Ankitarani
Param satyagyani...
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पाँचवाँ भाग
उन लड़कियों की घुड़की के बाद अभिषेक मेरे पास आया और हम दोनों आपस में बातें करते हुए पंचर बनवाने के लिए साइकिल की दुकान पर चले गए। साईकिल वाले ने बताया कि टायर ट्यूब भ्रष्ट हो गया है तो उन्हें बदलना पड़ेगा। क्योंकि साईकिल वाला पापा को अच्छी तरह से जानता था। तो उसने टायर ट्यूब बदल दी और पैसा पापा के खाते में लिखकर मुझे बता दिया।
उसके बाद अभिषेक साईकिल चलाने लगा और मैं आगे डंडे पर बैठकर अभिषेक के घर के लिए निकल गया। मैंने अभिषेक को उसके घर छोड़कर उसके यहाँ खाना खाया।
इस दौरान पायल भी हमारे आस पास ही रही, मेरी जब भी उसपर नजर पड़ती तो मुझे ये लगता कि वो मुझे ही देख रही है, क्योंकि जैसे ही मेरी नजर उसकी तरफ जाती वो झट से अपनी नजरें दूसरी तरफ घुमा लेती। मुझे उसका बर्ताव समझ में नहीं आ रहा था।
मैं अभिषेक के यहां शाम तक रहा उसके बाद मैं अपने घर की तरफ निकल पड़ा। काजल को समोसा बहुत पसंद था, इसलिए मैंने रास्ते में मैंने काजल के लिए समोसा खरीदा। घर आकर मैंने समोसा काजल को दिया। वो समोसा देखकर बहुत खुश हुई।
इसी तरह दिन बीतते रहे और छुट्टियां समाप्त हो गई। मैंने 11वीं में विज्ञान माध्यम से।दाखिला ले लिया। अभिषेक ने भी मेरे साथ ही विज्ञान माध्यम दे दाखिला काजल ने 7वीं में तथा पायल ने नौंवी में दाखिला लिया। हम सब अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गए।
11वीं में कक्षा शुरू होने के बाद लगभग 1 महीने बीत चुके थे। 16वें दिन एक नई लड़की ने हमारी कक्षा में प्रवेश किया। उसके साथ प्रधानाध्यापक सर भी थे। हम सब प्रधानाध्यापक सर को देखकर खड़े हो गए। प्रधानाध्यापक सर ने सबको बैठने के लिए कहा फिर पूरी क्लास से कहा।
प्रधानाध्यापक सर- बच्चों ये मेरे बहुत ही अच्छे मित्र की बिटिया तनु है और ये आज से इसी स्कूल में पढ़ेगी तो सभी बच्चे इसे पढ़ाई में सहयोग करेंगे।
सब- जी सर जी।
प्रधानाध्यापक सर- अभिषेक और नयन। तुम दोनों कक्षा खत्म हो जाने के बाद मेरे कार्यालय में आओ। कुछ बात करनी है दोनों से।
इतना कहकर प्रधानाध्यापक सर बाहर चले गए। और हम दोनों सोचने लगे कि क्या बात होगी जो प्रधानाध्यापक सर ने हमें बुलाया है। कक्षा खत्म होने के बाद मैं और अभिषेक प्रधानाध्यापक सर के कार्यालय के सामने थे। हम दोनों अंदर जाने में डर रहे थे, क्योंकि वो बहुत ही सख्त मिजाज इंसान थे और वो किसी को अपने कार्यालय में तभी बुलाते थे, जब किसी गलती के लिए विद्यार्थी को दंडित करना होता था, लेकिन उन्होंने बुलाया था तो अंदर जाना ही था। इसलिए हम दोनों डरते हुए अंदर चले गए। प्रधानाध्यापक सर अपनी कुर्सी पर बैठे हुए थे। हम दोनों को देखते हुए उन्होंने कहा।
प्रधानाध्यापक सर- अभिषेक और नयन आओ आओ। बैठो तुम दोनों।
मैं- आपने हमें बुलाया सर जी। कोई काम था क्या?
प्रधानाध्यापक सर- देखो जो नई लड़की आई है तनु। मैं चाहता हूं कि तुम दोनों पढ़ाई में उसकी मदद करो। और एक महीने में जो कुछ पढ़ाया जा चुका है उसको नोट्स वगैरह उपलब्ध करवाओ। वो गणित और अंग्रेजी में कमजोर है तो तुम दोनों उसे गणित और अंग्रेजी की पढ़ाई में मदद करो।
अभिषेक- लेकिन हम लोग कैसे मदद कर पाएंगे सर जी। हम दोनों तो खुद छात्र हैं तो कैसे उसकी मदद कर सकते हैं। ये तो अध्यापकों का काम है सर जी।
प्रधानाध्यापक सर- मुझे पता है कि ये अध्यापकों का काम है। मगर तुम दोनों ने इस वर्ष 10वीं में अंग्रेजी और गणित में ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं तो तुम दोनों उसे अच्छे से पढ़ा सकते हो।
मैं- ठीक है सर जी। हम उनकी मदद कर दिया करेंगे।
फिर प्रधानाध्यापक सर ने घण्टी बजाई। तो चपरासी अंदर आया। उन्होंने उसे तनु को अपने कार्यालय में भेजने के लिए कहा। थोड़ी देर बाद तनु अंदर आई तो प्रधानाध्यापक सर ने हम दोनों का परिचय उससे कराते हुए कहा।
प्रधानाध्यापक सर- तनु इनसे मिलो ये हैं अभिषेक। इन्होंने इस वर्ष दसवीं में अंग्रेजी विषय में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किये हैं और ये हैं नयन जिन्होंने दसवीं में गणित विषय में पूरे स्कूल में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं। ये दोनों तुम्हे पढ़ाई में मदद करेंगे और पिछड़ी हुई पढ़ाई को पूरा करने के लिए नोट्स भी उपलब्ध कराएंगे।
तनु- हाय अभिषेक हाय नयन।
हम दोनों- हाय तनु।
प्रधानाध्यपक सर- अब तुम सब जाओ और अच्छे अब मन लगाकर पढ़ाई करो।
प्रधानाचार्य सर जी के कहने पर हम तीनों अपनी कक्षा की तरफ चल पड़े। अब तनु के बारे में थोड़ा परिचय हो जाए।
