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Fantasy क्या यही प्यार है

Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
Supreme
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nice update ..to mahesh dosti karna chahta tha tanu se isliye itna ghuma phira ke baat kar raha tha 🤣..
abhishek aur nayan ne apne taraf se puri safai de di tanu ko lekar ..
par yaha aisa laga nahi ki dono me se koi bhi usse pyar type karta hai 🤔..
ab mahesh ki dosti accept kar li tanu ne 🤩..
par kya wo tanu ke dil me jagah bana payega dekhte hai ..
धन्यवाद आपका सर जी इतनी अच्छी समीक्षा देने के लिए।

आपकी समीक्षा को देखकर हमारा उत्साह बढ़ता है सर जी

अगला भाग 11 बजे तक लिखेंगे।
साथ बने रहिए।
 
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Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
Supreme
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अपडेट अच्छा था
Amzing update
Aaj तो school ke dino ki yaad a rahi h kese dosto ke sath masti kiya karte the
Misss u school day
धन्यवाद मान्यवर आपका।
साथ बने रहिए।
 

Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
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सातवां भाग


तनु ने महेश की दोस्ती स्वीकार कर ली। जिससे महेश बहुत खुश हो गया। कुछ देर इधर उधर की बात करने में बाद हम सब अपनी कक्षा में चले गए। कक्षा में आने के बाद महेश ने अपनी बैठने की जगह बदल ली और वो हम दोनों के पास आकर बैठ गया। फिर क्लास शुरू हुई और हमने मन लगाकर पढ़ाई की। छुट्टी होने के बाद हम अपने घर को चले गए।

रात में खाना खाते समय काजल ने मुझसे कहा।

काजल- वो लड़की कौन है भैया जिसके साथ आजकल आप रहते हैं। आपको पता है स्कूल में मुझको तरह तरह की बाते बोलते हैं मेरे दोस्त लोग आपके बारे में।

काजल की बात सुनकर पापा और अम्मा मुझे देखन लगे अम्मा ने पूछा।

अम्मा- कौन लड़की।

मैं- अम्मा वो प्रधानाचार्य सर के दोस्त की बेटी है। तनु नाम है उसका । वो पढ़ाई में थोड़ा कमजोर है तो प्रधानाचार्य सर ने मुझे और अभिषेक को उसकी पढ़ाई में मदद करने के लिए कहा है और उसे हमारे साथ रहने के लिए कहा है, इसलिए वो हम दोनों के साथ रहती है स्कूल समय में।

अम्मा- तू उसे क्यों पढ़ाएगा। उसके लिए मास्टर हैं न। तो बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। एक तो तुझे वैसे भी पढ़ने के लिए कम समय मिलता है ऊपर से तू दूसरे को पढ़ाने का ठेका ले रखा है। इससे तुम्हारी पढ़ाई का नुकसान भी तो होगा।

पापा- अरे कैसी बात करती हो भाग्यवान। किसी की पढ़ाई में मदद करना तो बहुत अच्छी बात है। इससे नयन का ज्ञान तो और बढ़ेगा। जब ये उस लड़की को कोई चीज बताएगा कोई सवाल हल करवाएगा तो इसे वो सवाल हमेशा याद रहेगा। और वैसे भी किसी की मदद करना तो पुण्य का काम होता है।

अम्मा- पुण्य का काम तो होता है। लेकिन अपना नुकसान करके अगर किसी की भलाई की जाए तो वो पुण्य का काम नहीं बेवकूफी का काम होता है। और तू नयन। बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। किसी की भलाई बाद में करे। पहले अपनी भलाई तो कर ले।

अम्मा की बात सुनकर सभी खामोश हो गए। मैं काजल को देख रहा था जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी। मैं सोच रहा था, इसे यही वक्त मिला था क्या ये बात छेड़ने के लिए। खाना खाकर जब हम दोनों सोने के लिए गए तो मैंने काजल का कान पकड़ कर ऐंठ दिया जिससे वो चीख पड़ी और बोली।

काजल- क्या कर रहे हो भैया। मुझे दर्द हो रहा है।

मैं- तुम बहुत शरारती हो गई हो काजल। ये सब बातें अम्मा के सामने बोलने की क्या जरूरत थी। पहले मुझसे पूछती तुम तो मैं तुझे सब कुछ बता ही देता। खामखाह अम्मा की डांट सुननी पड़ी।

काजल- मैंने तो वही कहा जो मुझे मेरे दोस्तों ने बताया। मुझे थोड़े ही पता था कि आपको अम्मा डाटेंगी।

मैं- अब आगे से कुछ भी बोलने से पहले एक बार मुझसे बात कर लेना।

काजल- ठीक है भैया अब कान छोड़ो मेरा दर्द कर रहा है।

मैंने काजल को छोड़ दिया और अपने बिस्तर पर सोने चला गया। सुबह उठकर मैंने फ्रेश होकर कलेवा खाया और काजल के साथ स्कूल चला गया। स्कूल में पहुंच कर मैं अभिषेक से मिला और अपनी कक्षा में चल पड़ा। कक्षा में जाकर देखा तो महेश और तनु पहले ही आ गए थे और अपनी जगह पर बैठकर एक दूसरे से बात कर रहे थे।

मैं और अभिषेक जाकर दोनों से मिले और अपनी सीट पर बैठ गए। कुछ देर बाद शिक्षक भी आ गए और क्लास शुरू हो गई। ऐसे ही दिन पर दिन गुजरते रहे। मैं अपनी दिनचर्या से रोज स्कूल आता अपने दोस्तों से मिलता। अपनी क्लास अटेंड करता और अपने घर चला जाता। इस दौरान तनु जो भी पढ़ाई के संबंध में अपनी समस्या बताती उसे मैं सुलझाने की कोशिश करता।
इसी तरह 2 से ढाई महीने का समय बीत गया और इस दौरान बदलाव ये आया कि महेश और तनु और ज्यादा नज़दीक आ गए। दोनों में पहले से ज्यादा बहुत ज्यादा बातें होने लगी।

अभिषेक और मेरी बात चीत पहले की ही तरह तनु से होती थी। तनु ने मेरे बारे में अभिषेक से पूछा भी कि मैं लड़कियों से इतना दूर क्यों भागता हूँ, लेकिन अभिषेक उसे यही बताता था कि उसे लड़कियों में रुचि नहीं है। जिससे तनु को विश्वास नहीं होता था।

यही बात उसने महेश से भी पूछी थी, लेकिन महेश तो अपनी गोटी फिट करने की फिराक में था तो उसने तनु को कुछ नहीं बताया। एक दिन मैं, अभिषेक, महेश और तनु भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे थे। अभिषेक और महेश तनु से बात कर रहे थे और मैं वहां उगी घांस के साथ खेल रहा था। तनु काफी देर से मुझे समझने की कोशिश कर रही थी, जब मैं उनकी तरफ देखता तो वो मुस्कुरा देती, जवाब में मैं भी मुस्कुरा देता। थोड़ी देर बाद जब तनु से न रह गया तो उसने मुझसे पूछा।

तनु- नयन। अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात पूछना चाहती हूं तुमसे।

मैं- हाँ पूछो न क्या पूछना है।

तनु- कुछ व्यक्तिगत सवाल था इसलिए पूछा तुमसे।

मैं- इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है। आखिर हम इतने दिन से साथ हैं और हम दोस्त भी हैं तो पूछ सकती हो तुम।

तनु- हम लगभग 3-4 महीने से साथ हैं। लेकिन कभी तुमने मुझसे बात करने की कोशिश नहीं की। जब मैं तुमसे बात करती हूँ। तभी बात करते हो, जितना पूछती हूँ उतना जवाब देते हो।

मैं- नहीं तनु ऐसा कुछ नहीं है। जैसा तुम समझ रही हो। वो तो बस ऐसे ही तुम लोग बात करते हो। तो सुनने में अच्छा लगता है।

तनु- मैं कुछ नहीं समझ रही हूँ। जो सच है वही बोल रही हूँ। क्या तुम्हें मेरा साथ रहना पसंद नहीं है तुमको या मैं ज्यादा ही परेशान करती हूँ तुमको। अगर ऐसा है तो बता दो। मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगी।

