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Incest आंधी (नफ़रत और इन्तकाम की)

sam21003

Mirtyu hi satya hai
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UPDATE 31




सुबह सुबह साहिल के घर में , जहां सब तैयार होके नाश्ता कर रहे थे तभी राजेश के पास काल आता है किसी का जिससे बात करने के बाद....


राजेश – (सरला से) मा अभी अभी फोन आया है हमें रीना के गांव जाना होगा....


सरला – क्यों क्या हुआ बेटा....


राजेश – मा वो रीना के भाई का एक्सीडेंट में गुजर गए है....


रीना – (चौक के) ये कैसी बात कर रहे हो आप कल ही तो बात ही थी मेरी भाई से....


राजेश – रीना अभी अभी फोन आया है तुम्हारी मां का गांव से , उन्हों बताया....


राजेश की बात सुन रीना रोने लगी थी तब....


सरला – (रीना को संभालते हुए लता से) लता हमारे जाने की तैयारी करो जल्दी से....


लता – जी मा जी....


बोल के तैयारी करने लग जाती है लता , कुछ देर में सरला , रीना , राजेश , रिकी , सोनम और पूनम निकल जाते है रीना के गांव की तरफ , कुछ देर बाद पायल , शबनम , साहिल , कमल , कविता , सुनंदा , अवनी और खुशी निकल जाते है कॉलेज के लिए , कॉलेज में आते ही सुनंदा निकल जाती है बाकी टीचर्स की तरफ बाकी सब जाने लगते है क्लास में और पायल और शबनम अपने क्लास में तब रस्ते में....


विनय – (पायल और शबनम से) हेय कैसी हो दोनों....


पायल – मै बढ़िया तुम दोनों बताओ...


प्रदीप – कुछ नहीं यार आज क्लास खाली है टीचर आया नहीं है हमारा बस घूम रहे है कॉलेज में....


शबनम – क्या टीचर नहीं आए आज अब क्या करे हम....


विनय – कुछ नहीं चलो हमारे साथ बाहर ग्राउंड में चल के बाते करते है और क्या....


पायल – (शबनम से) अब क्या करे तू बता....


शबनम – मै क्या बताऊं यार एक तो सोनम और पूनम भी नहीं आई और शायद तीन चार दिन बाद आयेगी दोनों....


प्रदीप – क्यों क्या हुआ दोनों को....


पायल – उनके मामा की डेथ हो गई वो गांव गए है ना...


विनय – चिंता मत करो हम लोग है ना साथ में चलो चलते है ग्राउंड में....


बोल के चारों चले गए ग्राउंड में , इधर क्लास में बाकी सब क्लास शुरू हो गई , क्लास में....


सेमेंथा – (साहिल से) पूरा दिन रेस्टोरेंट में काम करते हो तो पढ़ाई कैसे कर पाते हो तुम....


साहिल – (मुस्कुरा के) उसके लिए भी इंतजाम कर दिया गया है घर में....


सेमेंथा – (मुस्कुराते हुए) अच्छा क्या इंतजाम हुआ है....


कविता – (इनकी बाते सुन बीच में) अब से रोज सुनंद जी पढ़ाएगी साहिल को रात में....


साहिल – (कविता से) क्या बीच में बोलना जरूरी है....


खुशी – हम बात भी नहीं कर सकते आपसे....


साहिल – नहीं , मै जरूरी नहीं समझता बात करना....


कविता – लेकिन हमें तो अच्छा लगता है आपसे बात करना....


अवनी – (साहिल के हाथ में अपना हाथ रख मुस्कुरा के) चाहे जैसे बात करो आप , हमे कोई एतराज नहीं , बल्कि अच्छा लगेगा हमें आपसे बात करते हुए....


साहिल – (तीनों से) समझ रहा हूँ सब , खेल रही हो मेरे साथ , जैसे दो साल पहले खेला था , उस वक्त तुम्हारे दोस्त शामिल थे , लेकिन इस बार तुम तीनों अलग खेल , खेल रही हो ताकि मै तुम्हारी इन मीठी बातों में आके फंस जाऊ और बाद में तुम तीनों अपना असली रंग दिखाओगे....


कविता – आपकी कसम ऐसा कुछ नहीं है हमारे मन में आपके लिए....


साहिल – हा तुम्हारे मन में ऐसा कुछ ना हो लेकिन दिल में बहुत कुछ है , इसीलिए देखो झूठी कसम भी खाई वो भी मेरी , अब समझ में आ रहा है , तुमलोग असल में चाहते यही हो मै खुद अपने आप को खत्म कर दूं....


कविता – (साहिल के मू पर अपना हाथ रख के) उससे पहले मै मर जाऊ....


कविता के जवाब से साहिल कुछ पल कविता को देखने लगा तभी...


सेमेंथा – (खुशी और अवनी से) शांत हो जाओ टीचर आ रही है (कविता से) बैठ जाओ कविता...


सेमेंथा की बात सुन खुशी और अवनी चुप होके आगे देखने लगे वही कविता बैठ गई अपनी जगह जबकि सेमेंथा एक पल देख रही थी साहिल को जो अभी भी कविता को देख रहा था , ये देख मुस्कुराने लगी सेमेंथा तभी क्लास में टीचर आई....


टीचर – (सभी से) Hello Everyone , My Name is SALMA....


ae2029


सलमा – मै आप सब की साइंस की टीचर हूँ....


जिसके बाद सलमा ने सबका इंट्रोडक्शन लिया और पढ़ाई शुरू की इस बीच साहिल का ध्यान बार बार कविता पे जा रहा था , तभी साहिल सलमा को देखने लगा जो पढ़ा रही थी तभी...


साहिल – (मन में – क्या सच में कविता का दिल साफ है या फिर से कोई नया खेल है इसका , इसकी बात से मुझे कुछ अजीब सा क्यों लग रहा है आज , कही ये मेरा वहम तो नहीं , शायद वहम ही होगा मेरा ये , ये कभी नहीं सुधर सकती दो साल पहले भी अपने दोस्तो के साथ मिल के खेल था मेरे साथ लेकिन अब नहीं खेलने दूंगा मै , भाड़ में जाए ये यार मै भी क्या सोचने लगा (सलमा को देख के) क्या माल है यार क्या पर्सनेलिटी है सलमा की उफफफफफफफफफफ्फ़ , शरीर के एक एक अंग को क्या तो मेंटेन करके रखा हुआ है , हहाहाएएएए सलमा पलट के देख यहां बैठा है तेरा बलमा , (अपने सिर को झटक के) ये मै क्या सोचने लगा टीचर के बारे में)....


तभी सलमा की आवाज आई....


सलमा – (साहिल को देख के) क्या हुआ साहिल , Any Problem....


साहिल – (हड़बड़ी में) No Miss Everything is Fine....


सलमा – हम्मम ठीक है....


बोल के सलमा आगे पढ़ाने लगी तभी...


साहिल – (अपने मन में – बच गया अच्छा हुआ मन में सोच रहा था , अब कुछ न सोचूं तो ज्यादा अच्छा होगा मेरे लिए)....


बोल के पढ़ाई में ध्यान देने लगा कुछ देर बाद जब रिसेस हुआ तब सब कैंटीन में चले गए , जहां पहले से पायल और शबनम बैठे थे विनय और प्रदीप के साथ , साथ में अंजली , माया और नमिता थे , बाकी लोगो के वहां आते ही....


पायल – (साहिल , कमल , कविता , अवनी , सेमेंथा और खुशी से) अरे आगए तुम लोग आओ बैठो यहां , (बाकियों से) इनसे मिलो ये है प्रदीप , विनय , माया , नमिता और अंजली ये हमारे क्लास के है सब....


फिर सब एक दूसरे से मिलते है तब....


विनय – (साहिल से) अरे इससे तो हम मिल चुके है कॉलेज के पहले दिन में (साहिल को तरफ हाथ आगे बढ़ा के) मेरा नाम विनय है....


साहिल – (हाथ मिला के) मेरा नाम साहिल है....


प्रदीप – (नाम सुन साहिल से) तुम्हारा नाम साहिल है...


साहिल – हा मेरा नाम साहिल है क्यों....


पायल – ये भाई है हमारा....


विनय – (चौक के) तुम्हारा भाई....


शबनम – हा तुम इतना चौक क्यों रहे हो....


विनय – नहीं ऐसी बात नहीं है शबनम....


अंजली – तुम सब रिलेटिव हो क्या आपस में....


पायल – हा (कमल की तरफ इशार करके) ये मेरा और शबनम का भाई है और साहिल , कविता , अवनी और खुशी भाई बहन है और हमारे कज़न है....


पायल की बात सुन विनय और प्रदीप एक दूसरे को देखने लगे जबकि....


साहिल – (पायल और शबनम से) आप दोनों कहा थे हम क्लास में गए थे दिखे नहीं आप...


शबनम – अरे हा आज क्लास में टीचर नहीं आए थे , तो हम लोग कॉलेज के ग्राउंड में आगए थे....


कमल – दीदी कम से कम हमे तो बता देते , हम ढूंढ रहे थे आप दोनों को....


प्रदीप – (बीच में) अरे चिन्ता क्यों करते हो यार दोनों हमारे साथ थे , हम बस बात कर के एक दूसरे को जान रहे थे....


साहिल – हम कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए आते है भाई साहब जान पहचान करने के लिए नहीं , (पायल और शबनम से) प्लीज़ आगे से ऐसा कुछ हो तो आप बता दिया करो हमें पहले से....


विनय – JUST CHILL यार क्यों टेंशन लेते हो , पायल और शबनम कोई बच्ची थोड़ी न है....


कमल – जानता हूँ बच्ची नहीं है दोनों , लेकिन बहन जरूर है मेरी....


पायल – Relax कमल सब ठीक है , ज्यादा सोचो मत तुम , हम आगे से ध्यान रखेंगे ठीक है....


कमल – हम्मम ठीक है....


बोल के सब खाने लगे जबकि विनय और प्रदीप दिल ही दिल में साहिल और कमल को गालियां दे रह थे और ये बात साहिल गौर कर रहा था दोनों को देख के , जबकि कोई और भी था जो प्रदीप और विनय को देख के कुछ सोच रहा था लेकिन किसी ने कुछ नहीं बोला सिर्फ खाने पर लगे थे , कुछ समय बाद रिसेस खत्म हुआ तब सब जाने लगे अपनी क्लास में तब चुपके से माया और नमिता ये दोनों साहिल को इशारा करके बुलाते है अपने पास तब....