तनु एक 16 वर्षीय खूबसूरत लड़की थी। दिखने में मासूम दिखती थी। लंबे घने काले बाल झील सी गहरी आंखे मतलब की एक 16 वर्ष की उम्र की खूबसूरत लड़की में होना चाहिए था वो सबकुछ था उसमें। हम तीनों आकर अपनी कक्षा में बैठ गए। मेरी कक्षा में लड़कियों और लड़कों का अनुपात लगभग समान ही यह तथा मैं और अभिषेक हमेशा पीछे ही बैठा करते थे। लोग अक्सर कहते हैं कि पीछे बैठने वाले पढ़ाई में कमजोर होते हैं, परंतु हमारे साथ ऐसा बिल्कुल नहीं था। हम पढ़ाई के साथ साथ स्कूल के अन्य सांस्कृतिक क्रिया कलापों और खेल कूद में हिसा लेते थे।
बहरहाल मैं और अभिषेक आकर पीछे अपनी जगह पर बैठ गए। तनु भी पीछे ही हम लोगों के पास लड़कियों वाली पंक्ति में बैठ गई। फिर गणित की कक्षा शुरू हुई और हम पढ़ने लगे। गणित की कक्षा खत्म हो जाने के बाद अभिषेक ने उससे पूछा।
अभिषेक- तनु तुम कहाँ से हो कर इतनी देर से क्यों स्कूल में दाखिला लिया।
तनु- मैं इलाहाबाद शहर से हूँ। मुझे पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। और मेरी गणित और अंग्रेजी कमजोर है। पापा ने ट्यूशन भी लगवाया था, पर वो मास्टर चश्मिश था, उसका पढ़ाया मुझे समझ मे ही नहीं आता था। जिसके कारण पापा हमेशा नाराज़ रहते थे, मेरे अंक भी दसवीं में कम आए। इसलिए पापा ने अपने दोस्त के स्कूल में मुझे पढ़ने के लिए भेज दिया।
मैं- जब तुम्हें पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं है तो पढ़ की क्यों रही हो। खामखाह कपन और हमारा दोनों का समय खराब कर रही हो। जब पढ़ाई में दिलचस्पी लोगों तभी तो पढ़ाई समझ में आएगी तुम्हें।
मैंने ये बात थोड़ी नाराजगी भरे स्वर में कही थी, क्योंकि मैं लड़कियों से वैसे भी बात न के बराबर करता था, अब तनु पूरे स्कूल समय में हमारे साथ ही रहती। उसपर घर के काम के काम की वजह से मुझे पढ़ने के लिए ज्यादा समय नहीं मिल पाता था पर जितना समय मिलता था मैं अपना ध्यान पढ़ाई पर लगाता था,।
अब इस लड़की को भी पढ़ाई में मदद करनी थी। ऊपर से ये पढ़ना भी नहीं चाहती ,जिसे सुनकर मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा था। क्योंकि इससे उसका समय तो बर्बाद होता ही। साथ मे हमारा समय भी बर्बाद हो जाना था।
मगर अभिषेक अपनी मस्त मौला और हँसमुख स्वभाव के अनुसार मेरी इस बात पर मुझे घूरकर देखा, क्योंकि वैसे भी वो लड़कियों से बात करने का बहुत शौकीन था और लड़कियों से बात करने का मौका ढूंढता रहता था। यहाँ तो तनु पूरे स्कूल समय मे उसके साथ रहने वाली थी, इसलिए वो मुझसे बोला।
अभिषेक- तू चुप कर। जब देखो गलत ही बोलता है। अरे जिसकी पढ़ने में दिलचस्पी नहीं है उसे पढ़ाई के प्रति जागरूक कर प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि उसकी पढ़ाई में रुचि बने, न कि तुम्हारी तरह उसे हतोत्साहित करने चाहिए। तुम इसकी बात को ज्यादा गंभीरता से मत लो। मैं भी देखता हूँ ये कैसे तुम्हारी मदद नहीं करता पढ़ाई में।
तनु- धन्ययवाद अभिषेक, तुम कितने अच्छे हो। और बात भी बहुत अच्छी करते हो। मैं पूरी कोशिश करूँगी कि मेरी रुचि पढ़ाई में ज्यादा बने।
अभिषेक- देख नयन कुछ सीख तनु से। बचपन से तू मेरे साथ है फिर भी कभी तुमने मेरी अच्छाई नहीं देखी। लेकिन तनु ने 2-3 घंटे में ही मेरी अच्छाई को देख लिया
अभिषेक की बात सुनकर मैं हल्का हल्का मुस्कुराने लगा, मैंने अपने मन में सोचा कि लगता है तेरा भी बुरा समय शुरू होने वाला है।
उसके बाद हमने अपनी पढ़ाई में ध्यान लगाया और पढ़ाई करने लगा। स्कूल की छुट्टी होने के बाद मैं और अभिषेक साथ में घर के लिए निकल पड़े। काजल और पायल अपनी सहेलियों के साथ घर जाती थी। स्कूल से निकलने के बाद मैंने अभिषेक से कहा।
मैं- क्यों बे। बड़ी तरफ़दारी कर रहा था उसकी। लग तो ऐसा रहा था कि वो तेरी बचपन की दोस्त है और मैं तुझसे कुछ घंटे पहले ही मिला हूँ।
अभिषेक- (अपनी खीस निपोरकर बोला) अरे नहीं भाई, तू तो मेरा भाई है। तेरे सामने वो कुछ भी नहीं है। मैं तो बस प्रधानाचार्य सर के कहे अनुसार पढ़ाई में उसकी मदद करना चाहता हूँ।
मैं- लग तो कुछ और रहा है बेटा, अच्छा रहेगा तेरे लिए अगर तू बस पढ़ाई तक ही सीमित रहे, कहीं प्यार व्यार के चक्कर में मत पड़ जाना। नहीं तो पढ़ाई का बहुत नुकसान होगा।
अभी तक मैं यही जानता था कि प्यार मोहब्बत के चक्कर में समय का बहुत दुरुपयोग होता है, लेकिन इसके अलावा भी बहुत कुछ होता है जो मुझे बाद में पता चली।
बहरहाल मेरी बात पर अभिषेक हंसने लगा। मैं भी उसके साथ हंसने लगा। कुछ देर बाद अपने अपने घर की तरफ जाने वाले रास्ते पर हम दोनों आ गए। मैं अभिषेक को बाय बोलकर अपने घर की तरफ निकल गया।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
बहुत बहुत धन्यवाद आपका अंकिता जी।Ohhh...nice updatw mahi ji...college me nyi ldki aayi...tannu...
