Chudashama
New Member
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nice! bahut badiya kahaani, bahut hi exciting aur bahut bahut kamuk writings!
बहुत ही सुन्दर अपडेट दिया है आपने भावनाओं को कामुकता के साथ मिलाकर एक उत्कर्ष अपडेट है !MEGA UPDATE:-
मैं ने पहले माँ के होंठो पर एक किस किया और फिर मैं ने एक झटका मारा पर कुछ नही हुआ, मेरा लण्ड फिसल गया. फिसलता भी क्यों नहीं. आखिर माँ की चूत थी ही इतनी टाइट और माँ को चोदने का मेरा यह पहला ही मौका था.
मैं ने फिर से लण्ड को योनि पर रखा और एक ज़ोर का झटका मारा कि लण्ड का टोपा माँ की योनि मे चला गया .
माँ के मुँह से चीख निकल गयी .
माँ की दर्द भरी चीख सुनकर मुझे ऐसा लग रहा था कि दर्द माँ को नही बल्कि मुझे हो रहा हो.
दर्द माँ को हो रहा था और मेरी आँखो मे पानी आ रहा था.
माँ ने जब मेरी आँखो मे पानी देखा तो उन्होने चीखना बंद किया. और दर्द को बर्दास्त करना शुरू किया.
माँ अपने होंठो को दबा कर अपनी चीख को रोकने लगी.
पर माँ को दर्द हो रहा था.
माँ का दर्द कम करने के लिए मैं अपने होंठ माँ के होंठो पर रख कर चूसने लगा.
जिस से माँ दर्द को भूल कर किस पर फोकस कर सके ताकि दर्द कम होज़ाये.
अभी तो सिर्फ़ टोपा अंदर गया था.
मेरा टोपा बहुत बड़ा था किसी जंगली आलू की तरह और इतने सालों से माँ ने सेक्स नही किया था , ठीक है की उंगली से माँ मजा लेती थी पर आखिर लण्ड तो लण्ड ही उसका और एक ऊँगली का क्या मुकाबला. इसलिए उनकी योनि किसी कुँवारी लड़की की तरह हो गई थी अभी तो सिर्फ टोपा अंदर गया था पूरा लण्ड अभी अंदर जाना बाकी था.
पर मुझे क्या हुआ था कि मैं माँ को दर्द होता हुआ देख नही पा रहा था.
पर माँ को प्यार भी करना था.
उपर से मेरा लण्ड माँ की योनि मे जाने के लिए बेताब हो रहा था.
थोड़ी देर मे माँ शांत हो गयी फिर भी मैं हाथो से स्तन को दबाने लगा. थोड़ी देर मे माँ को पूरी तरह से अच्छा लगने लगा .
मैं ने माँ को इशारे मे पूछा कि अंदर डालु उसने हाँ मे गर्दन हिला दी.
फिर मैं ने एक जोरदार झटका मारा,वो झटका जिसे कोई औरत अपनी ज़िंदगी भर भूल नही सकती, झटका मार कर लण्ड माँ की योनि में अपना रास्ता बनाता हुआ पांच इंच तक अंदर चला गया.
माँ ने बहुत कोशिस की चीख ना निकले पर ये ऐसा झटका था जिस के मारते ही हर औरत की चीख निकल जाती है.
माँ की भी चीख निकल गयी.पर मेरे किस करने से उसकी दबी हुई चीख मेरे मुँह मे दब गयी.
माँ और मेरे भी आँखो से पानी निकलने लगा क्यों कि मैं अपने माँ को कोई भी तकलीफ होते हुए नही देख सकता
उसको सासे लेने की ज़्यादा ज़रूरत थी जिस से मैं ने उनके होंठो को अपने होंठो से आज़ाद किया. पर मैं स्तन को दबाता रहा.
माँ के मुँह से दर्द भरे शब्द निकले. पर माँ ने कंट्रोल करते हुए उन शब्दो को बीच मे रोख दिया.
मुझे पता था कि माँ को दर्द हो रहा है. फिर भी माँ ने मुझे लण्ड बाहर निकालने को नही कहा और अंदर डालने को भी नही कहा.
वो बस मेरे नीचे लेटी हुई अपने दर्द को मुझ पर जाहिर नही होने देना चाहती थी.
माँ मुझसे इतना प्यार करती थी कि उसने आँखो को खोल कर मुझे आँखो से इशारा करके थोड़ी देर रुकने को कहा.
उसे लगा कि अगर मैं भी उस से प्यार करता हू तो मैं उनका इशारा समझ जाउन्गा .
और हुआ भी ऐसा ही मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाहती है.
मैं ऐसे ही रुका रहा. मुझे ऐसे देख कर उसकी आँखो मे एक चमक आ गयी. वो मुझे लण्ड को बाहर निकलवाना नहीं चाहती थी. माँ तो चुदाई चाहती थी बस दिक्कत थी तो इतने मोठे लण्ड के दर्द की. माँ भी जानती थी की यह दर्द थोड़ी ही देर का है और थोड़ी ही देर में इसके पीछे पीछे मजा आने वाला है जिसके लिए मैं और मेरी माँ न जाने कितने सालों से तड़प रहे थे।
मैं ने अपने लण्ड को ऐसे ही रखा .और फिर से माँ के होंठो को चूसने लगा. स्तन को दबाने लगा.कुछ समय के बाद माँ को अच्छा लगने लगा.
उनका दर्द कम हो गया. मैं ने माँ के होंठो को छोड़ दिया .और स्तन को भी ...
माँ के चेहरे पर अब दर्द नही था बस प्यार ही प्यार दिख रहा था.
मैं लण्ड को धीरे से बाहर निकाल कर अंदर डालने लगा .धीरे धीरे लण्ड को अंदर बाहर करने लगा. अभी तक पांच इंच लण्ड अंदर था.मैं आराम से दो मिनट तक लण्ड को हिलाता रहा.
माँ बस बिना पलके झुकाए मुझे देख रही थी. क्या पता क्या देख रही थी.
मैं जो प्यार से लण्ड अंदर बाहर कर रहा था .मैं उसे ज़्यादा दर्द नही होने दे रहा था. शायद माँ यही देख रही थी.
मैं लण्ड को बड़े प्यार से माँ की योनि मे डाल रहा था. शायद माँ मेरा यही प्यार देख रही थी.
फिर धीरे धीरे गति बढ़ाने लगा .अब माँ का कुछ दर्द कम हुआ था. पर मैं ने अभी तक पूरा लण्ड अंदर नही डाला था.मैं इंतज़ार करने लगा कि कब माँ की योनि पानी छोड़ेगी.
पांच मिनट तक ऐसे ही चुदाई करने से माँ की योनि ने पानी छोड़ दिया.
