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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

komaalrani

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ११२ -अगला दिन, बुच्ची और इमरतिया पृष्ठ ११४५

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Chalakmanus

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कॉमल रानी जी, आपकी कलम में जादू है,
शब्दों से आप रातें गर्म कर देते हो।
हर पंक्ति में आग छिपी है,
जो पढ़ते ही तन में समा जाती है।

कॉमल रानी, तेरी लेखनी कमाल है,
होंठों की लाली, बदन की उत्तेजना,
सब कुछ इतनी बारीकी से उकेरा,
कि पाठिका की साँसें भी थम जाती हैं।

तेरे दृश्यों में वो नमी है, वो स्पर्श है,
उँगलियों का वो सरकना, वो दबाव है,
जो किताब से बाहर निकलकर
सीधे जिस्म पर उतर आता है।

कॉमल रानी, तेरा हर अध्याय
एक नई चरमसीमा रचता है,
कराहें जो कागज़ पर लिखी हैं,
वो हमारे गले से खुद निकलती हैं।

तेरी कहानियाँ सिर्फ़ पढ़ी नहीं जातीं,
उन्हें महसूस किया जाता है, जीया जाता है,
हर रात तेरे शब्दों के साथ
हम खुद को खो देते हैं।

कॉमल रानी, तेरी कलम को सलाम,
जो शर्म को शब्दों में बदल देती है,
और वासना को इतनी ख़ूबसूरती से लिखती है
कि पाप भी कविता लगने लगता है।
 

Random2022

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. चुनिया -बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

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तेरी अम्मा के नखड़े मैं सारे उठाउंगी, तेरी माई के नखड़े मैं सारे उठाउंगी ,


और मुड़ के सुरजू की माई की ओर सर झुका के दोनों हाथ जोड़ के फिर से एक चक्कर मार के ठुमका लगा के गाया

तेरी अम्मा के नखड़े मैं सारे उठाउंगी, तेरी माई के नखड़े मैं सारे उठाउंगी ,

सुरजू की माई खूब खुश, उन्होंने हाथ उठा के आशीर्वाद दिया और चुनिया ने बुच्ची को देख के पास में जा के गाना आगे बढ़ाया



बुच्ची की ओर मुड़ के बोली लेकिन, और बुच्ची ने भौहे मटकायी,.... जैसे पूछ रही हो क्या?

और चुनिया ने क्या कमर मटकायी, क्या चक्कर मारा और फिर माला जैसे एकदम बन्ना बने बुच्ची के पास ले जा के गाया




बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

तेरी अम्मा के नखड़े मैं सारे उठाउंगी, तेरी माई के नखड़े मैं सारे उठाउंगी ,

लेकिन तेरी बहना पे अपने भाई को चढ़ाउंगी, तेरी बुच्ची पे अपने गप्पू को चढ़ाउंगी


बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी



और अब वो जोर से हो हो हुयी, लड़कियों ने मुंह में ऊँगली डाल के सीटी मारी, ढोलक खूबी तेज से टनकने लगी, बुच्ची जैसे सोच में पड़ गयी, ये शर्त माने न माने

लेकिन चुनिया ने फिर गाया


बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

तेरी अम्मा के नखड़े मैं सारे उठाउंगी, तेरी माई के नखड़े मैं सारे उठाउंगी ,

लेकिन तेरी बहना पे अपने भाई को चढ़ाउंगी, तेरी बुच्ची पे अपने गप्पू को चढ़ाउंगी


बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी



और बन्ना बनी बुच्ची को पकड़ने की कोशिश की लेकिन बुच्ची मुस्कराते हुए, उसकी बाहों से फिसलकर निकल गयी, और दूर खड़ी होक उसे जीभ चिढ़ाते हुए अंगूठा दिखाने लगी,

कोई भौजाई बोली, " अरे बन्ने मान जा, तेरा भी फायदा तेरी बहना का भी फायदा, लम्बा मोटा औजार मिलेगा, गपागप घोंटेंगी

दूसरी बोली, दूल्हे की बहन पर तो दुल्हिन के मायके वालों का पहला हक होता है

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और चुनिया ने फिर अपनी बात साफ़ की


बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

सेजों पे तुझे मजा कराउंगी, तुझे मैं मस्ती खूब कराउंगी

लेकिन तेरी बहना का जोबन अपने भाई से मिजवाउंगी

तेरी बुच्ची का जोबन गप्पू से मलवाउंगी


और अब मामला एकदम खुल के था, टॉप तो दोनों के ऊपर उठ गए थे, लेकिन रामपुर वाली भाभी ने गाने का लेवल एकदम से बढ़ा दिया और अब सब औरतें, लड़कियां मजे ले लेकर गा रही थीं,



बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी, बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

सेजों पे तुझे मजा कराउंगी, तुझे मैं मस्ती खूब कराउंगी

बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी,सेजों पे तुझे मजा कराउंगी,

लेकिन पहले तेरी बहना को, तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,

तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,




और बुच्ची जो खूब मजे ले रही थी, खुद निहुर के घोड़ी बन गयी,

और चुनिया, उसके पीछे, और एक झटके में बुच्ची की शलवार का नाड़ा भी खुला और शलवार सरक के घुटने तक, और गाना फिर तेज हो गया था, चुनिया और गप्पू की बड़ी बहन, रामपुर वाली भौजी गा रही थीं , साथ में अब सब लड़कियां, औरतें


लेकिन पहले तेरी बहना को, तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,

तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,

अपने गप्पू से तेरी बुच्ची को खूब चुदवाउंगी , गपागप चुदवाउंगी




और सब लोग मान गए बुच्ची और चुनिया की जोड़ी को, स्साला क्या कोई मरद चोदेगा, जिस तरह से चुनिया ने सबके सामने बुच्ची की टाँगे फैलायीं, बीच में अपनी दोनों टाँगे फंसा दी, की धक्के पड़ने पर स्साली सिकोड़ न ले, और फिर एक हाथ कमर पे और दूसरा जोबन पे और रगड़ रगड़ के, गिन गिन के धक्के मारे,, चुनिया की भी शलवार किसी लड़की ने खींच के नीचे, और अब दोनों सहेलियों की चुनमुनिया आपस में रगड़ खा रही थी, लेकिन चुनिया ने कुछ उसके कान में भी कहा, प्यार से भी धमका के,

" स्साली, बोल हाँ, सबके सामने, नहीं तो एक साथ तीन ऊँगली अंदर करूंगी, जो तुझे अपने सुरजू भैया से अपनी झिल्ली फड़वाने का शौक है न बस यहीं फट जायेगी सबके सामने और तेरे भैया को फटी फटी मिलेगी, "
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" कमीनी, हाँ तो कर दिया है, अब कैसे करूँ, स्साली ऊँगली किया न तो कुट्टी, पक्की वाली और तेरा भाई भी देखता रह जाएगा, "


बुच्ची गुस्से से धीमे धीमे फुसफुसाते बोली, लेकिन डर उसे लग रहा था, कहीं सच में ये छिनार,

" चल एक बार और हाँ बोल दे, सबके सामने जोर से "

चुनिया ने दोनों जांघों के बीच एक हथेली डाल के अपनी सहेली की कुँवारी एकदम कच्ची सहेली को रगड़ते बोला

" लेकिन तू ऊँगली नहीं करेगी, और पहले अपने भैया से उसके बाद पक्का चल तू भी क्या याद करेगी, गप्पू बेचारा इत्ते दिन से पीछे पड़ा है तो उसका भी मन रख दूंगी। "

मुस्कराते हुए बुच्ची बोली


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और एक बार फिर से गप्पू की बड़ी बहन, रामपुर वाली भौजी दुहरा रही थीं, जोर जोर से गा रही थीं



लेकिन पहले तेरी बहना को, तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,

तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,


अपने गप्पू से तेरी बुच्ची को खूब चुदवाउंगी , गपागप चुदवाउंगी

और अबकी बुच्ची ने एक बार फिर जोर से हाँ हाँ हाँ कहा पूरे पांच बार, और चारो ओर देखकर, रामपुर वाली भौजी को भी सुनाते हुए ,



वो हाँ तो सबने सुनी और सब समझ गए किस बात की हाँ है लेकिन ये बात भी कई लोगो ने सुनी जो बुच्ची ने बोली थी,

" पहले अपने भैया से उसके बाद पक्का चल तू भी क्या याद करेगी, गप्पू का भी मन रख दूंगी। "

