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Horror कामातुर चुड़ैल! (Completed)

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Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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ShanthiSpore

Shanthi From Singapore - 40 F
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अपडेट २#

अब तक आपने पढ़ा..

युवती (मुस्कुराते हुए बेड से उठ कर सम्राट के करीब आती है): मैं कौन, और यहां कैसे आई, इन बातों में वक्त क्यों बर्बाद करना? आओ और बस मेरी बाहों में समा जाओ।
_____________________________________

अब आगे....



सम्राट उसकी ओर आश्चर्य से देखता है, और उसकी नजरें जैसे ही युवती से मिलती हैं, सम्राट की सुधबुध खो सी जाती है, और वो युवती सम्राट को अपनी बाहों में भर लेती है, और उसके आधारों को चूमने लगती है। सम्राट जो की किसी और दुनिया में गुम हो चुका था, वो भी उस युवती का साथ देने लगता है।

दोनो में एक होड़ लगी थी कि कौन दूसरे के अधरों का रसपान ज्यादा कर सकता है। तभी उस युवती ने अपनी जीभ को सम्राट के मुंह में धकेल दिया जिससे सम्राट को नया अनुभव मिला और वो उसकी जीभ के स्वाद का मजा लेने लगा। साथ ही साथ उसके हाथ युवती केबदन पर घूमते हुए उसके उभारों को महसूस करने लगे। युवती सम्राट को उसके बेड पर ले कर आती है, और आधारों को छोड़ कर उसकी शर्ट को उतारने लगती है। उधर सम्राट की हालत ऐसी होती है जैसे उससे किसी ने उसका सबसे प्यारा खिलौना छीन लिया हो, मगर तभी वो युवती उसके सीने को चूमते हुए अपने एक हाथ से सम्राट की पैंट को भी खोलने लगती है।

सम्राट बेसब्र हो कर अपने हाथ से उसके स्तनों को दबाने लगता है, तो वो युवती उठ कर अपनी टीशर्ट उतार देती है, और उसके उन्नत स्तन सम्राट के आंखों के सामने आ कर उसकी आमंत्रण देने लगते हैं, सम्राट आगे बढ़ते हुए एक स्तन पर अपना मुंह लगता है, और दूसरे के हाथों से सहलाने लगता है, युवती अपने एक हाथ से उसके सर को अपने वक्षों पर दबाते हुए दूसरे से सम्राट के लंड को मसलने लगती है, जिससे सम्राट की सिसकारी निकल पड़ती है। थोड़ी देर बाद वो युवती फिर से उठती है और अपनी जींस भी निकाल फेकती है, और दुबारा से सम्राट की छाती पर बैठ जाती है मगर इस बार उसके मुंह की तरफ पीठ करके, और आगे झुक कर सम्राट के लंड को अपनी जीभ से चाटने लगती है, सम्राट ने ये सब पढ़ा और देखा भर था, पर जीवन में पहले बार उसके साथ पहली बार हो रहा था, उतेजना के आसमान पर पहुंच चुका था वो।

युवती की गुलाबी फूल जैसी साफ और चिकनी योनि सम्राट के मुंह के सामने थी, और वो योनि के मदहोश करने वाली गंध उसकी उत्तेजना को और बढ़ा ही रही थी। और अभी तक के अर्जित ज्ञान को इकट्ठा करते हुए, उसने अपने मुंह योनि से लगाया और उससे बहते हुए काम रस का को चखने लगा। उससे इतनी उत्तेजना बर्दास्त नही हुई और वो भरभरा कर युवती के मुंह में झड़ गया। युवती ने भी उसके वीर्य को पूरी तरह से गटकते हुए उसके लंड को पूरी तरह से चाट कर साफ कर दिया।

फिर वो वापस घूम कर सम्राट के मुंह की तरफ आ गई और उसके पूरे चेहरे पर चुम्बानो की झड़ी लगा दी, और धीरे धीरे नीचे आते हुए उसकी गर्दन को चूमने और चाटने लगी, उसकी गरमा गरम खुरदुरी जीभ ने तुरंत अपना असर दिखाना शुरू कर दिया जो सम्राट के लंड में दिखना शुरू हो गया, गर्दन से नीचे आते हुए वो अब उसके सीने पर वही हरकत करने लगी, और एकदम से उसके चुचकों को अपने मुंह में भर कर चूस लिया, इसी के साथ सम्राट एक बार फिर उत्तेजना के शिखर पर पहुंच गया। युवती ने ये महसूस करते ही अपनी योनि को उसके लंड पर लगाते हुए उस पर सवार हो गई।