मैं- नहीं तनु ऐसी बात नहीं है। मैं लड़कियों से बहुत कम बात करता हूँ, इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है।

तनु- तुम लड़कियों से बात नहीं करते, लेकिन मुझसे तो कर ही सकते हो। आखिर मैं तुम्हारी दोस्त हूँ। और क्या मैं जान सकती हूँ कि तुम लड़कियों से बात क्यों नहीं करते। क्या उनमें कांटे लगे होते हैं। या तुम्हें उन्होंने कभी कुछ कहा है।

मैं- ये तो तुम्हें अभिषेक बता ही चुका होगा तो मुझसे क्यों पूछ रही हो फिर।

तनु- यार तुम अब लड़कियों की तरह भाव मत खाओ। बताना है तो बताओ नहीं तो कोई बात नहीं।

इतना कहकर तनु मुंह घुमाकर बैठ गई। यह देखकर मैंने मन ही मन सोचा कि लड़कियों के नखरे भी कितने अजीब होते हैं। बिना किसी बात के नाराज़ होना और नखरे दिखाना इन्हें बहुत अच्छी तरह से आता है। मैंने मुस्कुराते हुए तनु से कहा।

मैं- मैं नखरे नहीं दिखा रहा हूँ। बस ऐसे ही तुम्हें छेड़ रहा था।

गलती से मेरे मुंह से यह निकल गया। मेरी बात सुनकर अभिषेक और महेश मुझे देखने लगे। अभिषेक तुरन्त मेरी खिंचाई करते हुए मुझसे बोला।

अभिषेक- साले तू कब से लड़की छेड़ने लगा। मतलब पापा का लाडला बिगड़ रहा है।

मैं- अबे पापा का लाडला नहीं होता मां का लाडला होता है।

अभिषेक- हाँ हाँ मालूम है, लेकिन तू माँ का लाडला नहीं पापा का लाडला है। और तू कब बिगड़ रहा है।

तनु- तुम दोनों अब चुप हो जाओ। नयन तुम बताओगे कुछ या नहीं।

फिर मैंने तनु को पापा की लड़कियों के संबंध में सिखाई हुई सारी बात बता दी। जिसे सुनने के बाद तनु ने कहा।

तनु- क्या यार नयन तुम भी अब तक उस बात को लेकर बैठे हुए हो। माँ बाप का काम ही है बोलना। वो उनके जमाने की बाते हैं। लवकिं अब जमाना बदल गया है। अब तो मौज मस्ती के दिन शुरू हुए हैं और तुम अपने पापा की बात लेकर अब तक बैठे हुए हो। माना कि उन्होंने जो भी कहा तुमसे वो गलत नहीं है, लेकिन अपने आपको समय के साथ बदलना चाहिए।

मैं- मतलब क्या है तुम्हारा। कहना क्या चाहती हो तुम। माँ बाप की बात मानना गलत है। मैं गलत हूँ।

तनु- मैंने ऐसा तो नहीं कहा। तुम्हारे मां बाप ने जो कहा वो सही था, लेकिन उनके कहने का मतलब कुछ और था और तुमने कुछ और समझ लिया। तुम्हें लड़कियों की इज़्ज़त करनी चाहिए, लेकिन लेकिन इसके लिए उनसे दूर भागने की क्या जरूरत है। तुम उनसे बात चीत तो कर ही सकते हो। हो सकता है इसी बातचीत से तुम्हारे मन में उनके लिए कुछ अलग सा महसूस हो। मेरी बातों पर गौर करना तुम नयन।

मैंने तनु से इसके आगे कुछ भी नहीं कहा। तनु इतना कहकर वहां से चली गई। तनु की कुछ बातें मुझे सही लगी। तो कुछ बातें मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आई। मैंने सोचा कि पापा ने लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाया है, लेकिन उनसे बातचीत, साथ उठना बैठना, उनके साथ रखने से मना तो नहीं किया है। अब मुझे क्या करना चाहिए। तनु की बात माननी चाहिए या मैं जैसा हूँ वैसे ही रहना चाहिए।
मैं अपनी ही सोच में डूबा हुआ था तभी अभिषेक ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

अभिषेक- क्या सोच रहा है भाई।

मैं- यार ये तनु क्या बोलकर चली गई। उसकी बातें सुनकर मैं तो उहापोह में पड़ गया हूँ। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए। पापा की बात भी गलत नहीं है और तनु की कुछ बातें भी सही हैं।

अभिषेक- मैं भी तो तुझे हमेशा यही कहता था और आज तनु भी यही कह रही है। अब समय आ गया है कि तू अपने आपको थोड़ा सा बदल लें लड़कियों के मामले में। तेरे पापा ने भी यहीं कहा होगा तुझे, लेकिन तूने कुछ और मतलब निकाल लिया।

मैं- ठीक है मेरे भाई। गौर करूँगा इस बात पर। अब चल क्लास का समय हो गया है।

इतना बोलकर मैं अभिषेक और महेश अपनी कक्षा की तरफ चल दिए।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
 

SHADOW KING

Supreme
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nice update ..tanu aur mahesh me ab achchi dosti ho gayi hai .

kajal ne ghar me tanu ka matter chheda 😁..
papa ka kehna bhi sahi hai ki dusro ko padhane se khudka gyaan bhi badhta hai 😍,,par maa to maa hai apne bete ke baare me sochegi hi .... ki nayan ko khud padhne ke liye time nahi milta jyada to wo kisi aur pe apna waqt barbaad na kare ..

ye tanu ne itne mahine observe kiya nayan ko aur phir ye ladkiyo se baat na karne ka karan puchha 🤔..
waise tanu ki baate bhi sahi hai par pitaji ne bhi ladkiyo ki ijjat karne ko kaha hai wo bhi galat nahi .
 

Luffy

Well-Known Member
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सातवां भाग


तनु ने महेश की दोस्ती स्वीकार कर ली। जिससे महेश बहुत खुश हो गया। कुछ देर इधर उधर की बात करने में बाद हम सब अपनी कक्षा में चले गए। कक्षा में आने के बाद महेश ने अपनी बैठने की जगह बदल ली और वो हम दोनों के पास आकर बैठ गया। फिर क्लास शुरू हुई और हमने मन लगाकर पढ़ाई की। छुट्टी होने के बाद हम अपने घर को चले गए।

रात में खाना खाते समय काजल ने मुझसे कहा।

काजल- वो लड़की कौन है भैया जिसके साथ आजकल आप रहते हैं। आपको पता है स्कूल में मुझको तरह तरह की बाते बोलते हैं मेरे दोस्त लोग आपके बारे में।

काजल की बात सुनकर पापा और अम्मा मुझे देखन लगे अम्मा ने पूछा।

अम्मा- कौन लड़की।

मैं- अम्मा वो प्रधानाचार्य सर के दोस्त की बेटी है। तनु नाम है उसका । वो पढ़ाई में थोड़ा कमजोर है तो प्रधानाचार्य सर ने मुझे और अभिषेक को उसकी पढ़ाई में मदद करने के लिए कहा है और उसे हमारे साथ रहने के लिए कहा है, इसलिए वो हम दोनों के साथ रहती है स्कूल समय में।

अम्मा- तू उसे क्यों पढ़ाएगा। उसके लिए मास्टर हैं न। तो बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। एक तो तुझे वैसे भी पढ़ने के लिए कम समय मिलता है ऊपर से तू दूसरे को पढ़ाने का ठेका ले रखा है। इससे तुम्हारी पढ़ाई का नुकसान भी तो होगा।

पापा- अरे कैसी बात करती हो भाग्यवान। किसी की पढ़ाई में मदद करना तो बहुत अच्छी बात है। इससे नयन का ज्ञान तो और बढ़ेगा। जब ये उस लड़की को कोई चीज बताएगा कोई सवाल हल करवाएगा तो इसे वो सवाल हमेशा याद रहेगा। और वैसे भी किसी की मदद करना तो पुण्य का काम होता है।

अम्मा- पुण्य का काम तो होता है। लेकिन अपना नुकसान करके अगर किसी की भलाई की जाए तो वो पुण्य का काम नहीं बेवकूफी का काम होता है। और तू नयन। बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। किसी की भलाई बाद में करे। पहले अपनी भलाई तो कर ले।

