Office and Stressful life
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To akhir chod hi diya apni Tai ko uske munna ne pr lagta hai pahli chudai ki khumari me kuchh jyada hi utavle pan ko darsa diya tai ke samne... Sandar hot update bhai jabarjastअपडेट १३
कुछ देर बाद ताईजी ब्लाउज और पेटीकोट में कमरे के अंदर दाखिल हुई, मैंने ध्यान से देखा तो पता चला कि ताईजी ने ब्लाउज के अंदर से ब्रा नहीं पहना था क्योंकि उनकी बड़ी बड़ी चुचियों की कड़क भूरे रंग की घुंडिया ब्लाउज के ऊपर से साफ दिखाई पड़ रही थी, फिर ताईजी धीरे से बिस्तर पर करवट लेकर लेट गई तभी मेरी नजर उनकी भारी गांड पर पड़ती है तो मैं दंग रह जाता हूं ताईजी ने पेटीकोट के अंदर पैंटी तक नहीं पहनी थी क्योंकि पेटीकोट के ऊपर से उनकी चर्बीदार गांड दिखाई पड़ रही थी अगर उन्होंने पैंटी पहनी होती तो पैंटी का आकार नजर आता जो नजर नहीं आ रहा था मतलब उनकी गांड पैंटी में कैद नहीं थी।
कुछ देर तक मैं ऐसे ही ताईजी की गांड को घूरता रहा और धोती के ऊपर से लन्ड पकड़कर मुठ मारने लगा और मुझे पता नहीं कब नींद आ गई, फिर थोड़ी देर के बाद अचानक मेरी नींद खुलती है तो मैं देखता हू ताईजी मेरी तरफ करवट लेकर सोई हुई थी और उनका पेटीकोट ऊपर तक उठा हुआ था उनकी फूली हुई चिकनी चूत नजर आ रही थी मस्त गुलाबी चूत थी और ऊपर से उनके ब्लाउज के बटन खुले हुए थे जिसमे से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया काफी ज्यादा बाहर निकली हुई थीं, मैंने थोड़ा आगे बढ़कर ताईजी के बूब्स को हाथों में पकड़कर सहलाने लगा, फिर मैंने उनके मोटे मोटे बूब्स को ब्लाउज से बाहर निकाल लिया और मुंह में भरकर चूसने लगा, ५ मिनट तक मैं ऐसे ही उनके चूचियों को चूसता रहा और सहलाता रहा, फिर मैंने अपने लन्ड को धोती से बाहर निकालकर पकड़ लिया, मेरा लन्ड तन कर खड़ा हो गया था और मैं मुठ मारने लगा।
तभी अचानक मेरी आंख खुल गई "अरे ये क्या मैं सपना देख रहा था" ऐसा मैंने मन में खुद से कहा, लेकिन तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरे हाथ किसी नरम और मुलायम चीज़ पर थे मैने देखा कि सच में मेरे साथ ताईजी की बड़ी बड़ी मुलायम चूचियों पर थे, मैने हल्का सा ऊपर देखा तो मेरी गांड में धमाका हो गया मैंने देखा कि ताईजी की आंखें खुली हुई थीं और वह मुझे देख रही थीं मेरे हाथ उनकी चूचियों पर थे और मैंने महसूस किया कि कोई मेरे लन्ड को पकड़कर सहला रहा है मेरा लन्ड धोती के बाहर तनकर खड़ा था और ताईजी के हाथ में था ताईजी मेरे लन्ड को अपनी मुठ्ठी में भरकर आगे पीछे कर रही थी हमारी नजरें एक दूसरे से टकरा गई थीं लेकिन न तो मैने अपने हाथों से ताईजी की चूचियों को मसलना बंद किया न ही ताईजी में मेरे लन्ड को सहलाना बंद किया, न ताईजी कुछ बोल रही थी और न ही मैं।
मेरे पास सुनहरा मौका था और इस मौके को मैं किसी भी कीमत पर हाथ से जाने नही देना चाहता था इसलिए मैंने थोड़ा हिम्मत दिखाई और आगे बढ़कर ताईजी की चूचियों को मुंह में भरकर चूसने लगा और ताईजी भी मेरे लन्ड को अपनी मुठ्ठी में भरकर सहला रही थी मेरे लन्ड की मोटाई ताईजी के कलाई जितनी थी जो बड़ी मुश्किल से उनकी मुठ्ठी में आ रहा था, कुछ देर उनकी रसीली चूचियों का रस निचोड़ने के बाद मैने ताईजी की आंखों में देखा तो हम दोनों की नजरें मिली और मैंने हल्के से ताईजी के होंठों को चूम लिया फिर एक के बाद एक २०–२२ चुम्मियां हल्के से उनके होंठों पर जड़ दिया ताईजी ने मेरा थोड़ा सा भी विरोध नहीं किया जिससे मेरी हिम्मत और ज्यादा बढ़ गई और इस बार मैं ताईजी के गुलाबी होंठों को अपने होंठों में जकड़कर चूसने लगा, ये मेरी जिंदगी का पहला चुम्बन था जिसमे सामने वाला भी मुझे रिस्पॉन्स दे रहा था वैसे तो मैं सोती हुई अपनी मां को चूम चुका था लेकिन यहां बात अलग थी यहां ताईजी चुम्बन में मेरा साथ दे रही थी, ताईजी मेरे होंठों को अपने गुलाबी होंठों में कैद करके चूस रही थी और अपनी जीभ को मेरे मुंह के अंदर डालकर हर तरह घुमा रही थी इधर ताईजी का हाथ मेरे लन्ड पर लगातार चल रहा है और उधर मेरे हाथ ताईजी की चूचियों को निचोड़ने में लगे हुए थे।
हम लोग २०–२५ मिनट तक ऐसे ही एक दूसरे को चूमते चूसते और सहलाते रहे फिर मैंने ताईजी के पेटीकोट पर हाथ रखकर ऊपर खिसका के उनकी कमर तक चढ़ा दिया और अपने हाथ को उनकी मंसाल जांघों पर फेरने लगा, फिर धीरे धीरे अपने हाथ को उनकी गुलाबी चूत पर फेरने लगा और हल्के हल्के उनकी चूत को सहलाने लगा और अपनी उंगलियों से उनकी चूत की पंखुड़ियो को कुरेदने लगा तो ताईजी मस्त हो गई और आआआह्ह करके सिसकियां भरने लगी, उसके बाद मैंने एक हाथ से ताईजी के पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उनके जिस्म से अलग करके उनकी चर्बीदार मटके जैसी गांड को नंगा कर दिया और दूसरे हाथ से उनके ब्लाउज का बटन खोलकर उनके कंधे से ऊपर की तरफ खिसका के उनकी बड़ी बड़ी पहाड़ जैसी चूचियों को नंगा कर दिया और फिर ताईजी के ऊपर लेट गया और एक हाथ से उनकी चूत मसलने लगा और दूसरे हाथ से उनकी चूचियां दबाने लगा।
ताईजी की हथेली में मेरा लन्ड कैद था इसलिए ताईजी को और मजा देने के लिए मैंने अपने लन्ड को ताईजी की हथेली से आजाद किया और हल्के हल्के अपने लन्ड को ताइजी की चूत पर रगड़ने लगा, ताईजी ने इशारा करके मुझे ऐसा करने से मना किया लेकिन मैं कहां मानने वाला था मैंने अपनी गांड को हवा में उछालकर हल्के से धक्का मारा और मेरा आधा लन्ड ताइजी की चूत की गहराई में धस गया।
ताईजी चिल्लाई लेकिन मैंने उनके मुंह पर हाथ रख दिया जिसके कारण उनकी आवाज दब गई, ये पहली बार था कि मेरा लन्ड किसी की चूत में गया था मुझे इस वक्त जिंदगी का सबसे हसीन खुशनुमा और प्यारा एहसास हो रहा था ऐसा लग रहा था कि इस वक्त मैं इस दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान हूं, ताईजी की चूत अंदर से बहुत गीली–गीली थी और बहुत ज्यादा नरम और मुलायम भी महसूस हो रही थी ऐसा लग रहा था कि मेरा लन्ड किसी पिघलती हुई आइस क्रीम में डूबा हुआ है लेकिन चूत अंदर से बहुत गर्म भी थी तो इसे लिक्विड हॉट चॉकलेट बोलना बेहतर रहेगा, मैने हल्के हल्के धक्के मारना चालू किया , मुझे मस्ती का एक अजीब एहसास हो रहा था जो आज तक मुठ मारते वक्त भी नही हुआ था, चूत में लन्ड पेलना हजार बार मुठ मारने जैसा लग रहा था, आज मैं सांतवे आसमान पर पहुंच गया था पता नही यहां तक पहुंचने के लिए मैं कबसे ख्वाइश कर रहा था।
मैंने हल्के हल्के अपने लन्ड को ताइजी की रसीली चूत में अंदर बाहर करना चालू किया और इसके साथ मैं ताईजी के गुलाबी होंठों को अपने होंठों में जकड़कर उनका रस चूस रहा था और अपनी जीभ को ताइजी के मुंह के अंदर घुसेड़कर उनके मुंह का मुआइना कर रहा था और मेरे दोनों हाथ बहुत मस्ती से ताईजी के थनों को मसल रहे थे, धीरे धीरे धक्के की गति तेज होने लगी जैसे जैसे मेरी लन्ड की गति ताईजी की चूत में बढ़ रही थी वैसे वैसे मस्ती बढ़ती जा रही थी और अब ताईजी नीचे से अपनी गांड उछालकर मेरे लन्ड को अपनी चूत की गहराइयों में लेने की कोशिश कर रही थी और मेरी पीठ पर हाथ रखकर पागलों की तरह मुझे सहला रही थी। मेरा दिल किया कि थोड़ा ताबड़तोड़ धक्के मारता हूं और फिर मैंने ताईजी की भारी गांड को हवा में उठाकर उनकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया ताकि धक्के की गति और तेज कर सकूं, अब मैंने एक के बाद एक ताबड़तोड़ धक्के लगाने चालू करे और ताईजी के मुंह पर एक हाथ रख दिया ताकि उनकी सिसकियां कमरे से बाहर न निकले, मैं ताईजी की आंखों में देखते हुए उन्हें ठोक रहा था लेकिन ताईजी के मुंह से सिसकियो के अलावा एक शब्द भी नही निकल रहा था।
