बहुत ही सुंदर लाजवाब अद्भुत रमणिय और रोमांचकारी मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गयाUpdate 6Next on 50
तुझे मेरा ही घर मिलता है पूरा उदयपुर मे अपनी हवस मिटाने के लिए.. पिछली बार तो बच्चा समझ के छोड़ दिया था मगर तू अब भी नहीं सुधरा.. और तू करमजली रांड.. शर्म हया लाज कुछ बची है या नहीं तेरे अंदर.. पहले ही बदनाम थी अब और नाम कमाने चली है..
सूरज अपने कपड़े उठाकर पहनने लगता है और चिंकी बिना कुछ पहने नंगी ही अपनी माँ रमा को पकड़ कर बेड पर धकलती हुई कहती है - खबरदार जो हनी पर हाथ उठाया तो माँ..
रमा - अरे रंडी.. तू पैदा होते ही मर क्यों नहीं गई? शादी से पहले तो करती थी अब शादी के बाद तो सुधर जा.. कैसे बेशर्म बनकर खड़ी है मेरे सामने.. जरा भी शर्म नहीं है तुझमे?
चिंकी चड्डी और ब्रा पहनती हुई - शर्म की बात तो आप मत ही करो माँ.. मैं अच्छे से जानती हूँ आप कितनी शरीफ और सीधी है.. आप करो तो रास लीला और मैं करू तो करैक्टर ढीला.. सरकारी दामाद चाहिए था ना आप लोगों को? 2 इंच की लुल्ली है आपके सरकारी दामाद की.. घुसने पहले ही ढीला पड़ जाता है.. हनी को मैं पसंद करती हूँ और आप इसे कुछ नहीं कहेंगी.. समझी आप?
रमा - हे भगवान.. कैसी बेटी दी है तूने? इसे तो कोई लाज शर्म ही नहीं है.. अपनी माँ के सामने अपने आशिक को बचा रही है.. रुक मैं मुन्ना को फ़ोन करती हूँ.. जैसी पिछली बार तेरी सुताई की थी वैसे ही अब भी करेगा..
चिंकी - हाँ बुलाओ.. और मुन्ना को ये भी बताना की सुबह मंदिर के बहाने आप कहा जाती हो.. वो दिनु मामा आपके धर्म के भाई आपके साथ क्या क्या करते है वो भी बताना..
रमा इस बार चिंकी की बात सुनकर चुप हो गई थी.. सूरज अपने सारे कपड़े पहन चूका था और अब चिंकी ने भी सलवार पहन ली थी और कुर्ती हाथ में उठा रखी थी..
सूरज रमा के पैर पकड़कर - रमा ताई माफ़ कर देना मुझे.. आप घर पर मत बताना.. प्लीज..
चिंकी सूरज को उठाते हुए - किस बात की माफ़ी हनी.. उठ.. तू जा यहां से मैं देख लुंगी.. तेरे मेरे बीच में क्या है किसी को कुछ पता नहीं चलेगा..
रमा गुस्से में सूरज से - अगली बार ईस घर में कदम रखा तो देख लेना..
चिंकी सूरज का हाथ पकड़ कर रमा के सामने ही उसे स्मूच करके सूरज के होंठो को चूमती है और फिर सूरज वहा से चला जाता है.. रमा देखती रह जाती है..
चिंकी - अगर किसी को मेरे और हनी के बारे में कुछ पता चला ना तो देख लेना माँ.. सुबह सुबह आप मंदिर के बहाने दिनु मामा के साथ जो भजन करके आती हो ना सारे शहर में चिल्ला चिल्ला उसकी कैसेट बजा दूंगी.. हनी मेरा यार है और मैं उसी के बच्चे भी पैदा करुँगी.. आपको अच्छा लगे या बुरा..
रमा शर्म से पानी पानी होकर धीरे से बोलती है - तुझे जो करना है कर.. मगर घर के बाहर.. उस लड़के अगली बार घर मत बुलाना चिंकी..
ये कहते हुए रमा जाने लगती है चिंकी अपनी माँ रमा का हाथ पकड़ कर उसे रोकते हुए कहती है - घर तो वो आएगा माँ.. जब अकेली रहूंगी तो उसे बुलाऊंगी और इसी बिस्तर वो मेरे साथ वो सब करेगा जो वो चाहेगा.. आपने अगर हनी से अगली बार कुछ कहा तो देख लेना.. चप्पल से मारा ना आपने मेरे हनी को.. बेचारे को लगी होगी.. आप शाम को मेरे साथ चलकर उससे माफ़ी मांगोगी.. वरना दिनु मामा सुबह पार्क मे झाड़ियों के पीछे रासलीला होती है ना उसके कई विडिओ पड़े है मेरे फ़ोन में.. गली मोहल्ले के लोग उस वीडियो को देखंगे तो आपके इस सीधे साधे चेहरे के पीछे की चालक औरत को भी पहचान जाएंगे..