Wese iska jada nature dikhaya nhi....
Bdhiya hai...dono ko hi pdhane ka jimma de diya...
Ab dekhte hai kya hota hai...
Yha ab tringular love bnne wala hai...abhishek shayad tannu ko chahega or tannu nayan ko(may be..)baki dekhte hai kya hota hai...
Aswesoe update....carry on...
Nice update broआठवाँ भाग
धीरे धीरे समय बीतता गया। और वार्षिक परीक्षा का समय नजदीक आने लगा। महेश की तनु के साथ नजदीकियां बढ़ती रही। अब दोनों पहले की अपेक्षा ज्यादा समय साथ में बिताते थे। अभिषेक भी ज्यादातर उन्हीं के साथ रहता था। मैं अभी भी पहले जैसा ही था। मुझमें तनु की बात से बस इतना बदलाव आया था कि मैं अब उससे खुलकर बात करता था, लेकिन अन्य लड़कियों के प्रति मेरा रवैया पहले की ही तरह था। मैं उनसे बात करने में कतराता था।
कुछ समय बाद 11वीं की वार्षिक परीक्षा शुरू होने वाली थी। एक दिन अभिषेक मेरे घर पर रात में रुका। सुबह मैं और अभिषेक नहर पर फ्रेश होने चले गए। फ्रेश होकर लौटते समय पुलिया पर महेश बैठा मिला। वो हमें देखते ही बोला।
महेश- नमस्कार नूनू भाई। कैसे हो।
मैं- ठीक हूँ भाई। तू अपना बता।
महेश- और भाई अभिषेक आप कैसे हैं।
आभिषेक- मस्त भाई ।
महेश- मैं तो बहुत ज्यादा ठीक हूँ यार। ये सब तुम दोनों की वजह से ही हुआ है।
मैं- हम दोनों की वजह से कैसे। मैं कुछ समझ नहीं।
महेश- अबे तुम दोनों ने मेरी मुलाकात तनु से करवाई। जिसके कारण मेरी दोस्ती तनु से हुई। और एक बात बताऊँ तुम दोनों को। मुझे लगता है मुझे तनु से प्यार हो गया है।
महेश की बात सुनकर हम दोनों चौक गए। मुझे ज्यादा अभिषेक चौका, किसलिए। पता नहीं। महेश की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।
अभिषेक- कैसे बात कर रहा है बे। तुझे प्यार करने के लिए वही लड़की मिली थी क्या। तू पहले खुद को देख और उसको देख। तुम दोनों का कोई जोड़ नहीं है।
अभिषेक की बात सुनकर मैं उसे देखने लगा। ऐसा नहीं था कि महेश देखने में किसी से कम था। महेश एकदम उसी तरह था जिसे सजीला नौजवान बोलते हैं। महेश और अभिषेक लगभग एक ही तरह थे। हम तीनों में महेश सबसे सुंदर था। अभिषेक की ये बात मेरे गले नहीं उतर रही थी कि वो महेश का जोड़ तनु के साथ कमतर बता रहा था। उसकी बात सुनकर महेश बोला।
महेश- क्यों क्या कमी है मुझमें और क्या कमी है तनु में। तू मुझसे जल रहा है न कि मेरी दोस्ती तनु से बाद में हुई और मैं तनु को तुझसे पहले पटा रहा हूँ।
अभिषेक- अरे तू न पागल हो गया है। मैं क्यों जलूंगा तुझसे। मैं तो ये कह रहा था कि तनु भी तुझे प्यार करती है या तू ही हवा में उड़ रहा है। देख लेना वो शहरी लड़की हैं कहीं कुछ गलत न सोच ले।
महेश- तू चिंता मत कर भाई। सालाना परीक्षा के बाद में उसे अपने प्यार का इज़हार कर दूंगा और मुझे पूरा भरोसा है कि तनु इनकार नहीं करेगी मेरे प्यार को स्वीकारने में।
महेश इतना बोलकर अपने गांव की तरफ चला गया। मैं और अभिषेक भी अपने घर की तरफ चल पड़े। महेश की बात सुनकर अभिषेक गुमसुम से हो गया। पूरे रास्ते उसने कोई बात नहीं कि मुझसे घर में पहुंचकर मैंने उससे पूछा।
मैं- क्या बात है अभिषेक, महेश की बात सुनकर तुझे क्या हो गया है। तेरा चेहरा क्यों उतर गया है।
अभिषेक- कुछ नहीं यार, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे उसकी बात सुनकर अच्छा नहीं लग रहा। मन में एक कसक सी उठ रही है। पता नहीं कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
मैं- अच्छा तो ये बात है। लगता है तुझे प्यार हो गया है।
अभिषेक- तू पागल हो गया है क्या। किसी बहकी बहकी बात कर रहा है। मुझे किससे प्यार होगा।
मैं- मैं बहकी बहकी बात नहीं कर रहा हूँ। तेरे चेहरे के भाव को देखकर तो यही लग रहा है कि तुझे तनु से प्यार हो गया है।
अभिषेक-क्या बात कर रहा है यार। ऐसी कोई भावना नहीं है उसके लिए मेरे मन में। वो तो तेरी तरह मेरी अच्छी दोस्त है। और तू इसे प्यार का नाम दे रहा है। इस तरह तो मैं भी कह सकता हूँ कि तुझे भी तनु से प्यार हो गया है।
मैं- अगर तुझे तनु से प्यार नहीं होता तो तू महेश की बात सुनकर ऐसे बर्ताव नहीं करता, उसकी बात सुनकर तू उछल पड़ा, तेरे चेहरे का रंग बदल गया। तेरा चेहरा उतर गया। इसे प्यार ही कहते हैं मेरे भाई। तेरा प्यार मुझे पहले दिन से ही दिखने लगा था उसके प्रति। महेश की बात सुनकर मैंने तो तेरी तरह कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। और वैसे भी मुझे इन सब फालतू के लफड़ों में नहीं पड़ना। मैं ऐसे ही बहुत खुश हूं।