आआआआह्हह्ह उह्ह्ह्ह्हहह्ह्ह ये हल्की हल्की सिसकियां मेरे शरीर को अंदर तक हिलाकर रख देती थी और मुझे बहुत मस्ती चढ़ने लगती थी, ताईजी की आवाज में एक अजीब सी हलचल होने लगी थी जिसकी वजह से मेरे शरीर में भी अजीब लहर उठने लगी थी ऐसा लग रहा था कि मैं किसी नई दुनिया में पहुंच गया हूं जहां ताईजी के नंगे जिस्म और उनकी मस्ती भरी सिसकियों के अलावा मुझे कुछ दिखाई और सुनाई नही दे रहा था, अचानक ताईजी का जिस्म झटके खाना शुरू कर दिया और उनकी सिसकियां पहले से और ज्यादा तेज और ऊंची हो गई और मैंने अपने हथेली की पकड़ को उनके मुंह पर कस लिया ताकि उनकी सिसकियां दबी रहें। मैं समझ गया था कि ताईजी अब झड़ रही हैं और गांड उछालकर जोरदार झटके मारते हुए ताइजी ने पानी छोड़ दिया, मुझे अपने लन्ड और आंड पर गीला–गीला महसूस होने लगा, करीब ३० सेकंड्स तक ताईजी झड़ती रही,
अब मेरा लन्ड चिकनाहट के साथ और तेज गति से ताईजी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, मैंने ताईजी की गुलाबी चूत के परखच्चे उड़ाकर उसका भोसड़ा बना कर रख दिया था, ताईजी की चूत का रस निकल जाने के बाद उन्होंने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ते हुए रुकने का इशारा किया लेकिन मैं रुकने वाला कहां था बल्कि उल्टा मैंने अपने लन्ड की गति उनके भोसड़े में और तेज कर दिया था, तभी पहली बार ताईजी ने विरोध करते हुए मेरी छाती पर हल्के से धक्का मारा लेकिन मैंने तुरंत उनके कंधों को पकड़ कर कस लिया और बहुत ताबड़तोड़ धक्के मार कर ताईजी को चोदने लगा, ताईजी अपने भारी जिस्म को इधर उधर पटकने लगी, उनकी आंखों में आसूं आने लगे थे लेकिन मेरे लिए यहां तक पहुंचकर रुकना बहुत मुश्किल था मैंने उनके आंसुओं को नजरंदाज कर दिया था।
अब मुझे १०–१२ मिनट हो गए थे ताईजी को ताबड़तोड़ गति से चोदते हुए, इस वक्त मुझे मेरी पहली चूदाई का नशा चढ़ा था मैं इतना डूब गया था उस नशे में कि अपनी ताईजी की आंखों से आने वाले आंसू भी मुझे रोक पाने में असमर्थ थे, ताईजी खुद को इधर उधर पटक रही थी और मुझे अपनी बाहों में कसके जकड़कर मेरी पीठ को अपने नाखूनों से नोचने लगी थी, ताईजी को लग रहा था कि मुझे दर्द होगा और मैं उन्हें छोड़ दूंगा, दर्द तो मुझे हो रहा था लेकिन इस दर्द में भी एक अजीब सा मजा था जिसने मुझे रोकने का नही बल्कि और तेज गति से चोदने का इशारा किया और मैं ताबड़तोड़ तरीके से ताइजी की चूत में अपना काला लन्ड घुसेड़ घुसेड़कर पेलने लगा, ऐसे ही और १०–१२ मिनट झटके ठोकने और ताईजी के तपड़ने के बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं तो मैंने अपने लन्ड के झटकों को ताईजी के भोसड़े में और बेरहम कर दिया और लन्ड का सारा वीर्य चूत में उड़ेल दिया, मुझे अपना वीर्य ताईजी की चूत में गिरता हुआ महसूस हुआ और हल्के हल्के झटकों के साथ मैं कपकपा कर झड़ता रहा और फिर मेरा शरीर बिलकुल ढीला पड़ गया तो मैंने अपना लन्ड ताईजी की चूत से बाहर निकाल लिया और बेसुध होकर पलट के बिस्तर पर लेट गया, मैं अपनी पहली चूदाई से इतना थक गया था कि मुझे पता नही चला कि कब नींद के आगोश में चला गया।
Wah bhai to dudhiya ko thukva kr ragni ko thokne ka plan bnaya hai, Chalo Badhiya hai dekhte hai kaise manage karega apna lalla... Superb update bhai sandarअपडेट १४
सुबह मेरी आंख खुली तो ९ बज चुके थे, मेरा लन्ड अभी तक धोती के बाहर था मैं बहुत डर गया था और शर्मिंदा महसूस कर रहा था, फिर मैं घर के पिछवाड़े में चला गया मूतकर थोड़ा बहुत कसरत किया उसके बाद नहाने चल गया, गुसलखाने से बाहर निकला तो ताईजी रसोईघर में थी, मैं भी रसोई में जाने लगा पर मेरी हिम्मत नही हुई फिर भी मुझे प्यास लगी थी इसलिए मैं रसोई में चला गया और फ्रिज खोलकर पानी पीने लगा जैसे ही मैंने फ्रिज खोला तो ताईजी ने पीछे मुड़कर मेरी तरफ घूरकर देखा और वापस से काम में लग गई, मैं गटागट पानी पिया और बाहर चला गया, मैं आंगन में चारपाई पर बैठ गया। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की अब क्या कर सकता हूं मैं तो ताईजी को प्लान करके चोदना चाहता था लेकिन रात को सब कुछ अचानक हो गया। तभी मुझे रसोईघर में बर्तन गिरने की आवाज आई जो ताईजी ने रसोई में जमीन पर रखा था उन्होंने इतनी तेज आवाज से बर्तन इसलिए रखा था ताकि मुझे पता चल जाए कि खाना लग गया है मैं चुपचाप रसोई से थाली उठा लिया और चटाई पर बैठकर खाने लगा, ताईजी रसोई में ही बैठकर चुपचाप भोजन कर रही थी और बहुत गुस्से में थी मुझसे नजर तक नहीं मिला रही थी।
कुछ देर बाद मैं कोचिंग जाने के लिए तैयार हो गया और तुरंत साइकिल से कोचिंग के लिए निकल गया, चौराहे पर मुझे राज अपनी साइकिल पर इंतजार कर रहा था।
"और भाई आने में बड़ी देर लगा दिया, मैंने अपना काम कर दिया है अब तुझे आगे का काम संभालना है।"
"साले तू तो बड़ा तेज है अब आगे क्या करना है मुझे तो बड़ा डर लग रहा है"
"जो कुछ करना है तुझे करना है बस जैसे मैंने कहा था वैसा करना, जा मां घर पर बहुत परेशान है"
"ठीक है मैं अपनी तरफ से कोशिश करूंगा"
" चल मैं कोचिंग जाता हूं ऑल द बेस्ट"
फिर मैं राज के घर चला गया और घर के अंदर घुस गया, मुझे पता था कि रागिनी काकी तबेले में होंगी इसलिए फिर घर के पिछवाड़े में आ गया जहां छोटा सा तबेला बना था वहां रागिनी काकी गाय को पानी से नहला रही थी उन्होंने बैंगनी रंग की पुरानी साड़ी और ढीला सा ब्लाउज पहना था मेरा दिल किया कि रागिनी काकी को पीछे से दबोच कर चूम लूं लेकिन इस बार मुझे प्लान के अनुसार चलना था नही तो राज के द्वारा बिछाया हुआ जाल बर्बाद हो सकता था।
"अरे बलराम तू ? राज घर पर नही है कोचिंग गया है तू नही गया?" रागिनी काकी पलट कर मुझे देखते हुए बोली
"काकी मैं कोचिंग जा ही रहा था लेकिन मुझे रास्ते में राज मिल गया उसने कहा कि गाय की तबियत ठीक नहीं है और मां बहुत परेशान हो रही है, मुझे जानवरों के बारे में जानकारी थी तो सोचा पहले आपकी मदद कर देता हूं फिर बाद में कोचिंग चला जाऊंगा"
"बेटा अच्छा हुआ तू आ गया , देख ना मेरी गाय बहुत परेशान कर रही है और सुबह से चारा भी नहीं खा रही, देख के बता इसे क्या हुआ है?"
जब से मैं इस गांव में आया था तब से मेरा चैन चुराने वाली और कोई नहीं बल्कि रागिनी काकी ही थी उसका कसा हुआ गठीला बदन पांव के ताल पर थिरकते हुए मोटे मोटे भरे हुए चूतड़ और हिलती हुई बडी बडी चूचियां देख देख कर मैं रागिनी काकी का दीवाना हो गया था कितनी बार मैने चाहा की बस एक बार रागिनी काकी मुझसे ठुकवा ले मगर थोड़ी बहुत नटखट बातों के अलावा कभी बात आगे ही नहीं बढ़ पाई। रागिनी काकी को कस के चोदने की इच्छा तो मुझे बहुत पहले से थी मगर मैं रागिनी काकी के मामले में जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था क्यूंकि आखिर वह मेरे दोस्त राज की माँ जो थी, लेकिन अब राज भी मेरा साथ दे रहा था मैं जानता था आज नहीं तो कल रागिनी मुझे देगी ज़रूर मगर ये वक्त काटना मेरे लिए ज़हर पीने जैसा था।
"देख ना क्या सोच रहा है?"
"क्या काकी?"
"अरे मेरी गाय को देखेगा या नहीं"
"हां देखता हूं" कहकर मैंने गाय के पेट पर हाथ रखा और नौटंकी करते हुए गाय के शरीर पर इधर उधर हाथ फेरने लगा।
"पता नही सुबह से अजीब–अजीब आवाजें कर रही है न कुछ खाती है और न पीती है"
ये राज ने ही किया था क्योंकि गाय के गर्भवती होने का वक्त हो चला था और उसकी वासना जगाने के लिए राज ने कुछ गोलियां खिला दी थीं।
तभी मैं रागिनी काकी को देखकर हंसने लगा।
"क्या बात है मुझे भी बताएगा, मुस्कुराए जा रहा है" रागिनी काकी मुझे घूरती हुई बोली
"काकी इसका समय आ गया है, गांव में कोई सांड है क्या?"