और जिन लोगों ने सुनी उसमे इमरतिया, मुन्ना बहू, मंजू भाभी, रामपुर वाली भाभी के आलावा भी घर की कई भौजाइयां, लड़कियां और काम करनेवाली थीं,



बस अपनी जीत का जैसे एलान करते हुए चुनिया ने बुच्ची का कुर्ता पूरी तरह अब खींच के उतार दिया, खड़ी होक लहराया और पूरी ताकत से जो फेंका तो सीधे मुन्ना बहू की गोद में और उन्होंने दबोच लिया।
Bahut badhiya kiya chuniya ne. Apne bhai ke liye intejam
 

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रामपुर वाली भौजी --सुरजू सिंह की माई
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और चुनिया और बुच्ची को सुरजू सिंह की माई ने इशारे से बुला लिया और दोनों को अपनी गोद में , बाँहों में भींच लिया,

कन्या रस की वो पुराने प्रेमी और ऊपर से ऐसी कच्ची कलियाँ मिलती कहाँ है, फिर सबके सामने खुले में अपने घर की छत पे, दुलराते सहलाते, पहले तो उन्होंने बुच्ची की एक कच्ची अमिया कस के दबा दी, उसके निपल पे चिकोटी काट ली।



उसकी माँ का भी तो कितनी बार उन्होंने इसी तरह, ....

सुरजू की बूआ, उनकी ननद, तो कुंवारे में भी , बियाह के बाद भी भी, खूब रस लिया था तो अब बिटिया का, और फिर दोनों हाथों में लड्डू,

लेकिन अब गाने और नाच का काम भौजाइयों के जिम्मे आ गया था और सबसे पहले उतरी चुनिया की बड़ी बहन, रामपुर वाली भौजी, मायका उनका रामपुर का था इसलिए सब रामपुर वाली भौजी कहते थे, लेकिन बियाह के आयी थीं, सुरजू सिंह की ननिहाल में

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और सुरजू सिंह की माई को दिखा दिखा के, चिढ़ा चिढ़ा के उन्होंने गाना शुरू किया




जब तेरा मुन्ना छोटा था , जब ये बन्ना छोटा था, बोतल से दूध पीता था, तब ये बन्ना तेरा था,



और क्या एक्टिंग की रामपुर वाली भाभी ने, थी भी बहुत सुन्दर, गोरी चिकनी और जोबन भले ही ३४ का हो लेकिन ३६ डी डी से कम का नहीं लगता था,

एक तो २६ इंच की पतली कटीली कमरिया, फिर चोली हरदम छोटी सी और इतना टाइट पहनती थीं की जोबन हरदम छलकते आधे बाहर रहते थे, मर्दो को ललचाते, और सुरजू तो उनके फेवरेट देवर, इसलिए न सिर्फ वो खुद आयीं बल्कि अपने भाई गप्पू और छोटी बहन चुनिया को भी साथ लायी।

बड़ी मामी अभी नहीं आ पायी थीं, उनके मायके में कुछ था लेकिन वो भी दो चार दिन में आने वाली थीं, पर उनकी बहू ये रामपुर वाली भाभी, अपनी बहन और भाई के साथ, सूरजु की माई के साथ उनकी छनती भी खूब थी , मजाक में न वो रिश्ता देखती थी न उमर और गारी गाते समय या मजाक करते समय सब कुछ एकदम खोल के और यही चीज बड़की ठकुराइन को बहुत पंसद थी इसलिए दस बार उन्होंने बोला था, ' रामपुर वाली दस बारह दिन पहले से आना होगा, जैसे लगन लगे, वरना तोहार देवर है तू जाना "

" अरे मैं नहीं आउंगी तो आपको गारी कौन देगा, और गारी देने वाली आठ दस ननद मिल भी जाएंगी तो आपका पेटकोट का नाड़ा कौन खोलेगा, मैं भी देखूं वो जगह जहां से आपने अस लजाधुर देवर निकाला है " हँसते हुए रामपुर वाली बोलीं,

" अरे तोहार महतारी आती न तो बताती " हँसते हुए बड़की ठकुराइन बोलीं

" आएँगी, वो भी आएँगी, अब आपने इतने प्यार से बुलाया है , और रामपुर वाली डरती नहीं है , आपकी समधन बरात जाने के चार दन पहले से आ जाएंगी। " भौजी बोलीं

