Uffff Please Papa bas naa! Ekdam hot update.Update : 71
पापा का आंख खुला तो उनका नज़र रूम में टांगे घड़ी पे पड़ा : ओह , प्रज्ञा का एग्जाम खत्म होने ही वाला होगा ।
समय 2.45 PM हो चला था । 3 बजे प्रज्ञा का एग्जाम खत्म हो जाता । पापा उठे और जल्दी ही मुंह हाथ धो के प्रज्ञा के एग्जाम सेंटर की ओर बढ़ गए । थोड़ी देर में ही वो वहां पहुंच गए । गेट पे बहुत भीड़ लग गया था । सब लोग अपने अपने बच्चों को लेने आ गए थे । तभी अंदर से घंटी बजने की आवाज आई और अगले ही कुछ पलो बाद , अंदर से गए खुलते ही , बच्चों का हुजूम निकलने लगा । पापा की आंखें अपनी फुल सी बेटी को तलाशने में लग गई। बच्चे निकलते जा रहे थे और प्रज्ञा के लिए पापा का मन बेचैन हो रहा था । अभी तक तो निकल जाना था ।
लगभग 5 मिनट बाद जा के पापा की नजर अपने खूबसूरत बेटी पर पड़ी और इनका मन झूम उठा । प्रज्ञा की नज़रें बेसब्री से पापा को उस भीड़ में ढूंढने लगी । पापा ने ये नोटिस किया तो अपना हाथ उठा के हवा में लहरा दिया और हाथ हिलाने लगे : अरे , यहाँ, प्रज्ञा...। पापा जोर से चिल्लाये और प्रज्ञा की नजरें जिसे ढूंढ रही थी वो उसे दिख गया । उसकी चेहरे पे एक मीठी मुस्कान तैर गई । और वो जल्दी ही पापा के पास पहुंच गई ।
पापा: तब आखिर मैं मिल गया ना?
प्रज्ञा : हां पापा ।
पापा: कैसा गया एग्जाम ? अभी यहां रहना है एक सप्ताह या कल की रवानगी ? हाहाहा...
प्रज्ञा मुस्कुराते हुए : बहुत अच्छा पापा , मेरे अंदाजे से मेरा सिलेक्शन पक्का है । बस शाम को 6 बजे तक की रिज़ल्ट नेट पे आ जाएगा तब पता चलेगा । वैसे अब इंटरव्यू तक तो मै पहुंच ही जाऊंगी ।
पापा: ओके ,बहुत अच्छे , मेरी प्यारी प्रज्ञा रानी।
प्रज्ञा : हाहाहा...थैंक्स पापा ।
पापा: हस क्यों रही ?
प्रज्ञा : वो आपने मुझे प्यारी कहा ना ,इसलिए।
पापा: तो तू प्यारी नहीं है ? तू तो इतनी खूबसूरत और प्यारी है कि मैं क्या , अब तुझे प्यारी कहेंगे । तू तो मेरी प्यारी खूबसूरत बेटी है । मै सच में तुमसे बहुत प्यार करता हूं।
प्रज्ञा का दिल जोर से धड़क गया , पापा का अंतिम शब्द सुन के ।
प्रज्ञा : अच्छा अच्छा पापा , बस करिए ।
पापा: क्यों , तेरी तारीफ़ ही तो कर रहा ?
प्रज्ञा : ह्म्म्म...पापा , पर मुझे शर्म आ रही है आप ऐसे पब्लिक में मुझे प्यारी कह रहे है ।
पापा: लो इसमें शर्माने की क्या बात है , अब एक बाप अपने बेटी से प्यार भी नहीं कर सकता ।
प्रज्ञा के गाल शरम से लाल हो चुके थे ।
पापा: अच्छा ये सब छोड़, जल्दी होटल चल , वहां के रेस्टोरेंट में तुझे बढ़िया पांव भाजी खिलाता हूं । मुझे भी भूख लगी है । सो गया था तो कुछ खाया नहीं दिन में ।
प्रज्ञा : क्या पापा , अपने कुछ खाया नहीं है सबेरे के नाश्ता के बाद?
पापा: हां बोला तो सो गया था , सोते हुए कौन खाता है , हाहाहा?
प्रज्ञा : पापा , आप अपने आप पे बिल्कुल ध्यान नहीं देते , चलिए मुझे भी भूख लग रही है , लंच में मैने थोड़ा ही खाया था ।
पापा : हां चलो ।
दोनों बाप - बेटी ,होटल पहुँच गए । प्रज्ञा रूम में जा के थोड़ा कपड़े चेंज कर के फ्रेश हुई और नीचे रेस्टोरेंट में आ गई,जहां पहले ही पापा ने पांव भाजी का ऑर्डर दे दिया था । साथ ही जूस भी मंगवाया हुआ था । प्रज्ञा ने पहले सलवार कमीज पहना हुआ था । अब उसने वो बदल के , जिन्स और टॉप पहन लिया था । वो उस ड्रेस में बड़ी सेंक्सी लग रही थी और कहर ढा रही थी । पापा उसे तब तक घूरते रहे , अब तक वो गेट से अंदर आ के उनके सामने वाली कुर्सी पे ना बैठ गई । पापा प्रज्ञा की सुंदरता पे मंत्रमुग्ध हो गए थे । आज से पहले शायद उन्होंने प्रज्ञा को इस नज़र से कभी देखा नहीं था । या शायद प्रज्ञा घर पे ऐसे ड्रेस जायदा पहनती भी नहीं थी । पापा का लिंग थोड़ा तन गया । मगर टेबल की वजह से प्रज्ञा के नज़र में नहीं आया । प्रज्ञा आते ही उनके सामने की कुर्सी पर बैठ गई : वाह पापा, अपने ऑर्डर पहले ही कर दिया ? और खाना आ भी गया ।
पापा: हां ,मुझे भूख लगी थी तो समय गंवाना सही नहीं समझा बेटी ।
प्रज्ञा : हां पापा , सही किया , कितना मस्त दिख रहा है । मेरे मुंह में भी पानी आ रहा है ।
पापा: हां तो इंतजार किस बात का , शुरू कर।
और पापा और प्रज्ञा खाने लगे। दोनों लगभग वही बैठे एक घंटे बाते करते रहे ,साथ में खाते रहे । पापा प्रज्ञा के साथ प्यारी प्यारी बाते कर रहे थे । प्रज्ञा भी पापा से अब खुल चुकी थी और बेधड़क बाते कर रही थी ।
प्रज्ञा : पापा पता है , एग्जाम हॉल में एक लड़का पागलो के तरह घूरा जा रहा था ।
पापा: अरे तूने बताया क्यों नहीं उस समय मुझे , उसकी टांगे तोड़ देता मै ।
प्रज्ञा : अरे पापा , आप इतना पोजेसिव हो रहे है मेरे लिए ? हाहाहाहा...
पापा: तो , तुझे कोई गन्दी नज़रों से देखे तो मै कैसे बर्दाश्त के सकता हूँ?
प्रज्ञा एक शैतानी हंसी लिए धीरे से बुदबुदाई : और आप जो मुझे उसी नजरों से देखते है उसका गया ।
पापा: क्या , क्या कहा ? मैने तुझे ऐसे कब घूरा ?
प्रज्ञा : पापा ,अभी जो मै आ रही थी ,तो आपके नज़रे ही नहीं हट रही थी मुझ से । हाहाहाहा...
पापा: ह्म्म्म...तूने पकड़ लिया मुझे । तू लग ही इतनी सुंदर और प्यारी रही है ।
प्रज्ञा : तब उस लड़के की भी क्या गलती है , वो भी तो मुझे इसलिए घूरा होगा क्योंकि मैं उसे सुंदर लगी होऊंगी ।
पापा: नहीं , तुझे ओर कोई नहीं घूर सकता मेरे अलावा । मै पापा के साथ तेरा जीजा भी हूं और तू मेरी साली । और तुझे तो पता है ना साली क्या होती है ?
प्रज्ञा : आधी घरवाली....हाहाहा...
प्रज्ञा पापा के मजाक पे हस पड़ी।
पापा: बिल्कुल । दीदी पे पूरा अधिकार , तेरे पे आधा तो अधिकार है ही ।
प्रज्ञा : वो तो है । दीदी को तो आप ऐसे ही घूरते होंगे ?
पापा: हां उसे तो मै घूरने के अलावा भी बहुत कुछ करता हूं।
प्रज्ञा पापा का कहने का भावार्थ समझ गई और शर्म से उसके गाल लाल हो गए ।
पापा उसे शर्माता देख मुस्कुरा दिए ।
खाना खत्म हो चुका था । पापा ने बिल दिया और बाहर आ गए । प्रज्ञा ने पापा को बोला : अब क्या प्लान है पापा ?
पापा: बोल , तुझे लखनऊ घुमाया जाए ?
प्रज्ञा : ह्म्म्म...आज बहुत थक गई हु पापा , अब घूमना चलना मेरे से नहीं होगा , ऊपर से रिजल्ट की भी टेंशन है । 6 बजे आ ही जाएगा।
पापा: एक काम करते है । सबसे अच्छा एक फिल्म देख कर आते है । तूने तो अभी तक कोई फिल्म देखी भी नहीं है ना थिएटर में ? मै तुझे ले गया था एक बार जब तू १० साल की थी ।
प्रज्ञा : वाह पापा, हां इसमें तो मुझे चलना भी नहीं पड़ेगा । ये ईडिया अच्छा है । कौन सी पिक्चर देखेंगे ?
पापा: जो भी लगा होगा देख लिया जाएगा ।
प्रज्ञा खुश हो गई ।
प्रज्ञा : ठीक है पापा । नो प्रॉब्लम।
खाना खा के दोनों शहर के एक मशहूर मॉल के ओर निकल गए । एक ऑटो लिया और १० मिनट में दोनों एक बड़े मॉल के पास पहुंच गए । प्रज्ञा ने इतना बड़ा मॉल पहली बार देखा था तो बहुत खुश हुई । पापा ने ऑटो वाले को पैसे दिए और प्रज्ञा को साथ चलने का इशारा दिया । प्रज्ञा पापा के पीछे चल दी । पापा ने गेट पे खड़े गार्ड से पूछा : भाई साहब, यहाँ पिक्चर थिएटर है ना , वो कहां है ?
गार्ड ने बोला : सर , आप इन स्केलेटर वाले सीढ़ियों से चल के सबसे ऊपर वाले मंज़िल पे चले जाइए। वहां पे PVR है ।
पापा: धन्यवाद सर ।
दोनों गार्ड का बात के अनुसार अंदर थिएटर के ओर चल दिए और सबसे ऊपर जाने के बाद ही एक बड़ा सा टिकट काउंटर दिखा । पापा ने काउंटर के पास जा के अंदर बैठ आदमी से पूछा : भाई साहब , कोई शो शुरू होने वाला है क्या ? या अभी टाइम है ?
आदमी ने जवाब दिया : सर , अभी 6:15 से , अगली पिक्चर शुरू होगी ।
पापा: कौन सी?