रागिनी काकी मेरी बात सुनकर बुरी तरह शर्मा गई, गांव में बस एक सांड था जो हरिया ने पाल रखा था हरिया का सांड एक काम बड़े ज़ोरदार तरीके से करता था और वो था गांव के गायों को गर्भवती करना, जब भी कोई गाय गरम हो जाती थी तो हरिया का सांड ही उसको अपने नीचे ले के शांत करता था, हरिया को सांड पालने का शौक इसलिए था क्योंकि जब भी गांव की कोई औरत अपनी गाय लेकर आती थी हरिया के सांड से गर्भवती करवाने के लिए तो हरिया को छेड़ने और मस्ती करने का मौका मिल जाता था, ऐसा मुझे राज ने बताया था।
"बताओ काकी गांव में कोई सांड है? नही तो आपकी गाय की तबियत और बिगड़ जाएगी"
रागिनी काकी अब समझ गई थी कि उनकी गाय को क्या हुआ है।
"एक सांड है हरिया का"
"काकी तो चलिए ना नहीं तो आपकी गाय पागल हो जाएगी" मैं अपनी हंसी दबाते हुए बोला
रागिनी काकी अपनी गाय को लेकर मेरे साथ हरिया के घर चल पड़ती हैं।
तभी रेखा मौसी मुझे रास्ते में मिल जाती हैं।
"अरे रेखा मौसी कहां भागे जा रही हो हम तुम्हारे पास ही आ रहे थे"
"बबुआ मैं तो हवेली जा रही थी तू बता क्या काम आ गया"
मैं गाय की तरफ इशारा करते हुए और रेखा मौसी समझ जाती हैं कि क्या बात है।
"जा पीछे तबेले में बंधा है मेरा सांड जा ठुकवा ले इसको"
रागिनी काकी मुंह बंद करके हंसी रोकने की कोशिश करती हैं।
"और ये ले घर की चाभी, कोई चीज की जरूरत पड़े तो निःसंकोच ले लेना।"
"चाभी किसलिए मौसी घर पर कोई नहीं है क्या?" मुस्कुराते हुए
"मेरा मर्द तो हवेली को चौकीदारी कर रहा है, कम्मो तेरे भईया की दुकान पर गई है और मालती सुबह से हवेली में काम कर रही है, मैं भी हवेली जा रही हूं किसी महत्वपूर्ण काम से मालकिन ने आने के लिए कहा है।"
रेखा मौसी की बात सुनकर मैं खुश हो गया।
"चलो काकी ठुकवा लो अपनी गाय को" मुस्कुराते हुए
रागिनी काकी शर्मा जाता है और कुछ देर बाद हम रेखा मौसी के घर पहुंच जाते हैं, हरिया का सांड घर के पिछवाड़े में खूंटे से बंधा हुआ था।
"काकी इस सांड का नाम क्या है?"
"भूरा"
"और आपकी गाय का नाम?"
"दुधिया"
दुधिया को देखते ही भूरा ने अपना बड़ा सा लाल लाल लन्ड बाहर निकाल देता है और दुधिया को सूंघने लगता है।
Nice updateअपडेट १२
"ऐसे क्या देख रहा है लल्ला?" ताईजी मुझे घूरते हुए देख कर बोली
मैं ताईजी को ऊपर से नीचे तक देखते हुए "ताईजी आज कहर ढहाने का इरादा है क्या?"
"चल झूठे, इस बूढ़ी घोड़ी में क्या रखा है तुझे तो जवान और मस्तानी घोड़ियां पसंद होंगी" ताईजी ने मुझे ताना सा मारा और घर के बाहर चली गई
थोड़ी देर बाद पीहू दीदी भी घर के पिछवाड़े से निकलकर बाहर आ गई और फिर ताईजी ने घर के फाटक पर ताला मारा और चाबी के झल्ले को कमर में ठूंस लिया। पीहू दीदी थोड़ा आगे चली गई थी और मैं ताईजी के साथ पीछे पीछे चल रहा था, सड़क पर बहुत कीचड़ हो रहा था शायद किसी के खेत का पानी सड़क पर आ गया था।
"ताईजी सड़क पर बहुत कीचड़ है आप मेरा हाथ पकड़ कर चलिए" कहकर मैंने तपाक से ताइजी का हाथ पकड़ लिया
"लल्ला कोई देखेगा तो क्या कहेगा रे" ताईजी झल्लाती हुई बोली
"जो कहेगा सो कहे मगर आप कीचड़ में फिसल कर गिर गई तो कोई न कोई हंसेगा जरूर"
"हां लल्ला और फिर साड़ी भी तो गंदी हो जाएगी" कहकर ताईजी ने मेरे हाथ को अपने हाथ में जकड़ कर पकड़ लिया।
ताइजी की नरम और गुदाज चूचियां मेरे बाजुओं से रगड़ रहे थे मुझे बहुत मजा आने लगा था इसलिए मैं जानबूझकर अपने बाजुओं को ताईजी की चूचियों पर गड़ा रहा था, फिर ऐसे ही थोड़ी देर बाद हम लालू के ढाबे पर पहुंच गए।
लालू का ढाबा बाजार से थोड़ा पास पड़ता था और गांव के लोग यहां खाने पीने के लिए आते थे, कोई बहुत शानदार ढाबा तो नहीं था लेकिन गांव के लोगों के लिए यह ढाबा किसी ५ स्टार होटल के कम भी नहीं था, मैं पीहू दीदी और ताईजी जगह देखकर कुर्सियों पर बैठ गए और भीमा भईया और शीला भाभी का इंतजार करने लगे।
"खाना क्या ऑर्डर करना है ताईजी"
"लल्ला मेरे लिए पुलाव और कढ़ी पकौड़े ऑर्डर कर देना।"
"और मेरे लिए चाउमीन और मंचूरियन" पीहू दीदी बोली
"मैं तो रूमाली रोटी के साथ पनीर खाऊंगा"
"क्या ऑर्डर किया जा रहा है देवर जी" शीला भाभी पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रखते हुई बोली
"अरे आप दोनों भी आ गए" मैं पलटकर भईया और भाभी को देखते हुए बोला
फिर भीमा भईया और भाभी अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठ गए।
"आपको क्या खाना है जो आप खाओगे मैं भी वही खाऊंगी" शीला भाभी भीमा भईया से बोली
"शीला मुझे तो आज बटर चिकन खाना है" भीमा भईया ताईजी की तरफ देखते हुए थोड़ा हिचकिचाते हुए बोले
ताईजी कुछ बोली नहीं पर उनकी खामोशी ने भीमा भईया को मंजूरी दे दी थी।
"आओ देवर जी खाना ऑर्डर करने चलते हैं।"
मैं उठकर शीला भाभी के साथ चल दिया, उन्होंने आज लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी और श्रृंगार भी किया हुआ था आंखों में काजल, माथे पर बिंदी, होंठों पर लिपस्टिक और कलाइयों में चूड़ियां देखने में संस्कारी ग्रहणी लग रही थी। ताईजी की तुलना में शीला भाभी का जिस्म ढका हुआ था लेकिन फिर भी किसी भी मर्द को आकर्षित करने के लिए काफी था और मैंने नोटिस किया कि आस पास के लोग भाभी को हवस की नजर से घूर रहे थे।
"देवर जी कहां खोए हो क्या सोच रहे हो?"
"कुछ नहीं"
"देवर जी मैं तो आपको बड़ा भोला समझती थी मुझे पता नहीं था कि आप इतने शैतान हो"
"मैंने क्या किया भाभी?"
"ये पूछो क्या नहीं किया, ऐसी फिल्म की टिकट कौन खरीदता है फिल्म का नाम क्या था "पेटीकोट में धमाका" हिहिहिही"
"अरे भाभी गांव के सिनेमा घर में ऐसी ही फिल्म लगती है, आपको फिल्म पसंद नही आई तो अगली बार से आपके लिए ऐसी किसी भी फिल्म की टिकट नहीं लूंगा"
"मैंने ऐसा तो नहीं कहा कि फिल्म अच्छी नहीं थी"
"मतलब फिल्म आपको पसंद आई और भीमा भईया को?