माँ की योनि में पानी आ गया था. योनि अब गीली हो गयी थी. लण्ड के लिए जगह बन रही थी. माँ कुँवारी नही थी पर मेरा लण्ड ही बहोत बडा था नौ इंच लंबा और चार इंच चौड़ा और उसका सुपडा किसी जंगली आलू की तरह बडा था और माँ की योनि बहुत छोटी थी किसी छोटी बच्ची की तरह माँ की योनि और मेरे लिंग का कोई मेल ही नही था तो रिझल्ट तो ऐसे ही आना था मेरे लिंग ने माँ की योनि का बहोत बुरा हाल कर दिया था
फिर मैं ने आख़िरी झटका मारा और पूरा लण्ड अंदर चला गया. माँ की दबी हुई दर्द भरी चीख निकल गयी.
मैं माँ का बचा हुआ दर्द स्तन को दबा कर कम करने लगा.
मैं ने माँ से कहा बस हो गया .अब दर्द नही होगा... जितना दर्द होना तो हो गया ...पूरा लण्ड अंदर चला गया है..,बस थोड़ी देर रूको सब ठीक हो जाएगा
माँ ने कहा., मुझे दर्द नही हो रहा है.
मुझे पता था कि माँ झूठ बोल रही थी.
मेरे लण्ड से दर्द ना हो ये हो ही नही सकता.
माँ की स्मॉल योनि मे दर्द ना हो ये हो ही नही सकता.
लण्ड अंदर जाने के बाद चीख निकली और दर्द ना हो ये हो ही नही सकता.
फिर भी माँ ने मेरे लिए कहा कि उन्हें दर्द नही हो रहा.
माँ की बात सुन ने के बाद मैं ने लण्ड को बाहर निकाल लिया. माँ के चेहरे पर जो भाव था वो ये बता रहा था कि माँ को कितना दर्द हो रहा है.
मैं समझ गया कि वो मेरे लिए ,अपने प्यार के लिए दर्द बर्दास्त कर रही है.
मैं ने लण्ड को धीरे से फिर से अंदर डाल दिया और माँ के स्तन दबाते हुए लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया.
लण्ड के हिलने से माँ को दर्द हो रहा था .उन्होने अपने हाथ मेरी पीठ पे रख दिए. जैसे उनको दर्द होता वो अपने नाख़ून मेरे पीठ मे गाढ देती.और कहती कि मुझे दर्द नही हो रहा.
एक तरफ दर्द के वजह से नाख़ून से मेरे पीठ को खरॉच रही थी और दूसरी तरफ कह रही थी कि मुझे दर्द नही हो रहा.
माँ के साथ चुदाई करते हुए मुझे कोई जल्दी नही थी.
मैं हर एक धक्के को महसूस करना चाहता था. मैं ऐसा क्यू कर रहा था मुझे पता नही था.
पर हर एक धक्के के साथ मुझे एक अलग ही आनंद मिल रहा था.
माँ भी अब मेरे धक्को को महसूस करके अपने दिलो दिमाग़ मे ये माँ बेटे की पहली चुदाई फिट कर रही थी.
मैं बड़े प्यार से माँ की चुदाई कर रहा था. आज मुझे क्या हुआ था कुछ समझ नही आरहा था.
ना माँ को जल्दी थी और ना मुझे जल्दी थी. ना माँ मुझसे अलग होना चाहती थी. और ना मैं माँ को अलग होने देना चाहता था
मैं लण्ड को माँ की योनि की गहराई तक अंदर डाल कर धक्के मारता गया. फिर भी उनका दर्द कम नही हुआ.पर मुझे लग रहा था कि उनका प्यार बढ़ रहा है.
चुदाई के बाद मैं माँ को क्या कहूँगा ,उनका सामना कैसे करूँगा ,इसकी मुझे कोई फिकर नही थी.
बस मैं धक्के मार कर अपने जीवन को सफल कर रहा था.
मैं लण्ड को धीरे से पूरा बाहर निकाल लेता फिर अंदर कर लेता. ऐसा कुछ देर करने के बाद माँ की योनि ने मेरे लण्ड के लिए जगह बना दी.और लण्ड आराम से अंदर जाने लगा.
योनि मे लण्ड के लिए जगह बनने से माँ का दर्द ख़तम हो गया. मैं धक्के लगाता रहा .
अब माँ भी अपने चूतड़ उपर करके मेरा साथ दे रही थी माँ अब सिसकिया ले रही थी पर खुल कर नही ले रही थी. वो मुझसे शरमा रही थी.
बस बीच बीच मे आहह आहह कर रही थी.दस मिनट तक मैं ने दिमाग़ को सेक्स से अलग रख कर दिल को माँ की चुदाई फील करने दे रहा था.
मैं माँ की ऐसे ही चुदाई करता रहा.फिर से माँ ने पानी छोड़ दिया.
फिर मैं ने माँ के पैरो को थोड़ा ज़्यादा फैला दिया और धक्के बहुत धीमी गति से मैं माँ की योनि मे धक्के मार रहा था.
मैं माँ को हर धक्के का मज़ा दे रहा था और ले भी रहा था. कमरे मे हमारे चुदाई का म्यूज़िक गूँज रहा था.
यह चुदाई का म्यूज़िक कब से बज रहा था ये ना माँ को पता था और ना मुझे पता था.
माँ ने ज़्यादा तर समय अपनी आँखो को बंद रखा था.पर माँ बीच बीच मे अपनी आँखो खोल कर मुझे धक्के मारते हुए देख कर फिर से अपनी आँखो बंद कर लेती.
माँ ने फिर एक बार पानी छोड़ दिया.इस लंबी चुदाई मे मुझे भी लग रहा था कि अब मेरा भी होने वाला है.
अब मुझे अपनी धक्के मारने की गति बढ़ानी थी.पर माँ को दर्द ना हो,इसके लिए दिल मुझे इसकी इजाज़त नही दे रहा था. अगर दिल की जगह दिमाग़ होता तो अब तक मैं ने अपनी गति बढ़ा दी होती और मेरा वीर्य माँ की योनि मे होता.
मैं बड़े प्यार के साथ आख़िरी झटके भी धीरे धीरे मार रहा था.
आख़िरी झटके वो भी धीरे धीरे मारने के लिए मुझे मेरे दिल ने बहुत मदद की.
मेरे धक्के की गति अपने आप थोड़ी बढ़ गयी थी शायद उस से माँ ने पता लगा लिया होगा कि मेरा होने वाला .
इस लिए वो अपने चूतड़ उठाकर मेरा साथ देने लगी.
मैंने माँ को प्यार से पूछा - "माँ मेरा होने वाला है. मैं अपना माल कहाँ निकालूँ? क्या अंदर ही छोड़ दूँ. कोई दिक्कत तो नहीं है न ?'