सम्राट को ऐसा लगा जैसे उसका लुंड किसी गरम भट्टी में चला गया हो, योनि की दीवारों ने लंड को जकड़ कर रखा था, युवती ने जोर लगा कर लंड को अपने भीतर लेना चालू किया और दोनो की सिसकारी एक साथ फूट पड़ी, दोनो के चेहरे पर दर्द की लकीर दिखने लगी, मगर कामोतेजना की आग के आगे वो दर्द जरा भी टिक न पाया, और बिस्तर पर एक घमासान सा छिड़ गया, दोनो एक दूसरे को अपने अंदर लेने की होड़ में लग गए। कभी सम्राट ऊपर तो कभी युवती ऊपर, दोनो एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे थे। ये घमासान करीब आधे घंटे तक चला और दोनो लगभग एक साथ ही स्खलित हुए।

इसी के साथ सम्राट थकान से चूर हो कर उस युवती बाहों में सो गया।


कुछ समय बाद बाहर सड़क पर एकदम अंधेरे में एक काला साया एक ओर जाते हुए दिखता है, और जिस दिशा में वो साया जा रहा होता है, वहां अंधकार और भयानक हो जाता है, सड़क के किनारे जलते बल्ब खुद ब खुद बुझ जा रहे थे, सड़क के आवारा कुत्ते जो शायद ही किसी पर न भौंकते हों, दुम दबा कर पता नही किस कोने में जा छुपे थे। वो साया कोने पर मौजूद एक कब्रिस्तान के अंदर गया, और एक अट्टहास सा गूंज गया, और एक आवाज, जो कह रही थी, "मैं कल फिर आऊंगी।"
Badhiya shuruwat
 
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Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
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अरे भईया! ई का कै दिहौ! 😲
चुड़ैल और वो भी कामातुर! 🤣🤣
Keep it up!!
बंधु! संसार ही कामातुर है............. वरना "कामदेव" को कौन पूंछेगा :D
 

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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अपडेट ३#

अब तक आपने पढ़ा...

वो साया कोने पर मौजूद एक कब्रिस्तान के अंदर गया, और एक अट्टहास सा गूंज गया, और एक आवाज, जो कह रही थी, "मैं कल फिर आऊंगी।"

अब आगे:


कुछ महीनों पहले....

आज सम्राट के स्कूल का आखिरी दिन था, उसका बारहवीं का रिजल्ट आ चुका था और अब पूरी क्लास स्कूल छोड़ कॉलेज की जिंदगी शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। आज स्कूल ने रिजल्ट में अच्छा करने वालों को सम्मानित करने के लिए सबको बुलाया था। सम्राट ने लड़कों में सबसे ज्यादा नंबर लाय थे तो उसे भी सम्मानित किया गया था। उससे ज्यादा नंबर आरती के आए थे, आरती एक बला की खूबसूरत लड़की है, जिसे सम्राट बचपन से ही पसंद करता है, मगर आज तक ये कहने की हिम्मत उसे नही हुई। दोनो के घर भी आस पास ही थे और बचपन से दोनो साथ ही खेले और बड़े थे, फिर भी सम्राट आज तक हिम्मत नही कर पाया आरती से कुछ कहने की।

शिव और गोपाल सम्राट के चढ्ढी बड़ी यानी की बचपन के दोस्त और सब एक साथ ही पढ़ते थे, उन्होंने सम्राट को उदास देख उससे पूछा, "क्या बात है भाई, आज सब इतने खुश हैं, तू फिर भी मुंह लटकाए बैठा है?"

सम्राट: "भाई आज स्कूल का आखिरी दिन है, अब पता नही हम सब साथ में पढ़े या अलग अलग कॉलेज में जाए, बस यही सोच कर परेशान हूं।"

गोपाल: ये सोच के परेशान है या आरती के बारे में सोच के परेशान है कि वो किसी और जगह पढ़ने न चली जाए, हमारा तो पहले से ही डिसाइडेड है की **** कॉलेज से पहले बीबीए और फिर एमबीए करके अपना बिजनेस सम्हालना है।

शिव: हां यही बात है, देख सम्राट, आज बोल दे, कब तक फट्टू बना घूमता रहेगा?

सम्राट: हां भाई आज कुछ तो करना ही पड़ेगा।

तभी उनको आरती आती हुई दिखती है, तो सम्राट उठ कर उसकी ओर जाता है।

सम्राट: आरती, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

आरती: हैं बोलो सम्राट?

सम्राट: यहां नही, कहीं अकेले में, प्लीज!!

आरती कुछ सोच कर मुस्कुराते हुए: अच्छा बोलो कहा चलना है?

सम्राट उसको ले कर एक क्लास में घुस जाता है।

आरती: हां अब बोलो सम्राट, ऐसी क्या बात करनी है कि ऐसे एकांत में ले कर आए हो?

सम्राट कुछ घबराते हुए: वा वो क्या है न आरती, वो में ये कह रहा था न कि, वो मैं, मैं तुमसे कह रहा था...


आरती: अरे अब मैं तुम वो से आगे भी बढ़ो जल्दी।

सम्राट: अच्छा बोलता हूं पर एक वादा करो पहले, मैं जो भी कहूं, उससे हमारी दोस्ती पर कोई फर्क नही पड़ता चाहिए।

आरती (मुस्कुराते हुए): वो तो पड़ेगा ही।

सम्राट: अरे यार, फिर मैं नही बोलूंगा।

आरती: क्या नही बोलोगे? मेरे दोस्त हो तुम, और मुझसे ही छुपाओगे?

सम्राट (हड़बड़ाते हुए): दोस्त हूं तो क्या ये भी बता दूं कि तुमसे प्यार करता हूं.... उफ्फ ये क्या बोल दिया मैने (सर पर हाथ मरते हुए)

आरती (थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए): ये नही बोलना था तो क्या बोलना था? और किस बात को बोलने के लिए इधर आए थे हम?

अब सम्राट पूरी तरह से घबरा जाता है: देखो आरती, अगर जो तुमको बुरा लगा हो तो मैं माफी चाहता हूं, पर प्लीज अपनी दोस्ती पर कोई बात न आए।

आरती: और अगर जो बुरा न लगा हो तो?

सम्राट: तो भी, समझो यार... क्या? मतलब तुमको इससे कोई एतराज नहीं, मतलब तुम भी??

आरती: अरे बुद्धू, मैं तो कबसे वेट कर रही थी कि तुम कब ये मुझे बोलोगे?

सम्राट: आरती मैं डरता था कि कहीं तुम ना न बोल दो, बस इसीलिए, लेकिन आज बहुत हिम्मत करके बोला तुमको, क्योंकि क्या पता आज के बाद हम कब मिलें?

आरती: कब मिलें क्या मतलब? तुम *** कॉलेज में ही एडमिशन लोगे न, फिर?

सम्राट: मतलब तुम भी उसी में एडमिशन लोगी? ओह माय गॉड!! पर तुम तो शायद बाहर जाने वाली थी ना?

आरती: थी बाबा, लेकिन जब तुम यहां हो तो भला मैं दूसरी जगह कैसे रहूंगी?? और वैसे भी राम्या और शिवानी, मुझसे कोई बात नही छुपाती, उन्होंने बताया की तुम तीनों वहां पढ़ोगे, और इसीलिए हम तीनों ने भी वहीं पढ़ने का सोचा।

सम्राट: तो फिर चलो सब साथ में सेलिब्रेट करते हैं।

आरती: बिल्कुल।

क्लास से बाहर निकलते ही शिव राम्या और गोपाल शिवानी भी बाहर उनका वेट कर रहे थे।

शिवानी: तो आखिर लैला मजनू को एक दूसरे के बारे में पता चल ही गया?

सम्राट (शर्माते हुए): इन दोनो के चलते आरू को सब पता था, पर इन दोनो ने मुझे आज तक नही बताया। (फिर शिव और गोपाल दोनो को घूर कर देखने लगता है)

राम्या: अरे नाराज न हो, इनको भी अभी ही पता चला है कि आरु भी तुमको चाहती है पहले से। हमने आज तक इनको बताया ही नहीं। (और इसी के साथ तीनो लड़कियां हसने लगती हैं)

सम्राट, झेपते हुए: अच्छा चलो, कहां चला जाय आज एंजॉय करने केलिए??

शिवानी: तुम दोनो आज अकेले समय बिताओ, हम सब कल साथ में पब चलेंगे।

आरती: नही, हम आज ही चलेंगे, बाकी सम्राट मेरा और मैं सम्राट की ही हूं, सारा समय हमारा ही है।

ये सुन कर सब मुस्कुरा कर अपनी सहमति देते हैं, और फिर सब पब के लिए निकल जाते हैं। वहां खूब मस्ती करने के बाद सारे लोग नदी के किनारे जा कर सूर्यास्त का नजारा लेते हुए बातें कर रहे हैं।

गोपाल: यार मैं सोच रहा हूं कि हम सब मिल कर कहीं घूमने चलें, किसी एडवेंचर ट्रिप पर।

सम्राट: ये तो बढ़िया आइडिया है, क्यों आरू?

आरती: हां, लेकिन कहां जाया जाए?

शिव: महेंद्रगढ़ चलें?

राम्या: वो जहां लोग कहते है की किसी गुप्त कमरे में कोई खजाना छुपा है?

शिव: हां, वही, मेरे चाचा आजकल वहीं पोस्टेड हैं, वो पुरातत्व विभाग में ही हैं न, उनको इंचार्ज बना कर भेजा है वहां, मुझे कई बार बुला चुके हैं।

गोपाल: वाह चलो फिर खजाना भी ढूंढ लिया जाएगा।

शिव: बात करता हूं कोई खास दिन ही जाना होगा उसके लिए, अमावस्या को शायद।

सम्राट: चलो फिर उनसे बात करके दिन फिक्स करते हैं।


फिर सब अपने अपने घर को चले जाते हैं।

------------------------------------------


रात का कोई पहर था, सम्राट एक पुराने महल के अंदर अकेला भटक रहा था, तभी वो एक कमरे में जाता है, और उसके अंदर जाते ही कमरे में उजाला हो जाता है, और उसकी नजर सामने दीवाल पर लटकी एक तस्वीर पर जाती है, जिसमे एक बला की खूबसूरत युवती थी, जिसकी आंखे बेहद खूबसूरत थी। देखते ही देखते वो युवती उस तस्वीर से बाहर आ कर सम्राट के सामने खड़ी हो जाती है, और अपनी बाहें फैलाते हुए कहती है: आखिर तुम आ ही गए कुमार। कितने बरसों से मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं यहां.....
 

Riky007

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खुरदुरी जीभ😋

वाह अब आया मजा 😂😂

सही चल रही है, कहानी मस्त लगे रहो भाई ✍️✍️

Kya seen create kiya he. Amezing. Erotic seen ke bad jo kala saya ka movment tha jabardast.

Shandaar update

Congratulations for new story bro mujhe horror bahut pasand hai ,😏😏👹👹
Horror padho aur rat me sapne me bhuto chudailo ko dekho aur chillao😜😜🤪🤪🤫🤫🤫🤫🤫

Intresting update :goteam:

Interesting updates

Bahut hi badhiya update diya hai Riky007 bhai....
Nice and beautiful update....

अरे भईया! ई का कै दिहौ! 😲
चुड़ैल और वो भी कामातुर! 🤣🤣
Keep it up!!

Weating too next update

Update ke intezaar me

Badhiya shuruwat
अपडेट आ गया दोस्तों
 

Shetan

Well-Known Member
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अपडेट ३#

अब तक आपने पढ़ा...

वो साया कोने पर मौजूद एक कब्रिस्तान के अंदर गया, और एक अट्टहास सा गूंज गया, और एक आवाज, जो कह रही थी, "मैं कल फिर आऊंगी।"

अब आगे:


कुछ महीनों पहले....