"तुम्हारे भईया का तो मूड बन गया था देवर जी हिहिहिही" कहकर शीला भाभी बटर चिकन का ऑर्डर देने चली गई और मैं शाकाहारी भोजन का ऑर्डर देकर पीहू दीदी के लिए चाइनीज खाना ऑर्डर कर आया।
कुछ देर बाद खाना आ गया और फिर सभी ने जमकर खाना पेला और उसके बाद एक एक ग्लास ठंडी लस्सी का लुफ्त उठाया, मैंने और ताईजी ने तो एक एक ग्लास लस्सी और पिया, फिर भीमा भईया पैसे पे करके आ गए, अब चूंकि ताईजी और मैंने बहुत ज्यादा खाना ठूंस लिया था तो ताईजी ने कहा कि हम टेम्पो से आएंगे और घर की चाबी का झल्ला शीला भाभी को थमा दिया, फिर भीमा भईया, शीला भाभी और पीहू दीदी घर के लिए निकल गए और हम लालू के ढाबे के बाहर टेम्पो का इंतजार करने लगे।
रात के १० बज रहे थे मुझे तो नही लग रहा था कि इस वक्त टेम्पो मिलेगा लेकिन काफी देर के बाद एक जीप रुकती है मैंने देखा कि ड्राइविंग सीट पर हरिया बैठा था और पीछे कोई गट्टा आदमी एक लंबी चौड़ी औरत के साथ बैठा था जो सोने की ज्वैलरी से लदी हुई थी
"नमस्ते कजरी बहन, आओ तुम्हे और इस बच्चे को तुम्हारे घर छोड़ देता हूं"
"नहीं प्रधान जी आप क्यों कष्ट कर रहे हैं हम चले जाएंगे"
तो ये मादरचोद साला बाऊना यहां का प्रधान है
"अरे कजरी बहन कहां देर रात को इस बच्चे के साथ अकेली जाओगी, वैसे भी गांव में चोर डकैत घूम रहे हैं तुम्हारे साथ कुछ ऊंच नीच हो गई तो"
साला मुश्किल से चार फुट का होगा और मुझे बच्चा बोल रहा था।
"लल्ला आगे बैठ जाओ मैं पीछे बैठ जाती हूं" कहकर ताईजी पीछे बैठ गई और मैं आगे बैठ गया।
हरिया ने गाड़ी चालू किया, तभी मुझे पीछे से हल्की हल्की आवाज आना शुरू हुई, लेकिन मैने बिलकुल भी रिएक्ट नहीं किया और तभी मैंने चुपके से जीप में टंगी मिरर में देखा तो दंग रह गया, साला प्रधान मेरी ताईजी के गुदाज पेट पर अपने हाथ फेर रहा था, ताईजी बीच में बैठी हुई थी और प्रधान की पत्नी कमला खिड़की से बाहर देख रही थी जैसे उसे कोई होश ही नहीं था या फिर जान कर अंजान बनने का नाटक कर रही थी, ताईजी के उभारदार पेट पर हाथ फेरते फेरते प्रधान तुरंत साड़ी का पल्लू सरका देता है और ताईजी की मोटी मोटी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगता है, ताईजी विरोध तक नहीं कर रही थी इससे ज्यादा हैरानी मुझे इस बात की थी कि प्रधान की पत्नी कमला को जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था। रात के अंधेरे में मुझे कुछ साफ नजर तो नही आ रहा था लेकिन चांद की रोशनी हल्की हल्की जीप के अंदर आ रही थी जिससे मुझे धुंधला धुंधला दिखाई पड़ रहा था कि पीछे क्या खेल चालू है और फिर कुछ देर बाद घर आ जाता है और मैं गाड़ी से उतर जाता हूं।
"धन्यवाद प्रधान जी" कहकर ताईजी अपनी साड़ी ठीक करते हुए गाड़ी से उतर गई
प्रधान अपने चेहरे पर बेहद घिनौनी मुस्कुराहट के साथ "कजरी बहन हवेली पर भी आती जाती रहना"
"जी प्रधान जी"
फिर प्रधान की जीप चली जाती है, मुझे अब ऐसे दर्शाना था जैसे मैंने जीप में कुछ देखा ही नहीं था।
"प्रधान जी तो बहुत अच्छे हैं ताईजी, उन्होंने हमें घर तक छोड़ दिया" मैं किसी नादान बच्चे की तरह बोला
"लल्ला, प्रधान और उसकी हवेली से दूर ही रहना, कभी–कभी जो जैसा दिखता है वैसा होता नही है।" कहकर ताईजी घर में चली गई और फिर मैं भी अपने कमरे में आ गया।
मुझे आज थोड़ा आगे बढ़ना था इसलिए मैंने सोचा कि आज रात ताईजी के साथ सोने का प्लान बनाता हूं और फिर मुझे एक आइडिया आया तो मैं धोती और बनियान पहनकर ताईजी के कमरे में पहुंच गया, ताईजी साड़ी में अपने बिस्तर पर बैठी हुई किसी सोच ने डूबी हुई थी।
"क्या हुआ लल्ला कुछ चाहिए क्या?"
"नहीं ताईजी कुछ चाहिए तो नहीं था"
"तो फिर किसलिए आए हो लल्ला?"
"ताईजी कल रात मुझे बहुत डरावना सपना आया था और फिर सारी रात मुझे ठीक से नींद भी नहीं आई इसलिए क्या मैं कुछ दिन के लिए आप के साथ सो सकता हूं"
"हां क्यों नही लल्ला लेकिन ऐसे डरेगा तो कैसे काम चलेगा"
फिर मै ताईजी के बिस्तर पर लेट गया और ताईजी भी साड़ी पहने लेट गई।
"ताईजी इतनी गर्मी में साड़ी पहन कर कैसे सो रही हो?"
"अरे नही लल्ला मैं तो पेटीकोट और ब्लाउज में ही सोती हूं लेकिन अभी तू है इसलिए" कहकर ताईजी चुप हो गई
"ताईजी मैं कोई पराया थोड़ी न हूं, पेटीकोट और ब्लाउज में ही सोइए नही तो नींद नहीं आएगी"
"तू तो मेरा लल्ला है मेरे जिगर का टुकड़ा है रे, चल मैं अभी आती हूं" कहकर ताईजी बिस्तर से उठकर घर के पिछवाड़े में चली गई
Behtreen updateअपडेट १३
कुछ देर बाद ताईजी ब्लाउज और पेटीकोट में कमरे के अंदर दाखिल हुई, मैंने ध्यान से देखा तो पता चला कि ताईजी ने ब्लाउज के अंदर से ब्रा नहीं पहना था क्योंकि उनकी बड़ी बड़ी चुचियों की कड़क भूरे रंग की घुंडिया ब्लाउज के ऊपर से साफ दिखाई पड़ रही थी, फिर ताईजी धीरे से बिस्तर पर करवट लेकर लेट गई तभी मेरी नजर उनकी भारी गांड पर पड़ती है तो मैं दंग रह जाता हूं ताईजी ने पेटीकोट के अंदर पैंटी तक नहीं पहनी थी क्योंकि पेटीकोट के ऊपर से उनकी चर्बीदार गांड दिखाई पड़ रही थी अगर उन्होंने पैंटी पहनी होती तो पैंटी का आकार नजर आता जो नजर नहीं आ रहा था मतलब उनकी गांड पैंटी में कैद नहीं थी।
कुछ देर तक मैं ऐसे ही ताईजी की गांड को घूरता रहा और धोती के ऊपर से लन्ड पकड़कर मुठ मारने लगा और मुझे पता नहीं कब नींद आ गई, फिर थोड़ी देर के बाद अचानक मेरी नींद खुलती है तो मैं देखता हू ताईजी मेरी तरफ करवट लेकर सोई हुई थी और उनका पेटीकोट ऊपर तक उठा हुआ था उनकी फूली हुई चिकनी चूत नजर आ रही थी मस्त गुलाबी चूत थी और ऊपर से उनके ब्लाउज के बटन खुले हुए थे जिसमे से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया काफी ज्यादा बाहर निकली हुई थीं, मैंने थोड़ा आगे बढ़कर ताईजी के बूब्स को हाथों में पकड़कर सहलाने लगा, फिर मैंने उनके मोटे मोटे बूब्स को ब्लाउज से बाहर निकाल लिया और मुंह में भरकर चूसने लगा, ५ मिनट तक मैं ऐसे ही उनके चूचियों को चूसता रहा और सहलाता रहा, फिर मैंने अपने लन्ड को धोती से बाहर निकालकर पकड़ लिया, मेरा लन्ड तन कर खड़ा हो गया था और मैं मुठ मारने लगा।
तभी अचानक मेरी आंख खुल गई "अरे ये क्या मैं सपना देख रहा था" ऐसा मैंने मन में खुद से कहा, लेकिन तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरे हाथ किसी नरम और मुलायम चीज़ पर थे मैने देखा कि सच में मेरे साथ ताईजी की बड़ी बड़ी मुलायम चूचियों पर थे, मैने हल्का सा ऊपर देखा तो मेरी गांड में धमाका हो गया मैंने देखा कि ताईजी की आंखें खुली हुई थीं और वह मुझे देख रही थीं मेरे हाथ उनकी चूचियों पर थे और मैंने महसूस किया कि कोई मेरे लन्ड को पकड़कर सहला रहा है मेरा लन्ड धोती के बाहर तनकर खड़ा था और ताईजी के हाथ में था ताईजी मेरे लन्ड को अपनी मुठ्ठी में भरकर आगे पीछे कर रही थी हमारी नजरें एक दूसरे से टकरा गई थीं लेकिन न तो मैने अपने हाथों से ताईजी की चूचियों को मसलना बंद किया न ही ताईजी में मेरे लन्ड को सहलाना बंद किया, न ताईजी कुछ बोल रही थी और न ही मैं।
मेरे पास सुनहरा मौका था और इस मौके को मैं किसी भी कीमत पर हाथ से जाने नही देना चाहता था इसलिए मैंने थोड़ा हिम्मत दिखाई और आगे बढ़कर ताईजी की चूचियों को मुंह में भरकर चूसने लगा और ताईजी भी मेरे लन्ड को अपनी मुठ्ठी में भरकर सहला रही थी मेरे लन्ड की मोटाई ताईजी के कलाई जितनी थी जो बड़ी मुश्किल से उनकी मुठ्ठी में आ रहा था, कुछ देर उनकी रसीली चूचियों का रस निचोड़ने के बाद मैने ताईजी की आंखों में देखा तो हम दोनों की नजरें मिली और मैंने हल्के से ताईजी के होंठों को चूम लिया फिर एक के बाद एक २०–२२ चुम्मियां हल्के से उनके होंठों पर जड़ दिया ताईजी ने मेरा थोड़ा सा भी विरोध नहीं किया जिससे मेरी हिम्मत और ज्यादा बढ़ गई और इस बार मैं ताईजी के गुलाबी होंठों को अपने होंठों में जकड़कर चूसने लगा, ये मेरी जिंदगी का पहला चुम्बन था जिसमे सामने वाला भी मुझे रिस्पॉन्स दे रहा था वैसे तो मैं सोती हुई अपनी मां को चूम चुका था लेकिन यहां बात अलग थी यहां ताईजी चुम्बन में मेरा साथ दे रही थी, ताईजी मेरे होंठों को अपने गुलाबी होंठों में कैद करके चूस रही थी और अपनी जीभ को मेरे मुंह के अंदर डालकर हर तरह घुमा रही थी इधर ताईजी का हाथ मेरे लन्ड पर लगातार चल रहा है और उधर मेरे हाथ ताईजी की चूचियों को निचोड़ने में लगे हुए थे।
