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Fantasy गंदी राजनीति

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कहानी कैसी लगी बताइये जरूर

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rajeev13

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Tq sir बट क्या लोगो की प्रतिक्रिया नहीं आती ऐसा लगता है उनको अच्छी नहीं लग रही है
They will come along, It will take time to grow the audience like Kahani Chodampur Ki !
 
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mis1234

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रविवार को सुबह ही मयंक कनिका चौधरी के घर चला जाता है गेट पे सेक्रेट्री गार्ड खड़ा था कनिका ने कार्यकारणी सरपंच पद संभाल लिया था क्योंकि चुनाव 6 महीना बाद ही थे इसलिए वो चुनाव वापस नहीं हुए गांव के सहमति से उनको सरपंच बना दिया अब कनिका ने पति पत्नी एक गार्ड को रख लिया जो सिक्युरिटी का काम करता है उसकी पत्नी ही घर का काम करती है
मयंक__कनिका आंटी ने बुलाया है

गार्ड__मेम अन्दर ही है जा सकते हो मयंक को गार्ड भी जानता था इसने ही तो गेम पलटा था


कनिका __अरे मयंक आवो आवो मै कुछ लेके आती हु खाने पीने को
मयंक__अरे रहने दो आप क्यों तकलीफ करती हो
तब तक कनिका किचन में चली गई
अपने पति के कहने पर कनिका तैयार तो हो गई थी पर आज तक उसने ऐसा कुछ किया नहीं था वो एक संस्कारी औरत थी ऐसे ही कैसे मयंक के साथ सेक्स की बात करे मयंक उसके बारे में क्या सोचेगा वो भी अभी सरपंच भी है उसको ये सोच कर ही पसीने छूट रहा था
कनिका__मन मै - क्या करु कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या में ये सही करने जा रही हु कैसे में उसे सेक्स करने के लिए कह सकूंगी वो क्या सोचेगा मेरे बारे में उसे लगेगा मैने एक गिरी हुई औरत को सरपंच बनाने मै साथ दिया हे भगवान मेरी मदद कर अब ज्यादा सोचने से क्या फायदा जो होगा देखा जाएगा वैसे भी में ये सब मजे के लिए नहीं कर रही हु एक बार बच्चा जाए तो सब सही हो जाएगा सिर्फ सेक्स ही तो करना है कौनसा उसके साथ प्यार का रिश्ता जोड़ना है
जैसे तैसे वो मेरे कोख में अपना वीर्य भरड़े बस वही मेरे लिए काफी है हां कनिका यही सही है सिर्फ उसके साथ सेक्स करके पेट से ही तो होना है

ऐसे ही ख्यालों में खोये हुए वो मयंक के लिए ज्यूस बना रही थी ज्यूस लेकर वो हॉल में उसके सामने आई उसने मयंक को वो ज्यूस दिया उसके हाथ कांप रहे थे वो वही सामने बैठ गई जब तक मयंक ज्यूस पी रहा था दोनों में छुपी छाई रही
कनिका कभी मयंक को देख रही थी कभी नीचे देखते हुए अपनी सोच में खो जाती है मयंक ने जूस खत्म कर लिया और ग्लास को रखकर कनिका कि तरफ देखा तो उन्हें किसी सोच में डूबा पाया


मयंक __आंटी (वो सोच मै गुम थी )... आंटी (मयंक ने थोड़ा जोर से पुकारा )


कनिका (चौंकते हुए हकीकत में लौट आई ) हा.. हा ओह पीलिया तुमने


मयंक __जी आंटी,(फिर दोनों के बीच वही खामोशी, मयंक को समझ नहीं आ रहा था के वो इतनी घबराई हुई क्यों है )(फिर मयंक थोड़ा झिझकते हुए ) क्या हुआ आंटी आप ऐसे घबराई हुई क्यों हो


कनिका__(एक लंबी सांस लेते हुए अपने आपको शांत करते हुए मयंक की और देखती है) मयंक में तुम जानते हो मैंने तुम्हे क्यों बुलाया है मुझे तुम्हारी एक हेल्प चाहिए
(उसने बहुत नर्म आवाज में ये कहा पर कहते कहते उसकी सांसे चढ़ने लगी थी वो रुक गई )


मयंक __(मयंक को कुछ समझ में नहीं आ रहा था ) कैसी हेल्प आंटी
कनिका _ (फिर वह सोचने लग जाती हैं कहे कि ना कहे वो अपने हाथों को मसल रही थी वो उलझन में थी फिर भी मन मजबूत करते हुए उसने कहा) मयंक मुझे हेल्प चाहिए पर पहले पहल तुम एक वादा करना होगा इस बारे में तुम किसी से कुछ भी ना कहोगे तुम पर निर्भर करता है कि तुम मेरी हेल्प करो या नहीं करो बस यह बात हम दोनों के बीच में रहना चाहिए मैं तुम्हारे को कोई फोर्स नहीं करूंगी

मयंक __(मयंक को समझ में नहीं आ रहा था कि माजरा क्या है फिर सोचते हुए)जी आंटी में किसी से कुछ नहीं कहूंगा पर बताइए तो सही क्या हेल्प चाहिए


कनिका &_वो... वो.........


(ये कहते हुए उसका गला भर जाता है आंखों से आंसू तक बहने लगते हैं ऐसे भी किसी शरीफ औरत के लिए यह कहना कितना मुश्किल होता है वह अपने दोनों हाथ में अपना मुंह छुपा कर रोने लगी )
मयंक तो उनको देखकर ही डर रहा था पता नहीं क्या बात है मयंक को कुछ समझ मै ही नहीं आ रहता की क्या करे मयंक ने हिम्मत जताकर और उनके पास जाकर बैठ गया कनिका अभी भी अपना मुंह छुपा के रो रही थी मयंक डरते डरते अपना हाथ उनके कंधे पर रखा

मयंक __ प्लीज़ आंटी रोये मत जो भी है वो कहिए मेरा यकीन कीजिए मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा


मयंक बस इतनी बोल पाया कनिका ने अपना सिर उठाकर अपनी भीगी आंखों से मयंक को देखा अचानक वो मयंक से लिपट गई और जोर-जोर से रोने लगी मयंक एकदम से शॉक्ड था मयंक को कुछ समझ में नहीं आ रहा था मयंक ने एक हाथ उनकी पीठ पर रख कर सहलाने लगा और उन्हें चुप होने के लिए बार-बार कहता रहा ऐसे ही कुछ देर चलता है अब कनिका रोना धीरे-धीरे बंद होने लगा फिर सिसकिया ले रही थी वह मयंक अलग हुई और अपना चेहरा झुकाया हुए ही अपनी आंखें साफ करने लगी फिर उन्होंने अपने भीगे नैनो से उसे देखा और फिर अपना चेहरा झुका लिया


कनिका__ मयंक मेरे लिए कहना बहुत मुश्किल है पर मेरे लिए और कोई रास्ता भी नहीं है मयंक में तुम्हें फोर्स नहीं करूंगी तुम चाहो तो मेरी मदद करो या ना करो ये बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए
(बोलते बोलते उनका गला भर आया)मयंक ने कनिका का एक हाथ अपने दोनों हाथों में थामते हुए )प्लीज रोये मत आंटी जो भी हो वह कहिए मैं वादा करता हूं चाहिए आप की हेल्प करूं या ना भी करू तो भी आप की ये बात मै आज इधर ही भूल जाऊंगा प्लीज आप शांत हो जाइए और मुझे बताइए आप क्या हेल्प चाहती है मेरे से


कनिका ___ (एक बार उसकी ओर देखते हैं फिर अपना सिर नीचे झुका कर बोलने लगती है ) मयंक हमारी शादी को 8 साल हो चुके हैं पर अभी तक मैं मां नहीं बन पाई हमने डॉक्टर का सहारा भी लिया पर उनके अनुसार मेरे पति में कुछ प्रॉब्लम है तो वह बाप नहीं बन सकत..(वो फिर शांत हो जाते हैं)


मयंक__ (मयंक को कुछ समझ नहीं आ रहा था जब कनिका ने बोलना बंद किया तो मयंक भी शांत रहा फिर) पर मुझे ये समझ मैं नहीं आ रहा इसमें मैं आपकी क्या मदद कर सकता हू
कनिका__(उसकी और देखते हुए और उसके भोलेपन से मुस्कुरा देती है फिर मुस्कुराते हुए) मयंक तुम्हें पता है बच्चा कैसे होता है

मयंक __(कुछ सोचते हुए )हां आंटी मुझे पता है


कनिका __(मुस्कुराते हुए उसकी देख रही थी) तो बताओ कैसे होता है


मयंक __जब मेल का शुक्राणु फीमेल के अंडकोष में से मिलता है तब बच्चा बनने की प्रक्रिया शुरू होती है और फिर वो गर्भाशय में स्थापित हो जाता है जहां वो बढ़ता जहां वह बढ़ता है और फिर 9 महीने बाद वह बाहर आता है


उसने बड़े ही भोलेपन से बताया जो उसने किताब से सीखा था
कनिका अब थोड़ी सहज हो चुकी थी और उसके भोलेपन से कनिका के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी
कनिका __अरे वहा तुम तो बहुत कुछ जानते हो
(वो अपनी अपनी भीगी आंखें साफ करते हुए मुस्कुरा कर पूछती है) और ये शुक्राणु और अंडकोष मिलते कैसे हैं?


मयंक (मयंक सोचने लगा, ये तो कही पढ़ाया ही नहीं था) वो पता नहीं आंटी उसके बारे में कुछ पढ़ा ही नहीं


कनिका __(मुस्कुराते हुए) ऐसा तब होता है जब कोई पुरुष अपना वीर्य किसी औरत की कोख में डालता है और मुझे इसके लिए ही तुम्हारी मदद चाहिए


मयंक __(कुछ सोचते हुए) तो आप चाहती है कि में वो वीर्य लाकर आप की कोख में डालू बस इतना ही काम है आप तो खामखा इतना डर रही थी आप बताइए मुझे कहा से लाना है में अभी ले आता हूं


कनिका__ (जोर से हंसने लगती है उसे इतनी हंसी आ रही थी कि उसकी आंखें फिर से आंसू आने लगते है पर यह दुख वाले आंसू नहीं वह खुशी के आंसू थे)ओह तुम सच में बहुत भोले हो


(फिर शांत होती है और मयंक और देखते हुए कहती है )तुम वो वीर्य कही से लाने की जरूरत नहीं है तुम्हारे पास ही है


मयंक__( मयंक कुछ सोचने लगा पर उसे कुछ याद नहीं आया )नहीं आंटी मेरे पास कोई वीर्य नहीं है मैं सच बोल रहा हूं


कनिका__( मुस्कुराते हुए) वह तुम्हारे पास ही है मयंक तुम्हारे अंदर

मयंक __मेरे अंदर कहां


कनिका__अगर तुमने ठीक से पढ़ा है तो याद करो शुक्राणु तुम्हारे अंदर कहां से बनते हैं


मयंक मयंक कुछ देर सोता है अरे हां वह शुक्रशय मैं होते है (फिर उसे याद आता है की शुक्रास्य कहां होता है तो वो थोड़ा शर्मा गया और अपनी नजर नीचे झुका ली)

कनिका __(उसे ऐसे शर्माते देख) तो तुम्हें पता चल गया शुक्राणु कहां होते हैं


मयंक _(शरमाते हुए अपनी गर्दन हा मै हिलाई जी आंटी फिर सोचते हुए )पर वह देते कैसे हैं वह मुझे नहीं पता


कनिका__( अब कनिका काफी रिलेक्स फील कर रही थी इस मयंक के साथ और उसके भोले पन मोहित हो गई थी)
(लेकिन मयंक इतना भी भोला नहीं था कि वो देख रहा था ये चाहती क्या है)
वह मैं तुम्हें सिखा दूंगी पर क्या वह तुम मुझे देना चाहोगे


मयंक __क्यों नहीं आंटी अगर किसी से आपकी मदद हो जाती है तो मुझे क्या प्रॉब्लम होगी


कनिका __(अपना अपना एक हाथ उसके दूसरा हाथ पर रखकर थामते हुए )सचमुच तुम बहुत अच्छे हो मयंक और थैंक यू कि तुम मेरी मदद करने के लिए राजी हुए


मयंक __हां पर आपको वह खुद ही लेना होगा मुझे देना नहीं आता
इतना तो उसको भी पता था क्या होगा आगे क्योंकि वो भी तो 18साल का लड़का था
कनिका __(उसके भोलेपन खिल खिलाकर हंसने लगती है फिर यह सोचकर कि उसकी बात का क्या मतलब होता है वह खुद ही शर्मा जाती है कि कुछ सोच कर) मयंक तुम्हें पता चल गया ना की और तुम्हारा भी वीर्य कहा है तो अगर मैं वह लूं तो तुम्हें शर्माओगे शर्माओगे तो नहीं