पापा को उस आदमी ने घूर के देखा । वो इसलिए कि उस टिकट काउंटर पे जनलोग अक्सर टिकट लेने आते थे , उन्हें पता होता था कि कौन सी पिक्चर देखने वो आए है । मगर पापा तो अंधेरे में तीर मारने आ गए थे । फिर उस आदमी ने आजु बाजू देखा , तो उसे जींस टॉप में प्रज्ञा दिखी । वो माजरा समझ गया । क्या है कि अक्सर वैसे लोग ही बिना फिल्म का नाम जाने सिनेमा देखने आते है , जिन्हें सिनेमा से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सी है । वो बस अपने पार्टनर के साथ हॉल के अंदर चुम्मा चाटी करने आते है ।
उसने बोला : सर अगली मूवी , आपके ही मतलब की है , पुरानी मूवी है ,मगर रिरिलीज़ हुई है । Hate story 3 । एकदम गरम ।
पापा: अच्छा , ठीक है ।
और इतना सुनते ही पापा के कुछ बोलने से पहले ही उसने एकदम पीछे की कॉर्नर वाली सीट की २ टिकटे काट के पापा को थमा दिया।
और बोला: भाई साहब , आपके पसंद के मुताबिक सीट दे दिया है , पिक्चर बहुत गरम है , ओर रिरिलीज़ के कारण थियेटर पूरी खाली ही है । कुछ इक्का दुक्का लोगों ने ही अब तक टिकट ली है ।
आप मजे करिए आराम से ।
पापा : आपको कैसे पता चला कि मुझे २ टिकट चाहिए थे ?
आदमी : अरे साहब , तजुर्बा है मेरा ,कोई सिनेमा का दीवाना , बिना सिनेमा के बारे ने जाने टिकट लेने थोड़ी आता है। आप को तो बस कोई भी सिनेमा देखना है, यानी सिनेमा कोई भी हो आपका काम हो जाए बस , है ना ? और उधर आपकी माशूका भी दिख रही है ,जो खड़ी आपका इंतजार कर रही है ।
पापा जरा झेप गए , थोड़े घबड़ा भी गए मगर वो अब उसे पलट के ये नहीं बोलना चाहते थे कि ये मेरी बेटी है , इसलिए उन्होंने आदमी के बात को काटा नहीं और जैसा वो समझ रहा था , वैसा ही रहने दिया सिचुएशन को । और बोला : अरे थैंक्यू भाई साहब ।
आदमी बोला : सर वैसे एक बात बोलूं ?
पापा टिकट अपने पॉकेट में रखते हुए : हां बोलिए ।
आदमी : सर , आपकी पसंद बड़ी मस्त है । एकदम ताजा लगती है । बिल्कुल खिज्जा माल । कहा पटाया इसे ?
पापा एकदम से सकपका गए : अरे भाई साहब क्या बोल रहे है आप।
आदमी : अरे सर, तजुर्बा है , सब समझते है । हमारे यहां आपके ही तरह एक कॉलेज के टीचर आते है , बिल्कुल आप के उमर के , रेग्युलर आते है , और अक्सर जब की फ्लॉप फिल्म लगती है , और हर बारी एक नए , 18,19,20 साल की ,ताजा माल के साथ । सब उनकी स्टूडेंट होती है । सोचिये , क्या मज़ेदार लाइफ़ , पढ़ाते पढ़ाते, लड़कियों को सेक्स का ज्ञान भी दे देते है उनका सील तोड़ के ।
पापा: अच्छा ?
आदमी : हां और नहीं तो क्या , एक मूवी में पूरा थ्रेटर खाली था , उस दिन , उन्हें मैने एकदम कॉर्नर वाली सीट दिया था । और उन्होंने उस लड़की का इसी हाल में सील तोड़ दिया । उन्होंने हो मुझे बताया , रेगुलर है तो अच्छी जान पहचान है हमारी तो ये अब बाते वो मुझे बता देते है , बारे रंगीन मिजाज आदमी है । बाद में मुझे उस गद्दादे कुर्सी की सफाई करवानी पड़ी ।
पापा : अरे आपको गलत फहमी हुई है , मै ऐसा कुछ नहीं कर रहा , मेरी साली है ।
आदमी : अच्छा साली , आधी घरवाली , हाहाहा...समझा सर , चलिए मजे कीजिए ।
उस आदमी को पक्का पता था कि पापा प्रज्ञा के साथ कुछ ना कुछ तो करेंगे ही । ऊपर से फिल्म भी गरमा गरम सीन से भरा हुआ ।
अभी पिक्चर शुरू होने में आधे घंटे थे । पापा ने प्रज्ञा से कहा : बेटी पेट तो भरा है , कुछ खरीदेगी यह माल से तो देख ले चल ।
प्रज्ञा : पापा , नहीं अभी मै शॉपिंग के मूड में नहीं ही पापा , मुझे थोड़ी टेंशन हो रहीं है। 6 बजे रिजल्ट आने है आज एक एग्जाम का , ऑनलाइन एग्जाम हुआ था तो वो आज ही रिजल्ट घोषित कर देंगे । 15 मिनट बचे है । मुझे घबराहट हो रही है पापा ।
पापा ने प्रज्ञा का हाथ पाकर लिया : अरे घबराहट क्यों बेटी , तू अबल्ल आएगी देख लेना ।
प्रज्ञा : ह्म्म्म...पापा आपके मुंह में घी सक्कर।
पापा: चल उधर बैठते है फिर , वही बैठ के तेरा रिजल्ट देख लेंगे ।
पापा ने प्रज्ञा को सामने लगे वेटिंग हाल की कुर्सियां के तरफ इसरा कर के कहा ।
प्रज्ञा पापा के पीछे उधर चल दी और दोनों बैठ गए । पापा के बाजू की कुर्सी पे प्रज्ञा बैठी थी और बार बार कॉलेज के साइट को रिजल्ट के लिए चेक कर रही थी ।
5.55 में ही साइट पे रिजल्ट नोटिफिकेशन आ गया । प्रज्ञा एकदम एक्साइड हो गई : पापा , देखो , जस्ट रिजल्ट आ गया है ।
पापा: अच्छा 5 मिनट पहले ही , देख जरा ।
प्रज्ञा ने झट से रिजल्ट का टैब खोला तो वह रोल नंबर और नाम डालने का ऑप्शन था । प्रज्ञा ने बड़े ध्यान से दोनों चीज़ भर के ओके बटन में दबा दिया । उसका दिल जोर से धड़क रहा था । उसने एक हाथ से मोबाइल पकड़ा हुआ था , ओर दूसरे से पापा का हाथ। उसका हाथ तक थोड़ा थोड़ा काँप रहा था , नर्वसनेस से ।
प्रज्ञा का मार्कशीट निकल के आ गया । उसने रिजल्ट चेक किया, सब सब्जेक्ट में अच्छे मार्क्स, और अंत में सिलेक्शन स्टेटस में ग्रीन कलर में लिखा हुआ था , "pass, eligible for next round (interview) ".
प्रज्ञा खुशी से झूम उठी , वो अपने सीट से उठी और पापा को कस के गले लगा लिया , ओह पापा, मै पास हो गई , अब बस इंटरव्यू, वो तो मै निकल ही लूंगी ।
पापा ने आजु बाजू नज़र फिराया ,वहां कोई भी नहीं था । पापा ने प्रज्ञा को आलिंगन में भर लिया और गाल पे किस करते हुए बोले , वह मेरी प्यारी और तेज बेटी , तुझे तो पास होना ही था इतनी मेहनत जो कि थी तूने । पापा को प्राची से संतरे ,अपने सीने पे रगड़ खाते महसूस हो गया । प्रज्ञा खुशी के मारे पापा का किस नज़र अंदाज के दी , जैसे कोई बड़ी बात नहीं हो और पापा तो बाप बेटी वाले प्यार में किस कर दिया । मगर पापा के इरादे अब प्रज्ञा को लेके बदल ही चुके थे ।
प्रज्ञा पापा से अलग हुई ओर बोली : पापा , दादी और दीदी को बता देती हु ।
पापा: हां बता दे । और ये भी बता देना कि कल का टिकट अब कैंसिल के दूंगा मै , और अगले सोमवार वाला टिकट हमारे पास है , तुम्हारे इंटरव्यू के बाद अब उसी दिन हम वापस आ पाएंगे ।
प्रज्ञा : ठीक है पापा।
प्रज्ञा ने कॉल लगाया तो फोन दादी ने उठाया : हेलो , प्रज्ञा बेटी , कैसी है ? तेरा पापा कैसा है ?
प्रज्ञा : मै ठीक हु दादी , पापा भी अच्छे है ।
दादी : अच्छा , समय से पहुंच गए थे ना दोनों , मैने फोन नहीं किया कि पता नहीं ,रस्ते में होगे तुम लोग, फिर रहने का ठिकाना ढूंढो , फिर एग्जाम में , काफी भागा दौरी थी ना। एग्जाम कैसा गया तेरा ?
प्रज्ञा : हां दादी एकदम सही टाइम से पहुंच गए थे । एग्जाम भी बहुत अच्छा हुआ , और अच्छा होटल मिल गया है दादी । उसी बारे में कॉल किया है आपको ।
दादी : अच्छा बता बता !
प्रज्ञा : दादी , रिज़ल्ट आ गया है ,एग्जाम का ।
दादी : अरे वाह इतनी जल्दी ? क्या हुआ रिजल्ट ?
प्रज्ञा : दादी ने पास हो गई , अगले राउंड के लिए सेलेक्ट भी हो गई ।
दादी : अरे वाह बहुत अच्छी खबर सुनाया बेटी , बहुत बहुत आशीर्वाद, ऐसे ही आगे बढ़ो मेरी बिटिया ।
प्रज्ञा : थैंक्यू दादी ।
दादी : इंटरव्यू अगले रविवार को है ना?
प्रज्ञा : हां दादी , पापा ने बोला है कि वो कल वाली टिकट कैंसिल के रहे है । और अगली वाली टिकट इस्तेमाल करेंगे , अगले सोमवार को , मेरे इंटरव्यू के बाद ।
दादी का दिल थोड़ा सा घबराहट से भर गया । वो चाहती थी कि जितना जल्दी हो सके , प्रज्ञा घर आ जाए । क्योंकि दादी ने पापा की एक बेटी को खुद से पापा के सामने पड़ोस दिया था । मतलब पापा अब अपने बेटी के संग सेक्स को भी गलत नहीं मानते ,क्योंकि उसने दादी की रजामंदी थी । और दादी को डर था कि कही पापा प्रज्ञा संग भी इन 8 दिनों के दौरान कुछ ऐसा वैसा ना के दे । उनको पापा में यकीन कम था , क्योंकि जब उनका बेटा, अपने एक बेटी को चोद सकता है तो दूसरे बेटी को क्यों नहीं ?