हम लोग २०–२५ मिनट तक ऐसे ही एक दूसरे को चूमते चूसते और सहलाते रहे फिर मैंने ताईजी के पेटीकोट पर हाथ रखकर ऊपर खिसका के उनकी कमर तक चढ़ा दिया और अपने हाथ को उनकी मंसाल जांघों पर फेरने लगा, फिर धीरे धीरे अपने हाथ को उनकी गुलाबी चूत पर फेरने लगा और हल्के हल्के उनकी चूत को सहलाने लगा और अपनी उंगलियों से उनकी चूत की पंखुड़ियो को कुरेदने लगा तो ताईजी मस्त हो गई और आआआह्ह करके सिसकियां भरने लगी, उसके बाद मैंने एक हाथ से ताईजी के पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उनके जिस्म से अलग करके उनकी चर्बीदार मटके जैसी गांड को नंगा कर दिया और दूसरे हाथ से उनके ब्लाउज का बटन खोलकर उनके कंधे से ऊपर की तरफ खिसका के उनकी बड़ी बड़ी पहाड़ जैसी चूचियों को नंगा कर दिया और फिर ताईजी के ऊपर लेट गया और एक हाथ से उनकी चूत मसलने लगा और दूसरे हाथ से उनकी चूचियां दबाने लगा।
ताईजी की हथेली में मेरा लन्ड कैद था इसलिए ताईजी को और मजा देने के लिए मैंने अपने लन्ड को ताईजी की हथेली से आजाद किया और हल्के हल्के अपने लन्ड को ताइजी की चूत पर रगड़ने लगा, ताईजी ने इशारा करके मुझे ऐसा करने से मना किया लेकिन मैं कहां मानने वाला था मैंने अपनी गांड को हवा में उछालकर हल्के से धक्का मारा और मेरा आधा लन्ड ताइजी की चूत की गहराई में धस गया।
ताईजी चिल्लाई लेकिन मैंने उनके मुंह पर हाथ रख दिया जिसके कारण उनकी आवाज दब गई, ये पहली बार था कि मेरा लन्ड किसी की चूत में गया था मुझे इस वक्त जिंदगी का सबसे हसीन खुशनुमा और प्यारा एहसास हो रहा था ऐसा लग रहा था कि इस वक्त मैं इस दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान हूं, ताईजी की चूत अंदर से बहुत गीली–गीली थी और बहुत ज्यादा नरम और मुलायम भी महसूस हो रही थी ऐसा लग रहा था कि मेरा लन्ड किसी पिघलती हुई आइस क्रीम में डूबा हुआ है लेकिन चूत अंदर से बहुत गर्म भी थी तो इसे लिक्विड हॉट चॉकलेट बोलना बेहतर रहेगा, मैने हल्के हल्के धक्के मारना चालू किया , मुझे मस्ती का एक अजीब एहसास हो रहा था जो आज तक मुठ मारते वक्त भी नही हुआ था, चूत में लन्ड पेलना हजार बार मुठ मारने जैसा लग रहा था, आज मैं सांतवे आसमान पर पहुंच गया था पता नही यहां तक पहुंचने के लिए मैं कबसे ख्वाइश कर रहा था।
मैंने हल्के हल्के अपने लन्ड को ताइजी की रसीली चूत में अंदर बाहर करना चालू किया और इसके साथ मैं ताईजी के गुलाबी होंठों को अपने होंठों में जकड़कर उनका रस चूस रहा था और अपनी जीभ को ताइजी के मुंह के अंदर घुसेड़कर उनके मुंह का मुआइना कर रहा था और मेरे दोनों हाथ बहुत मस्ती से ताईजी के थनों को मसल रहे थे, धीरे धीरे धक्के की गति तेज होने लगी जैसे जैसे मेरी लन्ड की गति ताईजी की चूत में बढ़ रही थी वैसे वैसे मस्ती बढ़ती जा रही थी और अब ताईजी नीचे से अपनी गांड उछालकर मेरे लन्ड को अपनी चूत की गहराइयों में लेने की कोशिश कर रही थी और मेरी पीठ पर हाथ रखकर पागलों की तरह मुझे सहला रही थी। मेरा दिल किया कि थोड़ा ताबड़तोड़ धक्के मारता हूं और फिर मैंने ताईजी की भारी गांड को हवा में उठाकर उनकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया ताकि धक्के की गति और तेज कर सकूं, अब मैंने एक के बाद एक ताबड़तोड़ धक्के लगाने चालू करे और ताईजी के मुंह पर एक हाथ रख दिया ताकि उनकी सिसकियां कमरे से बाहर न निकले, मैं ताईजी की आंखों में देखते हुए उन्हें ठोक रहा था लेकिन ताईजी के मुंह से सिसकियो के अलावा एक शब्द भी नही निकल रहा था।
आआआआह्हह्ह उह्ह्ह्ह्हहह्ह्ह ये हल्की हल्की सिसकियां मेरे शरीर को अंदर तक हिलाकर रख देती थी और मुझे बहुत मस्ती चढ़ने लगती थी, ताईजी की आवाज में एक अजीब सी हलचल होने लगी थी जिसकी वजह से मेरे शरीर में भी अजीब लहर उठने लगी थी ऐसा लग रहा था कि मैं किसी नई दुनिया में पहुंच गया हूं जहां ताईजी के नंगे जिस्म और उनकी मस्ती भरी सिसकियों के अलावा मुझे कुछ दिखाई और सुनाई नही दे रहा था, अचानक ताईजी का जिस्म झटके खाना शुरू कर दिया और उनकी सिसकियां पहले से और ज्यादा तेज और ऊंची हो गई और मैंने अपने हथेली की पकड़ को उनके मुंह पर कस लिया ताकि उनकी सिसकियां दबी रहें। मैं समझ गया था कि ताईजी अब झड़ रही हैं और गांड उछालकर जोरदार झटके मारते हुए ताइजी ने पानी छोड़ दिया, मुझे अपने लन्ड और आंड पर गीला–गीला महसूस होने लगा, करीब ३० सेकंड्स तक ताईजी झड़ती रही,
अब मेरा लन्ड चिकनाहट के साथ और तेज गति से ताईजी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, मैंने ताईजी की गुलाबी चूत के परखच्चे उड़ाकर उसका भोसड़ा बना कर रख दिया था, ताईजी की चूत का रस निकल जाने के बाद उन्होंने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ते हुए रुकने का इशारा किया लेकिन मैं रुकने वाला कहां था बल्कि उल्टा मैंने अपने लन्ड की गति उनके भोसड़े में और तेज कर दिया था, तभी पहली बार ताईजी ने विरोध करते हुए मेरी छाती पर हल्के से धक्का मारा लेकिन मैंने तुरंत उनके कंधों को पकड़ कर कस लिया और बहुत ताबड़तोड़ धक्के मार कर ताईजी को चोदने लगा, ताईजी अपने भारी जिस्म को इधर उधर पटकने लगी, उनकी आंखों में आसूं आने लगे थे लेकिन मेरे लिए यहां तक पहुंचकर रुकना बहुत मुश्किल था मैंने उनके आंसुओं को नजरंदाज कर दिया था।
अब मुझे १०–१२ मिनट हो गए थे ताईजी को ताबड़तोड़ गति से चोदते हुए, इस वक्त मुझे मेरी पहली चूदाई का नशा चढ़ा था मैं इतना डूब गया था उस नशे में कि अपनी ताईजी की आंखों से आने वाले आंसू भी मुझे रोक पाने में असमर्थ थे, ताईजी खुद को इधर उधर पटक रही थी और मुझे अपनी बाहों में कसके जकड़कर मेरी पीठ को अपने नाखूनों से नोचने लगी थी, ताईजी को लग रहा था कि मुझे दर्द होगा और मैं उन्हें छोड़ दूंगा, दर्द तो मुझे हो रहा था लेकिन इस दर्द में भी एक अजीब सा मजा था जिसने मुझे रोकने का नही बल्कि और तेज गति से चोदने का इशारा किया और मैं ताबड़तोड़ तरीके से ताइजी की चूत में अपना काला लन्ड घुसेड़ घुसेड़कर पेलने लगा, ऐसे ही और १०–१२ मिनट झटके ठोकने और ताईजी के तपड़ने के बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं तो मैंने अपने लन्ड के झटकों को ताईजी के भोसड़े में और बेरहम कर दिया और लन्ड का सारा वीर्य चूत में उड़ेल दिया, मुझे अपना वीर्य ताईजी की चूत में गिरता हुआ महसूस हुआ और हल्के हल्के झटकों के साथ मैं कपकपा कर झड़ता रहा और फिर मेरा शरीर बिलकुल ढीला पड़ गया तो मैंने अपना लन्ड ताईजी की चूत से बाहर निकाल लिया और बेसुध होकर पलट के बिस्तर पर लेट गया, मैं अपनी पहली चूदाई से इतना थक गया था कि मुझे पता नही चला कि कब नींद के आगोश में चला गया।
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कुछ देर बाद ताईजी ब्लाउज और पेटीकोट में कमरे के अंदर दाखिल हुई, मैंने ध्यान से देखा तो पता चला कि ताईजी ने ब्लाउज के अंदर से ब्रा नहीं पहना था क्योंकि उनकी बड़ी बड़ी चुचियों की कड़क भूरे रंग की घुंडिया ब्लाउज के ऊपर से साफ दिखाई पड़ रही थी, फिर ताईजी धीरे से बिस्तर पर करवट लेकर लेट गई तभी मेरी नजर उनकी भारी गांड पर पड़ती है तो मैं दंग रह जाता हूं ताईजी ने पेटीकोट के अंदर पैंटी तक नहीं पहनी थी क्योंकि पेटीकोट के ऊपर से उनकी चर्बीदार गांड दिखाई पड़ रही थी अगर उन्होंने पैंटी पहनी होती तो पैंटी का आकार नजर आता जो नजर नहीं आ रहा था मतलब उनकी गांड पैंटी में कैद नहीं थी।