मयंक__ (उसे पता था कि वह लॉन की बात कर रही है तो अब वह थोड़ा शर्मा कर चुप ही रहता है)


कनिका__( अपना एक हाथ उसकी गाल पर रखते हुए बड़े प्यार से उसका चेहरे ऊपर उठाते हुए बड़े प्यार से पूछती है)
कहो ना मयंक शर्माओगे तो नहीं (यह बोलते बोलते कनिका को थोड़ी उत्तेजना महसूस होने लगती हैं क्योंकि वह मयंक को चोदने के लिए तैयार कर रही थी)

मयंक __मयंक ने शरमाते हुए ना में गर्दन हिलाई मिले


कनिका __ओ मयंक थैंक यू थैंक यू करते हुए ( मयंक के गले लगे गई)


इसे गले लगने से दोनों को की गर्म जिसमें दूसरे पर अपना जादू चलाना शुरु कर देता है मासूम से दिखने वाला मासूम सी बातें करने वाला मयंक अब उसका मजबूत शरीर का स्पष्ट कनिका को उत्तेजित करना लगा था वह और उसे चिपकने लगती है पर ऐसे साइड में बैठकर वह उसको सही से गले नहीं लग पा रही थी वह खड़ी हुई


कनिका _(अपना हाथ मयंक की ओर बढ़ाते हुए) मेरे साथ आवो( मयंक ने एक हाथ दिया तो वह उसे पकड़कर अपने साथ एक रूम में लेकर गई )


आलीशान कमरा था वह डबल बेड बिछा हुआ था टीवी भी था एक और गुलदस्ता लगा हुवा था एक बड़ा सा ड्रेसिंग टेबल जिस पर बड़ा आईना लगा हो


वो दोनों एक दूसरे की आंखों में देख देख रहे थे कनिका को मयंक बहुत पसंद आ रहा था वह अपने आप पर काबू खोते जा रही थी उसकी काली आंखों में डूबती जा रही थी उसके पति से भी लंबा था वो मयंक के नजदीक किसकी और अपना चेहरा ऊपर उठने लगी
जब मयंक नीचे ना झुका तो उसने अपना हाथ बड़ा कर उसके सर को पकड़ा और उसे झुकने लगी


मयंक__( मयंक थोड़ा झिझक रहा था शायद वह उसे किस करने जा रही थी इससे आज उसका पहले बार था किसी औरत को किस पहले कोमल ने ही किस किया था इसलिए करने दिया जो करना चाहती थी वह मयंक के होठों को हल्के हल्के चूसने लगी उनके सांस से तेज चल रही थी उनके ऐसे भीगे होंठों का स्पर्श से ही मयंक के अंदर हलचल पैदा करने लगा और आंखे बंद होने लगी गई और उसके भी होठों से हरकत शुरु हो गई वो भी कनिका के होठों को चूसने लगा मयंक ने कनिका को अपनी बाहों की गिरफ्त में ले लिया और उनके होठों को चूसने लगा


कनिका अपने आसपास लिफ्टी सख्त बाहों को महसूस कर और जोर से मयंक को किस करने लगी जब उसके सांस उखड़ने लगी तो अपने हॉट छुड़ाकर उसकी छाती पर अपना सिर रख कर हांपने लगी ऐसी किस तो वह पहली बार कर रही हो ऐसा महसूस हो रहा था


पता नहीं किस तरह का आनंद था कि उसका पूरा शरीर कांप गया था उसने सहमत हुए मयंक को देखा और शिकायत से
कनिका __इतनी जोर से कोई। पकड़ता है भला देखो मेरा दिल कैसे धक धक कर रहा है


उसके दिल जोरो से धड़क रहा था मयंक का हाथ उनके बूब्स को बहुत करीब था अब मयंक को भी थोड़ा तो पता उसकी कनिका आंटी उससे क्या चाहती है मयंक ने आहिस्ता से हाथ नीचे सरकाया और कनिका के बूब्स के ऊपर रख दिया


कनिका__ (मयंक की हरकत से सिहर उठी )मयंक


मयंक(मयंक को लगा शायद उसने गलती कर दी थी उसने अपना हाथ हटा दिया)
कनिका __(उसके हाथ हटाने से और उसकी ओर देखते हुए) हाथ क्यों हटा दिया मयंक


मयंक__ मुझे लगा आपको अच्छा नहीं लगा


कनिका ___ऐसा क्यों लगा तुम्हें मयंक मुझे बहुत अच्छा लगा जो हम करने जा रहे हैं इनमें यह सब करना ही होता है


(कनिका को पता था कि वह शर्म आती रहेगी तो यह सब होना रहा तो उसने बेशर्म होना ही बेहतर समझा) तुम इसे छू सकते हो मयंक


मयंक _(मयंक कनिका की आंखों में देखा वह अपने बूब्स दबाने के लिए कह रही ;थी मयंक का लन्ड खड़ा होने लगा था वैसे भी कनिका एक भरे हुए बदन की औरत थी सच कहो तो वह औरत नहीं एक लड़की जैसी ही दिख रही थी कोमल के मुकाबले ये ज्यादा भरी हुई थीं कनिका के बूब्स भी बड़े थे


मयंक ने अपने हाथ कनिका के स्तन पर रख दिया और उसे दबाने भी लगा कनिका आंटी आंखें बंद किए हुए खड़ी थी और मयंक को बूब्स को मसलने दे रही थीं मयंक उनके स्तन दबाने लगा और दूसरा हाथ भी रख दिया बूब्स पे दोनों दोनों बूब्स को दबाने लगा

कनिका__(मयंक बड़ी जोर से उसके बूब्स दबा रहा था उसे थोड़ा दर्द भी हो रहा था पर उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी आज पहली बार उसके पति के अलावा कोई गैर उसके बूब्स को दबा रहा था उसकी चुत गीली होने लगी थी, मयंक उसके पीछे चला गया और अपने दोनों हाथ उसकी बगल से निकालते हुए उसके बूब्स दबाने लगा तो पीछे खिसक कर उस से चिपक ने लगी, पर उसे अपने कूल्हों पर कुछ चुभा, वो समझ गयी ये क्या , अपने कूल्हों पर लन्ड का एहसास होते ही उसका रोम रोम बहकने लगा) मयंक (वो अपनी गांड़ मयंक के लन्ड पर रगड़ने लगी)


(जब उसे से सहन ना हुआ तो पलट कर मयंक को सीने से लग गई और उसे अपनी बाहों में कस लिया वो सब भूल चुकी थी वो कौन है वो किसी की बीवी थी और गांव की सरपंच पर इस वक्त वह मयंक के साथ पर ऐसा करने से मयंक का लन्ड उसके पेट पर चुभने लगा बस उसको वही दिख रहा था अब आगे बढ़ना पर कैसे एक पड़ाव तो पर कर चुकी थी वो)
कनिका __(कांपती आवाज में बिना मयंक की और देखे) मयंक, हमे कपड़े उतारने पड़ेंगे
मयंक __जी आंटी मयंक ने शर्ट खोले के साइड मै रख दिया बनियान वो पहनता नहीं था
कनिका ऐसा लंबा मजबूत शरीर और उसके ऊपर मेहनत की वजह से बने हुए कटाव देखकर कनिका मोहित हो रही थी कनिका उसमे पेंट की ओर इशारा करके


कनिका __ इसे भी...(मयंक थोड़ा हिचकिचाया फिर अपना पेंट निकल दिया और अंडरवियर में खड़ा था)(कनिका मयंक लन्ड उभार देख उतेजना और शर्म से मिले-जुले एहसास से कांप रही थी उसका दिल जोर से धड़क रहा था )


मयंक (मयंक खड़ा-खड़ा कनिका को देख रहा था कनिका ने भी एक बार मयंक को दिखा फिर उनकी आंखें झुकती हुई नीचे चली गई और वह उल्टी घूम गई)


मयंक कभी फर्स्ट टाइम था इसलिए उसको भी बहुत शर्म आ रही थी अब कनिका को भी कपड़े उतारने थे वह जानती थी मयंक उसकी और ही देख रहा होगा उर्दू करना था उसके लिए सब कपड़े उतारने की जरूरत नहीं थी उसने आगे से अपनी साड़ी उठाई और अपनी पेंटी निकाल दी मयंक ने देखा पेंटी आगे से पूरी भीग चुकी थी और मयंक नजर वही थी ये यह देखा तो कनिका को भी शर्म आई )
कनिका __मुझे बहुत शर्म आ रही है मैं कपड़े और नहीं उतार पाऊंगी


(मयंक क्या कहता है वो ओ बस खड़ा कनिका को देख रहा था कनिका भी बेड पर सीधी लेट गई और अपनी आंखों पर अपना हाथ रख लिया)


मयंक के लिय ये पहला मौका था जो किसी औरत को नंगी देखना का
मन मै कनिका ने उसे साड़ी उठाने को कहा था कनिका के शब्द कनिका का साथ नहीं दे रह थे लड़खड़ा रह थे मयंक के भीं हाथ कांप रह थे
मयंक ने देखा गोरे पैर में पायल पहनी हुई थी मयंक ने नीचे से कनिका की साड़ी पकड़ी और ऊपर उठाता गया जैसे जैसे मयंक उठा रहा था कनिका के गोरे पैर उसके सामने बेपर्दा हो रह थे
मयंक ने देखा कि उनके पैरों पर कोई बाल नहीं थे गोरी त्वचा एकदम चिकनी थी , मयंक साड़ी उठाते उठाते उसे जांघों के ऊपर तक चढ़ा दिया उनकी भरी हुई मांसल जांघे मयंक के सामने नंगी थी
मयंक का लन्ड ये देख के ही झटके मार रहा था


(कनिका शर्म से गढ़ी जा रही थी आज मयंक उसका वो खजाना देखने जा रहा था जिसे उसके पति के अलावा किसी ने नहीं देखा था शर्म के साथ साथ उतेजना भी महसूस हो रही थी) मयंक ने जैसे ही साड़ी उठाई मयंक को लड़कियों का खास अंग मयंक के आंखों के सामने दिखने लगा जो वो आज तक देख नहीं था वो थी कनिका की चुत


छोटे छोटे बालों से सजी हुई थी हॉट फुले हुए थे एक दरार नजर आ रही थी जो आपस मैं चिपकी हुई थी मयंक कनिका की ओर देखा तो वो अपना चेहरा अपने हाथों से ढके दूसरी और देख रही थी उनके शरीर के रंग के मुकाबले वो होठ थोड़े गहरे रंग के थे, मयंक ने देखा कि वहां एक जगह चिप छिपा लगा हुआ था(कनिका नीचे से नंगी थी), उसे बहुत शर्म भी आ रही थी जब कनिका ने देखा मयंक कुछ नहीं कर रहा है तो उसने अपनी कनखियों से मयंक की ओर देखा वो उसके खजाने को बड़े गौर से देख रहा था मयंक को ऐसे देखते हुए देख उसकी चुत से दो चार बूंदे ओर बाहर टपक लगी उसे पता था मयंक ने कभी किया नहीं ये उसका फर्स्ट टाइम है अब जो भी करना है उसको ही करना था


कनिका __(धीमी आवाज में ) उसे छू सकते हो (मयंक ने कनिका की ओर देखा तो कनिका ने वापस अपनी आंखें बंद कर ली वो अदभुत नजारा मयंक को सम्मोहित कर रहा था
मयंक ने अपने कांपते हाथ बढ़ाया और उस अंग के पास उनकी गोरी जांघें पर रख दिया)
(कनिका कसमसाई, मयंक की ये छुअन उसके अंदर उत्तेजना की एक लहर भर गई)
(कनिका की आवाज से मयंक ने उसक ओर देखा वो वैसे ही लेटी थी
मयंक ने हल्के से कनिका की गोरी जांघें को दबा कर महसूस करने लगा एक मखमली एहसास उसके अंदर भरने लगा वो उसे सहलाने लगा मयंक के लन्ड पूरी तरहा से कड़क हो चुका था वो भी दर्द कर रहा था उसने उसे एडजस्ट किया


आहिस्ता से उसने अपना हाथ उस अंग के ऊपर उगे बाल पे रखा ओर उसे सहलाते हुए महसूस करने लगा मयंक ये नहीं जानता कि ये भी किसी तरह का रोमांच है बट उसके शरीर में एक अजीब सी हलचल उसके अंदर रहीं थी ओर उसकी हिम्मत बढ़ने लगी न
उसने अपना एक अंगूठा उस दरार पे फिराया कनिका के शरीर ने एक झटका खाया और उन्होंने एक हाथ से चादर को मुट्ठी में भर लिया
मयंक का अंगूठा उस चुत को फैलाते हुए अंदर धसने लगा उसक अंगूठे के ऊपर चुत का रस लगाने लगा जैसे जैसे उसका अंगूठा फिर रहा था उसके चुत के हॉट भी चिकने हो रहे थे वो उसे हल्के दबाव से चुत को सहला रहा था


