जोरू का गुलाम भाग २५८- एम् ३ पृष्ठ १६२३
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Gariyae bina to komal rani ka erotic seen adhura raheta hai. Apne marad ko nahi chhodti to jija ko kese chhod degi. Par guddi rani ko kahe bachaya. Reenu ne de diya abhay dan. Wah komaliya kamal jiju ki chahiti. Ho bhi kyo na. Jija sali ka rista jo haiकमल जीजू
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अजय जीजू ने गुड्डी के लौंडा मार्का चूतड़ पर दो तमाचे लगाए चटाक चटाक और खूंटा पूरा बाहर निकाल लिया,
" निहुर स्साली, " जोर से गुड्डी का सर एकदम फर्श पे दबाते हुए अजय जीजू बोले, और अब गुड्डी का सर जमीन पर, चूतड़ हवा में खूब उठे हुए, नहीं अजय जीजू ने गांड नहीं मारी गुड्डी की। आज की रात तो रीनू ने गुड्डी के पिछवाड़े को अभयदान दिया था। लेकिन जिस ताकत से अपना मोटा खूंटा उस किशोरी की कच्ची बिल में ठेला, बेचारी की तो चीख निकल ही गयी,
हम सब हदस गए, और उसका असर कमल जीजू पर भी हुआ ,
उन्होंने मेरी पीठ पर जोर देकर मुझे झुकाया और बोले,
" निहुर स्साली "
और मैं निहुर गयी।
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मैं तो इसी का इन्तजार कर रही थी, इत्ती जोर से जीजू का मोटू जो मेरे पिछवाड़े रगड़ रहा था बड़ी जोर जोर से चींटियां काट रही थीं, मन कर रहा बस कमल जीजू कब निहराएँ कब सटाये, कब घुसेड़ें,
कमल जीजू ने कस के मेरी पीठ दबाये और मैं भी अब एकदम गुड्डी की तरह मेरा सर फर्श से चिपका, चूतड़ हवा में उठा,
मेरी गांड में आग लगी थी, इतने देर से कमल जीजू का शैतान मोटू पीछे तंग कर रहा था, बस मन कर रहा था घुसेड़ दें, पेल दें, वैसे तो ललचाते रहेंगे, कभी चूतड़ में चिकोटी काटेंगे, कभी दरार में ऊँगली कर देंगे, और मैं ललचाती भी थी उनको अपने मोटे मोटे नितम्बो मटका के, तीनो बहनो में सबसे चौड़े मेरे ही थे, और आज जब मैं निहुर के तैयार थी, वो तड़पा थे,
" जीजू करो न " मैंने दबी जुबान से कहा,
" का करूँ स्साली "
चिढ़ाते हुए वो बोले और मैं समझ गयी वो गारी सुनना चाहते हैं , मेरे और रीनू दोनों के जीजू , जब तक बहन महतारी गरियाई न जाए, उनका मन नहीं भरता था,
" अरे स्साली क गांड मारो, तोहार बहन महतारी तो हैं नहीं यहाँ जिनकी मारोगे, एक है भी तो उस पे अजय जीजू चढ़े है, "
छनछना के मैं बोली और खुद अपने दोनों हाथों को पीछे कर के कस के अपने दोनों चूतड़ फैला लिए, कसी दरार अच्छी खासी फ़ैल गयी
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और सामने छप्पन भोग रखा हो, तो कौन रोक सकता है अपने को और कमल जीजू तो गांड के पुराने शैदाई और मेरे पिछवाड़े के तो वो दीवाने थे।
एक हाथ से उन्होंने चूँची दबोच रखी थी, दूसरे हाथ से कमर को पकड़ के उन्होंने करारा धक्का मारा,
मेरी चीख निकल गयी, लेकिन ये तो अभी कुछ भी नहीं था, अब दोनों हाथ कमर को कस के पकड़ के जो उन्होंने धकेला,
उफ्फ्फ्फ़ ओह्ह्ह्हह रोकते रोकते भी मैं सिसक पड़ी, पास में फर्श पे रखे एक तकिये को खींच के अपना सर उसमे भींच लिया, दोनों हतहों से तकिये को पकड़ लिया, पिछली बार भी चार पांच बार उन्होंने मेरी मारी थी, और उस बार तो एकदम पहली बार लेकिन ऐसा दर्द,
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जीजू ने बाहर निकाल कर बस हलके से ठोंक दिया, पूरा सुपाड़ा भी अंदर नहीं घुसा था लेकिन इतनी कस के उसने मेरी पिछवाड़े की सुरंग की दीवाल को रगड़ा दरेरा, लगता था कुछ छिल सा गया, और वो बार अपना मोटा सुपाड़ा वहीं रगड़ रहे थे, दरेर रहे थे,
दर्द से मैं बेहाल थी, और अभी तो पिछवाड़े का खैबर का दर्रा पार भी नहीं हुआ था, जैसे मेरे मन की बात उन्होंने सुन ली और क्या करारा धक्का मारा की खैबर का दर्रा पार, लेकिन इस बार वहां भी कुछ छिल सा गया,
दर्द भी बहुत हुआ था और मजा भी बहुत आया था जब पिछली बार कमल जीजू ने मारा था लेकिन इस बार तो दर्द की इंतहा से थी, मेर्रो दोनों आँखों से आंसू टप टप चू रहे थे, मैंने मुंह तकिये में भींच रखा था की चीखे न निकलें, लेकिन दर्द इतना हो रहा था की मेरे मुंह से निकल ही पड़ी चीखें
उईईई ओह्ह उईईईईई नहीं नहीं जीजू बहुत लग रहा है थोड़ा हलके से, एक मिनट एक मिनट प्लीज,
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जीजू रुक तो गए उन्होंने बाहर निकाल भी लिया लेकिन अबकी जो पेला तो बंद कमरे में भी तारे दिख गए, दर्द बहुत हो रहा था लेकिन मजा भी आ रहा
जहाँ जहां छिला था अंदर उसी जगह पर दरेरते रगड़ते, और अभी आधा से ज्यादा अंदर था, बिन रोये मेरी आँखों से आंसू छलक रहे थे लेकिन i उत्तेजना के मारे पूरी देह काँप रही थी, मस्ती से मेरे जोबन पथरा रहे थे,

वाह जी वाह. मिर्ची वाली चाट. मज़ेदार वाक्य. अब मिर्ची ऊपर वाले मुँह मै लगे की निचे वाले. कोमलिया तो दोनों का मझा लेती है.तेज मिर्च वाली चाट
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हम तीनों बहने मैं, रीनू और चीनू, जब चाट खाने जाते तो चीनू पहले ही बोल देती मेरे वाले में मिर्ची बहुत कम, रीनू को फरक नहीं पड़ता था लेकिन मैं कहती थी, भैया मेरे में एक्स्ट्रा, और वो चाट दे देता था तो भी मैं बोलती थी भैया मिर्च जरा सा ऊपर से और, फिर पूरा मुँह जलता था, आँख नाक हर जगह से पानी निकलता था, सी सी करती रहती, मुंह छरछराता रहता था, आग लग जाती थी गले में लेकिन मजा भी बहुत आता था।
चीनू हड़काती भी थी, ' कमीनी, जब ऐसी हालत खराब हो जाती है तो बार बार ज्यादा मिर्च क्यों "
मैंने सी सी करती रहती और बोलती भी, अरे दी ज्यादा मिर्च वाली चाट का मजा ही अलग है, इसी हालत खराब होने का ही तो मजा है।