साहिल – (माया और नमिता के पास जाके) क्या बात है आप दोनों ने क्यों बुलाया मुझे....


माया – देखो साहिल जितना हो सके पायल और शबनम को दूर रखो विनय और प्रदीप से ये दोनों अच्छे लड़के नहीं है....


साहिल – दोस्त है दोनों आपके और अपने दोस्तो के लिए ऐसा क्यों बोल रही हो....


नमिता – पायल और शबनम की भलाई के लिए बोल रहे है हम , ये दोनों जैसा दिखते है वैसे है नहीं कॉलेज में हर नई लड़की को अपने अच्छी बात के जाल में फसाना इनका पुराना काम है , समझा लो पायल और शबनम को वर्ना दोनों के साथ वैसा होगा जैसा हमारे साथ हो चुका है....


साहिल – (चौक के) क्या हुआ है आप दोनों के साथ...


माया – इन बातों को जान के क्या करोगे तुम , बस पायल और शबनम का ध्यान रखो , यही वजह है कि पूनम और सोनम दूर रहती है इनसे....


साहिल – एक बात बताओ जब आप दोनों जानते हो सब , इनके बारे में तो शिकायत क्यों नहीं करती इनकी....


नमिता – (हस के) प्रदीप कोई मामूली लड़का नहीं है यहां के MLA DEV तिवारी का बेटा है , शायद तुम जानते नहीं हो देव तिवारी को , ये दोनों बाप बेटे एक नंबर के गिरे हुए इंसान है , इस कॉलेज में ड्रग्स का....


माया – (नमिता की बात बीच में काट साहिल से) देखो हमारा काम था समझाना बस , अब तुम देख लो , चल नमिता....


बोल के दोनों चले गए अपनी क्लास में , पीछे छोड़ गए साहिल को जो इस वक्त....


साहिल – (मन में – कॉलेज में ड्रग्स , इसका मतलब मेरे दादा जी के कॉलेज में ड्रग्स का काम भी होता है शायद हो न हो जरूर प्रदीप और नवीन शामिल है इसमें और शायद इनका पिता देव तिवारी भी , लेकिन अगर ऐसा है तो ये बात घर में अब तक किसी को पता क्यों नहीं चली , चक्कर क्या है आखिर , इस मामले की जड़ तक जाना होगा मुझे , और ये बात माया और नमिता से जाननी होगी मुझे , ये दोनों कुछ तो जानते है)....


मन में सोचते हुए साहिल चला गया क्लास में , जबकि विनय और प्रदीप क्लास में जाने के बजाय कॉलेज के ग्राउंड में थे आपस में बात करते हुए....


विनय – उस दिन अनुज तो उस लड़के का नाम आरव बता रहा था लेकिन अभी वो लड़कियां तो साहिल नाम बता रही थी उसका , ये क्या चक्कर है....


प्रदीप – भाड़ में जाए वो , चाहे जो नाम हो उसका क्या फर्क पड़ता है , लेकिन इन दोनों के होते पायल और शबनम हमारे आस पास तक नहीं रहेगी....


विनय – जानते हो ना क्या बोल रहे हो , वो लोग प्रताप के खानदान से है भूलो मत ये कॉलेज उनका है....


प्रदीप – तो क्या हुआ राज तो अपना चलता है कॉलेज में , और किसी में हिम्मत नहीं जो बोल जाए हमे कुछ भी....


विनय – देख भाई चाहे जो हो अपने को हर कदम फुक फुक के रखना है बस , तभी ये दोनों छमिया हाथ आयेगी अपने....


प्रदीप – हम्मम खेर चल आज कॉलेज के बाद रेस्टोरेंट चलते है , पिता जी का एक काम निपटाना है....


विनय – लगता है नया माल आने वाला है भाई....


प्रदीप – ये तो वही जाके पता चलेगा यार....


वही क्लास में....


सेमेंथा – (साहिल से) उन दोनों लड़कियों ने क्यों बुलाया था तुम्हे....


साहिल – (मुस्कुरा के) बोल रही थी कि उन्हें मुझसे प्यार हो गया है , मेरे बगैर मन नहीं लगता उनका....


सेमेंथा – अच्छा फिर तुमने क्या कहा....


साहिल – (मुस्कुरा के) मैने कहा देखो मस्ती करो मजा लेकिन मेरे प्यार के चक्कर में मत पड़ो , क्योंकि मेरी जिंदगी में पहले से ही एक परी मौजूद है....


सेमेंथा – अच्छा तो उनके साथ मस्ती और मजा सिर्फ उनके साथ करोगे....


साहिल – नहीं नहीं सिर्फ उनके साथ क्यों तुम्हारे साथ भी करूंगा , वो क्या है ना घर के दाल चावल के साथ कभी कभी बाहर को बिरियानी भी खा लेनी चाहिए इंसान को....


सेमेंथा – अच्छा करके तो देखो जला दूंगी उस बिरियानी को मै....


साहिल – (मुस्कुरा के) ज्यादा मत जलो कही घर के दाल चावल न जल जाए....


बोल के साहिल मू पर हाथ रख के हंसने लगा उसे देख सेमेंथा भी हसने लगी...


सेमेंथा – अच्छा अब सच सच बताओ क्या बोल रही थी वो....


साहिल – बाद में बताता हूँ बात....


कुछ समय बाद कॉलेज खत्म हुआ तब....


कविता – (साहिल से) हमारे साथ चलो हम छोड़ देगे आपको....


साहिल – नहीं मै चला जाऊंगा....


कविता – तो क्या हुआ हम भी जा रहे है घर रस्ते में छोड़ देगे आपको....


साहिल कुछ बोलने को होता तब....


खुशी – (बीच में) पैदल जाने से अच्छा है हमारे साथ चलो आप जल्दी पहुंच जाओगे काम पर....


कमल – अगर तुम्हारे साथ गए तो पक्का काम चला जाएगा हमारे हाथ से , तब हमारा मालिक यहीं बोलेगा , जब कार है तुम्हारे पास तो नौकरी किस लिए कर रहे हो दोनों जाओ घूमों कार से अपनी....


बोल के कमल हसने लगा तब...


अवनी – (कमल से) जब इतना तेज दिमाग चलता है तो तुम्हारा तो ये भी बोल सकते हो न कि दोस्त ने लिफ्ट दी थी बस....


अवनी की बात सुन कमल की बोलती बंद हो गई साथ में सबकी हसी छूट गई तब , तब सब निकल गए रेस्टोरेंट के बाहर कार रोकते हो , साहिल और कमल बाहर निकल थे तब...


कविता – इस रेस्टोरेंट में काम करते हो...


कमल – हा....


खुशी – क्या क्या काम करते हो....


साहिल – भूखों को खाना खिलाना हमारा काम है....


कमल – वेटर का काम करते है हम यहां पर...


साहिल और कमल को बात सुन कविता , अवनी और खुशी एक दूसरे को देखने लगे तब....


शबनम – (कार से बाहर आ , एक तरफ होके साहिल से) साहिल तुम्हें काम करना है करो हम साथ है तुम्हारे , बस दूर दूर मत रहा करो हमसे , हम कोई पराय नहीं है साहिल यू दूर दूर रह के हमें पराया मत करो तुम , मैने देखा आज कॉलेज में तुम्हें पसंद नहीं है कि हम उन लड़कों से बात करे , ठीक है हम बात नहीं करेंगे , बदले में तुम्हें भी हमसे दूर रहने की जरूरत नहीं है , इतना तो मान सकते हो बात हमारी प्लीज़ साहिल....


साहिल – ठीक है....


शबनम – (मुस्कुरा के) चलो अच्छी बात है , रात में टाइम से आजाना ठीक है....


साहिल – ठीक है....


बोल के साहिल चला गया रेस्टोरेंट में साथ में कमल भी उनके जाते ही...


शबनम – (कार में बैठ कविता , अवनी , खुशी से) तुम तीनों क्या देख रहे हो रेस्टोरेंट को , चले गए दोनों अन्दर....


कविता – (शबनम से) दीदी क्या आपको पता नहीं ये रेस्टोरेंट किसका है....


पायल – (हस के) तू तो ऐसे पूछ रही है जैसे ये रेस्टोरेंट अपना हो....


अवनी – हा दीदी....


शबनम – (चौक के) क्या मतलब है तुम्हारा....


खुशी – दीदी ये रेस्टोरेंट बड़ी मां का है....


पायल – ये रेस्टोरेंट रीना मामी का है....


कविता – हा दीदी रीना चाची के दो रेस्टोरेंट है एक ये है और दूसरा शहर के दूसरी तरफ है....


शबनम – और ये बात साहिल और कमल को पता तक नहीं है , वर्ना हमें बताते जरूर....


कविता – (गुस्से में) अभी जाके बताती हूँ....


पायल – (कविता को रोकते हुए) रुक जा कविता तू जानती है साहिल के गुस्से को....


कविता – तो आप क्या चाहत हो दीदी जिस रेस्टोरेंट के मालिक है वो , उसी में वेटर की नौकरी का रहे है वो...


शबनम – और बताने के बाद क्या होगा जानती हो ना , साहिल तो यही सोचेगा कि हम उसकी इंसल्ट करने के लिए रेस्टोरेंट के अन्दर आगए है , थोड़ा शांति से काम ले कविता , घर में बात करेंगे हम साहिल से....


खुशी – मै अभी रीना चाची को फोन करके बता देती हूं....


अवनी – तू पागल हो गई है रीना चाची गांव गई है अपने , उनके भाई गुजर गए है भूल गई क्या....


खुशी – तो फिर क्या करे ये जानते हुए कि जिस रेस्टोरेंट में मालिक बन के रहना चाहिए उसमें साहिल एक मामूली वेटर का काम कर रहा है....


पायल – शांत हो जाओ सब ये वक्त सही नहीं है इन बातों के लिए , हम घर चल के पहले बता देगे सबको उसके बाद सोचेंगे साहिल से क्या बोलना है , जल्दी बाजी में कही बात बिगड़ ना जाए....


पायल की बात सही लगी सबको जिसके बाद सब निकल गया घर की तरफ , घर में आते ही सभी घर के हाल में बैठे बात कर रहे थे तब....


कविता – (घर के अंदर आते ही सभी से) क्या आप सबको पता है साहिल कहा पर काम कर रहा है....


