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Fantasy क्या यही प्यार है

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बोर्ड का एग्जाम होने में बीस बाइस दिन बचे हैं और ये सभी पिकनिक मनाने के लिए राजगिरी जाने का प्लान बना रहे हैं । और प्लान बना क्या रहे हैं बल्कि बना चुके हैं और प्रिंसिपल की अनुमति भी ले लिये है ।
ऐसा तो नहीं होता । कोई भी प्रिंसिपल इसकी अनुमति नहीं देता । हां , परीक्षा हो जाए फिर कहीं जाए । इसके लिए प्रिंसिपल ही नहीं बल्कि पैरेंट्स भी अनुमति दे सकते हैं ।

खैर ! तनु का राजगिरी जाने का प्लान कोई साजिश का हिस्सा लगता है । लड़की है तो वो अभिषेक हो या नयन , किसी के उपर भी झुठा रेप करने का आरोप लगा सकती है।
वो कुछ भी कर सकती है क्योंकि उसका व्यवहार आम लड़कियों जैसा है भी नहीं ।

वैसे मैं भी नालंदा और राजगिरी बहुत साल पहले गया था । बहुत ही खूबसूरत जगह है ।

बहुत बढ़िया अपडेट माही जी । आउटस्टैंडिंग ।
 

mashish

BHARAT
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सोलहवाँ भाग
अभिषेक से बात करके मुझे बहुत सुकून मिला। उससे बात करके मुझे अनुमान हुआ कि मेरा शक अभिषेक के ऊपर निराधार है। फिर हम दोनों हँसते हुए वहाँ से चले गए। शायद मेरी खुशी के आगे अभिषेक को यह ध्यान भी नही रहा कि तनु उसके इंतजार कर रही है। हम दोनो अपनी कक्षा में आ गए। जब वहाँ पर तनु दिखाई नहीं दी तो अभिषेक ने अपने सिर पर हाथ मारते हुए कहा।
अभिषेक- अरे यार। ये क्या हो गया। तेरे चक्कर में मैं तनु को वहीं छोड़कर चला आया। तू रुक मैं आता हूँ कुछ देर में।
मैं-जा बेटा जा। आज तो तेरी बैंड बजने वाली है (मैंने ये बात हँसते हुए कही थी)
अभिषेक मुझे कक्षा में छोड़कर चला गया। और बाहर जहाँ तनु को छोड़कर आया था वहाँ देखने लगा, लेकिन तनु वहाँ नहीं थी। अभिषेक यहाँ वहाँ ढूंढने के बाद वापस कक्षा मे चला आया। मैने उसे देखते हुए कहा।
मैं- क्या हुआ। तनु नहीं मिली क्या।
अभिषेक- नहीं यार पता नहीं वो कहाँ चली गई।वो वहाँ थी ही नहीं जहाँ में उसे छोड़कर आया था।
मै- अरे यार गई कहाँ होगी। यहीं स्कूल में ही होगी। अभी थोड़ी देर में आ जाएगी। वैसे लगता है कि वो तुझसे नाराज हो गई है तेरे ऐसे चले आने से। अपना पिछवाड़ा मजबूत कर ले, क्योंकि आज तेरे पिछवाड़े पर बहुत मार पड़ने वाली है।
अभिषेक- ये सब तेरी वजह से ही हुआ है और तू मेरे ही मजे ले रहा है। ले भाई तेरा समय है ले ले मजे मेरे। एक दिन ऐसे ही मैं भी तेरे मजे लूँगा देख लेना।
मैं- मैं तेरी तरह पागल नहीं हूँ जो इन प्यार व्यार के चक्करों में पडू। और वैसे भी मेरे पास इस सब फालतू चीजों के लिए समय नहीं है।
अभिषेक- इसका मतलब तू ये कहना चाहता है कि मैं पागल हूँ। रुक साले अभी तुझे बताता हूँ।
इतना कहकर अभिषेक मुझे मारने को हुआ तो मैं वहाँ से भाग लिया। अभी मैं दरवाजे के पास पहुँचा ही था कि बाहर से आती तनु से टकरा गया। जिसके कारण उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो जमीन पर गिरने को हुई तो मैंने उसे थाम लिया। उसे थामने के लिए मुझे उसकी कमर को पकड़ना पड़ा। मैंने तनु को जमीन पर गिरने नहीं दिया। बस फिर क्या था। तनु को एक बहाना मिल गया और वो मेरे ऊपर भड़क गई।
तनु- ये क्या बदतमीजी है नयन। तुम्हें शर्म नहीं आती मेरे साथ ऐसी हरकत करते हुए।
मैं- अरे मैंने क्या किया है। मैंने तो तुम्हें नीचे गिरने से बचाया है ताकि तुम्हें चोट न लगे।
तनु- एक तो खुद मुझसे जानबूझकर टकराते हो और ऊपर से बोलते हो कि मुझे गिरने से बचाया तुमने। मैं अच्छे से जानती हूँ कि तुम्हारे मन में मेरे लिए क्या है।
मै- देखो तनु बहुत हुआ अब। मैं तुमसे जानबूझ कर नहीं टकराया था वो तो बस अचानक से तुम आ गई इसलिए मैं टकरा गया तुमसे, लेकिन इसको इतना बड़ा इश्यू बनाने की क्या जरूरत है। तुम तो मुझे बहुत दिनों से जान रही हो। मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई गलत ख्याल नहीं है तनु। विश्वास करो मेरा।
तनु- तुम्हारा विश्वास करू। मुझे अब पता चल गया है कि तुम किस टाइप के लड़के है।
अभिषेक जो दूर खड़ा इस बात को सुन रहा था। तनु ने शायद अभिषेक के ऊपर ध्यान ही नहीं दिया कि अभिषेक भी कक्षा में है, क्योकि जब मुझसे टकराने के बाद तनु को मैंने पकड़कर खड़ा किया तो अभिषेक की तरफ उसकी पीठ हो गई थी, इसलिए अभिषेक को उसने नहीं देखा था। तनु की बात सुनकर अभिषेक ने तनु से तेज स्वर में कहा।
अभिषेक- तनु। ये क्या अनाप सनाप बके जा रही हो नयन के बारे में।
तनु- अभिषेक। तुम। तुमने देखा नहीं नयन ने मेरे साथ क्या किया है।
अभिषेक- हाँ मैंने देखा की नयन ने तुम्हारे साथ क्या किया है। और ये भी देख रहा हूँ कि तुम नयन के साथ क्या कर रही हो। तुम्हारे दिमाग फिर गया है क्या। तुम नयन को ऐसे कैसे उलटा सीधा बोल सकती हो। तुम कितना जानती हो नयन के बारे में। और मैं उसे जानता हूँ बचपन से। कक्षा की कोई भी लड़की नयन के बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकती और तुम नयन के ऊपर इलजाम लगा रही हो। अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसका मुँह तोड़ देता।
मैं- ये क्या बोल रहा है तू अभिषेक। तुझे तनु से ऐसे बात नहीं करना चाहिए। उसको कोई गलतफहमी हो गई होगी मेरे लिए। तो उसके लिए तू उसे इतनी खरी-खोटी सुना रहा है। दोस्तों के बीच तो ये सब होता ही रहता है। तनु अभिषेक की बात का बुरा मत मानना। ये तो बस ऐसे ही बोल गया तुम्हें।
मुझे कुछ कुछ समझ में आ रहा था कि अभिषेक का तनु को वहाँ अकेला छोड़कर आना तनु के गुस्से का मुख्य कारण हो सकता है। और इसी गुस्से में वो मुझे इतना कुछ कह गई। लेकिन अभिषेक को ऐसे रिएक्ट नहीं करना चाहिए था। अगर अभिषेक कुछ देर और यहाँ रहा तो दोनों में शीतयुद्ध शुरू होने की संभावना है इसलिए मैं अभिषेक को कक्षा से बाहर निकाल कर ले आया और उसे समझाते हुए कहा।
मै- ये सब क्या था यार। तुझे तनु से साथ ऐसे पेश नहीं आना था। वो अभी गुस्से में थी, क्योंकि तुम उसे वहाँ अकेला छोड़कर आ गए। और तुझसे पहले मैं उसके सामने आ गया इसलिए उसको पूरा गुस्सा मेरे ऊपर निकल गया। अब अपना गुस्सा थूक दे यार और चिल मार। तू गुस्से में बिलकुल भी चिंम्पैंजी लगता है। कहीं ऐसा न हो कि तुझे सर्कस वाले न देख लें और अपने साथ सर्कस में ले जाएँ। तब तो मुझे अपने दोस्त से मिलने के लिए रोज सर्कस जाना पड़ेगा।
मैंने अभिषेक का गुस्सा शान्त करने के लिए ही ऐसी कमेडी तरह की बात की थी और इसका असर भी हुआ। अभिषेक का गुस्सा शान्त हो गया। अब उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। थोड़ी देर बाहर बैठने के बाद भोजनावकाश के समाप्त होने की घंटी बजी तो हम दोनो कक्षा की तरफ चल दिए। कक्षा में पहुँचने के बाद अभिषेक ने एक नजर तनु को देखा और फिर अपनी नजर उससे हटा ली। मैंने भी तनु की तरफ देख कर आँखों से इशारा किया कि अब सब ठीक है अभिषेक गुस्से में नही है अब। तो तनु की तरफ से मुझे कुछ दिनों से मिल रही प्रतिक्रिया ही मिली। उसने अपना मुँह सिकोड़ लिया। मुझे उसकी इस प्रतिक्रिया को खास तवज्जो नहीं दी। क्योंकि अभी जो कुछ भी हुआ था। उसके बाद ऐसी प्रतिक्रिया का आना स्वाभाविक था।
बहरहाल मैं और अभिषेक आकर अपनी जगह पर बैठ गए। इधर हम दोनों के कक्षा से जाने के बाद अभिषेक के कहे हुए अंतिम शब्द कि अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसके मुँह तोड़ देता। तनु के कानों मे गूँज रहा था। उसे लग रहा था कि अभिषेक ने सब के सामने उसकी बेइज्जती कर दी है। जबकि उस समय कक्षा में हम तीनों के अलावा और कोई नहीं था। लेकिन तनु ने इस बात को अपने अहम पर ले लिया। उसके दिमाग में कुछ खुराफात चलने लगा। लेकिन अभी के लिए उसने अपने आप सो संभाल लिया था। अभिषेक ने अभी तक तनु से कोई बात नहीं की थी और न ही तनु ने कोई बात करने की कोशिक की थी। मैंने ही अभिषेक को कोहनी मारते हुए कहा।
मैं- अबे क्या कर रहा है तू। कम से कम एक बार बात तो कर तनु से।
अभिषेक- तू चुप कर साले। मैं कोई बात-चीत नहीं करने वाले तनु से।
मै- अगर बातचीत नहीं करेगा तो तुम दोनों की नाराजगी कैसे दूर होगी। नाराजगी दूर करने के लिए बात-चीत तो करनी पड़ेगी न।
अभिषेक- अब मैं तनु से तभी बात करूँगा जब वो स्वयं आकर मुझसे बात करेगी। अब इस बारे में ज्यादा बहस मत कर मुझसे।
तभी शिक्षक ने कमरे में प्रवेश किया तो मैं और अभिषेक शान्त हो गए। इसी तरह कक्षा चलती रही और मैं अभिषेक मन लगाकर पढ़ाई करते रहे, लेकिन भोजनावकाश के समय हुई घटना के बाद मेरा और अभिषेक का मन पढ़ाई में और दिनों की अपेक्षा नहीं लग रहा था। किसी तरह छुट्टी हुई और हम अपने घर जाने लगे। रास्ते में एक बार भी तनु ने अभिषेक और न ही तनु ने अभिषेक से बात करने की कोशिश की। हम सब अपने घर चले गए। मैं इस घटना के बारे में ज्यादा सोचना नहीं चाहता था, क्योंकि जितना ज्यादा मैं सोचता उतना ज्यादा उलटा सीधा खयाल मेरे दिमाग में आता।
अगले दिन हम सब फिर स्कूल पहुँचे। महेश भी आज स्कूल आया था। आज भी तनु और अभिषेक ने बात करने की कोशिश नहीं की एक दूसरे से। महेश ये देखकर हैरान था कि एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया जो अभिषेक और तनु ईलू ईलू करने की बजाय एकदम शांत बैठे हैं। भोजनावकाश के समय महेश से जब न रहा गया तो उसने मुझसे पूछ ही लिया।
महेश- अरे नूनू भाई एक बात तो बताना। मैं सुबह से देख रहा हूँ कि अभिषेक और तनु आपस में कोई बातचीत ही नहीं कर रहे हैं। अभी परसों तो दोनों ऐसे व्यस्त थे एस दूसरे में कि उन्होंने हमारी तरफ भी ध्यान नहीं दिया था। और कल मैं आया नहीं था। तो इस एक दिन में आखिर ऐसा क्या हो गया कि दोनो लैला मजनू एकदम शांत बैठे हुए हैं।
महेश के पूछने के बाद मैंने उसे कल हुई सारी घटना के बारे में अवगत करा दिया जिसे सुनने के बाद महेश ने कहा।
महेश- एक बात सच कहूँ यार। तनु पर मुझे कुछ शक हो रहा है। उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो चल रहा है। क्या हमें अभिषेक को उससे अलग होने के लिए बोल देना चाहिए।
मैं- कैसी बात कर रहा है यार तू। बिना किसी ठोस सबूत के हम केवल शक कर सकते हैं। और शक के बिना पर उठाया गया कोई भी कदम सही नहीं होता। कल तक मुझे भी ऐसा ही लगता था, लेकिन ठंडे दिमाग से सोचने के बाद मुझे भी एहसास हुआ कि शायद मैं सही नहीं सोच रहा था। कल तनु ने जो किया वो उसका गुस्सा था जो अभिषेक के बजाय मेरे ऊपर निकाल दिया उसने।
महेश- भगवान करे तू जो सोच रहा है वैसा ही हो, लेकिन मेरा सिक्स सेंस कह रहा है कि तनु कुछ न कुछ बड़ा सोच रही है।
मैं- तेरा सिक्स सेंस। साले तेरे पास एक भी सेंस नहीं है और तू सिक्स सेंस से सोच रहा है। सोचना तेरे बस की बात नहीं है। और जो जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दे। समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।
मेरी बात सुनकर महेश मुस्कुराने लगा। इसी तरह दो दिन बीत गए, लेकिन अभिषेक और तनु में कोई बात नहीं हुई। अगले दिन मैं अभिषेक और महेश भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए। तभी वहां तनु आ गई। और आते ही मुझसे और महेश से बोली।
तनु- नयन और महेश कैसे हो तुम दोनों।
तनु से हम दोनों को इतने प्रेम से बात करने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि पिछले लगभग दो महीने में आज पहली बार हुआ था जो तनु ने तने प्रेम से हम दोनो से बात की थी। उसकी बात सुनकर हमें लगा कि शायद हम दोनों उसके बारे में गलत ही सोचते थे। क्योंकि अभिषेक और तनु का नया नया प्यार था और उनको थोड़ा अलग स्पेस चाहिए था इसलिए तनु हम दोनों से बात नहीं करती थी ठीक से। इसलिए तनु के इतने प्रेम से बोलने के बाद हम दोनों को बहुत खुशी हुई। हम दोनों ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैं और अभिषेक- हम दोनों बहुत बढ़िया हैं।
मैं- तुम कैसी हो तनु।
तनु- मैं बिलकुल भी अच्छी नहीं हूँ।
मैं- क्यों क्या हुआ तुम्हें।
तनु- अरे यार तुम्हारा दोस्त पिछले तीन दिन से साडू मुँह बनाकर घूम रहा है। मुझसे बात ही नहीं करता तो मैं कैसे अच्छी हो सकती हूँ।
इतना बोलकर तनु अभिषेक की तरफ मुखातिब होकर अभिषेक से बोली।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
nice update mahi ji ye fantasy story kese hai yha to romance hi dikh rha hai story main
 