और आज एकदम वैसा ही लग रहा था बस ज्यादा मिर्च ही नहीं, लगता था किसी ने सबसे तेज मिर्च भूत झोलकिया का छौंका मार दिया है। इतना तेज छरछरा रहा था, बुरी तरह लग रहा था लेकिन मजा भी नया नया आ रहा था ।
तबतक कमल जीजू ने कस एक मेरी दोनों चूँचियों को पकड़े पकड़े ऑलमोस्ट बाहर निकाला और ऐसा करारा धक्का मारा और वही दरेरते, छीलते, रगड़ते, घिसते, मुझे लगा जैसा मैं अब बर्दास्त नहीं कर पाउंगी, और आलमोस्ट पूरा अंदर,
नहीं नहीं जीजू नहीं, दर्द हो रहा है, बस, अब बस, बहुत ओह्ह्ह उफ्फ्फ उईईईईई
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मैं चीख रही थी एक चीख रूकती तो दूसरी शुरू हो जाती हालांकि कमल जीजू ने धक्के मारने बंद कर दिए थे, और जब किसी तरह मेरी चीख रुकी तो मुझे समझ में आया कमल जीजू की शैतानी, चीनू तो सीरियस टाइप थी, लेकिन रीनू के साथ भी एक बार उन्होंने, और रीनू ने ही मुझे बताया था
" कमल जीजू जब बहुत ज्यादा मस्ती के मूड में होते हैं तो ज्यादा मिर्ची वाली चाट खिला देते हैं, "
एक बार रीनू के साथ भी, रीनू उन्हें बहुत छेड़ रही थी, चिढ़ा रही थी लेकिन दे नहीं रही थी। रीनू ने कमल जीजू की ट्रिक भी बता दी,
" कोमलिया, कमल जीजू, बदमाशों के सरदार, बजाय सीधे पेलने ढकलने के हल्का सा तिरछा और धक्का, पिछवाड़े वाली गली में लगने की बजाय दीवाल में लगने लगता है, बस दो चार ठोकर में ही कहीं लाल, तो कहीं हल्का सा छिल जाता है और वो जलन होती है लगता है जैसे गांड में किसी ने मिर्ची वाला पटाखा जला के डाल दिया हो और उसी छिली जगह पे फिर दुबारा तिबारा तो वो वो और,
मैं समझ गयी कमल जीजू आज मुझे तेज मिर्च वाली चाट खिला रहे हैं।
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और जब पिछवाड़े को उनके मोटे खूंटे की आदत पड़ी तो कमल जीजू के लम्बे लम्बे नाख़ून मोटी मोटी चूँचियों में धंस गए और मैं जोर जोर से चीखी,
उईईईईई लेकिन उस चीख में दर्द से ज्यादा मजा था।
और जैसे जीजू को ग्रीन सिग्नल मिल गया हो, उन्होंने धकमपेल गांड मारना शुरू कर दिया, क्या ताकत थी उन के धक्को में कभी मैं चीखती, कभी सिसकती, लेकिन थोड़ी बहुत बदमाशी तो मंजू बाई की संगत में कमल जीजू की साली ने भी सीख ली थी। उनका खूंटा पूरा धंसा हुआ था और जब उन्होंने बाहर निकालना शुरू किया तो बस मैंने अपने खैबर के दर्रे को , छले को कस के भींच लिया, फिर तो जैसे कोई मोटा चूहा पिंजड़े में घुसे और बाहर न आ पाए, बस वही हालत, वो जितना बाहर निकलने की कोशिश करते मैं उतना ही कस के भींचती,
लेकिन थोड़ी देर बाद कुछ मेरी पकड़ ढीली पड़ी कुछ उनका जोर बढ़ा और वो मोटू बाहर लेकिन जीजू कुछ भी उधार नहीं रखते थे, अबकी जो उन्होंने ठेला तो बस आधा भी नहीं घुसा था और वो रुक गए,
बहुत कंट्रोल चाहिए मरद को कसी संकरी गांड में आधा घुसा खूंटा रोकने के लिए, तड़पाने के लिए
" करो न जीजू, कर न " मैं बार बार उनसे कह रही थी, उनकी माई बहन को गरियाने का भी असर नहीं पड़ा, और वो बोले,
" हर बार मैं ही धक्का क्यों मारुं, देखूं मेरी साली ने कुछ सीखा भी है की नहीं "
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और मैं समझ गयी, बस साली कौन जो जीजा का इशारा न समझे, बस मैं चूतड़ पीछे आगे कर के धीरे धीरे तीन चौथाई घोंट गयी, मान गए जीजू और अब कभी वो धक्का मारते कभी मैं, झूले की पेंग की तरह, कभी दर्द से हालत खराब होती कभी मजे
मेरी बहन रीनू भी मेरे बगल में ही निहुरी हुयी थी, फर्क इतना था की मेरे जीजू को गोलकुंडा का गोल दरवाजा पसंद था तो मेरी बहन रीनू के जीजू, मेरे मरद को प्रेमगली, साली की चम्पाकली पसंद थी
जैसी मेरी हालत खराब थी, उससे कम रीनू की नहीं थी। उसके जीजू के पास दर्जनों हथियार थे और सबसे बड़ी थी उनकी आँख, प्यार से जब वो देखते तो बिना छुए कोई पिघल जाए, दूसरी बात उनकी समझ जो उनकी सास और मंजू ने और तेज कर दी, कोई भी लड़की हो औरत हो
दो मिनट में उसके सारे एरोटिक बिंदु , जहँ बस छूने से वो पिघल जाए, उन्हें पता चल जाते थे, उनका खूंटा तो रीनू की ऐसी की ततैसी कर ही रहा था, इनके होंठ, कभी झुक के कान की लर हलके से काट लेते कभी गले के नीचे चूम लेते कभी जीभ की टिप से अपनी साली की पीठ पे सीधे मेरु दंड पर एक हलकी सी लाइन बनाते कूल्हे तक, रीनू के जोबन तो कोई भी मरद नहीं छोड़ता तो वो क्यों छोड़ते और धक्के भी बाहर निकाल के देर तक वो फांको पे रगड़ते, फिर एक झटके में पेल देते
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हालत मेरी भी खराब थी, रीनू की भी
मेरी दर्द और मजे दोनों से , रीनू सिर्फ मजे से ही पागल हो रही थी
एक विज्ञापन में दो क्रिकेट खिलाडी कहते हैं न
मेरे जमाने में सोच के मारते थे
और नए जमाने वाले का जवाब है
मेरे जमाने में ठोक के मारते हैं , बस तो कमल जीजू ठोक के मारने वाले थे,
गुड्डी और अजय तो कभी के झड़े पड़े थे,

अरे डबल क्या जीजू 3 तीन होते तो ट्रिपल भी कर लेती कोमलिया. छिनार गुड्डी को रेस्ट दिया तो फायदा कोमलिया को मिल गया.गुड्डी
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गुड्डी और अजय तो कभी के झड़े पड़े थे, अजय गुड्डी के अंदर, थोड़ी देर में मैं भी लेटी और कमल जीजू मेरे अंदर झड़ रहे थे, बूँद बूँद, मैं आँखे बंद किये मजा ले रही थी , निचोड़ रही थी
थोड़ी देर बाद मेरी आँख खुली तो रीनू एकदम थेथर, न जाने कितनी बार जैसे झड़ी हो और वो भी उसके अंदर झड़ रहे थे और हम छह उसी तरह बहुत देर पड़े रहे।
और असली जीजा साली तो आज , ... ये और रीनू ,
रीनू मेरी बगल में लेटी नींद में , और नींद में भी उसके उभार कस के पकड़े , उसके जीजू , मेरे ये ,...