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तो अब वो सुरजू की माई को अपनी सास को चिढ़ा चिढ़ा के गा रही थीं


जब तेरा मुन्ना छोटा था , जब ये बन्ना छोटा था, बोतल से दूध पीता था, तब ये बन्ना तेरा था,

अब बोतल से व्हिस्की पियेगा, साथ में मेरे झूमेगा, अब ये बन्ना मेरा है ,

और क्या सीधे बोतल से व्हिस्की पी के झूमने की एक्टिंग की उन्होंने और फिर अगली लाइन गायी और उनके साथ बाकी गाँव की भौजाइयां भी झूम झूम के गा रही थीं



जब हाफ पेंट पहनता था, छोटी सी नेकर पहनता था, तब ये बन्ना तेरा था,

अब सूट बूट पहनता है , अब ये बन्ना मेरा है, अब ये बन्ना मेरा है।



और सुरजू सिंह की माई को चिढ़ा के चमका के, हाथ दिखा दिखा के , और मजा तो तब आया जब अगली लाइन आयी और अपनी छोटी ऊँगली दिखा के

जब इसकी छोटी सी नूनी थी , तू तेल इस में लगाती थी, तब ये बन्ना तेरा था, तब ये मुन्ना तेरा था




और क्या जबरदस्त हंसी हुयी , लेकिन रामपुर वाली भाभी ने उन्हें बख्शा नहीं, बगल में बैठ के छोटी ऊँगली दिखा दिखा के

जब इसकी छोटी सी नूनी थी , तू तेल इस में लगाती थी, तब ये बन्ना तेरा था, तब ये मुन्ना तेरा था



और फिर खड़ी हो के



जब इसकी छोटी सी नूनी थी , तू तेल इस में लगाती थी, तब ये बन्ना तेरा था, तब ये मुन्ना तेरा था

अब मोटा सा लौंड़ा है, अब लम्बा सा लौंड़ा है, अब ये बन्ना मेरा है।


कम से कम दस बार उन्होंने अपने हाथ को कोहनी के पास से पकड़ के सुरजू सिंह के औजार के बारे में अपनी सास को दिखा दिखा के



अब मोटा सा लौंड़ा है, अब लम्बा सा लौंड़ा है, अब ये बन्ना मेरा है।

अब मोटा सा लौंड़ा है, अब लम्बा सा लौंड़ा है, अब ये बन्ना मेरा है।

लेकिन अब बड़की ठकुराइन बोल पड़ीं,

"गलत एकदम गलत, अरे तेरे देवर का बचपन से ही मोटा लौंड़ा था, नहीं तो उसकी बूआ से पूछ लो व् बगल में बैठी हैं मेरे, ये भी खोल खोल के तेल लगाई हैं"

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वो जोर से मुस्करायी, और सहमति में सर हिलाया,

और ठकुराइन ने दूसरा गवाह पेश किया, " बुच्ची क माई भी आएँगी, तो वो बताएंगी, आधे टाइम तो तेल बुकवा वही करती थीं कीबच्चों में कैसा था लेकिन अब कैसा है ये तो भौजाई लोगों को मालूम होना चाहिए, बोल इमरतिया,

उनकी आँखे न सिर्फ इमरतिया से बल्कि सबसे कह रही थीं " कइसन भौजाई हो जो अभी तक न पकड़ी हो न घोंटी हो, "

लेकिन इमरतिया की आँख की चमक और मुस्कान साफ़ साफ़ सुरजू की माई से कह रही थी, " पकड़ भी चुकी हूँ और घोंट भी चुकी हूँ अपने देवर का, अइसन वइसन भौजाई नहीं हूँ "

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और बड़ी बूढी औरतों को छोडिये ये दोनों बिन बोली बातें, सब खेली खायी भौजियां भी समझ गयी,अब शेर ने शिकार कर लिया है, पक्का आदमखोर बल्कि औरतखोर हो गया है और अब एक बार बड़का नाग, कुंडली खोल के लंगोट की डलिया से बाहर आ गया है तो बिना डसे रहेगा नहीं। और मुस्करा भी रही थीं,