सुनीता – हा कमल ने बताया था किसी रेस्टोरेंट में काम करते है दोनों , क्यों क्या हुआ कविता....


सुमन – बात क्या है कविता तू इतना गुस्से में क्यों लग रही है....


पायल – (सुमन से) वो मामी साहिल और कमल जिस रेस्टोरेंट में काम कर रहे है , वो रीना मामी का रेस्टोरेंट है....


सुमन , सुनीता , सुनैना और लता चौक गए बात सुन के तब....


सुनीता – कमल ने बताया नहीं मुझे इस बारे में....


सुमन – (कविता से) तो तूने बताया क्यों नहीं साहिल को....


शबनम – मामी शायद ये बात साहिल और कमल नहीं जानते है....


खुशी – (सुनैना से) मां जिस रेस्टोरेंट के मालिक है उसमें वेटर का काम करते है दोनों....


सुमन – तो तुम लोगो को बताना चाहिए था ना....


पायल – मैने ही मना किया था बोलने से कही साहिल गलत न समझ बैठे....


सुमन – मै अभी जाके बताती हूँ साहिल को....


सुनैना – हा यही सही रहेगा चल मै भी चलती हूँ....


सुनीता – (बीच में) नहीं जल्दी बाजी में मत सोचो कुछ भी आप , वो दोनों अनजाने में काम कर रहे है रेस्टोरेंट में अगर उन्हें वहां जाके बताओगे तो सोचा है क्या सोचेगा दोनों खास कर साहिल , वो यही सोचेगा उसे बात सुनाने आए हो दोनों....


शबनम – मा यही सोच के मैने सबको मना किया बात करने से वर्ना कविता तो जाके बताने वाली थी साहिल को....


सुनीता – अच्छा किया तुम दोनों ने (सुमन और सुनैना से) देखो अभी वो अनजाने में सही लेकिन अपने रेस्टोरेंट में काम कर रहे है , अच्छा यही रहेगा हममें से कोई ना जाए उस रेस्टोरेंट में अभी , जब रीना दीदी आएगी तब उनसे बात करेंगे , अब साहिल और कमल से इस बारे में बात करने की जरूरत नहीं है किसी को , करने दो उन्हें काम जैसे कर रहे है....


रेस्टोरेंट में जहां साहिल और कमल काम कर रहे थे वही इस वक्त प्रदीप और विनय आते है माया , अंजली और नमिता के साथ....


माया – क्या बात है प्रदीप आज इतने महंगे रेस्टोरेंट में लाए हो क्या पार्टी देने वाले हो....


प्रदीप – अरे नहीं यार पिता जी का कुछ काम था इसीलिए आया सोचा इस बहाने लंच भी कर लेते है सब साथ में....


अंजली – मानना पड़ेगा तुम्हे प्रदीप पढ़ाई के साथ काम भी सम्भल रहे हो अपने पिता का....


विनय – अभी सिर्फ प्रैक्टिस चल रही है प्रदीप की , जब ट्रेंड हो जाएगा तब देखना पिता की तरह MLA नहीं , CM बनेगा पक्का....


नमिता – अगर ऐसा है प्रदीप तब तो भूल जाओगे तुम हमें....


प्रदीप – ऐसा कैसे यार तुम तो मेरी पर्सनल हो तुम्हे कैसे भूलूंगा....


अंजली – अच्छा सिर्फ नमिता को और हम कहा है....


प्रदीप – अरे यार तुम तीनों तो हमारी परमानेंट माल हो जहां मै वही तुम भी होगे....


विनय – ये प्लान हम दोनों ने शुरू से बना के रखा है तुम तीनों के लिए इसीलिए ज्यादा सोचो मत बस ऑर्डर करो बहुत भूख लग रही है यार....


तभी उनके पास वेटर आता है ऑर्डर लेने तब....


वेटर – क्या लेगे सर....


प्रदीप – (जैसे ही वेटर की शकल देखता है , हसी निकल जाती है तब) अबे तू यहां वेटर के कपड़ो में....


प्रदीप की बात सुन सभी देखते है तो पाते है सामने और कोई नहीं बल्कि साहिल खड़ा था तब....


विनय – (हस के) तू वेटर है यहां पर....


साहिल – जी मै वेटर हूँ यहां पर....


अंजली – (हस के) वेटर की मामूली नौकरी करने वाला इतने बड़े कॉलेज में कैसे पढ़ता है भला....


प्रदीप – (हस्ते हुए दोस्तो से) अब समझ में आया यार असल में कॉलेज में जो इसके साथ लड़की थी जो इसे भाई बता रही थी असल में सगी नहीं मू बोली या दूर की होगी बहन इसकी....


विनय – (हस के) हा यार वर्ना ये एक मामूली वेटर उनका भाई....


बोल के हंसने लगा विनय ये देख साहिल मन ही मन में गुस्सा आ रहा था लेकिन शांत कर रहा था अपने मन को (कारण सब जानते है ज्यादा गुस्सा आना , या खून देखना , या फिर गोली की आवाज से साहिल को अटैक आते है) ताकि अटैक से बच सके तभी....


माया – (शांति से साहिल से) तुम यहां वेटर की नौकरी क्यों करते हो....


साहिल – ताकि अपने बल बूते पर कुछ कर सकू....


नमिता – (हल्का मुस्कुरा के) बहुत अच्छी बात है ये , सुबह कॉलेज और दिन में यहां पर काम अच्छी बात है....


प्रदीप – (चीड़ के) बताओ इतने बड़े कॉलेज में पढ़ने वाला , इस रेस्टोरेंट में वेटर की एक मामूली नौकरी करता है (साहिल से) कितना कमा लेते हो मतलब क्या सैलरी है तुम्हारी....


साहिल – (बात बदल के) सर क्या ऑर्डर है आपका बताए....


विनय – पहले हमने जो पूछा वो तो बता क्या सैलरी है तेरी....


साहिल – चालीस हजार....


प्रदीप – (हस्ते हुए) अबे इससे ज्यादा तो मेरी गाड़ी के पेट्रोल का खर्चा होता है , इतनी सैलरी में , में कॉलेज की फीस भी नहीं बनती है तेरी , और इतनी सैलरी में तू यहां नौकरी कर रहा है....


नमिता – (देखती है प्रदीप और विनय बेइज्जती करने पर लगे है तब बीच में) हमारा ऑर्डर लिख लो तुम बहुत भूख लगी है यार....


तब माया ऑर्डर देती है जिसे साहिल लेने चले जाता है तब....


प्रदीप – (माया और नामित से) क्या यार क्यों इतनी जल्दी भगा दिया इसे अभी तो मजा आरहा था यार....


अंजली – कोई बात नहीं यार फिर से आएगा तब बाकी हसरत पूरी कर लेना अपनी , कम से कम भूख शांत हो जाएगी अपनी तब तक....


बोल के सब हंसने लगे , थोड़ी देर में ऑर्डर आ गया सबका सब खान लगे थे तभी बीच में एक आदमी आता है....


आदमी – (प्रदीप से) हैलो प्रदीप कैसे हो....


प्रदीप – (आदमी को देख के) हैलो हैलो वर्मा अंकल , मै अच्छा हूँ आप कैसे हो....


वर्मा – मै अच्छा हूँ , और तुम बताओ काफी समय बाद दिखे हो , पढ़ाई में ज्यादा बीजी हो हुए हो क्या....


प्रदीप – बस अंकल....


वर्मा – (मुस्कुरा के) अच्छी बात है , अच्छा प्रदीप ये लो (100 का आधा नोट देते हुए) इसे सम्भाल के रखना , तुम्हारे पिता जी दिल्ली से वापस आ जाए उन्हें दे देना ध्यान से , बहुत जरूरी है ये....


प्रदीप – (100 का आधा नोट लेके अपने पीछे की जेब में रखते हुए) जी बिल्कुल अंकल....


वर्मा – अच्छा मै चलता हु बेटा एंजॉय करो तुम लोग....


प्रदीप – अंकल आप भी ज्वाइन करिए....


वर्मा – नहीं बेटा मुझ कुछ जरूरी काम से जाना है बाहर फिर कभी....


बोल के वर्मा निकल जाता है उसके जाते ही....


विनय – क्या बात है प्रदीप तुझे 100 का आधा नोट क्यों दिया उसने और इससे क्या होगा....


प्रदीप – (मुस्कुरा के) तू नहीं समझेगा ने ये सीक्रेट बात है फिर कभी बताऊंगा ये बात....


इस तरफ कमल ने देख लिया था उन सब को साथ में कैसे हस के साहिल से बात कर रहे थे जिसे देख उसे समझ आ गया था वो मजाक उड़ा रहे है साहिल का लेकिन इससे पहले कमल उनके पास आता तभी साहिल वहां से निकल के आगया कमल के पास तब....


कमल – वो मजाक उड़ा रहे थे तेरा क्यों....


साहिल – बोलने दे यार कुत्ते है , थक जाएंगे तो खुद चुप हो जायेगे....


कमल – तो जवाब देंना था न उनको....


साहिल – बेकार में कुत्तों के मू लग के क्या फायदा यार भौंकने दे सालों को....


कमल – तू वहा नहीं जाएगा सम मै जाऊंगा ऑर्डर लेके उनका....


साहिल – परेशान मत हो बे मै देख लूंगा , वैसे भी भूल गया क्या मेरी टेबल है वो , मैनेज देखेगा तो जानता है ना वो भी भौंकने लगेगा , तू बस चुप बैठ में होके आता हूँ....


बोल साहिल उनका ऑर्डर देने गया और होके आगया , जबकि इस तरफ वर्मा के जाने के बाद , सब खाना खाने लगे थे थोड़ी देर बाद साहिल उनके पास आया तब....


साहिल – सर और कुछ लाऊ आपके लिए....


प्रदीप – (हस के) हा यार खा तो हो गया अब यार कुछ और जायद गरमा गर्म लेके आजा....


साहिल – सर आप मेन्यू देख के बता दें मै ले आऊंगा....


विनय – (हस के) अच्छा वैसे क्या है गरमा गर्म में जो सिर्फ मेरे और प्रदीप के लिए हो....


प्रदीप – (हस्ते हुए) अबे बस कर यार कही बेचारे को गुस्सा आ गया तो बोलेगा , गरमा गर्म तवा है ले आऊं क्या....


