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Fantasy क्या यही प्यार है

11 ster fan

Lazy villain
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तनु- नयन और महेश कैसे हो तुम दोनों।
तनु से हम दोनों को इतने प्रेम से बात करने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि पिछले लगभग दो महीने में आज पहली बार हुआ था जो तनु ने तने प्रेम से हम दोनो से बात की थी। उसकी बात सुनकर हमें लगा कि शायद हम दोनों उसके बारे में गलत ही सोचते थे। क्योंकि अभिषेक और तनु का नया नया प्यार था और उनको थोड़ा अलग स्पेस चाहिए था इसलिए तनु हम दोनों से बात नहीं करती थी ठीक से। इसलिए तनु के इतने प्रेम से बोलने के बाद हम दोनों को बहुत खुशी हुई। हम दोनों ने मुस्कुराते हुए कहा।

Kuchh to gadbad hai hai daya..:dazed:
 

Vk248517

I love Fantasy and Sci-fiction story.
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N
सोलहवाँ भाग
अभिषेक से बात करके मुझे बहुत सुकून मिला। उससे बात करके मुझे अनुमान हुआ कि मेरा शक अभिषेक के ऊपर निराधार है। फिर हम दोनों हँसते हुए वहाँ से चले गए। शायद मेरी खुशी के आगे अभिषेक को यह ध्यान भी नही रहा कि तनु उसके इंतजार कर रही है। हम दोनो अपनी कक्षा में आ गए। जब वहाँ पर तनु दिखाई नहीं दी तो अभिषेक ने अपने सिर पर हाथ मारते हुए कहा।
अभिषेक- अरे यार। ये क्या हो गया। तेरे चक्कर में मैं तनु को वहीं छोड़कर चला आया। तू रुक मैं आता हूँ कुछ देर में।
मैं-जा बेटा जा। आज तो तेरी बैंड बजने वाली है (मैंने ये बात हँसते हुए कही थी)
अभिषेक मुझे कक्षा में छोड़कर चला गया। और बाहर जहाँ तनु को छोड़कर आया था वहाँ देखने लगा, लेकिन तनु वहाँ नहीं थी। अभिषेक यहाँ वहाँ ढूंढने के बाद वापस कक्षा मे चला आया। मैने उसे देखते हुए कहा।
मैं- क्या हुआ। तनु नहीं मिली क्या।
अभिषेक- नहीं यार पता नहीं वो कहाँ चली गई।वो वहाँ थी ही नहीं जहाँ में उसे छोड़कर आया था।
मै- अरे यार गई कहाँ होगी। यहीं स्कूल में ही होगी। अभी थोड़ी देर में आ जाएगी। वैसे लगता है कि वो तुझसे नाराज हो गई है तेरे ऐसे चले आने से। अपना पिछवाड़ा मजबूत कर ले, क्योंकि आज तेरे पिछवाड़े पर बहुत मार पड़ने वाली है।
अभिषेक- ये सब तेरी वजह से ही हुआ है और तू मेरे ही मजे ले रहा है। ले भाई तेरा समय है ले ले मजे मेरे। एक दिन ऐसे ही मैं भी तेरे मजे लूँगा देख लेना।
मैं- मैं तेरी तरह पागल नहीं हूँ जो इन प्यार व्यार के चक्करों में पडू। और वैसे भी मेरे पास इस सब फालतू चीजों के लिए समय नहीं है।
अभिषेक- इसका मतलब तू ये कहना चाहता है कि मैं पागल हूँ। रुक साले अभी तुझे बताता हूँ।
इतना कहकर अभिषेक मुझे मारने को हुआ तो मैं वहाँ से भाग लिया। अभी मैं दरवाजे के पास पहुँचा ही था कि बाहर से आती तनु से टकरा गया। जिसके कारण उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो जमीन पर गिरने को हुई तो मैंने उसे थाम लिया। उसे थामने के लिए मुझे उसकी कमर को पकड़ना पड़ा। मैंने तनु को जमीन पर गिरने नहीं दिया। बस फिर क्या था। तनु को एक बहाना मिल गया और वो मेरे ऊपर भड़क गई।
तनु- ये क्या बदतमीजी है नयन। तुम्हें शर्म नहीं आती मेरे साथ ऐसी हरकत करते हुए।
मैं- अरे मैंने क्या किया है। मैंने तो तुम्हें नीचे गिरने से बचाया है ताकि तुम्हें चोट न लगे।
तनु- एक तो खुद मुझसे जानबूझकर टकराते हो और ऊपर से बोलते हो कि मुझे गिरने से बचाया तुमने। मैं अच्छे से जानती हूँ कि तुम्हारे मन में मेरे लिए क्या है।
मै- देखो तनु बहुत हुआ अब। मैं तुमसे जानबूझ कर नहीं टकराया था वो तो बस अचानक से तुम आ गई इसलिए मैं टकरा गया तुमसे, लेकिन इसको इतना बड़ा इश्यू बनाने की क्या जरूरत है। तुम तो मुझे बहुत दिनों से जान रही हो। मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई गलत ख्याल नहीं है तनु। विश्वास करो मेरा।
तनु- तुम्हारा विश्वास करू। मुझे अब पता चल गया है कि तुम किस टाइप के लड़के है।