रमा आंसू बहाते हुए - मैं तेरी माँ हूँ.. अपनी जबान संभाल के बात कर चिंकी.. एक तो आवारा लड़के के घर बुला कर मुंह काला करती है ऊपर अपनी माँ को ही बुरा भला कहती है..
चिंकी - आवारा नहीं है हनी.. और आपको माफ़ी मांगनी पड़ेगी..
रमा - नहीं माँगने वाली मैं किसी से माफ़ी.. समझी तू.. तुझे जो करना है कर.. मैं तुझसे नहीं डरने वाली.. माँ हूँ तेरी.. और अब ये कुर्ती लेकर खड़ी ही रहेंगी या पहनेगी भी? बेशर्म..
चिंकी कुर्ती पहनती हुई - माँ.. एक सॉरी बोलने में आपका कुछ नहीं जाएगा..
रमा गुस्से से - सॉरी बोलने कि नौबत ही क्यों आने देती है तू.. जो करना है परदे के पीछे छुपकर कर.. खुलेआम घर को रंडीखाना क्यों बना रही है? घर का मैन दरवाजा खुला हुआ था, तेरे कमरे का दरवाजा खुला हुआ था.. अगर मेरी जगह कोई और होता क्या इज़्ज़त रह घर की परिवार की? तेरी टांगो के बीच में आग ही भरी है या तेरे कानो के बीच में दिमाग भी है थोड़ा सा?
चिंकी रमा को गले लगाते हुए - एक छोटी सी सॉरी ही तो बोलनी ना माँ.. आपका असली दामाद है वो.. उसीके बच्चे आपको नानी नानी कहेँगे देखना.. मैं आगे से हर चीज का ख्याल रखूंगी.. कभी पकड़ी भी नहीं जाउंगी... आपने चप्पल से इतना मारा है उसे.. बस एक बार मेरे हनी को सॉरी बोल दो.. फ़ोन पर ही बोल दो..
रमा कुछ सोचकर - बाद में.. अभी बच्चों को स्कूल से लाने का समय हो गए है.. कमरा ठीक कर तेरा..
चिंकी मुस्कुराते हुए रमा के ब्लाउज पर हाथ रखकर अपनी माँ रमा के चुचे मसलते हुए - वैसे माँ.. वो दिनु मामा को आपके आम बड़े अच्छे लगते है.. कल देखा मैंने कैसे चूस रहे थे.. इतना पापा को चूसा देती तो शायद इतनी जल्दी भगवान के पास नहीं जाते..
रमा अपने बूब्स पर से चिंकी का हाथ हटाकर चिंकी को आँख दिखाती हुई बोली - मेरे ऊपर कम नज़र रखा कर.. समझी तू?
चिंकी हस्ती हुई - माँ.. चाहो तो दिनु मामा को घर बुला लो.. कंडोम में लाकर दे दूंगी आपको..
रमा जाते हुए - चुप बेशर्म.. बाल ठीक कर अपने..
रमा अपने बेटे मुन्ना और बहु नेहा के बच्चों को स्कूल से लेने चली जाती है वही चिंकी कमरे को फिर से व्यवस्थित करके हनी को फ़ोन करती है..
हनी गार्डन में मुन्ना और नेहा के पास आ जाता है जहाँ वो अपने लोगों से काम करवा रहे थे और जयप्रकाश के साथ कुछ रिस्तेदार भी वही थे.. हनी चिंकी का फ़ोन आता देखकर वहां से कुछ दूर चला जाता है और फ़ोन उठाता हुआ कहता है..
हेलो..
कहाँ है तू?
तेरे भाई के पास हूँ.. आंटी किसी से कुछ कहने तो नहीं वाली ना?
कहने तो वाली है पर तुझसे.. सॉरी.. माँ तुझे सॉरी बोलने वाली है..
क्यों?
क्यों क्या? चप्पल से कोई मारता है अपने असली दामाद को? सॉरी तो बुलवा कर रहूंगी मैं उनसे..
चिंकी पागल हो गई है क्या तू.. आंटी ने चप्पल से ही तो मारा है कोनसा तलवार से मार दिया..
मेरे हनी को कोई रुमाल से भी नहीं मार सकता.. सिर्फ मैं ही मार सकती हूँ तुझे समझा?