माँ भी प्यार से बोली - "हाँ बेटा मेरे अंदर ही अपना माल छोड़ दो. मेरा अब माँ बनने का टाइम निकल चूका है. इसलिए कोई खतरा नहीं है. तुम आराम से अंदर ही अपना वीर्य छोड़ सकते हो. वैसे भी मैं पहली बार अपने बेटे के साथ यह सब कर रही हूँ तो तुम्हारा वीर्य मैं अपने अंदर महसूस करना चाहती हूँ. "
फिर एक आखरी धक्के के साथ मेरा वीर्य निकल गया.
मैं ने अपना वीर्य माँ की योनि मे डाल दिया.
मेरा वीर्य योनि मे महसूस कर के माँ ने आँखो खोल दी और मैं माँ के उपर गिर गया.
थोड़ी देर मैं माँ के उपर ही रहा.
फिर माँ नॉर्मल हो गयी.
अब माँ को अपने बदन मे दर्द महसूस हो रहा था.
क्यू कि मैं अभी तक माँ के उपर था
मुझे इस बात का अहसास हुआ .मैं माँ के उपर से अलग हो गया.
मैं ने अपने लण्ड को माँ की योनि से बाहर निकाल लिया.
मेरा लण्ड तो माँ की योनि से बाहर आने को तैय्यार नही था.
उसे हमेशा के लिए आखिर एक घर मिल गया था और वो वही रहना चाहता था.
दिल पर पत्थर रख कर लण्ड को बाहर निकाल लिया.
मेरे लण्ड पे माँ की चूत का रस और मेरा वीर्य लगा हुआ था.
माँ के योनि पर भी उनका अपना रस और उनके बेटे का वीर्य लगा हुआ था.
तब माँ ने कहा “ऐसे ही पड़े रो कुछ देर अच्छा लग रहा था” और शर्मा गई फिर मैंने फिर मेरा लिंग अंदर डालकर उनके ऊपर पडा रहा उनको किस करता रहा
और साथ मे उनके स्तन के साथ प्यार से खेलता रहा हम एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे माँ को अब दर्द नही हो रहा था
उनके बदन के पसीने की गंध से मेरा लण्ड फिर हार्ड होने लगा माँ मेरे लण्ड का कड़ापन महसूस करके हैरत से बोली
“ये क्या फिर से”कहते हुए मेरी तरफ हैरत और अभिमान से देखने लगी उनकी उस नजर से मुझे फिर से ताकत मिली और मैं फिर धीरे धीरे अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा अभी कुछ देर पहले मैं अंदर झड़ा था इसलीए मेरे वीर्य से पूरी योनि अछि तरह चिकनाई युक्त हो गई थी माँ ने प्यार भरे गुस्से में मुझे देखा और धीरे से कहा
“ये क्या तुम फिर शरू हुये, क्या अब भी दिल नही भरा? अब एक बार हो तो गया है. ”
माँ के ऐसे कहते ही मुझे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आया कि माँ को कितना दर्द हुआ था और मैं उन्हें आराम देने के बदले फिर सेक्स के बारे में सोचने लगा मैने झटसे अपना लिंग बाहर निकाला और माँ के ऊपर से उतर के अलग हुआ
मुझे यू अपने उपरसे हटते हुए देखकर माँ को हैरत का झटका लगा. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर कहा
" क्या हुआ तुम हट क्यों गये"
मैंने कहा "सॉरी माँ मुझसे गलती हुई तुम्हे इतना दर्द था और मैं सिर्फ सेक्स के बारे में सोच रहा था मुझे माफ़ करो मुझसे गलती हुई"
माँ ने हस कर मेरी तरफ देखा और कहा
“बेटा तुम मुझसे इतना प्यार करते हो , मैं आज बहुत खुश हूं अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझती हूं जो मुझे अपने साथी के रूप में तुम मिले, और मुझे इतना दर्द नही हो रहा है, मैं तो मजाक कर रही थी, मेरी भी इच्छा थी तुम मुझे प्यार करते रहो ”
मैने माँ की आंखों में अपने लिए बेइंतहा प्यार देखा मेरी आँखों मे खुशी के आंसू आगये मैं माँ लिपटकर उन्हें पागलो की तरह चुमने लगा माँ भी मेरा साथ देने लगी मेरा ढीला पड़ा लिंग फिर हार्ड हो गया माँ की दोनो थाइस मेरी कमर से लिपट गई मैने अपना लिंग माँ की रसभरी योनि में फिर से घुसा दिया माँ के मुह से आनंददायक सिसकारी निकल गई मैं फिरसे माँ की चुदाई करने लगा माँ और मैंने का सेक्सुअल पार्ट्स एकदम चिपक चुका था... पूरा लण्ड माँ की योनि में घूसा बैठा था...
मैंने माँ के शोल्डर्स को अपने हाथों में थाम लिया, फेस और लिप्स पर किसिंग करने लगा.. मैं अपने लण्ड को कुछ देर माँ की योनि में घूसा कर रखना चाहता था.. शायद इस तरह से माँ की योनि मेरे लण्ड के साइज की तरह हो जाए.... मैंने पूरा लण्ड धीरे धीरे योनि से बाहर निकाला और फिर झटके से पूरा अन्दर डाल दिया.. माँ दर्द से फिर चिल्ला उठि.. मैंने ने कोई १० - १५ धक्के इस तरह मारे...
हर धक्के पर माँ के मुँह से हाय मर गइ... ओह माँ मा....अह निकल रहा था.. लण्ड योनि में अपनी जगह बनाने में लगा था.. धीरे धीरे जब मैंरे लण्ड ने माँ की टाइट योनि में अपनी जगह बना ली तो दर्द कुछ कम होने लगा... फिर मैंने माँ को चोदना शुरू कर दिया.. माँ मेरी बाँहों में पड़ी चुप चाप चुद रही थी.. थोड़ी देर में माँ का दर्द बिलकुल ख़तम हो गया और वो भी अब मेरा साथ देने लगी.. माँ ने मुझे अपने से लिपटा लिया... माँ के सेक्सी लेगस, उन लेग्स पर पायल, और सेक्सी रेड पेंटेड नेल्स चुदाई के टाइम बहुत मस्त लग रही थी. मैंने स्लो और तेज दोनों तरह से रेगुलर माँ की योनि चोद रहा था... माँ भी मुझ को अपने चूतड़ ऊपर उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी.. हमदोनों का सेक्सुअल चुदाई इतना परफेक्ट दीख रहा था मानो हम एक दूसरे के साथ कई सालों से सेक्स कर रहा हो.. दोनों की सेक्सी अवाज़ों से पूरा कमरा गूँज रहा था ....