अम्मा की बात सुनकर सभी खामोश हो गए। मैं काजल को देख रहा था जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी। मैं सोच रहा था, इसे यही वक्त मिला था क्या ये बात छेड़ने के लिए। खाना खाकर जब हम दोनों सोने के लिए गए तो मैंने काजल का कान पकड़ कर ऐंठ दिया जिससे वो चीख पड़ी और बोली।

काजल- क्या कर रहे हो भैया। मुझे दर्द हो रहा है।

मैं- तुम बहुत शरारती हो गई हो काजल। ये सब बातें अम्मा के सामने बोलने की क्या जरूरत थी। पहले मुझसे पूछती तुम तो मैं तुझे सब कुछ बता ही देता। खामखाह अम्मा की डांट सुननी पड़ी।

काजल- मैंने तो वही कहा जो मुझे मेरे दोस्तों ने बताया। मुझे थोड़े ही पता था कि आपको अम्मा डाटेंगी।

मैं- अब आगे से कुछ भी बोलने से पहले एक बार मुझसे बात कर लेना।

काजल- ठीक है भैया अब कान छोड़ो मेरा दर्द कर रहा है।

मैंने काजल को छोड़ दिया और अपने बिस्तर पर सोने चला गया। सुबह उठकर मैंने फ्रेश होकर कलेवा खाया और काजल के साथ स्कूल चला गया। स्कूल में पहुंच कर मैं अभिषेक से मिला और अपनी कक्षा में चल पड़ा। कक्षा में जाकर देखा तो महेश और तनु पहले ही आ गए थे और अपनी जगह पर बैठकर एक दूसरे से बात कर रहे थे।

मैं और अभिषेक जाकर दोनों से मिले और अपनी सीट पर बैठ गए। कुछ देर बाद शिक्षक भी आ गए और क्लास शुरू हो गई। ऐसे ही दिन पर दिन गुजरते रहे। मैं अपनी दिनचर्या से रोज स्कूल आता अपने दोस्तों से मिलता। अपनी क्लास अटेंड करता और अपने घर चला जाता। इस दौरान तनु जो भी पढ़ाई के संबंध में अपनी समस्या बताती उसे मैं सुलझाने की कोशिश करता।
इसी तरह 2 से ढाई महीने का समय बीत गया और इस दौरान बदलाव ये आया कि महेश और तनु और ज्यादा नज़दीक आ गए। दोनों में पहले से ज्यादा बहुत ज्यादा बातें होने लगी।

अभिषेक और मेरी बात चीत पहले की ही तरह तनु से होती थी। तनु ने मेरे बारे में अभिषेक से पूछा भी कि मैं लड़कियों से इतना दूर क्यों भागता हूँ, लेकिन अभिषेक उसे यही बताता था कि उसे लड़कियों में रुचि नहीं है। जिससे तनु को विश्वास नहीं होता था।

यही बात उसने महेश से भी पूछी थी, लेकिन महेश तो अपनी गोटी फिट करने की फिराक में था तो उसने तनु को कुछ नहीं बताया। एक दिन मैं, अभिषेक, महेश और तनु भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे थे। अभिषेक और महेश तनु से बात कर रहे थे और मैं वहां उगी घांस के साथ खेल रहा था। तनु काफी देर से मुझे समझने की कोशिश कर रही थी, जब मैं उनकी तरफ देखता तो वो मुस्कुरा देती, जवाब में मैं भी मुस्कुरा देता। थोड़ी देर बाद जब तनु से न रह गया तो उसने मुझसे पूछा।

तनु- नयन। अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात पूछना चाहती हूं तुमसे।

मैं- हाँ पूछो न क्या पूछना है।

तनु- कुछ व्यक्तिगत सवाल था इसलिए पूछा तुमसे।

मैं- इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है। आखिर हम इतने दिन से साथ हैं और हम दोस्त भी हैं तो पूछ सकती हो तुम।

तनु- हम लगभग 3-4 महीने से साथ हैं। लेकिन कभी तुमने मुझसे बात करने की कोशिश नहीं की। जब मैं तुमसे बात करती हूँ। तभी बात करते हो, जितना पूछती हूँ उतना जवाब देते हो।

मैं- नहीं तनु ऐसा कुछ नहीं है। जैसा तुम समझ रही हो। वो तो बस ऐसे ही तुम लोग बात करते हो। तो सुनने में अच्छा लगता है।

तनु- मैं कुछ नहीं समझ रही हूँ। जो सच है वही बोल रही हूँ। क्या तुम्हें मेरा साथ रहना पसंद नहीं है तुमको या मैं ज्यादा ही परेशान करती हूँ तुमको। अगर ऐसा है तो बता दो। मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगी।

मैं- नहीं तनु ऐसी बात नहीं है। मैं लड़कियों से बहुत कम बात करता हूँ, इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है।

तनु- तुम लड़कियों से बात नहीं करते, लेकिन मुझसे तो कर ही सकते हो। आखिर मैं तुम्हारी दोस्त हूँ। और क्या मैं जान सकती हूँ कि तुम लड़कियों से बात क्यों नहीं करते। क्या उनमें कांटे लगे होते हैं। या तुम्हें उन्होंने कभी कुछ कहा है।

मैं- ये तो तुम्हें अभिषेक बता ही चुका होगा तो मुझसे क्यों पूछ रही हो फिर।

तनु- यार तुम अब लड़कियों की तरह भाव मत खाओ। बताना है तो बताओ नहीं तो कोई बात नहीं।

इतना कहकर तनु मुंह घुमाकर बैठ गई। यह देखकर मैंने मन ही मन सोचा कि लड़कियों के नखरे भी कितने अजीब होते हैं। बिना किसी बात के नाराज़ होना और नखरे दिखाना इन्हें बहुत अच्छी तरह से आता है। मैंने मुस्कुराते हुए तनु से कहा।

मैं- मैं नखरे नहीं दिखा रहा हूँ। बस ऐसे ही तुम्हें छेड़ रहा था।

गलती से मेरे मुंह से यह निकल गया। मेरी बात सुनकर अभिषेक और महेश मुझे देखने लगे। अभिषेक तुरन्त मेरी खिंचाई करते हुए मुझसे बोला।

अभिषेक- साले तू कब से लड़की छेड़ने लगा। मतलब पापा का लाडला बिगड़ रहा है।

मैं- अबे पापा का लाडला नहीं होता मां का लाडला होता है।

अभिषेक- हाँ हाँ मालूम है, लेकिन तू माँ का लाडला नहीं पापा का लाडला है। और तू कब बिगड़ रहा है।

तनु- तुम दोनों अब चुप हो जाओ। नयन तुम बताओगे कुछ या नहीं।

फिर मैंने तनु को पापा की लड़कियों के संबंध में सिखाई हुई सारी बात बता दी। जिसे सुनने के बाद तनु ने कहा।

तनु- क्या यार नयन तुम भी अब तक उस बात को लेकर बैठे हुए हो। माँ बाप का काम ही है बोलना। वो उनके जमाने की बाते हैं। लवकिं अब जमाना बदल गया है। अब तो मौज मस्ती के दिन शुरू हुए हैं और तुम अपने पापा की बात लेकर अब तक बैठे हुए हो। माना कि उन्होंने जो भी कहा तुमसे वो गलत नहीं है, लेकिन अपने आपको समय के साथ बदलना चाहिए।

मैं- मतलब क्या है तुम्हारा। कहना क्या चाहती हो तुम। माँ बाप की बात मानना गलत है। मैं गलत हूँ।

तनु- मैंने ऐसा तो नहीं कहा। तुम्हारे मां बाप ने जो कहा वो सही था, लेकिन उनके कहने का मतलब कुछ और था और तुमने कुछ और समझ लिया। तुम्हें लड़कियों की इज़्ज़त करनी चाहिए, लेकिन लेकिन इसके लिए उनसे दूर भागने की क्या जरूरत है। तुम उनसे बात चीत तो कर ही सकते हो। हो सकता है इसी बातचीत से तुम्हारे मन में उनके लिए कुछ अलग सा महसूस हो। मेरी बातों पर गौर करना तुम नयन।

