितना प्राची से भी कभी नहीं किया । मै तेरे संग जीवन का एक नया आयाम देखना चाहता हूँ। तुझ सेक्स का पाठ पढ़ना चाहता हु । तू अभी कच्ची कली है , तुझे एक फूल की तरह खिला देना चाहता हूँ मेरी बच्ची। बोल मेरी प्रज्ञा , तेरे दिल में मेरे लिए क्या है ? क्या मै तुझे फूल बना सकता हूं? क्या तू मुझ अपने शरीर सौंप देगी ? क्या मुझे प्यार करेगी प्रज्ञा ? प्रज्ञा सब कुछ आराम से सुन रही थी , पापा अभी भी अपना हाथ प्रज्ञा के उजोरो से हटाए नहीं थे और उसे मसल रहे थे । प्रज्ञा ने एकदम धीरे से अपनी आंखें खोली और पापा की तरफ़ देखा । पापा ने प्रज्ञा के आंखों में देखा , उसके आंखों में लाल डोरे साफ गवाही दे रहे थे कि वो भी काम अग्नि में जल रही थी ।
प्रज्ञा चाह के भी अपनी प्यास छुपा नहीं पा रही थी ।
पापा : बोल ना मेरी रानी ।
प्रज्ञा : पापा , आगे ये सब कैसे होगा ?
पापा : तू , अभी ये मत सोच , बता ना तुझे मुझ से प्यार है क्या नहीं मेरी साली साहिबा ? उसके बाद तू सब मुझ पे छोड़ दे । मै वादा करता हूं कि हमारे रिश्ते के वजह से किसी रिश्ते में दरार नहीं आएगी प्रज्ञा । ना प्राची के साथ मेरे या तेरे रिश्ते में , ना ही दादी के साथ । मै सब ठीक कर दूंगा । और जैसे मैने प्राची को संभाला है तुझ भी संभालूंगा।
प्रज्ञा ने थोड़ा सोचा । सोचते समय भी पापा के उसकी उजोरो से खेलना नहीं छोड़ा था । प्रज्ञा भी निर्विरोध पापा को अपने अंग से खेलने का इजाजत दें दिया था । वो कोई भी विरोध नहीं कर रही थी ।
प्रज्ञा ने एक मिनट के लिए आंखे बंद किया ,कुछ सोचा , और आंखे खोल के पापा को बोला : हां पापा ।
पापा: हां , क्या हां मेरी रानी ?
प्रज्ञा : आपसे प्यार ।
पापा : हां बोल ना ।
प्रज्ञा : मै भी आपसे प्यार करती हुं पापा , बहुत प्यार करती हूं। मै भी हर समय अपने आप को दीदी के स्थान पे पाती थी । और मुझ हमेशा से लगता था कि जैसे दीदी की शादी आपसे हुई है ,मेरी भी आपसे वैसे ही शादी हो।
पापा : मेरी रानी, मै वादा करता हूं कि तुझे अपना बनाऊँगा । बस थोड़ा टाइम देना मुझे ।
प्रज्ञा : थैंक्यू पापा , आई लाइव यू टु।
पापा प्रज्ञा का इजहार सुनते ही अपना होंठ सीधे प्रज्ञा के पखुरी होठों पे चिपका दिया । आज इस सुबह की शुभ मुहूर्त में एक बाप अपने दूसरे बेटी में समा जाना चाहता था , जो कि कुँवारी, जवान और एकदम एमेच्योर थी ।
दोनों के होठ मिल गए और प्रज्ञा को उसके जीवन का पहला चुंबन का एहसास हो गया ।
पापा एक बदहवास मर्द के तरह छोटी प्रज्ञा पे टूट पड़े, उसके होठों को अपने चुंबन से सराबोर करने लगे , हाथ प्रज्ञा के चूचियो पे अटखेली और जोर जोर से करने लगा और प्रज्ञा एकदम से भाव विभोर हो गई थी । प्रज्ञा ने पहले कभी चुंबन किया नहीं था किसी को भी इस तरह तो वो ढंग से पापा के चुंबन का जवाब नहीं दे पा रही थी । पापा अच्छे से प्रज्ञा के लबों को चूम ओर चूस रहे थे । कभी कभी वो अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे देते थे तो प्रज्ञा को पता ही नहीं चलता कि क्या करना है । पापा ने देखा कि प्रज्ञा एकदम ही नवसुखु है इस खेल में तो उन्होंने प्रज्ञा का मार्ग दर्शन करने का ठान लिया ।
पापा चूमते हुए ही बोले : बेटी...उम्म्म...अपना जीभ मेरे मुंह में डालो ना....उम्मम्म्म्हाआअ....
प्रज्ञा ने पापा के आज्ञा का पालन किया और वैसा ही किया जैसा पापा ने बोला । अपना जीभ पापा के होंठो के बीच डाल दिया । पापा ने उसके जीभ को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगे । फिर बोला : ऐसे ही मेरा चुसना जान ।
और फिर अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे दिया , वो भी वैसे ही पापा के जीभ चूसने लगी जैसे पापा जिस रहे थे । दोनों का ये आदान प्रदान काफी समय तक चलता रहा ।
पापा प्रज्ञा की ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । वो अपनी बेटी को अपना बना लेना चाहते थे । और टनटनाता हुआ लन्ड जल्दी ही प्रज्ञा के दहकती बुर में डाल के उसे मथना चाहते थे ।
प्रज्ञा पापा का साथ जैसे तैसे दे पा रही थी , उसके लिए ये सब नया था और पापा एक मंझे हुए खिलाड़ी । पापा ने तो अब तक दो महिलाओं को चोद के गाभीन के दिया था , प्रज्ञा की मां और दीदी ,के बाद आज वो तीसरी कन्या का सुख भोगना चाहते थे और उसके जवानी के साथ खेल रहे थे ।
उन्होंने प्रज्ञा से बोला : बेटी जरा अपनी हाथो को ऊपर उठा ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
प्रज्ञा ने जैसे ही हाथ उठाया , पापा ने एक झटके से प्रज्ञा का नाइट सूट उतार दिया , अब वो बस एक पैजामी में थी , ऊपर से नंगी पापा के सामने आ चुकी थी । वो शर्म से गुलाबी हो गई । प्रज्ञा एकदम दूध जैसे गोरी थी , उसका बदन एकदम हल्की रोशनी में दमक रही थी । पापा अपने छोटी बेटी के शरीर का अवलोकन करने लगे । बला की खूबसूरती थी प्रज्ञा के बदन में । दूधिया बदन , सुडौल वृक्षस्थल, उजोरो तने हुए और निप्पल बाहर की ओर नुकीले कांटे की तरह निकले हुए, पतली गोरी कमर , जिसे पकड़ के पापा प्रज्ञा के चुत में सॉर्ट लगाने वाले थे । एकदम परी जैसी माल । पापा की तो किस्मत खुल गई थी । वो प्राची के जवानी का रस पीना चाहते थे । उन्होंने अपना टी शर्ट भी उतार दिया । अब वो बस अंडरवियर में थे , जिसमें से उनका विक्राल लिंग फट के बाहर आने को प्रतीत हो रहा था । प्रज्ञा का नज़र पापा के चड्डी में बने तंबू पे गया और उसका दिल सिहर उठा । इतना बड़ा ? वो एकदम चकित रह गई ।
पापा ने उसे अपने ओर खींज के सीने से लगा लिया । प्रज्ञा की चुचिया पापा के सीने में धस गई । क्या कोमल बदन था प्रज्ञा का । पापा फिर से अपना होठ प्रज्ञा के होंठ में लगा दिया ओर चूसाई चालू कर दिया ।
धीरे धीरे सरकाते हुए पापा गर्दन और फिर और नीच चुचियो , पे आ गए और प्रज्ञा की चुचि पूरी की पूरी अपने मुंह में भर लिया और सक करने लगे । प्रज्ञा तरप उठी , पहली बार कोई मर्द उसकी चुचि चूस रहा था । मदमस्त मस्ती में सराबोर प्रज्ञा में पापा का बाल नोचने लगी । पापा कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । आज प्रज्ञा भी अपना सुध बुद्ध भूल के पाप की ही ही जाना चाह रहे थीं।
Surupppppppp....suruppppppp की आवाज बाहर के भोर के चिड़ियों की चहचहाहट से ज्यादा सौर मचा रही थी । पापा बारी बारी प्रज्ञा की दोनों चूचियाँ चूस रहे थे । पापा के सामने प्रज्ञा किसी छोटी बच्ची जैसी लग रही थी कद काठी से । रह रह के प्रज्ञा को पापा का विक्राल लन्ड ,कभी पेट में तो, कभी बुर पे ,तो कभी जांघों पे चुभ रहा था । पापा के चूसाई से प्रज्ञा मदहोश हो के एकदम छटपटा रही थी । कमरे में एक कुंवारी लड़की का पहली बार सेक्स सुख का अनुभव बस होने ही वाला था ।
पापा बेदर्दी से प्रज्ञा को चोदे जा रहे थे , कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी , प्रज्ञा चिल्लाती जा रही थी : नहीं पापा , आह छोड़ो पापा , मत करिए दर्द हो रहा है । पापा: चुप मादरचोद, चुप चाप लन्ड ले मेरा । बहुत मज़ा आएगा ।
पापा प्रज्ञा के चुत पे उछल उछल के धक्के लगा रहे थे । प्रज्ञा का हर धक्के के साथ मूत निकल जा रहा था । उनकी आंखें ऊपर चढ़ गई थी और हाथ से पापा को हटाने की नाकाम कोशिश कर रही थी । पसीने पसीने । पापा ने गांड का ऐम लगा के लिंग गांड में डाल दिया और फुल स्पीड में चोदने लगे । फिर चुत में । और ऐसा ही रीपीट होता रहा । कभी गांड तो कभी चुत। प्रज्ञा का मूत निकलने से पापा पूरे भीग गए थे , बिस्तर भी गिला ही गया था ।
प्रज्ञा रोई जा रही थी : आह ,पापा , दर्द हो रहा है , छोड़िए । दरिन्दे की तरह मुझ पे टूट परे है । मत करिए पापा । आह....अपने बेटी पे रहम खाइये पापा।
पापा: चुप कर साली , सिनेमा हॉल में तो मजे से चुचि मिझवा रही थी । चुप चाप लौड़ा का चोट सह मादरचोद और रोना धोना बंद कर । पूरे मज़े ले । आह...बारी कमसिन कली है तू । मज़ा आ गया तेरे टाइट बुर में लन्ड पेस के ।
चुदाई उफान में आ गया और छलछला के पापा ने अपना गरम पानी प्रज्ञा के चुत में भर दिया । प्रज्ञा भी चीख पड़ी और पापा एकदम शांत हो गए । पापा : अब क्या चीख रही है । अब तो मेरा बच्चा तेरे कोख मे ठहरने से कोई नहीं रोक सकता , मेरी रांड बेटी ।
अचानक ही पापा को गीला गीला महसूस हुआ और उनकी आंखें खुल गई ।
वो पसीने से लथपथ थे और देखा कि पजामे वीर्य गिरने से आगे से थोड़ा गीला हो गया है । बगल में प्रज्ञा आराम से सो रही है ।यानी पापा का प्रज्ञा से मिलन सपने में हो रहा था ।
पापा एकदम शरम से लाल हो गए । उन्हें आज पहली बार स्वपन दोष हुआ था । मतलब जब किसी इंसान ने लंबे समय से सेक्स ना किया हो और उसके वीर्य बनाने की क्षमता के अनुसार शरीर से वीर्य ना निकले , तो ऐसे ही सोते समय वीर्य अपने आप ही कोई सेक्सी सपना देखते हुए , निकल जाता है । वही पापा के साथ हुआ था । असल में उन्होंने प्रज्ञा को हाथ भी नहीं लगाया था मगर सपने में प्रज्ञा को अभी अभी जी भर के चोद दिया था ।
पापा चुपचाप उठे और बाथरूम में जा के पेशाब किया और अपने आप को साफ किया , पजामा बदला और चड्डी में आ गए । फिर पानी पिया , तब जा के उनका मन शांत हुआ । पानी पीने के बाद उनका नज़र प्रज्ञा पे पड़ी । कितनी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा सोती हुई। पापा ने घड़ी पे नज़र डाली । सुबह के 4:30 बजने को आ गए थे ।
प्रज्ञा अभी भी गहरी नींद में जान पड़ती थी । पापा उसके बगल में आ के वापस लेट गए। पापा ऊपर छत को देखने लगे और सोचने लगे : ये क्या हो गया था मुझे , मै सपने में अपनी ही बेटी का रे प कर रहा था ? प्रज्ञा कैसे चीखे निकल के रो रही थी , और मै कमीने की तरह ,बेदर्दी से उसे छोड़ रहा था , गलिया भी दे रहा था । लानत है मुझपे , मै अपनी प्यारी और फूल सी बेटी के साथ ऐसा कभी नहीं कर सकता ।
पापा सपने के बारे में सोच रहे थे , सपना भयावह था , मगर उस सपने में एक पाप ओर बेटी का मिलन भी तो था । और ये सपना प्रमाण था कि प्रज्ञा के साथ वो किस रिश्ते की शुरुआत करना चाहते थे । कहते है सुबह का सपना सच होता है । तो क्या प्रज्ञा की चुत पे अब मेरा हक होगा । क्या प्रज्ञा भी प्राची के तरह मुझे प्यार करने देगी ।
प्रज्ञा बेहद सुंदर थी , एकदम चिकनी बदन की मालिक , पापा प्रज्ञा के संग अब अपना रिश्ता बनाने का मन बना चुके थे ।
पापा ने करवट बदली और प्रज्ञा के तरफ देखने लगे। प्रज्ञा का पीठ पापा के तरफ था और मुंह उल्टा साइड । पापा प्रज्ञा को देखते रहे, और रात की हुई बातों को सोचने लगे । प्रज्ञा अभी सुकून से सो रही थी , उसका पीठ उसके हर गहरे सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी । पापा ने सिर उठा के प्रज्ञा का चेहरा देखा । गोरे चेहरे पे बाल बिखरे हुए थे । चांद जैसी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा ।
पापा सोच रहे थे : कास रात को मै प्रज्ञा की नाराज़ ना करता तो शायद प्रज्ञा मेरी बाहों में लिपट के सोती । मैने गलती करी । प्रज्ञा मेरा साथ चाहती है । उसे मै पसंद हु , ये बात तो तय है । बस बेचारी हिम्मत नहीं कर पा रहीं है । मै कल उसे लाइन दे रहा था । और वो सारे सवाल पूछे जा रही थी । मतलब वो चाहती थी कि वो सारे आगे होने वाले घटनाक्रम के बारे में मुझ से पूछ ले , ताकि आगे उसे मुझ से धोखा ना मिले । वो शायद आश्वत हों चाहती थी कि मैं उसका साथ दूंगा या नहीं , मेरी एक बीवी के रहते मै उसका साथ किस तरह से दूंगा । अगर मै कल रात उसे सारे सही जवाब दे देता तो शायद वो मेरे प्यार का इजहार मान जाती या खुद इजहार कर देती । मै कितना बुधु हूं,बेटी का दिल ना पढ़ सका और उसको मजाक का नाम दे दिया और प्रज्ञा का दिल तोड़ दिया । नहीं आज मै सब ठीक कर दूंगा । आप प्रज्ञा मेरी होगी । उसके सारे गिले शिकवे दूर करना ही होगा मुझे । आधी घरवाली नहीं , पूरी घरवाली बनाना है प्रज्ञा की मुझे । प्राची को भी समय आने पे सब बता दूंगा । और वो शायद मुझे समझ जाएगी । मै उसे भी धोखे में नहीं रखूंगा ।
पापा ने अपने हाथ बढ़ा के प्रज्ञा के चेहरे से उसकी बाल के लटों को आराम से हटाया । वो सोते हुए किसी शांत खूबसूरत समंदर की तरह लग रही थी । पापा प्रज्ञा का चेहरा एक टक से देख रहे थे । कितनी सुंदर है प्रज्ञा । प्राची की तुलना में शायद दुगनी सुंदर होगी । इसे मै किसी ओर को कैसे सौंप सकता हूं। ये फूल पे सिर्फ़ मेरा हक है । मेरे बगिए की फूल है दोनों ,प्रज्ञा ओर प्राची । और मै ही माली बन के , इन दिनों फूलों की हिफाचत करूंगा , एक फूल को खिला चुका हूं, इस कली को फूल बनाना है अब । और अपने बगिया में ही इस फूल का सुगंध लेना है मुझ ।
पापा ने झुक के प्रज्ञा के गाल को धीरे से चूमा । प्रज्ञा बस थोड़ी सकपकाई और फिर नींद में गहरी सांस लेने लगी ।
