लिप सर्विस
" भैया, माँ बहुत बोल रही है न , अरे यार अपनी नहीं तो अपनी बहन की इज्जत का ख्याल कर, हर साल राखी बांधती हूँ, पैसा भी नहीं देते,... आज इसको चोद के बता दो मेरा भैया चीज़ क्या है, जिस भोंसडे से निकले हो न उसी में, पक्का, बहुत मजा आएगा,.."

और साथ में मैं चूस भी रही थी, चाट भी रही थी, मुठिया भी रही थी, आठ दस मिनट तक,... बेचारे की हालत खराब हो रही थी,...
लेकिन मैंने भी तय कर लिया था की आज इस बाबू जी को तड़पाना है,...
स्साले ने मुझे कित्ते दिन तड़पाया था,... चाची ने बोला, घर में सगी बहन बैठी है,...
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फुलवा बोली,.... मस्त माल घर में है,
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मुझसे बारी चमेलिया, फुलवा की छुटकी बहिनिया की खुले आम, आम की बाग़ में फाड़ दिया , गन्ने के खेत में टांग उठा के पेल दिया
और मैं बेचारी, ऊपर से मुझे देख के फनफनाता था, मेरे बारे में सोच सोच के बेचारा बाथरूम में मुट्ठ मारता था, सगी बहन की चूँची देखने के लिए बाथरूम के दरवाजे में स्साले ने छेद कर दिया था, ... और मैं भी उसे दिखा के ठीक छेद के सामने अपना जोबन मसलती थी,
तड़प स्साले , तेरी किस्मत में तड़पना लिखा है,...
वो तो सहेली की भौजी ने मुझे इत्ता सिखाया पढ़ाया,... और मैं ही,... तो आज तू भी तड़प,...
मैं थोड़ी देर चूस के उस गदहे छाप लंड को छोड़ देती थी, एकदम कुतुबमीनार, ...
बस कभी ऊँगली से सहलाती रहती तो फिर बस छोटे छोटे चुम्मे खूंटे के बेस से सुपाड़े तक, बहुत छोटे छोटे और चुम्मी में उसे ४४० वोल्ट के करेंट का झटका लगता,...
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बेचारा जब दस बार कहता हे गितवा मुंह में ले
तो ले लेती लेकिन
उस मोटे खूंटे को नहीं,... नीचे लटक रहे दोनों रसगुल्लों को,... कभी हलके हलके चूसती तो कभी जोर से ,..
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माँ ने आज कुछ ट्रिक तो भैया के सामने सिखाई थी और उससे दस गुना ज्यादा चाची के यहाँ आते जाते ,... चूसने के चाटने के , .. और न लड़की की देह में कुछ गन्दा होता है न लड़के के देह में ,
मैंने हिचकते हुए पूछा माँ लड़के के पिछवाड़े , तो वो खिलखिलाने लगीं बोलीं अरे बेटी असली खेल तो वहीँ है,... तीन चार बार चोद के मरद थक के चूर हो गया हो , बस ज़रा सा जीभ दरार में घुमा दो,... बस फनफनाने लगेगा,... शरारत करनी हो पिछवाड़े ऊँगली पेल दो,... जो मरद एकदम सांड़ हो,
" भैया ऐसा न माँ " मैं हंस के बोली , एकदम माँ ने हामी भरी लेकिन बात अपनी जारी रखी
"जल्दी न झड़ रहा हो बस उसकी गाँड़ में ऊँगली डाल दो, अक्सर जल्दी से घुसती नहीं है , लेकिन थूक लगा के चिकनी कर लो,... बस कोहनी के जोर से और गोल गोल घुमाते हुए ,... ये खेल जल्दी बाजी का नहीं है अंदाज लगाना होत, है कहाँ है , जहाँ पेल्हड़ ख़तम होता है उसी के ऊपर,... मैं सिखा दूंगी प्रैक्टिस करा के , अखरोट के साइज की होती है वो बस गाँड़ में ऊँगली डाल के ज़रा सा खुरचो, हलके हलके दबाओ , दो मिनट में खेल ख़तम,.. तेरे भैया को हो सकता है छह सात मिनट लगे, लेकिन पक्का शर्तिया तरीका है,... "
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तो गीता बॉल्स चूसते चूसते माँ की बातें सोचते सोचते भाई के पिछवाड़े की दरार में कभी ऊँगली से सहलाती तो कभी जीभ से ही दो चार बार लम्बा लम्बा चाट लेती ,...
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एक दो बार तो उसे कुछ ऐसा ऐसा,...
बेचारा भाई कुछ कर भी नहीं सकता था ,
खूंटा खड़ा तन्नाया,...
माँ भी अपने बेटे बेटी का ये खेल अपनी आँखों के सामने देख के खुश हो रही थी अब धीरे धीरे बेटी की हिचक ख़तम हो रही थी,...
बस अरविन्द तड़प रहा था मन तो यही कर रहा था की पटक के गितवा को चोद दे,... लेकिन ऐसा बंधा छना, बस एक बार खुल जाय किसी तरह तो आज ऐसा चोदेगा उसे की तीन दिन तक चल नहीं पाएगी स्साली, अब तक बहन समझ के,... उसके दर्द की परवाह करता था,... लेकिन आज स्साली कित्ता भी रोये कूदे, चूतड़ पटके, अभी तक उसने उसकी ताकत देखी नहीं थी, हर बार वो बहुत सम्हल सम्हल के,...
पर गीता को आज कुछ परवाह नहीं थी जितना देर उसने चूसा था उससे ज्यादा तड़पाया और फिर सिर्फ सुपाड़ा मुंह में ले के चुभलाने लगी,.... कभी जीभ से सिर्फ पेशाब वाले छेद को छेड़ती,
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अरविन्द का हाथ खुला होता,... तो सर पकड़ के बहन के मुंह पूरा बित्ते भर का ९ इंच का लंड हलक तक पेल देता लेकिन
पर बहन कौन जो भाई के मन की बात न समझे तो गीता ने खुद ही धीरे धीरे कर के इंच इंच, ... गाल में दर्द हो रहा था , हलक फटा पड़ रहा था लेकिन घोंट लिया पूरा, फिर गीता के होंठ हलके हल्के बस चर्म दंड को सहला रहे थे, नीचे से जीभ भी सुरसुरा रही थी और सबसे बढ़ के गीता की दीये की तरह की बड़ी बड़ी आँखे भाई की आँखों को छेड़ रही थीं , उकसा रही थीं , बता रही थीं उसे कितना मज़ा आ रहा है, ...
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भाई का गन्ना चूसने में
गीता ने छुटकी से आगे का हवाल बयान किया,...
अरविन्द का हाथ खुला होता,... तो सर पकड़ के बहन के मुंह पूरा बित्ते भर का ९ इंच का लंड हलक तक पेल देता लेकिन
पर बहन कौन जो भाई के मन की बात न समझे तो गीता ने खुद ही धीरे धीरे कर के इंच इंच, ... गाल में दर्द हो रहा था , हलक फटा पड़ रहा था लेकिन घोंट लिया पूरा, फिर गीता के होंठ हलके हल्के बस चर्म दंड को सहला रहे थे, नीचे से जीभ भी सुरसुरा रही थी और सबसे बढ़ के गीता की दीये की तरह की बड़ी बड़ी आँखे भाई की आँखों को छेड़ रही थीं , उकसा रही थीं , बता रही थीं उसे कितना मज़ा आ रहा है,