अभिषेक- नहीं भाई मैं प्यार नहीं करता यार उसे। लेकिन तू पता नहीं कहाँ से इस बात को जोड़कर बता रहा है। लेकिन एक बात बता। तुझे प्यार के बारे में इतना कैसे मालूम। तू तो लड़कियों से दूर भागता है न। पर तु बात तो ऐसे कर रहा है जैसे तूने प्यार को लेकर पीएचडी की हुई है।
मैं- अरे भाई अपने यहां एक कहावत है कि अगर मेरी शादी नहीं हुई है तो क्या मैंने बारात भी नहीं अटेंड की है। इसका मतलब ये है शादी करने के बाद ही शादी के बारे में ज्ञान हो ये जरूरी नहीं है। बिना शादी के ही शादी के बारे में ज्ञान होता है लोगों को। उसी तरह मैंने किसी से प्यार नहीं किया तो इसका मतलब ये नहीं कि मैंने प्यार करने वालों को देखा नहीं है। बेटा तुझे प्यार का रोग लग चुका है। हाँ ये अभी प्रारंभिक अवस्था में है। अगर इसका स्थाई समाधान नहीं किया तो ये बीमारी गंभीर रूप ले लेगी। और फिर धीरे धीरे लाइलाज़ हो जाएगी। इसीलिए अभी से ही इसकी दवा लेनी शुरू कर दे।
मैंने ये बात हंसते हुए कही। जिसे सुनकर अभिषेक भी हंसने लगा। हंसते हुए अभिषेक ने कहा।
अभिषेक-ऐसा कुछभी नहीं है भाई,तू पता नहीं कहाँ से कहाँ पहुंच गया। ये प्यार तो बिल्कुल नहीं है हां तनु की तरफ मेरा खिंचाव जरूर है। अब चल बातें बहुत हो गई अब हमें स्कूल के लिए तैयार होना है।
मैं- ठीक है चलते हैं, लेकिन पहले ये बता। तुम्हें लग रहा है कि ये तनु की तरफ तुम्हारा खिंचाव है तो क्या अगर तनु ने तुझसे अपने प्यार का इज़हार किया तो क्या तुम उसका प्यार स्वीकार कर लोगे।
अभिषेक- अभी इस बारे में मैंने कुछ सोचा नहीं है। अगर ऐसा कुछ होगा तो तुझे जरूर बताऊंगा यार। अब बहुत हो गया। बाद में बात करेंगे इस बारे में। अभी हमें स्कूल चलना है।
उसके बाद हम दोनों तैयार होकर खाना खाकर स्कूल के लिए निकल गए। स्कूल पहुँचकर मैं और अभिषेक अपनी सिटपर बैठ गए। तनु और महेश अभी तक आए नहीं थे। मैं तो अपनी किताब निकल कर पढ़ने बैठ गया, परन्तु अभिषेक अभी भी कुछ सोच रहा था। थोड़ी देर उसे पता नहीं क्या हुआ वो उठकर बाहर चला गया। मुंह कुछ समझ नहीं आया तो मैं भी उठकर उसके पीछे चला गया। मैंने देखा कि अभिषेक बाहर पिलर पर टेक लगाकर खड़ा होकर कुछ सोच रहा था। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
मैं-क्या बात है यार तू इतना परेशान क्यों है। तुझे ऐसे परेशान मैंने कभी नहीं देखा। क्या हुआ है भाई। बता मुझे।
अभिषेक- पता नहीं यार नयन। जब से महेश ने तनु के बारे में बात की है। मेरा मन बहुत विचलित हो रहा है। कुछ समझ में नही आ रहा है कि ऐसा किसलिए हो रहा है। आज से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ।
मैं- देख अभिषेक। उस समय मैंने थोड़े मज़ाक में ये बात बोल दी थी कि तू तनु से प्यार करता है, लेकिन जहां तक मुझे लगता है ये तेरा उसके प्रति आकर्षण मात्र है। इसलिए इससे तू बाहर निकल क्योंकि सालाना परीक्षा सर पर है और अगर मेरी बात मान तो इस प्यार मोहब्बत के लफड़े से दूर रहना। नहीं तो तेरी पढ़ाई भी इससे प्रभावित होगी। और तू जितना इस बारे में सोचेगा। उतना ही इसमें उलझता चला जाएगा।
अभिषेक- मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है यार, लेकिन इतना तो यकीन है मुझे की ये प्यार व्यार तो नहीं है।
मैं- देख मेरे भाई। मैं तो अभी यही कहूंगा कि इन सब बातों को भुलाकर परीक्षा के बारे में सोच। परीक्षा के बाद इसके बारे में सोचने के लिए बहुत समय मिलेगा। फिर आराम से सोचना इसके बारे में।
अभिषेक- हां भाई तू सही रहा है। मुझे इन सब बारे में नही सोचना चाहिए। मुझे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।
इतना कहकर अभिषेक ने अपने सिर को झटका दिया और हम दोनों कक्षा में वापस आ गए। तब तक महेश और तनु भी आ चुके थे। हम दोनों जा कर महेश के बगल में बैठ गए। तब तक शिक्षक भी कक्षा में आ गए। शिक्षक महोदय पढ़ाने लगे।
इस दौरान अभिषेक ने एक बार भी तनु की तरफ नहीं देखा बल्कि अपना पूरा ध्यान किताब पर और शिक्षक की बातों पर लगाये रखा।
अचानक से मेरा ध्यान तनु पर चल गया तो मैंने पाया कि तनु लगातार अभिषेक को देखे जा रही है। मैंने अपना भरम समझकर अपना ध्यान पढ़ाई पर लगाया। कुछ देर में मैन जब फिर तनु की तरफ देखा तो तनु अभी भी अभिषेक को ही देख रही थी।