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mashish

BHARAT
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सत्रहवाँ भाग


तनु- अरे यार तुम्हारा दोस्त पिछले तीन दिन से साडू मुँह बनाकर घूम रहा है। मुझसे बात ही नहीं करता तो मैं कैसे अच्छी हो सकती हूँ।

इतना बोलकर तनु अभिषेक की तरफ मुखातिब होकर अभिषेक से बोली।

अभिषेक- मुझे माफ कर दो यार। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई थी उस दिन जो मैंने नयन को उलटा सीधा बोल दिया था। वो क्या है न कि तुम दोनो जब मुझे नजरअंदाज करके चले गए थे तो मुझे तुमपर बहुत गुस्सा आया। मैं तुमसे नाराज हो गई थी।और यही जताने के लिए कक्षा में आ रही थी और नयन से टक्कर हो गई। एक तो मैं पहले से ही गुस्सा थी ऊपर से ये टक्कर हो गई तो मुझे और गुस्सा आ गया और जो गुस्सा मैं तुमपर निकालना चाहती थी वो नयन पर निकल गया। मैंने दो दिन इस बारे में सोचा तब मुझे एहसास हुआ कि मैंने गलती की है। इसलिए मैं तुमसे माफी माँग रही हूँ। मुझे माफ कर दो अभिषेक, प्लीज, प्लीज।

तनु की बात सुनकर हम सब तनु को देखने लगे। उसकी बात मुझे भी सही लग रही थी, लेकिन महेश था जो उसे अभी भी तनु की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था, परंतु वो चुपचाप बैठा हुआ था। तनु की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।

अभिषेक- अगर तुम्हें अपनी गलती का एहसास है तो तुम मुझसे नहीं नयन से माफी माँगो। अगर उसने तुम्हें माफ कर दिया तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है।

तनु- नयन मुझे मेरी उस दिन की गलती के लिए माफ कर दो। मैंने उस दिन जो कुछ भी किया वो गलत था, लेकिन मैं गुस्से में थी इसलिए मुझे सही गलत कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। प्लीज मुझे माफ कर दो।

मैं- तुम्हें माफी माँगने की जरूरत नहीं है तनु। मैं तो उसी दिन समझ गया था कि तुमने गुस्से में ये सब किया है। इसलिए मैंने तुम्हें उसी दिन माफ कर दिया था। अभिषेक अब तू भी गुस्सा थूक दे और तनु को माफ कर दे।

मेरी बात सुनकर अभिषेक ने अपना मुँह पीछे किया और आ... थू किया। उसे देख कर महेश ने कहा।

महेश- अब ये क्या था बे।

अभिषेक- अभी तो नयन ने कहा न कि अपना गुस्सा थूक दो। तो मैं वही कर रहा था अपना गुस्सा थूक रहा था।

उसकी बात सुनकर हम सब हँसने लगे। उसके बाद तनु के कहा।

तनु- तो अभिषेक अब तो तुम मुझसे नाराज नहीं हो न। मुझे माफ कर दिया न तुमने।

अभिषेक- हां माफ कर दिया मैंने तुम्हें। लेकिन आगे से ऐसा कभी मत करना यार। ये मेरा भाई है।

इतना सुनकर तनु अभिषेक के ऊपर टूट पड़ी और उसके ऊपर चुम्बनों की झड़ी लगा दी। अभिषेक बहुत मुश्किल से तनु को अपने से अलग करते हुए कहा।

अभिषेक- ये सब क्या है। तुम पागल हो क्या। जब देखो तब तुम मेरे ऊपर चढ़ जाती हो और चूमने लगती हो। ये भी नहीं देखती कि हम लोग कहाँ बैठे हुए हैं। अगर मैं अकेले में तुम्हें मिल जाऊँ तो पता नहीं तुम मेरे साथ क्या करोगी।

तनु- ये तो मेरे प्यार जताने का तरीका है अभिषेक। कभी अकेले में मिलो तुम।तुम्हें खुद पता चल जाएगा कि मैं क्या करूँगी।

अभिषेक- चलो अब बहुत हुआ तुम्हारा प्यार। अब कक्षा में चलते हैं वहीं बैठकर बात करेंगे।

तनु- तुम सब चलो मैं कुछ देर में आती हूँ। मुझे अपनी एक सहेली से कुछ जरूरी काम है।

तनु की बात सुनकर मैं अभिषेक और महेश अपनी कक्षा में जाने के लिए उठ गए। फिर मैं अभिषेक से बाथरूम जाने का बोलकर बाथरूम में चला गया। जब मैं बाथरूम से वापस होकर लौटा तो देखा कि तनु किसी से बात कर रही है। उसे देखकर मैं सोच में पड़ गया कि तनु ने तो बोला था कि उसे अपनी किसी सहेली से जरूरी काम है, तो क्या ये उसकी सहेली है। लेकिन ये उसकी सहेली कब से बन गई। हो सकता है कुछ और बात कर रहीं हों दोनो। मैंने अपने दिमाक को झटकते हुए अपनी कक्षा में आ गया। थोड़ी देर बाद तनु भी कक्षा में आ गई। मैंने बाहर वाली बात उससे पूछना जरूरी नहीं समझा क्योंकि वो कोई इतनी बड़ी बात नहीं थी और पूछने का मतलब था कि तनु फिर से शक कर लेती की मैं उसकी जासूसी कर रहा हूँ।

खैर शिक्षक आए और कक्षा शुरू हो गई। इसी तरह समय बीतता गया और स्कूल की छुट्टी हो गई। हम लोग अपने घर की तरफ चल पड़े। रास्ते में मुझसे महेश ने कहा।

महेश- नूनू भाई। तुम्हें क्या लगता है कि तनु सच में पहले जैसी हो गई है।

मैं- हाँ मुझे तो यही लग रहा है कि जो हमने तनु के बारे में सोचा था वो गलत था। तनु वैसी ही थी जैसी वो पहले थी।

महेश- लेकिन भाई। मुझे अब भी तनु के ऊपर शक है। मुझे लगता है कि उसके दिमाग में कुछ-न-कुछ चल रहा है।

मैं- तेरे पास दिमाग है जो तू सोच रहा है। ऐसा कुछ भी नहीं है। बस उसने तेरा प्यार स्वीकार नहीं किया इसलिए तू उसपर लांछन लगा रहा है। अब अपना ज्यादा दिमाग मत इस्तेमाल कर और चुपचाप घर चल।

इसी तरह दिन बीतते रहे और हम चारों की दोस्ती फिर से पहले जैसी हो गई, लेकिन महेश का तनु के ऊपर का शक अभी भी मिटा नहीं था। तनु की हम लोगों से मित्रवत बातचीत को दोबारा शुरू हुए 15 दिन बीत चुके थे। हम लोग भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए बाते कर रहे थे। तभी तनु ने कहा।

तनु- एक बात है जो मेरे मन में कई दिन से आ रही है। अगर तुम लोग सुनो तो मैं कहूँ।

अभिषेक- हाँ क्यों नहीं बताओ तो क्या बात है।

तनु- देखो। अब हम लोगों की बोर्ड परीक्षा को ज्यादा से ज्यादा 20-22 दिन बचे हुए हैं। और इस परीक्षा के बाद हो सकता है कि हमारी मुलाकात दोबारा न हो। और अगर होती भी है तो कभी कभार होगी। पता नहीं कौन किस कॉलेज में जाएगा। कौन अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाएगा। कौन पढ़ाई बन्द कर देगा।

महेश- हाँ ये बात तो तुम बिलकुल सही कह रही हो। इस परीक्षा के बाद तो बहुत मुश्किल से मिलना होगा।

तनु- तो मैं ये सोच रही थी कि इस स्कूल से जाते जाते हम अपनी इस दोस्ती को कुछ यादगार बनाएँ और पिछली जो भी बुरी यादें हमारे साथ रही हैं अब तक उन्हें पीछे छोड़कर कुछ अच्छी यादों को इस स्कूल से जाते समय अपने साथ ले जाएँ।

नयन- हाँ यार बात तो तुम्हारी एकदम सही है तनु। इन सब बातों पर तो हमने कभी गौर किया ही नहीं, लेकिन ये हमें इसके लिए करना क्या होगा। मेरे मतलब है कि हम अपने स्कूल के बचे हुए कुछ दिन यादगार कैसे बनाएँ।

तनु- हाँ तो सुनो। मैं ये कह रही थी कि क्यों ने हम दो-तीन दिन के लिए कहीं बारह घूमने चलें। बाहर मतलब। किसी दूसरे राज्य में। और मैंने तो जगह भी सोच ली है। राजगिरी। पटना शहर से कुछ घंटे की दूरी पर है ये। मेरी एक सहेली वहाँ घूमकर आई है बता रही थी कि बहुत ही अच्छी जगह है। क्या बोलते हो तुम लोग।

अभिषेक- बात तो तुम्हारी सही है तनु, लेकिन कुछ दिन बाद परीक्षा है और इस समय जाने पर पढ़ाई का नुकसान भी होगा। और सबसे बड़ी बात इतनी बड़ी बात। इतनी दूर घर वाले जाने की इजाजत भी नहीं देंगे। मुझे तो गाँव के पास नहर पर हगने जाने पर भी डाट सुननी पड़ती है तो पटना जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता और वो भी अकेले जाने का।

तनु- अरे यार। पहले मेरी बात तो पूरा सुन लो। हम लोग अकेला नहीं जा रहे हैं। अपने स्कूल के और भी बच्चे और शिक्षक भी साथ में चलेंगे। तब तो तुम्हारे मम्मी पापा को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

अभिषेक- हाँ अगर ऐसा होता है तो फिर मम्मी पापा को मैं मना लूँगा किसी तरह। और शिक्षक के जाने पर पापा शायद मना भी नहीं करेंगे।

महेश- लेकिन ये होगा कैसे। क्या तुमने सभी से बात कर ली है जाने के लिए।

तनु- अभी नहीं। पहले मैं तुम लोगों से सहमति तो ले लूँ, क्योंकि अगर तुम लोग ही तैयार नहीं हुए तो वहाँ जाने का कोई मतलब ही नहीं है। अगर तुम लोग तैयार हो तो बात करते हैं अन्य छात्रों और प्रधानाचार्य महोदय से।

तनु की बात सुनकर हम सब एक दूसरे को देखने लगे। सच में तनु का प्लान वाकई गजब का था। इसलिए किसी की आपत्ति का प्रश्न ही नहीं उठता था। इसलिए हम सभी की सहमति बन गई। तो तनु ने कहा।

तनु- तो चलो सबसे पहले अन्य छात्र/छात्राओं से बात करते हैं। अगर ज्यादा लोग तैयार हो गए चलने के लिए तो प्रधानाचार्य महोदय को मनाने में आसानी होगी।

तनु की बात सुनकर हम सब अपनी कक्षा में चले गए और छात्र/छात्राओं को अपने इस प्लान के बारे में बताया। जिसे सुनकर ज्यादा छात्र/छात्राएँ तो नहीं किंतु 15 लोगों ने अपनी सहमति जता दी। किन्तु हम सबको मिलाकर भी संख्या 20 नहीं पहुँच रही थी तो हम लोग बाहर आकर आपस में बात करने लगे। तनु ने कहा।

तनु- क्यों न हम लोग कक्षा 10 के विद्यार्थियों से बात करें आखिर उनका भी बोर्ड की परीक्षा है। अगर वो हमारे साथ चलते हैं तो उनका भी दिमाग फ्रेश हो जाएगा। और घूम भी लेंगे सभी।

हमें तनु की बात ठीक लगी। हम लोगों ने कक्षा 10 के विद्यार्थियों से बात की तो वहाँ से भी 25 विद्यार्थी मिल गए। फिर हमने अपनी बात को प्रधानाचार्य महोदय के सामने रखने की सोची। और उनके कक्ष की तरफ चल पड़े। हम लोगों ने अनुमति लेकर उनके कक्ष में गए और उनके समक्ष अपनी बात रखी तो उन्होंने कहा।

प्रधानाचार्य महोदय- तुम्हारा प्लान तो बहुत अच्छा है, लेकिन तुम लोग शायद यह भूल रहे हो कि बोर्ड की परीक्षाएँ नजदीक हैं और वहां जाने से पढ़ाई का नुकसान भी हो सकता है।

तनु- नहीं सर पढ़ाई का नुकसान बिलकुल नहीं होगा। आप ही सोचिए सर कि साल भर से वही वही चीज पढ़ते पढ़ते विद्यार्थी परेशान हो जाते हैं। मानसिक दबाव में रहने लगते हैं। अगर इस बीच किसी अच्छी जगह पर घूम कर आया जाए तो दिमाग के सारे दबाव और परेशानियाँ दूर हो जाती हैं और दिमाग एकदम तरोतोजा हो जाता है। और वैसे भी कुछ समय बाद हम सब एक दूसरे से बहुत कम मिल सकेंगे तो कम से कम इसी बहाने हम कुछ यादें संजो कर रखना चाहते हैं।

प्रधानाचार्य महोदय- बात तो तुम्हारी ठीक है तनु, लेकिन मैं कोई निर्णय अकेले नहीं ले सकता। क्योंकि मैं अगर तैयार भी हो जाता हूँ तो तुम लोगों को अकेले तो भेज नहीं सकता। इसके लिए कम से कम 4-5 शिक्षक भी साथ जाएँगे। तो हम उनसे बात कर लें पहले फिर सोचेंगे इसके बारे मैं। शाम तक तुम लोगों को बताते हैं कि क्या निर्णय लिया गया है।