बोल के अंजली , प्रदीप और विनय जोर से हंसने लगे तब....


विनय – (हस्ते हुए साहिल से) क्या सच में यही बोलने वाले थे क्या तुम....


साहिल – (बीना किसी रिएक्शन के) सर आपका बिल....


प्रदीप – (हस्ते हुए) लेकिन यहां कोई चूहा नहीं है यार....


बोल के फिर से सब हंसने लगे तभी वहां मैनेजर आजाता है....


मैनेजर – (साहिल से) क्या हो रहा है यहां पर....


साहिल – कुछ नहीं सर मै , बस सर को उनका बिल दे रहा था....


प्रदीप – (मैनेजर से) क्यों मैनेजर अब मुझे भी बिल भरना पड़ेगा क्या....


मैनेजर – (मुस्कुरा के) अरे नहीं सर आप से बिल कौन भरवाएगा , मेरे होते....


मैनेजर की बात सुन साहिल मैनेजर को देखने लगा तब....


प्रदीप – तो ये बात इसे समझा ले मैनेजर , और हा बिल इसकी तनख्वा से काटना....


मैनेजर – (मुस्कुरा के) बिल्कुल सर आप फ़िक्र ना करे....


साहिल – (बीच में मैनेजर से) सर मेरी सैलरी से क्यों खाना तो इन्होंने खाया है....


प्रदीप – (बीच में) क्योंकि यहां मेरी चलती है बच्चे , और तुमने मुझसे बिल मांगा ये उसकी पैनल्टी है....


विनय – (हस्ते हुए) अरे लगता है बच्चे को बुरा लग गया देखो , यार कितना गलत हुआ न....


प्रदीप – (हस्ते हुए) हा यार बहुत बुरा हुआ , लेकिन कोई ना....


बोल के प्रदीप अपनी जेब से पर्स निकालता है और तभी पर्स के साथ 100 का आधा नोट जमीन में गिर पड़ता है जिसपे किसी का ध्यान नहीं जाता तब , प्रदीप पर्स से 500 के दो नोट निकाल के साहिल को देता है....


प्रदीप – ये ले तेरी टिप शायद कुछ भरपाई हो जाए तेरी गलती की इसमें....


बोल के नोट जमीन में गिरा देता है प्रदीप तब...


प्रदीप – (अपने दोस्तो से) चलो रे बहुत मस्ती हो गई यहां पर (साहिल से) उठ लेना पैसे....


बोल के हस्ते हुए निकल जाता है सबके साथ लेकिन जाते जाते माया और नमिता पलट के देखने लगती है साहिल को तब....


मैनेजर – (साहिल से) जानता नहीं वो यहां के MLA का बेटा है उससे बिल मांगने चला था , तू नया है इसीलिए माफ कर रहा हु तुझे समझा चल सामान उठा और जाके काम कर और हा जमीन से उठा लेना पैसे....


बोल के मैनेजर चला गया , तब साहिल जमीन से पैसे उठता है साथ में 100 का आधा नोट जिसपे धाय नहीं देता साहिल और जेब में रख लेता है और च जाता है जहां कमल दूर से देख रहा था तब....


कमल – हो गई तसल्ली तेरी , बोला था ना मुझे जाने दे लेकिन नहीं हीरो बनना है ना तुझे....


साहिल – छोड़ न यार ऐसे तो मिलते रहेंगे हर बार , चल काम कर टेंशन मत ले वक्त आयेगा अपना भी....


बोल अपने काम पर लग गए दोनों , इस तरफ परी के घर में आरव , परी और आकृति बैठे वही आज डॉक्टर आया था परी के घर में आरव के टाके खोल रहा था तब....


डॉक्टर – (परी से) ज़ख्म काफी हद तक अब ठीक हो चुके है आरव के हल्के निशान है टाको का , धीरे धीरे ये भी कम हो जाएंगे मैडम....


परी – थैंक यू डॉक्टर....


डॉक्टर – कोई बात नहीं ये मेरा काम है मैडम (आरव से) ओके मिस्टर आरव अब ऐसी कोई मस्ती मत करना तुम समझे....


आरव – जी अंकल , अच्छा अंकल अब तो मै बाहर जा सकता हूँ न....


डॉक्टर – हा बिल्कुल बेटा अब आप आराम से घूमों पढ़ाई करो कॉलेज जाओ....


आरव – थैंक यू अंकल , बहुत दिनों से बोर हो गया था घर में बैठे मै....


परी – हम्ममम अब तैयारी करो कॉलेज जाने को समझे....


आरव – (मुस्कुरा के) बिल्कुल मोम....


डॉक्टर के जाने के बाद परी चाय बनाने चली गई रसोई में वही आरव ने लक्की को फोन मिलाया तब....


आरव – (फोन पर) कैसा है बे....


लक्की – बढ़िया तू बता....


आरव – कॉलेज चले कल से , बहुत बोर हो गया हूँ यार....


लक्की – मै कब से तैयार बैठा हूं तेरा इंतजार कर रहा था....


आरव – तो चल कल से हाल चाल लेते है कॉलेज वासियों के....


लक्की – अभी अभी हॉस्पिटल से आया है अभी से ही मस्ती सूझ रही है तुझे बोलूं क्या चाची को....


आरव – बोल दे जानता है ना फिर क्या होगा....


बोल के हंसने लगा आरव तब....


लक्की – चल बे मेरा दिमाग थोड़ी न खराब है जो चाची को बोलूंगा....


आरव – तो तैयार रहना कल से चलते है कॉलेज , कुछ मजा करते है वहा पर....


बोल के फोन काट दिया आरव ने तब....


आकृति – (आरव से) तुझे एक बात बतानी है आरू....


आरव –हा बोलिए न....


आकृति – मैने रोहित से बात की है तुझे उससे मिल के हैकिंग सीखनी होगी....


आरव – (खुश होके) क्या हैकिंग , मजा आएगा....


आकृति – मजे का पता नहीं लेकिन काम बहुत आने वाला है तेरे , बोल करेगा काम मेरे लिए....


आरव – बिल्कुल आप बोलो क्या करना होगा मुझे....


आकृति – मै तुझे मैसेज करूंगी जल्दी ही , और एक बात बतानी है तुझे....


आरव – क्या....


आकृति – मै दिल्ली जा रही हूँ ज्वाइनिंग के लिए....


आरव मायूस होके देखने लगा आकृति को तब....


आकृति – (आरव को मायूस देख) अगर तू इस तरह मायूस होगा मै कही जा नहीं पाऊंगी आरू , देख मैने कहा है साथ हूँ तेरे लेकिन तुझे ऐसे मायूस नहीं देख सकती हूँ मै , बस ध्यान रख जो मैने कहा है करने को , बाकी मै बात करती रहूंगी तेरे से रोज , तू फ़िक्र मत कर सब ठीक हो जाएगा....


आरव – लेकिन आप तो जानते हो न , और अब तो मै कॉलेज जाने लगूंगा तब कही फिर से....


इस बीच परी रसोई से निकली थी चाय लेके सबके पास आने के लिए तभी उसने आरव और आकृति की बात सुन रसोई के दरवाजे के पास रुक के सुनने लगी दोनों की बाते तब....


आकृति – देख आरू जैसा मैने पहले कहा आज भी बोलती हु , सिर्फ तेरा प्यार हैं जो चाची को रोक रहा है आगे बढ़ने से इसीलिए चाची आज तक आगे नहीं बढ़ी अपने अफेयर को लेके , अगर तू चाहता है ऐसा न हो तो अपना प्यार बनाए रख चाची से , उनको अभी तक नहीं पता कि तू उनके अफेयर के बारे में जानता है , जिस वजह से तू चाची से आज भी नाराज है बस किसी को पता नहीं लगने देता , उसी तरह अपने प्यार को और ज्यादा दिखा चाची को , देखना वो तेरे लिए वो सब कुछ छोड़ देगी समझा तू....


आरव – और अगर ऐसा ना हुआ , मोम कही रवि के साथ फिर से , तो मै अपने आप को जरूर कुछ दूंगा.....


आकृति – (गुस्से में आरव का कॉलर पकड़ के) अगर तूने ऐसा सोचा न , तो सबसे पहले गोली उस रवि मेहता को मरूंगी फिर परी चाची को और आखिरी में खुद को समझा....


बोल के कॉलर छोड़ आरव को गले लगा लिया आकृति ने तब....


आकृति – (खुद को शांत करके) तू फिक्र मत कर , मुझे यकीन है ऐसा कुछ नहीं होगा.....


आरव – हम्ममम....


तभी आकृति ने परी को देख जो रसोई के दरवाजे के बाहर खड़ी थी चाय की ट्रे लेके तब आकृति अलग होके बैठ गई तब....


आकृति – कल से कॉलेज जा और एंजॉय कर बस....


दोनों की बात को बदलता देख परी चाय लेके आगई दोनों के पास , कुछ देर बाद....


आकृति – (परी से) अच्छा चाची मै चलती हूँ आज दिल्ली जाना है मुझे काम से जल्दी वापस आके मिलती हूँ....


परी – हम्ममम ठीक है....


बोल आकृति निकल गई , आकृति के जाने के कुछ समय बाद रात में आरव और परी खाना खा के हाल में बैठे TV देख रहे थे , तभी परी को ये सही वक्त लगा आरव से बात कर उसकी गलतफहमी को दूर करने का (परी और रवि के अफेयर के बारे में) , जिस वजह से आरव का एक्सीडेंट हुआ था उसके बाद से परी , आरव से बात नहीं कर पाई थी , परी कुछ बोलने को हुई आरव से तभी घर के दरवाजे की घंटी बजती है जिसे आरव देखने जाता है तब , दरवाजे के होल से सामने खड़े शक्श को देखता है तभी....


परी – कौन आया है आरू....


आरव – (थोड़ा गुस्से में) आपका खास दोस्त....


पहले तो परी कुछ समझ नहीं पाई , लेकिन इधर आरव बोल के दरवाजा खोल देता है , सामने रवि मेहता और सोनल तलवार होते है जिसे परी देख समझ जाती है आरव की बात का मतलब तब....


रवि मेहता और सोनल तलवार एक साथ – (आरव को सामने देख) कैसे हो आरव....


आरव – बढ़िया हूँ....


परी अचानक से दोनों को अपने घर में देख उसे याद आ जाता है , बीता हुआ वो दिन जिस दिन रवि और सोनल आए थे उसके घर में , तो क्या हुआ था उस रात में.....