मैंने तनु से इसके आगे कुछ भी नहीं कहा। तनु इतना कहकर वहां से चली गई। तनु की कुछ बातें मुझे सही लगी। तो कुछ बातें मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आई। मैंने सोचा कि पापा ने लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाया है, लेकिन उनसे बातचीत, साथ उठना बैठना, उनके साथ रखने से मना तो नहीं किया है। अब मुझे क्या करना चाहिए। तनु की बात माननी चाहिए या मैं जैसा हूँ वैसे ही रहना चाहिए।
मैं अपनी ही सोच में डूबा हुआ था तभी अभिषेक ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

अभिषेक- क्या सोच रहा है भाई।

मैं- यार ये तनु क्या बोलकर चली गई। उसकी बातें सुनकर मैं तो उहापोह में पड़ गया हूँ। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए। पापा की बात भी गलत नहीं है और तनु की कुछ बातें भी सही हैं।

अभिषेक- मैं भी तो तुझे हमेशा यही कहता था और आज तनु भी यही कह रही है। अब समय आ गया है कि तू अपने आपको थोड़ा सा बदल लें लड़कियों के मामले में। तेरे पापा ने भी यहीं कहा होगा तुझे, लेकिन तूने कुछ और मतलब निकाल लिया।

मैं- ठीक है मेरे भाई। गौर करूँगा इस बात पर। अब चल क्लास का समय हो गया है।

इतना बोलकर मैं अभिषेक और महेश अपनी कक्षा की तरफ चल दिए।



इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
Nice update bro
 
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Now I am become Death, the destroyer of worlds
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सातवां भाग


तनु ने महेश की दोस्ती स्वीकार कर ली। जिससे महेश बहुत खुश हो गया। कुछ देर इधर उधर की बात करने में बाद हम सब अपनी कक्षा में चले गए। कक्षा में आने के बाद महेश ने अपनी बैठने की जगह बदल ली और वो हम दोनों के पास आकर बैठ गया। फिर क्लास शुरू हुई और हमने मन लगाकर पढ़ाई की। छुट्टी होने के बाद हम अपने घर को चले गए।

रात में खाना खाते समय काजल ने मुझसे कहा।

काजल- वो लड़की कौन है भैया जिसके साथ आजकल आप रहते हैं। आपको पता है स्कूल में मुझको तरह तरह की बाते बोलते हैं मेरे दोस्त लोग आपके बारे में।

काजल की बात सुनकर पापा और अम्मा मुझे देखन लगे अम्मा ने पूछा।

अम्मा- कौन लड़की।

मैं- अम्मा वो प्रधानाचार्य सर के दोस्त की बेटी है। तनु नाम है उसका । वो पढ़ाई में थोड़ा कमजोर है तो प्रधानाचार्य सर ने मुझे और अभिषेक को उसकी पढ़ाई में मदद करने के लिए कहा है और उसे हमारे साथ रहने के लिए कहा है, इसलिए वो हम दोनों के साथ रहती है स्कूल समय में।

अम्मा- तू उसे क्यों पढ़ाएगा। उसके लिए मास्टर हैं न। तो बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। एक तो तुझे वैसे भी पढ़ने के लिए कम समय मिलता है ऊपर से तू दूसरे को पढ़ाने का ठेका ले रखा है। इससे तुम्हारी पढ़ाई का नुकसान भी तो होगा।

पापा- अरे कैसी बात करती हो भाग्यवान। किसी की पढ़ाई में मदद करना तो बहुत अच्छी बात है। इससे नयन का ज्ञान तो और बढ़ेगा। जब ये उस लड़की को कोई चीज बताएगा कोई सवाल हल करवाएगा तो इसे वो सवाल हमेशा याद रहेगा। और वैसे भी किसी की मदद करना तो पुण्य का काम होता है।

अम्मा- पुण्य का काम तो होता है। लेकिन अपना नुकसान करके अगर किसी की भलाई की जाए तो वो पुण्य का काम नहीं बेवकूफी का काम होता है। और तू नयन। बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। किसी की भलाई बाद में करे। पहले अपनी भलाई तो कर ले।

अम्मा की बात सुनकर सभी खामोश हो गए। मैं काजल को देख रहा था जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी। मैं सोच रहा था, इसे यही वक्त मिला था क्या ये बात छेड़ने के लिए। खाना खाकर जब हम दोनों सोने के लिए गए तो मैंने काजल का कान पकड़ कर ऐंठ दिया जिससे वो चीख पड़ी और बोली।

काजल- क्या कर रहे हो भैया। मुझे दर्द हो रहा है।

मैं- तुम बहुत शरारती हो गई हो काजल। ये सब बातें अम्मा के सामने बोलने की क्या जरूरत थी। पहले मुझसे पूछती तुम तो मैं तुझे सब कुछ बता ही देता। खामखाह अम्मा की डांट सुननी पड़ी।

काजल- मैंने तो वही कहा जो मुझे मेरे दोस्तों ने बताया। मुझे थोड़े ही पता था कि आपको अम्मा डाटेंगी।

मैं- अब आगे से कुछ भी बोलने से पहले एक बार मुझसे बात कर लेना।

काजल- ठीक है भैया अब कान छोड़ो मेरा दर्द कर रहा है।

मैंने काजल को छोड़ दिया और अपने बिस्तर पर सोने चला गया। सुबह उठकर मैंने फ्रेश होकर कलेवा खाया और काजल के साथ स्कूल चला गया। स्कूल में पहुंच कर मैं अभिषेक से मिला और अपनी कक्षा में चल पड़ा। कक्षा में जाकर देखा तो महेश और तनु पहले ही आ गए थे और अपनी जगह पर बैठकर एक दूसरे से बात कर रहे थे।

मैं और अभिषेक जाकर दोनों से मिले और अपनी सीट पर बैठ गए। कुछ देर बाद शिक्षक भी आ गए और क्लास शुरू हो गई। ऐसे ही दिन पर दिन गुजरते रहे। मैं अपनी दिनचर्या से रोज स्कूल आता अपने दोस्तों से मिलता। अपनी क्लास अटेंड करता और अपने घर चला जाता। इस दौरान तनु जो भी पढ़ाई के संबंध में अपनी समस्या बताती उसे मैं सुलझाने की कोशिश करता।
इसी तरह 2 से ढाई महीने का समय बीत गया और इस दौरान बदलाव ये आया कि महेश और तनु और ज्यादा नज़दीक आ गए। दोनों में पहले से ज्यादा बहुत ज्यादा बातें होने लगी।

अभिषेक और मेरी बात चीत पहले की ही तरह तनु से होती थी। तनु ने मेरे बारे में अभिषेक से पूछा भी कि मैं लड़कियों से इतना दूर क्यों भागता हूँ, लेकिन अभिषेक उसे यही बताता था कि उसे लड़कियों में रुचि नहीं है। जिससे तनु को विश्वास नहीं होता था।

यही बात उसने महेश से भी पूछी थी, लेकिन महेश तो अपनी गोटी फिट करने की फिराक में था तो उसने तनु को कुछ नहीं बताया। एक दिन मैं, अभिषेक, महेश और तनु भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे थे। अभिषेक और महेश तनु से बात कर रहे थे और मैं वहां उगी घांस के साथ खेल रहा था। तनु काफी देर से मुझे समझने की कोशिश कर रही थी, जब मैं उनकी तरफ देखता तो वो मुस्कुरा देती, जवाब में मैं भी मुस्कुरा देता। थोड़ी देर बाद जब तनु से न रह गया तो उसने मुझसे पूछा।

तनु- नयन। अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात पूछना चाहती हूं तुमसे।

मैं- हाँ पूछो न क्या पूछना है।

तनु- कुछ व्यक्तिगत सवाल था इसलिए पूछा तुमसे।

मैं- इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है। आखिर हम इतने दिन से साथ हैं और हम दोस्त भी हैं तो पूछ सकती हो तुम।