इसके बाद हम लोग प्रधानाचार्य के कक्ष से बाहर आ जाते हैं और अपनी कक्षा में जाते हैं तो कक्षा में शिक्षक मौजूद थे और पढ़ा रहे थे। हमें देखते ही शिक्षक ने कहा।

शिक्षक- कहाँ से आ रही है चंडाल चौकड़ी घूम कर।

महेश- ये चंडाल चौकड़ी प्रधानाचार्य महोदय के कक्ष से सफर करते हुए अभी अभी अपनी कक्षा में प्रवेश कर रही है।

महेश ने ये बात मजाकिया लहजे में कही। जिसे सुनकर सारे विद्यार्थी हँसने लगे। शिक्षक ने हमें घूर कर देखा तो हम जल्दी से अपनी सीट पर बैठ गए। स्कूल की छुट्टी होने के कुछ देर पहले ही चपरासी ने आकर हमें सूचित किया कि हम चारों लोगों को प्रधानाचार्य महोदय ने अपने कक्ष में बुलाया है। चपरासी की बात सुनकर हम चारों प्रधानाचार्य महोदय के कक्ष की तरफ चल पड़ें।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

AWesome update
 
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Ankitarani

Param satyagyani...
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दसवाँ भाग

महेश मेरी बात सुनकर बहुत खुश हुआ और वहां से चल गया। महेश के जाने के बाद मैंने अभिषेक को देखा, उसका चेहरा उतर हुआ था। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

मैं- क्या बात है अभिषेक तू इतना गुस्सा क्यों हो गया। पहले तो तू महेश से ऐसे बात नहीं करता था। अब क्या हो गया है तुझे।

अभिषेक- पता नहीं यार जब भी महेश तनु की बात छेड़ता है मुझे पता नहीं क्या हो जाता है। मुझे उससे ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी, लेकिन उस समय मुझे पता नहीं क्या हो गया था।

मैं- चल छोड़ इस बात को। कक्षा में चलते हैं। शिक्षक के आने का समय हो गया है।

मैं और अभिषेक अपनी कक्षा में आ गए। जहां पर महेश अभी भी बहुत होकर बैठा था। अभिषेक उसके पास जाकर बैठ गया और उससे बोला।

अभिषेक- भाई मुझे माफ़ कर दे यार। तुझे उस समय गुस्से में आकर पता नहीं क्या क्या बोल दिया था। मुझे ऐसे तुझसे बात नहीं करनी चाहिए थी। भूल जा उस बात को और माफ कर दे मुझे।

महेश- कोई बात नहीं यार होता है ऐसा। लेकिन एक बात मुझे समझ नहीं आती की तुझे गुस्सा किस बात पर आया।

मैं-(बात बदलते हुए) अब छोड़ न उस बात को। हम तेरे साथ रहेंगे न। अब तू कल के बारे में अच्छा अच्छा सोच।

उसके बाद हमने अपनी पढ़ाई खत्म की और अपने अपने घर को चल दिये। रात को खाना खाते समय पापा ने कहा।

पापा- नयन बेटा तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है।

मैं- बहुत अच्छी चल रही है पापा।

पापा- एक काम था तुमसे। अगर ज्यादा जरूरी न हो तो तुम कल स्कूल मत जाओ।

मैं- कुछ काम है क्या पापा। जो आप छुट्टी के लिए बोल रहे हैं।

पापा- कल मैं और तुम्हारी अम्मा तुम्हारी बुआ के यहां जा रहे हैं। उनकी तबियत ठीक नहीं है तो घर में कोई नहीं रहेगा। इसलिए कल तुमको घर में रुकना है।

मैं- ठीक है पापा जैसा आप कहें।

उसके बाद खाना खाकर मैं और काजल सोने के लिए चले गए। कमरे में आने के बाद काजल ने कहा।

काजल- भैया क्या कल मैं भी छुट्टी ले लूँ स्कूल से।

मैं- तू किसलिए छुट्टी लेगी, पढ़ाई का नुकसान होगा तेरा।

काजल- नहीं होगा भैया। कल पापा और अम्मा नहीं रहेंगे तो मैं भी नहीं जाऊंगी स्कूल।

मैं- चल ठीक है। मत जाना, अब सो जा चुपचाप।

उसके बाद मैं चद्दर, और बिछौना लेकर बाहर आ गया। बाहर बहुत अच्छी हवा चल रही थी। मैं अपना बिछौना खटिया पर बिछाया और लेटकर सो गया।

सुबह उठकर मैंने अभिषेक को फोन करके अपने आज स्कूल न आने के बारे में बता दिया। जिसे सुनकर अभिषेक बोला।

अभिषेक- तू नहीं आ रहा है तो मैं भी नहीं जा रहा हूँ आज स्कूल। आज मैं भी आराम करूँगा।

मैं- अरे भाई तू चला जा स्कूल, आज महेश तनु को प्यार का इज़हार करने वाला है। तू भी नहीं जाएगा तो वो सोचेगा की हम दोनों जानबूझ कर आज स्कूल नहीं गए। तू रहेगा तो कम से कम वो कुछ गलत नहीं सोचेगा।

अभिषेक- उसको करना है तो करे वो इज़हार अपने प्यार का। उससे मुझको क्या। और उसके सोचने से की हम जानबूझकर स्कूल नहीं आए। उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।

मैं- चल ठीक है। जैसा तुझे सही लगे। तो कल मिलते हैं फिर स्कूल में।

उसके बाद मैंने फोन रख दिया। सुबह अम्मा पापा बुआ के यहां चले गए। मैं और काजल घर में खाली बैठे थे तो हम दोनों ने लूडो खेलने का सोचा सांप सीढ़ी वाला। काजल लूडो ले आई और हम दोनों खेलने बैठ गए। पहली चाल काजल ने चली छः आया। फिर चली फिर छः आया। फिर पांच आया। काजल बहुत खुश हुई और अपनी चाल चली।

मेरी बारी आई तो मेरी एक दो चार और पांच के अलावा और कोई नम्बर आ ही नहीं रहा था। जब मेरी चाल शुरू हुई तो काजल सीढ़ी चढ़ते हुए 99 पर पहुंच गई थी। अगली चाल में मैं हार गया। काजल खुशी से उछल पड़ी। और बोली।

काजल- हुर्रे मैंने आपको हरा दिया भैया।

मैं- ज्यादा खुश मत हो। इस बार तेरी तकदीर अच्छी थी इसलिए जीत गई। अगली बार ऐसा नहीं होगा। चलो दूसरी पारी शुरू करो फिर बताता हूँ तुमको।

अभी हम दूसरी पारी शुरू करते उससे पहले ही महेश का फ़ोन मेरे मोबाइल पर आया। मैं समझ गया कि भोजनावकाश का समय हो गया है और ये मुझे और अभिषेक को स्कूल में न देखकर भड़का हुआ होगा। मैंने काजल से दूर जाकर अपना फ़ोन उठाया।

मैं- हाँ महेश।

महेश- महेश को अपनी गांड में डाल ले साले। तुम दोनों ने मुझे बेवकूफ बनाया है मुझे धोखा दिया है। तुम दोनों ने मेरा साथ देने के लिए कहा था, लेकिन तुम दोनो नहीं आये। तुम दोनों साले मेरे दोस्त नहीं दुश्मन हो। मैंने रात भर जागकर तरह तरह के तरीके सोचता रहा कि तनु को ऐसे बोलूंगा। वैसे बोलूंगा। उसको अपने प्यार का एहसास करवाऊंगा। उसे मनाऊंगा, लेकिन तुम दोनों ने मेरे अरमानों पर पानी फेर दिया। मिलो कल दोनों स्कूल में तुम दोनों की अच्छे से बैंड बजाता हूँ मैं।

मैं- अब गांडू शांत हो जा। पहले मेरी बात तो सुन। बहुत जरूरी काम आ गया था इसलिए स्कूल नहीं आ पाया। और अभिषेक को इसके बारे में बताया था मैंने।

महेश- ऐसा कौन सा जरूरी काम आ गया जो मेरे प्यार की शुरुआत होने से पहले ही उसे खत्म करने के लिए रास्ते में आ गया।

मैं- अरे यार मेरी बुआ की तबियत बहुत खराब थी। तो पापा और अम्मा उनके यहां चले गए। भैसों के चारा पानी के लिए मुझे घर में रुकना पड़ा।

महेश- माफ़ करना नूनू भाई। तुम्हारा काम मेरे वाले से ज्यादा जरूरी था। गुस्से में पता नहीं क्या क्या बोल गया तुझे। दिल पे मत लेना भाई।

मैं- अरे कोई बात नहीं यार। कल मिलते हैं फिर।

महेश- नूनू भाई, मैंने रात भर सोचा था और बहुत हिम्मत जुटाई थी। अब मुझे फिर से हिम्मत जुटानी पड़ेगी भाई। और इस अभिषेक के बच्चे नेभी मुझे कुछ नहीं बताया कि वो स्कूल नहीं आ रहा है।

मैं-(हंसकर) तो आज रात फिर से जागकर हिम्मत जुटा और कल कर दे अपने प्यार का इज़हार। अब फोन रखता हूँ काल मिलते हैं स्कूल में।

इसके बाद मैंने फ़ोन रख दिया और वापस आकर लूडो खेलने लगा। लेकिन मेरी किस्मत आज बहुत खराब थी लूडो में। 5 बाजी खेली हमने और मैं पांचों में हार गया। मेरे हारने पर काजल बहुत खुश हुई। उसको खुश देखकर मुझे भी बहुत खुशी हुई।


रात को 8 बजे के करीब अम्मा पापा बुआ के घर से वापस आ गए। अम्मा ने सबके लिए खाना बनाया और सभहि खाना खाकर सो गए। सुबह उठकर मैं और काजल नियत समय से स्कूल के लिए चल पड़े।

जब मैं स्कूल पहुंचा तो महेश गेट के पास खड़ा होकर हमारा इंतज़ार कर रहा था। मुझे देखते ही मेरे पास आ गया और बोला।

महेश- अरे नूनू भाई। अकेले आए, अभिषेक नहीं आया साथ में।

मैं- अरे इतने उतावले क्यों हो रहे हो। अभिषेक आता ही होगा।

थोड़ी देर बाद अभिषेक आ जाता है। मैं महेश और अभिषेक तीनों कक्षा में जाते हैं जहां तनु पहले से ही बैठी थी। हमें देखते ही उसने मुस्कुरा कर हमारा स्वागत किया। हम तीनों अपनी अपनी जगह पर बैठ गए। फिर से वही सिलसिला शुरू हो गया। तनु अभिषेक या महेश की तरफ देख रही थी और महेश आज बहुत खुशी से तनु की तरफ देख रहा था।

भोजनावकाश हो जाने के बाद हम चारों स्कूल के परिसर में बैठ गए। थोड़ी देर तक इधर उधर की बातचीत करने के बाद महेश ने हम दोनों को थोड़ी दूर जाकर बैठने का इशारा किया। मैं और अभिषेक उठकर थोड़ी दूर जाकर बैठ गए। तब तनु ने कहा।

तनु- क्या बात है तुम दोनों वहां क्यों जाकर बैठ गए।

मैं- कुछ नहीं बस ऐसे ही।

महेश- तनु मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है इसलिए वो दोनों दूर जाकर बैठ गए हैं।

तनु- ऐसी क्या जरूरी बात है जिसके लिए उनको दूर जाकर बैठना पड़ रहा है।

महेश- तनु वो मुझे तुमसे, मतलब मुझे ये कहना था कि मैं तुमसे ये कहना चाहता हूँ कि ये तुम्हारे बाल बहुत खूबसूरत लग रहे हैं तनु।

तनु- धन्यवाद महेश, लेकिन बात क्या है वो बताओ। यूँ गोल गोल पहेलियां मत बुझाओ।

महेश- कहना तो तुमसे बहुत कुछ है, लेकिन मेरी जुबान साथ नहीं दे रही है। कैसे कहूँ तुमसे कुछ समझ मे नहीं आ रहा है। कहीं तुम बुरा मान गए तो क्या होगा फिर।

तनु- देखो अभिषेक हम दोनों अच्छे दोस्त हैं तो मैं तुम्हारी बात का बुरा क्यों मानूँगी। जो भी बात हो। खुलकर कहो।

तनु की बात सुनकर महेश ने एक गहरी और लम्बी सांस ली और हम दोनों की तरफ देखा। हम दोनों ने उसे आंखों से बोल देने का इशारा किया। फिर महेश ने तनु के हाथ को अपने हाथ में लेकर उसकी आंखों में देखते हुए कहा।

महेश- तनु हम दोनों अच्छे दोस्त हैं। हम दोनो एक दूसरे को समझते हैं। मैंने जब से तुम्हें देखा है तब से मेरे दिल में तुम्हारे लिए दोस्त से बढ़कर जज्बात हैं। मैं बहुत दिनों से ये बात तुमसे कहने की सोच रहा था। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ तनु। आई लव यू तनु। आई लव यू।

महेश की बात सुनकर तनु को जैसे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ। वो जैसे चौक सी गई और बोली।

तनु- क्या या या या..............


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
Hahaahahahah....mahesh ne prpose kr diya...
Tannnuu reject him...wo achha nhi hai...abhishek ya nahyan ko accept krna...un dono ne kitna kuch kiya tumhare lie...or is mahesh ke bchhe ne kuch nhi kiya...