मैंने अपने मन में सोचा कि बेटा नयन। लगता है मेरे अलावा इन तीनों का बहुत बुरा होने वाला है। भगवान ही बचाए इन्हें।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
Nice and superb update...आठवाँ भाग
धीरे धीरे समय बीतता गया। और वार्षिक परीक्षा का समय नजदीक आने लगा। महेश की तनु के साथ नजदीकियां बढ़ती रही। अब दोनों पहले की अपेक्षा ज्यादा समय साथ में बिताते थे। अभिषेक भी ज्यादातर उन्हीं के साथ रहता था। मैं अभी भी पहले जैसा ही था। मुझमें तनु की बात से बस इतना बदलाव आया था कि मैं अब उससे खुलकर बात करता था, लेकिन अन्य लड़कियों के प्रति मेरा रवैया पहले की ही तरह था। मैं उनसे बात करने में कतराता था।
कुछ समय बाद 11वीं की वार्षिक परीक्षा शुरू होने वाली थी। एक दिन अभिषेक मेरे घर पर रात में रुका। सुबह मैं और अभिषेक नहर पर फ्रेश होने चले गए। फ्रेश होकर लौटते समय पुलिया पर महेश बैठा मिला। वो हमें देखते ही बोला।
महेश- नमस्कार नूनू भाई। कैसे हो।
मैं- ठीक हूँ भाई। तू अपना बता।
महेश- और भाई अभिषेक आप कैसे हैं।
आभिषेक- मस्त भाई ।
महेश- मैं तो बहुत ज्यादा ठीक हूँ यार। ये सब तुम दोनों की वजह से ही हुआ है।
मैं- हम दोनों की वजह से कैसे। मैं कुछ समझ नहीं।
महेश- अबे तुम दोनों ने मेरी मुलाकात तनु से करवाई। जिसके कारण मेरी दोस्ती तनु से हुई। और एक बात बताऊँ तुम दोनों को। मुझे लगता है मुझे तनु से प्यार हो गया है।
महेश की बात सुनकर हम दोनों चौक गए। मुझे ज्यादा अभिषेक चौका, किसलिए। पता नहीं। महेश की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।
अभिषेक- कैसे बात कर रहा है बे। तुझे प्यार करने के लिए वही लड़की मिली थी क्या। तू पहले खुद को देख और उसको देख। तुम दोनों का कोई जोड़ नहीं है।
अभिषेक की बात सुनकर मैं उसे देखने लगा। ऐसा नहीं था कि महेश देखने में किसी से कम था। महेश एकदम उसी तरह था जिसे सजीला नौजवान बोलते हैं। महेश और अभिषेक लगभग एक ही तरह थे। हम तीनों में महेश सबसे सुंदर था। अभिषेक की ये बात मेरे गले नहीं उतर रही थी कि वो महेश का जोड़ तनु के साथ कमतर बता रहा था। उसकी बात सुनकर महेश बोला।
महेश- क्यों क्या कमी है मुझमें और क्या कमी है तनु में। तू मुझसे जल रहा है न कि मेरी दोस्ती तनु से बाद में हुई और मैं तनु को तुझसे पहले पटा रहा हूँ।
अभिषेक- अरे तू न पागल हो गया है। मैं क्यों जलूंगा तुझसे। मैं तो ये कह रहा था कि तनु भी तुझे प्यार करती है या तू ही हवा में उड़ रहा है। देख लेना वो शहरी लड़की हैं कहीं कुछ गलत न सोच ले।
महेश- तू चिंता मत कर भाई। सालाना परीक्षा के बाद में उसे अपने प्यार का इज़हार कर दूंगा और मुझे पूरा भरोसा है कि तनु इनकार नहीं करेगी मेरे प्यार को स्वीकारने में।
महेश इतना बोलकर अपने गांव की तरफ चला गया। मैं और अभिषेक भी अपने घर की तरफ चल पड़े। महेश की बात सुनकर अभिषेक गुमसुम से हो गया। पूरे रास्ते उसने कोई बात नहीं कि मुझसे घर में पहुंचकर मैंने उससे पूछा।
मैं- क्या बात है अभिषेक, महेश की बात सुनकर तुझे क्या हो गया है। तेरा चेहरा क्यों उतर गया है।
अभिषेक- कुछ नहीं यार, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे उसकी बात सुनकर अच्छा नहीं लग रहा। मन में एक कसक सी उठ रही है। पता नहीं कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
मैं- अच्छा तो ये बात है। लगता है तुझे प्यार हो गया है।
अभिषेक- तू पागल हो गया है क्या। किसी बहकी बहकी बात कर रहा है। मुझे किससे प्यार होगा।
मैं- मैं बहकी बहकी बात नहीं कर रहा हूँ। तेरे चेहरे के भाव को देखकर तो यही लग रहा है कि तुझे तनु से प्यार हो गया है।
अभिषेक-क्या बात कर रहा है यार। ऐसी कोई भावना नहीं है उसके लिए मेरे मन में। वो तो तेरी तरह मेरी अच्छी दोस्त है। और तू इसे प्यार का नाम दे रहा है। इस तरह तो मैं भी कह सकता हूँ कि तुझे भी तनु से प्यार हो गया है।
मैं- अगर तुझे तनु से प्यार नहीं होता तो तू महेश की बात सुनकर ऐसे बर्ताव नहीं करता, उसकी बात सुनकर तू उछल पड़ा, तेरे चेहरे का रंग बदल गया। तेरा चेहरा उतर गया। इसे प्यार ही कहते हैं मेरे भाई। तेरा प्यार मुझे पहले दिन से ही दिखने लगा था उसके प्रति। महेश की बात सुनकर मैंने तो तेरी तरह कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। और वैसे भी मुझे इन सब फालतू के लफड़ों में नहीं पड़ना। मैं ऐसे ही बहुत खुश हूं।