ज्यादा चिपक नहीं रही तू? शादीशुदा है याद है ना? मैंने कोई प्यार मोहब्बत का वादा नहीं किया तुझसे..
आज जैसे तूने मुझे चिपका चिपका के चोदा है ना मेरे हीरो.. मैं तो तेरी फैन हो गई.. तू फ़िक्र मत कर मैं गले नहीं पड़ने वाली तेरे.. जब तेरा मन तब मिल लेना.. मैं फ़ोर्स नहीं करुँगी तुझे.. पर मिलना जरुर.. तू जैसे करना चाहे वैसे करवा लुंगी.. और तेरा रुमाल मेरे पास ही रह गया मेरे क्यूट कमीने..
ठीक है चिंकी.. अच्छा मैं बाद में बात करूंगा अभी बहुत काम है.. बाय..
सूरज फ़ोन काट कर जैसे ही पीछे मुड़ता है नेहा खड़ी होती है..
भाभी.. आप?
भाभी के बच्चे.. चिंकी से बात कर रहा था ना तू? उस दिन जी भरके बात करवाई थी ना तेरी.. बातों बातों में तीन बार उल्टी कर दी थी तूने.. चिंकी ने सब बताया था मुझे बाद में.. अगर ऐसे खुले में उससे बात करेगा और मुन्ना ने सुन लिया तो हंगामा कर देगा..
भाभी उसने फोन किया था.. कह रही थी रुमाल रह गया उसके पास..
तेरा रुमाल उसके पास.. मतलब तू आज भी बात करने गया था ना उससे घर पर? मतलब उसका पेट पक्का फूलने वाला है.. अगर पकडे गए तो तुम ही निपटना फिर.
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भाभी सॉरी ना.. अच्छा सुनो ना..
क्या है हनी.. मिठाई बनी या नहीं देखने जाना है फिर मत कहना ये नहीं हुआ वो नहीं हुआ.. जल्दी बोल..
वो भाभी एक दोस्त का फोन आया था.. अगले महीने उसकी बहन की शादी तो कैर्टिंग के बारे में पूछ रहा था.. मैंने भी कह दिया मेरी नेहा भाभी से अच्छी कैटरिंग कौन कर सकता है.. बड़ी पार्टी है vip लोग आएंगे.. अच्छा माल बन जाएगा.. आपको नम्बर व्हाट्सप्प कर रहा हूँ एक बार बात कर लो शाम को मिलवा भी दूंगा..
नेहा ख़ुशी से इधर उधर देखकर हनी के गाल को चुम लेती है और कहती है - जब भी चिंकी से बात करने का मन करें बता दिया कर हनी.. मैं कोई ना कोई जुगाड़ करवा दिया करुँगी तुम दोनों का..
सूरज - चिंकी के अलावा किसीसे बात करनी हो तो भाभी..
नेहा - बता ना किससे बात करनी है? देख वो जो काम कर रही है ना वहा.. पांचो औरतों में जिसके साथ तेरा मन हो बता मैं ऊपर भेज दूंगी तेरे पास.. घंटे भर में फ्री कर देना.. समझा..
सूरज मुस्कुराते हुए - मैं आपको ऐसा लगता हूँ भाभी.. कि किसी के साथ भी बात कर लूंगा..
नेहा - जल्दी बता ना हनी.. मैं नहीं जाउंगी तो वो सब धीरे धीरे काम करेंगे.. फिर तू मुझे ही कहेगा भाभी ये काम नहीं हुआ वो नहीं हुआ..
सूरज - आप जाओ.. मैं बाद में व्हाट्सप्प पर बता दूंगा..
नेहा वापस इधर उधर देखकर जल्दी से हनी के गाल पर चुम्बन देने को आगे बढ़ती है मगर सूरज गाल घुमा लेता है और नेहा के होंठो से सूरज के होंठ मिल जाते है और नेहा होंठ मिलते ही अपने होंठों को सूरज के होंठों पर से हटा लेती है और सूरज के बाजू पर अपने हाथ से हल्का सा मारते हुए मुस्कुराकर वापस जाते हुए कहती है - लिपस्टिक साफ कर अपने होंठों से..
सूरज अपने होंठों पर जीभ फिरा कर अपने होंठों पर लगी लिपस्टिक साफ करते हुए जाती हुई नेहा को देखने लगता है और नेहा भी मुस्कुराते हुए सूरज को ही देखने लगती है फिर अपने काम में लग जाती है..