Bechare ne puri raat jagkar himmt jutai...
Or ab...shit....
Mtln 2raato me himmt jutao fir bhi esa prpose...bawal...
Are pahad todkar lao bhaiya..
Chand taaro ko lao...tb jaake baat bne...khali khusat aagya prpose krne...
Reject him tannnnnnnnnnnnuuuuuuu
 
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Ankitarani

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ग्यारहवाँ भाग


महेश की बात सुनकर तनु को जैसे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ। वो जैसे चौक सी गई और बोली।

तनु- क्या या या या.............. फिर से बोलना एकबार क्या कहा तुमने।

महेश- (खुश होते हुए) मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। आई लव यू तनु। आई लव यू।

तनु- तुम्हें क्या हो गया है, ये तुम क्या कह रहे हो महेश।

महेश- मुझे तुमसे प्यार हो गया है तनु। और में तुम्हें अपने प्यार के बारे में बहुत दिन से बताना चाहता था, लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी तुम्हें बताने की। लेकिन आज मैंने फैसला कर लिया था कि मैं तुमसे आने प्यार का इज़हार करके रहूंगा।

तनु- पर मैंने कभी तुम्हारे बारे में ऐसा कुछ सोच नहीं है। मेरे दिल में तुम्हारे लिए प्यार का एहसास कभी जगा ही नहीं। में तुमसे प्यार नहीं करती महेश।

महेश- लेकिन क्यों तनु। क्या कमी है मुझमें। क्या मैं बुरा लड़का हूँ।

तनु- नहीं महेश। तुममें कोई कमी नहीं है और तुम बहुत अच्छे लड़के हो, तुमसे जो लड़की प्यार करेगी वो बहुत किस्मतवाली होगी। लेकिन मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती महेश।

महेश- आखिर क्यों। क्यों मुझसे प्यार नहीं कर सकती तुम तनु। हम दोनों कितने दिन से साथ में रहते हैं। एक दूसरे को समझते हैं। एक दूसरे के चारित्रिक गुण से भली भांति परिचित हैं। तो तुम मेरे प्यार को स्वीकार क्यों नहीं कर रही हो।

तनु- देखो महेश। तुम वाकई में बहुत अच्छे लड़के हो। और तुम्हें मुझसे अच्छी लड़की मिलेगी। तुम्हारे जज्बात की में कदर करती हूँ। लेकिन मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती। मैं तुम्हारा दिल नहीं दुखाना चाहती। इसलिए मैं तुमको कोई झूठा दिलाशा भी नहीं देना चाहती। इसलिए तुम अपने मन से मेरा ख्याल निकाल दो।


महेश- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। लेकिन तुम मुझसे क्यों प्यार नहीं कर सकती। जब मैं एक अच्छा लड़का हूँ। मुझमें कोई कमी भी नहीं है। तो फिर तुम मना क्यों कर रही हो।

तनु- देखों महेश। तुम मेरे एक अच्छे दोस्त हो इसलिए मैं तुम्हें बता रही हूँ। मैं किसी और से प्यार करती हूँ इसलिए तुम्हारे प्यार को में स्वीकार नहीं कर सकती। हम दोनों अच्छे दोस्त हैं और में एक दोस्त बनकर ही तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं, इसलिए मैं चाहती हूं कि अपनी दोस्ती के बीच ये प्यार जैसा शब्द दोबारा न आए। मैंने तुम्हें हमेशा अपने भाई जैसे माना है।

तनु की बात सुनकर महेश चौक गया। उसके दिल के टुकड़े टुकड़े हो गए। उसकी आँखों में आंसू भर आए। महेश ने अपना चेहरा घुमा लिया और आंसू साफ करते हुए तनु से बोला।

महेश- मैं भी तो जानूँ वो कौन है जिसके लिए तुमने मेरे प्यार को नकार दिया। जरूर वो मुझसे अधिक अच्छा और नेक होगा।

तनु- तुमने सही कहा महेश। वो बहुत अच्छा है और में उसे पसंद करती हूँ । लेकिन वो मुझे पसंद करता है और मुझे प्यार भी करता है या नहीं ये मुझे नहीं पता। मैं तो बस दिन रात उसी के बारे में सोचती राहती हूँ। पता नहीं उसके दिल में मेरे लिए क्या जज्बात हैं

महेश- प्यार करता है या नहीं का क्या मतलब है तुम्हारा। क्या तुमने उसे अभी तक नहीं बताया अपने प्यार के बारे में।

तनु- अभी तक मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार नहीं किया है। लेकिन जल्द ही उसे मैं अपने दिल की बात कह दूंगी और मुझे पूरा विश्वास है कि वो मेरे प्यार को स्वीकार कर लेगा।

महेश- चलो अच्छा है तुम्हे तुम्हारा प्यार मिल जाये। मैं प्रार्थना करूँगा भगवान से तुम्हारे लिए। लेकिन ये तो बताओ कि एओ खुशनसीब है कौन जिसे तुम प्यार करती हो।

तनु- बहुत जल्दी ही तुम्हे भी सब पता चल जाएगा। जब मैं उससे अपने प्यार का इज़हार करूँगी तो तुम सब की मौजूदगी में ही करूँगी।

महेश- चलो अच्छी बात होगी। अगर तुम्हें तुम्हारा प्यार मिल गया तो। सब के नसीब में उनका प्यार नहीं लिखा होता।

महेश ने ये बात एकदम दुःख भरे स्वर में कही से। उनके चेहरे को देखकर ही पता चल रहा था कि उसके दिल पर क्या बीत रही है। तनु ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

तनु- महेश। मेरा मकसद तुम्हारा दिल दुखाने के नहीं था। प्लीज़ मेरी बात का बुरा मत मानना।

महेश- नहीं तनु इसमे बुरा मानने वाली क्या बात है। में तुमसे प्यार करता हूँ, जरूरी तो नहीं कि तुम्हे भी मुझसे प्यार हो। प्यार जबरदस्ती तो होता नहीं है, ये तो बस हो जाता है।

इसके बाद दोनों चुप हो गए। क्लास की एक लड़की तनु को बुलाकर अपने साथ ले गई। तनु के जाने के बाद महेश मुंह लटकाकर आकर हम दोनों के पास बैठ गया। उसको देखकर ही लग रहा था कि वो अभी रो देगा। मैं और अभिषेक बस उसे ही देख रहे थे। कुछ देर तक हमारी आवाज़ न सुनने के बाद महेश ने अपना सर उठाकर हम दोनों की तरफ देखा तो हमें अपनी तरफ देखते पाया। जब हम लोग कुछ नहीं बोले तो महेश ने कहा।

महेश- क्या?

अभिषेक- क्या? क्या?

महेश- वही तो पूछ रहा हूँ क्या?

अभिषेक- वही तो हम भी पूछ रहे हैं क्या?

अभिषेक की बात सुनकर महेश चिढ़ गया। वो महेश को गाली देते हुए बोला।

महेश- अबे साले भो...... ले। यहां मेरी जली पड़ी है और तुझे मस्ती सूझ रही है। मेरा ज्यादा दिमाग मत खराब कर नहीं तो तेरी गांड मार दूंगा मैं।

मैं- अब हम वही तो पूछ रहे हैं कि क्या हुआ? लेकिन तू है कि भड़क रहा है। क्या कहा तनु ने।

महेश- मुझे देखकर भी नहीं समझ पा रहे हो कि तनु ने क्या कहा होगा।

अभिषेक- समझ तो गए हैं हम कि तुझे प्यार में सफलता नहीं मिली है, लेकिन फिर भी क्या कहा तनु ने ये तो बता। उसने इनकार किया है तो कोई वजह तो होगी।

महेश- हाँ वजह है। वो किसी और से प्यार करती है इसलिए उसने मेरे प्यार को अस्वीकार कर दिया।

उसकी बात सुनकर मैं समझ गया कि हो न हो वो अभिषेक के बारे में ही बोल रही है, लेकिन फिर भी मैं पूरी सच्चाई जानने चाहता था, इसलिए मैंने महेश से पूछा।

मैं- क्या कहा। किसी और से प्यार। कौन है वो जिससे तनु प्यार करती है।

महेश- उसने नही बताया नूनू भाई कि वो कौन है जिससे वो प्यार करती है। बस इतना कहा कि बहुत जल्द हम सबको उसके बारे में पता चल जाएगा।

अभिषेक- तूने अच्छे से अपने प्यार का इज़हार नहीं किया होगा, इसीलिए उसने तुझे मना कर दिया होगा। तुझे फिल्मी तरीके से इज़हार करना चाहिए था कोई डायलॉग मारना चाहिए था तुझे।

महेश- (थोड़ा गुस्से में) तू ज्यादा मत बोला कर बे। किया था मैंने अच्छे तरीके से किया था इज़हार मैंने। मगर वो बोलती है कि मैंने तुम्हें हमेशा अपना भाई माना है।

महेश की बात सुनकर अभिषेक अपना पेट पकड़कर जोर जोर से हँसने लगा। मेरे भी चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। लेकिन मैं अपनी हंसी को छुपा गया, लेकिन अभिषेक जोर जोर से हंसते हुए बोला।

अभिषेक- हाहाहाहा भैया...... भैया....... हाहाहाहा।

महेश- चुप कर साले। तुझे बड़ी हंसी आ रही है।

मगर अभिषेक रुक नहीं और हंसता रहा। थोड़ी देर हँसने के बाद वो बोला।

अभिषेक- हाहाहाहा भैया। तेरा नसीब बहुत ही खराब है महेश। तू बनने उसका सैया गया था और उसने तुझे अपना भैया बना लिया। हाहाहाहा हाहाहाहा......

महेश- अब इतना भी मजे न ले भाई। शांत हो जा।

महेश- अरे यार मुझे पूरा भरोसा था कि वो इनकार नहीं करेगी, लेकिन वो किसी और पर लट्टू है, अब देखना होगा कि वो खुशनसीब है कौन। जिसे तनु पसंद करती है। तू निराश मत हो भाई। तुझे तनु से भी बढ़िया लड़की मिलेगी।

अभिषेक- हाँ महेश। हिम्मत मत हारो यार। जो भी होता है अच्छे के लिए होता है।

महेश को सांत्वना देकर हम लोग अपनी कक्षा में चले गए। हम सभी अपनी कक्षा समाप्त कर अपने अपने घर चले गए।

महेश का तनु को प्यार का इज़हार किए हुए लगभग महीने भर बीत चुका था। महेश एकदम सामान्य तरीके से तनु के साथ व्यवहार करता था। तभी एक घटना हो गई।

एक दिन भोजनावकाश के समय मैं, अभिषेक और महेश तीनों बैठे हुए बात कर रहे थे कि तभी पायल हम लोगों के पास आई। हमने जब उसकी तरह देखा तो उसकी आँखों में आँसू भर था। अभिषेक तुरंत खड़ा होता हुआ बोला।

अभिषेक- क्या हुआ पायल। तू रो क्यों रही है। किसी ने कुछ कहा क्या तुझे।

पायल- वो भैया मेरी कक्षा में जो सुरेश है ना उसने मेरे साथ बदतमीज़ी करने की कोशिश की। उसने मेरे शरीर को गलत तरीके से छुआ।

पायल की बात सुनकर अभिषेक को बहुत गुस्सा आया। उसने गुस्से से पायल से पूछा।

अभिषेक- कहाँ है सुरेश।

पायल- वो अपनी कक्षा में बैठा हुआ है। मैंने उसे थप्पड़ मारा उसकी इस हरकत के लिए।

पायल ने बता दिया कि वो कक्षा में बैठा हुआ है। अभिषेक उसकी कक्षा की तरफ जाने लगा तो मैंने अभिषेक को रोक लिया। क्योंकि मैं सुरेश को बहुत अच्छी तरह से जानता था। वो मेरे ही गांव का था। वो बहुत ही शरीफ लड़का था। वो ज्यादा किसी से बात नहीं करता था, वो बस पढ़ाई पर ही ज्यादा ध्यान देता था। इसीलिए सभी छात्र और अध्यापक उसे अच्छी तरह जानते थे।

मैं- अभिषेक मैं सुरेश को बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ। वो ऐसी हरकत नहीं कर सकता। जरूर पायल को कोई गलतफहमी हुई है।

अभिषेक- तू क्या कहना चाहता है कि पायल झूठ बोल रही है।

मैं- मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि पायल झूठ बोल रही है। मैं ये कह रहा हूँ कि पायल को गलतफहमी हुई है। क्योंकि सुरेश ऐसा नहीं कर सकता। इसलिए कुछ करने से पहले पूरी सच्चाई का पता लगाना। उसके बाद ही कुछ करने की सोचना।

अभिषेक- ठीक है चलो फिर देखते हैं क्या बात है।

उसके बाद मैं अभिषेक और महेश सुरेश की कक्षा की तरफ चल पड़े।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

Hahahaah bhaiyaa.....:yes1:..


Mil gya na baba ji ka thullu....
Aaya bda hmari heroin ko prpose krne...
Achha kiya tannu ne...
Wese mahi ji thank you....ye update pdkr mujhe ek nyi kahani likhne ka idea mil gya...thank you so much...

Bechara mahesh...kya kahu bs...happy bday ho gya isla to...
Pr wo abhishek hi hai na...jisko tannu pyar krti hai....

Ye bchhe log bs...pdhai krne nhi pyar krne hate hai....

Khait ab suresh ka kya mtter hai...kya schme usne payal ko chheda...

Wese tannu or mahesh ke bich jo baat hui prpose krte time...wo achhi lgi...mja aagya ..

Dekhte hai age kya hoga...
Great story maahi ji...ab mja aayega kahani me...track pr aagyi hai story...
Nice stroy great writing....superb..
 