दोनों मेरे जीजू , एकदम गुड्डी के छोटे छूटे जुबना के दीवाने, और ऊपर से निपल उसके हरदम खड़े रहते थे, उसके भैया ने जो बाड़ी पियर्सिंग वाले के यहाँ जो गोल्डन रिंग उसके निप्स पे लगवा दिया था, उसका असर, दोनों बटन आती हुयी ट्रक के हेडलाइट की तरह दूर से दिखते,,...
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और आज की रात तो बस ट्रेलर थी , और गुड्डी भी न ,मान गयी मैं अपनी ननद को , कैसे उस कमीनी रीनू को पटा के , एक दिन और मेरे दोनों जीजू , बहन का प्रोग्राम उसने बढ़वा दिया , अब कल और परसों की रात भी , ... और फिर रात और दिन में कोई फरक थोड़े ही होगा ,
मेरी बहन , रीनू भी पक्की लेस्बो , वो भी लेजडॉम ,... एकदम गुड्डी के पीछे पड़ी , ... और गुड्डी भी जैसे चीनी दूध में मिल जाय , वैसे ,... एक से एक किंक , और गुड्डी से हामी भी भरवा ली,...
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इनका ओर रीनू का भी क्या मस्त टांका भिड़ा है , कब से ये साली के चक्कर में ,... और अब साली मिल गयी है , वो भी रीनू ऐसी खूब चिढ़ाती है , मजाक करती है , ... छेड़ती है , और क्या मस्त इन्होने मेरी बहन को चोदा आज , उस को भी मालूम हो गया मेरी मर्द , तीन तीन बार झड़ी वो तब जाकर अपनी साली को थेथर कर के ,... किस तारीफ़ से देख रही थी मेरे सोना मोना को ,..
इनकी साली बोल रही थी, जल भी रही थी चिढ़ा भी रही थी,
" यार सबसे लकी तू ही निकली एकदम चोदमपुर का राजा है, तेरा वाला। मजे लेने से ज्यादा मजे देने के पीछे पड़ा रहता है। दिल मुलायम और खूंटा हरदम हार्ड रहे ऐसा मरद बड़े मुश्किल से मिलता है। "
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" गृहकार्यों में भी दक्ष है, " मुस्करा के मैं बोली, अपने मर्द की तारीफ़ किसे नहीं अच्छी लगती, हाँ मरद के सामने नहीं होनी चाहिए।
हम सब थक गए थे, रीनू की हालत सबसे ज्यादा खराब थी, एकदम थेथर।
और हम सब सो गए थे, उसी कमरे में, मैंने कमल और अजय जीजू के बीच, गुड्डी अजय जीजू और इनके बीच और इनके साथ रीनू, इनकी साली
गुड्डी कस कर सो रही थी, और हम सब थोड़े सोये थोड़े जागे,
गुड्डी इत्ती प्यारी सी भोली सी लग रही थी, कोई कह सकता था की थोड़ी देर पहले तीन तीन मर्दों को अकेले इसने सिर्फ नाच गा के, नए आये जुबना की झलक दिखा दिखा के पागल कर दिया था,
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और अभी महीना भर भी तो नहीं हुआ उसे इंटर किये, मिडल ऑफ़ टीन्स, लेकिन आग लगा दिया आज उसने, हाँ इस समय थकी सी लग रही थी इसलिए सबसे गाढ़ी तगड़ी नींद में वही सो रही थी, लेकिन सुबह ही उठ जाती थी, गीता के आने पर, फिर गीता के संग मस्ती भी किचेन का सब काम और उसके बाद उसकी ऑनलाइन क्लासेज, आज भी सुबह सात बजे से और फिर आज भी आठ घंटे कोचिंग में रगड़ के पढ़ाई, और घर लौटते ही,
मैंने और रीनू ने कमल जीजू को पहले से ही गरमा रखा था,
गुड्डी का पिछवाड़ा फटा कमल जीजू के खूंटे से और रीनू उसकी मीठी भाभी के सहयोग से
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फिर बाकी दोनों मर्दो ने भी उस किशोरी के पिछवाड़े का मजा लिया, और कमल जीजू ने तो आगे पीछे दोनों ओर,
उसके बाद किचेन में भी हम लोगों के साथ खाना बनाना सर्व करना,
और फिर रीनू पीछे पड़ के डांस करीब डेढ़ दो घंटे, नान -स्टाप, आधे दर्जन तो भोजपुरी गाने ही रहे होंगे,
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और फिर अजय ने जो हचक के चोदा है, कोई भी थक जाता
इसलिए मैं श्योर थी की गुड्डी अब सुबह से पहले उठने वाली नहीं।
लेकिन बाकी लोगों के बारे में मैं श्योर नहीं थी,
बगल में एक नहीं दो जीजू हो तो किस स्साली को नींद आएगी और जवानी की राते सोने के लिए थोड़े ही होती हैं, अजय भी कुनमुना रहा था कमल जीजू अपनी जगह पर यानी मेरे पिछवाड़े से मुझे पकड़े और अजय आगे से, हाँ जोबन साली का दोनों जिज्जा ने एकदम ईमानदारी से बराबर बांटा था, एक कमल जीजू के कब्जे में दूसरा अजय के कब्जे में।
बदमाशी अजय ने ही शुरू की,
पहले हलके हलके दबाना, मसलना, फिर जीभ से निप्स को छेड़ना और जैसे उसने चूसना शुरू किया मेरी चूत में आग लग गयी।
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थोड़ी देर पहले ही कमल जीजू ने हचक के गांड मारी थी, अब तक चिल्ख मची थी, लग रहा था किसी ने मिर्चा कूट दिया है अंदर, लेकिन चम्पाकली की रगड़ाई तो उस समय नहीं हुयी थी, इसलिए वहां खुजली मच रही थी और अब अजय की बदमाशी। मैंने भी अजय के साथ, बस देख रही थी उसे गुड्डी से मजे लेते हुए गुड्डी की उसे गांड भी मारी और गाना डांस के साथ कैसे खड़े खड़े उसने गुड्डी की हचक के ली, मान गयी मैं अजय को नंबरी चोदू है स्साला मेरा जीजू, रीनू का मर्द।
मैं स्साली क्यों छोड़ती, मैंने भी अजय जीजू के खूंटे को रगड़ना शुरू कर दिया, अपनी कोमल कोमल उँगलियों से, कभी खुले सुपाड़े को सहलाती कभी मुठियाती कभी मेल टिट्स को दबोच लेती, दांतों से काट लेती,

सोरी वो अपडेट पढ़ने मे आगे पीछे हुआ तो थोड़ी कमैंट्स भी आगे पीछे हो गई. कोई बात नहीं. We love komal Rani. दूसरी बार भी कमैंट्स होंगी.गुड्डी
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गुड्डी और अजय तो कभी के झड़े पड़े थे, अजय गुड्डी के अंदर, थोड़ी देर में मैं भी लेटी और कमल जीजू मेरे अंदर झड़ रहे थे, बूँद बूँद, मैं आँखे बंद किये मजा ले रही थी , निचोड़ रही थी
थोड़ी देर बाद मेरी आँख खुली तो रीनू एकदम थेथर, न जाने कितनी बार जैसे झड़ी हो और वो भी उसके अंदर झड़ रहे थे और हम छह उसी तरह बहुत देर पड़े रहे।
और असली जीजा साली तो आज , ... ये और रीनू ,
रीनू मेरी बगल में लेटी नींद में , और नींद में भी उसके उभार कस के पकड़े , उसके जीजू , मेरे ये ,...