आज सम्राट के स्कूल का आखिरी दिन था, उसका बारहवीं का रिजल्ट आ चुका था और अब पूरी क्लास स्कूल छोड़ कॉलेज की जिंदगी शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। आज स्कूल ने रिजल्ट में अच्छा करने वालों को सम्मानित करने के लिए सबको बुलाया था। सम्राट ने लड़कों में सबसे ज्यादा नंबर लाय थे तो उसे भी सम्मानित किया गया था। उससे ज्यादा नंबर आरती के आए थे, आरती एक बला की खूबसूरत लड़की है, जिसे सम्राट बचपन से ही पसंद करता है, मगर आज तक ये कहने की हिम्मत उसे नही हुई। दोनो के घर भी आस पास ही थे और बचपन से दोनो साथ ही खेले और बड़े थे, फिर भी सम्राट आज तक हिम्मत नही कर पाया आरती से कुछ कहने की।

शिव और गोपाल सम्राट के चढ्ढी बड़ी यानी की बचपन के दोस्त और सब एक साथ ही पढ़ते थे, उन्होंने सम्राट को उदास देख उससे पूछा, "क्या बात है भाई, आज सब इतने खुश हैं, तू फिर भी मुंह लटकाए बैठा है?"

सम्राट: "भाई आज स्कूल का आखिरी दिन है, अब पता नही हम सब साथ में पढ़े या अलग अलग कॉलेज में जाए, बस यही सोच कर परेशान हूं।"

गोपाल: ये सोच के परेशान है या आरती के बारे में सोच के परेशान है कि वो किसी और जगह पढ़ने न चली जाए, हमारा तो पहले से ही डिसाइडेड है की **** कॉलेज से पहले बीबीए और फिर एमबीए करके अपना बिजनेस सम्हालना है।

शिव: हां यही बात है, देख सम्राट, आज बोल दे, कब तक फट्टू बना घूमता रहेगा?

सम्राट: हां भाई आज कुछ तो करना ही पड़ेगा।

तभी उनको आरती आती हुई दिखती है, तो सम्राट उठ कर उसकी ओर जाता है।

सम्राट: आरती, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

आरती: हैं बोलो सम्राट?

सम्राट: यहां नही, कहीं अकेले में, प्लीज!!

आरती कुछ सोच कर मुस्कुराते हुए: अच्छा बोलो कहा चलना है?

सम्राट उसको ले कर एक क्लास में घुस जाता है।

आरती: हां अब बोलो सम्राट, ऐसी क्या बात करनी है कि ऐसे एकांत में ले कर आए हो?

सम्राट कुछ घबराते हुए: वा वो क्या है न आरती, वो में ये कह रहा था न कि, वो मैं, मैं तुमसे कह रहा था...


आरती: अरे अब मैं तुम वो से आगे भी बढ़ो जल्दी।

सम्राट: अच्छा बोलता हूं पर एक वादा करो पहले, मैं जो भी कहूं, उससे हमारी दोस्ती पर कोई फर्क नही पड़ता चाहिए।

आरती (मुस्कुराते हुए): वो तो पड़ेगा ही।

सम्राट: अरे यार, फिर मैं नही बोलूंगा।

आरती: क्या नही बोलोगे? मेरे दोस्त हो तुम, और मुझसे ही छुपाओगे?

सम्राट (हड़बड़ाते हुए): दोस्त हूं तो क्या ये भी बता दूं कि तुमसे प्यार करता हूं.... उफ्फ ये क्या बोल दिया मैने (सर पर हाथ मरते हुए)

आरती (थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए): ये नही बोलना था तो क्या बोलना था? और किस बात को बोलने के लिए इधर आए थे हम?

अब सम्राट पूरी तरह से घबरा जाता है: देखो आरती, अगर जो तुमको बुरा लगा हो तो मैं माफी चाहता हूं, पर प्लीज अपनी दोस्ती पर कोई बात न आए।

आरती: और अगर जो बुरा न लगा हो तो?

सम्राट: तो भी, समझो यार... क्या? मतलब तुमको इससे कोई एतराज नहीं, मतलब तुम भी??

आरती: अरे बुद्धू, मैं तो कबसे वेट कर रही थी कि तुम कब ये मुझे बोलोगे?

सम्राट: आरती मैं डरता था कि कहीं तुम ना न बोल दो, बस इसीलिए, लेकिन आज बहुत हिम्मत करके बोला तुमको, क्योंकि क्या पता आज के बाद हम कब मिलें?