कनिका के मुहे से हल्की हल्की आवाज निकाल रही थी उनकी आवाजें मयंक को भी उत्तेजित कर रही थी
मयंक ने चुत का छेद देखा उसमें से रस निकल रहा था


कनिका (मयंक को रुका देख कनिका ने देखा अपनी अंगुलियों की बीच में से देखा वो उसे ही देख राह था उसके अंगूठे की छुने से पहले ही वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी


कनिका __कांपती आवाज में कहा) अपना अंडरवियर उतारो (मयंक खड़ा हुआ और उसने अपना अंडरवियर नीचे उतारा जिसे कनिका बड़े गौर से देख रही थी जैसे ही उसकी नजर के सामने वो बड़ा सा नाग आया, उसकी सांसे हलक में घुटने लगी, ऐसा लन्ड वो पहली बार देख रही थी, उसे देख उसके पसीने छूटने लगे, वो पूरी तरह से खड़ा था उसकी लंबाई और मोटाई देख एक तरफ तो वो डरने लगी दूसरी और उसकी चुत से पानी का एक झरना बहने लगा वो उत्तेजना में कांपने लगी उसके मान में शंका होने लगी कि क्या वो उसके अन्दर जाएगा पर करना तो था ही उसने आंखे बंद की और अपने आप को संभाला उसने अपने पैरों के बीच इशारा किया) यहां आ जाओ (उसकी आवाज में घबराहट साफ झलक रही थी, उसके शब्द उसका साथ नहीं दे रहे थे)


मयंक कनिका के पैरों के बीच जा कर बैठ गया कनिका अपने पैर फैलाए हुए थी
मयंक एक खूबसूरत महिला जो उसकी बॉस की बीवी थी और सरपंच भी थी वह उसके सामने इस अवस्था में थी उनकी टांगें फैली हुई थी और उनकी चुत किस चिपके हुए हॉट अब थोड़ा सा खुल गए थे मयंक एक गुलाबी छेद नजर आ रहा था जो बहुत छोटा था मयंक इतना भी नादान नहीं था लन्ड कहा डालना है


कनिका शर्म ओर उत्तेजना के मिले जुले एहसास से कांप रही टी
कनिका ने अपनी आंखें बंद ही रखी और अपने हाथ से अपनी चुत को फैलाया चुत को छुटे ही उसे पता चल गया कि उसकी चुत कितनी गीली हो चुकी है वो खुद अपनी चुत की इस अवस्था को देख कर हैरान थी उसने चुत के होठों को फैलाया और एक उंगली उस में डाली सच में वो आज एक आग की भट्टी के सामान तप रही थी



कनिका__ (कांपती, धीमी आवाज में) तुम्हारा... वो ... यहां.... इस जगह... अन्दर.... डालना है(बोलते बोलते उसकी सांसे इतनी तेज हो गई थी कि वो हांफने लगी


मयंक कनिका की बात मानते हुए थोड़ा आगे खिसका और उसने लन्ड को चुत पे लगाया क्या गजब का एहसास था चुत अत्यधिक गरम भी चिकनी तो इतनी थी कि उसका लन्ड फिसल रहा था


कनिका ने अपनी चुत के मुहाने लगे उसे सौंपड़े को महसूस करने अपनी निचला होंठ अपने दांत तले दबा दिया उसकी चुत में सरसराहट होने लगी आज मयंक उसकी चुत में अपना लन्ड डालने जा रहा था इस एहसास से ही उसकी चुत से नदिया बहने लगी उसकी कमर हिलने लगी थी जिस से लन्ड का सुपड़ा उसकी चुत पर घर्षण पैदा कर रहा था उसने दो तीन बार अपनी कमर हिलाई


कनिका__ मममम यययय ककककक मयंक डालो अन्दर (मयंक ने अपनी स्थिति सही की ओर अपने लन्ड पर दबाव बढ़ाया तो उसको आश्चर्य की सीमा न रही लन्ड चुत को फैलाते हुए अंदर घुस गया)मममम ययययय ककककक





कनिका ने अपने अन्दर घुसते उस लन्ड की मोटाई को महसूस कर तड़प उठी लन्ड ने चुत को अपने चरम तक फैल दिया था उसे हल्का हल्का दर्द भी होने लगा था उसने चादर को जोरो से अपनी मुट्ठी में दबा दिया मयंक लगातार लन्ड चुत मै घुसेड़ रहा था आखिर कर उससे बरदाश्त न हुआ तो उसने उसे पेट पर हाथ रख कर उसे रोकने लगी
मममम ययययय ककककक मममम ययययय ककककक
मयंक रुक गया उस गरम छोटी सी चुत का छेद उसके लन्ड पर अपना दबाव बढ़ा रहा था, ये किस तरह का आनंद था उसे पता नहीं चल रहा था पर उसे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था, उसका लन्ड गर्म गर्म चिकनी मांस पेशियों से लिपटा हुवा था उसके लन्ड पर कसी हुई वो गोलाई में साफ महसूस कर रहा था


कनिका को इतने सालों से चूदने के बाद उसे यकीन नहीं हो रहा था मयंक के बड़े लन्ड ने उसके चुत को पूरी तरह से फैला दिया था उसके पसीने छुटे रहे थे उसे इतनी गर्मी लग रही थी उसके पहने हुई साड़ी ओर ब्लाउज उसे काट रह थे


मयंक _सॉरी आंटी में बाहर निकाल लूं (कहते हुए में मयंक अपना लन्ड निकालने लगा)


कनिका___मममम ययययय(तुरंत उसे रोकते हुए) नहीं मयंक बाहर मत निकालना आह्ह्ह्ह थोड़ी देर ऐसे ही रुको मममम ययययय ककककक


मयंक __पर आप को दर्द हो रहा है, मैने कुछ गलत तो नहीं कर दिया


कनिका__(उसके चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी इतना हटा कटा और साथ में इतने बड़े लन्ड का मालिक पर दिल बिल्कुल बच्चे जैसा देखकर कनिका को उसे पर प्यार आने लगे) यहां आवो


कनिका __(मयंक कनिका के ऊपर झुकने लगा तो कनिका ने अपने हाथ से उसका चेहरा सहलाया ) तुमने कुछ गलत नहीं किया पर तुम्हारा वह बहुत बड़ा है
(कहते कहते वह शर्मा गई फिर मुस्कुराते हुए )मुझे किस करो
मयंक __(ये यह क्या हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था उसने सोचा आंटी को तो दर्द हो रहा है फिर भी मुस्कुरा रही है तो उसे किस करने को बोल रही है मयंक झुका और उनके होठों को किस करने लगे)


कनिका __मममम ययययय ककककक
(वो मयंक के होठों पर टूट सी पड़ी और उसकी पीठ पर अपने हाथ फिर आने लगी)


उसको ऐसे किस करते देख मयंक भी उसके होठों को चूसने लगा थोड़ी ही देर में वह किस करते-करते अपनी कमर हिलाने लगी मयंक लगा लन्ड को उसकी चुत चूस रही है


अब मयंक की भी कमर आगे पीछे होने लगी क्या ऐसा था उसे चिकनी गर्म सुरंग में उसका लन्ड अंदर बाहर हो रहा था यह किस तरह का आनंद है उसे पता नहीं चल रहा था उसका शरीर अपने आप आगे पीछे हो रहा था उसके लन्ड अच्छा लग रहा था कि वह जल्दी-जल्दी आगे पीछे करने लगा

(कनिका तो खुद इतनी गरम हो गई थी कि वह भी अपने कमर हिला कर धक्के लगाने लगी उसे दर्द तो हो रहा था पर जो आनंद मिल रहा था उसके सामने वह दर्द कुछ भी नहीं इस शरीर में इतनी गर्मी बढ़ रही थी कि उसने अपने एक हाथ से ब्लाउज का हुक खोल दिया और शिव के हाथ को पकड़कर की अपने बूब्स पर रख दिया


(धक्के लगाते हुए मयंक कनिका के बूब्स को पकड़कर दबाने लगा वह बड़ी-बड़ी नरम नरम बूब्स उसके अंदर अजीब तरह जोश भर रही थी उसकी कमर जोर जोर से हिल रही थी)
(अपने अंदर उतरते लन्ड को कनिका साफ तौर पर महसूस कर रही थी मयंक का लन्ड उसकी चुत को और गहरा और गहरा खोले जा रहा था दर्द एक तरफ और उसमें अनुभव का आनंद एक तरफ उसे बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रहा था


उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह इतने बड़े लन्ड से चूद रही थी उसके चेहरे पर आनंद झलक रहा था उसके हर धक्के पर उसकी आहे तेज़ हो रही थी





कनिका __मममम ययययय ककककक अह्ह्ह्ह और जोर से .मममम ययययय ककककक मममम ययययय कककककम
मयंक कनिका को दर्द हो रहा था तो मयंक के आधे लन्ड से ही अंदर बाहर कर रहा था कनिका के ऐसे कहने से मयंक के अंदर जोश बढ़ने लगा उसको भी चुत के अंदर बाहर करने से बहुत मजा आ रहा था


कनिका__मममम यययय ककककक में झड़नेवाली हु
मममम ययययय ककककक जोर से करो ओर जोर से
(मयंक को बहुत मजा आ रहा था उसने भी जोर-जोर से धक्के लग रहा था चुत का घर्षण उसके लन्ड पर बहुत कुछ असर डाल रहा था वो उनके ऊपर झुक कर उनके होठों को पूरी तरह छोड़ने लगा निचोड़ने लगा )


मममम ययययय ककककक धीरे मयंक यूई मम्मी (कनिका अब पछता रही थी उसे ज़ोर जोर से कहने को बोलकर उसकी धक्के बहुत ज्यादा तेज हो गए थे ऐसे तो उसे कभी मोहन ने भी नहीं चोदा था दर्द और मजे से उसकी हालत खराब थी एक और में उसे रोकना चाहती थी पर झड़ने के बहुत नजदीक है उसकी चुत मयंक के लन्ड और अंदर और अंदर घुस रहा था इधर से भी हालत खराब थी) धीरेई अह्ह्ह धीरेई ममम ययययययय कककककक अह्ह्ह्ह धीरेईए आईईईई मयनक अह्ह्ह्ह्हः ममीईईई आईईईईईई


( जब वह नहीं रुक रहा था तो उसने उसके होंठो को जोर से चूसना शुरू करती है और उसकी पीठ पर अपने नाखून घड़ने लगी उसके बाल जोरों से खींचने लगी ऐसा करने से मयंक और जोर से धक्के लगाने लगा) हम्मम हम्मम हम्ममम
हम्मम हम्मम हम्ममम


(कनिका के मुंह से आवाज भी नहीं निकल रही थी उसने उसे अपने सीने मै दबोच लिया कनिका उसके नीचे दबी उसके धक्को की रफ्तार को सह रही थी उसका लन्ड इतना अंदर घुस चुका था कि उसकी बच्चे दानी से टकराने लगा मेरी हालत बहुत खराब होने लगी इतनी बुरी तरह से वो कभी नहीं चुदि थी पर अलग तरह का आनंद उसे और जोस दिला रहा था) में मैं मैं गई
आह्ह्ह्ह में गयीईई ओह्ह्ह्ह्हः माअआआ में मर जाऊंगी अह्ह्ह्ह्हः मम्मीईईईई (मयंक वे अपना आखिरी पड़ाव पर था और वो उसे नाजुक से जिस्म को अपने अघोष मे दबाया अपना लन्ड उसकी गहराई में डाल रहा था )



यह किसी तरह का आनंद था उसे पता नहीं उसे सुरंग में उसे इतना मजा आ रहा था कि वो जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा था कनिका की आवाज उसे ना रही थी पर वो अपनी ही धुन में था ऐसा एहसास उसे पहली बार हो रहा था वो अपनी कमर बड़ी तेजी से हिला रहा था उसके अंदर से कुछ निकलने वाला था वो तेज तेज धक्के लगाते हुए आखिर का
कर छूट गया और उसके अंदर का आनंद की अनुभूति होने लगी अंदर से कुछ निकल रहा था उसने अपना पूरा लन्ड कनिका की चुत की गहराई में ठोक दिया)
(अपने अंदर हो रही गर्म बरसात को महसूस कर करने कनिका मयंक से जोर से लिपट गई)


कनिका ने उसको अपने पैरों से ऐसे झगड़ा था कि वह हिल भी नहीं पा रहा था मयंक चेहरा ऊपर उठाते हुए कनिका को देखा तो मैं चौंक सा गया उनकी आंखों से आंसू बह रह थे और उनके चेहरे पर दर्द की लकीर साफ देखी जा सकती थी वो डर गया और उतने लगा


जब कनिका कोई एहसास हुआ कि मयंक उठ रहा है तो उसने अपनी आंखें खोली और साथ में मयंक को अपने हाथों से जकड़ते हुए उठने से रोकने लगी
(उसे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो वह रुक कर कनिका को ओर देख रहा था) (मयंक की आंखों में देखते हुए भीगी आंखों से मुस्कुराई ) अभी हिलने मत ऐसे ही मेरे ऊपर लेटे (वो मयंक को खींचती हैं और उसे वापस अपनी बाहों में भर लेती है वह चाहती थी कि अंदर का वीर्य बाहर ना निकले इसलिए वो मयंक के लन्ड को निकालने से मना कर रही थी


मयंक __(थोड़े चिंतित स्वर में) आंटी दर्द हो रहा है?.....