पापा ने अपनी प्यारी बेटी को आलिंगन में धीरे से भर लिया और पीठ के तरफ से ही प्रज्ञा से लिपट गए । और गर्दन में एक हल्का सा चुंबन ले लिया । प्रज्ञा की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई । पापा का हौसला बढ़ा । और फिर से एक चुंबन गले पे जड़ दिया । उनका हाथ प्राची के पेट पे था और पापा ऐसे प्रज्ञा से लिपट गए थे जैसे एक सांप चंदन के पेड़ से लिपटा हुआ हो। प्रज्ञा के शरीर से एक मादक सुगंध आ रहा था । मादा के शरीर का ये सुगंध एक नर ही समझ सकता है। पापा का पैर प्रज्ञा के पैर से लिपटा हुआ था । ऐसा लग रहा था कि पापा बरसों से प्यासे है और प्रज्ञा ही अब उनकी प्यास बुझा सकती है । पापा गले पे चुम्बन करते जा रहे थे । पापा ने नोटिस किया कि प्रज्ञा की सबसे अब गहरी नहीं चल रही है , आंखे अभी भी बंद है । पापा ने हाथ को हल्के से पेट से सहलाते हुए प्रज्ञा के दाई चुचि के ऊपर सरका दिया । चुचि पे अभी ब्रा भी नहीं थी और अभी का मखमली एहसास पापा को सिनेमा घर में हुए एहसास से भी मुलायम लगा । पापा ने एकदम हल्के से प्रज्ञा की चुचि पे हाथ फेरा , ओर थोड़ा सा दबाया। प्रज्ञा का कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पापा ने चुप चाप हाथ को प्रज्ञा के पेट के नीच सरका दिया ओर नाइट शूट के टॉप के अंतिम छोड़ पे पहुंच गए । और हलके हाथों से उसकी नाइट सूट के अंदर हाथ को घुसा दिया , पापा का हाथ अब प्रज्ञा की चिकनी ,मखमली और मक्खन जैसी नगीं पेट पे था । पापा लगातार प्रज्ञा के गर्दन पे अपने होंठों से स्पर्श कर रहे थे । उनको अपने छोटी बेटी पे बड़ा प्यार आ रहा था ।
पापा धीरे धीरे प्रज्ञा के नाइट सूट के अंदर ही हाथ को ऊपर की ओर सरकते चले जा रहे थे और पापा को ऐसा लग रहा था जैसे किसी मक्खन के शिला पे हाथ फेर रहे हो। तभी पापा की उँगलियों को किसी गोल से उठान का महसूस हुआ । वो प्रज्ञा की चुचि थी , प्रज्ञा की नंगी चुचि । पापा का हाथ अपने बेटी के मखमली चूचक तक पहुंच गया था । पापा ने बारे आराम से अपने बेटी के उजोरो को अपने हथेली में पूरी तरह से भर गया । उनका लिंग एकदम 90° में तन गया और प्रज्ञा से चिपके होने के कारण उसके गांड के दरार में दवाब बनाने लगा । पापा हवस से भर चुके थे । और अब उनकी हथेली में छोटी बेटी का चूचक समाया हुआ था । पापा अभी भी बीच बीच में एकदम मादक भाव से प्रज्ञा का गला चूम रहे थे । आज पापा सच में बहक गए थे , एक अनचुदी बुर के लिए ।
पापा अपने हाथों को एकदम धीमा घुमा रहे थे और चुचि को भी हल्के हल्के ही दबा रहे थे । तभी पापा को प्रतीत हुआ ही प्रज्ञा की चुचि का निप्पल एकदम तन गया है और सख्त हो गया है । पापा ने प्रज्ञा के सांसो पे गौर किया , एकदम स्लो ,जबकि एक सोते हुए आदमी की सांस जोरो से चलती है । पापा हैरान रह गए और समझ गए प्रज्ञा जग चुकी है । पर पापा ने अपनी हरकतों को ना रोका । वो प्रज्ञा के चुचि को भींचते रहे । पापा ने सोचा : वाह,प्रज्ञा कोई विरोध नहीं कर रही । मुझे पक्का यकीन है ही प्रज्ञा सो तो नहीं रही है । और उसे मजा आ रहा होगा । अभी पता लग जाएगा प्रज्ञा जागी है या सोने का नाटक कर रही , आंखे बंद कर के । पापा ने प्रज्ञा के चुचि को कस के २ बार दबाया , प्रज्ञा के मुंह पे कोई सिकन भी नहीं । पापा ने अपना अगला दाव चला और प्रज्ञा के निप्पल या चूचक के गुड़ी को अपने चुटकी से भर के मसल दिया । पहले धीरे धीरे । प्रज्ञा तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । प्रज्ञा का निप्पल एकदम सख्त मटर के दाने जैसा था । एकदम नई यौवन का उठान , और कुँवारी 18 साल लड़की की फूलता हुआ छोटी सी सीने पे खिले दो ताज़े फूल की तरह ते प्रज्ञा के उजोर।
पापा ने सोचा : अच्छा बेटी , अपने बाप से ही चालाकी , अभी बताता हूं, कैसे नहीं प्रतिक्रिया देती है कोई ।
पापा ने इसबार कस के प्रज्ञा के निप्पल को चुटकी से मसल दिया , इतना कस के नहीं कि उसे बहुत दर्द हो । प्रज्ञा के मुंह से इस बार एक सीईईई.......कि सिसकारी निकल गई । प्रज्ञा इस बार कंट्रोल खो बैठी । पापा का शक यकीन में बदल गया । पर अभी भी प्रज्ञा ने अपनी आंखें नहीं खोली थी । शायद वो पापा के नजरों में शर्म के मारे देखना नहीं चाहती थी । या उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि पापा का साथ देती रहे वो भी उनको निहारते हुए ।
पापा अब बेधड़क प्रज्ञा के दोनों चुचियो का अपने कब्जे में बारी बारी लेते और दबा देते , फिर निप्पल भी मसल रही थे । प्रज्ञा अपने होंठों को अपने मुंह से दबा रही थी और बीच बीच में उसकी सिसकारी भी निकल रही थी ।
पापा सबेरे के अंधेरे में अपने बेटी को एक अलग और नया सुख का अनुभव करा रहे थे । पापा ने गर्दन पे चुम्बन लिया और प्रज्ञा के कान के पास जा के बोला : मेरी रानी , मै जनता हूं कि मेरी बेटी जागी हुई है और पापा के स्पर्श से उसका रोम रोम सिहर उठा है । मैने इस दिन की कब से तलाश की थी प्रज्ञा , तेरी हर अदा , तेरी चंचलपन , तेरी चहक , तेरी वो अपने दीदी का उसके मा के जैसा ख्याल रखना , सब तुझे स्पेशल बना देते है मेरी जान । मै कब से प्यासा हु तेरे लिए मेरी रानी और आज अपने दिल की बात तुझ से कहता हु । आई लव यू बेटी । मै तुमसे बहुत प्यार करता हु । मै तुमसे इतना प्यार करता हु जितना प्राची से भी कभी नहीं किया । मै तेरे संग जीवन का एक नया आयाम देखना चाहता हूँ। तुझ सेक्स का पाठ पढ़ना चाहता हु । तू अभी कच्ची कली है , तुझे एक फूल की तरह खिला देना चाहता हूँ मेरी बच्ची। बोल मेरी प्रज्ञा , तेरे दिल में मेरे लिए क्या है ? क्या मै तुझे फूल बना सकता हूं? क्या तू मुझ अपने शरीर सौंप देगी ? क्या मुझे प्यार करेगी प्रज्ञा ? प्रज्ञा सब कुछ आराम से सुन रही थी , पापा अभी भी अपना हाथ प्रज्ञा के उजोरो से हटाए नहीं थे और उसे मसल रहे थे । प्रज्ञा ने एकदम धीरे से अपनी आंखें खोली और पापा की तरफ़ देखा । पापा ने प्रज्ञा के आंखों में देखा , उसके आंखों में लाल डोरे साफ गवाही दे रहे थे कि वो भी काम अग्नि में जल रही थी ।
प्रज्ञा चाह के भी अपनी प्यास छुपा नहीं पा रही थी ।
पापा : बोल ना मेरी रानी ।
प्रज्ञा : पापा , आगे ये सब कैसे होगा ?
पापा : तू , अभी ये मत सोच , बता ना तुझे मुझ से प्यार है क्या नहीं मेरी साली साहिबा ? उसके बाद तू सब मुझ पे छोड़ दे । मै वादा करता हूं कि हमारे रिश्ते के वजह से किसी रिश्ते में दरार नहीं आएगी प्रज्ञा । ना प्राची के साथ मेरे या तेरे रिश्ते में , ना ही दादी के साथ । मै सब ठीक कर दूंगा । और जैसे मैने प्राची को संभाला है तुझ भी संभालूंगा।
प्रज्ञा ने थोड़ा सोचा । सोचते समय भी पापा के उसकी उजोरो से खेलना नहीं छोड़ा था । प्रज्ञा भी निर्विरोध पापा को अपने अंग से खेलने का इजाजत दें दिया था । वो कोई भी विरोध नहीं कर रही थी ।
प्रज्ञा ने एक मिनट के लिए आंखे बंद किया ,कुछ सोचा , और आंखे खोल के पापा को बोला : हां पापा ।
पापा: हां , क्या हां मेरी रानी ?
प्रज्ञा : आपसे प्यार ।
पापा : हां बोल ना ।
प्रज्ञा : मै भी आपसे प्यार करती हुं पापा , बहुत प्यार करती हूं। मै भी हर समय अपने आप को दीदी के स्थान पे पाती थी । और मुझ हमेशा से लगता था कि जैसे दीदी की शादी आपसे हुई है ,मेरी भी आपसे वैसे ही शादी हो।
पापा : मेरी रानी, मै वादा करता हूं कि तुझे अपना बनाऊँगा । बस थोड़ा टाइम देना मुझे ।
प्रज्ञा : थैंक्यू पापा , आई लाइव यू टु।
पापा प्रज्ञा का इजहार सुनते ही अपना होंठ सीधे प्रज्ञा के पखुरी होठों पे चिपका दिया । आज इस सुबह की शुभ मुहूर्त में एक बाप अपने दूसरे बेटी में समा जाना चाहता था , जो कि कुँवारी, जवान और एकदम एमेच्योर थी ।
दोनों के होठ मिल गए और प्रज्ञा को उसके जीवन का पहला चुंबन का एहसास हो गया ।
पापा एक बदहवास मर्द के तरह छोटी प्रज्ञा पे टूट पड़े, उसके होठों को अपने चुंबन से सराबोर करने लगे , हाथ प्रज्ञा के चूचियो पे अटखेली और जोर जोर से करने लगा और प्रज्ञा एकदम से भाव विभोर हो गई थी । प्रज्ञा ने पहले कभी चुंबन किया नहीं था किसी को भी इस तरह तो वो ढंग से पापा के चुंबन का जवाब नहीं दे पा रही थी । पापा अच्छे से प्रज्ञा के लबों को चूम ओर चूस रहे थे । कभी कभी वो अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे देते थे तो प्रज्ञा को पता ही नहीं चलता कि क्या करना है । पापा ने देखा कि प्रज्ञा एकदम ही नवसुखु है इस खेल में तो उन्होंने प्रज्ञा का मार्ग दर्शन करने का ठान लिया ।
पापा चूमते हुए ही बोले : बेटी...उम्म्म...अपना जीभ मेरे मुंह में डालो ना....उम्मम्म्म्हाआअ....
प्रज्ञा ने पापा के आज्ञा का पालन किया और वैसा ही किया जैसा पापा ने बोला । अपना जीभ पापा के होंठो के बीच डाल दिया । पापा ने उसके जीभ को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगे । फिर बोला : ऐसे ही मेरा चुसना जान ।
और फिर अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे दिया , वो भी वैसे ही पापा के जीभ चूसने लगी जैसे पापा जिस रहे थे । दोनों का ये आदान प्रदान काफी समय तक चलता रहा ।
पापा प्रज्ञा की ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । वो अपनी बेटी को अपना बना लेना चाहते थे । और टनटनाता हुआ लन्ड जल्दी ही प्रज्ञा के दहकती बुर में डाल के उसे मथना चाहते थे ।
प्रज्ञा पापा का साथ जैसे तैसे दे पा रही थी , उसके लिए ये सब नया था और पापा एक मंझे हुए खिलाड़ी । पापा ने तो अब तक दो महिलाओं को चोद के गाभीन के दिया था , प्रज्ञा की मां और दीदी ,के बाद आज वो तीसरी कन्या का सुख भोगना चाहते थे और उसके जवानी के साथ खेल रहे थे ।
उन्होंने प्रज्ञा से बोला : बेटी जरा अपनी हाथो को ऊपर उठा ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
प्रज्ञा ने जैसे ही हाथ उठाया , पापा ने एक झटके से प्रज्ञा का नाइट सूट उतार दिया , अब वो बस एक पैजामी में थी , ऊपर से नंगी पापा के सामने आ चुकी थी । वो शर्म से गुलाबी हो गई । प्रज्ञा एकदम दूध जैसे गोरी थी , उसका बदन एकदम हल्की रोशनी में दमक रही थी । पापा अपने छोटी बेटी के शरीर का अवलोकन करने लगे । बला की खूबसूरती थी प्रज्ञा के बदन में । दूधिया बदन , सुडौल वृक्षस्थल, उजोरो तने हुए और निप्पल बाहर की ओर नुकीले कांटे की तरह निकले हुए, पतली गोरी कमर , जिसे पकड़ के पापा प्रज्ञा के चुत में सॉर्ट लगाने वाले थे । एकदम परी जैसी माल । पापा की तो किस्मत खुल गई थी । वो प्राची के जवानी का रस पीना चाहते थे । उन्होंने अपना टी शर्ट भी उतार दिया । अब वो बस अंडरवियर में थे , जिसमें से उनका विक्राल लिंग फट के बाहर आने को प्रतीत हो रहा था । प्रज्ञा का नज़र पापा के चड्डी में बने तंबू पे गया और उसका दिल सिहर उठा । इतना बड़ा ? वो एकदम चकित रह गई ।
पापा ने उसे अपने ओर खींज के सीने से लगा लिया । प्रज्ञा की चुचिया पापा के सीने में धस गई । क्या कोमल बदन था प्रज्ञा का । पापा फिर से अपना होठ प्रज्ञा के होंठ में लगा दिया ओर चूसाई चालू कर दिया ।
धीरे धीरे सरकाते हुए पापा गर्दन और फिर और नीच चुचियो , पे आ गए और प्रज्ञा की चुचि पूरी की पूरी अपने मुंह में भर लिया और सक करने लगे । प्रज्ञा तरप उठी , पहली बार कोई मर्द उसकी चुचि चूस रहा था । मदमस्त मस्ती में सराबोर प्रज्ञा में पापा का बाल नोचने लगी । पापा कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । आज प्रज्ञा भी अपना सुध बुद्ध भूल के पाप की ही ही जाना चाह रहे थीं।
Surupppppppp....suruppppppp की आवाज बाहर के भोर के चिड़ियों की चहचहाहट से ज्यादा सौर मचा रही थी । पापा बारी बारी प्रज्ञा की दोनों चूचियाँ चूस रहे थे । पापा के सामने प्रज्ञा किसी छोटी बच्ची जैसी लग रही थी कद काठी से । रह रह के प्रज्ञा को पापा का विक्राल लन्ड ,कभी पेट में तो, कभी बुर पे ,तो कभी जांघों पे चुभ रहा था । पापा के चूसाई से प्रज्ञा मदहोश हो के एकदम छटपटा रही थी । कमरे में एक कुंवारी लड़की का पहली बार सेक्स सुख का अनुभव बस होने ही वाला था ।
पापा बेदर्दी से प्रज्ञा को चोदे जा रहे थे , कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी , प्रज्ञा चिल्लाती जा रही थी : नहीं पापा , आह छोड़ो पापा , मत करिए दर्द हो रहा है । पापा: चुप मादरचोद, चुप चाप लन्ड ले मेरा । बहुत मज़ा आएगा ।
पापा प्रज्ञा के चुत पे उछल उछल के धक्के लगा रहे थे । प्रज्ञा का हर धक्के के साथ मूत निकल जा रहा था । उनकी आंखें ऊपर चढ़ गई थी और हाथ से पापा को हटाने की नाकाम कोशिश कर रही थी । पसीने पसीने । पापा ने गांड का ऐम लगा के लिंग गांड में डाल दिया और फुल स्पीड में चोदने लगे । फिर चुत में । और ऐसा ही रीपीट होता रहा । कभी गांड तो कभी चुत। प्रज्ञा का मूत निकलने से पापा पूरे भीग गए थे , बिस्तर भी गिला ही गया था ।
प्रज्ञा रोई जा रही थी : आह ,पापा , दर्द हो रहा है , छोड़िए । दरिन्दे की तरह मुझ पे टूट परे है । मत करिए पापा । आह....अपने बेटी पे रहम खाइये पापा।
पापा: चुप कर साली , सिनेमा हॉल में तो मजे से चुचि मिझवा रही थी । चुप चाप लौड़ा का चोट सह मादरचोद और रोना धोना बंद कर । पूरे मज़े ले । आह...बारी कमसिन कली है तू । मज़ा आ गया तेरे टाइट बुर में लन्ड पेस के ।
चुदाई उफान में आ गया और छलछला के पापा ने अपना गरम पानी प्रज्ञा के चुत में भर दिया । प्रज्ञा भी चीख पड़ी और पापा एकदम शांत हो गए । पापा : अब क्या चीख रही है । अब तो मेरा बच्चा तेरे कोख मे ठहरने से कोई नहीं रोक सकता , मेरी रांड बेटी ।