अभिषेक जो दूर खड़ा इस बात को सुन रहा था। तनु ने शायद अभिषेक के ऊपर ध्यान ही नहीं दिया कि अभिषेक भी कक्षा में है, क्योकि जब मुझसे टकराने के बाद तनु को मैंने पकड़कर खड़ा किया तो अभिषेक की तरफ उसकी पीठ हो गई थी, इसलिए अभिषेक को उसने नहीं देखा था। तनु की बात सुनकर अभिषेक ने तनु से तेज स्वर में कहा।
अभिषेक- तनु। ये क्या अनाप सनाप बके जा रही हो नयन के बारे में।
तनु- अभिषेक। तुम। तुमने देखा नहीं नयन ने मेरे साथ क्या किया है।
अभिषेक- हाँ मैंने देखा की नयन ने तुम्हारे साथ क्या किया है। और ये भी देख रहा हूँ कि तुम नयन के साथ क्या कर रही हो। तुम्हारे दिमाग फिर गया है क्या। तुम नयन को ऐसे कैसे उलटा सीधा बोल सकती हो। तुम कितना जानती हो नयन के बारे में। और मैं उसे जानता हूँ बचपन से। कक्षा की कोई भी लड़की नयन के बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकती और तुम नयन के ऊपर इलजाम लगा रही हो। अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसका मुँह तोड़ देता।
मैं- ये क्या बोल रहा है तू अभिषेक। तुझे तनु से ऐसे बात नहीं करना चाहिए। उसको कोई गलतफहमी हो गई होगी मेरे लिए। तो उसके लिए तू उसे इतनी खरी-खोटी सुना रहा है। दोस्तों के बीच तो ये सब होता ही रहता है। तनु अभिषेक की बात का बुरा मत मानना। ये तो बस ऐसे ही बोल गया तुम्हें।
मुझे कुछ कुछ समझ में आ रहा था कि अभिषेक का तनु को वहाँ अकेला छोड़कर आना तनु के गुस्से का मुख्य कारण हो सकता है। और इसी गुस्से में वो मुझे इतना कुछ कह गई। लेकिन अभिषेक को ऐसे रिएक्ट नहीं करना चाहिए था। अगर अभिषेक कुछ देर और यहाँ रहा तो दोनों में शीतयुद्ध शुरू होने की संभावना है इसलिए मैं अभिषेक को कक्षा से बाहर निकाल कर ले आया और उसे समझाते हुए कहा।
मै- ये सब क्या था यार। तुझे तनु से साथ ऐसे पेश नहीं आना था। वो अभी गुस्से में थी, क्योंकि तुम उसे वहाँ अकेला छोड़कर आ गए। और तुझसे पहले मैं उसके सामने आ गया इसलिए उसको पूरा गुस्सा मेरे ऊपर निकल गया। अब अपना गुस्सा थूक दे यार और चिल मार। तू गुस्से में बिलकुल भी चिंम्पैंजी लगता है। कहीं ऐसा न हो कि तुझे सर्कस वाले न देख लें और अपने साथ सर्कस में ले जाएँ। तब तो मुझे अपने दोस्त से मिलने के लिए रोज सर्कस जाना पड़ेगा।
मैंने अभिषेक का गुस्सा शान्त करने के लिए ही ऐसी कमेडी तरह की बात की थी और इसका असर भी हुआ। अभिषेक का गुस्सा शान्त हो गया। अब उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। थोड़ी देर बाहर बैठने के बाद भोजनावकाश के समाप्त होने की घंटी बजी तो हम दोनो कक्षा की तरफ चल दिए। कक्षा में पहुँचने के बाद अभिषेक ने एक नजर तनु को देखा और फिर अपनी नजर उससे हटा ली। मैंने भी तनु की तरफ देख कर आँखों से इशारा किया कि अब सब ठीक है अभिषेक गुस्से में नही है अब। तो तनु की तरफ से मुझे कुछ दिनों से मिल रही प्रतिक्रिया ही मिली। उसने अपना मुँह सिकोड़ लिया। मुझे उसकी इस प्रतिक्रिया को खास तवज्जो नहीं दी। क्योंकि अभी जो कुछ भी हुआ था। उसके बाद ऐसी प्रतिक्रिया का आना स्वाभाविक था।
बहरहाल मैं और अभिषेक आकर अपनी जगह पर बैठ गए। इधर हम दोनों के कक्षा से जाने के बाद अभिषेक के कहे हुए अंतिम शब्द कि अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसके मुँह तोड़ देता। तनु के कानों मे गूँज रहा था। उसे लग रहा था कि अभिषेक ने सब के सामने उसकी बेइज्जती कर दी है। जबकि उस समय कक्षा में हम तीनों के अलावा और कोई नहीं था। लेकिन तनु ने इस बात को अपने अहम पर ले लिया। उसके दिमाग में कुछ खुराफात चलने लगा। लेकिन अभी के लिए उसने अपने आप सो संभाल लिया था। अभिषेक ने अभी तक तनु से कोई बात नहीं की थी और न ही तनु ने कोई बात करने की कोशिक की थी। मैंने ही अभिषेक को कोहनी मारते हुए कहा।
मैं- अबे क्या कर रहा है तू। कम से कम एक बार बात तो कर तनु से।
अभिषेक- तू चुप कर साले। मैं कोई बात-चीत नहीं करने वाले तनु से।
मै- अगर बातचीत नहीं करेगा तो तुम दोनों की नाराजगी कैसे दूर होगी। नाराजगी दूर करने के लिए बात-चीत तो करनी पड़ेगी न।