कनिका __(मुस्कुराते हुए ) हा थोड़ा थोड़ा
मयंक __सॉरी आंटी मुझे पता नहीं था ऐसा होगा


कनिका___( उसके गले से अपने गाल रगड़ते हुए()मुझे भी पता नहीं था ऐसा होगा तुम चिंता मत करो कुछ नहीं हुआ है होता है जैसा मुझे ताजुब इसलिए है कि मेरे साथ ऐसा हुआ
मयंक को कुछ समझ में नहीं आया तो वह थोड़ा ऊपर हुआ और सवालिया नजरों से उनको देखने लगा


(कनिका__( मुस्कुराते हुए )अरे पागल जब लड़की पहली बार ऐसा करती है तो उसे दर्द होता है पर मुझे हुआ इसलिए मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ पर तुम्हारा वह इतना बड़ा है इतना बड़ा है ताजुब की कोई बात नहीं पर ऐसा होगा यह मैंने नहीं सोचा था


मयंक ___अगर आपको दर्द हो रहा है तो मुझे निकाल लेने दीजिए


कनिका___( उसके गाल सहलाते हुए) पागल यह होगा तभी तो मैं मां बनोगी तो चिंता मत कर अभी ठीक हो जाएगा अच्छा यह तो बहुत तुझे कैसा लगा क्या तुझे मजा आया


मयंक शरमाते हुए हा में गर्दन हिलाता है
कनिका __शर्माता क्यों है (फिर उसकी और प्यार से देखते हुए ) तुझे मैं अच्छी लगी


(मयंक फिर हां मैं गर्दन हिलाई )ऐसे नहीं बोल मैं तुझे कैसे लगी


मयंक__ आंटी आप बहुत खूबसूरत। ओर प्यारी है मैंने सोचा नहीं था कि आप ऐसा भी करती होगी


कनिका __ (वो मुस्कुराई )क्या तुझे मुझे छूने का चूमने का मन कर रहा है


(मयंक फिर शर्माकर हा में सर हिलाया
कनिका__(मुस्कराते हुए )मैने बोला ना बोल के बता अच्छा ये बता क्या छूने का मन कर रहा है


मयंक की नजर उनके बूब्स की और चली गई पर वो बोला कुछ नहीं
कनिका ___क्या तुझे ये अच्छे लगते है?
( मयंक ने मुस्कुराकर उन्हें देखा )
कनिका __बता ना क्या तुम्हे ये अच्छे लगते है, क्या इसे दबाना चाहते हो


मयंक ___जी...जी आंटी.


(पता नहीं पर कनिका को उसके के साथ ऐसी बातें करने में बहुत मजा आ रहा था वह बहुत खुश थी वह अपने इस नए साथी के साथ खुलकर मजा लेना चाहती थी
(मयंक हाथ पड़कर वह अपनी छाती पर रख देती है) इसे दबावों मयंक जो मर्जी हो करो इसके साथ उसे भी बड़ा मजा आया है जब मयंक इसके साथ ऐसा करते हो तो

कनिका खुद मयंक का एक हाथ को अपने बूब्स पे रख कर उसे दबाने के लिय बोल रही थी ब्रा में कैद उस के नरम गोल को दबाने में उसे बहुत मजा आ रहा था


मयंक भी एक हाथ से एक बूब्स दबाते हुए दूसरे को मुंह में लेकर चूसने लगा इन बड़े बड़े नरम गुब्बारों से खेलने ओर उसके ऊपर कड़क दाने को चूसना उसे बहुत पसन्द आ रात था
(कनिका ने अपनी ब्रा को नीचे खिसका दिया जिस से उसका निप्पल बहार आ गया, निप्पल को देख मयंक उस पर टूट पड़ा, वो उसे ज़ोर जोर से चाटने लगा, कनिका को थोड़ा दर्द हुआ पर उसने मयंक को रोका नहीं कनिका महसूस कर रही थी कि थोड़ी देर पहले लन्ड जो थोड़ा ढीला हुआ था वो फिर अकड़ने लगा. उसकी चुत में एकबार फिर पानी बहने लगी. वो अब मचलने लगी थी. वो खुद अपनी कमर हिलाने लगी, जिस से लन्ड थोड़ा थोड़ा अन्दर बाहर होने लगता है. उसके पति ने कभी उसे दूसरी बार नहीं चोदा था)


कनिका __एक मिनट मयंक (वो रुक गया और उन्हें देखने लगा उन्होंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए, वो पूरी तरह से नंगी हो गई, मयंक उसको देखते ही रह गया उनके बूब्स बहुत बड़े लग रहे थे, गहरे रंग का एक बड़ा सा गोल आकार बना हुआ था और बीच में बूब्स पूरी तरह से खड़ा था उन्हें देख कर मेरी उत्तेजना चरम पर पहुंच गई, मैने कस के दोनों चूचों को पकड़ लिया और मसल दिया अह्ह्ह्ह्ह्ह धीरेईएई


अब मयंक झुक कर एक बूब्स को मुंह में लिया और उसे जोरो से चूसने लगा, बारी बारी दोनों चूचियां मसलते हुए वो बूब्स को चूस रहा था

धीरेएई मयंक


कनिका __में कहीं भागी नहीं जा रही


मयंक इतना उत्तेजित हो गया था कि वो सुन ही नहीं रहा था, मयंक ने अपनी कमर का जोर से धक्का दिया) मुमीईईईईई अह्ह्ह्ह्ह्ह में यही हु मयंक धीरेईएई में कही नहीं जा रहीईईईई आईईईईईई धीरेईएई


ऐसे ही कनिका कौन चोद रहा था कनिका भी पूरी हिल रही थी वह बिस्तर में घड़ी जा रही थी जिंदगी में पहली बार उसे चुत का मजा मिल रहा था उसका उत्साह वो समझ सकती थी और सच कहूं तो उसे भी ऐसे मजा आ रहा था ऐसी चूदाई तो उसकी कभी नहीं हुई थी उसके बड़े लन्ड के धक्के से पागल हो रही थी
मयंक का लन्ड उसकी चुत में घमासान मचाया हुए था कनिका ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई



कनिका: युईएई माअआअ सीईई में गयीईईई अह्ह्ह्ति shi रूको आह्ह्ह रुको . मयंक रुक गया, और उन्हें देखने लगा, वो मुझे बड़े प्यार से देख रही थी, झूठे गुस्से से) पागल हो गए हो क्या, इतना तेज कोई करता है भला. में तुम्हारी तरह मजबूत नहीं हु, नाजुक सी लड़की हु, बहार निकलो इसे


मयंक __(उसको ओर करना था उसे ने गलती कर दी) सॉरी आंटी में धीरे से करूंगा.


कनिका (मुस्कुराते हुए) में मना नहीं कर रही हु, अभी थोड़ी देर रुको, मुझे तुम्हारा देखना है
मयंक मुस्कुराते हुए अपना लन्ड बाहर निकाल लिया, पक की आवाज के साथ लन्ड बाहर निकल आया अह्ह्ह्ह्ह्ह


कनिका बैठ कर अपनी चुत देखने लगी, ढेर सारा वीर्य उसकी चुत से निकल कर बिस्तर पर गिरने लगा, उसने देखा कि वो थोड़ा लाल भी था, वो समझ गई कि उसकी चुत अन्दर से फटी है. उसे कोई परवाह नहीं थी, उसने अपनी साड़ी से लन्ड को साफ किया और उस अजूबे को पकड़ कर देखने लगी



उस बड़े से दैत्याकार लन्ड को देख वो मोहित होने लगी, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इतना बड़ा लन्ड वो अपनी चुत में ले चुकी है. वो उसे चूमने और चाटने लगी





मयंक देख रहा था कैसे कनिका उसके लन्ड को चाट रही है, मयंक __(मन मै जब उसने पहली बार देखा तब तब अगर मुझे कोई कहता कि आंटी ऐसा भी कर रही थी तो में यकीन ही ना करता. वो कितनी खूबसूरत थी और दिखने में कितनी शालीन और सभ्य दिखती है प्यारी सूरत के साथ उनकी आवाज भी कितनी मीठी है में एक नए अनुभव को सीख रहा था. में अपने घुटनों पर खड़ा था और वो मेरे लन्ड को चाट रही थी. में देख रहा था कि वो ऐसे चाट रही है जैसे छोटा बच्चा कुल्फी को चाट ता है
.(कनिका जैसे जैसे लन्ड को चाट रही थी वैसे वैसे वो और उत्तेजित हो रही थी लन्ड से निकालने वाली वो गंध उसके नाखूनों में भर रही थी,
मयंक के वीर्य और उसकी चुत की मिली जुली गंध उसे और उत्तेजित कर रही थी, उसकी चुत से अभी भी मयंक का वीर्य टपक राह था, उसने लन्ड के सुपाड़े को अपने मुंह में भर लिया
कनिका लन्ड से पूरा मुंह भर गया था उसके हॉट लन्ड के इर्द गिर्द लिपट गए थे)


कनिका ने उसका लन्ड मुंह में भर लिया था कनिका के मुंह की गर्माहट मयंक अपने लन्ड पर महसूस कर रहा था


वो ऐसे झुकी थी कि उसके कूल्हे बाहर उभार आए हुए थे


मयंक ने झुककर उन्हें पकड़ा और दबाकर महसूस करने लगा वह मखमली गद्देदार कूल्हे दबाने में उसे बहुत मजा आने लगा



मयंक के हाथ काफी लंबे थे तो वह अपनी उंगली से गांड़ दरार को सहलाने लगा जैसे ही उसे चुत का छेद मिला उसने अपनी अंगुली अंदर डाल दी


चुत पूरी चिप चिप्पी थी उसे गर्म जगह में उसने अपनी अंगुली गुस्सा दी और आगे पीछे करने लगा


कनिका अपनी चुत में अंदर बाहर हो रही उंगली से ओर उत्तेजित होने लगी उसे ऐसा लग रहा था कि उसकी चुत में लन्ड है और जोर से लन्ड को चूसने लगी
कनिका ने सोचा नहीं था कि एक दिन में इतना सब कुछ हो जाएगा कहा वो ये सोचे बैठी थी कि एक ही बार तो करना है ओर अभी उसका दिल ही नहीं मान राह था


इतनी उत्तेजना उसने कभी महसूस नहीं की थी या यू कहे कि काफी सालों से वो इतनी उत्तेजित नहीं हुई थी, शादी के शुरुआती दिनों में वो जरूर उत्तेजित हो जाती थी, पर धीरे धीरे वो सब कम हो गया था
वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी तो वो सीधी लेट गई


मयंक भी बेसबर हो रहा था जैसे ही में लेटी वो अपनी पॉजिशन लेने लगा,
कनिका ने एक टांग उठा कर उसे जगह दिया मयंक अपना लन्ड पूरा अंडर डाल दिया वो जल्दी जल्दी कनिका चोदने लगा
मयंक कनिका के पैर को पकड़ कर उसे चाटने लगा तो उसे गुदगुदी होने लगी





कनिका : आआह मयंक क्या कर रहे हो, गुदगुदी हो रही है,


मयंक का लन्ड जिस रफ्तार से अंदर बाहर हो रहा था उसकी हड्डियां तक आवाज करने लगी थी ओह्ह्ह्ह मयंक तुम मुझे आआआ अह्ह्ह पागल कर दोगे आह्ह्ह्ह अह्ह्ह आह्ह्ह्ह


मयंक __ये कैसा मजा था, उसका लन्ड उस छोटी सी सुरंग में अन्दर बाहर होने से उसे एक अजीब तरह का आनद मिल रहा था