अचानक ही पापा को गीला गीला महसूस हुआ और उनकी आंखें खुल गई ।
वो पसीने से लथपथ थे और देखा कि पजामे वीर्य गिरने से आगे से थोड़ा गीला हो गया है । बगल में प्रज्ञा आराम से सो रही है ।यानी पापा का प्रज्ञा से मिलन सपने में हो रहा था ।
पापा एकदम शरम से लाल हो गए । उन्हें आज पहली बार स्वपन दोष हुआ था । मतलब जब किसी इंसान ने लंबे समय से सेक्स ना किया हो और उसके वीर्य बनाने की क्षमता के अनुसार शरीर से वीर्य ना निकले , तो ऐसे ही सोते समय वीर्य अपने आप ही कोई सेक्सी सपना देखते हुए , निकल जाता है । वही पापा के साथ हुआ था । असल में उन्होंने प्रज्ञा को हाथ भी नहीं लगाया था मगर सपने में प्रज्ञा को अभी अभी जी भर के चोद दिया था ।
पापा चुपचाप उठे और बाथरूम में जा के पेशाब किया और अपने आप को साफ किया , पजामा बदला और चड्डी में आ गए । फिर पानी पिया , तब जा के उनका मन शांत हुआ । पानी पीने के बाद उनका नज़र प्रज्ञा पे पड़ी । कितनी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा सोती हुई। पापा ने घड़ी पे नज़र डाली । सुबह के 4:30 बजने को आ गए थे ।
प्रज्ञा अभी भी गहरी नींद में जान पड़ती थी । पापा उसके बगल में आ के वापस लेट गए। पापा ऊपर छत को देखने लगे और सोचने लगे : ये क्या हो गया था मुझे , मै सपने में अपनी ही बेटी का रे प कर रहा था ? प्रज्ञा कैसे चीखे निकल के रो रही थी , और मै कमीने की तरह ,बेदर्दी से उसे छोड़ रहा था , गलिया भी दे रहा था । लानत है मुझपे , मै अपनी प्यारी और फूल सी बेटी के साथ ऐसा कभी नहीं कर सकता ।
पापा सपने के बारे में सोच रहे थे , सपना भयावह था , मगर उस सपने में एक पाप ओर बेटी का मिलन भी तो था । और ये सपना प्रमाण था कि प्रज्ञा के साथ वो किस रिश्ते की शुरुआत करना चाहते थे । कहते है सुबह का सपना सच होता है । तो क्या प्रज्ञा की चुत पे अब मेरा हक होगा । क्या प्रज्ञा भी प्राची के तरह मुझे प्यार करने देगी ।
प्रज्ञा बेहद सुंदर थी , एकदम चिकनी बदन की मालिक , पापा प्रज्ञा के संग अब अपना रिश्ता बनाने का मन बना चुके थे ।
पापा ने करवट बदली और प्रज्ञा के तरफ देखने लगे। प्रज्ञा का पीठ पापा के तरफ था और मुंह उल्टा साइड । पापा प्रज्ञा को देखते रहे, और रात की हुई बातों को सोचने लगे । प्रज्ञा अभी सुकून से सो रही थी , उसका पीठ उसके हर गहरे सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी । पापा ने सिर उठा के प्रज्ञा का चेहरा देखा । गोरे चेहरे पे बाल बिखरे हुए थे । चांद जैसी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा ।
पापा सोच रहे थे : कास रात को मै प्रज्ञा की नाराज़ ना करता तो शायद प्रज्ञा मेरी बाहों में लिपट के सोती । मैने गलती करी । प्रज्ञा मेरा साथ चाहती है । उसे मै पसंद हु , ये बात तो तय है । बस बेचारी हिम्मत नहीं कर पा रहीं है । मै कल उसे लाइन दे रहा था । और वो सारे सवाल पूछे जा रही थी । मतलब वो चाहती थी कि वो सारे आगे होने वाले घटनाक्रम के बारे में मुझ से पूछ ले , ताकि आगे उसे मुझ से धोखा ना मिले । वो शायद आश्वत हों चाहती थी कि मैं उसका साथ दूंगा या नहीं , मेरी एक बीवी के रहते मै उसका साथ किस तरह से दूंगा । अगर मै कल रात उसे सारे सही जवाब दे देता तो शायद वो मेरे प्यार का इजहार मान जाती या खुद इजहार कर देती । मै कितना बुधु हूं,बेटी का दिल ना पढ़ सका और उसको मजाक का नाम दे दिया और प्रज्ञा का दिल तोड़ दिया । नहीं आज मै सब ठीक कर दूंगा । आप प्रज्ञा मेरी होगी । उसके सारे गिले शिकवे दूर करना ही होगा मुझे । आधी घरवाली नहीं , पूरी घरवाली बनाना है प्रज्ञा की मुझे । प्राची को भी समय आने पे सब बता दूंगा । और वो शायद मुझे समझ जाएगी । मै उसे भी धोखे में नहीं रखूंगा ।
पापा ने अपने हाथ बढ़ा के प्रज्ञा के चेहरे से उसकी बाल के लटों को आराम से हटाया । वो सोते हुए किसी शांत खूबसूरत समंदर की तरह लग रही थी । पापा प्रज्ञा का चेहरा एक टक से देख रहे थे । कितनी सुंदर है प्रज्ञा । प्राची की तुलना में शायद दुगनी सुंदर होगी । इसे मै किसी ओर को कैसे सौंप सकता हूं। ये फूल पे सिर्फ़ मेरा हक है । मेरे बगिए की फूल है दोनों ,प्रज्ञा ओर प्राची । और मै ही माली बन के , इन दिनों फूलों की हिफाचत करूंगा , एक फूल को खिला चुका हूं, इस कली को फूल बनाना है अब । और अपने बगिया में ही इस फूल का सुगंध लेना है मुझ ।
पापा ने झुक के प्रज्ञा के गाल को धीरे से चूमा । प्रज्ञा बस थोड़ी सकपकाई और फिर नींद में गहरी सांस लेने लगी ।
पापा ने अपनी प्यारी बेटी को आलिंगन में धीरे से भर लिया और पीठ के तरफ से ही प्रज्ञा से लिपट गए । और गर्दन में एक हल्का सा चुंबन ले लिया । प्रज्ञा की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई । पापा का हौसला बढ़ा । और फिर से एक चुंबन गले पे जड़ दिया । उनका हाथ प्राची के पेट पे था और पापा ऐसे प्रज्ञा से लिपट गए थे जैसे एक सांप चंदन के पेड़ से लिपटा हुआ हो। प्रज्ञा के शरीर से एक मादक सुगंध आ रहा था । मादा के शरीर का ये सुगंध एक नर ही समझ सकता है। पापा का पैर प्रज्ञा के पैर से लिपटा हुआ था । ऐसा लग रहा था कि पापा बरसों से प्यासे है और प्रज्ञा ही अब उनकी प्यास बुझा सकती है । पापा गले पे चुम्बन करते जा रहे थे । पापा ने नोटिस किया कि प्रज्ञा की सबसे अब गहरी नहीं चल रही है , आंखे अभी भी बंद है । पापा ने हाथ को हल्के से पेट से सहलाते हुए प्रज्ञा के दाई चुचि के ऊपर सरका दिया । चुचि पे अभी ब्रा भी नहीं थी और अभी का मखमली एहसास पापा को सिनेमा घर में हुए एहसास से भी मुलायम लगा । पापा ने एकदम हल्के से प्रज्ञा की चुचि पे हाथ फेरा , ओर थोड़ा सा दबाया। प्रज्ञा का कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पापा ने चुप चाप हाथ को प्रज्ञा के पेट के नीच सरका दिया ओर नाइट शूट के टॉप के अंतिम छोड़ पे पहुंच गए । और हलके हाथों से उसकी नाइट सूट के अंदर हाथ को घुसा दिया , पापा का हाथ अब प्रज्ञा की चिकनी ,मखमली और मक्खन जैसी नगीं पेट पे था । पापा लगातार प्रज्ञा के गर्दन पे अपने होंठों से स्पर्श कर रहे थे । उनको अपने छोटी बेटी पे बड़ा प्यार आ रहा था ।
पापा धीरे धीरे प्रज्ञा के नाइट सूट के अंदर ही हाथ को ऊपर की ओर सरकते चले जा रहे थे और पापा को ऐसा लग रहा था जैसे किसी मक्खन के शिला पे हाथ फेर रहे हो। तभी पापा की उँगलियों को किसी गोल से उठान का महसूस हुआ । वो प्रज्ञा की चुचि थी , प्रज्ञा की नंगी चुचि । पापा का हाथ अपने बेटी के मखमली चूचक तक पहुंच गया था । पापा ने बारे आराम से अपने बेटी के उजोरो को अपने हथेली में पूरी तरह से भर गया । उनका लिंग एकदम 90° में तन गया और प्रज्ञा से चिपके होने के कारण उसके गांड के दरार में दवाब बनाने लगा । पापा हवस से भर चुके थे । और अब उनकी हथेली में छोटी बेटी का चूचक समाया हुआ था । पापा अभी भी बीच बीच में एकदम मादक भाव से प्रज्ञा का गला चूम रहे थे । आज पापा सच में बहक गए थे , एक अनचुदी बुर के लिए ।
पापा अपने हाथों को एकदम धीमा घुमा रहे थे और चुचि को भी हल्के हल्के ही दबा रहे थे । तभी पापा को प्रतीत हुआ ही प्रज्ञा की चुचि का निप्पल एकदम तन गया है और सख्त हो गया है । पापा ने प्रज्ञा के सांसो पे गौर किया , एकदम स्लो ,जबकि एक सोते हुए आदमी की सांस जोरो से चलती है । पापा हैरान रह गए और समझ गए प्रज्ञा जग चुकी है । पर पापा ने अपनी हरकतों को ना रोका । वो प्रज्ञा के चुचि को भींचते रहे । पापा ने सोचा : वाह,प्रज्ञा कोई विरोध नहीं कर रही । मुझे पक्का यकीन है ही प्रज्ञा सो तो नहीं रही है । और उसे मजा आ रहा होगा । अभी पता लग जाएगा प्रज्ञा जागी है या सोने का नाटक कर रही , आंखे बंद कर के । पापा ने प्रज्ञा के चुचि को कस के २ बार दबाया , प्रज्ञा के मुंह पे कोई सिकन भी नहीं । पापा ने अपना अगला दाव चला और प्रज्ञा के निप्पल या चूचक के गुड़ी को अपने चुटकी से भर के मसल दिया । पहले धीरे धीरे । प्रज्ञा तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । प्रज्ञा का निप्पल एकदम सख्त मटर के दाने जैसा था । एकदम नई यौवन का उठान , और कुँवारी 18 साल लड़की की फूलता हुआ छोटी सी सीने पे खिले दो ताज़े फूल की तरह ते प्रज्ञा के उजोर।
पापा ने सोचा : अच्छा बेटी , अपने बाप से ही चालाकी , अभी बताता हूं, कैसे नहीं प्रतिक्रिया देती है कोई ।
पापा ने इसबार कस के प्रज्ञा के निप्पल को चुटकी से मसल दिया , इतना कस के नहीं कि उसे बहुत दर्द हो । प्रज्ञा के मुंह से इस बार एक सीईईई.......कि सिसकारी निकल गई । प्रज्ञा इस बार कंट्रोल खो बैठी । पापा का शक यकीन में बदल गया । पर अभी भी प्रज्ञा ने अपनी आंखें नहीं खोली थी । शायद वो पापा के नजरों में शर्म के मारे देखना नहीं चाहती थी । या उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि पापा का साथ देती रहे वो भी उनको निहारते हुए ।
पापा अब बेधड़क प्रज्ञा के दोनों चुचियो का अपने कब्जे में बारी बारी लेते और दबा देते , फिर निप्पल भी मसल रही थे । प्रज्ञा अपने होंठों को अपने मुंह से दबा रही थी और बीच बीच में उसकी सिसकारी भी निकल रही थी ।
पापा सबेरे के अंधेरे में अपने बेटी को एक अलग और नया सुख का अनुभव करा रहे थे । पापा ने गर्दन पे चुम्बन लिया और प्रज्ञा के कान के पास जा के बोला : मेरी रानी , मै जनता हूं कि मेरी बेटी जागी हुई है और पापा के स्पर्श से उसका रोम रोम सिहर उठा है । मैने इस दिन की कब से तलाश की थी प्रज्ञा , तेरी हर अदा , तेरी चंचलपन , तेरी चहक , तेरी वो अपने दीदी का उसके मा के जैसा ख्याल रखना , सब तुझे स्पेशल बना देते है मेरी जान । मै कब से प्यासा हु तेरे लिए मेरी रानी और आज अपने दिल की बात तुझ से कहता हु । आई लव यू बेटी । मै तुमसे बहुत प्यार करता हु । मै तुमसे इतना प्यार करता हु जितना प्राची से भी कभी नहीं किया । मै तेरे संग जीवन का एक नया आयाम देखना चाहता हूँ। तुझ सेक्स का पाठ पढ़ना चाहता हु । तू अभी कच्ची कली है , तुझे एक फूल की तरह खिला देना चाहता हूँ मेरी बच्ची। बोल मेरी प्रज्ञा , तेरे दिल में मेरे लिए क्या है ? क्या मै तुझे फूल बना सकता हूं? क्या तू मुझ अपने शरीर सौंप देगी ? क्या मुझे प्यार करेगी प्रज्ञा ? प्रज्ञा सब कुछ आराम से सुन रही थी , पापा अभी भी अपना हाथ प्रज्ञा के उजोरो से हटाए नहीं थे और उसे मसल रहे थे । प्रज्ञा ने एकदम धीरे से अपनी आंखें खोली और पापा की तरफ़ देखा । पापा ने प्रज्ञा के आंखों में देखा , उसके आंखों में लाल डोरे साफ गवाही दे रहे थे कि वो भी काम अग्नि में जल रही थी ।
प्रज्ञा चाह के भी अपनी प्यास छुपा नहीं पा रही थी ।
पापा : बोल ना मेरी रानी ।
प्रज्ञा : पापा , आगे ये सब कैसे होगा ?
पापा : तू , अभी ये मत सोच , बता ना तुझे मुझ से प्यार है क्या नहीं मेरी साली साहिबा ? उसके बाद तू सब मुझ पे छोड़ दे । मै वादा करता हूं कि हमारे रिश्ते के वजह से किसी रिश्ते में दरार नहीं आएगी प्रज्ञा । ना प्राची के साथ मेरे या तेरे रिश्ते में , ना ही दादी के साथ । मै सब ठीक कर दूंगा । और जैसे मैने प्राची को संभाला है तुझ भी संभालूंगा।
प्रज्ञा ने थोड़ा सोचा । सोचते समय भी पापा के उसकी उजोरो से खेलना नहीं छोड़ा था । प्रज्ञा भी निर्विरोध पापा को अपने अंग से खेलने का इजाजत दें दिया था । वो कोई भी विरोध नहीं कर रही थी ।
प्रज्ञा ने एक मिनट के लिए आंखे बंद किया ,कुछ सोचा , और आंखे खोल के पापा को बोला : हां पापा ।
पापा: हां , क्या हां मेरी रानी ?
प्रज्ञा : आपसे प्यार ।
पापा : हां बोल ना ।
प्रज्ञा : मै भी आपसे प्यार करती हुं पापा , बहुत प्यार करती हूं। मै भी हर समय अपने आप को दीदी के स्थान पे पाती थी । और मुझ हमेशा से लगता था कि जैसे दीदी की शादी आपसे हुई है ,मेरी भी आपसे वैसे ही शादी हो।
पापा : मेरी रानी, मै वादा करता हूं कि तुझे अपना बनाऊँगा । बस थोड़ा टाइम देना मुझे ।
प्रज्ञा : थैंक्यू पापा , आई लाइव यू टु।
पापा प्रज्ञा का इजहार सुनते ही अपना होंठ सीधे प्रज्ञा के पखुरी होठों पे चिपका दिया । आज इस सुबह की शुभ मुहूर्त में एक बाप अपने दूसरे बेटी में समा जाना चाहता था , जो कि कुँवारी, जवान और एकदम एमेच्योर थी ।
दोनों के होठ मिल गए और प्रज्ञा को उसके जीवन का पहला चुंबन का एहसास हो गया ।
पापा एक बदहवास मर्द के तरह छोटी प्रज्ञा पे टूट पड़े, उसके होठों को अपने चुंबन से सराबोर करने लगे , हाथ प्रज्ञा के चूचियो पे अटखेली और जोर जोर से करने लगा और प्रज्ञा एकदम से भाव विभोर हो गई थी । प्रज्ञा ने पहले कभी चुंबन किया नहीं था किसी को भी इस तरह तो वो ढंग से पापा के चुंबन का जवाब नहीं दे पा रही थी । पापा अच्छे से प्रज्ञा के लबों को चूम ओर चूस रहे थे । कभी कभी वो अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे देते थे तो प्रज्ञा को पता ही नहीं चलता कि क्या करना है । पापा ने देखा कि प्रज्ञा एकदम ही नवसुखु है इस खेल में तो उन्होंने प्रज्ञा का मार्ग दर्शन करने का ठान लिया ।
पापा चूमते हुए ही बोले : बेटी...उम्म्म...अपना जीभ मेरे मुंह में डालो ना....उम्मम्म्म्हाआअ....