अभिषेक- नहीं भाई मैं प्यार नहीं करता यार उसे। लेकिन तू पता नहीं कहाँ से इस बात को जोड़कर बता रहा है। लेकिन एक बात बता। तुझे प्यार के बारे में इतना कैसे मालूम। तू तो लड़कियों से दूर भागता है न। पर तु बात तो ऐसे कर रहा है जैसे तूने प्यार को लेकर पीएचडी की हुई है।
मैं- अरे भाई अपने यहां एक कहावत है कि अगर मेरी शादी नहीं हुई है तो क्या मैंने बारात भी नहीं अटेंड की है। इसका मतलब ये है शादी करने के बाद ही शादी के बारे में ज्ञान हो ये जरूरी नहीं है। बिना शादी के ही शादी के बारे में ज्ञान होता है लोगों को। उसी तरह मैंने किसी से प्यार नहीं किया तो इसका मतलब ये नहीं कि मैंने प्यार करने वालों को देखा नहीं है। बेटा तुझे प्यार का रोग लग चुका है। हाँ ये अभी प्रारंभिक अवस्था में है। अगर इसका स्थाई समाधान नहीं किया तो ये बीमारी गंभीर रूप ले लेगी। और फिर धीरे धीरे लाइलाज़ हो जाएगी। इसीलिए अभी से ही इसकी दवा लेनी शुरू कर दे।
मैंने ये बात हंसते हुए कही। जिसे सुनकर अभिषेक भी हंसने लगा। हंसते हुए अभिषेक ने कहा।
अभिषेक-ऐसा कुछभी नहीं है भाई,तू पता नहीं कहाँ से कहाँ पहुंच गया। ये प्यार तो बिल्कुल नहीं है हां तनु की तरफ मेरा खिंचाव जरूर है। अब चल बातें बहुत हो गई अब हमें स्कूल के लिए तैयार होना है।
मैं- ठीक है चलते हैं, लेकिन पहले ये बता। तुम्हें लग रहा है कि ये तनु की तरफ तुम्हारा खिंचाव है तो क्या अगर तनु ने तुझसे अपने प्यार का इज़हार किया तो क्या तुम उसका प्यार स्वीकार कर लोगे।
अभिषेक- अभी इस बारे में मैंने कुछ सोचा नहीं है। अगर ऐसा कुछ होगा तो तुझे जरूर बताऊंगा यार। अब बहुत हो गया। बाद में बात करेंगे इस बारे में। अभी हमें स्कूल चलना है।
उसके बाद हम दोनों तैयार होकर खाना खाकर स्कूल के लिए निकल गए। स्कूल पहुँचकर मैं और अभिषेक अपनी सिटपर बैठ गए। तनु और महेश अभी तक आए नहीं थे। मैं तो अपनी किताब निकल कर पढ़ने बैठ गया, परन्तु अभिषेक अभी भी कुछ सोच रहा था। थोड़ी देर उसे पता नहीं क्या हुआ वो उठकर बाहर चला गया। मुंह कुछ समझ नहीं आया तो मैं भी उठकर उसके पीछे चला गया। मैंने देखा कि अभिषेक बाहर पिलर पर टेक लगाकर खड़ा होकर कुछ सोच रहा था। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
मैं-क्या बात है यार तू इतना परेशान क्यों है। तुझे ऐसे परेशान मैंने कभी नहीं देखा। क्या हुआ है भाई। बता मुझे।
अभिषेक- पता नहीं यार नयन। जब से महेश ने तनु के बारे में बात की है। मेरा मन बहुत विचलित हो रहा है। कुछ समझ में नही आ रहा है कि ऐसा किसलिए हो रहा है। आज से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ।
मैं- देख अभिषेक। उस समय मैंने थोड़े मज़ाक में ये बात बोल दी थी कि तू तनु से प्यार करता है, लेकिन जहां तक मुझे लगता है ये तेरा उसके प्रति आकर्षण मात्र है। इसलिए इससे तू बाहर निकल क्योंकि सालाना परीक्षा सर पर है और अगर मेरी बात मान तो इस प्यार मोहब्बत के लफड़े से दूर रहना। नहीं तो तेरी पढ़ाई भी इससे प्रभावित होगी। और तू जितना इस बारे में सोचेगा। उतना ही इसमें उलझता चला जाएगा।
अभिषेक- मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है यार, लेकिन इतना तो यकीन है मुझे की ये प्यार व्यार तो नहीं है।
मैं- देख मेरे भाई। मैं तो अभी यही कहूंगा कि इन सब बातों को भुलाकर परीक्षा के बारे में सोच। परीक्षा के बाद इसके बारे में सोचने के लिए बहुत समय मिलेगा। फिर आराम से सोचना इसके बारे में।
अभिषेक- हां भाई तू सही रहा है। मुझे इन सब बारे में नही सोचना चाहिए। मुझे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।
इतना कहकर अभिषेक ने अपने सिर को झटका दिया और हम दोनों कक्षा में वापस आ गए। तब तक महेश और तनु भी आ चुके थे। हम दोनों जा कर महेश के बगल में बैठ गए। तब तक शिक्षक भी कक्षा में आ गए। शिक्षक महोदय पढ़ाने लगे।
इस दौरान अभिषेक ने एक बार भी तनु की तरफ नहीं देखा बल्कि अपना पूरा ध्यान किताब पर और शिक्षक की बातों पर लगाये रखा।
अचानक से मेरा ध्यान तनु पर चल गया तो मैंने पाया कि तनु लगातार अभिषेक को देखे जा रही है। मैंने अपना भरम समझकर अपना ध्यान पढ़ाई पर लगाया। कुछ देर में मैन जब फिर तनु की तरफ देखा तो तनु अभी भी अभिषेक को ही देख रही थी।