शाम के 6 बज चुके थे और अब सब रिश्तेदार और परिवार के सदस्य गार्डन में पहुंचने लगे थे.. गरिमा भी गार्डन में आ चुकी थी और वो वहा अकेले एक रूम में बैठी हुई थी.. वही सूरज घर जा चूका था और अपने कमरे में बैठा हुआ फ़ोन ओर गरिमा के साथ बात कर रहा था..
कहाँ हो? दिखाई क्यों नहीं दिए मुझे यहां? पहले तो कह रहे थे कि आते ही फूलों से मेरा स्वागत करोगे मगर तुम तो नज़र से भी दूर हो.. ऐसा करोगे देवर जी तो मैं नाराज़ हो जाउंगी आपसे..
भाभी किसी काम से घर आया था.. थोड़ी देर में वापस आ जाऊँगा.. वैसे भईया होंगे ना आपजे स्वागत में वहा..
अच्छा जी.. भईया का नाम लेकर तुम बचना चाहते हो देवर जी? जल्दी से यहाँ आ जाओ.. और मुझे अपने दर्शनलाभ दो.. समझें?
मुझे तो समय लगेगा भाभी.. तब तक आप भईया से बात कर लो..
देखो देवर जी मैं तैयार हो रही हूँ.. अगर मेरे तैयार होने तक नहीं आये तो मैं बात भी नहीं करुँगी तुमसे.. बाय.. फोन कट जाता है और सूरज गद्दे से खड़ा होकर अपने सूट को अलमीरा से निकालकर एक तरफ रख देता है और अपनी टीशर्ट उतारकर बाथरूम के अंदर चला जाता है और ब्रश करता हुआ बाल्टी में नहाने के लिए पानी भरने लगता है.. तभी बाथरूम के गेट पर उसे कोई दिखाई देता है और वो कहता है - भाभी देखो सुबह से बर्दास्त कर रहा हूँ आपको.. ये सब हरकते मेरे साथ मत करो.. वरना मैं नीलेश भईया को फोन कर दूंगा..
रचना - कर देना देवर जी.. मैंने रोका थोड़ी है आपको... वैसे बॉडी तो बहुत अच्छी है आपकी.. बिना जिम गए ही काफी अच्छी बॉडी बना ली.. मछली पडती है आपके? दिखाओ ना देवर जी..
भाभी देखो.. आप अकेले में जो करती हो ना मेरे साथ वो सब गलत है.. मैं अनुराधा बुआ और नीलेश भईया से आपकी शिकायत कर दूंगा.. पहले तो बातों से छेड़ती थी अब तो यहां वहां छूने भी लगी हो..
अच्छा ककहाँ छुआ मैंने? बताओ तो..
सुबह सीढ़ियों में आपने कहा कहा हाथ लगाया था? भूल गयी? और अभी थोड़ी देर पहले रसोई में चाय देते वक़्त भी.. शर्म नहीं आती आपको.. दो साल का बच्चा है आपका और ये सब करती हो..
रचना रचना...
रचना बाथरूम के दरवाजे से हटकर कमरे से बाहर आ जाती है और सीढ़ियों से ऊपर आती अनुराधा को देखकर कहती है..
जी माँ जी.. क्या हुआ?
रचना मैं मुन्ने को लेकर सुमित्रा और बाकी लोगों के साथ जा रही हूँ.. तू ये चाबी रख.. घर लॉक करके आना हनी के साथ आ जाना और उसे तंग मत करना.. अनुराधा वापस नीचे चली जाती है..
ठीक है माँ जी.. रचना वापस कमरे के अंदर आती है तो देखती है सूरज ने बाथरूम का दरवाजा लगा लिया है और नहा रहा है.. रचना अपने पर्स से एक vigra कि गोली जो नीलेश खाता था उसे एक जूस के गिलास में डाल कर मिला देती है और वही रख देती है..
फिर सूरज का सूट उठाकर कहीं छिपा देती है और सूरज के बाथरूम से बाहर आने का इंतजार करने लगती है..
सूरज जब बाथरूम से तौलिया लपेटकर बाहर आता है तो देखता है रचना वही गद्दे ओर बैठी हुई थी..
तोलिए में तो कमाल लगते हो देवर जी.. देखते ही आँखों में नशा चढ़ जाता है..
भाभी आप गई नहीं.. देखो अब आप लिमिट क्रॉस कर ही हो..
रचना उठकर करीब आती हुई - अभी कहा लिमिट क्रॉस की है देवर जी.. लेकिन आप चाहो तो लिमिट क्रॉस हो सकती है.. कसम से देवर जी.. पूरा सुखी कर दूंगी.. आप खुद बोलोगे भाभी मज़ा आ गया..
