चौदहवाँ भाग
तनु ने अभिषेक का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा।
तनु- मैं जब से यहाँ पर आई हूँ तब से मैं तुम्हारे साथ हूँ। तुम्हारा स्वभाव, तुम्हारी बात और तुम्हारा व्यवहार ने मेरे दिल में एक अलग छाप छोड़ी है। मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ और तुमसे बहुत प्यार करती हूँ अभिषेक। आई लव यू अभिषेक। आई लव यू।
तनु के ऐसा करने के बाद वहाँ सन्नाटा छा गया। सभी आँखे फाड़े एक दूसरे को देखने लगे। सबसे ज्यादा अचंभित इस समय महेश था। उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि तनु जिस लड़के से प्यार करने की बात करती थी वह अभिषेक ही है। मुझे तो पहले से ही शक था इस बात पर इसलिए मेरा बर्ताव सामान्य ही था। अभिषेक भी यह सुनकर चकित ही था, लेकिन उसके मन में भी थोड़ा बहुत तनु के लिए कुछ था इसलिए तनु की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।
अभिषेक- ये सब क्या है तनु। अभी हम सब पढ़ने लिखने की उम्र में प्यार मोहब्बत की बात कैसे कर सकते हैं। पहले बोर्ड की परीक्षा खत्म हो जाए उसके बाद इस बारे में बात करते हैं।
तनु- नहीं अभिषेक, पढ़ाई लिखाई के साथ ये सब भी जरूरी है। और मुझे तुम्हारा जवाब अभी चाहिए वो भी हाँ में चाहिए।
महेश- अरे ऐसे कैसे। मैंने भी तुमसे अपने प्यार का इजहार किया था, लेकिन तुमने इस घोंचू के लिए मुझे मना कर दिया। और अब जब अभिषेक कोई जवाब नहीं दे रहा है तो तुम उससे जबदस्ती कर रही हो। ये सही बात नहीं है तनु।
तनु- महेश तुम चुप रहो और दोबारा अभिषेक को घोंचू मत कहना। हाँ अभिषेक तुम इसके लिए कल तक का समय ले सकते हो। तब तक अच्छे से सोच लो। मुझे तुम्हारा जवाब हाँ में ही चाहिए। क्योंकि मैं बहुत जिद्दी हूँ और जब तक तुम हाँ नहीं कहोगे मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ूँगी।
मैं- ये कैसी बात कर रही हो तनु। महेश हमारा बचपन का दोस्त है। हम सब आपस में ऐसी बाते करते रहते हैं। तुम्हें इस तरह से महेश से बात नहीं करनी चाहिए। आखिर वो तुम्हारा भी दोस्त है।
तनु- वो गलती से मेरे मुँह से निकल गया। मुझे माफ कर देना महेश। लेकिन तुम्हें ऐसे अभिषेक को नहीं बोलना चाहिए। अच्छा नहीं लगता है ये सब।
इतना कहकर तनु उठकर वहाँ से चली गई। अब वहाँ हम तीनो रह गए। अभिषेक गहरी सोच में बैठा था। मैंने अभिषेक को देखते हुए कहा।
मैं- क्या सोच रहा है यार। मैंने तो तुझसे पहले ही बोला था कि शायद तनु तुझसे प्यार करती है, लेकिन तुमने कहा था कि जब वो अपने प्यार का अजहार करेगी तब सोचेंगे इसके बारे में। अब तो उसने अपने प्यार का इजहार कर भी दिया है। अब क्या कहता है तू।
अभिषेक- मैं अभी भी असमंजस की स्थिति में हूँ भाई। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे हाँ करना चाहिए या नहीं।
महेश- देखो अभिषेक, तुम्हें हाँ या न में जवाब तो देना ही है। तुम आराम से सोच समझकर ही अपना जवाब देना। इस मामले में कोई जल्दबाजी मत करना मेरे भाई।
अभिषेक- तुम ठीक कह रहे हो यार, चलो छोड़ो इस बात को। क्लास का समय हो रहा है कक्षा में चलते हैं।
इसके बाद हम तीनो कक्षा में चले गए। क्लास अटेंड करने के बाद हम लोग अपने अपने घर निकल गए। रात में खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में बैठा पढ़ाई कर रहा था, तभी अभिषेक के फोने मेरे मोबाइल पर आया। मैंने फोने उठाते हुए कहा।
मैं- हाँ अभिषेक। इस समय फोन सब ठीक तो है न।
अभिषेक- कुछ ठीक नहीं है भाई।
मैं- अरे क्या हुआ यार, तू इतना परेशान क्यों है।
