Tiger 786
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Komal ji mere commens jayada ho rahe hai.apki storie pe agar acha na lage to bata dijeyga.वापस बेड रूम ,
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कमरे में घुसने के पहले ही वेटर मिला ,
" मैडम ,डिनर। " उसने पूछा।
" सुबह वाला तो अच्छा था न , बस वही आर्डर कर देते हैं , "
उन की ओर मुड कर मैंने मुस्कराते कहा।
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और वेटर से बोला ,
" बेडरूम में ही दे देना , मैं प्लेट्स बाहर रख दूंगी। "
लेकिन उस बार भी खाना उन्होंने पूरा मेरे हाथों और होंठों से ही खाया।
उनके हाथ तो 'कहीं और ' बिजी थे।
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पूरा खाना मैंने उन्हें उनकी गोद में बैठकर खिलाया ,और उनके हाथ उस टाइट सूट से छलकते उभारों की नाप जोख करने में लगे थे।
और वहां फिर अबकी हम दोनों ने एक एक सुलगाई साथ साथ।
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मायके में तो कई बार , कभी चैलेंज के तौर पर तो कभी बस चिढ़ाने में ,... और कभी कभी सहेलियों के साथ ,
मुझे मम्मी की बात याद आ रही थी , अगर स्मोकर हो तो नान स्मोकर बना दो और नान स्मोकर हो तो स्मोकर ,वेज हो तो नान वेज ,...
आज कितना अच्छा लग रहा था मैं बता नहीं सकती एकदम खुला खुला
और मुझसे ज्यादा उनको
उस रात तीन राउंड हुआ और सुबह से भी जबरदस्त।
वो भी बिना किसी 'गोली -वोली ' की मदद से।
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उस बदमास , मेरी मम्मी के दामाद ने मेरी हड्डी हड्डी तोड़ कर रख दी , सुबह उठी तो बड़ी मुश्किल से पलंग का सहारा लेकर किसी तरह खड़ी हुयी
दीवाल का सहारा लेकर बाथरूम जा पायी ,
एक बूँद सोने नहीं दिया ,
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और मैं भी तो मैंने उसकी उस ' बहिनिया ' का नाम ले ले कर खूब छेड़ा ,
इतनी मस्ती आज तक नहीं हुयी थी ,मैंने सोचा भी नहीं था
और जब हम लोग लौट के आये उसके बाद स्लोली लेकिन सिग्निफिकेंटली उनकी हर चीज , खाने की आदत हो ,पहनने की हो एटीट्यूड , सब कुछ बदलने लगा।
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Kiuki ek storie pe mai har update pe comment kar raha tha to ek reader ne kaha ki bhai itne comment mat kiya karo