मैंने अपने मन में सोचा कि बेटा नयन। लगता है मेरे अलावा इन तीनों का बहुत बुरा होने वाला है। भगवान ही बचाए इन्हें।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
superb updateआठवाँ भाग
धीरे धीरे समय बीतता गया। और वार्षिक परीक्षा का समय नजदीक आने लगा। महेश की तनु के साथ नजदीकियां बढ़ती रही। अब दोनों पहले की अपेक्षा ज्यादा समय साथ में बिताते थे। अभिषेक भी ज्यादातर उन्हीं के साथ रहता था। मैं अभी भी पहले जैसा ही था। मुझमें तनु की बात से बस इतना बदलाव आया था कि मैं अब उससे खुलकर बात करता था, लेकिन अन्य लड़कियों के प्रति मेरा रवैया पहले की ही तरह था। मैं उनसे बात करने में कतराता था।
कुछ समय बाद 11वीं की वार्षिक परीक्षा शुरू होने वाली थी। एक दिन अभिषेक मेरे घर पर रात में रुका। सुबह मैं और अभिषेक नहर पर फ्रेश होने चले गए। फ्रेश होकर लौटते समय पुलिया पर महेश बैठा मिला। वो हमें देखते ही बोला।
महेश- नमस्कार नूनू भाई। कैसे हो।
मैं- ठीक हूँ भाई। तू अपना बता।
महेश- और भाई अभिषेक आप कैसे हैं।
आभिषेक- मस्त भाई ।
महेश- मैं तो बहुत ज्यादा ठीक हूँ यार। ये सब तुम दोनों की वजह से ही हुआ है।
मैं- हम दोनों की वजह से कैसे। मैं कुछ समझ नहीं।
महेश- अबे तुम दोनों ने मेरी मुलाकात तनु से करवाई। जिसके कारण मेरी दोस्ती तनु से हुई। और एक बात बताऊँ तुम दोनों को। मुझे लगता है मुझे तनु से प्यार हो गया है।
महेश की बात सुनकर हम दोनों चौक गए। मुझे ज्यादा अभिषेक चौका, किसलिए। पता नहीं। महेश की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।
अभिषेक- कैसे बात कर रहा है बे। तुझे प्यार करने के लिए वही लड़की मिली थी क्या। तू पहले खुद को देख और उसको देख। तुम दोनों का कोई जोड़ नहीं है।
अभिषेक की बात सुनकर मैं उसे देखने लगा। ऐसा नहीं था कि महेश देखने में किसी से कम था। महेश एकदम उसी तरह था जिसे सजीला नौजवान बोलते हैं। महेश और अभिषेक लगभग एक ही तरह थे। हम तीनों में महेश सबसे सुंदर था। अभिषेक की ये बात मेरे गले नहीं उतर रही थी कि वो महेश का जोड़ तनु के साथ कमतर बता रहा था। उसकी बात सुनकर महेश बोला।
महेश- क्यों क्या कमी है मुझमें और क्या कमी है तनु में। तू मुझसे जल रहा है न कि मेरी दोस्ती तनु से बाद में हुई और मैं तनु को तुझसे पहले पटा रहा हूँ।
अभिषेक- अरे तू न पागल हो गया है। मैं क्यों जलूंगा तुझसे। मैं तो ये कह रहा था कि तनु भी तुझे प्यार करती है या तू ही हवा में उड़ रहा है। देख लेना वो शहरी लड़की हैं कहीं कुछ गलत न सोच ले।
महेश- तू चिंता मत कर भाई। सालाना परीक्षा के बाद में उसे अपने प्यार का इज़हार कर दूंगा और मुझे पूरा भरोसा है कि तनु इनकार नहीं करेगी मेरे प्यार को स्वीकारने में।
महेश इतना बोलकर अपने गांव की तरफ चला गया। मैं और अभिषेक भी अपने घर की तरफ चल पड़े। महेश की बात सुनकर अभिषेक गुमसुम से हो गया। पूरे रास्ते उसने कोई बात नहीं कि मुझसे घर में पहुंचकर मैंने उससे पूछा।
मैं- क्या बात है अभिषेक, महेश की बात सुनकर तुझे क्या हो गया है। तेरा चेहरा क्यों उतर गया है।
अभिषेक- कुछ नहीं यार, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे उसकी बात सुनकर अच्छा नहीं लग रहा। मन में एक कसक सी उठ रही है। पता नहीं कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
मैं- अच्छा तो ये बात है। लगता है तुझे प्यार हो गया है।
अभिषेक- तू पागल हो गया है क्या। किसी बहकी बहकी बात कर रहा है। मुझे किससे प्यार होगा।
मैं- मैं बहकी बहकी बात नहीं कर रहा हूँ। तेरे चेहरे के भाव को देखकर तो यही लग रहा है कि तुझे तनु से प्यार हो गया है।
अभिषेक-क्या बात कर रहा है यार। ऐसी कोई भावना नहीं है उसके लिए मेरे मन में। वो तो तेरी तरह मेरी अच्छी दोस्त है। और तू इसे प्यार का नाम दे रहा है। इस तरह तो मैं भी कह सकता हूँ कि तुझे भी तनु से प्यार हो गया है।
मैं- अगर तुझे तनु से प्यार नहीं होता तो तू महेश की बात सुनकर ऐसे बर्ताव नहीं करता, उसकी बात सुनकर तू उछल पड़ा, तेरे चेहरे का रंग बदल गया। तेरा चेहरा उतर गया। इसे प्यार ही कहते हैं मेरे भाई। तेरा प्यार मुझे पहले दिन से ही दिखने लगा था उसके प्रति। महेश की बात सुनकर मैंने तो तेरी तरह कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। और वैसे भी मुझे इन सब फालतू के लफड़ों में नहीं पड़ना। मैं ऐसे ही बहुत खुश हूं।