प्रज्ञा ने पापा के आज्ञा का पालन किया और वैसा ही किया जैसा पापा ने बोला । अपना जीभ पापा के होंठो के बीच डाल दिया । पापा ने उसके जीभ को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगे । फिर बोला : ऐसे ही मेरा चुसना जान ।
और फिर अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे दिया , वो भी वैसे ही पापा के जीभ चूसने लगी जैसे पापा जिस रहे थे । दोनों का ये आदान प्रदान काफी समय तक चलता रहा ।
पापा प्रज्ञा की ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । वो अपनी बेटी को अपना बना लेना चाहते थे । और टनटनाता हुआ लन्ड जल्दी ही प्रज्ञा के दहकती बुर में डाल के उसे मथना चाहते थे ।
प्रज्ञा पापा का साथ जैसे तैसे दे पा रही थी , उसके लिए ये सब नया था और पापा एक मंझे हुए खिलाड़ी । पापा ने तो अब तक दो महिलाओं को चोद के गाभीन के दिया था , प्रज्ञा की मां और दीदी ,के बाद आज वो तीसरी कन्या का सुख भोगना चाहते थे और उसके जवानी के साथ खेल रहे थे ।
उन्होंने प्रज्ञा से बोला : बेटी जरा अपनी हाथो को ऊपर उठा ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
प्रज्ञा ने जैसे ही हाथ उठाया , पापा ने एक झटके से प्रज्ञा का नाइट सूट उतार दिया , अब वो बस एक पैजामी में थी , ऊपर से नंगी पापा के सामने आ चुकी थी । वो शर्म से गुलाबी हो गई । प्रज्ञा एकदम दूध जैसे गोरी थी , उसका बदन एकदम हल्की रोशनी में दमक रही थी । पापा अपने छोटी बेटी के शरीर का अवलोकन करने लगे । बला की खूबसूरती थी प्रज्ञा के बदन में । दूधिया बदन , सुडौल वृक्षस्थल, उजोरो तने हुए और निप्पल बाहर की ओर नुकीले कांटे की तरह निकले हुए, पतली गोरी कमर , जिसे पकड़ के पापा प्रज्ञा के चुत में सॉर्ट लगाने वाले थे । एकदम परी जैसी माल । पापा की तो किस्मत खुल गई थी । वो प्राची के जवानी का रस पीना चाहते थे । उन्होंने अपना टी शर्ट भी उतार दिया । अब वो बस अंडरवियर में थे , जिसमें से उनका विक्राल लिंग फट के बाहर आने को प्रतीत हो रहा था । प्रज्ञा का नज़र पापा के चड्डी में बने तंबू पे गया और उसका दिल सिहर उठा । इतना बड़ा ? वो एकदम चकित रह गई ।
पापा ने उसे अपने ओर खींज के सीने से लगा लिया । प्रज्ञा की चुचिया पापा के सीने में धस गई । क्या कोमल बदन था प्रज्ञा का । पापा फिर से अपना होठ प्रज्ञा के होंठ में लगा दिया ओर चूसाई चालू कर दिया ।
धीरे धीरे सरकाते हुए पापा गर्दन और फिर और नीच चुचियो , पे आ गए और प्रज्ञा की चुचि पूरी की पूरी अपने मुंह में भर लिया और सक करने लगे । प्रज्ञा तरप उठी , पहली बार कोई मर्द उसकी चुचि चूस रहा था । मदमस्त मस्ती में सराबोर प्रज्ञा में पापा का बाल नोचने लगी । पापा कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । आज प्रज्ञा भी अपना सुध बुद्ध भूल के पाप की ही ही जाना चाह रहे थीं।
Surupppppppp....suruppppppp की आवाज बाहर के भोर के चिड़ियों की चहचहाहट से ज्यादा सौर मचा रही थी । पापा बारी बारी प्रज्ञा की दोनों चूचियाँ चूस रहे थे । पापा के सामने प्रज्ञा किसी छोटी बच्ची जैसी लग रही थी कद काठी से । रह रह के प्रज्ञा को पापा का विक्राल लन्ड ,कभी पेट में तो, कभी बुर पे ,तो कभी जांघों पे चुभ रहा था । पापा के चूसाई से प्रज्ञा मदहोश हो के एकदम छटपटा रही थी । कमरे में एक कुंवारी लड़की का पहली बार सेक्स सुख का अनुभव बस होने ही वाला था ।
पापा प्राची के एक छुअन से परेशान हो गए थे । वो रूम में चले तो आए थे मगर उनका दिल अब प्रज्ञा के छोटे और मुलायम मौसंबियों ने चुरा लिया था । आज पहलीबार उन्हें प्रज्ञा के जवानी का अंदाजा अच्छे से लगा था । 18 साल की कच्ची कली । फुदकती आई और पापा को इतना जोर से गले लगा गई कि अब पापा का मन मादकता से भर गया । उनका खड़ा लिंग ,इस बात का सबूत दे रहा था ।
रूम में आ जाने के बाद उन्होंने झट से रूम का दरवाजा बंद कर लिया, बेड पे लेट गए और सोचने लगे : ये मुझे क्या हो रहा है ? प्रज्ञा के साथ ये मै क्या कर रहा हूं? अभी जो हुआ , क्या ये जायज था ? मेरी नादान प्रज्ञा क्या इतना नहीं समझ पाई कि अब वो जवान हो चुकी है , और उसे पापा के गले ऐसे नहीं लगना चाहिए ? मुझे तो उसकी शरीर की गर्माहट पागल कर रही है । आह...ये वही एहसास है , जब प्राची संग मेरी शादी तय हुई थी , और उसने पहली बार मुझ से गले लगाया था । ये मेरा लिंग भी , इतना आउट ऑफ कंट्रोल हो रहा है । समझ नहीं आता ये सब मेरे साथ क्या हो रहा है । जीवन का ये क्या खेल चल रहा है । एक बेटी के कोख में मेरा बीज पल रहा है और मेरा मन अब प्रज्ञा के साथ संभोग करने का हो रहा है । क्या ये गलत नहीं होगा ? क्या घर में सबको पता भी चल जाएगा ? नहीं ये मै नहीं कर सकता । प्राची को दोखा कैसे दे दु ? प्राची अब मेरी पत्नी ही नहीं ,मेरे होने वाले बच्चे की मां भी बनने वाली है । उसके साथ विश्वासघात कैसे करूं ? उसका सौतन उसके छोटी बहन को ही कैसे बना दूं? और क्या प्रज्ञा इस रिश्ते के लिए मानेगी ? उस दिन जब वो मेरी गोद में थी और मेरे लन्ड का स्पर्श अपने गुप्तांग पे किया था तो , एकदम नरम और बेजान सी हो गई थी । कुछ बोल भी नहीं पाई थी बेचारी ।
आह...उसका वो चुलबुली अंदाज से तुरंत मेरे गोद में एकदम शांत हो जाना ,कितना कामुक था । आह.....मेरा लौरा....लग रहा है आज उसकी सारी नसे फटी जा रही है । प्रज्ञा ने ये क्या जादू कर दिया है । क्या सही क्या गलत ? प्राची भी तो मेरी बेटी ही थी शादी से पहले , उसे तो रगड़ रगड़ के चोदा है मैने । इसमें मां ने भी मेरी मदद ही की है । अब प्रज्ञा ने जो आग लगाई है वो कैसे बुझेगी ? पर ये सही भी तो नहीं है ? प्राची को तो सबके सहमति से मैने अपना बनाया था । मगर प्रज्ञा के साथ अगर ऐसा कुछ करता हु तो ये तो और घर में सबको पता लग गया तो मै सबकी नजरों में गिर जाऊंगा ।
पापा अपने ख्यालों में डूबे हुए थे । उनका मन प्रज्ञा संग मिलन को तरस के रह गया था । मगर साथ ही जब वो अपने कामुकता से ऊपर उठ के बातों को सोच रहे थे तो उन्हें प्रज्ञा के संग कुछ भी करना , घर में सबको धोखा देना जैसे लग रहा था । उन्हें तो ये भी पता अभी नहीं चल पाया था कि सच में प्रज्ञा को कोई ऐसी भावना उनके प्रति भी आती होगी या नहीं । इन सब में पापा का लिंग इतना कड़क हो गया था ,कि लग रहा था उनकी सारी नसे फट जाएगी । आज से पहले इतना कड़कपन बस प्राची के सील तोड़ने वाले दिन ही महसूस किया था उन्होंने ।
पापा का बस चलता तो वो अभी प्रज्ञा के रूम में जा के उसको अपने लिंग का स्वाद चखा देते , मगर अभी तो उन्हें प्रज्ञा को पटाने की जरूरत थी ,क्योंकि प्राची के जैसे , प्रज्ञा को दादी उनके नीचे आसानी से थोड़े ही आने देने वाली थी । पापा आज मर्यादा तोड़ देना चाहते थे । उनका लिंग कड़कपन के कारण अब दर्द देने लगा था । एक मीठा दर्द । अपने छोटी बेटी के बुर का स्वाद चखने को तैयार। मगर दिल्ली अभी दूर था , यानी पापा के सोचने से प्रज्ञा उनको थोड़े न आसानी से मिलने वाली थी । ऊपर से उनको प्राची के साथ वाले रिश्ते का बंधन भी इसकी इजाजत नहीं दे रहा था ।
मिला जुला कर पापा बहुत कन्फ्यूज थे । उनको समझ नहीं आ रह था कि करना क्या है । क्या उन्हें इस भावना को यही दावा देना चाहिए या आगे बढ़ना चाहिए । वो अगर इस भावना से आए बढ़ते है तो रस्ते में काटे ही काटे होंगे । एक बीवी के रहते, प्रज्ञा के संग ये सब करना उनको घर के सदस्यों के नज़रों में गिरा सकता था । मगर प्रज्ञा के शरीर की गर्मी की बात ही कुछ ओर थी ।
पापा ने ये सोचते हुए अपना लिंग को अपने हाथ में भर किया लिया था । इन सब बातों को सोचते हुए कब उन्होंने अपना लोअर उतार लिया उन्हें खुद पता नहीं चला। उनका लिंग एकदम फांफनाया हुआ एकदम डंडे की तरह खड़ा था । उसपे नसे उभर के नज़र आ रही थी । ये सब प्रज्ञा के बदन के गर्मी का असर था । पापा का जी बेचैन हो गया था । उस एक आलिंगन ने सब बदल के रख दिया था।
इस बेचैनी ने उनके आंखों से नींद तो कोशों दूर ही थी । अगर बेचैनी शांत नहीं होती तो वो सो भी नहीं पाते । वो प्रज्ञा के बारे में सोचने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे ।
वो इसकी शुरुआत करे कि ना करे , इस कशमकश में थे । एक बाप का दिल उनको इसकी इजाजत नहीं दे रहा था मगर एक मर्द का दिल प्रज्ञा संग संभोग का दृश्य देख रहा था । पापा का हाथ उनके मचलते लिंग पे अब ऊपर नीच करने लगा था ।
धीरे धीरे पापा के मरदाना सोच ने उनके बाप वाले सोच को दावा दिया और वो पूरी तरह कामना के आशक्त हो गए । उनका सुपारा इतना फुल गया था कि एक बारे आलू जैसा देख रहा था । उनकी फोरस्किन भी ऊपर नीचे नहीं हो पा रही थी बिना दर्द के । पापा ने अपने पास वाले दराज़ से वो लुब्रिकेंट निकला जो वो प्राची के संग चुदाई के दौरान उपयोग किया करते थे और उसे अपने सुपारे और लिंग पे अच्छे से मला। लिंग में चिकनाई आने के बाद सुपारे पे फोरस्किन का घर्षण थोड़ा कम हुआ । पापा आज प्रज्ञा के नाम का हस्तमैथुन जिंदगी में पहली बार कर रहे थे ।
उनके मुंह से आहे निकल रही थी साथ ही एकदम धीमे आवाज में प्रज्ञा का नाम : आह....प्रज्ञा...मेरी कच्ची कली प्रज्ञा.... आजा अपने डैडी के पास.....अह्ह्ह्ह....घुसने दे ना...आह्ह्ह्ह...मेरी प्यारी....इतना टाइट होगा तेरा....देख तूने कैसे अपने पापा को अपना दीवाना बस एक आलिंगन दे के बना दिया है.....मेरा लिंग का चोट तू अपने चुत पे सह लेगी न मेरी बच्ची.....आह्ह्ह्ह...ओह्ह्ह्ह....मज़ा आ रहा है...।
पापा प्रज्ञा को प्यार करने के लिए मचल गए थे । उनका हाथ अब ओर तेज़ चलने लगा । उनके ख्यालों में प्रज्ञा थी , और आज उन्हें हस्तमैथुन करते हुए ऐसा लग रहा था कि जैसे वो प्रज्ञा का चुनमुनिया सा चुत चोद रहे हो। उनके मुंह से आहे और सिसकारियां रह रह के निकल रहीं थी । वो निरंतर प्रज्ञा का नाम भी लेने लगे : आह....प्रज्ञा मेरी जान....आह्ह्ह...मज़ा आ गया...असली मज़ा भी मै तेरे साथ लेना चाहता हु मेरी छुटकी....आह्ह्ह...तेरा शरीर कितना गर्म था ....वो तेरे चूचो की मखमली एहसास जो मेरे सीने पे हुआ....आह्ह्ह्ह... कमाल का था....वही चुचि को जब मैं अपने मुंह में भर के पियूँगा तो कितना मजा आएगा मेरी बेटी ।
पापा का हाथ तेज होता गया और साथ ही आहे और तेज। और लगभग 10 मिनट के इस काल्पनिक प्रज्ञा के चुदाई के बाद पापा के लिंग से एक गाढ़ा वीर्य की धारा निकली
और उनके पेट , जांघ और अंडकोष पे झलक के गिर गई ।
उनको ऐसा लगा जैसे दिल का सारा बोझ उस धारा के साथ निकल गया । पापा हाफ रहे थे और प्रज्ञा से अपने दिल में ही बात कर रहे थे : आह मेरी प्रज्ञा , देख तेरे चक्कर में कितना माल निकला है मेरा , तूने ये क्या जादू के दिया है मेरी जान। जितना रस मेरा तेरे नाम में निकला है , उतना अगर तेरे योनि में अपना लिंग डाल के बच्चेदानी में डालता तो तू भी तो प्राची की तरह ही पक्का प्रेग्नेंट हों जाती ।
उधर प्रज्ञा अपने कमरे में आराम से सोई हुई थी । उसे इस की कोई भनक तक नहीं थी कि पापा उसका नाम ले के अपने रूम में क्या कर रहे है ? शिकार आराम से सोया हुआ था , और शिकारी शिकार को जाल में फंसाने का मन बना चुका था ।
उस दिन के बाद पापा ने फैसला ले लिया था कि , अगर प्राची के साथ उन्होंने सम्बन्ध बना ही लिया है , तो प्रज्ञा भी तो उनकी बेटी ही है । एक से शादी तो वो कर ही चुके है , दादी ने खुद से कराया और सब कुछ परिवार के रज़ा मंडी में हुआ तो प्रज्ञा के साथ क्यों नहीं कर सकता मैं । कभी प्राची भी बेटी हुआ करती थी अब जीवन संगनी है , और प्रज्ञा भी बेटी से माशूका बन जाए तो क्या हर्ज है । एक बेटी के गर्भ में जब मेरा बच्चा तक पल रहा है , तो मै अब बाप ओर बेटी के मर्यादा का पाठ पढ़ने वाला , या खुद को मर्यादा के दायरे में रखने वाला कौन होता हु ?
पापा ये सब सोच के अपने आप को तसल्ली दे रहे थे कि जो उन्होंने किया या अब करने का मन बना रहे थे वो जायज है । अपने छोटी बेटी को भी वो भोग लेना चाहते थे और इसके लिए अब उन्हें प्रज्ञा को हासिल करना ही होगा । क्योंकि प्रज्ञा का नाक नक्श प्राची से भी सुंदर था और जवानी उसपे भी आ ही चुकी थी । पापा जब से प्रज्ञा पे गौर करने लगे थे तो उन्हें ये आभास हो गया था कि उनको प्रज्ञा के चुचियो को चूसने में बड़ा मजा आएगा । और प्रज्ञा का चूतड़ भी जब वो चलती थी तो मटकते हुए बहुत शानदार लगने लगा था उन्हें । और वो प्राची से ज्यादा गुदाज़ लगते थे । वैसे भी प्रज्ञा और प्राची के उमर में जायदा फासला तो था नहीं , दोनों बस 1 ही वर्ष के छोटी बड़ी थी ।
प्रज्ञा की इसकी कोई भी आभास नहीं था कि उसके पापा का मन , उसके जवानी चखने पे आ गया है । वो आने वाले एग्जाम की तैयारी जोरो शोरों से कर रही थी ।
समय बीतता जा रहा था और प्रज्ञा की तैयारी बहुत अच्छी हुई थी , उसे लग रहा था कि उसका एग्जाम बहुत ही अच्छा जाएगा ।
दादी को वैसे तो कोई प्रॉब्लम नहीं था मगर उसे अगर प्राची का ख्याल नहीं रखना पड़ता तो वो भी प्रज्ञा संग जरूर जाती । प्रज्ञा पापा के साथ दूर जा रही थी वो भी 1 सप्ताह के लिए तो उनको लग रहा था कि एक महिला भी साथ जाए दोनों के तो अच्छा होता , मगर अब परिस्थिति ही ऐसी बनी थी कि प्रज्ञा के साथ दादी नहीं जा सकती थी । वैसे दादी को , प्रज्ञा को पापा के साथ जाने देने से ये निश्चिंतता जरूर थी कि प्रज्ञा सुरक्षित रहेगी । बस दिल में एक कसक थी कि एक मर्द के साथ वो पहली बार प्रज्ञा को बाहर भेज रही थी ,क्योंकि पापा भी एक मर्द पहले है , बाद में प्रज्ञा के पापा ।
खैर सारी तैयारी हो गई थी। आज शनिवार था और शाम होने को आ गई थी । पापा अभी ऑफिस से आए नहीं थे और उन्हें आने के बाद स्टेशन निकलना था प्रज्ञा को लेके । प्रज्ञा ने सारा सामान पैक कर लिया था । और प्राची ने पापा का बैग तैयार कर दिया था । कपड़े , पानी की बोतल और सारे बेसिक सामान ।
सामान की तैयारी करते देख ,प्रज्ञा को दादी ने पूछा : बेटी सब कुछ ध्यान से रखना । और कुछ रेडिमेड खाने का सामान भी रख लेना । अपने जरूरत का सारा तेल कंघी, अपने अंडरवियर और ब्रा वगैरह रखना ना भूलना ।
प्रज्ञा : अरे दादी में बच्ची थोड़े ना हूं ? सब रख लिया है , जरूरत का ।
दादी : अच्छा , एक पैकेट सेनेट्री पैड भी रख लेना , अगर वहां जरूरत पड़ी तो पापा से कहेगी ? या कहां ढूंढती फिरेगी ? वो अब याद से ।
प्रज्ञा : हां दादी , रख लूंगी , वैसे भी मासिक का दिन को अभी टाइम है , हो सकता है इस सप्ताह में ना आए ।
दादी : अरे , एमर्सेंजी के लिए रख ले ।
प्रज्ञा : ठीक है दादी ।
प्राची दादी और प्रज्ञा की बाते सुन के हँस पड़ी: हाहाहा...दादी आपका बस चलेगा तो आप खुद प्रज्ञा के साथ चल देती ।
दादी : और नहीं तो क्या , मेरी पोती को इतना कुछ अकेले संभालना पर रहा है । मै साथ रहती तो इन सब चीजों में ध्यान थोड़े लगाना पड़ता ।
प्राची : अरे दादी , पापा हैं ना उसका ख्याल रखने के लिए , वो अच्छे से रखेंगे , प्रज्ञा का ख्याल , आप निश्चिंत रहिए ।
प्रज्ञा : हां दादी , मै अकेले थोड़ी ना जा रही हु , मै तो जीजा जी के साथ जा रही हु।
प्राची : प्रज्ञा , रस्ते में पापा से कोई मजाक नहीं , ओर परेशान मत करना।
प्रज्ञा : वाह, पति की इतनी फिक्र हो रही है तुम्हे , चलो मै परेशान नहीं करूंगी अपने जीजा जी को ।
प्राची : हट बदमाश....
तभी पापा घर में आ गए : कौन किसको परेशान के रहा है ?
