नहीं नहीं,
असल में ये पार्ट, इन्सेस्ट के किस्से वाला , तो यादों की झुरमुट का है , फ़्लैश बैक का, होली के बाद रंगपंचमी में गीता छुटकी को अपना किस्सा सुना रही है,
लेकिन किस्सा जबका है, जब गीता और उसके भाई का चक्कर चालू हुआ वो मौसम सावन का ही है
असल में मुझे सावन और फागुन दो महीने सब से ज्यादा भारतीय परिवेश में एरोटिक लगते हैं और सावन का मज़ा गांव के परिवेश में और बढ़ जाता है, इसलिए इस इन्सेस्ट वाले भाग की घटनाएं सावन में ही घटित है और मैं पात्रों के साथ मौसम आस पास की प्रकृति, खेत खलिहान की बातें भी करती हूँ बीच बीच में जिससे पाठकों को थोड़ा तो अहसास हो ये घटना कहाँ कब घट रही है, इसलिए सावन का माहौल इस कहानी में और
श्रृंगार के प्रसंगों में ऋतू उद्दीपन का भी काम करती है, एक बढ़िया नेपथ्य में पृष्ठ भूमि भी देती है इसलिए और आगे के प्रसंगों में ये बात और साफ़ होगी।
एकबार फिर से धन्यवाद, ... हर पोस्ट पर , कमेंट के लिए और हर कमेंट से मुझे कुछ सीखने को मिलता है बस ऐसे ही साथ बना रहे