बुआ और भईया को पता चल गया ना आपने क्या बोला है तो आपका वो हाल होगा जो आप सोच भी नहीं सकती.. समझी.. और मेरा सूट कहा छिपाया है आपने..
बता दूंगी.. पहले थोड़ा रिलेक्स हो जाओ देवर जी.. लो जूस पिलो..
मुझे नहीं पीना भाभी मेरे कपड़े दो.. आप मेरे साथ ये सब करोगी मुझे उम्मीद नहीं थी..
अच्छा मेरे शरीफ देवर जी आप जूस तो पियो.. लो.. मैं आपका सूट लाती हूँ.. अब तंग नहीं करती आपको.. लो..
सूरज जूस लेकर एक सांस में पी लेता है.. और उसे अहसास होता है की जूस कुछ अजीब था वो पूछता है - जूस में क्या मिलाया था आपने?
रचना मुस्कुराते हुए सूरज को सूट देती हुई - vigra की गोली है देवर जी.. मेरे साथ कुछ नहीं करना ना आपको.. अब अपने तोते के लिए कोई मैना ढूंढ़ लो.. क्युकी तोता आसमान में उड़ने वाला है.. वैसे घर में अब हमारे अलावा कोई नहीं है.. आप चाहो तो मैं ही आपको ठंडा कर देती हूँ.. कुछ देर आराम रहेगा देवर जी..
सूरज गुस्से से - आप नीलेश भैया की भाई की बीवी हो.. मैं आपके साथ कुछ नहीं करने वाला.. और ये जो हरकत की है ना आपने.. इसका बदला जरुरत लूंगा मैं आपसे.. याद रखना..
रचना सूरज का लंड खड़ा होते देखकर मुस्कुराते हुए - लगता है तोता उड़ने लगा.. सोच लो देवर जी.. ऑफर लिमिट पीरियड के लिए है फिर मत कहना रचना भाभी अपने बोला नहीं था..
सूरज सूट पहनता हुआ - आपसे तो मैं बात करना ही नहीं चाहता..
ये कहते हुए सूरज अपना सूट पहनता है मगर अपने खड़े लंड से परेशान रहता है और रचना उसे देखकर मुस्कुराते हुए कहती है - चलिए ना देवर जी अब तो वहा सब आ गए होंगे..
सूरज सूट पहनकर वापस बाथरूम में घुस जाता है..
रचना - जयकारा लगा रहे हो क्या देवर जी.. कब तक पकड़ के हिलाते रहोगे? बाहर आओ ना मैं मदद कर देती हूँ आपकी..
सूरज सच में अंदर लंड हिला रहा था और उसका लंड बिलकुल लोहै जैसा सख्त और मजबूत हो गया था उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें और उसे गार्डन में जाकर सबसे मिलने की भी बहुत तमन्ना थी.. रचना बाथरूम के बाहर खड़ी होकर जहरीली हंसी हसते हुए सूरज को बारबार उसके साथ सम्भोग करने के लिए उकसाए जा रही थी..
सूरज ने अपने खड़ा हुआ लंड देखकर रचना के बारे में एक बार सोचा और मन ही मन किसी ख्याल में पहुच गया और दो मिनट बाद उससे बाहर निकालकर पैंट से लंड बाहर रखकर ही बाथरूम से बाहर रचना के सामने आ गया..
रचना सूरज के लंड को उसकी पेंट से बाहर देखकर हसते हुए सूरज को देखने लगी मगर सूरज के लंड को देखकर उसके मुंह में पानी आने लगा था.. रचना के पति नीलेश भी रचना को पूरा मज़ा देते थे मगर रचना जगह जगह मुंह मारने वाली औरतों में थी और उसे सूरज जैसे लड़के की तलब थी..
क्या हुआ देवर जी चाहिए भाभी की मदद?
सूरज शर्म छोड़कर - भाभी घोड़ी बनोगी?
रचना सूरज के मुंह से इतना सुनकर ख़ुशी से झूम उठी और अपनी शाडी उठा के बिना कुछ बोले झट सेगद्दे पर घोड़ी बन गई..
सूरज ने रचना की बड़ी और चौड़ी गांड देगी तो वो कामुकता से भर गया मगर रचना से बदला लेने का उसका इरादा नहीं बदला और वो रचा के पीछे आकर उसकी गांड को सहलाने लगा..
देवर आराम से करना.. कहीं फाड़ मत देना अपनी भाभी की चुत को.. वरना आपके भईया को मैं क्या मुंह दिखाऊंगी? प्यार से करना..
सूरज अपने लंड ओर थूक लगता हुआ - चिंता मत करो भाभी मैं आपकी चुत को छूूँगा तक नहीं..