पर ये विश्वास भी था कि वो प्राची को धोखा तो नहीं देगा , क्योंकि प्राची उसके बच्चे की मां बन गई है।
दादी ने प्रज्ञा से बोला : अच्छा बेटा , ठीक है , आराम से रहना, और जायदा बाहर मत घूमना और पापा के ज़्यादा खर्चे भी ना करना ।
प्रज्ञा : ठीक है दादी ।
दादी : अच्छा , होटल अच्छा तो हैं ना।
प्रज्ञा : अरे दादी पापा ने मस्त होटल लिया है । एकदम 5 स्टार जैसा बहुत कि खूबसूरत ।
दादी : अच्छा , तब तो दो कमरे का बहुत ज्यादा पैसे लगा होगा ।
दादी इस सवाल से जानना चाहती थी कि कही प्रज्ञा और पापा का कमरा एक तो नहीं ।
प्रज्ञा दादी का प्रश्न भाप गई , और वो अपने पापा को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी कि उसके पापा ने एक ही कमरा लिया है , जिसमें वो दोनों एक कपल के पहचान से रह रहे है । दादी खामखा सक कर बैठती । पापा भी दादी की बाते सुन रहे थे , उन्हें लगा कि अब गए एकदम । उन्होंने सोचा : मां मेरा इरादा समझ जाएगी, की मैने एक कमरा ही क्यों लिया है । अगर प्रज्ञा ने सब सही बता दिया तो घर में सामत आ जाएगी । प्राची क्या सोचेगी । पापा डर गए थे ।
मगर प्रज्ञा दादी से ये नहीं बताना चाहती थी कि पापा और वो एक ही कमरा और बाथरूम इस्तेमाल कर रहे है ।
उसने बोला : हां दादी , पापा ने २ कमरे लिए है , एक मेरा और एक अपना , मेरा कमरा भी पापा के बाजू वाले कमरे में ही है दादी । पापा ने बोला है कि उनके बजट में ही दोनों कमरे मिल गया है ।
पापा एकदम से चौंक गए : क्या , प्रज्ञा ने मेरे लिए झूठ बोला , मां से झूठ बोल दिया , वाह मेरी बेटी , आज तूने बचा लिया , मेरा गहर टूटने से । प्राची को अगर पता चलता ,तो वो जरूर सक करती , क्योंकि कई बार उसको चोदते समय मैने प्रज्ञा को चोदने का जिक्र भी मजाक में किया है । वाह मेरी प्रज्ञा , मान गए तुझे , पापा को बचा रहीं है , अपने किसी बॉयफ्रेंड के जैसे । मतलब प्रज्ञा के दिल में मेरे लिए कुछ तो है , जो वो अब से गुप्त रखना चाहती है ।
दादी : ठीक है बेटी , अभी कहा हो ? होटल पे आ गई ?
प्रज्ञा ने फिर ये नहीं बताया कि वो पापा के साथ फिल्म देखने आई है । इससे भी, दादी को हो सकता है सक होता ,कि ये बाप बेटी होके लेट नाइट वाली पिक्चर देखने गए है । फिर पापा का ही इमेज घर में खराब होता ।
प्रज्ञा : हां दादी , वो बस हम थोड़ा बाजार घूम रहे है और कुछ खाके वापस चले जाएंगे । पापा तो नहीं जाने की जिद कर रहे थे ,मैने ही उन्हें खींच के लाया है ।
पापा मन में : अरे वाह, प्रज्ञा तो कमाल निकली , मुझे किस तरह से बचा रही है । वाह मेरी बेटी । ये तो एकदम सीधा सिग्नल है कि तुझे भी मै भा गया हूं। और तू हमारे बीच की ये रिश्ते को दुनिया से छुपा के रखना चाहती है ।
दादी को सब सामान्य लगा : ठीक है बेटी , पापा को ज्यादा परेशान मत कर , थका होगा सफर का । तू भी तो थकी होगी दिन भर । जल्दी खा के वापस जा और अच्छे से सो जाना । और कमरे का दरवाजा अच्छे से लॉक कर लेना अपने । कुछ नहीं डर लगे तो बगल वाले कमरे में पापा तो रहेगा ही तेरा , उसको बताना । कही जाना ही तो उसके साथ ही जाना ।
दादी को प्रज्ञा के जवाब से ये तसल्ली हो गई थी कि वो खामखा ही पापा पे शक कर रही थी । पापा तो प्राची के पति है । और उसके लिए प्रज्ञा अभी भी उसकी बेटी है । दादी ने सोचा : मै भी खामखा ही सक के लिए अपने बेटे पे । प्रज्ञा एकदम सुरक्षित है उसके साथ ।
इधर पापा के बांछे खिल गए थे । उनके बेटी ने उन्हें , बदनाम नहीं होने दिया , उनके प्रति दादी और प्राची के नज़रों में सक की कोई गुंजाईश नहीं छोड़ी। पापा खुश हो गए ।
पापा: वाह प्रज्ञा , दादी से झूठ ?
प्रज्ञा : तो , क्या बोलती ,कि पापा के साथ उनके कमरे में रह रही हूं? आपको तो दादी का नेचर अच्छे से पता है । वो आसमान सर पे ले लेती , पता नहीं , हमारे बारे में क्या क्या सोचती रहती हर समय ।
पापा: क्या सोचती ?
प्रज्ञा : पापा.....आपको पता नहीं है ? दादी को क्या लगता , अगर उनको पता लग जाता कि मैं आपके कमरे में , एक कपल बन के रह रही हु , रेजिस्ट्रेशन के हिसाब से ?
पापा: ह्म्म्म..नहीं पता , सच में , क्या सोचती दादी ?
पापा प्रज्ञा के साथ थोड़ी मस्ती के मूड में आ गए थे ।
प्रज्ञा : वो सोचती कि जो आपने दीदी के साथ किया अपने कमरे में सुला के , वो मेरे साथ भी के रहे होंगे ।
पापा: अच्छा ....ऐसा क्या किया तेरे दीदी को मैने अपने कमरे ने सुला के ।
प्रज्ञा : पापा मुंह मत खुलवाये । आपकी और दीदी की सुगहरात की रात याद है मुझे , दीदी कितना चीख रही थी । और उसके बाद दीदी की १० दिनों तक क्या हालत थी , दादी ने सब मुझे बताया है ।
पापा समझ गए कि दादी ने प्रज्ञा को अच्छे से जब कुछ बता दिया है और प्रज्ञा को जाल में फसना उतना आसान भी नहीं जितना वो सोच रहे थे । मगर अभी के कॉल के बाद वो १००% कन्फर्म हो गए थे कि प्रज्ञा , उनके और अपने रिश्ते के बारे में किसी को नहीं बताएगी , अगर इन 8 दिनों में उन दोनों का ऐसा रिश्ता बन गया तो ।
तभी पुराना शो खत्म हो गया और नया शो के लिए ओडियनस अंदर हॉल में जाने लगे , पापा ने देखा बहुत कम लोग ही अंदर क्लजा रहे थे । उसमें 2-4 तो कपल ही थे । बस ।
पापा ने प्रज्ञा को बोला : चलो बेटी , शो शुरू होने वाला है , 6:13 ही गया ।
प्रज्ञा : ओह ,ओके पापा, कौन सी मूवी है ?
पापा: अरे बेटी कोई hate story 3 नाम की मूवी है । टिकट वाले ने बोला अच्छी है ।
प्रज्ञा : वाह ये फिर से रिलीज़ हुआ है क्या पापा , इसके गाने मैने सुन रखे है , बहुत प्यारे है ।
पापा : हां , आज कल का फ़ैशन है , पुराने फिल्मों को रिलीज़ करना । ताकि ऑडियंस फिर से उसका मजा ले पाए ।
प्रज्ञा : अच्छा । चलिए पापा , अच्छा हुआ मैने अभी तक ये पिक्चर नहीं देखो , और आज हॉल में देख लूंगी । गाने तो बड़े अच्छे है । मूवी भी मस्त होगी ।
दोनों अंदर चले गए और पापा ने सीट ढूंढा , एकदम पीछे कॉर्नर के दो सोफा वाला रेक्लाइनर सीट था । प्रज्ञा ऐसे सिनेमा घर में पहली बार आई थी । उसे ये सब बेहतरीन लग रहा था ।
दोनों बैठ गए । प्रज्ञा ने पापा से पूछा : पापा पूरा हॉल खाली लग रहा है । कोई नहीं आया क्या ?
पापा: अब पुरानी फिल्म को फिर से लगाएंगे तो लोग उतना थोड़े ही आयेंगे ।
प्रज्ञा ने नोटिस किया कि उसके और पापा के अलावा जो लोग भी उस हॉल में थे अब कपल लग रहे थे और सब कपल जोड़ी में दूर दूर वाली सीटों पे बैठे थे । की वो अगर एक दूसरे के साथ अंधेरे में कुछ करे तो किसी को पता ना चले । फिर प्रज्ञा ने अचानक ही अपने सीट पे ध्यान दिया । अरे उसका सीट भी तो एकदम कोने में है । पापा के साथ । जहां शायद ही किसी की नजर पड़ेगी । वो आगे आने पल को लेके थोड़ी नर्वस थी कि कही पापा का इरादा कुछ ऐसा वैसा था नहीं है ना।
उसने पापा से पूछा : पापा , हमारी सीट इतने कॉर्नर में क्यों है ।
पापा: पता नहीं बेटी , उस टिकट पे बैठे आदमी ने यही टिकट काट दिया । बोला कि पीछे से सबसे अच्छा दिखता है पर्दा।
प्रज्ञा को ये विश्वास हो गया कि पापा ने खुद बोल के ये टिकट नहीं लिया है । वो थोड़ा रिलेक्स हो गई ।
सिनेमा शुरू हुआ , और जल्दी ही एकदम से गर्मी बढ़ने लगा ।
प्रज्ञा ने करण सिंह ग्रोवर को देखा और पहचान लिया । प्रज्ञा : पापा ये बिपाशा बसु का पति है ।
पापा: अच्छा , मै नहीं जानता था ।
पापा को भी मूवी पसंद आने लगी , एक से एक हॉट सीन , हॉट माल हीरोइन, डेजी शाह के बड़े बड़े मम्में । वही जरीन खान के गुदाज़ चूतड़, चुचि और बिकिनी सीन , उफ़ , पापा को सब मदहोश करते जा रहे थे । हॉल एकदम अंधेरा था । फिल्म में करण सिंह ग्रोवर, शर्मन जोशी के पत्नी बनी जरीन खान को एक रात अपने साथ सुलाने की बात करता है । उसे चोदने के लिए मांगता है। बदले में उसके बिज़नेस को बचाने की बात । फिल्म एकदम गरम गरम सीन से भरा था । प्रज्ञा के सब देख देख के , अंधेरे में भी बैठी , शर्मा रही थी । उसने गौर से नोटिस किया तो उसके कुछ ही दूरी पे बैठ एक कपल ने एक दूसरे के होठों को चुसना शुरू कर दिया है । अंधेरे के कारण कुछ साफ नहीं दिख रहा था । तभी एक गाना आता है , कैसे कहीं इश्क़ में तेरे कितना ही बेताब मैं.....आंखों से आंखे मिला के चुरालु तेरे ख़्वाब मैं...... , इस गाने के दौरान , जरीन खान के साथ करण सिंह ग्रोवर धीरे धीरे फेयरप्ले करता है और चोदता है ।
इस गाने के दौरान, हॉल के अंदर से ही , अंधेरे में से , एक लड़की के चीखने की आवाज आई । आह्ह्ह्ह....बस बस.....। गाना इतना तेज होने के बावजूद भी वहां मौजूद सबको ये आवाज सुनाई दे दी , पापा और प्रज्ञा को भी । वही एक आदमी ने सीटी बजते हुए कहा, अरे धीरे धीरे राजा , ऐसे मत हुमच के करो... और सब हस दिए ।
प्रज्ञा अभी भी सोच में डूबी थी , कि ये हुआ क्या?