अभिषेक- नहीं भाई मैं प्यार नहीं करता यार उसे। लेकिन तू पता नहीं कहाँ से इस बात को जोड़कर बता रहा है। लेकिन एक बात बता। तुझे प्यार के बारे में इतना कैसे मालूम। तू तो लड़कियों से दूर भागता है न। पर तु बात तो ऐसे कर रहा है जैसे तूने प्यार को लेकर पीएचडी की हुई है।
मैं- अरे भाई अपने यहां एक कहावत है कि अगर मेरी शादी नहीं हुई है तो क्या मैंने बारात भी नहीं अटेंड की है। इसका मतलब ये है शादी करने के बाद ही शादी के बारे में ज्ञान हो ये जरूरी नहीं है। बिना शादी के ही शादी के बारे में ज्ञान होता है लोगों को। उसी तरह मैंने किसी से प्यार नहीं किया तो इसका मतलब ये नहीं कि मैंने प्यार करने वालों को देखा नहीं है। बेटा तुझे प्यार का रोग लग चुका है। हाँ ये अभी प्रारंभिक अवस्था में है। अगर इसका स्थाई समाधान नहीं किया तो ये बीमारी गंभीर रूप ले लेगी। और फिर धीरे धीरे लाइलाज़ हो जाएगी। इसीलिए अभी से ही इसकी दवा लेनी शुरू कर दे।
मैंने ये बात हंसते हुए कही। जिसे सुनकर अभिषेक भी हंसने लगा। हंसते हुए अभिषेक ने कहा।
अभिषेक-ऐसा कुछभी नहीं है भाई,तू पता नहीं कहाँ से कहाँ पहुंच गया। ये प्यार तो बिल्कुल नहीं है हां तनु की तरफ मेरा खिंचाव जरूर है। अब चल बातें बहुत हो गई अब हमें स्कूल के लिए तैयार होना है।
मैं- ठीक है चलते हैं, लेकिन पहले ये बता। तुम्हें लग रहा है कि ये तनु की तरफ तुम्हारा खिंचाव है तो क्या अगर तनु ने तुझसे अपने प्यार का इज़हार किया तो क्या तुम उसका प्यार स्वीकार कर लोगे।
अभिषेक- अभी इस बारे में मैंने कुछ सोचा नहीं है। अगर ऐसा कुछ होगा तो तुझे जरूर बताऊंगा यार। अब बहुत हो गया। बाद में बात करेंगे इस बारे में। अभी हमें स्कूल चलना है।
उसके बाद हम दोनों तैयार होकर खाना खाकर स्कूल के लिए निकल गए। स्कूल पहुँचकर मैं और अभिषेक अपनी सिटपर बैठ गए। तनु और महेश अभी तक आए नहीं थे। मैं तो अपनी किताब निकल कर पढ़ने बैठ गया, परन्तु अभिषेक अभी भी कुछ सोच रहा था। थोड़ी देर उसे पता नहीं क्या हुआ वो उठकर बाहर चला गया। मुंह कुछ समझ नहीं आया तो मैं भी उठकर उसके पीछे चला गया। मैंने देखा कि अभिषेक बाहर पिलर पर टेक लगाकर खड़ा होकर कुछ सोच रहा था। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
मैं-क्या बात है यार तू इतना परेशान क्यों है। तुझे ऐसे परेशान मैंने कभी नहीं देखा। क्या हुआ है भाई। बता मुझे।
अभिषेक- पता नहीं यार नयन। जब से महेश ने तनु के बारे में बात की है। मेरा मन बहुत विचलित हो रहा है। कुछ समझ में नही आ रहा है कि ऐसा किसलिए हो रहा है। आज से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ।
मैं- देख अभिषेक। उस समय मैंने थोड़े मज़ाक में ये बात बोल दी थी कि तू तनु से प्यार करता है, लेकिन जहां तक मुझे लगता है ये तेरा उसके प्रति आकर्षण मात्र है। इसलिए इससे तू बाहर निकल क्योंकि सालाना परीक्षा सर पर है और अगर मेरी बात मान तो इस प्यार मोहब्बत के लफड़े से दूर रहना। नहीं तो तेरी पढ़ाई भी इससे प्रभावित होगी। और तू जितना इस बारे में सोचेगा। उतना ही इसमें उलझता चला जाएगा।
अभिषेक- मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है यार, लेकिन इतना तो यकीन है मुझे की ये प्यार व्यार तो नहीं है।
मैं- देख मेरे भाई। मैं तो अभी यही कहूंगा कि इन सब बातों को भुलाकर परीक्षा के बारे में सोच। परीक्षा के बाद इसके बारे में सोचने के लिए बहुत समय मिलेगा। फिर आराम से सोचना इसके बारे में।
अभिषेक- हां भाई तू सही रहा है। मुझे इन सब बारे में नही सोचना चाहिए। मुझे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।
इतना कहकर अभिषेक ने अपने सिर को झटका दिया और हम दोनों कक्षा में वापस आ गए। तब तक महेश और तनु भी आ चुके थे। हम दोनों जा कर महेश के बगल में बैठ गए। तब तक शिक्षक भी कक्षा में आ गए। शिक्षक महोदय पढ़ाने लगे।
इस दौरान अभिषेक ने एक बार भी तनु की तरफ नहीं देखा बल्कि अपना पूरा ध्यान किताब पर और शिक्षक की बातों पर लगाये रखा।
अचानक से मेरा ध्यान तनु पर चल गया तो मैंने पाया कि तनु लगातार अभिषेक को देखे जा रही है। मैंने अपना भरम समझकर अपना ध्यान पढ़ाई पर लगाया। कुछ देर में मैन जब फिर तनु की तरफ देखा तो तनु अभी भी अभिषेक को ही देख रही थी।
मैंने अपने मन में सोचा कि बेटा नयन। लगता है मेरे अलावा इन तीनों का बहुत बुरा होने वाला है। भगवान ही बचाए इन्हें।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।