कुछ देर तक मैं ऐसे ही ताईजी की गांड को घूरता रहा और धोती के ऊपर से लन्ड पकड़कर मुठ मारने लगा और मुझे पता नहीं कब नींद आ गई, फिर थोड़ी देर के बाद अचानक मेरी नींद खुलती है तो मैं देखता हू ताईजी मेरी तरफ करवट लेकर सोई हुई थी और उनका पेटीकोट ऊपर तक उठा हुआ था उनकी फूली हुई चिकनी चूत नजर आ रही थी मस्त गुलाबी चूत थी और ऊपर से उनके ब्लाउज के बटन खुले हुए थे जिसमे से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया काफी ज्यादा बाहर निकली हुई थीं, मैंने थोड़ा आगे बढ़कर ताईजी के बूब्स को हाथों में पकड़कर सहलाने लगा, फिर मैंने उनके मोटे मोटे बूब्स को ब्लाउज से बाहर निकाल लिया और मुंह में भरकर चूसने लगा, ५ मिनट तक मैं ऐसे ही उनके चूचियों को चूसता रहा और सहलाता रहा, फिर मैंने अपने लन्ड को धोती से बाहर निकालकर पकड़ लिया, मेरा लन्ड तन कर खड़ा हो गया था और मैं मुठ मारने लगा।
तभी अचानक मेरी आंख खुल गई "अरे ये क्या मैं सपना देख रहा था" ऐसा मैंने मन में खुद से कहा, लेकिन तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरे हाथ किसी नरम और मुलायम चीज़ पर थे मैने देखा कि सच में मेरे साथ ताईजी की बड़ी बड़ी मुलायम चूचियों पर थे, मैने हल्का सा ऊपर देखा तो मेरी गांड में धमाका हो गया मैंने देखा कि ताईजी की आंखें खुली हुई थीं और वह मुझे देख रही थीं मेरे हाथ उनकी चूचियों पर थे और मैंने महसूस किया कि कोई मेरे लन्ड को पकड़कर सहला रहा है मेरा लन्ड धोती के बाहर तनकर खड़ा था और ताईजी के हाथ में था ताईजी मेरे लन्ड को अपनी मुठ्ठी में भरकर आगे पीछे कर रही थी हमारी नजरें एक दूसरे से टकरा गई थीं लेकिन न तो मैने अपने हाथों से ताईजी की चूचियों को मसलना बंद किया न ही ताईजी में मेरे लन्ड को सहलाना बंद किया, न ताईजी कुछ बोल रही थी और न ही मैं।
मेरे पास सुनहरा मौका था और इस मौके को मैं किसी भी कीमत पर हाथ से जाने नही देना चाहता था इसलिए मैंने थोड़ा हिम्मत दिखाई और आगे बढ़कर ताईजी की चूचियों को मुंह में भरकर चूसने लगा और ताईजी भी मेरे लन्ड को अपनी मुठ्ठी में भरकर सहला रही थी मेरे लन्ड की मोटाई ताईजी के कलाई जितनी थी जो बड़ी मुश्किल से उनकी मुठ्ठी में आ रहा था, कुछ देर उनकी रसीली चूचियों का रस निचोड़ने के बाद मैने ताईजी की आंखों में देखा तो हम दोनों की नजरें मिली और मैंने हल्के से ताईजी के होंठों को चूम लिया फिर एक के बाद एक २०–२२ चुम्मियां हल्के से उनके होंठों पर जड़ दिया ताईजी ने मेरा थोड़ा सा भी विरोध नहीं किया जिससे मेरी हिम्मत और ज्यादा बढ़ गई और इस बार मैं ताईजी के गुलाबी होंठों को अपने होंठों में जकड़कर चूसने लगा, ये मेरी जिंदगी का पहला चुम्बन था जिसमे सामने वाला भी मुझे रिस्पॉन्स दे रहा था वैसे तो मैं सोती हुई अपनी मां को चूम चुका था लेकिन यहां बात अलग थी यहां ताईजी चुम्बन में मेरा साथ दे रही थी, ताईजी मेरे होंठों को अपने गुलाबी होंठों में कैद करके चूस रही थी और अपनी जीभ को मेरे मुंह के अंदर डालकर हर तरह घुमा रही थी इधर ताईजी का हाथ मेरे लन्ड पर लगातार चल रहा है और उधर मेरे हाथ ताईजी की चूचियों को निचोड़ने में लगे हुए थे।
हम लोग २०–२५ मिनट तक ऐसे ही एक दूसरे को चूमते चूसते और सहलाते रहे फिर मैंने ताईजी के पेटीकोट पर हाथ रखकर ऊपर खिसका के उनकी कमर तक चढ़ा दिया और अपने हाथ को उनकी मंसाल जांघों पर फेरने लगा, फिर धीरे धीरे अपने हाथ को उनकी गुलाबी चूत पर फेरने लगा और हल्के हल्के उनकी चूत को सहलाने लगा और अपनी उंगलियों से उनकी चूत की पंखुड़ियो को कुरेदने लगा तो ताईजी मस्त हो गई और आआआह्ह करके सिसकियां भरने लगी, उसके बाद मैंने एक हाथ से ताईजी के पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उनके जिस्म से अलग करके उनकी चर्बीदार मटके जैसी गांड को नंगा कर दिया और दूसरे हाथ से उनके ब्लाउज का बटन खोलकर उनके कंधे से ऊपर की तरफ खिसका के उनकी बड़ी बड़ी पहाड़ जैसी चूचियों को नंगा कर दिया और फिर ताईजी के ऊपर लेट गया और एक हाथ से उनकी चूत मसलने लगा और दूसरे हाथ से उनकी चूचियां दबाने लगा।
ताईजी की हथेली में मेरा लन्ड कैद था इसलिए ताईजी को और मजा देने के लिए मैंने अपने लन्ड को ताईजी की हथेली से आजाद किया और हल्के हल्के अपने लन्ड को ताइजी की चूत पर रगड़ने लगा, ताईजी ने इशारा करके मुझे ऐसा करने से मना किया लेकिन मैं कहां मानने वाला था मैंने अपनी गांड को हवा में उछालकर हल्के से धक्का मारा और मेरा आधा लन्ड ताइजी की चूत की गहराई में धस गया।
ताईजी चिल्लाई लेकिन मैंने उनके मुंह पर हाथ रख दिया जिसके कारण उनकी आवाज दब गई, ये पहली बार था कि मेरा लन्ड किसी की चूत में गया था मुझे इस वक्त जिंदगी का सबसे हसीन खुशनुमा और प्यारा एहसास हो रहा था ऐसा लग रहा था कि इस वक्त मैं इस दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान हूं, ताईजी की चूत अंदर से बहुत गीली–गीली थी और बहुत ज्यादा नरम और मुलायम भी महसूस हो रही थी ऐसा लग रहा था कि मेरा लन्ड किसी पिघलती हुई आइस क्रीम में डूबा हुआ है लेकिन चूत अंदर से बहुत गर्म भी थी तो इसे लिक्विड हॉट चॉकलेट बोलना बेहतर रहेगा, मैने हल्के हल्के धक्के मारना चालू किया , मुझे मस्ती का एक अजीब एहसास हो रहा था जो आज तक मुठ मारते वक्त भी नही हुआ था, चूत में लन्ड पेलना हजार बार मुठ मारने जैसा लग रहा था, आज मैं सांतवे आसमान पर पहुंच गया था पता नही यहां तक पहुंचने के लिए मैं कबसे ख्वाइश कर रहा था।
मैंने हल्के हल्के अपने लन्ड को ताइजी की रसीली चूत में अंदर बाहर करना चालू किया और इसके साथ मैं ताईजी के गुलाबी होंठों को अपने होंठों में जकड़कर उनका रस चूस रहा था और अपनी जीभ को ताइजी के मुंह के अंदर घुसेड़कर उनके मुंह का मुआइना कर रहा था और मेरे दोनों हाथ बहुत मस्ती से ताईजी के थनों को मसल रहे थे, धीरे धीरे धक्के की गति तेज होने लगी जैसे जैसे मेरी लन्ड की गति ताईजी की चूत में बढ़ रही थी वैसे वैसे मस्ती बढ़ती जा रही थी और अब ताईजी नीचे से अपनी गांड उछालकर मेरे लन्ड को अपनी चूत की गहराइयों में लेने की कोशिश कर रही थी और मेरी पीठ पर हाथ रखकर पागलों की तरह मुझे सहला रही थी। मेरा दिल किया कि थोड़ा ताबड़तोड़ धक्के मारता हूं और फिर मैंने ताईजी की भारी गांड को हवा में उठाकर उनकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया ताकि धक्के की गति और तेज कर सकूं, अब मैंने एक के बाद एक ताबड़तोड़ धक्के लगाने चालू करे और ताईजी के मुंह पर एक हाथ रख दिया ताकि उनकी सिसकियां कमरे से बाहर न निकले, मैं ताईजी की आंखों में देखते हुए उन्हें ठोक रहा था लेकिन ताईजी के मुंह से सिसकियो के अलावा एक शब्द भी नही निकल रहा था।
आआआआह्हह्ह उह्ह्ह्ह्हहह्ह्ह ये हल्की हल्की सिसकियां मेरे शरीर को अंदर तक हिलाकर रख देती थी और मुझे बहुत मस्ती चढ़ने लगती थी, ताईजी की आवाज में एक अजीब सी हलचल होने लगी थी जिसकी वजह से मेरे शरीर में भी अजीब लहर उठने लगी थी ऐसा लग रहा था कि मैं किसी नई दुनिया में पहुंच गया हूं जहां ताईजी के नंगे जिस्म और उनकी मस्ती भरी सिसकियों के अलावा मुझे कुछ दिखाई और सुनाई नही दे रहा था, अचानक ताईजी का जिस्म झटके खाना शुरू कर दिया और उनकी सिसकियां पहले से और ज्यादा तेज और ऊंची हो गई और मैंने अपने हथेली की पकड़ को उनके मुंह पर कस लिया ताकि उनकी सिसकियां दबी रहें। मैं समझ गया था कि ताईजी अब झड़ रही हैं और गांड उछालकर जोरदार झटके मारते हुए ताइजी ने पानी छोड़ दिया, मुझे अपने लन्ड और आंड पर गीला–गीला महसूस होने लगा, करीब ३० सेकंड्स तक ताईजी झड़ती रही,
अब मेरा लन्ड चिकनाहट के साथ और तेज गति से ताईजी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, मैंने ताईजी की गुलाबी चूत के परखच्चे उड़ाकर उसका भोसड़ा बना कर रख दिया था, ताईजी की चूत का रस निकल जाने के बाद उन्होंने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ते हुए रुकने का इशारा किया लेकिन मैं रुकने वाला कहां था बल्कि उल्टा मैंने अपने लन्ड की गति उनके भोसड़े में और तेज कर दिया था, तभी पहली बार ताईजी ने विरोध करते हुए मेरी छाती पर हल्के से धक्का मारा लेकिन मैंने तुरंत उनके कंधों को पकड़ कर कस लिया और बहुत ताबड़तोड़ धक्के मार कर ताईजी को चोदने लगा, ताईजी अपने भारी जिस्म को इधर उधर पटकने लगी, उनकी आंखों में आसूं आने लगे थे लेकिन मेरे लिए यहां तक पहुंचकर रुकना बहुत मुश्किल था मैंने उनके आंसुओं को नजरंदाज कर दिया था।