इतना कहकर सूरज ने लंड सीधा रचना की गांड के छेद पर टिका दिया और दोनों हाथ से रचना की कमर पकड़ कर एक जोरदार धक्का मार दिया.. लंड सीधा खड़ा हुआ था लोडे सा सख्त. रचना की गांड में आधा झट से घुस गया और रचना चिल्ला उठी मगर सूरज को रचना पर गुस्सा आ रहा था उसने 3-4 धक्के दबाव लगाते हुए लगाए जिससे पूरा लंड रचना की गांड में लगभग घुस ही गया था.. रचना दर्द से सिसक उठी थी और उसकी आँख में आंसू थे. उसे लगा था की वो सूरज के मज़े लेगी मगर सूरज ने बदले के चक्कर में रचना के मज़े ले लिए थे.
रचना सिसकती हुई आंसू बहा रही थी मगर उसे देखने सुनने वाला कोई नहीं था.. थोड़ी देर बाद जब रचना की गांड के मसल्स रिलैक्स हुए तब सूरज ने झटके पर झटके लगा कर रचना की गांड मारनी शुरू कर दी..
रचना तो कुछ बोलने लायक़ ही नहीं रही.. सूरज से गांड मरवाते हुए वो बस सूरज को गालिया ही दे रही थी और उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी.. मगर सूरज ने इतना कस के रचना को पकड़ लिया था कि उसकी पकड़ से छूटना आसान नहीं था..
सूरज धक्के पर धक्के दे रहा था और रचना गांड मरवाती हुई सिसकियाँ लेकर अपनी गांड का गोदाम बनते हुए लाचार होकर देख रही थी..
दिवार कि गाड़ी शाम के सात बजा रही थी और अब एक घंटे बाद जाकर सूरज रचना कि गांड मार कर उसमे अपना माल भरकर लंड बाहर निकाल चूका था.. रचना अपनी गांड पकड़ कर खड़ी हुई तो उसने महसूस किया कि उसकी गांड में दर्द हो रहा है और चलने में भी हलकी सी जलन का अहसास हो रहा है
सूरज का लंड ठंडा हो गया था और वो अब रचना से पूछने लगा - भाभी हो गई इच्छा पूरी?
रचना एक जोर दार थपड़ सूरज के गाल पर जड़ कर कमरे से अपनी गांड पकड़ कर बाहर आ जाती है.. सूरज भी अपनी पेंट ठीक से पहन कर अपना फ़ोन उठाते हुए कमरे से बाहर आ जाता है..
गरिमा कॉल पर - कहा हो.. आये क्यों नहीं अब तक?
घर पर हूँ बस आ रहा हूँ..
स्टेज पर जा रही हूँ.. जल्दी आओ वरना बात भी नहीं करूंगी समझें ना.. तुम्हारे भईया तो पहले से स्टेज ओर बैठे है..
ठीक है आ रहा हूँ..
सूरज फ़ोन काट कर रचना से - भाभी एक राउंड और हो जाए?
रचना - बहन के लोडे.. गांड में सुरंग बनायेगा क्या? सोचा था चिकना है चुत में घुसा कर निचोड़ लुंगी मगर तू गांड के पीछे पड़ गया..
सूरज खड़ा होता हुआ - 7.15 बजने वाले है.. चलो..
रचना गुस्से से - मेरी चुत नहीं मारेगा?
सूरज - मैंने कहा था मैं हाथ भी नहीं लगाऊंगा आपकी चुत को.. अब चलना है तो बोलो वरना मैं अकेला निकल जाऊँगा..
रचना अपनी गांड पकड़ कर खड़ी हुई - कमीने याद रखूंगी मैं भी.. देखना केसा बदला लेती हूँ तुझसे..
सूरज हसते हुए - दरवाजा लॉक करो और चलो.. देर करोगी तो सबके सवालों का जवाब देते नहीं बनेगा..
गार्डन में काफी लोग आ गए थे कुछ खाने के लिए चले गए तो कुछ स्टेज पर विनोद और गरिमा के साथ फोटोज खिचवा रहे थे.. कुछ dj ओर डांस भी कर रहे थे.. वही जयप्रकाश और उसके सहकर्मी भागते हुए गार्डन के गेट पर आये और अपने ऑफिस की अधिकारी मैडम का स्वागत करने लगे..
बहुत अच्छा लगा मैडम आप समय निकाल कर आई.. आइये मैं आपको अपने बेटे और उसकी मगेतर से मिलवाता हूँ..
आपने इतना जोर देकर कहा था जयप्रकाश जी.. आना तो था ही..