अभिषेक- अब मैं तनु से तभी बात करूँगा जब वो स्वयं आकर मुझसे बात करेगी। अब इस बारे में ज्यादा बहस मत कर मुझसे।
तभी शिक्षक ने कमरे में प्रवेश किया तो मैं और अभिषेक शान्त हो गए। इसी तरह कक्षा चलती रही और मैं अभिषेक मन लगाकर पढ़ाई करते रहे, लेकिन भोजनावकाश के समय हुई घटना के बाद मेरा और अभिषेक का मन पढ़ाई में और दिनों की अपेक्षा नहीं लग रहा था। किसी तरह छुट्टी हुई और हम अपने घर जाने लगे। रास्ते में एक बार भी तनु ने अभिषेक और न ही तनु ने अभिषेक से बात करने की कोशिश की। हम सब अपने घर चले गए। मैं इस घटना के बारे में ज्यादा सोचना नहीं चाहता था, क्योंकि जितना ज्यादा मैं सोचता उतना ज्यादा उलटा सीधा खयाल मेरे दिमाग में आता।
अगले दिन हम सब फिर स्कूल पहुँचे। महेश भी आज स्कूल आया था। आज भी तनु और अभिषेक ने बात करने की कोशिश नहीं की एक दूसरे से। महेश ये देखकर हैरान था कि एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया जो अभिषेक और तनु ईलू ईलू करने की बजाय एकदम शांत बैठे हैं। भोजनावकाश के समय महेश से जब न रहा गया तो उसने मुझसे पूछ ही लिया।
महेश- अरे नूनू भाई एक बात तो बताना। मैं सुबह से देख रहा हूँ कि अभिषेक और तनु आपस में कोई बातचीत ही नहीं कर रहे हैं। अभी परसों तो दोनों ऐसे व्यस्त थे एस दूसरे में कि उन्होंने हमारी तरफ भी ध्यान नहीं दिया था। और कल मैं आया नहीं था। तो इस एक दिन में आखिर ऐसा क्या हो गया कि दोनो लैला मजनू एकदम शांत बैठे हुए हैं।
महेश के पूछने के बाद मैंने उसे कल हुई सारी घटना के बारे में अवगत करा दिया जिसे सुनने के बाद महेश ने कहा।
महेश- एक बात सच कहूँ यार। तनु पर मुझे कुछ शक हो रहा है। उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो चल रहा है। क्या हमें अभिषेक को उससे अलग होने के लिए बोल देना चाहिए।
मैं- कैसी बात कर रहा है यार तू। बिना किसी ठोस सबूत के हम केवल शक कर सकते हैं। और शक के बिना पर उठाया गया कोई भी कदम सही नहीं होता। कल तक मुझे भी ऐसा ही लगता था, लेकिन ठंडे दिमाग से सोचने के बाद मुझे भी एहसास हुआ कि शायद मैं सही नहीं सोच रहा था। कल तनु ने जो किया वो उसका गुस्सा था जो अभिषेक के बजाय मेरे ऊपर निकाल दिया उसने।
महेश- भगवान करे तू जो सोच रहा है वैसा ही हो, लेकिन मेरा सिक्स सेंस कह रहा है कि तनु कुछ न कुछ बड़ा सोच रही है।
मैं- तेरा सिक्स सेंस। साले तेरे पास एक भी सेंस नहीं है और तू सिक्स सेंस से सोच रहा है। सोचना तेरे बस की बात नहीं है। और जो जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दे। समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।
मेरी बात सुनकर महेश मुस्कुराने लगा। इसी तरह दो दिन बीत गए, लेकिन अभिषेक और तनु में कोई बात नहीं हुई। अगले दिन मैं अभिषेक और महेश भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए। तभी वहां तनु आ गई। और आते ही मुझसे और महेश से बोली।
तनु- नयन और महेश कैसे हो तुम दोनों।
तनु से हम दोनों को इतने प्रेम से बात करने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि पिछले लगभग दो महीने में आज पहली बार हुआ था जो तनु ने तने प्रेम से हम दोनो से बात की थी। उसकी बात सुनकर हमें लगा कि शायद हम दोनों उसके बारे में गलत ही सोचते थे। क्योंकि अभिषेक और तनु का नया नया प्यार था और उनको थोड़ा अलग स्पेस चाहिए था इसलिए तनु हम दोनों से बात नहीं करती थी ठीक से। इसलिए तनु के इतने प्रेम से बोलने के बाद हम दोनों को बहुत खुशी हुई। हम दोनों ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैं और अभिषेक- हम दोनों बहुत बढ़िया हैं।
मैं- तुम कैसी हो तनु।
तनु- मैं बिलकुल भी अच्छी नहीं हूँ।
मैं- क्यों क्या हुआ तुम्हें।
तनु- अरे यार तुम्हारा दोस्त पिछले तीन दिन से साडू मुँह बनाकर घूम रहा है। मुझसे बात ही नहीं करता तो मैं कैसे अच्छी हो सकती हूँ।
इतना बोलकर तनु अभिषेक की तरफ मुखातिब होकर अभिषेक से बोली।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
Nice updates
 