पापा तो समझ गए थे कि किसी ने हॉल में ही चुदाई चालु कर दी है। मिला जुला के पूरा हॉल रोमांटिक हो गया था । सब कपल आपस में लगे थे और उस मादक पर्यावरण में एक बाप और उसकी 18 साल की जवान और अनचुदी बेटी भी वहां बैठे थे । पापा ने प्रज्ञा की तरफ देखा , वो गौर से पर्दे के तरफ देख रही थी , किसिंग सीन एकदम दिलचस्पी से । पापा ने धीरे से अपना एक हाथ प्रज्ञा के हाथ में रख दिया । प्रज्ञा एकदम से कांप गई , फिर पाया कि पापा ने उसके हाथ पे अपना हाथ रखा है तो वो बिना कुछ बोले ही फिल्म देखने लगी ।
पापा धीरे धीरे प्रज्ञा के हाथ को सहलाने लगे और वो भी इसबात को नोटिस कर रही थी मगर कुछ बोल नहीं रही थी । पापा ने प्रज्ञा के कान के पास अपना मुंह ले जा के पूछा : क्यों मेरी रानी , कैसा लग रहा है फिल्म ।
प्रज्ञा ने भी आहिस्ते से जवाब दिया : अच्छी है पापा , वो वाले सीन थीरे जायदा है ।
पापा : कौन से वाले सीन मेरी बाबू ?
प्रज्ञा : रोमांटिक वाले पापा।
पापा : तुम्हे पसंद आ रहे है ?
प्रज्ञा : ह्म्म्मम्म...किसे नहीं आते पापा।
पापा समझ गई लोहा गरम हो गया है , और वो अब हथौड़ा चला सकते है ।
उन्होंने अपना हाथ प्रज्ञा के हाथ से हटा के उसके कंधे पे रख दिया और प्रज्ञा को हल्के से अपनी तरफ खींचा । जिसे प्रज्ञा ने अपना सर पापा के कंधे पे रख के टिका दिया । पापा के बदन में एक करेंट सा दौर गया । जवान छोटी बेटी को अपने कंधे पर सर टिकाते ही उनका हिम्मत थोड़ा बढ़ गया । उनका लन्ड 90° पे खड़ा हो गया था । पापा धीरे धीरे , अपना टाइम लेते हुए , प्रज्ञा के कंधों को , बाँहो को , और कभी कभी गर्दन को सहला रहे थे । पापा नज़रे झुका के प्रज्ञा को बीच बीच में देखते थे । वो कभी कभी स्क्रीन पे देखती रहती तो कभी उसकी आंखे बंद पाते वो । पापा समझ गए कि प्रज्ञा उनके कंधों पे एकदम रिलेक्स हो गई है और जोड़िया भी रही है । वो पापा का छुअन अपने शरीर पे महसूस कर रही है आंखे बंद कर के , यानी उसका योनि गरम पानी छोड़ने लगा होगा ।
पापा ने थोड़ा हाथ तेज तेज सहलाने लगे और एक बार बांहो के नीचे से हाथ को सरका के प्रज्ञा के साइड चुचि को टच के दिया । प्रज्ञा थोड़ा सा हिली पर कंधे से अपना सर नहीं उठाया । पापा ने सोचा : जरूर मेरी अनचुदी बेटी को ये सब अच्छा लग रहा है , नहीं तो अब तक ये मेरे इस तरह से सहलाने का विरोध कर चुकी होती ।
पापा ने मौका पे चौका मारने का सोचा और कदम आगे बढ़ाने का फैसला लिया । उन्होंने अपने हाथ को धीरे धीरे सरकाते हुए प्रज्ञा के संतरे जैसे छोटे गोलाई वाले चुचि पे एक बार पूरी तरह से हाथ फेरा । प्रज्ञा थोड़ा थरथरई फिर कोई विरोध की प्रतिक्रिया नहीं । पापा ने ये जरूर पढ़ लिया था कि प्रज्ञा का मूड अभी बहुत हॉर्नी और मादक हो चुका है और घुप अंधेरा के कारण वो जो हो रहा है उसे बिना मुझ से नज़ारे मिलाये होने दे रही है ।
पापा ने थोड़े थोड़े अंतराल पे प्रज्ञा के गोलाई पे हाथ फिरा देते और प्रज्ञा कोई विरोध नहीं करती । पापा का जोश बढ़ा और उन्होंने अब मन बना लिया था प्रज्ञा के चुचियो को अच्छे से दबाने का। उन्होंने प्रज्ञा के चुचि को अपने हथेली में एक बार में ही भर लिया । प्रज्ञा थोड़ी हिली डुली और अपना एक हाथ पापा के पैर पे रख दिया उनके जांघो पे । पापा के हाथ में अब अपने 18 साल की जवान बेटी की चुचि आ चुकी थी , कोई विरोध नहीं , कोई रोक टोक नहीं । पापा अपने उंगलियों का दबाव प्रज्ञा के मुलायम गोलाई पे बनाने लगे । प्रज्ञा ने टॉप पहना हुआ था , उसके नीचे एक सॉफ्ट ब्रा। पापा चुचि का पूरा शेप अपने हाथों से महसूस के पा रही थी ।
पापा एकदम धीरे धीरे , फिर थोड़ा जोर , भी ओर जोर लगा लगा के अपने बेटी का चुचि मिजने लगे । पापा ने अपनी गर्दन झुका के देखा । प्रज्ञा के मुंह पे मादक भाव आ चुका था और उसकी आंखे बंद थी । उसे एकदम नया एहसास सा हो रहा था । अभी भी उसका सर पापा के कंधे पर ही थी । वही पापा का लिंग एकदम टाइट हो गया था ।
पापा ने अब अपना दुसरा हाथ बढ़ा के , प्रज्ञा के दूसरी चुचि भी अपने गिरफ़्त में ले लिए । प्रज्ञा पापा को कुछ बोल ही नहीं रही थी । या तो वो थोड़ा सौक हो गई थी या फिर उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था ।
मूवी बढ़ती जा रही थी वही पापा का हाथ भी बड़ी तरीके से प्रज्ञा के चुचियो का मसाज कर रहा था । कभी कभी एकदम कस के, बेरहमी से पापा प्रज्ञा के चुचि को दबा भी देते थे । प्रज्ञा एक सीईईई....कि आवाज निकल देती थी । ये सिलसिला , मूवी के क्लाइमैक्स तक चलता ही रहा ।
अचानक ही पापा ने नोटिस किया प्रज्ञा ने अपना सर उन के कंधे से उठा लिया और एकदम से झटके खाने लगी । इसी बीच प्रज्ञा ने पापा के हाथ को कस के दबोचा हुआ था । झटका लगभग 3-4 बार लगा और प्रज्ञा के हाथ की पकड़ पापा के बांहों पे ढीले पर गई । मतलब साफ था । प्रज्ञा पापा के चुचि भींच देने मात्र से ही झड़ गई । उधर फिल्म भी अंतिम चरण में था । थोड़े देर में लाइट जल जाता । पापा का हाथ मगर अभी भी मख मली, मुलायम , संतरे जैसे चुचि पे था ।
तभी प्रज्ञा ने पापा का हाथ को धीरे से , अपने हाथ से , अपने चुचि पर से हटा दिया । प्रज्ञा : प्लीज़ पापा , बस ना।
पापा थोड़े निराश हो गए , कि शायद आज प्रज्ञा के चुचि को वो नंगी कर के भी , यानी टॉप के अंदर हाथ डाल के भी छू सकते थे । मगर खुश भी थे कि बेटी ने जायदा विरोध नहीं दिखाया , यानी जल्दी ही काम बनाने की उम्मीद। पापा ने अपना हाथ प्रज्ञा के सीने से हटा लिया । अब प्रज्ञा की चुचि पापा के गिरफ्त से आजाद हो चुकी है । पापा का लिंग थोड़े देर में ही नॉर्मल हो गया ।
तभी हॉल की बत्ती जल गई ।
Nice comment bhai...love ur comment.Aaah kya mast moment h baap beti ka so excited, horny, lusty. Awesome story going, incredible writing skills![]()
Jarur pighlegiAb Papa apna khel suru karenge. Dekhte hain pragya kitni jaldi pighalti hai.
All is set for Pragya's initiation into sex.
Haan prgya sang papa mze lene ke liye utable ho rhe haiGood going .Samaa bandh raha hai.
Nice update....Update 73
पापा बेदर्दी से प्रज्ञा को चोदे जा रहे थे , कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी , प्रज्ञा चिल्लाती जा रही थी : नहीं पापा , आह छोड़ो पापा , मत करिए दर्द हो रहा है ।
पापा: चुप मादरचोद, चुप चाप लन्ड ले मेरा । बहुत मज़ा आएगा ।
पापा प्रज्ञा के चुत पे उछल उछल के धक्के लगा रहे थे । प्रज्ञा का हर धक्के के साथ मूत निकल जा रहा था । उनकी आंखें ऊपर चढ़ गई थी और हाथ से पापा को हटाने की नाकाम कोशिश कर रही थी । पसीने पसीने । पापा ने गांड का ऐम लगा के लिंग गांड में डाल दिया और फुल स्पीड में चोदने लगे ।
फिर चुत में । और ऐसा ही रीपीट होता रहा ।
कभी गांड तो कभी चुत। प्रज्ञा का मूत निकलने से पापा पूरे भीग गए थे , बिस्तर भी गिला ही गया था ।
प्रज्ञा रोई जा रही थी : आह ,पापा , दर्द हो रहा है , छोड़िए । दरिन्दे की तरह मुझ पे टूट परे है । मत करिए पापा । आह....अपने बेटी पे रहम खाइये पापा।
पापा: चुप कर साली , सिनेमा हॉल में तो मजे से चुचि मिझवा रही थी । चुप चाप लौड़ा का चोट सह मादरचोद और रोना धोना बंद कर । पूरे मज़े ले । आह...बारी कमसिन कली है तू । मज़ा आ गया तेरे टाइट बुर में लन्ड पेस के ।
चुदाई उफान में आ गया और छलछला के पापा ने अपना गरम पानी प्रज्ञा के चुत में भर दिया । प्रज्ञा भी चीख पड़ी और पापा एकदम शांत हो गए ।
पापा : अब क्या चीख रही है । अब तो मेरा बच्चा तेरे कोख मे ठहरने से कोई नहीं रोक सकता , मेरी रांड बेटी ।
अचानक ही पापा को गीला गीला महसूस हुआ और उनकी आंखें खुल गई ।
वो पसीने से लथपथ थे और देखा कि पजामे वीर्य गिरने से आगे से थोड़ा गीला हो गया है । बगल में प्रज्ञा आराम से सो रही है ।यानी पापा का प्रज्ञा से मिलन सपने में हो रहा था ।
पापा एकदम शरम से लाल हो गए । उन्हें आज पहली बार स्वपन दोष हुआ था । मतलब जब किसी इंसान ने लंबे समय से सेक्स ना किया हो और उसके वीर्य बनाने की क्षमता के अनुसार शरीर से वीर्य ना निकले , तो ऐसे ही सोते समय वीर्य अपने आप ही कोई सेक्सी सपना देखते हुए , निकल जाता है । वही पापा के साथ हुआ था । असल में उन्होंने प्रज्ञा को हाथ भी नहीं लगाया था मगर सपने में प्रज्ञा को अभी अभी जी भर के चोद दिया था ।
पापा चुपचाप उठे और बाथरूम में जा के पेशाब किया और अपने आप को साफ किया , पजामा बदला और चड्डी में आ गए । फिर पानी पिया , तब जा के उनका मन शांत हुआ । पानी पीने के बाद उनका नज़र प्रज्ञा पे पड़ी । कितनी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा सोती हुई। पापा ने घड़ी पे नज़र डाली । सुबह के 4:30 बजने को आ गए थे ।
प्रज्ञा अभी भी गहरी नींद में जान पड़ती थी । पापा उसके बगल में आ के वापस लेट गए।
पापा ऊपर छत को देखने लगे और सोचने लगे : ये क्या हो गया था मुझे , मै सपने में अपनी ही बेटी का रे प कर रहा था ? प्रज्ञा कैसे चीखे निकल के रो रही थी , और मै कमीने की तरह ,बेदर्दी से उसे छोड़ रहा था , गलिया भी दे रहा था । लानत है मुझपे , मै अपनी प्यारी और फूल सी बेटी के साथ ऐसा कभी नहीं कर सकता ।
पापा सपने के बारे में सोच रहे थे , सपना भयावह था , मगर उस सपने में एक पाप ओर बेटी का मिलन भी तो था । और ये सपना प्रमाण था कि प्रज्ञा के साथ वो किस रिश्ते की शुरुआत करना चाहते थे । कहते है सुबह का सपना सच होता है । तो क्या प्रज्ञा की चुत पे अब मेरा हक होगा । क्या प्रज्ञा भी प्राची के तरह मुझे प्यार करने देगी ।
प्रज्ञा बेहद सुंदर थी ,
एकदम चिकनी बदन की मालिक , पापा प्रज्ञा के संग अब अपना रिश्ता बनाने का मन बना चुके थे ।
पापा ने करवट बदली और प्रज्ञा के तरफ देखने लगे। प्रज्ञा का पीठ पापा के तरफ था और मुंह उल्टा साइड । पापा प्रज्ञा को देखते रहे, और रात की हुई बातों को सोचने लगे । प्रज्ञा अभी सुकून से सो रही थी , उसका पीठ उसके हर गहरे सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी । पापा ने सिर उठा के प्रज्ञा का चेहरा देखा । गोरे चेहरे पे बाल बिखरे हुए थे । चांद जैसी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा ।
पापा सोच रहे थे : कास रात को मै प्रज्ञा की नाराज़ ना करता तो शायद प्रज्ञा मेरी बाहों में लिपट के सोती । मैने गलती करी । प्रज्ञा मेरा साथ चाहती है । उसे मै पसंद हु , ये बात तो तय है । बस बेचारी हिम्मत नहीं कर पा रहीं है । मै कल उसे लाइन दे रहा था । और वो सारे सवाल पूछे जा रही थी । मतलब वो चाहती थी कि वो सारे आगे होने वाले घटनाक्रम के बारे में मुझ से पूछ ले , ताकि आगे उसे मुझ से धोखा ना मिले । वो शायद आश्वत हों चाहती थी कि मैं उसका साथ दूंगा या नहीं , मेरी एक बीवी के रहते मै उसका साथ किस तरह से दूंगा । अगर मै कल रात उसे सारे सही जवाब दे देता तो शायद वो मेरे प्यार का इजहार मान जाती या खुद इजहार कर देती । मै कितना बुधु हूं,बेटी का दिल ना पढ़ सका और उसको मजाक का नाम दे दिया और प्रज्ञा का दिल तोड़ दिया । नहीं आज मै सब ठीक कर दूंगा । आप प्रज्ञा मेरी होगी । उसके सारे गिले शिकवे दूर करना ही होगा मुझे । आधी घरवाली नहीं , पूरी घरवाली बनाना है प्रज्ञा की मुझे । प्राची को भी समय आने पे सब बता दूंगा । और वो शायद मुझे समझ जाएगी । मै उसे भी धोखे में नहीं रखूंगा ।
पापा ने अपने हाथ बढ़ा के प्रज्ञा के चेहरे से उसकी बाल के लटों को आराम से हटाया । वो सोते हुए किसी शांत खूबसूरत समंदर की तरह लग रही थी । पापा प्रज्ञा का चेहरा एक टक से देख रहे थे । कितनी सुंदर है प्रज्ञा । प्राची की तुलना में शायद दुगनी सुंदर होगी । इसे मै किसी ओर को कैसे सौंप सकता हूं। ये फूल पे सिर्फ़ मेरा हक है । मेरे बगिए की फूल है दोनों ,प्रज्ञा ओर प्राची । और मै ही माली बन के , इन दिनों फूलों की हिफाचत करूंगा , एक फूल को खिला चुका हूं, इस कली को फूल बनाना है अब । और अपने बगिया में ही इस फूल का सुगंध लेना है मुझ ।
पापा ने झुक के प्रज्ञा के गाल को धीरे से चूमा । प्रज्ञा बस थोड़ी सकपकाई और फिर नींद में गहरी सांस लेने लगी ।
पापा ने अपनी प्यारी बेटी को आलिंगन में धीरे से भर लिया और पीठ के तरफ से ही प्रज्ञा से लिपट गए । और गर्दन में एक हल्का सा चुंबन ले लिया । प्रज्ञा की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई । पापा का हौसला बढ़ा । और फिर से एक चुंबन गले पे जड़ दिया । उनका हाथ प्राची के पेट पे था और पापा ऐसे प्रज्ञा से लिपट गए थे जैसे एक सांप चंदन के पेड़ से लिपटा हुआ हो। प्रज्ञा के शरीर से एक मादक सुगंध आ रहा था । मादा के शरीर का ये सुगंध एक नर ही समझ सकता है। पापा का पैर प्रज्ञा के पैर से लिपटा हुआ था । ऐसा लग रहा था कि पापा बरसों से प्यासे है और प्रज्ञा ही अब उनकी प्यास बुझा सकती है । पापा गले पे चुम्बन करते जा रहे थे । पापा ने नोटिस किया कि प्रज्ञा की सबसे अब गहरी नहीं चल रही है , आंखे अभी भी बंद है । पापा ने हाथ को हल्के से पेट से सहलाते हुए प्रज्ञा के दाई चुचि के ऊपर सरका दिया । चुचि पे अभी ब्रा भी नहीं थी और अभी का मखमली एहसास पापा को सिनेमा घर में हुए एहसास से भी मुलायम लगा । पापा ने एकदम हल्के से प्रज्ञा की चुचि पे हाथ फेरा , ओर थोड़ा सा दबाया। प्रज्ञा का कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पापा ने चुप चाप हाथ को प्रज्ञा के पेट के नीच सरका दिया ओर नाइट शूट के टॉप के अंतिम छोड़ पे पहुंच गए । और हलके हाथों से उसकी नाइट सूट के अंदर हाथ को घुसा दिया , पापा का हाथ अब प्रज्ञा की चिकनी ,मखमली और मक्खन जैसी नगीं पेट पे था । पापा लगातार प्रज्ञा के गर्दन पे अपने होंठों से स्पर्श कर रहे थे । उनको अपने छोटी बेटी पे बड़ा प्यार आ रहा था ।
पापा धीरे धीरे प्रज्ञा के नाइट सूट के अंदर ही हाथ को ऊपर की ओर सरकते चले जा रहे थे और पापा को ऐसा लग रहा था जैसे किसी मक्खन के शिला पे हाथ फेर रहे हो। तभी पापा की उँगलियों को किसी गोल से उठान का महसूस हुआ । वो प्रज्ञा की चुचि थी , प्रज्ञा की नंगी चुचि । पापा का हाथ अपने बेटी के मखमली चूचक तक पहुंच गया था । पापा ने बारे आराम से अपने बेटी के उजोरो को अपने हथेली में पूरी तरह से भर गया । उनका लिंग एकदम 90° में तन गया और प्रज्ञा से चिपके होने के कारण उसके गांड के दरार में दवाब बनाने लगा । पापा हवस से भर चुके थे । और अब उनकी हथेली में छोटी बेटी का चूचक समाया हुआ था । पापा अभी भी बीच बीच में एकदम मादक भाव से प्रज्ञा का गला चूम रहे थे । आज पापा सच में बहक गए थे , एक अनचुदी बुर के लिए ।
पापा अपने हाथों को एकदम धीमा घुमा रहे थे और चुचि को भी हल्के हल्के ही दबा रहे थे । तभी पापा को प्रतीत हुआ ही प्रज्ञा की चुचि का निप्पल एकदम तन गया है और सख्त हो गया है । पापा ने प्रज्ञा के सांसो पे गौर किया , एकदम स्लो ,जबकि एक सोते हुए आदमी की सांस जोरो से चलती है । पापा हैरान रह गए और समझ गए प्रज्ञा जग चुकी है । पर पापा ने अपनी हरकतों को ना रोका । वो प्रज्ञा के चुचि को भींचते रहे । पापा ने सोचा : वाह,प्रज्ञा कोई विरोध नहीं कर रही । मुझे पक्का यकीन है ही प्रज्ञा सो तो नहीं रही है । और उसे मजा आ रहा होगा । अभी पता लग जाएगा प्रज्ञा जागी है या सोने का नाटक कर रही , आंखे बंद कर के । पापा ने प्रज्ञा के चुचि को कस के २ बार दबाया , प्रज्ञा के मुंह पे कोई सिकन भी नहीं । पापा ने अपना अगला दाव चला और प्रज्ञा के निप्पल या चूचक के गुड़ी को अपने चुटकी से भर के मसल दिया । पहले धीरे धीरे । प्रज्ञा तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । प्रज्ञा का निप्पल एकदम सख्त मटर के दाने जैसा था । एकदम नई यौवन का उठान , और कुँवारी 18 साल लड़की की फूलता हुआ छोटी सी सीने पे खिले दो ताज़े फूल की तरह ते प्रज्ञा के उजोर।
पापा ने सोचा : अच्छा बेटी , अपने बाप से ही चालाकी , अभी बताता हूं, कैसे नहीं प्रतिक्रिया देती है कोई ।
पापा ने इसबार कस के प्रज्ञा के निप्पल को चुटकी से मसल दिया , इतना कस के नहीं कि उसे बहुत दर्द हो । प्रज्ञा के मुंह से इस बार एक सीईईई.......कि सिसकारी निकल गई । प्रज्ञा इस बार कंट्रोल खो बैठी ।
पापा का शक यकीन में बदल गया । पर अभी भी प्रज्ञा ने अपनी आंखें नहीं खोली थी । शायद वो पापा के नजरों में शर्म के मारे देखना नहीं चाहती थी । या उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि पापा का साथ देती रहे वो भी उनको निहारते हुए ।
पापा अब बेधड़क प्रज्ञा के दोनों चुचियो का अपने कब्जे में बारी बारी लेते और दबा देते , फिर निप्पल भी मसल रही थे । प्रज्ञा अपने होंठों को अपने मुंह से दबा रही थी और बीच बीच में उसकी सिसकारी भी निकल रही थी ।
पापा सबेरे के अंधेरे में अपने बेटी को एक अलग और नया सुख का अनुभव करा रहे थे । पापा ने गर्दन पे चुम्बन लिया और प्रज्ञा के कान के पास जा के बोला : मेरी रानी , मै जनता हूं कि मेरी बेटी जागी हुई है और पापा के स्पर्श से उसका रोम रोम सिहर उठा है । मैने इस दिन की कब से तलाश की थी प्रज्ञा , तेरी हर अदा , तेरी चंचलपन , तेरी चहक , तेरी वो अपने दीदी का उसके मा के जैसा ख्याल रखना , सब तुझे स्पेशल बना देते है मेरी जान । मै कब से प्यासा हु तेरे लिए मेरी रानी और आज अपने दिल की बात तुझ से कहता हु । आई लव यू बेटी । मै तुमसे बहुत प्यार करता हु । मै तुमसे इतना प्यार करता हु जितना प्राची से भी कभी नहीं किया । मै तेरे संग जीवन का एक नया आयाम देखना चाहता हूँ। तुझ सेक्स का पाठ पढ़ना चाहता हु । तू अभी कच्ची कली है , तुझे एक फूल की तरह खिला देना चाहता हूँ मेरी बच्ची। बोल मेरी प्रज्ञा , तेरे दिल में मेरे लिए क्या है ? क्या मै तुझे फूल बना सकता हूं? क्या तू मुझ अपने शरीर सौंप देगी ? क्या मुझे प्यार करेगी प्रज्ञा ?
प्रज्ञा सब कुछ आराम से सुन रही थी , पापा अभी भी अपना हाथ प्रज्ञा के उजोरो से हटाए नहीं थे और उसे मसल रहे थे । प्रज्ञा ने एकदम धीरे से अपनी आंखें खोली और पापा की तरफ़ देखा । पापा ने प्रज्ञा के आंखों में देखा , उसके आंखों में लाल डोरे साफ गवाही दे रहे थे कि वो भी काम अग्नि में जल रही थी ।
प्रज्ञा चाह के भी अपनी प्यास छुपा नहीं पा रही थी ।
पापा : बोल ना मेरी रानी ।
प्रज्ञा : पापा , आगे ये सब कैसे होगा ?
पापा : तू , अभी ये मत सोच , बता ना तुझे मुझ से प्यार है क्या नहीं मेरी साली साहिबा ? उसके बाद तू सब मुझ पे छोड़ दे । मै वादा करता हूं कि हमारे रिश्ते के वजह से किसी रिश्ते में दरार नहीं आएगी प्रज्ञा । ना प्राची के साथ मेरे या तेरे रिश्ते में , ना ही दादी के साथ । मै सब ठीक कर दूंगा । और जैसे मैने प्राची को संभाला है तुझ भी संभालूंगा।
प्रज्ञा ने थोड़ा सोचा । सोचते समय भी पापा के उसकी उजोरो से खेलना नहीं छोड़ा था । प्रज्ञा भी निर्विरोध पापा को अपने अंग से खेलने का इजाजत दें दिया था । वो कोई भी विरोध नहीं कर रही थी ।
प्रज्ञा ने एक मिनट के लिए आंखे बंद किया ,कुछ सोचा , और आंखे खोल के पापा को बोला : हां पापा ।
पापा: हां , क्या हां मेरी रानी ?
प्रज्ञा : आपसे प्यार ।
पापा : हां बोल ना ।
प्रज्ञा : मै भी आपसे प्यार करती हुं पापा , बहुत प्यार करती हूं। मै भी हर समय अपने आप को दीदी के स्थान पे पाती थी । और मुझ हमेशा से लगता था कि जैसे दीदी की शादी आपसे हुई है ,मेरी भी आपसे वैसे ही शादी हो।
पापा : मेरी रानी, मै वादा करता हूं कि तुझे अपना बनाऊँगा । बस थोड़ा टाइम देना मुझे ।
प्रज्ञा : थैंक्यू पापा , आई लाइव यू टु।
पापा प्रज्ञा का इजहार सुनते ही अपना होंठ सीधे प्रज्ञा के पखुरी होठों पे चिपका दिया ।
आज इस सुबह की शुभ मुहूर्त में एक बाप अपने दूसरे बेटी में समा जाना चाहता था , जो कि कुँवारी, जवान और एकदम एमेच्योर थी ।
दोनों के होठ मिल गए और प्रज्ञा को उसके जीवन का पहला चुंबन का एहसास हो गया ।
पापा एक बदहवास मर्द के तरह छोटी प्रज्ञा पे टूट पड़े, उसके होठों को अपने चुंबन से सराबोर करने लगे , हाथ प्रज्ञा के चूचियो पे अटखेली और जोर जोर से करने लगा और प्रज्ञा एकदम से भाव विभोर हो गई थी । प्रज्ञा ने पहले कभी चुंबन किया नहीं था किसी को भी इस तरह तो वो ढंग से पापा के चुंबन का जवाब नहीं दे पा रही थी । पापा अच्छे से प्रज्ञा के लबों को चूम ओर चूस रहे थे । कभी कभी वो अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे देते थे तो प्रज्ञा को पता ही नहीं चलता कि क्या करना है । पापा ने देखा कि प्रज्ञा एकदम ही नवसुखु है इस खेल में तो उन्होंने प्रज्ञा का मार्ग दर्शन करने का ठान लिया ।
पापा चूमते हुए ही बोले : बेटी...उम्म्म...अपना जीभ मेरे मुंह में डालो ना....उम्मम्म्म्हाआअ....
प्रज्ञा ने पापा के आज्ञा का पालन किया और वैसा ही किया जैसा पापा ने बोला । अपना जीभ पापा के होंठो के बीच डाल दिया । पापा ने उसके जीभ को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगे । फिर बोला : ऐसे ही मेरा चुसना जान ।
और फिर अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे दिया , वो भी वैसे ही पापा के जीभ चूसने लगी जैसे पापा जिस रहे थे । दोनों का ये आदान प्रदान काफी समय तक चलता रहा ।
पापा प्रज्ञा की ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । वो अपनी बेटी को अपना बना लेना चाहते थे । और टनटनाता हुआ लन्ड जल्दी ही प्रज्ञा के दहकती बुर में डाल के उसे मथना चाहते थे ।
प्रज्ञा पापा का साथ जैसे तैसे दे पा रही थी , उसके लिए ये सब नया था और पापा एक मंझे हुए खिलाड़ी । पापा ने तो अब तक दो महिलाओं को चोद के गाभीन के दिया था , प्रज्ञा की मां और दीदी ,के बाद आज वो तीसरी कन्या का सुख भोगना चाहते थे और उसके जवानी के साथ खेल रहे थे ।
उन्होंने प्रज्ञा से बोला : बेटी जरा अपनी हाथो को ऊपर उठा ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
प्रज्ञा ने जैसे ही हाथ उठाया , पापा ने एक झटके से प्रज्ञा का नाइट सूट उतार दिया , अब वो बस एक पैजामी में थी , ऊपर से नंगी पापा के सामने आ चुकी थी ।
वो शर्म से गुलाबी हो गई । प्रज्ञा एकदम दूध जैसे गोरी थी , उसका बदन एकदम हल्की रोशनी में दमक रही थी । पापा अपने छोटी बेटी के शरीर का अवलोकन करने लगे । बला की खूबसूरती थी प्रज्ञा के बदन में । दूधिया बदन , सुडौल वृक्षस्थल, उजोरो तने हुए और निप्पल बाहर की ओर नुकीले कांटे की तरह निकले हुए, पतली गोरी कमर , जिसे पकड़ के पापा प्रज्ञा के चुत में सॉर्ट लगाने वाले थे । एकदम परी जैसी माल । पापा की तो किस्मत खुल गई थी । वो प्राची के जवानी का रस पीना चाहते थे । उन्होंने अपना टी शर्ट भी उतार दिया । अब वो बस अंडरवियर में थे , जिसमें से उनका विक्राल लिंग फट के बाहर आने को प्रतीत हो रहा था । प्रज्ञा का नज़र पापा के चड्डी में बने तंबू पे गया और उसका दिल सिहर उठा । इतना बड़ा ? वो एकदम चकित रह गई ।
पापा ने उसे अपने ओर खींज के सीने से लगा लिया ।
प्रज्ञा की चुचिया पापा के सीने में धस गई । क्या कोमल बदन था प्रज्ञा का । पापा फिर से अपना होठ प्रज्ञा के होंठ में लगा दिया ओर चूसाई चालू कर दिया ।
धीरे धीरे सरकाते हुए पापा गर्दन और फिर और नीच चुचियो , पे आ गए और प्रज्ञा की चुचि पूरी की पूरी अपने मुंह में भर लिया और सक करने लगे ।
प्रज्ञा तरप उठी , पहली बार कोई मर्द उसकी चुचि चूस रहा था । मदमस्त मस्ती में सराबोर प्रज्ञा में पापा का बाल नोचने लगी । पापा कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । आज प्रज्ञा भी अपना सुध बुद्ध भूल के पाप की ही ही जाना चाह रहे थीं।
Surupppppppp....suruppppppp की आवाज बाहर के भोर के चिड़ियों की चहचहाहट से ज्यादा सौर मचा रही थी । पापा बारी बारी प्रज्ञा की दोनों चूचियाँ चूस रहे थे । पापा के सामने प्रज्ञा किसी छोटी बच्ची जैसी लग रही थी कद काठी से । रह रह के प्रज्ञा को पापा का विक्राल लन्ड ,कभी पेट में तो, कभी बुर पे ,तो कभी जांघों पे चुभ रहा था । पापा के चूसाई से प्रज्ञा मदहोश हो के एकदम छटपटा रही थी । कमरे में एक कुंवारी लड़की का पहली बार सेक्स सुख का अनुभव बस होने ही वाला था ।
अगला अपडेट जल्द ही।
SooooooooooUpdate 73
पापा बेदर्दी से प्रज्ञा को चोदे जा रहे थे , कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी , प्रज्ञा चिल्लाती जा रही थी : नहीं पापा , आह छोड़ो पापा , मत करिए दर्द हो रहा है ।
पापा: चुप मादरचोद, चुप चाप लन्ड ले मेरा । बहुत मज़ा आएगा ।
पापा प्रज्ञा के चुत पे उछल उछल के धक्के लगा रहे थे । प्रज्ञा का हर धक्के के साथ मूत निकल जा रहा था । उनकी आंखें ऊपर चढ़ गई थी और हाथ से पापा को हटाने की नाकाम कोशिश कर रही थी । पसीने पसीने । पापा ने गांड का ऐम लगा के लिंग गांड में डाल दिया और फुल स्पीड में चोदने लगे ।
फिर चुत में । और ऐसा ही रीपीट होता रहा ।
कभी गांड तो कभी चुत। प्रज्ञा का मूत निकलने से पापा पूरे भीग गए थे , बिस्तर भी गिला ही गया था ।
प्रज्ञा रोई जा रही थी : आह ,पापा , दर्द हो रहा है , छोड़िए । दरिन्दे की तरह मुझ पे टूट परे है । मत करिए पापा । आह....अपने बेटी पे रहम खाइये पापा।
पापा: चुप कर साली , सिनेमा हॉल में तो मजे से चुचि मिझवा रही थी । चुप चाप लौड़ा का चोट सह मादरचोद और रोना धोना बंद कर । पूरे मज़े ले । आह...बारी कमसिन कली है तू । मज़ा आ गया तेरे टाइट बुर में लन्ड पेस के ।
चुदाई उफान में आ गया और छलछला के पापा ने अपना गरम पानी प्रज्ञा के चुत में भर दिया । प्रज्ञा भी चीख पड़ी और पापा एकदम शांत हो गए ।
पापा : अब क्या चीख रही है । अब तो मेरा बच्चा तेरे कोख मे ठहरने से कोई नहीं रोक सकता , मेरी रांड बेटी ।
अचानक ही पापा को गीला गीला महसूस हुआ और उनकी आंखें खुल गई ।
वो पसीने से लथपथ थे और देखा कि पजामे वीर्य गिरने से आगे से थोड़ा गीला हो गया है । बगल में प्रज्ञा आराम से सो रही है ।यानी पापा का प्रज्ञा से मिलन सपने में हो रहा था ।
पापा एकदम शरम से लाल हो गए । उन्हें आज पहली बार स्वपन दोष हुआ था । मतलब जब किसी इंसान ने लंबे समय से सेक्स ना किया हो और उसके वीर्य बनाने की क्षमता के अनुसार शरीर से वीर्य ना निकले , तो ऐसे ही सोते समय वीर्य अपने आप ही कोई सेक्सी सपना देखते हुए , निकल जाता है । वही पापा के साथ हुआ था । असल में उन्होंने प्रज्ञा को हाथ भी नहीं लगाया था मगर सपने में प्रज्ञा को अभी अभी जी भर के चोद दिया था ।
पापा चुपचाप उठे और बाथरूम में जा के पेशाब किया और अपने आप को साफ किया , पजामा बदला और चड्डी में आ गए । फिर पानी पिया , तब जा के उनका मन शांत हुआ । पानी पीने के बाद उनका नज़र प्रज्ञा पे पड़ी । कितनी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा सोती हुई। पापा ने घड़ी पे नज़र डाली । सुबह के 4:30 बजने को आ गए थे ।
प्रज्ञा अभी भी गहरी नींद में जान पड़ती थी । पापा उसके बगल में आ के वापस लेट गए।
पापा ऊपर छत को देखने लगे और सोचने लगे : ये क्या हो गया था मुझे , मै सपने में अपनी ही बेटी का रे प कर रहा था ? प्रज्ञा कैसे चीखे निकल के रो रही थी , और मै कमीने की तरह ,बेदर्दी से उसे छोड़ रहा था , गलिया भी दे रहा था । लानत है मुझपे , मै अपनी प्यारी और फूल सी बेटी के साथ ऐसा कभी नहीं कर सकता ।
पापा सपने के बारे में सोच रहे थे , सपना भयावह था , मगर उस सपने में एक पाप ओर बेटी का मिलन भी तो था । और ये सपना प्रमाण था कि प्रज्ञा के साथ वो किस रिश्ते की शुरुआत करना चाहते थे । कहते है सुबह का सपना सच होता है । तो क्या प्रज्ञा की चुत पे अब मेरा हक होगा । क्या प्रज्ञा भी प्राची के तरह मुझे प्यार करने देगी ।
प्रज्ञा बेहद सुंदर थी ,
एकदम चिकनी बदन की मालिक , पापा प्रज्ञा के संग अब अपना रिश्ता बनाने का मन बना चुके थे ।
पापा ने करवट बदली और प्रज्ञा के तरफ देखने लगे। प्रज्ञा का पीठ पापा के तरफ था और मुंह उल्टा साइड । पापा प्रज्ञा को देखते रहे, और रात की हुई बातों को सोचने लगे । प्रज्ञा अभी सुकून से सो रही थी , उसका पीठ उसके हर गहरे सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी । पापा ने सिर उठा के प्रज्ञा का चेहरा देखा । गोरे चेहरे पे बाल बिखरे हुए थे । चांद जैसी प्यारी लग रही थी प्रज्ञा ।
पापा सोच रहे थे : कास रात को मै प्रज्ञा की नाराज़ ना करता तो शायद प्रज्ञा मेरी बाहों में लिपट के सोती । मैने गलती करी । प्रज्ञा मेरा साथ चाहती है । उसे मै पसंद हु , ये बात तो तय है । बस बेचारी हिम्मत नहीं कर पा रहीं है । मै कल उसे लाइन दे रहा था । और वो सारे सवाल पूछे जा रही थी । मतलब वो चाहती थी कि वो सारे आगे होने वाले घटनाक्रम के बारे में मुझ से पूछ ले , ताकि आगे उसे मुझ से धोखा ना मिले । वो शायद आश्वत हों चाहती थी कि मैं उसका साथ दूंगा या नहीं , मेरी एक बीवी के रहते मै उसका साथ किस तरह से दूंगा । अगर मै कल रात उसे सारे सही जवाब दे देता तो शायद वो मेरे प्यार का इजहार मान जाती या खुद इजहार कर देती । मै कितना बुधु हूं,बेटी का दिल ना पढ़ सका और उसको मजाक का नाम दे दिया और प्रज्ञा का दिल तोड़ दिया । नहीं आज मै सब ठीक कर दूंगा । आप प्रज्ञा मेरी होगी । उसके सारे गिले शिकवे दूर करना ही होगा मुझे । आधी घरवाली नहीं , पूरी घरवाली बनाना है प्रज्ञा की मुझे । प्राची को भी समय आने पे सब बता दूंगा । और वो शायद मुझे समझ जाएगी । मै उसे भी धोखे में नहीं रखूंगा ।
पापा ने अपने हाथ बढ़ा के प्रज्ञा के चेहरे से उसकी बाल के लटों को आराम से हटाया । वो सोते हुए किसी शांत खूबसूरत समंदर की तरह लग रही थी । पापा प्रज्ञा का चेहरा एक टक से देख रहे थे । कितनी सुंदर है प्रज्ञा । प्राची की तुलना में शायद दुगनी सुंदर होगी । इसे मै किसी ओर को कैसे सौंप सकता हूं। ये फूल पे सिर्फ़ मेरा हक है । मेरे बगिए की फूल है दोनों ,प्रज्ञा ओर प्राची । और मै ही माली बन के , इन दिनों फूलों की हिफाचत करूंगा , एक फूल को खिला चुका हूं, इस कली को फूल बनाना है अब । और अपने बगिया में ही इस फूल का सुगंध लेना है मुझ ।
पापा ने झुक के प्रज्ञा के गाल को धीरे से चूमा । प्रज्ञा बस थोड़ी सकपकाई और फिर नींद में गहरी सांस लेने लगी ।
पापा ने अपनी प्यारी बेटी को आलिंगन में धीरे से भर लिया और पीठ के तरफ से ही प्रज्ञा से लिपट गए । और गर्दन में एक हल्का सा चुंबन ले लिया । प्रज्ञा की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई । पापा का हौसला बढ़ा । और फिर से एक चुंबन गले पे जड़ दिया । उनका हाथ प्राची के पेट पे था और पापा ऐसे प्रज्ञा से लिपट गए थे जैसे एक सांप चंदन के पेड़ से लिपटा हुआ हो। प्रज्ञा के शरीर से एक मादक सुगंध आ रहा था । मादा के शरीर का ये सुगंध एक नर ही समझ सकता है। पापा का पैर प्रज्ञा के पैर से लिपटा हुआ था । ऐसा लग रहा था कि पापा बरसों से प्यासे है और प्रज्ञा ही अब उनकी प्यास बुझा सकती है । पापा गले पे चुम्बन करते जा रहे थे । पापा ने नोटिस किया कि प्रज्ञा की सबसे अब गहरी नहीं चल रही है , आंखे अभी भी बंद है । पापा ने हाथ को हल्के से पेट से सहलाते हुए प्रज्ञा के दाई चुचि के ऊपर सरका दिया । चुचि पे अभी ब्रा भी नहीं थी और अभी का मखमली एहसास पापा को सिनेमा घर में हुए एहसास से भी मुलायम लगा । पापा ने एकदम हल्के से प्रज्ञा की चुचि पे हाथ फेरा , ओर थोड़ा सा दबाया। प्रज्ञा का कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पापा ने चुप चाप हाथ को प्रज्ञा के पेट के नीच सरका दिया ओर नाइट शूट के टॉप के अंतिम छोड़ पे पहुंच गए । और हलके हाथों से उसकी नाइट सूट के अंदर हाथ को घुसा दिया , पापा का हाथ अब प्रज्ञा की चिकनी ,मखमली और मक्खन जैसी नगीं पेट पे था । पापा लगातार प्रज्ञा के गर्दन पे अपने होंठों से स्पर्श कर रहे थे । उनको अपने छोटी बेटी पे बड़ा प्यार आ रहा था ।
पापा धीरे धीरे प्रज्ञा के नाइट सूट के अंदर ही हाथ को ऊपर की ओर सरकते चले जा रहे थे और पापा को ऐसा लग रहा था जैसे किसी मक्खन के शिला पे हाथ फेर रहे हो। तभी पापा की उँगलियों को किसी गोल से उठान का महसूस हुआ । वो प्रज्ञा की चुचि थी , प्रज्ञा की नंगी चुचि । पापा का हाथ अपने बेटी के मखमली चूचक तक पहुंच गया था । पापा ने बारे आराम से अपने बेटी के उजोरो को अपने हथेली में पूरी तरह से भर गया । उनका लिंग एकदम 90° में तन गया और प्रज्ञा से चिपके होने के कारण उसके गांड के दरार में दवाब बनाने लगा । पापा हवस से भर चुके थे । और अब उनकी हथेली में छोटी बेटी का चूचक समाया हुआ था । पापा अभी भी बीच बीच में एकदम मादक भाव से प्रज्ञा का गला चूम रहे थे । आज पापा सच में बहक गए थे , एक अनचुदी बुर के लिए ।
पापा अपने हाथों को एकदम धीमा घुमा रहे थे और चुचि को भी हल्के हल्के ही दबा रहे थे । तभी पापा को प्रतीत हुआ ही प्रज्ञा की चुचि का निप्पल एकदम तन गया है और सख्त हो गया है । पापा ने प्रज्ञा के सांसो पे गौर किया , एकदम स्लो ,जबकि एक सोते हुए आदमी की सांस जोरो से चलती है । पापा हैरान रह गए और समझ गए प्रज्ञा जग चुकी है । पर पापा ने अपनी हरकतों को ना रोका । वो प्रज्ञा के चुचि को भींचते रहे । पापा ने सोचा : वाह,प्रज्ञा कोई विरोध नहीं कर रही । मुझे पक्का यकीन है ही प्रज्ञा सो तो नहीं रही है । और उसे मजा आ रहा होगा । अभी पता लग जाएगा प्रज्ञा जागी है या सोने का नाटक कर रही , आंखे बंद कर के । पापा ने प्रज्ञा के चुचि को कस के २ बार दबाया , प्रज्ञा के मुंह पे कोई सिकन भी नहीं । पापा ने अपना अगला दाव चला और प्रज्ञा के निप्पल या चूचक के गुड़ी को अपने चुटकी से भर के मसल दिया । पहले धीरे धीरे । प्रज्ञा तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । प्रज्ञा का निप्पल एकदम सख्त मटर के दाने जैसा था । एकदम नई यौवन का उठान , और कुँवारी 18 साल लड़की की फूलता हुआ छोटी सी सीने पे खिले दो ताज़े फूल की तरह ते प्रज्ञा के उजोर।
पापा ने सोचा : अच्छा बेटी , अपने बाप से ही चालाकी , अभी बताता हूं, कैसे नहीं प्रतिक्रिया देती है कोई ।
पापा ने इसबार कस के प्रज्ञा के निप्पल को चुटकी से मसल दिया , इतना कस के नहीं कि उसे बहुत दर्द हो । प्रज्ञा के मुंह से इस बार एक सीईईई.......कि सिसकारी निकल गई । प्रज्ञा इस बार कंट्रोल खो बैठी ।
पापा का शक यकीन में बदल गया । पर अभी भी प्रज्ञा ने अपनी आंखें नहीं खोली थी । शायद वो पापा के नजरों में शर्म के मारे देखना नहीं चाहती थी । या उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि पापा का साथ देती रहे वो भी उनको निहारते हुए ।
पापा अब बेधड़क प्रज्ञा के दोनों चुचियो का अपने कब्जे में बारी बारी लेते और दबा देते , फिर निप्पल भी मसल रही थे । प्रज्ञा अपने होंठों को अपने मुंह से दबा रही थी और बीच बीच में उसकी सिसकारी भी निकल रही थी ।
पापा सबेरे के अंधेरे में अपने बेटी को एक अलग और नया सुख का अनुभव करा रहे थे । पापा ने गर्दन पे चुम्बन लिया और प्रज्ञा के कान के पास जा के बोला : मेरी रानी , मै जनता हूं कि मेरी बेटी जागी हुई है और पापा के स्पर्श से उसका रोम रोम सिहर उठा है । मैने इस दिन की कब से तलाश की थी प्रज्ञा , तेरी हर अदा , तेरी चंचलपन , तेरी चहक , तेरी वो अपने दीदी का उसके मा के जैसा ख्याल रखना , सब तुझे स्पेशल बना देते है मेरी जान । मै कब से प्यासा हु तेरे लिए मेरी रानी और आज अपने दिल की बात तुझ से कहता हु । आई लव यू बेटी । मै तुमसे बहुत प्यार करता हु । मै तुमसे इतना प्यार करता हु जितना प्राची से भी कभी नहीं किया । मै तेरे संग जीवन का एक नया आयाम देखना चाहता हूँ। तुझ सेक्स का पाठ पढ़ना चाहता हु । तू अभी कच्ची कली है , तुझे एक फूल की तरह खिला देना चाहता हूँ मेरी बच्ची। बोल मेरी प्रज्ञा , तेरे दिल में मेरे लिए क्या है ? क्या मै तुझे फूल बना सकता हूं? क्या तू मुझ अपने शरीर सौंप देगी ? क्या मुझे प्यार करेगी प्रज्ञा ?
प्रज्ञा सब कुछ आराम से सुन रही थी , पापा अभी भी अपना हाथ प्रज्ञा के उजोरो से हटाए नहीं थे और उसे मसल रहे थे । प्रज्ञा ने एकदम धीरे से अपनी आंखें खोली और पापा की तरफ़ देखा । पापा ने प्रज्ञा के आंखों में देखा , उसके आंखों में लाल डोरे साफ गवाही दे रहे थे कि वो भी काम अग्नि में जल रही थी ।
प्रज्ञा चाह के भी अपनी प्यास छुपा नहीं पा रही थी ।
पापा : बोल ना मेरी रानी ।
प्रज्ञा : पापा , आगे ये सब कैसे होगा ?
पापा : तू , अभी ये मत सोच , बता ना तुझे मुझ से प्यार है क्या नहीं मेरी साली साहिबा ? उसके बाद तू सब मुझ पे छोड़ दे । मै वादा करता हूं कि हमारे रिश्ते के वजह से किसी रिश्ते में दरार नहीं आएगी प्रज्ञा । ना प्राची के साथ मेरे या तेरे रिश्ते में , ना ही दादी के साथ । मै सब ठीक कर दूंगा । और जैसे मैने प्राची को संभाला है तुझ भी संभालूंगा।
प्रज्ञा ने थोड़ा सोचा । सोचते समय भी पापा के उसकी उजोरो से खेलना नहीं छोड़ा था । प्रज्ञा भी निर्विरोध पापा को अपने अंग से खेलने का इजाजत दें दिया था । वो कोई भी विरोध नहीं कर रही थी ।
प्रज्ञा ने एक मिनट के लिए आंखे बंद किया ,कुछ सोचा , और आंखे खोल के पापा को बोला : हां पापा ।
पापा: हां , क्या हां मेरी रानी ?
प्रज्ञा : आपसे प्यार ।
पापा : हां बोल ना ।
प्रज्ञा : मै भी आपसे प्यार करती हुं पापा , बहुत प्यार करती हूं। मै भी हर समय अपने आप को दीदी के स्थान पे पाती थी । और मुझ हमेशा से लगता था कि जैसे दीदी की शादी आपसे हुई है ,मेरी भी आपसे वैसे ही शादी हो।
पापा : मेरी रानी, मै वादा करता हूं कि तुझे अपना बनाऊँगा । बस थोड़ा टाइम देना मुझे ।
प्रज्ञा : थैंक्यू पापा , आई लाइव यू टु।
पापा प्रज्ञा का इजहार सुनते ही अपना होंठ सीधे प्रज्ञा के पखुरी होठों पे चिपका दिया ।
आज इस सुबह की शुभ मुहूर्त में एक बाप अपने दूसरे बेटी में समा जाना चाहता था , जो कि कुँवारी, जवान और एकदम एमेच्योर थी ।
दोनों के होठ मिल गए और प्रज्ञा को उसके जीवन का पहला चुंबन का एहसास हो गया ।
पापा एक बदहवास मर्द के तरह छोटी प्रज्ञा पे टूट पड़े, उसके होठों को अपने चुंबन से सराबोर करने लगे , हाथ प्रज्ञा के चूचियो पे अटखेली और जोर जोर से करने लगा और प्रज्ञा एकदम से भाव विभोर हो गई थी । प्रज्ञा ने पहले कभी चुंबन किया नहीं था किसी को भी इस तरह तो वो ढंग से पापा के चुंबन का जवाब नहीं दे पा रही थी । पापा अच्छे से प्रज्ञा के लबों को चूम ओर चूस रहे थे । कभी कभी वो अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे देते थे तो प्रज्ञा को पता ही नहीं चलता कि क्या करना है । पापा ने देखा कि प्रज्ञा एकदम ही नवसुखु है इस खेल में तो उन्होंने प्रज्ञा का मार्ग दर्शन करने का ठान लिया ।
पापा चूमते हुए ही बोले : बेटी...उम्म्म...अपना जीभ मेरे मुंह में डालो ना....उम्मम्म्म्हाआअ....
प्रज्ञा ने पापा के आज्ञा का पालन किया और वैसा ही किया जैसा पापा ने बोला । अपना जीभ पापा के होंठो के बीच डाल दिया । पापा ने उसके जीभ को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगे । फिर बोला : ऐसे ही मेरा चुसना जान ।
और फिर अपना जीभ प्रज्ञा के मुंह में दे दिया , वो भी वैसे ही पापा के जीभ चूसने लगी जैसे पापा जिस रहे थे । दोनों का ये आदान प्रदान काफी समय तक चलता रहा ।
पापा प्रज्ञा की ट्रेनिंग में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । वो अपनी बेटी को अपना बना लेना चाहते थे । और टनटनाता हुआ लन्ड जल्दी ही प्रज्ञा के दहकती बुर में डाल के उसे मथना चाहते थे ।
प्रज्ञा पापा का साथ जैसे तैसे दे पा रही थी , उसके लिए ये सब नया था और पापा एक मंझे हुए खिलाड़ी । पापा ने तो अब तक दो महिलाओं को चोद के गाभीन के दिया था , प्रज्ञा की मां और दीदी ,के बाद आज वो तीसरी कन्या का सुख भोगना चाहते थे और उसके जवानी के साथ खेल रहे थे ।
उन्होंने प्रज्ञा से बोला : बेटी जरा अपनी हाथो को ऊपर उठा ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
प्रज्ञा ने जैसे ही हाथ उठाया , पापा ने एक झटके से प्रज्ञा का नाइट सूट उतार दिया , अब वो बस एक पैजामी में थी , ऊपर से नंगी पापा के सामने आ चुकी थी ।
वो शर्म से गुलाबी हो गई । प्रज्ञा एकदम दूध जैसे गोरी थी , उसका बदन एकदम हल्की रोशनी में दमक रही थी । पापा अपने छोटी बेटी के शरीर का अवलोकन करने लगे । बला की खूबसूरती थी प्रज्ञा के बदन में । दूधिया बदन , सुडौल वृक्षस्थल, उजोरो तने हुए और निप्पल बाहर की ओर नुकीले कांटे की तरह निकले हुए, पतली गोरी कमर , जिसे पकड़ के पापा प्रज्ञा के चुत में सॉर्ट लगाने वाले थे । एकदम परी जैसी माल । पापा की तो किस्मत खुल गई थी । वो प्राची के जवानी का रस पीना चाहते थे । उन्होंने अपना टी शर्ट भी उतार दिया । अब वो बस अंडरवियर में थे , जिसमें से उनका विक्राल लिंग फट के बाहर आने को प्रतीत हो रहा था । प्रज्ञा का नज़र पापा के चड्डी में बने तंबू पे गया और उसका दिल सिहर उठा । इतना बड़ा ? वो एकदम चकित रह गई ।
पापा ने उसे अपने ओर खींज के सीने से लगा लिया ।
प्रज्ञा की चुचिया पापा के सीने में धस गई । क्या कोमल बदन था प्रज्ञा का । पापा फिर से अपना होठ प्रज्ञा के होंठ में लगा दिया ओर चूसाई चालू कर दिया ।
धीरे धीरे सरकाते हुए पापा गर्दन और फिर और नीच चुचियो , पे आ गए और प्रज्ञा की चुचि पूरी की पूरी अपने मुंह में भर लिया और सक करने लगे ।
प्रज्ञा तरप उठी , पहली बार कोई मर्द उसकी चुचि चूस रहा था । मदमस्त मस्ती में सराबोर प्रज्ञा में पापा का बाल नोचने लगी । पापा कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे । आज प्रज्ञा भी अपना सुध बुद्ध भूल के पाप की ही ही जाना चाह रहे थीं।
Surupppppppp....suruppppppp की आवाज बाहर के भोर के चिड़ियों की चहचहाहट से ज्यादा सौर मचा रही थी । पापा बारी बारी प्रज्ञा की दोनों चूचियाँ चूस रहे थे । पापा के सामने प्रज्ञा किसी छोटी बच्ची जैसी लग रही थी कद काठी से । रह रह के प्रज्ञा को पापा का विक्राल लन्ड ,कभी पेट में तो, कभी बुर पे ,तो कभी जांघों पे चुभ रहा था । पापा के चूसाई से प्रज्ञा मदहोश हो के एकदम छटपटा रही थी । कमरे में एक कुंवारी लड़की का पहली बार सेक्स सुख का अनुभव बस होने ही वाला था ।
अगला अपडेट जल्द ही।