अब मुझे १०–१२ मिनट हो गए थे ताईजी को ताबड़तोड़ गति से चोदते हुए, इस वक्त मुझे मेरी पहली चूदाई का नशा चढ़ा था मैं इतना डूब गया था उस नशे में कि अपनी ताईजी की आंखों से आने वाले आंसू भी मुझे रोक पाने में असमर्थ थे, ताईजी खुद को इधर उधर पटक रही थी और मुझे अपनी बाहों में कसके जकड़कर मेरी पीठ को अपने नाखूनों से नोचने लगी थी, ताईजी को लग रहा था कि मुझे दर्द होगा और मैं उन्हें छोड़ दूंगा, दर्द तो मुझे हो रहा था लेकिन इस दर्द में भी एक अजीब सा मजा था जिसने मुझे रोकने का नही बल्कि और तेज गति से चोदने का इशारा किया और मैं ताबड़तोड़ तरीके से ताइजी की चूत में अपना काला लन्ड घुसेड़ घुसेड़कर पेलने लगा, ऐसे ही और १०–१२ मिनट झटके ठोकने और ताईजी के तपड़ने के बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं तो मैंने अपने लन्ड के झटकों को ताईजी के भोसड़े में और बेरहम कर दिया और लन्ड का सारा वीर्य चूत में उड़ेल दिया, मुझे अपना वीर्य ताईजी की चूत में गिरता हुआ महसूस हुआ और हल्के हल्के झटकों के साथ मैं कपकपा कर झड़ता रहा और फिर मेरा शरीर बिलकुल ढीला पड़ गया तो मैंने अपना लन्ड ताईजी की चूत से बाहर निकाल लिया और बेसुध होकर पलट के बिस्तर पर लेट गया, मैं अपनी पहली चूदाई से इतना थक गया था कि मुझे पता नही चला कि कब नींद के आगोश में चला गया।
Shandaar updateअपडेट १४
सुबह मेरी आंख खुली तो ९ बज चुके थे, मेरा लन्ड अभी तक धोती के बाहर था मैं बहुत डर गया था और शर्मिंदा महसूस कर रहा था, फिर मैं घर के पिछवाड़े में चला गया मूतकर थोड़ा बहुत कसरत किया उसके बाद नहाने चल गया, गुसलखाने से बाहर निकला तो ताईजी रसोईघर में थी, मैं भी रसोई में जाने लगा पर मेरी हिम्मत नही हुई फिर भी मुझे प्यास लगी थी इसलिए मैं रसोई में चला गया और फ्रिज खोलकर पानी पीने लगा जैसे ही मैंने फ्रिज खोला तो ताईजी ने पीछे मुड़कर मेरी तरफ घूरकर देखा और वापस से काम में लग गई, मैं गटागट पानी पिया और बाहर चला गया, मैं आंगन में चारपाई पर बैठ गया। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की अब क्या कर सकता हूं मैं तो ताईजी को प्लान करके चोदना चाहता था लेकिन रात को सब कुछ अचानक हो गया। तभी मुझे रसोईघर में बर्तन गिरने की आवाज आई जो ताईजी ने रसोई में जमीन पर रखा था उन्होंने इतनी तेज आवाज से बर्तन इसलिए रखा था ताकि मुझे पता चल जाए कि खाना लग गया है मैं चुपचाप रसोई से थाली उठा लिया और चटाई पर बैठकर खाने लगा, ताईजी रसोई में ही बैठकर चुपचाप भोजन कर रही थी और बहुत गुस्से में थी मुझसे नजर तक नहीं मिला रही थी।
कुछ देर बाद मैं कोचिंग जाने के लिए तैयार हो गया और तुरंत साइकिल से कोचिंग के लिए निकल गया, चौराहे पर मुझे राज अपनी साइकिल पर इंतजार कर रहा था।
"और भाई आने में बड़ी देर लगा दिया, मैंने अपना काम कर दिया है अब तुझे आगे का काम संभालना है।"
"साले तू तो बड़ा तेज है अब आगे क्या करना है मुझे तो बड़ा डर लग रहा है"
"जो कुछ करना है तुझे करना है बस जैसे मैंने कहा था वैसा करना, जा मां घर पर बहुत परेशान है"
"ठीक है मैं अपनी तरफ से कोशिश करूंगा"
" चल मैं कोचिंग जाता हूं ऑल द बेस्ट"
फिर मैं राज के घर चला गया और घर के अंदर घुस गया, मुझे पता था कि रागिनी काकी तबेले में होंगी इसलिए फिर घर के पिछवाड़े में आ गया जहां छोटा सा तबेला बना था वहां रागिनी काकी गाय को पानी से नहला रही थी उन्होंने बैंगनी रंग की पुरानी साड़ी और ढीला सा ब्लाउज पहना था मेरा दिल किया कि रागिनी काकी को पीछे से दबोच कर चूम लूं लेकिन इस बार मुझे प्लान के अनुसार चलना था नही तो राज के द्वारा बिछाया हुआ जाल बर्बाद हो सकता था।
"अरे बलराम तू ? राज घर पर नही है कोचिंग गया है तू नही गया?" रागिनी काकी पलट कर मुझे देखते हुए बोली
"काकी मैं कोचिंग जा ही रहा था लेकिन मुझे रास्ते में राज मिल गया उसने कहा कि गाय की तबियत ठीक नहीं है और मां बहुत परेशान हो रही है, मुझे जानवरों के बारे में जानकारी थी तो सोचा पहले आपकी मदद कर देता हूं फिर बाद में कोचिंग चला जाऊंगा"
"बेटा अच्छा हुआ तू आ गया , देख ना मेरी गाय बहुत परेशान कर रही है और सुबह से चारा भी नहीं खा रही, देख के बता इसे क्या हुआ है?"
जब से मैं इस गांव में आया था तब से मेरा चैन चुराने वाली और कोई नहीं बल्कि रागिनी काकी ही थी उसका कसा हुआ गठीला बदन पांव के ताल पर थिरकते हुए मोटे मोटे भरे हुए चूतड़ और हिलती हुई बडी बडी चूचियां देख देख कर मैं रागिनी काकी का दीवाना हो गया था कितनी बार मैने चाहा की बस एक बार रागिनी काकी मुझसे ठुकवा ले मगर थोड़ी बहुत नटखट बातों के अलावा कभी बात आगे ही नहीं बढ़ पाई। रागिनी काकी को कस के चोदने की इच्छा तो मुझे बहुत पहले से थी मगर मैं रागिनी काकी के मामले में जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था क्यूंकि आखिर वह मेरे दोस्त राज की माँ जो थी, लेकिन अब राज भी मेरा साथ दे रहा था मैं जानता था आज नहीं तो कल रागिनी मुझे देगी ज़रूर मगर ये वक्त काटना मेरे लिए ज़हर पीने जैसा था।
"देख ना क्या सोच रहा है?"
"क्या काकी?"
"अरे मेरी गाय को देखेगा या नहीं"
"हां देखता हूं" कहकर मैंने गाय के पेट पर हाथ रखा और नौटंकी करते हुए गाय के शरीर पर इधर उधर हाथ फेरने लगा।
"पता नही सुबह से अजीब–अजीब आवाजें कर रही है न कुछ खाती है और न पीती है"
ये राज ने ही किया था क्योंकि गाय के गर्भवती होने का वक्त हो चला था और उसकी वासना जगाने के लिए राज ने कुछ गोलियां खिला दी थीं।
तभी मैं रागिनी काकी को देखकर हंसने लगा।
"क्या बात है मुझे भी बताएगा, मुस्कुराए जा रहा है" रागिनी काकी मुझे घूरती हुई बोली
"काकी इसका समय आ गया है, गांव में कोई सांड है क्या?"
रागिनी काकी मेरी बात सुनकर बुरी तरह शर्मा गई, गांव में बस एक सांड था जो हरिया ने पाल रखा था हरिया का सांड एक काम बड़े ज़ोरदार तरीके से करता था और वो था गांव के गायों को गर्भवती करना, जब भी कोई गाय गरम हो जाती थी तो हरिया का सांड ही उसको अपने नीचे ले के शांत करता था, हरिया को सांड पालने का शौक इसलिए था क्योंकि जब भी गांव की कोई औरत अपनी गाय लेकर आती थी हरिया के सांड से गर्भवती करवाने के लिए तो हरिया को छेड़ने और मस्ती करने का मौका मिल जाता था, ऐसा मुझे राज ने बताया था।
"बताओ काकी गांव में कोई सांड है? नही तो आपकी गाय की तबियत और बिगड़ जाएगी"
रागिनी काकी अब समझ गई थी कि उनकी गाय को क्या हुआ है।
"एक सांड है हरिया का"
"काकी तो चलिए ना नहीं तो आपकी गाय पागल हो जाएगी" मैं अपनी हंसी दबाते हुए बोला
रागिनी काकी अपनी गाय को लेकर मेरे साथ हरिया के घर चल पड़ती हैं।
तभी रेखा मौसी मुझे रास्ते में मिल जाती हैं।
"अरे रेखा मौसी कहां भागे जा रही हो हम तुम्हारे पास ही आ रहे थे"
"बबुआ मैं तो हवेली जा रही थी तू बता क्या काम आ गया"
मैं गाय की तरफ इशारा करते हुए और रेखा मौसी समझ जाती हैं कि क्या बात है।
"जा पीछे तबेले में बंधा है मेरा सांड जा ठुकवा ले इसको"
रागिनी काकी मुंह बंद करके हंसी रोकने की कोशिश करती हैं।
"और ये ले घर की चाभी, कोई चीज की जरूरत पड़े तो निःसंकोच ले लेना।"
"चाभी किसलिए मौसी घर पर कोई नहीं है क्या?" मुस्कुराते हुए
"मेरा मर्द तो हवेली को चौकीदारी कर रहा है, कम्मो तेरे भईया की दुकान पर गई है और मालती सुबह से हवेली में काम कर रही है, मैं भी हवेली जा रही हूं किसी महत्वपूर्ण काम से मालकिन ने आने के लिए कहा है।"
रेखा मौसी की बात सुनकर मैं खुश हो गया।
"चलो काकी ठुकवा लो अपनी गाय को" मुस्कुराते हुए
रागिनी काकी शर्मा जाता है और कुछ देर बाद हम रेखा मौसी के घर पहुंच जाते हैं, हरिया का सांड घर के पिछवाड़े में खूंटे से बंधा हुआ था।
"काकी इस सांड का नाम क्या है?"