प्रज्ञा एकदम से झेप गई ।
प्राची : पापा , आपकी लाडो बेटी , आपको परेशान ना करे वही बोल रही हु इसे ।
पापा : अरे ये क्यों परेशान करेगी मुझे । ये तो मेरी प्यारी बच्ची है ।
पापा के हाव भाव से बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि ये वही आदमी है जो उस रात अपने बेटी का नाम लेले के अपने लिंग की मालिश कर रहा था ।
प्रज्ञा : हां पापा , बोलो ना इसको , इसको जलन हो रही है , मै आपके साथ बाहर जा रही हु तो ।
पापा : ऐसी कोई बात नहीं है प्रज्ञा , उसे जलन क्यों होगी , हमने तो हनीमून का प्लान बनाया ही था । अब प्राची के डिलीवरी के बाद उसे घुमा दूंगा ।
दादी : हां , चलो हाथ मुंह धो लो और खा के तैयार हो जाओ , ट्रेन २ घंटे में ही है ।
पापा : अरे हां , मै आता हु चेंज कर के ।
आज भी सबने साथ खाना खाया । दादी अपना ज्ञान प्रज्ञा को देती रही । और पापा को भी सब बाते समझती रही । वो पापा को बोल रही थी : बेटा नया जगह है , प्रज्ञा को अकेले मत छोड़ना , हर समय साथ रहना , और एग्जाम भी खुद दिलवाने जाना इसके साथ । होटल थिर डंग का लेना जहां सभ्य लोग रहे ।
पापा: अरे मां, आप टेंशन मत लो , मै सब देख लूंगा ।
पापा दादी को हर तरीके से संतुष्ट कर रहे थे कि उनकी पोती एकदम ठीक रहेगी ।
जल्दी ही जाने का समय हो गया ।
पापा ने प्राची को गले लगाया और उसके पेट पे हाथ फेरते हुए बोला । बस कुछ दिन में आ जाएंगे पापा , मां को तंग मत करना नन्हे बदमाश। प्राची हस परी । पापा ने प्राची को चूम लिया तो उसके आंखों में आंशू आ गए ।
पापा: अरे पागल मै यू गया और यू प्रज्ञा को एग्जाम दिला कर आ गया । तू मन क्यों छोटा करती है । वैसे भी दादी है ना , और कुछ भी हो, तुरंत अस्पताल वाले नंबर पे कॉल कारण , वो तुरंत हेल्प के लिए किसी को वेज देंगे । मैने सारी बात कर ली है ।
प्राची : ठीक है पापा, आराम से जाइए ।
दादी को भी पापा ने प्रणाम किया और प्रज्ञा ने भी किया । बाहर गाड़ी आ चुकी थी ,जो उन दोनों को स्टेशन ले के जाने वाली थी ।
पापा और प्रज्ञा गाड़ी में अपना सामान डाल के बैठ चुके थे । और दादी और प्राची को बाय बोल के स्टेशन की ओर ड्रा
इवर को गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए बोला ।
पापा और प्रज्ञा लगभग ३० मिनट में स्टेशन पहुंच गए ।
ट्रेन प्लेटफार्म पे लग चुकी थी पापा , टिकट के हिसाब से अपनी बॉगी का नंबर ढूंढ रहे थे । बॉगी नंबर था H2 । जल्दी ही पापा को बोगी दिख गई । बाहर एक स्टाफ खड़ा था । वो दोनों गेट के तरफ बढ़े तो पापा ने गौर किया कि प्रज्ञा आगे आगे चल रही थी । उसका गांड मटकते हुए बहुत अच्छा दिख रहा था । पास में ही कुछ अवारा लड़के एक दूसरे से प्रज्ञा की ओऱ इशारा कर के दिखा रहे थे । वो थोड़ी दूरी पर थे तो वो क्या बोल रहे थे ये तो पापा को भी सुनाई नहीं दे रहा था। मगर इनकी राक्षसों वाली हंसी पापा और प्रज्ञा दोनों को सुनाई दे रह था । पापा को गुस्सा आ रहा था , मगर प्रज्ञा सुन के अनसुना सा कर रही थी । गेट पे जब दोनों पहुंच ही गए थे कि एक ने चिल्ला के बोला : अरे अंकल , इतना कड़क माल लिये कहा जा रहे हो , जरा हमे भी तो चखा दो। हाहाहाहा.....
उनको लग रहा था कि वो बहुत कूल लग रहे है ऐसा कर के मगर पापा का गुस्सा आसमान पे चल गया था । प्रज्ञा ने वो सुना तो शर्म से सिर झुका लिया । पापा ने प्रज्ञा को बोला बेटी तू ये बैग लेके अंदर जा जरा इनकी खबर लेता हु । प्राची डर गई कि कही पापा उन अवारा लोगों से लड़ाई तो नहीं कर लेंगे , वो अवारा लड़के पापा को चोट ना पहुंचा दे ?
उसने पापा से कहा : पापा ट्रेन बस खुल ही जाएगी । इन सब में मत पड़ो, चलिए अपने शीट पे बैठते है ।
तभी एक और लड़का चिल्लाया : क्या अंकल , अकेले अकेले जवानी का रस पियोगे ।
प्रज्ञा शर्म से लाल हो गई । पापा का गुस्सा अब सर पे चढ़ गया । वही गेट पे कुछ पुलिस गार्ड भी खरे थे । पापा ने बैग वही रखा और तेजी से उन लड़कों के पास गए और एक लड़का जो बहुत ज्यादा हस रहा था और प्रज्ञा के बारे में चिल्ला के अभद्र बात की थी ,उसके गाल पे एक रसीद के चाटा जड़ दिया । चटाक..... की आवाज आस पास गूंज गई और वो लड़के एकदम सदमे में आ के शांत से हो गए । उसे पहले वो लड़के पापा पे हाथ उठाते वो गार्ड जो 1st AC के गेट पे खड़े थे , वो वहां पहुंच गए ।
गार्ड उन लड़कों से : क्यों बे लफंगो, क्या चुतिया गिरी कर रहा है ?
पापा : अरे ये लोग देखिए , आती जाती लड़कियों को छेड़ते रहते है । अभी मेरे बेटी पे अभद्र टिप्पणी कर रहे थे । मुझे से रहा नहीं गया और मैने रसीद के एक कान पे बजा दिया । उसके लिए माफ करियेगा सर ।
गार्ड : बिल्कुल सही किया , मै अभी RPF वालों को बोलता हु , इसी स्टेशन पे खबर लेंगे इसकी ।
तभी गेट पे खड़ा स्टाफ भी ये सब देख रहा था । पापा का ये रूप देख के सब पापा की प्रशंसा करने लगे । प्रज्ञा वही खरी पापा के इस दबंग अंदाज को दिखती रही पर कुछ बोल नहीं पाई । उसने मन में कहा : आज पापा नहीं होते तो पता नहीं ये लड़के कुछ कहने से ज़्यादा कुछ के सख्त थे । पापा ने कितना हिम्मत दिखाया मेरे लिए । पापा मुझे पे कभी आँच नहीं आने देंगे । पापा ने कैसे उस कामिने को रसीद के चाटा जड़ा , वाह मजा ही आ गया । पापा मेरे लिए किसी से भी भीड़ जाते है । कितना प्यार करते है वो मुझे ।
यहाँ प्रज्ञा के प्यार का मतबल पापा वाला प्यार से ही था । उसके दिल में पापा के लिए अभी तक उस तरह का प्रेम जग नहीं था । अगर प्रज्ञा को पापा से उस तरह का प्यार चाहिए होता तो उस दिन उनके गोद में ही कुछ ना कुछ कर बैठती। मगर आज के घटना ने पापा के मर्दानगी का छाप प्रज्ञा के दिल पे छोड़ दिया था ।
गार्ड ने पापा को करवाई का सांतवना दे के बोला , सर आपकी ट्रेन खुलने वाली है आप चलिए , इनका ठिकाना ह्म लगते है । तभी दूर से RPF के कुछ जवान आते दिखे । पापा समझ गए कि ये मावली पकड़े गए आज । वो गेट के तरफ आ गए । गत पे खड़े स्टाफ ने आगे बढ़ के पापा का सामान लिया और बोला : अच्छा किया सर आपने , कितने ही लड़कियों हो छेड़ रहे थे , जब से ट्रेन रुकी है । मै कुछ बोल नहीं रहा था क्योंकि मैं बाहर का हु ओर ये लोकल लोग। चक्कर में फंस गया तो ट्रेन को कौन देखेगा । वैसे मै आपका बोगी स्टाफ हु । आपकी बोगी H2 ही है ना।
पापा : जी , सही कहा अपने H 2 सीट नंबर 15-16 ।
स्टाफ : वेलकम sir ।
वो पापा और प्राची का सामान लेके आगे आगे बढ़ा और दोनों उसके पीछे पीछे बोगी में अंदर चल दिए ।
पापा ने स्टाफ से पूछा : और भैया ,कहा से हो ?
स्टाफ : लखनऊ से हु सर । आज रात को मै यही ड्यूटी कर रहा हूं। आपको कुछ भी चीज की जरूरत हो तुरंत मुझे बताइए । आपका दोनों सीट केबिन में है , आपके साथ वहां एक कपल भी है । होप यू डॉन्ट माइंड सर ।
पापा: ओह...हमे लगा कि हमे कूप में सीट मिला है ।
स्टाफ : नहीं सर , आपकी सीट नंबर 15-16 है जो 13-14 के साथ है सर ।
पापा : अरे यार , हम दोनों फैमिली है । एक कूप से केबिन का सीट एक्सचेंज हो जाता तो बहुत अच्छा होता ।
स्टाफ : सॉरी सर , वो तो मै कैसे बता पाऊंगा । वैसे टीटी सर आयेंगे तो उनसे पूछ के कोई जुगाड़ करवा दूंगा ,मगर तब तक आपको एडजस्ट करना पड़ेगा । टी टी अगले 3 स्टेशन बाद ही आयेंगे ।
पापा : ओह यानी एक घंटा । चलो मैनेज कर लेंगे ।
उसने दोनों को उनके केबिन तक पहुचा दिया । अंदर 4 शीट थी । एक साइड के ऊपर नीचे , प्रज्ञा और पापा का था । और दूसरे साइड का दोनों सीट एक मुस्लिम बाप बेटी जैसे दिख रहे 2 लोगों का था ।
पापा: क्या नाम है तुम्हारा ।
स्टाफ : सर राकेश ।
पापा: ठीक है राकेश , थैंक्यू। कुछ जरूरी होगी तो बुलाता हूं तुम्हें।
राकेश : ओके सर , बिल्कुल । आप कंफर्टेबल हो जाइए ।
पापा और प्रज्ञा ,केबिन के अंदर गए । एक तरफ सीट पे ,एक 50-55 साल का दाढ़ी वाले मौलवी की तरह दिखने वाले शख्स बैठे थे और वही पास में एक 18-19 साल की लड़की जो उनकी बेटी की उम्र की जान पड़ती थी , वो बैठी थी । उसके गले में काले रंग का हिजाब जैसा स्कार्फ था ।
पापा और प्रज्ञा ने अपना सामान को ठिकाने सीट के नीच लगा दिया और सीट पे बैठ चुके थे ।
प्रज्ञा साथ कुछ किताब लाई थी तो वो पढ़ने के लिए ले कर बैठ गई । और तभी ट्रेन चल पड़ी।
मौलवी : सुब्हानला, ट्रेन खुल गई ।
पापा : जी ।
पापा ने थोड़ा मौन रह के उस से पूछा : आप कहा से है , और कहा तक जा रहे है ।
मौलवी: अजी हम लखनऊ से है और अभी वहीं जा रहे है , हमारी फुफेरी बहन के बेटे की निकाह है । उसी में जा रहे है ।
पापा: अच्छा , लखनऊ से है आप ।
मौलवी: जी जी , जमाने से हमारा वहां एक होटल चलता है , बाप - दादा , सब चलाते रहे । अब मेरे बच्चे चलते है । मैने भी लगभग 30 साल चलाया । अब बम्बई में रहने लगा हु ।
पापा: अच्छा , हम लोग तो आप के ही शहर जा रहे है , लखनऊ, वहां हमारे बेटी का एग्जाम है कॉलेज के एडमिशन का।
मौलवी : वहां, चलिए , हम आपको अपने शहर का खरीददारी दिखाएंगे , आइएगा एक बार हमारे होटल पे , बहुत अच्छी कबाब मिलते है ।
पापा: जरूर आते , मगर हम शाकाहारी है ।
मौलवी: ओह अच्छा अच्छा , कोई नहीं , बादाम शरबत ही पिला देंगे आपको । हाहाहाहा...
पापा भी हस पड़े । प्रज्ञा के कानों में भी सारी बाते जा रही थी मगर वो अपने किताब में मुंह छुपाए पढ़ रही थी ।
पापा और उस आदमी की लंबी बात होने लगी , कॉलेज कहा है ? क्या क्या घूमने का जगह है लखनऊ में ?....बगैरा बगैरा।
तभी पापा का ध्यान उस लड़की ने खींचा और उन्होंने ऐसे ही पूछ लिया : और आपके कितने बच्चे है, ये आपकी छोटी बेटी है ?
उस मौलवी के मुंह पे एक मुस्कान आ गई : मेरी खुदा के फज़ल से ३ शादी हुई है जनाब। पहले बीवी से 6, दूसरी से 4 , और तीसरी से अभी कार्य प्रगति में है , नहीं भी तो 3-4 उनसे भी हो ही जाएगा अब तक बुढ़ा होऊंगा । हाहाहा....
पापा : हाहाहा..बारे क़िस्मत वाले है । काफ़ी मेहनत किया है अपने जीवन में ....हाहाहा...
मौलवी : जी अब जो है वो आल्हा की देन है ।
पापा: अच्छा ये आपकी बड़ी वाली पत्नी की बेटी है या २nd वाइफ़ से?
मौलवी: अजी , आप नहीं समझे लग रहा है , ये ही मेरी तीसरी बेगम है । मेरे चेहरे भाई की लड़की है । हमारे में चलता है चचेरे भाई वाली भतीजी से निकाह । और शादी भी 4 कर सकते है ।
पापा आवक रह गए । वही प्रज्ञा एकदम से अपना किताब नीचे कर के उस लड़की की ओर देखने लगी । एकदम मासूम चेहरा , एकदम गोरा दमकता , सेब की तरह लाल, बॉडी पार्ट समीज सलवार से ढकी हुए , सर के चारों तरफ एक हिजाब । बूढ़े ने लॉटरी मार लिया था ।
पापा: वाह जी वाह, किस्मत हो तो आपके जैसा । २ बीविया के रहते हुए , तीसरी से शादी किए और वो भी इतनी सुंदर। वाह।
प्रज्ञा को पापा के बातों के आश्चर्य हो रहा था । पापा ये क्या कह रहे है ? अच्छा किया ? ये बूढ़े ने इतनी छोटी लड़की के साथ शादी कर के उसे मां बनाने के चक्कर में है और पापा इसकी तारीफ कर रहे है ?
पापा : मगर आपको तीसरी शादी क्यों करनी पड़ी ? २ बीविया तो थी ही , ओर अब आपकी उमर भी जायदा है इनके साथ के लिए ।
मौलवी : अरे , इनकी अम्मि अब इस दुनिया में नहीं रही । और अबु भी पिछले ही साल एक एक्सीडेंट में चल बसे । तो इनकी चाचा इसका निकाह मेरे बेटे से करना चाहते थे । मगर उसने शादी वाले दिन ही पता नहीं क्या गया , रिश्ता तोड़ दिया । और ये बेचारी जहर खाने के चक्कर में थी , सब ने इसको बचाया । मगर एक लड़की का उसके शादी के दिन ही शादी टूट जाए तो उसकी शादी आगे भी होने में बहुत मुश्किल होती है । और मैने इसके चाचा को जवान भी दिया था कि ये मेरे घर की बहु बनेगी । अंत में कोई उपाय नहीं हो सका तो मैने हो इनके चाचा को बोला कि मैं ही शादी करने के लिए तैयार हु , क्योंकि जवान मैने दो थी । इस तरह हमारा निकाह हुआ ।
पापा और प्रज्ञा कहानी सुन के ही आवक हो गए थे । पर दूसरे को क्या कोसना जब पापा खुद ही अपने बेटी से ही शादी के के उसे प्रेग्नेंट बना चुके थे ।
वो दोनों बाते करते रहे । और खाना आ गया । पापा और प्रज्ञा घर से ही थोड़ा खा के आए थे तो एक थाली में ही खा लिया । उधर वो दोनों मियां बीवी भी खा लिए और वो हिजाब वाली लड़की को उसके शौहर ने उसे ऊपर वाले सीट पे सुला दिया ।
पापा ने राकेश को एक बार बुलाया और सीट के बारे में पूछा , उसने कहा , सर कोई भी कूप अवेलेबल नहीं है , और कुछ लोगों से मैने एक्सचेंज के लिए भी पूछा मगर वो भी केबिन नहीं लेना चाहते है। टीटी सर ने भी कोई जुगाड़ नहीं बिठा पाए । सॉरी सर ।
पापा को थोड़ा गुस्सा आया मगर अब क्या के सकते थे , एक रात की तो बात थी । पापा दरअसल प्रज्ञा के साथ अकेले में कुछ समय बिताना चाहते थे । खैर उस अरमान पे तो पानी फिर गया था । चलो वैसे भी 5-6 बजे तक तो उतर ही जाना था । रात को वो कितना ही प्रज्ञा के साथ बात के सकते थे ।
पापा ने प्रज्ञा से बोला : अब तो यही सोना पड़ेगा बेटी । तू ऊपर चली जा मै नीच सो जाता हूं।
प्रज्ञा : ok papa.
AC काफी तेज चल रहा था सो सबने चादर ओढ़ा हुआ था ।
पापा भी मन मार के नीचे वाले सीट पे लेट गए , और सोने की कोशिश करने लगे ।
लगभग आधी रात का समय था , पापा पूरे दिन का काम ऑफिस में करने से थक गए थे और गहरी नींद में सो गए थे । वही प्रज्ञा को कल एग्जाम का टेंशन को लेके नींद नहीं आ पा रही थी । और अभी जा के थोड़ा थोड़ा आंख लगाना शुरू हुआ था ।
गाड़ी अपने गति से भागे जा रही थी । और बाहर ट्रेन से छुक छुक की आवाज आ रही थी । सब का शरीर भी स्थिर नहीं था और गाड़ी के गति के कारण डोल रहा था । अचानक की प्रज्ञा को आभास हुआ कि एक कला जा आकृति सामने वाले सीट ले सोई लड़की के सीट पे चढ़ने की कोशिश के रहा है। प्रज्ञा ने हल्का सा अपना आंख खोला तो वो ओर कोई नहीं वो मौलवी ही था । बड़ा बड़ा दाढ़ी से ही प्रज्ञा को पता चल गया ।
उसने एकदम हल्की आवाज में उस लड़की को आवाज दिया : अमीना वो मेरी अमीना , सो गई क्या ?