कनिका (इतने तेज धक्के में पहली बार झेल रही थी उसकी ताकत देख उसे भी ताज्जुब हो रहा था, यहां उसकी चुत की हालत बहुत ज्यादा खराब हो रही थी पर दिल मान नहीं रहा था, शरीर में ऐसी ऐसी तरंगें उठ रही थी, उसका रोम रोम खड़ा हो रहा था, वो उसके शरीर पर पूरा छाया हुआ था, और धक्को की बरसात हो रही थी)



कनिका ने उसके होठों पर टूट पड़ी, दोनों के मुख से निकल रहा है रस पूरे चेहरे को भीगने लगा था वह उसके स्तनों चाटता कभी गर्दन को चाटता उसके धक्के लगातार चल रहे थे यह उसका पहला अनुभव था कि वो इतना देर से चूद रही थी पिछले आधे घंटे से वह लगातार उसे चोद रहा था वह जरा भी नहीं थका था
उसका स्टैमिना देख उसे हैरानी हो रही थी उसे पर इतना प्यार आ रहा था कि यह लगातार उसके होठों को चूस रही थी



आखिर वो वक्त भी नजदीक आ गया वो जान गाई कि अब मयंक झड़ने वाला है रफ्तार इतनी तेज थी कि कनिका को हालत पतली हो रही थी

कनिका __ अह्ह्ह्ह्हः आह्ह आराम से आह धीरे मयंक आह्ह्ह्ह धीरे अह्ह्ह्ह्हः
(आखिर कर जोर से झटके लगाते हुए वो अपना वीर्य उसके अन्दर भरने लगा और वो भी झड़ने लगी, कनिका ने उसे अपने गले से लगा लिया



दोनों जोर जोर से सांस लेने के पूरे कमरे में सांसों की आवाज थी चुत वीर से भर गई की पूरी वह महसूस कर रही थी की वीर्य निकल कर उसकी गांड से दरार से बह रह था


कनिका लन्ड की नसे अपनी चुत में महसूस कर रही थी उसकी चुत लन्ड का कसके निचोड़ रही थी

उसे चुदाने की पूरी खुशी उसने दी थी वह पूरी तरह से उसे पर मर मीठी उसने थोड़ा ऊपर उठकर उसकी ओर देखा तो उसने अपनी नाक उसकी नाक से सटा दी



वह पूरी तरह से संतुष्ट थी उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसने दुनिया की सबसे बड़ी खुशी पर पा ली हो उसकी पीठ सहलाते हुए उसकी इस अद्भुत कारनामे का इनाम दे रही थी
वही मोहन बेचैन था अच्छा शरीर था उसके पास पर जो एक मर्द बनाता है वही वह नहीं था वो चूदाई तो अच्छी कर लेता था कनिका भी खुश थी आज उस ने अपनी प्यारी और खूबसूरत बीवी को किसी और की बाहों में देना पड़ा
उसे सोच सोच के पागल हो रहा था कि वह क्या हो रहा होगा क्या बैंक मन होगा
उसने देखा था मयंक को जब मयंक गर पे आया था एक गांव की स्कूल के लिय लड़ पड़ा वो किसी के साथ धोखा नहीं करता अब तो पूरे गांव मै संस्कारी लड़का वो ही था



मयंक और कनिका शांत हो गए तो मयंक अलग होने के लिए उठने लगा तो कनिका ने फिर उसे पकड़ते हुए उठना नहीं दिया


कनिका__ अभी ऐसे ही रहो मयंक मुझे बहुत अच्छा लग रहा ह
मयंक __मुझे घर भी तो जाना है आंटी मा भी वेट कर रही होगी और ये सब मोहन अंकल को पता चल गया तो


कनिका __(उसका गाल सहलाते हुए) तुम इन सबकी चिंता मत करो, में हु ना. वो सब छोड़ो ये बताओ तुम्हे कैसा लगा ये सब
मयंक __(शर्माते और मुस्कुराते हुए) बहुत मजा आया आंटी और आप को?
कनिका __मुझे भी बहुत मजा आया मयंक. तुम्हे बुरा तो नहीं लगा ना मेरे साथ ये सब करने मै
मयंक __सच केहू तो मैने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा भी करते है, और आप कितनी खूबसूरत और अच्छी दिखती है फिर भी...
कनिका __(मुस्कुराते हुए) अच्छी हु तो क्या अब बुरी हो गई लड़की चाहे कितनी भी अच्छी हो या सीधी हो, हर कोई ये करती है यही कुदरत है. अगर लड़की हो कर ये सब ना करे या लड़का हो कर ये सब ना करे तो प्रॉब्लम है


थोड़ी देर दोनों ऐसे ही एक दूसरे के साथ बाते करने लगे. पर कनिका ने महसूस किया कि मयंक का लन्ड फिर से उसकी चुत में अपना आकार बढ़ाने लगा और कड़क भी होने लगा था


कनिका (मुस्कुराते हुए) क्या फिर से मन कर रहा है
मयंक __करना तो चाहता था लेकिन अभी आपकी हालात देखो इसलिए फिर कभी देखेंगे


कनिका __ तुम कितना सोचते हो दुसरो के बारे में चलो ठीक है मै कपड़े चेज़ कर लेती हु तुम्हे गाड़ी से छोड़ दूंगी


मयंक __आप रहने दीजिए में चला जाऊंगा
कनिका __नहीं मयंक, में तुम्हें छोड़ने आ रही हु


मयंक __नहीं आंटी आप को दर्द हो रहा है आप रहने दीजिए में चला जाऊंगा, आप आराम कीजिए


कनिका (मुस्कुराते हुए ) इतना भी दर्द नहीं है तुम चिन्ता मत करो.


मयंक__फिर आप भी नहीं आएंगी, प्लीज़ आप आराम कीजिए, में चला जाऊंगा.


कनिका _ठीक है , ध्यान से जाना


मयंक घर आ गया और तब तक शाम हो गई थी

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mis1234

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पार्ट 11
रात 9:00 PM पूरे गांव में आज बिजली नहीं थी मयंक का घर वैसे भी गांव के बाहर था जहां सुनसान जानवरों की आवाजें आ रही थी
सुमित्रा __मयंक बेटा थोड़ा अन्दर से लालटेन लेके जला दे देख आज ये लाइट अब गई है पता कब आएगी


मयंक अंदर से लालटेन लाके जला देता है


सुमित्रा बर्तन धो रही थी आज वो भी बेचैन थी उसका दिमाग मैं हर दिमाग मै कुछ गलत होने की आशंका हो रही थी पता नहीं आज उसका जी घबरा रहा था
ऐसे तैसे करके बर्तन धोक रख कर आ गई और मयंक के



पास आके सो गई ओर पीछे से मयंक ने भी उससे लिपट कर सो गया
मयंक___मां... नींद नहीं आ रही आज पता नहीं क्यों
सुमित्रा ने पलटकर नहीं देखा: "सो जा बेटा


वह मन में सोचने लगी गुरु जी ने अभी 2 महीना का बोला था क्या उसके पहले चले जाना चाहिए
नहीं गुरु जी जो बोला वो तो अभी 15दिन पड़े है क्या करु कुछ गुरु जी ने भी सोचा होगा
उसी उधेड़बुन उसे नींद आ जाती है
मयंक को भी नींद आ जाती है क्योंकि फूल मेहनत जो करी
दोनों मां बेटे दुनिया से बेखबर सो जात है


अमावस्या की रात आज थी जिस कारण चारों तरफ अंधेरा फैला हुआ था और गाँव के सभी लोग अपने अपने घऱों के अंदर सोये हुए थे। उस अंधेरी रात में बस कुछ आवारा कुत्तों के भोंकने की आवाज सुनाई दे रही थी, ऊपर से सर्दी के मौसम और घने कोहरे ने उस रात को कुछ ज्यादा ही डरावना बना दिया था। तभी एक अनजान काला साया उस घने अंधेरे का फायदा उठाते हुए चोरी छिपे सुमित्रा के मकान की दीवार पर चढ़ने की कोशिश करने लगा, कुछ देर प्रयास करने के बाद जल्द ही वो अपनी कोशिशों में कामयाव रहा और अगले ही पल वो उस मकान की दीवार उस पार था


जिसके बाद वो बिना किसी डर के धीरे धीरे चोक से चुपचाप मकान के अंदर दाखिल हो गया। ऐसा लग रहा था जैसे वो अनजान सख्स पहले से ही इस घऱ के हर एक कोने से अच्छी तरह से परिचित है। उस रहस्यमई अनजान सख्स ने काले रंग के कपडे पहने हुए थे, साथ ही अपने चेहरे को भी काले नकाब से ढंक रखा था, जो उसे रात के अंधेरे में दूसरे लोगों की नजरों में आने से बचा रहा था। वो सख्स बिना कोई आवाज किए और बिना किसी परेशानी के बडी ही आसानी से उस मकान के अंदर दाखिल हो चुका था और बिना किसी डर के एक कमरे की तरफ बढ रहा था। शायद उस सख्स को पहले से ही पता था कि उसे कहाँ जाना है।


उस कमरे का दरवाजा अंदर से लॉक नहीं था। शायद उस कमरे के अंदर इस वक्त मयंक ओर सुमित्रा मौजूद थे दरवाजा तो बंद करती है लेकिन आज कुछ चिंता मै थी इसलिए भूल गई बंद करना ऐसे किसी अनजान व्यक्ति के घऱ में आने के बारे में कभी सोचा ही नहीं था, जब उस अनजान सख्स ने बिना किसी आवाज के आहिस्ता से कमरे के दरवाजे को खोलकर अंदर झांक कर देखा, तो उस वक्त कमरे में नाईट बल्ब की हल्की रोशनी फैली हुई थी, जिसमें उसे सुमित्रा मयंक के साथ बिस्तर पर बेखबर सोती हुई साफ साफ दिखाई दे रही थी। जिसे देखकर उस अनजान साये की आँखों में एक अलग ही प्रकार की चमक आ गई थी।


इसलिए वो बिना किसी आवाज के चुप चाप उस कमरे में दाखिल हो गया और जैसे ही वो उस औरत के पास पहुँचा, यानि सुमित्रा के पहुँचा तो वो सुमित्रा की खूबसूरती में पूरी तरह खो गया। वह एक 28-30 साल की बला सी खूबसूरत महिला थी, सोते समय उसके काले घने बाल उसके चेहरे पर आ गए थे और उन काले घने बालों के बीच से झाँकता उसका दूधिया सफेद चेहरा कुछ ज्यादा ही मनमोहक लग रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे कोयले की खान में कोई हीरा चमक रहा हो या फिर काले घने बादलों के बीच से चाँद अपनी चमक विखेर रहा हो। ऊपर से उस सुमित्रा की सांसों की लय में ऊपर नीचे होता उसका सीना देखकर तो उस काले साये को अपनी साँसे रुकती हुई महसूस हो रहीं थीं।


इस वक्त वो अनजान व्यक्ति पूरी तरह से उस सुमित्रा की खूबसूरती में खो चुका था, तभी अचानक से घऱ के पास गली में से किसी आवारा कुत्ते के भोंकने की तेज आवाज सुनाई दी, जिसे सुनकर वो साया बापिस फिर से अपने होश में आ गया। अपने होशो हवास में बापिस आते ही उस साये ने तेजी से अपने प्लान को अंजाम देना शुरू कर दिया।


होश मैं आते वो सुमित्रा के पास जा पहुँचा। जो अब भी पूरी तरह से बेखबर गहरी नींद में सो रही थी। लेकिन अब वो नकाबपोस साया बिना किसी डर और हिचक के लगातार सुमित्रा को घूरे जा रहा था। उसकी आँखों में इस वक्त वासना साफ साफ दिखाई दे रही थी वो खुद सुमित्रा की खूबसूरती देख आया किस काम वो भूल जाता



अचानक से उस नकाबपोस साये ने सुमित्रा के गालों को छूआ और तभी पता नहीं कैसे सुमित्रा ने किसी अनजान शख्स का स्पर्श अपनी नींद में भी महसूस कर लिया, जिसके अगले पल ही सुमित्रा तुरंत ही अपनी नींद से जाग गई। लेकिन जैसे ही उसकी नजर उस नकाबपोस काले साये पर पडी तो उसने चीखने के लिए अपना मुंह खोला


पर इससे पहले व सुमित्रा चीख पाती या फिर अपनी मदद के लिए बोल पाती पाती। उस काले साये ने बिजली कि गती से अपना एक हाथ मजबूती से सुमित्रा के मुंह पर रख दिया। जिस कारण सुमित्रा की चीख उसके गले में ही घुट कर रह गई
पास में सो रहा मयंक को पता भी नहीं चला ओर वो साया सुमित्रा को घर के बाहर लेके आ गया


इस अचानक हुए हमले से वो सुमित्रा बुरी तरह से डर गई थी, और इस नऐ माहौल को समझने की कोशिश कर ही रही थी। ठीक तभी उस औरत के कानों में एक मर्दाना सर्द आवाज गूँजी


अगर तुमने अपने मुँह से जरा सी भी आवाज निकालने की गलती की, तो तुम हमेशा हमेशा के लिए तेरे उस पीले को खो दोगी” सोचो उसका बाप का भी पता नहीं चल आजतक किसने मारा है उसे इसका भी पता नहीं चलेगा



सुमित्रा उस मर्दाना आवाज को सुनकर बुरी तरह से हैरान रह गई थी, उसकी आँखों में साफ साफ दिकाई दे रहा था कि सुमित्रा उस आवाज के मालिक को बहुत अच्छी तरह से पहचानती है
ये आवाज बहुत दिनों के बाद सुनी थी सालो बीत गए शायद
हाँलाकि इस बात का एहसास उस नकाबपोस को भी हो गया था। इसलिए उस नकाबपोस आदमी ने अपने चेहरे से नकाब हटा दिया, क्योंकि अब उसके पास अपना चेहरा छिपाने की कोई बजह नहीं बची थी। लेकिन जैसे ही उस आदमी ने सुमित्रा की मूँह से अपना हाथ हटाया तो वो सुमित्रा लगभग चीखते हुए बोली


सुमित्रा ---त त त तुम...... तुम यहाँ क्या कर रहे हो....