Mahi Maurya

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nice update ...abhishek aur nayan tanu ko wahi chhodkar class me aa gaye iska gussa tanu ne nayan par nikala ..
aur apne dost ki itni beijjati hote dekh abhishek ne nayan ka saath diya aur tanu ko khari khoti sunayi 🤩..

nayan ne undono ka jhagda badhne nahi diya ye achcha kiya ..
par ab dono ek dusre se baat nahi karte aur agle din mahesh ne ye baat notice ki aur uske dil me jo tha tanu ko lekar wo keh diya nayan se ..

aur 3 din baad achanak tanu ka nayan aur mahesh se pyar se baat karna 🤔.. kuch naa kuch karke hi maanegi tanu aisa lagta hai ..

nayan ko abhi se saawdhan rehna chahiye par wo tanu ko samajh hi nahi paaya abhi tak .

dekhte hai tanu kaise apna badlaa leti hai nayan se ..
धन्यवाद सर जी इस बेहतरीन समीक्षा के लिए।

तनु की नाराजगी जायज थी, लेकिन वो अभिषेक के प्रति थी। नयन पर उसका ठीकरा नयन के ऊपर फोड़ना गलत था। उसका बर्ताव अचानक बदल जाना किसी बड़े खतरे का संकेत दे रहा है सर जी। देखते हैं क्या होता है।