लड़की : न....नहीं अब्बू, नींद नहीं आ रही आपके बिना ।
प्रज्ञा को अब्बू शब्द सुनते ही एकदम से धक्का लगा : क्या , क्या उसने उस आदमी को अब्बू बोला ? क्या ये आदमी इस लड़की का बाप है ? इसने पापा से कितना झूठ बोला ? और झूठ भी ऐसा कि कोई भी यकीन कर ले ।
प्रज्ञा का मन दहल गया कि ये बूढ़ा अभी इतनी रात को यूं अपने बेटी के सीट पे क्यों चढ़ आया है , और प्रज्ञा को इस सवाल का जवाब मिलने में ज्यादा वक्त नहीं लगा ।
अब्बू: अमीना मेरी जान , मुझे भी कहा तेरे बिना नींद आनी है । मगर मैने कितनी बार बोला है , बाहर अब्बू मत बुलाया कर , लोग सुनेगे तो क्या सोचेंगे ।
अमीना : सॉरी खान साहब ।
अब्बू : हां ये हुए बात। अब जरा मेरे ज्वालामुखी का लावा तेरे बुर में उड़ेलने दे ना।
प्रज्ञा एकदम ठिठुर गई ये सुन के ।
अमीना : यहां कितने लोग है अब्बू । नहीं नहीं ।
अब्बू : अरे मेरी जान , कोई नहीं आएगा , देख नीचे केबिन का दरवाजा बंद है ना।
अमीना : पर से लोग भी तो है , जो उस सीट में सो रहे है , और ये लड़की तो एकदम सामने ही है ।
अब्बू : अरे गहरी नींद में है , उन्हें क्या पता चलेगा । मैने नीचे वाले आदमी को थोड़ा हिलाया , एकदम घोड़ा बेच के सो रहा है ।
अमीना : मगर अब्बू , ये लड़की जग गई तो ।
अब्बू : तो इसको भी अपने मुस्लिम लार का मजा दे दूंगा ।
प्रज्ञा ये बात सुन के दहल गई , वो पानी पानी हो गई थी । वो जीवन में पहली बार ऐसा कुछ देख रही थी । एक बाप उसके सामने अपनी बेटी को चोदने की बात कर रहा था । उसका दिमाग तुरन्त अपने पापा और प्राची के बीच हुए मिलन पे चला गया , क्या पापा भी ऐसा कुछ करते होंगे दीदी के साथ ? ये क्या करने वाला है इस लड़की के साथ ? ओह ये तो उस लड़की को चूमने लगा है । हाय मै शर्म से पानी पानी हो रही हू , और ये कितने निर्लज्ज लोग है कि इन्हें बगल में २ अंजान लोग रहते भी शरम नहीं आ रही ।
उम्म्म...उम्म्म... कर के एकदम हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी । प्रज्ञा के पास कोई चारा नहीं था । पापा को तो ये सब पता भी नहीं चल रहा होगा ,वो इतमीनान से नीचे सो रहे थे । मगर ऊपर अब प्रज्ञा के आंखों से नींद एकदम गायब थी । मगर प्रज्ञा ऐसा दिखा रही थी कि वो सो रही है , वो भी गहरी नींद में । ओर ये दोनों बाप बेटी अपना काम शुरू कर चुके थे ।
अमीना : अब्बू ओके ये दाढ़ी चुभ रही है । मेरे होठ छिल जाएंगे ।
अब्बू : मेरी जान , अभी तो बुर में मिटा काँटा चुभोंगा उसका क्या ? वो तो चीर के रख देगा तेरा बुर अगर तुझे दाढ़ी से होठ छिल रहे है तो ।
प्रज्ञा का परा भी बढ़ता जा रहा था ।
वो दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे । और अब्बू उस लड़की का सीने का गोलाई अपने हथेली में भर के बैलून की तरह दबा रहा था ।
अमीना : अब्बू आऊच.....
अब्बू : सीईईई....क्या कर रही है , ये लोग जग गए तो गड़बड़ हो जाएगी । छोड़ सीधा आज पेलाई की कर लेता हू , रोज़ तो अच्छे से मजा लेके तो चोदता ही ही तुम्हे ।
प्रज्ञा मन में : हाय राम ये बूढ़ा रोज़ करता है ऐसा अपने बेटी के साथ ? क्या पापा भी दीदी के साथ ? बाप रे दीदी ये अब की होगी पापा के साथ ।
प्रज्ञा को अंधेरे में कुछ साफ साफ दिख नहीं रहा था । मगर इतना पता चल रहा था कि क्या क्या हो रहा है । उस आदमी ने अपने पजामे का नारा खोला और खींच के नीचे के लिया ,साथ ही अंडरवियर भी , अब उसका लिंग अंधेरे में ही आकर का दिखा था था । एकदम फ़ानफाया हुआ । उसने बोला : खोल अमीना , जल्दी , रहा नहीं जाता , नहीं तो नींद भी नहीं आएगी ।
उस लड़की ने भी अपने सलवार की डोरी खोल दी , कि तभी अब्बू ने कस के उसका सलवार खींच के गांड और चुत को आजाद के दिया । और उसने अपने बेटी का चुत चाटना शुरू के दिया ,ओर लगभग २ मिनट तक चाटता रहा ।
अमीना : अब्बू , बड़ा दुखता है , आराम से डालियेगा । यहां चीख़ निकल गई तो गजब हो जाएगा ।
अब्बू अपने लन्ड के छिले हुए टोपे पर थूक मलते हुए : एकदम मेरी बच्ची , आराम से , एकदम आराम से करूंगा । तू बस लेती रहा ।
प्रज्ञा ये सारा दृष्य दबी आंखों से देख रही थी । अब उसको दादी की सारी बाते याद आने लगी थी । दादी ने जो लड़का और लड़की के मिलन के बारे में बताया था । इतने में वो मौलवी ने अपना लिंग अमीना के बुर पे लगाया और एकदम धीरे से अंदर सरकने लगा , प्रज्ञा ये देख के दंग रह गई , इतना मोटा , इतना आराम से कैसे जा रहा है इस लड़की में ।
ये लड़की भी तो प्रज्ञा के उमर की ही लग रही थी । क्या इसको इस बूढ़े ने बहुत बार ऐसा किया है कि इसका इतना आराम से ले ले रही है ये लड़की ?
देखते ही देखते पूरा का पूरा लिंग अंदर के दिया उस मौलवी ने अपने बेटी के बुर में । अमीना के मुंह से एक सिसकी निकली , सीईईई....
अब्बू : बस बस मेरी बच्ची हो गया , चला गया अंदर ।
इतना सुनते ही प्रज्ञा की चुत से उसे कुछ चिपचिपा गढ़ा रस बहता भी महसूस हो रहा था , असल में वो गीली हो रही थी ।
एकदम धीरे धीरे वो आदमी अपने बेटी के चुत पे शॉर्ट लगने लगा । पट पट...चप चप...फच फच की हल्की हल्की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी ।
प्रज्ञा को ये आवाज सोचने को मजबूर के रही थी कि , इसका एहसास कैसा होगा ? वो अब एकदम गरम हो गई थी ।
अब्बू : बस अमीना , ज़रा जल्दी जल्दी मारने दे बुर , मजा आ रहा है बेटी....आह....
चुदाई अपने पेस पे चालू था । ट्रेन तो वैसे भी झूल रही थी , तो किसी को सीट झुलाने का भी पता नहीं चल रहा था । उधर बस एक आदमी था जो ये सब देख रहा था , वो थी प्रज्ञा ।
चुदाई होती जा रही थी , होती जा रही थी । अब दोनों ने अपने कमर पे चादर डाल लिया था और कुछ दंग से दिख भी नहीं रहा था । पर हर स्टॉक जो अब्बू अमीना के चुत पे मर रहे थे , वो महसूस या पता एकदम चल रहा था ।
प्रज्ञा एकदम चिपके से अपना हाथ नीचे ले जा कर एक उंगली से अपने सलवार के अंदर हाथ डाल चुकी थी । और अनचुदी , मखमली चुत को रगड़ रही थी ।
लगभग अब्बू और बेटी का खेल 10-15 मिनट चल होगा और एक दो झटका खा के वो दाढ़ी वाला आदमी एकदम शांत हो गया । इसबार कोई कुछ नहीं बोला । वो उठा और अपना नारा बांध कर वो नीचे चला गया और गए खोल केबिन से बाहर निकल गया ।
वही वो लड़की अमीना , अपने चुत पकड़े ऐसी बैठी रही जैसे किसी ने उसको घोड़े के लन्ड से चुदाई करा दिया हो ।
थोड़े देर ऐसा लग रहा था कि उसे कोई होश नहीं है , फिर वो भी उठी और अपना सलवार टाइट कर के नीचे उतर के लेडीज़ बाथरूम के तरफ चल दिया ।
आप उस केबिन में बस पापा और प्रज्ञा ही बचे थे । पापा की सांसे तेज तेज चलने का आवाज आ रहा था । और पैगी को एक मदहोश करता जा रहा था । अभी अभी उसके सामने एक बाप ने अपनी बेटी चोदि थी । और नीचे पापा की मौजूदगी का एहसास उसे और जायदा जोश से भर रहा था । अचानक उसका शरीर आकरा और भलभला के उसने बुर से पानी छोड़ दिया । और एकदम शांत हो गई ।
इन सब से बेखबर पापा सो रहे थे । धीरे धीरे प्रज्ञा का भी आँख लगना शुरू हो गया और वो नींद के आगोश में चली गई ।
5 बजे के करीब पापा का अलार्म बजा, उन्होंने उठ के स्टेशन का नाम चेक किया था अगले 3 स्टेशन के बाद लखनऊ आने ही वाला था । पापा सब कुछ व्यवस्थित करने लगी। उधर वो आदमी भी उठ गया और सारा सामान निकालने लगा , उसे भी लखनऊ ही उतरना था । प्रज्ञा नीचे आ के अपना मुंह हाथ धो के फ्रेश हो गई थी , आज उसका एग्जाम था । सब लखनऊ आने का इंतजार के रहे थे तो प्रज्ञा ने उस लड़की को देखा । एकदम मासूम सी , पर रात को जो हुआ उसके साथ ये सोच के प्रज्ञा को पता चल गया था कि ये मासूम तो बिल्कुल नहीं है । उसपर से वो दाढ़ी वाल मौलवी, बार बार प्रज्ञा को घूरे जा रहा था। उसे गुस्सा भी आ रहा था ।
15- 20 मिनट बाद ही , लखनऊ आ चुका था । पापा ने मुझे बोला अभी इंतजार करो , अब उतर जाए तो उतरेंगे आराम से ।
वो मौलवी ने पापा को अपना होटल का कार्ड थमते हुए बोला : अच्छा भाई साहब , अच्छे से दिलवाई बेटी का एग्जाम , मै निकलता हूं। वैसे किसी चीज की परेशानी हो तो याद कर लीजिएगा।
पापा: अच्छा अच्छा ठीक है ।
पापा और प्रज्ञा , भी ट्रेन से बाहर आए , पापा ने एक ऑटो बुक किया और एक अच्छे होटल ले जाने को बोला , उसने पापा को बोल : सर बेस्ट होटल ले चलता हु । आइय बैठिये ।
पापा : बेस्ट ले चल और ये भी होना चाहिए कि कॉलेज के पास ही होना चाहिए । आज ही एग्जाम है ।
ऑटो वाला : सर बैठिए तो , कितनो के एग्जाम के लिए मैने यही होटल में ठहराया है । चालिया ना ,उस होटल से 300 m पे ही दीदी का कॉलेज है ।
पापा, : चलो फिर ये अच्छा हो गया ।
30-40 मिनट में ही वो लोग होटल पहुंच गए । होटल सच में बहुत खूबसूरत था । और एकदम एकांत वाले जगह पे था , वही दूर से ही प्रज्ञा के सेंटर वाले कॉलेज का बिल्डिंग भी दिख रहा था जो उस ऑटोवाले ने बताया था ।
प्रज्ञा : वाह पापा, मै ऐसे होटल में कभी नहीं रुकी हूं ।
पापा : तब अब रुक लेना ।
और वो समान निकलवाने लगे । वो लोग अंदर जाने लगे तो होटल का चकाचौंध देख के प्रज्ञा बहुत खुश हो गई ।
प्रज्ञा : पापा कितना सुंदर होटल है । बहुत महंगा होगा पापा , एक सप्ताह में तो और भी ज्यादा पैसे लगेंगे ।
पापा: तू उसकी चिंता मत कर बस एग्जाम की चिंता कर । पैसे मै किस लिए कमाता हु तेरे ही लिए ना ?
प्रज्ञा पापा का ये जवाब सुन के खुशी से झूम उठी ।
प्रज्ञा : सच पापा...आप मेरे बारे में इतना सोचते है ।
पापा : पगली , कैसी बात करती है तेरे बारे में नहीं सोचूंगा तो ओर किसके बारे में सोचूंगा , प्राची तो पत्नी है , अब तू ही तो मेरी इकलौती बेटी है ।
प्रज्ञा : थैंक यू पापा ।
पापा : थैंक्यू किस बात की , बाप हु तेरा , मेरे ऊपर हक है तेरा , और तेरे ऊपर भी मेरा पूरा हक है ।
प्रज्ञा : जी पापा , अब से थैंक्यू नहीं बोलूंगी। हाहाहा...
पापा: तेरे ऊपर हक है मेरा ये तो मानती है ना ?
प्राची थोड़ी झेप गई , वो पापा की बात को समझ गई ।
पापा: अरे बोल ।
प्रज्ञा : हां पापा , पूरा हक है , आप ही तो हमारा घर के मालिक है , मेरे पापा है , आपका ह्म सब पे पूरा हक है ।
पापा : ह्म्म्म...चलो हक है तो हक जताने दो और इस होटल में बुकिंग करने दो ।
प्रज्ञा : ओके पापा।
पापा: एग्जाम तेरे कितने बजे तक है ?
प्रज्ञा : पापा 11 बजे से 3 बजे तक ।
पापा : बढ़िया , उसके बाद मजे करेंगे ।
प्रज्ञा : थोड़ी शरमाई मजे के नाम पे फिर बोली : जी पापा।
प्रज्ञा वही लगे सोफे पे बैठ गई ,जब तक पापा बुकिंग करने गए ।
पापा रिसेप्शन पे गए तो वहां बैठी लड़की बोली : YES sir , how may I help you ?
पापा: मुझे एक कमरा चाहिए ।
लड़की : ओके सर ,कितने मेंबर्स के लिए ?
पापा: 2 लोगों के लिए ।
लड़की : ओके आप लोग कपल है ?
पापा को लगा कि अगर बेटी बोल के एक कमरे में रहेंगे तो ये लोग क्या सोचेंगे और २ कमरा इतने महंगे होटल में एक सप्ताह के लिए आउट ऑफ बजट है , इनको सब कुछ क्यों बताना की हमारा रिश्ता क्या है । पापा ने बस एक ह्म्म्म.... में जवाब दिया ।
लड़की : ओके सर , अपना नाम बताइए और मैडम का का नाम बताइए । और आप अपना क्या मैडम जी में से किसी एक का ID भी दीजिए ।
पापा ने उसे ये भी बता दिया कि रूम वो एक वीक का जरूर बुक कर रहे है मगर उनका काम जल्दी खत्म हो गया तो वो जल्दी भी चेक आउट कर सकते है ।
इसपे उस लड़की ने बोला : नो प्रॉबलम, सर आप जब चाहो चेक आउट के सकते है ।
पापा ने अपना ID देते हुए अपना नाम और प्रज्ञा का नाम लिखा दिया । वो रेस्पेसिनिष्ट झट झट सारा डाटा अपने कंप्यूट में एंट्री करने लगी । पापा का id स्कैन किया ओर फिर वापस दे दिया । एड्रेस और पर्पस ऑफ विजिट पूछ के उसने बोला : ok sir , your room will be ready in 10 mins , please just wait sir.
पापा भी प्रज्ञा के पास जा के सोफे पे बैठ गए । और प्रज्ञा से बोला : बेटी , एक प्रॉब्लम है , रूम्स बहुत महंगे है । इसलिए २ रूम करना सही नहीं लगा , एक ही रूम किया है , मगर काफी स्पेस वाला है तो कोई दिक्कत नहीं होगा । और रूम में सोफा भी है तो तू बोलेगी तो मै सोफे पे सो जाऊंगा , तो उसकी चिंता मत करना ।
प्रज्ञा : हां पापा , मै तो पहले ही बोली थी बहुत महंगा होटल होगा । की बात नहीं मुझे चलेगा पापा ।
पापा अब जा के आश्वत हुए ।
थोड़े देर बाद वो लड़की पापा के पास आई
और बोली : सर , हमे खेद है कि आप ने जो रूम बुक किया है , वो इन्फॉरफुनेटली अभी उपलब्ध नहीं हो सकेगा । उसके गेस्ट ने अपना स्टे को बढ़ा दिया है । मगर हमने आपको कमिटमेंट किया था तो हम आपको अपग्रेड के के कपल स्वीट प्रोवाइड कर रहे है । Is that ok for you sir ?
पापा: लेकिन उसके चार्जेज ?
लड़की : डॉन्ट वैरी सर, हम सेम प्राइस में हो आपको अपग्रेड के रहे है ।
पापा: फिर ठीक है ।
प्रज्ञा भी खुश हो गई ।
एक लड़का उन दोनों का सामान ले कर उन्हें अपने पीछे आने को बोला । लिफ्ट से 4 मंजिल पे पहुंच कर एक बारे से दरवाजे के कि ओर ले गया । कार्ड डाल के उसने रूम नंबर 405 खोला और पापा से बोल : वेलकम sir.
ये अगले एक सप्ताह तक आपका कमरा है , बाथरूम राइट साइड में है । और आप ठंडा और गरम दिनों पानी का उपयोग कर सकते है । लेफ्ट कॉर्नर में फ्रिज भी है , सो u can enjoy bear or softdrinks .
फिर वो पापा और प्राची को उनका बेडरूम दिखाया । वो बहुत ही शानदार और सुंदर था । कमरे के बीचोबीज एक बार सा बेड लगा था साइड में सोफा और एक साइड बालकनी में आराम कुर्सी डाला हुआ था । अगले 5 मीनट तक वो लड़का , पापा और प्रज्ञा को सारा रूल और सामान के उपलब्धता के बारे में बताता रहा । सब कुछ बताने के बाद वो जाने लगा ।
लड़का : चलिए सर मै निकलता हूं। आप लोगों किसी भी चीज की जरूरत हो , तो बताए हुए नंबर ले कॉल के लेना ।
पापा: थैंक्यू भाई , थैंक्स ।
लड़का : मेंशन नॉट सर । ओके सर, ओके मैम। इंजॉय यौर हनीमून और सर आपको अगर कोंडोम का जरूरी परे तो आप के बेड के दराज़ में परे है । You are free to use it. And if you need more just give a call we will provide.