" बोल इमरतिया, " कौन मां अपने बेटे की तारीफ़ नहीं सुनना चाहती,


और इमरतिया ने जैसे रामपुर वाली भाभी दिखा रही थीं , एकदम कोहनी से पकड़ के हिला हिला के इशारा किया, मतलब बित्ते से भी बड़ा
Isharo isharo me imarti na bata diya or sab samajh bhi gaye
 

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बुच्ची की गेंद मेरा भाई खेलेगा
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और अबकी हाथ बढ़ा के बुच्ची को चुनिया ने पकड़ भी लिया और दोनों हाथ सीधे जुबना पे,

जोर से हो हो हुआ, "अरे गप्पू कुर्ता थोड़ी मसलेगा, सीधे चूँची पे हाथ डालेगा,"


रामपुर वाली भौजी, गप्पू की बड़ी बहन बोलीं और अपनी दो ननदों को उकसाया,
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बुच्ची के दोनों हाथ उन दोनों के कब्जे में

और चुनिया ने आराम से सबको दिखाते हुए, धीरे धीरे, बुच्ची का कुर्ता ऊपर किया, ढक्क्न तो लगाना ही नहीं था,


बस दोनों जुबना गोल गोल उछल के बाहर आ गए,, बहुत बड़े नहींj, बस कच्ची अमिया, रुई के फाहे जैसे, लेकिन दर्जा नौ वालियों के जैसे होते हैं उनसे २२ -२४ ही होंगे १९ नहीं थे, और क्या कोई लौंडा मसलेगा, पहले हलके से छुआ, फिर सहलाया, फिर बस धीरे धीरे से आ रहे निप्स को फ्लिक किया, मुंह में लेकर चुभलाया, चूसा और फिर कस के रगड़ना मसलना,

जो बुच्ची गप्पू को जुबना दिखा दिखा के ललचाती थी, कभी दुपट्टा गिराती थी, सम्हालती थी,


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उसका बदला उसकी बहन ने सबके सामने ले लिया
जोर से हो हो के बीच में सुरजू के गाँव की भौजाई, पठानटोले की बड़की सैयदायिन, सुरजू सिंह की खास भौजाई बोलीं,

" अरे छाती से छाती से मिले, बन्नी का काहें छुपा है,

और अबकी दाखिन पट्टी की दो लड़कियां, मधु और बेला उठी और अब चुनिया का टॉप भी खुल गया,

उसके भी जोबन जबरदस्त,

लेकिन ढोलक तो उसकी बड़ी बहन रामपुर वाली भौजी के हाथ में ही थी और उन्होंने साथ में उनकी नंदों ने गाना आगे बढ़ाया


-- बुच्ची की गेंद मेरा भाई खेलेगा, मेरा गप्पू खेलेगा
बुच्ची के सीने पे दो दो गेंद, बुच्ची के कुर्ते में दो दो गेंद,

बुच्ची की गेंद मेरा भाई खेलेगा, मेरा गप्पू खेलेगा




बुच्ची निहुरी हुयी थी, उसकी एक गोल गोल मस्त चूँची, ग्वालिन भौजी के हाथ में थी जो उसे कस के मसल रगड़ रही थी, और दूसरी चुनिया के हाथों में थी,

बुच्ची की जाँघों के बीच की घास, अरे बुच्ची की जाँघों के बीच की घास मेरा नऊआ छिलेगा, अरे मेरा नऊआ छिलेगा,

नाऊटोले की इमरतिया की किसी देवरानी ने गाने को आगे बढ़ाया

और अगली लाइन मुन्ना बहू ने जोड़ी,


अरे बुच्ची रानी की, अरे बुच्ची छिनारिया की, बुच्ची भाई चोद की कुंए से पानी मेरा कहरा निकालेगा, मेरा कहरा निकालेगा

और उसको निहुराये चुनिया क्या मस्त धक्के मार रही थी और फिर ग्वालिन भौजी भी,

और क्या मस्त रगड़ाई कर रही थी, चुनिया अपनी सहेली की छोटी छोटी चूँची की, अपने भैया का नाम ले ले कर, कभी दबाती, कभी सहलाती, कभी होंठों में ले कर काट लेती और चिढ़ा के बोलती, जोर जोर से

" स्साली मेरा भाई, गप्पू ऐसे ही मस्ती से काटेगा, चूसेगा, रगड़ेगा "

