कभी-कभार मुझे लगता है रघुवीर का किरदार आपने खुद के लाइफ से प्रेरित होकर लिखा है । और सुप्रिया जी का किरदार शायद आपकी पत्नी या प्रेमिका से इंसपायरड होकर ।
शेरो- शायरी का शौक आपको भी है और इस स्टोरी के नायक रघुवीर को भी । इश्क - विश्क भी अवश्य आपने किया ही होगा । ऐसे खुबसूरत शायरी से हसीना नही पटे संभव नही है ।
अब लगे हाथ यह भी कबूल कीजिए कि आप अपने हमसफ़र से एक क्लास स्कूल मे नीचे थे ।
खैर यह सब मजाक की बात हुई ।
रघुवीर साहब और सुप्रिया की अंडरस्टेंडिंग वाकई काफी अच्छी है । वगैर कहे , सुने दोनो एक दूसरे के दिल की बात समझ जाते हैं ।
रघुवीर साहब कालेज ट्रीप पर कहीं भी जाएं और सुप्रिया साथ न रहे , हो ही नही सकता । आखिर रघुवीर उसकी जिम्मेदारी भी तो है ।
इन दोनो के बहाने एक और लव वर्डस् का भला होते हुए भी दिखाई दे रहा है । शायद यह कालेज ट्रीप सन्नी और कंचन के बीच की दूरियाँ कम कर दे ।
आउटस्टैंडिंग अपडेट शर्मा जी ।
लगे रहिए और महिलाओं को तब तक आमंत्रित करते रहिए जब तक फोरम की सारी महिलाएं इस थ्रीड पर आ न जाएं !