आरती: कब मिलें क्या मतलब? तुम *** कॉलेज में ही एडमिशन लोगे न, फिर?

सम्राट: मतलब तुम भी उसी में एडमिशन लोगी? ओह माय गॉड!! पर तुम तो शायद बाहर जाने वाली थी ना?

आरती: थी बाबा, लेकिन जब तुम यहां हो तो भला मैं दूसरी जगह कैसे रहूंगी?? और वैसे भी राम्या और शिवानी, मुझसे कोई बात नही छुपाती, उन्होंने बताया की तुम तीनों वहां पढ़ोगे, और इसीलिए हम तीनों ने भी वहीं पढ़ने का सोचा।

सम्राट: तो फिर चलो सब साथ में सेलिब्रेट करते हैं।

आरती: बिल्कुल।

क्लास से बाहर निकलते ही शिव राम्या और गोपाल शिवानी भी बाहर उनका वेट कर रहे थे।

शिवानी: तो आखिर लैला मजनू को एक दूसरे के बारे में पता चल ही गया?

सम्राट (शर्माते हुए): इन दोनो के चलते आरू को सब पता था, पर इन दोनो ने मुझे आज तक नही बताया। (फिर शिव और गोपाल दोनो को घूर कर देखने लगता है)

राम्या: अरे नाराज न हो, इनको भी अभी ही पता चला है कि आरु भी तुमको चाहती है पहले से। हमने आज तक इनको बताया ही नहीं। (और इसी के साथ तीनो लड़कियां हसने लगती हैं)

सम्राट, झेपते हुए: अच्छा चलो, कहां चला जाय आज एंजॉय करने केलिए??

शिवानी: तुम दोनो आज अकेले समय बिताओ, हम सब कल साथ में पब चलेंगे।

आरती: नही, हम आज ही चलेंगे, बाकी सम्राट मेरा और मैं सम्राट की ही हूं, सारा समय हमारा ही है।

ये सुन कर सब मुस्कुरा कर अपनी सहमति देते हैं, और फिर सब पब के लिए निकल जाते हैं। वहां खूब मस्ती करने के बाद सारे लोग नदी के किनारे जा कर सूर्यास्त का नजारा लेते हुए बातें कर रहे हैं।

गोपाल: यार मैं सोच रहा हूं कि हम सब मिल कर कहीं घूमने चलें, किसी एडवेंचर ट्रिप पर।

सम्राट: ये तो बढ़िया आइडिया है, क्यों आरू?

आरती: हां, लेकिन कहां जाया जाए?

शिव: महेंद्रगढ़ चलें?

राम्या: वो जहां लोग कहते है की किसी गुप्त कमरे में कोई खजाना छुपा है?

शिव: हां, वही, मेरे चाचा आजकल वहीं पोस्टेड हैं, वो पुरातत्व विभाग में ही हैं न, उनको इंचार्ज बना कर भेजा है वहां, मुझे कई बार बुला चुके हैं।

गोपाल: वाह चलो फिर खजाना भी ढूंढ लिया जाएगा।

शिव: बात करता हूं कोई खास दिन ही जाना होगा उसके लिए, अमावस्या को शायद।

सम्राट: चलो फिर उनसे बात करके दिन फिक्स करते हैं।


फिर सब अपने अपने घर को चले जाते हैं।

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रात का कोई पहर था, सम्राट एक पुराने महल के अंदर अकेला भटक रहा था, तभी वो एक कमरे में जाता है, और उसके अंदर जाते ही कमरे में उजाला हो जाता है, और उसकी नजर सामने दीवाल पर लटकी एक तस्वीर पर जाती है, जिसमे एक बला की खूबसूरत युवती थी, जिसकी आंखे बेहद खूबसूरत थी। देखते ही देखते वो युवती उस तस्वीर से बाहर आ कर सम्राट के सामने खड़ी हो जाती है, और अपनी बाहें फैलाते हुए कहती है: आखिर तुम आ ही गए कुमार। कितने बरसों से मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं यहां.....
Amezing..... Ek film ki tarah lag raha he. Maja aa raha he. Superb..
 
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