दोनों मेरे जीजू , एकदम गुड्डी के छोटे छूटे जुबना के दीवाने, और ऊपर से निपल उसके हरदम खड़े रहते थे, उसके भैया ने जो बाड़ी पियर्सिंग वाले के यहाँ जो गोल्डन रिंग उसके निप्स पे लगवा दिया था, उसका असर, दोनों बटन आती हुयी ट्रक के हेडलाइट की तरह दूर से दिखते,,...
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और आज की रात तो बस ट्रेलर थी , और गुड्डी भी न ,मान गयी मैं अपनी ननद को , कैसे उस कमीनी रीनू को पटा के , एक दिन और मेरे दोनों जीजू , बहन का प्रोग्राम उसने बढ़वा दिया , अब कल और परसों की रात भी , ... और फिर रात और दिन में कोई फरक थोड़े ही होगा ,
मेरी बहन , रीनू भी पक्की लेस्बो , वो भी लेजडॉम ,... एकदम गुड्डी के पीछे पड़ी , ... और गुड्डी भी जैसे चीनी दूध में मिल जाय , वैसे ,... एक से एक किंक , और गुड्डी से हामी भी भरवा ली,...
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इनका ओर रीनू का भी क्या मस्त टांका भिड़ा है , कब से ये साली के चक्कर में ,... और अब साली मिल गयी है , वो भी रीनू ऐसी खूब चिढ़ाती है , मजाक करती है , ... छेड़ती है , और क्या मस्त इन्होने मेरी बहन को चोदा आज , उस को भी मालूम हो गया मेरी मर्द , तीन तीन बार झड़ी वो तब जाकर अपनी साली को थेथर कर के ,... किस तारीफ़ से देख रही थी मेरे सोना मोना को ,..
इनकी साली बोल रही थी, जल भी रही थी चिढ़ा भी रही थी,
" यार सबसे लकी तू ही निकली एकदम चोदमपुर का राजा है, तेरा वाला। मजे लेने से ज्यादा मजे देने के पीछे पड़ा रहता है। दिल मुलायम और खूंटा हरदम हार्ड रहे ऐसा मरद बड़े मुश्किल से मिलता है। "
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" गृहकार्यों में भी दक्ष है, " मुस्करा के मैं बोली, अपने मर्द की तारीफ़ किसे नहीं अच्छी लगती, हाँ मरद के सामने नहीं होनी चाहिए।
हम सब थक गए थे, रीनू की हालत सबसे ज्यादा खराब थी, एकदम थेथर।
और हम सब सो गए थे, उसी कमरे में, मैंने कमल और अजय जीजू के बीच, गुड्डी अजय जीजू और इनके बीच और इनके साथ रीनू, इनकी साली
गुड्डी कस कर सो रही थी, और हम सब थोड़े सोये थोड़े जागे,
गुड्डी इत्ती प्यारी सी भोली सी लग रही थी, कोई कह सकता था की थोड़ी देर पहले तीन तीन मर्दों को अकेले इसने सिर्फ नाच गा के, नए आये जुबना की झलक दिखा दिखा के पागल कर दिया था,
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और अभी महीना भर भी तो नहीं हुआ उसे इंटर किये, मिडल ऑफ़ टीन्स, लेकिन आग लगा दिया आज उसने, हाँ इस समय थकी सी लग रही थी इसलिए सबसे गाढ़ी तगड़ी नींद में वही सो रही थी, लेकिन सुबह ही उठ जाती थी, गीता के आने पर, फिर गीता के संग मस्ती भी किचेन का सब काम और उसके बाद उसकी ऑनलाइन क्लासेज, आज भी सुबह सात बजे से और फिर आज भी आठ घंटे कोचिंग में रगड़ के पढ़ाई, और घर लौटते ही,
मैंने और रीनू ने कमल जीजू को पहले से ही गरमा रखा था,
गुड्डी का पिछवाड़ा फटा कमल जीजू के खूंटे से और रीनू उसकी मीठी भाभी के सहयोग से
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फिर बाकी दोनों मर्दो ने भी उस किशोरी के पिछवाड़े का मजा लिया, और कमल जीजू ने तो आगे पीछे दोनों ओर,
उसके बाद किचेन में भी हम लोगों के साथ खाना बनाना सर्व करना,
और फिर रीनू पीछे पड़ के डांस करीब डेढ़ दो घंटे, नान -स्टाप, आधे दर्जन तो भोजपुरी गाने ही रहे होंगे,
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और फिर अजय ने जो हचक के चोदा है, कोई भी थक जाता
इसलिए मैं श्योर थी की गुड्डी अब सुबह से पहले उठने वाली नहीं।
लेकिन बाकी लोगों के बारे में मैं श्योर नहीं थी,
बगल में एक नहीं दो जीजू हो तो किस स्साली को नींद आएगी और जवानी की राते सोने के लिए थोड़े ही होती हैं, अजय भी कुनमुना रहा था कमल जीजू अपनी जगह पर यानी मेरे पिछवाड़े से मुझे पकड़े और अजय आगे से, हाँ जोबन साली का दोनों जिज्जा ने एकदम ईमानदारी से बराबर बांटा था, एक कमल जीजू के कब्जे में दूसरा अजय के कब्जे में।
बदमाशी अजय ने ही शुरू की,
पहले हलके हलके दबाना, मसलना, फिर जीभ से निप्स को छेड़ना और जैसे उसने चूसना शुरू किया मेरी चूत में आग लग गयी।
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थोड़ी देर पहले ही कमल जीजू ने हचक के गांड मारी थी, अब तक चिल्ख मची थी, लग रहा था किसी ने मिर्चा कूट दिया है अंदर, लेकिन चम्पाकली की रगड़ाई तो उस समय नहीं हुयी थी, इसलिए वहां खुजली मच रही थी और अब अजय की बदमाशी। मैंने भी अजय के साथ, बस देख रही थी उसे गुड्डी से मजे लेते हुए गुड्डी की उसे गांड भी मारी और गाना डांस के साथ कैसे खड़े खड़े उसने गुड्डी की हचक के ली, मान गयी मैं अजय को नंबरी चोदू है स्साला मेरा जीजू, रीनू का मर्द।
मैं स्साली क्यों छोड़ती, मैंने भी अजय जीजू के खूंटे को रगड़ना शुरू कर दिया, अपनी कोमल कोमल उँगलियों से, कभी खुले सुपाड़े को सहलाती कभी मुठियाती कभी मेल टिट्स को दबोच लेती, दांतों से काट लेती,

वाह री कोमलिया आग गुड्डी की लगवाई. और भुजवा दोनों बहने अपनी रही हो. तेरा मन किया. और तू चढ़ गई अपने अजय जीजू के खुटे पर. लेकिन तेरी बहन को देख ले. कैसे खेल रही है तेरे मरद के खुटे से. और हचक हचक कर वाह ये अमेज़िंग फैंटासी है. अपनी बहन को अपने मरद से आगे पूछे फाड़वाते देखने का. मै इसपर एक स्टोरी जरूर लिखूँगी.मस्ती जीजा साली की
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मैं स्साली क्यों छोड़ती, मैंने भी अजय जीजू के खूंटे को रगड़ना शुरू कर दिया, अपनी कोमल कोमल उँगलियों से, कभी खुले सुपाड़े को सहलाती कभी मुठियाती