इतने दिनों की प्रतीक्षा में दोनी का संयम अब टूट चुका था मैंने अब अपनी माँ को अब वह सुख दे रहा था जिसके लिए मां न जाने कितने सालो के लिये तरसी थी आज उसे वह सुख मिल रहा था जो वह भूल गई थी उनका पति पिछले १० साल पहले मर चूका था और तब से वह इस सुख से वंचित थी और उसने इसे अपना भाग्य मान लिया था
पर आज उनका बेटा ही उनका पति के स्थान पर उन्हें चोद रहा था, उनका अपने वो बेटा जो न केवल उसे प्यार करता है बल्कि सेक्स में भी बहुत जोरदार है जो उसे वह सुख दे रहा है जिसके लिए वह न जाने कबसे तड़पी थी पर अब उसे वह सुख मिल रहा था वह बहुत खुश थी तभी मेरी आवाज से वह सोच से बाहर आई.
माँ के फेस से अब साफ़ दीख रहा था के उनको भी सेक्स करने में खूब मजा आ रहा है..
रेगुलर धक्को से माँ के चूतड़ बिस्तर में धस चुके थे..उनके सेक्सी टांगों को जो कभी तो मेरे हिप्स पर होते,,, तो कभी हवा में ,,, और कभी मैंने उनको अपने शोल्डर पेर रख कर योनि को चोदता.,,, मेरे धक्कों के साथ साथ माँ के पायल की छन छन साउंड भी सुनाई देती..... जिस जगह माँ के चूतड़ थे वहां पर से मैट्रेस भी नीचे घुस गया था..
मैं बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था. लगा के शायद मेरा लण्ड बहुत जल्दी पानी छोड़ देगा, क्योंकि ज़िंदगी मे पहली बार माँ की योनि का दर्शन किया था , मगर पूरे बीस मिनट हो चुके थे और अब भी रेगुलर मेरा लण्ड माँ की योनि की गहराई नाप रहा था.. मैं चुदाई ग के साथ साथ कभी माँ के स्तन को चूसता तो कभी लिप्स को चूसता .
मेरे चेहरे पर मजे के रंग आ रहे थे माँ भी उन्हें देख कर समझ रही थी की मुझे चुदाई में बहुत आनंद आ रहा है. उन्हें खुद भी बहुत मजा आ रहा था. आखिर यह माँ बेटे की पहली चुदाई जो थी.
मैं अब झड़ने वाला था.. तभी कोई दस धक्कों के बाद मैं गुर्राने लगा..ओर मैंने माँ को अपने बदनसे इस तरह से चिपका लिया के मानो हवा भी पार न हो पाये. आह आह आए माँ में आ रहा हूँ। अब नहीं रुक सकता। ... ओह माँ ओह ... ..और एक जटके के साथ मैंने अपने लण्ड का पानी माँ की योनि में डाल दिया....माँ भी साथ साथ चीख उठि .. आआह में भी झड़ रही हु ... ओह माँ मर गई. आह
झड़ने के बाद मैं माँके ऊपर ही ढेर हो गया.. माँ के स्तन में मेरा सर पड़ा था ... मैं बहुत थक चुका था मगर लण्ड अब भी योनि में ही घूसा बैठा था... दस मिनट बाद हमदोनो के बदन अलग हुये.. मैं माँ के साइड में लेट गया...
मेरी नज़र माँ पर गई तो देखा .. वो बेड पर टाँगे खोले पोजीशन में पड़ी थी... ऐसा लग रहा था के जैसे दोनों सेक्सी टाँगे इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद बंद होने का नाम ही नहीं लें रही थी।
माँ का बदन पसीना पसीना हो रहा था.. माँ के पसीने की बूंदे पूरे बदन पर चमक रहीं थी. बाल गीले हो कर चेहरे से चिपक गए थे... मैंने ने खूब जम कर माँ के होंठों को चूसा था, होंठों का साइज खुल कर डबल हो गया था.. पूरे शरीर पर मेरे काटने के निशान थे.
मैंने दोनों टाँगो को और ख़ौल दिया और अपनी जन्मभूमि योनि के दर्शन किये.
ओह भगवान . माँ के योनि का रंग बदल कर पूरा लाल हो गया था... लण्ड से चुदने के वजह से योनि के होंठों खुले के खुले ही रह गए थे.. योनि के अन्दर कई इंच तक साफ़ देखा जा सकता था.. मेरा ख़ूनमिश्रित वीर्य भी माँ के योनि से रिस रिस के बाहर आ रहा था.
माँ बेहाल बेड पर पड़ी थी.. ऐसा लग रहा था मानो किसी ने उनका रेप किया हो... माँ के योनि के नीचे की चादर पूरी गीली और लाल हो चुकी थी ,,माँ चुदाई के दोरान ४-५ बार झड़ गई थी और सारा पानी चादर पर ही बह गया.. फिर हम दोनो बारी बारी से बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर आगये और बेडसे बेडशीट बदल कर दोनों बेड पर पड़े थे. फिर मैं ने माँ को अपने बदन से चिपका लिया
फिर मैंने माँ की आँखों में जहाँ मेरे लिए प्यार ही प्यार था को देखा और माँ को कहा
"माँ आपका बहुत बहुत धन्यवाद् है की आप ने मेरी बात को माना. मैं कहता था न कि, पूरी दुनिया ने हम को छोड़ दिया है. हमारा कोई और सहारा नहीं है. बस हम दोनों माँ बेटा ही अब इस जीवन में एक दूजे के सहारे हैं. इसलिए हमे ही एक दुसरे की हर तरह की जरूरत का ध्यान रखें है और इस हर तरह की जरूरत में शरीर की जरूरत भी शामिल है. आज हमने माँ बेटे के संबंधों की आखरी दिक्कत भी दूर कर ली है और अब सारी जिंदगी इसी तरह हूँ एक दुसरे का सहारा बने रहेंगे। ठीक है न ?
माँ की आँखों में मेरे लिए अनन्त प्यार दिखाई दे रहा था. वो भी बोली
"बेटा पहले तो मुझे तुम्हारी बात बहुत गलत लगी. पर फिर मैंने भी जब तुम्हारी बात पर ध्यान से और शांति से गौर किया तो मुझे भी लगा की तुम ठीक ही कह रहे हो. अब हम दोनों माँ बेटा को ही एक दुसरे का सहारा बनना है. चलो जो भी हुआ अच्छा ही हुआ. अब बाकि की सारी जिंदगी हम दोनों इसी तरह गुजारेंगे।
दुनिआ के लिए हम माँ बेटा होंगे और घर के अंदर हम प्रेमी प्रेमिका , या जो भी नाम तुम हमारे इस नए रिश्ते को दो. लेकिन बस अब आगे से हमारे जीवन में प्यार ही प्यार होगा। "
यह कह कर माँ मेरे से जोर से चिपक गयी और मैंने भी माँ को अपनी आगोश में जकड लिया और फिर हम दोनों माँ बेटा नींद की वादियो मे खो गये..
हम अब जानते थे की हमारे जीवन से दुःख जा चूका है और आगे खुशियाँ ही खुशियां हैं.
thanks broLovely and very much exciting story writings!
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयाMEGA UPDATE:-
मैं ने पहले माँ के होंठो पर एक किस किया और फिर मैं ने एक झटका मारा पर कुछ नही हुआ, मेरा लण्ड फिसल गया. फिसलता भी क्यों नहीं. आखिर माँ की चूत थी ही इतनी टाइट और माँ को चोदने का मेरा यह पहला ही मौका था.
मैं ने फिर से लण्ड को योनि पर रखा और एक ज़ोर का झटका मारा कि लण्ड का टोपा माँ की योनि मे चला गया .
माँ के मुँह से चीख निकल गयी .
माँ की दर्द भरी चीख सुनकर मुझे ऐसा लग रहा था कि दर्द माँ को नही बल्कि मुझे हो रहा हो.
दर्द माँ को हो रहा था और मेरी आँखो मे पानी आ रहा था.
माँ ने जब मेरी आँखो मे पानी देखा तो उन्होने चीखना बंद किया. और दर्द को बर्दास्त करना शुरू किया.
माँ अपने होंठो को दबा कर अपनी चीख को रोकने लगी.
पर माँ को दर्द हो रहा था.
माँ का दर्द कम करने के लिए मैं अपने होंठ माँ के होंठो पर रख कर चूसने लगा.
जिस से माँ दर्द को भूल कर किस पर फोकस कर सके ताकि दर्द कम होज़ाये.
अभी तो सिर्फ़ टोपा अंदर गया था.
मेरा टोपा बहुत बड़ा था किसी जंगली आलू की तरह और इतने सालों से माँ ने सेक्स नही किया था , ठीक है की उंगली से माँ मजा लेती थी पर आखिर लण्ड तो लण्ड ही उसका और एक ऊँगली का क्या मुकाबला. इसलिए उनकी योनि किसी कुँवारी लड़की की तरह हो गई थी अभी तो सिर्फ टोपा अंदर गया था पूरा लण्ड अभी अंदर जाना बाकी था.
पर मुझे क्या हुआ था कि मैं माँ को दर्द होता हुआ देख नही पा रहा था.
पर माँ को प्यार भी करना था.
उपर से मेरा लण्ड माँ की योनि मे जाने के लिए बेताब हो रहा था.
थोड़ी देर मे माँ शांत हो गयी फिर भी मैं हाथो से स्तन को दबाने लगा. थोड़ी देर मे माँ को पूरी तरह से अच्छा लगने लगा .
मैं ने माँ को इशारे मे पूछा कि अंदर डालु उसने हाँ मे गर्दन हिला दी.
फिर मैं ने एक जोरदार झटका मारा,वो झटका जिसे कोई औरत अपनी ज़िंदगी भर भूल नही सकती, झटका मार कर लण्ड माँ की योनि में अपना रास्ता बनाता हुआ पांच इंच तक अंदर चला गया.
माँ ने बहुत कोशिस की चीख ना निकले पर ये ऐसा झटका था जिस के मारते ही हर औरत की चीख निकल जाती है.
माँ की भी चीख निकल गयी.पर मेरे किस करने से उसकी दबी हुई चीख मेरे मुँह मे दब गयी.
माँ और मेरे भी आँखो से पानी निकलने लगा क्यों कि मैं अपने माँ को कोई भी तकलीफ होते हुए नही देख सकता
उसको सासे लेने की ज़्यादा ज़रूरत थी जिस से मैं ने उनके होंठो को अपने होंठो से आज़ाद किया. पर मैं स्तन को दबाता रहा.
माँ के मुँह से दर्द भरे शब्द निकले. पर माँ ने कंट्रोल करते हुए उन शब्दो को बीच मे रोख दिया.
मुझे पता था कि माँ को दर्द हो रहा है. फिर भी माँ ने मुझे लण्ड बाहर निकालने को नही कहा और अंदर डालने को भी नही कहा.
वो बस मेरे नीचे लेटी हुई अपने दर्द को मुझ पर जाहिर नही होने देना चाहती थी.
माँ मुझसे इतना प्यार करती थी कि उसने आँखो को खोल कर मुझे आँखो से इशारा करके थोड़ी देर रुकने को कहा.
उसे लगा कि अगर मैं भी उस से प्यार करता हू तो मैं उनका इशारा समझ जाउन्गा .
और हुआ भी ऐसा ही मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाहती है.
मैं ऐसे ही रुका रहा. मुझे ऐसे देख कर उसकी आँखो मे एक चमक आ गयी. वो मुझे लण्ड को बाहर निकलवाना नहीं चाहती थी. माँ तो चुदाई चाहती थी बस दिक्कत थी तो इतने मोठे लण्ड के दर्द की. माँ भी जानती थी की यह दर्द थोड़ी ही देर का है और थोड़ी ही देर में इसके पीछे पीछे मजा आने वाला है जिसके लिए मैं और मेरी माँ न जाने कितने सालों से तड़प रहे थे।
मैं ने अपने लण्ड को ऐसे ही रखा .और फिर से माँ के होंठो को चूसने लगा. स्तन को दबाने लगा.कुछ समय के बाद माँ को अच्छा लगने लगा.
उनका दर्द कम हो गया. मैं ने माँ के होंठो को छोड़ दिया .और स्तन को भी ...
माँ के चेहरे पर अब दर्द नही था बस प्यार ही प्यार दिख रहा था.
मैं लण्ड को धीरे से बाहर निकाल कर अंदर डालने लगा .धीरे धीरे लण्ड को अंदर बाहर करने लगा. अभी तक पांच इंच लण्ड अंदर था.मैं आराम से दो मिनट तक लण्ड को हिलाता रहा.
माँ बस बिना पलके झुकाए मुझे देख रही थी. क्या पता क्या देख रही थी.
मैं जो प्यार से लण्ड अंदर बाहर कर रहा था .मैं उसे ज़्यादा दर्द नही होने दे रहा था. शायद माँ यही देख रही थी.
मैं लण्ड को बड़े प्यार से माँ की योनि मे डाल रहा था. शायद माँ मेरा यही प्यार देख रही थी.
फिर धीरे धीरे गति बढ़ाने लगा .अब माँ का कुछ दर्द कम हुआ था. पर मैं ने अभी तक पूरा लण्ड अंदर नही डाला था.मैं इंतज़ार करने लगा कि कब माँ की योनि पानी छोड़ेगी.
पांच मिनट तक ऐसे ही चुदाई करने से माँ की योनि ने पानी छोड़ दिया.
माँ की योनि में पानी आ गया था. योनि अब गीली हो गयी थी. लण्ड के लिए जगह बन रही थी. माँ कुँवारी नही थी पर मेरा लण्ड ही बहोत बडा था नौ इंच लंबा और चार इंच चौड़ा और उसका सुपडा किसी जंगली आलू की तरह बडा था और माँ की योनि बहुत छोटी थी किसी छोटी बच्ची की तरह माँ की योनि और मेरे लिंग का कोई मेल ही नही था तो रिझल्ट तो ऐसे ही आना था मेरे लिंग ने माँ की योनि का बहोत बुरा हाल कर दिया था
फिर मैं ने आख़िरी झटका मारा और पूरा लण्ड अंदर चला गया. माँ की दबी हुई दर्द भरी चीख निकल गयी.
मैं माँ का बचा हुआ दर्द स्तन को दबा कर कम करने लगा.
मैं ने माँ से कहा बस हो गया .अब दर्द नही होगा... जितना दर्द होना तो हो गया ...पूरा लण्ड अंदर चला गया है..,बस थोड़ी देर रूको सब ठीक हो जाएगा
माँ ने कहा., मुझे दर्द नही हो रहा है.
मुझे पता था कि माँ झूठ बोल रही थी.
मेरे लण्ड से दर्द ना हो ये हो ही नही सकता.
माँ की स्मॉल योनि मे दर्द ना हो ये हो ही नही सकता.
लण्ड अंदर जाने के बाद चीख निकली और दर्द ना हो ये हो ही नही सकता.
फिर भी माँ ने मेरे लिए कहा कि उन्हें दर्द नही हो रहा.
माँ की बात सुन ने के बाद मैं ने लण्ड को बाहर निकाल लिया. माँ के चेहरे पर जो भाव था वो ये बता रहा था कि माँ को कितना दर्द हो रहा है.
मैं समझ गया कि वो मेरे लिए ,अपने प्यार के लिए दर्द बर्दास्त कर रही है.
मैं ने लण्ड को धीरे से फिर से अंदर डाल दिया और माँ के स्तन दबाते हुए लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू किया.
लण्ड के हिलने से माँ को दर्द हो रहा था .उन्होने अपने हाथ मेरी पीठ पे रख दिए. जैसे उनको दर्द होता वो अपने नाख़ून मेरे पीठ मे गाढ देती.और कहती कि मुझे दर्द नही हो रहा.
एक तरफ दर्द के वजह से नाख़ून से मेरे पीठ को खरॉच रही थी और दूसरी तरफ कह रही थी कि मुझे दर्द नही हो रहा.
माँ के साथ चुदाई करते हुए मुझे कोई जल्दी नही थी.
मैं हर एक धक्के को महसूस करना चाहता था. मैं ऐसा क्यू कर रहा था मुझे पता नही था.
पर हर एक धक्के के साथ मुझे एक अलग ही आनंद मिल रहा था.
माँ भी अब मेरे धक्को को महसूस करके अपने दिलो दिमाग़ मे ये माँ बेटे की पहली चुदाई फिट कर रही थी.
मैं बड़े प्यार से माँ की चुदाई कर रहा था. आज मुझे क्या हुआ था कुछ समझ नही आरहा था.
ना माँ को जल्दी थी और ना मुझे जल्दी थी. ना माँ मुझसे अलग होना चाहती थी. और ना मैं माँ को अलग होने देना चाहता था
मैं लण्ड को माँ की योनि की गहराई तक अंदर डाल कर धक्के मारता गया. फिर भी उनका दर्द कम नही हुआ.पर मुझे लग रहा था कि उनका प्यार बढ़ रहा है.
चुदाई के बाद मैं माँ को क्या कहूँगा ,उनका सामना कैसे करूँगा ,इसकी मुझे कोई फिकर नही थी.
बस मैं धक्के मार कर अपने जीवन को सफल कर रहा था.
मैं लण्ड को धीरे से पूरा बाहर निकाल लेता फिर अंदर कर लेता. ऐसा कुछ देर करने के बाद माँ की योनि ने मेरे लण्ड के लिए जगह बना दी.और लण्ड आराम से अंदर जाने लगा.
योनि मे लण्ड के लिए जगह बनने से माँ का दर्द ख़तम हो गया. मैं धक्के लगाता रहा .
अब माँ भी अपने चूतड़ उपर करके मेरा साथ दे रही थी माँ अब सिसकिया ले रही थी पर खुल कर नही ले रही थी. वो मुझसे शरमा रही थी.
बस बीच बीच मे आहह आहह कर रही थी.दस मिनट तक मैं ने दिमाग़ को सेक्स से अलग रख कर दिल को माँ की चुदाई फील करने दे रहा था.
मैं माँ की ऐसे ही चुदाई करता रहा.फिर से माँ ने पानी छोड़ दिया.
फिर मैं ने माँ के पैरो को थोड़ा ज़्यादा फैला दिया और धक्के बहुत धीमी गति से मैं माँ की योनि मे धक्के मार रहा था.
मैं माँ को हर धक्के का मज़ा दे रहा था और ले भी रहा था. कमरे मे हमारे चुदाई का म्यूज़िक गूँज रहा था.
यह चुदाई का म्यूज़िक कब से बज रहा था ये ना माँ को पता था और ना मुझे पता था.
माँ ने ज़्यादा तर समय अपनी आँखो को बंद रखा था.पर माँ बीच बीच मे अपनी आँखो खोल कर मुझे धक्के मारते हुए देख कर फिर से अपनी आँखो बंद कर लेती.
माँ ने फिर एक बार पानी छोड़ दिया.इस लंबी चुदाई मे मुझे भी लग रहा था कि अब मेरा भी होने वाला है.
अब मुझे अपनी धक्के मारने की गति बढ़ानी थी.पर माँ को दर्द ना हो,इसके लिए दिल मुझे इसकी इजाज़त नही दे रहा था. अगर दिल की जगह दिमाग़ होता तो अब तक मैं ने अपनी गति बढ़ा दी होती और मेरा वीर्य माँ की योनि मे होता.
मैं बड़े प्यार के साथ आख़िरी झटके भी धीरे धीरे मार रहा था.
आख़िरी झटके वो भी धीरे धीरे मारने के लिए मुझे मेरे दिल ने बहुत मदद की.
मेरे धक्के की गति अपने आप थोड़ी बढ़ गयी थी शायद उस से माँ ने पता लगा लिया होगा कि मेरा होने वाला .
इस लिए वो अपने चूतड़ उठाकर मेरा साथ देने लगी.
मैंने माँ को प्यार से पूछा - "माँ मेरा होने वाला है. मैं अपना माल कहाँ निकालूँ? क्या अंदर ही छोड़ दूँ. कोई दिक्कत तो नहीं है न ?'
माँ भी प्यार से बोली - "हाँ बेटा मेरे अंदर ही अपना माल छोड़ दो. मेरा अब माँ बनने का टाइम निकल चूका है. इसलिए कोई खतरा नहीं है. तुम आराम से अंदर ही अपना वीर्य छोड़ सकते हो. वैसे भी मैं पहली बार अपने बेटे के साथ यह सब कर रही हूँ तो तुम्हारा वीर्य मैं अपने अंदर महसूस करना चाहती हूँ. "
फिर एक आखरी धक्के के साथ मेरा वीर्य निकल गया.
मैं ने अपना वीर्य माँ की योनि मे डाल दिया.
मेरा वीर्य योनि मे महसूस कर के माँ ने आँखो खोल दी और मैं माँ के उपर गिर गया.
थोड़ी देर मैं माँ के उपर ही रहा.
फिर माँ नॉर्मल हो गयी.
अब माँ को अपने बदन मे दर्द महसूस हो रहा था.
क्यू कि मैं अभी तक माँ के उपर था
मुझे इस बात का अहसास हुआ .मैं माँ के उपर से अलग हो गया.
मैं ने अपने लण्ड को माँ की योनि से बाहर निकाल लिया.
मेरा लण्ड तो माँ की योनि से बाहर आने को तैय्यार नही था.
उसे हमेशा के लिए आखिर एक घर मिल गया था और वो वही रहना चाहता था.
दिल पर पत्थर रख कर लण्ड को बाहर निकाल लिया.
मेरे लण्ड पे माँ की चूत का रस और मेरा वीर्य लगा हुआ था.
माँ के योनि पर भी उनका अपना रस और उनके बेटे का वीर्य लगा हुआ था.
तब माँ ने कहा “ऐसे ही पड़े रो कुछ देर अच्छा लग रहा था” और शर्मा गई फिर मैंने फिर मेरा लिंग अंदर डालकर उनके ऊपर पडा रहा उनको किस करता रहा
और साथ मे उनके स्तन के साथ प्यार से खेलता रहा हम एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे माँ को अब दर्द नही हो रहा था
उनके बदन के पसीने की गंध से मेरा लण्ड फिर हार्ड होने लगा माँ मेरे लण्ड का कड़ापन महसूस करके हैरत से बोली
“ये क्या फिर से”कहते हुए मेरी तरफ हैरत और अभिमान से देखने लगी उनकी उस नजर से मुझे फिर से ताकत मिली और मैं फिर धीरे धीरे अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा अभी कुछ देर पहले मैं अंदर झड़ा था इसलीए मेरे वीर्य से पूरी योनि अछि तरह चिकनाई युक्त हो गई थी माँ ने प्यार भरे गुस्से में मुझे देखा और धीरे से कहा
“ये क्या तुम फिर शरू हुये, क्या अब भी दिल नही भरा? अब एक बार हो तो गया है. ”
माँ के ऐसे कहते ही मुझे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आया कि माँ को कितना दर्द हुआ था और मैं उन्हें आराम देने के बदले फिर सेक्स के बारे में सोचने लगा मैने झटसे अपना लिंग बाहर निकाला और माँ के ऊपर से उतर के अलग हुआ
मुझे यू अपने उपरसे हटते हुए देखकर माँ को हैरत का झटका लगा. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर कहा
" क्या हुआ तुम हट क्यों गये"
मैंने कहा "सॉरी माँ मुझसे गलती हुई तुम्हे इतना दर्द था और मैं सिर्फ सेक्स के बारे में सोच रहा था मुझे माफ़ करो मुझसे गलती हुई"
माँ ने हस कर मेरी तरफ देखा और कहा
“बेटा तुम मुझसे इतना प्यार करते हो , मैं आज बहुत खुश हूं अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझती हूं जो मुझे अपने साथी के रूप में तुम मिले, और मुझे इतना दर्द नही हो रहा है, मैं तो मजाक कर रही थी, मेरी भी इच्छा थी तुम मुझे प्यार करते रहो ”
मैने माँ की आंखों में अपने लिए बेइंतहा प्यार देखा मेरी आँखों मे खुशी के आंसू आगये मैं माँ लिपटकर उन्हें पागलो की तरह चुमने लगा माँ भी मेरा साथ देने लगी मेरा ढीला पड़ा लिंग फिर हार्ड हो गया माँ की दोनो थाइस मेरी कमर से लिपट गई मैने अपना लिंग माँ की रसभरी योनि में फिर से घुसा दिया माँ के मुह से आनंददायक सिसकारी निकल गई मैं फिरसे माँ की चुदाई करने लगा माँ और मैंने का सेक्सुअल पार्ट्स एकदम चिपक चुका था... पूरा लण्ड माँ की योनि में घूसा बैठा था...
मैंने माँ के शोल्डर्स को अपने हाथों में थाम लिया, फेस और लिप्स पर किसिंग करने लगा.. मैं अपने लण्ड को कुछ देर माँ की योनि में घूसा कर रखना चाहता था.. शायद इस तरह से माँ की योनि मेरे लण्ड के साइज की तरह हो जाए.... मैंने पूरा लण्ड धीरे धीरे योनि से बाहर निकाला और फिर झटके से पूरा अन्दर डाल दिया.. माँ दर्द से फिर चिल्ला उठि.. मैंने ने कोई १० - १५ धक्के इस तरह मारे...
हर धक्के पर माँ के मुँह से हाय मर गइ... ओह माँ मा....अह निकल रहा था.. लण्ड योनि में अपनी जगह बनाने में लगा था.. धीरे धीरे जब मैंरे लण्ड ने माँ की टाइट योनि में अपनी जगह बना ली तो दर्द कुछ कम होने लगा... फिर मैंने माँ को चोदना शुरू कर दिया.. माँ मेरी बाँहों में पड़ी चुप चाप चुद रही थी.. थोड़ी देर में माँ का दर्द बिलकुल ख़तम हो गया और वो भी अब मेरा साथ देने लगी.. माँ ने मुझे अपने से लिपटा लिया... माँ के सेक्सी लेगस, उन लेग्स पर पायल, और सेक्सी रेड पेंटेड नेल्स चुदाई के टाइम बहुत मस्त लग रही थी. मैंने स्लो और तेज दोनों तरह से रेगुलर माँ की योनि चोद रहा था... माँ भी मुझ को अपने चूतड़ ऊपर उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी.. हमदोनों का सेक्सुअल चुदाई इतना परफेक्ट दीख रहा था मानो हम एक दूसरे के साथ कई सालों से सेक्स कर रहा हो.. दोनों की सेक्सी अवाज़ों से पूरा कमरा गूँज रहा था ....
इतने दिनों की प्रतीक्षा में दोनी का संयम अब टूट चुका था मैंने अब अपनी माँ को अब वह सुख दे रहा था जिसके लिए मां न जाने कितने सालो के लिये तरसी थी आज उसे वह सुख मिल रहा था जो वह भूल गई थी उनका पति पिछले १० साल पहले मर चूका था और तब से वह इस सुख से वंचित थी और उसने इसे अपना भाग्य मान लिया था
पर आज उनका बेटा ही उनका पति के स्थान पर उन्हें चोद रहा था, उनका अपने वो बेटा जो न केवल उसे प्यार करता है बल्कि सेक्स में भी बहुत जोरदार है जो उसे वह सुख दे रहा है जिसके लिए वह न जाने कबसे तड़पी थी पर अब उसे वह सुख मिल रहा था वह बहुत खुश थी तभी मेरी आवाज से वह सोच से बाहर आई.
माँ के फेस से अब साफ़ दीख रहा था के उनको भी सेक्स करने में खूब मजा आ रहा है..
रेगुलर धक्को से माँ के चूतड़ बिस्तर में धस चुके थे..उनके सेक्सी टांगों को जो कभी तो मेरे हिप्स पर होते,,, तो कभी हवा में ,,, और कभी मैंने उनको अपने शोल्डर पेर रख कर योनि को चोदता.,,, मेरे धक्कों के साथ साथ माँ के पायल की छन छन साउंड भी सुनाई देती..... जिस जगह माँ के चूतड़ थे वहां पर से मैट्रेस भी नीचे घुस गया था..
मैं बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था. लगा के शायद मेरा लण्ड बहुत जल्दी पानी छोड़ देगा, क्योंकि ज़िंदगी मे पहली बार माँ की योनि का दर्शन किया था , मगर पूरे बीस मिनट हो चुके थे और अब भी रेगुलर मेरा लण्ड माँ की योनि की गहराई नाप रहा था.. मैं चुदाई ग के साथ साथ कभी माँ के स्तन को चूसता तो कभी लिप्स को चूसता .
मेरे चेहरे पर मजे के रंग आ रहे थे माँ भी उन्हें देख कर समझ रही थी की मुझे चुदाई में बहुत आनंद आ रहा है. उन्हें खुद भी बहुत मजा आ रहा था. आखिर यह माँ बेटे की पहली चुदाई जो थी.
मैं अब झड़ने वाला था.. तभी कोई दस धक्कों के बाद मैं गुर्राने लगा..ओर मैंने माँ को अपने बदनसे इस तरह से चिपका लिया के मानो हवा भी पार न हो पाये. आह आह आए माँ में आ रहा हूँ। अब नहीं रुक सकता। ... ओह माँ ओह ... ..और एक जटके के साथ मैंने अपने लण्ड का पानी माँ की योनि में डाल दिया....माँ भी साथ साथ चीख उठि .. आआह में भी झड़ रही हु ... ओह माँ मर गई. आह
झड़ने के बाद मैं माँके ऊपर ही ढेर हो गया.. माँ के स्तन में मेरा सर पड़ा था ... मैं बहुत थक चुका था मगर लण्ड अब भी योनि में ही घूसा बैठा था... दस मिनट बाद हमदोनो के बदन अलग हुये.. मैं माँ के साइड में लेट गया...
मेरी नज़र माँ पर गई तो देखा .. वो बेड पर टाँगे खोले पोजीशन में पड़ी थी... ऐसा लग रहा था के जैसे दोनों सेक्सी टाँगे इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद बंद होने का नाम ही नहीं लें रही थी।
माँ का बदन पसीना पसीना हो रहा था.. माँ के पसीने की बूंदे पूरे बदन पर चमक रहीं थी. बाल गीले हो कर चेहरे से चिपक गए थे... मैंने ने खूब जम कर माँ के होंठों को चूसा था, होंठों का साइज खुल कर डबल हो गया था.. पूरे शरीर पर मेरे काटने के निशान थे.
मैंने दोनों टाँगो को और ख़ौल दिया और अपनी जन्मभूमि योनि के दर्शन किये.
ओह भगवान . माँ के योनि का रंग बदल कर पूरा लाल हो गया था... लण्ड से चुदने के वजह से योनि के होंठों खुले के खुले ही रह गए थे.. योनि के अन्दर कई इंच तक साफ़ देखा जा सकता था.. मेरा ख़ूनमिश्रित वीर्य भी माँ के योनि से रिस रिस के बाहर आ रहा था.
माँ बेहाल बेड पर पड़ी थी.. ऐसा लग रहा था मानो किसी ने उनका रेप किया हो... माँ के योनि के नीचे की चादर पूरी गीली और लाल हो चुकी थी ,,माँ चुदाई के दोरान ४-५ बार झड़ गई थी और सारा पानी चादर पर ही बह गया.. फिर हम दोनो बारी बारी से बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर आगये और बेडसे बेडशीट बदल कर दोनों बेड पर पड़े थे. फिर मैं ने माँ को अपने बदन से चिपका लिया
फिर मैंने माँ की आँखों में जहाँ मेरे लिए प्यार ही प्यार था को देखा और माँ को कहा
"माँ आपका बहुत बहुत धन्यवाद् है की आप ने मेरी बात को माना. मैं कहता था न कि, पूरी दुनिया ने हम को छोड़ दिया है. हमारा कोई और सहारा नहीं है. बस हम दोनों माँ बेटा ही अब इस जीवन में एक दूजे के सहारे हैं. इसलिए हमे ही एक दुसरे की हर तरह की जरूरत का ध्यान रखें है और इस हर तरह की जरूरत में शरीर की जरूरत भी शामिल है. आज हमने माँ बेटे के संबंधों की आखरी दिक्कत भी दूर कर ली है और अब सारी जिंदगी इसी तरह हूँ एक दुसरे का सहारा बने रहेंगे। ठीक है न ?
माँ की आँखों में मेरे लिए अनन्त प्यार दिखाई दे रहा था. वो भी बोली
"बेटा पहले तो मुझे तुम्हारी बात बहुत गलत लगी. पर फिर मैंने भी जब तुम्हारी बात पर ध्यान से और शांति से गौर किया तो मुझे भी लगा की तुम ठीक ही कह रहे हो. अब हम दोनों माँ बेटा को ही एक दुसरे का सहारा बनना है. चलो जो भी हुआ अच्छा ही हुआ. अब बाकि की सारी जिंदगी हम दोनों इसी तरह गुजारेंगे।
दुनिआ के लिए हम माँ बेटा होंगे और घर के अंदर हम प्रेमी प्रेमिका , या जो भी नाम तुम हमारे इस नए रिश्ते को दो. लेकिन बस अब आगे से हमारे जीवन में प्यार ही प्यार होगा। "
यह कह कर माँ मेरे से जोर से चिपक गयी और मैंने भी माँ को अपनी आगोश में जकड लिया और फिर हम दोनों माँ बेटा नींद की वादियो मे खो गये..
हम अब जानते थे की हमारे जीवन से दुःख जा चूका है और आगे खुशियाँ ही खुशियां हैं.