जी मैडम.. आईये.. ये मेरा बड़ा बेटा विनोद और ये उसकी मगेतर गरिमा..
Congratulations..
विनोद और गरिमा - थैंक्यू..
जयप्रकाश - मैडम.. फोटो.. इस तरफ..
सूरज अब तक रचना को गार्डन में ले आया था और रचना सूरज को आज की आखिरी गाली देकर अपनी गांड के दर्द के साथ अनुराधा के पास चला गया था..
सूरज ने स्टेज की तरफ देखा तो देखता ही रह गया और फिर एकदम से छुपते हुए भगकर गार्डन के बाई तरफ से होकर रसोई खाने में चला गया जहाँ अब एक्का दुक्का लोग थे..
सूरज रसोई के पीछे बने एक एक्स्ट्रा बाथरूम की तरफ चला गया और खड़े होकर लम्बी लम्बी साँसे लेता हुआ कुछ सोचने लगा.. उसने स्टेज पर जिसे बिनोद गरिमा के साथ फोटो खिचवाते हुए देखा था वो कोई और नहीं बल्कि सूरज की कॉलेज में गर्लफ्रेंड रह चुकी गुनगुन थी..
सूरज ने गुनगुन से वापस कभी ना मिलने की कसम खाई थी और वो अपनी कसम पर कायम था.. उसे समझ नहीं आ रहा था की ये सब क्या हो रहा है.. गुनगुन अचानक उसके सामने आ गई और कॉलेज के वो चार साल उसे याद आ गए.. दोनों के बीच प्यार और इश्क़ के दिन.. जब दिनों ने अपने अपने जीवन को एकदूसरे के लिए जीने की कसम खाई थी.. दोनों का पहला सम्भोग भी एक दूसरे के साथ ही हुआ था.. मगर फिर सूरज गुनगुन के जाने के बाद किस तरह से जिन्दा रहा उसे वो भी याद आ गया.. उसने नशे करना शुरू कर दिया था.. रात रात भर घर से गायब रहता था.. किसी से बात नहीं करता था.. मरने तक के ख्याल उसके दिमाग में आये थे और तभी उसने गुनगुन से कभी नहीं मिलने की कसम खाई थी और उसके बाद उसे चिंकी ने संभाला था.. उसे होने जिस्म का सुख और मोरल सपोर्ट देकर चिंकी ने वापस नशे से बाहर निकाला था.. सुमित्रा ने सूरज का ख्याल रहा था और उसे प्यार दिया था जिससे वो वापस ठीक हुआ..
आपके दो बेटे है ना जयप्रकाश जी..
जी मैडम.. छोटा वाला यही कहीं होगा.. फ़ोन भी नहीं उठा रहा वरना आपसे मिलवा देता.. आपकी ही उम्र का है पर अब भी कोई काम नहीं करता.. सोच रहा हूँ शादी के बाद उसे अपने भाई के पास भेज दूं.. वही कुछ कर लेगा..
देखना जयप्रकाश जी.. कहीं हाथ से निकल जाए.. आज कल बच्चे माँ बाप की नहीं सुनते..
सही कहा मैडम.. आइये खाना खा लीजिये है..
गुनगुन खाना खाने लगी थी वही सूरज अब वही था और उसने उस बाथरूम से किसी को बाहर आते हुए देखा एक औरत उस बाथरूम से बाहर आकर सूरज से बोली..
हनी तू यहां क्या कर रहा है..
हनी पर vigra का असर था उसने बिना कुछ सोचे समझें उस औरज को पकड़ लिया और उसे वापस वापस बाथरूम के अंदर घुसाकार अंदर से बाथरूम की कुंदी लगा ली और औरत की कमर में हाथ डाल कर उसके होंठों को चूमते हुए कहा..
नेहा भाभी आपसे बात करनी है अभी..
नेहा शॉक्ड हो गई मगर उसने हनी से कुछ नहीं कहा और बस उसे देखती ही रह गयी..
सूरज ने नेहा की ख़ामोशी को उसकी हां समझा और उसके होंठों को चूमने लगा..
नेहा ने पहले कुछ सेकंड तो कुछ नहीं किया मगर फिर वो भी कुछ सोचकर सूरज के साथ चुम्बन के बंधन में बंध गई और सूरज को बेतहाशा चूमने लगी..
सूरज ने नेहा का एक हाथ होने लंड के ऊपर रख दिया और नेहा के चेहरे और गर्दन को चूमने और चाटने लगा.. नेहा अपने हाथ से सूरज का लंड पकड़ते हुए दबा दिया और पेंट के ऊपर से उसके लंड को पकडने लगी फिर बोली - हनी.. यहां इस बाथरूम में कैसे बात होगी? इतनी बू आ रही है..