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कभी मेल टिट्स को दबोच लेती, दांतों से काट लेती,
मन तो अजय जीजू का भी कर रहा था, औजार एकदम तना, फनफना रहा था. वो भी जानते थे की मेरी भी हालत खराब है मिलेगी तो है ही स्साली, तो वो और तड़पा रहे थे, दोनों जोबन उन्होंने कमल जीजू को गिफ्ट कर दिए और खुद उनके हाथ मेरी जांघ मेरी प्रेम गली और क्लिट में,
चूत में आग लग गयी मेरी और मुझसे रहा नहीं गया,
और मैं सीधे अजय जीजू के खूंटे पर चढ़ गयी, और कोई फोरप्ले नहीं सीधे से अजय के कंधे के पकड़ के वो करारा धक्का मारा, अगर कोई कच्ची कुँवारी भी होती झिल्ली फाड़ते हुए लंड अंदर समा जाता, अजय का बांस बहुत लम्बा था फिर भी आधे से ज्यादा मेरे अंदर घुस गया,
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ये और रीनू भी जग गए थे, ये मुझे मुस्कराते हुए देख रहे थे, उन्हें मालूम था की मैं जब इस मूड में होती हूँ तो माँ बहन सब चोद के रख देती हूँ,
मैंने भी मुस्करा के उनको और उनकी साली रीनू को भी देखा, वो मेरे मरद का मोटा मूसल चूस रही थी,
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उसने जबरदस्त हाई फाइव किया
मैं उसका मरद चोद रही थी,
दोनों हाथों से मैंने अजय के कंधे को पकड़ा और एक जबरदस्त धक्का मारा,
सरसराते बचा खुचा नाग बिल के अंदर और अब बिल ने अपने को सिकोड़ना उसे दबोचना, निचोड़ना शुरू किया, अजय भी कई बार झड़ चूका था शाम से उसके जल्दी झड़ने का सवाल ही नहीं था. कुछ देर उसे तंग करने के बाद मैंने अब हलके हलके धक्के ऊपर से मारने शुरू किये, बस दो चार इंच कमर ऊपर उठा तो और फिर धीरे धीरे खूब धीरे धीरे नीचे, ऊपर नीचे होती कसी प्रेमगली में लंड के रगड़ने पे जो मजा मरद को मिलता है वो कहने लायक नहीं और ऊपर से मैं अपने जोबन कभी अजय के सीने से रगड़ देती कभी उसके होंठों पे छुला के हटा देती,
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कमल जीजू मुझे देख के मुस्करा रहे थे, उनका मूसल भी जग रहा था।
और मैंने कमल जीजू के मोटू को भी मसल दिया, मैं जानती थी ये जग गया तो एक बार फिर मेरे पिछवाड़े की ऐसी की तैसी करेगा,
करेगा तो करे, मेरे जीजू, मेरे जीजू का मूसल,
और मैंने झुक के अपने होंठों से पहले तो कमल जीजू के खूब मोटे सुपाड़े को चूसा और फिर कस के लंड मुंह में लेकर चूसने लगी,
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रीनू को जलाने के लिए मैंने इशारा किया,
" हे मेरे पास दो दो है "
वो कमीनी, मेरे मरद के खड़े खूंटे पर चढ़ते उसने भी इशारा किया, मेरे एक तेरे दो के बराबर है बल्कि उन दोनों से बीस है।
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वो मेरे मरद के खूंटे पे चढ़ी थी और मैं उसके, एकदम अगल बगल, और मैं साथ में कमल जीजू को पागल कर रही थी।
और उसके बाद वही हुआ जो होना था
मेरे जीजू लोगों ने मेरी जबरदस्त सैंडविच बनाई , खासतौर से कमल जीजू ने जो गांड मारी , अब तक कल्ला रही है ,
ऊपर से वार्निंग भी दे दी ,
" यार तेरे ऐसा पिछवाड़ा आज तक नहीं मिला , ...अबकी तो दर्जन भर बार कम से कम तेरी मारूंगा ,... "
मैं सिहर तो गयी लेकिन सुन कर अच्छा भी लगा , उफ़ हाँ कैसे मेरी सैंडविच बनी ये तो बताई नहीं , , ... ये भी बात बता दूँ , अपनी और अपने दोनों जीजू की
रीनू पर तो उसके जीजू चढ़े थे और मैं अपने दोनों जीजू के साथ ,...

वाह री कोमलिया. सेंडविच बनाकर तो खूब माझा ले लिया. और तू तो अपने दोनों जीजाओ की है भी फेवरेट. तेरे कवारेपन मे ही वादा ले लिया. अब हमरी कोमलिया तो इंतजार ही अपने जीजा का कर रही थी. उल्टा कोमलया के पास तो दो है.सैंडविच
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पर कमल जीजू न , अभी तक मेरा पिछवाड़ा कल्ला रहा था , आग लगी थी एकदम अंदर तक , ऐसे रगड़ रगड़ तक ,... ऊपर से कमल जीजू बोल भी रहे थे , कोमल यार तेरी गांड का मजा ही अलग है , सच में अबकी तो कम से कम दर्जन भर बार मार के ही जाऊँगा ,...
और सच में चीनू की शादी में ही मुझे अंदाज लग गया था , जिस तरह से डांस करते समय मेरे गोल गोल नितम्बों को वो सहला रहे थे , लहंगे के ऊपर से , ...
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खाने के समय हम दोनों अलग ही थे , बरात की भीड़भाड़ से थोड़े अलग से , ...एक ही प्लेट में , मैं उन्हें अपने हाथ से खिला रही थी , और उस समय उनसे नहीं रहा गया , बोल ही दिया कमल जीजू ने ,
"सुन कोमल मैं अगवाड़े ,पिछवाड़े में अंतर नहीं करता। "
मैं उनकी छोटी पक्की साली , और छेड़ा मैंने ,
" जीजू, करना भी नहीं चाहिए। और अगर आपने किया न , तो इस साली की पक्की वाली कुट्टी हो जायेगी। लेकिन आप बीबी और साली में तो अंतर करते होंगे "
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" एकदम नहीं ,... " हँसते हुए बोले वो। फिर जोड़ दिया ,
" लेकिन साली का दर्जा ऊपर है , यार साली तो कभी कभार , इसलिए उसे तो कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए , बीबी तो ,.... और न साली का अगवाड़ा , न पिछवाड़ा। "
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लेकिन कमल जीजू न इतने बेरहम ,... मैं चीखती रही , चिल्लाती रही , बिसूरति रही पर , ऐसे रगड़ रगड़ के गांड मारी उन्होंने मेरी अभी तक ,...
सैंडविच मेरी पिछली बार भी बनी थी , मेरे पिछवाड़े अजय और कमल दोनों जीजू ने अपना मूसल चलाया था , पर सच में अबकी लगा की वो तो बस ट्रेलर था ,...