तनु- हम लगभग 3-4 महीने से साथ हैं। लेकिन कभी तुमने मुझसे बात करने की कोशिश नहीं की। जब मैं तुमसे बात करती हूँ। तभी बात करते हो, जितना पूछती हूँ उतना जवाब देते हो।

मैं- नहीं तनु ऐसा कुछ नहीं है। जैसा तुम समझ रही हो। वो तो बस ऐसे ही तुम लोग बात करते हो। तो सुनने में अच्छा लगता है।

तनु- मैं कुछ नहीं समझ रही हूँ। जो सच है वही बोल रही हूँ। क्या तुम्हें मेरा साथ रहना पसंद नहीं है तुमको या मैं ज्यादा ही परेशान करती हूँ तुमको। अगर ऐसा है तो बता दो। मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगी।

मैं- नहीं तनु ऐसी बात नहीं है। मैं लड़कियों से बहुत कम बात करता हूँ, इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है।

तनु- तुम लड़कियों से बात नहीं करते, लेकिन मुझसे तो कर ही सकते हो। आखिर मैं तुम्हारी दोस्त हूँ। और क्या मैं जान सकती हूँ कि तुम लड़कियों से बात क्यों नहीं करते। क्या उनमें कांटे लगे होते हैं। या तुम्हें उन्होंने कभी कुछ कहा है।

मैं- ये तो तुम्हें अभिषेक बता ही चुका होगा तो मुझसे क्यों पूछ रही हो फिर।

तनु- यार तुम अब लड़कियों की तरह भाव मत खाओ। बताना है तो बताओ नहीं तो कोई बात नहीं।

इतना कहकर तनु मुंह घुमाकर बैठ गई। यह देखकर मैंने मन ही मन सोचा कि लड़कियों के नखरे भी कितने अजीब होते हैं। बिना किसी बात के नाराज़ होना और नखरे दिखाना इन्हें बहुत अच्छी तरह से आता है। मैंने मुस्कुराते हुए तनु से कहा।

मैं- मैं नखरे नहीं दिखा रहा हूँ। बस ऐसे ही तुम्हें छेड़ रहा था।

गलती से मेरे मुंह से यह निकल गया। मेरी बात सुनकर अभिषेक और महेश मुझे देखने लगे। अभिषेक तुरन्त मेरी खिंचाई करते हुए मुझसे बोला।

अभिषेक- साले तू कब से लड़की छेड़ने लगा। मतलब पापा का लाडला बिगड़ रहा है।

मैं- अबे पापा का लाडला नहीं होता मां का लाडला होता है।

अभिषेक- हाँ हाँ मालूम है, लेकिन तू माँ का लाडला नहीं पापा का लाडला है। और तू कब बिगड़ रहा है।

तनु- तुम दोनों अब चुप हो जाओ। नयन तुम बताओगे कुछ या नहीं।

फिर मैंने तनु को पापा की लड़कियों के संबंध में सिखाई हुई सारी बात बता दी। जिसे सुनने के बाद तनु ने कहा।

तनु- क्या यार नयन तुम भी अब तक उस बात को लेकर बैठे हुए हो। माँ बाप का काम ही है बोलना। वो उनके जमाने की बाते हैं। लवकिं अब जमाना बदल गया है। अब तो मौज मस्ती के दिन शुरू हुए हैं और तुम अपने पापा की बात लेकर अब तक बैठे हुए हो। माना कि उन्होंने जो भी कहा तुमसे वो गलत नहीं है, लेकिन अपने आपको समय के साथ बदलना चाहिए।

मैं- मतलब क्या है तुम्हारा। कहना क्या चाहती हो तुम। माँ बाप की बात मानना गलत है। मैं गलत हूँ।

तनु- मैंने ऐसा तो नहीं कहा। तुम्हारे मां बाप ने जो कहा वो सही था, लेकिन उनके कहने का मतलब कुछ और था और तुमने कुछ और समझ लिया। तुम्हें लड़कियों की इज़्ज़त करनी चाहिए, लेकिन लेकिन इसके लिए उनसे दूर भागने की क्या जरूरत है। तुम उनसे बात चीत तो कर ही सकते हो। हो सकता है इसी बातचीत से तुम्हारे मन में उनके लिए कुछ अलग सा महसूस हो। मेरी बातों पर गौर करना तुम नयन।

मैंने तनु से इसके आगे कुछ भी नहीं कहा। तनु इतना कहकर वहां से चली गई। तनु की कुछ बातें मुझे सही लगी। तो कुछ बातें मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आई। मैंने सोचा कि पापा ने लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाया है, लेकिन उनसे बातचीत, साथ उठना बैठना, उनके साथ रखने से मना तो नहीं किया है। अब मुझे क्या करना चाहिए। तनु की बात माननी चाहिए या मैं जैसा हूँ वैसे ही रहना चाहिए।
मैं अपनी ही सोच में डूबा हुआ था तभी अभिषेक ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

अभिषेक- क्या सोच रहा है भाई।

मैं- यार ये तनु क्या बोलकर चली गई। उसकी बातें सुनकर मैं तो उहापोह में पड़ गया हूँ। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए। पापा की बात भी गलत नहीं है और तनु की कुछ बातें भी सही हैं।

अभिषेक- मैं भी तो तुझे हमेशा यही कहता था और आज तनु भी यही कह रही है। अब समय आ गया है कि तू अपने आपको थोड़ा सा बदल लें लड़कियों के मामले में। तेरे पापा ने भी यहीं कहा होगा तुझे, लेकिन तूने कुछ और मतलब निकाल लिया।

मैं- ठीक है मेरे भाई। गौर करूँगा इस बात पर। अब चल क्लास का समय हो गया है।

इतना बोलकर मैं अभिषेक और महेश अपनी कक्षा की तरफ चल दिए।



इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
:lol1: finally koi to milla....
Nayan ko update mangta tha aisa....matlab isko dekho pahle...Babuji ne kaha ijjat do....ye baat hi nahi karta tha dekhta bhi nahi tha unki oor...
serious problem chee iske saath.....
schools ki ye badi ajeeb baat hoti hai....matlab kuch bhi imagine kar lete hai waha pe log.... ek ladka ek ladki ke saath ho....
dono ka chakkar hai....ek ladka 2 ladki ke saath ho....waah iske to mazze hai 2-2......3 aur 4 aa jaye to uss ladke ko sab ladki bulane lag jaate hai....apni biradari se hi nikal diya jaata hai unko...jab wo khelne aaye to usko bolte hai ladiyon ke saath khelo...
:sigh: aisa hi kuch ladkiyon ke saath bhi hota hoga....
I blame Selmon Bhoi for this.... naa Maine Pyaar kiya banti naa ye sab sabke dimmag mein hota....
Kajal ki baat bahut kuch batati hai......thinking ke baare mein.....schools are naat good place....bade khatarnaak jagah hote hai ye....
waise Abhishek ki baatein nahi sunni thi Nayan ne aur Tanu ne kaha to :hint: naat good equality nahi hai ye....
:protest: #justiceforAbhishek

Nayan ki Maa.....Amma....ye wahi hai....ek typical Indian Mummy..... jinka manna hota hai pahle khud ka dekho....badka naa banno jyada... wo wale...
Ye story mein Mummy log bade acche hai...
Nayan ki Mummy bhi mast hai aur Abhishek ki to :bow: gyaani hai wo.....bhoot bhavishya vartaman sab jaanti hai wo...
As apan bhi school gaya hai....aur aadat hai aisi ajeeb sawalon ki....
Why Tanu and Mahesh ke bich najdikiyan aa rahi hai.....
Abhishek jelous kyun nahi hai isse...
nice update
 

Sanju@

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सातवां भाग


तनु ने महेश की दोस्ती स्वीकार कर ली। जिससे महेश बहुत खुश हो गया। कुछ देर इधर उधर की बात करने में बाद हम सब अपनी कक्षा में चले गए। कक्षा में आने के बाद महेश ने अपनी बैठने की जगह बदल ली और वो हम दोनों के पास आकर बैठ गया। फिर क्लास शुरू हुई और हमने मन लगाकर पढ़ाई की। छुट्टी होने के बाद हम अपने घर को चले गए।