दरअसल वो कपल स्वीट ज्यादातर कपल लोग ही बुक करते थे । और उस लड़के को ये पता नहीं था कि पापा और प्रज्ञा ने नार्मल रूम बुक किया था और उन्हें अपग्रेड के के ये रून दिया गया है । उसे बस रिसेपशन वाली लड़की ने बताया था कि ये कपल है , क्योंकि पापा ने प्रज्ञा का नाम कपल के तौर पे हो लिखवाया था ।
तो उस करके को लगा कि ये पक्का हनीमून मनाने हो आए होंगे , जैसे और लोग आते है । इसलिए उसने ऐसा बोल जाते जाते ।
पापा और प्रज्ञा एकदम से स्तब्ध रह गए । की ये क्या हुआ । प्रज्ञा को एक झटका सा लगा कि उसने पापा को कोंडोम के बारे में क्यों बताया ? और हनीमून?
पापा भी समझ नहीं पा रहे थे कि अब प्रज्ञा को कैसे समझाए ?
पापा को कुछ सूझ नहीं रहा था कि अब प्रज्ञा को क्या जवाब दिया जाए । उस स्टाफ ने प्रज्ञा के सामने कोंडोम का जिक्र कर के माहौल ही बदल दिया । प्रज्ञा के मन का चोर इस बात को सुन के शर्म से अंदर ही अंदर छुपने की कोशिश कर रहा था । वो मन में सोच रही थी : क्या उस आदमी ने सच में वो कहा जो मैंने सुना ? क्या उसने कोंडोम की बात की ? पापा का क्या इरादा है ? क्या वो मुझे वो यहां.....? नहीं नहीं... पापा मेरे साथ ऐसा नहीं करेंगे । पर उस स्टॉफ ने ऐसे ही हनीमून की बात नहीं की होगी , जरूर उसे लगा होगा कि पापा और मैं कपल है । हाँ, तभी वो इस तरह से बोल रहा था । उसे एक बार जान तो लेना चाहिए था कि ये मेरे पापा है , पति नहीं । पर पापा ने उसे कुछ कहा क्यों नहीं ? क्या पापा सच में वो कोंडोम का इस्तेमाल करने वाले है ? हाय मेरा दिल कितना तेज धड़क रहा है । मै कैसे नज़रे मिला पाऊँगी अब पापा से ? क्या पापा मुझे उस मौलवी की तरह.....बाप रे क्या सच में पापा ऐसा कुछ....नहीं नहीं...ये सब कुछ ग़लतफहमी हुई है । पापा ऐसा कुछ कभी नहीं करेंगे । मगर क्या पापा मेरे साथ ज़बरदस्ती भी कर सकते है ? रात को तो वो भी इसी कमरे में होंगे ? नहीं नहीं...पापा तो, मेरे लिए , उन लड़कों तक से भीड़ गये थे , पापा मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते । ये सब सच में कोई गलतफहमी ही है । पापा की मै प्यारी बेटी हु । मेरे साथ ये सब पापा नहीं कर सकते।
प्रज्ञा अपने मन को सांत्वना दे रही थी कि पापा और उसके बीच कुछ नहीं हो सकता और उस आदमी को गलत फहमी हुई है , वही एक डर भी था कि कही उस आदमी की कही हुई बाते सही ना हो जाए । ये डर कुछ अलग था , इस डर में उत्साह भी था, थोड़ी घबराहट और थोड़ी सी, आने वाले 8 दिन कैसे गुजरेंगे इसका आंकलन और चिंता ।
उधर पापा के भी हवाइयां उर गई थी , उस स्टाफ के कोंडोम वाले बात पे । अब वो प्रज्ञा को क्या बताए कि उनके ओर प्रज्ञा के कमरे ने कोंडोम क्या कर रहा है ? क्या प्रज्ञा अब मुझ पे विश्वास कर पाएगी अगले 8 दिनों तक की मै उसके साथ कुछ उट पटांग हरकत नहीं करना चाहता । क्या वो अब सतर्क हो जाएगी ? प्रज्ञा के हाव भाव से लग रहा है कि उसे ये पसंद नहीं आया है । अब मै क्या करूं और कहा अपना मुंह छुपाऊ । उसे ये कैसे बताऊ की मैने रजिस्ट्रेशन के टाइम उसे अपनी पत्नी बताया है बेटी नहीं । पर जो भी हो , अगर ग़लत फहमी बढ़ गई तो शायद प्रज्ञा के दिमाग में नेगेटिव असर को , और उसके एग्जाम पे भी इसका असर पड़े। इसलिए मुझे प्रज्ञा को अब कुछ खुल के बताना होगा ।
पापा: प्रज्ञा ।
प्रज्ञा जैसे नींद से उठी हो और पापा की आवाज सुन के ही चौक गई : हम्ममम...हां पापा।
पापा: प्रज्ञा बेटी , कैसा लगा कमरा ?
प्रज्ञा इस प्रश्न से थोड़ी सोच में पर गई कि पापा ये क्यों पूछ रहे है कि कैसा लगा कमरा , कही मेरे साथ इसी कमरे में..... : अच्छा है पापा । बहुत बड़ा है और आलीशान लग रहा है ।
पापा: ह्म्म्म...बेटी वो तुझे मै एक बात बताना चाहता हूँ।
प्रज्ञा का दिल जोर से धड़कने लगा । पापा क्या बताना चाहते है ? कही वो मेरे साथ प्यार करने या उस तरीके का कुछ बात तो नहीं करना चाहते ? क्या वो मुझे अगले 8 दिनों का प्लान बताना चाहते है । प्रज्ञा : हां पापा , बताइए ना।
पापा: बेटी वो एक गलत फहमी हो गई है ।
प्रज्ञा मन में राहत का सांस ली और सोचा , तभी मै बोलूं कि उस आदमी ने कोंडोम का जिक्र क्यों किया । मेरा शक सही था । उसे गलतफहमी ही हुआ था ।
प्रज्ञा : क्या , गलत फहमी पापा?
वो ऐसा दर्शा रही थी कि उसने कुछ ध्यान ही नहीं दिया कोंडोम और हनीमून वाली बात पे ।
पापा: वो..., वो जो स्टाफ अभी कह के गया है , वो दराज़ में रखे कोंडोम वाली बात।
प्रज्ञा एकदम ऐसा दर्शाना चाहती थी कि वो ये सब कुछ समझ ही नहीं पाई कुछ भी : हां पापा , उसने ऐसा क्यों बोला ? मै कुछ समझ नहीं पाई । हम दोनों तो कपल नहीं है ना। कपल तो आप ओर दीदी है ।फिर उसने हनीमून वाली बात क्यों की ?
पापा के दिमाग में थोड़ी सी राहत मिली । वो सोचे : चलो प्रज्ञा को उतना कुछ समझ नहीं आया जो भी अभी हुआ । वैसे भी अभी इन सब बातों का उसे ज्यादा पता भी नहीं होगा । मगर ऐसा भी तो हो सकता है कि प्रज्ञा सब समझ गई हो और ना समझ बनने का नाटक कर रही हो ?
पापा फिर धर्मसंकट में घिर गए ।
पापा: नहीं प्रज्ञा, वो शायद उसने हमारे बारे में गलत समझ लिया । दरअसल जब हम यहां आए, तो मैने देखा कि रूम काफी महंगे है। और 1-2 दिनों की बात होती तो हम 2 अलग अलग कमरे के सकते थे , मगर 8 दिन रुकने का बात हुआ तो हमारा बजट बहुत बढ़ जाएगा इस लिए मैने एक ही कमरा लेने का सोचा ।
प्रज्ञा : हां पापा , सही किया अपने । वैसे भी आप कोई पराये आदमी थोड़े हो मेरे लिए की हमे दो कमरे चाहिए ।
पापा: हाँ पर एक गलती हो गई मुझ से ।
प्रज्ञा : क्या गलती पापा ?
पापा : प्रज्ञा , मैने उस रिसेप्शनिष्ट को ये नहीं बताया कि हम बाप बेटी है ।
प्रज्ञा : तो क्या बताया पापा ?
पापा : उसने तुम्हे मेरे साथ देख के उसे लगा कि तुम मेरी पत्नी हो , और मुझ से पूछा कि, मुझे कपल रूम लेना ? तो मैने उसे बताया के हां । क्यों कि अगर मै उसे उसे ये बता देता कि तुम मेरी बेटी हो और तब सिंगल रूम लेता तो पता नहीं वो लोग क्या सोच लेते मेरे बारे में, सोचते कि मैं अपने बेटी के साथ कुछ गलत तो नहीं कर रहा , या फिर ये भी की शायद मेरी औकाद ही नहीं इस होटल में रहने की इस लिए एक कमरा ले रहा हूं। इस चक्कर में मैने उसे ये नहीं बताया कि तुम मेरी बेटी हो । और जब कोई कमरा खाली नहीं था तो उसने हमें अपग्रेड कर के ये हनीमून स्वीट दे दिया ,क्योंकि उसने समझा कि हम कपल। वही वो स्टाफ ने समझा कि मैने यही स्वीट बुक किया है और हनीमून मनाने आया हूं। इसलिए उसने कोडम का ज़िक्र कर दिया । मुझे माफ कर दो बेटी मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था । ये सब गलतफहमी में हुआ है ।
प्रज्ञा एकदम से दंग रह गई : क्या , पापा ने मेरे बारे में बताया कि मैं और वो एक कपल है ? हाय राम ! वो आदमी क्या सोच रहा होगा कि रात को हमारे बीच क्या होगा ? एक गलतफहमी और अब लोग मुझे पापा की पत्नी समझ रही है । पर वो तो दीदी है ना । हद है , ये सब क्या हो रहा है । मगर इसमें पापा की कोई गलती नहीं । लोगो का क्या वो तो अंजान है । मुझे उनके सोचने से क्या ? उनके सोचने से मेरे और पापा का रिश्ता थोड़ी बदल जाएगा । सोचने दो उन्हें । और जैसा मैने सोचा था , पापा मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते , वही हुआ । ये सारा गलत फहमी था । मुझे लोगों के सोचने से कोई फर्क नहीं पड़ता । पापा मुझे होनेस्टी के साथ सारा मामला बताया , यानी पापा का इरादा गलत नहीं हो सकता । पापा मेरे साथ वो सब नहीं के सकते । मुझे पापा के बारे में ऐसा नहीं सोचना चाहिए थे कि पापा मेरे साथ कुछ...या कोई जोर जबर्दस्ती करेंगे...रात को।
प्रज्ञा निश्चिंत को के पापा को बोला : कोई बात नहीं पापा , लोगो को सोचने दीजिए जो भी सोचते है । मै जानती हूं आप मेरा हर तरह से ख्याल रखेंगे । आपने सही किया कि मुझे सब कुछ बता दिया । नहीं तो किसी स्टाफ के सामने आपको पापा बोल देती तो कितना गलत ही जाता । उसे क्या लगता कि इसकी बेटी ही इसकी पत्नी है । हाहाहा...
पापा का दिमाग ठनका , अब पुरुष का दिमाग है , प्रज्ञा के इस तरह के जवाब से पापा को लगा कि प्रज्ञा को इसका कोई एतराज़ नहीं हुआ कि पापा ने उसे अपनी पत्नी बताया रिसेप्शनिस्ट को । क्या प्रज्ञा ये सुन के थोड़ा चकित भी नहीं हुईं। क्या प्रज्ञा चाहती है कि मैं उसके साथ ये कोंडोम का इस्तेमाल करूं ? उसे मेरे पत्नी कहलवाने या समझे जाने से कोई दिक्कत नहीं है , उसने मेरे बातों पे कोई गुस्सा या विरोध नहीं किया । मतलब सिग्नल ग्रीन है और प्रज्ञा का बुर मेरे लिए फड़कने लगा है । हां ....तभी इसने की जायदा विरोध नहीं किया और बात तुरंत समझ गई ,क्योंकि इसका मन है कि मैं इसे सेक्स क्या होता है वो सिखाऊं । इसकी चुदाई करूँ । इसके साथ इन कोंडोम का इस्तेमाल करूं । हां लग रहा है अगले आठ दिन में हमारे बीच बहुत कुछ होने वाला। है ।
यहाँ पापा और प्रज्ञा की सोच बिल्कुल भी मेल नहीं खा रही । प्रज्ञा को पापा का ईमानदारी से अब बता देना, उसके दिल को ये सुकून दे रहा था कि पापा कुछ भी नहीं करेंगे उसके साथ । वही पापा को प्रज्ञा के जायदा गुस्से नहीं करने से लगा कि प्रज्ञा को इस बात से कोई एतराज़ नहीं कि कोंडोम का इस्तेमाल उसके साथ किया जाए।
अब आगे क्या होगा , ये तो वक्त ही तय करेगा।
खैर , पापा और प्रज्ञा ,लंबा सफर से आए थे सो दिनों ने फ्रेश होने का सोचा ।
पापा ने प्रज्ञा से बोला : बेटी तू पहले नहा ले , तेरा एग्जाम 11 बजे से है और तुझे नहाने के बाद भी कपड़े और तैयार होने में समय लगेगा ,तो तू पहले नहा के अपने काम में लग जा । मै तो तुरंत तैयार हो जाऊंगा । मुझे क्या मै तो टी-शर्ट और पेंट डालूँगा , और कंघी करूंगा । हो गया रेडी । तुझे समय लगेगा ।
प्रज्ञा : हां , आप सही कह रहे है पापा , मै अभी आती हु नहा के , हमारे पास ज्यादा समय नहीं है अब । वैसे भी होटल बुकिंग में काफी समय लग गया ।
प्रज्ञा ने बैग से तौलिया , कुछ कपड़े , और अपनी अंडर गारमेंट ली और बाथरूम में चल दी । अंदर जाते ही , एकदम से खुशी से चिल्लाया: अरे पापा, ये तो मस्त हो गया ।
पापा एकदम से घबरा से गए कि क्या हो गया। पापा : अरे क्या मस्त हो गया ?
प्रज्ञा : पापा ,देखो ना, बाथ टब है यहां तो । मैने तो बस फिल्मों में ही देखा है बाथ टब ।
पापा: हद है....तूने तो मुझे एक पल के लिए डरा दिया कि क्या देख लिया तूने । हाहाहा....हां बढ़िया होटल है तो बाथ टब तो होगा ही , वो भी ये कपल स्वीट है । इसका दाम नॉर्मल कमरे से जायदा है , तो इसमें बाथ टब नहीं होता तो अजीब लगता ।
प्रज्ञा : वाह पापा , मैने पहली बार देखा है ये । मै अब इसी में नहाऊंगी।
प्रज्ञा बहुत ज्यादा उत्साहित थी उस बाथटब को देख कर ।
पापा: अरे यार , आज मत नहाना , इसमें लोग आराम से रिलेक्स करने के लिए नहाते है । अभी तू जल्दी नहा के नहीं निकलेगी तो तेरा एग्जाम इस बाथ टब में ही होता रह जाएगा । और बाथ टब में ऐसा क्या है कि तू इतना खुशी से झूम उठी है ?
प्रज्ञा : पापा वो मैने उसे बस पिक्चर में देखा है । एक फिल्म में हीरो और हिरोइन इसी में बैठ के गाना गा रहे थे। मुझे ये बहुत अच्छा लगता है । मेरा भी मन था कि जब भी मुझे मौका मिलेगा मै भी एक बार इसमें नहाऊंगी ।
पापा: हीरो के साथ ??? हाहाहाहा....