पिछली बार सम्हाल कर , हलके हलके धीरे पहले सुपाड़ा फिर ,...
लेकिन अबकी तो एक धक्के में , कमल जीजू ने ,... और मोटा भी कितना है उनका मेरी मुट्ठी में नहीं आता।
सिर्फ सुपाड़ा ही नहीं धकेला बल्कि , पूरा गांड का छल्ला पार ,... मैंने अपनी समझ से चूस के उनका चिकना कर दिया था , लेकिन सुपाड़ा बहुत ही मोटा है उनका , इतना जोर से दरेरता रगड़ता घुसेड़ा , मेरी आँख के आगे तारे नाच गए , जोर की चीख निकली मेरी। और आलमोस्ट निकाल के उन्होंने फिर से पूरा ठेल दिया , चार पांच धक्के में तो कमल जीजू ने तो पूरा मेरी गांड के जड़ तक ,
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मैं चीखती रही , चिल्लाती रही , उनकी माँ को गाली देती रही ,
" कमल जीजू , ये तेरी माँ , चीनू की सास , ...स स्साली मायके की रंडी , बचपन से तेरे मामा को चढ़वाती थी , अरे उस कुत्ता चोदी , गदहा चोदी के जने , रंडी के पूत , तेरी मां का भोंसड़ा नहीं है , ताल पोखरा ऐसी , तेरी कोमल साली की कोमल कोमल गांड है , ज़रा सम्हाल के , ..दे तो रही हूँ ,
इन सारे लड़कों का मैंने देखा है , बस माँ का नाम ले ले और लंड में एकदम से नया जोश आ जाता है , जैसे बचपन से माँ का नाम ले के ही मुठ मार रहे हैं , इनकी भी यही हालत और अजय और कमल जीजू की भी यही तीनो लड़कों की।
और हुआ वही , कमल जीजू ने इतना कस के धक्का मारा की मेरे आँख में आंसू आ आगये , और साथ में कमल जीजू ने मेरी दोनों चूँचियाँ भी कस कस के , निचोड़ लीन , निप्स पिंच कर लिए।
वो तो नीचे से अजय का खूंटा मेरी बुर में धंसा हुआ था वरना मैं गद्दे पर ,....
मुझे मालूम था ये दोनों लड़के क्या चाहते हैं , कमल जीजू तो मेरे नितम्बों के पहले दिन से ही दीवाने ,... बस मैं खुद अजय के खूंटे के ऊपर ,.. अब विपरीत रति में तो ,... इनके साथ भी तो आलमोस्ट रोज बिना नागा एक बार ,...
अजय के दोनों हाथों को मैंने अपने हाथ से पकड़ लिया , और आँखों से बरज दिया ,
जीजू अब थोड़ी देर कमान मेरे हाथ में ,
और झुक के अपने जोबन अजय जीजू की छाती पर रगड़ने लगी , मेरी प्रेम गली जीजू के ९० डिग्री पर खड़े , बम्बू के बस सहला रही थी , चिढ़ा रही थी , उकसा रही थी , एक धक्के में मैंने सुपाड़ा तो अपनी बिल में घोंट लिया लेकिन , फिर रुक गयी। मेरी चूत कस कस के अजय के सुपाड़े को भींच रही थी , कुछ देर में ही जीजू की हालत खराब , वो नीचे से पुश करने की कोशिश कर रहे थे
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लेकिन मेरी कलाई ने कस के उन्होंने पकड़ रखा था , सीने का पूरा बोझ उनके सीने पर , इधर मेरी चूत उनके सुपाड़े को भींच कर दबोच कर निचोड़ कर उनकी हालत खराब कर रही थी , वही मेरे जोबन भी दोनों साथ साथ अजय जीजू के सीने पर रगड़ घिस्स ,
लेकिन कुछ देर बाद मुझे दया आ गयी , हचक के चुदवाने का मन तो मेरा भी कर रहा था
ऊपर से मेरी एकदम बगल मेरी बहन , रीनू हचक हचक के इनसे चुदवा रही थी , चूतड़ उठा उठा के धक्के लगा रही , मैं कौन होती थी अपने दोनों जीजू को तरसाने वाली ,
और जब से हम बहनें टीनेजर , बल्कि साफ़ साफ़ कहूं तो हम तीनों बहनों , मेरी रीनू और चीनू की झांटे आयीं ,
दोनों मुझे चिढ़ाती थी की उन दोनों के मर्द मेरे साथ , ... उस समय तो मैं खूब मुंह बनाती थी , चिल्लाती थी , ...
पर बाद में सोचती थी , कितना मजा आएगा , मैं अपने जीजू लोगों के साथ और ये अपनी साली के साथ
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आज वो फैंटेसी पूरी हो रही थी य्ये एकदम मेरे बगल में लेटी मेरी बहन पर चढ़े हुए था , बिना झिझके और उन्ही के सामने मेरे दोनों जीजू ,
और ये सोचते सोचते मैंने कस के धक्का मारा , कलाई की पकड़ धीमी की , नीचे से अजय जीजू ने भी आधा मूसल उनका मेरे अंदर ,
और मैंने हाथ छोड़ दिया अजय जीजू का , उन्होंने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींचना शुरू किया , नीचे से धक्के पर धक्का और मैं भी उनका साथ दे रही थी , बस चार पांच मिनट में उनका बालिश्त भर का खूंटा मेरे अंदर धंसा ,
मुझे मालूम था क्या होना है इसके आगे , वही हुआ ,
अजय जीजू ने कस के मेरी पीठ दबोच रखी थी , लंड उनका मेरी बच्चेदानी तक धंसा
और पीछे से कमल जीजू ने अपना लंड मेरी गांड में , पहले धक्के में ही गांड का छल्ला पार
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मैं रो रही थी चिल्ला रही थी और कमल जीजू कस कस के मेरी गांड मार रहे थे , अजय जीजू बस घुसाए
७-८ मिनट तक सिर्फ कमल जीजू के धक्के ,
उसके बाद दोनों जीजू ने मिलकर वो जुगल बंदी की , जैसे तय कर करके आये हों दोनों की अबकी कोमल साली की बुर और गांड दोनों के चिथड़े चिथड़े कर देंगे
और अजय का हर धक्का सीधे मेरी बच्चेदानी पर
कमल जीजू का हर धक्का गांड के एकदम आखिरी हिस्से पर ,
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दोनों के खूंटे का एक सूत भी बाहर नहीं रहता था , एक को मेरी बुर ने घोंट रखा था दुसरे को मेरी गांड ने।
और हर धक्के के साथ मेरी चीख निकलती थी , ...
यहाँ तक की दोनों जीजू लोगों की जबरदस्त चुदाई के बाद जब मैं झड़ रही थी , काँप रही थी , थरथरा रही , तब भी उन दोनों नालायक लड़कों ने , मेरे दोनों बदमाश जीजू ने रुकने को कौन कहे चोदने की रफ़्तार भी नहीं धीमी की , मेरी गांड भी मारी जाती रही बुर भी चोदी जाती रही , पूरी रफ़्तार से , ... साथ साथ।
झड़ने के बाद , लेकिन मैंने भी ,... अब गुड्डी की तरह कोई नौसिखिया तो थी नहीं , ... धक्के का जवाब धक्के से , आगे भी , पीछे भी ,
और साथ में निचोड़ना , मेरी प्रेम गली अजय के खूंटे को निचोड़ रही थी और पिछवाड़ा , कमल जीजू के खूंटे को ,
बहुत पहले मैंने सीख लिया था , लड़की का काम सिर्फ चुदवाना नहीं , चोदना भी है , और अपने साजन को तो मैं रोज चोदती थी , बिना नागा , और जब हम लोग वैसे भी बैठे रहते , बात करते रहते थे , तो भी अपनी आँखों से , अपने जुबना के उभार से , अपने सोना मोना को ,...