अभिषेक- यार मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ। शुरू शुरू में मुझे भी ऐसा लगता था कि शायद मेरे मन में भी तनु के लिए कुछ है, लेकिन तुझसे बात करने के बाद मुझे समझ में आया कि वो मेरे आकर्षण था। अब तनु के इजहार के बाद वैसी ही इच्छा मेरे मन में फिर से आ रही हैं जैसे पहले आया करती थी। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि ये प्यार का एहसास है या आकर्षण है तनु के प्रति।
मैं- देख यार। मैं तुझे कभी कोई गलत सलाह नहीं दूँगा। अगर तेरे मन में उसके लिए तनिक भी प्यार है तो तू उसे हाँ कर दे। अगर फिर भी तेरे कुछ न समझ में न आए और तू कोई निर्णय न ले पा रहा हो तो अपनी आँख बंद करके अपना एक हाथ अपने दिल पर रखकर ठंडे दिमाक और शांत चित से सोच ले। तुझे जवाब मिल जाएगा। एक बात और कहूगाँ दोस्त तुझसे कि तुझे जो भी हाँ या न कहना है वो कहकर इस मामले को यहीं खत्म कर दे, क्योंकि बोर्ड की परीक्षा सिर पर है। अगर तू ऐसे ही विचलित रहेगा तो कैसे चलेगा भाई। मेरी बात पर अच्छी तरह गौर करने और कल अपने निर्णय तनु को सुना देना।
अभिषेक- धन्यवाद यार। तूने मेरे परेशानी एक मिनट में सुलझा दी। ठीक है अब फोन रख रहा हूँ। कल सुबह स्कूल में मिलता हूँ फिर बात करेंगें।
इसके बाद अभिषेक ने फोन रख दिया। काजल जो अभी तक सोई नहीं थी, मेरे फोन रखने के बाद बोली।
काजल-क्या बात है भैया। किससे चोरी चोरी बातें हो रही हैं।
मैं- अरे कुछ नहीं वो अभिषेक का फोन था उसी से बातें कर रहा था।
काजल- अभिषेक भैया का फोन था या चुपके चुपके अपनी महिला मित्र से बात कर रहे थे।
मैं- चुप कर तू। ज्यादा फालतू में अपना दिमाग मत चलाया कर। इतना दिमाग अगर पढाई में लगाती तो आज पूरी कक्षा में अव्वल आती। चल सो जा अब।
मेरे कहने के बाद पायल मुँह बनाकर करवट बदल ली और सोने लगी। मैंने थोड़ी देर और पढ़ाई की। उसके बाद मैंने किताब बंद की और सो गया।
सुबह उठकर मैं तैयार होकर नाश्ता करने के बाद स्कूल चला गया। वहाँ अभिषेक और महेश मुझे बाहर ही मिल गए। हम तीनो अपनी कक्षा में जाकर अपनी अपनी जगह पर बैठ गए। थोड़ी देर बाद शिक्षक आ गए और क्लास शुरू हो गई। इसी तरह पढ़ाई करते हुए भोजनावकाश का समय हो गया। कक्षा से बाहर आते हुए महेश बाथरूम जाने का बोलकर चला गया। मैं और अभिषेक आकर परिसर में खाली जगह देखकर बैठ गए। बैठने के बाद मैंने अभिषेक से पूछा
मैं- तो फिर क्या सोचा है तुमने तनु के बारे में।
अभिषेक- कल रात तेरे बताए हुए तरीके से मैंने सोचा, तो मुझे लगा कि शायद मेरे दिल के किसी कोने में तनु के लिए कुछ तो है। इसलिए मैंने निर्णय लिया है कि मैं तनु के प्यार के इजहार को स्वीकार कर लेना चाहिए।
अभिषेक की बात सुनकर मैं खुश हो गया और उसे गले से लगाकर बोला।
मैं- ये तुमने बहुत अच्छा किया अभिषेक। मेरा भी यही मानना था कि तुम्हें तनु के प्रपोजल को मान लेना चाहिए।
अभी हम बात कर ही रहे थे कि वहाँ पर तनु आ गई और उसके पीछे पीछे महेश भी आ गया। तनु आकर हम दोनों के पास बैठती हुई बोली।
तनु- क्या बात है। तुम दोनो बड़े खुश दिखाई दे रहे हो। जरा मैं भी तो सुनूँ कि किस खुशी में तुम दोनो एक दूसरे के गले मिल रहे हो।
मैं- ये हम दोनों दोस्तों के बीच की बात है। कुछ समय बाद तुम्हें भी पता चल जाएगा।
उसके बाद हम चारों बैठे हुए इधर उधर की बातें करने लगे। थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद आखिरकार तनु ने अभिषेक से पूछ ही लिया।
तनु- अभिषेक तुमने अभी तक मेरे प्रपोजल का कोई जवाब नहीं दिया। क्या मैं तुम्हें पसंद नहीं हूँ। या तुम किसी और को चाहते हो जिसके लिए मेरा प्रपोजल ठुकरा रहे हो।