साथ बने रहिए
 

Sanju@

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सोलहवाँ भाग
अभिषेक से बात करके मुझे बहुत सुकून मिला। उससे बात करके मुझे अनुमान हुआ कि मेरा शक अभिषेक के ऊपर निराधार है। फिर हम दोनों हँसते हुए वहाँ से चले गए। शायद मेरी खुशी के आगे अभिषेक को यह ध्यान भी नही रहा कि तनु उसके इंतजार कर रही है। हम दोनो अपनी कक्षा में आ गए। जब वहाँ पर तनु दिखाई नहीं दी तो अभिषेक ने अपने सिर पर हाथ मारते हुए कहा।
अभिषेक- अरे यार। ये क्या हो गया। तेरे चक्कर में मैं तनु को वहीं छोड़कर चला आया। तू रुक मैं आता हूँ कुछ देर में।
मैं-जा बेटा जा। आज तो तेरी बैंड बजने वाली है (मैंने ये बात हँसते हुए कही थी)
अभिषेक मुझे कक्षा में छोड़कर चला गया। और बाहर जहाँ तनु को छोड़कर आया था वहाँ देखने लगा, लेकिन तनु वहाँ नहीं थी। अभिषेक यहाँ वहाँ ढूंढने के बाद वापस कक्षा मे चला आया। मैने उसे देखते हुए कहा।
मैं- क्या हुआ। तनु नहीं मिली क्या।
अभिषेक- नहीं यार पता नहीं वो कहाँ चली गई।वो वहाँ थी ही नहीं जहाँ में उसे छोड़कर आया था।
मै- अरे यार गई कहाँ होगी। यहीं स्कूल में ही होगी। अभी थोड़ी देर में आ जाएगी। वैसे लगता है कि वो तुझसे नाराज हो गई है तेरे ऐसे चले आने से। अपना पिछवाड़ा मजबूत कर ले, क्योंकि आज तेरे पिछवाड़े पर बहुत मार पड़ने वाली है।
अभिषेक- ये सब तेरी वजह से ही हुआ है और तू मेरे ही मजे ले रहा है। ले भाई तेरा समय है ले ले मजे मेरे। एक दिन ऐसे ही मैं भी तेरे मजे लूँगा देख लेना।
मैं- मैं तेरी तरह पागल नहीं हूँ जो इन प्यार व्यार के चक्करों में पडू। और वैसे भी मेरे पास इस सब फालतू चीजों के लिए समय नहीं है।
अभिषेक- इसका मतलब तू ये कहना चाहता है कि मैं पागल हूँ। रुक साले अभी तुझे बताता हूँ।
इतना कहकर अभिषेक मुझे मारने को हुआ तो मैं वहाँ से भाग लिया। अभी मैं दरवाजे के पास पहुँचा ही था कि बाहर से आती तनु से टकरा गया। जिसके कारण उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो जमीन पर गिरने को हुई तो मैंने उसे थाम लिया। उसे थामने के लिए मुझे उसकी कमर को पकड़ना पड़ा। मैंने तनु को जमीन पर गिरने नहीं दिया। बस फिर क्या था। तनु को एक बहाना मिल गया और वो मेरे ऊपर भड़क गई।
तनु- ये क्या बदतमीजी है नयन। तुम्हें शर्म नहीं आती मेरे साथ ऐसी हरकत करते हुए।
मैं- अरे मैंने क्या किया है। मैंने तो तुम्हें नीचे गिरने से बचाया है ताकि तुम्हें चोट न लगे।
तनु- एक तो खुद मुझसे जानबूझकर टकराते हो और ऊपर से बोलते हो कि मुझे गिरने से बचाया तुमने। मैं अच्छे से जानती हूँ कि तुम्हारे मन में मेरे लिए क्या है।
मै- देखो तनु बहुत हुआ अब। मैं तुमसे जानबूझ कर नहीं टकराया था वो तो बस अचानक से तुम आ गई इसलिए मैं टकरा गया तुमसे, लेकिन इसको इतना बड़ा इश्यू बनाने की क्या जरूरत है। तुम तो मुझे बहुत दिनों से जान रही हो। मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई गलत ख्याल नहीं है तनु। विश्वास करो मेरा।
तनु- तुम्हारा विश्वास करू। मुझे अब पता चल गया है कि तुम किस टाइप के लड़के है।
अभिषेक जो दूर खड़ा इस बात को सुन रहा था। तनु ने शायद अभिषेक के ऊपर ध्यान ही नहीं दिया कि अभिषेक भी कक्षा में है, क्योकि जब मुझसे टकराने के बाद तनु को मैंने पकड़कर खड़ा किया तो अभिषेक की तरफ उसकी पीठ हो गई थी, इसलिए अभिषेक को उसने नहीं देखा था। तनु की बात सुनकर अभिषेक ने तनु से तेज स्वर में कहा।
अभिषेक- तनु। ये क्या अनाप सनाप बके जा रही हो नयन के बारे में।
तनु- अभिषेक। तुम। तुमने देखा नहीं नयन ने मेरे साथ क्या किया है।
अभिषेक- हाँ मैंने देखा की नयन ने तुम्हारे साथ क्या किया है। और ये भी देख रहा हूँ कि तुम नयन के साथ क्या कर रही हो। तुम्हारे दिमाग फिर गया है क्या। तुम नयन को ऐसे कैसे उलटा सीधा बोल सकती हो। तुम कितना जानती हो नयन के बारे में। और मैं उसे जानता हूँ बचपन से। कक्षा की कोई भी लड़की नयन के बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकती और तुम नयन के ऊपर इलजाम लगा रही हो। अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसका मुँह तोड़ देता।
मैं- ये क्या बोल रहा है तू अभिषेक। तुझे तनु से ऐसे बात नहीं करना चाहिए। उसको कोई गलतफहमी हो गई होगी मेरे लिए। तो उसके लिए तू उसे इतनी खरी-खोटी सुना रहा है। दोस्तों के बीच तो ये सब होता ही रहता है। तनु अभिषेक की बात का बुरा मत मानना। ये तो बस ऐसे ही बोल गया तुम्हें।
मुझे कुछ कुछ समझ में आ रहा था कि अभिषेक का तनु को वहाँ अकेला छोड़कर आना तनु के गुस्से का मुख्य कारण हो सकता है। और इसी गुस्से में वो मुझे इतना कुछ कह गई। लेकिन अभिषेक को ऐसे रिएक्ट नहीं करना चाहिए था। अगर अभिषेक कुछ देर और यहाँ रहा तो दोनों में शीतयुद्ध शुरू होने की संभावना है इसलिए मैं अभिषेक को कक्षा से बाहर निकाल कर ले आया और उसे समझाते हुए कहा।
मै- ये सब क्या था यार। तुझे तनु से साथ ऐसे पेश नहीं आना था। वो अभी गुस्से में थी, क्योंकि तुम उसे वहाँ अकेला छोड़कर आ गए। और तुझसे पहले मैं उसके सामने आ गया इसलिए उसको पूरा गुस्सा मेरे ऊपर निकल गया। अब अपना गुस्सा थूक दे यार और चिल मार। तू गुस्से में बिलकुल भी चिंम्पैंजी लगता है। कहीं ऐसा न हो कि तुझे सर्कस वाले न देख लें और अपने साथ सर्कस में ले जाएँ। तब तो मुझे अपने दोस्त से मिलने के लिए रोज सर्कस जाना पड़ेगा।