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Ankitarani

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बारहवाँ भाग


पायल की बात सुनकर मैं अभिषेक और महेश सुरेश की कक्षा की तरफ चल पड़े।

सुरेश अपनी कक्षा में बैठा हुआ था उसके आसपास उसकी कक्षा के अन्य लड़के और लड़कियां बैठे हुए थे। हम तीनों जाकर सुरेश के सामने खड़े हो गए। सुरेश ने हम तीनों को देखा तो वो डर गया। उसे लगा कि अब उसे मार पड़ेगी। अभिषेक ने सुरेश के पास बैठे हुए अन्य विद्यार्थियों से कहा।

अभिषेक- तुम सब लोग बाहर जाओ। मुझे सुरेश से कुछ बात करनी है।

अभिषेक के कहने पर सभी विद्यार्थी कक्षा से बाहर चले गए। मैंने गौर से सुरेश को देखा तो उसके गाल लाल हो गए थे। वो डर रहा था इसलिए विद्यार्थियों के बाहर जाते ही वो अभिषेक से बोला।

सुरेश- मैंने कुछ नहीं किया भैया। वो पायल ने मुझे बेवजह थप्पड़ मारा है।

मैं- हमको पता है कि तुम्हारी कोई गलती नहीं है। फिर भी बात क्या है वो बताओ।

मेरी बात से सुरेश को थोड़ी राहत मिली, लेकिन मेरे ऐसा कहने पर अभिषेक ने मुझे घूरकर देखा। मैंने आंख के इशारे से उसे शांत रहने के लिए कहा।

सुरेश- बात ये है कि मैं यहां पर खड़ा हुआ था (उस जगह की तरफ इशारा करते हुए) और अपने दोस्तों से कुछ बात कर रहा था। सभी छात्र अपनी अपनी जगह बैठे हुए थे। तभी पायल बाहर जाने के लिए आने लगी, पता नहीं मेरे करीब आकर कैसे उसका पैर फिसल गया। और वो नीचे मेज की तरफ गिरने लगी, लेकिन उसके नीचे गिरने से पहले मैंने उसे थाम लिया। लेकिन उसे पकड़ने के चक्कर में मेरे हाथ उसके पेट पर चले गए, और मैं उसको लिए हुए जमीन पर गिर पड़ा। शायद उसको ये बात खराब गई हो। इसलिए उसने मुझे बदतमीज़ कहकर थप्पड़ मार दिया।

अभिषेक- तू झूठ बोल रहा है, पायल बिना मतलब क्यों तुझे मारेगी, सच बता नहीं तो बहुत मार खाएगा मुझसे तू।

सुरेश- मैं सच कह रहा हूँ भैया। जो कुछ भी हुआ मैंने आपको वही बताया। अगर आपको मेरी बात का भरोसा नहीं है तो आप कक्षा के किसी भी विद्यार्थी से पूछ सकते हैं।

सुरेश की बातों में मुझे सच्चाई दिख रही थी, लेकिन अभिषेक बहन प्रेम में कुछ सुनने को तैयार ही नहीं था। वो बार बार सुरेश को धमका कर सच बोलने को कह रहा था। मैं अभिषेक को खींचकर कक्षा से बाहर ले गया। बाहर आकर अभिषेक ने मुझसे कहा।

अभिषेक- तू मुझे बाहर क्यों ले आया। वो बार बार झूठ बोल रहा था, अभी एक लगाता कसकर तो सारी सच्चाई उगल देता।

मैं- वो अभी तक सच्चाई ही उगल रहा था। वो सच बोल रहा है। मैंने पहले ही कहा था कि पायल को शायद कुछ गलतफहमी हुई है। सुरेश ऐसा लड़का बिल्कुल भी नहीं है। मैं उसे बहुत अच्छी तरह से जनता हूँ। वो तो मुझसे भी ज्यादा शरीफ है।

अभी हम दोनों बातचीत कर ही रहे थे कि उसकी कक्षा की एक लड़की हमको पुकारती हुई वहां आई।

लड़की- नयन भैया, अभिषेक भैया।
मैं- हाँ बोलो। क्यों बुला रही हो हमको।

लड़की- मुझे आपको कुछ बताना है पायल के बारे में। लेकिन आप लोग ये बात काजल को बिल्कुल भी मत बताइएगा की मैंने ये बात आप लोगों को बताई है, नहीं तो वो मुझसे बेवजह झगड़ा करेगी।

अभिषेक- ठीक है नहीं बताएंगे, लेकिन बात क्या है।

लड़की- भैया, पायल जैसी दिखाई देखती है वैसी बिल्कुल भी नहीं है।
मैं- मतलब, तुम कहना क्या चाहती हो।

लड़की- मतलब ये कि आज जो कुछ भी हुआ उसमें सुरेश की कोई भी गलती नहीं है। ये सब पायल ने जानबूझकर किया है।

अभिषेक- ये क्या कह रही हो तुम, जानबूझकर किया है। तुम कहना क्या चाहती हो। पूरी बात क्या है वो बताओ।

लड़की- मैं बता तो रही हों, लेकिन इन सब के बारे में पायल को पता नहीं चलना चाहिए। काजल ने ये सब अपनी सहेली के सामने अपने आपको बेहतर साबित करने के लिए किया है। उसकी सहेली ने उसे चुनौती दी थी ऐसा करने की।

अभिषेक (आश्चर्य से) कैसी चुनौती।

लड़की- बात कुछ दिन पहले की है भैया किसी बात को लेकर पायल ने कहा था कि उसके लिए कोई भी काम करना मुश्किल नहीं है। वो कोई भी काम बहुत आसानी से कर सकती है। तो उसकी सहेली ने उसे सुरेश को अपने प्यार में पागल करने के लिए कहा। जिसके लिए दोनों की शर्त लग गई। और शर्त के मुताबिक अगर पायल हार गई तो उसे अपनी सहेली की हर बात एक महीने तक माननी पड़ेती।

मैं और अभिषेक उसकी बात बहुत ध्यान से सुन रहे थे। जहाँ अभिषेक के चेहरे के भाव पल प्रति पल बदल रहे थे वहीं मुझे भी पायल के बारे में जानकर आश्चर्य हो रहा था। मैंने उससे पूछा।

मैं- और अगर पायल सुरेश को अपने प्यार में पागल कर देती तो।

लड़की- वो भी बताऊंगी भैया। उस लड़की ने पायल को 15 दिन का समय दिया। और इन 15 दिनों के अंदर पायल को सुरेश को अपने प्यार में पागल करना था। या यूं कहिए पायल को सुरेश को पटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था। पायल ने हर संभव कोशिश की सुरेश को पटाने की, लेकिन बात नहीं बनी। 2 दिन पहले पायल ने सुरेश को अपने झूठे प्यार का इज़हार किया था, लेकिन सुरेश को तो आप जानते ही हैं, उसने साफ मना कर दिया। इस बात को लेकर पायल आग बबूला हो गई।

उस लड़की की बात सुनकर हम दोनों को बहुत आश्चर्य हो रहा था कि पायल ऐसी भी हो सकती है। मेरा तो चलो फिर भी ठीक है, लेकिन अभिषेक तो उसका सगा भाई था, जिसे अपनी बहन की करतूत सुनकर बहुत गुस्सा आ रहा था कुछ देर रुकने के बाद उस लड़की ने कहा।

लड़की- पायल बाहर से जैसी मासूम और सीधी सादी दिखती है वैसी बिल्कुल भी नहीं है। वो बहुत ज़िद्दी और गुस्सैल है। सुरेश के मना करने के बाद उसका गुस्सा बढ़ गया। सुरेश के इनकार को पायल ने अपनी बेइज़्ज़ती मान लिया और उससे बदला लेने और उसे सबक सिखाने के लिए सही समय का इंतज़ार करने लगी। शायद आज उसे सही समय मिल गया।

(कुछ देर रुकने के बाद) आज सुबह जब सुरेश खड़े होकर अपने दोस्तों के साथ बातें कर रहा था तो पयाल ने अपनी सहेली से कहा कि आज वो सुरेश को सभी विद्यार्थियों के सामने जलील कर अपनी बेइज़्ज़ती का बदला लेगी। पायल कुछ देर सोचने के बाद जानबूझकर सुरेश के पास गयी, उसके पास जाकर पयाल ने जानबूझकर अपना पैर आपस में फंसाकर गिरने का नाटक किया। लेकिन सुरेश ने इंसानियत सिखाते हुए उसको गिरने से बचाया। उसके बाद पायल ने पूरी कक्षा के सामने सुरेश को खूब जलील किया और थप्पड़ मार दिया।

उस लड़की की बात सुनकर हम दोनों की आंखे बड़ी बड़ी हो गई। हम दोनों को भरोसा नहीं हो रहा था कि मासूम सी दिखने वाली पायल ऐसा कुछ भी कर सकती है। मैं उसे एक चुलबुली और शरारती लड़की समझता था, लेकिन पायल तो बड़ी पहुंची हुई चीज निकली। उसकी ये हरकत सुनने के बाद मुझे ये जानने की इच्छा बलवती हो गई कि उसने अगर वह उसकी सहेली द्वारा दी गई चुनौती को पूरा कर लेती और सुरेश को झूठे प्यार में पटा लेती तो उसकी अपनी सहेली से उसकी मांग जरूर कुछ ऊट पटांग ही होती, इसलिए मैंने उस लड़की से पूछा।

मैं- तुम बोल रही थी कि अगर पायल शर्त हार जाती है तो उसे अपनी सहेली की हर बात एक महीने तक माननी पड़ेगी। लेकिन अगर वो शर्त जीत जाती तो उस स्थिति में क्या तय हुआ था दोनों की बीच।

लड़की- वो सब जाने दीजिए भैया। वो सब आप न जानिए तो ही अच्छा है।

अभिषेक- अरे जब इतना सब बता ही दिया जाए पयाल के बारे में तो ये भी बता दो। हमें पता तो चले कि शर्त जीतने के बाद उसकी क्या इच्छा थी। वो क्या करने वाली थी, क्या करना चाहती थी।

लड़की- जब आप इतना कह ही रहे हैं तो सुनिए। अगर पायल शर्त जीत जाती तो उसकी सहेली को पायल की मदद करनी पड़ती आपको पटाने में।

उसकी बात सुनकर मैं और अभिषेक चौंक गए। कभी दोनों एक दूसरे को देखते तो कभी उस लड़की को। उनकी बात सुनकर मैं चौंकते हुए बोला।

मैं- क्या?............ मुझे पटाने में। ये क्या कह रही हो तुम।

लड़की- हाँ भैया मैं सच कह रही हूँ। पायल और उसकी सहेली हमेशा आपकी बातें करती रहती हैं। पायल बोलती है कि वो आपसे बहुत प्यार करती है, लेकिन आप उसपर ध्यान ही नहीं देते। आप उसे बहन की तरह मानते हैं, इसलिए वो अपनी सहेली की मदद से आपको पटाना चाहती है।

अभिषेक- (गुस्से से) ऐ लड़की। बंद कर अपनी बकवास। हम तुम्हारी बातें सुन रहे हैं तो इसका मतलब तुम कुछ भी बोल दोगी हमारी बहन के बारे में। अगर तुम लड़की नहीं होती तो पता नहीं तुम्हारे साथ मैं क्या करता आज।

लड़की- आपका गुस्सा होना जायज है भैया, क्योंकि बात आपकी बहन से जुड़ी हुई है। लेकिन मैंने जो कुछ भी आप दोनों से कहा वो बिल्कुल सत्य है। पायल बाहर से जैसी दिखती है वैसी बिल्कुल भी नहीं है। इसे मानना या न मानना आपका काम है।

मैं- लेकिन तुम्हे इतना सब कैसे पता है।

लड़की- क्योंकि मैं पायल और उसकी सहेली के आगे बैठती हूँ तो उनकी जो भी बातें आपसे में होती हैं मुझे सुनाई पड़ता है।

अभिषेक- तो तुमने अभी तक ये बात हमें क्यों नहीं बताई। और आज क्यों बता रही हो।

लड़की- मैं ये सब किसी को कभी नहीं बताती। अगर पायल ने सुरेश को मारा न होता और आप लोग सुरेश को मारने न आए होते, क्योंकि मैं सुरेश को मन ही मन पसंद करती हूँ, हो सकता है ये मेरा आकर्षण हो उसके प्रति। पता नहीं सुरेश के मन में क्या है मेरे लिए, लेकिन पायल की आज की हरकत की वजह से मैं अपने आपको रोक नहीं पाई ये सब आपको बताने से। और यही नहीं पायल के दिल में नयन भैया के लिए प्यार है या कुछ और इसमें भी मुझे शक है, क्योंकि पायल इसके पहले भी कई लड़कों के ऊपर अपने क्रश के बारे में अपनी सहेली से बहुत गंदी बातें कर चुकी है। और आपके बारे में भी ऐसी बातें करती है अपनी सहेली से कि मुझे बताते हुए भी शर्म आ रही है।

अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है अभिषेक भैया। पायल गलत रास्ते पर जा रही है। उसे गलत रास्ते पर जाने से रोक लीजिए। पता नहीं आप लोगों को मेरी बात पर विश्वास भी है या नहीं, लेकिन मैंने जो भी कहा वो अक्षरशः सत्य हैं। अब मैं चलती हूँ अगर पायल ने मुझे आपके साथ बात करते हुए देख लिया तो वो बेवजह मुझसे झगड़ा करने लगेगी।

इतना बोलकर वो लड़की अपनी कक्षा की तरफ चली गई। मेरा दिमाग तो ये सुनकर काम करना ही बंद कर दिया। मैं पायल को बहुत अच्छी लड़की समझता था। उसे बहन की तरह मानता था, लेकिन पायल मेरे बारे में कितना गंदा सोचती है। अब मुझे समझ में आ रहा था कि जब मैं अभिषेक के घर जाता था तो पायल मुझे अजीब नजरों से क्यों देखती थी। उसका मतलब अब मुझे समझ में आया था।

मुझसे भी ज्यादा सोच में अभिषेक डूबा हुआ था। उसके चेहरे के भाव हर पल बदल रहे थे। मैंने अभिषेक के कंधे पर हाथ रख दिए। अभिषेक मेरी आँखों में देखते हुए पूछा।

अभिषेक- नयन क्या तू भी पायल से प्यार.............।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

Ohhhh ye kya...yha to naiya hi dub gyi...mtlb sara kiua dhara hi payal ka tha...sirf ek shrt ke lie....
Mahi ji apne shayad glti se 2,3jagah payal ko kajal lilh diya hai...use sahi kr dijiyega....

To ab payal ka nayan ko chahna bhi sabke samne aagya....
Bechara suresh...khamkha kha gya ek thappad...

Khair dekhte hai ab kya hota hai...
Superb update mahi ji...story me ab mja aarha hai...keep writing.

As always ure writing superb...
 

Ankitarani

Param satyagyani...
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तेरहवाँ भाग


मुझसे भी ज्यादा गहरी सोच में अभिषेक डूबा हुआ था। उसके चेहरे के हाव भाव प्रतिपल बदल रहा था। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा तो वो मेरी आँखों में देखते हुए बोला।

अभिषेक- नयन सच बताना। क्या तुम्हारे मन में भी पायल को लेकर...........

मैं- (उसकी बात बीच में काटकर) ये तू कैसी बाते कर रहा है। वो बहन है मेरी भी यार। तू मेरे बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकता है। तू मुझे बचपन से जानता है। तुझे क्या लगता है। मैं ऐसा कुछ कर सकता हूँ क्या?