रात में खाना खाते समय काजल ने मुझसे कहा।

काजल- वो लड़की कौन है भैया जिसके साथ आजकल आप रहते हैं। आपको पता है स्कूल में मुझको तरह तरह की बाते बोलते हैं मेरे दोस्त लोग आपके बारे में।

काजल की बात सुनकर पापा और अम्मा मुझे देखन लगे अम्मा ने पूछा।

अम्मा- कौन लड़की।

मैं- अम्मा वो प्रधानाचार्य सर के दोस्त की बेटी है। तनु नाम है उसका । वो पढ़ाई में थोड़ा कमजोर है तो प्रधानाचार्य सर ने मुझे और अभिषेक को उसकी पढ़ाई में मदद करने के लिए कहा है और उसे हमारे साथ रहने के लिए कहा है, इसलिए वो हम दोनों के साथ रहती है स्कूल समय में।

अम्मा- तू उसे क्यों पढ़ाएगा। उसके लिए मास्टर हैं न। तो बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। एक तो तुझे वैसे भी पढ़ने के लिए कम समय मिलता है ऊपर से तू दूसरे को पढ़ाने का ठेका ले रखा है। इससे तुम्हारी पढ़ाई का नुकसान भी तो होगा।

पापा- अरे कैसी बात करती हो भाग्यवान। किसी की पढ़ाई में मदद करना तो बहुत अच्छी बात है। इससे नयन का ज्ञान तो और बढ़ेगा। जब ये उस लड़की को कोई चीज बताएगा कोई सवाल हल करवाएगा तो इसे वो सवाल हमेशा याद रहेगा। और वैसे भी किसी की मदद करना तो पुण्य का काम होता है।

अम्मा- पुण्य का काम तो होता है। लेकिन अपना नुकसान करके अगर किसी की भलाई की जाए तो वो पुण्य का काम नहीं बेवकूफी का काम होता है। और तू नयन। बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। किसी की भलाई बाद में करे। पहले अपनी भलाई तो कर ले।

अम्मा की बात सुनकर सभी खामोश हो गए। मैं काजल को देख रहा था जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी। मैं सोच रहा था, इसे यही वक्त मिला था क्या ये बात छेड़ने के लिए। खाना खाकर जब हम दोनों सोने के लिए गए तो मैंने काजल का कान पकड़ कर ऐंठ दिया जिससे वो चीख पड़ी और बोली।

काजल- क्या कर रहे हो भैया। मुझे दर्द हो रहा है।

मैं- तुम बहुत शरारती हो गई हो काजल। ये सब बातें अम्मा के सामने बोलने की क्या जरूरत थी। पहले मुझसे पूछती तुम तो मैं तुझे सब कुछ बता ही देता। खामखाह अम्मा की डांट सुननी पड़ी।

काजल- मैंने तो वही कहा जो मुझे मेरे दोस्तों ने बताया। मुझे थोड़े ही पता था कि आपको अम्मा डाटेंगी।

मैं- अब आगे से कुछ भी बोलने से पहले एक बार मुझसे बात कर लेना।

काजल- ठीक है भैया अब कान छोड़ो मेरा दर्द कर रहा है।

मैंने काजल को छोड़ दिया और अपने बिस्तर पर सोने चला गया। सुबह उठकर मैंने फ्रेश होकर कलेवा खाया और काजल के साथ स्कूल चला गया। स्कूल में पहुंच कर मैं अभिषेक से मिला और अपनी कक्षा में चल पड़ा। कक्षा में जाकर देखा तो महेश और तनु पहले ही आ गए थे और अपनी जगह पर बैठकर एक दूसरे से बात कर रहे थे।

मैं और अभिषेक जाकर दोनों से मिले और अपनी सीट पर बैठ गए। कुछ देर बाद शिक्षक भी आ गए और क्लास शुरू हो गई। ऐसे ही दिन पर दिन गुजरते रहे। मैं अपनी दिनचर्या से रोज स्कूल आता अपने दोस्तों से मिलता। अपनी क्लास अटेंड करता और अपने घर चला जाता। इस दौरान तनु जो भी पढ़ाई के संबंध में अपनी समस्या बताती उसे मैं सुलझाने की कोशिश करता।
इसी तरह 2 से ढाई महीने का समय बीत गया और इस दौरान बदलाव ये आया कि महेश और तनु और ज्यादा नज़दीक आ गए। दोनों में पहले से ज्यादा बहुत ज्यादा बातें होने लगी।

अभिषेक और मेरी बात चीत पहले की ही तरह तनु से होती थी। तनु ने मेरे बारे में अभिषेक से पूछा भी कि मैं लड़कियों से इतना दूर क्यों भागता हूँ, लेकिन अभिषेक उसे यही बताता था कि उसे लड़कियों में रुचि नहीं है। जिससे तनु को विश्वास नहीं होता था।

यही बात उसने महेश से भी पूछी थी, लेकिन महेश तो अपनी गोटी फिट करने की फिराक में था तो उसने तनु को कुछ नहीं बताया। एक दिन मैं, अभिषेक, महेश और तनु भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे थे। अभिषेक और महेश तनु से बात कर रहे थे और मैं वहां उगी घांस के साथ खेल रहा था। तनु काफी देर से मुझे समझने की कोशिश कर रही थी, जब मैं उनकी तरफ देखता तो वो मुस्कुरा देती, जवाब में मैं भी मुस्कुरा देता। थोड़ी देर बाद जब तनु से न रह गया तो उसने मुझसे पूछा।

तनु- नयन। अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात पूछना चाहती हूं तुमसे।

मैं- हाँ पूछो न क्या पूछना है।

तनु- कुछ व्यक्तिगत सवाल था इसलिए पूछा तुमसे।

मैं- इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है। आखिर हम इतने दिन से साथ हैं और हम दोस्त भी हैं तो पूछ सकती हो तुम।

तनु- हम लगभग 3-4 महीने से साथ हैं। लेकिन कभी तुमने मुझसे बात करने की कोशिश नहीं की। जब मैं तुमसे बात करती हूँ। तभी बात करते हो, जितना पूछती हूँ उतना जवाब देते हो।

मैं- नहीं तनु ऐसा कुछ नहीं है। जैसा तुम समझ रही हो। वो तो बस ऐसे ही तुम लोग बात करते हो। तो सुनने में अच्छा लगता है।

तनु- मैं कुछ नहीं समझ रही हूँ। जो सच है वही बोल रही हूँ। क्या तुम्हें मेरा साथ रहना पसंद नहीं है तुमको या मैं ज्यादा ही परेशान करती हूँ तुमको। अगर ऐसा है तो बता दो। मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगी।

मैं- नहीं तनु ऐसी बात नहीं है। मैं लड़कियों से बहुत कम बात करता हूँ, इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है।

तनु- तुम लड़कियों से बात नहीं करते, लेकिन मुझसे तो कर ही सकते हो। आखिर मैं तुम्हारी दोस्त हूँ। और क्या मैं जान सकती हूँ कि तुम लड़कियों से बात क्यों नहीं करते। क्या उनमें कांटे लगे होते हैं। या तुम्हें उन्होंने कभी कुछ कहा है।

मैं- ये तो तुम्हें अभिषेक बता ही चुका होगा तो मुझसे क्यों पूछ रही हो फिर।

तनु- यार तुम अब लड़कियों की तरह भाव मत खाओ। बताना है तो बताओ नहीं तो कोई बात नहीं।

इतना कहकर तनु मुंह घुमाकर बैठ गई। यह देखकर मैंने मन ही मन सोचा कि लड़कियों के नखरे भी कितने अजीब होते हैं। बिना किसी बात के नाराज़ होना और नखरे दिखाना इन्हें बहुत अच्छी तरह से आता है। मैंने मुस्कुराते हुए तनु से कहा।

मैं- मैं नखरे नहीं दिखा रहा हूँ। बस ऐसे ही तुम्हें छेड़ रहा था।

गलती से मेरे मुंह से यह निकल गया। मेरी बात सुनकर अभिषेक और महेश मुझे देखने लगे। अभिषेक तुरन्त मेरी खिंचाई करते हुए मुझसे बोला।

