मिलन की तैयारी
लेकिन अभी चवन्नी का खेल बाकी था , बल्कि चवन्नी का ही खेल हुआ था.
……………
नहाने के बाद उबटन , वो भी एकदम ख़ास , चन्दन और चमेली के तेल का जिसमें कुछ हर्ब्स पड़ी थीं ,
और फिर गुड्डी के कच्ची अमिया पर एक खास उबटन , कच्चे अनार के दानो को पीस कर , थोड़ा सा दूध और गुलाब जल ,
साथ साथ गीता की छेड़छाड़ ,
" ई उबटन लगवा लो न भौजी तो केतनो जुबना मिजवावोगी ,ऐसी ही टनाटन बना रहेगा , " निपल खींचती हुयी गीता ने उसे छेड़ा ,और जोड़ा ,
" अरे यहां थोड़े सैयां ही अकेले थोड़े हैं इन कच्ची अमिया को चखने वाले , देवर हैं ,ननदोई हैं , .... "
बस गुड्डी को मौक़ा मिला गया उसने जवाबी हमला बोल दिया , गीता के उभारो को दबोचती बोली ,
" हाँ तोहार एस ननद हैं , तो फिर एक दो थोड़े ,आठ दस ननदोई तो होंगे ही , क्यों। "
" एकदम , ... एक दो में इस उम्र में किसका मन भरता है , अब आगयी हो तो देखना ,मिलवा दूंगी , अरे मिलवा दूंगी क्या चढ़वा दूंगी तोहरे ऊपर , नन्दोई सलहज का , ... "

हलके हलके गुड्डी के उभार पर मालिश करते ,उबटन छुड़ाते वो बोली।और सिखा भी रही थी, ' रोज नहाने के बाद स्कूल जाने के पहिले बस पांच मिनट ऐसे ही मालिश करना दोनों कबूतर को , एकदम टनाटन रहेंगे बिना ढक्कन के दर्जनों यार रोज मीजेंगे कस कस के तब भी। "
साथ में लाइट एक्सरसाइजेज भी ,
गुड्डी के पैर मोड़ के उसने दुहरा कर दिया , और चिढ़ाया ,
" भौजी आज रात भर ऐसे ही टाँगे उठी रहेंगी , प्रैक्टिस कर लो ,.. "
गुड्डी योगा की एक्सपर्ट थी ,एक से एक कठिन आसन उसके लिए आसान थे , पर ये आसन तो अलग ही
फिर धीरे धीरे योनि की एक्ससरसाइज ,
कैसे उसको रिलेक्स रखें , फिर बार बार अच्छी तरह भींच कर कसी रखें ,जिससे चुदने के बाद भी कसाव में कोई कमी न आये,
साथ साथ गीता गुड्डी की गुलाबी पंखुड़ियों को सहला रही थी , छेड़ रही थी,उसपर चमेली का तेल हलके हलके मल रही थी।
मस्ती से गुड्डी की आँखे मुंदी हुयी थी।
और गीता की ज्ञान भरी बातें भी जारी थीं ,
" हे भौजी , दरद तो बहुत होगा जब फटेगी , लेकिन जानती हो असली मजा तो उसी दरद में है , तुमको भी और भइया को भी। लेकिन पूरा घोंटना जरूर। और कुल मलाई अंदर , सबसे अच्छा मलहम वही है बुरिया के लिए। "
गीता गुड्डी को पटा रही थी ,समझा रही थी , तैयार कर रही थी और मैं किचेन में बिजी थी।
कभी गुड्डी की सिसकियाँ ,कभी दोनों की खिलखिलाहटें छन छन कर मेरे कानों में पड़ रही थी।
और मैं मुस्करा रही थी , गुड्डी को नहीं मालूम था , गीता की ये दोस्ती उसे कहाँ ले जाने वाली थी। किंक के मामले में गीता अपनी माँ मंजू बाई से भी दो हाथ आगे थी और उसने पहले ही मुझसे भी और इनसे भी तिरबाचा भरवा लिया था की जब वो गुड्डी की ऐसी की तैसी करेगी तो हम दोनों बीच में नहीं आएंगे।
मैं हँसते हुए बोली , नहीं आउंगी लेकिन मेरी भी एक शर्त है , तुम्हे उसको अपनी तरह पक्की छिनार बनाना होगा।

गीता भी न ,उसने जोर से न न में सर हिलाया और हँसते हुए बोली ,
" नहीं नहीं , अपने जैसी नहीं। मुझसे भी चार हाथ आगे जायेगी वो ,एक बार मेरे हाथ में पड़ने तो दीजिए ,... लंड देखकर खुद ही उसकी पैंट का ज़िप खोल देगी ,बहुत तड़पाया है न मेरे भइया को उसने, नम्बरी छिनार बनेगी वो, पक्की चुदक्कड़।"
और इस घर की पहली सुबह ही गीता ने उसे अपने शीशे में उतार लिया ,हाँ मैंने गीता को बोला था , शुरू के दो चार दिन ज़रा , ... एक बार मेरे कमल जीजू आ जाएँ ,.. दो चार रात ये भी अपनी बहिनिया का मजा ले लें ,फिर उसकी असली रगड़ाई तो होनी ही है , मेरे मायके भेजने के पहले एक दो दिन वो पूरी तरह गीता और मंजू के कब्जे में
और गीता की ज्ञान भरी बातें भी जारी थीं ,
" हे भौजी , दरद तो बहुत होगा जब फटेगी , लेकिन जानती हो असली मजा तो उसी दरद में है , तुमको भी और भइया को भी। लेकिन पूरा घोंटना जरूर। और कुल मलाई अंदर , सबसे अच्छा मलहम वही है बुरिया के लिए। "
Bahut mast