उस सुमित्रा की बात सुनकर उस आदमी ने कहा


आदमी__स्स्स्स्स् स्स्स्स्स कहा ना आवाज नहीं... लगता है तुम मेरी बात ठीक से समझी नहीं या फिर उस पहले उस पीले को मारू


मयंक को पेशाब लगी तो वो उठा तो सुमित्रा को वहां ना पाकर माँ कहा गई उसने सोचा शायद पेशाब करने गई होगी बाथरूम मै
मयंक _मन मै (मां बाथरूम मै है तो मै बाहर कर। आ जाता हु)
मयंक ने देखा दो साये घर के बाहर खड़े हैं उनकी बातें सुनने के लिय वो आगे बढ़ा ओर सुनने लगा सुमित्रा को पहचानने मै समय नहीं लगाया दूसरा कौन है उसे पता नहीं
उस आदमी की धमकी सुनकर सुमित्रा को मयंक की याद आ गई और
सुमित्रा __वो सो रहा है इसलिए तू जिंदा है सोच अगर वो जाग गया तो तेरी लाश पड़ी हुई होती समझा


आदमी __उसके के लिय पूरा प्लान तैयार किया है मेरी जान
तू सोच तू खजाने को लिया बैठी है तुझे ढूंढने के लिय पूरा राज्य छान मारा साला उस रघुवीर की मां चोद दी हमने लेकिन मरते मरते एक काम गलत कर दिया साले ने प्रॉपर्टी मै एक तो साधु डाल दिया एक वो लड़का अजय दोनों का पता नहीं चल तू उसे क्या नाम बताया तेरे किस्मत खराब है तेरा पता चल गया अब तेरा नंबर है तेरे साथ तो मै शुहागरात मनाऊंगा फिर उस पीले का अजय को तो हम मारेंगे ही पहले तू बोल मैने पता किया तेरी तो अभी तक शादी नहीं हुई कैसे संभालती है तू इस जवानी को मै जितना पता किया हु तेरे बारे में मुझे लगता है अभी तक तेरी सील पेक है तू मेरी जान


सुमित्रा __तुझे कौन बोला वो अजय है वो मयंक है मेरा बेटा


सुमित्रा की डर भरी आवाज सुनकर वो आदमी मुस्कुराता हुआ बोला


आदमी__मेरे आदमी इस घर के चारों ओर फैले हुए है अभी तू जहाँ भी है फिलहाल ठीक ठाक है। लेकिन अगर तुमने कोई गडबड की या मेरी बात नहीं मानी तो मैं गारंटी नहीं ले सकता कि वो आगे आगे वो क्या करेंगे


उस आदमी की बात सुनकर सुमित्रा एक बार फिर डरते हुए बोली


सुमित्रा __आखिर क्क्क्क् क्या चाहते हो तुम वो


सुमित्रा की बात सुनकर वो आदमी वासना भरी नजरों से उस सुमित्रा को घूरते हुए बोला


आदमी- तुम जानती तो हो मेरी जान मैं यहाँ क्यों आया हूँ


औरती- क्क्क्क् क्या मतलब है तुम्हारा....


आदमी- तुम इतनी बडी मूर्ख तो दिखाई नहीं देती जो इतना भी ना समझो की एक मर्द इतनी रात को एक औरत के पास आखिर किस लिए जाता है पहले तू मुझे खुश कर फिर बाद में मै दूसरी बात करेंगे


उस आदमी की बातों का मतलब समझते ही सुमित्रा गुस्से में गुर्राते हुए बोली


औरत- कमीने... ...... तूने सोचा भी कैसे अगर मेरे बेटे को पता चल गया तो वो तुम्हारी जान ले लेगा


सुमित्रा की बात सुनकर वो आदमी एक बहसी हँसी हंसते हुए बोला


आदमी- हा हा हा हा तेरे बेटे को तो इस बारे में तब पता चलेगा ना, वो जिंदा रहेगा.... तुझे मै साथ लेके जाऊंगा ओर उसका तो मेरे आदमी काम तमाम कर देंगे इसलिए बोलता हु तुझे जानेमन मेरा साथ दो और मुझे जी भरकर तेरे हुस्न का मजा लेने दे। मैं तुम्हें रानी बना कर रखूँगा। क्यों उस भिखारी के लिय अपनी जवानी खराब कर रही हो इस भिखारी केबलिया अभी तक शादी भी नहीं की तुमने ऐसा क्या कर दिया इसने या फिर उस साधु ने कुछ दिया है क्या तुझे


उस आदमी की बात सुनकर सुमित्रा लगभग चीखते हुए बोली


सुमित्रा __नहीं कमीने मेरे जीते जी ऐसा कभी नहीं हो सकता


आदमी- देखो मेरी जान अगर प्यार से मेरी बात मान जाओगी तो तुम ऐश करोगी, वरना तुम्हारा रेप करूंगा वो अलग ओर तुझे कोटे की रण्डी बना दूंगा अलग समझी


उस आदमी की बात सुनकर सुमित्रा ने जैसे ही उस आदमी की आँखों में वासना और बहसीपन देखा तो वो बुरी तरह से डर गई। उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि वो अब उस आदमी से मयंक और अपने आप को कैसे बचाऐ



सुमित्रा को यूँ खामोश देखकर उस आदमी को लगा कि सुमित्रा ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इसलिए वो धीरे धीरे सुमित्रा की तरफ बढ़ना लगा पर तभी अचानक से सुमित्रा ने पूरी ताकत के साथ उस आदमी को धक्का दिया और वहाँ से भागने की कोशिश करने लगी। लेकिन वो आदमी पहले से ही ऐसी किसी भी स्थिती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार था।


इसलिए उसन सुमित्रा को वहां से भागने का कोई मौका नहीं दिया और सुमित्रा को धक्का देकर नीचे गिरा दिया इससे पहले सुमित्रा फिर से भागने की कोशिश करती, वो आदमी सुमित्रा की कमर के ऊपर जाकर बैठ गया और उसके दोनों हाथों को अपने हाथों से मजबूती से पकड कर,
सुमित्रा के चेहरे की तरफ झूकने लगा। सुमित्रा ने डर और घृणा से अपनी आँखें बंद कर ली थीं और अपना चेहरा दूसरी तरफ करके लगभग रोते हुए बोली


सुमित्रा __प्लीज भगवान के लिए ऐसा मत करो। अगर तुमने मुझे छुआ भी तो मैं अपनी जान दे दूँगी


उस औरत की लाचारी पर वो आदमी हंसता हुआ बोला


आदमी- हा हा हा जान दे दोगी हा हा हा…. जानेमन ज्यादा नौटंकी करने की जरूरत नहीं है। अगर मैं तेरे साथ थोडा बहुत प्यार कर भी लूँगा तो कौन सा तुम घिस जाओगी वैसे भी तेरा कौनसा पति है जो उसे मालूम पड़ जायेगा
तभी पीछे से एक तेज आहट हुई ओर मयंक ने एक लाठी से मारा उस आदमी के सिर पे आदमी वही बेहोश होके गिर जाता है
मयंक ने जल्दी से सुमित्रा का हाथ पकड़ा और उसको खड़ा करके घर के अंदर लेकर चला गया
तभी 5 6आदमी घर के सामने आ आ गए ओर मयंक और सुमित्रा दोनों को गेर लिया मयंक ने देखा एक के हाथ मै गन थी दूसरे के हाथ मै लाठी सभी के मुहे बंद हुए थे अब मयंक अकेला ओर सामने चार बंदे थे सुमित्रा तो ग़म में डुब चुकी थी


सुमित्रा ने बिस्तर के पास पड़ा एक लट हाथ में मजबूती से पकडा और पूरी ताकत से उस आदमी के सिर पर दे मारा जिसके के हाथ मै गन थी वो आदमी इस अचानक हुए हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था। लट के सिर पर लगते ही उसके सिर से खून निकलने लगा था और उसके सिर में तेज दर्द भी हो रहा था। जिस कारण उसने अपने दोनों हाथों से अपने सिर को पकड लिया।
मयंक भी टूट पड़ा ओर थोड़े दूसरे आदमी को मारने के लिय लेकिन आदमी मयंक आते देख पहले ही उसपर हमला कर दिया वो मयंक के सिर पे दे मारा मयंक के सिर से खून की नदिया बहने लगी
मयंक को खून से लटपट देख सुमित्रा का गुस्सा सातवें आसमान पहुंचा चुका था
सुमित्रा ने दोनों आदमियों को लाठियों को बरसात कर दी और उनको मार मार के बेहोश कर दिया
वो बेहोश हो गए तो भी मार रही थी जब तक उसे मयंक कराहते हुए चीख सुनाई ना दी माअआआ मर गए वो माअआ
सुमित्रा दौड़ कर मयंक के पास गई ओर बोली बेटा तुझे कुछ नहीं होने दूंगी मै अभी हम हॉस्पिटल चलते है
वो दौड़कर राजेश के घर गई राजेश को बोला
सुमित्रा__राजेश राजेश शांति शांति जल्दी बाहर आवो वो
राजेश ओर शांति बाहर आए तो
राजेश __क्या हुआ सुमित्रा भाभी
सुमित्रा __जल्दी जाओ ओर कनिका के घर से उसकी गाड़ी लेके आवो
गाँव मै कनिका चौधरी ओर धनजय सिंह के गाड़ी थी इसलिए राजेश निकल गया


सुमित्रा वापस घर आई तो देखा सामने वो चारों आदमियों को उठा के एक गाड़ी मै डाला दो आदमी लेकर चल गए
तब तक कनिका ओर राजेश दोनों गाड़ी लेके आ गए
जब कनिका को राजेश से पता चला कि मयंक की तबीयत खराब है तो खुद गाड़ी लेके आ गई
राजेश सुमित्रा ओर कनिका ने मयंक को उठाया और निकल पड़ शहर की ओर


सुमित्रा__ मयंक उठो देखो मुझे....उठो मयंक हे भगवान ये क्या हो गया मेरे बेटे को। मयंक मैंने कहा था ना पर तुम नहीं माने भगवान को मेरी खुशियां बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है। मेरी किस्मत में प्यार ही नहीं, मैं जानती थी कि जो भी मेरी जिंदगी में आएगा किस्मत उससे मुझसे छीन लेगी, देखो क्या हो गया



पहले रघुवीर जैसा भाई को छीन लिया उसके बाद पूनम भाभी को और अब तुम भी मुझे छोड़ कर जा रह हो। मैं तुम्हें कहीं नहीं जाने दूंगी उठो तुम्हें उठना ही होगा मेरे लिए, अपनी मां के लिए। मैं वादा करती हूं कि तुम्हें इतना प्यार दूंगी


जितना कभी किसी ने किसी और को नहीं किया होगा। मेरी खातिर. मैं कभी भी तुम्हारे से कोई बात नहीं छिपाऊंगी तुम्हें वो सब सच बताऊंगी, तुम्हे उन्हें सब का बदला भी लेना है बेटा उठ जा मेरे मयंक तेरे पीछे तो ये जिंदगी जी रही हु मै भी उस टाइम मर जाती मेरे लाल जो मुझे बचाया वो तुझे भी बचाएगा उनको पता चल गया होगा


बस मुझे यू बिच रास्ते में छोड़ कर मत जाओ। मैं बिल्कुल अकेली हो जाऊंगी थक गई मैं लड़ते-लड़ते अब और किसी अपने को खोने की हिम्मत नहीं वह मुझमें


सुमित्रा मयंक के सीने पर सिर रख कर फुट फुट कर काफी देर तक रोती रही फिर कुछ बाद उसका चेहरा एक दम मजबूत हो चुका था आंखे एक दम लाल थी जिन्हें देखने से ऐसा लग रहा था जिसे ये रोने की बजह से नहीं बल्की गुस्से से लाल हो।


कनिका गाड़ी रप्तार से चला रही थी उसके भी आंखों में आंसू थे राजेश भी गुमसुम बैठा था गाड़ी शहर के अन्दर इंट्री के साथ उसके साथ दो गाड़िया ओर साथ मै दौड़ने लगती है
सब गाड़िया अपनी रफ्तार से चल रही थी जैसे किसी रेसिंग मै भाग ले रही हो
हॉस्पिटल मै पहुंचते ही सामने डॉक्टरों की टीम पहले ही खड़ी थी इमरजेंसी वॉर्ड का सायरन बजते ही अस्पताल के गेट के अंदर आते अफरा तफरी मची हुई थी कनिका की गाड़ी रुकते ही सुमित्रा पागलों की तरह चिल्लाई, "जल्दी करो
तभी वो दोनों गाड़िया भी आकर रुकती है है इसमें भगवाधारी साधु उनको देख के सभी उनको प्रणाम करते है
सुमित्रा उन साधु बाबा को देख के उनके पैरों मै पास जाती पैर पकड़ कर कहती
सुमित्रा __मयंक को बचा लीजिए गरू जी अब तो मेरा भी एक ही तो सहारा है


गुरु जी __सुमित्रा उठो बेटा ओर शांत हो जाओ कुछ नहीं होगा मयंक को मै डॉक्टरों से बात करूंगा
सुमित्रा कनिका ओर राजेश बाहर बैठे थे मयंक को ऑपरेशन थियेटर ले जाते हुए देख रह थे
(automatic) दरवाजे जैसे ही बंद हुए, बाहर का शोर पूरी तरह गायब हो गया। अंदर का नजारा किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के हाई-टेक कंट्रोल रूम जैसा था, जहाँ मयंक की जिंदगी को बचाने के लिए अत्याधुनिक मशीनें और डॉक्टरों की टीम मुस्तैद थी।


अस्पताल के उस वीआईपी न्यूरो-ऑपरेशन थिएटर के (ओटीटी)अंदर कदम रखते ही सबसे पहले कड़ाकेदार ठंड का अहसास होता है। बैक्टीरिया और इन्फेक्शन को रोकने के लिए वहाँ का तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस पर लॉक रखा गया था। छत पर लगी विशाल, बिना परछाई वाली शैडोलैस (Shadowless) एलईडी सर्जिकल लाइट्स मयंक के सिर पर केंद्रित थीं, जिससे मयंक का चेहरा और सिर पूरी तरह दूधिया रोशनी में नहाया हुआ था।



मशीनों का जाल और बीप की आवाजें आ रही थी मयंक के रिमोट-कंट्रोल वाले स्टील के बेड के चारों तरफ ऐसी मशीनें थीं जो पल-पल की हरकत रिकॉर्ड कर रही थीं एनेस्थीसिया वेंटिलेटर वर्कस्टेशन: मयंक के मुंह पर लगे वेंटिलेटर मास्क से उसकी छाती धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थी। मशीन से लगातार 'टुक-टुक... बीप-बीप' की आवाज आ रही थी, जो मयंक के दिल की धड़कन (Heart Rate) और ऑक्सीजन लेवल (98%) को स्क्रीन पर हरे रंग के ग्राफ में दिखा रही थी।
न्यूरो-नेविगेशन स्क्रीन: बेड के ठीक बगल में एक बड़ा कंप्यूटर मॉनिटर था, जिस पर मयंक के दिमाग का 3D (त्रि-आयामी) लाइव नक्शा चल रहा था। यह मशीन डॉक्टरों को सटीक रास्ता दिखा रही थी कि दिमाग के किस संवेदनशील हिस्से को छुए बिना खून का थक्का हटाना है।


एक तरफ स्टील की बड़ी मेज पर सैकड़ों की संख्या में बारीक और चमकदार सर्जिकल औजार (Scalpels, Forceps, और Micro-Scissors) सलीके से सजे थे। दिमाग की सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाला खास अल्ट्रासोनिक एस्पिरेटर (Ultrasonic Aspirator) और लेजर कटर भी तैयार रखा था, जो बिना खून बहाए खोपड़ी के अंदर काम कर सकते थे।


तीन सीनियर न्यूरोसर्जन नीले रंग के विशेष सर्जिकल गाउन, सिर पर कैप, पैरों में एंटी-स्टैटिक शूज और आँखों पर सर्जिकल लाउप्स (Magnifying Glasses/माइक्रोस्कोप चश्मा) पहने मयंक के सिर के पास खड़े थे।
मुख्य सर्जन ने बेहद सधे हुए हाथों से मयंक के सिर के उस हिस्से पर निशान लगाया जहाँ कट लगाना था कमरे में इतनी खामोशी थी कि डॉक्टरों की सांस लेने की आवाज भी सुनी जा सकती थी। मुख्य सर्जन ने बिना पीछे मुड़े सिर्फ हाथ बढ़ाया, "स्कैल्पल (ब्लेड)..." और चीफ नर्स ने बिना एक सेकंड गंवाए उनके हाथ पर औजार रख दिया।


माइक्रोस्कोपिक कैमरे की मदद से डॉक्टर मयंक की खोपड़ी के छोटे से हिस्से (Bone Flap) को हटाकर दिमाग की झिल्ली तक पहुंचे। स्क्रीन पर साफ दिख रहा था कि एक काले रंग का खून का थक्का मयंक के दिमाग की नसों को दबा रहा था। सर्जन के माथे पर पसीने की बूंद आई, जिसे असिस्ट कर रही नर्स ने तुरंत पोंछा। डॉक्टर ने कहा, "क्लॉट बहुत गहरा है, हमें बहुत धीरे-धीरे इसे सक्शन (सोखना) करना होगा। जरा सी भी चूक हुई तो इसके बोलने या याद रखने की क्षमता हमेशा के लिए चली जाएगी।
गुरु जी के साथ आए दो आदमी कनिका ओर सुमित्रा के पास बैठे थे




डॉक्टरों की टीम जब ऑपरेशन थिएटर से बाहर आई, तो उनके चेहरों पर राहत की जगह एक गहरी चिंता थी। चीफ न्यूरोसर्जन ने अपने चेहरे से मास्क हटाया और भारी कदमों से गुरु जीकी तरफ बढ़े। गुरु जी और सुमित्रा कनिका राजेश भी उनके पास पहुंच


डॉक्टर ने जो कहा, उसने सभी के होश उड़ा दिए: "ऑपरेशन तो सफल रहा, हमने खून का थक्का (Clot) निकाल दिया है। लेकिन चोट दिमाग के बहुत संवेदनशील हिस्से (Temporal Lobe) में थी। इस वजह से इसके दिमाग पर क्या असर पड़ेगा, इसकी हम कोई गारंटी नहीं दे सकते


सुमित्रा और गुरु जी के पैरों तले जमीन खिसक गई। गुरु जी ने डॉक्टर का कॉलर पकड़ने के अंदाज में कहा, "क्या मतलब गारंटी नहीं दे सकते गुरु जी तुम्हारे पास दुनिया की हर तकनीक है, फिर यह लापरवाही कैसी?"


डॉक्टर ने नजरें झुकाकर कहा, "गुरु जी यह लापरवाही नहीं, मेडिकल साइंस की सीमा है। सिर के अंदरूनी हिस्से में दबाव बहुत ज्यादा था। होश में आने के बाद ही पता चलेगा कि मयंक की याददाश्त (Memory Loss) सुरक्षित है या नहीं, या उसके शरीर का कोई हिस्सा पैरालाइज्ड (लकवाग्रस्त) तो नहीं हुआ। हमें अगले 24 घंटे इंतजार करना होगा


आईसीयू (ICU) के कांच के बाहर खड़े होकर दोनों मयंक को देख रहे थे, जो अनगिनत पाइपों और वेंटिलेटर मशीनों के बीच बेधड़क सोया हुआ था।


गुरु जी ने सुमित्रा की तरफ देखा, उसकी आँखों में गुस्सा और पछतावा दोनों था, "सुमित्रा! मैंने तुम्हें उसके कलेजे का टुकड़ा सौंपा था ताकि वह सुरक्षित रहे। लेकिन आज उसका बेटा जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है, और शायद वह अतीत भी न भूल जाइए


सुमित्रा ने रोते हुए हाथ जोड़े, "गुरु जी मयंक ने आज तक मुझसे कभी कोई जिद नहीं की आज भी वो दो को मार चुका था लेकिन तीसरे आदमी ने उसे लट से सिर पे मार दिया जहां शायद वो पहले वाली चोट भी थीअगर मेरे बच्चे के दिमाग पर कोई असर पड़ा, तो मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगी उनको भी ढूंढ ढूंढ कर मरूंगी


हॉस्पिटल के उस वीआईपी कॉरिडोर में अजीब सन्नाटा था। एक तरफ देश के बड़े से बड़े डॉक्टरों को गुरु जी ने वहां बुला लिया था तो दूसरी तरफ सुमित्रा आईसीयू के दरवाजे के बाहर फर्श पर बैठकर भगवान के सामने रो-रोकर भीख मांग रही थी।


नर्सों और गार्ड्स के लिए यह देखना हैरान करने वाला था कि एक साधु और एक साधारण महिला दोनों एक ही बच्चे के लिए तड़प रहे थे। सबसे बड़ा डर यह था कि अगर मयंक की याददाश्त चली गई तो


मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज के बीच मयंक की उंगलियों में थोड़ी हलचल हुई। उसकी आँखें धीरे-धीरे खुलीं। डॉक्टर, हर्षवर्धन और सुमित्रा तुरंत बेड के पास पहुंचे। कमरे का तापमान जैसे जम सा गया था। सब यह जानने के लिए सांस रोके खड़े थे कि क्या मयंक का दिमाग सही तरीके से काम कर रहा है या वह सब कुछ भूल चुका है।


डॉक्टर ने एक गहरी सांस ली और सुमित्रा के कंधे पर हाथ रखकर ढाँढस बंधाया, "सुमित्रा जी, हिम्मत रखिए। ऑपरेशन तकनीकी रूप से पूरी तरह सफल रहा है। हमने खोपड़ी के अंदर जमा सारा खून का थक्का (Clot) साफ कर दिया है और उस पुरानी गांठ के पास हो रही ब्लीडिंग को भी पूरी तरह कंट्रोल कर लिया है। मयंक की जान अब खतरे से बाहर है


यह सुनते ही गुरु जी सुमित्रा के चेहरे पर राहत की लहर दौड़ गई, लेकिन डॉक्टर के अगले ही वाक्य ने पूरे वीआईपी कॉरिडोर में सन्नाटा खींच दिया।


डॉक्टर ने गुरु जी की तरफ गंभीर नजरों से देखा और कहा, "लेकिन गुरु जी, जैसा कि मैंने पहले बताया था, वह पुरानी गांठ दिमाग के 'ब्रोका एरिया' (Broca's Area) के बेहद करीब थी—यह दिमाग का वह हिस्सा है जो इंसान के बोलने की क्षमता (Speech) को कंट्रोल करता है। थक्का हटाने के दौरान उस हिस्से पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ा है।"


सुमित्रा की सांसें अटक गईं।उसने पूछा
सुमित्रा __इसका क्या मतलब है डॉक्टर साहब?"


डॉक्टर ने नजरें झुकाते हुए कहा, "इसका मतलब यह है कि मयंक होश में कब आएगा, यह तो हम अगले कुछ घंटों में देख लेंगे। ... लेकिन वह दोबारा बोल कब पाएगा, या कभी बोल भी पाएगा या नहीं, इसकी हमारे पास कोई गारंटी नहीं है। यह समय ही बताएगा।"


'बोलेगा कब तक पता नहीं'—यह शब्द सुनते ही सुमित्रा वहीं फर्श पर घुटनों के बल बैठ गई। उसकी आँखों से आंसुओं का सैलाब बहने लगा। वह रोते हुए बुदबुदाई,
सुमित्रा __मेरा बच्चा मुझसे बात नहीं कर पाएगा? वह मुझे 'माँ' कहकर नहीं पुकारेगा


डॉक्टर भी इस लाचारी के आगे खुद को बहुत छोटा महसूस कर रहे थे
गुरु जी __जितना पैसा चाहिए मैं दूंगा कहा से डॉक्टर बुलाना है बुलाइए मुझे मयंक चाहिए
डॉक्टर ने नम आवाज में कहा, गुरु जी ___यहाँ अब पैसा नहीं, सिर्फ मयंक की इच्छाशक्ति और वक्त काम करेगा। हमें उसे आईसीयू में ऑब्जर्वेशन पर रखना होगा


कुछ ही देर में मयंक को स्ट्रेचर पर डालकर आईसीयू (ICU) के स्पेशल रूम में शिफ्ट किया गया। सुमित्रा और गुरु जी कांच की खिड़की से अंदर देख रहे थे। मयंक की आँखें बंद थीं, सिर पर सफेद पट्टियों का भारी बोझ था और मुंह पर वेंटिलेटर मास्क लगा था। वह जिंदा तो था, लेकिन उसकी वो आवाज खो चुकी थी जो घर में गूंजती थी।
गुरु जी ने सुमित्रा के सिर पर अपना कोमल हाथ रखा। उनके हाथ के स्पर्श मात्र से सुमित्रा के अशांत मन को एक अजीब सा सुकून मिला। गुरु जी ने मंद मुस्कान के साथ गंभीर और शांत आवाज में कहा, "पुत्री, उठो। विज्ञान जहाँ अपनी सीमाएं समाप्त घोषित करता है, अध्यात्म और विश्वास की यात्रा वहीं से आरंभ होती है। जिस बालक की रक्षा स्वयं महाकाल ने 18 वर्ष पूर्व की थी, उसकी वाणी इतनी सरलता से नहीं जा सकती


सुमित्रा ने रोते हुए कहा, "गुरु देव, डॉक्टरों ने दुनिया की सबसे महंगी मशीनें लगवा दीं, विदेशों से न्यूरोसर्जन बुला लिए, लेकिन डॉक्टर कोई गारंटी नहीं दे रहे है


गुरु जी ने सुमित्रा की तरफ देखा और कहा, ___सुमित्रा मनुष्य का अहंकार ही उसका सबसे बड़ा भ्रम है। तुम धन से औषधियां खरीद सकते हो, जीवन नहीं डॉक्टरों ने मयंक के मस्तिष्क का उपचार किया है, परंतु चेतना का उपचार केवल उस परमपिता परमेश्वर के हाथ में है। शांत हो जाओ और अपनी इस शक्ति को प्रार्थना में बदलो महाकाल को याद करो


महंत रामधारी जी ने मयंक की कलाई से अपनी उंगलियां हटाईं और आईसीयू (ICU) के रूम के अन्दर आए उनके चेहरे पर एक गंभीर दृढ़ता थी


डॉक्टरों ने जब गुरु जी को देखा, तो वे वीआईपी नियमों को दरकिनार करते हुए उन्हें मयंक के बेड के पास ले गए। गुरु जी आईसीयू के अंदर मयंक के सिरहाने खड़े हो गए। उन्होंने अपने झोले से पवित्र गंगाजल और केदारनाथ की भस्म निकाली
उन्होंने मयंक के माथे और सफेद पट्टी के ऊपर भस्म का तिलक लगाया।
मयंक के निर्जीव और शांत पड़े हाथ को अपने हाथों में लिया और आँखें बंद करके महामृत्युंजय मंत्र का धीमा जाप करने लगे—"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्..."


कमरे में चल रही मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ के बीच, गुरु जी के मंत्रों की गूंज से जैसे पूरा माहौल बदल गया। अचानक मॉनिटर पर मयंक की दिमागी तरंगें (Brain Waves) जो बिल्कुल सीधी और धीमी चल रही थीं, उनमें एक तेज उतार-चढ़ाव देखा गया।



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तभी डॉक्टर ने चौंककर मॉनिटर की तरफ देखा, "यह... यह असंभव है! मयंक का न्यूरो-रिस्पॉन्स अचानक एक्टिव हो रहा है।"


गुरु जी ने अपनी आँखें खोली और सुमित्रा की तरफ देखकर कहा___विश्वास रखो। यह बालक न केवल होश में आएगा, बल्कि इसके कंठ से उस सच की गूंज भी निकलेगी जो 18 वर्षों से इस अस्पताल की दीवारों और सुमित्रा के हृदय में दबा हुआ है
महंत जी ने सुमित्रा की आँखों में देखते हुए एक ऐसा फैसला सुनाया जिसने सबको चौंका दिया: "मयंक को पूरी तरह ठीक करने के लिए, मुझे इसे अभी इसी वक्त अपने साथ हिमाचल प्रदेश स्थित अपने आश्रम में ले जाना होगा।"


यह सुनते ही सुमित्रा ओर डॉक्टर घबरा गए। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, "गुरु देव! हिमाचल? इस नाजुक हालत में मयंक को इतनी दूर ले जाना खतरनाक हो सकता है। यहाँ दुनिया के सबसे बेहतरीन डॉक्टर मौजूद हैं


महंत रामधारी जी ने शांत होकर अपना हाथ उठाया और कहा, "तुम मनुष्यों यही प्रॉब्लम है अब भी अपनी दौलत के मद में अंधे हो। इन मशीनों और आधुनिक दवाओं की एक सीमा है। मयंक के दिमाग की जो स्थिति है, उसे इस अस्पताल का वातानुकूलित (AC) कमरा और रासायनिक दवाएं और सुस्त बना देंगी। हिमाचल की वादियों में, ब्यास नदी के तट पर जो शुद्ध वायु है और मेरे आश्रम की जो दिव्य जड़ी-बूटियां हैं, वही मयंक के मस्तिष्क की मृत कोशिकाओं को दोबारा जीवित कर सकती हैं


जहाँ एक तरफ डॉक्टर सोच में पड़ गए थे, वहीं सुमित्रा ने बिना एक पल गंवाए महंत रामधारी जी के चरणों को छू लिया।


सुमित्रा( रोते हुए बोली)__"गुरु जी, मुझे आपकी बात पर पूरा भरोसा है। अगर मेरे मयंक की भलाई हिमाचल के आपके आश्रम में है, तो मैं भी आपके साथ चलूँगी। मेरा बच्चा बोले या न बोले, मुझे बस उसकी जिंदगी सुरक्षित चाहिए
वैसे भी आप ने 15दिन बाद बुलाया था 15दिन पहले ही सही गुरु देव


महंत जी ने मुस्कुराकर कहा, __पुत्री सुमित्रा, तुम्हारी ममता और सेवा ही मयंक की असली दवा बनेगी। तुम्हारी उपस्थिति आश्रम में अनिवार्य है


सुमित्रा को समझ आ गया था कि महंत रामधारी जी के आध्यात्मिक ज्ञान और संकल्प के आगे डॉक्टर कुछ नहीं है। उन्होंने तुरंत अपने सेक्रेटरी को आदेश दिया
गुरु देव __ एयर पोर्ट पर प्राइवेट 'एयर एम्बुलेंस' (Air Ambulance) तैयार खड़ी दिल्ली से चंडीगढ़ और वहाँ से सीधे हिमाचल के आश्रम के पास वाले हेलीपैड के लिए डॉक्टरों की एक विशेष टीम के साथ उड़ान की व्यवस्था की जाए


अस्पताल के डॉक्टर इस फैसले से असहमत थे, लेकिन सुमित्रा और महंत जी के रसूख के आगे वे कुछ नहीं बोल पाए
उन्होंने मयंक को यात्रा के अनुकूल (Travel-ready) बनाने के लिए आवश्यक पोर्टेबल लाइफ-सपोर्ट सिस्टम पर शिफ्ट कर दिया


कुछ ही घंटों में मयंक को विशेष स्ट्रेचर पर लिटाकर अस्पताल से बाहर निकाला गया। मयंक की आँखें अभी भी आधी बंद थीं, लेकिन महंत जी के सिद्ध मंत्र के कारण उसकी सांसें अब पहले से कहीं ज्यादा स्थिर थीं।


महंत रामधारी जी आगे-आगे चल रहे थे, उनके पीछे सुमित्रा मयंक का हाथ पकड़े हुए थी, और गुरु जी के गार्ड पूरी सुरक्षा व्यवस्था को संभाल रहे थे। अस्पताल के गेट पर लगी गाड़ियों का काफिला अब सीधे एयरपोर्ट की तरफ बढ़ रहा था।


ऑपरेशन थिएटर के बाहर जब महंत रामधारी जी ने उसकी जान को पुराने दुश्मनों से खतरा है, तो राजेश अंकल और सरपंच कनिका सन्न रह गए।


राजेश अंकल ने कांपती आवाज में कहा, __महंत जी, हम तो मयंक को एक साधारण अनाथ बच्चा समझते थे जिसे सुमित्रा ने पाला इतना बड़ा राज
वहीं सरपंच कनिका की आँखों में चिंता साफ दिख रही थी वह गाँव की सरपंच भी थी और मयंक की सबसे अच्छी दोस्त भी उसने कहा, __गुरु जी, मयंक मेरा दोस्त है। उसकी सुरक्षा के लिए जो करना होगा, मैं करूँगी इसके जो राज है मैं आगे भी छुपाया है ओर अब भी छुपाऊंगी
गुरु देव __तेरी मनोकामना जरूरी पूरी करेगा मयंक जब वापस आएगा तो तब ये मयंक अन्दर का शेर को देखेगी ज्यादा समय नहीं लूंगा मै
अब तुम दोनों जैसा मै बोलूं वैसा ही करना
महंत रामधारी जी ने कनिका और राजेश अंकल के चेहरे के हाव-भाव देखकर गंभीर वाणी में कहा, "राजेश, तुम सुमित्रा के सुख-दुख के साथी रहे हो। और कनिका, तुम इस गाँव की सरपंच हो, पूरे गाँव की सुरक्षा और सूचनाएं तुम्हारे हाथ में हैं। इसलिए मैं यह जिम्मेदारी तुम दोनों को सौंप रहा हूँ। गाँव में किसी को भी, एक भी व्यक्ति को यह पता नहीं चलना चाहिए कि मयंक को इतनी गंभीर चोट लगी है या वह हिमाचल के आश्रम में है कनिका तुम भी आगे कुछ भी बात हुई हो आज तक तुमने जो भी किया वो मोहन को बता के किया या फिर मोहन रज़ामंदी से लेकिन ये बात तुम मोहन से छुपानी होगी
कनिका__( महंत जी बात सुनकर आचार्य चकित रह गई मुंह से धीरे से इतना ही निकला) __आपको तो सब मालूम है
महंत जी न__( कनिका की आँखों में देखते हुए कहा)__यदि गाँव के चौपाल या गलियों में मयंक की बीमारी की चर्चा हुई, तो मयंक के दुश्मन सतर्क हो जाएंगे। वे मयंक को ढूंढते हुए मेरे आश्रम तक पहुँच सकते हैं।"


(गाँव की सरपंच होने के नाते कनिका का दिमाग बहुत तेज था। उसने तुरंत स्थिति को संभाला और कहा, )


कनिका__महंत जी, आप निश्चिंत होकर मयंक को हिमाचल ले जाइए। गाँव की पंचायत और चौपाल को कैसे संभालना है, वह मुझे पता है। मैं गाँव में यह आधिकारिक खबर फैला दूँगी कि मयंक की कुशाग्र बुद्धि को देखते हुए उसे जिला प्रशासन और मेरी सिफारिश पर 'मुख्यमंत्री विशेष छात्रवृत्ति' के तहत आगे की पढ़ाई के लिए शहर के एक बड़े सरकारी हॉस्टल में भेजा गया है, और सुमित्रा चाची उसकी देखरेख के लिए साथ गई हैं।"


राजेश __हाँ गुरु जी, मैं भी गाँव लौटकर कनिका के इस बयान का समर्थन करूँगा। कोई चाहकर भी सुमित्रा के घर की तरफ शक की निगाह से नहीं देखेगा।"


जाने से पहले कनिका एक बार फिर आईसीयू के कांच के पास गई, जहाँ मयंक अचेत लेटा हुआ था।


उसने मन ही मन अपने मयंक से कहा, __मयंक, तू ठीक होकर जल्दी लौट आ। तेरी सरपंच दोस्त तेरे पीछे पूरे गाँव को संभाल कर रखेगी सरपंच भी तो तू बनाया है जब तू आयेगा तो देखना गांव का नक्शा ही बदल दूंगी मै


महंत रामधारी जी ने कनिका और राजेश की इस सूझबूझ को देखकर उन्हें आशीर्वाद दिया। अब गाँव की तरफ से सुरक्षा का घेरा पूरी तरह पक्का हो चुका था, और एयर एम्बुलेंस मयंक को लेकर हिमाचल की वादियों की तरफ उड़ चली थी




लाइक कमेंट जरूर स्टोरी कैसी लग रही है
 
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