अभिषेक- नहीं मैं किसी और से प्यार नहीं करता और मैंने कहाँ तुम्हारा प्रपोजल ठुकराया है। अभी तो मैंने तुम्हें कोई जवाब भी नहीं दिया है।
तनु- तो तुम्हारा क्या जवाब है अभिषेक।
इतने कहकर तनु अभिषेक को देखने लगी। तनु के चेहरे का भाव प्रतिपल बदल रहा था। उसे अभिषेक के जवाब की प्रतीक्षा करना मुश्किल हो रहा था। अभिषेक ने गहरी सांस लेते हुए कहा।
तनु- देखो तनु। मैंने कल बहुत गहराई से तुम्हारे बारे में सोचा। मुझे भी ऐसा लगता है कि मेरे दिल में भी तुम्हारे लिए कुछ जज्बात तो हैं। शायद ये प्यार ही हो। इसलिए मैं तुम्हारा दिल नहीं तोड़ना चाहता। मैं भी तुम प्यार करता हूँ। आई लव यू तनु।
तनु- क्या सच में अभिषेक। थैंक यू सो मच। तुम नहीं जानते अभिषेक मैं आज कितनी खुश हूँ। मुझे पता था कि तुम्हारा जवाब हां में ही होगा।
इतना कहकर तनु अभिषेक से लिपट गई और उसे जोर से अपनी बाहों में भर लिया। बाहों में भरने के बाद तनु ने अभिषेक के होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूमने लगी। अभिषेक की आंखे बड़ी हो गई तनु के ऐसा करने पर, क्योंकि जब कोई लड़की पहली बार ऐसा करती है तो ये सब होना स्वाभाविक है। अभिषेक तो जैसे बुत से बन गया था। जिसे महेश ने होश में लाते हुए कहा।
महेश- कुछ तो शर्म करो तुम दोनों। एकदम बेशर्मों की तरह चूम रहे हो एक दूसरे को। हम दोनों यहां हैं तब ये हाल है। पता नहीं अकेले होंगे तो क्या क्या करोगे।
महेश ने क्या क्या पर बहुत जोर दिया जिसके मतलब हम अभिषेक, मैं और तनु भी समझ गए, तनु वहां से शरमाकर भाग गई और अभिषेक महेश को घूरने लगा। महेश ने दांत निपोरते हुए कहा।
महेश- हो गया अब तुम दोनों का। चल बेटा अभिषेक तेरा मुंह तो मीठा हो गया। अब हमारा भी मुंह मीठा करा।
अभिषेक- अच्छा तुझे मुंह मीठा करना है। आ यहां मेरे पास बैठ मैं तेरा मुंह मीठा करवाता हूँ।
अभिषेक ने महेश को अपने पास बैठने के लिए कहा और अपने होंठ को गोल बनाकर महेश को इशारा किया। अभिषेक की इस हरकत से मेरी हंसी छूट गई। महेश ने अभिषेक को घूरते हुए कहा।
महेश- बकचोद साले। मुझे गे समझता है क्या तू। अभी मेरे इतने बुरे दिन भी नहीं आए हैं कि मुझे तेरा चुम्मा लेना पड़े। अब चुपचाप चल बाहर और मुंह मीठा करवा हम दोनों का।
अभिषेक- तो उसके लिए बाहर जाने की क्या जरूरत में यहीं तेरा मुंह मीठा करवा देता हूँ।
इतना कहकर अभिषेक ने अपनी जेब मे हाथ डाला और लेबिनचूस/कम्पट (आज के जमाने का चॉकलेट जो 5 ₹ में दस मिलती है।) ऑरेंज फ्लेवर का निकाला और महेश को देते हुए बोला।
अभिषेक- ले अपना मुंह मीठा कर। मुझे पहले से पता था कि तू ऐसा ही कुछ करेगा। इसलिए खासतौर से मैंने तेरे लिए ही ली है ये।
लेबिनचूस/कम्पट देखकर महेश का पारा ऊपर चढ़ गया और वो महेश पर भड़कता हुआ बोला।
महेश- ये कम्पट तू अपनी गांड में दाल ले भोस.... ले। तू साले बहुत बड़ा कंजूस है। लड़की ने आगे से चलकर तुझे प्रपोज किया और तू मुझे कम्पट खिला रहा है। पता नहीं तनु को तुझमें क्या दिखा जो वो अपने होशोहवास खो बैठी है। पता नहीं उसका क्या होगा, जो इतना कंजूस प्रेमी मिला है।
महेश ने बात की शुरुआत तो गुस्से से की थी लेकिन बात खत्म होते होते उसकी बात हास्यप्रद हो गई। उसकी बात सुनकर हम दोनों हँसने लगे। जब हमारी हंसी रुकी तो अभिषेक ने कहा।
अभिषेक- चल तू भी क्या याद करेगा कि किसी दिलदार आदमी से पाला पड़ा है। चल तुझे नहर ददोली का सुप्रसिद्ध रसगुल्ला खिलाता हूँ।
रसगुल्ले का नाम सुनकर महेश बहुत खुश हुआ। और अभिषेक का हाथ पकड़कर उसे खींचते हुए स्कूल से बाहर ले जाने लगा। मैं भी दोनों के पीछे पीछे चलने लगा।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।