लेकिन अभी तो १०० % उसपर मेरी बहन का कब्जा था , हम लोगों के टीनेज अग्रीमेंट के मुताबिक़ और मेरा दोनों जीजू पर ,
हाँ दूसरी बार मैं झड़ी , तो साथ साथ पहले अजय जीजू मेरी चुनमुनिया में और फिर कमल जीजू मेरे पिछवाड़े ,
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और जब कमल जीजू ने निकाला बाहर तो एक बार फिर से मेरी चीख निकल गयी , अंदर जगह जगह रगड़ लग गयी थी।

Updates posted, please read, enjoy and comme
Komal ko ek hi banda din me taare dikha skta hai wo hai kamal jiju. Komal sali ko bhi bus bus krne pr majboor kr diyaकमल जीजू
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अजय जीजू ने गुड्डी के लौंडा मार्का चूतड़ पर दो तमाचे लगाए चटाक चटाक और खूंटा पूरा बाहर निकाल लिया,
" निहुर स्साली, " जोर से गुड्डी का सर एकदम फर्श पे दबाते हुए अजय जीजू बोले, और अब गुड्डी का सर जमीन पर, चूतड़ हवा में खूब उठे हुए, नहीं अजय जीजू ने गांड नहीं मारी गुड्डी की। आज की रात तो रीनू ने गुड्डी के पिछवाड़े को अभयदान दिया था। लेकिन जिस ताकत से अपना मोटा खूंटा उस किशोरी की कच्ची बिल में ठेला, बेचारी की तो चीख निकल ही गयी,
हम सब हदस गए, और उसका असर कमल जीजू पर भी हुआ ,
उन्होंने मेरी पीठ पर जोर देकर मुझे झुकाया और बोले,
" निहुर स्साली "
और मैं निहुर गयी।
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मैं तो इसी का इन्तजार कर रही थी, इत्ती जोर से जीजू का मोटू जो मेरे पिछवाड़े रगड़ रहा था बड़ी जोर जोर से चींटियां काट रही थीं, मन कर रहा बस कमल जीजू कब निहराएँ कब सटाये, कब घुसेड़ें,
कमल जीजू ने कस के मेरी पीठ दबाये और मैं भी अब एकदम गुड्डी की तरह मेरा सर फर्श से चिपका, चूतड़ हवा में उठा,
मेरी गांड में आग लगी थी, इतने देर से कमल जीजू का शैतान मोटू पीछे तंग कर रहा था, बस मन कर रहा था घुसेड़ दें, पेल दें, वैसे तो ललचाते रहेंगे, कभी चूतड़ में चिकोटी काटेंगे, कभी दरार में ऊँगली कर देंगे, और मैं ललचाती भी थी उनको अपने मोटे मोटे नितम्बो मटका के, तीनो बहनो में सबसे चौड़े मेरे ही थे, और आज जब मैं निहुर के तैयार थी, वो तड़पा थे,
" जीजू करो न " मैंने दबी जुबान से कहा,
" का करूँ स्साली "
चिढ़ाते हुए वो बोले और मैं समझ गयी वो गारी सुनना चाहते हैं , मेरे और रीनू दोनों के जीजू , जब तक बहन महतारी गरियाई न जाए, उनका मन नहीं भरता था,
" अरे स्साली क गांड मारो, तोहार बहन महतारी तो हैं नहीं यहाँ जिनकी मारोगे, एक है भी तो उस पे अजय जीजू चढ़े है, "
छनछना के मैं बोली और खुद अपने दोनों हाथों को पीछे कर के कस के अपने दोनों चूतड़ फैला लिए, कसी दरार अच्छी खासी फ़ैल गयी
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और सामने छप्पन भोग रखा हो, तो कौन रोक सकता है अपने को और कमल जीजू तो गांड के पुराने शैदाई और मेरे पिछवाड़े के तो वो दीवाने थे।
एक हाथ से उन्होंने चूँची दबोच रखी थी, दूसरे हाथ से कमर को पकड़ के उन्होंने करारा धक्का मारा,
मेरी चीख निकल गयी, लेकिन ये तो अभी कुछ भी नहीं था, अब दोनों हाथ कमर को कस के पकड़ के जो उन्होंने धकेला,
उफ्फ्फ्फ़ ओह्ह्ह्हह रोकते रोकते भी मैं सिसक पड़ी, पास में फर्श पे रखे एक तकिये को खींच के अपना सर उसमे भींच लिया, दोनों हतहों से तकिये को पकड़ लिया, पिछली बार भी चार पांच बार उन्होंने मेरी मारी थी, और उस बार तो एकदम पहली बार लेकिन ऐसा दर्द,
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जीजू ने बाहर निकाल कर बस हलके से ठोंक दिया, पूरा सुपाड़ा भी अंदर नहीं घुसा था लेकिन इतनी कस के उसने मेरी पिछवाड़े की सुरंग की दीवाल को रगड़ा दरेरा, लगता था कुछ छिल सा गया, और वो बार अपना मोटा सुपाड़ा वहीं रगड़ रहे थे, दरेर रहे थे,
दर्द से मैं बेहाल थी, और अभी तो पिछवाड़े का खैबर का दर्रा पार भी नहीं हुआ था, जैसे मेरे मन की बात उन्होंने सुन ली और क्या करारा धक्का मारा की खैबर का दर्रा पार, लेकिन इस बार वहां भी कुछ छिल सा गया,
दर्द भी बहुत हुआ था और मजा भी बहुत आया था जब पिछली बार कमल जीजू ने मारा था लेकिन इस बार तो दर्द की इंतहा से थी, मेर्रो दोनों आँखों से आंसू टप टप चू रहे थे, मैंने मुंह तकिये में भींच रखा था की चीखे न निकलें, लेकिन दर्द इतना हो रहा था की मेरे मुंह से निकल ही पड़ी चीखें
उईईई ओह्ह उईईईईई नहीं नहीं जीजू बहुत लग रहा है थोड़ा हलके से, एक मिनट एक मिनट प्लीज,
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जीजू रुक तो गए उन्होंने बाहर निकाल भी लिया लेकिन अबकी जो पेला तो बंद कमरे में भी तारे दिख गए, दर्द बहुत हो रहा था लेकिन मजा भी आ रहा
जहाँ जहां छिला था अंदर उसी जगह पर दरेरते रगड़ते, और अभी आधा से ज्यादा अंदर था, बिन रोये मेरी आँखों से आंसू छलक रहे थे लेकिन i उत्तेजना के मारे पूरी देह काँप रही थी, मस्ती से मेरे जोबन पथरा रहे थे,
Bahut hi hot update hai komal ji.तेज मिर्च वाली चाट
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हम तीनों बहने मैं, रीनू और चीनू, जब चाट खाने जाते तो चीनू पहले ही बोल देती मेरे वाले में मिर्ची बहुत कम, रीनू को फरक नहीं पड़ता था लेकिन मैं कहती थी, भैया मेरे में एक्स्ट्रा, और वो चाट दे देता था तो भी मैं बोलती थी भैया मिर्च जरा सा ऊपर से और, फिर पूरा मुँह जलता था, आँख नाक हर जगह से पानी निकलता था, सी सी करती रहती, मुंह छरछराता रहता था, आग लग जाती थी गले में लेकिन मजा भी बहुत आता था।