मैंने अभिषेक का गुस्सा शान्त करने के लिए ही ऐसी कमेडी तरह की बात की थी और इसका असर भी हुआ। अभिषेक का गुस्सा शान्त हो गया। अब उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। थोड़ी देर बाहर बैठने के बाद भोजनावकाश के समाप्त होने की घंटी बजी तो हम दोनो कक्षा की तरफ चल दिए। कक्षा में पहुँचने के बाद अभिषेक ने एक नजर तनु को देखा और फिर अपनी नजर उससे हटा ली। मैंने भी तनु की तरफ देख कर आँखों से इशारा किया कि अब सब ठीक है अभिषेक गुस्से में नही है अब। तो तनु की तरफ से मुझे कुछ दिनों से मिल रही प्रतिक्रिया ही मिली। उसने अपना मुँह सिकोड़ लिया। मुझे उसकी इस प्रतिक्रिया को खास तवज्जो नहीं दी। क्योंकि अभी जो कुछ भी हुआ था। उसके बाद ऐसी प्रतिक्रिया का आना स्वाभाविक था।
बहरहाल मैं और अभिषेक आकर अपनी जगह पर बैठ गए। इधर हम दोनों के कक्षा से जाने के बाद अभिषेक के कहे हुए अंतिम शब्द कि अगर तुम्हारी जगह कोई और लड़की होती तो मैं उसके मुँह तोड़ देता। तनु के कानों मे गूँज रहा था। उसे लग रहा था कि अभिषेक ने सब के सामने उसकी बेइज्जती कर दी है। जबकि उस समय कक्षा में हम तीनों के अलावा और कोई नहीं था। लेकिन तनु ने इस बात को अपने अहम पर ले लिया। उसके दिमाग में कुछ खुराफात चलने लगा। लेकिन अभी के लिए उसने अपने आप सो संभाल लिया था। अभिषेक ने अभी तक तनु से कोई बात नहीं की थी और न ही तनु ने कोई बात करने की कोशिक की थी। मैंने ही अभिषेक को कोहनी मारते हुए कहा।
मैं- अबे क्या कर रहा है तू। कम से कम एक बार बात तो कर तनु से।
अभिषेक- तू चुप कर साले। मैं कोई बात-चीत नहीं करने वाले तनु से।
मै- अगर बातचीत नहीं करेगा तो तुम दोनों की नाराजगी कैसे दूर होगी। नाराजगी दूर करने के लिए बात-चीत तो करनी पड़ेगी न।
अभिषेक- अब मैं तनु से तभी बात करूँगा जब वो स्वयं आकर मुझसे बात करेगी। अब इस बारे में ज्यादा बहस मत कर मुझसे।
तभी शिक्षक ने कमरे में प्रवेश किया तो मैं और अभिषेक शान्त हो गए। इसी तरह कक्षा चलती रही और मैं अभिषेक मन लगाकर पढ़ाई करते रहे, लेकिन भोजनावकाश के समय हुई घटना के बाद मेरा और अभिषेक का मन पढ़ाई में और दिनों की अपेक्षा नहीं लग रहा था। किसी तरह छुट्टी हुई और हम अपने घर जाने लगे। रास्ते में एक बार भी तनु ने अभिषेक और न ही तनु ने अभिषेक से बात करने की कोशिश की। हम सब अपने घर चले गए। मैं इस घटना के बारे में ज्यादा सोचना नहीं चाहता था, क्योंकि जितना ज्यादा मैं सोचता उतना ज्यादा उलटा सीधा खयाल मेरे दिमाग में आता।
अगले दिन हम सब फिर स्कूल पहुँचे। महेश भी आज स्कूल आया था। आज भी तनु और अभिषेक ने बात करने की कोशिश नहीं की एक दूसरे से। महेश ये देखकर हैरान था कि एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया जो अभिषेक और तनु ईलू ईलू करने की बजाय एकदम शांत बैठे हैं। भोजनावकाश के समय महेश से जब न रहा गया तो उसने मुझसे पूछ ही लिया।
महेश- अरे नूनू भाई एक बात तो बताना। मैं सुबह से देख रहा हूँ कि अभिषेक और तनु आपस में कोई बातचीत ही नहीं कर रहे हैं। अभी परसों तो दोनों ऐसे व्यस्त थे एस दूसरे में कि उन्होंने हमारी तरफ भी ध्यान नहीं दिया था। और कल मैं आया नहीं था। तो इस एक दिन में आखिर ऐसा क्या हो गया कि दोनो लैला मजनू एकदम शांत बैठे हुए हैं।
महेश के पूछने के बाद मैंने उसे कल हुई सारी घटना के बारे में अवगत करा दिया जिसे सुनने के बाद महेश ने कहा।
महेश- एक बात सच कहूँ यार। तनु पर मुझे कुछ शक हो रहा है। उसके दिमाग में कुछ न कुछ तो चल रहा है। क्या हमें अभिषेक को उससे अलग होने के लिए बोल देना चाहिए।
मैं- कैसी बात कर रहा है यार तू। बिना किसी ठोस सबूत के हम केवल शक कर सकते हैं। और शक के बिना पर उठाया गया कोई भी कदम सही नहीं होता। कल तक मुझे भी ऐसा ही लगता था, लेकिन ठंडे दिमाग से सोचने के बाद मुझे भी एहसास हुआ कि शायद मैं सही नहीं सोच रहा था। कल तनु ने जो किया वो उसका गुस्सा था जो अभिषेक के बजाय मेरे ऊपर निकाल दिया उसने।
महेश- भगवान करे तू जो सोच रहा है वैसा ही हो, लेकिन मेरा सिक्स सेंस कह रहा है कि तनु कुछ न कुछ बड़ा सोच रही है।
मैं- तेरा सिक्स सेंस। साले तेरे पास एक भी सेंस नहीं है और तू सिक्स सेंस से सोच रहा है। सोचना तेरे बस की बात नहीं है। और जो जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दे। समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।
मेरी बात सुनकर महेश मुस्कुराने लगा। इसी तरह दो दिन बीत गए, लेकिन अभिषेक और तनु में कोई बात नहीं हुई। अगले दिन मैं अभिषेक और महेश भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए। तभी वहां तनु आ गई। और आते ही मुझसे और महेश से बोली।
तनु- नयन और महेश कैसे हो तुम दोनों।
तनु से हम दोनों को इतने प्रेम से बात करने की उम्मीद नहीं थी। क्योंकि पिछले लगभग दो महीने में आज पहली बार हुआ था जो तनु ने तने प्रेम से हम दोनो से बात की थी। उसकी बात सुनकर हमें लगा कि शायद हम दोनों उसके बारे में गलत ही सोचते थे। क्योंकि अभिषेक और तनु का नया नया प्यार था और उनको थोड़ा अलग स्पेस चाहिए था इसलिए तनु हम दोनों से बात नहीं करती थी ठीक से। इसलिए तनु के इतने प्रेम से बोलने के बाद हम दोनों को बहुत खुशी हुई। हम दोनों ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैं और अभिषेक- हम दोनों बहुत बढ़िया हैं।
मैं- तुम कैसी हो तनु।
तनु- मैं बिलकुल भी अच्छी नहीं हूँ।
मैं- क्यों क्या हुआ तुम्हें।
तनु- अरे यार तुम्हारा दोस्त पिछले तीन दिन से साडू मुँह बनाकर घूम रहा है। मुझसे बात ही नहीं करता तो मैं कैसे अच्छी हो सकती हूँ।
इतना बोलकर तनु अभिषेक की तरफ मुखातिब होकर अभिषेक से बोली।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
बहुत ही शानदार अपडेट है
लगता है कि तनु के दिमाग में कुछ खास चल रहा है वह नयन से बदला लेने वाली हैं
 

Mahi Maurya

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बहुत ही शानदार अपडेट है
लगता है कि तनु के दिमाग में कुछ खास चल रहा है वह नयन से बदला लेने वाली हैं
धन्यवाद आपका मित्रवर।

हो सकता है। तनु की हरकतें तो यही कह रही हैं।

साथ बने रहिए।
 

Mahi Maurya

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सत्रहवाँ भाग
तनु- अरे यार तुम्हारा दोस्त पिछले तीन दिन से साडू मुँह बनाकर घूम रहा है। मुझसे बात ही नहीं करता तो मैं कैसे अच्छी हो सकती हूँ।
इतना बोलकर तनु अभिषेक की तरफ मुखातिब होकर अभिषेक से बोली।
अभिषेक- मुझे माफ कर दो यार। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई थी उस दिन जो मैंने नयन को उलटा सीधा बोल दिया था। वो क्या है न कि तुम दोनो जब मुझे नजरअंदाज करके चले गए थे तो मुझे तुमपर बहुत गुस्सा आया। मैं तुमसे नाराज हो गई थी।और यही जताने के लिए कक्षा में आ रही थी और नयन से टक्कर हो गई। एक तो मैं पहले से ही गुस्सा थी ऊपर से ये टक्कर हो गई तो मुझे और गुस्सा आ गया और जो गुस्सा मैं तुमपर निकालना चाहती थी वो नयन पर निकल गया। मैंने दो दिन इस बारे में सोचा तब मुझे एहसास हुआ कि मैंने गलती की है। इसलिए मैं तुमसे माफी माँग रही हूँ। मुझे माफ कर दो अभिषेक, प्लीज, प्लीज।
तनु की बात सुनकर हम सब तनु को देखने लगे। उसकी बात मुझे भी सही लग रही थी, लेकिन महेश था जो उसे अभी भी तनु की बात पर विश्वास नहीं हो रहा था, परंतु वो चुपचाप बैठा हुआ था। तनु की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।
अभिषेक- अगर तुम्हें अपनी गलती का एहसास है तो तुम मुझसे नहीं नयन से माफी माँगो। अगर उसने तुम्हें माफ कर दिया तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
तनु- नयन मुझे मेरी उस दिन की गलती के लिए माफ कर दो। मैंने उस दिन जो कुछ भी किया वो गलत था, लेकिन मैं गुस्से में थी इसलिए मुझे सही गलत कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। प्लीज मुझे माफ कर दो।
मैं- तुम्हें माफी माँगने की जरूरत नहीं है तनु। मैं तो उसी दिन समझ गया था कि तुमने गुस्से में ये सब किया है। इसलिए मैंने तुम्हें उसी दिन माफ कर दिया था। अभिषेक अब तू भी गुस्सा थूक दे और तनु को माफ कर दे।
मेरी बात सुनकर अभिषेक ने अपना मुँह पीछे किया और आ... थू किया। उसे देख कर महेश ने कहा।
महेश- अब ये क्या था बे।
अभिषेक- अभी तो नयन ने कहा न कि अपना गुस्सा थूक दो। तो मैं वही कर रहा था अपना गुस्सा थूक रहा था।
उसकी बात सुनकर हम सब हँसने लगे। उसके बाद तनु के कहा।
तनु- तो अभिषेक अब तो तुम मुझसे नाराज नहीं हो न। मुझे माफ कर दिया न तुमने।
अभिषेक- हां माफ कर दिया मैंने तुम्हें। लेकिन आगे से ऐसा कभी मत करना यार। ये मेरा भाई है।
इतना सुनकर तनु अभिषेक के ऊपर टूट पड़ी और उसके ऊपर चुम्बनों की झड़ी लगा दी। अभिषेक बहुत मुश्किल से तनु को अपने से अलग करते हुए कहा।
अभिषेक- ये सब क्या है। तुम पागल हो क्या। जब देखो तब तुम मेरे ऊपर चढ़ जाती हो और चूमने लगती हो। ये भी नहीं देखती कि हम लोग कहाँ बैठे हुए हैं। अगर मैं अकेले में तुम्हें मिल जाऊँ तो पता नहीं तुम मेरे साथ क्या करोगी।
तनु- ये तो मेरे प्यार जताने का तरीका है अभिषेक। कभी अकेले में मिलो तुम।तुम्हें खुद पता चल जाएगा कि मैं क्या करूँगी।
अभिषेक- चलो अब बहुत हुआ तुम्हारा प्यार। अब कक्षा में चलते हैं वहीं बैठकर बात करेंगे।
तनु- तुम सब चलो मैं कुछ देर में आती हूँ। मुझे अपनी एक सहेली से कुछ जरूरी काम है।
तनु की बात सुनकर मैं अभिषेक और महेश अपनी कक्षा में जाने के लिए उठ गए। फिर मैं अभिषेक से बाथरूम जाने का बोलकर बाथरूम में चला गया। जब मैं बाथरूम से वापस होकर लौटा तो देखा कि तनु किसी से बात कर रही है। उसे देखकर मैं सोच में पड़ गया कि तनु ने तो बोला था कि उसे अपनी किसी सहेली से जरूरी काम है, तो क्या ये उसकी सहेली है। लेकिन ये उसकी सहेली कब से बन गई। हो सकता है कुछ और बात कर रहीं हों दोनो। मैंने अपने दिमाक को झटकते हुए अपनी कक्षा में आ गया। थोड़ी देर बाद तनु भी कक्षा में आ गई। मैंने बाहर वाली बात उससे पूछना जरूरी नहीं समझा क्योंकि वो कोई इतनी बड़ी बात नहीं थी और पूछने का मतलब था कि तनु फिर से शक कर लेती की मैं उसकी जासूसी कर रहा हूँ।
खैर शिक्षक आए और कक्षा शुरू हो गई। इसी तरह समय बीतता गया और स्कूल की छुट्टी हो गई। हम लोग अपने घर की तरफ चल पड़े। रास्ते में मुझसे महेश ने कहा।
महेश- नूनू भाई। तुम्हें क्या लगता है कि तनु सच में पहले जैसी हो गई है।
मैं- हाँ मुझे तो यही लग रहा है कि जो हमने तनु के बारे में सोचा था वो गलत था। तनु वैसी ही थी जैसी वो पहले थी।
महेश- लेकिन भाई। मुझे अब भी तनु के ऊपर शक है। मुझे लगता है कि उसके दिमाग में कुछ-न-कुछ चल रहा है।
मैं- तेरे पास दिमाग है जो तू सोच रहा है। ऐसा कुछ भी नहीं है। बस उसने तेरा प्यार स्वीकार नहीं किया इसलिए तू उसपर लांछन लगा रहा है। अब अपना ज्यादा दिमाग मत इस्तेमाल कर और चुपचाप घर चल।
इसी तरह दिन बीतते रहे और हम चारों की दोस्ती फिर से पहले जैसी हो गई, लेकिन महेश का तनु के ऊपर का शक अभी भी मिटा नहीं था। तनु की हम लोगों से मित्रवत बातचीत को दोबारा शुरू हुए 15 दिन बीत चुके थे। हम लोग भोजनावकाश के समय स्कूल परिसर में बैठे हुए बाते कर रहे थे। तभी तनु ने कहा।
तनु- एक बात है जो मेरे मन में कई दिन से आ रही है। अगर तुम लोग सुनो तो मैं कहूँ।
अभिषेक- हाँ क्यों नहीं बताओ तो क्या बात है।
तनु- देखो। अब हम लोगों की बोर्ड परीक्षा को ज्यादा से ज्यादा 20-22 दिन बचे हुए हैं। और इस परीक्षा के बाद हो सकता है कि हमारी मुलाकात दोबारा न हो। और अगर होती भी है तो कभी कभार होगी। पता नहीं कौन किस कॉलेज में जाएगा। कौन अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाएगा। कौन पढ़ाई बन्द कर देगा।
महेश- हाँ ये बात तो तुम बिलकुल सही कह रही हो। इस परीक्षा के बाद तो बहुत मुश्किल से मिलना होगा।
तनु- तो मैं ये सोच रही थी कि इस स्कूल से जाते जाते हम अपनी इस दोस्ती को कुछ यादगार बनाएँ और पिछली जो भी बुरी यादें हमारे साथ रही हैं अब तक उन्हें पीछे छोड़कर कुछ अच्छी यादों को इस स्कूल से जाते समय अपने साथ ले जाएँ।
नयन- हाँ यार बात तो तुम्हारी एकदम सही है तनु। इन सब बातों पर तो हमने कभी गौर किया ही नहीं, लेकिन ये हमें इसके लिए करना क्या होगा। मेरे मतलब है कि हम अपने स्कूल के बचे हुए कुछ दिन यादगार कैसे बनाएँ।
तनु- हाँ तो सुनो। मैं ये कह रही थी कि क्यों ने हम दो-तीन दिन के लिए कहीं बारह घूमने चलें। बाहर मतलब। किसी दूसरे राज्य में। और मैंने तो जगह भी सोच ली है। राजगिरी। पटना शहर से कुछ घंटे की दूरी पर है ये। मेरी एक सहेली वहाँ घूमकर आई है बता रही थी कि बहुत ही अच्छी जगह है। क्या बोलते हो तुम लोग।
अभिषेक- बात तो तुम्हारी सही है तनु, लेकिन कुछ दिन बाद परीक्षा है और इस समय जाने पर पढ़ाई का नुकसान भी होगा। और सबसे बड़ी बात इतनी बड़ी बात। इतनी दूर घर वाले जाने की इजाजत भी नहीं देंगे। मुझे तो गाँव के पास नहर पर हगने जाने पर भी डाट सुननी पड़ती है तो पटना जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता और वो भी अकेले जाने का।
तनु- अरे यार। पहले मेरी बात तो पूरा सुन लो। हम लोग अकेला नहीं जा रहे हैं। अपने स्कूल के और भी बच्चे और शिक्षक भी साथ में चलेंगे। तब तो तुम्हारे मम्मी पापा को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
अभिषेक- हाँ अगर ऐसा होता है तो फिर मम्मी पापा को मैं मना लूँगा किसी तरह। और शिक्षक के जाने पर पापा शायद मना भी नहीं करेंगे।
महेश- लेकिन ये होगा कैसे। क्या तुमने सभी से बात कर ली है जाने के लिए।
तनु- अभी नहीं। पहले मैं तुम लोगों से सहमति तो ले लूँ, क्योंकि अगर तुम लोग ही तैयार नहीं हुए तो वहाँ जाने का कोई मतलब ही नहीं है। अगर तुम लोग तैयार हो तो बात करते हैं अन्य छात्रों और प्रधानाचार्य महोदय से।
तनु की बात सुनकर हम सब एक दूसरे को देखने लगे। सच में तनु का प्लान वाकई गजब का था। इसलिए किसी की आपत्ति का प्रश्न ही नहीं उठता था। इसलिए हम सभी की सहमति बन गई। तो तनु ने कहा।
तनु- तो चलो सबसे पहले अन्य छात्र/छात्राओं से बात करते हैं। अगर ज्यादा लोग तैयार हो गए चलने के लिए तो प्रधानाचार्य महोदय को मनाने में आसानी होगी।
तनु की बात सुनकर हम सब अपनी कक्षा में चले गए और छात्र/छात्राओं को अपने इस प्लान के बारे में बताया। जिसे सुनकर ज्यादा छात्र/छात्राएँ तो नहीं किंतु 15 लोगों ने अपनी सहमति जता दी। किन्तु हम सबको मिलाकर भी संख्या 20 नहीं पहुँच रही थी तो हम लोग बाहर आकर आपस में बात करने लगे। तनु ने कहा।
तनु- क्यों न हम लोग कक्षा 10 के विद्यार्थियों से बात करें आखिर उनका भी बोर्ड की परीक्षा है। अगर वो हमारे साथ चलते हैं तो उनका भी दिमाग फ्रेश हो जाएगा। और घूम भी लेंगे सभी।
हमें तनु की बात ठीक लगी। हम लोगों ने कक्षा 10 के विद्यार्थियों से बात की तो वहाँ से भी 25 विद्यार्थी मिल गए। फिर हमने अपनी बात को प्रधानाचार्य महोदय के सामने रखने की सोची। और उनके कक्ष की तरफ चल पड़े। हम लोगों ने अनुमति लेकर उनके कक्ष में गए और उनके समक्ष अपनी बात रखी तो उन्होंने कहा।
प्रधानाचार्य महोदय- तुम्हारा प्लान तो बहुत अच्छा है, लेकिन तुम लोग शायद यह भूल रहे हो कि बोर्ड की परीक्षाएँ नजदीक हैं और वहां जाने से पढ़ाई का नुकसान भी हो सकता है।
तनु- नहीं सर पढ़ाई का नुकसान बिलकुल नहीं होगा। आप ही सोचिए सर कि साल भर से वही वही चीज पढ़ते पढ़ते विद्यार्थी परेशान हो जाते हैं। मानसिक दबाव में रहने लगते हैं। अगर इस बीच किसी अच्छी जगह पर घूम कर आया जाए तो दिमाग के सारे दबाव और परेशानियाँ दूर हो जाती हैं और दिमाग एकदम तरोतोजा हो जाता है। और वैसे भी कुछ समय बाद हम सब एक दूसरे से बहुत कम मिल सकेंगे तो कम से कम इसी बहाने हम कुछ यादें संजो कर रखना चाहते हैं।
प्रधानाचार्य महोदय- बात तो तुम्हारी ठीक है तनु, लेकिन मैं कोई निर्णय अकेले नहीं ले सकता। क्योंकि मैं अगर तैयार भी हो जाता हूँ तो तुम लोगों को अकेले तो भेज नहीं सकता। इसके लिए कम से कम 4-5 शिक्षक भी साथ जाएँगे। तो हम उनसे बात कर लें पहले फिर सोचेंगे इसके बारे मैं। शाम तक तुम लोगों को बताते हैं कि क्या निर्णय लिया गया है।
इसके बाद हम लोग प्रधानाचार्य के कक्ष से बाहर आ जाते हैं और अपनी कक्षा में जाते हैं तो कक्षा में शिक्षक मौजूद थे और पढ़ा रहे थे। हमें देखते ही शिक्षक ने कहा।
शिक्षक- कहाँ से आ रही है चंडाल चौकड़ी घूम कर।
महेश- ये चंडाल चौकड़ी प्रधानाचार्य महोदय के कक्ष से सफर करते हुए अभी अभी अपनी कक्षा में प्रवेश कर रही है।
महेश ने ये बात मजाकिया लहजे में कही। जिसे सुनकर सारे विद्यार्थी हँसने लगे। शिक्षक ने हमें घूर कर देखा तो हम जल्दी से अपनी सीट पर बैठ गए। स्कूल की छुट्टी होने के कुछ देर पहले ही चपरासी ने आकर हमें सूचित किया कि हम चारों लोगों को प्रधानाचार्य महोदय ने अपने कक्ष में बुलाया है। चपरासी की बात सुनकर हम चारों प्रधानाचार्य महोदय के कक्ष की तरफ चल पड़ें।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में।
 
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