अभिषेक- माफ कर दे भाई। मेरा दिमाग ही नहीं काम कर रहा है। क्या सही है और क्या गलत है। कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है। दिल ये मानने को तैयार ही नहीं है कि पायल इतनी घटिया हरकत कर सकती है, लेकिन उस लड़की की बातों में भी कहीं न कहीं सच्चाई झलक रही थी। मुझे तो ये समझ में ही नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ। मन तो कर रहा है कि पायल की मार मार कर टंगे तोड़ दूं।

मैं- देख भाई। पायल ने बहुत गलत किया है। इस बारे में एक बार पायल से बात करनी चाहिए, उसे समझना चहिए कि वो जिस रास्ते पर चलने जा रही है वो गलत है। अभी हम सब लड़कपन में हैं तो ऐसी गलतियां होना स्वाभाविक हैं। यही समय होता है जब हम इस गलती को सुधार सकते हैं, इसके लिए जोश से नहीं होश से काम लेने की जरूरत है। पायल ऐसी नहीं है हो सकता है उसकी सहेली उसे इस राह पर ले जा रही हो। मेरी बात मान एक बार ठंडे दिमाग से पायल से बात कर इस बारे में।

अभिषेक- तू सही कह रहा है भाई। बात करता हूँ पायल से और पापा को भी इस बारे में बताना पड़ेगा। जब तक इसे मार नहीं पड़ेगी तबतक समझ मे नहीं आएगा।

वहां से महेश बाथरूम चला गया और मैं अभिषेक पायल के पास चले गए। पायल वहीं पर बैठी हुई थी जहां पर हम लोग उसे छोड़कर गए थे। हमें देखते ही पायल उठकर खड़ी हो गई। अभिषेक पायल के पास पहुचते ही एक जोर का थप्पड़ उसके गालों पर लगा दिया।

चटाक कककक .......।

अभिषेक का थप्पड़ बहुत झन्नाटेदार था। थप्पड़ पड़ने के बाद पायल अपने गालों पर हाथ रखकर अभिषेक को देखने लगी। अभिषेक ने गुस्से में पायल से कहा।

अभिषेक- यही सब करने आती है तो स्कूल। मुझे तुझसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। आज तेरी खैर नहीं है। एक शर्त जीतने के लिए तूने सुरेश के साथ कितना बुरा बर्ताव किया। तो ऐसा कैसे कर सकती है। तेरी ऐसी हरकत जानकर मुझे तुझे बहन कहते हुए शर्म आती है। घर चल तू आज तेरी अच्छी खबर लेंगे पापा।

पायल- मैंने कुछ नहीं किया भैया। सुरेश ही मेरे साथ उलटी सीधी हरकत कर रहा था।

अभिषेक- ये तो तुझे घर चलने के बाद पता चलेगा। अब जा अपनी कक्षा में और खबरदार फिर कोई उलटी सीधी हरकत की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

अभिषेक की बात सुनकर पायल अपनी कक्षा में चली गई। उसके जाने के बाद मैंने अभिषेक से कहा।

मैं- तुझे उसपर हाथ नहीं उठाना चाहिए था अभिषेक, वो बच्ची है अभी। प्यार से समझाओगे तो वो समझ जाएगी। अभी उसे अच्छे बुरे की समझ कम है।

अभिषेक- छोड़ न यार इस बात को। चल अपनी कक्षा में चलते हैं क्लास का समय भी हो रहा है।

उसके बाद हम दोनों अपनी कक्षा में आ गए। कक्षा में आकर हमने अपनी सारी क्लास ली और छुट्टी के बाद अपने घर चले गए। अभिषेक अभी भी गुस्से में था। वो और पायल अपने घर की ओर और मैं काजल के साथ अपने घर की ओर चले गए। शाम को जब अभिषेक के पापा आए तो उन्होंने अभिषेक को गुस्से में देखा और पायल को देखा जिसके गाल लाल थे थप्पड़ पड़ने की वजह से।

अभिषेक पापा- क्या बात है अभिषेक तू गुस्से में लग रहा है। और पायल तुझे क्या हुआ। तेरे गाल क्यों लाल हो गए है। किसी ने मारा क्या।

अभिषेक के पापा की बात सुनकर अभी कोई कुछ बोलता उससे पहले ही अभिषेक की मम्मी बीच में बोल पड़ी।

अभिषेक मम्मी- अरे उससे क्या पूछते हो। में बताती हूँ कि बात क्या है। साहबजादे ने थप्पड़ मारा है पायल को। और पूछने पर कुछ बता भी नहीं रहा है।

अभिषेक पापा- ये क्या सुन रहा हूँ मैं अभिषेक। तुमने पायल को मारा। अपनी बहन पर हाथ उठाया। क्या मैं जान सकता हूँ कि तुमने ऐसा क्यों किया?

अभिषेक- ये आप अपनी इस लाडली से पूछिए पापा। ये आपको बताएगी की उसको किसलिए मारा मैंने।

अभिषेक पापा- क्या बात है पायल। किसलिए मारा तुझे अभिषेक ने। क्या गलती की थी तुमने।

पायल- मैंने कुछ नहीं किया है पापा। मेरे साथ पढ़ने वाले एक लड़के ने मेरे साथ बदतमीज़ी की थी। जिसकी शिकायत मैंने भैया से की तो भैया ने उलटे मुझे मारा।

अभिषेक पापा- ये सब क्या है अभिषेक।

अभिषेक- इसने हरकत ही ऐसी की है पापा। ये लड़कियों से शर्त लगाकर लड़कों को जलील करती है। उन्हें मारती है।

अभिषेक पापा- क्या कह रहे हो अभिषेक। क्या अभिषेक सही कह रहा है पायल?

पापा की बात का पायल ने कोई उत्तर नहीं दिया। उसे चुप देख पापा ने मुझसे कहा।

अभिषेक पापा- बात क्या है अभिषेक। पूरी बात बताओ मुझे।

अभिषेक- इसकी कक्षा में सुरेश नामक लड़का पढ़ता है इसने अपनी कक्षा की एक लड़की से शर्त लगाई थी कि ये सुरेश को 15 दिन में अपने झूठे प्यार के जाल में फंसा लेगी। और जब सुरेश ने इनकार किया तो इसने बहाना बनाकर उसे जलील किया और पूरी कक्षा के सामने उसे थप्पड़ मारा। इतना ही नहीं ये लड़कियों से गंदी गंदी बातें भी करती है।

अभिषेक की बात सुनकर अभिषेक के पापा और मम्मी की आँखें बड़ी हो गई। पापा ने गुस्से से पायल को देखते हुए पूछा।

अभिषेक पापा- ये मैं क्या सुन रहा हूँ पायल। तुम स्कूल में पढ़ने जाती हो या ये सब करने। तुमने अपनी उम्र देखी है। पढ़ने लिखने की उम्र में ये हरकतें करती हो तुम। तुम्हारी पढ़ाई बंद करवा दूंगा फिर पड़ी रहना घर पर।

अभिषेक मम्मी- क्या जी। आप भी मेरी बच्ची को डांटने लगे। अरे अभी नादान है। तो ये सब होना आम बात है।

अभिषेक पापा- तुम्हें ये आम बात लग रही है। पायल हाथ से निकलती जा रही है और तुम्हें आम बात लग रही है। तुम्हारे लाड प्यार ने ही इसे बिगाड़ दिया है। पढ़ाई करने की उम्र में ये शर्त लगाती घूम रही है। किसी दिन कोई ऊँच नीच हो गई तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे हम।

अभिषेक- इतना ही नहीं पापा। आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि इसने ये शर्त क्यों लगाई थी।

अभिषेक पापा- अब बताओगे तभी तो पता चलेगा।

अभिषेक- इसने अपनी सहेली से शर्त इसलिए लगाई थी कि अगर ये शर्त जीत गई तो इसकी सहेली नयन को पटाने में उसकी मदद करेगी, क्योंकि ये नयन से प्यार करती है।

अभिषेक पापा- क्या नयन से। तू पागल हो गई है क्या पायल। तुझे रिश्ते का लिहाज है कि नहीं है। तू नीचे कैसे गिर सकती है।

इतना बोलकर अभिषेक के पापा ने एक झापड़ खींचकर पायल को लगा दिया। ये देखकर अभिषेक की मम्मी ने अभिषेक के पापा का हाथ पकड़ लिया और बोली।

अभिषेक मम्मी- ये क्या कर रहे हैं आप। कोई ऐसे मारता है क्या अपने बच्चों को। ये सब उस नयन का किया धरा है। उसने ही मेरी फूल सी बच्ची को अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में फसाया होगा। मैं अच्छे से जानती हूँ इस गरीब और दो कौड़ी के लोगों को। जहां कोई अमीर लड़की दिखी नहीं। उसे अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में फंसाना शुरू कर देते हैं। क्योंकि इन्हें उनकी दौलत से मतलब होता है। मैंने अभिषेक से कितनी बार कहा है कि वो लड़का गरीब है ठीक नहीं है। दोस्ती अपने हैसियत के हिसाब से करो, लेकिन तुमने मेरी बात कभी नहीं मानी और आप ने भी हमेशा उसे अपने बेटे जैसा माना। देखा आपने आपके उस बेटे ने क्या किया।

अभिषेक- उसने ऐसा कुछ नहीं किया। मैंने उससे पूछा इस बारे में, वो तो इसे अपनी बहन मानता है काजल की तरह, और मुझे पूरा विश्वास है कि वो ऐसा कभी नहीं करेगा।

अभिषेक मम्मी- अच्छा तुझे अपनी बहन से ज्यादा उस दो कौड़ी के लड़के पर विश्वास है। उसी ने मेरी मासूम बेटी को फंसाया है। उसके संस्कार ही ऐसे हैं।

अभिषेक पापा- चुप रहो अभिषेक की माँ, संस्कार की बात तुम मत ही करो तो अच्छा है। तुमने अपने ही संस्कार अपनी बेटी को दिए हैं तभी आज ये इतनी बिगड़ गई है जो आज ऐसी हरकतें कर रही है और नयन के बारे में तो तुम कुछ भी मत बोलना। वो और उसका परिवार कैसा है ये किसी से छिपा नहीं है। उसने गांव में कोई भी ऐसा नहीं है जो उस परिवार पर उंगली भी उठाए। और नयन पर मुझे भी अभिषेक की तरह पूरा भरोसा है। वो कभी ऐसा नहीं करेगा और अगर करेगा तो उसे स्वीकार भी कर लेगा।

अभिषेक मम्मी- हां आपको तो हमेशा से वही सही लगता है। मैं तो हमेशा गलत ही होती हूँ न। देख लेना एक दिन वो लड़का हमें किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगा। तब मत कहना आप मुझे कुछ।

अभिषेक पापा- वही तो मैं भी तुमसे कह रहा हूँ कि अपनी बेटी को अच्छे संस्कार दो। उसे समझाओ। नही तो नयन का तो पता नहीं लेकिन एक दिन ये हमें कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेगी। याद रखना मेरी इस बात को।

उसके बाद अभिषेक की मम्मी और पायल उनके कमरे में चले गए। मैं अपने कमरे में चला गया। सुरेश वाली बात से तो पायल ने कुछ भी रिएक्ट नहीं किया लेकिन मेरी बात पर अभिषेक के पापा ने जो थप्पड़ मारा था पायल को उससे पायल के मन में मेरे लिए नफरत की शुरुआत कर दी थी। उसकी ये नफरत आगे क्या क्या रंग लाएगी और क्या गुल खिलाएगी। वो भविष्य के गर्भ में हैं।

बहरहाल धीरे धीरे समय गुजरता रहा। और हम सब की दिनचर्या वैसी ही चलती रही जैसी अभी तक चली आ रही थी। उस घटना को बीते हुए लगभग दो महीने बीत चुके थे। दिसंबर के महीना चल रहा था। मैं, अभिषेक, महेश और तनु भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए बाते कर रहे थे। आसपास बहुत से विद्यार्थी खेल रहे थे, कुछ बात चीत कर रहे थे।

हम चारों बैठे बातचीत कर रहे थे तभी मैंने देखा कि तनु अभिषेक को देख रही है और कुछ कहने की कोशिश कर रही है, लेकिन कुछ कह नहीं पा रही है। कुछ देर उसे देखने के बाद मैंने तनु से पूछा।

मैं- क्या बात है तनु, मैं कब से देख रहा हूँ कि तुम अभिषेक से कुछ कहना चाह रही हो। लेकिन कुछ कह नहीं रही हो। बोलो क्या बात है।

तनु- हाँ नयन। कुछ कहना तो है लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि कैसे कहूँ। पता नहीं जो बात मैं कहने जा रही हूँ उसे सुनने के बाद तुम लोगों की प्रतिक्रिया क्या होगी। खासकर अभिषेक की।

महेश- अब तुम बोलोगी तभी तो पता चलेगा कि हमें किस प्रकार की प्रतिक्रिया देने है। क्यों नूनू भाई।

मैं- और नहीं तो क्या। जब तक तुम बोलोगी नहीं। हमें पता कैसे चलेगा।

हम दोनों की बातें सुनकर तनु ने एक गहरी सांस ली और अभिषेक का हाथ पकड़कर अपनी दोनों हथेलियों के बीच रखकर अभिषेक की आंखों में देखते हुए कहा।

तनु- अभिषेक मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। आई लव यू अभिषेक आई लव यू।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

Hmmm....to akhir...kahani me twist bn rha hai ab....payal vs nayan...bthiya hai...dekhte hai kya krti hai payal...
Kuch to bda hi kr degi...

Abhuehsk ki ma...
"Ma"ek aisa shand ...jisse sunte hu man me samman umad aata hai...kadatr maa achhi hiti hai...lekin kuch bht buri hhi...
Meri ek saheli ki ma ne...uski jindagi brbad krdi...totaly brbad...uska tallak kradiya...marti peet'ti hai...
Uske bare me sichti hu to mn me ata hai pta nhi kb mregi wo...
Kisi ke mrne ki dua mangna sahi nhi hai...pr rakshaas ke mrne ke bad hi kisi ka udhhar hota hai...
Ap sb us orat ko nhi jante pr pls frnd ek baar to mn me bolna hi wo orat jaldi mr jaye...kuki uske mrne ke bad hi uska priwar chain ki sans le skata hai...she is dayan...khair mai kaha pahuch gyi...
Akhir tannu ne bhi prpose kr diya abbishek ko...very good...mja aayega ab...
Mja aagya maahi ji...you are great...keep writing...superb
 

Ankitarani

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चौदहवाँ भाग


तनु ने अभिषेक का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा।

तनु- मैं जब से यहाँ पर आई हूँ तब से मैं तुम्हारे साथ हूँ। तुम्हारा स्वभाव, तुम्हारी बात और तुम्हारा व्यवहार ने मेरे दिल में एक अलग छाप छोड़ी है। मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ और तुमसे बहुत प्यार करती हूँ अभिषेक। आई लव यू अभिषेक। आई लव यू।

तनु के ऐसा करने के बाद वहाँ सन्नाटा छा गया। सभी आँखे फाड़े एक दूसरे को देखने लगे। सबसे ज्यादा अचंभित इस समय महेश था। उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि तनु जिस लड़के से प्यार करने की बात करती थी वह अभिषेक ही है। मुझे तो पहले से ही शक था इस बात पर इसलिए मेरा बर्ताव सामान्य ही था। अभिषेक भी यह सुनकर चकित ही था, लेकिन उसके मन में भी थोड़ा बहुत तनु के लिए कुछ था इसलिए तनु की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।

अभिषेक- ये सब क्या है तनु। अभी हम सब पढ़ने लिखने की उम्र में प्यार मोहब्बत की बात कैसे कर सकते हैं। पहले बोर्ड की परीक्षा खत्म हो जाए उसके बाद इस बारे में बात करते हैं।