"भूरा"
"और आपकी गाय का नाम?"
"दुधिया"
दुधिया को देखते ही भूरा ने अपना बड़ा सा लाल लाल लन्ड बाहर निकाल देता है और दुधिया को सूंघने लगता है।
NICE UPDATE.अपडेट १४
सुबह मेरी आंख खुली तो ९ बज चुके थे, मेरा लन्ड अभी तक धोती के बाहर था मैं बहुत डर गया था और शर्मिंदा महसूस कर रहा था, फिर मैं घर के पिछवाड़े में चला गया मूतकर थोड़ा बहुत कसरत किया उसके बाद नहाने चल गया, गुसलखाने से बाहर निकला तो ताईजी रसोईघर में थी, मैं भी रसोई में जाने लगा पर मेरी हिम्मत नही हुई फिर भी मुझे प्यास लगी थी इसलिए मैं रसोई में चला गया और फ्रिज खोलकर पानी पीने लगा जैसे ही मैंने फ्रिज खोला तो ताईजी ने पीछे मुड़कर मेरी तरफ घूरकर देखा और वापस से काम में लग गई, मैं गटागट पानी पिया और बाहर चला गया, मैं आंगन में चारपाई पर बैठ गया। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की अब क्या कर सकता हूं मैं तो ताईजी को प्लान करके चोदना चाहता था लेकिन रात को सब कुछ अचानक हो गया। तभी मुझे रसोईघर में बर्तन गिरने की आवाज आई जो ताईजी ने रसोई में जमीन पर रखा था उन्होंने इतनी तेज आवाज से बर्तन इसलिए रखा था ताकि मुझे पता चल जाए कि खाना लग गया है मैं चुपचाप रसोई से थाली उठा लिया और चटाई पर बैठकर खाने लगा, ताईजी रसोई में ही बैठकर चुपचाप भोजन कर रही थी और बहुत गुस्से में थी मुझसे नजर तक नहीं मिला रही थी।
कुछ देर बाद मैं कोचिंग जाने के लिए तैयार हो गया और तुरंत साइकिल से कोचिंग के लिए निकल गया, चौराहे पर मुझे राज अपनी साइकिल पर इंतजार कर रहा था।
"और भाई आने में बड़ी देर लगा दिया, मैंने अपना काम कर दिया है अब तुझे आगे का काम संभालना है।"
"साले तू तो बड़ा तेज है अब आगे क्या करना है मुझे तो बड़ा डर लग रहा है"
"जो कुछ करना है तुझे करना है बस जैसे मैंने कहा था वैसा करना, जा मां घर पर बहुत परेशान है"
"ठीक है मैं अपनी तरफ से कोशिश करूंगा"
" चल मैं कोचिंग जाता हूं ऑल द बेस्ट"
फिर मैं राज के घर चला गया और घर के अंदर घुस गया, मुझे पता था कि रागिनी काकी तबेले में होंगी इसलिए फिर घर के पिछवाड़े में आ गया जहां छोटा सा तबेला बना था वहां रागिनी काकी गाय को पानी से नहला रही थी उन्होंने बैंगनी रंग की पुरानी साड़ी और ढीला सा ब्लाउज पहना था मेरा दिल किया कि रागिनी काकी को पीछे से दबोच कर चूम लूं लेकिन इस बार मुझे प्लान के अनुसार चलना था नही तो राज के द्वारा बिछाया हुआ जाल बर्बाद हो सकता था।
"अरे बलराम तू ? राज घर पर नही है कोचिंग गया है तू नही गया?" रागिनी काकी पलट कर मुझे देखते हुए बोली
"काकी मैं कोचिंग जा ही रहा था लेकिन मुझे रास्ते में राज मिल गया उसने कहा कि गाय की तबियत ठीक नहीं है और मां बहुत परेशान हो रही है, मुझे जानवरों के बारे में जानकारी थी तो सोचा पहले आपकी मदद कर देता हूं फिर बाद में कोचिंग चला जाऊंगा"
"बेटा अच्छा हुआ तू आ गया , देख ना मेरी गाय बहुत परेशान कर रही है और सुबह से चारा भी नहीं खा रही, देख के बता इसे क्या हुआ है?"
जब से मैं इस गांव में आया था तब से मेरा चैन चुराने वाली और कोई नहीं बल्कि रागिनी काकी ही थी उसका कसा हुआ गठीला बदन पांव के ताल पर थिरकते हुए मोटे मोटे भरे हुए चूतड़ और हिलती हुई बडी बडी चूचियां देख देख कर मैं रागिनी काकी का दीवाना हो गया था कितनी बार मैने चाहा की बस एक बार रागिनी काकी मुझसे ठुकवा ले मगर थोड़ी बहुत नटखट बातों के अलावा कभी बात आगे ही नहीं बढ़ पाई। रागिनी काकी को कस के चोदने की इच्छा तो मुझे बहुत पहले से थी मगर मैं रागिनी काकी के मामले में जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था क्यूंकि आखिर वह मेरे दोस्त राज की माँ जो थी, लेकिन अब राज भी मेरा साथ दे रहा था मैं जानता था आज नहीं तो कल रागिनी मुझे देगी ज़रूर मगर ये वक्त काटना मेरे लिए ज़हर पीने जैसा था।
"देख ना क्या सोच रहा है?"
"क्या काकी?"
"अरे मेरी गाय को देखेगा या नहीं"
"हां देखता हूं" कहकर मैंने गाय के पेट पर हाथ रखा और नौटंकी करते हुए गाय के शरीर पर इधर उधर हाथ फेरने लगा।
"पता नही सुबह से अजीब–अजीब आवाजें कर रही है न कुछ खाती है और न पीती है"
ये राज ने ही किया था क्योंकि गाय के गर्भवती होने का वक्त हो चला था और उसकी वासना जगाने के लिए राज ने कुछ गोलियां खिला दी थीं।
तभी मैं रागिनी काकी को देखकर हंसने लगा।
"क्या बात है मुझे भी बताएगा, मुस्कुराए जा रहा है" रागिनी काकी मुझे घूरती हुई बोली
"काकी इसका समय आ गया है, गांव में कोई सांड है क्या?"
रागिनी काकी मेरी बात सुनकर बुरी तरह शर्मा गई, गांव में बस एक सांड था जो हरिया ने पाल रखा था हरिया का सांड एक काम बड़े ज़ोरदार तरीके से करता था और वो था गांव के गायों को गर्भवती करना, जब भी कोई गाय गरम हो जाती थी तो हरिया का सांड ही उसको अपने नीचे ले के शांत करता था, हरिया को सांड पालने का शौक इसलिए था क्योंकि जब भी गांव की कोई औरत अपनी गाय लेकर आती थी हरिया के सांड से गर्भवती करवाने के लिए तो हरिया को छेड़ने और मस्ती करने का मौका मिल जाता था, ऐसा मुझे राज ने बताया था।
"बताओ काकी गांव में कोई सांड है? नही तो आपकी गाय की तबियत और बिगड़ जाएगी"
रागिनी काकी अब समझ गई थी कि उनकी गाय को क्या हुआ है।
"एक सांड है हरिया का"
"काकी तो चलिए ना नहीं तो आपकी गाय पागल हो जाएगी" मैं अपनी हंसी दबाते हुए बोला
रागिनी काकी अपनी गाय को लेकर मेरे साथ हरिया के घर चल पड़ती हैं।
तभी रेखा मौसी मुझे रास्ते में मिल जाती हैं।
"अरे रेखा मौसी कहां भागे जा रही हो हम तुम्हारे पास ही आ रहे थे"
"बबुआ मैं तो हवेली जा रही थी तू बता क्या काम आ गया"
मैं गाय की तरफ इशारा करते हुए और रेखा मौसी समझ जाती हैं कि क्या बात है।
"जा पीछे तबेले में बंधा है मेरा सांड जा ठुकवा ले इसको"
रागिनी काकी मुंह बंद करके हंसी रोकने की कोशिश करती हैं।
"और ये ले घर की चाभी, कोई चीज की जरूरत पड़े तो निःसंकोच ले लेना।"
"चाभी किसलिए मौसी घर पर कोई नहीं है क्या?" मुस्कुराते हुए
"मेरा मर्द तो हवेली को चौकीदारी कर रहा है, कम्मो तेरे भईया की दुकान पर गई है और मालती सुबह से हवेली में काम कर रही है, मैं भी हवेली जा रही हूं किसी महत्वपूर्ण काम से मालकिन ने आने के लिए कहा है।"
रेखा मौसी की बात सुनकर मैं खुश हो गया।
"चलो काकी ठुकवा लो अपनी गाय को" मुस्कुराते हुए
रागिनी काकी शर्मा जाता है और कुछ देर बाद हम रेखा मौसी के घर पहुंच जाते हैं, हरिया का सांड घर के पिछवाड़े में खूंटे से बंधा हुआ था।
"काकी इस सांड का नाम क्या है?"
"भूरा"
"और आपकी गाय का नाम?"
"दुधिया"
दुधिया को देखते ही भूरा ने अपना बड़ा सा लाल लाल लन्ड बाहर निकाल देता है और दुधिया को सूंघने लगता है।