चीनू हड़काती भी थी, ' कमीनी, जब ऐसी हालत खराब हो जाती है तो बार बार ज्यादा मिर्च क्यों "
मैंने सी सी करती रहती और बोलती भी, अरे दी ज्यादा मिर्च वाली चाट का मजा ही अलग है, इसी हालत खराब होने का ही तो मजा है।
और आज एकदम वैसा ही लग रहा था बस ज्यादा मिर्च ही नहीं, लगता था किसी ने सबसे तेज मिर्च भूत झोलकिया का छौंका मार दिया है। इतना तेज छरछरा रहा था, बुरी तरह लग रहा था लेकिन मजा भी नया नया आ रहा था ।
तबतक कमल जीजू ने कस एक मेरी दोनों चूँचियों को पकड़े पकड़े ऑलमोस्ट बाहर निकाला और ऐसा करारा धक्का मारा और वही दरेरते, छीलते, रगड़ते, घिसते, मुझे लगा जैसा मैं अब बर्दास्त नहीं कर पाउंगी, और आलमोस्ट पूरा अंदर,
नहीं नहीं जीजू नहीं, दर्द हो रहा है, बस, अब बस, बहुत ओह्ह्ह उफ्फ्फ उईईईईई
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मैं चीख रही थी एक चीख रूकती तो दूसरी शुरू हो जाती हालांकि कमल जीजू ने धक्के मारने बंद कर दिए थे, और जब किसी तरह मेरी चीख रुकी तो मुझे समझ में आया कमल जीजू की शैतानी, चीनू तो सीरियस टाइप थी, लेकिन रीनू के साथ भी एक बार उन्होंने, और रीनू ने ही मुझे बताया था
" कमल जीजू जब बहुत ज्यादा मस्ती के मूड में होते हैं तो ज्यादा मिर्ची वाली चाट खिला देते हैं, "
एक बार रीनू के साथ भी, रीनू उन्हें बहुत छेड़ रही थी, चिढ़ा रही थी लेकिन दे नहीं रही थी। रीनू ने कमल जीजू की ट्रिक भी बता दी,
" कोमलिया, कमल जीजू, बदमाशों के सरदार, बजाय सीधे पेलने ढकलने के हल्का सा तिरछा और धक्का, पिछवाड़े वाली गली में लगने की बजाय दीवाल में लगने लगता है, बस दो चार ठोकर में ही कहीं लाल, तो कहीं हल्का सा छिल जाता है और वो जलन होती है लगता है जैसे गांड में किसी ने मिर्ची वाला पटाखा जला के डाल दिया हो और उसी छिली जगह पे फिर दुबारा तिबारा तो वो वो और,
मैं समझ गयी कमल जीजू आज मुझे तेज मिर्च वाली चाट खिला रहे हैं।
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और जब पिछवाड़े को उनके मोटे खूंटे की आदत पड़ी तो कमल जीजू के लम्बे लम्बे नाख़ून मोटी मोटी चूँचियों में धंस गए और मैं जोर जोर से चीखी,
उईईईईई लेकिन उस चीख में दर्द से ज्यादा मजा था।
और जैसे जीजू को ग्रीन सिग्नल मिल गया हो, उन्होंने धकमपेल गांड मारना शुरू कर दिया, क्या ताकत थी उन के धक्को में कभी मैं चीखती, कभी सिसकती, लेकिन थोड़ी बहुत बदमाशी तो मंजू बाई की संगत में कमल जीजू की साली ने भी सीख ली थी। उनका खूंटा पूरा धंसा हुआ था और जब उन्होंने बाहर निकालना शुरू किया तो बस मैंने अपने खैबर के दर्रे को , छले को कस के भींच लिया, फिर तो जैसे कोई मोटा चूहा पिंजड़े में घुसे और बाहर न आ पाए, बस वही हालत, वो जितना बाहर निकलने की कोशिश करते मैं उतना ही कस के भींचती,
लेकिन थोड़ी देर बाद कुछ मेरी पकड़ ढीली पड़ी कुछ उनका जोर बढ़ा और वो मोटू बाहर लेकिन जीजू कुछ भी उधार नहीं रखते थे, अबकी जो उन्होंने ठेला तो बस आधा भी नहीं घुसा था और वो रुक गए,
बहुत कंट्रोल चाहिए मरद को कसी संकरी गांड में आधा घुसा खूंटा रोकने के लिए, तड़पाने के लिए
" करो न जीजू, कर न " मैं बार बार उनसे कह रही थी, उनकी माई बहन को गरियाने का भी असर नहीं पड़ा, और वो बोले,
" हर बार मैं ही धक्का क्यों मारुं, देखूं मेरी साली ने कुछ सीखा भी है की नहीं "
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और मैं समझ गयी, बस साली कौन जो जीजा का इशारा न समझे, बस मैं चूतड़ पीछे आगे कर के धीरे धीरे तीन चौथाई घोंट गयी, मान गए जीजू और अब कभी वो धक्का मारते कभी मैं, झूले की पेंग की तरह, कभी दर्द से हालत खराब होती कभी मजे
मेरी बहन रीनू भी मेरे बगल में ही निहुरी हुयी थी, फर्क इतना था की मेरे जीजू को गोलकुंडा का गोल दरवाजा पसंद था तो मेरी बहन रीनू के जीजू, मेरे मरद को प्रेमगली, साली की चम्पाकली पसंद थी
जैसी मेरी हालत खराब थी, उससे कम रीनू की नहीं थी। उसके जीजू के पास दर्जनों हथियार थे और सबसे बड़ी थी उनकी आँख, प्यार से जब वो देखते तो बिना छुए कोई पिघल जाए, दूसरी बात उनकी समझ जो उनकी सास और मंजू ने और तेज कर दी, कोई भी लड़की हो औरत हो
दो मिनट में उसके सारे एरोटिक बिंदु , जहँ बस छूने से वो पिघल जाए, उन्हें पता चल जाते थे, उनका खूंटा तो रीनू की ऐसी की ततैसी कर ही रहा था, इनके होंठ, कभी झुक के कान की लर हलके से काट लेते कभी गले के नीचे चूम लेते कभी जीभ की टिप से अपनी साली की पीठ पे सीधे मेरु दंड पर एक हलकी सी लाइन बनाते कूल्हे तक, रीनू के जोबन तो कोई भी मरद नहीं छोड़ता तो वो क्यों छोड़ते और धक्के भी बाहर निकाल के देर तक वो फांको पे रगड़ते, फिर एक झटके में पेल देते
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हालत मेरी भी खराब थी, रीनू की भी
मेरी दर्द और मजे दोनों से , रीनू सिर्फ मजे से ही पागल हो रही थी
एक विज्ञापन में दो क्रिकेट खिलाडी कहते हैं न
मेरे जमाने में सोच के मारते थे
और नए जमाने वाले का जवाब है
मेरे जमाने में ठोक के मारते हैं , बस तो कमल जीजू ठोक के मारने वाले थे,
गुड्डी और अजय तो कभी के झड़े पड़े थे,