(is bare me janane ke leye read kare ayush01111 bhai ki story JUNG PYAR KE LEYE NAFRAT SE ka UPDATE 10)....


बात याद आते ही परी को समझ आ गया था कि आज सोनल क्या करवाने वाली है परी से जिसके बाद बहुत कुछ बदल जाने वाला था , बात को याद करके परी का खून खौलने लगा था गुस्से में लेकिन अपने गुस्से को शांत करके....


परी – (रवि और सोनल की बात का जवाब देती है) बिल्कुल ठीक है , पहले की तरह हो चुका है मेरा आरू....


परी की बात सुन आरव आगे कुछ बोल न सका दोनों से जिसके बाद....


रवि – आज पता चला मुझे आरव हॉस्पिटल से आ गया है घर , सोचा मिलूं आरव से और रस्ते में सोनल मिल गई थी वो भी आ गई....


परी – हम्ममम ठीक है , (रवि से) ऑफिस में काम कैसा चल रहा है....


रवि – अच्छा चल रहा है , तुम कब से ज्वाइन कर रही हो ऑफिस....


परी – अभी वक्त लगेगा मुझे रवि....


सोनल – (आरव से) तो कब से कॉलेज ज्वाइन कर रहे हो आरव....


आरव – कल से जाऊंगा....


सोनल – अच्छी बात है अब कम से कम परी को भी वक्त मिलेगा ऑफिस का काम देखने के लिए....


बोल के मुस्कुरा के परी और रवि को देखने लगी जिसे देख आरव मन ही मन रवि और सोनल को गालीया दे रहा था तब....


सोनल – (परी से) तेरे हसबैंड दिख नहीं रहे है.....


परी – ड्यूटी में गए है सुबह आयेगे , क्यों क्या हुआ....


सोनल – कुछ नहीं यार ऐसे पूछ मैने , अच्छा चल काफी तो पिला यार....


परी – हम्ममम मै बना के लाती हु (आरव से) आरू जाके आराम कर कमरे में मै आती हूं जल्दी.....


परी की बात सुन आरव अपने कमरे में चला गया , उसके जाते ही परी रसोई में चली गई काफी बनाने पीछे रवि , परी को रसोई में देख रहा था....




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रवि ये नजारा देख के अपने होठ को दांत से हल्का काट रहा था , जबकि सोनल से येबात छुपी नहीं थी , वो देख रही थी रवि की हरकत को तब...


सोनल – (मुस्कुरा के) इस नजारे को देख कुछ ज्यादा ही एक्साइटिड हो रहे हो तुम रवि...




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रवि – नजारा ही ऐसा है , रहा नहीं जाता है यार , कुछ कर आज की रात के लिए....


सोनल – (मुस्कुरा के) इसीलिए तो तैयार होके आई हो , तू रुक मै अभी कुछ करती हूँ....


बोल के सोनल पीछे से आई रसोई में परी के पास तब....


सोनल – तो आज क्या प्रोग्राम है तेरा....


परी – (सोनल की बात सुन समझ गई क्या बोलने वाली है सोनल तब) कुछ खास नहीं , वैसा अच्छा हुआ तुम दोनों आगए यहां , मुझे कुछ जरूरी बात करनी थी तुम दोनों से , सोचा फ्री होके बात करूगी , खेर अभी अकेले मिल गए तो बात करती हूँ.....


सोनल – बाते तो होती रहेगी यार , सुन तेरे से एक बात बोलनी थी....


परी – हा बोल क्या बात है....


सोनल – यार वो रवि है ना अकेला फील कर रहा है आज कुछ प्रोग्राम बना यार....


परी – दिमाग सही है तेरा , आरू की तबियत अभी ठीक नहीं हुई है और तू....


सोनल – अरे यार तू ज्यादा सोच रही है ये देख....


हाथ में नींद की दो गोलियां दिखाते हुए....


सोनल – इसे दूध में डाल के देदो आरव को , उसे कुछ पता नहीं चलेगा....


परी – (गुस्से में) तो तू पूरी तैयारी कर के रवि के साथ यहां इसीलिए आई है , ताकि मै आरू को नींद की गोली देके रावी के साथ....


बोल के परी देखने लगी सोनल को तब....


परी – जानती है ना आरू की तबियत कैसी है इस वक्त , अगर कुछ ऊंच नीच हो गई इस दवा की वजह से आरू के साथ तो कौन जिम्मेदार होगा बता मुझे , सोनल तू दोस्त से पहले एक मा भी है अनुज और रश्मि की , क्या तू ऐसा करेगी अपने घर में अपने दोनों बच्चों के साथ , जो मुझे करने को बोल रही है तू , अगर तुझे ये सही लगता है तो (दूध का ग्लास सोनल के सामने करके) डाल दे इसमें नींद की गोली , लेकिन एक बात याद रखना सोनल आज तू एक मा के हाथों से अपने बच्चे को नींद की गोली नहीं बल्कि जहर दिलवाने वाली है....


परी की बात सुन सोनल को एहसास हो गया चाहे जो हो वो भी दो बच्चों की मा जो ठहरी , उसे भी लगा अपनी दोस्ती निभाने के चक्कर में क्या करने जा रही थी , इसीलिए सोनल ने तुरंत नींद की गोली को डस्टबिन में फेक दिया , जिसे देख परी ने मुस्कुरा के सोनल के गाल में हाथ रख....


परी – (मुस्कुरा के) मै जानती थी मेरी सोनल भले कैसी भी हो , लेकिन दोस्त से पहले वो भी एक मा है और एक मा ही दूसरी मां के जज्बातों को समझ सकती है....


सोनल – I M SORRY परी , (बात बदल के) चल काफी लेके चलते है , फिर तुझे कुछ जरूरी बात भी करनी है न....


परी – हा मेरे रूम में चलके बात करते हैं हम....


बोल के दोनों बाहर आ गए , बाहर आते ही सोनल ने रवि को परी के रूम में चलने को बोला और परी ने आरव को कमरे में दूध दिया , तब अपने कमरे में आगई जहां तीनों कमरे में आके काफी पीके बात करने लगे तब....


सोनल – हा परी क्या जरूरी बात करने को बोल रही थी....


परी – (रवि और सोनल को देख के) रवि , सोनल क्या तुम दोनों को मुझपे भरोसा है....


रवि और सोनल एक साथ – हा परी अपने आप से ज्यादा करते है भरोसा तुम पर....


परी – हम्ममम , मैने अपनी जिंदगी का एक एहम फैसला ले लिया है , जानती हूँ दो साल लग गए मुझे रवि के साथ लेकिन इन दो सालों में आगे बढ़ने का फैसला नहीं ले पा रही थी , लेकिन अब मैने डिसाइड कर लिया है आगे बढ़ने का , (रवि से) मेरा साथ दोगे जिंदगी भर धोखा तो नहीं दोगे ना....


रवि – (खुश होके) हा परी मै कभी तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा , जिंदगी के हर कदम में तुम्हारा साथ दूंगा....


परी – (मुस्कुरा के) ठीक है , अब मुझे कोई दिक्कत नहीं , अब मै आगे बढ़ सकती हूँ बिन किसी परवाह के (थोड़ा गंभीर होके) अब बस एक काम और करना है....


रवि – (परी के रिएक्शन को देख अंदाजा लगाते हुए) तूम तेज के बारे में सोच रही होना....


परी – (मुस्कुरा के) अरे नहीं यार रवि , मै तेज के बारे में नहीं सोच रही थी उसके बारे में मैं पहले सोच लिया है , बस आरू के बारे में सोच रही हूँ....


सोनल – आरव के लिए क्या सोच रही हो....


परी – (रवि से) रवि तुम जानते हो मै आरू के बिना नहीं रह सकती हूँ उसके लिए मुझे अभी कुछ वक्त और लगेगा , ताकि मै आरू को सब समझा सकू , मै जानती हूँ आरू मेरी बात कभी नहीं टालेगा वो ज़रूर समझेगा मुझे , बस रवि तुम इतना इंतजार किया है मै चाहती हूँ कुछ वक्त और देदो मुझे ताकि मै अपने आरू के साथ हमेशा के लिए....


बोल के परी मुस्कुरा के रवि को देखन लगी , जिसे देख रवि समझ गया कि परी की बात का मतलब तब....


रवि – (खुश होके) परी इतने सालों तक इंतजार किया है मैने तुम्हारा , कुछ वक्त और ही सही मै इंतजार करूंगा परी ताकि जल्द से जल्द तुम मै ओर आरव हमेशा एक साथ रहे....


सोनल – (बीच में परी से) लेकिन परी तूने तेज के बारे में क्या सोचा है बताया नहीं , क्या तेज मान जाएगा ये बात , क्या अलग हो जाएगा वो आरव से....


परी – देख सोनल तू अच्छे से जानती है तेज घर से ज्यादा अपनी ड्यूटी पर ध्यान देता है , मुझसे अलग होना ना होना उसके लिए कोई मायने नहीं रखता , उसकी ड्यूटी ही सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है उसके लिए , तो पहले मै आरू को समझा दूं , उसके बाद मौका देख मै तेज से तलाक़ लेलूगी और वैसे भी तेज को इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी....


परी की बात सुन सोनल और रवि दोनों हंसने लगते है तब....


सोनल – (हस्ते हुए परी से) मै तेरे और तेज के तलाक के पेपर्स तैयार रखूंगी , ताकि तलाक के तुरंत बाद , रवि से शादी हो जाय तेरी , और कोई बीच में अर्चन न आए....


रवि – अगर आई तो मै लड़ जाऊंगा सबसे....


परी – (मुस्कुरा के) रवि जब काम बातों से बनता हो तो लड़ाई की क्या जरूरत , तुम बस शांति से इंतजार करो कुछ वक्त के लिए....


रवि – (खुशी से) सच कहूं परी तो अब इंतजार और नहीं होता मुझसे लेकिन तुम्हारे लिए जब इतना इंतजार किया तो कुछ वक्त और सही , मै खुश हु की आखिर कार तुम मेरी होने वाली हो....


सोनल – (हस्ते हुए) वो तो दो साल पहले ही बना चुकी हूँ मै परी को तेरा , बस अब तो तेरे घर में आने की देर है हमेशा के लिए.....