प्रज्ञा एक्साइटमेंट में अचानक बोल परी : हां...एकदम उस फिल्म की तरह ,नंगे बदन..., प्यार करते ह....... । उसने अपना पूरा बात भी नहीं बोला था और अचानक ही प्रज्ञा को लगा, कि ये वो क्या बोल गई ? और वो झेप गई ।
लेकिन इसका असर पापा पे ये हुआ कि उन्हें लगा , प्रज्ञा के ख्यालों के हीरो वो है , जिसके साथ वो उस टब में नंगी बैठना चाहती थी और प्रज्ञा करना चाहती थी ।
प्रज्ञा एकदम शांत हो गई थी , उसे अपने बड़बोले होने पर आज बहुत शर्म आ रहा था । पापा एक मीठी मुस्कान लिए बाथरूम से जाने लगे : ठीक है , प्यार बाद में के लेना , अभी नहा के जल्दी निकल ।
प्रज्ञा को बहुत ग्लानि हो रही थी , कि वो पापा के क्या कह बैठी ।
उधर पापा भी अब बाथरूम से निकल गए थे , उन्होंने अपने पेंट की तरफ देखा। लिंग फ़नफना चुका था । पापा ने प्रज्ञा के साथ उस टब में नंगे बैठने का दृश्य,अपने मन में देख लिया था । उनको अब लग रहा था कि प्रज्ञा उनके साथ, 8 दिन , उनको लवर बन के गुजरना चाहती है । वो उनसे चुदवाना चाहती है , वो भी उस टब में , नंगे पानी में बैठ के । क्या गजब की चुदाई होगी हमारी । जब मै प्रज्ञा के टाइट बुर में अपने लन्ड से शॉर्ट मारूंगा तो साथ साथ पूरा पानी भी झपाक झपाक कर के उड़ेगा और टब के बाहर तक गिरेगा । पापा अब आश्वस्त हो चुके थे कि प्रज्ञा उनको कई इसारे दे रही है।
मगर ये तो प्रज्ञा का नेचर ही ऐसा था कि उसे पता ही नहीं चलता था कि उसको कहा पे क्या बोलना चाहिए , वो जब बोलने लगती तो बेधड़क ही कही भी , कुछ भी बोल देती , और पापा के संग उसका ऐसा कुछ इरादा नहीं था , पर उसने उतेजित हो कर उनके सामने अपने फैन्टेसी के बारे में ज़िक्र कर दिया था ,गलती से । वो बेचारी को जब समझ में आया कि वो क्या बोल गई तो, उसे लगा कि , उसका रीढ़ की हड्डी जैसे अकड़ गया हो। वो हिल नहीं पा रही हो । और पापा के बाथरूम से जाने के बाद वो 2 में वही आवक खड़ी रही । उसका दिल की धक धक इतनी तेज था कि अगर उस बाथरूम मे कोई ओर होता तो उसे बिना सीने में कान लगाए ही , उसकी धड़कन सुनाई दे जाती ।
उसने हिम्मत कर के गेट बंद किया और झरने के नीचे , अपने कपड़े उतार के खड़ी हो गई ।
घबराहट से उसके चेहरे पे हवाइयां उरी हुई थी । उसने पापा की सामने ये क्या कह दिया था । कही पापा ये ना समझ जाए कि मैं ऐसा कुछ उनके साथ करने की सोच रही हूं। उनकी बेटी होके ,उनकी पत्नी की सौतन बनने की कोशिश कर रही हूं। पापा के दिल में ऐसा कुछ होता वो वो मेरे साथ इतना होनेस्ट नहीं होते उस स्टाफ की बात को लेकर । नहीं पापा ने ऐसा कुछ नहीं सोचा होगा मेरे बारे में । मगर वो ये जरूर सोच रहे होंगे कि मैं कितनी बेशर्मी भरी बाते कर रही हु उनके साथ । धत् मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए थे पापा से ।
उधर पापा का लौरा खड़ा हो गया था और मीठा मीठा दर्द होने लगा था उन्हें ,इतना कड़क हो गया था । वो पेंट में के तब्बू जैसा बना चुका था । पापा प्रज्ञा से मिलन के सपने में खो गए थे । और प्रज्ञा संग हुए अभी के कुछ घटना उन्हें प्रज्ञा के तरफ से भी ग्रीन सिग्नल देने का अंदेशा दे रहा था । मगर ऐसा था क्या ? ये तो आगे ही पता चलेगा ।
प्रज्ञा का बदन शर्म के मारे अंदर बाथरूम ने थरथरा रहा था कि ये क्या हुआ अभी ।
उधर पापा का लिंग प्रज्ञा के बुर को सलामी देने की लिए तन के दर्द देने लगा था । पापा ने अब मन बना लिया था, पूरी तरह से , कि अब वो ये मौका गवां नहीं सकते ,और प्रज्ञा के साथ इन्हीं 8 दिन के अंदर ,उसके 18 साल की कच्ची बुर के परखच्चे उड़ा देना है उन्हें । प्रज्ञा उनसे प्यार करने के लिए तरस रही है और इसीलिए शायद प्रज्ञा उस स्टाफ के बातों पे भी जायदा गुस्से नहीं की थी ।
प्रज्ञा चुप थी और बाथरूम में बस अब उसके गर्म जवान जिस्म पे , पानी गिरने का आवाज ही गूंज रहा था ।
प्रज्ञा की मनोदशा में, पापा क्या सोच रहे होंगे , यही चल रहा था । मगर अब जो होना था वो हो चुका । और जल्दी ही उसके एग्जाम का समय हो जाएगा , तो उसने इस सोच को पीछे छोड़ , एग्जाम का टेंशन सर पे ले लिए और जल्दी से नहा के निकल जाने का सोचा । वो झरने के नीचे अच्छे से नहा रही थी । बीच बीच ने वो, झरने को बंद कर के , अपने बदन को साबुन लगा के मल भी रही थी ।
वो अपने चूचो को भी साबुन लगा रही थी । साबुन की फेन उसके संतरे जैसे छोटे छोटे चुचि से फिसल कर नीचे गिर रहे थे ।
जल्दी ही वो नहा चुकी थी और बाथरूम में ही कपड़े बदलने लगी ,क्योंकि रूम में पापा भी होंगे । बाहर पापा प्रज्ञा संग मिलन के सपना लिए , अपने खड़े मर्दानगी को सुलाने का कोशिश कर रहे थे कि कही प्रज्ञा बाथरूम से बाहर आई और उनकी इस पेंट के तम्बू को देख लिया तो गजब हो जाएगा । मगर वो जितना उसे दवाई की कोशिश करते , उतना ही ज्यादा कड़कपन उसमे आता ही का रहा था ।
प्रज्ञा जल्दी हो कपड़े पहन के बाहर निकली : पापा , हो गया मेरा , आप जाइए ,नहा लीजिए ।
प्रज्ञा ने ये बात पापा को काफी हिम्मत जुटाने के बाद बोली थी । उसके नज़रे भी नीचे झुकी हुई थी ।
पापा: हां बस अभी गया और तुरंत नहा के आया ।
पापा कोशिश कर रहे थे कि उनका खड़ा हुआ मर्दानगी की निशानी , प्रज्ञा के नज़र में ना आए । इस सोच से लिंग अब झटके खाने लगा था । और पापा को तो था भी बड़ा और मोटा, जिसके कारण तम्बू बहुत ही विशाल बना हुआ था ।
वो थोड़ा शरीर को घुमा के अंदर जाने लगे । कि तभी उनके सामने ही प्रज्ञा ,एकदम से गिले बालों को तैलिया से झरते हुए ,आ गई । जिसका डर था वही हुआ ।
प्रज्ञा की नजर डायरेक्ट पापा के तम्बू में खड़े बम्बू पे पर गया । वो बहुत ज्यादा चौंक गई और अन्यास ही उसके मुंह से जोर से निकल गया : हाय दइया, इतना बड़ा......।
पापा की शर्मिंदगी अब आसमान पे थी । ये क्या हो गया । प्रज्ञा को मेरा सामान दिख गया है । धत् ,बारी गड़बड़ हो गई ।
वो झटके से उसपे हाथ रखते हुए बाथरूम ने घुश गए । वही प्रज्ञा को आज ,झटके पे झटका लगता ही का रहा था । ट्रेन पे उस मौलवी का उसकी बेटी को चोदना, होटल के स्टाफ का ऐसा बोलना , पापा को उसको अपनी पत्नी बताना रिसेप्शन पे , कमरे में कोंडोम का पैकेट होना , कमरा भी हनीमून स्वीट होना , पापा के साथ बाथटब का जिक्र करना , और अब पापा का वो मोटा खड़ा,लिंग से बने आकर को देख लेना। ये सब प्रज्ञा के दिमाग को इसकी पुष्टि दे चुके थे कि वो अपने दीदी के साथ ही ,पापा के दिल में , स्थान ले चुकी है । यानी अब पापा सिर्फ दीदी से ही नहीं ,उसे भी अपने दिल में बसा चुके है । ऐसा नहीं होता तो अभी ये लंबा और मोटा तम्बू जो उसे दिखा है वो नहीं दिखता ।
सबके जज़्बात बदल रहे थे । उधर पापा ने नहाने के लिए जैसे ही अपना कपड़ा खोला और पेंट को नीचे सरकाया , ऐसा लग रहा था कि उनका लिंग चड्डी फार कर बस निकलने ही वाला है । पापा ने बारी बारी सारे कपड़े उतारे और जैसे ही अपने चड्डी नीचे सरकाया , उछल के 8 इंच खा लौड़ा,बाहर आ गया । उनकी नसे फटी जा रही थी । बर्दाश्त से बाहर । पापा ने झरना चलाया और सोचा ठंडा पानी परते ही एकदम से उनकी सारी गर्मी शांत हो जाएगी । मगर ऐसा हुआ नहीं और लिंग अब और झटके खाने लगा ।
तभी पापा की नजर पास पड़े ,प्रज्ञा का अभी अभी खोला गया कपड़ा पे पड़ा । प्रज्ञा ने कपड़े को बाल्टी में डाल के छोड़ दिया था कि वो पापा के नहाने के बाद सारे कपड़े एक साथ ही धो लेगी । वो चाहती नहीं थी कि पापा खुद ही कपड़ा ना धोये ,इसलिए उसने पापा को बाथरूम में घुसने से पहले ही बोल दिया था कि आप कपड़े को बाल्टी में रख के छोड़ दीजिएगा , मै धो दूंगी , आपके नहाने और बाल झरने के के बाद ।
पापा प्रज्ञा के कपड़े देख के उत्सुक हो गए और बाल्टी में हाथ डाल कर कुछ तलाशने लगे । थोड़े देर कपड़ों को उलट फेर करने के बाद ही उनको एक काला कलर का कपड़ा मिला , शायद पापा वही ढूंढ रहे थे । वो था प्रज्ञा की पैंट । पापा ऐसे खुश हुए जैसे लग उन्हें खजाना मिल गया हो । उन्होंने उस पैन्टी को उलट पलट के देखा और उसे उल्टा कर दिया , और उस स्थान पे देखने लगे जहाँ अभी कुछ देर पहले तक प्रज्ञा के सील युक्त चुत का मुहाना लगा हुआ था । पापा झूम गए । पैन्टी का वो हिस्सा सफेद और थोड़ा करा सा जान पड़ता था । उसपे एक गाढ़ा क्रीम जैसा द्रव लगा हुआ था । ये हो ना हो प्रज्ञा का चुत रस था । उन्होंने उसे अपने नाक के पास ले जाके , कस के अंदर सांस भरी , और उसी के साथ प्रज्ञा के चुत रस से उठ रही कुशबू उनके नथुनों को गमकता हुआ महसूस हुआ । आह , एक बाप अपने छोटी बेटी के बुर का रस का सुगंध ले रहा था ।
वो भी एक अनचुदी बुर का। पापा ने तुरंत पैन्टी के उस स्थान को अपने जीभ से चाटा , और पाया कि उस रस का स्वाद कसैला था ।
अब पापा के लिंग में इतना तान आ गया था कि अब उसे कोई दीवाल में भी छेद करवा सकता था । पापा ने उस पैन्टी को झट से अपने लन्ड पे लपेट लिया और पैन्टी से अपने लिंग को रगड़ने लगे और सुपारे पे अपने फोरस्किन को ऊपर नीचे करने लगे ।
उनका सुपारा कभी नंगा ही रहा था तो कभी फोरस्किन से ढक जाता । पापा अपना लन्ड हिलाने लगे । पापा प्रज्ञा के नाम का मूठ मार रहे थे , वो भी उसके पैन्टी से रगड़ रगड़ के ।
उन्हें ये ऐसा अनुभव दे रहा था जैसे वो प्रज्ञा के चुत का ही मजा ले रहे हो । उधर झरने से पानी की बूंदे उनके शरीर को और मजा दे रहा था । वो प्रज्ञा के कुंवारी बुर के बारे में सोचते हुए बहुत ज़्यादा उत्साहित हो गए और कुछ मिंटो के घर्षण के बाद ही उनके लिंग के टोपे से एक मोटा ,गाढ़ा , वीर्य धार निकला और प्रज्ञा का पैन्टी उससे पूरी तरह गीली हो गई ।
उनके लन्ड का पानी पैन्टी में सीधे बुर के मुहाने वाले जगह पे गिरी थी । जब पापा को होश आया , तब तक बहुत देर हो चुकी थी । उसका सारा माल ,प्रज्ञा के पैन्टी पे लग चुका था । पापा ने सोचा कि वो पैन्टी को धो देते है । फिर सोचा नहीं अगर प्रज्ञा को पैन्टी पूरा धोया हुआ और गीला मिला तो उसे पता चल जाएगा कि पापा ने उसकी पैन्टी को छुआ है । उन्होंने सोचा , कि क्यों ना इसको कपड़ों के बीच छिपा दिया जाए , ताकि प्रज्ञा कपड़े धोने के कर्म में पैन्टी को गिला करने के बाद ढूंढ पाए , कपड़ों के बीच । फिर उसे पता भी नहीं चलेगा । पापा ने पैन्टी को बाल्टी में सबसे नीच कपड़ों के बीच में रख दिया । ऊपर से अपने कपड़े के ,प्रज्ञा के सारे कपड़े रख दिया । अगले 2 मिनिट में पापा नहा के बनियान और तैलिया लपेटे बाथरूम से बाहर आ गया।
प्रज्ञा को उन्होंने किसी सोच में डूबी और अपने बालों में एकदम धीरे धीरे कंघी करते देखा।
पापा: प्रज्ञा बेटी ।
पापा के आवाज सुनते ही ऐसा लगा जैसे प्रज्ञा की किसी ने सोते हुए का के हिला के जग दिया हो : उम्म..ह्म्म...हां हां पापा ।
उसका नज़र सीधा पापा के तैलिया पे गया ,जहां उसे अब कोई तम्बू नहीं दिखा । वो थोड़ा रिलेक्स हुई ।
पापा: किन ख्यालों में खोई हो । 10 बज गए , हमे नाश्ता भी करना है, और एग्जाम सेंटर 20 मिनट पहले भी पहुंचना है ,नहीं तो गेट बंद हो जायेगे । जल्दी कर ।
प्रज्ञा को अचानक याद आया कि वो यहां आई क्यों है : हां पापा , बस ,अभी कपड़ों को मशीन में डाल देती हु । अभी देखा कि बालकनी ने वाशिंग मशीन भी लगा है ।
पापा मन में : मर गए , अब मशीन में तो वो एक एक कर के कपड़े डालेगी । उसे पता न चल जाए कि उसके पैन्टी के साथ क्या किया है मैने ।
प्रज्ञा तुरंत बाथरूम में कपड़े से भरे बाल्टी ले आई और बालकनी में चली गई । पापा के पसीने छूटने लगे ।
प्रज्ञा एक एक के सारे कपड़े मशीन का ढक्कन खोल के डालने लगी । पहले पापा के कपड़े , फिर अपने कपड़े , अंत में बाल्टी में बस उसकी पैन्टी पड़ी थी ।
पापा तब तक अपना कपड़े पहनने लगे : अब जो होगा वो होगा , प्रज्ञा आज नहीं तो कल वो वीर्य अपने बच्चेदानी में ही लेने वाली है। आज उसके दर्शन भी हो जाएंगे उसे ।
प्रज्ञा ने जैसे ही अपने चड्डी को हाथ में उठाया , उसे कुछ चिपचिप सा महसूस हुआ । उसने अपनी पैन्टी को उल्टा किया कि उसे एक अजीब सा गढ़ा सफेद क्रीम जैसा द्रव दिखा । ये पहले उसने कभी नहीं देखा था । ये क्या है ? उसके मन में पहला सवाल ये आया । वो समझ नहीं पा रही थी ये है क्या , कही ये उसके बुर से तो नहीं निकला , या बाल्टी में पहले से ही कुछ था जो इसमें लग गया है ।
दादी रहती तो वो झट से पूछ लेती , मगर पापा को अपनी पैन्टी वो कैसे दिखाई और फिर वो स्थान दिखाए जहां पे उसकी चुत का मुहाना रहता है । नहीं नहीं , ये नहीं कर सकती थी । उसने उस क्रीम जैसे चीज को सूंघने की कोशिश की , आह अजीब सा गमक था । ये क्या था ? वो बहुत कन्फ्यूज थी। अचानक ही उसका दिमाग ठनका । कही ये पापा ने तो कुछ नहीं किया ? हां मेरे बाद बाथरूम में वही गए थे । और उन्होंने अपने कपड़े भी इस बाल्टी में डाला है । मतलब पापा को ये पैन्टी उस बाल्टी में जरूर ही दिखा होगा । क्या ये.....नहीं....पापा का काम रस , जो मुझे दादी ने बताया था कि मर्दो का काम रस निकलता है , झरने के बाद । हां ये वही है । ओह माई गौड । क्या पापा ने मेरे पैन्टी का इस्तेमाल झरने के किए किया है ?
प्रज्ञा को अब पापा के इरादे साफ नज़र आने लगा , पापा उसे उसके दीदी का सौतन बनाना चाह रहे थे । हालांकि प्रज्ञा ,पापा और प्राची के पहली रात को घटी घटना के बाद ही पापा के साथ वो एक्स्पीरियंस करना चाहती थी , जो उसके पापा ने दीदी को कराया था । इसका जिक्र वो कई बार कर चुकी थी , जैसे हनीमून पे पापा के साथ जाने वाले बात , जब प्राची और पापा का हनीमून में जाने का प्लान बन रहा था । या फिर साली आधी घरवाली वाली बात । प्रज्ञा को सब याद आने लगा , मगर उस समय प्रज्ञा नादानी में ये सब बाते बोली रही थी ।
अब उसे पूरा पता लग गया था कि पापा उसके साथ क्या करना चाहते है । वो भी कही ना कही ये करना जरूर चाहती थी मगर अब उसे पापा का इरादा पता लगने के बाद डर लगने लगा था । साथ ही पापा के तंबू का साइज उसे डरा रहा था । उसके पेट में जैसे तितलियाँ उड़ने लगी हो , ऐसा महसूस होने लगा । उसका डर बस इसलिए था कि पापा कही उसके साथ जबरदस्ती ना कर दे । मिला जुला के प्रज्ञा चाहती थी कि पापा उसे थोड़ा टाइम दे । मगर ये काम रस सुनिश्चित कर चुका था कि पापा ने तो मन बना ही लिया है।
तभी पापा की आवाज आई : प्रज्ञा , जल्दी करो , नाश्ता भी आ गया है ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
प्रज्ञा के पास अब ये सब सोचने का टाइम नहीं था । उसका पूरा फोकस अब एग्जाम के तरफ चल गया ,जिसके लिए वो पिछले 3-4 महीनों से तैयारी कर रही थी ।
उसने जल्दी से अपने पैन्टी को भी मशीन में डाला , और उसे डिटर्जेंट डाल के चालू कर दिया और पापा के पास चली गई ।
पापा बिल्कुल ही नॉर्मल थे , एकदम पहले जैसे ही बिहेव कर रहे थे : अरे , चल अब जल्दी से नाश्ता कर , नहीं तो एंट्री नहीं मिलेगी , एग्जाम सेंटर में ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
पापा का एकदम नॉर्मल होना , प्रज्ञा को थोड़ा आश्वस्त कर चुका था कि हो सकता है पापा का मन भी उसके जैसे ही मिलन का कर रहा हो और उन्हें डर भी लग रहा हो ,या जबरदस्ती ना करना चाहते हो । जो भी हो , अब समय कम था ।
दोनों के जल्दी ही नाश्ता खत्म किया । और दोनों एग्जाम सेंटर की ओर निकल गए । एग्जाम सेंटर पहुंच के पापा ने प्रज्ञा को गेट से अंदर जाने से पहले बोला : बेटी , ऑल द बेस्ट । अच्छे से एग्जाम दे , और पास हो जाना है । तूने बहुत मेहनत की है इसके लिए । डरना नहीं , नर्वस मत होना , मै यही बाहर रहूंगा ।
प्रज्ञा : पापा एग्जाम तो ३ बजे तक चलेगा और लंच की व्यवस्था अंदर ही है मतलब ये ३ से पहले मुझे बाहर नहीं आने देंगे । आप होटल जा के आराम कीजिए , फिर ३ बजे मन हो तो आ जाइएगा ।
पापा: ह्म्म्म...ये भी ठीक कह रही यहां धूल खाने से अच्छा , AC में सो जाऊं थोड़ा । हाहाहा...चल तू जा अब ,मेरी चिंता छोड़।
प्रज्ञा अंदर चली गई । पापा थोड़े देर वहां रुक के वापस होटल चले गए और आराम फरमाने लगे । सफर में थके होने के कारण , थोड़े देर में ही उनकी आंख लग गई ।