तनु- नहीं अभिषेक, पढ़ाई लिखाई के साथ ये सब भी जरूरी है। और मुझे तुम्हारा जवाब अभी चाहिए वो भी हाँ में चाहिए।

महेश- अरे ऐसे कैसे। मैंने भी तुमसे अपने प्यार का इजहार किया था, लेकिन तुमने इस घोंचू के लिए मुझे मना कर दिया। और अब जब अभिषेक कोई जवाब नहीं दे रहा है तो तुम उससे जबदस्ती कर रही हो। ये सही बात नहीं है तनु।

तनु- महेश तुम चुप रहो और दोबारा अभिषेक को घोंचू मत कहना। हाँ अभिषेक तुम इसके लिए कल तक का समय ले सकते हो। तब तक अच्छे से सोच लो। मुझे तुम्हारा जवाब हाँ में ही चाहिए। क्योंकि मैं बहुत जिद्दी हूँ और जब तक तुम हाँ नहीं कहोगे मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ूँगी।

मैं- ये कैसी बात कर रही हो तनु। महेश हमारा बचपन का दोस्त है। हम सब आपस में ऐसी बाते करते रहते हैं। तुम्हें इस तरह से महेश से बात नहीं करनी चाहिए। आखिर वो तुम्हारा भी दोस्त है।

तनु- वो गलती से मेरे मुँह से निकल गया। मुझे माफ कर देना महेश। लेकिन तुम्हें ऐसे अभिषेक को नहीं बोलना चाहिए। अच्छा नहीं लगता है ये सब।

इतना कहकर तनु उठकर वहाँ से चली गई। अब वहाँ हम तीनो रह गए। अभिषेक गहरी सोच में बैठा था। मैंने अभिषेक को देखते हुए कहा।

मैं- क्या सोच रहा है यार। मैंने तो तुझसे पहले ही बोला था कि शायद तनु तुझसे प्यार करती है, लेकिन तुमने कहा था कि जब वो अपने प्यार का अजहार करेगी तब सोचेंगे इसके बारे में। अब तो उसने अपने प्यार का इजहार कर भी दिया है। अब क्या कहता है तू।

अभिषेक- मैं अभी भी असमंजस की स्थिति में हूँ भाई। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे हाँ करना चाहिए या नहीं।

महेश- देखो अभिषेक, तुम्हें हाँ या न में जवाब तो देना ही है। तुम आराम से सोच समझकर ही अपना जवाब देना। इस मामले में कोई जल्दबाजी मत करना मेरे भाई।

अभिषेक- तुम ठीक कह रहे हो यार, चलो छोड़ो इस बात को। क्लास का समय हो रहा है कक्षा में चलते हैं।

इसके बाद हम तीनो कक्षा में चले गए। क्लास अटेंड करने के बाद हम लोग अपने अपने घर निकल गए। रात में खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में बैठा पढ़ाई कर रहा था, तभी अभिषेक के फोने मेरे मोबाइल पर आया। मैंने फोने उठाते हुए कहा।

मैं- हाँ अभिषेक। इस समय फोन सब ठीक तो है न।

अभिषेक- कुछ ठीक नहीं है भाई।

मैं- अरे क्या हुआ यार, तू इतना परेशान क्यों है।

अभिषेक- यार मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ। शुरू शुरू में मुझे भी ऐसा लगता था कि शायद मेरे मन में भी तनु के लिए कुछ है, लेकिन तुझसे बात करने के बाद मुझे समझ में आया कि वो मेरे आकर्षण था। अब तनु के इजहार के बाद वैसी ही इच्छा मेरे मन में फिर से आ रही हैं जैसे पहले आया करती थी। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि ये प्यार का एहसास है या आकर्षण है तनु के प्रति।

मैं- देख यार। मैं तुझे कभी कोई गलत सलाह नहीं दूँगा। अगर तेरे मन में उसके लिए तनिक भी प्यार है तो तू उसे हाँ कर दे। अगर फिर भी तेरे कुछ न समझ में न आए और तू कोई निर्णय न ले पा रहा हो तो अपनी आँख बंद करके अपना एक हाथ अपने दिल पर रखकर ठंडे दिमाक और शांत चित से सोच ले। तुझे जवाब मिल जाएगा। एक बात और कहूगाँ दोस्त तुझसे कि तुझे जो भी हाँ या न कहना है वो कहकर इस मामले को यहीं खत्म कर दे, क्योंकि बोर्ड की परीक्षा सिर पर है। अगर तू ऐसे ही विचलित रहेगा तो कैसे चलेगा भाई। मेरी बात पर अच्छी तरह गौर करने और कल अपने निर्णय तनु को सुना देना।

अभिषेक- धन्यवाद यार। तूने मेरे परेशानी एक मिनट में सुलझा दी। ठीक है अब फोन रख रहा हूँ। कल सुबह स्कूल में मिलता हूँ फिर बात करेंगें।

इसके बाद अभिषेक ने फोन रख दिया। काजल जो अभी तक सोई नहीं थी, मेरे फोन रखने के बाद बोली।

काजल-क्या बात है भैया। किससे चोरी चोरी बातें हो रही हैं।

मैं- अरे कुछ नहीं वो अभिषेक का फोन था उसी से बातें कर रहा था।

काजल- अभिषेक भैया का फोन था या चुपके चुपके अपनी महिला मित्र से बात कर रहे थे।

मैं- चुप कर तू। ज्यादा फालतू में अपना दिमाग मत चलाया कर। इतना दिमाग अगर पढाई में लगाती तो आज पूरी कक्षा में अव्वल आती। चल सो जा अब।

मेरे कहने के बाद पायल मुँह बनाकर करवट बदल ली और सोने लगी। मैंने थोड़ी देर और पढ़ाई की। उसके बाद मैंने किताब बंद की और सो गया।

सुबह उठकर मैं तैयार होकर नाश्ता करने के बाद स्कूल चला गया। वहाँ अभिषेक और महेश मुझे बाहर ही मिल गए। हम तीनो अपनी कक्षा में जाकर अपनी अपनी जगह पर बैठ गए। थोड़ी देर बाद शिक्षक आ गए और क्लास शुरू हो गई। इसी तरह पढ़ाई करते हुए भोजनावकाश का समय हो गया। कक्षा से बाहर आते हुए महेश बाथरूम जाने का बोलकर चला गया। मैं और अभिषेक आकर परिसर में खाली जगह देखकर बैठ गए। बैठने के बाद मैंने अभिषेक से पूछा

मैं- तो फिर क्या सोचा है तुमने तनु के बारे में।

अभिषेक- कल रात तेरे बताए हुए तरीके से मैंने सोचा, तो मुझे लगा कि शायद मेरे दिल के किसी कोने में तनु के लिए कुछ तो है। इसलिए मैंने निर्णय लिया है कि मैं तनु के प्यार के इजहार को स्वीकार कर लेना चाहिए।

अभिषेक की बात सुनकर मैं खुश हो गया और उसे गले से लगाकर बोला।

मैं- ये तुमने बहुत अच्छा किया अभिषेक। मेरा भी यही मानना था कि तुम्हें तनु के प्रपोजल को मान लेना चाहिए।

अभी हम बात कर ही रहे थे कि वहाँ पर तनु आ गई और उसके पीछे पीछे महेश भी आ गया। तनु आकर हम दोनों के पास बैठती हुई बोली।

तनु- क्या बात है। तुम दोनो बड़े खुश दिखाई दे रहे हो। जरा मैं भी तो सुनूँ कि किस खुशी में तुम दोनो एक दूसरे के गले मिल रहे हो।

मैं- ये हम दोनों दोस्तों के बीच की बात है। कुछ समय बाद तुम्हें भी पता चल जाएगा।

उसके बाद हम चारों बैठे हुए इधर उधर की बातें करने लगे। थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद आखिरकार तनु ने अभिषेक से पूछ ही लिया।

तनु- अभिषेक तुमने अभी तक मेरे प्रपोजल का कोई जवाब नहीं दिया। क्या मैं तुम्हें पसंद नहीं हूँ। या तुम किसी और को चाहते हो जिसके लिए मेरा प्रपोजल ठुकरा रहे हो।

अभिषेक- नहीं मैं किसी और से प्यार नहीं करता और मैंने कहाँ तुम्हारा प्रपोजल ठुकराया है। अभी तो मैंने तुम्हें कोई जवाब भी नहीं दिया है।

तनु- तो तुम्हारा क्या जवाब है अभिषेक।

इतने कहकर तनु अभिषेक को देखने लगी। तनु के चेहरे का भाव प्रतिपल बदल रहा था। उसे अभिषेक के जवाब की प्रतीक्षा करना मुश्किल हो रहा था। अभिषेक ने गहरी सांस लेते हुए कहा।

तनु- देखो तनु। मैंने कल बहुत गहराई से तुम्हारे बारे में सोचा। मुझे भी ऐसा लगता है कि मेरे दिल में भी तुम्हारे लिए कुछ जज्बात तो हैं। शायद ये प्यार ही हो। इसलिए मैं तुम्हारा दिल नहीं तोड़ना चाहता। मैं भी तुम प्यार करता हूँ। आई लव यू तनु।

तनु- क्या सच में अभिषेक। थैंक यू सो मच। तुम नहीं जानते अभिषेक मैं आज कितनी खुश हूँ। मुझे पता था कि तुम्हारा जवाब हां में ही होगा।

इतना कहकर तनु अभिषेक से लिपट गई और उसे जोर से अपनी बाहों में भर लिया। बाहों में भरने के बाद तनु ने अभिषेक के होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूमने लगी। अभिषेक की आंखे बड़ी हो गई तनु के ऐसा करने पर, क्योंकि जब कोई लड़की पहली बार ऐसा करती है तो ये सब होना स्वाभाविक है। अभिषेक तो जैसे बुत से बन गया था। जिसे महेश ने होश में लाते हुए कहा।

महेश- कुछ तो शर्म करो तुम दोनों। एकदम बेशर्मों की तरह चूम रहे हो एक दूसरे को। हम दोनों यहां हैं तब ये हाल है। पता नहीं अकेले होंगे तो क्या क्या करोगे।

महेश ने क्या क्या पर बहुत जोर दिया जिसके मतलब हम अभिषेक, मैं और तनु भी समझ गए, तनु वहां से शरमाकर भाग गई और अभिषेक महेश को घूरने लगा। महेश ने दांत निपोरते हुए कहा।

महेश- हो गया अब तुम दोनों का। चल बेटा अभिषेक तेरा मुंह तो मीठा हो गया। अब हमारा भी मुंह मीठा करा।

अभिषेक- अच्छा तुझे मुंह मीठा करना है। आ यहां मेरे पास बैठ मैं तेरा मुंह मीठा करवाता हूँ।

अभिषेक ने महेश को अपने पास बैठने के लिए कहा और अपने होंठ को गोल बनाकर महेश को इशारा किया। अभिषेक की इस हरकत से मेरी हंसी छूट गई। महेश ने अभिषेक को घूरते हुए कहा।

महेश- बकचोद साले। मुझे गे समझता है क्या तू। अभी मेरे इतने बुरे दिन भी नहीं आए हैं कि मुझे तेरा चुम्मा लेना पड़े। अब चुपचाप चल बाहर और मुंह मीठा करवा हम दोनों का।

अभिषेक- तो उसके लिए बाहर जाने की क्या जरूरत में यहीं तेरा मुंह मीठा करवा देता हूँ।

इतना कहकर अभिषेक ने अपनी जेब मे हाथ डाला और लेबिनचूस/कम्पट (आज के जमाने का चॉकलेट जो 5 ₹ में दस मिलती है।) ऑरेंज फ्लेवर का निकाला और महेश को देते हुए बोला।

अभिषेक- ले अपना मुंह मीठा कर। मुझे पहले से पता था कि तू ऐसा ही कुछ करेगा। इसलिए खासतौर से मैंने तेरे लिए ही ली है ये।

लेबिनचूस/कम्पट देखकर महेश का पारा ऊपर चढ़ गया और वो महेश पर भड़कता हुआ बोला।

महेश- ये कम्पट तू अपनी गांड में दाल ले भोस.... ले। तू साले बहुत बड़ा कंजूस है। लड़की ने आगे से चलकर तुझे प्रपोज किया और तू मुझे कम्पट खिला रहा है। पता नहीं तनु को तुझमें क्या दिखा जो वो अपने होशोहवास खो बैठी है। पता नहीं उसका क्या होगा, जो इतना कंजूस प्रेमी मिला है।

महेश ने बात की शुरुआत तो गुस्से से की थी लेकिन बात खत्म होते होते उसकी बात हास्यप्रद हो गई। उसकी बात सुनकर हम दोनों हँसने लगे। जब हमारी हंसी रुकी तो अभिषेक ने कहा।

अभिषेक- चल तू भी क्या याद करेगा कि किसी दिलदार आदमी से पाला पड़ा है। चल तुझे नहर ददोली का सुप्रसिद्ध रसगुल्ला खिलाता हूँ।

रसगुल्ले का नाम सुनकर महेश बहुत खुश हुआ। और अभिषेक का हाथ पकड़कर उसे खींचते हुए स्कूल से बाहर ले जाने लगा। मैं भी दोनों के पीछे पीछे चलने लगा।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

Chlo ji...akhiarkar love story begins..lekin prposal aceept krte hi kiss...ufffff....ajeeb hai...bdi beshrm nikli tannu to...

Kampat...muje aaj pta lga use kampatt kahte hai...thanks btane k lie...
Wese kamt wala scene kaafi comedy tha...
Anyway...abhishek pr mujhe kuch shk hai...usne ye kaha...ki mere mn me bhi kuch hai...ab is kuch ka mtlb pyar hi hai...ye pta nhi...kahi esa na ho bad me chle ki ye to bs attrection tha...
Anyway mai shaayd jada soch rhi hu suspade story likh likhkr dimak b shaayd wesa ho gya...
Anyay supreb maaahi ji...ab dekhte hai aage kya hone wala hai...great wrinting...carry on...
 

Vk248517

I love Fantasy and Sci-fiction story.
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सत्रहवाँ भाग


तनु- अरे यार तुम्हारा दोस्त पिछले तीन दिन से साडू मुँह बनाकर घूम रहा है। मुझसे बात ही नहीं करता तो मैं कैसे अच्छी हो सकती हूँ।

इतना बोलकर तनु अभिषेक की तरफ मुखातिब होकर अभिषेक से बोली।

अभिषेक- मुझे माफ कर दो यार। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई थी उस दिन जो मैंने नयन को उलटा सीधा बोल दिया था। वो क्या है न कि तुम दोनो जब मुझे नजरअंदाज करके चले गए थे तो मुझे तुमपर बहुत गुस्सा आया। मैं तुमसे नाराज हो गई थी।और यही जताने के लिए कक्षा में आ रही थी और नयन से टक्कर हो गई। एक तो मैं पहले से ही गुस्सा थी ऊपर से ये टक्कर हो गई तो मुझे और गुस्सा आ गया और जो गुस्सा मैं तुमपर निकालना चाहती थी वो नयन पर निकल गया। मैंने दो दिन इस बारे में सोचा तब मुझे एहसास हुआ कि मैंने गलती की है। इसलिए मैं तुमसे माफी माँग रही हूँ। मुझे माफ कर दो अभिषेक, प्लीज, प्लीज।

तनु की बात सुनकर हम सब तनु को देखने लगे। उसकी बात मुझे भी सही लग रही थी, लेकिन महेश था जो उसे अभी भी तनु की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था, परंतु वो चुपचाप बैठा हुआ था। तनु की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।

अभिषेक- अगर तुम्हें अपनी गलती का एहसास है तो तुम मुझसे नहीं नयन से माफी माँगो। अगर उसने तुम्हें माफ कर दिया तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है।

तनु- नयन मुझे मेरी उस दिन की गलती के लिए माफ कर दो। मैंने उस दिन जो कुछ भी किया वो गलत था, लेकिन मैं गुस्से में थी इसलिए मुझे सही गलत कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। प्लीज मुझे माफ कर दो।

मैं- तुम्हें माफी माँगने की जरूरत नहीं है तनु। मैं तो उसी दिन समझ गया था कि तुमने गुस्से में ये सब किया है। इसलिए मैंने तुम्हें उसी दिन माफ कर दिया था। अभिषेक अब तू भी गुस्सा थूक दे और तनु को माफ कर दे।

मेरी बात सुनकर अभिषेक ने अपना मुँह पीछे किया और आ... थू किया। उसे देख कर महेश ने कहा।

महेश- अब ये क्या था बे।

अभिषेक- अभी तो नयन ने कहा न कि अपना गुस्सा थूक दो। तो मैं वही कर रहा था अपना गुस्सा थूक रहा था।

उसकी बात सुनकर हम सब हँसने लगे। उसके बाद तनु के कहा।

तनु- तो अभिषेक अब तो तुम मुझसे नाराज नहीं हो न। मुझे माफ कर दिया न तुमने।

अभिषेक- हां माफ कर दिया मैंने तुम्हें। लेकिन आगे से ऐसा कभी मत करना यार। ये मेरा भाई है।

इतना सुनकर तनु अभिषेक के ऊपर टूट पड़ी और उसके ऊपर चुम्बनों की झड़ी लगा दी। अभिषेक बहुत मुश्किल से तनु को अपने से अलग करते हुए कहा।

अभिषेक- ये सब क्या है। तुम पागल हो क्या। जब देखो तब तुम मेरे ऊपर चढ़ जाती हो और चूमने लगती हो। ये भी नहीं देखती कि हम लोग कहाँ बैठे हुए हैं। अगर मैं अकेले में तुम्हें मिल जाऊँ तो पता नहीं तुम मेरे साथ क्या करोगी।

तनु- ये तो मेरे प्यार जताने का तरीका है अभिषेक। कभी अकेले में मिलो तुम।तुम्हें खुद पता चल जाएगा कि मैं क्या करूँगी।

अभिषेक- चलो अब बहुत हुआ तुम्हारा प्यार। अब कक्षा में चलते हैं वहीं बैठकर बात करेंगे।

तनु- तुम सब चलो मैं कुछ देर में आती हूँ। मुझे अपनी एक सहेली से कुछ जरूरी काम है।

तनु की बात सुनकर मैं अभिषेक और महेश अपनी कक्षा में जाने के लिए उठ गए। फिर मैं अभिषेक से बाथरूम जाने का बोलकर बाथरूम में चला गया। जब मैं बाथरूम से वापस होकर लौटा तो देखा कि तनु किसी से बात कर रही है। उसे देखकर मैं सोच में पड़ गया कि तनु ने तो बोला था कि उसे अपनी किसी सहेली से जरूरी काम है, तो क्या ये उसकी सहेली है। लेकिन ये उसकी सहेली कब से बन गई। हो सकता है कुछ और बात कर रहीं हों दोनो। मैंने अपने दिमाक को झटकते हुए अपनी कक्षा में आ गया। थोड़ी देर बाद तनु भी कक्षा में आ गई। मैंने बाहर वाली बात उससे पूछना जरूरी नहीं समझा क्योंकि वो कोई इतनी बड़ी बात नहीं थी और पूछने का मतलब था कि तनु फिर से शक कर लेती की मैं उसकी जासूसी कर रहा हूँ।

खैर शिक्षक आए और कक्षा शुरू हो गई। इसी तरह समय बीतता गया और स्कूल की छुट्टी हो गई। हम लोग अपने घर की तरफ चल पड़े। रास्ते में मुझसे महेश ने कहा।

महेश- नूनू भाई। तुम्हें क्या लगता है कि तनु सच में पहले जैसी हो गई है।

मैं- हाँ मुझे तो यही लग रहा है कि जो हमने तनु के बारे में सोचा था वो गलत था। तनु वैसी ही थी जैसी वो पहले थी।

महेश- लेकिन भाई। मुझे अब भी तनु के ऊपर शक है। मुझे लगता है कि उसके दिमाग में कुछ-न-कुछ चल रहा है।

मैं- तेरे पास दिमाग है जो तू सोच रहा है। ऐसा कुछ भी नहीं है। बस उसने तेरा प्यार स्वीकार नहीं किया इसलिए तू उसपर लांछन लगा रहा है। अब अपना ज्यादा दिमाग मत इस्तेमाल कर और चुपचाप घर चल।

इसी तरह दिन बीतते रहे और हम चारों की दोस्ती फिर से पहले जैसी हो गई, लेकिन महेश का तनु के ऊपर का शक अभी भी मिटा नहीं था। तनु की हम लोगों से मित्रवत बातचीत को दोबारा शुरू हुए 15 दिन बीत चुके थे। हम लोग भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए बाते कर रहे थे। तभी तनु ने कहा।

तनु- एक बात है जो मेरे मन में कई दिन से आ रही है। अगर तुम लोग सुनो तो मैं कहूँ।

अभिषेक- हाँ क्यों नहीं बताओ तो क्या बात है।

तनु- देखो। अब हम लोगों की बोर्ड परीक्षा को ज्यादा से ज्यादा 20-22 दिन बचे हुए हैं। और इस परीक्षा के बाद हो सकता है कि हमारी मुलाकात दोबारा न हो। और अगर होती भी है तो कभी कभार होगी। पता नहीं कौन किस कॉलेज में जाएगा। कौन अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाएगा। कौन पढ़ाई बन्द कर देगा।

महेश- हाँ ये बात तो तुम बिलकुल सही कह रही हो। इस परीक्षा के बाद तो बहुत मुश्किल से मिलना होगा।

तनु- तो मैं ये सोच रही थी कि इस स्कूल से जाते जाते हम अपनी इस दोस्ती को कुछ यादगार बनाएँ और पिछली जो भी बुरी यादें हमारे साथ रही हैं अब तक उन्हें पीछे छोड़कर कुछ अच्छी यादों को इस स्कूल से जाते समय अपने साथ ले जाएँ।

नयन- हाँ यार बात तो तुम्हारी एकदम सही है तनु। इन सब बातों पर तो हमने कभी गौर किया ही नहीं, लेकिन ये हमें इसके लिए करना क्या होगा। मेरे मतलब है कि हम अपने स्कूल के बचे हुए कुछ दिन यादगार कैसे बनाएँ।

तनु- हाँ तो सुनो। मैं ये कह रही थी कि क्यों ने हम दो-तीन दिन के लिए कहीं बारह घूमने चलें। बाहर मतलब। किसी दूसरे राज्य में। और मैंने तो जगह भी सोच ली है। राजगिरी। पटना शहर से कुछ घंटे की दूरी पर है ये। मेरी एक सहेली वहाँ घूमकर आई है बता रही थी कि बहुत ही अच्छी जगह है। क्या बोलते हो तुम लोग।

अभिषेक- बात तो तुम्हारी सही है तनु, लेकिन कुछ दिन बाद परीक्षा है और इस समय जाने पर पढ़ाई का नुकसान भी होगा। और सबसे बड़ी बात इतनी बड़ी बात। इतनी दूर घर वाले जाने की इजाजत भी नहीं देंगे। मुझे तो गाँव के पास नहर पर हगने जाने पर भी डाट सुननी पड़ती है तो पटना जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता और वो भी अकेले जाने का।

तनु- अरे यार। पहले मेरी बात तो पूरा सुन लो। हम लोग अकेला नहीं जा रहे हैं। अपने स्कूल के और भी बच्चे और शिक्षक भी साथ में चलेंगे। तब तो तुम्हारे मम्मी पापा को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

अभिषेक- हाँ अगर ऐसा होता है तो फिर मम्मी पापा को मैं मना लूँगा किसी तरह। और शिक्षक के जाने पर पापा शायद मना भी नहीं करेंगे।

महेश- लेकिन ये होगा कैसे। क्या तुमने सभी से बात कर ली है जाने के लिए।

तनु- अभी नहीं। पहले मैं तुम लोगों से सहमति तो ले लूँ, क्योंकि अगर तुम लोग ही तैयार नहीं हुए तो वहाँ जाने का कोई मतलब ही नहीं है। अगर तुम लोग तैयार हो तो बात करते हैं अन्य छात्रों और प्रधानाचार्य महोदय से।

तनु की बात सुनकर हम सब एक दूसरे को देखने लगे। सच में तनु का प्लान वाकई गजब का था। इसलिए किसी की आपत्ति का प्रश्न ही नहीं उठता था। इसलिए हम सभी की सहमति बन गई। तो तनु ने कहा।

तनु- तो चलो सबसे पहले अन्य छात्र/छात्राओं से बात करते हैं। अगर ज्यादा लोग तैयार हो गए चलने के लिए तो प्रधानाचार्य महोदय को मनाने में आसानी होगी।

तनु की बात सुनकर हम सब अपनी कक्षा में चले गए और छात्र/छात्राओं को अपने इस प्लान के बारे में बताया। जिसे सुनकर ज्यादा छात्र/छात्राएँ तो नहीं किंतु 15 लोगों ने अपनी सहमति जता दी। किन्तु हम सबको मिलाकर भी संख्या 20 नहीं पहुँच रही थी तो हम लोग बाहर आकर आपस में बात करने लगे। तनु ने कहा।

तनु- क्यों न हम लोग कक्षा 10 के विद्यार्थियों से बात करें आखिर उनका भी बोर्ड की परीक्षा है। अगर वो हमारे साथ चलते हैं तो उनका भी दिमाग फ्रेश हो जाएगा। और घूम भी लेंगे सभी।

हमें तनु की बात ठीक लगी। हम लोगों ने कक्षा 10 के विद्यार्थियों से बात की तो वहाँ से भी 25 विद्यार्थी मिल गए। फिर हमने अपनी बात को प्रधानाचार्य महोदय के सामने रखने की सोची। और उनके कक्ष की तरफ चल पड़े। हम लोगों ने अनुमति लेकर उनके कक्ष में गए और उनके समक्ष अपनी बात रखी तो उन्होंने कहा।

प्रधानाचार्य महोदय- तुम्हारा प्लान तो बहुत अच्छा है, लेकिन तुम लोग शायद यह भूल रहे हो कि बोर्ड की परीक्षाएँ नजदीक हैं और वहां जाने से पढ़ाई का नुकसान भी हो सकता है।

तनु- नहीं सर पढ़ाई का नुकसान बिलकुल नहीं होगा। आप ही सोचिए सर कि साल भर से वही वही चीज पढ़ते पढ़ते विद्यार्थी परेशान हो जाते हैं। मानसिक दबाव में रहने लगते हैं। अगर इस बीच किसी अच्छी जगह पर घूम कर आया जाए तो दिमाग के सारे दबाव और परेशानियाँ दूर हो जाती हैं और दिमाग एकदम तरोतोजा हो जाता है। और वैसे भी कुछ समय बाद हम सब एक दूसरे से बहुत कम मिल सकेंगे तो कम से कम इसी बहाने हम कुछ यादें संजो कर रखना चाहते हैं।

प्रधानाचार्य महोदय- बात तो तुम्हारी ठीक है तनु, लेकिन मैं कोई निर्णय अकेले नहीं ले सकता। क्योंकि मैं अगर तैयार भी हो जाता हूँ तो तुम लोगों को अकेले तो भेज नहीं सकता। इसके लिए कम से कम 4-5 शिक्षक भी साथ जाएँगे। तो हम उनसे बात कर लें पहले फिर सोचेंगे इसके बारे मैं। शाम तक तुम लोगों को बताते हैं कि क्या निर्णय लिया गया है।

इसके बाद हम लोग प्रधानाचार्य के कक्ष से बाहर आ जाते हैं और अपनी कक्षा में जाते हैं तो कक्षा में शिक्षक मौजूद थे और पढ़ा रहे थे। हमें देखते ही शिक्षक ने कहा।

शिक्षक- कहाँ से आ रही है चंडाल चौकड़ी घूम कर।

महेश- ये चंडाल चौकड़ी प्रधानाचार्य महोदय के कक्ष से सफर करते हुए अभी अभी अपनी कक्षा में प्रवेश कर रही है।

महेश ने ये बात मजाकिया लहजे में कही। जिसे सुनकर सारे विद्यार्थी हँसने लगे। शिक्षक ने हमें घूर कर देखा तो हम जल्दी से अपनी सीट पर बैठ गए। स्कूल की छुट्टी होने के कुछ देर पहले ही चपरासी ने आकर हमें सूचित किया कि हम चारों लोगों को प्रधानाचार्य महोदय ने अपने कक्ष में बुलाया है। चपरासी की बात सुनकर हम चारों प्रधानाचार्य महोदय के कक्ष की तरफ चल पड़ें।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

Nice updates
 
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SHADOW KING

Supreme
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nice update ..to tanu phir se group me shamil ho gayi abhishek ke gussa thukne par ..
par ye tanu ki kaunsi dost hai jo abhi tak kisiko pata nahi 🤔.

shayad tanu ne nayan ko fasane ke liye picnic ka plan banaya hai ..
par ye exam ke pehle picnic 🤔..

shayad nayan pe koi iljaam lag jaaye picnic me aur uska asar uski padhai par ho aisa hi plan kar rahi hogi tanu ..
aur phir abhishek aur nayan ki dosti toot jaaye ..
 
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