जोश में आके सोनल ने अनजाने में आज खुद एक्सेप्ट कर लिया कि दो साल पहले सोनल ने ही परी को धकेला रवि के पास , लेकिन सोनल नहीं जानती थी कि उसने आज ये बात बोल के कितना बड़ा नुकसान किया है खुद का , क्योंकि परी का ध्यान रवि और सोनल , दोनों की बातों में था , लेकिन परी ने अपना रिएक्शन बदला नहीं , बस दोनों के साथ मुस्कुराती रही तब....


सोनल – (परी से) अच्छा परी अब हम चलते है , (रवि से) चलो रवि....


रवि – (सोनल से) तुम जाओ मै थोड़ी देर रुकना चाहता हूँ परी के साथ....


सोनल – (हस्ते हुए) सब्र करो थोड़ा रवि , परी जल्द ही घर आने वाली है तेरे , वैसे भी सब्र का फल मीठा होता है जनाब , चलो अब....


बोल के सोनल के साथ रवि हस्ते हुए जानें के लिए उठ गए तब....


रवि – (परी को गले लगा के) THANK YOU SOO MUCH परी तुमने मुझे बहुत बड़ी खुशी देदी , मै इंतजार करूंगा उस दिन का जिस दिन तुम पूरी तरह मेरी हो जाओगी....


ये तीनों इस बात से अंजान की आरव दरवाजे के बाहर खड़ा इनकी सारी बाते सुन रहा था , हुआ कुछ ऐसा जब परी दूध आरव को कमरे में देके गई थी तब आरव दूध पीने लगा था लेकिन तभी दूध को आधे में छोड़ के.....


आरव – अरे यार मोम ने इसमें शक्कर हीं नहीं डाली....


बोल के कमरे के बाहर निकल जाता है आरव , तभी उसे परी के कमरे से बात करने कि आवाज आती है जिसे सुन वो समझ जाता है परी अपने कमरे में है , आरव , परी को बताने जा रहा होता है दूध में शक्कर न होने की बात बताने के लिए , जैस ही आरव दरवाजे तक आता तभी उसे परी की आवाज आती है , जिससे परी की बाते सुन आरव वही रुक जाता है और उनकी सारी बात सुन कर....


आरव गुस्से के साथ उसकी आंख में आंसू आजाता है , तभी आरव सुनता है तीनों कमरे के बाहर निकलने वाले है , आरव तुरंत वहां से हट अपने कमरे में चला जाता है , दूध का आधा ग्लास टेबल में रख बेड में लेट जाता है , इस तरफ रवि , सोनल बाते कर दोनों निकल गए परी के घर से , उनके जाते ही परी दरवाजा बंद करके....


परी – (मन में – हो ले जितना खुश होना है तुझे रवि , तुझे ये झांसा सिर्फ इसीलिए दिया ताकि तुझे पूरा यकीन हो जाए कि मै तेरी हो चुकी हूँ , ताकि तू वो कदम उठाने की कभी न सोच सके जिसने मेरा सब कुछ तबाह कर दिया था एक बार , लेकिन इस बार कुछ ही वक्त में मै तेरा सब कुछ तबाह करवा दूंगी).....


मन में सोचते हुए परी कमरे में जाने लगी तभी उसके मोबाइल में किसी का कॉल आया जिसे देख परी के चेहरे पर मुस्कान आगई....


परी – (फोन उठा के) कैसी हो मा....


ये है शोभा ताई का फोन जो कोलीवाड़ा में रहती है....


शोभा ताई – मै अच्छी हूँ परी बेटा , तुझे ये बताने के लिए फोन किया था , मैने पूरी तैयारी कर ली है सभी लोगों को इक्कठा कर उन्हें समझा दिया है मैने , कल से सोनल चैन की नींद नहीं सो पाएंगी बेटा....


परी – शुक्रिया मा....


शोभा ताई – भला एक बेटी कब से अपनी मां को शुक्रिया कहने लगी , तू बेटी है मेरी हक से बोला कर तू , और बता और क्या कर सकती है तेरे लिए तेरी ये मां....


परी – जब जरूरत होगी फिर ज़रूर बताऊंगी मा , बस अब आप तैयारी करो अगले महीने आरू के जनम दिन में आने....


शोभा ताई – (हस्ते हुए) तू बोले तो अभी से आ जाती हूँ मै , ओर से अगले महीना क्या लगा रखा है , अगले महीने को 6 दिन बचे है....


परी – (मुस्कुरा के) क्यों नहीं मा आपका घर है ये भी जब चाहे तब आप आओ , और माँ अगला भी खत्म होने में अभी 6 दिन बचे है ना इसीलिए अगला महीना बोल रही हूँ....



बोल के दोनों हंसने लगे कुछ देर बात करने के बाद दोनों ने फोन काट दिया , तब परी कमरे में चली गई जहां आरव सो रहा था दूसरी तरफ मू करके , जैसे ही परी बेड में बैठी उसने देखा दूध का ग्लास आधा है तब....


परी – (मुस्कुरा के) ये भी न आधा दूध पी के सो गया....


बोल के परी उसी दूध को पीती है तभी....


परी – (दूध बीच में छोड़ के) अरे इसमें तो शक्कर नहीं डाली मैने (मुस्कुरा के) तभी आरू ने आधा दूध पिया होगा....


बोल परी दूध पूरा पी के लेट जाती है आरव के बगल में और उसके सिर में हाथ फेरते सो जाती है , लेकिन इस तरफ आरव सो नहीं रहा था वो जाग रहा था अपनी आंखें खोले जिसमें इस वक्त आसू बह रहे थे....


आरव – (अपने मन में – आप गलत थी अक्कू दीदी , मोम वैसी नहीं जैसा हम सब सोचते है , वो इतना कुछ सिर्फ इसीलिए कर रही है , ताकि अपने यार के साथ अपनी जिंदगी बिता सके बिना किसी दिक्कत के , आज अगर मै उनकी सारी बात न सुनता तो कभी सच नहीं जान पाता , लेकिन अब नहीं मोम तुम्हे जो करना था कर लिया अब मेरी बारी है , तुम मुझे समझा बुझा तैयार करना चाहती हो ना , ताकि मुझे साथ लेके अपने उस यार , रवि के साथ जिंदगी बिताने का जो सपना देख रही हो ना तुम , मै उसे कभी पूरा नहीं होने दूंगा बर्बाद कर दूंगा मै वो सब कुछ , अक्कू दीदी ने मुझे रोहित भईया से हैकिंग सीखने को बोला है न , मै कल ही रोहित भईया से बात करूंगा सीखूंगा हैकिंग उसके बाद शुरू होगा सिर्फ बर्बादी का खेल , सोनल , रवि और साथ में परी तीनों को बर्बाद कर दूंगा मै , और शुरुआत होगी रवि मेहता से इसकी).....


मन में सोच अपने आंसू पोछ के सो गया आरव , ये पहली बार था जब आरव ने मन में परी को आप की जगह तुम कहा , जबकि इन सब बातों से अंजान परी बगल में सो रही थी उसे नहीं पता था कि उनकी बातों के बीच आरव उसी कमरे के बाहर खड़ा सब कुछ सुन रहा था , और आज उसकी नजरों में परी गिर चुकी थी पूरी तरह से , शायद इस बार अच्छा होता अगर परी सोनल की बात मान दूध में नींद की गोली डाल के आरव को दे देती...


भले आज जो किया परी ने वही करती कम से कम जो पहले हुआ वो न होता और न ही आरव की नजरों में गिरती , बेचारी परी सब कुछ ठीक करने में लगी हुई थी सिर्फ आरव के खातिर , लेकिन इस बीच परी की किस्मत ने उसे धोखा दे दिया , क्योंकि आरव ने परी की बाते सुन उसे सच मान लिया , जिन बातों से परी सिर्फ रवि और सोनल को अपने जाल में फंसाने के लिए कर रही थी उनसे , अब ना जाने इससे परी की जिंदगी में क्या असर पड़ने वाला है , और ना जाने आरव क्या करेगा रवि , सोनल और परी के साथ....


खेर इस तरफ जब सोनल और रवि निकल थे परी के घर से तब रस्ते में....


रवि – (सोनल से) क्या यार तुमने तो पूरा मूड खराब कर दिया मेरा , आज मूड बना के आया था मै सोचा परी के साथ मजा करूंगा , लेकिन तुमने तो....


सोनल – (बीच में) अच्छा हुआ जो मैने सही वक्त पर बात को सम्भल लिया वर्ना आज परी का विश्वास उठ जाता और दोस्ती टूट जाती वो अलग....


रवि – क्या मतलब है तुम्हारा....


सोनल – नींद की गोली लेके गई थी परी के पास ताकि उसका सपोला नींद की गोली खाके सो जाए और तू मजा कर सके परी के साथ , लेकिन उल्टा वो परी मुझे अच्छाई का पाठ पढ़ाने लगी , ये गलत है तू मेरे हाथों मेरे बेटे को नींद की गोली नहीं जहर दिलवा रही है , तू भी एक मा है तू भी ऐसा करेगी अपने बच्चों के साथ...


उसकी बेकार की बाते सुन मै समझ गई थी , अगर मैने ज्यादा जोर दिया तो दिक्कत हो सकती है हमारे लिए इसीलिए उसे दिखाने के लिए मैने नींद की गोली डस्टबिन मे फ़ेक दी थी , लेकिन जो हुआ अच्छा हुआ , कम से कम प्लान हमारा सक्सेस होने वाला है रवि , क्योंकि परी आगे बढ़ने को तैयार बैठी है बस किसी तरह अपने सपोले (आरव) को काबू में कर ले परी एक बार उसके बाद परी के साथ उसकी जायदाद और साथ में आरव की सारा पैसा तुम्हे मिल जाएगा....


रवि – चलो कोई बात नहीं तुमने सही वक्त पर सही चाल चल दी परी के सामने वर्ना दिक्कत हो सकती थी , लेकिन साथ में परी का डिसीज़न भी पता चल गया हमें , बस जल्दी से परी और सारी प्रॉपर्टी मिल जाए तो मै बिजनेस को और आगे ले जाऊगा बिना किसी रोक टोक के....


सोनल – लेकिन रवि अब एक बात अच्छे से ध्यान रखना तुम , अब से परी को बिना वजह फोन कॉल मत करना जब बहुत जरूरी काम हो तब , जितना ज्यादा वक्त परी को मिलेगा अच्छा रहेगा हमारे लिए , उतने वक्त में परी अपने सपोले को अच्छे से काबू मे कर लेगी....