और कबुलवाया, " आगे से मेरे भाई के आगे, अगर दुप्पटा ओढ़ा न, तोपने ढांकने की कोशिश की न " और जोर से निपल्स काट लिए,

" अरे मेरी नानी नहीं ढकूँगी, तूने तो वैसे ही मेरा दुपट्टा छीन के अपने भाई को पकड़ा दिया है " चीखती हुयी बुच्ची ने कबूला।
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लेकिन तबतक दूसरा जोबन एक दूसरी लड़की के कब्जे में, वो इसी गाँव की भौजाई की बहिन थी, इन्ही की पट्टी की, और वो और कस के मसलते बोली,

" चलो कल से गप्पू से मसलवाना, कटवाना शुरू कर, एक दो दिन में मेरा भाई भी आ जाएगा, फिर दोनों मिल के बाँट के गेंद खेलेंगे, "

और एक चूँची वो दबाने लगी तो दूसरी चुनिया और सब भौजाइयां अपनी दोनों बहनों को ललकार रही थीं,

लेकिन फैसला सुनाया, सूरजु सिंह की महतारी ने, आखिर वो भी तो इस गाँव की भौजाई ही थीं, और नंदों की रगड़ाई में, गरियाने में सबसे आगे रहती थीं

" सही तो है, चुनिया एकदम सही कह रही है, दूल्हे की बहन पे, भौजाई के भाई का पक्का हक़ है, सीधे से न दे तो जबरदस्ती, ….साले का नेग बनता है। सादी बियाह के घर में तो दूल्हे की बहिनिया के दुनो बिल से हरदम लगातार सड़का टपकता रहना चाहिए , तब लगेगा दूल्हे की बहिनिया है। "

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" अरे तनी असली दरवाजा खिड़की तो दिखाओ "

मुन्ना बहु बोली,


गाँव की भौजाई, बुच्ची के साथ कल कोहबर की रखवारी में कुल छेड़ का रस तो ले लिया था, लेकिन सबके सामने बिलुक्का खुलना जरूरी था, पर ये काम अकेले चुनिया के बस का नहीं था, तो साथ में भौजाइयां एक तगड़ी अहिराने की भौजी ने बुच्ची की कमर में हाथ डाल के कस के पीछे खींच दिया, वो फर्श पर गिरी और ग्वालिन भौजी ने अपने संडसी ऐसे हाथ से बुच्ची की दोनों कलाई जकड़ ली, बस, एक टांग कम्मो बहु ने उठायी बुच्ची की और दूसरी रामपुर वाली भौजी ने, और पूरा फैला दिया,

बुलबुल दिखने लगी, ....एकदम साफ़ साफ़।

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रामपुर वाली ने अपनी छोटी बहन चुनिया को इशारा किया और चनिया ने पहले तो अपने भाई गप्पू के माल पे हाथ फेरा, बुलबुल को सहलाया, अच्छी खासी पनिया रही थी, फिर दोनों फांको को फ़ैलाने की कोशिश की, दोनों ऊँगली का जोर लगाया,

लेकिन फांके चिपकी ही रहीं, एकदम कसी

और भौजाइयां, यहाँ तक की सूरजु की माई, गाँव की सब खेली खायी लड़कियां देखती ही रह गयी,

इसका मतलब सच में कोरी है, लंड तो घोंटा ही नहीं है, कभी इसकी भौजाइयों ऊँगली भी नहीं पेली,

और इमरतिया मन ही मन मुस्कराने लगी, एकदम सही है, अब असली इम्तहान होगा सूरजु देवर का, इतना मोटा लंड है, कलाई से भी मोटा और कड़ा भी कितना, चार बच्चों की माँ, पक्की भोंसड़ी वाली को भी पसीना आ जाए, और ये कच्ची कली, घोंटेंगी देवर का, अपने भाई का, भाई बहन दोनों का इम्तहान होगा,

लेकिन तबतक कोई नयी भौजाई बोली, जिसका मरद बिना नागा गाँड़ मारता था, " अरे तानी नन्द रानी का गोल दरवाजा भी तो दिखाओ "

बस रामपुर वाली और मुन्ना बहु ने मिल के चूतड़ उठा दिया

और वो दुबदूबाता छेद तो और टाइट,.... बुच्ची का


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Ek dam kadak maal hai bucchi
 
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