Milan jaldi hi hoga.Ab jaldi se baap beti ka milan krwa do aap and bahut hi lajbab update
Bhai next night me seal tod do pragya ka fir 6 din Honeymoon, gajab story likhte ho
Jb bhi time milega update aa jayega bro. ThanksPls fast update
Nice update....Update 72:
हॉल में रोशनी हो चुकी थी और ये रोशनी एक तरह से प्रज्ञा के जीवन में नए प्रकाश की तरह था । उस पूरी पिक्चर के दौरान पापा की हिम्मत अंधेरे में बढ़ती गई और आधी फिल्म के बाद तो पापा ने जी भर के प्रज्ञा के संतरे को मिज के रख दिया था । पापा के हाथ लगते ही प्रज्ञा के बदन में जो सुरसुरी हुई थी वो उसके योनि तक पहुंचते देर न लगी । पापा ने आज तक प्रज्ञा के योनि को हाथ भी नहीं लगाया था । पापा ने क्या किसी भी लड़के ने आज तक प्रज्ञा के योनि पे हाथ नहीं लगाया था । पर वो पापा द्वारा चुचि दबाने मात्र से ही चु गई थी । उसका जींस, उसके योनि के सामने , प्रज्ञा के चुत रस से गिला ही चुका था ,जो गौर से देखने पे किसी को भी पता लग जाता ।
पापा ने प्रज्ञा को रोशनी में ऊपर से नीचे तक निहारा , उसके चेहरे पे हल्की सी शरम का भावना था । मगर गुस्सा का कोई भाव नहीं । यानी इतना तो पता चल गया पापा को की प्रज्ञा गुस्सा नहीं करने वाली उसके हरकतों पे । ये पापा के हिम्मत को बढ़ा देने के लिए काफी था । पापा ने प्रज्ञा के योनि के पास गिला हुआ जींस का हिस्सा देखा और समझ गए की उनकी बेटी को उनका चुचि मर्दन करना मजेदार लगा है और उनके हाथ लगाने को वो सह ना पाई और चरम सुख को प्राप्त हो गई है।
दोनों वहां कुछ नहीं बोले और बस पापा आगे आगे और प्रज्ञा पीछे पीछे मॉल से निकल गए , ऑटो लिया और वापस होटल पे आ गए। पापा और प्रज्ञा लिफ्ट में अंदर घुस गए । लिफ्ट का दरवाजा बंद होने वाला ही था कि वही स्टाफ जो सबेरे उन दोनों को रूम दिखाने आया था वो भी लिफ्ट में घुसा। और लिफ्ट चल परी।
वैसे तो होटल के स्टाफ पर्सनल तोर पे बात चित नहीं करते कस्टमर से मगर वो स्टाफ थोड़ा मुंह फट था या कह लो कि लोगों से बाते करना उसे पसंद थी ।
उसने ,पापा और प्रज्ञा को देखा और बोला : हाय सर , कैसा रहा आपका दिन , कहां कहां घूमे आपलोग अभी तक ।
पापा: कहां कही घुमा हु यार , अभी तो एक काम के चक्कर ने फंसे थे । वो ही पूरा दिन ले गया , और आज थोड़े थके हुए भी है सफर से तो ज्यादा घूमना सही नहीं लगा ।
स्टाफ: ओह नो प्रॉब्लम Sir, आराम से एक्सप्लोर कीजिये ।
पापा: ह्म्म्म... थैंक्यू।
स्टाफ: अभी कहा से आ रहे है ?
पापा: ओह अभी , अरे कही घूमने नहीं गए थे । थोड़ा फिल्म देखने निकल गए थे ।
तभी उस स्टाफ ने प्रज्ञा के जींस का वो गिला पार्ट देख लिया और वो समझ गया कि सिनेमा हॉल में क्या गुल खिलाया है दोनों ने।
स्टाफ: ओह अच्छी बात है सर ।
उसने थोड़ा सा रुक के फिर कहा : बुरा ना माने सर तो एक बात कहना चाहूंगा । भाभी जो काफी लक्की है। और भी ।
पापा चकित होके : अच्छा , धन्यवाद मगर कैसे ?
स्टाफ : भाभी जी लक्की है कि आप बहुत रोमांटिक है और आप लक्की है क्योंकि आपको भाभी जी जैसी कम उमर की दिखने वाली लड़की से शादी हुई है ।
प्रज्ञा लज्जा के मारे सिर झुका ली और पापा को समझ नहीं आया इसका जवाब क्या दे ।
पापा: हां भाभी कम उमर की दिखती नहीं है , वो कम उमर की ही है । मगर मै रोमांटिक हूं ये कैसे कह रहे हो ?
स्टाफ प्राची के चुत की तरफ पापा को आंखों से इशारा करता हुआ : वो तो पता चल गया से भाभी जी का हाव भाव देख के ।
पापा ने उसके आंखों को इशारे का पीछा किया और प्रज्ञा के गिले जींस को नोटिस किया । वो कुछ कहते लिफ्ट का दरवाजा खुल गया और वो 3 मंजिल पे पहुंच गया । और वो स्टाफ वही उतर गया और जाते जाते बोल गया : सर अच्छे से हनीमून एंजॉय करिए , कोई भी चीज की जरूरत तो , बियर, वाइन या कोंडोम तो बेझिझक बताइयेगा ।
पापा चौक गए मगर अंदर से थोड़ा खुश भी हो गए , वही प्रज्ञा एकदम शर्म से पानी पानी हो गई थी और लिफ्ट के कोने में सहमी खड़ी थी । उसके मन में एक अजीब सी उथल पुथल मच गई थी : ये होटल का स्टाफ कैसे मजाक कर रहा था पापा के साथ । सब पापा की गलती है , उन्होंने कपल नाम से रूम बुक किया है , वो तो होना ही था । सबको लगेगा कि अंदर हमदोनों हनीमून बमन रहे है । पर पापा ऐसा थोड़े न करेंगे । वो हॉल ने शायद वो बहक गए थे । उन्हें प्राची की याद आ रही होगी । तभी उनको ये लगा होगा कि ये मै हु दीदी नहीं , इसलिए वो उससे आगे नहीं बढ़े । उस कंडिशन या सिचुएशंस में कोई दूसरा मर्द होता तो शायद इतना धैर्य न रखता ।
तभी दोबारा लिफ्ट का दरवाजा खुला और वो दोनों का कमरा आ गया । पापा ने कार्ड से गेट खोला और दोनों अंदर आ गए और पापा ने अंदर से गेट को बंद कर लिया । अब बस उस पूरे आलीशान कमरे ने २ लोग थे , पापा और प्रज्ञा , एक बाप और बेटी , या यू कह लीजिए , एक नर और एक मादा । मादा जो अब तक संभोग का सुख भी नहीं जानती । एक मर्द जो काफी दिनों से संभोग ना करने के कारण तड़प रहा है ।
पापा ने प्रज्ञा को कहा : बेटी रात बहुत ही गया है , फ्रेश हो ले , फि मै फ्रेश हो जाऊंगा । और फिर आराम करेंगे ।
प्रज्ञा सिर हिला कर हामी भारी ओर अपनी नाइट सूट ले के बाथरूम ने चली गई ।
वहां जा कर हाथ मुंह धोई और फिर अपना कपड़ा बदलने लगी । प्रज्ञा ने जैसे ही अपनी टॉप उतारी उसने देखा की ब्रा में चूचक से पास मचोर पड़ी हुई थी । प्रज्ञा ने वो देख और शर्म से फिर लाल हो गई । दरअसल ये मचोर पापा के हाथ से प्रज्ञा की चुचि दबाने से हुआ था । वो अपने पापा से इस मामले में कुछ भी नहीं कहा या बात किया था । वो अपने आप से सवाल कर रही थी कि क्या उसे पापा की हरकत अच्छी लगी ? उसने अपने पापा का विरोध क्यों नहीं किया ? पापा का हाथ लगाना उसे इतना अच्छा क्यों लगा ? पापा ने जब अंधेरे में प्रज्ञा की चुचि दबाये तो पापा के मन में क्या था ?
वो अपने अंतर्मन से ये सवाल पूछती धीरे धीरे अपने नाइट सूट में आ गई , अंदर ब्रा भी नहीं पहने क्योंकि प्रज्ञा की सोते टाइम चुचियो पे कसावट की आदत नहीं परी थी और अभी तो उसकी चुचि में नेचुरल टाइटन्स था
और वो ज़्यादा बड़े या बेडौल भी नहीं हुए थे ।प्रज्ञा एक सुडौल चुचि को मालिक थी ।
खैर वो अपने आप से ही सवाल का जवाब ढूंढने लगी। हो सकता है पापा बहक गए हो , जैसे दीदी बहक गई थी , दोनों में कितने दिनों से प्यार नहीं हुआ है । पापा हो सकता है वो सिनेमा देख के खुद को कंट्रोल नहीं कर पाए हो और मुझे प्राची दीदी समझ के.....हां ये मुमकिन है , पापा बहक गए थे , उनको भी अपने किये पे पछतावा होगा , इसलिए तो वो मुझ से नज़रे भी नहीं मिला रहे थे । और अंत में उस ने ये पापा से बात करने का विचार किया इस बारे में ।
वो बाथरूम से नाइट सूट पहन के निकल गई और बोला : पापा आप भी फ्रेस हो जाइए ।
पापा : हां , वो जरा मेरे पजामे दे दे ।
पापा रात को पहनने के लिए पजामे और एक ढीला टी शर्ट लाये थे ।
प्रज्ञा ने निकल के दिया और जल्द ही उन्होंने भी अपने कपड़े बदल के सोने की तैयारी में आ गए । समय 10:45 PM हो रहा था ।
पापा ने सोने से पहले पानी पिया और प्रज्ञा से बोले : बेटी ,बेड तो एक ही है, तू कहेगी तो मै यहां सोफे पे सो जाता हूं।
पापा का मन था कि वो अपने बेटी के साथ ही सोये मगर वो बस ये दिखाना चाहते थे कि वो एक अच्छे मर्द है । जो लड़की की रिस्पेक्ट करता है ।
प्रज्ञा : पापा , मैं क्या कहती हु कि , बेड तो एक ही है ,मगर काफी बड़ा सा है , और मै अकेले इतना बड़ा बेड पे सोऊ और आप उस छोटे सोफे पे अनकंफर्टेबल हो के दिक्कत से सोए ,ये अच्छा नहीं । आप भी बेड पे आ जाइए । वैसे भी बचपन में तो आप ओर मम्मी के बीच कितने दिनों तक सोई हु मै और प्राची दादी के साथ सो जाती थी ।
प्रज्ञा थोड़ा सहमी जरूर हुई थी, उस हॉल वाली घटना के बाद मगर उसके दिल में भी पापा के उन हरकतों का विरोध बिल्कुल नहीं था । जो उसकी दीदी को मिला था , वो चाहती थी कि उसे भी मिले । पापा का प्यार । और आज जब पापा ने प्यार से उसके बदन को हाथ लगाया तो प्रज्ञा खुद को भाग्यशाली समझने लगी थी । वो बस थोड़ा झिझक रही थी क्योंकि वो जानती थी पापा उसके दीदी के पति है । और दीदी का विश्वास तोड़ना अच्छा नहीं है ।
पापा: ह्म्म्म...बात तो तेरी सही है , तू कोई पराई औरत तो नहीं है , मेरी ही बच्ची है । और ये भी बात तेरी ठीक है कि सोफा अनकंफर्टेबल तो हो जाएगा । एक काम कर मैं बीच में एक तकिए से पार्टिशन बना देता हु , उस तरफ तू सो जा और इस तरफ मै सो जाऊंगा । ताकि तुझे अपना स्पेस मिल सके ।
प्रज्ञा : पापा , आप कैसी बात कर रहे है , आप कोई गैर मर्द थोड़ी है , मेरे पापा है , इन सब की कोई जरूरत नहीं है । आपके साथ मै अपने आप को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हूं।
पापा समझ गए कि प्रज्ञा को हॉल वाली चुचि छुअन से कोई आपति नहीं है , यानी आगे बढ़ाने का ग्रीन सिग्नल । पापा खुश हो गए ।
पापा : ठीक है प्रज्ञा , आजा आज पापा के साथ सो जा तू ।
और इतना कहते हुए शर्मा जी बेड में घुस गए । AC ने कमरे में अच्छी ठंडक की हुई थी । सारी खिड़कियां और पर्दे भी लगे थे । पापा ने प्रज्ञा से कहा : बेटी , आते हुए लाइट ऑफ कर देना नहीं तो नींद नहीं आएगी ।
प्रज्ञा का दिल जोर से धड़कने लगा । हॉल के अंधेरे में पापा ने उसके साथ जो किया था उसके बाद उसे थोड़ा तो संकोज जरूर हो रहा था । मगर उसने अगले ही पल सोचा । कि जब दीदी पापा की बेटी हो के पापा के साथ सो सकती है तो मै भी तो बेटी ही हूं। प्रज्ञा का मन एक तरह से डर भी रहा था और उसका मन ये भी था कि पापा आए बढ़े और उसे रियल प्यार क्या होता है , वो बताए । दादी के द्वारा कहानियों और जानकारियों ने उसको तो अपने पापा से मिलन के लिए कब का मन था । इस ट्रिप पे ही उसे पापा का साथ इतने एकांत में मिल था । मगर वो पापा को कुछ बोलना नहीं चाहती थी । वो सोच रही थी कि शायद पापा को बुरा लगे तो , शायद पापा को लगे कि वो दीदी को धोखा दे रहे है तो । नहीं नहीं , वो पापा और दीदी के बीच दरार नहीं लाना चाहती थी । उसने लाइट बंद किया ओर नाइट लाइट जला दी । कमरा एकदम धीमी रोशनी में सराबोर हो गया । एकदम कैंडल लाइट के जैसा ।
प्रज्ञा चुपचाप आई और पापा संग चादर में घुस गई । पापा और प्रज्ञा के बीच में बस कुछ इंच का फसल ही रह गया था ।
प्रज्ञा : पापा आप दिन में आराम किए थे ना ? या थकान जायदा है ?
पापा : नहीं बेटी मैने दिन में अच्छे से कुछ देर की नींद खींच ली थी । तू जब एग्जाम दे रहे थी । हाहाहा...
प्रज्ञा : ओह ओके पापा , अब मुझ तो बहुत थकान लग रहा है पापा ।
पापा: हां बेटी सो जा ना , वैसे कल पूरा दिन ,मै सोच रहा हु कि आराम ही किया जाए यही पे , अभी तो हमलोगों के पास 8 दिन का समय है , आराम से लखनऊ घूमेंगे , जल्दी क्या है । कल अच्छे से सो के थकान मिटा लेंगे तो आराम से घुमा जाएगा , है ना।
प्रज्ञा : हां पापा , आपको जो मर्जी ।
पापा : बेटी आज तो तू बहुत थक गई होगी ना , इतना दौड़ भाग और फिर एग्जाम । परेशान हो गई होगी तू तो।
प्रज्ञा : हां पापा , रात को ट्रेन में भी मुझे अच्छी नींद नहीं आई थी ।
पापा : क्यों ,ऐसा क्यों , ट्रेन तो फर्स्ट क्लास वाला था , एकदम कंफर्टेबल। मै तो अच्छे से सो रहा था ।
प्रज्ञा पापा को कैसे बताए कि उसकी नींद ट्रेन में कैसे उड़ गई थी ।
प्रज्ञा : हां पापा , मगर अंजान जगह पे मुझ ढंग से नींद नहीं आती ना।
पापा : हां वो तो तेरी आदत बचपन से रहीं है ।
प्रज्ञा और पापा को कल सबेरे उठाने की जल्दी तो थी नहीं तो दोनों बाते करने लगे ।
प्रज्ञा : पापा, अपने मगर उन लड़कों को अच्छा सबक सिखाया । वो कल ट्रेन स्टेशन पे ।
पापा: हां , अब ये चूजे जैसे , छपरी लोग होते ही है कमीने, बे मतलब का ,बिना काम धंधे स्टेशनों पे , बस अड्डों पे खड़े रहते है और लड़कियां छेड़ते रहते है । उनको तो मै जूता खोल के मारता , वो तो पुलिस सही समय पे आ गई।
प्रज्ञा : मगर वो लड़के आपको चोट भी तो पहुंचा सकते थे ना पापा ?
पापा : तुम कैसी बात करती को मेरी बच्ची , मेरे सामने तुम्हे कोई छेड़े और मै ये सोचता रहूँ कि मुझे चोट लग जाएगी तेरे लिए आवाज उठाऊंगा तो ? तू मेरी बेटी है , और अब तो साली साहिबा भी हो , साली साहिबा मतलब पता है ना तुम्हे ?
प्रज्ञा : हां पापा , आधी घरवाली , हाहाहा...
पापा: हां , और कोई मेरी बेटी या घरवाली को छेड़े तो मै उसे कैसे छोड़ दूँ? बता जरा ?
प्रज्ञा : ओ-फोह , पापा घरवाली के साथ आधी लगाइए ना । मै साली हु ना , आपकी घरवाली तो दीदी है ना ।
पापा : अच्छा , मगर उससे क्या होता है । वो भी मेरी बेटी है , तू भी , वो भी मेरी घरवाली है , और तू भी , अब उसमें आधी हो या पूरी क्या फरक पड़ता है ।
प्रज्ञा : ह्म्म्म...पापा मगर वो पूरी घर वाली है इसलिए तो आपके साथ हर दिन सोती है ना । और आप उसे कितना प्यार करते है । और भगवान के दया से अब दीदी आपके प्यार से आपकी वारिश को भी उस दुनिया में जल्दी ही ला रही है ।
पापा ने सोचा ,ये मौका सही है प्रज्ञा से उसके दिल की बात उगलवाने का ।
पापा : तो आज तू भी मेरे साथ सोई है ना ? तो हुई ना आधी घर वाली , तू कहे तो पूरी बना दूं ? ह्म्म्म...
प्रज्ञा एकदम से चुप हो गई । जैसे पापा ने उसे कुछ ऐसा कह दिया हो कि जो बात उसे चकित कर गया हो ।
प्रज्ञा : पापा ये क्या कह रहे है । आप दीदी के पति है । मै आपको घरवाली कैसे बन सकती हूं।
पापा : क्यों नहीं बन सकती । वो मौलवी को नहीं देखा , कितने घरवाली थी उसकी ? और पहले के हिन्दू भी , एक से ज़्यादा शादी करते थे , राजा महराजा की कई रानिया होती थी ।
प्रज्ञा : तो क्या पापा , आपने मुझे अपनी घरवाली सोच के कि सिनेमा देखने के समय वैसे हाथ लगाया था ? आप दीदी के याद में बहक नहीं गए थे ?
पापा : और नहीं तो क्या , तुझे मै पराई समझता तो थोड़ी ना तेरे अंगों को ऐसे प्यार से छूता?
प्रज्ञा एकदम हिल गई थी । उसका शरीर कंपन करने लगा । उसे पापा के तरफ से इतना फ्रैंक जवाब का अंदेशा नहीं था ।
प्रज्ञा : पापा , आप प्लीज़ ऐसा मत बोलिए ।
प्रज्ञा भी अन्य लड़कियों के तरह ही थी ,जो पहले बार में ही अपने दिल किसी पुरुष के आगे खोल के नहीं रखना चाहती थी । पापा को प्रज्ञा उसी दिन से चाहती थी , जिस दिन उसने प्राची के चीखे पापा के रूम से आते हुए सुना था । मगर वो एकदम से राज़ी नहीं होना चाहती थी या पापा को इतनी आसानी से नहीं मिल जाने वाली थी ।
पापा भी ये सब बाते बस ट्राई कर रहे थे , कि अगर मामला बन गया तो प्रज्ञा उनकी हो जाएगी ,नहीं तो वो बोल देंगे कि मैं मजाक कर रहा था , जीजा साली वाला।
पापा : क्यों नहीं मेरी रानी ?
पापा के मुंह से रानी सुनके प्राची का दिल गदगद हो गया । मगर उसे अभी पापा की बातों से फिघलना नहीं था । क्योंकि वो इतना तो जानती थी जो चीज इंसान को आसानी से मिल जाए उसकी वो इंसान कदर कम करता है । अगर पापा के बात में वो हामी भरती गई तो पापा को लगेगा कि प्रज्ञा पापा के प्यार में पहले से ही पागल है । आग दोनों तरफ लगी थी मगर दोनों प्लेयर सेफ़ खेल खेल रहे थे ।
प्रज्ञा : पापा...दीदी आपके बच्चे की मां बनी है अभी अभी ? थोड़ा तो सोचिए उनके बारे में...
पापा : मैने कम कहा कि मैं उसके बारे में नहीं सोचूंगा , वो मेरी पूरी घरवाली है ना। मगर मुझे आधी घरवाली को भी अपना प्यार देने में कोई बुराई नहीं दिखता ।
प्रज्ञा : पापा मै अभी छोटी हु । ऊपर से करियर में आगे बढ़ना चाहती हूं। मै आपकी घरवाली कैसे बन सकती हु अभी ?
पापा: तो क्या हुआ , तू वो कर जो तुझे मन करे । मगर प्यार का और करियर का अलग अलग रास्ता होता है । तू प्यार के साथ अपने करियर पे भी ध्यान दे सकती है ।
प्रज्ञा : पापा ,मै.....
प्रज्ञा बोलते बोलते रुक गई ।
पापा : हाहाहा...सीरियस हो गया क्या ,मै तो मजाक कर रहा था बाबू।
प्रज्ञा का दिल ये नहीं सुनना चाहता था , वो चाहती थी कि पापा इस बात को ज्यादा खींचे और अंत में इजहार कर दे तो वो पापा को खुले दिल से अपना लेगी । मगर पापा ने उसके दिल के तार को छेड़ कर अचानक ही उसे तोड़ दिया और उसे मजाक का नाम दे दिया । उसके दिल को धक्का लगा और आंखों से आंसू निकल गई ।
वो पापा को ये सब नहीं दिखाना चाहती थी । इसलिए अपने आप को पापा के सामने कमजोर नहीं दिखा सकती थी ।
प्रज्ञा : अच्छी बात है , चलिए मै सो रही हूं। और प्रज्ञा ने करवट बदल लिया ।
पापा को लगा कि प्रज्ञा लाइन में आ रही है मगर ये क्या ? उसमें तो कोई रिएक्शन नहीं दिया ? क्या उसे ये सब अच्छा नहीं लगा ? क्या उसके दिल में कुछ नहीं मेरे लिए ? क्या मैने उसे नाराज़ कर दिया ? पापा भी अचंभे में थे । वो तो सोच रहे थे कि ये सब ट्रिक अपना के वो प्रज्ञा के मन का बात जान लेंगे । मगर प्रज्ञा ने तो एकदम से जज़्बात बदल दिए । क्या मैं गलत सोच रहा था । नहीं नहीं , आप किसी लड़की का चुचि दबाये और अगर उसके दिल में आपके लिए कुछ ना हो और वो विरोध नहीं करे ऐसा हो नहीं सकता । प्रज्ञा के दिल में मेरे लिए प्यार जरूर था इसलिए उसने कुछ बोला नहीं था । मगर अचानक ये मुकर क्यों गई ।
पापा ने लगभग १०-१५ मिनट तक अभी हुए पूरी बातचीत पर ज्ञान दिया और उनको एकदम पता लग गया कि गलती कहा हुई। प्रज्ञा आधी घरवाली वाली बात पे सीरियस थी और अचानक ही मैने उसे मजाक बोल के उसका दिल दुखा दिया । मतलब प्रज्ञा मुझ से प्यार करती है । मगर मै बुधु उसका दिल दुखा बैठा ।
पापा एकदम से प्रज्ञा के ओर सरक गए और उसे हल्के से अपने हाथों में थाम लिया और बोला : प्रज्ञा ,मेरी रानी ....?
प्रज्ञा : प्लीज पापा ,मै थकी हुई हूं। मुझे सोना है । सोने दीजिए ।
पापा ने सोचा , अभी अब प्रज्ञा गुस्से में है , उसको अभी आराम करने देना चाहिए । हो सकता था , आज अगर मै बेवकूफी नहीं करता तो आज रात प्रज्ञा मेरी बाहों में होती । मगर अभी उसे परेशान करना सही नहीं होगा । कल बात करते है आराम से ।
पापा अपनी बेटी के साथ की ज़बरदस्ती या बिना परमिशन के कुछ नहीं करना चाहते थे । उनको प्रज्ञा के मन की बात पता लग गई थी और उनको बिस्वास था कि आज नहीं तो कल वो प्रज्ञा की पटा जरूर लेंगे , उसे मना के।
प्रज्ञा थोड़ी देर तक कुछ सोचती रही ,फिर थकान के कारण उसकी आंखे बंद होने लगी ।
पापा ने भी सो जाना ही उचित समझा। और दोनों नींद के आगोश में चले गए ।
Welcome dear SarkarThanks Razi Bhabhi.
Hmmm... suggestion ke hisab se bura plan nhi hai. Try karunga.Welcome dear Sarkarvese ek chakkar Pragya aur uske papa ka maulvi aur uski begum beti ke pass lagwa do,vo Pragya ko seduce kr denge.Just a suggestion,do as u like,u r doing very well devar ji
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Nice update....Update 72:
हॉल में रोशनी हो चुकी थी और ये रोशनी एक तरह से प्रज्ञा के जीवन में नए प्रकाश की तरह था । उस पूरी पिक्चर के दौरान पापा की हिम्मत अंधेरे में बढ़ती गई और आधी फिल्म के बाद तो पापा ने जी भर के प्रज्ञा के संतरे को मिज के रख दिया था । पापा के हाथ लगते ही प्रज्ञा के बदन में जो सुरसुरी हुई थी वो उसके योनि तक पहुंचते देर न लगी । पापा ने आज तक प्रज्ञा के योनि को हाथ भी नहीं लगाया था । पापा ने क्या किसी भी लड़के ने आज तक प्रज्ञा के योनि पे हाथ नहीं लगाया था । पर वो पापा द्वारा चुचि दबाने मात्र से ही चु गई थी । उसका जींस, उसके योनि के सामने , प्रज्ञा के चुत रस से गिला ही चुका था ,जो गौर से देखने पे किसी को भी पता लग जाता ।
पापा ने प्रज्ञा को रोशनी में ऊपर से नीचे तक निहारा , उसके चेहरे पे हल्की सी शरम का भावना था । मगर गुस्सा का कोई भाव नहीं । यानी इतना तो पता चल गया पापा को की प्रज्ञा गुस्सा नहीं करने वाली उसके हरकतों पे । ये पापा के हिम्मत को बढ़ा देने के लिए काफी था । पापा ने प्रज्ञा के योनि के पास गिला हुआ जींस का हिस्सा देखा और समझ गए की उनकी बेटी को उनका चुचि मर्दन करना मजेदार लगा है और उनके हाथ लगाने को वो सह ना पाई और चरम सुख को प्राप्त हो गई है।
दोनों वहां कुछ नहीं बोले और बस पापा आगे आगे और प्रज्ञा पीछे पीछे मॉल से निकल गए , ऑटो लिया और वापस होटल पे आ गए। पापा और प्रज्ञा लिफ्ट में अंदर घुस गए । लिफ्ट का दरवाजा बंद होने वाला ही था कि वही स्टाफ जो सबेरे उन दोनों को रूम दिखाने आया था वो भी लिफ्ट में घुसा। और लिफ्ट चल परी।
वैसे तो होटल के स्टाफ पर्सनल तोर पे बात चित नहीं करते कस्टमर से मगर वो स्टाफ थोड़ा मुंह फट था या कह लो कि लोगों से बाते करना उसे पसंद थी ।
उसने ,पापा और प्रज्ञा को देखा और बोला : हाय सर , कैसा रहा आपका दिन , कहां कहां घूमे आपलोग अभी तक ।
पापा: कहां कही घुमा हु यार , अभी तो एक काम के चक्कर ने फंसे थे । वो ही पूरा दिन ले गया , और आज थोड़े थके हुए भी है सफर से तो ज्यादा घूमना सही नहीं लगा ।
स्टाफ: ओह नो प्रॉब्लम Sir, आराम से एक्सप्लोर कीजिये ।
पापा: ह्म्म्म... थैंक्यू।
स्टाफ: अभी कहा से आ रहे है ?
पापा: ओह अभी , अरे कही घूमने नहीं गए थे । थोड़ा फिल्म देखने निकल गए थे ।
तभी उस स्टाफ ने प्रज्ञा के जींस का वो गिला पार्ट देख लिया और वो समझ गया कि सिनेमा हॉल में क्या गुल खिलाया है दोनों ने।
स्टाफ: ओह अच्छी बात है सर ।
उसने थोड़ा सा रुक के फिर कहा : बुरा ना माने सर तो एक बात कहना चाहूंगा । भाभी जो काफी लक्की है। और भी ।
पापा चकित होके : अच्छा , धन्यवाद मगर कैसे ?
स्टाफ : भाभी जी लक्की है कि आप बहुत रोमांटिक है और आप लक्की है क्योंकि आपको भाभी जी जैसी कम उमर की दिखने वाली लड़की से शादी हुई है ।
प्रज्ञा लज्जा के मारे सिर झुका ली और पापा को समझ नहीं आया इसका जवाब क्या दे ।
पापा: हां भाभी कम उमर की दिखती नहीं है , वो कम उमर की ही है । मगर मै रोमांटिक हूं ये कैसे कह रहे हो ?
स्टाफ प्राची के चुत की तरफ पापा को आंखों से इशारा करता हुआ : वो तो पता चल गया से भाभी जी का हाव भाव देख के ।
पापा ने उसके आंखों को इशारे का पीछा किया और प्रज्ञा के गिले जींस को नोटिस किया । वो कुछ कहते लिफ्ट का दरवाजा खुल गया और वो 3 मंजिल पे पहुंच गया । और वो स्टाफ वही उतर गया और जाते जाते बोल गया : सर अच्छे से हनीमून एंजॉय करिए , कोई भी चीज की जरूरत तो , बियर, वाइन या कोंडोम तो बेझिझक बताइयेगा ।
पापा चौक गए मगर अंदर से थोड़ा खुश भी हो गए , वही प्रज्ञा एकदम शर्म से पानी पानी हो गई थी और लिफ्ट के कोने में सहमी खड़ी थी । उसके मन में एक अजीब सी उथल पुथल मच गई थी : ये होटल का स्टाफ कैसे मजाक कर रहा था पापा के साथ । सब पापा की गलती है , उन्होंने कपल नाम से रूम बुक किया है , वो तो होना ही था । सबको लगेगा कि अंदर हमदोनों हनीमून बमन रहे है । पर पापा ऐसा थोड़े न करेंगे । वो हॉल ने शायद वो बहक गए थे । उन्हें प्राची की याद आ रही होगी । तभी उनको ये लगा होगा कि ये मै हु दीदी नहीं , इसलिए वो उससे आगे नहीं बढ़े । उस कंडिशन या सिचुएशंस में कोई दूसरा मर्द होता तो शायद इतना धैर्य न रखता ।
तभी दोबारा लिफ्ट का दरवाजा खुला और वो दोनों का कमरा आ गया । पापा ने कार्ड से गेट खोला और दोनों अंदर आ गए और पापा ने अंदर से गेट को बंद कर लिया । अब बस उस पूरे आलीशान कमरे ने २ लोग थे , पापा और प्रज्ञा , एक बाप और बेटी , या यू कह लीजिए , एक नर और एक मादा । मादा जो अब तक संभोग का सुख भी नहीं जानती । एक मर्द जो काफी दिनों से संभोग ना करने के कारण तड़प रहा है ।
पापा ने प्रज्ञा को कहा : बेटी रात बहुत ही गया है , फ्रेश हो ले , फि मै फ्रेश हो जाऊंगा । और फिर आराम करेंगे ।
प्रज्ञा सिर हिला कर हामी भारी ओर अपनी नाइट सूट ले के बाथरूम ने चली गई ।
वहां जा कर हाथ मुंह धोई और फिर अपना कपड़ा बदलने लगी । प्रज्ञा ने जैसे ही अपनी टॉप उतारी उसने देखा की ब्रा में चूचक से पास मचोर पड़ी हुई थी । प्रज्ञा ने वो देख और शर्म से फिर लाल हो गई । दरअसल ये मचोर पापा के हाथ से प्रज्ञा की चुचि दबाने से हुआ था । वो अपने पापा से इस मामले में कुछ भी नहीं कहा या बात किया था । वो अपने आप से सवाल कर रही थी कि क्या उसे पापा की हरकत अच्छी लगी ? उसने अपने पापा का विरोध क्यों नहीं किया ? पापा का हाथ लगाना उसे इतना अच्छा क्यों लगा ? पापा ने जब अंधेरे में प्रज्ञा की चुचि दबाये तो पापा के मन में क्या था ?
वो अपने अंतर्मन से ये सवाल पूछती धीरे धीरे अपने नाइट सूट में आ गई , अंदर ब्रा भी नहीं पहने क्योंकि प्रज्ञा की सोते टाइम चुचियो पे कसावट की आदत नहीं परी थी और अभी तो उसकी चुचि में नेचुरल टाइटन्स था
और वो ज़्यादा बड़े या बेडौल भी नहीं हुए थे ।प्रज्ञा एक सुडौल चुचि को मालिक थी ।
खैर वो अपने आप से ही सवाल का जवाब ढूंढने लगी। हो सकता है पापा बहक गए हो , जैसे दीदी बहक गई थी , दोनों में कितने दिनों से प्यार नहीं हुआ है । पापा हो सकता है वो सिनेमा देख के खुद को कंट्रोल नहीं कर पाए हो और मुझे प्राची दीदी समझ के.....हां ये मुमकिन है , पापा बहक गए थे , उनको भी अपने किये पे पछतावा होगा , इसलिए तो वो मुझ से नज़रे भी नहीं मिला रहे थे । और अंत में उस ने ये पापा से बात करने का विचार किया इस बारे में ।
वो बाथरूम से नाइट सूट पहन के निकल गई और बोला : पापा आप भी फ्रेस हो जाइए ।
पापा : हां , वो जरा मेरे पजामे दे दे ।
पापा रात को पहनने के लिए पजामे और एक ढीला टी शर्ट लाये थे ।
प्रज्ञा ने निकल के दिया और जल्द ही उन्होंने भी अपने कपड़े बदल के सोने की तैयारी में आ गए । समय 10:45 PM हो रहा था ।
पापा ने सोने से पहले पानी पिया और प्रज्ञा से बोले : बेटी ,बेड तो एक ही है, तू कहेगी तो मै यहां सोफे पे सो जाता हूं।
पापा का मन था कि वो अपने बेटी के साथ ही सोये मगर वो बस ये दिखाना चाहते थे कि वो एक अच्छे मर्द है । जो लड़की की रिस्पेक्ट करता है ।
प्रज्ञा : पापा , मैं क्या कहती हु कि , बेड तो एक ही है ,मगर काफी बड़ा सा है , और मै अकेले इतना बड़ा बेड पे सोऊ और आप उस छोटे सोफे पे अनकंफर्टेबल हो के दिक्कत से सोए ,ये अच्छा नहीं । आप भी बेड पे आ जाइए । वैसे भी बचपन में तो आप ओर मम्मी के बीच कितने दिनों तक सोई हु मै और प्राची दादी के साथ सो जाती थी ।
प्रज्ञा थोड़ा सहमी जरूर हुई थी, उस हॉल वाली घटना के बाद मगर उसके दिल में भी पापा के उन हरकतों का विरोध बिल्कुल नहीं था । जो उसकी दीदी को मिला था , वो चाहती थी कि उसे भी मिले । पापा का प्यार । और आज जब पापा ने प्यार से उसके बदन को हाथ लगाया तो प्रज्ञा खुद को भाग्यशाली समझने लगी थी । वो बस थोड़ा झिझक रही थी क्योंकि वो जानती थी पापा उसके दीदी के पति है । और दीदी का विश्वास तोड़ना अच्छा नहीं है ।
पापा: ह्म्म्म...बात तो तेरी सही है , तू कोई पराई औरत तो नहीं है , मेरी ही बच्ची है । और ये भी बात तेरी ठीक है कि सोफा अनकंफर्टेबल तो हो जाएगा । एक काम कर मैं बीच में एक तकिए से पार्टिशन बना देता हु , उस तरफ तू सो जा और इस तरफ मै सो जाऊंगा । ताकि तुझे अपना स्पेस मिल सके ।
प्रज्ञा : पापा , आप कैसी बात कर रहे है , आप कोई गैर मर्द थोड़ी है , मेरे पापा है , इन सब की कोई जरूरत नहीं है । आपके साथ मै अपने आप को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हूं।
पापा समझ गए कि प्रज्ञा को हॉल वाली चुचि छुअन से कोई आपति नहीं है , यानी आगे बढ़ाने का ग्रीन सिग्नल । पापा खुश हो गए ।
पापा : ठीक है प्रज्ञा , आजा आज पापा के साथ सो जा तू ।
और इतना कहते हुए शर्मा जी बेड में घुस गए । AC ने कमरे में अच्छी ठंडक की हुई थी । सारी खिड़कियां और पर्दे भी लगे थे । पापा ने प्रज्ञा से कहा : बेटी , आते हुए लाइट ऑफ कर देना नहीं तो नींद नहीं आएगी ।
प्रज्ञा का दिल जोर से धड़कने लगा । हॉल के अंधेरे में पापा ने उसके साथ जो किया था उसके बाद उसे थोड़ा तो संकोज जरूर हो रहा था । मगर उसने अगले ही पल सोचा । कि जब दीदी पापा की बेटी हो के पापा के साथ सो सकती है तो मै भी तो बेटी ही हूं। प्रज्ञा का मन एक तरह से डर भी रहा था और उसका मन ये भी था कि पापा आए बढ़े और उसे रियल प्यार क्या होता है , वो बताए । दादी के द्वारा कहानियों और जानकारियों ने उसको तो अपने पापा से मिलन के लिए कब का मन था । इस ट्रिप पे ही उसे पापा का साथ इतने एकांत में मिल था । मगर वो पापा को कुछ बोलना नहीं चाहती थी । वो सोच रही थी कि शायद पापा को बुरा लगे तो , शायद पापा को लगे कि वो दीदी को धोखा दे रहे है तो । नहीं नहीं , वो पापा और दीदी के बीच दरार नहीं लाना चाहती थी । उसने लाइट बंद किया ओर नाइट लाइट जला दी । कमरा एकदम धीमी रोशनी में सराबोर हो गया । एकदम कैंडल लाइट के जैसा ।
प्रज्ञा चुपचाप आई और पापा संग चादर में घुस गई । पापा और प्रज्ञा के बीच में बस कुछ इंच का फसल ही रह गया था ।
प्रज्ञा : पापा आप दिन में आराम किए थे ना ? या थकान जायदा है ?
पापा : नहीं बेटी मैने दिन में अच्छे से कुछ देर की नींद खींच ली थी । तू जब एग्जाम दे रहे थी । हाहाहा...
प्रज्ञा : ओह ओके पापा , अब मुझ तो बहुत थकान लग रहा है पापा ।
पापा: हां बेटी सो जा ना , वैसे कल पूरा दिन ,मै सोच रहा हु कि आराम ही किया जाए यही पे , अभी तो हमलोगों के पास 8 दिन का समय है , आराम से लखनऊ घूमेंगे , जल्दी क्या है । कल अच्छे से सो के थकान मिटा लेंगे तो आराम से घुमा जाएगा , है ना।
प्रज्ञा : हां पापा , आपको जो मर्जी ।
पापा : बेटी आज तो तू बहुत थक गई होगी ना , इतना दौड़ भाग और फिर एग्जाम । परेशान हो गई होगी तू तो।
प्रज्ञा : हां पापा , रात को ट्रेन में भी मुझे अच्छी नींद नहीं आई थी ।
पापा : क्यों ,ऐसा क्यों , ट्रेन तो फर्स्ट क्लास वाला था , एकदम कंफर्टेबल। मै तो अच्छे से सो रहा था ।
प्रज्ञा पापा को कैसे बताए कि उसकी नींद ट्रेन में कैसे उड़ गई थी ।
प्रज्ञा : हां पापा , मगर अंजान जगह पे मुझ ढंग से नींद नहीं आती ना।
पापा : हां वो तो तेरी आदत बचपन से रहीं है ।
प्रज्ञा और पापा को कल सबेरे उठाने की जल्दी तो थी नहीं तो दोनों बाते करने लगे ।
प्रज्ञा : पापा, अपने मगर उन लड़कों को अच्छा सबक सिखाया । वो कल ट्रेन स्टेशन पे ।
पापा: हां , अब ये चूजे जैसे , छपरी लोग होते ही है कमीने, बे मतलब का ,बिना काम धंधे स्टेशनों पे , बस अड्डों पे खड़े रहते है और लड़कियां छेड़ते रहते है । उनको तो मै जूता खोल के मारता , वो तो पुलिस सही समय पे आ गई।
प्रज्ञा : मगर वो लड़के आपको चोट भी तो पहुंचा सकते थे ना पापा ?
पापा : तुम कैसी बात करती को मेरी बच्ची , मेरे सामने तुम्हे कोई छेड़े और मै ये सोचता रहूँ कि मुझे चोट लग जाएगी तेरे लिए आवाज उठाऊंगा तो ? तू मेरी बेटी है , और अब तो साली साहिबा भी हो , साली साहिबा मतलब पता है ना तुम्हे ?
प्रज्ञा : हां पापा , आधी घरवाली , हाहाहा...
पापा: हां , और कोई मेरी बेटी या घरवाली को छेड़े तो मै उसे कैसे छोड़ दूँ? बता जरा ?
प्रज्ञा : ओ-फोह , पापा घरवाली के साथ आधी लगाइए ना । मै साली हु ना , आपकी घरवाली तो दीदी है ना ।
पापा : अच्छा , मगर उससे क्या होता है । वो भी मेरी बेटी है , तू भी , वो भी मेरी घरवाली है , और तू भी , अब उसमें आधी हो या पूरी क्या फरक पड़ता है ।
प्रज्ञा : ह्म्म्म...पापा मगर वो पूरी घर वाली है इसलिए तो आपके साथ हर दिन सोती है ना । और आप उसे कितना प्यार करते है । और भगवान के दया से अब दीदी आपके प्यार से आपकी वारिश को भी उस दुनिया में जल्दी ही ला रही है ।
पापा ने सोचा ,ये मौका सही है प्रज्ञा से उसके दिल की बात उगलवाने का ।
पापा : तो आज तू भी मेरे साथ सोई है ना ? तो हुई ना आधी घर वाली , तू कहे तो पूरी बना दूं ? ह्म्म्म...
प्रज्ञा एकदम से चुप हो गई । जैसे पापा ने उसे कुछ ऐसा कह दिया हो कि जो बात उसे चकित कर गया हो ।
प्रज्ञा : पापा ये क्या कह रहे है । आप दीदी के पति है । मै आपको घरवाली कैसे बन सकती हूं।
पापा : क्यों नहीं बन सकती । वो मौलवी को नहीं देखा , कितने घरवाली थी उसकी ? और पहले के हिन्दू भी , एक से ज़्यादा शादी करते थे , राजा महराजा की कई रानिया होती थी ।
प्रज्ञा : तो क्या पापा , आपने मुझे अपनी घरवाली सोच के कि सिनेमा देखने के समय वैसे हाथ लगाया था ? आप दीदी के याद में बहक नहीं गए थे ?
पापा : और नहीं तो क्या , तुझे मै पराई समझता तो थोड़ी ना तेरे अंगों को ऐसे प्यार से छूता?
प्रज्ञा एकदम हिल गई थी । उसका शरीर कंपन करने लगा । उसे पापा के तरफ से इतना फ्रैंक जवाब का अंदेशा नहीं था ।
प्रज्ञा : पापा , आप प्लीज़ ऐसा मत बोलिए ।
प्रज्ञा भी अन्य लड़कियों के तरह ही थी ,जो पहले बार में ही अपने दिल किसी पुरुष के आगे खोल के नहीं रखना चाहती थी । पापा को प्रज्ञा उसी दिन से चाहती थी , जिस दिन उसने प्राची के चीखे पापा के रूम से आते हुए सुना था । मगर वो एकदम से राज़ी नहीं होना चाहती थी या पापा को इतनी आसानी से नहीं मिल जाने वाली थी ।
पापा भी ये सब बाते बस ट्राई कर रहे थे , कि अगर मामला बन गया तो प्रज्ञा उनकी हो जाएगी ,नहीं तो वो बोल देंगे कि मैं मजाक कर रहा था , जीजा साली वाला।
पापा : क्यों नहीं मेरी रानी ?
पापा के मुंह से रानी सुनके प्राची का दिल गदगद हो गया । मगर उसे अभी पापा की बातों से फिघलना नहीं था । क्योंकि वो इतना तो जानती थी जो चीज इंसान को आसानी से मिल जाए उसकी वो इंसान कदर कम करता है । अगर पापा के बात में वो हामी भरती गई तो पापा को लगेगा कि प्रज्ञा पापा के प्यार में पहले से ही पागल है । आग दोनों तरफ लगी थी मगर दोनों प्लेयर सेफ़ खेल खेल रहे थे ।
प्रज्ञा : पापा...दीदी आपके बच्चे की मां बनी है अभी अभी ? थोड़ा तो सोचिए उनके बारे में...
पापा : मैने कम कहा कि मैं उसके बारे में नहीं सोचूंगा , वो मेरी पूरी घरवाली है ना। मगर मुझे आधी घरवाली को भी अपना प्यार देने में कोई बुराई नहीं दिखता ।
प्रज्ञा : पापा मै अभी छोटी हु । ऊपर से करियर में आगे बढ़ना चाहती हूं। मै आपकी घरवाली कैसे बन सकती हु अभी ?
पापा: तो क्या हुआ , तू वो कर जो तुझे मन करे । मगर प्यार का और करियर का अलग अलग रास्ता होता है । तू प्यार के साथ अपने करियर पे भी ध्यान दे सकती है ।
प्रज्ञा : पापा ,मै.....
प्रज्ञा बोलते बोलते रुक गई ।
पापा : हाहाहा...सीरियस हो गया क्या ,मै तो मजाक कर रहा था बाबू।
प्रज्ञा का दिल ये नहीं सुनना चाहता था , वो चाहती थी कि पापा इस बात को ज्यादा खींचे और अंत में इजहार कर दे तो वो पापा को खुले दिल से अपना लेगी । मगर पापा ने उसके दिल के तार को छेड़ कर अचानक ही उसे तोड़ दिया और उसे मजाक का नाम दे दिया । उसके दिल को धक्का लगा और आंखों से आंसू निकल गई ।
वो पापा को ये सब नहीं दिखाना चाहती थी । इसलिए अपने आप को पापा के सामने कमजोर नहीं दिखा सकती थी ।
प्रज्ञा : अच्छी बात है , चलिए मै सो रही हूं। और प्रज्ञा ने करवट बदल लिया ।
पापा को लगा कि प्रज्ञा लाइन में आ रही है मगर ये क्या ? उसमें तो कोई रिएक्शन नहीं दिया ? क्या उसे ये सब अच्छा नहीं लगा ? क्या उसके दिल में कुछ नहीं मेरे लिए ? क्या मैने उसे नाराज़ कर दिया ? पापा भी अचंभे में थे । वो तो सोच रहे थे कि ये सब ट्रिक अपना के वो प्रज्ञा के मन का बात जान लेंगे । मगर प्रज्ञा ने तो एकदम से जज़्बात बदल दिए । क्या मैं गलत सोच रहा था । नहीं नहीं , आप किसी लड़की का चुचि दबाये और अगर उसके दिल में आपके लिए कुछ ना हो और वो विरोध नहीं करे ऐसा हो नहीं सकता । प्रज्ञा के दिल में मेरे लिए प्यार जरूर था इसलिए उसने कुछ बोला नहीं था । मगर अचानक ये मुकर क्यों गई ।
पापा ने लगभग १०-१५ मिनट तक अभी हुए पूरी बातचीत पर ज्ञान दिया और उनको एकदम पता लग गया कि गलती कहा हुई। प्रज्ञा आधी घरवाली वाली बात पे सीरियस थी और अचानक ही मैने उसे मजाक बोल के उसका दिल दुखा दिया । मतलब प्रज्ञा मुझ से प्यार करती है । मगर मै बुधु उसका दिल दुखा बैठा ।
पापा एकदम से प्रज्ञा के ओर सरक गए और उसे हल्के से अपने हाथों में थाम लिया और बोला : प्रज्ञा ,मेरी रानी ....?
प्रज्ञा : प्लीज पापा ,मै थकी हुई हूं। मुझे सोना है । सोने दीजिए ।
पापा ने सोचा , अभी अब प्रज्ञा गुस्से में है , उसको अभी आराम करने देना चाहिए । हो सकता था , आज अगर मै बेवकूफी नहीं करता तो आज रात प्रज्ञा मेरी बाहों में होती । मगर अभी उसे परेशान करना सही नहीं होगा । कल बात करते है आराम से ।
पापा अपनी बेटी के साथ की ज़बरदस्ती या बिना परमिशन के कुछ नहीं करना चाहते थे । उनको प्रज्ञा के मन की बात पता लग गई थी और उनको बिस्वास था कि आज नहीं तो कल वो प्रज्ञा की पटा जरूर लेंगे , उसे मना के।
प्रज्ञा थोड़ी देर तक कुछ सोचती रही ,फिर थकान के कारण उसकी आंखे बंद होने लगी ।
पापा ने भी सो जाना ही उचित समझा। और दोनों नींद के आगोश में चले गए ।
Nice and superb update....Update 72:
हॉल में रोशनी हो चुकी थी और ये रोशनी एक तरह से प्रज्ञा के जीवन में नए प्रकाश की तरह था । उस पूरी पिक्चर के दौरान पापा की हिम्मत अंधेरे में बढ़ती गई और आधी फिल्म के बाद तो पापा ने जी भर के प्रज्ञा के संतरे को मिज के रख दिया था । पापा के हाथ लगते ही प्रज्ञा के बदन में जो सुरसुरी हुई थी वो उसके योनि तक पहुंचते देर न लगी । पापा ने आज तक प्रज्ञा के योनि को हाथ भी नहीं लगाया था । पापा ने क्या किसी भी लड़के ने आज तक प्रज्ञा के योनि पे हाथ नहीं लगाया था । पर वो पापा द्वारा चुचि दबाने मात्र से ही चु गई थी । उसका जींस, उसके योनि के सामने , प्रज्ञा के चुत रस से गिला ही चुका था ,जो गौर से देखने पे किसी को भी पता लग जाता ।
पापा ने प्रज्ञा को रोशनी में ऊपर से नीचे तक निहारा , उसके चेहरे पे हल्की सी शरम का भावना था । मगर गुस्सा का कोई भाव नहीं । यानी इतना तो पता चल गया पापा को की प्रज्ञा गुस्सा नहीं करने वाली उसके हरकतों पे । ये पापा के हिम्मत को बढ़ा देने के लिए काफी था । पापा ने प्रज्ञा के योनि के पास गिला हुआ जींस का हिस्सा देखा और समझ गए की उनकी बेटी को उनका चुचि मर्दन करना मजेदार लगा है और उनके हाथ लगाने को वो सह ना पाई और चरम सुख को प्राप्त हो गई है।
दोनों वहां कुछ नहीं बोले और बस पापा आगे आगे और प्रज्ञा पीछे पीछे मॉल से निकल गए , ऑटो लिया और वापस होटल पे आ गए। पापा और प्रज्ञा लिफ्ट में अंदर घुस गए । लिफ्ट का दरवाजा बंद होने वाला ही था कि वही स्टाफ जो सबेरे उन दोनों को रूम दिखाने आया था वो भी लिफ्ट में घुसा। और लिफ्ट चल परी।
वैसे तो होटल के स्टाफ पर्सनल तोर पे बात चित नहीं करते कस्टमर से मगर वो स्टाफ थोड़ा मुंह फट था या कह लो कि लोगों से बाते करना उसे पसंद थी ।
उसने ,पापा और प्रज्ञा को देखा और बोला : हाय सर , कैसा रहा आपका दिन , कहां कहां घूमे आपलोग अभी तक ।
पापा: कहां कही घुमा हु यार , अभी तो एक काम के चक्कर ने फंसे थे । वो ही पूरा दिन ले गया , और आज थोड़े थके हुए भी है सफर से तो ज्यादा घूमना सही नहीं लगा ।
स्टाफ: ओह नो प्रॉब्लम Sir, आराम से एक्सप्लोर कीजिये ।
पापा: ह्म्म्म... थैंक्यू।
स्टाफ: अभी कहा से आ रहे है ?
पापा: ओह अभी , अरे कही घूमने नहीं गए थे । थोड़ा फिल्म देखने निकल गए थे ।
तभी उस स्टाफ ने प्रज्ञा के जींस का वो गिला पार्ट देख लिया और वो समझ गया कि सिनेमा हॉल में क्या गुल खिलाया है दोनों ने।
स्टाफ: ओह अच्छी बात है सर ।
उसने थोड़ा सा रुक के फिर कहा : बुरा ना माने सर तो एक बात कहना चाहूंगा । भाभी जो काफी लक्की है। और भी ।
पापा चकित होके : अच्छा , धन्यवाद मगर कैसे ?
स्टाफ : भाभी जी लक्की है कि आप बहुत रोमांटिक है और आप लक्की है क्योंकि आपको भाभी जी जैसी कम उमर की दिखने वाली लड़की से शादी हुई है ।
प्रज्ञा लज्जा के मारे सिर झुका ली और पापा को समझ नहीं आया इसका जवाब क्या दे ।
पापा: हां भाभी कम उमर की दिखती नहीं है , वो कम उमर की ही है । मगर मै रोमांटिक हूं ये कैसे कह रहे हो ?
स्टाफ प्राची के चुत की तरफ पापा को आंखों से इशारा करता हुआ : वो तो पता चल गया से भाभी जी का हाव भाव देख के ।
पापा ने उसके आंखों को इशारे का पीछा किया और प्रज्ञा के गिले जींस को नोटिस किया । वो कुछ कहते लिफ्ट का दरवाजा खुल गया और वो 3 मंजिल पे पहुंच गया । और वो स्टाफ वही उतर गया और जाते जाते बोल गया : सर अच्छे से हनीमून एंजॉय करिए , कोई भी चीज की जरूरत तो , बियर, वाइन या कोंडोम तो बेझिझक बताइयेगा ।
पापा चौक गए मगर अंदर से थोड़ा खुश भी हो गए , वही प्रज्ञा एकदम शर्म से पानी पानी हो गई थी और लिफ्ट के कोने में सहमी खड़ी थी । उसके मन में एक अजीब सी उथल पुथल मच गई थी : ये होटल का स्टाफ कैसे मजाक कर रहा था पापा के साथ । सब पापा की गलती है , उन्होंने कपल नाम से रूम बुक किया है , वो तो होना ही था । सबको लगेगा कि अंदर हमदोनों हनीमून बमन रहे है । पर पापा ऐसा थोड़े न करेंगे । वो हॉल ने शायद वो बहक गए थे । उन्हें प्राची की याद आ रही होगी । तभी उनको ये लगा होगा कि ये मै हु दीदी नहीं , इसलिए वो उससे आगे नहीं बढ़े । उस कंडिशन या सिचुएशंस में कोई दूसरा मर्द होता तो शायद इतना धैर्य न रखता ।
तभी दोबारा लिफ्ट का दरवाजा खुला और वो दोनों का कमरा आ गया । पापा ने कार्ड से गेट खोला और दोनों अंदर आ गए और पापा ने अंदर से गेट को बंद कर लिया । अब बस उस पूरे आलीशान कमरे ने २ लोग थे , पापा और प्रज्ञा , एक बाप और बेटी , या यू कह लीजिए , एक नर और एक मादा । मादा जो अब तक संभोग का सुख भी नहीं जानती । एक मर्द जो काफी दिनों से संभोग ना करने के कारण तड़प रहा है ।
पापा ने प्रज्ञा को कहा : बेटी रात बहुत ही गया है , फ्रेश हो ले , फि मै फ्रेश हो जाऊंगा । और फिर आराम करेंगे ।
प्रज्ञा सिर हिला कर हामी भारी ओर अपनी नाइट सूट ले के बाथरूम ने चली गई ।
वहां जा कर हाथ मुंह धोई और फिर अपना कपड़ा बदलने लगी । प्रज्ञा ने जैसे ही अपनी टॉप उतारी उसने देखा की ब्रा में चूचक से पास मचोर पड़ी हुई थी । प्रज्ञा ने वो देख और शर्म से फिर लाल हो गई । दरअसल ये मचोर पापा के हाथ से प्रज्ञा की चुचि दबाने से हुआ था । वो अपने पापा से इस मामले में कुछ भी नहीं कहा या बात किया था । वो अपने आप से सवाल कर रही थी कि क्या उसे पापा की हरकत अच्छी लगी ? उसने अपने पापा का विरोध क्यों नहीं किया ? पापा का हाथ लगाना उसे इतना अच्छा क्यों लगा ? पापा ने जब अंधेरे में प्रज्ञा की चुचि दबाये तो पापा के मन में क्या था ?
वो अपने अंतर्मन से ये सवाल पूछती धीरे धीरे अपने नाइट सूट में आ गई , अंदर ब्रा भी नहीं पहने क्योंकि प्रज्ञा की सोते टाइम चुचियो पे कसावट की आदत नहीं परी थी और अभी तो उसकी चुचि में नेचुरल टाइटन्स था
और वो ज़्यादा बड़े या बेडौल भी नहीं हुए थे ।प्रज्ञा एक सुडौल चुचि को मालिक थी ।
खैर वो अपने आप से ही सवाल का जवाब ढूंढने लगी। हो सकता है पापा बहक गए हो , जैसे दीदी बहक गई थी , दोनों में कितने दिनों से प्यार नहीं हुआ है । पापा हो सकता है वो सिनेमा देख के खुद को कंट्रोल नहीं कर पाए हो और मुझे प्राची दीदी समझ के.....हां ये मुमकिन है , पापा बहक गए थे , उनको भी अपने किये पे पछतावा होगा , इसलिए तो वो मुझ से नज़रे भी नहीं मिला रहे थे । और अंत में उस ने ये पापा से बात करने का विचार किया इस बारे में ।
वो बाथरूम से नाइट सूट पहन के निकल गई और बोला : पापा आप भी फ्रेस हो जाइए ।
पापा : हां , वो जरा मेरे पजामे दे दे ।
पापा रात को पहनने के लिए पजामे और एक ढीला टी शर्ट लाये थे ।
प्रज्ञा ने निकल के दिया और जल्द ही उन्होंने भी अपने कपड़े बदल के सोने की तैयारी में आ गए । समय 10:45 PM हो रहा था ।
पापा ने सोने से पहले पानी पिया और प्रज्ञा से बोले : बेटी ,बेड तो एक ही है, तू कहेगी तो मै यहां सोफे पे सो जाता हूं।
पापा का मन था कि वो अपने बेटी के साथ ही सोये मगर वो बस ये दिखाना चाहते थे कि वो एक अच्छे मर्द है । जो लड़की की रिस्पेक्ट करता है ।
प्रज्ञा : पापा , मैं क्या कहती हु कि , बेड तो एक ही है ,मगर काफी बड़ा सा है , और मै अकेले इतना बड़ा बेड पे सोऊ और आप उस छोटे सोफे पे अनकंफर्टेबल हो के दिक्कत से सोए ,ये अच्छा नहीं । आप भी बेड पे आ जाइए । वैसे भी बचपन में तो आप ओर मम्मी के बीच कितने दिनों तक सोई हु मै और प्राची दादी के साथ सो जाती थी ।
प्रज्ञा थोड़ा सहमी जरूर हुई थी, उस हॉल वाली घटना के बाद मगर उसके दिल में भी पापा के उन हरकतों का विरोध बिल्कुल नहीं था । जो उसकी दीदी को मिला था , वो चाहती थी कि उसे भी मिले । पापा का प्यार । और आज जब पापा ने प्यार से उसके बदन को हाथ लगाया तो प्रज्ञा खुद को भाग्यशाली समझने लगी थी । वो बस थोड़ा झिझक रही थी क्योंकि वो जानती थी पापा उसके दीदी के पति है । और दीदी का विश्वास तोड़ना अच्छा नहीं है ।
पापा: ह्म्म्म...बात तो तेरी सही है , तू कोई पराई औरत तो नहीं है , मेरी ही बच्ची है । और ये भी बात तेरी ठीक है कि सोफा अनकंफर्टेबल तो हो जाएगा । एक काम कर मैं बीच में एक तकिए से पार्टिशन बना देता हु , उस तरफ तू सो जा और इस तरफ मै सो जाऊंगा । ताकि तुझे अपना स्पेस मिल सके ।
प्रज्ञा : पापा , आप कैसी बात कर रहे है , आप कोई गैर मर्द थोड़ी है , मेरे पापा है , इन सब की कोई जरूरत नहीं है । आपके साथ मै अपने आप को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हूं।
पापा समझ गए कि प्रज्ञा को हॉल वाली चुचि छुअन से कोई आपति नहीं है , यानी आगे बढ़ाने का ग्रीन सिग्नल । पापा खुश हो गए ।
पापा : ठीक है प्रज्ञा , आजा आज पापा के साथ सो जा तू ।
और इतना कहते हुए शर्मा जी बेड में घुस गए । AC ने कमरे में अच्छी ठंडक की हुई थी । सारी खिड़कियां और पर्दे भी लगे थे । पापा ने प्रज्ञा से कहा : बेटी , आते हुए लाइट ऑफ कर देना नहीं तो नींद नहीं आएगी ।
प्रज्ञा का दिल जोर से धड़कने लगा । हॉल के अंधेरे में पापा ने उसके साथ जो किया था उसके बाद उसे थोड़ा तो संकोज जरूर हो रहा था । मगर उसने अगले ही पल सोचा । कि जब दीदी पापा की बेटी हो के पापा के साथ सो सकती है तो मै भी तो बेटी ही हूं। प्रज्ञा का मन एक तरह से डर भी रहा था और उसका मन ये भी था कि पापा आए बढ़े और उसे रियल प्यार क्या होता है , वो बताए । दादी के द्वारा कहानियों और जानकारियों ने उसको तो अपने पापा से मिलन के लिए कब का मन था । इस ट्रिप पे ही उसे पापा का साथ इतने एकांत में मिल था । मगर वो पापा को कुछ बोलना नहीं चाहती थी । वो सोच रही थी कि शायद पापा को बुरा लगे तो , शायद पापा को लगे कि वो दीदी को धोखा दे रहे है तो । नहीं नहीं , वो पापा और दीदी के बीच दरार नहीं लाना चाहती थी । उसने लाइट बंद किया ओर नाइट लाइट जला दी । कमरा एकदम धीमी रोशनी में सराबोर हो गया । एकदम कैंडल लाइट के जैसा ।
प्रज्ञा चुपचाप आई और पापा संग चादर में घुस गई । पापा और प्रज्ञा के बीच में बस कुछ इंच का फसल ही रह गया था ।
प्रज्ञा : पापा आप दिन में आराम किए थे ना ? या थकान जायदा है ?
पापा : नहीं बेटी मैने दिन में अच्छे से कुछ देर की नींद खींच ली थी । तू जब एग्जाम दे रहे थी । हाहाहा...
प्रज्ञा : ओह ओके पापा , अब मुझ तो बहुत थकान लग रहा है पापा ।
पापा: हां बेटी सो जा ना , वैसे कल पूरा दिन ,मै सोच रहा हु कि आराम ही किया जाए यही पे , अभी तो हमलोगों के पास 8 दिन का समय है , आराम से लखनऊ घूमेंगे , जल्दी क्या है । कल अच्छे से सो के थकान मिटा लेंगे तो आराम से घुमा जाएगा , है ना।
प्रज्ञा : हां पापा , आपको जो मर्जी ।
पापा : बेटी आज तो तू बहुत थक गई होगी ना , इतना दौड़ भाग और फिर एग्जाम । परेशान हो गई होगी तू तो।
प्रज्ञा : हां पापा , रात को ट्रेन में भी मुझे अच्छी नींद नहीं आई थी ।
पापा : क्यों ,ऐसा क्यों , ट्रेन तो फर्स्ट क्लास वाला था , एकदम कंफर्टेबल। मै तो अच्छे से सो रहा था ।
प्रज्ञा पापा को कैसे बताए कि उसकी नींद ट्रेन में कैसे उड़ गई थी ।
प्रज्ञा : हां पापा , मगर अंजान जगह पे मुझ ढंग से नींद नहीं आती ना।
पापा : हां वो तो तेरी आदत बचपन से रहीं है ।
प्रज्ञा और पापा को कल सबेरे उठाने की जल्दी तो थी नहीं तो दोनों बाते करने लगे ।
प्रज्ञा : पापा, अपने मगर उन लड़कों को अच्छा सबक सिखाया । वो कल ट्रेन स्टेशन पे ।
पापा: हां , अब ये चूजे जैसे , छपरी लोग होते ही है कमीने, बे मतलब का ,बिना काम धंधे स्टेशनों पे , बस अड्डों पे खड़े रहते है और लड़कियां छेड़ते रहते है । उनको तो मै जूता खोल के मारता , वो तो पुलिस सही समय पे आ गई।
प्रज्ञा : मगर वो लड़के आपको चोट भी तो पहुंचा सकते थे ना पापा ?
पापा : तुम कैसी बात करती को मेरी बच्ची , मेरे सामने तुम्हे कोई छेड़े और मै ये सोचता रहूँ कि मुझे चोट लग जाएगी तेरे लिए आवाज उठाऊंगा तो ? तू मेरी बेटी है , और अब तो साली साहिबा भी हो , साली साहिबा मतलब पता है ना तुम्हे ?
प्रज्ञा : हां पापा , आधी घरवाली , हाहाहा...
पापा: हां , और कोई मेरी बेटी या घरवाली को छेड़े तो मै उसे कैसे छोड़ दूँ? बता जरा ?
प्रज्ञा : ओ-फोह , पापा घरवाली के साथ आधी लगाइए ना । मै साली हु ना , आपकी घरवाली तो दीदी है ना ।
पापा : अच्छा , मगर उससे क्या होता है । वो भी मेरी बेटी है , तू भी , वो भी मेरी घरवाली है , और तू भी , अब उसमें आधी हो या पूरी क्या फरक पड़ता है ।
प्रज्ञा : ह्म्म्म...पापा मगर वो पूरी घर वाली है इसलिए तो आपके साथ हर दिन सोती है ना । और आप उसे कितना प्यार करते है । और भगवान के दया से अब दीदी आपके प्यार से आपकी वारिश को भी उस दुनिया में जल्दी ही ला रही है ।
पापा ने सोचा ,ये मौका सही है प्रज्ञा से उसके दिल की बात उगलवाने का ।
पापा : तो आज तू भी मेरे साथ सोई है ना ? तो हुई ना आधी घर वाली , तू कहे तो पूरी बना दूं ? ह्म्म्म...
प्रज्ञा एकदम से चुप हो गई । जैसे पापा ने उसे कुछ ऐसा कह दिया हो कि जो बात उसे चकित कर गया हो ।
प्रज्ञा : पापा ये क्या कह रहे है । आप दीदी के पति है । मै आपको घरवाली कैसे बन सकती हूं।
पापा : क्यों नहीं बन सकती । वो मौलवी को नहीं देखा , कितने घरवाली थी उसकी ? और पहले के हिन्दू भी , एक से ज़्यादा शादी करते थे , राजा महराजा की कई रानिया होती थी ।
प्रज्ञा : तो क्या पापा , आपने मुझे अपनी घरवाली सोच के कि सिनेमा देखने के समय वैसे हाथ लगाया था ? आप दीदी के याद में बहक नहीं गए थे ?
पापा : और नहीं तो क्या , तुझे मै पराई समझता तो थोड़ी ना तेरे अंगों को ऐसे प्यार से छूता?
प्रज्ञा एकदम हिल गई थी । उसका शरीर कंपन करने लगा । उसे पापा के तरफ से इतना फ्रैंक जवाब का अंदेशा नहीं था ।
प्रज्ञा : पापा , आप प्लीज़ ऐसा मत बोलिए ।
प्रज्ञा भी अन्य लड़कियों के तरह ही थी ,जो पहले बार में ही अपने दिल किसी पुरुष के आगे खोल के नहीं रखना चाहती थी । पापा को प्रज्ञा उसी दिन से चाहती थी , जिस दिन उसने प्राची के चीखे पापा के रूम से आते हुए सुना था । मगर वो एकदम से राज़ी नहीं होना चाहती थी या पापा को इतनी आसानी से नहीं मिल जाने वाली थी ।
पापा भी ये सब बाते बस ट्राई कर रहे थे , कि अगर मामला बन गया तो प्रज्ञा उनकी हो जाएगी ,नहीं तो वो बोल देंगे कि मैं मजाक कर रहा था , जीजा साली वाला।
पापा : क्यों नहीं मेरी रानी ?
पापा के मुंह से रानी सुनके प्राची का दिल गदगद हो गया । मगर उसे अभी पापा की बातों से फिघलना नहीं था । क्योंकि वो इतना तो जानती थी जो चीज इंसान को आसानी से मिल जाए उसकी वो इंसान कदर कम करता है । अगर पापा के बात में वो हामी भरती गई तो पापा को लगेगा कि प्रज्ञा पापा के प्यार में पहले से ही पागल है । आग दोनों तरफ लगी थी मगर दोनों प्लेयर सेफ़ खेल खेल रहे थे ।
प्रज्ञा : पापा...दीदी आपके बच्चे की मां बनी है अभी अभी ? थोड़ा तो सोचिए उनके बारे में...
पापा : मैने कम कहा कि मैं उसके बारे में नहीं सोचूंगा , वो मेरी पूरी घरवाली है ना। मगर मुझे आधी घरवाली को भी अपना प्यार देने में कोई बुराई नहीं दिखता ।
प्रज्ञा : पापा मै अभी छोटी हु । ऊपर से करियर में आगे बढ़ना चाहती हूं। मै आपकी घरवाली कैसे बन सकती हु अभी ?
पापा: तो क्या हुआ , तू वो कर जो तुझे मन करे । मगर प्यार का और करियर का अलग अलग रास्ता होता है । तू प्यार के साथ अपने करियर पे भी ध्यान दे सकती है ।
प्रज्ञा : पापा ,मै.....
प्रज्ञा बोलते बोलते रुक गई ।
पापा : हाहाहा...सीरियस हो गया क्या ,मै तो मजाक कर रहा था बाबू।
प्रज्ञा का दिल ये नहीं सुनना चाहता था , वो चाहती थी कि पापा इस बात को ज्यादा खींचे और अंत में इजहार कर दे तो वो पापा को खुले दिल से अपना लेगी । मगर पापा ने उसके दिल के तार को छेड़ कर अचानक ही उसे तोड़ दिया और उसे मजाक का नाम दे दिया । उसके दिल को धक्का लगा और आंखों से आंसू निकल गई ।
वो पापा को ये सब नहीं दिखाना चाहती थी । इसलिए अपने आप को पापा के सामने कमजोर नहीं दिखा सकती थी ।
प्रज्ञा : अच्छी बात है , चलिए मै सो रही हूं। और प्रज्ञा ने करवट बदल लिया ।
पापा को लगा कि प्रज्ञा लाइन में आ रही है मगर ये क्या ? उसमें तो कोई रिएक्शन नहीं दिया ? क्या उसे ये सब अच्छा नहीं लगा ? क्या उसके दिल में कुछ नहीं मेरे लिए ? क्या मैने उसे नाराज़ कर दिया ? पापा भी अचंभे में थे । वो तो सोच रहे थे कि ये सब ट्रिक अपना के वो प्रज्ञा के मन का बात जान लेंगे । मगर प्रज्ञा ने तो एकदम से जज़्बात बदल दिए । क्या मैं गलत सोच रहा था । नहीं नहीं , आप किसी लड़की का चुचि दबाये और अगर उसके दिल में आपके लिए कुछ ना हो और वो विरोध नहीं करे ऐसा हो नहीं सकता । प्रज्ञा के दिल में मेरे लिए प्यार जरूर था इसलिए उसने कुछ बोला नहीं था । मगर अचानक ये मुकर क्यों गई ।
पापा ने लगभग १०-१५ मिनट तक अभी हुए पूरी बातचीत पर ज्ञान दिया और उनको एकदम पता लग गया कि गलती कहा हुई। प्रज्ञा आधी घरवाली वाली बात पे सीरियस थी और अचानक ही मैने उसे मजाक बोल के उसका दिल दुखा दिया । मतलब प्रज्ञा मुझ से प्यार करती है । मगर मै बुधु उसका दिल दुखा बैठा ।
पापा एकदम से प्रज्ञा के ओर सरक गए और उसे हल्के से अपने हाथों में थाम लिया और बोला : प्रज्ञा ,मेरी रानी ....?
प्रज्ञा : प्लीज पापा ,मै थकी हुई हूं। मुझे सोना है । सोने दीजिए ।
पापा ने सोचा , अभी अब प्रज्ञा गुस्से में है , उसको अभी आराम करने देना चाहिए । हो सकता था , आज अगर मै बेवकूफी नहीं करता तो आज रात प्रज्ञा मेरी बाहों में होती । मगर अभी उसे परेशान करना सही नहीं होगा । कल बात करते है आराम से ।
पापा अपनी बेटी के साथ की ज़बरदस्ती या बिना परमिशन के कुछ नहीं करना चाहते थे । उनको प्रज्ञा के मन की बात पता लग गई थी और उनको बिस्वास था कि आज नहीं तो कल वो प्रज्ञा की पटा जरूर लेंगे , उसे मना के।
प्रज्ञा थोड़ी देर तक कुछ सोचती रही ,फिर थकान के कारण उसकी आंखे बंद होने लगी ।
पापा ने भी सो जाना ही उचित समझा। और दोनों नींद के आगोश में चले गए ।