रवि – वैसे यार परी और मेरे बीच उसका सपोला कही दिक्कत तो नहीं करेगा आगे चल के....


सोनल – (गुस्से में) सच कहूं रवि अगर आरव , परी का बेटा नहीं होता तो उसे उसी दिन खत्म करवा देती , जिस दिन उसने मेरे बेटे पर हाथ छोड़ा था , हरामजादे की हिम्मत देखो अनुज पर हाथ उठाने के बाद भी कैसे प्रिंसिपल के सामने अकड़ के खड़ा था....


रवि – मजबूरी मेरी भी है यार सोनल इसीलिए कुछ नहीं कर रहा हूँ मै , 200 करोड़ की प्रॉपर्टी नाम है आरव के , वर्ना सबसे बड़ा काटा तो आरव बना हुआ है मेरे और परी के बीच में , मुझे समझ नहीं आ रहा परी का मेरे घर आने के बाद क्या करूंगा आरव और कैसे , क्योंकि परी कुछ करने नहीं देगी मुझे आरव के अगेंस्ट....


सोनल – (मुस्कुरा के) उसकी चिंता तुम मत करो रवि एक बार प्रॉपर्टी मिल जाए तुम्हे उसके बाद मै ऐसी चाल चलूंगी जिससे परी खुद आरव को हॉस्टल में डाल देगी उसके बाद तुम घर में जो चाहे वो करना परी के साथ और पीठ पीछे आरव को हटा देना हमेशा के लिए रास्ते से , सपने में भी परी कभी जान नहीं पाएगी , किसने क्या किया उसके सपोले के साथ....


रवि – (हस्ते हुए) मानना पड़ेगा तुझे सोनल तू सच में बहुत चालाक है....


सोनल – (हस्त हुए) चालाक नहीं रवि शातिर वकील हूँ मै , आरव जैसों को हर रोज चक्कर कटवाती रहती हूँ कोर्ट के.....


बोल के दोनों हंसने लगे , खेर बेचारों को क्या पता उनके साथ कौन खेल रहा है , और अब तो एक और खिलाड़ी शामिल हो गया है इसमें , जो रवि और सोनल के साथ परी के लिए भी तैयारी करने वाला है....


अब चलते है साहिल की तरफ जहां रेस्टोरेंट बंद होने जा रहा था तब सभी वेट्स आज की टिप का आधा हिस्सा मैनेजर को देके घर जा रहे थे तभी....


साहिल – (बाकी पैसों के साथ 100 का आधा नोट देख के) ये आधा नोट किसने दिया होगा मुझे....


कमल – (साहिल के हाथ 100 का आधा नोट देख) अबे ये किसने थमा दिया तुझे....


साहिल – पता नहीं यार , पैसे तो पूरे है मेरे पास , न जाने कहा से आगया ये 100 का पुराना नोट वो भी आधा....


कमल – जाने दे पैसे पूरे है ना तेरे पास , चल के मैनेजर को दे के निकलते है यार....


कुछ समय बाद दोनों घर की तरफ निकल जाते है तब रस्ते में साहिल आज कॉलेज में जो हुआ सब बताता है बात कमल को जिसे सुन के....


कमल – (चौक के) मतलब अपने कॉलेज में इतना कुछ चल रहा है और किसी को पता तक नहीं.....


साहिल – हा यार जाने कैसे मेंटेन करते है ये लोग (तभी साहिल को एक बात याद आती है तब) अरे हा याद आया वो 100 का आधा नोट उस प्रदीप का है....


कमल – उसका कैसे मतलब....


साहिल – अबे आज उसी ने पैसे जमीन में फेंके थे टिप वाले , उसे उठाया था मैने तभी प्रदीप की जेब से गिरा होगा ये नोट....


कमल – लेकिन साला उस MLA के लड़के को आधे नोट रखने की क्या जरूरत आन पड़ी....


साहिल – भाड़ में जाए यार अपने को क्या करना है , कल दे दूंगा उसे वापस....


घर मे आते ही सब हॉल में बैठे मिले तब....


सुनीता – (दोनों को देख) आगए दोनों चलो जल्दी से हाथ मू धोके आजाओ खाना लगाते है हम जब तक....


थोड़ी देर बाद दोनों खाना खाने लगे थे तब....


कमल – (सब से) आप सब इतनी देर तक क्यों जाग रहे हो आराम करते सब लोग.....


सुमन – तुझे क्यों दिक्कत हो रही है , जब हमे कोई दिक्कत नहीं....


सुनीता – सही कहा दीदी , जब घर के बच्चे काम कर रहे हो तो हम आराम कैसे करे....


लता – खाना कैसा बना है साहिल....


साहिल – अच्छा बना है , वो दादी कब आयेगी....


सुमन – तीन दिन तो लग जाएंगे माजी को आने में....


साहिल – हम्ममम....


खुशी – (साहिल से) आपका काम कैसा चल रहा है रेस्टोरेंट में....


साहिल – (एक पल खुशी को देख के) ठीक है....


कविता – (साहिल से) आज कॉलेज में प्रोजेक्ट मिला था सबको , हम सब ने पूरा कर दिया है....


साहिल – (बीच में ही) हा पता है मै कर लूंगा.....


पायल – जरूरत नहीं हमलोगो ने कर लिया है तेरा भी , बस तुझे बता रहे थे....


साहिल – मै खुद कर सकता हूँ , मुझे जरूरत नहीं किसी की मदद की....


शबनम – (मुस्कुरा के) हम मदद नहीं सिर्फ साथ दे रहे है....


सुनंदा – अच्छी बात है , इस बहाने साहिल को मै समझा दूंगी प्रोजेक्ट के बारे में साथ में , किसी सब्जेक्ट में दिक्कत होगी वो भी देख लूंगी मै , (साहिल से) खाना खालो फिर आज से हर रोज एक घंटा मै पढ़ाऊंगी तुम्हे....


इन सब बातों के बीच साहिल चाह के भी कुछ बोल न सका , क्योंकि वो भी जानता था काम के साथ पढ़ाई पर भी उसे ध्यान देना है , कुछ समय बाद कमरे में आते ही साहिल किताबें निकाल देख रहा था तभी सुमन दूध लेके साहिल के पास आई....


सुमन – (साहिल से) दूध पीलेना साहिल....


साहिल – ये हर रोज मेरे लिए स्पेशली बार बार दूध लानें की जरूरत नहीं है मुझे जरूरत होगी मै खुद मांग लूंगा.....


सुमन – तो कब मांगोगे तुम.....


साहिल – जब जरूरत होगी....


सुमन – और कब जरूरत होगी....


साहिल – (सुमन की बात सुन उसे देखने लगा तब) चाहती क्या है आप....


सुमन – तुमसे बात करना....


साहिल – वो तो कर ही रही हो आप....


सुमन – (मुस्कुरा के) चलो कोई बात नहीं , (किताबें देख के) अच्छा बताओ क्या पड़ रहे हो , मै मदद करती हूँ....


साहिल – मै खुद कर लूंगा....


सुमन – क्यों मै नहीं कर सकती हूँ क्या , मैने भी पढ़ाई की है BCOM complete किया है मैने...


साहिल – (सुमन को देख के) अच्छा तो पड़ी लिखी हो आप मतलब.....


सुमन – हा बिल्कुल....


साहिल – तो पड़ लिखे कब से अंधविश्वास में विश्वास करने लगे है....


साहिल की बात सुन सुमन एक टक देखने लगी साहिल को तब....


साहिल – मुझे आपकी तरह पढ़ना नहीं है , क्या फायदा आपकी तरह पड़ने का , कही मै भी अंधविश्वासी न बन जाऊं....


सुमन – साहिल मै बस तुमसे बात करना चाहती हूँ , मै नहीं चाहती तुम अकेले में खुद से बात करते रहो बस....


साहिल – इन सब के लिए बहुत देर कर दी आपने , आप जाए और मुझे पढ़ाई करने दे....


सुमन – (मुस्कुरा के) दूध पी लेना तुम , और रही बात की तो मै रोज करूगी तुमसे....


इसके आगे सुमन बिन कुछ बोले चली गई , उसके जाने के बाद साहिल बाथरूम जाने लगा जैसे हो दरवाजा खोला सामने सुनंदा को पाया तब...




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सुनंदा – (अपने सीने और नीचे हाथ रखते हुए) मै हूँ बाथरूम में साहिल....


साहिल – (सामने सुनंदा को बिना कपड़ो के देख हैरान होके) Sorry मुझे पता नहीं था....


बोल के दरवाजा बंद कर बेड में बैठ गया , इधर सुनंदा , साहिल का इस तरह से आने से मुस्कुरा के नाइटी पहन रही थी तब....


सेमेंथा – (मुस्कुरा के) साहिल का चेहरा देखने लायक था....


सुनंदा – (मुस्कुरा के) तुझे बड़ा मजा आ रहा है....


सेमेंथा – हा साहिल को देख कर , कैसा मू हो गया था उसका , देखने लायक था....


सुनंदा – (मुस्कुरा के) अब तू जा बाकी मुझे संभालने दे....


मुस्कुराते हुए सेमेंथा गायब हो गई वहां से , जबकि इधर बेड में....


साहिल – (मन में – अरे यार ये मैं क्या कर दिया मैने , जाने क्या सोच रही होगी सुनंदा जी मेरे बारे में , लेकिन क्या तो मस्त बॉडी है सुनंदा जी की , कितना मेंटेन करके रखा खुद को , ये क्या सोच रहा हूँ मैं , गलत है ये , लेकिन कुछ भी कहो पूरी माल लगती है सुनंदा जी , काश मैं भी नहा लेता उनके साथ तो पूरा मजा लेता सुनंदा जी का , अरे यार ये बार बार उल्टे ख्याल क्यों आरहे है मेरे मन में सुनंद जी के लिए , क्या सुनंदा जी लगा रखा है मैने यार , उनकी उम्र ही कितनी होगी अभी ज्यादा से ज्यादा सात , आठ साल का फर्क होगा बस और वैसे भी अकेली है वो कौन है उनका दुनिया में , ज्यादा मत सोच साहिल दाव मार ले सुनंदा पे , ज्यादा शरीफ बन के रहेगा तो जिन्दगी का मजा कैस ले पाएगा)....


अपना सिर इधर उधर झटक के....