अभिषेक- साले तू कब से लड़की छेड़ने लगा। मतलब पापा का लाडला बिगड़ रहा है।

मैं- अबे पापा का लाडला नहीं होता मां का लाडला होता है।

अभिषेक- हाँ हाँ मालूम है, लेकिन तू माँ का लाडला नहीं पापा का लाडला है। और तू कब बिगड़ रहा है।

तनु- तुम दोनों अब चुप हो जाओ। नयन तुम बताओगे कुछ या नहीं।

फिर मैंने तनु को पापा की लड़कियों के संबंध में सिखाई हुई सारी बात बता दी। जिसे सुनने के बाद तनु ने कहा।

तनु- क्या यार नयन तुम भी अब तक उस बात को लेकर बैठे हुए हो। माँ बाप का काम ही है बोलना। वो उनके जमाने की बाते हैं। लवकिं अब जमाना बदल गया है। अब तो मौज मस्ती के दिन शुरू हुए हैं और तुम अपने पापा की बात लेकर अब तक बैठे हुए हो। माना कि उन्होंने जो भी कहा तुमसे वो गलत नहीं है, लेकिन अपने आपको समय के साथ बदलना चाहिए।

मैं- मतलब क्या है तुम्हारा। कहना क्या चाहती हो तुम। माँ बाप की बात मानना गलत है। मैं गलत हूँ।

तनु- मैंने ऐसा तो नहीं कहा। तुम्हारे मां बाप ने जो कहा वो सही था, लेकिन उनके कहने का मतलब कुछ और था और तुमने कुछ और समझ लिया। तुम्हें लड़कियों की इज़्ज़त करनी चाहिए, लेकिन लेकिन इसके लिए उनसे दूर भागने की क्या जरूरत है। तुम उनसे बात चीत तो कर ही सकते हो। हो सकता है इसी बातचीत से तुम्हारे मन में उनके लिए कुछ अलग सा महसूस हो। मेरी बातों पर गौर करना तुम नयन।

मैंने तनु से इसके आगे कुछ भी नहीं कहा। तनु इतना कहकर वहां से चली गई। तनु की कुछ बातें मुझे सही लगी। तो कुछ बातें मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आई। मैंने सोचा कि पापा ने लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाया है, लेकिन उनसे बातचीत, साथ उठना बैठना, उनके साथ रखने से मना तो नहीं किया है। अब मुझे क्या करना चाहिए। तनु की बात माननी चाहिए या मैं जैसा हूँ वैसे ही रहना चाहिए।
मैं अपनी ही सोच में डूबा हुआ था तभी अभिषेक ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

अभिषेक- क्या सोच रहा है भाई।

मैं- यार ये तनु क्या बोलकर चली गई। उसकी बातें सुनकर मैं तो उहापोह में पड़ गया हूँ। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए। पापा की बात भी गलत नहीं है और तनु की कुछ बातें भी सही हैं।

अभिषेक- मैं भी तो तुझे हमेशा यही कहता था और आज तनु भी यही कह रही है। अब समय आ गया है कि तू अपने आपको थोड़ा सा बदल लें लड़कियों के मामले में। तेरे पापा ने भी यहीं कहा होगा तुझे, लेकिन तूने कुछ और मतलब निकाल लिया।

मैं- ठीक है मेरे भाई। गौर करूँगा इस बात पर। अब चल क्लास का समय हो गया है।

इतना बोलकर मैं अभिषेक और महेश अपनी कक्षा की तरफ चल दिए।



इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
Amazing update
बहुत सुन्दर अपडेट है
एक बात तो सही ही की लड़किया हर छोटी बात पर मुंह फूला लेती हैं तनु ने नयन से सही कहा है कि लड़कियों से बात करनी चाहिए
 

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Lazy villain
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सातवां भाग


तनु ने महेश की दोस्ती स्वीकार कर ली। जिससे महेश बहुत खुश हो गया। कुछ देर इधर उधर की बात करने में बाद हम सब अपनी कक्षा में चले गए। कक्षा में आने के बाद महेश ने अपनी बैठने की जगह बदल ली और वो हम दोनों के पास आकर बैठ गया। फिर क्लास शुरू हुई और हमने मन लगाकर पढ़ाई की। छुट्टी होने के बाद हम अपने घर को चले गए।

रात में खाना खाते समय काजल ने मुझसे कहा।

काजल- वो लड़की कौन है भैया जिसके साथ आजकल आप रहते हैं। आपको पता है स्कूल में मुझको तरह तरह की बाते बोलते हैं मेरे दोस्त लोग आपके बारे में।

काजल की बात सुनकर पापा और अम्मा मुझे देखन लगे अम्मा ने पूछा।

अम्मा- कौन लड़की।

मैं- अम्मा वो प्रधानाचार्य सर के दोस्त की बेटी है। तनु नाम है उसका । वो पढ़ाई में थोड़ा कमजोर है तो प्रधानाचार्य सर ने मुझे और अभिषेक को उसकी पढ़ाई में मदद करने के लिए कहा है और उसे हमारे साथ रहने के लिए कहा है, इसलिए वो हम दोनों के साथ रहती है स्कूल समय में।

अम्मा- तू उसे क्यों पढ़ाएगा। उसके लिए मास्टर हैं न। तो बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। एक तो तुझे वैसे भी पढ़ने के लिए कम समय मिलता है ऊपर से तू दूसरे को पढ़ाने का ठेका ले रखा है। इससे तुम्हारी पढ़ाई का नुकसान भी तो होगा।

पापा- अरे कैसी बात करती हो भाग्यवान। किसी की पढ़ाई में मदद करना तो बहुत अच्छी बात है। इससे नयन का ज्ञान तो और बढ़ेगा। जब ये उस लड़की को कोई चीज बताएगा कोई सवाल हल करवाएगा तो इसे वो सवाल हमेशा याद रहेगा। और वैसे भी किसी की मदद करना तो पुण्य का काम होता है।

अम्मा- पुण्य का काम तो होता है। लेकिन अपना नुकसान करके अगर किसी की भलाई की जाए तो वो पुण्य का काम नहीं बेवकूफी का काम होता है। और तू नयन। बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। किसी की भलाई बाद में करे। पहले अपनी भलाई तो कर ले।

अम्मा की बात सुनकर सभी खामोश हो गए। मैं काजल को देख रहा था जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी। मैं सोच रहा था, इसे यही वक्त मिला था क्या ये बात छेड़ने के लिए। खाना खाकर जब हम दोनों सोने के लिए गए तो मैंने काजल का कान पकड़ कर ऐंठ दिया जिससे वो चीख पड़ी और बोली।

काजल- क्या कर रहे हो भैया। मुझे दर्द हो रहा है।

मैं- तुम बहुत शरारती हो गई हो काजल। ये सब बातें अम्मा के सामने बोलने की क्या जरूरत थी। पहले मुझसे पूछती तुम तो मैं तुझे सब कुछ बता ही देता। खामखाह अम्मा की डांट सुननी पड़ी।

काजल- मैंने तो वही कहा जो मुझे मेरे दोस्तों ने बताया। मुझे थोड़े ही पता था कि आपको अम्मा डाटेंगी।

मैं- अब आगे से कुछ भी बोलने से पहले एक बार मुझसे बात कर लेना।

काजल- ठीक है भैया अब कान छोड़ो मेरा दर्द कर रहा है।

मैंने काजल को छोड़ दिया और अपने बिस्तर पर सोने चला गया। सुबह उठकर मैंने फ्रेश होकर कलेवा खाया और काजल के साथ स्कूल चला गया। स्कूल में पहुंच कर मैं अभिषेक से मिला और अपनी कक्षा में चल पड़ा। कक्षा में जाकर देखा तो महेश और तनु पहले ही आ गए थे और अपनी जगह पर बैठकर एक दूसरे से बात कर रहे थे।

मैं और अभिषेक जाकर दोनों से मिले और अपनी सीट पर बैठ गए। कुछ देर बाद शिक्षक भी आ गए और क्लास शुरू हो गई। ऐसे ही दिन पर दिन गुजरते रहे। मैं अपनी दिनचर्या से रोज स्कूल आता अपने दोस्तों से मिलता। अपनी क्लास अटेंड करता और अपने घर चला जाता। इस दौरान तनु जो भी पढ़ाई के संबंध में अपनी समस्या बताती उसे मैं सुलझाने की कोशिश करता।
इसी तरह 2 से ढाई महीने का समय बीत गया और इस दौरान बदलाव ये आया कि महेश और तनु और ज्यादा नज़दीक आ गए। दोनों में पहले से ज्यादा बहुत ज्यादा बातें होने लगी।

अभिषेक और मेरी बात चीत पहले की ही तरह तनु से होती थी। तनु ने मेरे बारे में अभिषेक से पूछा भी कि मैं लड़कियों से इतना दूर क्यों भागता हूँ, लेकिन अभिषेक उसे यही बताता था कि उसे लड़कियों में रुचि नहीं है। जिससे तनु को विश्वास नहीं होता था।

यही बात उसने महेश से भी पूछी थी, लेकिन महेश तो अपनी गोटी फिट करने की फिराक में था तो उसने तनु को कुछ नहीं बताया। एक दिन मैं, अभिषेक, महेश और तनु भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे थे। अभिषेक और महेश तनु से बात कर रहे थे और मैं वहां उगी घांस के साथ खेल रहा था। तनु काफी देर से मुझे समझने की कोशिश कर रही थी, जब मैं उनकी तरफ देखता तो वो मुस्कुरा देती, जवाब में मैं भी मुस्कुरा देता। थोड़ी देर बाद जब तनु से न रह गया तो उसने मुझसे पूछा।

तनु- नयन। अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात पूछना चाहती हूं तुमसे।

मैं- हाँ पूछो न क्या पूछना है।

तनु- कुछ व्यक्तिगत सवाल था इसलिए पूछा तुमसे।

मैं- इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है। आखिर हम इतने दिन से साथ हैं और हम दोस्त भी हैं तो पूछ सकती हो तुम।

तनु- हम लगभग 3-4 महीने से साथ हैं। लेकिन कभी तुमने मुझसे बात करने की कोशिश नहीं की। जब मैं तुमसे बात करती हूँ। तभी बात करते हो, जितना पूछती हूँ उतना जवाब देते हो।

मैं- नहीं तनु ऐसा कुछ नहीं है। जैसा तुम समझ रही हो। वो तो बस ऐसे ही तुम लोग बात करते हो। तो सुनने में अच्छा लगता है।

तनु- मैं कुछ नहीं समझ रही हूँ। जो सच है वही बोल रही हूँ। क्या तुम्हें मेरा साथ रहना पसंद नहीं है तुमको या मैं ज्यादा ही परेशान करती हूँ तुमको। अगर ऐसा है तो बता दो। मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगी।

मैं- नहीं तनु ऐसी बात नहीं है। मैं लड़कियों से बहुत कम बात करता हूँ, इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा है।

तनु- तुम लड़कियों से बात नहीं करते, लेकिन मुझसे तो कर ही सकते हो। आखिर मैं तुम्हारी दोस्त हूँ। और क्या मैं जान सकती हूँ कि तुम लड़कियों से बात क्यों नहीं करते। क्या उनमें कांटे लगे होते हैं। या तुम्हें उन्होंने कभी कुछ कहा है।

मैं- ये तो तुम्हें अभिषेक बता ही चुका होगा तो मुझसे क्यों पूछ रही हो फिर।

तनु- यार तुम अब लड़कियों की तरह भाव मत खाओ। बताना है तो बताओ नहीं तो कोई बात नहीं।

इतना कहकर तनु मुंह घुमाकर बैठ गई। यह देखकर मैंने मन ही मन सोचा कि लड़कियों के नखरे भी कितने अजीब होते हैं। बिना किसी बात के नाराज़ होना और नखरे दिखाना इन्हें बहुत अच्छी तरह से आता है। मैंने मुस्कुराते हुए तनु से कहा।

मैं- मैं नखरे नहीं दिखा रहा हूँ। बस ऐसे ही तुम्हें छेड़ रहा था।

गलती से मेरे मुंह से यह निकल गया। मेरी बात सुनकर अभिषेक और महेश मुझे देखने लगे। अभिषेक तुरन्त मेरी खिंचाई करते हुए मुझसे बोला।

अभिषेक- साले तू कब से लड़की छेड़ने लगा। मतलब पापा का लाडला बिगड़ रहा है।

मैं- अबे पापा का लाडला नहीं होता मां का लाडला होता है।

अभिषेक- हाँ हाँ मालूम है, लेकिन तू माँ का लाडला नहीं पापा का लाडला है। और तू कब बिगड़ रहा है।

तनु- तुम दोनों अब चुप हो जाओ। नयन तुम बताओगे कुछ या नहीं।

फिर मैंने तनु को पापा की लड़कियों के संबंध में सिखाई हुई सारी बात बता दी। जिसे सुनने के बाद तनु ने कहा।

तनु- क्या यार नयन तुम भी अब तक उस बात को लेकर बैठे हुए हो। माँ बाप का काम ही है बोलना। वो उनके जमाने की बाते हैं। लवकिं अब जमाना बदल गया है। अब तो मौज मस्ती के दिन शुरू हुए हैं और तुम अपने पापा की बात लेकर अब तक बैठे हुए हो। माना कि उन्होंने जो भी कहा तुमसे वो गलत नहीं है, लेकिन अपने आपको समय के साथ बदलना चाहिए।

मैं- मतलब क्या है तुम्हारा। कहना क्या चाहती हो तुम। माँ बाप की बात मानना गलत है। मैं गलत हूँ।

तनु- मैंने ऐसा तो नहीं कहा। तुम्हारे मां बाप ने जो कहा वो सही था, लेकिन उनके कहने का मतलब कुछ और था और तुमने कुछ और समझ लिया। तुम्हें लड़कियों की इज़्ज़त करनी चाहिए, लेकिन लेकिन इसके लिए उनसे दूर भागने की क्या जरूरत है। तुम उनसे बात चीत तो कर ही सकते हो। हो सकता है इसी बातचीत से तुम्हारे मन में उनके लिए कुछ अलग सा महसूस हो। मेरी बातों पर गौर करना तुम नयन।

मैंने तनु से इसके आगे कुछ भी नहीं कहा। तनु इतना कहकर वहां से चली गई। तनु की कुछ बातें मुझे सही लगी। तो कुछ बातें मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं आई। मैंने सोचा कि पापा ने लड़कियों की इज़्ज़त करना सिखाया है, लेकिन उनसे बातचीत, साथ उठना बैठना, उनके साथ रखने से मना तो नहीं किया है। अब मुझे क्या करना चाहिए। तनु की बात माननी चाहिए या मैं जैसा हूँ वैसे ही रहना चाहिए।
मैं अपनी ही सोच में डूबा हुआ था तभी अभिषेक ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

अभिषेक- क्या सोच रहा है भाई।

मैं- यार ये तनु क्या बोलकर चली गई। उसकी बातें सुनकर मैं तो उहापोह में पड़ गया हूँ। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए। पापा की बात भी गलत नहीं है और तनु की कुछ बातें भी सही हैं।

अभिषेक- मैं भी तो तुझे हमेशा यही कहता था और आज तनु भी यही कह रही है। अब समय आ गया है कि तू अपने आपको थोड़ा सा बदल लें लड़कियों के मामले में। तेरे पापा ने भी यहीं कहा होगा तुझे, लेकिन तूने कुछ और मतलब निकाल लिया।

मैं- ठीक है मेरे भाई। गौर करूँगा इस बात पर। अब चल क्लास का समय हो गया है।

इतना बोलकर मैं अभिषेक और महेश अपनी कक्षा की तरफ चल दिए।



इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
Kya Inka school morning 6'o' clock ki chal rhi hai Jo ye nayan roj basi khana (kalewa) kha ke jata hai ..agar subah ka school hai to ye Naina ji khana kyo nhi bana deti oh ho yaad aaya wo to xf ke comment me busy rahti hai :lol1: ..ab hamka kahe aisa lagat ba ki ye tanua nayanawa ke chakkar me paral biya..lagat ba ee larki nayanawa ko ishq karawa ke rahi ...dekhat bani ja ki aagala updatewa me ka hoi...
 
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