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मैंने माँ को बाँहों में भर लिया और उन्हें प्यार से चूमने लगा. माँ भी मेरे साथ चिपटी पड़ी थी. उनका भी १० सालों के बाद एक जबरदस्त ओर्गास्म हुआ था.
माँ भी न जाने कब से इस के लिए तड़प रही थी. मूली खीरे या अपनी ही ऊँगली से भी भला कभी यो मजा आ सकता है क्या जो एक सख्त लौड़े से किसी औरत को मिलता है.जिस...
Thanks all
For your appreciations.
Though the main story ends here.
However I was thinking of writing one or two another episodes of this story involving anal sex of ma beta.
Pl give your suggestions, as to should I write further in this story or start some another one.
Thanks
MEGA UPDATE:-मैं ने पहले माँ के होंठो पर एक किस किया और फिर मैं ने एक झटका मारा पर कुछ नही हुआ, मेरा लण्ड फिसल गया. फिसलता भी क्यों नहीं. आखिर माँ की चूत थी ही इतनी टाइट और माँ को चोदने का मेरा यह पहला ही मौका था.मैं ने फिर से लण्ड को योनि पर रखा और एक ज़ोर का झटका मारा कि लण्ड का टोपा माँ...
“....ओह्ह्ह्हह...ओह....” माँ के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे .होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी माँ के स्तन पर पहुँच गया .यहाँ पर अभी भी माँ के हाथ थे . मेरा चेहरा जैसे ही माँ के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है ...
मैं हँसते हुए माँ से बोला "माँ। जिस की माँ तुम्हारे जितनी सुन्दर हो उस का बेटा तो अपने आप अकलमंद हो ही जायेगा. "माँ खुश हो गयी।मैं तुरंत ही उसकी चूत के दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगाऔर वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े...
मैं भी देरी ना करते हुए बिस्तर से उठा और झट से माँ की सलवार खोल दी. माँ ने भी कोई इतराज न किया। बल्कि उसने तो खुद अपनी कमीज भी उतार दी.अब मेरी माँ मेरे सामने बिलकुल नंगी थी.मैंने भी फटाफट अपने कपडे उतरे और खुद भी माँ की तरह नंगा हो गया.अब माँ बेटे का वासना का खेल शुरू होने ही वाला था...
फिर माँ मेरे से बोली"अच्छा एक बात बता। उस दिन तू मेरी कच्छी को क्यों सूंघ रहा था और क्यों चाट रहा था? तुझे शर्म नहीं आयी जो तू इतनी गन्दी जगह लगी हुई पैंटी को चाट रहा था.? "मैं माँ को अपने से चिपकता बोला।"माँ कौन कहता है कि वो गन्दी जगह है या उस को सूंघना ठीक नहीं है. आपकी चूत से तो बहुत...
मेरा मन ख़ुशी से झूम उठा.मैंने माँ को अपने से चिपकाया और अपनी ऊँगली को माँ की चूत में आगे को धकेल कर पूरी तरह से उन की चूत में घुसा दिया और बोला"माँ अपनी चूत को आगे को धकेल रही हो. क्या अपनी चूत में मेरी ऊँगली अच्छी लगी. क्या दूसरी ऊँगली भी आपकी चूत में घुसेड़ दूँ?"माँ ने अपना सर न में...
I am trying my best to give update.
I am writing but you know these days are Diwali days, so lots of work.
Find very less time to write, further writing in Hindi fonts, take considerable time.
However one thing is sure, story will complete.