साहिल – (अपने आप से) बस करो यार कितना बोलते जाओगे....


सुनंदा – क्या हुआ साहिल किस्से बात कर रहे हो तुम....


सुनंदा का चेहरा अचानक से सामने देख के....


साहिल – (हैरान होके) आप कब आई बाहर....


सुनंदा – पांच मिनट हो गए बाहर आए बाथरूम से , तब से तुम्हे बुला रही हूँ तुम्हारा ध्यान किधर है साहिल , और क्या बोल रहे थे अभी तुम....


साहिल – (कुछ ना समझते हुए बिना सुनंदा को देखे) अ...ब...म...मै...मै बाथरूम होके आता हूं....


बोल के साहिल तुरंत बाथरूम में भाग गया उसके जाते ही , जोर से हंसने की आवाज आई सुनंदा को , पलट के देखा सामने सेमेंथा हस रही थी उसे देख के....


सुनंदा – (मुस्कुरा के) तुमने कुछ किया साहिल के साथ....


सेमेंथा – (हस्ते हुए) मै सिर्फ साहिल के मन में चल रही बातों से छेड़ छाड़ कर रही थी मा....


सुनंदा – कैसी छेड़खानी कर रही थी तुम....


फिर हस्ते हुए सेमेंथा सारी बात बताती है सुनंदा को जिसे सुन के....


सुनंदा – (मुस्कुरा के) तू बहुत शरारती हो गई है सेमेंथा , ऐसा भी करते है क्या....


सेमेंथा – तो क्या करू मा जब देखो नाराजगी से बाते करता है सबसे बुद्धू कही का , जाने कब समझेगा , इसीलिए आज मैने कॉलेज में और अभी ये किया , ताकि साहिल का मन दूसरी बातों में जाए....


सुनंदा – हम्मम अच्छा किया तूने , अब ऐसा कर जब तुझे सही लगे ऐसे ही करना साहिल के साथ , लेकिन जरूरत वाली जगह पर , हर वक्त मस्ती अच्छी नहीं होती समझी....


सेमेंथा – जी मा , लेकिन एक बात तो है , साहिल के दिल में आपके लिए कुछ तो बाते डालने में कामयाब रही मै , और अब तो उसकी नजरे पक्का बदली बदली दिखने वाली है आपको , खुद के लिए....


बोल के दोनों मुस्कुराने लगे , तो ये थी सेमेंथा जिसने आज क्लास मेभी यही किया था साहिल के साथ , तभी बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई तब सुनंदा ने तुरन्त सेमेंथा को जाने का इशारा किया जिसे समझ सेमेंथा वहां से तुरंत गायब हो गई तब....


साहिल – (बाथरूम से बाहर आते ही) Sorry सुनंद जी वो मै गलती से....


बोल के साहिल गौर से देखने लगा सुनंद को जो कुछ ऐसी दिख रही थी....




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सुनंदा को देखने में इतना खोया था साहिल ये देख सुनंदा , साहिल को मुस्कुराते हुए देख रही थी तब....


सुनंदा – (मुस्कुराते हुए) कैसा लग रहा है तुम्हे साहिल अच्छा है ना....


साहिल – (सुनंदा के शरीर को देखते हुए) बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है....


सुनंदा – इसमें सबसे ज्यादा क्या अच्छा लग रहा है तुम्हे....


साहिल – (सुनंदा की बात सुन होश में आके) क्या क्या क्या कहा आपने....


सुनंदा – (बात को बदल मुस्कुरा के) मैने पूछा कॉलेज में क्या अच्छा लग रहा है तुम्हे....


साहिल – (हड़बड़ा के) क्या कॉलेज , हा...हा कॉलेज में तो सब कुछ अच्छा है....


सुनंदा – (मुस्कुरा के) और कोई खास जो कॉलेज में अच्छा लगा हो तुम्हे....


साहिल – (मुस्कुरा के) खास तो मेरी जिंदगी में सिर्फ दो है एक मेरी....


सुनंदा – (मुस्कुरा के बीच में) दादी और कमल , ये जानती हूँ मै , इसके इलावा कोई और....


साहिल – इसके इलावा एक है जिससे मै हाल ही में मिला था गांव में , बहुत खूबसूरत है वो , दिल की बिल्कुल साफ , उसकी आंखों में सिर्फ बेपनाह प्यार है....


सुनंदा – किसके लिए प्यार....


सुनंदा की बात सुन साहिल हल्का मुस्कुरा के शर्माने लगा जिसे देख....


सुनंदा – वैसे प्यार तो यहां पर भी कई लोग करते है तुम्हे , क्या तुमने कभी देखा उनकी आंखों में उस प्यार को अपने लिए....


साहिल – (मुस्कुरा के) प्यार और उनकी आंखों में....


सुनंदा – हस क्यों रहे हो तुम....


साहिल – वो इसीलिए सुनंदा जी , उनकी आंखों में मेरे लिए कोई प्यार नहीं बल्कि , एक हमदर्दी है , वो भी सिर्फ इसीलिए क्योंकि गांव में जब मुझे अटैक आया था उस वक्त इन सभी ने देखी थी मेरी वो हालत और तभी ये सब जान पाए थे कि मैने अपने दादा जी को नहीं मारा , यही एक वजह है जिस वजह से इन सबको मुझे इतनी हमदर्दी होने लगी है , इसीलिए मुझे यहां लेआए है , वर्ना आप खुद सोचिए अगर इन्हें अभी भी न पता चलता सच का तो क्या मै यहां होता , कभी नहीं , बल्कि आज भी ये सब मुझे याद करके गालिया देरहे होते , सुनंदा जी इन्हें मुझसे सिर्फ हमदर्दी है जिसे ये लोग प्यार का नाम देने पर तुले हुए है.....


सुनंदा – हम्मम मानती हूँ गलती की है उन्होंने , तो क्या तुम इनकी गलती को सुधारने का एक मौका नहीं दोगे इन्हें....


साहिल – इनकी की हुई गलती को पिछले 10 साल से भुगत रहा हूँ मै , अकेले रह के , माथे पर अपने दादा की मौत के कलंक के साथ , बिना परिवार के जी रहा हूँ मै इस जिंदगी को , और आपको लगता है इन्हें एक मौका मिलना चाहिए , चलिए अगर मौक देभी दूं इन्हें फिर भी क्या फायदा इस बात का , मै इनसे वो प्यार शायद कभी नहीं कर पाऊंगा....


साहिल की बाते सुन सुनंदा मुस्कुराने लगी जिसे देख....


साहिल – आप मुस्कुरा क्यों रही है....


सुनंदा – (मुस्कुराते हुए) तुम्हे DEVIL की एक आदत बताऊं....


साहिल – DEVIL की आदत , क्या मतलब इसका....


सुनंदा – वैसे DEVIL की कई खासियत होती है साहिल , जब वो किसी से नफरत करते है तो बेइंतिहा करते है , प्यार करते है तो बेइंतहा करते है , तुम्हारी आदत भी वैसी है , प्यार भी है और नफरत भी दोनों बेइंतेहा है तुममें , जब तक तुम नफरत से साथ रहोगे यहां सबके साथ सिवाए नफरत के कुछ नहीं करोगे , लेकिन प्यार के साथ रहोगे तभी प्यार कर पाओगे सबसे....


कुछ देर चुप रहने के बाद....


सुनंदा – (साहिल से) एक बात बताओ साहिल अगर तुम्हारे दिल में इतनी नफरत है फिर तुम यहां आए ही क्यों , कही किसी से बदला लेने तो नहीं आए हो तुम यहां पर....


साहिल – आपको ऐसा क्यों लगता है....


सुनंदा – तुम्हारे साथ इतना कुछ हुआ किसी के साथ होता तो वो शायद कभी न आए उस घर में , लेकिन तुम आगए , इस घर में आने की वजह सिर्फ दादी नहीं हो सकती है , तब सिर्फ एक ही बात बचती है बदला , अब सवाल ये है किस्से बदला ले रहे हो तुम....


साहिल – (झूठ बोलते हुए) मै बदला लेने नहीं आया हूं यहां पर किसी से , सिर्फ अपनी दादी के कारण आया हूँ घर में.....


सुनंदा – (मुस्कुरा के) तुम झूठ अच्छा बोल लेते हो , कोई जान ना पाए कुछ इस तरह से , ठीक है मत बताओ तुम , लेकिन एक बात जरूर बोलूंगी अगर बदला लेना हो दुश्मन से , तो सबसे पहले उसके करीबियों को अपने करीब करना होगा तुम्हे , इतना ज्यादा करीब करने के लिए तुम्हे सारी मर्यादा को लांघना पड़े तो कर देना , लेकिन सिर्फ प्यार से करना होगा तुम्हे ये सब , क्योंकि प्यार ही वो हथियार होगा जो उन्हें तुम्हारे करीब लायेगा , और वक्त आने पर वही लोग तुम्हारी ढाल बन जायेगे जिससे तुम्हारा दुश्मन इतना बेबस हो जाएगा के चाह के भी कुछ नहीं कर पाएगा तुम्हारा.....


सुनंदा की कही बातों को गौर से सुनता रहा साहिल , और कही न कही साहिल को सुनंदा की बात सही लग रही थी , ये बात सुनंदा को समझते देर न लगी कि साहिल उसकी कही बातों को समझ रहा है तब....


सुनंदा – अगर तुम चाहो तो मै मदद कर सकती हूँ तुम्हारी....


साहिल – मदद कैसी मदद....


सुनंदा – तुम्हारा बदला लेने में....


साहिल – नहीं मुझे कोई मदद नहीं चाहिए , मै कोई बदला लेने नहीं आया किसी से , और क्या करूंगा ये सब करके , मेरे मन में कुछ नहीं है उनके लिए , मै सो रहा हूँ कल कॉलेज भी जाना है....


बोल के साहिल बेड में लेट गया दूसरी तरफ मू करके....


सुनंदा – (मुस्कुरा के मन में – जानती हूँ तुझे मदद की जरूरत नहीं है , तुझे सिर्फ सही दिशा की जरूरत थी तभी तू अपने मकसद में जल्दी कामयाब होगा , और कल से कुछ नए बदलाव आने वाले है तेरे जिंदगी में , क्योंकि किसी और को तेरी , और उसे भी तेरी जरूरत पड़ने वाली है....
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जारी रहेगा ✍️ ✍️
Superb fantastic fabulous update
 
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