हो जायेगी बात भाभी.. आप पलट जाओ और शाडी उठाकर झुक जाओ.. सूरज पेंट नीचे सरकाकर लंड बाहर निकलते हुए बोला और नेहा पलट गई और शाडी उठाकर झुक गई..
सूरज ने लंड को चुत पर सेट करके अंदर घुसा दिया और धीरे धीरे चोदने लगा..
भाभी टाइट निकली आओ तो.. ऐसा लगता ही नहीं आप दो बच्चों की माँ हो..
देवर जी मुन्ना ने देख लिया ना तो तुम्हारे साथ मुझे भी जान से मार देंग.. जल्दी से अपनी बात पूरी करो और जाओ.. यहाँ कोई आ ना जाए.. बस..
सूरज धीरे धीरे चोदते हुए - भाभी मुझे जल्दीबाज़ी में बात करनी नहीं आती.. तसल्ली से इत्मीनान से बात करना पसंद है.. यहां कोई नहीं आएगा..
ऐसा है देवर जी.. अभी लम्बी बातचीत का समय नहीं है.. जल्दी से बात ख़त्म करो और जाओ.. लम्बी बात करने के लिए मैं तुम्हे बाद में फ़ोन कर दूंगी.. अभी ज्यादा देर यहां रुकना ठीक नहीं..
सूरज झटके तेज़ करते हुए आपने दोनों हाथ आगे लेजाकर नेहा के चुचे पकड़ लेता है और मसलाते हुए कहता है - लगता है अब भी दूध आता है इनमे भाभी..
मैं बुलाऊंगी तब आके आराम से पी लेना मेरा दूध हनी..
भाभी चिंकी को हमारी इस बात के बारे में मत बताना प्लीज...
उसकी फ़िक्र मत करो देवर जी.. तुम बस जल्दी से बात ख़त्म करो..
बस भाभी झड़ने वाला हूँ..
अंदर मत निकलना हनी..
क्यों भाभी.. अंदर क्या परेशानी है? निकालने दो ना.. प्लीज..
ठीक है हनी.. निकाल दे..
हनी झड़ता हुआ - भाभी मैं प्रेग्नेंट ना कर दूँ आपको आज.. मज़ा आ गया भाई..आप बहुत मस्त हो..
नेहा अपनी शादी नीचे करके पालाते हुए - अब जा हनी.. कोई आ जाएगा वरना..
सूरज लंड की तरफ इशारा करते हुए - भाभी साफ कर दो ना..
नेहा नीचे झुकाकर लंड को मुंह में ले लेती है चूसते हुए साफ करने लगती है.. तभी दरवाजा बजता है..
नेहा अंदर ही रहेगी क्या?
नेहा लंड मुंह से निकालकर - वो मेरा पेट खराब है.. आप जाइये में आती हूँ.. और एक बार बाहर चक्कर लगा लीजियेगा.. कुछ कमी तो नहीं है कही..
मुन्ना - ठीक है..
नेहा - अब मैं जाती हूँ और तू रसोई की तरफ से मत जाना.. समझा.?
सूरज नेहा को चूमकर - thanks भाभी.. आपका ये अहसास याद रखूँगा..
नेहा मुस्कुराते हुए - अगली बार तसल्ली से बात करूंगी हनी..
नेहा चली जाती है कुछ देर बाद सूरज भी बाथरूम से निकालकर कहीं चला जाता है..
अच्छा जयप्रकाश जी.. इज़ाज़त दीजिये अब..
जी मैडम.. आप आई बहुत अच्छा लगा.. वरना छोटे से बाबू के यहाँ कोनसा अफसर आता है..
ऐसा मत कहिये जयप्रकाश जी.. और कुछ दिन आप रेस्ट कारिये.. ऑफिस आने की जरुरत नहीं है.. मैं देख लुंगी..
बहुत शुक्रिया मैडम..
रात के नो बजने तक गुनगुन वहा से चली जाती है..
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चिंकी ने अपनी माँ रमा की ही बखिया उधेड दी
इधर रचना की मस्ती उसी की गांड का कमचुर निकाल गयी
ये गरीमा सुरज ना दिखने के कारण बावली होती नजर आ रही हैं
सुरज की पुरानी प्रेमिका गुनगुन उसके पिताजी की अधिकारी बन कर लौट आयी
नेहा भाभी के साथ एक जल्दी जल्दी वाली बात सुरज ने कर डाली
जबरदस्त अपडेट हैं भाई
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा